EPFO-3.0 से अब UPI-ATM से निकाल सकेंगे PF का पैसा:75% तक रकम निकालने की सुविधा मिलेगी; आधार OTP से वेरिफिकेशन होगा; खास ATM कार्ड मिलेंगे

एम्पलाई प्रोविडेंट फंड ऑर्गेनाइजेशन (EPFO) अपने मेंबर्स के लिए बड़ा डिजिटल अपग्रेड ‘EPFO 3.0’ लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है। इसके तहत पीएफ अकाउंट होल्डर्स अब UPI और ATM के जरिए भी अपना पैसा निकाल सकेंगे। इस नए सिस्टम को जून के अंत तक शुरू किए जाने की उम्मीद है। EPFO ने अभी तक UPI या ATM ट्रांजैक्शन के लिए अलग से कोई विड्रॉल लिमिट का ऐलान नहीं किया है, लेकिन मौजूदा नियमों के अनुसार ही यह सिस्टम काम करेगा। 75% तक पीएफ की रकम निकाल सकेंगे अकाउंट होल्डर्स मौजूदा नियमों के आधार पर योग्य अकाउंट होल्डर्स अपनी विड्रॉल की जरूरत और एलिजिबिलिटी के हिसाब से पीएफ बैलेंस का 75% तक हिस्सा UPI या UPI-सक्षम ATM के जरिए निकाल सकेंगे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस नए सिस्टम से अवेलेबल ईपीएफ बैलेंस का 75% तक हिस्सा सीधे लिंक किए गए बैंक अकाउंट में तुरंत ट्रांसफर किया जा सकेगा। आधार OTP और NPCI की मदद से काम करेगा नया सिस्टम यह नया विड्रॉल सिस्टम नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के सहयोग से तैयार किया जा रहा है। सरकार के अनुसार, इस सुविधा का टेस्टिंग काम पूरा हो चुका है और इसे जल्द ही रोलआउट किया जाएगा। केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया ने भी संकेत दिया है कि इसकी आधिकारिक घोषणा जल्द ही की जाएगी। इस सिस्टम में मेंबर्स को सपोर्टेड UPI एप्स के जरिए विड्रॉल शुरू करने से पहले आधार-बेस्ड OTP वेरिफिकेशन करना होगा। इसके बाद पैसा तुरंत लिंक किए गए बैंक खाते में क्रेडिट हो जाएगा। इससे पुराना सिस्टम बदल जाएगा, जिसमें क्लेम सबमिट करने के बाद सेटलमेंट के लिए कई दिनों का इंतजार करना पड़ता था। पीएफ-लिंक्ड ATM कार्ड भी मिलेंगे EPFO द्वारा पीएफ-लिंक्ड ATM कार्ड भी पेश किए जाने की उम्मीद है। इससे अकाउंट होल्डर्स एक सामान्य डेबिट कार्ड की तरह सीधे ATM से अपनी एलिजिबल राशि निकाल सकेंगे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मेंबर्स को अपने EPF बैलेंस का कम से कम 25% हिस्सा खाते में बनाए रखना जरूरी हो सकता है, ताकि रिटायरमेंट की बचत पूरी तरह खत्म न हो। इन मेंबर्स को मिलेगी यह सुविधा इस नई डिजिटल विड्रॉल सुविधा का लाभ उठाने के लिए मेंबर्स के पास कुछ जरूरी चीजें होनी चाहिए… ऑटो-सेटलमेंट लिमिट बढ़कर ₹5 लाख हुई EPFO 3.0 के तहत UPI और ATM विड्रॉल के अलावा भी कई बड़े सुधार किए जा रहे हैं। क्लेम के लिए ऑटो-सेटलमेंट की लिमिट को ₹1 लाख से बढ़ाकर ₹5 लाख कर दिया गया है। इससे अब ज्यादा से ज्यादा क्लेम बिना किसी मैनुअल दखल के ऑटोमैटिक प्रोसेस हो सकेंगे। इसके साथ ही मेंबर्स ID वेरिफिकेशन के लिए उमंग (UMANG) एप के जरिए फेस ऑथेंटिकेशन टेक्नोलॉजी (FAT) का इस्तेमाल कर सकेंगे, जिससे कागजी कार्रवाई कम होगी। हालांकि, जब तक EPFO विस्तृत ऑपरेशनल गाइडलाइंस जारी नहीं करता, तब तक पात्रता मानदंड और टैक्स नियमों सहित मौजूदा ईपीएफ विड्रॉल के नियम ही लागू रहेंगे। क्या है ऑटो-सेटलमेंट लिमिट? EPFO ने क्लेम सेटलमेंट को तेज करने के लिए ऑटो-सेटलमेंट की सीमा को अब ₹5 लाख रुपए कर दिया है। पहले यह सीमा केवल ₹1 लाख रुपए थी। इसका मतलब है कि अगर आपका क्लेम ₹5 लाख रुपए तक का है, तो सॉफ्टवेयर बिना किसी अधिकारी के मैनुअल अप्रूवल के इसे ऑटोमैटिक और बेहद कम समय में पास कर देगा। ये खबर भी पढ़ें… EPFO पोर्टल 26-28 जून तक बंद रहेगा: सॉफ्टवेयर अपग्रेडेशन के कारण क्लेम प्रोसेस नहीं होंगे, जल्द UPI-ATM से पैसा निकालने की सुविधा EPFO का ऑनलाइन क्लेम प्रोसेसिंग पोर्टल 26 से 28 जून तक बंद रहेगा। इसकी वजह सिस्टम माइग्रेशन और सॉफ्टवेयर अपग्रेडेशन है। इस दौरान पीएफ विड्रॉल, ई पासवबुक सर्विस और अन्य डिजिटल सर्विस बंद रहेंगी। पूरी खबर पढ़ें…
EPFO-3.0 से अब UPI-ATM से निकाल सकेंगे PF का पैसा:75% तक रकम निकालने की सुविधा मिलेगी; आधार OTP से वेरिफिकेशन होगा; खास ATM कार्ड मिलेंगे

एम्पलाई प्रोविडेंट फंड ऑर्गेनाइजेशन (EPFO) अपने मेंबर्स के लिए बड़ा डिजिटल अपग्रेड ‘EPFO 3.0’ लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है। इसके तहत पीएफ अकाउंट होल्डर्स अब UPI और ATM के जरिए भी अपना पैसा निकाल सकेंगे। इस नए सिस्टम को जून के अंत तक शुरू किए जाने की उम्मीद है। EPFO ने अभी तक UPI या ATM ट्रांजैक्शन के लिए अलग से कोई विड्रॉल लिमिट का ऐलान नहीं किया है, लेकिन मौजूदा नियमों के अनुसार ही यह सिस्टम काम करेगा। 