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Apple iPad MacBook Price Hike | AI Boom Drives Chip Cost Up

Apple iPad MacBook Price Hike | AI Boom Drives Chip Cost Up

Hindi News Business Apple IPad MacBook Price Hike | AI Boom Drives Chip Cost Up | Global Tech News 2026 नई दिल्ली18 मिनट पहले कॉपी लिंक एपल ने गुरुवार को अपने आईपैड और मैकबुक की कीमतों में 300 डॉलर यानी 28,383 रुपए तक की बढ़ोतरी कर दी है। कंपनी का कहना है कि AI इंडस्ट्री के डेटा सेंटर बनाने के कारण मेमोरी और स्टोरेज चिप की लागत लगातार बढ़ रही है, जिसके चलते अब ग्राहकों को इस बढ़ी हुई कीमत से बचाना संभव नहीं रह गया है। कीमत बढ़ने से कौन-से प्रोडक्ट्स महंगे हुए इस फैसले से एपल के सबसे ज्यादा बिकने वाले प्रोडक्ट आईफोन पर कोई असर नहीं पड़ेगा। कंपनी के सबसे कम कीमत वाले लैपटॉप ‘नियो’ की शुरुआती कीमत लॉन्च के कुछ महीने बाद ही 599 डॉलर से बढ़कर 699 डॉलर हो जाएगी। इसके अलावा 512 गीगाबाइट वाले मैकबुक एयर की कीमत 200 डॉलर बढ़ गई है, जबकि 1 टेराबाइट स्टोरेज वाले मैकबुक प्रो की कीमत में 300 डॉलर का इजाफा होगा। एपल ने अपने होमपॉड स्मार्ट स्पीकर के दोनों वर्जन और एपल टीवी सेट-टॉप बॉक्स की कीमतें भी बढ़ा दी हैं। इस घोषणा के बाद एपल के शेयर करीब 5% गिर गए, जबकि उसकी कॉम्पिटिटर कंपनी डेल के शेयर 8% से ज्यादा टूट गए। चिप मेकर्स ने एनवीडिया जैसी कंपनियों को दी प्राथमिकता माइक्रोन जैसी मेमोरी मैन्युफैक्चरर कंपनियों ने पिछले कुछ महीनों में एनवीडिया जैसे AI चिपमेकर्स के ऑर्डर्स को प्राथमिकता दी है। इस कदम से मेमोरी मैन्युफैक्चरर को रिकॉर्ड मुनाफा तो हुआ है, लेकिन इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों के लिए इसकी सप्लाई बेहद कम बची है। सप्लाई कम होने के कारण ही अब कंपनियों को अपने प्रोडक्ट्स के दाम बढ़ाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, दुनिया की सबसे वैल्यूएबल कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी एपल के सप्लायर्स के साथ बेहतरीन संबंध होने के बावजूद वह इस संकट से नहीं बच पाई है। हालांकि, मजबूत संबंधों के कारण एपल को कुछ राहत जरूर मिली है, क्योंकि उसके कॉम्पिटिटर्स को कीमतों में इससे भी ज्यादा बढ़ोतरी करनी पड़ी है। कंपोनेंट की कीमत में इतनी बड़ी बढ़ोतरी पहले कभी नहीं देखी एपल ने एक बयान जारी कर कहा कि हमने किसी कंपोनेंट की कीमत में इतनी तेजी से और इतनी बड़ी बढ़ोतरी पहले कभी नहीं देखी है। हम अब तक अपने ग्राहकों को इन बढ़ी हुई कीमतों से बचाते आ रहे थे, लेकिन अब हम एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गए हैं जहां हमें आईपैड और मैक सहित कई प्रोडक्ट्स की कीमतें बढ़ाना शुरू करना पड़ रहा है। अगले फेज में आईफोन की कीमतें बढ़ने की आशंका मार्केट एनालिस्ट्स का मानना है कि अगला नंबर आईफोन का हो सकता है। रिसर्च फर्म IDC की सीनियर रिसर्च डायरेक्टर नबीला पोपल ने कहा कि आईफोन इस बढ़ोतरी से अछूता नहीं है, इसकी कीमतें भी जल्द ही बढ़ने वाली हैं। एपल के लिए आईफोन की फॉल लॉन्चिंग से ठीक पहले कीमतों में बढ़ोतरी की घोषणा करना बेहद स्ट्रैटेजिक कदम था, ताकि लॉन्चिंग के समय सुर्खियां कीमतों में बढ़ोतरी के बजाय नए फोन की वैल्यू पर फोकस रहें। क्या है रैम-एगेडन का पूरा बैकग्राउंड मॉडर्न टेक गैजेट्स में इस्तेमाल होने वाली डायनेमिक रैंडम एक्सेस मेमोरी (DRAM) की कीमतों में 2026 की पहली तिमाही में 98% तक की बढ़ोतरी देखी गई है। इंडस्ट्री ट्रैकर ट्रेंडफोर्स के मुताबिक, चालू तिमाही में भी इसकी कीमतों में 58% से 63% तक का उछाल आने का अनुमान है। एक्सपर्ट्स इस स्थिति को “रैम-एगेडन” कह रहे हैं। यह संकट AI डेटा सेंटर डेवलपमेंट में आए उछाल के कारण पैदा हुआ है, जहां एनवीडिया जैसी कंपनियां मेमोरी मैन्युफैक्चरर के साथ लॉन्ग-टर्म डील कर रही हैं। माइक्रोन ने बुधवार को बताया कि उसने अपनी मेमोरी सप्लाई सुरक्षित करने के इच्छुक ग्राहकों से 22 बिलियन डॉलर के लॉन्ग-टर्म एग्रीमेंट लॉक किए हैं। गैजेट्स मार्केट के फ्यूचर पर असर लागत में हो रही इस बढ़ोतरी का सीधा असर इस साल डिवाइस की बिक्री पर पड़ने की उम्मीद है। रिसर्च फर्म IDC के अनुमान के मुताबिक, इस बढ़ती लागत के कारण स्मार्टफोन बाजार में इस साल करीब 14% की अब तक की सबसे बड़ी सालाना गिरावट देखने को मिल सकती है, जबकि पीसी (PC) मार्केट में भी 11.3% की कमी आने की आशंका है। ये खबर भी पढ़ें… चीन में 7 लाख डिलीवरी वर्कर्स की जगह लेंगे रोबोट: ई-कॉमर्स कंपनी जेडी.कॉम के संस्थापक रिचर्ड लियू का चाइना सीईओ फोरम में बयान चीन में एक ही कंपनी के करीब 7 लाख डिलीवरी कर्मचारियों की जगह रोबोट ले सकते हैं। ई-कॉमर्स कंपनी जेडी.कॉम के संस्थापक रिचर्ड लियू ने एपीईसी चाइना सीईओ फोरम में कहा कि भविष्य में डिलीवरी कर्मचारियों की आवश्यकता नहीं होगी। सारी डिलीवरी रोबोट द्वारा की जाएगी। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Apple iPad MacBook Price Hike | AI Boom Drives Chip Cost Up

