कॉन्टैक्ट लेंस सुरक्षा: आपकी आँखों में कांटेक्ट लेंस क्या हैं? जान लें कि इसे काफी देर तक सुरक्षित रखा जा सकता है

आप कब तक कॉन्टैक्ट लेंस पहन सकते हैं: प्लांट के झंझट से बचने और अपने लुक को बेहतर बनाने के लिए कंसल्टेक्ट स्पेक्ट्रम का इस्तेमाल काफी आम हो गया है। ऑफिस जाना हो, कोई पार्टी हो या फिर कॉलेज, बहुत से लोग रोज़ अपनी आँखों में प्लास्टिक लगाना पसंद करते हैं। यह तो शुरू हुआ है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि एक दिन या लगातार कई घंटों तक अपनी आंखें सुरक्षित रखें? तो जानें कि कंजेक्टेक्ट स्टॉक स्केल का सही तरीका और सुरक्षित समय क्या है। स्थिर को कितनी देर तक चलाना सुरक्षित है? आंखों के मूल्यांकन के अनुसार, कंसल्टैक्ट स्थिरता की एक निश्चित समय सीमा होती है। एक दिन में ज्यादातर 8 से 10 घंटे तक आपको हीकेंडेंट स्टेक-सेल्स की सुविधा मिलती है। कुछ विशेष प्रकार के सिलिकॉन सिलिकॉन जेल को 12 से 14 घंटे तक पहना जा सकता है, लेकिन यह आपके डॉक्टर की सलाह पर मान्य है।हमारी आंखों की पुतली को स्वस्थ रहने के लिए हवा से सीधे ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है। जब हम लंबे समय तक स्टेरॉयड और लाल स्टॉल तक पहुंच गए, तो आंखों तक ऑक्सीजन ठीक से नहीं पहुंच पाई। कौन सा स्थिर उपकरण सोना सही है? यह सबसे बड़ी घटना एक है जो लोग अक्सर करते हैं। समय हमारे बंद हो गए हैं, और अगर अंदर स्टेकलेस लगा हो, तो आंखों को ऑक्सीजन बिल्कुल नहीं मिलती। इससे आंखों में संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। गंभीर मामलों में, जैसे कॉर्नियल अल्सर यानी आंखों की रोशनी पर घाव भी हो सकता है, जिससे आंखों की रोशनी जाने का खतरा रहता है। अगर आपको झपकी भी लेनी है, तो पहले अपना स्थिरीकरण लें। किन बातों का रखना होगा खास तरीका? यदि आप नियमित रूप से इलेक्ट्रोस्टैटिक उपकरण रखते हैं, तो अपनी आंखों की सुरक्षा के लिए इन बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। हाथों की सफाई: स्थिर को प्लास्टिक, ड्रेन या यूनिट से पहले अपने हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोकर सुखा लें। सही समाधान का प्रयोग किया गया: स्थिर को साफ करने और स्टोर करने के लिए हमेशा अच्छे क्वालिटी के स्थिर समाधान का ही उपयोग करें। कभी भी पानी या प्लेस से प्लास्टिक को साफ न करें। पानी से दूरी: नहाते समय, पानी में तैरते समय या बारिश में भीगते समय, कभी भी स्थिर स्थिर स्थिर उपकरण। पानी में मौजूद स्थिर स्थिर उपकरणों से आंखों में गंभीर संक्रमण हो सकता है। मेकअप का सही तरीका: हमेशा पहले पोर्टेबल, और उसके बाद आंखों का मेकअप करें। इसी तरह, मेकअप हटाने से पहले हमेशा के लिए प्लास्टिक को हटा दें। इलेक्ट्रिकल की समाप्ति तिथि: हर स्थिर की एक लाइफ़ है। एक्सपायरी डेट के बाद कभी भी पुराने प्लास्टिक का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। डॉक्टर के पास कब जाएं? अगर आपको स्थिर दर्द या तकलीफ हो रही है या आंखें बहुत ज्यादा लाल हो गई हैं, तो डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इसके अलावा अगर आपकी आंखें लगातार पानी में डूबी या खराब दिख रही हैं तो डॉक्टर के पास जरूर जाएं। अगर आपकी आंखों में रोशनी कम हो रही है, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। इलेक्ट्रानिक इलेक्ट्रोस्टैटिक उपकरण पूरी तरह से सुरक्षित है, आप इसकी गुणवत्ता का सही से पालन करें। अपनी आंखों को आराम दें, साफ-सफाई का ध्यान रखें और तय समय से ज्यादा न खरीदें। यह अवश्य पढ़ें: लौकी का जूस: किन लोगों को नहीं चाहिए लौकी का जूस? फायदे की जगह नुकसान हो सकता है; जानिए सेवन का सही तरीका अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए तरीके, तरीके और दावे अलग-अलग विद्वानों पर आधारित हैं। रिपब्लिक भारत लेख में दी गई जानकारी के सही होने का दावा नहीं किया गया है। किसी भी उपचार और सुझाव को पहले डॉक्टर या डॉक्टर की सलाह से अवश्य लें।
क्रिकेटर ऋषभ पंत ने किए आदि कैलाश के दर्शन:आईटीबीपी जवानों के साथ मिलकर बढ़ाया हौसला, स्थानीय लोगों और प्रशंसकों के साथ तस्वीरें खिंचवाईं

भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार विकेटकीपर-बल्लेबाज ऋषभ पंत ने उत्तराखंड के सीमांत जिले पिथौरागढ़ स्थित आदि कैलाश और पंचाचूली क्षेत्र का दौरा किया। अपने निजी दौरे के दौरान उन्होंने भगवान शिव के पवित्र धाम आदि कैलाश में दर्शन कर पूजा-अर्चना की और क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता का भी आनंद लिया। पर्यटन कारोबारियों का मानना है कि ऋषभ पंत जैसे लोकप्रिय क्रिकेटर के इस दौरे से आदि कैलाश, पंचाचूली और दारमा घाटी को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी। इससे न केवल धार्मिक और साहसिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि सीमांत क्षेत्रों की स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है। 10 जून को पंचाचूली का किया दीदार भारतीय क्रिकेटर ऋषभ पंत ने 10 जून को पिथौरागढ़ की दारमा घाटी पहुंचकर अपने सीमांत क्षेत्र के दौरे की शुरुआत की। यहां उन्होंने विश्व प्रसिद्ध पंचाचूली पर्वत श्रृंखला और आसपास की प्राकृतिक वादियों का भ्रमण किया। नाबी गांव के होम स्टे में रुके दारमा घाटी दौरे के दौरान ऋषभ पंत नाबी गांव स्थित एक होम स्टे में ठहरे। उनके आगमन की जानकारी मिलने पर स्थानीय लोगों में उत्साह का माहौल बन गया और कई लोग उनसे मिलने पहुंचे। 