Shraddha kapoor’s upcoming movie Eetha Landed in controversy due to its title

14 मिनट पहले कॉपी लिंक श्रद्धा कपूर की अपकमिंग फिल्म ईठा, टाइटल के चलते विवादों से घिर चुकी है। ये फिल्म लीजेंड्री लावणी नृत्यांगना, गायिका और कलाकार विठाबाई नारायणगांवकर पर बनी है। फिल्म का टीजर जारी होने के बाद NCP (नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी) ने फिल्म का टाइटल ईठा रखने पर नाराजगी जाहिर की। उनका मानना है कि फिल्म जिस महान कलाकार पर बनी है, टाइटल भी उनसे मिलता जुलता होना चाहिए। अब विठाबाई के परिवार ने भी आपत्ति जाहिर की है। टीवी 9 की रिपोर्ट के अनुसार, NCP के विरोध को विठाबाई के परिवार का समर्थन मिला है। विठाबाई के बेटों कैलाश और राजेश नारायणगांवकर और पोते मोहित ने ईठा नाम पर आपत्ति जताते हुए फिल्ममेकर्स से टाइटल बदलने की मांग की है। हालांकि इस पूरे विवाद पर मेकर्स की तरफ से कोई बयान सामने नहीं आया है। बता दें कि NCP के अलावा सांस्कृतिक विभाग के महाराष्ट्र अध्यक्ष बाबा साहेब पाटिल ने टाइटल पर सवाल उठाया है कि लावणी और तमाशा के क्षेत्र में विठाबाई ने बड़ा योगदान दिया है। ऐसे में अगर फिल्म उन पर बनी है, तो टाइटल में उनका नाम क्यों नहीं है। फिल्म के बारे में- श्रद्धा कपूर स्टारर फिल्म ईठा, 28 अगस्त 2026 में रिलीज होने के लिए शेड्यूल है। फिल्म को लक्ष्मण उटेकर ने डायरेक्ट किया है, जो इससे पहले छावा, जरा हटके जरा बचके और मिमी जैसी फिल्में बना चुके हैं। फिल्म में रणदीप हुड्डा और अनंत जोशी भी अहम रोल में हैं। फिल्म का टीजर 23 जून को रिलीज हुआ है। लीजेंड्री कलाकार विठाबाई के बारे में- विठाबाई नारायणगांवकर महाराष्ट्र की प्रसिद्ध लावणी और तमाशा कलाकार थीं। उनका जन्म 1935 में महाराष्ट्र के एक कलाकार परिवार में हुआ था। उन्होंने बहुत कम उम्र से ही मंच पर प्रस्तुति देना शुरू कर दिया था। अपनी दमदार अदाकारी, गायन और नृत्य के कारण उन्हें ‘लावणी सम्राज्ञी’ (लावणी की महारानी) कहा जाता था। उन्होंने महाराष्ट्र में तमाशा कला को नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। कला के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें कई राज्य स्तरीय और राष्ट्रीय सम्मान मिले। उनकी जीवनी पर आधारित मराठी शॉर्ट फिल्म विठा (2019) भी बनाई गई, जिसमें उनके संघर्ष और सफलता की कहानी दिखाई गई। 2002 में उनका निधन हो गया, लेकिन आज भी उन्हें महाराष्ट्र की लोककला और लावणी की सबसे महान कलाकारों में गिना जाता है। इन फिल्मों के टाइटल भी विवादों के बाद बदले गए- पुराना टाइटल: पद्मावती नया टाइटल: पद्मावत विवाद: राजपूत संगठनों ने फिल्म में रानी पद्मावती के कथित चित्रण पर आपत्ति जताई। सेंसर बोर्ड की सलाह के बाद फिल्म का नाम बदलकर ‘पद्मावत’ कर दिया गया। पुराना टाइटल: लक्ष्मी बॉम्ब नया टाइटल: लक्ष्मी विवाद: देवी लक्ष्मी के नाम के साथ ‘बॉम्ब’ शब्द जोड़ने पर धार्मिक संगठनों ने विरोध किया। विवाद बढ़ने के बाद मेकर्स ने टाइटल बदल दिया। पुराना टाइटल: राम-लीला नया टाइटल: गोलियों की रासलीला राम-लीला विवाद: भगवान राम के नाम के इस्तेमाल पर कई धार्मिक संगठनों ने आपत्ति जताई। इसके बाद फिल्म के नाम में बदलाव किया गया। पुराना टाइटल: सत्यनारायण की कथा नया टाइटल: सत्यप्रेम की कथा विवाद: भगवान सत्यनारायण के नाम के उपयोग को लेकर विरोध हुआ। धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हुए निर्माताओं ने टाइटल बदल दिया। पुराना टाइटल: पृथ्वीराज नया टाइटल: सम्राट पृथ्वीराज विवाद: करणी सेना सहित कई संगठनों ने कहा कि महान शासक पृथ्वीराज चौहान के नाम के साथ ‘सम्राट’ जोड़ा जाना चाहिए। विरोध के बाद फिल्म का नाम बदल दिया गया। पुराना टाइटल: मेंटल है क्या नया टाइटल: जजमेंटल है क्या विवाद: मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े संगठनों ने ‘मेंटल’ शब्द को अपमानजनक बताया। इसके बाद सेंसर बोर्ड के निर्देश पर नया टाइटल रखा गया। पुराना टाइटल: लवरात्रि नया टाइटल: लवयात्री विवाद: ‘लवरात्रि’ नाम को नवरात्रि पर्व का अपमान बताते हुए विरोध हुआ। कानूनी विवाद के बाद मेकर्स ने फिल्म का नाम बदल दिया। पुराना टाइटल: बैटल ऑफ गलवान नया टाइटल: मातृभूमि: मे वॉर रेस्ट इन पीस विवाद: गलवान संघर्ष जैसे संवेदनशील सैन्य विषय पर टाइटल को लेकर विवाद हुआ। इसके बाद फिल्म का नाम बदल दिया गया। पुराना टाइटल: घूसखोर पंडत नया टाइटल: (बाद में बदला गया, नया नाम अलग घोषित किया गया) विवाद: ब्राह्मण समाज और कई संगठनों ने टाइटल पर आपत्ति जताई। विरोध बढ़ने के बाद निर्माताओं ने टाइटल बदलने का फैसला लिया। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
