Monday, 27 Jul 2026 | 09:38 AM

Trending :

EXCLUSIVE

आज दुनिया के पहले ट्रिलिनियर बन सकते हैं मस्क:रॉकेट कंपनी स्पेसएक्स अमेरिकी बाजार में लिस्ट होगी; ये दुनिया का सबसे बड़ा आईपीओ

आज दुनिया के पहले ट्रिलिनियर बन सकते हैं मस्क:रॉकेट कंपनी स्पेसएक्स अमेरिकी बाजार में लिस्ट होगी; ये दुनिया का सबसे बड़ा आईपीओ

दुनिया के सबसे अमीर कारोबारी इलॉन मस्क की रॉकेट कंपनी स्पेसएक्स आज, 12 जून को अमेरिकी शेयर बाजार नैस्डैक पर लिस्ट होगी। गुरुवार को कंपनी ने अपने आईपीओ का फाइनल प्राइस 135 डॉलर तय कर दिया है। 1.77 ट्रिलियन डॉलर यानी करीब 168 लाख करोड़ रुपए के वैल्यूएशन पर हो रही इस लिस्टिंग के बाद इलॉन मस्क दुनिया के पहले ट्रिलिनियर बन सकते हैं। सवाल-जवाब में समझते हैं आज की लिस्टिंग की पूरी एबीसीडी सवाल 1: आज होने जा रही स्पेसएक्स की लिस्टिंग इतनी ऐतिहासिक क्यों है? जवाब: स्पेसएक्स इस इश्यू के जरिए रिकॉर्ड 75 बिलियन डॉलर यानी करीब 7.15 लाख करोड़ रुपए जुटा रही है। यह अकेला आईपीओ साल 2024 और 2025 में आए सभी अमेरिकी आईपीओ की कुल जुटाई रकम से भी ज्यादा है। यह दुनिया का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ है। सवाल 2: क्या इस लिस्टिंग से इलॉन मस्क दुनिया के पहले ‘ट्रिलिनेयर’ बन जाएंगे? जवाब: हां, इसकी पूरी संभावना है। फोर्ब्स के अनुसार इलॉन मस्क की नेटवर्थ 982 बिलियन डॉलर यानी करीब 94 लाख करोड़ रुपए है। उनके पास स्पेसएक्स में करीब 866 बिलियन डॉलर के शेयर हैं। आज जैसे ही ट्रेडिंग शुरू होगी तो टेस्ला और अपनी बाकी कंपनियों की वेल्थ मिलाकर मस्क की कुल नेटवर्थ 1 ट्रिलियन डॉलर यानी करीब 95 लाख करोड़ रुपए के पार पहुंच जाएगी। सवाल 3: एक ट्रिलियन डॉलर की रकम कितनी बड़ी होती है, इसे आम भाषा में कैसे समझें? जवाब: 1 ट्रिलियन डॉलर एक ऐसी रकम है जो दुनिया के अधिकांश देशों की जीडीपी से भी बड़ी है। दुनिया के केवल 20 देश ऐसे हैं जिनकी जीडीपी इससे ज्यादा है। मस्क अकेले ताइवान, स्विट्जरलैंड, स्वीडन और सिंगापुर जैसे अमीर देशों की कुल अर्थव्यवस्था से ज्यादा अमीर हो जाएंगे। अगर कोई व्यक्ति हर घंटे 10 लाख डॉलर यानी करीब 9.54 करोड़ रुपए भी खर्च करे, तो उसे 1 ट्रिलियन डॉलर खत्म करने में 114 साल से ज्यादा का समय लगेगा। जेपी मॉर्गन चेस के सीईओ जेमी डिमन ने तो मस्क को ‘हमारे समय का एडिसन और आइंस्टीन’ तक कह दिया है। सवाल 4: मार्केट एक्सपर्ट्स जिस ‘इलॉन प्रीमियम’ की बात कर रहे हैं, वो क्या है? जवाब: रेनेसां कैपिटल के सीनियर स्ट्रेटेजिस्ट मैट कैनेडी का कहना है कि ट्रेडिशनल फाइनेंस के नियम स्पेसएक्स पर लागू नहीं होते। जब कोई कंपनी पारंपरिक वित्तीय पैमानों जैसे मुनाफा या रेवेन्यू से परे जाकर सिर्फ अपने मालिक के विजन और साख के दम पर इतना बड़ा वैल्यूएशन पाती है, तो उसे बाजार की भाषा में ‘इलॉन प्रीमियम’ या ‘मस्कोनॉमी’ कहा जाता है। निवेशक उनके पिछले ट्रैक रिकॉर्ड को देखकर उनके इस नए विजन पर आंख मूंदकर दांव लगा रहे हैं। सवाल 5: कंपनी में आम निवेशकों की भागीदारी और मस्क का कंट्रोल कैसा रहेगा? जवाब: कंपनी ने आम निवेशकों के लिए रिकॉर्ड 30% का कोटा रिजर्व रखा है, जो करीब 22.5 बिलियन डॉलर बैठता है। जहां तक कंट्रोल की बात है, मस्क इस आईपीओ में अपना एक भी शेयर नहीं बेच रहे हैं और लिस्टिंग के बाद भी कंपनी के मेजॉरिटी वोटिंग राइट्स उन्हीं के पास रहेंगे। सवाल 6: बाजार के तकनीकी एक्सपर्ट्स को आज लिस्टिंग के समय किस बात का डर है? जवाब: इस ऐतिहासिक आईपीओ के कारण आज खुद मार्केट के सिस्टम का भी बड़ा टेस्ट होना है। जब 2012 में फेसबुक का बड़ा आईपीओ नैस्डैक पर आया था, तब तकनीकी गड़बड़ियों के कारण उसकी ओपनिंग में देरी हुई थी। चूंकि स्पेसएक्स का आईपीओ फेसबुक से कहीं ज्यादा बड़ा है, इसलिए वॉल स्ट्रीट की नजरें नैस्डैक के तकनीकी सिस्टम पर टिकी हैं कि वह इस लोड को कैसे संभालता है। सवाल 7: क्या स्पेसएक्स के मजबूत फाइनेंशियल्स इसके ऊंचे वैल्यूएशन को सही ठहराते हैं? जवाब: नहीं, बिल्कुल नहीं। यही सबसे बड़ा विवाद है। स्पेसएक्स ने पिछले साल लगभग 19 बिलियन डॉलर का रेवेन्यू तो कमाया, लेकिन कंपनी ने अब तक कोई मुनाफा नहीं कमाया है। रेटिंग एजेंसी ‘मॉर्निंगस्टार’ के विश्लेषकों ने साफ लिखा है कि कंपनी ‘ओवरवैल्यूड’ है और इसका सही वैल्यूएशन 780 बिलियन डॉलर होना चाहिए, जबकि इसे 1.77 ट्रिलियन डॉलर पर लिस्ट किया जा रहा है। सवाल 8: आज शाम भारतीय समय अनुसार लिस्टिंग कितने बजे होगी? जवाब: अमेरिकी बाजार नैस्डैक भारतीय समयानुसार आज शाम 7:00 बजे (प्री-मार्केट) खुलेगा। अत्यधिक वॉल्यूम और भारी डिमांड के कारण शुरुआती कुछ घंटों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। रात 11:30 बजे के बाद इस पर नॉर्मल ट्रेडिंग और प्राइज मूवमेंट पूरी तरह स्पष्ट दिखने लगेगा।

