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भारतीयों के लेनदेन की आदत बनना चाहती है मेटा:‘वेल फाइनेंस्ड’ उपभोक्ताओं तक पहुंच बनाने की रणनीति का हिस्सा है क्रेड में बड़ा निवेश

भारतीयों के लेनदेन की आदत बनना चाहती है मेटा:‘वेल फाइनेंस्ड’ उपभोक्ताओं तक पहुंच बनाने की रणनीति का हिस्सा है क्रेड में बड़ा निवेश

पेमेंट्स के मामले में भारतीयों का मिजाज भांपने में मेटा विफल रही है। भारत में वॉट्सएप पे की हिस्सेदारी 0.4% से भी कम है। दूसरी तरफ फोनपे और गूगल पे मिलकर 80% से ज्यादा यूपीआई लेनदेन संभालते हैं। पेमेंट्स की रेस हार चुकी मेटा ने नया दांव लगाया है। मेटा, क्रेड में 90 करोड़ डॉलर यानी करीब 8,500 करोड़ निवेश करने जा रही है। क्रेड का मौजूदा वैल्युएशन करीब 37,000 करोड़ आंका गया है। यह इसके रिकॉर्ड वैल्युएशन 56,000 करोड़ से लगभग 50% कम है, लेकिन भारत के टॉप फिनटेक स्टार्टअप्स में यह अब भी ऊंचा मुकाम है। क्रेड अभी घाटे में है, फिर भी मेटा इसमें बड़ी पूंजी लगा रही है। बाजार इसे भारत के ‘वेल फाइनेंस्ड’ उपभोक्ताओं तक पहुंच की रणनीति के तौर पर देख रही है। इस डील मेटा को मर्चेंट नेटवर्क, फिनटेक इकोसिस्टम और प्रीमियम यूजरबेस तक पहुंच दिलाएगी। क्रेड की ताकत – 750 से ज्यादा क्रेडिट स्कोर वाले प्रीमियम, हाई-स्पेंडिंग, क्रेडिटवर्दी ग्राहक क्रेड फिनटेक प्लेटफॉर्म है। इसमें 750+ क्रेडिट स्कोर वाले यूजर्स 1 करोड़ से ज्यादा हैं। इसका मतलब है कि इसका यूजरबेस प्रीमियम, हाई-स्पेंडिंग और क्रेडिटवर्दी है। ये वो ग्राहक हैं, जिन्हें बैंक, बीमा कंपनियां और लग्जरी ब्रांड्स वर्षों की मेहनत से हासिल करते हैं। क्रेड की शुरुआत क्रेडिट कार्ड बिल पेमेंट से हुई थी। अब यूपीआई, लोन, रेंट पेमेंट, वेल्थ प्रोडक्ट्स तक फैल चुकी है। मेटा की जरूरत – सटीक आंकड़े मेटा को विज्ञापन से कमाई होती है। 2025 में 18.5 लाख करोड़ की आय का करीब 98% हिस्सा विज्ञापन से आया। लेकिन विज्ञापन के लिए सटीक आंकड़े और उपभोक्ताओं के साथ गहरा संबंध जरूरी है। पेमेंट प्लेटफॉर्म यही देते हैं। जो कंपनी आपके पैसे के लेन-देन की आदत बन जाए, वह लोन, इंश्योरेंस और शॉपिंग का अगला पड़ाव भी बन सकती है। मेटा इसी ‘एम्बेडेड फाइनेंस’ की तरफ बढ़ रही है। वॉट्सएप पे – 8 साल के सफर में सिर्फ 0.4 फीसदी बाजार हिस्सेदारी वॉट्सएप पे 2018 में लॉन्च हुआ था। यह यूपीआई क्रांति में सबसे पहले उतरने वालों में शामिल है। लेकिन सफलता नहीं मिली। एनपीसीआई ने शुरुआत में सिर्फ 10 लाख यूजर्स की सीमा लगाई। बाद में इसे 2 करोड़, फिर 10 करोड़ तक बढ़ाया। 2024 में सीमाएं हटा ली गईं, पर वॉट्सएप पे 0.4% मार्केट शेयर तक ही पहुंच पाया। फोनपे और गूगल पे ने यूपीआई पेमेंट्स के 80% से ज्यादा हिस्से पर कब्जा कर लिया। चुनौती – आधी आय के बराबर घाटा कुल यूजर्स – 1.7 करोड़ यूजर्स में से करीब 1 करोड़ 750 से ज्यादा क्रेडिट स्कोर वाले प्लेटफॉर्म से कुल पेमेंट वॉल्यूम – बीते वित्त वर्ष 8.5 लाख करोड़ रुपए तक पहुंचा ऑपरेशन से आय – 2,735 करोड़ रुपए शुद्ध घाटा – 1,457 करोड़ रुपए इस्तेमाल – 50% एक्टिव यूजर्स अभी तीन या इससे ज्यादा प्रोडक्ट्स यूज कर रहे

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पेमेंट्स के मामले में भारतीयों का मिजाज भांपने में मेटा विफल रही है। भारत में वॉट्सएप पे की हिस्सेदारी 0.4% से भी कम है। दूसरी तरफ फोनपे और गूगल पे मिलकर 80% से ज्यादा यूपीआई लेनदेन संभालते हैं। पेमेंट्स की रेस हार चुकी मेटा ने नया दांव लगाया है। मेटा, क्रेड में 90 करोड़ डॉलर यानी करीब 8,500 करोड़ निवेश करने जा रही है। क्रेड का मौजूदा वैल्युएशन करीब 37,000 करोड़ आंका गया है। यह इसके रिकॉर्ड वैल्युएशन 56,000 करोड़ से लगभग 50% कम है, लेकिन भारत के टॉप फिनटेक स्टार्टअप्स में यह अब भी ऊंचा मुकाम है। क्रेड अभी घाटे में है, फिर भी मेटा इसमें बड़ी पूंजी लगा रही है। बाजार इसे भारत के ‘वेल फाइनेंस्ड’ उपभोक्ताओं तक पहुंच की रणनीति के तौर पर देख रही है। इस डील मेटा को मर्चेंट नेटवर्क, फिनटेक इकोसिस्टम और प्रीमियम यूजरबेस तक पहुंच दिलाएगी। क्रेड की ताकत – 750 से ज्यादा क्रेडिट स्कोर वाले प्रीमियम, हाई-स्पेंडिंग, क्रेडिटवर्दी ग्राहक क्रेड फिनटेक प्लेटफॉर्म है। इसमें 750+ क्रेडिट स्कोर वाले यूजर्स 1 करोड़ से ज्यादा हैं। इसका मतलब है कि इसका यूजरबेस प्रीमियम, हाई-स्पेंडिंग और क्रेडिटवर्दी है। ये वो ग्राहक हैं, जिन्हें बैंक, बीमा कंपनियां और लग्जरी ब्रांड्स वर्षों की मेहनत से हासिल करते हैं। क्रेड की शुरुआत क्रेडिट कार्ड बिल पेमेंट से हुई थी। अब यूपीआई, लोन, रेंट पेमेंट, वेल्थ प्रोडक्ट्स तक फैल चुकी है। मेटा की जरूरत – सटीक आंकड़े मेटा को विज्ञापन से कमाई होती है। 2025 में 18.5 लाख करोड़ की आय का करीब 98% हिस्सा विज्ञापन से आया। लेकिन विज्ञापन के लिए सटीक आंकड़े और उपभोक्ताओं के साथ गहरा संबंध जरूरी है। पेमेंट प्लेटफॉर्म यही देते हैं। जो कंपनी आपके पैसे के लेन-देन की आदत बन जाए, वह लोन, इंश्योरेंस और शॉपिंग का अगला पड़ाव भी बन सकती है। मेटा इसी ‘एम्बेडेड फाइनेंस’ की तरफ बढ़ रही है। वॉट्सएप पे – 8 साल के सफर में सिर्फ 0.4 फीसदी बाजार हिस्सेदारी वॉट्सएप पे 2018 में लॉन्च हुआ था। यह यूपीआई क्रांति में सबसे पहले उतरने वालों में शामिल है। लेकिन सफलता नहीं मिली। एनपीसीआई ने शुरुआत में सिर्फ 10 लाख यूजर्स की सीमा लगाई। बाद में इसे 2 करोड़, फिर 10 करोड़ तक बढ़ाया। 2024 में सीमाएं हटा ली गईं, पर वॉट्सएप पे 0.4% मार्केट शेयर तक ही पहुंच पाया। फोनपे और गूगल पे ने यूपीआई पेमेंट्स के 80% से ज्यादा हिस्से पर कब्जा कर लिया। चुनौती – आधी आय के बराबर घाटा कुल यूजर्स – 1.7 करोड़ यूजर्स में से करीब 1 करोड़ 750 से ज्यादा क्रेडिट स्कोर वाले प्लेटफॉर्म से कुल पेमेंट वॉल्यूम – बीते वित्त वर्ष 8.5 लाख करोड़ रुपए तक पहुंचा ऑपरेशन से आय – 2,735 करोड़ रुपए शुद्ध घाटा – 1,457 करोड़ रुपए इस्तेमाल – 50% एक्टिव यूजर्स अभी तीन या इससे ज्यादा प्रोडक्ट्स यूज कर रहे

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