घेवर रेसिपी: सावन में त्योहारों का मजा हो जाएगा दोगुना, घर पर ही बाजार में नकली घेवर जैसा

18 जुलाई 2026 को 22:47 IST पर अपडेट किया गया घेवर रेसिपी: घेवर राजस्थान की सबसे मशहूर मिठाइयों में से एक है। सावन के महीने और त्योहारों पर इसे विशेष रूप से बनाया और खाया जाता है। बाजार में मिलने वाला घेवर तो हम सब खाते हैं, लेकिन घर पर बनी शुद्ध मिठाई की बात ही कुछ और है। थोड़ी सी मेहनत से आप घर में ही स्वादिष्ट और नकली घेवर तैयार कर सकते हैं। आइए जानते हैं इसे बनाने की आसान विधि। अनुसरण करना : आवश्यक सामग्री: घी बनाने के लिए आपको मैदा, घी, दूध, ठंडा पानी, चीनी, इलायची और स्वादिष्ट मेवों की जरूरत पड़ेगी। घी को तलने के लिए आप अपनी पसंद के अनुसार घी या रिफाइंड तेल का उपयोग कर सकते हैं। छवि: एआई पाइथोरी में घी लें, उसे अच्छी तरह फेंटें। लिटिल-थोड़ा इन करके मैदा स्टॉल। इसके बाद इसमें दूध और ठंडा पानी स्टिल एक नमक नासा तैयार कर लें। नासाला बड़े पैमाने पर न हो, क्योंकि घेवर को नकली बना दिया जाता है। छवि: एआई एक गहरी रोटी में घी गर्म करें। जब घी अच्छी तरह गर्म हो जाए, तो इसमें थोड़ा-थोड़ा करके थूक दिया जाता है। डायनासोर के नमूने समय के बीच में जगह-जगह पर बने रहते हैं, जहां घेवर की जालीदार आकृतियां तैयार की जाएंगी। छवि: एआई जब गेहूँ का रंग उज्ज्वल सौर हो जाए, तो इसे सावधानी से बाहर निकाल लें। इसी तरह अन्य घेवर तैयार कर लें। एक पैन में चीनी और पानी का ढांचा एक तार की चाशनी तैयार कर लें। छवि: एआई घेवर को थोड़ी देर के लिए इस चाशनी में डालें और फिर बाहर निकाल लें। इसके ऊपर मलाई, रबरी या इलेक्ट्रानिक कटे हुए किर्ज़ मेवे स्टैंचल इसे सजा देते हैं। घेवर ब्रोक समय नासा को अधिकांश फ्लोट न रखें। छवि: एआई द्वारा प्रकाशित: कीर्ति सोनी प्रकाशित 18 जुलाई 2026 22:47 IST पर
अरबी के कोफ्ते रेसिपी: सादी सब्जी नहीं, घर में बनी नरम-मुलायम अरबी के कोफ्ते, मुंह में ही डूब जाएंगे; बनाना भी है आसान

कॉफ़ी के लिए: 500 अरबी ग्राम, 2 चम्मच आलू, 3 हरी मिर्च, 1 छोटा चम्मच अदरक पेस्ट, 2 बड़ा चम्मच बेसन, 2 छोटा चम्मच मकई का आटा, 1/2 छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर और धनिया पाउडर, 1/4 छोटा चम्मच मसाला गरम मसाला, नमक, तेल छवि: फ्रीपिक ग्रेवी के लिए: 2 प्याज, 2 टमाटर, 1 चम्मच अदरक-लहसुन पेस्ट, 2 चम्मच दही, 1 छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर और धनिया पाउडर, 1/2 छोटा चम्मच गरम मसाला, 1/2 छोटा चम्मच हल्दी और जीरा, तेल, नमक, हरा धनिया छवि: फ्रीपिक बनाने की विधि: सबसे पहले अरबी को अच्छी तरह धोकर कुकर में 2-3 सिटी तक आएँ। अद्वितीय होने पर इसे छीलाएं और अच्छी तरह मैश कर लें। छवि: सोशल मीडिया अब इसमें आलू, बेसन, कॉर्न फ्लोर, हरी मिर्च, अदरक, मसाला, नमक और हरा धनिया के टुकड़े अच्छी तरह मिला लें। अब इस मिश्रण