Shilpa Shinde Admits Mistake; Upasna Singh Defends Actress in Fake Harassment Case

2 मिनट पहले कॉपी लिंक टीवी सीरियल ‘भाभीजी घर पर हैं’ फेम शिल्पा शिंदे के हालिया खुलासे के बाद विवाद बढ़ गया है। शिल्पा ने स्वीकार किया है कि उन्होंने प्रोड्यूसर संजय कोहली पर 10 साल पहले फर्जी सेक्शुअल हैरेसमेंट का केस दर्ज कराया था। इसके बाद ऑल इंडियन सिने वर्कर्स एसोसिएशन (AICWA) ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। इस बीच, एक्ट्रेस उपासना सिंह शिल्पा के समर्थन में आई हैं। इंडियन एक्सप्रेस से उपासना ने कहा कि शिल्पा से गलती हुई और उन्होंने इसे मान लिया है, इसलिए उन्हें विलेन नहीं बनाना चाहिए। एक्ट्रेस उपासना सिंह। सेट पर मददगार और साफ दिल इंसान हैं शिल्पा उपासना सिंह ने शिल्पा शिंदे के साथ ‘मायका’ और ‘बेटियां अपनी या पराया धन’ जैसे शोज में काम किया है। उपासना ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि शिल्पा का एक पहलू ऐसा भी है जिस पर कोई बात नहीं कर रहा है। वे सेट पर स्पॉटबॉय, लाइटमैन और मेकअप मैन जैसे जूनियर स्टाफ के लिए हमेशा खड़ी रहती थीं। अगर कोई उनके पास आकर कहता था कि उसके पास खाने के लिए पैसे नहीं हैं, तो शिल्पा उसकी मदद जरूर करती थीं। वे बहुत ही दयालु स्वभाव की हैं। मजबूरी और गुस्से में उठाया था गलत कदम उपासना ने कहा कि वे शिल्पा की गलती को सही नहीं ठहरा रही हैं, लेकिन लोगों को उस समय के हालात को भी समझना चाहिए। एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में कई बार दो लोगों के बीच झगड़ा इतना बढ़ जाता है कि लोग गुस्से और फ्रस्ट्रेशन में सीमा पार कर जाते हैं। उस वक्त शिल्पा के पास शायद पैसे नहीं थे, वे शो छोड़ना चाहती थीं और काफी परेशान थीं। जब उन्हें लगा कि उनकी बात नहीं सुनी जा रही है, तब उन्होंने यह कदम उठाया। उपासना ने कहा कि बाद में उसी प्रोड्यूसर ने शिल्पा के साथ दोबारा काम किया, जो दिखाता है कि वे भी समझ गए थे कि यह सब गुस्से में हुआ था। शिल्पा शिंदे ने 2015 में टीवी शो भाभीजी घर पर हैं में अंगूरी भाभी का किरदार निभाया था। सच स्वीकार करने की हिम्मत की तारीफ होनी चाहिए इंटरव्यू में उपासना ने कहा कि शिल्पा को सिर्फ इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि उन्होंने खुद पूरी दुनिया के सामने अपनी गलती स्वीकार की है। अगर वे चुप रहतीं, तो कोई कुछ नहीं कहता। उपासना के मुताबिक, गलती स्वीकार करने के लिए बहुत हिम्मत की जरूरत होती है। उन्होंने कहा कि शायद उनमें भी ऐसा सच बोलने का साहस नहीं होता। लोग उनकी गलती पर सवाल उठा सकते हैं, लेकिन उन्हें पूरी तरह से विलेन के रूप में पेश करना गलत है। भारती और हर्ष के शो में किया था खुलासा यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब शिल्पा शिंदे हाल ही में कॉमेडियन भारती सिंह और हर्ष लिम्बाचिया के यूट्यूब चैनल पर शामिल हुईं। वहां उन्होंने स्वीकार किया कि 10 साल पहले उन्होंने ‘भाभीजी घर पर हैं’ के प्रोड्यूसर संजय कोहली के खिलाफ सेक्शुअल हैरेसमेंट का झूठा केस दर्ज कराया था। शिल्पा ने कहा कि उस समय उनके पास कोई दूसरा रास्ता नहीं था। प्रोड्यूसर्स उन पर एक ऐसा कॉन्ट्रैक्ट साइन करने का दबाव बना रहे थे, जिसके बाद वे किसी दूसरे प्रोडक्शन हाउस के साथ काम नहीं कर पातीं। 2016 में मेकर्स पर लगाए थे संगीन आरोप शिल्पा शिंदे ने 2015 में टीवी शो भाभीजी घर पर हैं में अंगूरी भाभी का किरदार निभाया था। एक साल बाद शिल्पा ने मेकर्स और प्रोड्यूसर के खिलाफ कई संगीन आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज करवाई और शो छोड़ दिया। शिल्पा शिंदे ने हाल ही में पॉडकास्ट के दौरान कहा था, “यह बात कोई नहीं जानता। मैं अब सच बोलने से नहीं डरती। मैंने अपने प्रोड्यूसर के खिलाफ सेक्सुअल हैरेसमेंट का केस दर्ज कराया था क्योंकि मेरे पास कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा था। कांट्रैक्ट के विवाद को सुलझाने के लिए मैंने ऐसा किया और बाद में सेटलमेंट करके मैं उस स्थिति से बाहर आ गई।” शिल्पा ने आगे दावा किया कि वे खुद लॉ बैकग्राउंड से आती हैं और पुलिस का कहना था कि अगर एफआईआर दर्ज करानी है, तो गंभीर आरोप लिखने ही होंगे। ये खबर भी पढ़ें शिल्पा शिंदे पर सीएम फडणवीस से कानूनी कार्रवाई की मांग:प्रोड्यूसर पर सेक्सुअल हैरेसमेंट के झूठे आरोप लगाए; शिल्पा का पोस्ट- ‘जो उखाड़ना है उखाड़ लो’ टेलीविजन एक्ट्रेस शिल्पा शिंदे के एक हालिया खुलासे पर ऑल इंडिया सिने वर्कर्स एसोसिएशन (AICWA) ने कड़ी आपत्ति जताई है। शिल्पा ने कॉमेडियन भारती सिंह और हर्ष लिंबाचिया के पॉडकास्ट में माना था कि उन्होंने टीवी शो ‘भाभीजी घर पर हैं’ के प्रोड्यूसर पर सेक्सुअल हैरेसमेंट (यौन उत्पीड़न) के झूठे आरोप लगाए थे। पूरी खबर पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
