Akshay’s style in Golmaal 5 is like ‘Bala’

अमित कर्ण. मंबई36 मिनट पहले कॉपी लिंक इस बार फिल्म में अक्षय की एंट्री सबसे बड़ा आकर्षण होगी, वहीं कहानी हॉरर-कॉमेडी और सुपरनैचुरल तत्वों के इर्द-गिर्द बुनी गई है। रोहित शेट्टी की कॉमेडी फ्रेंचाइज ‘गोलमाल’ की पांचवीं किस्त को लेकर इंडस्ट्री में चर्चाएं तेज हैं। फिल्म अभी बनने की प्रोसेस में है लेकिन प्रोडक्शन और क्रू से जुड़े सूत्रों के हवाले से इसके शेड्यूल, स्टारकास्ट, कहानी और किरदारों से जुड़ी कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। दैनिक भास्कर को मिली खास जानकारी के मुताबिक, इस बार फिल्म में अक्षय की एंट्री सबसे बड़ा आकर्षण होगी, वहीं कहानी हॉरर-कॉमेडी और सुपरनैचुरल तत्वों के इर्द-गिर्द बुनी गई है। मुंबई में अगला बड़ा शेड्यूल शुरू होने की तैयारियां चल रही है फिल्म का करीब 80 से 85 प्रतिशत हिस्सा मुंबई के स्टूडियो और अलग-अलग लोकेशंस पर शूट हो रहा है। एक्टर्स को उनके किरदारों के हिसाब से 10 से 15 दिन के स्लॉट में बुलाया जा रहा है। पहला प्रमुख शेड्यूल ऊटी में पूरा हो चुका है, जहां कुछ गानों और पैचवर्क की शूटिंग की गई। इसके अलावा गोवा भी फिल्म की कहानी का अहम हिस्सा रहेगा। जुलाई से अगला बड़ा शेड्यूल शुरू होगा। अक्षय का किरदार फिल्म में तमिलनाडु के ‘बादशाह’ के रूप में दिखाया जाएगा फिल्म में अक्षय कथित तौर पर मुख्य विलेन या एंटी-हीरो की भूमिका में नजर आ सकते हैं। सूत्रों के अनुसार, उनका किरदार ‘हाउसफुल 4’ के चर्चित ‘बाला’ अवतार से प्रेरित हो सकता है। कहानी में इस किरदार को तमिलनाडु की पृष्ठभूमि वाले ‘बादशाह’ नाम से पेश किए जाने की चर्चा है। अक्षय और अजय देवगन-अरशद वारसी की गैंग के बीच एक बड़ा एक्शन-कॉमेडी सीक्वेंस पहले ही शूट किया जा चुका है, जिसे फिल्म का प्रमुख आकर्षण माना जा रहा है। शरमन जोशी इस बार अजय देवगन नहीं अक्षय की टीम का होंगे हिस्सा पहली ‘गोलमाल’ के बाद फ्रेंचाइज से अलग हुए शरमन जोशी इस बार वापसी कर रहे हैं। वे अपने पुराने किरदार और उसी पहचान के साथ कहानी में लौटेंगे। हालांकि इस बार उनका झुकाव गोपाल की टीम के बजाय अक्षय के किरदार की तरफ दिख सकता है, जिससे कहानी में नया संघर्ष पैदा होगा। सुपरपावर्स वाली बच्ची के रोल के लिए नई चाइल्ड आर्टिस्ट हुई कास्ट गोलमाल अगेन’ की हॉरर-कॉमेडी सफलता के बाद रोहित शेट्टी उसी जॉनर को ही नए अंदाज में आगे बढ़ा रहे हैं। कहानी एक ऐसी बच्ची के इर्द-गिर्द घूमेगी, जिसके पास रहस्यमयी शक्तियां आ जाती हैं। इस रोल के लिए किसी स्टारकिड को न चुनकर मुंबई से बाहर की एक नई बाल कलाकार को चुना गया है। रोहित के कॉप यूनिवर्स से रणवीर सिंह के भी कैमियो की है चर्चा परिणीति चोपड़ा इस बार प्रोजेक्ट का हिस्सा नहीं हैं। तबु की मौजूदगी को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। वहीं अजय अपने क्लासिक ‘गोपाल’ लुक में ही नजर आएंगे। फिल्म में रोहित के कॉप यूनिवर्स से रणवीर सिंह के संभावित स्पेशल अपीयरेंस और क्लाइमैक्स में कुछ सरप्राइज एंट्री की भी चर्चाएं हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
Ranchi Student Exposes CBSE OSM Flaws, Chairman Ousted

रितु लकड़ा । रांची1 घंटे पहले कॉपी लिंक सीबीएसई के ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) सिस्टम में जब कॉपियां धुंधली दिखने और चेकिंग में गड़बड़ी की शिकायतें आईं। इसके बाद रांची के 17 साल के छात्र सार्थक सिद्धांत ने सिर्फ शिकायत ही नहीं की, बल्कि सिस्टम की ही पोल खोल दी। 12वीं (2024-26 बैच) के इस छात्र ने सीबीएसई के 576 टेंडर दस्तावेजों को खंगाला और एक ब्लॉग के जरिए ओएसएम का ठेका देने की प्रक्रिया में हुई भारी अनियमितताओं को उजागर कर दिया। सार्थक के इस खुलासे की गूंज संसद तक पहुंची। स्थायी समिति ने मामले पर संज्ञान लिया। इसके बाद सरकार को सीबीएसई के चेयरमैन राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता को पद से हटाना पड़ा। दरअसल, 13 मई को CBSE ने 12वीं का रिजल्ट जारी किया था। इस बार पहली बार कॉपियां कंप्यूटर स्क्रीन (OSM सर्विस) पर चेक की गई थीं। रिजल्ट आने के बाद कई छात्रों ने नंबरों को लेकर शिकायत की, जिसके बाद पूरे मामले की जांच शुरू की गई है। सवाल: कैसे ख्याल आया कि ओएसएम में गड़बड़ी हुई है? जवाब: निसर्ग अधिकारी जो खुद 12वीं का स्टूडेंट है, उसने इन गड़बड़ियों को अपने ब्लॉग में लिखा। जब निसर्ग अधिकारी ने मुझे अपना सारा ब्लॉग पोस्ट पढ़ाया तो मुझे लगा कि सीबीएसई ने ऐसे इनसिक्योर प्लेटफॉर्म को टेंडर क्यों दिया है? मैंने टेंडर्स के बारे में पता किया। सरकारी पोर्टल