75% तक पीएफ की रकम निकाल सकेंगे अकाउंट होल्डर्स मौजूदा नियमों के आधार पर योग्य अकाउंट होल्डर्स अपनी विड्रॉल की जरूरत और एलिजिबिलिटी के हिसाब से पीएफ बैलेंस का 75% तक हिस्सा UPI या UPI-सक्षम ATM के जरिए निकाल सकेंगे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस नए सिस्टम से अवेलेबल ईपीएफ बैलेंस का 75% तक हिस्सा सीधे लिंक किए गए बैंक अकाउंट में तुरंत ट्रांसफर किया जा सकेगा। आधार OTP और NPCI की मदद से काम करेगा नया सिस्टम यह नया विड्रॉल सिस्टम नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के सहयोग से तैयार किया जा रहा है। सरकार के अनुसार, इस सुविधा का टेस्टिंग काम पूरा हो चुका है और इसे जल्द ही रोलआउट किया जाएगा। केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया ने भी संकेत दिया है कि इसकी आधिकारिक घोषणा जल्द ही की जाएगी। इस सिस्टम में मेंबर्स को सपोर्टेड UPI एप्स के जरिए विड्रॉल शुरू करने से पहले आधार-बेस्ड OTP वेरिफिकेशन करना होगा। इसके बाद पैसा तुरंत लिंक किए गए बैंक खाते में क्रेडिट हो जाएगा। इससे पुराना सिस्टम बदल जाएगा, जिसमें क्लेम सबमिट करने के बाद सेटलमेंट के लिए कई दिनों का इंतजार करना पड़ता था। पीएफ-लिंक्ड ATM कार्ड भी मिलेंगे EPFO द्वारा पीएफ-लिंक्ड ATM कार्ड भी पेश किए जाने की उम्मीद है। इससे अकाउंट होल्डर्स एक सामान्य डेबिट कार्ड की तरह सीधे ATM से अपनी एलिजिबल राशि निकाल सकेंगे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मेंबर्स को अपने EPF बैलेंस का कम से कम 25% हिस्सा खाते में बनाए रखना जरूरी हो सकता है, ताकि रिटायरमेंट की बचत पूरी तरह खत्म न हो। इन मेंबर्स को मिलेगी यह सुविधा इस नई डिजिटल विड्रॉल सुविधा का लाभ उठाने के लिए मेंबर्स के पास कुछ जरूरी चीजें होनी चाहिए… ऑटो-सेटलमेंट लिमिट बढ़कर ₹5 लाख हुई EPFO 3.0 के तहत UPI और ATM विड्रॉल के अलावा भी कई बड़े सुधार किए जा रहे हैं। क्लेम के लिए ऑटो-सेटलमेंट की लिमिट को ₹1 लाख से बढ़ाकर ₹5 लाख कर दिया गया है। इससे अब ज्यादा से ज्यादा क्लेम बिना किसी मैनुअल दखल के ऑटोमैटिक प्रोसेस हो सकेंगे। इसके साथ ही मेंबर्स ID वेरिफिकेशन के लिए उमंग (UMANG) एप के जरिए फेस ऑथेंटिकेशन टेक्नोलॉजी (FAT) का इस्तेमाल कर सकेंगे, जिससे कागजी कार्रवाई कम होगी। हालांकि, जब तक EPFO विस्तृत ऑपरेशनल गाइडलाइंस जारी नहीं करता, तब तक पात्रता मानदंड और टैक्स नियमों सहित मौजूदा ईपीएफ विड्रॉल के नियम ही लागू रहेंगे। क्या है ऑटो-सेटलमेंट लिमिट? EPFO ने क्लेम सेटलमेंट को तेज करने के लिए ऑटो-सेटलमेंट की सीमा को अब ₹5 लाख रुपए कर दिया है। पहले यह सीमा केवल ₹1 लाख रुपए थी। इसका मतलब है कि अगर आपका क्लेम ₹5 लाख रुपए तक का है, तो सॉफ्टवेयर बिना किसी अधिकारी के मैनुअल अप्रूवल के इसे ऑटोमैटिक और बेहद कम समय में पास कर देगा। ये खबर भी पढ़ें… EPFO पोर्टल 26-28 जून तक बंद रहेगा: सॉफ्टवेयर अपग्रेडेशन के कारण क्लेम प्रोसेस नहीं होंगे, जल्द UPI-ATM से पैसा निकालने की सुविधा EPFO का ऑनलाइन क्लेम प्रोसेसिंग पोर्टल 26 से 28 जून तक बंद रहेगा। इसकी वजह सिस्टम माइग्रेशन और सॉफ्टवेयर अपग्रेडेशन है। इस दौरान पीएफ विड्रॉल, ई पासवबुक सर्विस और अन्य डिजिटल सर्विस बंद रहेंगी। पूरी खबर पढ़ें…
76% Promoted in 2 Years, Many Reach Leadership

Hindi News Career Jaipuria Alumni Success: 76% Promoted In 2 Years, Many Reach Leadership 5 मिनट पहले कॉपी लिंक प्लेसमेंट से आगे बढ़कर करियर की असली तस्वीर भारत में मैनेजमेंट संस्थानों की सफलता अक्सर प्लेसमेंट, वेतन पैकेज और बड़ी कंपनियों की भर्ती के आधार पर आंकी जाती है। लेकिन किसी संस्थान की वास्तविक सफलता का पैमाना यह नहीं है कि छात्र को पहली नौकरी कहां मिली, बल्कि यह है कि वह अपने करियर में आगे कितनी तेजी से बढ़ता है। इसी पहलू पर रोशनी डालती है जयपुरिया इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट की हालिया एलुमनाई ट्रेसर स्टडी, जिसमें पूर्व छात्रों की लॉन्ग टर्म करियर ग्रोथ का विश्लेषण किया गया है। दो साल में 76% को मिला पहला बड़ा करियर ग्रोथ, 10 साल से ज्यादा अनुभव वाले 50% लोग लीडरशिप पदों पर अध्ययन के अनुसार, जयपुरिया के 76.1% पूर्व छात्रों को स्नातक होने के दो वर्षों के भीतर पहला महत्वपूर्ण करियर प्रमोशन या प्रगति हासिल हुई। जबकि दस साल से ज़्यादा का प्रोफेशनल अनुभव रखने वाले लगभग आधे लोग जनरल मैनेजर और वाइस प्रेसिडेंट जैसे सीनियर लीडरशिप पदों पर पहुंच गए हैं। ये नतीजे एक अहम सच्चाई को पुख्ता करते हैं: मैनेजमेंट एजुकेशन की असली कीमत सिर्फ़ इस बात से नहीं पता चलती कि ग्रेजुएट अपने करियर की शुरुआत कहां से करते हैं, बल्कि इस बात से पता चलती है कि समय के साथ वे कितनी तरक्की करते हैं। इससे पता चलता है कि जयपुरिया केवल नौकरी दिलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि छात्रों को तेजी से आगे बढ़ने के लिए भी तैयार करता है। इससे स्वाभाविक रूप से एक और सवाल उठता है: लंबे समय तक प्रोफेशनल ग्रोथ किस चीज से संभव होती है? इसका जवाब अक्सर इस बात में मिलता है कि संस्थान छात्रों को सिर्फ नौकरी के लिए ही