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Apple iPad MacBook Price Hike | AI Boom Drives Chip Cost Up

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नई दिल्ली18 मिनट पहले

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एपल ने गुरुवार को अपने आईपैड और मैकबुक की कीमतों में 300 डॉलर यानी 28,383 रुपए तक की बढ़ोतरी कर दी है। कंपनी का कहना है कि AI इंडस्ट्री के डेटा सेंटर बनाने के कारण मेमोरी और स्टोरेज चिप की लागत लगातार बढ़ रही है, जिसके चलते अब ग्राहकों को इस बढ़ी हुई कीमत से बचाना संभव नहीं रह गया है।

कीमत बढ़ने से कौन-से प्रोडक्ट्स महंगे हुए

इस फैसले से एपल के सबसे ज्यादा बिकने वाले प्रोडक्ट आईफोन पर कोई असर नहीं पड़ेगा। कंपनी के सबसे कम कीमत वाले लैपटॉप ‘नियो’ की शुरुआती कीमत लॉन्च के कुछ महीने बाद ही 599 डॉलर से बढ़कर 699 डॉलर हो जाएगी।

इसके अलावा 512 गीगाबाइट वाले मैकबुक एयर की कीमत 200 डॉलर बढ़ गई है, जबकि 1 टेराबाइट स्टोरेज वाले मैकबुक प्रो की कीमत में 300 डॉलर का इजाफा होगा।

एपल ने अपने होमपॉड स्मार्ट स्पीकर के दोनों वर्जन और एपल टीवी सेट-टॉप बॉक्स की कीमतें भी बढ़ा दी हैं। इस घोषणा के बाद एपल के शेयर करीब 5% गिर गए, जबकि उसकी कॉम्पिटिटर कंपनी डेल के शेयर 8% से ज्यादा टूट गए।

चिप मेकर्स ने एनवीडिया जैसी कंपनियों को दी प्राथमिकता

माइक्रोन जैसी मेमोरी मैन्युफैक्चरर कंपनियों ने पिछले कुछ महीनों में एनवीडिया जैसे AI चिपमेकर्स के ऑर्डर्स को प्राथमिकता दी है। इस कदम से मेमोरी मैन्युफैक्चरर को रिकॉर्ड मुनाफा तो हुआ है, लेकिन इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों के लिए इसकी सप्लाई बेहद कम बची है। सप्लाई कम होने के कारण ही अब कंपनियों को अपने प्रोडक्ट्स के दाम बढ़ाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

एक्सपर्ट्स के अनुसार, दुनिया की सबसे वैल्यूएबल कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी एपल के सप्लायर्स के साथ बेहतरीन संबंध होने के बावजूद वह इस संकट से नहीं बच पाई है। हालांकि, मजबूत संबंधों के कारण एपल को कुछ राहत जरूर मिली है, क्योंकि उसके कॉम्पिटिटर्स को कीमतों में इससे भी ज्यादा बढ़ोतरी करनी पड़ी है।

कंपोनेंट की कीमत में इतनी बड़ी बढ़ोतरी पहले कभी नहीं देखी

एपल ने एक बयान जारी कर कहा कि हमने किसी कंपोनेंट की कीमत में इतनी तेजी से और इतनी बड़ी बढ़ोतरी पहले कभी नहीं देखी है। हम अब तक अपने ग्राहकों को इन बढ़ी हुई कीमतों से बचाते आ रहे थे, लेकिन अब हम एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गए हैं जहां हमें आईपैड और मैक सहित कई प्रोडक्ट्स की कीमतें बढ़ाना शुरू करना पड़ रहा है।

अगले फेज में आईफोन की कीमतें बढ़ने की आशंका

मार्केट एनालिस्ट्स का मानना है कि अगला नंबर आईफोन का हो सकता है। रिसर्च फर्म IDC की सीनियर रिसर्च डायरेक्टर नबीला पोपल ने कहा कि आईफोन इस बढ़ोतरी से अछूता नहीं है, इसकी कीमतें भी जल्द ही बढ़ने वाली हैं।

