वर्ल्ड अपडेट्स:POK के रावलकोट में प्रदर्शनकारियों पर पाकिस्तानी सेना और रेंजर्स की गोलीबारी से 16 की मौत

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) के रावलकोट में प्रदर्शनकारियों पर पाकिस्तानी सेना और रेंजर्स की फायरिंग में कम से कम 16 लोगों की मौत हो गई, जबकि 37 से ज्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं। यह घटना उस समय हुई जब हजारों लोग महंगाई, बिजली दरों में वृद्धि और बुनियादी राजनीतिक-आर्थिक अधिकारों की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। स्थानीय सूत्रों के मुताबिक रावलकोट के ईदगाह मैदान में बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए थे। इसी दौरान सुरक्षा बलों ने भीड़ पर गोलीबारी की। फायरिंग के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया। POK में पिछले कई दिनों से सस्ती बिजली, सब्सिडी वाला गेहूं-चावल और अधिक अधिकारों की मांग को लेकर आंदोलन चल रहा है। हाल ही में जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद तनाव और बढ़ गया। प्रशासन ने कई गिरफ्तारियां की हैं तथा कुछ क्षेत्रों में इंटरनेट सेवाएं भी बंद कर दी हैं। रावलकोट की घटना के बाद खाई गाला समेत कई इलाकों में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए। बाजार बंद रहे और लोगों ने सुरक्षा बलों की कार्रवाई के खिलाफ मार्च निकाला। महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों ने भी प्रदर्शन में भाग लिया। स्थानीय दावों के अनुसार 5 जून से जारी आंदोलन के दौरान अब तक 53 नागरिकों की मौत हो चुकी है। प्रदर्शन नेताओं ने कहा है कि वे आर्थिक राहत और लोकतांत्रिक अधिकारों की मांग को लेकर अपना आंदोलन जारी रखेंगे। भारत ने इस घटना की निंदा करते हुए इसे “नरसंहार” बताया है और कहा है कि यह पाकिस्तान के नियंत्रण वाले क्षेत्रों में लोगों के अधिकारों के दमन को दर्शाता है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मामले का संज्ञान लेने और पाकिस्तान से लोगों के अधिकारों का सम्मान करने की अपील की है। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी अन्य बड़ी खबरें… 3 साल से ज्यादा समय तक कोमा में रहीं थाई राजकुमारी बज्रकिटियाभा का निधन थाईलैंड की राजकुमारी बज्रकिटियाभा का 47 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। वह दिसंबर 2022 से कोमा में थीं। थाई शाही परिवार ने शुक्रवार को इसकी घोषणा करते हुए बताया कि लगातार चिकित्सा प्रयासों के बावजूद उनकी हालत बिगड़ती रही और गुरुवार शाम बैंकॉक के चुलालॉन्गकॉर्न अस्पताल में उनका निधन हो गया। राजकुमारी बज्रकिटियाभा दिसंबर 2022 में अपने कुत्तों के साथ व्यायाम कर रही थीं, तभी अचानक बेहोश हो गई थीं। डॉक्टरों ने बाद में बताया कि उनके हृदय में मायकोप्लाज्मा संक्रमण हुआ था, जिससे गंभीर अनियमित धड़कन की समस्या पैदा हुई और वह कोमा में चली गईं। 7 दिसंबर 1978 को जन्मीं बज्रकिटियाभा, थाईलैंड के राजा महा वजिरालोंगकोर्न की सबसे बड़ी संतान थीं। उन्होंने कानून की पढ़ाई की और अमेरिका की कॉर्नेल यूनिवर्सिटी से दो स्नातकोत्तर डिग्रियां हासिल कीं। संयुक्त राष्ट्र में थाई मिशन के साथ काम करने के बाद उन्होंने थाईलैंड में अटॉर्नी जनरल कार्यालय में सेवाएं दीं। वर्ष 2012 से 2014 तक वह ऑस्ट्रिया में थाईलैंड की राजदूत रहीं। इस दौरान उन्होंने जेल सुधार और महिला कैदियों के अधिकारों के मुद्दे पर सक्रिय भूमिका निभाई। बाद में वह संयुक्त राष्ट्र ड्रग्स एवं अपराध कार्यालय (UNODC) की ‘रूल ऑफ लॉ’ एम्बेसडर भी रहीं। 2021 में राजा वजिरालोंगकोर्न ने उन्हें अपनी निजी सुरक्षा इकाई का चीफ ऑफ स्टाफ नियुक्त किया और जनरल का दर्जा दिया। उनकी प्रशासनिक क्षमता और सार्वजनिक छवि के कारण उन्हें थाई राजशाही के संभावित उत्तराधिकारियों में भी देखा जाता था। राजा ने अब तक अपना आधिकारिक उत्तराधिकारी घोषित नहीं किया है। ऐसे में राजकुमारी बज्रकिटियाभा के निधन ने थाई राजपरिवार में उत्तराधिकार को लेकर नई अनिश्चितता पैदा कर दी है। कई राजभक्त उन्हें भविष्य में रानी या रीजेंट की भूमिका निभाने वाली संभावित शख्सियत मानते थे। उ. कोरिया में ड्रोन भेजने पर द. कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति को 30 साल अतिरिक्त जेल दक्षिण कोरिया की सियोल जिला अदालत ने पूर्व राष्ट्रपति यून सुक योल को उत्तर कोरिया में ड्रोन भेजकर तनाव भड़काने के मामले में 30 साल अतिरिक्त जेल की सजा सुनाई है। अदालत ने माना कि इस अभियान का मकसद उत्तर कोरिया को उकसाकर आपात स्थिति पैदा करना और बाद में मार्शल लॉ लागू करने के लिए माहौल तैयार करना था। अदालत ने यून सुक योल, पूर्व रक्षा मंत्री किम योंग-ह्यून, डिफेंस काउंटर इंटेलिजेंस कमांड के पूर्व प्रमुख यो इन-ह्युंग और ड्रोन ऑपरेशन कमांड के पूर्व प्रमुख किम योंग-डे को देशद्रोह और सत्ता के दुरुपयोग का दोषी ठहराया। अदालत ने कहा कि इन अधिकारियों ने सैन्य अभियान की आड़ में उत्तर कोरिया को उकसाया, जिससे दोनों देशों के बीच सैन्य संघर्ष का खतरा बढ़ गया। फैसले में कहा गया कि अक्टूबर 2024 में प्योंगयांग में प्रचार सामग्री गिराने के लिए ड्रोन भेजे गए थे। अदालत के अनुसार यह कार्रवाई यून सुक योल के निर्देश पर हुई थी और उन्हें