Shraddha kapoor’s upcoming movie Eetha Landed in controversy due to its title

14 मिनट पहले कॉपी लिंक श्रद्धा कपूर की अपकमिंग फिल्म ईठा, टाइटल के चलते विवादों से घिर चुकी है। ये फिल्म लीजेंड्री लावणी नृत्यांगना, गायिका और कलाकार विठाबाई नारायणगांवकर पर बनी है। फिल्म का टीजर जारी होने के बाद NCP (नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी) ने फिल्म का टाइटल ईठा रखने पर नाराजगी जाहिर की। उनका मानना है कि फिल्म जिस महान कलाकार पर बनी है, टाइटल भी उनसे मिलता जुलता होना चाहिए। अब विठाबाई के परिवार ने भी आपत्ति जाहिर की है। टीवी 9 की रिपोर्ट के अनुसार, NCP के विरोध को विठाबाई के परिवार का समर्थन मिला है। विठाबाई के बेटों कैलाश और राजेश नारायणगांवकर और पोते मोहित ने ईठा नाम पर आपत्ति जताते हुए फिल्ममेकर्स से टाइटल बदलने की मांग की है। हालांकि इस पूरे विवाद पर मेकर्स की तरफ से कोई बयान सामने नहीं आया है। बता दें कि NCP के अलावा सांस्कृतिक विभाग के महाराष्ट्र अध्यक्ष बाबा साहेब पाटिल ने टाइटल पर सवाल उठाया है कि लावणी और तमाशा के क्षेत्र में विठाबाई ने बड़ा योगदान दिया है। ऐसे में अगर फिल्म उन पर बनी है, तो टाइटल में उनका नाम क्यों नहीं है। फिल्म के बारे में- श्रद्धा कपूर स्टारर फिल्म ईठा, 28 अगस्त 2026 में रिलीज होने के लिए शेड्यूल है। फिल्म को लक्ष्मण उटेकर ने डायरेक्ट किया है, जो इससे पहले छावा, जरा हटके जरा बचके और मिमी जैसी फिल्में बना चुके हैं। फिल्म में रणदीप हुड्डा और अनंत जोशी भी अहम रोल में हैं। फिल्म का टीजर 23 जून को रिलीज हुआ है। लीजेंड्री कलाकार विठाबाई के बारे में- विठाबाई नारायणगांवकर महाराष्ट्र की प्रसिद्ध लावणी और तमाशा कलाकार थीं। उनका जन्म 1935 में महाराष्ट्र के एक कलाकार परिवार में हुआ था। उन्होंने बहुत कम उम्र से ही मंच पर प्रस्तुति देना शुरू कर दिया था। अपनी दमदार अदाकारी, गायन और नृत्य के कारण उन्हें ‘लावणी सम्राज्ञी’ (लावणी की महारानी) कहा जाता था। उन्होंने महाराष्ट्र में तमाशा कला को नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। कला के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें कई राज्य स्तरीय और राष्ट्रीय सम्मान मिले। उनकी जीवनी पर आधारित मराठी शॉर्ट फिल्म विठा (2019) भी बनाई गई, जिसमें उनके संघर्ष और सफलता की कहानी दिखाई गई। 2002 में उनका निधन हो गया, लेकिन आज भी उन्हें महाराष्ट्र की लोककला और लावणी की सबसे महान कलाकारों में गिना जाता है। इन फिल्मों के टाइटल भी विवादों के बाद बदले गए- पुराना टाइटल: पद्मावती नया टाइटल: पद्मावत विवाद: राजपूत संगठनों ने फिल्म में रानी पद्मावती के कथित चित्रण पर आपत्ति जताई। सेंसर बोर्ड की सलाह के बाद फिल्म का नाम बदलकर ‘पद्मावत’ कर दिया गया। पुराना टाइटल: लक्ष्मी बॉम्ब नया टाइटल: लक्ष्मी विवाद: देवी लक्ष्मी के नाम के साथ ‘बॉम्ब’ शब्द जोड़ने पर धार्मिक संगठनों ने विरोध किया। विवाद बढ़ने के बाद मेकर्स ने टाइटल बदल दिया। पुराना टाइटल: राम-लीला नया टाइटल: गोलियों की रासलीला राम-लीला विवाद: भगवान राम के नाम के इस्तेमाल पर कई धार्मिक संगठनों ने आपत्ति जताई। इसके बाद फिल्म के नाम में बदलाव किया गया। पुराना टाइटल: सत्यनारायण की कथा नया टाइटल: सत्यप्रेम की कथा विवाद: भगवान सत्यनारायण के नाम के उपयोग को लेकर विरोध हुआ। धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हुए निर्माताओं ने टाइटल बदल दिया। पुराना टाइटल: पृथ्वीराज नया टाइटल: सम्राट पृथ्वीराज विवाद: करणी सेना सहित कई संगठनों ने कहा कि महान शासक पृथ्वीराज चौहान के नाम के साथ ‘सम्राट’ जोड़ा जाना चाहिए। विरोध के बाद फिल्म का नाम बदल दिया गया। पुराना टाइटल: मेंटल है क्या नया टाइटल: जजमेंटल है क्या विवाद: मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े संगठनों ने ‘मेंटल’ शब्द को अपमानजनक बताया। इसके बाद सेंसर बोर्ड के निर्देश पर नया टाइटल रखा गया। पुराना टाइटल: लवरात्रि नया टाइटल: लवयात्री विवाद: ‘लवरात्रि’ नाम को नवरात्रि पर्व का अपमान बताते हुए विरोध हुआ। कानूनी विवाद के बाद मेकर्स ने फिल्म का नाम बदल दिया। पुराना टाइटल: बैटल ऑफ गलवान नया टाइटल: मातृभूमि: मे वॉर रेस्ट इन पीस विवाद: गलवान संघर्ष जैसे संवेदनशील सैन्य विषय पर टाइटल को लेकर विवाद हुआ। इसके बाद फिल्म का नाम बदल दिया गया। पुराना टाइटल: घूसखोर पंडत नया टाइटल: (बाद में बदला गया, नया नाम अलग घोषित किया गया) विवाद: ब्राह्मण समाज और कई संगठनों ने टाइटल पर आपत्ति जताई। विरोध बढ़ने के बाद निर्माताओं ने टाइटल बदलने का फैसला लिया। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
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48 मिनट पहले कॉपी लिंक श्रद्धा कपूर की अपकमिंग फिल्म ईठा, टाइटल के चलते विवादों से घिर चुकी है। ये फिल्म लीजेंड्री लावणी नृत्यांगना, गायिका और कलाकार विठाबाई नारायणगांवकर पर बनी है। फिल्म का टीजर जारी होने के बाद NCP (नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी) ने फिल्म का टाइटल ईठा रखने पर नाराजगी जाहिर की। उनका मानना है कि फिल्म जिस महान कलाकार पर बनी है, टाइटल भी उनसे मिलता जुलता होना चाहिए। अब विठाबाई के परिवार ने भी आपत्ति जाहिर की है। टीवी 9 की रिपोर्ट के अनुसार, NCP के विरोध को विठाबाई के परिवार का समर्थन मिला है। विठाबाई के बेटों कैलाश और राजेश नारायणगांवकर और पोते मोहित ने ईठा नाम पर आपत्ति जताते हुए फिल्ममेकर्स से टाइटल बदलने की मांग की है। हालांकि इस पूरे विवाद पर मेकर्स की तरफ से कोई बयान सामने नहीं आया है। बता दें कि NCP के अलावा सांस्कृतिक विभाग के महाराष्ट्र अध्यक्ष बाबा साहेब पाटिल ने टाइटल पर सवाल उठाया है कि लावणी और तमाशा के क्षेत्र में विठाबाई ने बड़ा योगदान दिया है। ऐसे में अगर फिल्म उन पर बनी है, तो टाइटल में उनका नाम क्यों नहीं है। फिल्म के बारे में- श्रद्धा कपूर स्टारर फिल्म ईठा, 28 अगस्त 2026 में रिलीज होने के लिए शेड्यूल है। फिल्म को लक्ष्मण उटेकर ने डायरेक्ट किया है, जो इससे पहले छावा, जरा हटके जरा बचके और मिमी जैसी फिल्में बना चुके हैं। फिल्म में रणदीप हुड्डा और अनंत जोशी भी अहम रोल में हैं। फिल्म का टीजर 23 जून को रिलीज हुआ है। लीजेंड्री कलाकार विठाबाई के बारे में- विठाबाई नारायणगांवकर महाराष्ट्र की प्रसिद्ध लावणी और तमाशा कलाकार थीं। उनका जन्म 1935 में महाराष्ट्र के एक कलाकार परिवार में हुआ था। उन्होंने बहुत कम उम्र से ही मंच पर प्रस्तुति देना शुरू कर दिया था। अपनी दमदार अदाकारी, गायन और नृत्य के कारण उन्हें ‘लावणी सम्राज्ञी’ (लावणी की महारानी) कहा जाता था। उन्होंने महाराष्ट्र में तमाशा कला को नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। कला के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें कई राज्य स्तरीय और राष्ट्रीय सम्मान मिले। उनकी जीवनी पर आधारित मराठी शॉर्ट फिल्म विठा (2019) भी बनाई गई, जिसमें उनके संघर्ष और सफलता की कहानी दिखाई गई। 2002 में उनका निधन हो गया, लेकिन आज भी उन्हें महाराष्ट्र की लोककला और लावणी की सबसे महान कलाकारों में गिना जाता है। इन फिल्मों के टाइटल भी विवादों के बाद बदले गए- पुराना टाइटल: पद्मावती नया टाइटल: पद्मावत विवाद: राजपूत संगठनों ने फिल्म में रानी पद्मावती के कथित चित्रण पर आपत्ति जताई। सेंसर बोर्ड की सलाह के बाद फिल्म का नाम बदलकर ‘पद्मावत’ कर दिया गया। पुराना टाइटल: लक्ष्मी बॉम्ब नया टाइटल: लक्ष्मी विवाद: देवी लक्ष्मी के नाम के साथ ‘बॉम्ब’ शब्द जोड़ने पर धार्मिक संगठनों ने विरोध किया। विवाद बढ़ने के बाद मेकर्स ने टाइटल बदल दिया। पुराना टाइटल: राम-लीला नया टाइटल: गोलियों की रासलीला राम-लीला विवाद: भगवान राम के नाम के इस्तेमाल पर कई धार्मिक संगठनों ने आपत्ति जताई। इसके बाद फिल्म के नाम में बदलाव किया गया। पुराना टाइटल: सत्यनारायण की कथा नया टाइटल: सत्यप्रेम की कथा विवाद: भगवान सत्यनारायण के नाम के उपयोग को लेकर विरोध हुआ। धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हुए