Saturday, 18 Jul 2026 | 07:04 PM

Trending :

EXCLUSIVE

कबाड़ के जरिए फर्जी कैशबैक; साइबर ठगी का नया खेल:पार्सल बॉक्स के लेबल से पर्सनल डेटा चुरा रहे ठग, ऐसे बना रहे आपको शिकार

कबाड़ के जरिए फर्जी कैशबैक; साइबर ठगी का नया खेल:पार्सल बॉक्स के लेबल से पर्सनल डेटा चुरा रहे ठग, ऐसे बना रहे आपको शिकार

आपने जो पार्सल अभी-अभी खोला उसका डिब्बा कूड़े में फेंक दिया। लेकिन क्या पता वो डिब्बा आपके बैंक अकाउंट तक पहुंचने का रास्ता बन जाए। यह अजीब जरूर है, लेकिन साइबर एक्सपर्ट्स की मानें तो अमेजन और फ्लिपकार्ट के पार्सल पर चिपका वो छोटी-सा स्टीकर, जिसे हम कभी गौर से देखते भी नहीं, जालसाजों के लिए सोने की खान बन गया है। जरा सोचिए, हर बार जब आप ऑनलाइन ऑर्डर करते हैं, डिलीवरी बॉक्स पर लगी चिट्ठी में क्या-क्या छपा होता है। इसमें आपका नाम, फोन नंबर, पूरा पता, ईमेल आईडी, और कई बार तो यह भी होता है कि आपने क्या खरीदा। पैकेट खुलते ही यह जानकारी बेकार लगती है, इसलिए लोग बिना सोचे-समझे बॉक्स को कूड़ेदान में डाल देते हैं। यहीं से शुरू होती है असली कहानी। ठग कूड़े के ढेर या कबाड़ी के पास से पार्सल डिब्बे उठाते हैं और उन पर छपी जानकारियां नोट कर लेते हैं। इसके बाद वे खुद को अमेजन, फ्लिपकार्ट या किसी डिलीवरी कंपनी का प्रतिनिधि बताकर फोन करते हैं। चूंकि उनके पास आपका नाम, पता और हाल में की गई खरीदारी की जानकारी होती है, लिहाजा बातचीत सही लगती है और भरोसा बनते देर नहीं लगती। इसके बाद कैशबैक, लॉयल्टी रिवॉर्ड या अगली खरीदारी पर छूट का लालच देकर एक फीडबैक सर्वे भरने को कहा जाता है। एसएमएस, वाट्सएप या ई-मेल पर भेजे गए लिंक पर क्लिक करते ही खेल शुरू हो जाता है। यह लिंक किसी फर्जी वेबसाइट पर ले जाता है, जहां बैंक डिटेल्स, कार्ड नंबर या ओटीपी मांगा जाता है। कई बार तो फोन में एक ऐसा मैलिशियस सॉफ्टवेयर इंस्टॉल हो जाता है, जो पासवर्ड और बैंकिंग डिटेल्स चुराकर सीधे अकाउंट से पैसे उड़ा ले जाता है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह पूरा फ्रॉड शुरू होता है एक ऐसी जगह से, जिसे हम कचरा समझकर भूल जाते हैं। लेकिन ऑनलाइन शॉपिंग जितनी बढ़ रही है, ठगों के तरीके भी उतने ही नए और शातिर होते जा रहे हैं। लेकिन एक छोटी-सी आदत- डिब्बा फेंकने से पहले लेबल मिटाना आपको इस नए तरह के फ्रॉड का अगला शिकार बनने से बचा सकती है। तो ऐसी धोखाधड़ी से बचाव का तरीका क्या है? जवाब उतना ही आसान है, जितनी यह समस्या मुश्किल लगती है। बॉक्स फेंकने से पहले शिपिंग लेबल फाड़ें, काटें या खुरच दें, ताकि उस पर लिखी जानकारियां कोई पढ़ न सके। आइडेंटिटी प्रोटेक्शन रोलर स्टैंप से भी संवेदनशील जानकारी छिपाई जा सकती है। साथ ही, अगर कोई कॉल पर खुद को ऑनलाइन शॉपिंग कंपनी का प्रतिनिधि बताकर एप इंस्टॉल करने, अनजान लिंक पर क्लिक करने या ओटीपी-बैंक डिटेल्स शेयर करने के लिए कहे, तो सतर्क हो जाएं। अमेजन, फ्लिपकार्ट जैसी कंपनियां अमूमन ऐसी मांग नहीं करतीं। किसी भी ऑफर या कैशबैक मैसेज की सच्चाई जानने के लिए कंपनी की ऑफिशियल एप पर जांच करें।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
Karnal Youth Dies of Heart Attack in US