आज दुनिया के पहले ट्रिलिनियर बनेंगे मस्क:रॉकेट कंपनी स्पेसएक्स अमेरिकी बाजार में लिस्ट होगी; ये दुनिया का सबसे बड़ा आईपीओ

आज दुनिया के पहले ट्रिलिनियर बनेंगे मस्क:रॉकेट कंपनी स्पेसएक्स अमेरिकी बाजार में लिस्ट होगी; ये दुनिया का सबसे बड़ा आईपीओ

दुनिया के सबसे अमीर कारोबारी इलॉन मस्क की रॉकेट कंपनी स्पेसएक्स आज, 12 जून को अमेरिकी शेयर बाजार नैस्डैक पर लिस्ट होगी। गुरुवार को कंपनी ने अपने आईपीओ का फाइनल प्राइस 135 डॉलर तय कर दिया है। 1.77 ट्रिलियन डॉलर यानी करीब 168 लाख करोड़ रुपए के वैल्यूएशन पर हो रही इस लिस्टिंग के बाद इलॉन मस्क दुनिया के पहले ट्रिलिनियर बन सकते हैं। सवाल-जवाब में समझते हैं आज की लिस्टिंग की पूरी एबीसीडी सवाल 1: आज होने जा रही स्पेसएक्स की लिस्टिंग इतनी ऐतिहासिक क्यों है? जवाब: स्पेसएक्स इस इश्यू के जरिए रिकॉर्ड 75 बिलियन डॉलर यानी करीब 7.15 लाख करोड़ रुपए जुटा रही है। यह अकेला आईपीओ साल 2024 और 2025 में आए सभी अमेरिकी आईपीओ की कुल जुटाई रकम से भी ज्यादा है। यह दुनिया का सबसे बड़ा आईपीओ है। सवाल 2: क्या इस लिस्टिंग से इलॉन मस्क दुनिया के पहले ‘ट्रिलिनेयर’ बन जाएंगे? जवाब: हां, इसकी पूरी संभावना है। फोर्ब्स के अनुसार इलॉन मस्क की नेटवर्थ 982 बिलियन डॉलर यानी करीब ₹94 लाख करोड़ हैं। उनके पास स्पेसएक्स में करीब 866 बिलियन डॉलर के शेयर हैं। आज जैसे ही ट्रेडिंग शुरू होगी तो बाकी कंपनियों की वेल्थ मिलाकर मस्क की कुल नेटवर्थ 1 ट्रिलियन डॉलर यानी करीब ₹95 लाख करोड़ के पार पहुंच जाएगी। सवाल 3: एक ट्रिलियन डॉलर की रकम कितनी बड़ी होती है, इसे आम भाषा में कैसे समझें? जवाब: 1 ट्रिलियन डॉलर एक ऐसी रकम है जो दुनिया के अधिकांश देशों की जीडीपी से भी बड़ी है। दुनिया के केवल 20 देश ऐसे हैं जिनकी जीडीपी इससे ज्यादा है। मस्क अकेले ताइवान, स्विट्जरलैंड, स्वीडन और सिंगापुर जैसे अमीर देशों की कुल अर्थव्यवस्था से ज्यादा अमीर हो जाएंगे। अगर कोई व्यक्ति हर घंटे 10 लाख डॉलर यानी करीब 9.54 करोड़ रुपए भी खर्च करे, तो उसे 1 ट्रिलियन डॉलर खत्म करने में 114 साल से ज्यादा का समय लगेगा। जेपी मॉर्गन चेस के सीईओ जेमी डिमन ने तो मस्क को ‘हमारे समय का एडिसन और आइंस्टीन’ तक कह दिया है। सवाल 4: मार्केट एक्सपर्ट्स जिस ‘इलॉन प्रीमियम’ की बात कर रहे हैं, वो क्या है? जवाब: रेनेसां कैपिटल के सीनियर स्ट्रेटेजिस्ट मैट कैनेडी का कहना है कि ट्रेडिशनल फाइनेंस के नियम स्पेसएक्स पर लागू नहीं होते। जब कोई कंपनी पारंपरिक वित्तीय पैमानों जैसे मुनाफा या रेवेन्यू से परे जाकर सिर्फ अपने मालिक के विजन और साख के दम पर इतना बड़ा वैल्यूएशन पाती है, तो उसे बाजार की भाषा में ‘इलॉन प्रीमियम’ या ‘मस्कोनॉमी’ कहा जाता है। निवेशक उनके पिछले ट्रैक रिकॉर्ड को देखकर उनके इस नए विजन पर आंख मूंदकर दांव लगा रहे हैं। सवाल 5: कंपनी में आम निवेशकों की भागीदारी और मस्क का कंट्रोल कैसा रहेगा? जवाब: कंपनी ने आम निवेशकों के लिए रिकॉर्ड 30% का कोटा था, जो करीब 22.5 बिलियन डॉलर बैठता है। जहां तक कंट्रोल की बात है, मस्क इस आईपीओ में अपना एक भी शेयर नहीं बेच रहे हैं और लिस्टिंग के बाद भी मेजॉरिटी वोटिंग राइट्स उन्हीं के पास रहेंगे। सवाल 6: बाजार के तकनीकी एक्सपर्ट्स को आज लिस्टिंग के समय किस बात का डर है? जवाब: आज मार्केट के सिस्टम का भी बड़ा टेस्ट होना है। जब 2012 में फेसबुक का बड़ा आईपीओ नैस्डैक पर आया था, तब तकनीकी गड़बड़ियों के कारण उसकी ओपनिंग में देरी हुई थी। चूंकि स्पेसएक्स का आईपीओ फेसबुक से कहीं ज्यादा बड़ा है, इसलिए वॉल स्ट्रीट की नजरें नैस्डैक के तकनीकी सिस्टम पर टिकी हैं कि वह इस लोड को कैसे संभालता है। सवाल 7: क्या स्पेसएक्स के मजबूत फाइनेंशियल्स इसके ऊंचे वैल्यूएशन को सही ठहराते हैं? जवाब: नहीं, बिल्कुल नहीं। यही सबसे बड़ा विवाद है। स्पेसएक्स ने पिछले साल लगभग 19 बिलियन डॉलर का रेवेन्यू तो कमाया, लेकिन कंपनी ने अब तक कोई मुनाफा नहीं कमाया है। रेटिंग एजेंसी ‘मॉर्निंगस्टार’ के विश्लेषकों ने साफ लिखा है कि कंपनी ‘ओवरवैल्यूड’ है और इसका सही वैल्यूएशन 780 बिलियन डॉलर होना चाहिए। सवाल 8: आज शाम भारतीय समय अनुसार लिस्टिंग कितने बजे होगी? जवाब: अमेरिकी बाजार नैस्डैक भारतीय समयानुसार आज शाम 7:00 बजे (प्री-मार्केट) खुलेगा। भारी डिमांड के कारण शुरुआती कुछ घंटों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। रात 11:30 बजे के बाद इस पर नॉर्मल ट्रेडिंग और प्राइज मूवमेंट पूरी तरह स्पष्ट दिखने लगेगा। स्पेसएक्स: रियूजेबल रॉकेट के जरिए स्पेस सेक्टर बदला साल 2002 में इलॉन मस्क ने स्पेस-एक्स कंपनी बनाई थी। स्पेस-एक्स ने तब इतिहास रचा था जब 31 मई 2020 को कंपनी ने दुनिया का पहला प्राइवेट ह्यूमन मिशन लॉन्च किया था। इस मिशन के तहत दो एस्ट्रोनॉट -रॉबर्ट बेहेनकेन और डगलस हर्ले स्पेस गए थे। करीब 63 दिन अंतरिक्ष में रहने के बाद ये दोनों वापस धरती पर लौटे थे। मस्क की कंपनी ने रियूजेबल रॉकेट टेक्नोलॉजी डेवलप कर सैटेलाइट लॉन्चिंग और दूसरे स्पेस मिशन्स को सस्ता बनाया है।