12 जून को आदि कैलाश पहुंचकर की पूजा-अर्चना होम स्टे संचालक सुरेंद्र सिंह नबियाल ने बताया कि 12 जून को ऋषभ पंत ज्योलिंगकांग स्थित आदि कैलाश पहुंचे। यहां उन्होंने शिव-पार्वती मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना कर भगवान शिव का आशीर्वाद लिया और पवित्र धाम में कुछ समय बिताया। आईटीबीपी के जवानों से की मुलाकात आदि कैलाश दौरे के दौरान ऋषभ पंत ने भारत-तिब्बत सीमा क्षेत्र में तैनात जवानों से मुलाकात कर उनका उत्साहवर्धन किया। इसके अलावा उन्होंने स्थानीय लोगों और प्रशंसकों के साथ तस्वीरें खिंचवाईं तथा कई फैंस को ऑटोग्राफ देकर अपने दौरे का समापन किया। गंगोलीहाट में है पैतृक गांव ऋषभ पंत का उत्तराखंड से गहरा जुड़ाव है। उनका पैतृक संबंध पिथौरागढ़ जिले के गंगोलीहाट क्षेत्र से है। यही वजह है कि उनका आदि कैलाश और दारमा घाटी का दौरा स्थानीय लोगों के लिए विशेष महत्व रखता है। सीमांत क्षेत्र पहुंचने पर लोगों ने उन्हें अपने बीच पाकर खुशी जताई, जबकि पंत ने भी स्थानीय संस्कृति, धार्मिक आस्था और क्षेत्र की प्राकृतिक विरासत के प्रति अपना लगाव प्रदर्शित किया।
एंथ्रोपिक का सबसे एडवांस्ड AI मॉडल दुनियाभर में बंद:अमेरिकी सरकार को साइबर हमले का डर, विदेशी नागरिकों तक पहुंच रोकने का आदेश दिया था

AI स्टार्टअप कंपनी एंथ्रोपिक ने अपने सबसे एडवांस AI मॉडल्स ‘क्लाउड फेबल 5’ और ‘मिथॉस 5’ को दुनियाभर में बंद कर दिया है। कंपनी ने यह फैसला अमेरिकी सरकार के उस आदेश के बाद लिया है, जिसमें विदेशी नागरिकों के लिए इन मॉडल्स के इस्तेमाल पर रोक लगाने को कहा गया था। अब भारतीयों समेत कोई भी गैर-अमेरिकी नागरिक इनका इस्तेमाल नहीं कर पाएगा। अमेरिकी अधिकारियों ने इसके पीछे नेशनल सिक्योरिटी और साइबर हमलों के खतरे का हवाला दिया है। यह पहली बार है जब किसी सरकार ने हार्डवेयर या चिप्स के बजाय सीधे AI सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाया है। जेलब्रेक के जरिए साइबर हमले का डर अमेरिकी सरकार को डर है कि इन एडवांस AI मॉडल के जरिए सुरक्षा घेरे को ‘जेलब्रेक’ यानी डिजिटल जेल को बाईपास किया जा सकता है। ऐसा होने पर इनका इस्तेमाल कंप्यूटर सिस्टम्स में कमियां ढूंढने, सरकारी डेटा हैक करने या बैंकिंग सिस्टम और क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़े साइबर हमले करने के लिए किया जा सकता है। ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेजॉन के रिसर्चर्स ने एक टेस्टिंग के दौरान कुछ खास प्रॉम्प्ट्स का इस्तेमाल करके एंथ्रोपिक के मॉडल से सॉफ्टवेयर की कुछ कमियां निकलवा ली थीं। इसकी जानकारी अमेरिकी वाणिज्य विभाग को दी गई, जिसके तुरंत बाद यह कड़ा एक्शन लिया गया। कंपनी बोली- पाबंदी का फैसला गलत इस मामले पर एंथ्रोपिक का कहना है कि सरकार का यह फैसला एक बड़ी गलतफहमी का नतीजा है। कंपनी के मुताबिक, जो कमियां पाई गई थीं, वे बहुत सीमित थीं और वैसी कमियां बाजार में मौजूद दूसरे पब्लिक AI मॉडल्स भी ढूंढ सकते हैं। इसके लिए इतने बड़े पैमाने पर पूरी दुनिया में बैन लगाना सही नहीं है। कंपनी ने बताया कि लॉन्चिंग से पहले उन्होंने अमेरिकी सरकारी एजेंसियों और ब्रिटेन के AI सेफ्टी इंस्टीट्यूट के साथ हफ्तों तक इसकी टेस्टिंग की थी, तब किसी को ऐसा कोई बड़ा खतरा नहीं मिला था। कंपनी अब सरकार से बातचीत कर रही है ताकि इस एक्सेस को जल्द से जल्द बहाल किया जा सके। तब तक यूजर्स कंपनी के बाकी पुराने AI मॉडल्स का इस्तेमाल कर सकते हैं। ट्रंप प्रशासन के साथ पहले से चल रहा था विवाद एंथ्रोपिक और ट्रंप प्रशासन के बीच पिछले कुछ महीनों से तनाव चल रहा है। दरअसल, कंपनी ने अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों को डोमेस्टिक सर्विलांस (घरेलू जासूसी) और पूरी तरह से ऑटोमैटिक चलने वाले हथियारों में अपने AI मॉडल का इस्तेमाल करने देने से मना कर दिया था। इसके बाद पेंटागन ने एंथ्रोपिक को ‘सप्लाई-चेन रिस्क’ की लिस्ट में डाल दिया था। यह विवाद ऐसे समय में बढ़ा है जब कंपनी शेयर बाजार में अपना IPO लाने की तैयारी कर रही है, जिससे उसकी मार्केट वैल्यू करीब 1 ट्रिलियन डॉलर (लगभग 92 लाख करोड़ रुपए) आंकी जा रही है। जोहो फाउंडर श्रीधर वेम्बू बोले- ग्लोबलाइजेशन अब खत्म अब तक अमेरिका का ध्यान सिर्फ AI चिप्स और सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी को दूसरे देशों (विशेषकर चीन) तक पहुंचने से रोकने पर था। लेकिन सॉफ्टवेयर पर लगे इस नए बैन ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। भारतीय टेक कंपनी जोहो के फाउंडर श्रीधर वेम्बू ने इस फैसले पर चिंता जताते हुए इसे भारत के लिए एक बड़ा वेक-अप कॉल बताया है। वेम्बू ने कहा कि अब ग्लोबलाइजेशन खत्म हो चुका है। भारत को अब विदेशी कंपनियों पर निर्भर रहने के बजाय तेजी से अपनी खुद की सॉवरेन AI क्षमताएं डेवलप करनी चाहिए और ओपन-सोर्स मॉडल्स को बढ़ावा देना चाहिए, क्योंकि भविष्य में कोई भी देश कभी भी अपनी टेक्नोलॉजी का एक्सेस बंद कर सकता है। नॉलेज बॉक्स: क्या होता है ‘जेलब्रेक’ और ‘सॉवरेन AI’? जेलब्रेक: AI मॉडल्स में कुछ सुरक्षा नियम सेट किए जाते हैं, ताकि वे बम बनाना, साइबर हमला करना या अवैध काम सिखाने जैसी जानकारियां न दें। जब कोई हैकर या यूजर चालाकी से इन नियमों को तोड़कर AI से प्रतिबंधित जानकारी निकलवा लेता है, तो उसे ‘जेलब्रेक’ कहते हैं। सॉवरेन AI: किसी देश की ओर से खुद के डेटा, इंफ्रास्ट्रक्चर और वैज्ञानिकों की मदद से तैयार किया गया घरेलू AI सिस्टम। इस पर किसी बाहरी देश या विदेशी कंपनी का नियंत्रण नहीं होता। ———— ये खबर भी पढ़ें… मिथॉस AI से बैंकिंग सिस्टम पर साइबर हमले का खतरा: वित्त मंत्री सीतारमण ने हाई-लेवल मीटिंग की; क्या है मिथॉस और यह क्यों खतरनाक वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को बैंकों के प्रमुखों के साथ एक हाई-लेवल मीटिंग की। इस बैठक में एंथ्रोपिक के ‘क्लॉड मिथॉस’ AI मॉडल से बैंकिंग सेक्टर को होने वाले संभावित खतरों पर चर्चा की गई। यह एआई मॉडल इतना एडवांस है कि हैकर इसका इस्तेमाल दशकों पुरानी अज्ञात खामियों को खोजकर फाइनेंशियल सेक्टर पर साइबर हमले कर सकते हैं। पूरी खबर पढ़ें…
एंथ्रोपिक का सबसे एडवांस्ड AI मॉडल दुनियाभर में बंद:अमेरिकी सरकार को साइबर हमले का डर, विदेशी नागरिकों तक पहुंच रोकने का आदेश दिया था

AI स्टार्टअप कंपनी एंथ्रोपिक ने अपने सबसे एडवांस AI मॉडल्स ‘क्लाउड फेबल 5’ और ‘मिथॉस 5’ को दुनियाभर में बंद कर दिया है। कंपनी ने यह फैसला अमेरिकी सरकार के उस आदेश के बाद लिया है, जिसमें विदेशी नागरिकों के लिए इन मॉडल्स के इस्तेमाल पर रोक लगाने को कहा गया था। अब भारतीयों समेत कोई भी गैर-अमेरिकी नागरिक इनका इस्तेमाल नहीं कर पाएगा। अमेरिकी अधिकारियों ने इसके पीछे नेशनल सिक्योरिटी और साइबर हमलों के खतरे का हवाला दिया है। यह पहली बार है जब किसी सरकार ने हार्डवेयर या चिप्स के बजाय सीधे AI सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाया है। जेलब्रेक के जरिए साइबर हमले का डर अमेरिकी सरकार को डर है कि इन एडवांस AI मॉडल के जरिए सुरक्षा घेरे को ‘जेलब्रेक’ यानी डिजिटल जेल को बाईपास किया जा सकता है। ऐसा होने पर इनका इस्तेमाल कंप्यूटर सिस्टम्स में कमियां ढूंढने, सरकारी डेटा हैक करने या बैंकिंग सिस्टम और क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़े साइबर हमले करने के लिए किया जा सकता है। ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेजॉन के रिसर्चर्स ने एक टेस्टिंग के दौरान कुछ खास प्रॉम्प्ट्स का इस्तेमाल करके एंथ्रोपिक के मॉडल से सॉफ्टवेयर की कुछ कमियां निकलवा ली थीं। इसकी जानकारी अमेरिकी वाणिज्य विभाग को दी गई, जिसके तुरंत बाद यह कड़ा एक्शन लिया गया। कंपनी बोली- पाबंदी का फैसला गलत इस मामले पर एंथ्रोपिक का कहना है कि सरकार का यह फैसला एक बड़ी गलतफहमी का नतीजा है। कंपनी के मुताबिक, जो कमियां पाई गई थीं, वे बहुत सीमित थीं और वैसी कमियां बाजार में मौजूद दूसरे पब्लिक AI मॉडल्स भी ढूंढ सकते हैं। इसके लिए इतने बड़े पैमाने पर पूरी दुनिया में बैन लगाना सही नहीं है। कंपनी ने बताया कि लॉन्चिंग से पहले उन्होंने अमेरिकी सरकारी एजेंसियों और ब्रिटेन के AI सेफ्टी इंस्टीट्यूट के साथ हफ्तों तक इसकी टेस्टिंग की थी, तब किसी को ऐसा कोई बड़ा खतरा नहीं मिला था। कंपनी अब सरकार से बातचीत कर रही है ताकि इस एक्सेस को जल्द से जल्द बहाल किया जा सके। तब तक यूजर्स कंपनी के बाकी पुराने AI मॉडल्स का इस्तेमाल कर सकते हैं। ट्रंप प्रशासन के साथ पहले से चल रहा था विवाद एंथ्रोपिक और ट्रंप प्रशासन के बीच पिछले कुछ महीनों से तनाव चल रहा है। दरअसल, कंपनी ने अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों को डोमेस्टिक सर्विलांस (घरेलू जासूसी) और पूरी तरह से ऑटोमैटिक चलने वाले हथियारों में अपने AI मॉडल का इस्तेमाल करने देने से मना कर दिया था। इसके बाद पेंटागन ने एंथ्रोपिक को ‘सप्लाई-चेन रिस्क’ की लिस्ट में डाल दिया था। यह विवाद ऐसे समय में बढ़ा है जब कंपनी शेयर बाजार में अपना IPO लाने की तैयारी कर रही है, जिससे उसकी मार्केट वैल्यू करीब 1 ट्रिलियन डॉलर (लगभग 92 लाख करोड़ रुपए) आंकी जा रही है। जोहो फाउंडर श्रीधर वेम्बू बोले- ग्लोबलाइजेशन अब खत्म अब तक अमेरिका का ध्यान सिर्फ AI चिप्स और सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी को दूसरे देशों (विशेषकर चीन) तक पहुंचने से रोकने पर था। लेकिन सॉफ्टवेयर पर लगे इस नए बैन ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। भारतीय टेक कंपनी जोहो के फाउंडर श्रीधर वेम्बू ने इस फैसले पर चिंता जताते हुए इसे भारत के लिए एक बड़ा वेक-अप कॉल बताया है। वेम्बू ने कहा कि अब ग्लोबलाइजेशन खत्म हो चुका है। भारत को अब विदेशी कंपनियों पर निर्भर रहने के बजाय तेजी से अपनी खुद की सॉवरेन AI क्षमताएं डेवलप करनी चाहिए और ओपन-सोर्स मॉडल्स को बढ़ावा देना चाहिए, क्योंकि भविष्य में कोई भी देश कभी भी अपनी टेक्नोलॉजी का एक्सेस बंद कर सकता है। नॉलेज बॉक्स: क्या होता है ‘जेलब्रेक’ और ‘सॉवरेन AI’? जेलब्रेक: AI मॉडल्स में कुछ सुरक्षा नियम सेट किए जाते हैं, ताकि वे बम बनाना, साइबर हमला करना या अवैध काम सिखाने जैसी जानकारियां न दें। जब कोई हैकर या यूजर चालाकी से इन नियमों को तोड़कर AI से