Apple iPad MacBook Price Hike | AI Boom Drives Chip Cost Up

Hindi News Business Apple IPad MacBook Price Hike | AI Boom Drives Chip Cost Up | Global Tech News 2026 नई दिल्ली11 मिनट पहले कॉपी लिंक एपल ने गुरुवार को अपने आईपैड और मैकबुक की कीमतों में 300 डॉलर यानी 28,383 रुपए तक की बढ़ोतरी कर दी है। वहीं भारत में इनकी कीमतों में 1 लाख रुपए तक का इजाफा हुआ है। कंपनी का कहना है कि AI इंडस्ट्री के डेटा सेंटर बनाने के कारण मेमोरी और स्टोरेज चिप की लागत लगातार बढ़ रही है, जिसके चलते अब ग्राहकों को इस बढ़ी हुई कीमत से बचाना संभव नहीं रह गया है। कीमत बढ़ने से कौन-से प्रोडक्ट्स महंगे हुए इस फैसले से एपल के सबसे ज्यादा बिकने वाले प्रोडक्ट आईफोन पर कोई असर नहीं पड़ेगा। कंपनी के सबसे कम कीमत वाले लैपटॉप ‘नियो’ की शुरुआती कीमत लॉन्च के कुछ महीने बाद ही 599 डॉलर से बढ़कर 699 डॉलर हो जाएगी। इसके अलावा 512 गीगाबाइट वाले मैकबुक एयर की कीमत 200 डॉलर बढ़ गई है, जबकि 1 टेराबाइट स्टोरेज वाले मैकबुक प्रो की कीमत में 300 डॉलर का इजाफा होगा। एपल ने अपने होमपॉड स्मार्ट स्पीकर के दोनों वर्जन और एपल टीवी सेट-टॉप बॉक्स की कीमतें भी बढ़ा दी हैं। इस घोषणा के बाद एपल के शेयर करीब 5% गिर गए, जबकि उसकी कॉम्पिटिटर कंपनी डेल के शेयर 8% से ज्यादा टूट गए। चिप मेकर्स ने एनवीडिया जैसी कंपनियों को दी प्राथमिकता माइक्रोन जैसी मेमोरी मैन्युफैक्चरर कंपनियों ने पिछले कुछ महीनों में एनवीडिया जैसे AI चिपमेकर्स के ऑर्डर्स को प्राथमिकता दी है। इस कदम से मेमोरी मैन्युफैक्चरर को रिकॉर्ड मुनाफा तो हुआ है, लेकिन इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों के लिए इसकी सप्लाई बेहद कम बची है। सप्लाई कम होने के कारण ही अब कंपनियों को अपने प्रोडक्ट्स के दाम बढ़ाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, दुनिया की सबसे वैल्यूएबल कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी एपल के सप्लायर्स के साथ बेहतरीन संबंध होने के बावजूद वह इस संकट से नहीं बच पाई है। हालांकि, मजबूत संबंधों के कारण एपल को कुछ राहत जरूर मिली है, क्योंकि उसके कॉम्पिटिटर्स को कीमतों में इससे भी ज्यादा बढ़ोतरी करनी पड़ी है। भारत में मैकबुक की नई कीमतें मॉडल लॉन्च प्राइस नई कीमत कुल बढ़ोतरी मैकबुक नियो ₹69,900 ₹79,900 ₹10,000 मैकबुक एयर 13-इंच (M5) ₹1,19,900 ₹1,49,900 ₹30,000 मैकबुक एयर 15-इंच ₹1,44,900 ₹1,79,900 ₹35,000 मैकबुक प्रो 14-इंच (M5, 16GB रैम) ₹1,69,900 ₹2,39,900 ₹70,000 मैकबुक प्रो 14-इंच (M5 मैक्स वेरिएंट) — — ₹1 लाख भारत में आईपैड की नई कीमतें मॉडल लॉन्च प्राइस नई कीमत कुल बढ़ोतरी आईपैड एयर 11-इंच (M4) ₹64,900 ₹89,900 ₹25,000 आईपैड प्रो (256GB, M5) ₹99,990 ₹1,39,900 ₹39,910 कंपोनेंट की कीमत में इतनी बड़ी बढ़ोतरी पहले कभी नहीं देखी एपल ने एक बयान जारी कर कहा कि हमने किसी कंपोनेंट की कीमत में इतनी तेजी से और इतनी बड़ी बढ़ोतरी पहले कभी नहीं देखी है। हम अब तक अपने ग्राहकों को इन बढ़ी हुई कीमतों से बचाते आ रहे थे, लेकिन अब हम एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गए हैं जहां हमें आईपैड और मैक सहित कई प्रोडक्ट्स की कीमतें बढ़ाना शुरू करना पड़ रहा है। अगले फेज में आईफोन की कीमतें बढ़ने की आशंका मार्केट एनालिस्ट्स का मानना है कि अगला नंबर आईफोन का हो सकता है। रिसर्च फर्म IDC की सीनियर रिसर्च डायरेक्टर नबीला पोपल ने कहा कि आईफोन इस बढ़ोतरी से अछूता नहीं है, इसकी कीमतें भी जल्द ही बढ़ने वाली हैं। एपल के लिए आईफोन की फॉल लॉन्चिंग से ठीक पहले कीमतों में बढ़ोतरी की घोषणा करना बेहद स्ट्रैटेजिक कदम था, ताकि लॉन्चिंग के समय सुर्खियां कीमतों में बढ़ोतरी के बजाय नए फोन की वैल्यू पर फोकस रहें। क्या है रैम-एगेडन का पूरा बैकग्राउंड मॉडर्न टेक गैजेट्स में इस्तेमाल होने वाली डायनेमिक रैंडम एक्सेस मेमोरी (DRAM) की कीमतों में 2026 की पहली तिमाही में 98% तक की बढ़ोतरी देखी गई है। इंडस्ट्री ट्रैकर ट्रेंडफोर्स के मुताबिक, चालू तिमाही में भी इसकी कीमतों में 58% से 63% तक का उछाल आने का अनुमान है। एक्सपर्ट्स इस स्थिति को “रैम-एगेडन” कह रहे हैं। यह संकट AI डेटा सेंटर डेवलपमेंट में आए उछाल के कारण पैदा हुआ है, जहां एनवीडिया जैसी कंपनियां मेमोरी मैन्युफैक्चरर के साथ लॉन्ग-टर्म डील कर रही हैं। माइक्रोन ने बुधवार को बताया कि उसने अपनी मेमोरी सप्लाई सुरक्षित करने के इच्छुक ग्राहकों से 22 बिलियन डॉलर के लॉन्ग-टर्म एग्रीमेंट लॉक किए हैं। गैजेट्स मार्केट के फ्यूचर पर असर लागत में हो रही इस बढ़ोतरी का सीधा असर इस साल डिवाइस की बिक्री पर पड़ने की उम्मीद है। रिसर्च फर्म IDC के अनुमान के मुताबिक, इस बढ़ती लागत के कारण स्मार्टफोन बाजार में इस साल करीब 14% की अब तक की सबसे बड़ी सालाना गिरावट देखने को मिल सकती है, जबकि पीसी (PC) मार्केट में भी 11.3% की कमी आने की आशंका है। ये खबर भी पढ़ें… चीन में 7 लाख डिलीवरी वर्कर्स की जगह लेंगे रोबोट: ई-कॉमर्स कंपनी जेडी.कॉम के संस्थापक रिचर्ड लियू का चाइना सीईओ फोरम में बयान चीन में एक ही कंपनी के करीब 7 लाख डिलीवरी कर्मचारियों की जगह रोबोट ले सकते हैं। ई-कॉमर्स कंपनी जेडी.कॉम के संस्थापक रिचर्ड लियू ने एपीईसी चाइना सीईओ फोरम में कहा कि भविष्य में डिलीवरी कर्मचारियों की आवश्यकता नहीं होगी। सारी डिलीवरी रोबोट द्वारा की जाएगी। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