World Champion Argentina Back to No.1; France Slips in FIFA Rankings

World Champion Argentina Back to No.1; France Slips in FIFA Rankings

Hindi News Sports World Champion Argentina Back To No.1; France Slips In FIFA Rankings 1 मिनट पहले कॉपी लिंक फीफा वर्ल्ड कप 2026 की शुरुआत से ठीक कुछ घंटे पहले फुटबॉल की ग्लोबल गवर्निंग बॉडी FIFA ने मेंस वर्ल्ड रैंकिंग जारी कर दी है। इस नई रैंकिंग में मौजूदा वर्ल्ड चैंपियन अर्जेंटीना दो पायदान की छलांग लगाकर एक बार फिर दुनिया की नंबर-1 टीम बन गया है। अब लियोनेल मेसी की कप्तानी वाली अर्जेंटीना की टीम दुनिया की टॉप-रैंक टीम के रूप में अपने खिताब को बचाने के लिए मैदान पर उतरेगी। वर्ल्ड कप से पहले खेले गए इंटरनेशनल फ्रेंडली (वॉर्म-अप) मैचों के प्रदर्शन के आधार पर इस रैंकिंग को रियल टाइम में अपडेट किया गया है। अर्जेंटीना ने अपने दोनों वॉर्म-अप मैचों में आइसलैंड और होंडुरास को हराकर रैंकिंग में पहला स्थान हासिल किया है। फ्रांस को दो पायदान का नुकसान, स्पेन नंबर-2 पर बरकरार इस नई रैंकिंग में पूर्व नंबर-1 टीम फ्रांस को नुकसान उठाना पड़ा है। फ्रांस की टीम दो पायदान नीचे खिसककर अब तीसरे नंबर पर आ गई है। वॉर्म-अप मैचों में फ्रांस को आइवरी कोस्ट के हाथों हार का सामना करना पड़ा था, हालांकि इसके बाद टीम ने नॉर्दर्न आयरलैंड को हरा दिया था, लेकिन तब तक वे पहले स्थान से नीचे आ चुके थे। वहीं स्पेन की टीम ने अपनी दूसरी रैंकिंग बरकरार रखी है। स्पेन का पहला वॉर्म-अप मैच इराक के साथ ड्रॉ रहा था, जिसके बाद उसने पेरू को हराया। मोरक्को सातवें स्थान पर पहुंचा टॉप-10 टीमों की बात करें तो मोरक्को एक पायदान ऊपर चढ़कर अब सातवें नंबर पर पहुंच गया है। अगस्त 1993 में फीफा रैंकिंग की शुरुआत होने के बाद से यह मोरक्को के इतिहास की अब तक की सबसे सर्वश्रेष्ठ और हाईएस्ट रैंकिंग है। इस छलांग के साथ मोरक्को ने दिग्गज टीम नीदरलैंड को पीछे छोड़ दिया है, जो अब आठवें नंबर पर आ गई है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

महिला आयोग का प्रणित मोरे-हिमांशु जांगड़ा को नोटिस:सेजल पवार के कमेंट्स पर AIMSA ने कार्रवाई की मांग की; तीनों पर FIR भी दर्ज

महिला आयोग का प्रणित मोरे-हिमांशु जांगड़ा को नोटिस:सेजल पवार के कमेंट्स पर AIMSA ने कार्रवाई की मांग की; तीनों पर FIR भी दर्ज

राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने गुरुग्राम में हुए कॉमेडियन प्रणित मोरे के स्टैंड-अप कॉमेडी शो से जुड़े विवाद का स्वतः संज्ञान लिया है। 370 की बिरयानी वाली वीडियो के मामले में आयोग ने प्रणित मोरे और हिमांशु जांगड़ा को सुनवाई नोटिस जारी किया है। मामले की सुनवाई 22 जून को शाम 4 बजे आयोग के सामने तय की गई है। न्यूज एजेंसी पीटीआई के अनुसार, NCW ने कहा कि वायरल वीडियो का कंटेंट और उसे मनोरंजन के रूप में प्रस्तुत किए जाने पर गंभीर चिंता है। मामले को गंभीरता से लेते हुए NCW की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने हरियाणा के पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखा है। उन्होंने मामले में जल्द, सख्त और तय समय के भीतर कार्रवाई करने की मांग की है। साथ ही आयोग ने पुलिस से सात दिनों के अंदर की गई कार्रवाई की पूरी रिपोर्ट भी मांगी है। आयोग ने एफआईआर दर्ज होने की स्थिति, भारतीय न्याय संहिता (BNS) और अन्य लागू कानूनों के तहत की गई कार्रवाई, वायरल वीडियो की जांच और वेरिफिकेशन, तथा आयोजकों, कलाकारों और वेन्यू मैनेजमेंट की भूमिका से संबंधित जानकारी मांगी है। वहीं, ऑल इंडिया मेडिकल स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AIMSA) ने प्रणित मोरे के दूसरे स्टैंड-अप शो के दौरान MBBS स्टूडेंट सेजल पवार द्वारा कैडवर और बॉडी डोनर्स पर की गई कमेंट्स की निंदा की है। AIMSA ने कहा कि शवों और बॉडी डोनर्स को एंटरटेनमेंट या कॉमेडी का टॉपिक बनाना असंवेदनशील और अपमानजनक है। ऑर्गनाइजेशन के मुताबिक, हर बॉडी डोनर मेडिकल एजुकेशन में योगदान देकर भविष्य के डॉक्टरों को ट्रेनिंग देने और जानें बचाने में अहम भूमिका निभाता है। एसोसिएशन ने कहा कि शवों का मजाक उड़ाना या उन्हें हल्के में लेना मंजूर नहीं है और इससे मेडिकल शिक्षा की गरिमा कम होती है। AIMSA ने संबंधित लोगों से तुरंत माफी मांगने और सख्त कार्रवाई की मांग की। एसोसिएशन ने चेतावनी दी कि अगर सही कार्रवाई नहीं की गई तो वह कानूनी कार्रवाई कर सकता है। महाराष्ट्र साइबर ने FIR दर्ज की महाराष्ट्र साइबर ने कॉमेडियन प्रणित मोरे, हिमांशु जांगड़ा, डॉ. सेजल पवार और इसमें शामिल अन्य लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। FIR इंडियन पीनल कोड (IPC) 2023 की अलग-अलग धाराओं और IT एक्ट 2000 की धारा 67 के तहत दर्ज की गई है। आरोप है कि शो और उससे जुड़े ऑनलाइन वीडियो में महिलाओं, सहमति और मृत लोगों के बारे में आपत्तिजनक कमेंट्स थे।

महिला आयोग का प्रणित मोरे-हिमांशु जांगड़ा को नोटिस:सेजल पवार के कमेंट्स पर AIMSA ने कार्रवाई की मांग की; तीनों पर FIR भी दर्ज

महिला आयोग का प्रणित मोरे-हिमांशु जांगड़ा को नोटिस:सेजल पवार के कमेंट्स पर AIMSA ने कार्रवाई की मांग की; तीनों पर FIR भी दर्ज

राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने गुरुग्राम में हुए कॉमेडियन प्रणित मोरे के स्टैंड-अप कॉमेडी शो से जुड़े विवाद का स्वतः संज्ञान लिया है। 370 की बिरयानी वाली वीडियो के मामले में आयोग ने प्रणित मोरे और हिमांशु जांगड़ा को सुनवाई नोटिस जारी किया है। मामले की सुनवाई 22 जून को शाम 4 बजे आयोग के सामने तय की गई है। न्यूज एजेंसी पीटीआई के अनुसार, NCW ने कहा कि वायरल वीडियो का कंटेंट और उसे मनोरंजन के रूप में प्रस्तुत किए जाने पर गंभीर चिंता है। मामले को गंभीरता से लेते हुए NCW की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने हरियाणा के पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखा है। उन्होंने मामले में जल्द, सख्त और तय समय के भीतर कार्रवाई करने की मांग की है। साथ ही आयोग ने पुलिस से सात दिनों के अंदर की गई कार्रवाई की पूरी रिपोर्ट भी मांगी है। आयोग ने एफआईआर दर्ज होने की स्थिति, भारतीय न्याय संहिता (BNS) और अन्य लागू कानूनों के तहत की गई कार्रवाई, वायरल वीडियो की जांच और वेरिफिकेशन, तथा आयोजकों, कलाकारों और वेन्यू मैनेजमेंट की भूमिका से संबंधित जानकारी मांगी है। वहीं, ऑल इंडिया मेडिकल स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AIMSA) ने प्रणित मोरे के दूसरे स्टैंड-अप शो के दौरान MBBS स्टूडेंट सेजल पवार द्वारा कैडवर और बॉडी डोनर्स पर की गई कमेंट्स की निंदा की है। AIMSA ने कहा कि शवों और बॉडी डोनर्स को एंटरटेनमेंट या कॉमेडी का टॉपिक बनाना असंवेदनशील और अपमानजनक है। ऑर्गनाइजेशन के मुताबिक, हर बॉडी डोनर मेडिकल एजुकेशन में योगदान देकर भविष्य के डॉक्टरों को ट्रेनिंग देने और जानें बचाने में अहम भूमिका निभाता है। एसोसिएशन ने कहा कि शवों का मजाक उड़ाना या उन्हें हल्के में लेना मंजूर नहीं है और इससे मेडिकल शिक्षा की गरिमा कम होती है। AIMSA ने संबंधित लोगों से तुरंत माफी मांगने और सख्त कार्रवाई की मांग की। एसोसिएशन ने चेतावनी दी कि अगर सही कार्रवाई नहीं की गई तो वह कानूनी कार्रवाई कर सकता है। महाराष्ट्र साइबर ने FIR दर्ज की महाराष्ट्र साइबर ने कॉमेडियन प्रणित मोरे, हिमांशु जांगड़ा, डॉ. सेजल पवार और इसमें शामिल अन्य लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। FIR इंडियन पीनल कोड (IPC) 2023 की अलग-अलग धाराओं और IT एक्ट 2000 की धारा 67 के तहत दर्ज की गई है। आरोप है कि शो और उससे जुड़े ऑनलाइन वीडियो में महिलाओं, सहमति और मृत लोगों के बारे में आपत्तिजनक कमेंट्स थे।