June 17, 2026/
3:50 pm

करनाल का सुपनदीप दो साल पहले अमेरिका गया था। मौत की सूचना पर करनाल में रोते-बिलखते परिजन। इनसेट में सुपनदीप...

मंदसौर ब्लड बैंक में घोटाला:35 डॉक्टर-26 कर्मचारियों को प्रोत्साहन की आड़ में बांट दिए 43.91 लाख रुपए

February 28, 2026/
4:00 am

मंदसौर जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में 35 डॉक्टर और 26 कर्मचारियों ने प्रोत्साहन के नाम पर 43.91 लाख रुपए...

Amal Malik Reveals Bigg Boss Struggle After Emotional Jaipur Show

March 22, 2026/
10:44 am

जयपुर4 घंटे पहलेलेखक: अनुराग त्रिवेदी कॉपी लिंक बॉलीवुड के प्रसिद्ध म्यूजिक कंपोजर और सिंगर अमाल मलिक हाल ही में जयपुर...

पुणे केतन मर्डर केस पर भड़कीं हिना खान:कहा- सच कहना मुश्किल, जान लेना आसान हो गया, एक्ट्रेस आंचल ने कहा था- सिया को भी खाई से फेंको

June 25, 2026/
12:07 pm

पुणे में हुए केतन अग्रवाल के मर्डर केस में उनकी मंगेतर सिया ने हत्या की बात कबूल ली है। देश...

File photo of US forces patrolling near the Iranian-flagged cargo ship M/V Touska after it was boarded and seized by US forces. (Image: Reuters)

May 3, 2026/
11:51 am

आखरी अपडेट:03 मई, 2026, 11:51 IST 2026 के तमिलनाडु चुनाव में संभावित त्रिशंकु फैसले की अटकलें बढ़ने के साथ, विजय...

वर्ल्ड अपडेट्स:नेपाल में हुए GenZ प्रदर्शन में मारे गए 27 छात्रों के परिवारों को सरकारी नौकरी मिलेगी, 35 दिन में अपॉइंटमेंट

March 29, 2026/
2:41 pm

नेपाल के नए प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने पद संभालते ही बड़ा फैसला लिया है। सितंबर 2025 के प्रदर्शन में मारे...

ट्रेनी एयर होस्टेस ने इशारों से समझाए ट्रैफिक रूल:इंदौर के पलासिया चौराहे पर पुलिस ने चलाया अनूठा जागरूकता अभियान

April 29, 2026/
9:47 pm

इंदौर के ट्रैफिक को सुधारने के लिए ट्रैफिक पुलिस लगातार नए-नए प्रयास कर रही है। इसी कड़ी में बुधवार को...

जॉब - शिक्षा

राजनीति

कबाड़ के जरिए फर्जी कैशबैक; साइबर ठगी का नया खेल:पार्सल बॉक्स के लेबल से पर्सनल डेटा चुरा रहे ठग, ऐसे बना रहे आपको शिकार

कबाड़ के जरिए फर्जी कैशबैक; साइबर ठगी का नया खेल:पार्सल बॉक्स के लेबल से पर्सनल डेटा चुरा रहे ठग, ऐसे बना रहे आपको शिकार