एपल के लिए आईफोन की फॉल लॉन्चिंग से ठीक पहले कीमतों में बढ़ोतरी की घोषणा करना बेहद स्ट्रैटेजिक कदम था, ताकि लॉन्चिंग के समय सुर्खियां कीमतों में बढ़ोतरी के बजाय नए फोन की वैल्यू पर फोकस रहें।

क्या है रैम-एगेडन का पूरा बैकग्राउंड

मॉडर्न टेक गैजेट्स में इस्तेमाल होने वाली डायनेमिक रैंडम एक्सेस मेमोरी (DRAM) की कीमतों में 2026 की पहली तिमाही में 98% तक की बढ़ोतरी देखी गई है। इंडस्ट्री ट्रैकर ट्रेंडफोर्स के मुताबिक, चालू तिमाही में भी इसकी कीमतों में 58% से 63% तक का उछाल आने का अनुमान है। एक्सपर्ट्स इस स्थिति को “रैम-एगेडन” कह रहे हैं।

यह संकट AI डेटा सेंटर डेवलपमेंट में आए उछाल के कारण पैदा हुआ है, जहां एनवीडिया जैसी कंपनियां मेमोरी मैन्युफैक्चरर के साथ लॉन्ग-टर्म डील कर रही हैं। माइक्रोन ने बुधवार को बताया कि उसने अपनी मेमोरी सप्लाई सुरक्षित करने के इच्छुक ग्राहकों से 22 बिलियन डॉलर के लॉन्ग-टर्म एग्रीमेंट लॉक किए हैं।

गैजेट्स मार्केट के फ्यूचर पर असर

लागत में हो रही इस बढ़ोतरी का सीधा असर इस साल डिवाइस की बिक्री पर पड़ने की उम्मीद है। रिसर्च फर्म IDC के अनुमान के मुताबिक, इस बढ़ती लागत के कारण स्मार्टफोन बाजार में इस साल करीब 14% की अब तक की सबसे बड़ी सालाना गिरावट देखने को मिल सकती है, जबकि पीसी (PC) मार्केट में भी 11.3% की कमी आने की आशंका है।

ये खबर भी पढ़ें…

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एपल ने गुरुवार को अपने आईपैड और मैकबुक की कीमतों में 300 डॉलर यानी 28,383 रुपए तक की बढ़ोतरी कर दी है। कंपनी का कहना है कि AI इंडस्ट्री के डेटा सेंटर बनाने के कारण मेमोरी और स्टोरेज चिप की लागत लगातार बढ़ रही है, जिसके चलते अब ग्राहकों को इस बढ़ी हुई कीमत से बचाना संभव नहीं रह गया है।

कीमत बढ़ने से कौन-से प्रोडक्ट्स महंगे हुए

इस फैसले से एपल के सबसे ज्यादा बिकने वाले प्रोडक्ट आईफोन पर कोई असर नहीं पड़ेगा। कंपनी के सबसे कम कीमत वाले लैपटॉप ‘नियो’ की शुरुआती कीमत लॉन्च के कुछ महीने बाद ही 599 डॉलर से बढ़कर 699 डॉलर हो जाएगी।

इसके अलावा 512 गीगाबाइट वाले मैकबुक एयर की कीमत 200 डॉलर बढ़ गई है, जबकि 1 टेराबाइट स्टोरेज वाले मैकबुक प्रो की कीमत में 300 डॉलर का इजाफा होगा।

एपल ने अपने होमपॉड स्मार्ट स्पीकर के दोनों वर्जन और एपल टीवी सेट-टॉप बॉक्स की कीमतें भी बढ़ा दी हैं। इस घोषणा के बाद एपल के शेयर करीब 5% गिर गए, जबकि उसकी कॉम्पिटिटर कंपनी डेल के शेयर 8% से ज्यादा टूट गए।