Shilpa Shinde Admits Mistake; Upasna Singh Defends Actress in Fake Harassment Case

18 मिनट पहले कॉपी लिंक टीवी सीरियल ‘भाभीजी घर पर हैं’ फेम शिल्पा शिंदे के हालिया खुलासे के बाद विवाद बढ़ गया है। शिल्पा ने स्वीकार किया है कि उन्होंने प्रोड्यूसर संजय कोहली पर 10 साल पहले फर्जी सेक्शुअल हैरेसमेंट का केस दर्ज कराया था। इसके बाद ऑल इंडियन सिने वर्कर्स एसोसिएशन (AICWA) ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। इस बीच, एक्ट्रेस उपासना सिंह शिल्पा के समर्थन में आई हैं। इंडियन एक्सप्रेस से उपासना ने कहा कि शिल्पा से गलती हुई और उन्होंने इसे मान लिया है, इसलिए उन्हें विलेन नहीं बनाना चाहिए। एक्ट्रेस उपासना सिंह। सेट पर मददगार और साफ दिल इंसान हैं शिल्पा उपासना सिंह ने शिल्पा शिंदे के साथ ‘मायका’ और ‘बेटियां अपनी या पराया धन’ जैसे शोज में काम किया है। उपासना ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि शिल्पा का एक पहलू ऐसा भी है जिस पर कोई बात नहीं कर रहा है। वे सेट पर स्पॉटबॉय, लाइटमैन और मेकअप मैन जैसे जूनियर स्टाफ के लिए हमेशा खड़ी रहती थीं। अगर कोई उनके पास आकर कहता था कि उसके पास खाने के लिए पैसे नहीं हैं, तो शिल्पा उसकी मदद जरूर करती थीं। वे बहुत ही दयालु स्वभाव की हैं। मजबूरी और गुस्से में उठाया था गलत कदम उपासना ने कहा कि वे शिल्पा की गलती को सही नहीं ठहरा रही हैं, लेकिन लोगों को उस समय के हालात को भी समझना चाहिए। एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में कई बार दो लोगों के बीच झगड़ा इतना बढ़ जाता है कि लोग गुस्से और फ्रस्ट्रेशन में सीमा पार कर जाते हैं। उस वक्त शिल्पा के पास शायद पैसे नहीं थे, वे शो छोड़ना चाहती थीं और काफी परेशान थीं। जब उन्हें लगा कि उनकी बात नहीं सुनी जा रही है, तब उन्होंने यह कदम उठाया। उपासना ने कहा कि बाद में उसी प्रोड्यूसर ने शिल्पा के साथ दोबारा काम किया, जो दिखाता है कि वे भी समझ गए थे कि यह सब गुस्से में हुआ था। शिल्पा शिंदे ने 2015 में टीवी शो भाभीजी घर पर हैं में अंगूरी भाभी का किरदार निभाया था। सच स्वीकार करने की हिम्मत की तारीफ होनी चाहिए इंटरव्यू में उपासना ने कहा कि शिल्पा को सिर्फ इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि उन्होंने खुद पूरी दुनिया के सामने अपनी गलती स्वीकार की है। अगर वे चुप रहतीं, तो कोई कुछ नहीं कहता। उपासना के मुताबिक, गलती स्वीकार करने के लिए बहुत हिम्मत की जरूरत होती है। उन्होंने कहा कि शायद उनमें भी ऐसा सच बोलने का साहस नहीं होता। लोग उनकी गलती पर सवाल उठा सकते हैं, लेकिन उन्हें पूरी तरह से विलेन के रूप में पेश करना गलत है। भारती और हर्ष के शो में किया था खुलासा यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब शिल्पा शिंदे हाल ही में कॉमेडियन भारती सिंह और हर्ष लिम्बाचिया के यूट्यूब चैनल पर शामिल हुईं। वहां उन्होंने स्वीकार किया कि 10 साल पहले उन्होंने ‘भाभीजी घर पर हैं’ के प्रोड्यूसर संजय कोहली के खिलाफ सेक्शुअल हैरेसमेंट का झूठा केस दर्ज कराया था। शिल्पा ने कहा कि उस समय उनके पास कोई दूसरा रास्ता नहीं था। प्रोड्यूसर्स उन पर एक ऐसा कॉन्ट्रैक्ट साइन करने का दबाव बना रहे थे, जिसके बाद वे किसी दूसरे प्रोडक्शन हाउस के साथ काम नहीं कर पातीं। 2016 में मेकर्स पर लगाए थे संगीन आरोप शिल्पा शिंदे ने 2015 में टीवी शो भाभीजी घर पर हैं में अंगूरी भाभी का किरदार निभाया था। एक साल बाद शिल्पा ने मेकर्स और प्रोड्यूसर के खिलाफ कई संगीन आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज करवाई और शो छोड़ दिया। शिल्पा शिंदे ने हाल ही में पॉडकास्ट के दौरान कहा था, “यह बात कोई नहीं जानता। मैं अब सच बोलने से नहीं डरती। मैंने अपने प्रोड्यूसर के खिलाफ सेक्सुअल हैरेसमेंट का केस दर्ज कराया था क्योंकि मेरे पास कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा था। कांट्रैक्ट के विवाद को सुलझाने के लिए मैंने ऐसा किया और