नहीं, बल्कि लीडरशिप, परिस्थितियों के अनुसार ढलने की क्षमता और लगातार सीखते रहने के लिए कैसे तैयार करते हैं। राजस्थान के छात्रों को अपने राज्य में रहते हुए ग्लोबल और इंटरनेशनल लेवल की मैनेजमेंट एजुकेशन हासिल करने का मौका! राजस्थान के छात्रों और परिवारों के लिए ये एक एडवांटेज है कि जयपुरिया इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट जयपुर उन्हें अपने राज्य में ही रहकर राष्ट्रीय स्तर की मैनेजमेंट शिक्षा और ग्लोबल करियर के अवसरों तक पहुंचने का मौका देता है। जयपुरिया इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट के पास AACSB एक्रेडिटेशन और NIRF रैंकिंग दोनों है! जयपुरिया इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट जयपुर इस बात का एक बेहतरीन उदाहरण है कि कैसे लंबे समय के विकास की इस सोच को छात्रों के अनुभव में बदला जाता है। यह राजस्थान के सिर्फ दो मैनेजमेंट संस्थानों में से एक है जिनके पास AACSB एक्रेडिटेशन और NIRF रैंकिंग दोनों हैं। जयपुरिया इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, जयपुर ने एक ऐसा इकोसिस्टम बनाया है जहां पढ़ाई की गंभीरता, इंडस्ट्री से जुड़ाव, लीडरशिप का विकास और करियर के लिए तैयारी, सब मिलकर सीखने का एक शानदार अनुभव देते हैं। रैंकिंग और एक्रेडिटेशन से कहीं ज्यादा, इस इकोसिस्टम का असर मौजूदा स्टूडेंट्स के करियर के सफर में साफ नजर आता है दिखाई देता है। 2024–26 बैच की छात्रा खुशी सोनी, जिन्हें डेलॉइट में नियुक्ति मिली है, मानती हैं कि इंडस्ट्री इंटरैक्शन, लाइव प्रोजेक्ट्स और प्रैक्टिकल लर्निंग ने उन्हें कॉर्पोरेट दुनिया के लिए तैयार किया। इसी तरह, उसी बैच के वेदांश राठी ने दुबई में लैंडमार्क ग्रुप के साथ अपना इंटरनेशनल करियर शुरू किया है। इससे पता चलता है कि जयपुरिया इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, जयपुर से ग्रेजुएट होने वाले स्टूडेंट्स के लिए दुनिया भर में कितने बड़े मौके खुल रहे हैं। ये अलग-अलग करियर यात्राएं संस्थान के एलुमनाई नेटवर्क में दिखने वाले एक बहुत बड़े पैटर्न का एक हिस्सा हैं। जयपुरिया जयपुर के ग्रेजुएट आज दुनिया भर में सम्मानित संगठनों में लीडरशिप के पदों पर काम कर रहे हैं। एल्युमनाई ट्रेसर स्टडी के जरिये इन उदाहरणों से पता चलता है कि जयपुरिया जयपुर अपने स्टूडेंट्स के लंबे समय के करियर विकास को लेकर कितना गंभीर है। जयपुरिया जयपुर के कई पूर्व छात्र दुनिया की प्रतिष्ठित कंपनियों में नेतृत्वकारी भूमिकाएं निभा रहे विजय साधनानी – असिस्टेंट वाइस प्रेसिडेंट, HSBC गुंजन जैन – वाइस प्रेसिडेंट, BlackRock अपूर्व सोगानी – असिस्टेंट वाइस प्रेसिडेंट, Citibank प्रेरणा भदानी – एसोसिएट डायरेक्टर, UBS नेतृत्व और व्यक्तित्व विकास पर विशेष जोर इस तरह के उताहरण कोई इत्तेफाक नहीं हैं। ये जयपुरिया इंस्टीट्यूट की उस सोच को दिखाते हैं जिसमें स्टूडेंट्स की ओवरऑल ग्रोथ पर ध्यान दिया जाता है। संस्थान का फोकस केवल अकादमिक पढ़ाई तक सीमित नहीं है। यहां छात्रों को नेतृत्व क्षमता, निर्णय लेने की योग्यता और आत्म-विकास पर भी काम करने का अवसर मिलता है। रिसर्च पर आधारित टीचिंग, लीडरशिप से जुड़ी पहल, इंडस्ट्री के साथ सहयोग और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों से छात्रों को अलग-अलग नजरिए और असल दुनिया की बिज़नेस चुनौतियों से रूबरू होने का मौका मिलता है। संस्थान की ‘लीडरशिप लैब’ छात्रों को असल ऑर्गनाइजेशनल माहौल से जुड़े लीडरशिप के सबक सीखने में मदद करती है, जबकि ‘4D रिसेट जर्नल’ आत्म-जागरूकता, मुश्किलों से उबरने की क्षमता, हालात के हिसाब से ढलने और सोच-समझकर फ़ैसले लेने की काबिलियत को बढ़ावा देता है-ये ऐसी खूबियां हैं जो आज के वर्कप्लेस में तेजी से अहम होती जा रही हैं। हालांकि ये पहल लंबे समय में क्षमता बढ़ाने पर केंद्रित हैं, लेकिन इनसे हायरिंग के समय इंडस्ट्री का भरोसा भी मजबूत होता है। जयपुरिया इंस्टीट्यूट जयपुर के प्रमुख रिक्रूटर्स में कंसल्टिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज, मैन्युफैक्चरिंग, कंज्यूमर गुड्स, एनर्जी और मीडिया जैसे सेक्टर शामिल हैं। देश और दुनिया की प्रतिष्ठित कंपनियां लगातार जयपुरिया के कैम्पस से हायरिंग कर रही हैं। देश और दुनिया की प्रतिष्ठित कंपनियों का भरोसा जयपुरिया के विभिन्न परिसरों में भर्ती करने वाली कंपनियों में डेलॉइट, ब्लैकरॉक, कोटक महिंद्रा बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, आदित्य बिड़ला कैपिटल, कोलगेट-पामोलिव, टीवीएस मोटर, जियो-बीपी, द टाइम्स ऑफ इंडिया और जेके सीमेंट जैसी प्रमुख कंपनियां शामिल हैं। इन सभी खूबियों का प्रभाव ठोस परिणामों के रूप में भी स्पष्ट दिखाई देता है। जयपुरिया के विभिन्न कैंपसों से वर्ष 2026 में ग्रेजुएट होने वाले छात्रों के लिए सबसे बड़ा वार्षिक पैकेज 24.11 लाख रुपये रहा, जबकि 2025 में यह आंकड़ा 36 लाख रुपये के उच्चतम वार्षिक पैकेज तक पहुंचा था। हालांकि, जयपुरिया इंस्टीट्यूट का फोकस केवल पहली नौकरी या शुरुआती वेतन तक सीमित नहीं है, बल्कि ऐसे करियर बनाने पर