श्रीलंका पहले टेस्ट की पहली पारी में 308 पर ऑलआउट:वेस्टइंडीज से जस्टिन ग्रेव्स ने 3 विकेट झटके, धनंजय डी सिल्वा का शतक

श्रीलंका पहले टेस्ट की पहली पारी में 308 पर ऑलआउट:वेस्टइंडीज से जस्टिन ग्रेव्स ने 3 विकेट झटके, धनंजय डी सिल्वा का शतक

श्रीलंका ने वेस्टइंडीज के खिलाफ पहले टेस्ट की पहली पारी में 308 रन बनाए हैं। गुरुवार को मैच के पहले दिन का खेल समाप्त होने तक वेस्टइंडीज अपना खाता भी नहीं खोल सकी है। टीम के ओपनर्स नाबाद लौटे हैं। तीसरे सेशन में कैरेबियाई पारी का पहला ओवर समाप्त होने के बाद अंपायर्स ने बेल्स उठा लिए। ओपनर जॉन कैंपबेल 6 बॉल खेलकर नाबाद रहे। जबकि ब्रैंडन किंग ने एक भी बॉल नहीं फेस की। इससे पहले जॉयडन सेल्स ने श्रीलंकाई टीम का आखिरी विकेट झटका। उन्होंने असिथा फर्नांडो को अल्जारी जोसेफ के हाथों कैच कराया। सेल्स को श्रीलंकाई पारी में एक विकेट ही मिला। श्रीलंका की खराब शुरुआत, 50 के अंदर 3 विकेट गंवाए टॉस हारकर बैटिंग कर रही श्रीलंका की शुरुआत खराब रही। टीम ने 50 रन के अंदर 3 विकेट गंवा दिए थे। केमार रोच ने पहले ओवर की आखिरी बॉल पर पाथुम निसांका को 2 रन के स्कोर पर पवेलियन भेजा दिया। उसके बाद 10वें ओवर में अल्जारी जोसेफ ने निशान मदुष्का (23 रन) और कामिंदु मेंडिस (जीरो) को लगातार बॉल पर आउट किया। चंडीमल और डी सिल्वा ने पारी संभाली निसांका के आउट होने के बाद क्रीज पर उतरे दिनेश चांदीमल ने धनंजय डी सिल्वा के साथ पारी संभाली। दोनों ने 94 बॉल पर 68 रनों की साझेदारी की। वे चौथे विकेट के रूप में आउट हुए। उन्हें शमार जोसेफ ने बोल्ड कर दिया। चांदीमल 67 बॉल पर 54 रन बनाकर आउट हुए। उन्होंने 8 चौके लगाए। डी सिल्वा का शतक, स्कोर 250 पार पहुंचाया 110 के स्कोर पर चांदीमल का विकेट गंवाने के बाद धनंजया डी सिल्वा ने श्रीलंकाई पारी को 250 पार पहुंचाया। डी सिल्वा ने 168 गेंद पर 120 रन की शतकीय पारी खेली। इस पारी में 17 चौके लगाए। उन्होंने लोअर ऑर्डर में 2 अर्धशतकीय साझेदारियां कीं। इनमें सोनल दिनुषा (43 रन) के साथ 150 गेंद पर 99 रन और मिलन रथनायके के साथ 85 गेंद पर 64 रन की साझेदारी शामिल रही। ग्रेव्स ने सबसे ज्यादा विकेट, 3 बॉलर्स को 2-2 विकेट वेस्टइंडीज की ओर से जस्टिन ग्रेव्स ने सबसे ज्यादा 3 विकेट लिए। उनके अलावा, 3 अन्य गेंदबाजों ने 2-2 विकेट हासिल किए। इनमें केमार रोच, अल्जारी जोसेफ और शमार जोसेफ के नाम शामिल रहे। एक विकेट जॉयडन सेल्स को मिला। ———————————————–

श्रीलंका पहले टेस्ट की पहली पारी में 308 पर ऑलआउट:वेस्टइंडीज से जस्टिन ग्रेव्स ने 3 विकेट झटके, धनंजय डी सिल्वा का शतक

श्रीलंका पहले टेस्ट की पहली पारी में 308 पर ऑलआउट:वेस्टइंडीज से जस्टिन ग्रेव्स ने 3 विकेट झटके, धनंजय डी सिल्वा का शतक