पर मुझे कोई टेंडर्स नहीं मिले, तो मैंने टेंडर एग्रीगेटर वेबसाइट से निकाला। रिसर्च किया तो गड़बड़ियों का पता चला। और मैंने अपने ब्लॉग पर पोस्ट किया। सवाल: 12वीं में आपके मार्क्स कैसे थे? कम मार्क्स का शक कैसे हुआ? जवाब: मार्क्स ठीक-ठाक आए थे, लेकिन मैं थोड़ा सा डिसअपॉइंटेड था। इसके बाद मैंने रीइवैल्यूएशन के लिए अप्लाई किया था। मुझे लगा कि मार्क्स और आने चाहिए थे। मेरे सारे दोस्तों के मार्क्स के साथ यही समस्या थी, सभी को लग रहा था कि मार्क्स कम आए हैं। छात्र सार्थक सिद्धांत ने संसद की स्थायी समिति के सामने प्रेजेंटेशन दिया। सवाल: संसदीय समिति के समक्ष आपने क्या प्रेजेंटेशन दिया? जवाब: मैंने टेंडर की शर्तों से जुड़ी 500 से अधिक पन्नों को पढ़कर जो निष्कर्ष निकाला था, उसे प्रेजेंटेशन में दिखाया। टेंडर में कई गड़बड़ियां दिखीं। उसकी डिटेलिंग करके बताया कि कोएम्ट कंपनी ने कैसे शर्तों का उल्लंघन किया। सवाल: राहुल गांधी से क्या बातचीत हुई? जवाब: ओएसएम पोर्टल के बारे में पूछा। टेंडर्स में मिली गलतियों के बारे में बिंदुवार जानकारी ली। कैसे और कहां-कहां गड़बड़ियां हुई है, इसकी डिटेल जानकारी उन्होंने ली। राहुल गांधी ने OSM की गड़बड़ी सामने लाने वाले सार्थक सिद्धांत से मुलाकात की थी। सवाल: क्या आपने सीबीएसई का साइट हैक करके सारी जानकारी ली थी? जवाब: नहीं, मैं एथिकल हैकर हूं, पहले भी बहुत सारी साइट हैक की है। लेकिन सीबीएसई की साइट को मैंने हैक नहीं किया। 12वीं के स्टूडेंट निसर्ग अधिकारी ने साइट हैक कर अपने ब्लॉग में पोस्ट किया, जिसके बाद मेरी जिज्ञासा बढ़ी और मैंने रिसर्च कर गड़बड़ी के साक्ष्य जुटाए। स्टूडेंट ने संसदीय समिति को बताया- OSM में 15 खामियां पोर्टल पर सुबह खुलते ही साइबर अटैक हुआ CBSE के री-इवैल्यूएशन पोर्टल पर साइबर अटैक हुआ। CBSE के अनुसार, 2 मिनट में 15 लाख एक्सेस अटेंप्ट हुए, जबकि 1 लाख से ज्यादा बार सिस्टम की फाइलों तक बिना अनुमति पहुंचने की कोशिश की गई। हालांकि, साइबर अटैक के बावजूद पोर्टल काम करता रहा और दोपहर 3 बजे तक 16 हजार से ज्यादा छात्रों ने आवेदन कर दिया। यह पोर्टल सोमवार से शुरू होना था। सार्थक ने समिति को गड़बड़ियों के बारे में बताया सार्थक सिद्धांत ने संसद की स्थायी समिति के सामने OSM प्रणाली के लागू होने और इसके टेंडर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर अपनी बात रखी। सार्थक सिद्धांत ने कहा, ‘मेरे ब्लॉग के अनुसार कम से कम 15 खामियां हैं।’ इसके बाद शिक्षा मंत्रालय ने CBSE से कोएम्प्ट (COEMPT) को टेंडर देने को लेकर बोर्ड से रिपोर्ट मांगी। संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह ने बताया, ‘सार्थक ने समिति के समक्ष अपनी बात रखी है। अब समिति उनके उठाए गए मुद्दों और CBSE के जवाबों पर विचार करेगी।’ OSM की गड़बड़ी सामने लाने वाले 2 छात्र, दोनों ने परीक्षा दी वेदांत से बोर्ड ने मांफी मांगी: दिल्ली के वेदांत श्रीवास्तव ने भी 12वीं की परीक्षा दी थी। फिजिक्स में 65 नंबर मिले तो उन्होंने आवाज उठाई। रीवैल्युएशन में कॉपी मिली तो गड़बड़ी का पता चला। पहले उन्हें सोशल मीडिया पर ट्रोल किया गया। ट्रोलर्स ने उन्हें देशद्रोही तक कहा, बाद में बोर्ड ने गलती मानी और माफी मांगी। सार्थक ने टेंडर में गड़बड़ी निकाली: रांची के 17 साल के सार्थक सिद्धांत टेक रिसर्चर हैं। उन्होंने भी परीक्षा दी थी। उन्होंने एक आम छात्र से आगे बढ़कर एक खोजी पत्रकार/डेटा साइंटिस्ट की तरह काम किया। सीबीएसई की तरफ से जारी पिछले 576 दस्तावेजों का बारीकी से अध्ययन और तुलना कर टेंडर में गड़बड़ी का खुलासा किया। रिजल्ट से री-इवैल्यूएशन तक, अब तक क्या-क्या हुआ… 13 मई- CBSE ने 12वीं बोर्ड परीक्षा के नतीजे घोषित किए। 19 मई- पोस्ट रिजल्ट शिकायतों के समाधान के लिए री-इवैल्यूएशन पोर्टल खोला, लेकिन पहले ही दिन क्रैश हो गया। 20 से 23 मई- तीन बार एक-एक दिन के लिए आंसरशीट की फोटोकॉपी लेने की तारीख बढ़ाई गई। छात्रों ने आंसर शीट ब्लर, ज्यादा फीस, साइट क्रैश होने की शिकायत की। 25 मई- पोर्टल दुरुस्त करने के लिए देश के दो आईआईटी से मदद मांगी गई। उन्होंने साइबर अटैक रोकने पर भी काम किया। बोर्ड ने कहा- री-इवैल्यूएशन पोर्टल एक जून को खुलेगा। 1 जून- OSM का रीवैल से जुड़ा पोर्टल दिन भर नहीं खुल सका। 2 जून- बोर्ड ने बताया कि पोर्टल लाइव हो गया है। यह 6 जून तक ओपन रहेगा। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
दुनियाभर के टॉप लग्जरी ब्रांड्स का ‘टॉप सीक्रेट’ मुंबई में:क्रिस्टियन डियोर, गुची, प्रादा के कपड़ों पर कढ़ाई चाणक्य इंटरनेशनल करती है