76% Promoted in 2 Years, Many Reach Leadership

Hindi News Career Jaipuria Alumni Success: 76% Promoted In 2 Years, Many Reach Leadership 48 मिनट पहले कॉपी लिंक प्लेसमेंट से आगे बढ़कर करियर की असली तस्वीर भारत में मैनेजमेंट संस्थानों की सफलता अक्सर प्लेसमेंट, वेतन पैकेज और बड़ी कंपनियों की भर्ती के आधार पर आंकी जाती है। लेकिन किसी संस्थान की वास्तविक सफलता का पैमाना यह नहीं है कि छात्र को पहली नौकरी कहां मिली, बल्कि यह है कि वह अपने करियर में आगे कितनी तेजी से बढ़ता है। इसी पहलू पर रोशनी डालती है जयपुरिया इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट की हालिया एलुमनाई ट्रेसर स्टडी, जिसमें पूर्व छात्रों की लॉन्ग टर्म करियर ग्रोथ का विश्लेषण किया गया है। दो साल में 76% को मिला पहला बड़ा करियर ग्रोथ, 10 साल से ज्यादा अनुभव वाले 50% लोग लीडरशिप पदों पर अध्ययन के अनुसार, जयपुरिया के 76.1% पूर्व छात्रों को स्नातक होने के दो वर्षों के भीतर पहला महत्वपूर्ण करियर प्रमोशन या प्रगति हासिल हुई। जबकि दस साल से ज़्यादा का प्रोफेशनल अनुभव रखने वाले लगभग आधे लोग जनरल मैनेजर और वाइस प्रेसिडेंट जैसे सीनियर लीडरशिप पदों पर पहुंच गए हैं। ये नतीजे एक अहम सच्चाई को पुख्ता करते हैं: मैनेजमेंट एजुकेशन की असली कीमत सिर्फ़ इस बात से नहीं पता चलती कि ग्रेजुएट अपने करियर की शुरुआत कहां से करते हैं, बल्कि इस बात से पता चलती है कि समय के साथ वे कितनी तरक्की करते हैं। इससे पता चलता है कि जयपुरिया केवल नौकरी दिलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि छात्रों को तेजी से आगे बढ़ने के लिए भी तैयार करता है। इससे स्वाभाविक रूप से एक और सवाल उठता है: लंबे समय तक प्रोफेशनल ग्रोथ किस चीज से संभव होती है? इसका जवाब अक्सर इस बात में मिलता है कि संस्थान छात्रों को सिर्फ नौकरी के लिए ही नहीं, बल्कि लीडरशिप, परिस्थितियों के अनुसार ढलने की क्षमता और लगातार सीखते रहने के लिए कैसे तैयार करते हैं। राजस्थान के छात्रों को अपने राज्य में रहते हुए ग्लोबल और इंटरनेशनल लेवल की मैनेजमेंट एजुकेशन हासिल करने का मौका! राजस्थान के छात्रों और परिवारों के लिए ये एक एडवांटेज है कि जयपुरिया इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट जयपुर उन्हें अपने राज्य में ही रहकर राष्ट्रीय स्तर की मैनेजमेंट शिक्षा और ग्लोबल करियर के अवसरों तक पहुंचने का मौका देता है। जयपुरिया इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट के पास AACSB एक्रेडिटेशन और NIRF रैंकिंग दोनों है! जयपुरिया इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट जयपुर इस बात का एक बेहतरीन उदाहरण है कि कैसे लंबे समय के विकास की इस सोच को छात्रों के अनुभव में बदला जाता है। यह राजस्थान के सिर्फ दो मैनेजमेंट संस्थानों में से एक है जिनके पास AACSB एक्रेडिटेशन और NIRF रैंकिंग दोनों हैं। जयपुरिया इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, जयपुर ने एक ऐसा इकोसिस्टम बनाया है जहां पढ़ाई की गंभीरता, इंडस्ट्री से जुड़ाव, लीडरशिप का विकास और करियर के लिए तैयारी, सब मिलकर सीखने का एक शानदार अनुभव देते हैं। रैंकिंग और एक्रेडिटेशन से कहीं ज्यादा, इस इकोसिस्टम का असर मौजूदा स्टूडेंट्स के करियर के सफर में साफ नजर आता है दिखाई देता है। 2024–26 बैच की छात्रा खुशी सोनी, जिन्हें डेलॉइट में नियुक्ति मिली है, मानती हैं कि इंडस्ट्री इंटरैक्शन, लाइव प्रोजेक्ट्स और प्रैक्टिकल लर्निंग ने उन्हें कॉर्पोरेट दुनिया के लिए तैयार किया। इसी तरह, उसी बैच के वेदांश राठी ने दुबई में लैंडमार्क ग्रुप के साथ अपना इंटरनेशनल करियर शुरू किया है। इससे पता चलता है कि जयपुरिया इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, जयपुर से ग्रेजुएट होने वाले स्टूडेंट्स के लिए दुनिया भर में कितने बड़े मौके खुल रहे हैं। ये अलग-अलग करियर यात्राएं संस्थान के एलुमनाई नेटवर्क में दिखने वाले एक बहुत बड़े पैटर्न का एक हिस्सा हैं। जयपुरिया जयपुर के ग्रेजुएट आज दुनिया भर में सम्मानित संगठनों में लीडरशिप के पदों पर काम कर रहे हैं। एल्युमनाई ट्रेसर स्टडी के जरिये इन उदाहरणों से पता चलता है कि जयपुरिया जयपुर अपने स्टूडेंट्स के लंबे समय के करियर विकास को लेकर कितना गंभीर है। जयपुरिया जयपुर के कई पूर्व छात्र दुनिया की प्रतिष्ठित कंपनियों में नेतृत्वकारी भूमिकाएं निभा रहे विजय साधनानी – असिस्टेंट वाइस प्रेसिडेंट, HSBC गुंजन जैन – वाइस प्रेसिडेंट, BlackRock अपूर्व सोगानी – असिस्टेंट वाइस प्रेसिडेंट, Citibank प्रेरणा भदानी – एसोसिएट डायरेक्टर, UBS नेतृत्व और व्यक्तित्व विकास पर विशेष जोर इस तरह के उताहरण कोई