श्रीलंका ने वेस्टइंडीज के खिलाफ पहले टेस्ट की पहली पारी में 308 रन बनाए हैं। गुरुवार को मैच के पहले दिन का खेल समाप्त होने तक वेस्टइंडीज अपना खाता भी नहीं खोल सकी है। टीम के ओपनर्स नाबाद लौटे हैं। तीसरे सेशन में कैरेबियाई पारी का पहला ओवर समाप्त होने के बाद अंपायर्स ने बेल्स उठा लिए। ओपनर जॉन कैंपबेल 6 बॉल खेलकर नाबाद रहे। जबकि ब्रैंडन किंग ने एक भी बॉल नहीं फेस की। इससे पहले जॉयडन सेल्स ने श्रीलंकाई टीम का आखिरी विकेट झटका। उन्होंने असिथा फर्नांडो को अल्जारी जोसेफ के हाथों कैच कराया। सेल्स को श्रीलंकाई पारी में एक विकेट ही मिला। श्रीलंका की खराब शुरुआत, 50 के अंदर 3 विकेट गंवाए टॉस हारकर बैटिंग कर रही श्रीलंका की शुरुआत खराब रही। टीम ने 50 रन के अंदर 3 विकेट गंवा दिए थे। केमार रोच ने पहले ओवर की आखिरी बॉल पर पाथुम निसांका को 2 रन के स्कोर पर पवेलियन भेजा दिया। उसके बाद 10वें ओवर में अल्जारी जोसेफ ने निशान मदुष्का (23 रन) और कामिंदु मेंडिस (जीरो) को लगातार बॉल पर आउट किया। चंडीमल और डी सिल्वा ने पारी संभाली निसांका के आउट होने के बाद क्रीज पर उतरे दिनेश चांदीमल ने धनंजय डी सिल्वा के साथ पारी संभाली। दोनों ने 94 बॉल पर 68 रनों की साझेदारी की। वे चौथे विकेट के रूप में आउट हुए। उन्हें शमार जोसेफ ने बोल्ड कर दिया। चांदीमल 67 बॉल पर 54 रन बनाकर आउट हुए। उन्होंने 8 चौके लगाए। डी सिल्वा का शतक, स्कोर 250 पार पहुंचाया 110 के स्कोर पर चांदीमल का विकेट गंवाने के बाद धनंजया डी सिल्वा ने श्रीलंकाई पारी को 250 पार पहुंचाया। डी सिल्वा ने 168 गेंद पर 120 रन की शतकीय पारी खेली। इस पारी में 17 चौके लगाए। उन्होंने लोअर ऑर्डर में 2 अर्धशतकीय साझेदारियां कीं। इनमें सोनल दिनुषा (43 रन) के साथ 150 गेंद पर 99 रन और मिलन रथनायके के साथ 85 गेंद पर 64 रन की साझेदारी शामिल रही। ग्रेव्स ने सबसे ज्यादा विकेट, 3 बॉलर्स को 2-2 विकेट वेस्टइंडीज की ओर से जस्टिन ग्रेव्स ने सबसे ज्यादा 3 विकेट लिए। उनके अलावा, 3 अन्य गेंदबाजों ने 2-2 विकेट हासिल किए। इनमें केमार रोच, अल्जारी जोसेफ और शमार जोसेफ के नाम शामिल रहे। एक विकेट जॉयडन सेल्स को मिला। ———————————————–

कच्चा-तेल ईरान युद्ध से पहले वाले भाव 72 डॉलर पर:एक्सपर्ट ने कहा- पेट्रोल-डीजल की कीमतों में राहत दशहरे तक ही संभव

कच्चा-तेल ईरान युद्ध से पहले वाले भाव 72 डॉलर पर:एक्सपर्ट ने कहा- पेट्रोल-डीजल की कीमतों में राहत दशहरे तक ही संभव

ईरान युद्ध से पहले कच्चे तेल की जो कीमतें थीं, गुरुवार को वैश्विक बाजार में दाम उसी स्तर पर आ गए हैं। बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड ऑयल 72 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। यह वही भाव (72.29 डॉलर) है, जो युद्ध शुरू होने से एक दिन पहले 27 फरवरी को था। 17 जून को अमेरिका और ईरान के बीच समझौते के बाद स्विट्जरलैंड में हुई शांति वार्ता में अमेरिका ने ईरानी तेल के निर्यात पर आंशिक प्रतिबंध हटा लिए। इसके बाद होर्मुज रूट से गुजरने वाले जहाज की संख्या बढ़ने लगी है। सोमवार के बाद से करीब 80 जहाज इस होर्मुज से गुजर चुके हैं। हालांकि यह संख्या युद्ध से पहले रोजाना 100 से ज्यादा जहाजों से कम है। हालांकि कच्चा तेल सस्ता होने के बावजूद पेट्रोल पंपों पर दाम दशहरे तक ही कम हो सकते हैं। कंपनियां पहले अपने नुकसान की भरपाई कर सकती हैं पेट्रोलियम की कीमतों में राहत मिलने की कितनी उम्मीद है? एनर्जी एक्सपर्ट नरेंद्र तनेजा के मुताबिक, पेट्रोल, डीजल जैसे प्रोडक्ट्स जो अभी हम खरीद रहे हैं, उन्हें तैयार करने के लिए जो कच्चा तेल इस्तेमाल हो रहा है, उसे तब खरीदा गया था जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में उसकी कीमत करीब 110 डॉलर प्रति बैरल थी। भारतीय रिफाइनरियों के लिए ये करीब 125 डॉलर प्रति बैरल थे। 72 डॉलर के क्रूड से बने पेट्रोल, डीजल कब तक पंपों पर पहुंचेंगे? इसमें करीब ढाई महीने लगेंगे। मौजूदा भाव का तेल स्रोत देशों के बंदरगाहों पर जहाजों में लोड होने में 15-20 दिन लगेंगे। उन्हें भारतीय बंदरगाहों तक पहुंचने में 55-60 दिन लगेंगे। वहां से रिफाइनरी और फिर पेट्रोल पंपों तक पहुंचने में भी समय लगेगा। यह पूरा चक्र 75-80 दिनों का होता है। तो क्या ढाई महीने बाद फौरन कीमतें कम हो जाएंगी? इसकी संभावना कम है। अभी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को पेट्रोल-डीजल पर करीब 7.5 रुपए प्रति लीटर नुकसान हो रहा है। सरकार ने भी एक्साइज ड्यूटी 10 रुपए प्रति लीटर घटाई थी। कुछ दिन इसकी भरपाई की जा सकती है। उसके बाद ही पेट्रोल-डीजल के दाम कम होने की संभावना है। कब तक राहत मिल सकती है? दशहरे के आसपास पेट्रोल-डीजल के दाम कम होने लगेंगे। ये भी उम्मीद कर सकते हैं कि अगस्त के आखिर तक या सितंबर की शुरुआत से कुछ राहत मिलने लगे। क्या कच्चे तेल के दाम फिर बढ़ेंगे? मुझे नहीं लगता है कि निकट भविष्य में कच्चे तेल के दाम बढ़ेंगे। ऐसी आशंका अब बेहद कम है।

कच्चा-तेल ईरान युद्ध से पहले वाले भाव 72 डॉलर पर:एनर्जी एक्सपर्ट ने कहा- पेट्रोल-डीजल की कीमतों में राहत दशहरे तक ही संभव

कच्चा-तेल ईरान युद्ध से पहले वाले भाव 72 डॉलर पर:एनर्जी एक्सपर्ट ने कहा- पेट्रोल-डीजल की कीमतों में राहत दशहरे तक ही संभव