उम्मीद थी कि उत्तर कोरिया जवाबी प्रतिक्रिया देगा। अभियोजन पक्ष का दावा था कि यह अभियान दिसंबर 2024 में मार्शल लॉ लागू करने की तैयारी का हिस्सा था। यून ने 3 दिसंबर को मार्शल लॉ लागू करते हुए कहा था कि देश को “राष्ट्र-विरोधी ताकतों” से बचाने की जरूरत है, लेकिन भारी जनविरोध के बाद उन्हें फैसला वापस लेना पड़ा। यून सुक योल पहले ही विद्रोह के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं। इसके अलावा उन्हें सत्ता के दुरुपयोग और गिरफ्तारी में बाधा डालने के मामले में पांच साल की अलग सजा भी मिल चुकी है। बचाव पक्ष ने अदालत में कहा कि ड्रोन अभियान उत्तर कोरिया द्वारा कचरे से भरे गुब्बारे भेजने की कार्रवाई का जवाब था। हालांकि अदालत ने इस दलील को खारिज करते हुए अभियोजन पक्ष के आरोपों को सही माना। इस मामले ने दक्षिण कोरिया में राजनीतिक संकट को और गहरा कर दिया था। बाद में हुए चुनाव में विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता ली जे-म्युंग सत्ता में आए और देश में राजनीतिक नेतृत्व बदल गया।
‘अस्तित्व का प्रश्न’: महुआ मोइत्रा का कहना है कि विपक्षी दलों को एकजुट होना चाहिए या ‘हम सब मर जाएंगे’ | भारत समाचार

आखरी अपडेट:12 जून, 2026, 11:02 IST महुआ मोइत्रा ने बागी टीएमसी नेताओं पर भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए के साथ गठबंधन करके बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के प्रति विश्वासघाती होने का भी आरोप लगाया। टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा. (पीटीआई/फ़ाइल) तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद महुआ मोइत्रा ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर तीखा हमला बोला और उस पर पार्टी को तोड़ने के लिए भय और धमकी का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया और सत्तारूढ़ दल से मुकाबला करने के लिए सभी विपक्षी दलों के बीच एकता पर जोर दिया। 51 वर्षीय सांसद ने बागी टीएमसी नेताओं पर भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के साथ गठबंधन करके बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के प्रति विश्वासघाती होने का भी आरोप लगाया और उन्हें अपने पदों से इस्तीफा देने और भाजपा के टिकटों पर नया जनादेश लेने की चुनौती दी। उन्होंने कहा, “लालच और विश्वासघात की कोई सीमा नहीं है। भाजपा लोकसभा में हार के बाद से हताश थी, जब उन्हें दो-तिहाई बहुमत नहीं मिला था। इसलिए, उन्होंने अपनी गणना कर ली है, और किसी भी तरह से वे 40-50 सांसद और लाना चाहते हैं। वे इसे चुनावों के माध्यम से प्राप्त करने में विश्वास नहीं करते हैं; वे इसे जोड़-तोड़ (पार्टियों को तोड़ना) के माध्यम से करना चाहते हैं।” इंडियन एक्सप्रेस. मोइत्रा ने आरोप लगाया कि भाजपा डर का माहौल बनाने और तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ जनता के गुस्से की गलत धारणा बनाने के लिए केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल कर रही है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना लेखक के बारे में अवीक बनर्जी अवीक बनर्जी News18 में वरिष्ठ उप संपादक हैं। ग्लोबल स्टडीज में मास्टर की डिग्री के साथ नोएडा में रहने वाले अवीक के पास डिजिटल मीडिया और न्यूज क्यूरेशन में तीन साल से अधिक का अनुभव है, जो कि अंतर्राष्ट्रीय विषयों में विशेषज्ञता रखते हैं…और पढ़ें न्यूज़ इंडिया ‘अस्तित्व का सवाल’: महुआ मोइत्रा का कहना है कि विपक्षी दलों को एकजुट होना चाहिए या ‘हम सब मर चुके हैं’ अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें
मूवी रिव्यू – भारत भाग्य विधाता रिव्यू:26/11 की अनसुनी बहादुरी को सामने लाती है फिल्म, कंगना रनोट ने सादगी से जीता दिल

26/11 मुंबई हमलों पर पहले भी कई फिल्में और वेब सीरीज बन चुकी हैं। ज्यादातर कहानियां पुलिस, आतंकियों या सुरक्षा बलों के इर्द-गिर्द घूमती रही हैं। लेकिन उस रात कामा अस्पताल के भीतर क्या चल रहा था, वहां मौजूद डॉक्टरों, नर्सों और कर्मचारियों ने किन हालात में मरीजों को बचाया, इस पर बहुत कम बात हुई। ‘भारत भाग्य विधाता’ उसी भूले हुए अध्याय को सामने लाती है। यह सिर्फ एक हमले की कहानी नहीं है, बल्कि उन लोगों की कहानी है जो सुर्खियों में कभी नहीं आए, लेकिन जिनकी वजह से सैकड़ों लोग सुरक्षित घर लौट सके। फिल्म की कहानी फिल्म की कहानी 26 नवंबर 2008 की उस रात पर आधारित है जब मुंबई दहशत के साए में थी। शहर के अलग-अलग हिस्सों में गोलियां चल रही थीं और उसी दौरान कामा अस्पताल भी खतरे के दायरे में आ गया। अस्पताल के भीतर मौजूद नर्सें, वार्ड स्टाफ और दूसरे कर्मचारी अचानक ऐसे हालात में फंस जाते हैं जिनके लिए कोई प्रशिक्षण काफी नहीं होता। कहानी का केंद्र एक नर्स और उसके साथ काम करने वाले लोग हैं, जो अपनी जान बचाने से पहले मरीजों की सुरक्षा के बारे में सोचते हैं। फिल्म का अच्छा पक्ष यह है कि यह किसी एक किरदार को सुपरहीरो नहीं बनाती। यहां बहादुरी सामूहिक है। हर व्यक्ति अपनी क्षमता के हिसाब से लड़ता है और यही बात कहानी को विश्वसनीय बनाती है। हालांकि फिल्म की पटकथा शुरुआत में थोड़ा समय लेती है। पहले आधे घंटे में किरदारों और उनके रिश्तों को स्थापित करने की कोशिश की गई है, जिससे