बाद में सेटलमेंट करके मैं उस स्थिति से बाहर आ गई।” शिल्पा ने आगे दावा किया कि वे खुद लॉ बैकग्राउंड से आती हैं और पुलिस का कहना था कि अगर एफआईआर दर्ज करानी है, तो गंभीर आरोप लिखने ही होंगे। ये खबर भी पढ़ें शिल्पा शिंदे पर सीएम फडणवीस से कानूनी कार्रवाई की मांग:प्रोड्यूसर पर सेक्सुअल हैरेसमेंट के झूठे आरोप लगाए; शिल्पा का पोस्ट- ‘जो उखाड़ना है उखाड़ लो’ टेलीविजन एक्ट्रेस शिल्पा शिंदे के एक हालिया खुलासे पर ऑल इंडिया सिने वर्कर्स एसोसिएशन (AICWA) ने कड़ी आपत्ति जताई है। शिल्पा ने कॉमेडियन भारती सिंह और हर्ष लिंबाचिया के पॉडकास्ट में माना था कि उन्होंने टीवी शो ‘भाभीजी घर पर हैं’ के प्रोड्यूसर पर सेक्सुअल हैरेसमेंट (यौन उत्पीड़न) के झूठे आरोप लगाए थे। पूरी खबर पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
ऋषिकेश में स्कूटी पर घूमती नजर आईं रवीना टंडन:परमार्थ निकेतन में गंगा आरती में हुईं शामिल, स्वामी चिदानंद सरस्वती का लिया आशीर्वाद

बॉलीवुड अभिनेत्री रवीना टंडन ऋषिकेश के जानकी सेतु पर स्कूटी पर घूमती नजर आईं। अपने दो दिवसीय दौरे के दौरान रवीना टंडन परमार्थ निकेतन पहुंची थीं। स्कूटी पर जानकी पुल पार करती नजर आईं रवीना रवीना टंडन साड़ी पहने और मुंह पर पीला गमछा ओढ़े स्कूटी पर जानकी पुल पार करती नजर आईं। इस दौरान वह ‘हर हर गंगे’ के जयकारे भी लगा रही थीं। उन्हें देखकर मौके पर मौजूद लोगों ने उनकी सादगी की सराहना की। सैकड़ों लोग उन्हें देखने के लिए जमा हो गए और रवीना ने कई प्रशंसकों के साथ सेल्फी भी ली। गंगा आरती में हुईं शामिल रवीना टंडन ने परमार्थ निकेतन में कथा सुनी, गंगा आरती में हिस्सा लिया और गौ पूजन भी किया। इन दो दिनों में रवीना पूरी तरह भक्ति में लीन दिखीं। उन्होंने परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती का आशीर्वाद भी लिया। प्रवास के बाद लौंटी मुंबई अपने प्रवास के बाद रवीना मुंबई लौट गई हैं। रवीना अक्सर परमार्थ निकेतन आती रहती हैं और उनका मानना है कि सभी को जीवन में एक बार ऋषिकेश का दौरा करना चाहिए।
Rakesh Roshan Denies Hrithiks ₹500 Cr Demand

4 मिनट पहले कॉपी लिंक बॉलीवुड के चर्चित प्रोजेक्ट्स में शामिल ‘कृष 4’ एक बार फिर सुर्खियों में है। पिछले कुछ महीनों से खबरें थीं कि फिल्म के बजट और निर्माण को लेकर ऋतिक रोशन और यशराज फिल्म्स (YRF) के बीच मतभेद चल रहे हैं। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि ऋतिक अपनी डायरेक्टोरियल डेब्यू फिल्म ‘कृष 4’ के लिए करीब 500 करोड़ रुपए का बजट चाहते हैं, जबकि आदित्य चोपड़ा इसे 350 करोड़ रुपए के भीतर रखना चाहते हैं। अब इन अटकलों पर फिल्ममेकर राकेश रोशन ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि ऋतिक द्वारा 500 करोड़ रुपए की मांग किए जाने की खबरें पूरी तरह गलत हैं। राकेश रोशन बोले- ऐसी बातें पूरी तरह बकवास मिड-डे को दिए इंटरव्यू में राकेश रोशन ने कहा कि यह कहना गलत है कि ऋतिक ने फिल्म के लिए 500 करोड़ रुपए का बजट मांगा है। उन्होंने इन खबरों को “नॉनसेंस” यानी बकवास बताया। राकेश के मुताबिक, बड़ी और दर्शकों की उम्मीदों पर खरी उतरने वाली फिल्म बनाने में समय लगता है। ‘कृष’ फ्रेंचाइजी की हर फिल्म को तैयार करने में भी पर्याप्त समय लिया गया था। फिल्म बंद नहीं हुई, सही समय का इंतजार राकेश रोशन ने स्पष्ट किया कि फिल्म किसी विवाद या मतभेद की वजह से अटकी नहीं है। उन्होंने कहा कि ‘कृष 4’ पर काम जारी है और फिल्म को लेकर कोई समस्या नहीं है। उनके मुताबिक, फिलहाल ऋतिक अपने दूसरे प्रोफेशनल कमिटमेंट्स और प्रोडक्शन हाउस के काम में व्यस्त हैं। इसलिए तारीखों को लेकर इंतजार करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि उनके, ऋतिक और आदित्य चोपड़ा के बीच किसी तरह का विवाद नहीं है। सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्ट्स में कही जा रही बातों में सच्चाई नहीं है। पहले क्या थीं रिपोर्ट्स? इस साल की शुरुआत में कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि ‘कृष 4’ का निर्माण बजट को लेकर फंस गया है। कहा गया था कि ऋतिक फिल्म को इंटरनेशनल सुपरहीरो फिल्मों के स्तर पर बनाना चाहते हैं, जिसके लिए लगभग 500 करोड़ रुपए की जरूरत होगी। वहीं YRF लागत नियंत्रित रखना चाहता है। इसी वजह से फिल्म की शूटिंग आगे नहीं बढ़ पा रही है। हालांकि अब राकेश रोशन के बयान के बाद साफ हो गया है कि फिल्म