निर्माताओं ने टाइटल बदल दिया। पुराना टाइटल: पृथ्वीराज नया टाइटल: सम्राट पृथ्वीराज विवाद: करणी सेना सहित कई संगठनों ने कहा कि महान शासक पृथ्वीराज चौहान के नाम के साथ ‘सम्राट’ जोड़ा जाना चाहिए। विरोध के बाद फिल्म का नाम बदल दिया गया। पुराना टाइटल: मेंटल है क्या नया टाइटल: जजमेंटल है क्या विवाद: मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े संगठनों ने ‘मेंटल’ शब्द को अपमानजनक बताया। इसके बाद सेंसर बोर्ड के निर्देश पर नया टाइटल रखा गया। पुराना टाइटल: लवरात्रि नया टाइटल: लवयात्री विवाद: ‘लवरात्रि’ नाम को नवरात्रि पर्व का अपमान बताते हुए विरोध हुआ। कानूनी विवाद के बाद मेकर्स ने फिल्म का नाम बदल दिया। पुराना टाइटल: बैटल ऑफ गलवान नया टाइटल: मातृभूमि: मे वॉर रेस्ट इन पीस विवाद: गलवान संघर्ष जैसे संवेदनशील सैन्य विषय पर टाइटल को लेकर विवाद हुआ। इसके बाद फिल्म का नाम बदल दिया गया। पुराना टाइटल: घूसखोर पंडत नया टाइटल: (बाद में बदला गया, नया नाम अलग घोषित किया गया) विवाद: ब्राह्मण समाज और कई संगठनों ने टाइटल पर आपत्ति जताई। विरोध बढ़ने के बाद निर्माताओं ने टाइटल बदलने का फैसला लिया। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
क्रेड में 8,500 करोड़ का निवेश, भारत के ‘वेल फाइनेंस्ड’:पेमेंट, लोन, बीमा, शॉपिंग; भारतीयों के लेन-देन की 'आदत' बनना चाहती है मेटा

पेमेंट्स के मामले में भारतीयों का मिजाज भांपने में मेटा विफल रही है। भारत में वॉट्सएप पे की हिस्सेदारी 0.4% से भी कम है। दूसरी तरफ फोनपे और गूगल पे मिलकर 80% से ज्यादा यूपीआई लेनदेन संभालते हैं। पेमेंट्स की रेस हार चुकी मेटा ने नया दांव लगाया है। मेटा, क्रेड में 90 करोड़ डॉलर यानी करीब 8,500 करोड़ निवेश करने जा रही है। क्रेड का मौजूदा वैल्युएशन करीब 37,000 करोड़ आंका गया है। यह इसके रिकॉर्ड वैल्युएशन 56,000 करोड़ से लगभग 50% कम है, लेकिन भारत के टॉप फिनटेक स्टार्टअप्स में यह अब भी ऊंचा मुकाम है। क्रेड अभी घाटे में है, फिर भी मेटा इसमें बड़ी पूंजी लगा रही है। बाजार इसे भारत के ‘वेल फाइनेंस्ड’ उपभोक्ताओं तक पहुंच की रणनीति के तौर पर देख रही है। इस डील मेटा को मर्चेंट नेटवर्क, फिनटेक इकोसिस्टम और प्रीमियम यूजरबेस तक पहुंच दिलाएगी। क्रेड की ताकत – 750 से ज्यादा क्रेडिट स्कोर वाले प्रीमियम, हाई-स्पेंडिंग, क्रेडिटवर्दी ग्राहक क्रेड फिनटेक प्लेटफॉर्म है। इसमें 750+ क्रेडिट स्कोर वाले यूजर्स 1 करोड़ से ज्यादा हैं। इसका मतलब है कि इसका यूजरबेस प्रीमियम, हाई-स्पेंडिंग और क्रेडिटवर्दी है। ये वो ग्राहक हैं, जिन्हें बैंक, बीमा कंपनियां और लग्जरी ब्रांड्स वर्षों की मेहनत से हासिल करते हैं। क्रेड की शुरुआत क्रेडिट कार्ड बिल पेमेंट से हुई थी। अब यूपीआई, लोन, रेंट पेमेंट, वेल्थ प्रोडक्ट्स तक फैल चुकी है। मेटा की जरूरत – सटीक आंकड़े मेटा को विज्ञापन से कमाई होती है। 2025 में 18.5 लाख करोड़ की आय का करीब 98% हिस्सा विज्ञापन से आया। लेकिन विज्ञापन के लिए सटीक आंकड़े और उपभोक्ताओं के साथ गहरा संबंध जरूरी है। पेमेंट प्लेटफॉर्म यही देते हैं। जो कंपनी आपके पैसे के लेन-देन की आदत बन जाए, वह लोन, इंश्योरेंस और शॉपिंग का अगला पड़ाव भी बन सकती है। मेटा इसी ‘एम्बेडेड फाइनेंस’ की तरफ बढ़ रही है। वॉट्सएप पे – 8 साल के सफर में सिर्फ 0.4 फीसदी बाजार हिस्सेदारी वॉट्सएप पे 2018 में लॉन्च हुआ था। यह यूपीआई क्रांति में सबसे पहले उतरने वालों में शामिल है। लेकिन सफलता नहीं मिली। एनपीसीआई ने शुरुआत में सिर्फ 10 लाख यूजर्स की सीमा लगाई। बाद में इसे 2 करोड़, फिर 10 करोड़ तक बढ़ाया। 2024 में सीमाएं हटा ली गईं, पर वॉट्सएप पे 0.4% मार्केट शेयर तक ही पहुंच पाया। फोनपे और गूगल पे ने यूपीआई पेमेंट्स के 80% से ज्यादा हिस्से पर कब्जा कर लिया। चुनौती – आधी आय के बराबर घाटा कुल यूजर्स – 1.7 करोड़ यूजर्स में से करीब 1 करोड़ 750 से ज्यादा क्रेडिट स्कोर वाले प्लेटफॉर्म से कुल पेमेंट वॉल्यूम – बीते वित्त वर्ष 8.5 लाख करोड़ रुपए तक पहुंचा ऑपरेशन से आय – 2,735 करोड़ रुपए शुद्ध घाटा – 1,457 करोड़ रुपए इस्तेमाल – 50% एक्टिव यूजर्स अभी तीन या इससे ज्यादा प्रोडक्ट्स यूज कर रहे
भारतीयों के लेनदेन की आदत बनना चाहती है मेटा:‘वेल फाइनेंस्ड’ उपभोक्ताओं तक पहुंच बनाने की रणनीति का हिस्सा है क्रेड में बड़ा निवेश

पेमेंट्स के मामले में भारतीयों का मिजाज भांपने में मेटा विफल रही है। भारत में वॉट्सएप पे की हिस्सेदारी 0.4% से भी कम है। दूसरी तरफ फोनपे और गूगल पे मिलकर 80% से ज्यादा यूपीआई लेनदेन संभालते हैं। पेमेंट्स की रेस हार चुकी मेटा ने नया दांव लगाया है। मेटा, क्रेड में 90 करोड़ डॉलर यानी करीब 8,500 करोड़ निवेश करने जा रही है। क्रेड का मौजूदा वैल्युएशन करीब 37,000 करोड़ आंका गया है। यह इसके रिकॉर्ड वैल्युएशन 56,000 करोड़ से लगभग 50% कम है, लेकिन भारत के टॉप फिनटेक स्टार्टअप्स में यह अब भी ऊंचा मुकाम है। क्रेड अभी घाटे में है, फिर भी मेटा इसमें बड़ी पूंजी लगा रही है। बाजार इसे भारत के ‘वेल फाइनेंस्ड’ उपभोक्ताओं तक पहुंच की रणनीति के तौर पर देख रही है। इस डील मेटा को मर्चेंट नेटवर्क, फिनटेक इकोसिस्टम और प्रीमियम यूजरबेस तक पहुंच दिलाएगी। क्रेड की ताकत – 750 से ज्यादा क्रेडिट स्कोर वाले प्रीमियम, हाई-स्पेंडिंग, क्रेडिटवर्दी ग्राहक क्रेड फिनटेक प्लेटफॉर्म है। इसमें 750+ क्रेडिट स्कोर वाले यूजर्स 1 करोड़ से ज्यादा हैं। इसका मतलब है कि इसका यूजरबेस प्रीमियम, हाई-स्पेंडिंग और क्रेडिटवर्दी है। ये वो ग्राहक हैं, जिन्हें बैंक, बीमा कंपनियां और लग्जरी ब्रांड्स वर्षों की मेहनत से हासिल करते हैं। क्रेड की शुरुआत क्रेडिट कार्ड बिल पेमेंट से हुई थी। अब यूपीआई, लोन, रेंट पेमेंट, वेल्थ प्रोडक्ट्स तक फैल चुकी है। मेटा की जरूरत – सटीक आंकड़े मेटा को विज्ञापन से कमाई होती है। 2025 में 18.5 लाख करोड़ की आय का करीब 98% हिस्सा विज्ञापन से आया। लेकिन विज्ञापन के लिए सटीक आंकड़े और उपभोक्ताओं के साथ गहरा संबंध जरूरी है। पेमेंट प्लेटफॉर्म यही देते हैं। जो कंपनी आपके पैसे के लेन-देन की आदत बन जाए, वह लोन, इंश्योरेंस और शॉपिंग का अगला पड़ाव भी बन सकती है। मेटा इसी ‘एम्बेडेड फाइनेंस’ की तरफ बढ़ रही है। वॉट्सएप पे – 8 साल के सफर में सिर्फ 0.4 फीसदी बाजार हिस्सेदारी वॉट्सएप पे 2018 में लॉन्च हुआ था। यह यूपीआई क्रांति में सबसे पहले उतरने वालों में शामिल है। लेकिन सफलता नहीं मिली। एनपीसीआई ने शुरुआत में सिर्फ 10 लाख यूजर्स की सीमा लगाई। बाद में इसे 2 करोड़, फिर 10 करोड़ तक बढ़ाया। 2024 में सीमाएं हटा ली गईं, पर वॉट्सएप पे 0.4% मार्केट शेयर तक ही पहुंच पाया। फोनपे और गूगल पे ने यूपीआई पेमेंट्स के 80% से ज्यादा हिस्से पर कब्जा कर लिया। चुनौती – आधी आय के बराबर घाटा कुल यूजर्स – 1.7 करोड़ यूजर्स में से करीब 1 करोड़ 750 से ज्यादा क्रेडिट स्कोर वाले प्लेटफॉर्म से कुल पेमेंट वॉल्यूम – बीते वित्त वर्ष 8.5 लाख करोड़ रुपए तक पहुंचा ऑपरेशन से आय – 2,735 करोड़ रुपए शुद्ध घाटा – 1,457 करोड़ रुपए इस्तेमाल – 50% एक्टिव यूजर्स अभी तीन या इससे ज्यादा प्रोडक्ट्स यूज कर रहे
Vaibhav Sooryavanshi Debut Controversy; IND vs IRE T20 Series

Hindi News Sports Cricket Vaibhav Sooryavanshi Debut Controversy; IND Vs IRE T20 Series | Coach Ten Doeschate Interview बेलफास्ट1 मिनट पहले कॉपी लिंक भारतीय क्रिकेट टीम के सहायक कोच रयान टेन डोशेट ने 15 साल के वैभव सूर्यवंशी को इंटरनेशनल क्रिकेट के लिए पूरी तरह तैयार बताया है। हालांकि, कोच ने साफ तौर पर कहा कि टीम में जगह पाने के लिए वैभव को भी उसी चयन प्रकिया से गुजरना होगा। जिससे अन्य खिलाड़ी गुजरे हैं। 45 साल के साउथ अफ्रीकी कोच ने आयरलैंड से हार पर कहा कि टीम खुद को हालात के हिसाब से ढाल नहीं पाई। रविवार को टीम इंडिया को आयरलैंड के खिलाफ एक रन की करीबी हार का सामना करना पड़ा था। इस हार के साथ आयरलैंड ने भारत को 2-0 से क्लीन स्वीप भी कर दिया था। संजू सैमसन का भी किया बचाव आयरलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज में वैभव को मौका नहीं मिलने पर उठे सवालों के जवाब में टेन डोशेट ने कहा कि संजू सैमसन ने कुछ महीने पहले भारत को टी20 वर्ल्ड कप जिताने में अहम भूमिका निभाई थी। उन्होंने कहा कि अच्छे IPL सीजन के बाद भी खिलाड़ियों को पर्याप्त अवसर देना और उन पर भरोसा बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने कहा- वैभव इंटरनेशनल क्रिकेट के लिए पूरी तरह तैयार है, इसमें कोई संदेह नहीं है। लेकिन संजू सैमसन भी ऐसे खिलाड़ी हैं, जिन्होंने हाल ही में टीम के लिए बड़ा योगदान दिया है। हम खिलाड़ियों को लंबा मौका देना चाहते हैं। डोशेट बोले- वैभव को लेकर टीम मैनेजमेंट एक्साइटेड टेन डोशेट ने कहा कि टीम प्रबंधन वैभव को जल्द खेलते देखने के लिए उत्साहित है, लेकिन उनके लिए भी वही मानदंड लागू होंगे जो अन्य खिलाड़ियों पर लागू होते हैं। उन्होंने कहा- हम सभी वैभव को खेलते देखना चाहते हैं, लेकिन उसे भी वही प्रक्रिया पूरी करनी होगी। उसकी प्रतिभा पर किसी को कोई शक नहीं है। आईपीएल में रहा शानदार प्रदर्शन वैभव सूर्यवंशी ने आईपीएल 2026 में सबसे ज्यादा 776 रन बनाए थे। उन्होंने 230 से अधिक के स्ट्राइक रेट से बल्लेबाजी करते हुए ऑरेंज कैप, मोस्ट वैल्यूएबल प्लेयर और इमर्जिंग प्लेयर जैसे पुरस्कार अपने नाम किए थे। इंग्लैंड दौरे पर मिल सकता है मौका भारत अब 1 जुलाई से इंग्लैंड के खिलाफ टी20 सीरीज खेलेगा। यदि इस दौरे पर वैभव को डेब्यू का मौका मिलता है तो वह 16 साल की उम्र में पदार्पण करने वाले सचिन तेंदुलकर का रिकॉर्ड तोड़ते हुए भारत के सबसे कम उम्र के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर बन जाएंगे। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
चांदी ₹5,059 बढ़कर ₹2.22 लाख किलो पर पहुंची:10 ग्राम सोना ₹2,038 महंगा हुआ, इस साल दाम ₹9 हजार बढ़ चुके

सोने-चांदी की कीमतों में 29 जून को बढ़त है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, 1 किलो आज चांदी 5,059 रुपए बढ़कर 2.22 लाख रुपए पर पहुंच गई है। वहीं 10 ग्राम 24 कैरेट सोना आज 2,038 रुपए महंगा होकर 1.42 लाख रुपए आ गया है। इससे पहले यह 1.40 लाख पर था। कैरेट के हिसाब से सोने की कीमत देश के बड़े शहरों में सोने की कीमत सोर्स: goodreturns 29 जून 2026 सोना इस साल 9 हजार महंगा हुआ इस साल सोने-चांदी की कीमत में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। सोना 2026 में अब तक 9 हजार रुपए महंगा हुई है। 31 दिसंबर 2025 को 10g सोना 1.33 लाख रुपए पर था, जो अब 1.42 लाख रुपए पर पहुंच गया है। वहीं, चांदी 31 दिसंबर 2025 को 2.30 लाख रुपए किलो थी, जो अब 2.22 लाख रुपए पर पहुंच गई है। यानी इसकी कीमत 8 हजार रुपए कम हुई है। इस दौरान 29 जनवरी को सोने ने 1.76 लाख रुपए और चांदी ने 3.86 लाख रुपए का ऑलटाइम हाई भी बनाया था। इस साल अब तक सोने-चांदी की चाल नोट:- सोने की कीमत प्रति 10 ग्राम और चांदी की कीमत किलो में | सोर्स:- IBJA ज्वेलर्स से सोना खरीदते समय इन 2 बातों का रखें ध्यान असली चांदी की पहचान करने के 4 तरीके
टेक्सास डेटा सेंटर, 47 लाख करोड़ का प्रोजेक्ट:चीन से होड़ में ट्रंप; सुरक्षा की अनदेखी से साइट पर 8,000 वर्कर्स को खतरा

दुनिया की एआई रेस अब सिर्फ टेक कंपनियों और सुपरपावर देशों की लड़ाई नहीं रही। इसकी कीमत निर्माण साइटों पर काम कर रहे वर्कर्स भी चुका रहे हैं। अमेरिका के टेक्सास स्थित एबिलीन में बन रहा स्टारगेट डेटा सेंटर 500 अरब डॉलर (47.18 लाख करोड़ रुपए) का मेगा एआई इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट है। इसे ओपनएआई, ओरेकल और सॉफ्टबैंक जैसे दिग्गज मिलकर बना रहे हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प इसे अमेरिका की एआई ताकत का बड़ा दांव बता चुके हैं। मकसद है चीन को एआई रेस में पीछे छोड़ना। लेकिन टाइम की ग्राउंड पड़ताल इस चमकदार प्रोजेक्ट की दूसरी तस्वीर दिखाती है। रिपोर्ट के मुताबिक तेजी से निर्माण की इस अंधी दौड़ में मजदूरों की जान और सुरक्षा को पूरी तरह नजरअंदाज किया जा रहा है। प्रोजेक्ट साइट पर 8,000 मजदूरों के साथ कई हादसे सामने आए हैं। ओशा रिकॉर्ड्स संस्था के मुताबिक 2025 में कई मजदूरों की टांगों में फ्रैक्चर हुआ। एक मजदूर एक्सकेवेटर के नीचे दबा। एक सीढ़ी से गिरा। एक पर 1,400 पाउंड वजन वाले कांच के पैनल गिर गए। एक मजदूर पोर्टा-पॉटी में मृत मिला। दिसंबर 2024 से साइट से 911 पर 14 इमरजेंसी कॉल दर्ज हुईं। इनमें चोट, हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और हार्ट अटैक जैसी मेडिकल इमरजेंसी शामिल थीं। इस प्रोजेक्ट पर काम कर रहीं