क्रिस्टियन डियोर, प्रादा, गुची जैसे दुनिया के 30 से ज्यादा टॉप लग्जरी ब्रांड्स के कपड़ों पर भारत में कढ़ाई होती है। ये नामी ब्रांड्स अपने कपड़ों की खास कढ़ाई मुंबई की ‘चाणक्य इंटरनेशनल’ से करवाते हैं। यहां के कारीगर हाथ की कढ़ाई से 5,000 साल पुरानी विरासत बचाए हुए हैं। चाणक्य इंटरनेशनल की शुरुआत गुजरात के विनोद शाह ने 1984 में की थी। इसका मकसद भारतीय कपड़ों पर सामूहिक रूप से की गई कारीगरी का पूरी दुनिया में पहचान दिलाना था। दुनिया के सबसे महंगे डिजाइनर और रेडीमेड कपड़ों में भारतीय कढ़ाई की मांग सबसे ज्यादा है। इसकी क्वालिटी का कोई मुकाबला नहीं है। पश्चिमी देशों में यह हुनर खत्म हो चुका है। भारत सदियों से दुनिया को कपड़े निर्यात कर रहा है। 16वीं और 17वीं सदी में भी भारत से फ्रांस सहित कई देशों को मलमल, सिल्क और कढ़ाई वाले कपड़े भेजे जाते थे। यही पुरानी विरासत आज भी भारतीय कला को आधुनिक बनाए हुए है। विनोद शाह की बेटी 49 वर्षीय करिश्मा स्वाली पिछले 30 साल से चाणक्य की मैनेजिंग और क्रिएटिव डायरेक्टर हैं। करिश्मा यहां 2,400 कारीगरों का नेतृत्व करती हैं। बचपन में जब वह पहली बार पिता की वर्कशॉप गईं, तो वहां सामूहिक काम देखकर उन्हें अहसास हुआ कि मिलकर जुटने से नतीजा उम्मीद से सुंदर होता है। डियोर फॉल 2023 शो के दौरान चाणक्य इंटरनेशनल को एक बड़ी टेक्सटाइल कलाकृति बनाने की जिम्मेदारी मिली थी। इसमें 1,008 मास्टर्स और महिलाओं ने मिलकर एक विशाल पारंपरिक तोरण बनाया था, जिसका इस्तेमाल घरों में स्वागत के लिए होता है। करिश्मा ने हाल ही में वेनिस बिएनाले और रोम की वेटिकन लाइब्रेरी में चाणक्य की कलाकृतियों का प्रदर्शन किया है। करिश्मा का मानना है कि इस कला की सबसे बड़ी ताकत यह है कि एआई कभी भी हाथ के इस हुनर की जगह नहीं ले सकता है। हुनर – नई पीढ़ी को सिखा रहे कढ़ाई, एआई भी नहीं ले सकती इंसानी कला की जगह करिश्मा ने नई पीढ़ी के लिए ‘चाणक्य स्कूल ऑफ क्राफ्ट’ खोला है। सबसे बड़ी चुनौती करिकुलम बनाना नहीं, बल्कि स्टूडेंट्स का न आना था। करिश्मा ने खुद गरीब बस्तियों में घर-घर जाकर महिलाओं को मुफ्त हुनर सिखाने के लिए मनाया। तब संदेह के बीच सिर्फ 22 महिलाएं अपने पतियों और सास के साथ आईं, जो बाहर बैठकर इंतजार करते थे। आज 10 साल बाद स्कूल में 1,400 महिलाएं हैं और लंबी वेटिंग लिस्ट है।
कंगना रनोट के बयान पर भड़के अशोक पंडित:बोले- वो बकवास करती है, इसलिए बैन किया था; एक्ट्रेस ने रणवीर सिंह को सपोर्ट किया था

फिल्म ‘डॉन 3’ विवाद में रणवीर सिंह के समर्थन में दिए गए कंगना रनोट के बयान पर FWICE के चीफ एडवाइजर अशोक पंडित ने रिएक्शन दिया। उन्होंने कहा कि कंगना बकवास करती हैं, इसलिए मैंने उन्हें बैन किया था। हिन्दुस्तान टाइम्स के साथ बातचीत में पंडित ने कहा, “इंडस्ट्री के बहुत से लोग हमें गालियां देने लगे हैं। कल कंगना ने भी कुछ कहा। लोग पूरे मामले को समझे बिना ही कमेंट कर रहे हैं। कंगना ने यह भी कहा कि मुझे इंडस्ट्री ने बैन कर दिया है। मैंने कहा, ‘तुम बेकार की बातें करती हो, इसलिए मैंने तुम्हें बैन किया था।” उन्होंने आगे कहा, “मुझे इसकी परवाह नहीं है। यहां पूरी फिल्म इंडस्ट्री का बड़ा मुद्दा चल रहा है। तुम्हें तो असली मामला भी नहीं पता, फिर भी बोल रही हो। हम रणवीर के खिलाफ नहीं हैं। हम सिर्फ उस घटना की बात कर रहे हैं जो हुई है।” रणवीर को लेकर कंगना ने क्या कहा था? रणवीर सिंह को मिलने नॉन-कोऑपरेशन को लेकर कंगना ने कहा था, “आप मुझसे यह सवाल पूछ रहे हैं, मुझे तो हर किसी ने बैन किया हुआ है। मैं यही कहना चाहूंगी कि जब आपकी हैसियत बढ़ती है, तो आपके दुश्मन भी बढ़ते हैं। ऐसा कभी नहीं हो सकता कि आपकी हैसियत बढ़े और दुश्मन न बढ़ें। आज रणवीर सिंह को सोचना चाहिए कि उनकी क्या हैसियत है कि उनके इतने दुश्मन बन गए हैं। यह एक तरह से अच्छा ही है।” कंगना ने अपनी जिंदगी का उदाहरण देते हुए आगे कहा था कि जब आप लाइफ में आगे बढ़ते हैं तो कई तरह की मुश्किलें आती हैं। उन्होंने कहा था, “मेरे साथ तो इतना सब कुछ हुआ है, लेकिन देखिए आज मैं अच्छा काम कर रही हूं। मेरी गाड़ी भी अच्छी चल रही है। इसलिए इन चीजों से कोई फर्क नहीं पड़ता है, समय के साथ सब कुछ ठीक हो जाएगा।” बता दें कि बुधवार को फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज (FWICE) ने रणवीर सिंह के खिलाफ जारी नॉन-कोऑपरेशन डायरेक्टिव (NCD) को तत्काल प्रभाव से वापस ले लिया। रणवीर पर नॉन-कोऑपरेशन का फैसला FWICE ने वापस लिया FWICE ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद आधिकारिक बयान में कहा कि इंडियन मोशन पिक्चर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (IMPPA) के हस्तक्षेप और अपील के बाद यह फैसला लिया गया है। अशोक पंडित बोले- बैन नहीं था अशोक पंडित ने कहा कि FWICE ने कभी भी रणवीर सिंह पर बैन नहीं लगाया था। उन्होंने मीडिया से अपील की कि इस मामले को बैन के तौर पर पेश न किया जाए, क्योंकि इससे कन्फ्यूजन पैदा होता है। पंडित ने यह भी कहा कि FWICE के पास किसी को बैन करने का अधिकार नहीं है। संगठन केवल नॉन-कोऑपरेशन यानी सहयोग न करने का फैसला ले सकता है। उनके मुताबिक, यह एक लोकतांत्रिक अधिकार है कि कोई तकनीशियन, वर्कर, निर्माता या कलाकार किसी व्यक्ति के साथ काम करना चाहता है या नहीं। पूरी खबर यहां पढ़ें…