बंद नहीं हुई है और बजट को लेकर कोई बड़ा टकराव भी नहीं है। ऋतिक करेंगे निर्देशन ‘कृष 4’ इसलिए खास है क्योंकि यह ऋतिक रोशन के करियर की पहली निर्देशित फिल्म होगी। पिछले साल राकेश रोशन ने घोषणा की थी कि ‘कृष 4’ के जरिए ऋतिक निर्देशन की दुनिया में कदम रखेंगे। फिल्म में वे अभिनय के साथ निर्देशन की जिम्मेदारी भी संभालेंगे। फिलहाल फैंस को फिल्म की शूटिंग शुरू होने और आधिकारिक रिलीज डेट का इंतजार है। राकेश रोशन के ताजा बयान से साफ हो गया है कि ‘कृष 4’ अभी भी ट्रैक पर है और इससे जुड़ी कई अफवाहों में सच्चाई नहीं है। __________________________ ‘कृष 4’ से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें ऋतिक रोशन की ‘कृष 4’ अटकी:₹500 करोड़ के बजट पर आदित्य चोपड़ा से नहीं बनी सहमति, सुपरहीरो की फिल्म पर फिलहाल लगा ब्रेक बॉलीवुड के सबसे पॉपुलर सुपरहीरो फ्रेंचाइजी कृष की चौथी कड़ी ‘कृष 4’ को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। लंबे समय से फिल्म की तैयारी जोरों पर थी, लेकिन अब इसे फिलहाल रोक दिया गया है और काम पर ब्रेक लगा दिया गया है।पूरी खबर पढ़ें.. दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
Rakesh Roshan Denies Hrithiks ₹500 Cr Demand

37 मिनट पहले कॉपी लिंक बजट विवाद की अफवाहों के बीच राकेश रोशन ने ऋतिक रोशन का बचाव किया। बॉलीवुड के चर्चित प्रोजेक्ट्स में शामिल ‘कृष 4’ एक बार फिर सुर्खियों में है। पिछले कुछ महीनों से खबरें थीं कि फिल्म के बजट और निर्माण को लेकर ऋतिक रोशन और यशराज फिल्म्स (YRF) के बीच मतभेद चल रहे हैं। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि ऋतिक अपनी डायरेक्टोरियल डेब्यू फिल्म ‘कृष 4’ के लिए करीब 500 करोड़ रुपए का बजट चाहते हैं, जबकि आदित्य चोपड़ा इसे 350 करोड़ रुपए के भीतर रखना चाहते हैं। अब इन अटकलों पर फिल्ममेकर राकेश रोशन ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि ऋतिक द्वारा 500 करोड़ रुपए की मांग किए जाने की खबरें पूरी तरह गलत हैं। राकेश रोशन के मुताबिक, ऋतिक और आदित्य चोपड़ा के बीच किसी तरह का विवाद नहीं है। राकेश रोशन बोले- ऐसी बातें पूरी तरह बकवास मिड-डे को दिए इंटरव्यू में राकेश रोशन ने कहा कि यह कहना गलत है कि ऋतिक ने फिल्म के लिए 500 करोड़ रुपए का बजट मांगा है। उन्होंने इन खबरों को “नॉनसेंस” यानी बकवास बताया। राकेश के मुताबिक, बड़ी और दर्शकों की उम्मीदों पर खरी उतरने वाली फिल्म बनाने में समय लगता है। ‘कृष’ फ्रेंचाइजी की हर फिल्म को तैयार करने में भी पर्याप्त समय लिया गया था। फिल्म बंद नहीं हुई, सही समय का इंतजार राकेश रोशन ने स्पष्ट किया कि फिल्म किसी विवाद या मतभेद की वजह से अटकी नहीं है। उन्होंने कहा कि ‘कृष 4’ पर काम जारी है और फिल्म को लेकर कोई समस्या नहीं है। उनके मुताबिक, फिलहाल ऋतिक अपने दूसरे प्रोफेशनल कमिटमेंट्स और प्रोडक्शन हाउस के काम में व्यस्त हैं। इसलिए तारीखों को लेकर इंतजार करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि उनके, ऋतिक और आदित्य चोपड़ा के बीच किसी तरह का विवाद नहीं है। सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्ट्स में कही जा रही बातों में सच्चाई नहीं है। पहले क्या थीं रिपोर्ट्स? इस साल की शुरुआत में कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि ‘कृष 4’ का निर्माण बजट को लेकर फंस गया है। कहा गया था कि ऋतिक फिल्म को इंटरनेशनल सुपरहीरो फिल्मों के स्तर पर बनाना चाहते हैं, जिसके लिए लगभग 500 करोड़ रुपए की जरूरत होगी। वहीं YRF लागत नियंत्रित रखना चाहता है। इसी वजह से फिल्म की शूटिंग आगे नहीं बढ़ पा रही है। हालांकि अब राकेश रोशन के बयान के बाद साफ हो गया है कि फिल्म बंद नहीं हुई है और बजट को लेकर कोई बड़ा टकराव भी नहीं है। ‘कृष 4’ के निर्देशन की कमान पहली बार खुद ऋतिक रोशन संभालेंगे। ऋतिक करेंगे निर्देशन ‘कृष 4’ इसलिए खास है क्योंकि यह ऋतिक रोशन के करियर की पहली निर्देशित फिल्म होगी। पिछले साल राकेश रोशन ने घोषणा की थी कि ‘कृष 4’ के जरिए ऋतिक निर्देशन की दुनिया में कदम रखेंगे। फिल्म में वे अभिनय के साथ निर्देशन की जिम्मेदारी भी संभालेंगे। फिलहाल फैंस को फिल्म की शूटिंग शुरू होने और आधिकारिक रिलीज डेट का इंतजार है। राकेश रोशन के ताजा बयान से साफ हो गया है कि ‘कृष 4’ अभी भी ट्रैक पर है और इससे जुड़ी कई अफवाहों में सच्चाई नहीं है। __________________________ ‘कृष 4’ से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें ऋतिक रोशन की ‘कृष 4’ अटकी:₹500 करोड़ के बजट पर आदित्य चोपड़ा से नहीं बनी सहमति, सुपरहीरो की फिल्म पर फिलहाल लगा ब्रेक बॉलीवुड के सबसे पॉपुलर सुपरहीरो फ्रेंचाइजी कृष की चौथी कड़ी ‘कृष 4’ को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। लंबे समय से फिल्म की तैयारी जोरों पर थी, लेकिन अब इसे फिलहाल रोक दिया गया है और काम पर ब्रेक लगा दिया गया है।पूरी खबर पढ़ें.. दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