दो ठेकेदार कंपनियों पर अदालत में मुकदमे चल रहे हैं। ग्राउंड जीरो से खुलासा… वर्कर्स को पानी और पंखे तक के लिए ‘लग्जरी’ बता तरसाया गया वर्कर्स ने साइट के अंदर के हालात को काफी कठिन बताया। एक इलेक्ट्रिशियन ने आरोप लगाया कि टेक्सास की तेज गर्मी में भी साइट पर पीने का पानी आसानी से उपलब्ध नहीं है। वर्कर्स से कहा गया कि ठंडा पानी ‘लग्जरी’ है, अधिकार नहीं। पंखे भी वापस ले लिए गए। एक वर्कर्स के मुताबिक कूलिंग स्टेशन में ज्यादा समय बिताने पर लिखित चेतावनी दी गई। एक कर्मी ने कहा कि कई को पैनिक अटैक भी आ चुको हैं। निर्माण की स्पीड बनाए रखने में बुनियादी सुविधाएं भी नहीं दी जा रहीं। 3 मामलों से समझें… रफ्तार में नियम कैसे छूटे केस 1 – ट्रक ड्राइवर डेनियल गोंजालेज बिजली उपकरणों वाला कंक्रीट बॉक्स उतार रहे थे। शोर में कम्युनिकेशन कमजोर था, वॉकी-टॉकी नहीं थे। तभी ऊपर से फेंकी गई चेन उनके सिर पर लगी। वे बेहोश हो गए। उन्होंने मुकदमा दायर किया है। केस 2 – 23 मई 2025 को एक मजदूर मिनी एक्सकेवेटर को रास्ता दिखा रहा था। जरूरी सुरक्षा न होने से वह ट्रैक के नीचे दब गया। उसके टखने और रीड की हड्डी में फ्रैक्चर हुआ। ओशा रिकॉर्ड्स संस्था ने पाया कि मजदूर को ट्रेनिंग नहीं दी गई थी। केस 3 – एक कर्मचारी कांच के पैनल खोल रहा था। तभी 650 किलो वजन के तीन पैनल उसके पैर पर गिर पड़े। जांघ की हड्डी टूट गई और कई सर्जरी करानी पड़ी। जांच में माना गया कि उस कर्मी को काम जल्दी खत्म करने का दबाव था। गोपनीयता समझौते ताकि वर्कर शिकायत नहीं करें कई मजदूरों ने पहचान छिपाकर बात की, क्योंकि उनसे गोपनीयता समझौते पर हस्ताक्षर कराए गए थे। आरोप है कि ऐसे समझौते साइट की वास्तविक स्थिति सामने आने से रोक रहे हैं। उन्हें डर रहता है कि खुलकर बोलने पर नौकरी जा सकती है या आगे काम मिलने में दिक्कत होगी। स्टारगेट – अमेरिकी एआई रेस में सबसे बड़ा हथियार स्टारगेट अमेरिका का मेगा एआई इंफ्रा प्रोजेक्ट है। यह सामान्य डेटा सेंटर नहीं, बल्कि एआई मॉडल चलाने और ट्रेन करने के लिए जरूरी विशाल कंप्यूटिंग नेटवर्क का हिस्सा है। इसमें ओपनएआई, ओरेकल और सॉफ्टबैंक जैसे नाम जुड़े हैं। इसका लक्ष्य चीन से आगे रहने की क्षमता विकसित करना है। रेस जीतनी है, प्रोजेक्ट जल्दी बनाना होगा – ट्रम्प अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प स्टारगेट को एआई रणनीति का बड़ा हिस्सा बता चुके हैं। ओपनएआई के सैम, ओरेकल के लैरी व सॉफ्टबैंक के सन के साथ इसकी घोषणा हुई थी। ट्रम्प ने कहा था कि रेस जीतनी है, इसे जल्दी बनाना होगा।
टेक्सास डेटा सेंटर, 47 लाख करोड़ का प्रोजेक्ट:चीन से होड़ में ट्रंप; सुरक्षा की अनदेखी से साइट पर 8,000 वर्कर्स को खतरा

दुनिया की एआई रेस अब सिर्फ टेक कंपनियों और सुपरपावर देशों की लड़ाई नहीं रही। इसकी कीमत निर्माण साइटों पर काम कर रहे वर्कर्स भी चुका रहे हैं। अमेरिका के टेक्सास स्थित एबिलीन में बन रहा स्टारगेट डेटा सेंटर 500 अरब डॉलर (47.18 लाख करोड़ रुपए) का मेगा एआई इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट है। इसे ओपनएआई, ओरेकल और सॉफ्टबैंक जैसे दिग्गज मिलकर बना रहे हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प इसे अमेरिका की एआई ताकत का बड़ा दांव बता चुके हैं। मकसद है चीन को एआई रेस में पीछे छोड़ना। लेकिन टाइम की ग्राउंड पड़ताल इस चमकदार प्रोजेक्ट की दूसरी तस्वीर दिखाती है। रिपोर्ट के मुताबिक तेजी से निर्माण की इस अंधी दौड़ में मजदूरों की जान और सुरक्षा को पूरी तरह नजरअंदाज किया जा रहा है। प्रोजेक्ट साइट पर 8,000 मजदूरों के साथ कई हादसे सामने आए हैं। ओशा रिकॉर्ड्स संस्था के मुताबिक 2025 में कई मजदूरों की टांगों में फ्रैक्चर हुआ। एक मजदूर एक्सकेवेटर के नीचे दबा। एक सीढ़ी से गिरा। एक पर 1,400 पाउंड वजन वाले कांच के पैनल गिर गए। एक मजदूर पोर्टा-पॉटी में मृत मिला। दिसंबर 2024 से साइट से 911 पर 14 इमरजेंसी कॉल दर्ज हुईं। इनमें चोट, हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और हार्ट अटैक जैसी मेडिकल इमरजेंसी शामिल थीं। इस प्रोजेक्ट पर काम कर रहीं दो ठेकेदार कंपनियों पर अदालत में मुकदमे चल रहे हैं। ग्राउंड जीरो से खुलासा… वर्कर्स को पानी और पंखे तक के लिए ‘लग्जरी’ बता तरसाया गया वर्कर्स ने साइट के अंदर के हालात को काफी कठिन बताया। एक इलेक्ट्रिशियन ने आरोप लगाया कि टेक्सास की तेज गर्मी में भी साइट पर पीने का पानी आसानी से उपलब्ध नहीं है। वर्कर्स से कहा गया कि ठंडा पानी ‘लग्जरी’ है, अधिकार नहीं। पंखे भी वापस ले लिए गए। एक वर्कर्स के मुताबिक कूलिंग स्टेशन में ज्यादा समय बिताने पर लिखित चेतावनी दी गई। एक कर्मी ने कहा कि कई को पैनिक अटैक भी आ चुको हैं। निर्माण की स्पीड बनाए रखने में बुनियादी सुविधाएं भी नहीं दी जा रहीं। 