कंगना रनोट के बयान पर भड़के अशोक पंडित:बोले- वो बकवास करती है, इसलिए बैन किया था; एक्ट्रेस ने रणवीर सिंह को सपोर्ट किया था

फिल्म ‘डॉन 3’ विवाद में रणवीर सिंह के समर्थन में दिए गए कंगना रनोट के बयान पर FWICE के चीफ एडवाइजर अशोक पंडित ने रिएक्शन दिया। उन्होंने कहा कि कंगना बकवास करती हैं, इसलिए मैंने उन्हें बैन किया था। हिन्दुस्तान टाइम्स के साथ बातचीत में पंडित ने कहा, “इंडस्ट्री के बहुत से लोग हमें गालियां देने लगे हैं। कल कंगना ने भी कुछ कहा। लोग पूरे मामले को समझे बिना ही कमेंट कर रहे हैं। कंगना ने यह भी कहा कि मुझे इंडस्ट्री ने बैन कर दिया है। मैंने कहा, ‘तुम बेकार की बातें करती हो, इसलिए मैंने तुम्हें बैन किया था।” उन्होंने आगे कहा, “मुझे इसकी परवाह नहीं है। यहां पूरी फिल्म इंडस्ट्री का बड़ा मुद्दा चल रहा है। तुम्हें तो असली मामला भी नहीं पता, फिर भी बोल रही हो। हम रणवीर के खिलाफ नहीं हैं। हम सिर्फ उस घटना की बात कर रहे हैं जो हुई है।” रणवीर को लेकर कंगना ने क्या कहा था? रणवीर सिंह को मिलने नॉन-कोऑपरेशन को लेकर कंगना ने कहा था, “आप मुझसे यह सवाल पूछ रहे हैं, मुझे तो हर किसी ने बैन किया हुआ है। मैं यही कहना चाहूंगी कि जब आपकी हैसियत बढ़ती है, तो आपके दुश्मन भी बढ़ते हैं। ऐसा कभी नहीं हो सकता कि आपकी हैसियत बढ़े और दुश्मन न बढ़ें। आज रणवीर सिंह को सोचना चाहिए कि उनकी क्या हैसियत है कि उनके इतने दुश्मन बन गए हैं। यह एक तरह से अच्छा ही है।” कंगना ने अपनी जिंदगी का उदाहरण देते हुए आगे कहा था कि जब आप लाइफ में आगे बढ़ते हैं तो कई तरह की मुश्किलें आती हैं। उन्होंने कहा था, “मेरे साथ तो इतना सब कुछ हुआ है, लेकिन देखिए आज मैं अच्छा काम कर रही हूं। मेरी गाड़ी भी अच्छी चल रही है। इसलिए इन चीजों से कोई फर्क नहीं पड़ता है, समय के साथ सब कुछ ठीक हो जाएगा।” बता दें कि बुधवार को फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज (FWICE) ने रणवीर सिंह के खिलाफ जारी नॉन-कोऑपरेशन डायरेक्टिव (NCD) को तत्काल प्रभाव से वापस ले लिया। रणवीर पर नॉन-कोऑपरेशन का फैसला FWICE ने वापस लिया FWICE ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद आधिकारिक बयान में कहा कि इंडियन मोशन पिक्चर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (IMPPA) के हस्तक्षेप और अपील के बाद यह फैसला लिया गया है। अशोक पंडित बोले- बैन नहीं था अशोक पंडित ने कहा कि FWICE ने कभी भी रणवीर सिंह पर बैन नहीं लगाया था। उन्होंने मीडिया से अपील की कि इस मामले को बैन के तौर पर पेश न किया जाए, क्योंकि इससे कन्फ्यूजन पैदा होता है। पंडित ने यह भी कहा कि FWICE के पास किसी को बैन करने का अधिकार नहीं है। संगठन केवल नॉन-कोऑपरेशन यानी सहयोग न करने का फैसला ले सकता है। उनके मुताबिक, यह एक लोकतांत्रिक अधिकार है कि कोई तकनीशियन, वर्कर, निर्माता या कलाकार किसी व्यक्ति के साथ काम करना चाहता है या नहीं। पूरी खबर यहां पढ़ें…
एलिस पेरी की युवा खिलाड़ियों को सलाह:अलग-अलग तरह के खेल खेलें, बेहतर खिलाड़ी के साथ बेहतर इंसान भी बनेंगे

जब 16 साल की एक लड़की 2007 में ऑस्ट्रेलिया की जर्सी पहनकर डार्विन के एक छोटे से मैदान पर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने उतरी थी, तब शायद किसी ने नहीं सोचा होगा कि वही खिलाड़ी एक दिन सदी की सर्वश्रेष्ठ महिला क्रिकेटर चुनी जाएगी। लगभग दो दशक बाद एलिस पेरी के नाम रिकॉर्डों का अंबार है, लेकिन उनके लिए सबसे बड़ी उपलब्धि खेल के साथ बना रहा वह रिश्ता है, जिसने उन्हें लगातार आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। 