प्रतिबंधित जानकारी निकलवा लेता है, तो उसे ‘जेलब्रेक’ कहते हैं। सॉवरेन AI: किसी देश की ओर से खुद के डेटा, इंफ्रास्ट्रक्चर और वैज्ञानिकों की मदद से तैयार किया गया घरेलू AI सिस्टम। इस पर किसी बाहरी देश या विदेशी कंपनी का नियंत्रण नहीं होता। ———— ये खबर भी पढ़ें… मिथॉस AI से बैंकिंग सिस्टम पर साइबर हमले का खतरा: वित्त मंत्री सीतारमण ने हाई-लेवल मीटिंग की; क्या है मिथॉस और यह क्यों खतरनाक वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को बैंकों के प्रमुखों के साथ एक हाई-लेवल मीटिंग की। इस बैठक में एंथ्रोपिक के ‘क्लॉड मिथॉस’ AI मॉडल से बैंकिंग सेक्टर को होने वाले संभावित खतरों पर चर्चा की गई। यह एआई मॉडल इतना एडवांस है कि हैकर इसका इस्तेमाल दशकों पुरानी अज्ञात खामियों को खोजकर फाइनेंशियल सेक्टर पर साइबर हमले कर सकते हैं। पूरी खबर पढ़ें…
कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी का पारंपरिक इलाज- चॉकलेट से इलाज! 3 लाख करोड़ रुपए का इलाज करा चुके हैं ‘जड़ी-मजबूत की रानी’ पद्मश्री यानुंग जामोह

कैंसर बहुत आम बीमारी बन गयी है। यह शरीर की ड्रिल में खराबी का कारण होता है। आम भारतीय घरों में जब तक इस बीमारी का पता चलता है, इलाज बहुत देर से होता है। इसका आधुनिक इलाज बहुत महंगा है और ज्यादातर केसों में पीड़ितों के बच निकलने की उम्मीद ना के बराबर है। एक पुरानी कहावत है “एल पैथी घाव पर मरहम है, तो आयुर्वेद और हर्बल जड़ से इलाज है।” अरुणाचल प्रदेश के प्रसिद्ध हर्बल चिकित्सक यानुंग जामोह लेगो (पद्म श्री यानुंग जामोह लेगो) स्वास्थ्य- उपचार और पारंपरिक चिकित्सा के मदद से कई दशकों से कैंसर, मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसे प्लास्टिक चिकित्सक का इलाज कर रहे हैं। यानुंग जामोह लेगो को मिर्ज़ा- पारंपरिक चिकित्सा और खेती में उनके शानदार योगदान के लिए राष्ट्रपति द्वारा 2024 में पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। उन्होंने 3 लाख से अधिक मिलियन लोगों का इलाज किया है। इनमें कैंसर के कई मरीज भी शामिल हैं। उन्होंने पिता से सीखी पारंपरिक सामग्री-माता-पिता की मदद से पीड़ितों को राहत दी और कई मामलों में बीमारी को नियंत्रित करने या ठीक करने में सफलता पाई। यानुंग जमोह लेगो कौन हैं? यानुंग जामोह लेगो का जन्म 9 जुलाई 1963 को अरुणाचल प्रदेश के पूर्वी सियांग जिले के सिका तोडे गांव में हुआ था। उनके पिता एक प्रसिद्ध लोक चिकित्सक थे। बचपन से ही उन्होंने पिता से चॉकलेट का इलाज बताया। उन्होंने असम कृषि विश्वविद्यालय से कृषि की पढ़ाई की। 1988 में यूक्रेन प्रदेश सरकार के कृषि विभाग में नौकरी शुरू हुई और 2023 में टूट गयी। लेकिन उनका असली जुनून हमेशा के लिए प्लांट मेडिसिन बना हुआ है। पिता के साथ 15 साल तक ट्रेनिंग लेने के बाद उन्होंने लोगों का इलाज शुरू कर दिया। लाखों लोगों की जान बचाई यानुंग ने अब तक 3 लाख से ज्यादा गरीबों का इलाज किया है। इनमें कैंसर, कैंसर, उच्च रक्त रक्तचाप जैसी गंभीर बीमारियाँ शामिल हैं। वे सिर्फ सलाह नहीं देते, बल्कि शर्तिया को जड़ से खत्म करने पर जोर देते हैं। उनके इलाज से हजारों लोगों को नई जिंदगी मिली है। कैंसर के निदान हेतु सहायता यानुंग जामोह लेगो ने स्थानीय स्वाद- मसाले का इस्तेमाल करके कैंसर जैसे गंभीर सामानों को इकट्ठा करने में मदद की। उनके उपचार का आधार उनके वास्तुशिल्प पुराने पारंपरिक ज्ञान और यूक्रेनी प्रदेश की प्राकृतिक औषधि-बूटियां हैं। उन्होंने न सिर्फ इलाज किया, बल्कि बीमारी को रोकने के लिए भी लोगों से सलाह ली। उनका कहना है, सही प्रभाव- जड़ी-बूटियों के नियमित इस्तेमाल और स्वस्थ्य रसायन से शरीर के रोग विशेषज्ञ की क्षमता प्रबल होती है, जो कैंसर रोगियों से लेकर मांसपेशियों में कमजोरी तक हो सकती है। कैंसर जैसी तैलियाँ में आधुनिक स्त्रियाँ बहुत जरूरी हैं, लेकिन पारंपरिक बूटियों की भी सहायक भूमिका हो सकती है। लेगो ने बताया कि हमारे मित्र का ज्ञान आज भी कितना मूल्यवान है। 2009 में खास संस्था की शुरुआत हुई 2009 में उन्होंने “स्वदेशी हर्बल विरासत” नाम से एक संस्था बनाई। इस संस्था का उद्देश्य औषधीय विज्ञान की खेती को बढ़ावा देना और लोगों को हर्बल औषधि के बारे में सलाह देना है। अब तक 1 लाख से ज्यादा लोगों को प्लांट दवाओं के फायदे दिए जा रहे हैं। हर साल करीब 5,000 औषधीय नुस्खे सुझाए जाते हैं ताकि ये औषधि-बूटियां हमेशा उपलब्ध रहें। पहले भी मिल चुके हैं कई अवॉर्ड 2024 में उन्हें पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इससे पहले 2019 में डेमोक्रेटिक प्रदेश राज्य पुरस्कार, 2007 में सृष्टि सम्मान पुरस्कार और 2013 में पारंपरिक वैद्यक रत्न पुरस्कार मिल चुका है। पद्म श्री पुरस्कार उनके दशकों की मेहनत और विरासत को दर्शाता है। यह बताता है कि हमारे देश की पारंपरिक चिकित्सा पद्धति आज भी बहुत उपयोगी और प्रभावशाली है। यानुंग जामोह लेगो हमें सिखाता है कि पुराने ज्ञान को आधुनिक तरीकों से अपनाकर हम बहुत कुछ कर सकते हैं। वे सिर्फ इलाज नहीं करते हैं, बल्कि आने वाली दवाओं के लिए औषधीय औषध से भी छुटकारा पाने का काम कर रही हैं। अरुणाचल प्रदेश जैसे इलाकों में पाई जाने वाली लाल-बूटियां प्राकृतिक हैं और कई प्लास्टिक में कमाल साबित हुई