Mini Brazil Shahdol Dreams FIFA World Cup 2026 Win for Brazil

Mini Brazil Shahdol Dreams FIFA World Cup 2026 Win for Brazil

फीफा विश्व कप 2026 की शुरुआत 11 जून से हो गई है, जिसे लेकर दुनिया भर के फुटबॉल प्रेमियों में जबरदस्त उत्साह है। अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको की संयुक्त मेजबानी में होने वाले इस महाकुंभ पर करोड़ों निगाहें टिकी हैं। . इस वैश्विक रोमांच के बीच मध्य प्रदेश के शहडोल जिले का ‘मिनी ब्राजील’ गांव विचारपुर भी फुटबॉल के रंग में रंग चुका है। विश्व कप शुरू होने से पहले ही विचारपुर के मैदानों में रौनक बढ़ गई है। गांव के बच्चे और युवा खिलाड़ी अपने पसंदीदा खिलाड़ियों और टीमों पर चर्चा करते नजर आ रहे हैं। यहां के अधिकांश खिलाड़ी ब्राजील का समर्थन करते हैं और उन्हें ही फीफा का विश्वविजेता देखना चाहते हैं। वहीं टीम इंडिया का फीफा तक नहीं पहुंच पाना भी उनके लिए निराशा का विषय है। मिनी ब्राजील के मैदान में फुटबॉल खेल रहे बच्चों का कहना है कि हम आने वाले समय में टीम इंडिया को फीफा तक पहुंचाएंगे। मैदान में खेल रहे कुछ युवा अर्जेंटीना और लियोनेल मेसी के प्रशंसक भी हैं। लेकिन इस उत्साह के बीच एक सवाल भी बार-बार उठता है जब दुनिया फुटबॉल के सबसे बड़े मंच पर उतर रही है, तब भारत अब तक वहां क्यों नहीं पहुंच पाया? दैनिक भास्कर की टीम ने गांव के युवा खिलाड़ियों से बात की। पढ़िए यह रिपोर्ट… क्यों कहा जाता है विचारपुर को मिनी ब्राजील? शहडोल मुख्यालय से करीब पांच किलोमीटर दूर स्थित विचारपुर गांव में फुटबॉल केवल खेल नहीं बल्कि जीवनशैली का हिस्सा है। गांव के अधिकांश घरों में कोई न कोई खिलाड़ी फुटबॉल से जुड़ा हुआ है। यहां बच्चे चलना सीखने के साथ फुटबॉल को भी अपनाने लगते हैं। वर्षों पहले गांव के युवाओं ने फुटबॉल को अपनी पहचान बनाया। धीरे-धीरे यहां से कई खिलाड़ी जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचे। महिला खिलाड़ियों ने भी उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कीं। गांव में फुटबॉल के प्रति इसी जुनून ने इसे “मिनी ब्राजील” की पहचान दिलाई। पीएम मोदी ने दिलाई राष्ट्रीय पहचान विचारपुर को राष्ट्रीय पहचान तब मिली जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2022 में अपने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में गांव का उल्लेख किया था। पीएम ने गांव की फुटबॉल संस्कृति और यहां के खिलाड़ियों की सराहना की थी। इसके बाद विचारपुर अचानक राष्ट्रीय सुर्खियों में आ गया। प्रधानमंत्री के उल्लेख के बाद कई प्रशासनिक और खेल विभाग के अधिकारी गांव पहुंचे। गांव की पहचान एक फुटबॉल हब के रूप में बनी और यहां के खिलाड़ियों को राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भाग लेने के अवसर बढ़े। देशभर के मीडिया संस्थानों ने भी गांव की कहानी को प्रमुखता से प्रकाशित किया। अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी बोलीं- फीफा से सीखने का अवसर जर्मनी में आयोजित अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी खिलाड़ी सानिया कुंडे कहती हैं कि फीफा विश्व कप उनके जैसे खिलाड़ियों के लिए सीखने का सबसे बड़ा मंच है। सानिया कहती हैं, “हम लोग सभी मैच देखेंगे। जो खिलाड़ी हमारी पोजीशन पर खेलते हैं, उन्हें देखकर नई तकनीक सीखने को मिलती है। ऐसे कई शॉट्स और मूवमेंट देखने को मिलते हैं जिन्हें सीखने के लिए बहुत उच्च स्तरीय अभ्यास की जरूरत होती है। हम सब ब्राजील को सपोर्ट करेंगे। हमारी कोशिश है कि एक दिन भारत भी फीफा वर्ल्ड कप में खेले।” उनका कहना है कि विश्व कप केवल मनोरंजन नहीं बल्कि प्रशिक्षण का भी माध्यम है। यहां दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी और कोच अपनी रणनीतियों का प्रदर्शन करते हैं, जिससे युवा खिलाड़ियों को खेल की बारीकियां समझने में मदद मिलती है। फीफा हमारे लिए खुली किताब वहीं महिला फुटबॉल टीम की कोच लक्ष्मी सहीश खिलाड़ियों को हर विश्व कप मैच देखने के लिए प्रेरित कर रही हैं। वह कहतीं हैं- “फीफा देखने से दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों का खेल समझने का मौका मिलता है। उनके गेम प्लान, पासिंग, गोल मूवमेंट और रणनीतियों का अध्ययन करके बच्चे बहुत कुछ सीख सकते हैं। मैं खिलाड़ियों से कहती हूं कि सिर्फ मैच मत देखो, उसे समझो और विश्लेषण करो। जो चीज अच्छी लगे, उसे अपने खेल में उतारने की कोशिश करो।” लक्ष्मी स्वयं लियोनेल मेसी की प्रशंसक हैं। उनका कहना है कि पिछली बार अर्जेंटीना ने खिताब जीता था और इस बार भी वे मेसी की टीम को समर्थन देंगी। वर्ल्ड कप में भारत के नहीं पहुंचने का अफसोस विचारपुर के खिलाड़ियों के बीच फीफा को लेकर जितना उत्साह है, उतना ही अफसोस इस बात का भी है कि भारत की टीम इस टूर्नामेंट का हिस्सा नहीं है। वर्तमान में भारतीय पुरुष फुटबॉल टीम विश्व फुटबॉल की शीर्ष टीमों से काफी पीछे है। जापान, दक्षिण कोरिया, ईरान, ऑस्ट्रेलिया और सऊदी अरब जैसी एशियाई टीमें लगातार विश्व कप में पहुंच रही हैं, जबकि भारत 2026 विश्व कप क्वालिफायर के दूसरे चरण से आगे नहीं बढ़ सका। खिलाड़ियों के अनुसार इसके पीछे कई कारण हैं। देश में फुटबॉल का आधारभूत ढांचा अभी भी सीमित है। गांवों और छोटे शहरों में गुणवत्तापूर्ण मैदान, प्रशिक्षित कोच, आधुनिक प्रशिक्षण सुविधाएं और स्पोर्ट्स साइंस का अभाव है। क्रिकेट की तुलना में फुटबॉल को कम आर्थिक सहायता और कम प्रायोजन मिलता है। परिणामस्वरूप अनेक प्रतिभाशाली खिलाड़ी शुरुआती स्तर पर ही खेल छोड़ देते हैं। कोच लक्ष्मी ने बताया कि भारत 1950 के फीफा वर्ल्ड कप के लिए क्वालिफाई कर चुका था, लेकिन विभिन्न कारणों से टीम टूर्नामेंट में हिस्सा नहीं ले सकी। इसके बाद भारत कभी भी विश्व कप के मुख्य दौर तक नहीं पहुंच पाया। सानिया कुंडे कहती हैं- “हम लोग बहुत मेहनत कर रहे हैं। आज हम फीफा देखकर सीख रहे हैं, लेकिन हमारा सपना है कि एक दिन भारत भी फीफा वर्ल्ड कप में उतरे और दुनिया हमारे खिलाड़ियों को भी उसी तरह देखे, जैसे हम आज बड़े खिलाड़ियों को देखते हैं।” पहचान मिली, सुविधाएं अब भी अधूरी विचारपुर को राष्ट्रीय पहचान तो मिल गई, लेकिन जमीनी हकीकत अभी भी चुनौतियों से भरी है। गांव के खिलाड़ियों का कहना है कि आज भी उन्हें समतल और विकसित खेल मैदान उपलब्ध नहीं है। बरसात के दौरान मैदान की स्थिति और खराब हो जाती है। कई बार खिलाड़ियों को निजी संसाधनों के सहारे अभ्यास करना पड़ता है। खिलाड़ियों और ग्रामीणों ने बताया कि गांव में भी कई मूलभूत सुविधाओं की कमी है। नियमित