बिग टीएमसी स्प्लिट ब्रूइंग? सुखेंदु शेखर रॉय, 5 अन्य सांसदों ने दिल्ली में भाजपा नेता भूपेन्द्र यादव से मुलाकात की | भारत समाचार

आखरी अपडेट:08 जून, 2026, 14:18 IST पार्टी से इस्तीफा देने के कुछ घंटे बाद पूर्व टीएमसी सांसद सुखेंदु शेखर रॉय पांच टीएमसी सांसदों के साथ बीजेपी नेता भूपेन्द्र यादव के आवास पहुंचे। ममता को ताजा झटका: भाजपा नेताओं से मुलाकात करने वाले सांसदों में सुखेंदु, प्रसून बनर्जी तृणमूल कांग्रेस का संसदीय संकट तेजी से गहराता नजर आ रहा है. पार्टी और राज्यसभा से इस्तीफा देने के कुछ घंटे बाद पूर्व टीएमसी सांसद सुखेंदु शेखर रॉय पांच टीएमसी सांसदों के साथ बीजेपी नेता भूपेन्द्र यादव के आवास पहुंचे. बैठक में पश्चिम बंगाल के सीएम सुवेंदु अधिकारी भी मौजूद रहे. सूत्रों ने कहा कि बागी टीएमसी सांसद फिलहाल यादव से बातचीत कर रहे हैं। बैठक में भाग लेने वालों में टीएमसी के लोकसभा सांसद प्रसून बनर्जी भी शामिल हैं, जो पार्टी के संसदीय रैंकों में संभावित बड़े विभाजन का संकेत है। यह ऐसे समय में आया है जब ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी इंडिया ब्लॉक बैठक के लिए राष्ट्रीय राजधानी में हैं। उपस्थित लोगों में बर्धमान पूर्व सांसद शर्मिला सरकार, हावड़ा सांसद प्रसून बनर्जी, कूच बिहार सांसद जगदीश चंद्र बसुनिया, बांकुरा सांसद अरूप चक्रवर्ती, झारग्राम सांसद कालीपद सोरेन और बोलपुर सांसद असित मल शामिल थे। एक सूत्र ने यह भी दावा किया कि मथुरापुर के सांसद बापी हलदर ने बैठक में भाग लिया। सुखेंदु रे के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया देते हुए, बागी टीएमसी विधायक और विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने कहा, “यह सिर्फ सुखेंदु के बारे में नहीं है। मैंने सुखेंदु से बात नहीं की है। लेकिन मैंने टीवी पर सुखेंदु के बयान देखे और सुने हैं। उन्होंने जो कहा है, उसमें से ज्यादातर से मैं सहमत हूं। और सुखेंदु संसद के उच्च सदन के कामकाज के बारे में बिल्कुल सही हैं। संसद प्रश्नोत्तरी का स्थान नहीं है…” चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना लेखक के बारे में शुद्धान्त पात्र आठ साल के अनुभव के साथ एक अनुभवी पत्रकार, शुद्धंता पात्रा, सीएनएन न्यूज़ 18 में वरिष्ठ उप-संपादक के रूप में कार्यरत हैं। राष्ट्रीय राजनीति, भू-राजनीति, व्यावसायिक समाचारों में विशेषज्ञता के साथ, उन्होंने प्रभावित किया है…और पढ़ें जगह : दिल्ली, भारत, भारत न्यूज़ इंडिया बिग टीएमसी स्प्लिट ब्रूइंग? सुखेंदु शेखर रॉय, 5 अन्य सांसदों ने दिल्ली में भाजपा नेता भूपेन्द्र यादव से मुलाकात की अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)टीएमसी(टी)टीएमसी संकट(टी)ममता बनर्जी(टी)तृणमूल कांग्रेस संकट(टी)टीएमसी संसदीय संकट(टी)सुखेंदु शेखर रॉय(टी)टीएमसी सांसदों की बैठक(टी)बीजेपी नेता भूपेन्द्र यादव(टी)पश्चिम बंगाल की राजनीति(टी)ममता बनर्जी(टी)सुवेंदु अधिकारी
10 राज्यों के 50 गांवों में पर्यटन के साथ लर्निंग:विदेशी बच्चों की पढ़ाई का हिस्सा बने भारतीय गांव, स्थानीय उत्पाद बिकने से सुधरी अर्थव्यवस्था

टोटो, दुनिया की सबसे छोटी जनजाति है। पश्चिम बंगाल के टोटोपारा गांव में इस जनजाति के आखिरी बचे 1700 लोग रहते हैं। गांव अपनी पहचान के लिए संघर्ष कर रहा था, इकलौते स्कूल में एक अतिरिक्त कमरे की जरूरत थी। खानपान को बचाने के लिए महिलाएं कैफे खोलना चाहती थीं। टोटोपारा से 2500 किलोमीटर दूर बेंगलुरु की क्राइस्ट यूनिवर्सिटी के छात्रों का 14 सदस्यीय दल बीते साल इस गांव की विजिट पर आया। अपने 10 दिन के टूर में छात्रों ने महिलाओं के साथ मिलकर कैफे का प्राइसिंग मॉडल-मेन्यू बनाया। छात्रों की इस यात्रा से गांव को 6 लाख रु. की कमाई हुई। इससे स्कूल का कमरा तैयार हो गया, कैफे भी खुल गया। ‘लोकल