हैं। इसका इस्तेमाल सही तरीके से और अनुभवी व्यक्ति की राय में करना चाहिए। यदि आप या आपके परिवार में कोई कैंसर जैसी बीमारी चल रही है, तो डॉक्टर की सलाह के साथ-साथ पारंपरिक चिकित्सा के बारे में भी जानकारी लें। लेकिन याद रखें- बिना विशेषज्ञ की सलाह के कोई भी इलाज शुरू न करें। ये भी पढ़ें: सास-ससुर के बाद मां-बाप को दिखे चकाचौंध पड़े अरमान आमिर की पहली पत्नी पायल के दोस्त, उनकी कृतिका के छूटे आंकड़े- वीडियो (टैग अनुवाद करने के लिए)पद्म श्री यानुंग जामोह लेगो(टी)पारंपरिक हर्बल चिकित्सा विशेषज्ञ(टी)कैंसर हर्बल उपचार(टी)कैंसर उपचार के लिए हर्बल थेरेपी(टी)यानुंग जामोह लेगो(टी)पद्म श्री 2024(टी)अरुणाचल प्रदेश हर्बल हीलर(टी)पारंपरिक चिकित्सा भारत(टी)आदि जनजाति हर्बल ज्ञान(टी)हर्बल उद्यान आंदोलन
मूंग दाल टिक्की रेसिपी: समोसा-पकौड़ा से भर गया मन, तो कम तेल में बनी टोकरी और कुरकुरी मूंग दाल टिक्की; विधि नोट करें

मूंग दाल टिक्की बनाने की सामग्री: 1 कप ढीली मूंग दाल, 1 गुलाब लाल आलू, 1 छोटा कटा प्याज, 2 हरी मिर्च, 1 छोटा टुकड़ा अदरक, हरा धनिया, ½ छोटा बड़ा लाल मिर्च पाउडर, ½ छोटा बड़ा जीरा, छवि: एआई ½ छोटा पिज्जा गरम मसाला, 1 छोटा मसाला चाट मसाला, स्वादानुसार नमक, 2 बड़े पिज्जा या सूजी, तेल। टिक्की का स्वाद ऐसा कि हर कोई तुम्हारा दीवाना न रहे। छवि: एआई मूंग दाल टिक्की बनाने की विधि: सबसे पहले मूंग दाल को अच्छी तरह धोकर 3-4 घंटे के लिए सस्ते दाम पर खरीदें। इसके बाद पानी की औद्योगिक दाल को पीसकर दरदरा पीस लें। ध्यान रखें कि पेस्ट बहुत ज्यादा महीन न हो। छवि: सोशल मीडिया एक बड़ी कटोरी में पिसी हुई दाल, मैश किया हुआ आलू, प्याज, हरी मिर्च, अदरक और हरा धनियां डालें। अब इसमें लाल मिर्च पाउडर, जीरा, गर्म मसाला, चाट मसाला और नमक शामिल है। छवि: एआई अगर मिक्सचर मसाला लगे तो इसमें ब्रेड क्रम्ब्स या सूजी दाल शामिल है। अब हाथों से छोटे-छोटे गोल या चपटी टिक्की बनाकर तैयार कर लें। एक नॉन-स्टिक तवा गरम करें और उस पर थोड़ा सा तेल का पाउडर लगाएं। छवि: एआई अब टिक्कियों को दोनों तरफ से सुनहरा और कुरकुरा होने तक मध्यम गति पर सेंक लें। गरमा-गरम मूंग दाल टिक्की को हरी चटनी, इमली की चटनी या दही के साथ परोसें। छवि: सोशल मीडिया फ़्लोरिडा तो इसे बर्गर या रेज़्यूमे में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। टिक्की को ज्यादा से ज्यादा क्रिस्पी बनाने के लिए मिक्स में थोड़ी सूजी मिला लें. अगर आप इसे और मशीनरी बनाना चाहते हैं तो एयर फ्रायर में भी बना सकते हैं। छवि: एआई स्वाद बढ़ाने के लिए इसमें कद्दू, की हुई गाजर या पनीर भी मिला सकते हैं. टिक्की को साधारण-मध्यम आँचल पर ग्रेड, इससे यह बाहर से कुरकुरा और अंदर से कुरकुरा बनेगी। छवि: सोशल मीडिया कम तेल में बनने वाली यह मूंग दाल टिक्की स्वाद और सेहत का बेहतरीन कॉम्बिनेशन है। अगर आप रोज़-रोज़ तली-हुई चीज़ें खाँचे बोर हो गए हैं, तो इस आसान रेसिपी को ज़रूर आज़माएँ। छवि: एआई
Tata’s iPhone parts manufacturing plant in Tamil Nadu’s Hosur is facing shutdown over wastewater discharge

Hindi News Business Tata’s IPhone Parts Manufacturing Plant In Tamil Nadu’s Hosur Is Facing Shutdown Over Wastewater Discharge नई दिल्ली6 मिनट पहले कॉपी लिंक तमिलनाडु पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने आरोप लगाया है कि टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स की आईफोन कंपोनेंट्स फैक्ट्री से निकलने वाले गंदे पानी (वेस्टवाटर) ने पास के खेतों के भूजल यानी ग्राउंडवाटर को दूषित कर दिया है। रेगुलेटर ने कंपनी को चेतावनी दी है कि अगर संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो फैक्ट्री की बिजली काट दी जाएगी और इसे जबरन बंद कर दिया जाएगा। खेतों और कुओं का पानी दूषित होने की शिकायत मिली थी टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स का यह प्लांट तमिलनाडु के होसुर में स्थित है, जहां आईफोन के बैक पैनल और अन्य पार्ट्स बनाए जाते हैं। प्लांट के पास मौजूद कृषि भूमि के मालिकों ने प्रदूषण बोर्ड से शिकायत की थी कि फैक्ट्री का वेस्टवाटर उनके खेतों और खुले कुओं के पानी को खराब कर रहा है। किसानों की इस शिकायत के बाद ही प्रदूषण बोर्ड ने मामले की जांच शुरू की थी। 5 बार हुआ निरीक्षण, निर्देशों का पालन नहीं करने का आरोप रेगुलेटर के नोटिस के मुताबिक, किसानों की शिकायतों के बाद दिसंबर 2025 से मई 2026 के बीच इस प्लांट का 5 बार राज्य स्तरीय निरीक्षण यानी इंसपेक्शन किया गया। 