गति कुछ धीमी महसूस होती है। लेकिन जैसे-जैसे खतरा करीब आता है, फिल्म पकड़ बनाती चली जाती है। फिल्म में एक्टिंग कंगना रनोट इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकतों में से एक हैं। दिलचस्प बात यह है कि यहां वह अपने स्टारडम पर नहीं, बल्कि किरदार पर भरोसा करती दिखाई देती हैं। लंबे समय बाद उन्हें ऐसे रोल में देखा गया है जहां ऊंची आवाज, लंबे भाषण या नाटकीयता नहीं है। उनका अभिनय संयमित है और यही बात असर छोड़ती है। कई दृश्यों में कंगना सिर्फ आंखों और चेहरे के भावों से डर, बेचैनी और जिम्मेदारी को व्यक्त कर देती हैं। यह उनके हालिया कामों से अलग प्रदर्शन है। गिरिजा ओक, स्मिता तांबे और बाकी कलाकार भी कहानी को मजबूती देते हैं। फिल्म का एक बड़ा गुण यह है कि सहायक कलाकार सिर्फ पृष्ठभूमि नहीं बनते, बल्कि कहानी का जरूरी हिस्सा लगते हैं। कई बार ऐसा महसूस होता है कि फिल्म किसी एक कलाकार की नहीं, पूरी टीम की है। फिल्म का डायरेक्शन निर्देशक मनोज तापड़िया ने विषय की संवेदनशीलता को समझते हुए काम किया है। उन्होंने 26/11 को तमाशे की तरह पेश करने के बजाय इंसानी नजरिए से देखने की कोशिश की है। फिल्म आतंकियों से ज्यादा उन लोगों पर फोकस करती है जिन्होंने मुश्किल समय में अपना कर्तव्य निभाया। निर्देशन की सबसे अच्छी बात यह है कि फिल्म लगातार सम्मानजनक बनी रहती है। कहीं भी अनावश्यक देशभक्ति या भावनाओं का दबाव डालने की कोशिश नहीं की गई। कई दृश्य स्वाभाविक रूप से असर छोड़ते हैं। हालांकि कुछ जगहों पर फिल्म और ज्यादा तीखी हो सकती थी। कुछ घटनाएं पर्दे पर जितना तनाव पैदा कर सकती थीं, उतना नहीं कर पातीं। फिल्म का तकनीकी पहलू फिल्म की सिनेमैटोग्राफी माहौल बनाने में सफल रहता है। अस्पताल के गलियारों, बंद कमरों और भय के माहौल को कैमरा प्रभावी ढंग से पकड़ता है। कई दृश्य ऐसे हैं जहां दर्शक जानते हैं कि आगे क्या होने वाला है, फिर भी तनाव बना रहता है। फिल्म की एडिटिंग भी काफी टाइट है। फिल्म बेवजह लंबी नहीं लगती, हालांकि पहले हिस्से में थोड़ी काट-छांट की जा सकती थी। प्रोडक्शन डिजाइन और कॉस्ट्यूम कहानी को असलियत के करीब लाते हैं। हॉस्पिटल का माहौल बनावटी नहीं लगता। फिल्म का म्यूजिक फिल्म का म्यूजिक याद रह जाने वाला नहीं है, लेकिन यह शिकायत भी नहीं बनता। पृष्ठभूमि संगीत कई महत्वपूर्ण दृश्यों में भावनात्मक असर बढ़ाता है। अच्छी बात यह है कि संगीत कहानी पर हावी नहीं होता। फिल्म की कमियां फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी इसकी धीमी शुरुआत है। कुछ दर्शकों को लग सकता है कि कहानी मुख्य संघर्ष तक पहुंचने में ज्यादा समय लेती है। इसके अलावा कुछ सहायक किरदारों को थोड़ा और विस्तार दिया जा सकता था। जो दर्शक पूरी तरह थ्रिलर देखने की उम्मीद से जाएंगे, उन्हें फिल्म कुछ जगहों पर अपेक्षा से ज्यादा भावनात्मक और कम रोमांचक लग सकती है। फिल्म को लेकर फाइनल वर्डिक्ट ‘भारत भाग्य विधाता’ उन लोगों को याद करने की कोशिश है जिनका नाम इतिहास के बड़े पन्नों में शायद नहीं लिखा गया, लेकिन जिन्होंने अपने हिस्से की बहादुरी पूरी ईमानदारी से निभाई। फिल्म की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि यह आतंक की कहानी सुनाते-सुनाते इंसानियत की कहानी बन जाती है। कंगना रनोट का सधा हुआ अभिनय, मजबूत सहायक कलाकार और संवेदनशील निर्देशन इसे एक असरदार अनुभव बनाते हैं। यह परफेक्ट फिल्म नहीं है, लेकिन दिल से बनाई गई फिल्म जरूर है। अगर आप सच्ची घटनाओं पर आधारित और भावनात्मक मानवीय कहानियां पसंद करते हैं, तो ‘भारत भाग्य विधाता’ एक बार देखी जा सकती है।
मूवी रिव्यू – भारत भाग्य विधाता रिव्यू:26/11 की अनसुनी बहादुरी को सामने लाती है फिल्म, कंगना रनोट ने सादगी से जीता दिल

26/11 मुंबई हमलों पर पहले भी कई फिल्में और वेब सीरीज बन चुकी हैं। ज्यादातर कहानियां पुलिस, आतंकियों या सुरक्षा बलों के इर्द-गिर्द घूमती रही हैं। लेकिन उस रात कामा अस्पताल के भीतर क्या चल रहा था, वहां मौजूद डॉक्टरों, नर्सों और कर्मचारियों ने किन हालात में मरीजों को बचाया, इस पर बहुत कम बात हुई। ‘भारत भाग्य विधाता’ उसी भूले हुए अध्याय को सामने लाती है। यह सिर्फ एक हमले की कहानी नहीं है, बल्कि उन लोगों की कहानी है जो सुर्खियों में कभी नहीं आए, लेकिन जिनकी वजह से सैकड़ों लोग सुरक्षित घर लौट सके। फिल्म की कहानी फिल्म की कहानी 26 नवंबर 2008 की उस रात पर आधारित है जब मुंबई दहशत के साए में थी। शहर के अलग-अलग हिस्सों में गोलियां चल रही थीं और उसी दौरान कामा अस्पताल भी खतरे के दायरे में आ गया। अस्पताल के भीतर मौजूद नर्सें, वार्ड स्टाफ और दूसरे कर्मचारी अचानक ऐसे हालात में फंस जाते हैं जिनके लिए कोई प्रशिक्षण काफी नहीं होता। कहानी का केंद्र एक नर्स और उसके साथ काम करने वाले लोग हैं, जो अपनी जान बचाने से पहले मरीजों की सुरक्षा के बारे में सोचते हैं। फिल्म का अच्छा पक्ष यह है कि यह किसी एक किरदार को सुपरहीरो नहीं बनाती। यहां बहादुरी सामूहिक है। हर व्यक्ति अपनी क्षमता के हिसाब से लड़ता है और यही बात कहानी को विश्वसनीय बनाती है। हालांकि फिल्म की पटकथा शुरुआत में थोड़ा समय लेती है। पहले आधे घंटे में किरदारों और उनके रिश्तों को स्थापित करने की कोशिश की गई है, जिससे गति कुछ धीमी महसूस होती है। लेकिन जैसे-जैसे खतरा करीब आता है, फिल्म पकड़ बनाती चली जाती है। फिल्म में एक्टिंग कंगना रनोट इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकतों में से एक हैं। दिलचस्प बात यह है कि यहां वह अपने स्टारडम पर नहीं, बल्कि किरदार पर भरोसा करती दिखाई देती हैं। लंबे समय बाद उन्हें ऐसे रोल में देखा गया है जहां ऊंची आवाज, लंबे भाषण या नाटकीयता नहीं है। उनका अभिनय संयमित है और यही बात असर छोड़ती है। कई दृश्यों में कंगना सिर्फ आंखों और चेहरे के भावों से डर, बेचैनी और जिम्मेदारी को व्यक्त कर देती हैं। यह उनके हालिया कामों से अलग प्रदर्शन है। गिरिजा ओक, स्मिता तांबे और बाकी कलाकार भी कहानी को मजबूती देते हैं। फिल्म का एक बड़ा गुण यह है कि सहायक कलाकार सिर्फ पृष्ठभूमि नहीं बनते, बल्कि कहानी का जरूरी हिस्सा लगते हैं। कई बार ऐसा महसूस होता है कि फिल्म किसी एक कलाकार की नहीं, पूरी टीम की है। फिल्म का डायरेक्शन निर्देशक मनोज तापड़िया ने विषय की संवेदनशीलता को समझते हुए काम किया है। उन्होंने 26/11 को तमाशे की तरह पेश करने के बजाय इंसानी नजरिए से देखने की कोशिश की है। फिल्म आतंकियों से ज्यादा उन लोगों पर फोकस करती है जिन्होंने मुश्किल समय में अपना कर्तव्य निभाया। निर्देशन की सबसे अच्छी बात यह है कि फिल्म लगातार सम्मानजनक बनी रहती है। कहीं भी अनावश्यक देशभक्ति या भावनाओं का दबाव डालने की कोशिश नहीं की गई। कई दृश्य स्वाभाविक रूप से असर छोड़ते हैं। हालांकि कुछ जगहों पर फिल्म और ज्यादा तीखी हो सकती थी। कुछ घटनाएं पर्दे पर जितना तनाव पैदा कर सकती थीं, उतना नहीं कर पातीं। फिल्म का तकनीकी पहलू फिल्म की सिनेमैटोग्राफी माहौल बनाने में सफल रहता है। अस्पताल के गलियारों, बंद कमरों और भय के माहौल को कैमरा प्रभावी ढंग से पकड़ता है। कई दृश्य ऐसे हैं जहां दर्शक जानते हैं कि आगे क्या होने वाला है, फिर भी तनाव बना रहता है। फिल्म की एडिटिंग भी काफी टाइट है। फिल्म बेवजह लंबी नहीं लगती, हालांकि पहले हिस्से में थोड़ी काट-छांट की जा सकती थी। प्रोडक्शन डिजाइन और कॉस्ट्यूम कहानी को असलियत के करीब लाते हैं। हॉस्पिटल का माहौल बनावटी नहीं लगता। फिल्म का म्यूजिक फिल्म का म्यूजिक याद रह जाने वाला नहीं है, लेकिन यह शिकायत भी नहीं बनता। पृष्ठभूमि संगीत कई महत्वपूर्ण दृश्यों में भावनात्मक असर बढ़ाता है। अच्छी बात यह है कि संगीत कहानी पर हावी नहीं होता। फिल्म की कमियां फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी इसकी धीमी शुरुआत है। कुछ दर्शकों को लग सकता है कि कहानी मुख्य संघर्ष तक पहुंचने में ज्यादा समय लेती है। इसके अलावा कुछ सहायक किरदारों को थोड़ा और विस्तार दिया जा सकता था। जो दर्शक पूरी तरह थ्रिलर देखने की उम्मीद से जाएंगे, उन्हें फिल्म कुछ जगहों पर अपेक्षा से ज्यादा भावनात्मक और कम रोमांचक लग सकती है। फिल्म को लेकर फाइनल वर्डिक्ट ‘भारत भाग्य विधाता’ उन लोगों को याद करने की कोशिश है जिनका नाम इतिहास के बड़े पन्नों में शायद नहीं लिखा गया, लेकिन जिन्होंने अपने हिस्से की बहादुरी पूरी ईमानदारी से निभाई। फिल्म की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि यह आतंक की कहानी सुनाते-सुनाते इंसानियत की कहानी बन जाती है। कंगना रनोट का सधा हुआ अभिनय, मजबूत सहायक कलाकार और संवेदनशील निर्देशन इसे एक असरदार अनुभव बनाते हैं। यह परफेक्ट फिल्म नहीं है, लेकिन दिल से बनाई गई फिल्म जरूर है। अगर आप सच्ची घटनाओं पर आधारित और भावनात्मक मानवीय कहानियां पसंद करते हैं, तो ‘भारत भाग्य विधाता’ एक बार देखी जा सकती है।
2 मिनट तक पेप्सी की फोटो देखती रहीं सपना चौधरी:पत्नी को गले लगाकर रोईं हरियाणवी सिंगर-डांसर, बच्चों के सिर पर हाथ फेरा

हरियाणवी सिंगर यशपाल शर्मा उर्फ पेप्सी शर्मा की शोक सभा में सपना चौधरी उनके पैतृक गांव पतला (गाजियाबाद) पहुंचीं। सपना ने पेप्सी शर्मा के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। वह दो मिनट तक पेप्सी की फोटो देखती रहीं। इसके बाद वह उनकी पत्नी से लिपट गईं और उन्हें सांत्वना दी। पेप्सी शर्मा के बच्चों के सिर पर हाथ रखते हुए सपना चौधरी भावुक नजर आईं। सपना ने पेप्सी के साथ मंच पर बिताए गए पलों और उनके साथ गाई रागनियों को भी याद किया। परिवार को ढांढस बंधाते समय उनकी आंखें नम हो गईं। पेप्सी शर्मा का 7 जून को सीने में दर्द होने के बाद निधन हो गया था। सपना और पेप्सी ने साथ में कई स्टेज कार्यक्रम और रागनी प्रतियोगिताएं की थीं। दोनों का नागिन डांस भी काफी चर्चित रहा था। शोक सभा की 2 तस्वीरें पत्नी को गले लगाकर ढांढस बंधाया पेप्सी शर्मा के घर पहुंचते ही सपना चौधरी ने सबसे पहले परिवार के सदस्यों से मुलाकात की। उन्हें देखते ही पेप्सी शर्मा की पत्नी रेनू भावुक हो गईं और गले लगकर रोने लगीं। सपना ने उन्हें संभालते हुए सांत्वना दी और भरोसा दिलाया कि वह इस मुश्किल समय में परिवार के साथ हैं। इस दौरान सपना भी अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख सकीं और उनकी आंखें नम हो गईं। महिलाओं के साथ बैठकर सुनी परिवार की पीड़ा इसके बाद सपना चौधरी शोक सभा में मौजूद महिलाओं के बीच जमीन पर बैठीं और परिवार का हालचाल जाना। उन्होंने पेप्सी शर्मा की तस्वीर के सामने हाथ जोड़कर श्रद्धांजलि अर्पित की। फिर उनकी मां, भाइयों और अन्य परिजनों से मिलकर दुख साझा किया। पेप्सी शर्मा के साथ सपना के डांस के PHOTOS बच्चों और पत्नी को सहयोग का भरोसा दिया परिवार से बातचीत के दौरान सपना ने रेनू और बच्चों को अपने दिल्ली स्थित आवास आने का न्योता दिया। उन्होंने कहा कि दुख की इस घड़ी में परिवार को किसी भी तरह की जरूरत हो तो वह हर संभव मदद के लिए तैयार हैं। सपना ने बच्चों का हालचाल भी जाना और उन्हें हिम्मत बनाए रखने की सलाह दी। वह करीब आधे घंटे तक परिवार के बीच रहीं। बोलीं- पेप्सी के जाने पर अब भी यकीन नहीं होता सपना चौधरी ने कहा- पेप्सी शर्मा के साथ उन्होंने कई मंच साझा किए थे और उनसे जुड़ी अनगिनत यादें हैं। वह अपने खास अंदाज से लोगों का मनोरंजन करते थे और जहां भी जाते थे, माहौल खुशनुमा बना देते थे। कभी नहीं लगा था कि वह इतनी कम उम्र में सभी को छोड़कर चले जाएंगे। भाई बोले- अब आखिरी निशानी उनका फोन पेप्सी शर्मा के बड़े भाई ऋषिपाल शर्मा ने बताया- उनके पास अब भाई की आखिरी निशानी के रूप में उनका मोबाइल फोन बचा है। हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली समेत कई राज्यों से लगातार उनके चाहने वालों के फोन आ रहे हैं और लोग परिवार को सांत्वना दे रहे हैं। ऋषिपाल ने बताया कि सोनोटेक कंपनी के मालिक की ओर से परिवार को 25 हजार रुपए की आर्थिक सहायता दी गई है। श्रद्धांजलि सभा में मौजूद कलाकारों ने सामूहिक रूप से निर्णय लिया कि प्रत्येक वर्ष 7 जून को पेप्सी शर्मा की स्मृति में उनके गांव पतला में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। 7 जून को हार्ट अटैक से हुआ था निधन यशपाल शर्मा उर्फ पेप्सी शर्मा का 7 जून को हार्ट अटैक आने से निधन हो गया था। उनकी अस्थियां ब्रजघाट पर गंगा नदी में विसर्जित की गईं थीं। पेप्सी शर्मा ने सपना चौधरी के साथ अनेक रागनी कार्यक्रमों में प्रस्तुति दी थी। पेप्सी अपनी पत्नी और बेटी के साथ नोएडा में रहते थे, जबकि उनका बेटा गांव में अपनी दादी और ताऊ के पास रहता है। ग्राफिक्स में सपना और पेप्सी के बारे में जानिए… —————————————- यह खबर भी पढ़ें… फैमिली-डिस्प्यूट के बीच सपना चौधरी ने पति पर जताया प्यार:रील बनाकर लिखा- मन्ने तेरे पै मर लेन दें; 2 दिन पहले कोर्ट से सिक्योरिटी मांगी मशहूर हरियाणवी डांसर-सिंगर सपना चौधरी और उसके पति वीर साहू के बीच चल रहा विवाद पिछले तीन दिनों से खूब चर्चा में है। पहले सपना ने दिल्ली की द्वारिका महिला कोर्ट में पति के खिलाफ घरेलू हिंसा की शिकायत की। (पूरी खबर पढ़ें)
South Korea Wins 2-1 vs Czech Republic

मैक्सिको18 मिनट पहले कॉपी लिंक जीत सेलिब्रेट करते साउथ कोरिया के खिलाड़ी। साउथ कोरिया ने फुटबॉल वर्ल्ड कप में जीत से शुरुआत की है। उसने मैक्सिको के एस्टाडियो ग्वाडलाहारा में शुक्रवार को ग्रुप-ए के मुकाबले में चेक रिपब्लिक को 2-1 के अंतर से हराया। कोरियाई टीम 65 मिनट तक 0-1 से पिछड़ रही थी। ह्वांग इन-बोम ने 67वें मिनट और सब्स्टीट्यूट प्लेयर ओ आयन-जीवाययू ने 80वें मिनट में गोल करके अपनी टीम को इस वर्ल्ड कप में पहली जीत दिला दी। ओ ने मैदान पर उतरने के महज 11 मिनट बाद गोल कर दिया। आखिरी के 10 मिनट में कोई गोल नहीं आया। 3 फोटो देखिए जीत के बाद साउथ कोरिया के खिलाड़ी खुशी से मैदान पर ही लेट गए। साउथ कोरिया ने अपने वर्ल्ड कप अभियान का आगाज जीत से किया है। साउथ कोरिया के गोलकीपर किम स्युंग-ग्यु (दाएं) ओ ह्योन-ग्यु (बीच में) और किम मिन-जे के साथ सेलिब्रेट करते हुए। चेक रिपब्लिक के व्लादिमीर कूफाल हार से निराश होकर मैदान पर बैठ गए। मैच के गोल…? पहला: कप्तान के गोल से चेकिया को बढ़त चेक रिपब्लिक के व्लादिमीर कूफाल के लंबे पास पर कप्तान कप्तान लाडीस्लाव क्रेजची ने गोल पोस्ट के किनारे से हेडर के जरिए गोल में पहुंचा दिया। कोरियाई गोलकीपर किम स्युंग-ग्यु इसे रोक नहीं सके। कप्तान क्रेज़ी के इस गोल से चेकिया ने मैच में शुरुआती बढ़त हासिल कर ली। दूसरा: इन-बोम ने बराबरी का गोल दागाचेकिया की बढ़त ज्यादा देर नहीं टिक सकी। 67वें मिनट में मिडफील्ड में ली कांग-इन ने ली गी-ह्युक का पास लेकर शानदार थ्रू बॉल पेनल्टी एरिया में पहुंचाई। ह्वांग इन-बोम ने गोलकीपर को अपनी लाइन से बाहर खींचा और फिर डिफेंडर को छकाकर दाएं पैर से चिप शॉट खेलकर गोल दागा। इस गोल से साउथ कोरिया ने 1-1 की बराबरी हासिल कर ली। तीसरा: कोरिया के ओ ने विजय गोल दागा 80वें मिनट में पैक ने डिफेंस के ऊपर से बेहतरीन फर्स्ट-टाइम पास खेला, जिस पर ह्वांग इन-बोम तेजी से आगे बढ़े। उन्होंने बॉक्स के अंदर सटीक क्रॉस दिया, जिसे सब्स्टीट्यूट ओ आयन-जीवाययू ने बिना समय गंवाए गोल में पहुंचा दिया। गोल रहित रहा पहला हाफ, कोरिया हावी रही मैच का पहला हाफ गोल रहित रहा। इसमें कोरियाई टीम का दबदबा रहा। क्योंकि, उसने ज्यादा मौके बनाए। चेकिया ने मैच में अटैकिंग स्टार्ट किया, लेकिन थोड़े ही समय में डिफेंसिव हो गई।