35 वर्षीय ऑलराउंडर पेरी कहती हैं कि उनके करियर का सबसे खूबसूरत पहलू यह रहा कि हर साल कुछ नया सीखने और खुद को बेहतर बनाने का मौका मिला। क्रिकेट लगातार बदलता रहा। खासकर टी20 में नए शॉट्स और नई टेक्निक सीखना उनके लिए चुनौती भी था और आनंद भी। उनके अनुसार, खेल में असली संतोष तब मिलता है, जब आप अपनी सीमाओं को पहचानकर उन्हें आगे बढ़ाने की कोशिश करते हैं। इंग्लैंड के खिलाफ एशेज टेस्ट भी पेरी की यादों का अहम हिस्सा हैं। खासकर 2017 में नॉर्थ सिडनी ओवल पर लगाया गया दोहरा शतक। वे कहती हैं कि उस पारी की सबसे बड़ी खुशी यह थी कि उनके पिता स्टैंड में बैठकर उसे देख रहे थे। क्रिकेट सिखाने से लेकर हर मैच से पहले बात करने तक, उनके पिता आज भी उनकी सबसे बड़ी ताकत हैं। पेरी अपनी सफलता का सबसे बड़ा श्रेय परिवार को देती हैं। उनके लिए मां प्रेरणा हैं, पिता मार्गदर्शक और बड़ा भाई सबसे अच्छा दोस्त। वहीं, कप्तानों की बात करें तो मेग लैनिंग की शांत नेतृत्व क्षमता और कठिन परिस्थितियों में फैसले लेने की कला ने उन्हें सबसे ज्यादा प्रभावित किया। नई पीढ़ी के खिलाड़ियों को सलाह देते हुए पेरी कहती हैं कि सिर्फ एक खेल तक सीमित न रहें। जितने ज्यादा खेल खेलेंगे और जितने ज्यादा अनुभव हासिल करेंगे, उतना बेहतर खिलाड़ी और इंसान बनेंगे। उनके मुताबिक खेल का असली मकसद आनंद है। अगर मजा खत्म हो गया, तो खेल का सबसे खूबसूरत हिस्सा भी खो जाएगा। 2020 वर्ल्ड कप उनका सबसे यादगार लम्हा महिला क्रिकेट के इतिहास की सबसे यादगार तस्वीरों में से एक 2020 टी20 वर्ल्ड कप फाइनल की है, जब मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड में 86 हजार से ज्यादा दर्शक मौजूद थे। दिलचस्प बात यह है कि उस मैच में पेरी चोट के कारण नहीं खेल सकीं, लेकिन फिर भी वह इसे अपने करियर के सबसे खास पलों में गिनती हैं। उनके मुताबिक यह सिर्फ एक मैच नहीं था, बल्कि उन सभी खिलाड़ियों और लोगों के संघर्ष का सम्मान था जिन्होंने वर्षों तक महिला क्रिकेट को आगे बढ़ाने के लिए काम किया।
उत्तराखंड चुनाव 2027: बीजेपी के पहले इलेक्शन मूड में कांग्रेस, फोन से रैली को बता कर राहुल गांधी नेफोटा 2027 चुनाव का बिगुल

लोकसभा चुनाव में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने उत्तराखंड से कांग्रेस के 2027 विधानसभा चुनाव अभियान की शुरुआत की। हालांकि खराब मौसम के कारण उनका शिखर सम्मेलन का कार्यक्रम प्रभावित हुआ, लेकिन उन्होंने फोन के माध्यम से आश्वासन दिया और प्रोत्साहन की कोशिश की। राहुल गांधी दो दिवसीय उत्तराखंड दौरे पर गुरुवार को राज्य अमेरिका थे। उनका पहला प्रमुख कार्यक्रम कार्यक्रम सिमकली मैदान में आयोजित किया गया था, जहां बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता और स्थानीय लोग थे। लेकिन खराब मौसम और कम दृश्यता के कारण पंतनगर हवाईअड्डे से उड़ान की मंजूरी के लिए उनके हेलीकॉप्टर वापस पंतनगर लौट आए। सुरक्षा उपकरण से आगे की उड़ान की मात्रा नहीं बताई गई। वीडियो | कोटद्वार: लोकसभा नेता राहुल गांधी दो दिवसीय उत्तराखंड दौरे पर हैं. दुकान के मालिक वकील अहमद कहते हैं, “घटना इसी दुकान पर हुई थी… हालांकि, न तो दीपक (जिम मालिक) और न ही कांग्रेस, राहुल गांधी ने मुझे मिलने के लिए आमंत्रित किया। मैं राहुल गांधी से मिलना चाहता था, वह एक बड़े… pic.twitter.com/OKjcV4jxKb – प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (@PTI_News) 4 जून, 2026 ये भी पढ़ें-आईएसआई-मुंबई अंडरवर्ल्ड आर्किटेक्चर केस में एटीएस का बड़ा एक्शन, 5 से ज्यादा की तोड़फोड़, 4 लोगों की किस्मत खराब हालाँकि कार्यक्रम रद्द नहीं किया गया। राहुल गांधी ने फोन के जरिए कांग्रेस को मजबूत करने और जनता के बीच एकजुटता लाने के लिए कांग्रेस को मजबूत करने का आह्वान किया। कांग्रेस इस दौरे में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले संगठन को मजबूत करने और राजनीतिक रणनीति तय करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। दौरे के दौरान राहुल गांधी के गढ़वाल में पूर्व सैनिकों से मुलाकात का कार्यक्रम भी है। कांग्रेस का मानना है कि उत्तराखंड के सैनिकों जैसे बहुसंख्यक पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के मुद्दे राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हैं। राहुल गांधी कंडोलिया मैदान में पूर्व सैनिकों से संवाद कर अपनी समस्याएं और सुझाव सुनेंगे। राहुल गांधी के दूसरे दिन कांग्रेस नेताओं और वकीलों के साथ बैठक करेंगे। इस दौरान बूथ स्तर की तैयारी और 2027 विधानसभा चुनाव की रणनीति पर चर्चा होने की संभावना है। वहीं भारतीय जनता पार्टी ने राहुल गांधी के दौरे का सारांश तैयार किया है। उत्तराखंड सरकार के मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि राहुल गांधी जहां भी जाते हैं, वहां अंततः भाजपा को ही राजनीतिक फायदा होता है। उन्होंने राहुल गांधी को बीजेपी का “स्टार प्रचारक” तक