25 मई 2026 को जारी तीन पन्नों के नोटिस में बोर्ड ने कहा कि टाटा ने अपने परिसर के भीतर बने रेन वाटर हार्वेस्टिंग पोंड (वर्षा जल संचयन तालाब) में गंदा पानी छोड़ दिया था। यह तालाब ओवरफ्लो हो गया, जिससे आसपास की कृषि भूमि में स्थित खुले कुओं का भूजल दूषित हो गया। इससे पहले 23 दिसंबर 2025 को भी बोर्ड ने कंपनी को निर्देश जारी किए थे, लेकिन टाटा ने उन पर कोई सुधारात्मक कदम नहीं उठाया। टाटा का दावा- हम नियमों का पूरी तरह पालन कर रहे हैं इस पूरे मामले पर टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने अपना रुख साफ किया है। कंपनी ने एक बयान में कहा कि उन्होंने एक मान्यता प्राप्त लेबोरेटरी से स्वतंत्र रूप से इसकी जांच (इंडिपेंडेंट एनालिसिस) करवाई है। इस स्टडी में सामने आया है कि कंपनी सभी नियामक मानदंडों (रेगुलेटरी नॉर्म्स) का पूरी तरह से पालन कर रही है। कंपनी जिम्मेदार व्यावसायिक तौर-तरीकों, पर्यावरण और स्थानीय समुदायों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और उन्होंने प्रदूषण अधिकारियों को अपना जवाब भेज दिया है। हालांकि, टाटा ने इस जवाब की विस्तृत जानकारी नहीं दी है। एपल की भारत सप्लाई चेन में पहले भी आ चुकी हैं मुश्किलें यह नोटिस एपल की भारत में मौजूद सप्लाई चेन के लिए एक नई परेशानी बनकर आया है। इससे पहले सितंबर 2024 में टाटा के इसी होसुर प्लांट में आग लग गई थी, जिससे आईफोन कंपोनेंट्स का प्रोडक्शन कुछ समय के लिए रुक गया था। वहीं सितंबर 2023 में एपल के पूर्व सप्लायर पेगाट्रॉन के आईफोन प्लांट में भी आग लगने से कई दिनों तक कामकाज ठप रहा था। इसके अलावा 2024 में एक जांच में सामने आया था कि फॉक्सकॉन अपने एक भारतीय प्लांट में विवाहित महिलाओं को असेंबली जॉब्स से दूर रखता है, हालांकि कंपनी ने सभी नियमों के पालन का दावा किया था। एपल के लिए क्यों अहम है टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स? टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स एपल के लिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि कंपनी चीन से बाहर अपने आईफोन प्रोडक्शन का विस्तार करना चाहती है। दक्षिण एशिया में ताइवान की फॉक्सकॉन के बाद टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स एपल की दूसरी सबसे बड़ी सप्लायर बन चुकी है। रिसर्च फर्म काउंटरपॉइंट के अनुसार, चार साल पहले वैश्विक स्तर पर बनने वाले कुल आईफोन्स में भारत की हिस्सेदारी महज 6% थी, जिसके साल 2026 में बढ़कर 26% होने का अनुमान है। नियमों के उल्लंघन पर फैक्ट्रियों को बंद करने का रिकॉर्ड भारत में प्रदूषण नियंत्रण नियमों का पालन न करने पर कंपनियों के खिलाफ लगातार अनुशासनात्मक कार्रवाई होती रही है। पर्यावरण मंत्रालय ने फरवरी में संसद को बताया था कि पिछले पांच सालों में जांच की गई 5,44,364 इंडस्ट्रीज में से 4.4% उद्योग पर्यावरण मानकों का उल्लंघन करते पाए गए, जिसके बाद प्रदूषण नियंत्रण विभागों ने 3,600 फैक्ट्रियों को बंद कर दिया। इससे पहले 2024 में मर्सिडीज-बेंज के इकलौते भारतीय कार प्लांट में भी नियमों की अनदेखी पकड़े जाने के बाद कंपनी ने वेस्टवाटर और एयर पॉल्यूशन मैनेजमेंट में सुधार किया था। क्या होते हैं एपल के सप्लायर नियम? एपल अपने सप्लायर्स के लिए बेहद कड़े नियम (सप्लायर कोड ऑफ कंडक्ट) लागू करता है। इसके तहत वेस्टवाटर (कारखाने के गंदे पानी) के मैनेजमेंट और पर्यावरण की सुरक्षा को लेकर सख्त गाइडलाइंस होती हैं। अगर कोई सप्लायर इन नियमों का उल्लंघन करता है, तो एपल उसके साथ अपना कॉन्ट्रैक्ट भी सस्पेंड या खत्म कर सकता है। इस मामले में एपल और तमिलनाडु सरकार की तरफ से फिलहाल कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। ये खबर भी पढ़ें… इस हफ्ते सोने-चांदी में गिरावट रही: चांदी की कीमत ₹14326 कम होकर ₹2.43 लाख किलो हुई, सोना ₹6438 सस्ता हुआ सोने-चांदी के दाम में इस हफ्ते गिरावट रही। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का दाम 6,438 रुपए गिरकर 1.48 लाख रुपए हो गया है। इससे पहले ये बीते हफ्ते यानी 6 जून को 1.54 लाख रुपए पर था। वहीं, चांदी 2.57 लाख रुपए किलो से गिरकर 2.43 लाख रुपए पर आ गई है। यानी इसकी कीमत 14,326 रुपए कम हुई। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Tata’s iPhone parts manufacturing plant in Tamil Nadu’s Hosur is facing shutdown over wastewater discharge

Hindi News Business Tata’s IPhone Parts Manufacturing Plant In Tamil Nadu’s Hosur Is Facing Shutdown Over Wastewater Discharge नई दिल्ली22 मिनट पहले कॉपी लिंक तमिलनाडु पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने आरोप लगाया है कि टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स की आईफोन कंपोनेंट्स फैक्ट्री से निकलने वाले गंदे पानी (वेस्टवाटर) ने पास के खेतों के भूजल यानी ग्राउंडवाटर को दूषित कर दिया है। रेगुलेटर ने कंपनी को चेतावनी दी है कि अगर संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो फैक्ट्री की बिजली काट दी जाएगी और इसे जबरन बंद कर दिया जाएगा। खेतों और कुओं का पानी दूषित होने की शिकायत मिली थी टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स का यह प्लांट तमिलनाडु के होसुर में स्थित है, जहां आईफोन के बैक पैनल और अन्य पार्ट्स बनाए जाते हैं। प्लांट के पास मौजूद कृषि भूमि के मालिकों ने प्रदूषण बोर्ड से शिकायत की थी कि फैक्ट्री का वेस्टवाटर उनके खेतों और खुले कुओं के पानी को खराब कर रहा है। किसानों की इस शिकायत के बाद ही प्रदूषण बोर्ड ने मामले की जांच शुरू की थी। 5 बार हुआ निरीक्षण, निर्देशों का पालन नहीं करने का आरोप रेगुलेटर के नोटिस के मुताबिक, किसानों की शिकायतों के बाद दिसंबर 2025 से मई 2026 के बीच इस प्लांट का 5 बार राज्य स्तरीय निरीक्षण यानी इंसपेक्शन किया गया। 