कोरियाई कप्तान सोन ह्युंग-मिन और ली कांग-इन ने मिडफील्ड में बेहतरीन तालमेल दिखाते हुए लगातार मौके बनाए। लेकिन, उन्हें सफलता नहीं मिली। चेकिया का एक गोल अमान्य हुआ 78वें मिनट में चेक रिपब्लिक ने गोल करके 2-1 की बढ़त हासिल कर ली थी, लेकिन यह गोल ऑफसाइड के कारण अमान्य कर दिया गया। फ्री-किक पर व्लादिमीर कूफाल के साथ खड़े मिखाल सादिलेक ने गेंद को गोल पोस्ट के किनारे पर पहुंचाया, जहां टॉमस सूचेक ने शानदार हेडर से गेंद को नेट में भेज दिया। गोल के तुरंत बाद सहायक रेफरी ने ऑफसाइड का झंडा उठा दिया। इसके चलते चेकिया की खुशी ज्यादा देर नहीं टिक सकी और स्कोर बराबर ही रहा। वर्ल्ड कप में रिकॉर्ड 1-0 हुआ इस जीत के साथ वर्ल्ड फुटबॉल रैंकिंग में 25वें नंबर की टीम साउथ कोरिया ने 41वें पायदान की टीम चेक रिपब्लिक के साथ वर्ल्ड कप रिकॉर्ड 1-0 कर लिया है। क्योंकि, दोनों टीमें इस टूर्नामेंट में पहली बार खेल रही थीं। ओवरऑल रिकॉर्ड में भी कोरियाई टीम 2-1 के रिकॉर्ड से आगे हो गई है। दोनों के बीच यह 5वां इंटरनेशनल मैच था। दोनों के बीच दो मैच ड्रॉ हुए हैं। जबकि एक जीत चेक रिपब्लिक को मिली है। दोनों टीमों की स्टार्टिंग इलेवन साउथ कोरिया: गोलकीपर- स्युंग-ग्यू, डिफेंडर- ली हान-बोम, मिन-जे, ली ते-सोक, सीलो यंग-वू। मिडफील्डर्स- ली-ह्युक, ह्वांग इन-बोम, पइक स्युंग-हो, ली जे-सुंग, ली कांग-इन। अटैक- सोन ह्युंग-मिन। चेक रिपब्लिक: गोलकीपर- मातेज कोवार, डिफेंडर्स- रॉबिन ह्रानाच, व्लादिमिर कूफाल, स्टीफन शलूपेक, लाडीस्लाव क्रेजची, जारोस्लाव जेलेनी। मिडफील्डर्स- लुकास प्रोवोड, टॉमस सूचेक, अलेक्जेंडर सोयका। अटैक-पैट्रिक शेक, पावेल सल्क। ——————————————- फुटबॉल वर्ल्ड कप से जुड़ी यह खबर भी पढ़िए… पॉपस्टार शकीरा ने ओपनिंग सेरेमनी में ‘डाई-डाई’ सॉन्ग गाया; मैक्सिको ने साउथ अफ्रीका को हराया फुटबॉल वर्ल्ड कप की शुरुआत हो चुकी है। गुरुवार रात को मैक्सिको में 39 दिन चलने वाले इस टूर्नामेंट की ओपनिंग सेरेमनी हुई। इसमें पॉप स्टार शकीरा और नाइजीरियाई सिंगर बर्ना बॉय ने परफॉर्म किया। दोनों ने मिलकर FIFA का ऑफिशियल सॉन्ग ‘डाई-डाई’ गाया। पढ़ें पूरी खबर दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
South Korea Wins 2-1 vs Czech Republic

मैक्सिको10 मिनट पहले कॉपी लिंक जीत सेलिब्रेट करते साउथ कोरिया के खिलाड़ी। साउथ कोरिया ने फुटबॉल वर्ल्ड कप अभियान की शुरुआत जीत से की। उसने शुक्रवार को चेक गणराज्य को 2-1 से हराया। ग्रुप-ए मुकाबले में ह्वांग इन-बोम ने एक गोल किया और एक गोल में मदद की। मैक्सिको के एस्टाडियो ग्वाडलाहारा में खेले गए मैच का पहला हाफ गोल रहित रहा। 59वें मिनट में चेक गणराज्य के कप्तान लाडिस्लाव क्रेजी ने हेडर से टीम को बढ़त दिलाई। हालांकि, साउथ कोरिया ने 67वें मिनट में ह्वांग इन-बोम के गोल से बराबरी कर ली। 80वें मिनट में उनके सटीक क्रॉस पर ओह ह्योन-ग्यू ने गोल कर टीम को 2-1 से आगे कर दिया। साउथ कोरिया ने 2010 के बाद पहली बार फुटबॉल वर्ल्ड कप में अपना पहला मैच जीता है। टीम ने लगातार तीसरे वर्ल्ड कप में किसी यूरोपीय टीम को हराया है। उसका अगला मैच मेजबान मैक्सिको से 19 जून को सुबह 6:30 बजे होगा। 3 फोटो देखिए जीत के बाद साउथ कोरिया के खिलाड़ी खुशी से मैदान पर ही लेट गए। साउथ कोरिया ने अपने वर्ल्ड कप अभियान का आगाज जीत से किया है। साउथ कोरिया के गोलकीपर किम स्युंग-ग्यु (दाएं) ओ ह्योन-ग्यु (बीच में) और किम मिन-जे के साथ सेलिब्रेट करते हुए। चेक रिपब्लिक के व्लादिमीर कूफाल हार से निराश होकर मैदान पर बैठ गए। मैच के गोल…? पहला: कप्तान के गोल से चेकिया को बढ़तचेक रिपब्लिक के व्लादिमीर कूफाल के लंबे पास पर कप्तान लाडीस्लाव क्रेजची ने गोल पोस्ट के किनारे से हेडर लगाकर गेंद गोल में पहुंचा दी। कोरियाई गोलकीपर किम स्युंग-ग्यु इसे नहीं रोक सके। इस गोल से चेकिया ने शुरुआती बढ़त हासिल कर ली। दूसरा: इन-बोम ने बराबरी का गोल दागाचेकिया की बढ़त ज्यादा देर नहीं टिक सकी। 67वें मिनट में मिडफील्ड में ली कांग-इन ने ली गी-ह्युक का पास लेकर शानदार थ्रू बॉल पेनल्टी एरिया में पहुंचाई। ह्वांग इन-बोम ने गोलकीपर को लाइन से बाहर खींचा, फिर डिफेंडर को छकाकर दाएं पैर से चिप शॉट खेलते हुए गोल दागा। इस गोल से साउथ कोरिया ने 1-1 की बराबरी कर ली। तीसरा: कोरिया के ओ ने विजय गोल दागा80वें मिनट में पैक ने डिफेंस के ऊपर से बेहतरीन फर्स्ट-टाइम पास खेला, जिस पर ह्वांग इन-बोम तेजी से आगे बढ़े। उन्होंने बॉक्स के अंदर सटीक क्रॉस दिया। सब्स्टीट्यूट ओ आयन-जीवाययू ने उसे बिना समय गंवाए गोल में पहुंचा दिया। पहले हाफ में कोरिया हावी रही, गोल नहीं मैच का पहला हाफ गोल रहित रहा। इसमें कोरियाई टीम का दबदबा रहा, क्योंकि उसने ज्यादा मौके बनाए। चेकिया ने अटैकिंग शुरुआत की, लेकिन जल्द ही डिफेंसिव हो गई। कोरियाई कप्तान सोन ह्युंग-मिन और ली कांग-इन ने मिडफील्ड में बेहतरीन तालमेल से लगातार मौके बनाए, लेकिन सफलता नहीं मिली। चेकिया का एक गोल अमान्य हुआ 78वें मिनट में चेक रिपब्लिक ने गोल कर 2-1 की बढ़त बना ली थी, लेकिन ऑफसाइड के कारण गोल अमान्य कर दिया गया। फ्री-किक पर व्लादिमीर कूफाल के साथ खड़े मिखाल सादिलेक ने गेंद गोल पोस्ट के किनारे पहुंचाई, जहां टॉमस सूचेक ने हेडर से उसे नेट में भेज दिया। गोल के तुरंत बाद सहायक रेफरी ने ऑफसाइड का झंडा उठा दिया। इससे चेकिया की खुशी ज्यादा देर नहीं टिक सकी और स्कोर बराबर रहा। वर्ल्ड कप में रिकॉर्ड 1-0 हुआ इस जीत के साथ वर्ल्ड फुटबॉल रैंकिंग में 25वें नंबर की टीम साउथ कोरिया ने 41वें पायदान की चेक रिपब्लिक के