नैरेटिव्स’ ने गांवों में पर्यटन को मनोरंजन तक सीमित नहीं रखा, बल्कि लर्निंग से जोड़ दिया। जापान-ऑस्ट्रेलिया के 10 संस्थान जुड़े ऑस्ट्रेलिया की यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू कासल, क्वींसलैंड यूनिवर्सिटी और जापान में टोक्यो व नागोया के 8 स्कूलों के बच्चे इसे सीखने के लिए भारत आ रहे हैं। भारत के 50 गांव मेजबानी के लिए तैयार वैष्णवी बताती हैं, लोकल नैरेटिव्स की शुरुआत 2021 में हुई। कम्युनिटी आधारित पर्यटन का उद्देश्य लोकल की तरह गांव में रहकर जनजीवन समझना-सीखना है। इसमें 50 गांवों को मेजबानी के लिए तैयार किया है। इससे गांवों को भी फायदा हो रहा है। उत्तराखंड के सुनकिया में छात्रों की यात्रा के बाद वहां देश की पहली कम्युनिटी टूरिज्म प्लेबुक तैयार हुई। इससे पर्यटन में मदद मिल रही है। एक अन्य यात्रा में गोवा के असनोरा में बुनकर महिलाओं को खरीदारों से जोड़ा, इससे उनकी कमाई बढ़ी। वैष्णवी सोमानी फाउंडर- लोकल नैरेटिव्स IIM बेंगलुरु ने इसे क्रेडिट प्रोग्राम के रूप में अप्रूव किया वैष्णवी कहती हैं, हमने पर्यटन को लर्निंग से जोड़ा। इसके लिए 5 दिन का करिकुलम बनाया। इसमें लोकल नैरेटिव्स को-फैकल्टी था। IIM बेंगलुरु ने इस कोर्स को अप्रूव किया। यानी गांवों में सामाजिक उद्यमिता सीखने के बाद छात्रों को 3 क्रेडिट मतलब मार्क्स भी मिल रहे हैं। – जैसा रोमेश साहू को बताया
10 राज्यों के 50 गांवों में पर्यटन के साथ लर्निंग:विदेशी बच्चों की पढ़ाई का हिस्सा बने भारतीय गांव, स्थानीय उत्पाद बिकने से सुधरी अर्थव्यवस्था

टोटो, दुनिया की सबसे छोटी जनजाति है। पश्चिम बंगाल के टोटोपारा गांव में इस जनजाति के आखिरी बचे 1700 लोग रहते हैं। गांव अपनी पहचान के लिए संघर्ष कर रहा था, इकलौते स्कूल में एक अतिरिक्त कमरे की जरूरत थी। खानपान को बचाने के लिए महिलाएं कैफे खोलना चाहती थीं। टोटोपारा से 2500 किलोमीटर दूर बेंगलुरु की क्राइस्ट यूनिवर्सिटी के छात्रों का 14 सदस्यीय दल बीते साल इस गांव की विजिट पर आया। अपने 10 दिन के टूर में छात्रों ने महिलाओं के साथ मिलकर कैफे का प्राइसिंग मॉडल-मेन्यू बनाया। छात्रों की इस यात्रा से गांव को 6 लाख रु. की कमाई हुई। इससे स्कूल का कमरा तैयार हो गया, कैफे भी खुल गया। ‘लोकल नैरेटिव्स’ ने गांवों में पर्यटन को मनोरंजन तक सीमित नहीं रखा, बल्कि लर्निंग से जोड़ दिया। जापान-ऑस्ट्रेलिया के 10 संस्थान जुड़े ऑस्ट्रेलिया की यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू कासल, क्वींसलैंड यूनिवर्सिटी और जापान में टोक्यो व नागोया के 8 स्कूलों के बच्चे इसे सीखने के लिए भारत आ रहे हैं। भारत के 50 गांव मेजबानी के लिए तैयार वैष्णवी बताती हैं, लोकल नैरेटिव्स की शुरुआत 2021 में हुई। कम्युनिटी आधारित पर्यटन का उद्देश्य लोकल की तरह गांव में रहकर जनजीवन समझना-सीखना है। इसमें 50 गांवों को मेजबानी के लिए तैयार किया है। इससे गांवों को भी फायदा हो रहा है। उत्तराखंड के सुनकिया में छात्रों की यात्रा के बाद वहां देश की पहली कम्युनिटी टूरिज्म प्लेबुक तैयार हुई। इससे पर्यटन में मदद मिल रही है। एक अन्य यात्रा में गोवा के असनोरा में बुनकर महिलाओं को खरीदारों से जोड़ा, इससे उनकी कमाई बढ़ी। वैष्णवी सोमानी फाउंडर- लोकल नैरेटिव्स IIM बेंगलुरु ने इसे क्रेडिट प्रोग्राम के रूप में अप्रूव किया वैष्णवी कहती हैं, हमने पर्यटन को लर्निंग से जोड़ा। इसके लिए 5 दिन का करिकुलम बनाया। इसमें लोकल नैरेटिव्स को-फैकल्टी था। IIM बेंगलुरु ने इस कोर्स को अप्रूव किया। यानी गांवों में सामाजिक उद्यमिता सीखने के बाद छात्रों को 3 क्रेडिट मतलब मार्क्स भी मिल रहे हैं। – जैसा रोमेश साहू को बताया
करिश्मा कपूर ने बताई वेब सीरीज 'ब्राउन' की चुनौतियां:कॉप रीटा की भूमिका मेरे करियर में सबसे चुनौतीपूर्ण और सीख देने वाली रही