ईरान युद्ध से पहले कच्चे तेल की जो कीमतें थीं, गुरुवार को वैश्विक बाजार में दाम उसी स्तर पर आ गए हैं। बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड ऑयल 72 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। यह वही भाव (72.29 डॉलर) है, जो युद्ध शुरू होने से एक दिन पहले 27 फरवरी को था। 17 जून को अमेरिका और ईरान के बीच समझौते के बाद स्विट्जरलैंड में हुई शांति वार्ता में अमेरिका ने ईरानी तेल के निर्यात पर आंशिक प्रतिबंध हटा लिए। इसके बाद होर्मुज रूट से गुजरने वाले जहाज की संख्या बढ़ने लगी है। सोमवार के बाद से करीब 80 जहाज इस होर्मुज से गुजर चुके हैं। हालांकि यह संख्या युद्ध से पहले रोजाना 100 से ज्यादा जहाजों से कम है। हालांकि कच्चा तेल सस्ता होने के बावजूद पेट्रोल पंपों पर दाम दशहरे तक ही कम हो सकते हैं। कंपनियां पहले अपने नुकसान की भरपाई कर सकती हैं पेट्रोलियम की कीमतों में राहत मिलने की कितनी उम्मीद है? एनर्जी एक्सपर्ट नरेंद्र तनेजा के मुताबिक, पेट्रोल, डीजल जैसे प्रोडक्ट्स जो अभी हम खरीद रहे हैं, उन्हें तैयार करने के लिए जो कच्चा तेल इस्तेमाल हो रहा है, उसे तब खरीदा गया था जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में उसकी कीमत करीब 110 डॉलर प्रति बैरल थी। भारतीय रिफाइनरियों के लिए ये करीब 125 डॉलर प्रति बैरल थे। 72 डॉलर के क्रूड से बने पेट्रोल, डीजल कब तक पंपों पर पहुंचेंगे? इसमें करीब ढाई महीने लगेंगे। मौजूदा भाव का तेल स्रोत देशों के बंदरगाहों पर जहाजों में लोड होने में 15-20 दिन लगेंगे। उन्हें भारतीय बंदरगाहों तक पहुंचने में 55-60 दिन लगेंगे। वहां से रिफाइनरी और फिर पेट्रोल पंपों तक पहुंचने में भी समय लगेगा। यह पूरा चक्र 75-80 दिनों का होता है। तो क्या ढाई महीने बाद फौरन कीमतें कम हो जाएंगी? इसकी संभावना कम है। अभी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को पेट्रोल-डीजल पर करीब 7.5 रुपए प्रति लीटर नुकसान हो रहा है। सरकार ने भी एक्साइज ड्यूटी 10 रुपए प्रति लीटर घटाई थी। कुछ दिन इसकी भरपाई की जा सकती है। उसके बाद ही पेट्रोल-डीजल के दाम कम होने की संभावना है। कब तक राहत मिल सकती है? दशहरे के आसपास पेट्रोल-डीजल के दाम कम होने लगेंगे। ये भी उम्मीद कर सकते हैं कि अगस्त के आखिर तक या सितंबर की शुरुआत से कुछ राहत मिलने लगे। क्या कच्चे तेल के दाम फिर बढ़ेंगे? मुझे नहीं लगता है कि निकट भविष्य में कच्चे तेल के दाम बढ़ेंगे। ऐसी आशंका अब बेहद कम है। ये खबर भी पढ़ें… अमेरिका में बच्ची से रेप केस में स्नैपचैट पर मुकदमा: इसके फीचर से रेपिस्ट बच्ची तक पहुंचा, भारत में इसके 25 करोड़ एक्टिव मंथली यूजर सोशल मीडिया एप स्नैपचैट की मूल कंपनी स्नैप पर अमेरिका के मिसौरी में मुकदमा दायर किया गया है। इस मुकदमे में आरोप लगाया गया है कि प्लेटफॉर्म 12 साल की बच्ची के बलात्कार के लिए जिम्मेदार है। पूरी खबर पढ़ें…

Movie review- welcome to the jungle, dont find logic and laugh out loud, akshay kumar and raveena tondon stolling heart with chemistry