खिलाफ वर्ल्ड कप रिकॉर्ड 1-0 कर लिया है। दोनों टीमें इस टूर्नामेंट में पहली बार आमने-सामने थीं। ओवरऑल रिकॉर्ड में भी कोरियाई टीम 2-1 से आगे हो गई है। दोनों के बीच यह पांचवां इंटरनेशनल मैच था। दो मुकाबले ड्रॉ रहे, जबकि एक जीत चेक रिपब्लिक को मिली है। दोनों टीमों की स्टार्टिंग इलेवन साउथ कोरिया: गोलकीपर- स्युंग-ग्यू, डिफेंडर- ली हान-बोम, मिन-जे, ली ते-सोक, सीलो यंग-वू। मिडफील्डर्स- ली-ह्युक, ह्वांग इन-बोम, पइक स्युंग-हो, ली जे-सुंग, ली कांग-इन। अटैक- सोन ह्युंग-मिन। चेक रिपब्लिक: गोलकीपर- मातेज कोवार, डिफेंडर्स- रॉबिन ह्रानाच, व्लादिमिर कूफाल, स्टीफन शलूपेक, लाडीस्लाव क्रेजची, जारोस्लाव जेलेनी। मिडफील्डर्स- लुकास प्रोवोड, टॉमस सूचेक, अलेक्जेंडर सोयका। अटैक-पैट्रिक शेक, पावेल सल्क। ——————————————- फुटबॉल वर्ल्ड कप से जुड़ी यह खबर भी पढ़िए… पॉपस्टार शकीरा ने ओपनिंग सेरेमनी में ‘डाई-डाई’ सॉन्ग गाया; मैक्सिको ने साउथ अफ्रीका को हराया फुटबॉल वर्ल्ड कप की शुरुआत हो चुकी है। गुरुवार रात को मैक्सिको में 39 दिन चलने वाले इस टूर्नामेंट की ओपनिंग सेरेमनी हुई। इसमें पॉप स्टार शकीरा और नाइजीरियाई सिंगर बर्ना बॉय ने परफॉर्म किया। दोनों ने मिलकर FIFA का ऑफिशियल सॉन्ग ‘डाई-डाई’ गाया। पढ़ें पूरी खबर दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
कोच के निधन का पता चलते मनु ने मैच रोका:पिस्टल छोड़ जमीन पर बैठीं; कल शाम फोन पर जसपाल ने कहा था- अब तबीयत में सुधार

ओलिंपियन मेडलिस्ट शूटर मनू भाकर के कोच जसपाल राणा का 49 साल की उम्र में निधन हो गया। कोच के निधन की खबर सुनते ही मनु भाकर के हाथ से पिस्टल छूट गई। कुछ पल के मनु एक जगह ही खड़ी रहीं। इसके बाद भावुक होकर वहीं जमीन पर बैठ गईं। उन्होंने शूटिंग मुकाबला भी बीच में ही छोड़ दिया। मनु राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर में हिस्सा लेने के लिए देहरादून गई हैं। यहां 25 मीटर एयर पिस्टल में मैच खेल रही थीं। परिजनों का कहना है कि मनु प्रतियोगिता में बिजी थी, इसीलिए कई घंटों तक उनसे ये बात छिपानी पड़ी। सुबह करीब 10 बजे उन्हें कोच के निधन की बात बताई गई, इसके बाद मनु ने बीच में ही अपना मैच रोक दिया। जसपाल के हार्ट में स्टेंट डला था एक जून की रात को म्यूनिख से लौटते समय फ्लाइट में जसपाल की तबीयत खराब हो गई थी, जहां उन्हें मेडिकल हेल्प दी गई थी। दिल्ली पहुंचते ही जसपाल को मैक्स साकेत हास्पिटल में एडमिट कराया गया। टेस्ट के बाद उन्हें हार्ट में एक स्टेंट डाला गया था। शुक्रवार सुबह उनका निधन हो गया। कल शाम तक हुई थी बातचीत कोच जसपाल की तबीयत खराब होने के बाद मनु लगातार उनके टच में थी। गुरुवार शाम भी उन्होंने फोन पर जसपाल से बातचीत की थी। बातचीत के दौरान कोच ने तबीयत में सुधार और जल्द ही ठीक होने की बात कही थी, मगर अगले दिन ही उनका निधन हो गया। मनु के करियर में कोच जसपाल का बड़ा रोल अंतिम दर्शन के लिए जाएंगी मनु कोच के निधन की खबर मिलने के बाद मनु भाकर ने अपने सभी कार्यक्रम और स्पोर्ट्स इवेंट स्थगित कर दिए हैं। देहरादून से वे सीधे कोच को अंतिम विदाई देने के लिए जाएंगी।
फिल्म 'काला हिरण' का फर्स्ट लुक रिलीज:नाम बदलकर सलमान खान और लॉरेंस का जिक्र किया गया; देखें वीडियो

सलमान खान के चर्चित काला हिरण मामले से प्रेरित फिल्म ‘काला हिरण: द बैटल फॉर लेगेसी’ का फर्स्ट लुक जारी कर दिया गया है। फिल्म का पहला वीडियो शुक्रवार को रिलीज हुआ। जिसमें सलमान खान का जिक्र अयान खान और लॉरेंस का जिक्र लॉयन के नाम से किया गया है। वीडियो में काला हिरण शिकार केस और कानूनी लड़ाई से जुड़े मामले को दिखाया गया है। कई डायलॉग बिश्नोई समाज के त्याग और वन्यजीव संरक्षण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता दिखा रहे हैं। फिल्म का निर्देशन भारत एस. श्रीनाथे ने किया है। जबकि अमित जानी इसके लेखक और निर्माता हैं। फिल्म का ग्लोबल टीजर 20 जून को रिलीज किया जाएगा। ‘काला हिरण’ को लेकर सलमान ने लीगल नोटिस भेजा ‘काला हिरण’ को लेकर सलमान की ओर से लीगल नोटिस भेजा गया था। न्यूज18 की रिपोर्ट में बताया गया था कि सलमान की ओर से लॉ फर्म DSK लीगल ने कास्टिंग डायरेक्टर अक्षय पांडे को एक लीगल नोटिस भेजा है। इस नोटिस में ‘काला हिरण’ नाम की प्रस्तावित फिल्म के प्रोडक्शन और प्रमोशन को तुरंत रोकने की मांग की गई। सलमान की ओर से मिले लीगल नोटिस को फाड़ा फिल्म ‘काला हिरण’ को लेकर जारी विवाद के बीच फिल्म के प्रोड्यूसर अमित जानी ने सलमान खान की ओर से मिले लीगल नोटिस को फाड़ दिया। जानी ने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर किए वीडियो में कहा, हर कोई मुझसे पूछ रहा है, मीडिया, दोस्त, कि सलमान खान के नोटिस पर आपको क्या कहना है? इस नोटिस पर मैं क्या कहूं? पिछले 36 घंटों से उनकी डोंगरी, धारावी, जोगेश्वरी के मुस्लिम लड़कों की फैन फॉलोइंग, उनके टूलकिट ने मुझे जान से मारने, मुंबई आने और सिर कलम करने के हजारों मैसेज भेजे हैं और उनके टूलकिट के जरिए एक मैसेज, चाहे वह असली हो या नकली, मुझे नहीं पता, डी-कंपनी के नाम से भेजा गया है। डी-कंपनी छोड़ेगी नहीं। जानी ने आगे कहा कि तो मैं किसका जवाब दूं? क्या मैं सलमान खान की टूलकिट द्वारा हजारों गालियां दिलवाई गईं और धमकियां दिलवाई गईं, उनका जवाब दूं? क्या मैं इस नोटिस का जवाब दूं? वहीं, इससे पहले ऑफिशियल फेसबुक अकाउंट में पोस्ट किए वीडियो में अमित जानी ने कहा था कि हमारी पूरी फिल्म सलमान खान की बायोपिक नहीं है। हमारी पूरी फिल्म सलमान खान के नजरिए से नहीं है। वहीं ABP न्यूज के साथ बातचीत में जानी ने कहा था कि ‘काला हिरण’ बिश्नोई समाज के संघर्ष, उनकी विरासत और वन्यजीवों के प्रति उनके समर्पण को दिखाती है। सलमान खान फिल्म का सिर्फ एक पार्ट हैं। 