मूवी रिव्यू – गवर्नर:देश को दिवालिया होने से बचाने की कहानी, मनोज बाजपेयी ने कठिन विषय को भी दिलचस्प बना दिया

मूवी रिव्यू – गवर्नर:देश को दिवालिया होने से बचाने की कहानी, मनोज बाजपेयी ने कठिन विषय को भी दिलचस्प बना दिया

आज का भारत दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में गिना जाता है, लेकिन एक दौर ऐसा भी था जब देश के पास जरूरी सामान आयात करने तक के पैसे नहीं बचे थे। विदेशी मुद्रा भंडार तेजी से घट रहा था और देश आर्थिक संकट के कगार पर खड़ा था। ‘गवर्नर’ उसी दौर की कहानी लेकर आती है। यह फिल्म बंदूक, बम और एक्शन की नहीं, बल्कि फाइलों, बैठकों और फैसलों की लड़ाई दिखाती है। हैरानी की बात यह है कि इतना गंभीर विषय होने के बावजूद फिल्म कई जगह दर्शकों को बांधे रखने में सफल रहती है। फिल्म की कहानी फिल्म की कहानी 1990-91 के उस आर्थिक संकट पर आधारित है जब भारत दिवालिया होने की स्थिति में पहुंच गया था। ऐसे समय में भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर ए. रामानन को देश की आर्थिक व्यवस्था संभालने की जिम्मेदारी मिलती है। एक तरफ बढ़ती महंगाई, घटता विदेशी मुद्रा भंडार और अंतरराष्ट्रीय दबाव है, तो दूसरी तरफ राजनीतिक अस्थिरता। ऐसे हालात में रामानन और उनकी टीम ऐसे फैसले लेने की कोशिश करती है जो देश को आर्थिक संकट से बाहर निकाल सकें। कहानी का बड़ा हिस्सा इसी संघर्ष और रणनीति पर आधारित है। फिल्म की अच्छी बात यह है कि यह इतिहास की किताब जैसा महसूस नहीं होती। जटिल आर्थिक मुद्दों को भी आसान तरीके से समझाने की कोशिश की गई है। फिल्म में एक्टिंग मनोज बाजपेयी पूरी फिल्म की जान हैं। लगभग हर दृश्य उनके कंधों पर टिका है और वह इस जिम्मेदारी को बखूबी निभाते हैं। एक ऐसे व्यक्ति का दबाव, चिंता और जिम्मेदारी वह बिना ज्यादा शोर किए दर्शकों तक पहुंचा देते हैं। अदा शर्मा पत्रकार की भूमिका में ठीक लगती हैं। हालांकि उनके हिस्से में बहुत ज्यादा प्रभावशाली दृश्य नहीं आए हैं, लेकिन वह कहानी को आगे बढ़ाने का काम करती हैं। मधु ने सीमित स्क्रीन टाइम में अच्छा काम किया है। वहीं सहायक कलाकार भी अपने-अपने किरदारों में विश्वसनीय लगते हैं। फिल्म में डायरेक्शन निर्देशक चिन्मय डी. मांडलेकर का सबसे बड़ा काम यह है कि उन्होंने अर्थव्यवस्था जैसे कठिन विषय को समझने लायक बनाया है। फिल्म कई बार डॉक्यूमेंट्री बनने के खतरे के करीब पहुंचती है, लेकिन निर्देशन उसे नीरस होने से बचा लेता है। हालांकि कुछ जगह फिल्म जरूरत से ज्यादा सरल समाधान पेश करती हुई महसूस होती है। कुछ घटनाओं और फैसलों के पीछे की जटिलता को और विस्तार से दिखाया जा सकता था। फिल्म का तकनीकी पहलू फिल्म का प्रोडक्शन डिजाइन उस दौर का माहौल बनाने में सफल रहता है। दफ्तर, सरकारी बैठकें और उस समय का माहौल विश्वसनीय लगता है। छायांकन साधारण है, लेकिन कहानी की जरूरत पूरी करता है। संपादन भी ठीक है, हालांकि कुछ हिस्सों में फिल्म थोड़ी लंबी महसूस होती है। फिल्म में कमियां फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी इसकी गति है। कुछ दृश्यों में कहानी ठहरती हुई लगती है। आर्थिक फैसलों को लेकर जो तनाव महसूस होना चाहिए था, वह हर जगह पूरी तरह नहीं बन पाता। इसके अलावा कुछ दर्शकों को लग सकता है कि फिल्म कई जटिल राजनीतिक पहलुओं को छूकर आगे बढ़ जाती है। अगर उन हिस्सों को थोड़ा और विस्तार मिलता तो कहानी और मजबूत बन सकती थी। फिल्म में म्यूजिक फिल्म में संगीत कहानी का मुख्य हिस्सा नहीं है। पृष्ठभूमि संगीत माहौल बनाने में मदद करता है और जरूरत के मुताबिक इस्तेमाल किया गया है। यही इसकी सबसे बड़ी खूबी है। फिल्म क्यों देखें? ‘गवर्नर’ उन फिल्मों में से है जो मनोरंजन के साथ-साथ जानकारी भी देती हैं। यह फिल्म बताती है कि देश का भविष्य सिर्फ सीमा पर लड़ी जाने वाली लड़ाइयों से नहीं, बल्कि बंद कमरों में लिए गए फैसलों से भी तय होता है। मनोज बाजपेयी का मजबूत अभिनय और एक कम चर्चित लेकिन महत्वपूर्ण विषय इसे देखने लायक बनाता है। हालांकि इसकी धीमी रफ्तार और कुछ सतही हिस्से इसे बहुत ऊंचाई तक नहीं ले जा पाते, लेकिन फिर भी यह एक ईमानदार और दिलचस्प कोशिश है।