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Hindi News Entertainment Bollywood Movie Review Welcome To The Jungle, Dont Find Logic And Laugh Out Loud, Akshay Kumar And Raveena Tondon Stolling Heart With Chemistry 2 मिनट पहले कॉपी लिंक स्टारकास्ट- अक्षय कुमार, सुनील शेट्टी, परेश रावल, जैकी श्रॉफ, रवीना टंडन, जैकलीन फर्नांडिस डायरेक्टर- अहमद खान रेटिंग- 3.5 स्टार्स अवधि- 2 घंटे 44 मिनट ‘वेलकम टू द जंगल’ का मकसद सिर्फ और सिर्फ मनोरंजन करना है और फिल्म शुरुआत से ही यह बात साफ कर देती है, यहां लॉजिक भी छुट्टी पर है और हंसी ड्यूटी पर। करीब तीन दर्जन कलाकारों से सजी यह कॉमेडी हर कुछ मिनट बाद नया किरदार, कॉमेडी और बवाल लेकर आती है। कहानी कई बार तर्क से दूर जरूर जाती है, लेकिन अगर आप लॉजिक को थोड़ी देर के लिए किनारे रख दें (या पॉपकॉर्न के साथ निगल लें) तो अक्षय कुमार की कॉमिक टाइमिंग, रवीना टंडन के साथ उनकी केमिस्ट्री और बाकी कलाकारों की मस्ती आपको लगातार हंसाती रहती है। कैसी है फिल्म की कहानी? कहानी बड़े कारोबारी सिन्हा (जाकिर हुसैन) से शुरू होती है, जिसे पता चलता है कि सरकार बदलने के बाद उसका काला धन सरकारी एजेंसियों के रडार पर आने वाला है। उसका निजी सचिव दुबे (जॉनी लिवर) सलाह देता है कि पूरा पैसा एक फ्लॉप फिल्म बनाने में लगा दिया जाए, क्योंकि काला धन वहां खपाया जा सकता है I इसके बाद दो नाकाम निर्देशक देव और दास (राजपाल यादव और परेश रावल), फ्लॉप अभिनेता राजीव (अक्षय कुमार), कमजोर नजर वाला छायाकार (श्रेयस तलपड़े) और कई अजीबोगरीब कलाकारों के साथ फिल्म की शूटिंग शुरू हो जाती है। इसी बीच सिन्हा के घर पर छापा पड़ जाता है और उसकी पूरी अवैध संपत्ति जब्त हो जाती है। अब उसके पास आखिरी उम्मीद यही फिल्म बचती है। वह दुबे को आदेश देता है कि बिना किसी अतिरिक्त बजट के एक ही दिन में फिल्म पूरी करनी होगी, यानी ‘जुगाड़’ ही असली हीरो है। इसी मजबूरी में पूरी टीम बॉर्डर से लगे आजादगंज गांव पहुंचती है। यहां गांव वाले इन्हें भारतीय सेना समझ बैठते हैं क्योंकि वे आतंकी सरगना जतारा के अत्याचारों से परेशान हैं। इसके बाद फिल्म कॉमेडी से निकलकर हल्के भावनात्मक मोड़ भी लेती है। दूसरे हिस्से में कुछ दृश्य कॉमिक ‘बजरंगी भाईजान’ की याद भी दिलाते हैं। आखिरकार यह टीम गांव वालों को जतारा के आतंक से कैसे बचाती है, यही फिल्म का क्लाइमैक्स है, जहां लॉजिक थोड़ा और पीछे छूट जाता है, लेकिन मस्ती से हंसते-हंसते लोटपोट जरुर है । कैसी है कलाकारों की एक्टिंग? अक्षय कुमार अपने पुराने कॉमिक अवतार में लौटे हैं और पूरी फिल्म की सबसे बड़ी ताकत भी वही हैं। खास बात यह है कि संवादों में कई बार उन्होंने खुद अपनी छवि का मजाक भी उड़ाया है और वही दृश्य सबसे ज्यादा हंसी लेकर आते हैं, जैसे वो खुद भी जानते हों कि यहां लॉजिक नहीं, टाइमिंग काम आएगी। रवीना टंडन का स्क्रीन टाइम भले कम हो, लेकिन जब भी वह पर्दे पर आती हैं, पूरा ध्यान अपनी ओर खींच लेती हैं। लंबे समय बाद अक्षय और रवीना को साथ देखना फिल्म का सबसे यादगार हिस्सा बन जाता है। सुनील शेट्टी और अरशद वारसी अपनी पुरानी छवि में खूब जमे हैं। ‘आवारा पागल दीवाना’ वाले अंदाज में सुनील शेट्टी फिर से मजा देते हैं। परेश रावल, जॉनी लीवर, फरीदा जलाल और किरण कुमार अपने छोटे छोटे किरदारों में भी जमकर हंसाते हैं। जैकी श्रॉफ खलनायक के रूप में प्रभाव छोड़ते हैं। दिशा पाटनी और जैकलीन फर्नांडिस फिल्म में ग्लैमर का तड़का लगाती हैं। डायरेक्शन और तकनीकी पक्ष कैसा है? दिवंगत नीरज वोहरा की कहानी का विचार दिलचस्प है। निर्देशक अहमद खान की सबसे बड़ी कामयाबी यह है कि उन्होंने इतने बड़े कलाकारों की फौज को संतुलित तरीके से संभाला है और लगभग हर कलाकार को चमकने का मौका दिया है। फिल्म के संवाद लगातार हंसाते हैं और कई कॉमिक पंच लंबे समय तक याद रहते हैं। हालांकि पहले हिस्से में कुछ दृश्य जरूरत से ज्यादा लंबे लगते हैं, जहां लगता है कि एडिटिंग भी शायद छुट्टी पर चली गई थी। दूसरे भाग में भी कुछ हिस्सों की एडिटिंग और बेहतर हो सकती थी। फिल्म थोड़ी और कसी होती तो मनोरंजन का स्तर और ऊपर पहुंच सकता था। छायांकन, एक्शन और लोकेशन कहानी के मुताबिक अच्छे हैं। हालांकि पहले हिस्से में कुछ दृश्य जरूरत से ज्यादा लंबे लगते हैं, जहां एडिटिंग थोड़ी और कसी जा सकती थी। दूसरे भाग में भी कुछ हिस्सों की एडिटिंग और बेहतर हो सकती थी। फिल्म थोड़ी और टाइट होती तो मनोरंजन का स्तर और ऊपर पहुंच सकता था। छायांकन, एक्शन और लोकेशन कहानी के मुताबिक अच्छे हैं। VFX ठीक ठाक ही है। कैसा है फिल्म का म्यूजिक? फिल्म का संगीत कहानी के साथ चलता है, लेकिन ऐसा कोई गाना नहीं है जो सिनेमाघर से निकलने के बाद लंबे समय तक याद रह जाए। बैकग्राउंड संगीत कॉमेडी के माहौल को जरूर मजबूत करता है। फाइनल वर्डिक्ट- फिल्म देखें या नहीं? ‘वेलकम टू द जंगल’ ऐसी फिल्म नहीं है जिसमें हर सीन का तर्क तलाशा जाए, क्योंकि अगर आप ढूंढेंगे, तो शायद हंसी छूट जाएगी। यह उन दर्शकों के लिए बनी है जो परिवार या दोस्तों के साथ बैठकर खुलकर हंसना चाहते हैं। अक्षय कुमार का पुराना कॉमिक अंदाज, रवीना टंडन के साथ उनकी शानदार केमिस्ट्री और सुनील शेट्टी, अरशद वारसी, परेश रावल, जॉनी लीवर, फरीदा जलाल जैसे कलाकार मिलकर फिल्म को मनोरंजक बना देते हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