करिश्मा कपूर अब ओटीटी पर अपने नए अवतार में नजर आ रही हैं। जी-5 की वेब सीरीज ‘ब्राउन’ में उन्होंने अपने किरदार, कोलकाता में मुश्किलों से भरी शूटिंग आदि पर खुलकर बात की… इस प्रोजेक्ट का हिस्सा कैसे बनीं? शुरुआत में मैंने इस प्रोजेक्ट के लिए साफ मना कर दिया था। कहानी और किरदार पसंद आए थे लेकिन 50-60 दिन कोलकाता में शूटिंग करने को लेकर मैं सहज नहीं थी। उस दौरान जी स्टूडियोज की टीम बार-बार मुझसे मिलती रही। मैं महबूब स्टूडियो में शूट कर रही थी, तब भी वे पहुंचे। आखिरकार मैंने 20 मिनट निकालकर निर्देशक अभिनय देव और टीम से बात की। रीटा ब्राउन के किरदार के बारे में सुनते ही मेरा नजरिया बदल गया और मैंने तुरंत हां कह दिया। रीटा ब्राउन जैसा किरदार निभाने के लिए कैसी तैयारी करनी पड़ी? रीटा मुझसे बिल्कुल अलग है। वह अल्कोहलिक है, चेन स्मोकर है और दवाइयों पर निर्भर रहती है। हमारा मकसद एक ऐसी महिला को दिखाना था जो अंदर से पूरी तरह टूट चुकी है। हमने मेकअप तक का इस्तेमाल नहीं किया। लगातार सिगरेट पीने की वजह से उसके होंठ तक खराब दिखाए गए हैं। यह मेरे करियर की सबसे चुनौतीपूर्ण और सीख देने वाली भूमिका रही। यह वर्दीधारी रोल बाकी पुलिस किरदारों से कितना अलग है? यह कोई टिपिकल फिट और एक्शन से भरपूर पुलिस अधिकारी नहीं है। शुरुआत में रीटा इतनी अनफिट है कि ठीक से दौड़ भी नहीं पाती। हमने दिखाया है कि वह मानसिक और शारीरिक रूप से कितनी टूटी हुई है। जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है और मर्डर मिस्ट्री खुलती है, उसका व्यक्तित्व भी बदलता है। उसका खुद को फिर से संभालना और मजबूत बनना ही इस कहानी की आत्मा है। कोलकाता में शूटिंग का अनुभव कैसा रहा? सच कहूं तो हम कोलकाता की सर्दियां, क्रिसमस का माहौल और शहर की खूबसूरती को कैमरे में कैद करना चाहते थे लेकिन कोविड की वजह से पूरा शेड्यूल बदल गया और जब हम वहां पहुंचे, तब भीषण गर्मी पड़ रही थी। तापमान 48 से 50 डिग्री सेल्सियस के बीच था। उस मौसम में रियल लोकेशंस पर शूटिंग करना आसान नहीं था। हमें लंबे-लंबे चेज सीक्वेंस, इन्वेस्टिगेशन वाले सीन और घंटों बाहर रहकर शूट करना पड़ता था। क्या यह कोलकाता को करीब से देखने का आपका पहला अनुभव था? मैं पहले भी कई बार इवेंट्स और प्रमोशन के लिए कोलकाता गई हूं, लेकिन इस प्रोजेक्ट के दौरान जिस तरह हमने शहर को जिया और अलग-अलग लोकेशंस पर शूट किया, वह अनुभव बिल्कुल नया और यादगार था। आपकी प्राथमिकताएं आज के दौर में कितनी बदली हैं? मुझे लगता है कि समय के साथ हर कलाकार की सोच और उसकी प्राथमिकताएं भी बदलती हैं। 90 के दशक में हमारा सिनेमा अलग था, वहां स्टारडम, गाने, बड़े सेट और कमर्शियल अपील का अपना महत्व था। मैंने उस दौर को भी पूरी तरह जिया और दर्शकों से बहुत प्यार पाया लेकिन आज का समय कंटेंट और किरदारों का है, जहां कलाकारों को खुद को नए तरीके से एक्सप्लोर करने का मौका मिलता है। आज मैं खुद को भाग्यशाली मानती हूं कि मुझे ऐसे रोल मिल रहे हैं।
20 सांसद, गुप्त बैठकें, बंद फोन: बंगाल से परे ममता बनर्जी के सामने संकट | भारत समाचार

आखरी अपडेट:08 जून, 2026, 13:27 IST रिपोर्टों में कहा गया है कि लगभग 20 सांसद वर्तमान में दिल्ली में एक अज्ञात स्थान पर उन विकल्पों पर चर्चा करने के लिए एकत्र हुए हैं जिनमें एक अलग संसदीय ब्लॉक बनाना या टीएमसी से इस्तीफा देना शामिल है। टीएमसी में कोई भी बड़ा विभाजन न केवल राष्ट्रीय स्तर पर ममता बनर्जी के प्रभाव को कमजोर करेगा, बल्कि विपक्षी गठबंधन के भीतर संतुलन को भी बदल सकता है। (एआई-जनरेटेड इमेज) पश्चिम बंगाल विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस में नाटकीय विद्रोह के कुछ ही दिनों बाद, संकेत उभर रहे हैं कि राजनीतिक संकट अब संसद तक जा सकता है। द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, तृणमूल कांग्रेस के लगभग 20 सांसद वर्तमान में दिल्ली में एक अज्ञात स्थान पर एकत्र हुए हैं और उन विकल्पों पर चर्चा कर रहे हैं जिनमें एक अलग संसदीय गुट बनाना या पार्टी से इस्तीफा देना भी शामिल है। यह घटनाक्रम ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी के भीतर बढ़ती चिंताओं के बीच आया है कि बंगाल में पार्टी की विधायी शाखा को खंडित करने वाला विद्रोह जल्द ही संसदीय स्तर तक फैल सकता है। यह घटनाक्रम चिंताजनक क्षणों की एक श्रृंखला को जोड़ता है, जिनसे टीएमसी जूझ रही है, जिसमें एनडीटीवी द्वारा उद्धृत सूत्रों द्वारा किए गए दावे भी शामिल हैं कि जब पार्टी नेताओं ने उनसे संपर्क करने का प्रयास किया तो कई तृणमूल सांसदों से संपर्क नहीं हो सका, कुछ ने कथित तौर पर अपने फोन बंद कर दिए और नेतृत्व के साथ संचार से परहेज किया। यह भी पढ़ें | कहानी में ट्विस्ट? टीएमसी संकट गहराने के बाद ममता बनर्जी विद्रोहियों को वापस लाने की कैसे योजना बना रही हैं? एनडीटीवी ने बताया कि मुंबई से कोलकाता जा रहे तृणमूल कांग्रेस के एक वरिष्ठ सांसद रविवार शाम को दिल्ली में अनिर्धारित रूप से रुके। सूत्रों ने चैनल को