इत्तेफाक नहीं हैं। ये जयपुरिया इंस्टीट्यूट की उस सोच को दिखाते हैं जिसमें स्टूडेंट्स की ओवरऑल ग्रोथ पर ध्यान दिया जाता है। संस्थान का फोकस केवल अकादमिक पढ़ाई तक सीमित नहीं है। यहां छात्रों को नेतृत्व क्षमता, निर्णय लेने की योग्यता और आत्म-विकास पर भी काम करने का अवसर मिलता है। रिसर्च पर आधारित टीचिंग, लीडरशिप से जुड़ी पहल, इंडस्ट्री के साथ सहयोग और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों से छात्रों को अलग-अलग नजरिए और असल दुनिया की बिज़नेस चुनौतियों से रूबरू होने का मौका मिलता है। संस्थान की ‘लीडरशिप लैब’ छात्रों को असल ऑर्गनाइजेशनल माहौल से जुड़े लीडरशिप के सबक सीखने में मदद करती है, जबकि ‘4D रिसेट जर्नल’ आत्म-जागरूकता, मुश्किलों से उबरने की क्षमता, हालात के हिसाब से ढलने और सोच-समझकर फ़ैसले लेने की काबिलियत को बढ़ावा देता है-ये ऐसी खूबियां हैं जो आज के वर्कप्लेस में तेजी से अहम होती जा रही हैं। हालांकि ये पहल लंबे समय में क्षमता बढ़ाने पर केंद्रित हैं, लेकिन इनसे हायरिंग के समय इंडस्ट्री का भरोसा भी मजबूत होता है। जयपुरिया इंस्टीट्यूट जयपुर के प्रमुख रिक्रूटर्स में कंसल्टिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज, मैन्युफैक्चरिंग, कंज्यूमर गुड्स, एनर्जी और मीडिया जैसे सेक्टर शामिल हैं। देश और दुनिया की प्रतिष्ठित कंपनियां लगातार जयपुरिया के कैम्पस से हायरिंग कर रही हैं। देश और दुनिया की प्रतिष्ठित कंपनियों का भरोसा जयपुरिया के विभिन्न परिसरों में भर्ती करने वाली कंपनियों में डेलॉइट, ब्लैकरॉक, कोटक महिंद्रा बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, आदित्य बिड़ला कैपिटल, कोलगेट-पामोलिव, टीवीएस मोटर, जियो-बीपी, द टाइम्स ऑफ इंडिया और जेके सीमेंट जैसी प्रमुख कंपनियां शामिल हैं। इन सभी खूबियों का प्रभाव ठोस परिणामों के रूप में भी स्पष्ट दिखाई देता है। जयपुरिया के विभिन्न कैंपसों से वर्ष 2026 में ग्रेजुएट होने वाले छात्रों के लिए सबसे बड़ा वार्षिक पैकेज 24.11 लाख रुपये रहा, जबकि 2025 में यह आंकड़ा 36 लाख रुपये के उच्चतम वार्षिक पैकेज तक पहुंचा था। हालांकि, जयपुरिया इंस्टीट्यूट का फोकस केवल पहली नौकरी या शुरुआती वेतन तक सीमित नहीं है, बल्कि ऐसे करियर बनाने पर
रणवीर सिंह के सपोर्ट में उतरे सुनील शेट्टी:कहा- आप होते कौन हैं किसी को बैन करने वाले, ये अधिकार किसी को नहीं; जानिए क्या है मामला

डॉन 3 विवाद में सुनील शेट्टी ने रणवीर सिंह का बचाव किया है। फिल्म छोड़ने की शिकायत के बाद उन्हें FWICE (फिल्म फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न सिने एम्प्लॉय्ज) द्वारा बैन किया गया था। यानी विवाद खत्म होने तक फेडरेशन से जुड़ा कोई शख्स उनके साथ काम नहीं कर सकता था। इस पर सुनील शेट्टी का कहना है कि किसी के पास किसी एक्टर को बैन करने का अधिकार नहीं है। उनका कहना है कि रणवीर ने फिल्म इंडस्ट्री के रेवेन्यू में बड़ा योगदान दिया है। उन्हें ऐसे ही कोई बैन नहीं कर सकता। हाल ही में टाइम्स नाऊ को दिए इंटरव्यू में सुनील शेट्टी ने डॉन 3 विवाद पर कहा है, ‘कोई भी किसी एक्टर को बैन नहीं कर सकता। कोई आर्ट को बैन नहीं कर सकता है। किसी के पास ये अधिकार नहीं। सुप्रीम कोर्ट इस मामले को एक सेकेंड में खारिज कर देगा। देखिए, दिक्कत ये है कि दोनों (फरहान और रणवीर) ही सेंसिबल हैं। फरहान भी एक बहुत सेंसिबल एक्टर, प्रोड्यूसर और डायरेक्टर हैं। और रणवीर भी। उसने अच्छा टाइम देखा है। मुझे लगता है कि अगर दोनों साथ बैठेंगे, तो मामला सुलझ जाएगा।’ मैं इसमें दखल नहीं दूंगा- सुनील शेट्टी जब उनसे पूछा गया कि क्या वो ये मामला सुलझा सकते हैं, तो जवाब में उन्होंने कहा, ‘नहीं मैं इस मामले में दखल नहीं दूंगा, क्योंकि कई लोग पहले ही बात कर चुके हैं। लेकिन फरहान और रणवीर को जानते हुए मैं यही कहना चाहूंगा कि अगर दोनों साथ बैठें तो जादू कर सकते हैं। रणवीर शिखर पर है और डॉन एक ऐसा प्रोजेक्ट है, जिसका हिस्सा रहना बहुत अच्छा होगा। ये फ्रैंचाइजी अमिताभ बच्चन से शुरू हुई, फिर शाहरुख जुड़े, इससे बेहतर और क्या हो सकता है।’ आगे उन्होंने कहा, ‘अगर कोई कह रहा है कि मैं इसे बैन कर दूंगा, उसे बैन कर दूंगा, आप किसी को ऐसे ही बैन नहीं कर सकते। आप होते कौन हैं किसी को बैन करने वाले। समझने की कोशिश करें कि इस बच्चे ने आपको करोड़ों का रेवेन्यू दिया है। आप उसे बैन क्यों करना चाहते हैं। बिकने वाली चीज को अगर आप बैन करोगे, तो आप क्या मांग रहे हो। बैन तो बस बोलने की बातें होती हैं।’ जानिए क्या है पूरा मामला? फरहान अख्तर ने 3 साल पहले डॉन फ्रैंचाइजी की तीसरी फिल्म डॉन 3 की घोषणा रणवीर सिंह के साथ की थी। फिल्म में उनके साथ कियारा आडवाणी को कास्ट किया गया था, हालांकि मेटरनिटी लीव के चलते कियारा ने फिल्म छोड़ दी। ये फिल्म कास्टिंग के चलते टलती गई और फिर रणवीर सिंह ने फिल्म धुरंधर पर काम शुरू कर दिया। धुरंधर की सक्सेस के बाद रणवीर सिंह ने क्रिएटिव डिफरेंस का हवाला देते हुए फिल्म छोड़ने का फैसला किया, जिस पर फरहान अख्तर ने आपत्ति जताई। विवाद के बीच रणवीर सिंह ने साइनिंग अमाउंट लौटाने की बात कही, लेकिन प्रोडक्शन ने दावा किया कि फिल्म में अब तक 45 करोड़ खर्च हो चुके हैं। विवाद के बीच फरहान अख्तर ने पहले प्रोड्यूसर गिल्ड और बाद में FWICE में शिकायत भेज हस्तक्षेप की मांग की थी, जिसके बाद विवाद और बढ़ गया।