25 मई 2026 को जारी तीन पन्नों के नोटिस में बोर्ड ने कहा कि टाटा ने अपने परिसर के भीतर बने रेन वाटर हार्वेस्टिंग पोंड (वर्षा जल संचयन तालाब) में गंदा पानी छोड़ दिया था। यह तालाब ओवरफ्लो हो गया, जिससे आसपास की कृषि भूमि में स्थित खुले कुओं का भूजल दूषित हो गया। इससे पहले 23 दिसंबर 2025 को भी बोर्ड ने कंपनी को निर्देश जारी किए थे, लेकिन टाटा ने उन पर कोई सुधारात्मक कदम नहीं उठाया। टाटा का दावा- हम नियमों का पूरी तरह पालन कर रहे हैं इस पूरे मामले पर टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने अपना रुख साफ किया है। कंपनी ने एक बयान में कहा कि उन्होंने एक मान्यता प्राप्त लेबोरेटरी से स्वतंत्र रूप से इसकी जांच (इंडिपेंडेंट एनालिसिस) करवाई है। इस स्टडी में सामने आया है कि कंपनी सभी नियामक मानदंडों (रेगुलेटरी नॉर्म्स) का पूरी तरह से पालन कर रही है। कंपनी जिम्मेदार व्यावसायिक तौर-तरीकों, पर्यावरण और स्थानीय समुदायों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और उन्होंने प्रदूषण अधिकारियों को अपना जवाब भेज दिया है। हालांकि, टाटा ने इस जवाब की विस्तृत जानकारी नहीं दी है। एपल की भारत सप्लाई चेन में पहले भी आ चुकी हैं मुश्किलें यह नोटिस एपल की भारत में मौजूद सप्लाई चेन के लिए एक नई परेशानी बनकर आया है। इससे पहले सितंबर 2024 में टाटा के इसी होसुर प्लांट में आग लग गई थी, जिससे आईफोन कंपोनेंट्स का प्रोडक्शन कुछ समय के लिए रुक गया था। वहीं सितंबर 2023 में एपल के पूर्व सप्लायर पेगाट्रॉन के आईफोन प्लांट में भी आग लगने से कई दिनों तक कामकाज ठप रहा था। इसके अलावा 2024 में एक जांच में सामने आया था कि फॉक्सकॉन अपने एक भारतीय प्लांट में विवाहित महिलाओं को असेंबली जॉब्स से दूर रखता है, हालांकि कंपनी ने सभी नियमों के पालन का दावा किया था। एपल के लिए क्यों अहम है टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स? टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स एपल के लिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि कंपनी चीन से बाहर अपने आईफोन प्रोडक्शन का विस्तार करना चाहती है। दक्षिण एशिया में ताइवान की फॉक्सकॉन के बाद टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स एपल की दूसरी सबसे बड़ी सप्लायर बन चुकी है। रिसर्च फर्म काउंटरपॉइंट के अनुसार, चार साल पहले वैश्विक स्तर पर बनने वाले कुल आईफोन्स में भारत की हिस्सेदारी महज 6% थी, जिसके साल 2026 में बढ़कर 26% होने का अनुमान है। नियमों के उल्लंघन पर फैक्ट्रियों को बंद करने का रिकॉर्ड भारत में प्रदूषण नियंत्रण नियमों का पालन न करने पर कंपनियों के खिलाफ लगातार अनुशासनात्मक कार्रवाई होती रही है। पर्यावरण मंत्रालय ने फरवरी में संसद को बताया था कि पिछले पांच सालों में जांच की गई 5,44,364 इंडस्ट्रीज में से 4.4% उद्योग पर्यावरण मानकों का उल्लंघन करते पाए गए, जिसके बाद प्रदूषण नियंत्रण विभागों ने 3,600 फैक्ट्रियों को बंद कर दिया। इससे पहले 2024 में मर्सिडीज-बेंज के इकलौते भारतीय कार प्लांट में भी नियमों की अनदेखी पकड़े जाने के बाद कंपनी ने वेस्टवाटर और एयर पॉल्यूशन मैनेजमेंट में सुधार किया था। क्या होते हैं एपल के सप्लायर नियम? एपल अपने सप्लायर्स के लिए बेहद कड़े नियम (सप्लायर कोड ऑफ कंडक्ट) लागू करता है। इसके तहत वेस्टवाटर (कारखाने के गंदे पानी) के मैनेजमेंट और पर्यावरण की सुरक्षा को लेकर सख्त गाइडलाइंस होती हैं। अगर कोई सप्लायर इन नियमों का उल्लंघन करता है, तो एपल उसके साथ अपना कॉन्ट्रैक्ट भी सस्पेंड या खत्म कर सकता है। इस मामले में एपल और तमिलनाडु सरकार की तरफ से फिलहाल कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। ये खबर भी पढ़ें… इस हफ्ते सोने-चांदी में गिरावट रही: चांदी की कीमत ₹14326 कम होकर ₹2.43 लाख किलो हुई, सोना ₹6438 सस्ता हुआ सोने-चांदी के दाम में इस हफ्ते गिरावट रही। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का दाम 6,438 रुपए गिरकर 1.48 लाख रुपए हो गया है। इससे पहले ये बीते हफ्ते यानी 6 जून को 1.54 लाख रुपए पर था। वहीं, चांदी 2.57 लाख रुपए किलो से गिरकर 2.43 लाख रुपए पर आ गई है। यानी इसकी कीमत 14,326 रुपए कम हुई। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Mouni Roy Addresses Sexuality Rumours

13 मिनट पहले कॉपी लिंक मौनी रॉय ने अपनी निजी जिंदगी से जुड़ी अफवाहों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मुश्किल समय में दोस्तों का साथ सबसे जरूरी होता है। एक्ट्रेस मौनी रॉय ने हाल ही में अपनी निजी जिंदगी से जुड़ी सोशल मीडिया चर्चाओं और अफवाहों पर खुलकर बात की। मोनिका शर्मा के डिजिटल टॉक शो में उनसे पूछा गया कि बॉलीवुड में आने के बाद उन्होंने अपने बारे में सबसे अजीब अफवाह कौन-सी सुनी। इस पर मौनी ने जवाब दिया, “यह कि मैं गे हूं।” मौनी ने इस सवाल का जवाब हल्के अंदाज में दिया और साफ किया कि वह ऐसी अटकलों को गंभीरता से नहीं लेतीं। पिछले कुछ समय से उनकी निजी जिंदगी चर्चा में रही है और सोशल मीडिया पर उनके रिश्तों व दोस्ती को लेकर कई तरह के अनुमान लगाए जाते रहे हैं। मौनी रॉय ने महिलाओं को आर्थिक और भावनात्मक रूप से आत्मनिर्भर बनने की सलाह दी। मौनी ने कहा कि उनके अच्छे-बुरे और मुश्किल दौर में करीबी महिला दोस्तों ने हमेशा