3 मामलों से समझें… रफ्तार में नियम कैसे छूटे केस 1 – ट्रक ड्राइवर डेनियल गोंजालेज बिजली उपकरणों वाला कंक्रीट बॉक्स उतार रहे थे। शोर में कम्युनिकेशन कमजोर था, वॉकी-टॉकी नहीं थे। तभी ऊपर से फेंकी गई चेन उनके सिर पर लगी। वे बेहोश हो गए। उन्होंने मुकदमा दायर किया है। केस 2 – 23 मई 2025 को एक मजदूर मिनी एक्सकेवेटर को रास्ता दिखा रहा था। जरूरी सुरक्षा न होने से वह ट्रैक के नीचे दब गया। उसके टखने और रीड की हड्डी में फ्रैक्चर हुआ। ओशा रिकॉर्ड्स संस्था ने पाया कि मजदूर को ट्रेनिंग नहीं दी गई थी। केस 3 – एक कर्मचारी कांच के पैनल खोल रहा था। तभी 650 किलो वजन के तीन पैनल उसके पैर पर गिर पड़े। जांघ की हड्डी टूट गई और कई सर्जरी करानी पड़ी। जांच में माना गया कि उस कर्मी को काम जल्दी खत्म करने का दबाव था। गोपनीयता समझौते ताकि वर्कर शिकायत नहीं करें कई मजदूरों ने पहचान छिपाकर बात की, क्योंकि उनसे गोपनीयता समझौते पर हस्ताक्षर कराए गए थे। आरोप है कि ऐसे समझौते साइट की वास्तविक स्थिति सामने आने से रोक रहे हैं। उन्हें डर रहता है कि खुलकर बोलने पर नौकरी जा सकती है या आगे काम मिलने में दिक्कत होगी। स्टारगेट – अमेरिकी एआई रेस में सबसे बड़ा हथियार स्टारगेट अमेरिका का मेगा एआई इंफ्रा प्रोजेक्ट है। यह सामान्य डेटा सेंटर नहीं, बल्कि एआई मॉडल चलाने और ट्रेन करने के लिए जरूरी विशाल कंप्यूटिंग नेटवर्क का हिस्सा है। इसमें ओपनएआई, ओरेकल और सॉफ्टबैंक जैसे नाम जुड़े हैं। इसका लक्ष्य चीन से आगे रहने की क्षमता विकसित करना है। रेस जीतनी है, प्रोजेक्ट जल्दी बनाना होगा – ट्रम्प अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प स्टारगेट को एआई रणनीति का बड़ा हिस्सा बता चुके हैं। ओपनएआई के सैम, ओरेकल के लैरी व सॉफ्टबैंक के सन के साथ इसकी घोषणा हुई थी। ट्रम्प ने कहा था कि रेस जीतनी है, इसे जल्दी बनाना होगा।
वर्ल्ड अपडेट्स:रिपोर्ट का दावा- फेसबुक बना अवैध वन्यजीव तस्करी का सबसे बड़ा ऑनलाइन बाजार

दुनिया भर में वन्यजीव संरक्षण के लिए काम करने वाले कई गैर-सरकारी संगठनों (NGO) की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि फेसबुक अवैध वन्यजीव तस्करी का सबसे बड़ा ज्ञात ऑनलाइन बाजार बन गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, Meta की कमजोर मॉडरेशन व्यवस्था और कंटेंट से कमाई (मॉनेटाइजेशन) की सुविधा इस अवैध कारोबार को बढ़ावा दे रही है। ग्लोबल इनिशिएटिव अगेंस्ट ट्रांसनेशनल ऑर्गेनाइज्ड क्राइम (GI-TOC) के अध्ययन में अप्रैल 2024 से मार्च 2026 के बीच सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर 20 हजार से अधिक विज्ञापन और 2.60 लाख से ज्यादा वन्यजीव उत्पादों की बिक्री के पोस्ट दर्ज किए गए। इनमें करीब 75% विज्ञापन फेसबुक पर मिले। रिपोर्ट के अनुसार, बिक्री के लिए पेश किए गए लगभग 84% वन्यजीव ऐसे थे जिनका अंतरराष्ट्रीय व्यावसायिक व्यापार CITES संधि के तहत प्रतिबंधित है। इनमें आधे से अधिक प्रजातियां संकटग्रस्त या अत्यंत संकटग्रस्त हैं। शोधकर्ताओं ने इन उत्पादों का कुल विज्ञापित मूल्य 6.6 करोड़ डॉलर (करीब 560 करोड़ रुपए) से अधिक बताया है। रिपोर्ट में पैंगोलिन, गैंडे के सींग, चिंपैंजी और संरक्षित पक्षियों सहित कई वन्यजीवों और उनके अंगों की खुलेआम बिक्री के उदाहरण दिए गए हैं। शोधकर्ताओं का आरोप है कि Meta के विज्ञापन और सब्सक्रिप्शन जैसे मॉनेटाइजेशन मॉडल ऐसे अकाउंट्स को आर्थिक लाभ पहुंचाते हैं, जिससे अवैध व्यापार को बढ़ावा मिलता है। Meta ने आरोपों पर विस्तृत प्रतिक्रिया देने से इनकार करते हुए कहा कि उसके प्लेटफॉर्म पर संकटग्रस्त प्रजातियों की बिक्री प्रतिबंधित है।