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Hindi News Entertainment Bollywood Movie Review Welcome To The Jungle, Dont Find Logic And Laugh Out Loud, Akshay Kumar And Raveena Tondon Stolling Heart With Chemistry 18 मिनट पहले कॉपी लिंक स्टारकास्ट- अक्षय कुमार, सुनील शेट्टी, परेश रावल, जैकी श्रॉफ, रवीना टंडन, जैकलीन फर्नांडिस डायरेक्टर- अहमद खान रेटिंग- 3.5 स्टार्स अवधि- 2 घंटे 44 मिनट ‘वेलकम टू द जंगल’ का मकसद सिर्फ और सिर्फ मनोरंजन करना है और फिल्म शुरुआत से ही यह बात साफ कर देती है, यहां लॉजिक भी छुट्टी पर है और हंसी ड्यूटी पर। करीब तीन दर्जन कलाकारों से सजी यह कॉमेडी हर कुछ मिनट बाद नया किरदार, कॉमेडी और बवाल लेकर आती है। कहानी कई बार तर्क से दूर जरूर जाती है, लेकिन अगर आप लॉजिक को थोड़ी देर के लिए किनारे रख दें (या पॉपकॉर्न के साथ निगल लें) तो अक्षय कुमार की कॉमिक टाइमिंग, रवीना टंडन के साथ उनकी केमिस्ट्री और बाकी कलाकारों की मस्ती आपको लगातार हंसाती रहती है। कैसी है फिल्म की कहानी? कहानी बड़े कारोबारी सिन्हा (जाकिर हुसैन) से शुरू होती है, जिसे पता चलता है कि सरकार बदलने के बाद उसका काला धन सरकारी एजेंसियों के रडार पर आने वाला है। उसका निजी सचिव दुबे (जॉनी लिवर) सलाह देता है कि पूरा पैसा एक फ्लॉप फिल्म बनाने में लगा दिया जाए, क्योंकि काला धन वहां खपाया जा सकता है I इसके बाद दो नाकाम निर्देशक देव और दास (राजपाल यादव और परेश रावल), फ्लॉप अभिनेता राजीव (अक्षय कुमार), कमजोर नजर वाला छायाकार (श्रेयस तलपड़े) और कई अजीबोगरीब कलाकारों के साथ फिल्म की शूटिंग शुरू हो जाती है। इसी बीच सिन्हा के घर पर छापा पड़ जाता है और उसकी पूरी अवैध संपत्ति जब्त हो जाती है। अब उसके पास आखिरी उम्मीद यही फिल्म बचती है। वह दुबे को आदेश देता है कि बिना किसी अतिरिक्त बजट के एक ही दिन में फिल्म पूरी करनी होगी, यानी ‘जुगाड़’ ही असली हीरो है। इसी मजबूरी में पूरी टीम बॉर्डर से लगे आजादगंज गांव पहुंचती है। यहां गांव वाले इन्हें भारतीय सेना समझ बैठते हैं क्योंकि वे आतंकी सरगना जतारा के अत्याचारों से परेशान हैं। इसके बाद फिल्म कॉमेडी से निकलकर हल्के भावनात्मक मोड़ भी लेती है। दूसरे हिस्से में कुछ दृश्य कॉमिक ‘बजरंगी भाईजान’ की याद भी दिलाते हैं। आखिरकार यह टीम गांव वालों को जतारा के आतंक से कैसे बचाती है, यही फिल्म का क्लाइमैक्स है, जहां लॉजिक थोड़ा और पीछे छूट जाता है, लेकिन मस्ती से हंसते-हंसते लोटपोट जरुर है । कैसी है कलाकारों की एक्टिंग? अक्षय कुमार अपने पुराने कॉमिक अवतार में लौटे हैं और पूरी फिल्म की सबसे बड़ी ताकत भी वही हैं। खास बात यह है कि संवादों में कई बार उन्होंने खुद अपनी छवि का मजाक भी उड़ाया है और वही दृश्य सबसे ज्यादा हंसी लेकर आते हैं, जैसे वो खुद भी जानते हों कि यहां लॉजिक नहीं, टाइमिंग काम आएगी। रवीना टंडन का स्क्रीन टाइम भले कम हो, लेकिन जब भी वह पर्दे पर आती हैं, पूरा ध्यान अपनी ओर खींच लेती हैं। लंबे समय बाद अक्षय और रवीना को साथ देखना फिल्म का सबसे यादगार हिस्सा बन जाता है। सुनील शेट्टी और अरशद वारसी अपनी पुरानी छवि में खूब जमे हैं। ‘आवारा पागल दीवाना’ वाले अंदाज में सुनील शेट्टी फिर से मजा देते हैं। परेश रावल, जॉनी लीवर, फरीदा जलाल और किरण कुमार अपने छोटे छोटे किरदारों में भी जमकर हंसाते हैं। जैकी श्रॉफ खलनायक के रूप में प्रभाव छोड़ते हैं। दिशा पाटनी और जैकलीन फर्नांडिस फिल्म में ग्लैमर का तड़का लगाती हैं। डायरेक्शन और तकनीकी पक्ष कैसा है? दिवंगत नीरज वोहरा की कहानी का विचार दिलचस्प है। निर्देशक अहमद खान की सबसे बड़ी कामयाबी यह है कि उन्होंने इतने बड़े कलाकारों की फौज को संतुलित तरीके से संभाला है और लगभग हर कलाकार को चमकने का मौका दिया है। फिल्म के संवाद लगातार हंसाते हैं और कई कॉमिक पंच लंबे समय तक याद रहते हैं। हालांकि पहले हिस्से में कुछ दृश्य जरूरत से ज्यादा लंबे लगते हैं, जहां लगता है कि एडिटिंग भी शायद छुट्टी पर चली गई थी। दूसरे भाग में भी कुछ हिस्सों की एडिटिंग और बेहतर हो सकती थी। फिल्म थोड़ी और कसी होती तो मनोरंजन का स्तर और ऊपर पहुंच सकता था। छायांकन, एक्शन और लोकेशन कहानी के मुताबिक अच्छे हैं। हालांकि पहले हिस्से में कुछ दृश्य जरूरत से ज्यादा लंबे लगते हैं, जहां एडिटिंग थोड़ी और कसी जा सकती थी। दूसरे भाग में भी कुछ हिस्सों की एडिटिंग और बेहतर हो सकती थी। फिल्म थोड़ी और टाइट होती तो मनोरंजन का स्तर और ऊपर पहुंच सकता था। छायांकन, एक्शन और लोकेशन कहानी के मुताबिक अच्छे हैं। VFX ठीक ठाक ही है। कैसा है फिल्म का म्यूजिक? फिल्म का संगीत कहानी के साथ चलता है, लेकिन ऐसा कोई गाना नहीं है जो सिनेमाघर से निकलने के बाद लंबे समय तक याद रह जाए। बैकग्राउंड संगीत कॉमेडी के माहौल को जरूर मजबूत करता है। फाइनल वर्डिक्ट- फिल्म देखें या नहीं? ‘वेलकम टू द जंगल’ ऐसी फिल्म नहीं है जिसमें हर सीन का तर्क तलाशा जाए, क्योंकि अगर आप ढूंढेंगे, तो शायद हंसी छूट जाएगी। यह उन दर्शकों के लिए बनी है जो परिवार या दोस्तों के साथ बैठकर खुलकर हंसना चाहते हैं। अक्षय कुमार का पुराना कॉमिक अंदाज, रवीना टंडन के साथ उनकी शानदार केमिस्ट्री और सुनील शेट्टी, अरशद वारसी, परेश रावल, जॉनी लीवर, फरीदा जलाल जैसे कलाकार मिलकर फिल्म को मनोरंजक बना देते हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

विशेष | वर्तमान प्रावधान के तहत, विलय में समस्या हो सकती है: हरीश साल्वे | एन18वी

विशेष | वर्तमान प्रावधान के तहत, विलय में समस्या हो सकती है: हरीश साल्वे | एन18वी