कूलर में पानी भरने के टिप्स: लोकतंत्र में पानी भरते समय भूलकर भी न करें ये 5 नलियां, कभी भी लग सकते हैं कूलर में पानी भरने का समय

कूलर सुरक्षा युक्तियाँ

12 जून 2026 को 11:41 IST पर अपडेट किया गया कूलर में पानी भरने के टिप्स: गर्मी से राहत पाने का सबसे अच्छा तरीका है गर्मी में ब्लॉकचेन। लेकिन लोग बार-बार इसका इस्तेमाल करते समय कुछ न कुछ ऐसी स्थिति कर देते हैं, जो स्वास्थ्य की दृष्टि से सुरक्षा के लिए खतरनाक हो सकता है। कई बार मलेशिया में पानी भरे वक्त लोग करंट मछली जैसी मछली का शिकार हो जाते हैं। फॉक्सवैगन के गलत इस्तेमाल से फंगस, बैक्टीरिया और मच्छरों का खतरा भी बढ़ जाता है। आइए जानते हैं चॉकलेट का इस्तेमाल करते समय किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है। अनुसरण करना : अर्थशास्त्र का एक ही पानी के इस्तेमाल से रुका हुआ पानी विद्वान-मशत्रों के पठने की जगह बन जाता है। संक्रमण, मलेरिया और अन्य गंभीर संक्रमणों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। समय पर पानी चलाना बहुत जरूरी है छवि: एआई डेंजरस के टैंकों में काई और गंदगी जमा हो जाती है, जो बिकाऊ उत्पाद बनाती है। हवा के माध्यम से रोग संबंधी रोग हो सकते हैं। सप्ताह में कम से कम एक बार मैनचेस्टर के टैंक और उसके पैड की अच्छी तरह से सफाई करें। छवि: एआई समय रहते पानी भी खतरनाक हो सकता है क्योंकि इसके साथ ही ब्लैक करंट भी खतरनाक हो सकता है। दुर्घटना से बचने के लिए डेमोक्रेट का स्विच बंद करें, दूसरा कारण, उसके बाद ही पानी भरना छवि: इंस्टाग्राम लंबे समय तक पैड की सफाई न की जाए या उसे बदला न जाए, तो हवा के साथ एलर्जी पैदा होने वाले कण और स्कैनर पूरे कमरे में फेल हो सकते हैं। पैड साफ करें, खराब को बदलें बेहतर है। छवि: एआई लोहे के पेंसिल में करंट आने की समस्या होती है, जिससे हाथ में झटका महसूस होता है। अगर आपके लेबल में भी ऐसा हो रहा है, तो तुरंत उसका ढांचा हटा दें। अर्थशास्त्र के सभी सिद्धांतों की जाँच करें छवि: एआई टैंक का पानी पूरी तरह से खाली और ज़रूरत पर उसकी मोटर की जाँच करवाएँ। किसी भी जोखिम से बचने के लिए अंतिम की सलाह अवश्य लें। छवि: एआई द्वारा प्रकाशित: कीर्ति सोनी प्रकाशित 12 जून 2026 11:41 IST (टैग्सटूट्रांसलेट)कूलर सुरक्षा युक्तियाँ(टी)कूलर में पानी कैसे भरें(टी)कूलर में बिजली का झटका(टी)कूलर का रखरखाव(टी)कूलर से डेंगू को रोकें(टी)ग्रीष्मकालीन सुरक्षा(टी)घरेलू उपकरणों की देखभाल

मूवी रिव्यू – गवर्नर:देश को दिवालिया होने से बचाने की कहानी, मनोज बाजपेयी ने कठिन विषय को भी दिलचस्प बना दिया

मूवी रिव्यू – गवर्नर:देश को दिवालिया होने से बचाने की कहानी, मनोज बाजपेयी ने कठिन विषय को भी दिलचस्प बना दिया