बताया. रिकाॅर्ड भंडारी के अंतिम संस्कार में राहुल गांधी शामिल हैंराजनीतिक दृष्टि से यह दौरा काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा था, विशेष रूप से जांच भंडारी हत्याकांड को लेकर। राहुल गांधी इस मामले में पीड़ित परिवार से मिलकर समर्थन जताना चाहते थे और राज्य सरकार से सवाल भी उठा सकते थे लेकिन सीज़न ने अपने इस कार्यक्रम पर पूरी तरह से पानी फेर दिया। कांग्रेस के प्रवक्ता का कहना है कि राहुल गांधी का यह दौरा आगे फिर से तय किया जा सकता है, जब सीज़न पूरी तरह से अनुकूल होगा। यूनिवर्सल पार्टी नेतृत्व की स्थिति पर नजर रखी जा रही है और नए प्रोग्राम की कंपनी पर विचार किया जा रहा है। तेल संकट पर मोदी सरकार ने लिया बड़ा फैसला, जारी किया 10 हजार करोड़ का फंड
Mexico Claims Caramelo Dog Breed; Brazil Prepares Currency Feature

ब्राजीलिया/मेक्सिको सिटी4 मिनट पहले कॉपी लिंक ब्राजील और मेक्सिको के बीच इन दिनों भूरे रंग के एक अवारा कुत्ते को लेकर विवाद छिड़ गया है। इसका नाम कारामेलो है। ब्राजील के लोग इस कुत्ते को देश की पहचान मानते हैं। उनका कहना है कि ब्राजील में कारामेलो उतना ही खास है जितना फुटबॉल और सांबा संगीत। मेक्सिको ने इसी साल अप्रैल में कारामेलो को स्थानीय नस्ल घोषित कर दिया जिसके बाद यह विवाद शुरू हुआ। मेक्सिको के इस फैसले ने ब्राजील में नाराजगी पैदा कर दी। कई ब्राजीलियाई लोगों को लगा कि उनकी सांस्कृतिक पहचान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा उनसे छीना जा रहा है। वैज्ञानिक दृष्टि से कारामेलो किसी एक शुद्ध नस्ल का कुत्ता नहीं है। ब्राजील की जेनेटिक्स कंपनी DNA पेट्स की स्टडी के मुताबिक, यह 300 से ज्यादा विदेशी नस्लों के कुत्तों के मिश्रण से बना है। यह किसी एक समय पर विकसित की गई नस्ल नहीं, बल्कि कई पीढ़ियों में सैकड़ों नस्लों के प्राकृतिक मिश्रण से बना कुत्ता है। कारामेलो नाम इन कुत्तों के हल्के भूरे या टॉफी जैसे रंग की वजह से पड़ा है। ब्राजील में इन कुत्तों की लोकप्रियता इतनी ज्यादा है कि इन पर मीम बनते हैं, टी-शर्ट छपती हैं, वायरल गाने बनाए जाते हैं और कार्निवल परेड में इनके सम्मान में झांकियां तक निकाली जाती हैं। यहां तक कि इन्हें ब्राजील की मुद्रा पर जगह देने का प्रस्ताव भी चर्चा में आया था। 2020 में 200 रियास के नोट पर भी इस कुत्ते की तस्वीर लगाने की मांग उठी, जिसे और ज्यादा समर्थन मिला। ब्राजील में राष्ट्रीय विरासत बनाने की कोशिश कारामेलो पुर्तगाली भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ कैरेमल या टॉफी जैसा हल्का भूरा रंग होता है। इसी रंग के कारण ब्राजील में भूरे रंग के अवारा कुत्तों को ‘कारामेलो’ कहा जाता है। 2019 में यह डॉग सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इसकी लोकप्रियता इतनी बढ़ी कि लोगों ने ब्राजील के 10 रियास के नोट पर बने पक्षी की जगह कारामेलो डॉग की तस्वीर लगाने की मांग शुरू कर दी। इसके लिए शुरू हुई एक याचिका पर करीब 50 हजार लोगों ने साइन किए। इसके बाद 2023 में ब्राजील के सांसदों ने एक बिल पेश किया था, जिसमें कारामेलो स्ट्रीट डॉग्स को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने की मांग की गई थी। हालांकि, यह कानून अब तक पास नहीं हो सका है। इसके बाद साओ पाउलो समेत कुछ राज्यों ने अपने स्तर पर इन्हें सांस्कृतिक विरासत का दर्जा देने वाले कानून बनाए। रियो डी जेनेरियो के एक डॉग पार्क में हाल ही में बड़ी संख्या में ऐसे भूरे कुत्ते दिखाई दिए। साल 2025 में कारामेलो कुत्ते पर नेटफ्लिक्स की एक फिल्म भी बनी थी। 100 साल में विकसित हुआ कारामेलो शोध के अनुसार कारामेलो की जड़ें उन कुत्तों तक जाती हैं जिन्हें पुर्तगाली उपनिवेशवादी अपने साथ ब्राजील लाए थे। बाद में इटली, जर्मनी, स्पेन और जापान से आए प्रवासी भी विभिन्न नस्लों के कुत्ते लेकर आए। 1930 से 1970 के बीच ब्राजील में औद्योगीकरण बढ़ा। इस दौरान ग्रामीण इलाकों के लोग शहरों की ओर आए तो वे अपने साथ खेतों और पशुओं की रखवाली करने वाले कुत्तों को भी लेकर आए। शहरों में पहले से मौजूद छोटे पालतू कुत्तों के साथ इनका मेल हुआ। कई पीढ़ियों तक बिना किसी नियंत्रण के प्रजनन होने के बाद आज के कारामेलो कुत्ते अस्तित्व में आए। मेक्सिको में भी पाए जाते है ये भूरे कुत्ते अप्रैल में मेक्सिको के पर्यावरण अभियोजक कार्यालय ने कारामेलो को मेक्सिकन नस्ल घोषित किया। अपने बयान में कार्यालय ने कहा कि इस कदम का मकसद देसी और आवारा कुत्तों को लेकर लोगों की नकारात्मक सोच बदलना है। मेक्सिको में जानवरों की संस्था से जुड़ी क्लाउडिया एडवर्ड्स ने कहा कि