Uber India CEO Prabhjit Singh Joins OpenAI India as Country MD in September

Hindi News Business Uber India CEO Prabhjit Singh Joins OpenAI India As Country MD In September नई दिल्ली12 मिनट पहले कॉपी लिंक उबर इंडिया के CEO प्रभजीत सिंह ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। वे सितंबर में चैटजीपीटी बनाने वाली कंपनी ओपनएआई के भारत ऑपरेशन्स में बतौर कंट्री मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) शामिल होंगे। प्रभजीत सिंह भारत में ओपनएआई के सबसे सीनियर लीडर होंगे और वे इसी साल मार्च में ओपनएआई के एशिया पैसिफिक के मैनेजिंग डायरेक्टर नियुक्त किए गए किरन मणी को रिपोर्ट करेंगे। भारत में ओपनएआई का काम संभालेंगे प्रभजीत ओपनएआई ने एक बयान में कहा है कि प्रभजीत सिंह पर भारत में कंपनी के कंज्यूमर ग्रोथ, एंटरप्राइज अडॉप्शन, पार्टनरशिप, रेगुलेटरी एंगेजमेंट और ऑपरेशन्स की जिम्मेदारी होगी। उनका फोकस पार्टनरशिप बनाने और भारत के बड़े एआई इकोसिस्टम को सपोर्ट करने पर रहेगा। साथ ही वे कंज्यूमर्स, बिजनेस, संस्थानों और सरकारी संस्थाओं को एआई से फायदा पहुंचाने में मदद करेंगे। उबर में प्रभजीत सिंह का 10 साल का सफर आईआईटी कानपुर और आईआईएम अहमदाबाद के छात्र रहे प्रभजीत सिंह शुक्रवार तक उबर के भारत और दक्षिण एशिया बिजनेस के प्रेसिडेंट के रूप में काम कर रहे थे। उबर इंडिया से उनका जाना उनके एक दशक लंबे सफर का अंत है, जिसके दौरान उन्होंने भारत भर में उबर के विकास और विस्तार की देखरेख की। प्रभजीत अगस्त 2015 में जनरल मैनेजर, हेड ऑफ स्ट्रेटजी के रूप में उबर से जुड़े थे। इसके बाद जून 2020 में वे प्रेसिडेंट बने और इस क्षेत्र में कंपनी के बिजनेस का नेतृत्व किया। उबर से पहले वे मैकिन्से एंड कंपनी में एसोसिएट पार्टनर थे। उबर का बयान और आगे का प्लान प्रभजीत के रिजाइन करने पर उबर के स्पोक्सपर्सन ने कहा कि ग्लोबल लेवल पर भारत उबर के सबसे जरूरी बाजारों में से एक है, और यह इनोवेशन व लॉन्ग-टर्म ग्रोथ का एक अहम ड्राइवर है। प्रवक्ता ने कहा कि आज हमारे बिजनेस की मजबूती उस बेहतरीन टीम और नींव को दर्शाती है जो सालों में तैयार हुई है। हम प्रभजीत को उबर के साथ उनके एक दशक के सफर में उनके नेतृत्व और स्थायी योगदान के लिए धन्यवाद देते हैं। हम भारत में अपने विकास के अगले फेज के लिए पूरी तरह कमिटेड हैं। उबर ने अभी तक इस रोल के लिए किसी उत्तराधिकारी की घोषणा नहीं की है, लेकिन उम्मीद है कि कंपनी आने वाले हफ्तों में अपना लीडरशिप ट्रांजिशन प्लान तैयार करेगी। भारतीय बाजार में घरेलू कंपनियों से मिल रही चुनौती प्रभजीत सिंह का इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब उबर को भारत में रैपिडो जैसे घरेलू प्लेयर्स के साथ-साथ को-ऑपरेटिव राइड-हेलिंग एप भारत टैक्सी जैसे नए मोबिलिटी प्लेटफॉर्म्स से कॉम्पिटिशन का सामना करना पड़ रहा है। प्रभजीत के कार्यकाल में उबर के 6 बड़े बदलाव कंपनी ने टियर-II शहरों और अन्य गैर-मेट्रो बाजारों में अपनी उपस्थिति मजबूत की। उबर मोटो, उबर ऑटो और इंटरसिटी ट्रैवल जैसी सर्विसेज के जरिए पोर्टफोलियो का विस्तार किया। एवरेस्ट फ्लीट जैसे फ्लीट ऑपरेटर्स और ड्राइवर्स के साथ पार्टनरशिप को गहरा किया। उबर एप पर मेट्रो टिकट बुकिंग जैसी कई सर्विसेज को इंटीग्रेट किया। एप पर मेट्रो टिकटिंग सेवा वर्तमान में 5 शहरों में लाइव है। सरकार समर्थित ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म ओएनडीसी के माध्यम से उबर एप पर अब तक 1 करोड़ से ज्यादा मेट्रो राइड्स बुक की जा चुकी हैं। पिछले महीने ही उबर ने ओएनडीसी में ₹60 करोड़ के स्ट्रैटेजिक निवेश की घोषणा की थी। क्या है ओएनडीसी? ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ONDC) सरकार समर्थित एक ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म है, जो डिजिटल कॉमर्स के लिए एक ओपन नेटवर्क तैयार करता है और इसमें उबर जैसी कंपनियां निवेश और इंटीग्रेशन कर रही हैं। ये खबर भी पढ़ें… अडाणी केस तुरंत खारिज करने से अमेरिकी जज का इनकार: बोले- सिर्फ सपाट बयान से केस नहीं हटेगा; सरकार को पूरा एक्सप्लेनेशन देना होगा अमेरिकी जज ने शुक्रवार को जस्टिस डिपार्टमेंट को निर्देश दिया है कि वे भारतीय बिजनेसमैन गौतम अडाणी के खिलाफ आपराधिक मामलों को वापस लेने के अपने फैसले को सही ठहराने वाली वजह बताएं। कोर्ट ने अडाणी के वकीलों द्वारा मामले को औपचारिक रूप से खारिज करने के अनुरोध पर तुरंत फैसला सुनाने से इनकार कर दिया है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Shreyas Iyer Slams Team; Win Not Easy