आज का भारत दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में गिना जाता है, लेकिन एक दौर ऐसा भी था जब देश के पास जरूरी सामान आयात करने तक के पैसे नहीं बचे थे। विदेशी मुद्रा भंडार तेजी से घट रहा था और देश आर्थिक संकट के कगार पर खड़ा था। ‘गवर्नर’ उसी दौर की कहानी लेकर आती है। यह फिल्म बंदूक, बम और एक्शन की नहीं, बल्कि फाइलों, बैठकों और फैसलों की लड़ाई दिखाती है। हैरानी की बात यह है कि इतना गंभीर विषय होने के बावजूद फिल्म कई जगह दर्शकों को बांधे रखने में सफल रहती है। फिल्म की कहानी फिल्म की कहानी 1990-91 के उस आर्थिक संकट पर आधारित है जब भारत दिवालिया होने की स्थिति में पहुंच गया था। ऐसे समय में भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर ए. रामानन को देश की आर्थिक व्यवस्था संभालने की जिम्मेदारी मिलती है। एक तरफ बढ़ती महंगाई, घटता विदेशी मुद्रा भंडार और अंतरराष्ट्रीय दबाव है, तो दूसरी तरफ राजनीतिक अस्थिरता। ऐसे हालात में रामानन और उनकी टीम ऐसे फैसले लेने की कोशिश करती है जो देश को आर्थिक संकट से बाहर निकाल सकें। कहानी का बड़ा हिस्सा इसी संघर्ष और रणनीति पर आधारित है। फिल्म की अच्छी बात यह है कि यह इतिहास की किताब जैसा महसूस नहीं होती। जटिल आर्थिक मुद्दों को भी आसान तरीके से समझाने की कोशिश की गई है। फिल्म में एक्टिंग मनोज बाजपेयी पूरी फिल्म की जान हैं। लगभग हर दृश्य उनके कंधों पर टिका है और वह इस जिम्मेदारी को बखूबी निभाते हैं। एक ऐसे व्यक्ति का दबाव, चिंता और जिम्मेदारी वह बिना ज्यादा शोर किए दर्शकों तक पहुंचा देते हैं। अदा शर्मा पत्रकार की भूमिका में ठीक लगती हैं। हालांकि उनके हिस्से में बहुत ज्यादा प्रभावशाली दृश्य नहीं आए हैं, लेकिन वह कहानी को आगे बढ़ाने का काम करती हैं। मधु ने सीमित स्क्रीन टाइम में अच्छा काम किया है। वहीं सहायक कलाकार भी अपने-अपने किरदारों में विश्वसनीय लगते हैं। फिल्म में डायरेक्शन निर्देशक चिन्मय डी. मांडलेकर का सबसे बड़ा काम यह है कि उन्होंने अर्थव्यवस्था जैसे कठिन विषय को समझने लायक बनाया है। फिल्म कई बार डॉक्यूमेंट्री बनने के खतरे के करीब पहुंचती है, लेकिन निर्देशन उसे नीरस होने से बचा लेता है। हालांकि कुछ जगह फिल्म जरूरत से ज्यादा सरल समाधान पेश करती हुई महसूस होती है। कुछ घटनाओं और फैसलों के पीछे की जटिलता को और विस्तार से दिखाया जा सकता था। फिल्म का तकनीकी पहलू फिल्म का प्रोडक्शन डिजाइन उस दौर का माहौल बनाने में सफल रहता है। दफ्तर, सरकारी बैठकें और उस समय का माहौल विश्वसनीय लगता है। छायांकन साधारण है, लेकिन कहानी की जरूरत पूरी करता है। संपादन भी ठीक है, हालांकि कुछ हिस्सों में फिल्म थोड़ी लंबी महसूस होती है। फिल्म में कमियां फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी इसकी गति है। कुछ दृश्यों में कहानी ठहरती हुई लगती है। आर्थिक फैसलों को लेकर जो तनाव महसूस होना चाहिए था, वह हर जगह पूरी तरह नहीं बन पाता। इसके अलावा कुछ दर्शकों को लग सकता है कि फिल्म कई जटिल राजनीतिक पहलुओं को छूकर आगे बढ़ जाती है। अगर उन हिस्सों को थोड़ा और विस्तार मिलता तो कहानी और मजबूत बन सकती थी। फिल्म में म्यूजिक फिल्म में संगीत कहानी का मुख्य हिस्सा नहीं है। पृष्ठभूमि संगीत माहौल बनाने में मदद करता है और जरूरत के मुताबिक इस्तेमाल किया गया है। यही इसकी सबसे बड़ी खूबी है। फिल्म क्यों देखें? ‘गवर्नर’ उन फिल्मों में से है जो मनोरंजन के साथ-साथ जानकारी भी देती हैं। यह फिल्म बताती है कि देश का भविष्य सिर्फ सीमा पर लड़ी जाने वाली लड़ाइयों से नहीं, बल्कि बंद कमरों में लिए गए फैसलों से भी तय होता है। मनोज बाजपेयी का मजबूत अभिनय और एक कम चर्चित लेकिन महत्वपूर्ण विषय इसे देखने लायक बनाता है। हालांकि इसकी धीमी रफ्तार और कुछ सतही हिस्से इसे बहुत ऊंचाई तक नहीं ले जा पाते, लेकिन फिर भी यह एक ईमानदार और दिलचस्प कोशिश है।

वर्ल्ड अपडेट्स:POK के रावलकोट में प्रदर्शनकारियों पर पाकिस्तानी सेना और रेंजर्स की गोलीबारी से 16 की मौत

वर्ल्ड अपडेट्स:POK के रावलकोट में प्रदर्शनकारियों पर पाकिस्तानी सेना और रेंजर्स की गोलीबारी से 16 की मौत

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) के रावलाकोट में प्रदर्शनकारियों पर पाकिस्तानी सेना और रेंजर्स की फायरिंग में कम से कम 16 लोगों की मौत हो गई, जबकि 37 से ज्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं। यह घटना उस समय हुई जब हजारों लोग महंगाई, बिजली दरों में वृद्धि और बुनियादी राजनीतिक-आर्थिक अधिकारों की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। स्थानीय सूत्रों के मुताबिक रावलाकोट के ईदगाह मैदान में बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए थे। इसी दौरान सुरक्षा बलों ने भीड़ पर गोलीबारी की। फायरिंग के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया। POK में पिछले कई दिनों से सस्ती बिजली, सब्सिडी वाला गेहूं-चावल और अधिक अधिकारों की मांग को लेकर आंदोलन चल रहा है। हाल ही में जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद तनाव और बढ़ गया। प्रशासन ने कई गिरफ्तारियां की हैं तथा कुछ क्षेत्रों में इंटरनेट सेवाएं भी बंद कर दी हैं। रावलाकोट की घटना के बाद खाई गाला समेत कई इलाकों में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए। बाजार बंद रहे और लोगों ने सुरक्षा बलों की कार्रवाई के खिलाफ मार्च निकाला। महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों ने भी प्रदर्शन में भाग लिया। स्थानीय दावों के अनुसार 5 जून से जारी आंदोलन के दौरान अब तक 53 नागरिकों की मौत हो चुकी है। प्रदर्शन नेताओं ने कहा है कि वे आर्थिक राहत और लोकतांत्रिक अधिकारों की मांग को लेकर अपना आंदोलन जारी रखेंगे। भारत ने इस घटना की निंदा करते हुए इसे “नरसंहार” बताया है और कहा है कि यह पाकिस्तान के नियंत्रण वाले क्षेत्रों में लोगों के अधिकारों के दमन को दर्शाता है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मामले का संज्ञान लेने और पाकिस्तान से लोगों के अधिकारों का सम्मान करने की अपील की है।