साथ दिया। उनके मुताबिक मजबूत दोस्ती और सपोर्ट सिस्टम किसी भी इंसान को मुश्किल समय से बाहर आने में मदद करता है। एक्ट्रेस ने युवा महिलाओं के लिए संदेश देते हुए कहा कि उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर और भावनात्मक रूप से मजबूत बनना चाहिए। उनके मुताबिक आत्मनिर्भरता सिर्फ करियर नहीं, बल्कि मानसिक और भावनात्मक मजबूती से भी जुड़ी होती है। मौनी ने कहा कि लोगों की राय और सोशल मीडिया की प्रतिक्रियाएं आती-जाती रहती हैं, लेकिन सबसे जरूरी खुद को समझना और अपने फैसलों पर भरोसा रखना है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को मजबूत सपोर्ट सिस्टम बनाना चाहिए और अपनी पहचान किसी बाहरी धारणा से तय नहीं होने देनी चाहिए। मौनी का यह बयान सोशल मीडिया पर चर्चा में है और लोग उनकी बेबाकी व आत्मनिर्भरता के संदेश पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं। __________________________________________________ यह खबर भी पढ़ें.. मौनी रॉय-सूरज ने फिर किया एक-दूसरे को इंस्टाग्राम पर फॉलो:गुरुवार को अलग होने की घोषणा की थी, दोस्ती बनाए रखने की कही थी बात एक्ट्रेस मौनी रॉय और बिजनेसमैन सूरज नांबियार ने शनिवार को इंस्टाग्राम पर एक-दूसरे को फिर से फॉलो करना शुरू कर दिया। हाल ही में दोनों के अलग होने की खबरों के बीच दोनों ने एक-दूसरे को अनफॉलो कर दिया था।पूरी खबर पढ़ें.. दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
Tejas Shirse Breaks National Record in 110m Hurdles, Qualifies for Commonwealth Games

Hindi News Sports Tejas Shirse Breaks National Record In 110m Hurdles, Qualifies For Commonwealth Games पंजाब4 मिनट पहले कॉपी लिंक तेजस शिर्से जीतने के बाद सेलिब्रेट करते हुए। भारतीय एथलीट तेजस शिर्से ने हर्डल रेस में नया रिकॉर्ड बना दिया है। उन्होंने शनिवार को 110 मीटर की रेस 13.27 सेकेंड में पूरी की। तेजस ने अपना ही रिकॉर्ड तोड़ा। उन्होंने मई 2024 में फिनलैंड के जैवस्किला में मोटोनेट जीपी मीट में 13.41 सेकेंड का रिकॉर्ड बनाया था। तेजस ने पंजाब के लुधियाना स्थित गुरु नानक स्टेडियम में इंडियन एथलेटिक्स सीरीज-9 में यह रिकॉर्ड बनाया। वे इस टूर्नामेंट में रिलायंस फाउंडेशन को रिप्रेजेंट कर रहे थे। कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए क्वालिफाई किया तेजस ने कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए क्वालिफाई कर लिया। उनका निर्धारित क्वालिफिकेशन मार्क 13.39 सेकेंड से बेहतर रहा। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का आयोजन 23 जुलाई से 2 अगस्त तक स्कॉटलैंड के ग्लासगो में होगा। रांची में गोल्ड मेडल जीता तेजस चोट के कारण कुछ समय ट्रैक से दूर रहे थे। इसके बाद उन्होंने रांची में हुए फेडरेशन कप 2026 में गोल्ड मेडल जीता था। एशिया का छठा बेस्ट प्रदर्शन तेजस ने 13.27 सेकेंड का समय निकालकर एशिया का छठा बेस्ट प्रदर्शन भी दर्ज किया। यदि उनका चयन भारतीय टीम में होता है तो वह 2014 में सिद्धार्थ थिंगालाया के बाद कॉमनवेल्थ गेम्स में हिस्सा लेने वाले पहले भारतीय मेंस 110 मीटर हर्डलर बन जाएंगे। रेस-बी में तेजस का दबदबा 110 मीटर हर्डल्स रेस-बी में तेजस ने शुरुआत से ही बढ़त बना ली थी। कृष्णिक एम ने उन्हें कड़ी टक्कर दी, लेकिन अंतिम हर्डल से टकराने के बावजूद तेजस ने 13.27 सेकेंड में रेस पूरी कर पहला स्थान हासिल किया। कृष्णिक एम 13.55 सेकेंड के साथ दूसरे और राजस्थान के माधवेंद्र सिंह 14.00 सेकेंड के साथ तीसरे स्थान पर रहे। दिल्ली के हरमनजीत सिंह 14.42 सेकेंड के साथ चौथे स्थान पर रहे। हरियाणा के शिवदर्शन ने 14.65 सेकेंड का समय निकालकर पांचवां स्थान हासिल किया। एयर फोर्स के तरनदीप सिंह भाटी 15.01 सेकेंड के साथ छठे और ऑल इंडिया पुलिस के सचिन कुमार 15.48 सेकेंड के साथ सातवें स्थान पर रहे। रेस-ए में पंकज पाल साहू विजेता रेस-ए में पंजाब के पंकज पाल साहू ने 14.65 सेकेंड के समय के साथ पहला स्थान हासिल किया। दिल्ली के शुभम रावत 14.77 सेकेंड के साथ दूसरे और बलराम शर्मा 14.85 सेकेंड के साथ तीसरे स्थान पर रहे। राजस्थान के मुकुल 15.23 सेकेंड के साथ चौथे और उत्तर प्रदेश के शिवम सिंह 16.91 सेकेंड के साथ पांचवें स्थान पर रहे। अफसल कॉमनवेल्थ क्वालिफिकेशन से चूके पुरुषों की 800 मीटर दौड़ में नेशनल रिकॉर्ड बनाने वाले मोहम्मद अफसल कॉमनवेल्थ गेम्स का क्वालिफिकेशन मार्क हासिल नहीं कर सके। उन्होंने 1:47 मिनट का समय निकाला, जबकि ग्लासगो 2026 के लिए निर्धारित क्वालिफिकेशन मानक 1:45 मिनट था। सचिन यादव बाहर, रोहित-जेना पर नजर जैवलिन वर्ल्ड चैंपियनशिप फाइनलिस्ट सचिन यादव कोहनी की चोट के कारण प्रतियोगिता से बाहर रह सकते हैं। ऐसे में रोहित यादव, शिवम लोहाकरे और किशोर कुमार जेना पर नजरें रहेंगी, जो कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए अपनी दावेदारी मजबूत करना चाहेंगे। वहीं दो बार के ओलिंपिक मेडलिस्ट नीरज चोपड़ा भी पिछले साल लगी चोट से उबर रहे हैं और उनके कॉमनवेल्थ गेम्स में खेलने की संभावना फिलहाल कम मानी जा रही है। नीरज चोपड़ा का कॉमनवेल्थ गेम्स खेलना मुश्किल माना जा रहा है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…