बेलफास्ट3 मिनट पहले कॉपी लिंक भारत के नए टी-20 कप्तान श्रेयस अय्यर ने आयरलैंड से मिली हार पर नाराजगी जताई है। उन्होंने मैच के बाद कहा- ‘क्रिकेट में किसी भी चीज को हल्के में नहीं लिया जा सकता और जीत के लिए हर मैच में बुनियादी बातों पर अमल करना जरूरी है।’ एक दिन पहले अय्यर की कप्तानी वाली टीम इंडिया आयरलैंड के खिलाफ टी-20 सीरीज का पहला मैच 34 रन से हार गई। यह हार इसलिए भी चुभने वाली है, क्योंकि, भारतीय टीम वर्ल्ड चैंपियन बनने के बाद अपना पहला ही मैच आयरलैंड से हारी है। आयरलैंड ने इंटरनेशनल क्रिकेट में पहली बार हराया है। श्रेयस अय्यर ने पहली बार भारतीय क्रिकेट टीम की कप्तानी की। 3 रन बनाकर आउट हुए श्रेयस इस मैच में भारतीय कप्तान श्रेयस खुद भी बल्ले से प्रभाव नहीं छोड़ सके। वे सात गेंद में सिर्फ तीन रन बनाकर आउट हो गए। उन्होंने कहा- मैच जीतने के लिए हर पल मेहनत करनी पड़ती है। आप सिर्फ मैदान पर उतरकर मैच नहीं जीत सकते। आपको लगातार मेहनत करनी होगी। श्रेयस ने माना- 140 रन का लक्ष्य बेहतर होता श्रेयस ने माना कि गेंदबाजों ने शुरुआत शानदार की थी, लेकिन बीच के ओवरों में टीम अपनी योजनाओं पर अमल नहीं कर सकी। उन्होंने कहा, ‘शुरुआत में हमारे गेंदबाजों ने शानदार गेंदबाजी की और शुरुआती विकेट भी निकाले। लेकिन, मिडिल ओवर्स में हमारी रणनीति सही नहीं रही। अय्यर ने कहा- ‘हमने बल्लेबाजों को सीधे मैदान के लंबे हिस्से में खेलने का मौका दिया, जबकि वहां बाउंड्री छोटी थी। मुझे लगा था कि अगर हम उन्हें 140 रन के आसपास रोकते तो लक्ष्य काफी बेहतर होता।’ श्रेयस अय्यर ने मैच में हर्षित राणा की बॉल पर टिम टेकर का कैच पकड़ा। हार के बावजूद कप्तानी से सीख मिली श्रेयस ने हार के बावजूद इसे अपने कप्तानी करियर की महत्वपूर्ण शुरुआत बताया। उन्होंने कहा, ‘इन परिस्थितियों में खेलने का अच्छा अनुभव मिला। विकेट को समझने का मौका मिला। कप्तान के तौर पर यह मेरे लिए सीखने वाली शुरुआत है और आगे इससे काफी फायदा मिलेगा।’ —————————————————— IND-IRE मैच की यह खबर भी पढ़िए… आयरलैंड ने पहली बार वर्ल्ड चैंपियन भारत को हराया मौजूदा टी-20 वर्ल्ड चैंपियन भारत को दुनिया में 12वें नंबर की टीम आयरलैंड ने हरा दिया है। बेलफास्ट में शुक्रवार को हुए दो मैचों की सीरीज के पहले मुकाबले में भारत पर 34 रन से जीत हासिल की। पढ़ें पूरी खबर दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
Shreyas Iyer Slams Team; Win Not Easy

बेलफास्ट6 मिनट पहले कॉपी लिंक भारत के नए टी-20 कप्तान श्रेयस अय्यर ने आयरलैंड से मिली हार को कप्तानी करियर की बेहतरीन शुरुआत बताया है। उन्होंने कहा- ‘इन परिस्थितियों में खेलने का अच्छा अनुभव मिला। विकेट को समझने का मौका मिला। कप्तान के तौर पर यह मेरे लिए सीखने वाली शुरुआत है और आगे इससे काफी फायदा मिलेगा।’ 31 साल के अय्यर ने मैच के बाद कहा- ‘क्रिकेट में किसी भी चीज को हल्के में नहीं लिया जा सकता और जीत के लिए हर मैच में बुनियादी बातों पर अमल करना जरूरी है।’ उन्होंने कहा- ‘मैच जीतने के लिए हर पल मेहनत करनी पड़ती है। आप सिर्फ मैदान पर उतरकर मैच नहीं जीत सकते।’ एक दिन पहले अय्यर की कप्तानी वाली टीम इंडिया आयरलैंड के खिलाफ टी-20 सीरीज का पहला मैच 34 रन से हार गई। यह हार इसलिए भी चुभने वाली है, क्योंकि, भारतीय टीम वर्ल्ड चैंपियन बनने के बाद अपना पहला ही मैच आयरलैंड से हारी है। आयरलैंड ने इंटरनेशनल क्रिकेट में पहली बार हराया है। श्रेयस अय्यर ने पहली बार भारतीय क्रिकेट टीम की कप्तानी की। श्रेयस ने माना- 140 रन का लक्ष्य बेहतर होता इस मैच में भारतीय कप्तान श्रेयस खुद भी बल्ले से प्रभाव नहीं छोड़ सके। वे सात गेंद में सिर्फ तीन रन बनाकर आउट हो गए। श्रेयस ने माना कि गेंदबाजों ने शुरुआत शानदार की थी, लेकिन बीच के ओवरों में टीम अपनी योजनाओं पर अमल नहीं कर सकी। उन्होंने कहा, ‘शुरुआत में हमारे गेंदबाजों ने शानदार गेंदबाजी की और शुरुआती विकेट भी निकाले। लेकिन, मिडिल ओवर्स में हमारी रणनीति सही नहीं रही। हमने बल्लेबाजों को सीधे मैदान के लंबे हिस्से में खेलने का मौका दिया, जबकि वहां बाउंड्री छोटी थी। मुझे लगा था कि अगर हम उन्हें 140 रन के आसपास रोकते तो लक्ष्य काफी बेहतर होता।’ श्रेयस अय्यर ने मैच में हर्षित राणा की बॉल पर टिम टेकर का कैच पकड़ा। —————————————————— IND-IRE मैच की यह खबर भी पढ़िए… आयरलैंड ने पहली बार वर्ल्ड चैंपियन भारत को हराया मौजूदा टी-20 वर्ल्ड चैंपियन भारत को दुनिया में 12वें नंबर की टीम आयरलैंड ने हरा दिया है। बेलफास्ट में शुक्रवार को हुए दो मैचों की सीरीज के पहले मुकाबले में भारत पर 34 रन से जीत हासिल की। पढ़ें पूरी खबर दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