से छोटे-छोटे गोल कोफ्ते तैयार करें। छवि: फ्रीपिक एक होने वाले तेल में गर्म करें और कोफ्तों को मध्यम मिश्रण पर मसाले तक तल लें। क्रूड तोइन कम तेल में एयर फ्रायर या अप्पे पैन में भी बनाया जा सकता है। एक पैन में तेल गर्म करें और उसमें जीरा डाल दें। छवि: एआई इसके बाद मोनोलैम्बस सोनालैन्ड्रा तक होना है। अब अदरक-लहसुन का प्लास्टर 1-2 मिनट। इसके बाद टमाटर की प्यूरी, हल्दी, लाल मिर्च, धनिया पाउडर और नमक मसाला तब तक मसाला जब तक मसाला तेल न छोड़ दे। छवि: फ्रीपिक अब फेंटा हुआ दही और लगातार 2-3 मिनट तक चले गए। आवश्यकता के अनुसार पानी मोनोमैट्रिक ग्रेवी को 5 मिनट तक अंतिम चरण में। अब गैस बनाएं और ग्रेवी में डाल कर कोफ्तों को तैयार करें। छवि: एआई 2 मिनट बाद गैस बंद कर दें ताकि कोफ्ते टूटें नहीं। ऊपर से गरम मसाला और हरा धनिए की सजा। अरबी को अधिक मात्रा में मसाले, अन्य मिश्रण बहुत सारे मसाले हो जायेंगे। छवि: एआई अगर मिक्स अपग्रेड लगे तो लिटिल बेसन या बेडर क्रैम्ब्स मिला लें। कपड़ों को ग्रेवी में खरीदने से ठीक पहले डालें, इससे वे नग्न रहेंगे और टूटेंगे नहीं। छवि: फ्रीपिक हल्की मलाई या ताजी क्रीम से ग्रेवी का स्वाद और भी भरपूर हो जाता है। गर्मा-गरम अरबी के कफों को तंदूरी रोटी, बटर नान, मिस्सी रोटी, पराठे या जीरा चावल के साथ बनाएं। छवि: एआई यह स्वादिष्ट व्यंजन घर के मूडी, डायनर या किसी भी खास मसाले के लिए एक बेहतरीन विकल्प है। एक बार इसे देखें, घर के सभी लोग उगलियां चाटते रहेंगे। छवि: फ्रीपिक (टैग्सटूट्रांसलेट)अरबी के कोफ्ते की सब्जी(टी)अरबी के कोफ्ते(टी)अरबी के कोफ्ते किस सब्जी(टी)अरबी के कोफ्ते की सब्जी(टी)कोफ्ते की सब्जी(टी)कोफ्ते की सब्जी(टी)अरबी के कोफ्ते की सब्जी रेसिपी
CBSE 10th Board 2026 2nd Result Released

Hindi News Career CBSE 10th Board 2026 2nd Result Released | 6.7 Lakh Students Appeared 8 मिनट पहले कॉपी लिंक CBSE कक्षा 10वीं सेकंड बोर्ड परीक्षा में शामिल हुए छात्रों का रिजल्ट जारी कर दिया गया है। छात्र केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की ऑफिशियल वेबसाइट cbse.gov.in के जरिये अपना रिजल्ट चेक व डाउनलोड कर सकते हैं। कुल 96.78% स्टूडेंट्स परीक्षा में पास हुए हैं। CBSE 10वीं मेन एग्जाम का रिजल्ट जारी होने के बाद लगभग 6.7 लाख छात्रों ने दूसरी बोर्ड की परीक्षा में भाग लेने के लिए आवेदन किया था। रिजल्ट चेक करने के लिए जरूरी डिटेल्स : रोल नंबर स्कूल नंबर एडमिट कार्ड आईडी रैंक या टॉपर लिस्ट जारी नहीं CBSE ने इस बार भी साफ किया है कि बोर्ड किसी भी छात्र की रैंक या टॉपर लिस्ट जारी नहीं करेगा। बोर्ड का कहना है कि इसका उद्देश्य छात्रों पर कॉम्पिटिशन का दबाव कम करना है। हालांकि जिन छात्रों ने अलग-अलग विषयों में सबसे बेहतर प्रदर्शन किया होगा, उन्हें मेरिट सर्टिफिकेट दिया जाएगा। ये सर्टिफिकेट सेकेंड बोर्ड परीक्षा का रिजल्ट जारी होने के बाद DigiLocker के माध्यम से उपलब्ध कराए जाएंगे। 