मेक्सिको में भी ऐसे भूरे कुत्ते बड़ी संख्या में मिलते हैं। इसकी वजह दोनों देशों का मिलता-जुलता इतिहास और मौसम है। उन्होंने कहा कि ब्राजील ने सबसे पहले इन कुत्तों को पहचान जरूर दिलाई। लेकिन कारामेलो सिर्फ एक देश का नहीं, पूरे लैटिन अमेरिका का है। ब्राजील में कारामेलो डॉग लोगों के बीच बहुत लोकप्रिय है। गर्म मौसम में आसानी से ढल जाते हैं कारामेलो कुत्ते ब्राजील के लगभग हर शहर में ये भूरे कुत्ते दिखाई देते हैं। स्थानीय लोग अक्सर इन्हें खाना खिलाते हैं और इनकी देखभाल भी करते हैं। कई जगह ये मोहल्लों के साझा कुत्ते बन चुके हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इनका छोटा और हल्का भूरा फर इन्हें गर्म मौसम में फायदा देता है। इससे शरीर पर कम कीड़े लगते हैं और तेज धूप में भी ये आसानी से रह पाते हैं। मिश्रित नस्ल होने की वजह से इनमें कई जन्मजात बीमारियों का खतरा भी कम रहता है। यही वजह है कि ये कुत्ते काफी मजबूत और परिस्थितियों के हिसाब से खुद को ढाल लेने वाले होते हैं। कई कारामेलो लोकप्रियता बढ़ने के बावजूद शेल्टर होम्स में है कारामेलो कुत्तों की लोकप्रियता बढ़ी है लेकिन बड़ी संख्या में ये अब भी शेल्टर होम्स में पड़े हैं। ब्राजील की सबसे बड़ी एनिमल वेलफेयर संस्था अम्पारा की संस्थापक जूलियाना कैमर्गो ने कहा कि लोग अब भी इन्हें सबसे पहले गोद लेने के लिए नहीं चुनते। एनिमल वेलफेयर ग्रुप्स की एक ग्लोबल स्टडी के मुताबिक, ब्राजील में दो करोड़ से ज्यादा आवारा कुत्ते हैं। कैमर्गो का अनुमान है कि इनमें 90% से ज्यादा कारामेलो हैं। जूलियाना कैमर्गो का मानना है कि अगर ब्राजील और मेक्सिको दोनों जगह कारामेलो कुत्तों को पहचान मिलेगी तो ज्यादा लोग इन्हें अपनाने के लिए आगे आएंगे। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
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ब्राजीलिया/मेक्सिको सिटी7 मिनट पहले कॉपी लिंक ब्राजील और मेक्सिको के बीच इन दिनों भूरे रंग के एक अवारा कुत्ते को लेकर विवाद छिड़ गया है। इसका नाम कैरामेलो है। ब्राजील के लोग इस कुत्ते को देश की पहचान मानते हैं। उनका कहना है कि ब्राजील में कैरामेलो उतना ही खास है जितना फुटबॉल और सांबा संगीत। मेक्सिको ने इसी साल अप्रैल में कैरामेलो को स्थानीय नस्ल घोषित कर दिया जिसके बाद यह विवाद शुरू हुआ। मेक्सिको के इस फैसले ने ब्राजील में नाराजगी पैदा कर दी। कई ब्राजीलियाई लोगों को लगा कि उनकी सांस्कृतिक पहचान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा उनसे छीना जा रहा है। वैज्ञानिक दृष्टि से कैरामेलो किसी एक शुद्ध नस्ल का कुत्ता नहीं है। ब्राजील की जेनेटिक्स कंपनी DNA पेट्स की स्टडी के मुताबिक, यह 300 से ज्यादा विदेशी नस्लों के कुत्तों के मिश्रण से बना है। यह किसी एक समय पर विकसित की गई नस्ल नहीं, बल्कि कई पीढ़ियों में सैकड़ों नस्लों के प्राकृतिक मिश्रण से बना कुत्ता है। कैरामेलो नाम इन कुत्तों के हल्के भूरे या टॉफी जैसे रंग की वजह से पड़ा है। ब्राजील में इन कुत्तों की लोकप्रियता इतनी ज्यादा है कि इन पर मीम बनते हैं, टी-शर्ट छपती हैं, वायरल गाने बनाए जाते हैं और कार्निवल परेड में इनके सम्मान में झांकियां तक निकाली जाती हैं। यहां तक कि इन्हें ब्राजील की मुद्रा पर जगह देने का प्रस्ताव भी चर्चा में आया था। 2020 में 200 रियास के नोट पर भी इस कुत्ते की तस्वीर लगाने की मांग उठी, जिसे और ज्यादा समर्थन मिला। ब्राजील में राष्ट्रीय विरासत बनाने की कोशिश कैरामेलो पुर्तगाली भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ कैरेमल या टॉफी जैसा हल्का भूरा रंग होता है। इसी रंग के कारण ब्राजील में भूरे रंग के अवारा कुत्तों को ‘कैरामेलो’ कहा जाता है। 2019 में यह डॉग सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इसकी लोकप्रियता इतनी बढ़ी कि लोगों ने ब्राजील के 10 रियास के नोट पर बने पक्षी की जगह कैरामेलो डॉग की तस्वीर लगाने की मांग शुरू कर दी। इसके लिए शुरू हुई एक याचिका पर करीब 50 हजार लोगों ने साइन किए। इसके बाद 2023 में ब्राजील के सांसदों ने एक बिल पेश किया था, जिसमें कैरामेलो स्ट्रीट डॉग्स को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने की मांग की गई थी। हालांकि, यह कानून अब तक पास नहीं हो सका है। इसके बाद साओ पाउलो समेत कुछ राज्यों ने अपने स्तर पर इन्हें सांस्कृतिक विरासत का दर्जा देने वाले कानून बनाए। रियो डी जेनेरियो के एक डॉग पार्क में हाल ही में बड़ी संख्या में ऐसे भूरे कुत्ते दिखाई दिए। साल 2025 में कैरामेलो कुत्ते पर नेटफ्लिक्स की एक फिल्म भी बनी थी। 