2 बार की चैंपियन उरुग्वे फुटबॉल वर्ल्ड कप से बाहर:स्पेन ने 1-0 से हराया, ग्रुप-एच में टॉप किया; बेल्जियम और फ्रांस भी जीते

2 बार की वर्ल्ड चैंपियन उरुग्वे फुटबॉल वर्ल्ड कप के लीग स्टेज से बाहर हो गई है। उसे शनिवार को यूरोपियन चैंपियन स्पेन ने 1-0 से हराया। इस जीत के साथ स्पेन ने ग्रुप-एच के टॉप पर रहते हुए नॉकआउट राउंड में प्रवेश किया। स्पेन के लिए मैच का एकमात्र गोल एलेक्स बाएना ने 42वें मिनट में किया। उनका शॉट उरुग्वे के अनुभवी गोलकीपर फर्नांडो मुस्लेरा रोक नहीं पाए। यह टूर्नामेंट में मुस्लेरा की तीसरी बड़ी गलती रही। 40 साल गोलकीपर ने हाफटाइम पर खुद को बदलने का अनुरोध किया, जिसके बाद दूसरे हाफ में सर्जियो रोचेट ने गोलपोस्ट संभाला। इस जीत के साथ स्पेन ने 7 अंकों के साथ ग्रुप-एच में शीर्ष स्थान हासिल किया। अब उसका सामना राउंड ऑफ-32 में ग्रुप जे की उपविजेता टीम ऑस्ट्रिया या अल्जीरिया से होगा। केप वर्डे तीन अंकों के साथ दूसरे स्थान पर रहा और नॉकआउट में पहुंच गया। उसने एक अन्य मैच में सऊदी अरब के साथ गोल रहित ड्रा खेला। उरुग्वे इस एडिशन में एक भी मैच नहीं जीत सकी। मैच की हाइलाइट्स बिएल्सा ने ली हार की जिम्मेदारी उरुग्वे के मुख्य कोच मार्सेलो बिएल्सा ने टीम के खराब प्रदर्शन की जिम्मेदारी ली। उन्होंने कहा, ‘इस समय कोई भी बहाने नहीं सुनना चाहता। इस निराशाजनक प्रदर्शन की जिम्मेदारी मेरी है। मेरे पास बेहतरीन खिलाड़ियों का समूह था, लेकिन मैं उनसे बेहतर परिणाम नहीं दिला सका।’ फ्रांस ने नॉर्वे को हराकर ग्रुप-आई में टॉप किया ग्रुप-आई से 2 बार की चैंपियन फ्रांस, नॉर्वे और सेनेगल ने राउंड ऑफ 32 में जगह बना ली। दिन के सबसे चर्चित मुकाबले में फ्रांस ने नॉर्वे को 4-1 हराकर ग्रुप में टॉप पोजिशन हासिल की। नॉर्वे हार के बावजूद नंबर-2 पर रहकर नॉकआउट में पहुंचा। इस मुकाबले को एर्लिंग हालैंड और किलियन एमबाप्पे की टक्कर के रूप में देखा जा रहा था, लेकिन फ्रांस की जीत के हीरो उस्मान डेम्बेले रहे। उन्होंने 7वें, 20वें और 32वें मिनट में गोल दागे। एक गोल डिजायर दुए इंजरी टाइम के चौथे मिनट में किया। एक अन्य मुकाबले में सेनेगल ने ईराक को 5-0 के बड़े अंतर से हराया। इस जीत का फायदा उसे गोल डिफरेंस में मिला। सेनेगल ने ज्यादा गोल डिफरेंस और अंकों के आधार पर तीसरे स्थान पर रहने वाली टीमों के टॉप-5 में जगह बनाई और नॉकआउट का टिकट हासिल किया। ———————————————-
2 बार की चैंपियन उरुग्वे फुटबॉल वर्ल्ड कप से बाहर:स्पेन ने 1-0 से हराया, ग्रुप-एच में टॉप किया; बेल्जियम और फ्रांस भी जीते

2 बार की वर्ल्ड चैंपियन उरुग्वे फुटबॉल वर्ल्ड कप के लीग स्टेज से बाहर हो गई है। उसे शनिवार को यूरोपियन चैंपियन स्पेन ने 1-0 से हराया। इस जीत के साथ स्पेन ने ग्रुप-एच के टॉप पर रहते हुए नॉकआउट राउंड में प्रवेश किया। स्पेन के लिए मैच का एकमात्र गोल एलेक्स बाएना ने 42वें मिनट में किया। उनका शॉट उरुग्वे के अनुभवी गोलकीपर फर्नांडो मुस्लेरा रोक नहीं पाए। यह टूर्नामेंट में मुस्लेरा की तीसरी बड़ी गलती रही। 40 साल गोलकीपर ने हाफटाइम पर खुद को बदलने का अनुरोध किया, जिसके बाद दूसरे हाफ में सर्जियो रोचेट ने गोलपोस्ट संभाला। इस जीत के साथ स्पेन ने 7 अंकों के साथ ग्रुप-एच में शीर्ष स्थान हासिल किया। अब उसका सामना राउंड ऑफ-32 में ग्रुप जे की उपविजेता टीम ऑस्ट्रिया या अल्जीरिया से होगा। केप वर्डे तीन अंकों के साथ दूसरे स्थान पर रहा और नॉकआउट में पहुंच गया। उसने एक अन्य मैच में सऊदी अरब के साथ गोल रहित ड्रा खेला। उरुग्वे इस एडिशन में एक भी मैच नहीं जीत सकी। मैच की हाइलाइट्स बिएल्सा ने ली हार की जिम्मेदारी उरुग्वे के मुख्य कोच मार्सेलो बिएल्सा ने टीम के खराब प्रदर्शन की जिम्मेदारी ली। उन्होंने कहा, ‘इस समय कोई भी बहाने नहीं सुनना चाहता। इस निराशाजनक प्रदर्शन की जिम्मेदारी मेरी है। मेरे पास बेहतरीन खिलाड़ियों का समूह था, लेकिन मैं उनसे बेहतर परिणाम नहीं दिला सका।’ फ्रांस ने नॉर्वे को हराकर ग्रुप-आई में टॉप किया ग्रुप-आई से 2 बार की चैंपियन फ्रांस, नॉर्वे और सेनेगल ने राउंड ऑफ 32 में जगह बना ली। दिन के सबसे चर्चित मुकाबले में फ्रांस ने नॉर्वे को 4-1 हराकर ग्रुप में टॉप पोजिशन हासिल की। नॉर्वे हार के बावजूद नंबर-2 पर रहकर नॉकआउट में पहुंचा। इस मुकाबले को एर्लिंग हालैंड और किलियन एमबाप्पे की टक्कर के रूप में देखा जा रहा था, लेकिन फ्रांस की जीत के हीरो उस्मान डेम्बेले रहे। उन्होंने 7वें, 20वें और 32वें मिनट में गोल दागे। एक गोल डिजायर दुए इंजरी टाइम के चौथे मिनट में किया। एक अन्य मुकाबले में सेनेगल ने ईराक को 5-0 के बड़े अंतर से हराया। इस जीत का फायदा उसे गोल डिफरेंस में मिला। सेनेगल ने ज्यादा गोल डिफरेंस और अंकों के आधार पर तीसरे स्थान पर रहने वाली टीमों के टॉप-5 में जगह बनाई और नॉकआउट का टिकट हासिल किया। ———————————————-