बताया कि समझा जाता है कि संक्षिप्त पड़ाव के दौरान सांसद ने लोगों की नजरों से दूर कई कम-प्रोफ़ाइल बैठकें कीं। सूत्रों के मुताबिक, सांसद कोलकाता से सटे जिलों के एक निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। उत्तर 24 परगना के एक तृणमूल सांसद, जिन्हें कथित तौर पर विधानसभा टिकट के लिए नजरअंदाज कर दिया गया था, वह भी एक दिन से अधिक समय से संपर्क से बाहर हैं, पार्टी के अंदरूनी सूत्र इस चुप्पी को बढ़ते असंतोष का संकेत मान रहे हैं। सूत्रों ने अभिनेता से सांसद बने एक व्यक्ति की ओर भी इशारा किया, जो रविवार को दिल्ली पहुंचे और माना जाता है कि वे धीरे-धीरे खुद को पार्टी से दूर कर रहे हैं। उत्तर बंगाल के कम से कम दो सांसद भी नेतृत्व की चिंताओं को बढ़ा रहे हैं, जिनके बारे में कहा जाता है कि वे वर्तमान स्थिति से नाखुश हैं। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों ने स्पष्टीकरण के रूप में यात्रा और कनेक्टिंग उड़ानों का हवाला दिया, लेकिन इस प्रकरण ने रैंकों के भीतर बढ़ते असंतोष की अटकलों को हवा दे दी। तृणमूल संकट में एक नया मोर्चा पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद उथल-पुथल शुरू हो गई, जब तृणमूल विधायकों का एक बड़ा वर्ग विधानसभा में पार्टी के आधिकारिक नेतृत्व से अलग हो गया, जिससे ममता बनर्जी की सत्ता के लिए एक अभूतपूर्व चुनौती पैदा हो गई। विद्रोह जल्द ही एक नियमित आंतरिक असहमति से बंगाल में सत्ता में आने के बाद से पार्टी के सामने सबसे बड़े संकट में बदल गया। यह भी पढ़ें | ममता का चलो दिल्ली आंदोलन: भारत के लिए आउटरीच या टीएमसी का अस्तित्व संघर्ष? अब, ध्यान संसद पर केंद्रित हो गया है। द इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, विद्रोही सांसदों का मानना है कि उनके पास स्वतंत्र रास्ता तय करने के लिए आवश्यक संख्या है, हालांकि प्रतिद्वंद्वी दावे इस बात पर कायम हैं कि कितने सांसद ममता बनर्जी के प्रति वफादार रहते हैं। जबकि असंतुष्टों ने कथित तौर पर लगभग 20 सांसदों के समर्थन का दावा किया है, तृणमूल नेतृत्व के करीबी नेताओं का कहना है कि विद्रोहियों ने अभी तक दल-बदल विरोधी प्रावधानों के तहत औपचारिक विभाजन के लिए आवश्यक ताकत हासिल नहीं की है। एनडीटीवी ने पहले बताया था कि कम से कम 20 तृणमूल सांसद राजनीतिक मध्यस्थों के संपर्क में थे और पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष के बीच विकल्प तलाश रहे थे। कुछ बागी नेताओं ने यह भी दावा किया कि अभिषेक बनर्जी को पार्टी के संसदीय नेता के पद से हटाने के प्रयास चल रहे हैं। ममता का दिल्ली मिशन यह संकट राजनीतिक रूप से संवेदनशील क्षण में सामने आया है। ममता बनर्जी आधिकारिक तौर पर विपक्षी चर्चा में भाग लेने के लिए इंडिया ब्लॉक की बैठक से पहले दिल्ली पहुंचीं। हालाँकि, कई रिपोर्टों से पता चलता है कि उनकी अपनी संसदीय पार्टी के भीतर विभाजन को रोकना भी उतनी ही जरूरी प्राथमिकता बन गई है। अभिषेक बनर्जी सहित वरिष्ठ नेता इस आशंका के बीच सांसदों के साथ विचार-विमर्श कर रहे हैं कि असंतुष्ट लोग औपचारिक रूप से संसद में अलग मान्यता की मांग कर सकते हैं। दांव महत्वपूर्ण हैं. तृणमूल वर्तमान में संसद में सबसे बड़े विपक्षी दलों में से एक और इंडिया ब्लॉक का एक प्रमुख घटक बना हुआ है। कोई भी बड़ा विभाजन न केवल राष्ट्रीय स्तर पर ममता बनर्जी के प्रभाव को कमजोर करेगा बल्कि ऐसे समय में विपक्षी गठबंधन के भीतर संतुलन को भी बदल सकता है जब पार्टियां मानसून सत्र और भविष्य की चुनावी लड़ाई से पहले फिर से संगठित होने का प्रयास कर रही हैं। विद्रोह को दबाने की कोशिश में, बनर्जी ने संगठनात्मक फेरबदल किया। जबकि अभिषेक बनर्जी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव बने रहेंगे, दो संयुक्त राष्ट्रीय सचिव, राज्यसभा सांसद डेरेक ओ’ब्रायन और डोला सेन को नियुक्त किया गया है। यह भी पढ़ें | इंडिया ब्लॉक को किसने डुबाया? जदयू के संजय झा ने ममता, केजरीवाल द्वारा ‘तोड़फोड़’ की ओर इशारा किया अफवाहें, इस्तीफे और अनिश्चितता अनिश्चितता सोमवार को और अधिक गहरा गई जब वरिष्ठ तृणमूल नेता और राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने संसद और पार्टी दोनों से अपने इस्तीफे की घोषणा की, जो संकट शुरू होने के बाद से सबसे अधिक प्रोफ़ाइल निकासियों में से एक बन गया। उनके जाने से अटकलें तेज हो गई हैं कि अगर नेतृत्व विद्रोह