100 साल में विकसित हुआ कैरामेलो शोध के अनुसार कैरामेलो की जड़ें उन कुत्तों तक जाती हैं जिन्हें पुर्तगाली उपनिवेशवादी अपने साथ ब्राजील लाए थे। बाद में इटली, जर्मनी, स्पेन और जापान से आए प्रवासी भी विभिन्न नस्लों के कुत्ते लेकर आए। 1930 से 1970 के बीच ब्राजील में औद्योगीकरण बढ़ा। इस दौरान ग्रामीण इलाकों के लोग शहरों की ओर आए तो वे अपने साथ खेतों और पशुओं की रखवाली करने वाले कुत्तों को भी लेकर आए। शहरों में पहले से मौजूद छोटे पालतू कुत्तों के साथ इनका मेल हुआ। कई पीढ़ियों तक बिना किसी नियंत्रण के प्रजनन होने के बाद आज के कैरामेलो कुत्ते अस्तित्व में आए। मेक्सिको में भी पाए जाते है ये भूरे कुत्ते अप्रैल में मेक्सिको के पर्यावरण अभियोजक कार्यालय ने कैरामेलो को मेक्सिकन नस्ल घोषित किया। अपने बयान में कार्यालय ने कहा कि इस कदम का मकसद देसी और आवारा कुत्तों को लेकर लोगों की नकारात्मक सोच बदलना है। मेक्सिको में जानवरों की संस्था से जुड़ी क्लाउडिया एडवर्ड्स ने कहा कि मेक्सिको में भी ऐसे भूरे कुत्ते बड़ी संख्या में मिलते हैं। इसकी वजह दोनों देशों का मिलता-जुलता इतिहास और मौसम है। उन्होंने कहा कि ब्राजील ने सबसे पहले इन कुत्तों को पहचान जरूर दिलाई। लेकिन कैरामेलो सिर्फ एक देश का नहीं, पूरे लैटिन अमेरिका का है। ब्राजील में कैरामेलो डॉग लोगों के बीच बहुत लोकप्रिय है। गर्म मौसम में आसानी से ढल जाते हैं कैरामेलो कुत्ते ब्राजील के लगभग हर शहर में ये भूरे कुत्ते दिखाई देते हैं। स्थानीय लोग अक्सर इन्हें खाना खिलाते हैं और इनकी देखभाल भी करते हैं। कई जगह ये मोहल्लों के साझा कुत्ते बन चुके हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इनका छोटा और हल्का भूरा फर इन्हें गर्म मौसम में फायदा देता है। इससे शरीर पर कम कीड़े लगते हैं और तेज धूप में भी ये आसानी से रह पाते हैं। मिश्रित नस्ल होने की वजह से इनमें कई जन्मजात बीमारियों का खतरा भी कम रहता है। यही वजह है कि ये कुत्ते काफी मजबूत और परिस्थितियों के हिसाब से खुद को ढाल लेने वाले होते हैं। कई कैरामेलो लोकप्रियता बढ़ने के बावजूद शेल्टर होम्स में है कैरामेलो कुत्तों की लोकप्रियता बढ़ी है लेकिन बड़ी संख्या में ये अब भी शेल्टर होम्स में पड़े हैं। ब्राजील की सबसे बड़ी एनिमल वेलफेयर संस्था अम्पारा की संस्थापक जूलियाना कैमर्गो ने कहा कि लोग अब भी इन्हें सबसे पहले गोद लेने के लिए नहीं चुनते। एनिमल वेलफेयर ग्रुप्स की एक ग्लोबल स्टडी के मुताबिक, ब्राजील में दो करोड़ से ज्यादा आवारा कुत्ते हैं। कैमर्गो का अनुमान है कि इनमें 90% से ज्यादा कैरामेलो हैं। जूलियाना कैमर्गो का मानना है कि अगर ब्राजील और मेक्सिको दोनों जगह कैरामेलो कुत्तों को पहचान मिलेगी तो ज्यादा लोग इन्हें अपनाने के लिए आगे आएंगे। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
‘कॉकटेल 2’ का ट्रेलर जारी; 19 जून को आएगी फिल्म:ट्रेलर में शाहिद, कृति और रश्मिका के किरदारों के बीच बनते-बिगड़ते रिश्तों को दिखाया गया है

शाहिद कपूर, कृति सेनन और रश्मिका मंदाना स्टारर फिल्म ‘कॉकटेल 2’ का ट्रेलर रिलीज हो गया है। फिल्म का निर्देशन होमी अदजानिया ने किया है, जिन्होंने 2012 में आई कॉकटेल का भी निर्देशन किया था। हालांकि यह फिल्म ‘कॉकटेल’ की सीधी कहानी को आगे नहीं बढ़ाती लेकिन इसकी थीम रिश्तों, दोस्ती और प्रेम के जटिल समीकरणों पर आधारित है। इस बार फिल्म में पूरी तरह नई स्टार कास्ट और नई कहानी देखने को मिलेगी। ट्रेलर में शाहिद, कृति और रश्मिका के किरदारों के बीच बनते-बिगड़ते रिश्तों को दिखाया गया है। कहानी एक ऐसे लव ट्रायंगल के इर्द-गिर्द घूमती है, जहां दोस्ती और प्यार की सीमाएं धुंधली होने लगती हैं। फिल्म आधुनिक रिश्तों की उलझनों और भावनात्मक संघर्षों को केंद्र में रखती है। फिल्म की कहानी तरुण जैन और लव रंजन ने लिखी है। इसका संगीत प्रीतम ने तैयार किया है, जबकि गीत अमिताभ भट्टाचार्य ने लिखे हैं। ट्रेलर में लोकप्रिय गीत ‘तुम्ही हो बंधु’ की वापसी भी देखने को मिलती है, जो सैफ अली खान स्टारर पहली फिल्म का चर्चित गाना था। फिल्म का निर्माण दिनेश विजान और लव रंजन ने किया है। शाहिद और कृति इससे पहले ‘तेरी बातों में ऐसा उलझा जिया’ में साथ नजर आ चुके हैं, जबकि रश्मिका पहली बार इस जोड़ी के साथ स्क्रीन साझा कर रही हैं। बता दें कि यह फिल्म 19 जून को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। रिपोर्ट्स के अनुसार शाहिद और रश्मिका की जोड़ी ‘कॉकटेल 2’ के बाद फिर एक रोमांटिक कॉमेडी में नजर आ सकती है। हालांकि इसकी आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है।