1998 में काला हिरण शिकार मामला सामने आया सलमान खान से जुड़ा काला हिरण शिकार मामला साल 1998 में सामने आया था, जब वो जोधपुर में फिल्म ‘हम साथ-साथ हैं’ की शूटिंग कर रहे थे। सलमान के खिलाफ कुल चार केस दर्ज किए गए थे। इनमें दो चिंकारा शिकार मामले, एक कांकाणी काला हिरण शिकार मामला और एक आर्म्स एक्ट का मामला शामिल था। काला हिरण शिकार मामले में बिश्नोई समुदाय की शिकायत पर सलमान के साथ सैफ अली खान, तब्बू, सोनाली बेंद्रे और नीलम के खिलाफ भी केस दर्ज किया गया था। अप्रैल 2006 में चिंकारा शिकार मामलों में सलमान को सजा सुनाई गई। जनवरी 2017 में उन्हें आर्म्स एक्ट मामले में बरी कर दिया गया। वहीं, 5 अप्रैल 2018 को काला हिरण शिकार मामले में उन्हें 5 साल की जेल और 10 हजार रुपए जुर्माने की सजा मिली। इसी मामले में बाकी कलाकारों को बरी कर दिया गया था। बाद में सलमान को जमानत मिल गई। फिलहाल यह मामला राजस्थान हाई कोर्ट में लंबित है। अगली सुनवाई 13 जुलाई 2026 के लिए तय की है। सलमान खान फिलहाल जमानत पर बाहर हैं।
फिल्म 'काला हिरण' का फर्स्ट लुक रिलीज:नाम बदलकर सलमान खान और लॉरेंस का जिक्र किया गया; देखें वीडियो

सलमान खान के चर्चित काला हिरण मामले से प्रेरित फिल्म ‘काला हिरण: द बैटल फॉर लेगेसी’ का फर्स्ट लुक जारी कर दिया गया है। फिल्म का पहला वीडियो शुक्रवार को रिलीज हुआ। जिसमें सलमान खान का जिक्र अयान खान और लॉरेंस का जिक्र लॉयन के नाम से किया गया है। वीडियो में काला हिरण शिकार केस और कानूनी लड़ाई से जुड़े मामले को दिखाया गया है। कई डायलॉग बिश्नोई समाज के त्याग और वन्यजीव संरक्षण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता दिखा रहे हैं। फिल्म का निर्देशन भारत एस. श्रीनाथे ने किया है। जबकि अमित जानी इसके लेखक और निर्माता हैं। फिल्म का ग्लोबल टीजर 20 जून को रिलीज किया जाएगा। ‘काला हिरण’ को लेकर सलमान ने लीगल नोटिस भेजा ‘काला हिरण’ को लेकर सलमान की ओर से लीगल नोटिस भेजा गया था। न्यूज18 की रिपोर्ट में बताया गया था कि सलमान की ओर से लॉ फर्म DSK लीगल ने कास्टिंग डायरेक्टर अक्षय पांडे को एक लीगल नोटिस भेजा है। इस नोटिस में ‘काला हिरण’ नाम की प्रस्तावित फिल्म के प्रोडक्शन और प्रमोशन को तुरंत रोकने की मांग की गई। सलमान की ओर से मिले लीगल नोटिस को फाड़ा फिल्म ‘काला हिरण’ को लेकर जारी विवाद के बीच फिल्म के प्रोड्यूसर अमित जानी ने सलमान खान की ओर से मिले लीगल नोटिस को फाड़ दिया। जानी ने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर किए वीडियो में कहा, हर कोई मुझसे पूछ रहा है, मीडिया, दोस्त, कि सलमान खान के नोटिस पर आपको क्या कहना है? इस नोटिस पर मैं क्या कहूं? पिछले 36 घंटों से उनकी डोंगरी, धारावी, जोगेश्वरी के मुस्लिम लड़कों की फैन फॉलोइंग, उनके टूलकिट ने मुझे जान से मारने, मुंबई आने और सिर कलम करने के हजारों मैसेज भेजे हैं और उनके टूलकिट के जरिए एक मैसेज, चाहे वह असली हो या नकली, मुझे नहीं पता, डी-कंपनी के नाम से भेजा गया है। डी-कंपनी छोड़ेगी नहीं। जानी ने आगे कहा कि तो मैं किसका जवाब दूं? क्या मैं सलमान खान की टूलकिट द्वारा हजारों गालियां दिलवाई गईं और धमकियां दिलवाई गईं, उनका जवाब दूं? क्या मैं इस नोटिस का जवाब दूं? वहीं, इससे पहले ऑफिशियल फेसबुक अकाउंट में पोस्ट किए वीडियो में अमित जानी ने कहा था कि हमारी पूरी फिल्म सलमान खान की बायोपिक नहीं है। हमारी पूरी फिल्म सलमान खान के नजरिए से नहीं है। वहीं ABP न्यूज के साथ बातचीत में जानी ने कहा था कि ‘काला हिरण’ बिश्नोई समाज के संघर्ष, उनकी विरासत और वन्यजीवों के प्रति उनके समर्पण को दिखाती है। सलमान खान फिल्म का सिर्फ एक पार्ट हैं। 1998 में काला हिरण शिकार मामला सामने आया सलमान खान से जुड़ा काला हिरण शिकार मामला साल 1998 में सामने आया था, जब वो जोधपुर में फिल्म ‘हम साथ-साथ हैं’ की शूटिंग कर रहे थे। सलमान के खिलाफ कुल चार केस दर्ज किए गए थे। इनमें दो चिंकारा शिकार मामले, एक कांकाणी काला हिरण शिकार मामला और एक आर्म्स एक्ट का मामला शामिल था। काला हिरण शिकार मामले में बिश्नोई समुदाय की शिकायत पर सलमान के साथ सैफ अली खान, तब्बू, सोनाली बेंद्रे और नीलम के खिलाफ भी केस दर्ज किया गया था। अप्रैल 2006 में चिंकारा शिकार मामलों में सलमान को सजा सुनाई गई। जनवरी 2017 में उन्हें आर्म्स एक्ट मामले में बरी कर दिया गया। वहीं, 5 अप्रैल 2018 को काला हिरण शिकार मामले में उन्हें 5 साल की जेल और 10 हजार रुपए जुर्माने की सजा मिली। इसी मामले में बाकी कलाकारों को बरी कर दिया गया था। बाद में सलमान को जमानत मिल गई। फिलहाल यह मामला राजस्थान हाई कोर्ट में लंबित है। अगली सुनवाई 13 जुलाई 2026 के लिए तय की है। सलमान खान फिलहाल जमानत पर बाहर हैं।