चिप मेकर्स ने एनवीडिया जैसी कंपनियों को दी प्राथमिकता

माइक्रोन जैसी मेमोरी मैन्युफैक्चरर कंपनियों ने पिछले कुछ महीनों में एनवीडिया जैसे AI चिपमेकर्स के ऑर्डर्स को प्राथमिकता दी है। इस कदम से मेमोरी मैन्युफैक्चरर को रिकॉर्ड मुनाफा तो हुआ है, लेकिन इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों के लिए इसकी सप्लाई बेहद कम बची है। सप्लाई कम होने के कारण ही अब कंपनियों को अपने प्रोडक्ट्स के दाम बढ़ाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

एक्सपर्ट्स के अनुसार, दुनिया की सबसे वैल्यूएबल कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी एपल के सप्लायर्स के साथ बेहतरीन संबंध होने के बावजूद वह इस संकट से नहीं बच पाई है। हालांकि, मजबूत संबंधों के कारण एपल को कुछ राहत जरूर मिली है, क्योंकि उसके कॉम्पिटिटर्स को कीमतों में इससे भी ज्यादा बढ़ोतरी करनी पड़ी है।

कंपोनेंट की कीमत में इतनी बड़ी बढ़ोतरी पहले कभी नहीं देखी

एपल ने एक बयान जारी कर कहा कि हमने किसी कंपोनेंट की कीमत में इतनी तेजी से और इतनी बड़ी बढ़ोतरी पहले कभी नहीं देखी है। हम अब तक अपने ग्राहकों को इन बढ़ी हुई कीमतों से बचाते आ रहे थे, लेकिन अब हम एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गए हैं जहां हमें आईपैड और मैक सहित कई प्रोडक्ट्स की कीमतें बढ़ाना शुरू करना पड़ रहा है।

अगले फेज में आईफोन की कीमतें बढ़ने की आशंका

मार्केट एनालिस्ट्स का मानना है कि अगला नंबर आईफोन का हो सकता है। रिसर्च फर्म IDC की सीनियर रिसर्च डायरेक्टर नबीला पोपल ने कहा कि आईफोन इस बढ़ोतरी से अछूता नहीं है, इसकी कीमतें भी जल्द ही बढ़ने वाली हैं।

एपल के लिए आईफोन की फॉल लॉन्चिंग से ठीक पहले कीमतों में बढ़ोतरी की घोषणा करना बेहद स्ट्रैटेजिक कदम था, ताकि लॉन्चिंग के समय सुर्खियां कीमतों में बढ़ोतरी के बजाय नए फोन की वैल्यू पर फोकस रहें।

क्या है रैम-एगेडन का पूरा बैकग्राउंड

मॉडर्न टेक गैजेट्स में इस्तेमाल होने वाली डायनेमिक रैंडम एक्सेस मेमोरी (DRAM) की कीमतों में 2026 की पहली तिमाही में 98% तक की बढ़ोतरी देखी गई है। इंडस्ट्री ट्रैकर ट्रेंडफोर्स के मुताबिक, चालू तिमाही में भी इसकी कीमतों में 58% से 63% तक का उछाल आने का अनुमान है। एक्सपर्ट्स इस स्थिति को “रैम-एगेडन” कह रहे हैं।

यह संकट AI डेटा सेंटर डेवलपमेंट में आए उछाल के कारण पैदा हुआ है, जहां एनवीडिया जैसी कंपनियां मेमोरी मैन्युफैक्चरर के साथ लॉन्ग-टर्म डील कर रही हैं। माइक्रोन ने बुधवार को बताया कि उसने अपनी मेमोरी सप्लाई सुरक्षित करने के इच्छुक ग्राहकों से 22 बिलियन डॉलर के लॉन्ग-टर्म एग्रीमेंट लॉक किए हैं।

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