आपने जो पार्सल अभी-अभी खोला उसका डिब्बा कूड़े में फेंक दिया। लेकिन क्या पता वो डिब्बा आपके बैंक अकाउंट तक पहुंचने का रास्ता बन जाए। यह अजीब जरूर है, लेकिन साइबर एक्सपर्ट्स की मानें तो अमेजन और फ्लिपकार्ट के पार्सल पर चिपका वो छोटी-सा स्टीकर, जिसे हम कभी गौर से देखते भी नहीं, जालसाजों के लिए सोने की खान बन गया है। जरा सोचिए, हर बार जब आप ऑनलाइन ऑर्डर करते हैं, डिलीवरी बॉक्स पर लगी चिट्ठी में क्या-क्या छपा होता है। इसमें आपका नाम, फोन नंबर, पूरा पता, ईमेल आईडी, और कई बार तो यह भी होता है कि आपने क्या खरीदा। पैकेट खुलते ही यह जानकारी बेकार लगती है, इसलिए लोग बिना सोचे-समझे बॉक्स को कूड़ेदान में डाल देते हैं। यहीं से शुरू होती है असली कहानी। ठग कूड़े के ढेर या कबाड़ी के पास से पार्सल डिब्बे उठाते हैं और उन पर छपी जानकारियां नोट कर लेते हैं। इसके बाद वे खुद को अमेजन, फ्लिपकार्ट या किसी डिलीवरी कंपनी का प्रतिनिधि बताकर फोन करते हैं। चूंकि उनके पास आपका नाम, पता और हाल में की गई खरीदारी की जानकारी होती है, लिहाजा बातचीत सही लगती है और भरोसा बनते देर नहीं लगती। इसके बाद कैशबैक, लॉयल्टी रिवॉर्ड या अगली खरीदारी पर छूट का लालच देकर एक फीडबैक सर्वे भरने को कहा जाता है। एसएमएस, वाट्सएप या ई-मेल पर भेजे गए लिंक पर क्लिक करते ही खेल शुरू हो जाता है। यह लिंक किसी फर्जी वेबसाइट पर ले जाता है, जहां बैंक डिटेल्स, कार्ड नंबर या ओटीपी मांगा जाता है। कई बार तो फोन में एक ऐसा मैलिशियस सॉफ्टवेयर इंस्टॉल हो जाता है, जो पासवर्ड और बैंकिंग डिटेल्स चुराकर सीधे अकाउंट से पैसे उड़ा ले जाता है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह पूरा फ्रॉड शुरू होता है एक ऐसी जगह से, जिसे हम कचरा समझकर भूल जाते हैं। लेकिन ऑनलाइन शॉपिंग जितनी बढ़ रही है, ठगों के तरीके भी उतने ही नए और शातिर होते जा रहे हैं। लेकिन एक छोटी-सी आदत- डिब्बा फेंकने से पहले लेबल मिटाना आपको इस नए तरह के फ्रॉड का अगला शिकार बनने से बचा सकती है। तो ऐसी धोखाधड़ी से बचाव का तरीका क्या है? जवाब उतना ही आसान है, जितनी यह समस्या मुश्किल लगती है। बॉक्स फेंकने से पहले शिपिंग लेबल फाड़ें, काटें या खुरच दें, ताकि उस पर लिखी जानकारियां कोई पढ़ न सके। आइडेंटिटी प्रोटेक्शन रोलर स्टैंप से भी संवेदनशील जानकारी छिपाई जा सकती है। साथ ही, अगर कोई कॉल पर खुद को ऑनलाइन शॉपिंग कंपनी का प्रतिनिधि बताकर एप इंस्टॉल करने, अनजान लिंक पर क्लिक करने या ओटीपी-बैंक डिटेल्स शेयर करने के लिए कहे, तो सतर्क हो जाएं। अमेजन, फ्लिपकार्ट जैसी कंपनियां अमूमन ऐसी मांग नहीं करतीं। किसी भी ऑफर या कैशबैक मैसेज की सच्चाई जानने के लिए कंपनी की ऑफिशियल एप पर जांच करें।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.