विशेष | वर्तमान प्रावधान के तहत, विलय में समस्या हो सकती है: हरीश साल्वे | N18V “यदि लगभग सभी सांसद जाना चाहते हैं तो क्या वे आपकी पार्टी के नहीं हैं? इन मामलों को पार्टी के भीतर हल किया जाना चाहिए। दलबदल विरोधी कानून की वर्तमान संरचना में शायद कोई समस्या है। तर्क यह है कि, यदि बहुत बड़ी संख्या में सांसद चले जाते हैं तो क्या वे आपकी पार्टी का हिस्सा नहीं हैं?: हरीश साल्वे, एफएमआर एसजी, सांसदों के अन्य दलों के साथ विलय पर”, एफएमआर एसजी, सांसदों के अन्य दलों के साथ विलय पर मोबाइल ऐप – https://onelink.to/desc-youtube आखरी अपडेट: 26 जून, 2026, 09:00 IST (टैग्सटूट्रांसलेट)संवैधानिक नैतिकता(टी)लिंग न्याय(टी)महाराष्ट्र विधायक सना मलिक(टी)मुस्लिम पर्सनल लॉ(टी)पर्सनल लॉ बहस(टी)पर्सनल लॉ इंडिया(टी)राजनीतिक दल और पर्सनल लॉ(टी)बहुविवाह विवाद(टी)मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत बहुविवाह(टी)प्रगतिशील आदर्श(टी)प्रगतिशील राजनीति(टी)सना मलिक(टी)सना मलिक का बचाव बहुविवाह(टी)सना मलिक विधायक(टी)सना मलिक बहुविवाह टिप्पणी(टी)धर्मनिरपेक्ष मूल्य(टी)धर्मनिरपेक्षता भारत(टी)यूसीसी(टी)यूसीसी बहस भारत(टी)समान नागरिक संहिता(टी)महिला अधिकार

लैथम -कॉन्वे के शतक से न्यूजीलैंड तीसरे टेस्ट में मजबूत:पहले दिन न्यूजीलैंड के 361 रन; आखिरी सेशन में इंग्लैंड की वापसी

लैथम -कॉन्वे के शतक से न्यूजीलैंड तीसरे टेस्ट में मजबूत:पहले दिन न्यूजीलैंड के 361 रन; आखिरी सेशन में इंग्लैंड की वापसी

इंग्लैंड और न्यूजीलैंड के बीच ट्रेंट ब्रिज में खेले जा रहे तीसरे टेस्ट के पहले दिन न्यूजीलैंड ने मजबूत शुरुआत की। टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए टीम ने दिन का खेल खत्म होने तक 4 विकेट पर 361 रन बनाए। ओपनर डेवोन कॉन्वे (157) और कप्तान टॉम लैथम (151) ने पहले विकेट के लिए 317 रन जोड़कर टीम को शानदार शुरुआत दिलाई। दोनों ने इसी साल माउंट माउंगानुई में वेस्टइंडीज के खिलाफ पहले विकेट के लिए 323 रन की साझेदारी भी की थी, जो उनकी सर्वश्रेष्ठ ओपनिंग साझेदारी है। हालांकि, आखिरी सेशन में इंग्लैंड ने मैच में वापसी करते हुए 44 रन के भीतर 4 विकेट झटक दिए। स्टंप्स के समय क्रीज पर हेनरी निकोल्स और नाइटवॉचर विल ओ’रूर्के मौजूद थे। लैथम ने मार्टिन क्रो की बराबरी की लाथम का यह टेस्ट करियर का 17वां शतक है। इसके साथ ही उन्होंने न्यूजीलैंड के बल्लेबाज मार्टिन क्रो के टेस्ट शतकों की बराबरी कर ली। दूसरी ओर, कॉन्वे ने अपने टेस्ट करियर का आठवां शतक पूरा किया। चोटों से परेशान न्यूजीलैंड को टॉस जीतने से मिली बड़ी राहत मैच से ठीक पहले न्यूजीलैंड की टीम को दो बड़े झटके लगे थे। पिछले हफ्ते द ओवल टेस्ट में 11 विकेट लेकर प्लेयर ऑफ द मैच रहे तेज गेंदबाज मैट हेनरी (पैर की चोट) और पहली पारी में शतक लगाने वाले ग्लेन फिलिप्स (साइड स्ट्रेन) चोट के कारण मैच से बाहर हो गए। उनकी जगह मिचेल सैंटनर और बेन सियर्स को प्लेइंग इलेवन में शामिल किया गया। ऐसे में कप्तान टॉम लाथम ने टॉस जीतकर पहले बैटिंग का सही फैसला किया, जिससे टीम को इस झटके से उबरने और सपाट पिच पर बड़ा स्कोर बनाने का मौका मिल गया।, कॉन्वे और लैथम को मिले जीवनदान न्यूजीलैंड की बड़ी साझेदारी के दौरान इंग्लैंड ने कई मौके गंवाए। पारी के शुरुआती ओवरों में ही जोफ्रा आर्चर की गेंद पर स्लिप कॉर्डन में बदलाव के तुरंत बाद टॉम लाथम का कैच उसी खाली जगह से निकल गया। इसके बाद स्पिनर शोएब बशीर की गेंद पर 71 रन के स्कोर पर डेवोन कॉन्वे एलबीडब्ल्यू थे, लेकिन इंग्लैंड ने डीआरएस नहीं लिया। रिप्ले में गेंद सीधे स्टंप्स पर लगती दिखी। वहीं, 129 रन पर गस एटकिंसन की गेंद पर विकेटकीपर जेमी स्मिथ ने लाथम का लेग साइड पर आसान कैच छोड़ दिया। इन दोनों जीवनदानों का न्यूजीलैंड ने पूरा फायदा उठाया और कॉन्वे-लाथम ने पहले विकेट के लिए 317 रन की रिकॉर्ड साझेदारी कर डाली। आखिरी सेशन में इंग्लैंड की वापसी न्यूजीलैंड एक समय बिना किसी नुकसान के 317 रन बनाकर पूरी तरह हावी नजर आ रही थी, लेकिन दिन के अंतिम सेशन में इंग्लैंड ने शानदार वापसी की। कप्तान बेन स्टोक्स ने अपने 13वें ओवर में टॉम लाथम को आउट कर 317 रन की रिकॉर्ड ओपनिंग साझेदारी तोड़ी। इसके सिर्फ सात गेंद बाद जो रूट ने डेवोन कॉन्वे को लॉन्ग-ऑन पर कैच कराकर न्यूजीलैंड को दूसरा झटका दिया। इसके बाद इंग्लैंड ने दबाव बनाए रखा। दिन का खेल समाप्त होने से कुछ मिनट पहले गस एटकिंसन ने रचिन रवींद्र को पवेलियन भेजा, जबकि आखिरी ओवर में जोफ्रा आर्चर ने हेनरी निकोल्स (14) को विकेटकीपर के हाथों कैच कराकर न्यूजीलैंड का चौथा विकेट गिराया। इस तरह इंग्लैंड ने 44 रन के भीतर चार विकेट लेकर मुकाबले में दमदार वापसी की। हालांकि, मेजबान टीम के लिए चिंता की बात यह रही कि तेज गेंदबाज जोश टंग हैमस्ट्रिंग में परेशानी के कारण तीसरे सेशन में सिर्फ एक ओवर ही फेंक सके।