33% अंक लाना जरूरी जो छात्र मेन एग्जाम में एक या दो विषय में असफल घोषित किए गए थे। उन्हें दूसरी बोर्ड की परीक्षा में पास होने के लिए न्यूनतम 33% अंक प्राप्त करना जरूरी है। इसके साथ ही जो छात्र दूसरी बोर्ड की परीक्षा में फेल होंगे, वे छात्र अगले साल बोर्ड की परीक्षा में शामिल होकर अपने अंकों में सुधार कर सकते हैं। इसी साल शुरू की गई 10वीं बोर्ड सेकंड परीक्षा CBSE ने कक्षा 10वीं के लिए सेकंड (दूसरी) बोर्ड परीक्षा 2026 से ही शुरू की है ताकि छात्रों को उसी शैक्षणिक वर्ष में अपना प्रदर्शन सुधारने का एक और मौका मिल सके। यह व्यवस्था सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकंडरी एजुकेशन द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 की सिफारिशों के अनुरूप लागू की गई है। ————– ये खबर भी पढ़ें… UPTET 2026 – 2 से 4 जुलाई तक:16 लाख उम्मीदवार परीक्षा में शामिल, मल्टी-लेयर सिक्योरिटी सिस्टम लागू उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग 2 से 4 जुलाई तक उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) 2026 का आयोजन करेगा। आयोग ने परीक्षा को नकलमुक्त और पारदर्शी बनाने के लिए इस बार सख्त सुरक्षा व्यवस्था लागू की है। पूरी खबर यहां पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
दही भल्ला रेसिपी: आपके भी दही भल्ले रह जाते हैं सख्त, इस सीक्रेट तरीके से बनाएं रुई जैसे मुलायम, मुंह में डालें ही खा जाएंगे

18 जुलाई 2026 को 20:46 IST पर अपडेट किया गया दही भल्ला रेसिपी: दही भल्ला रेसिपी: दही भल्ला सभी को बहुत पसंद आता है, लेकिन अक्सर लोगों की फरमाइश होती है कि घर पर बनाए गए भल्ले सख्त रह जाते हैं. अगर आप भी बाजार में रुई जैसे नैर और स्पैनी दही भल्ले बनाना चाहते हैं, तो इन खास टिप्स और सामग्री का उपयोग करके आप घर पर ही प्रभावकारी परिणाम पा सकते हैं। अनुसरण करना : 1 कप उड़द दालअदरक का टुकड़ाहरी मिर्चनमकतेल2 कप आराध्य देवी2 चीनी चीनीआधा काला नमकहाल ही में हुआ जीरा पाउडरलाल मिर्च पाउडरइमली और खजूर की मिठाईहरी धनिया और पुदीने की चटनीअनारदाने और कटा हरा धनिया छवि: ऐ उड़द की दाल को 4 से 5 घंटे तक अकेलेकर रखें। पीसते समय कम पानी का उपयोग करें ताकि बैटर फ्लोट रहे। इसमें अदरक- हरी मिर्च की गोलियां, इसे कम से कम 10 से 15 मिनट तक फेंटें, जिसमें मिक्सचर और फ्लफी हो जाए। छवि: एआई भल्लों को हमेशा अधिष्ठापन पर तलें। तेज गति पर भल्ले ऊपर से जल जाएंगे और अंदर से कच्ची रह जाएंगी, वहीं अधम जंक पर वे तेल ज्यादा सोख छोड़ देंगे। छवि: एआई आख़िर हुए भल्लों को सीधे दही में न डालें। सबसे पहले उन्हें गुनगुने नमक वाले पानी में 10 से 15 मिनट के लिए ऑनलाइनकर लें। इससे भल्ले एक्स्ट्रा तेल छोड़ गए और सीधा नर हो जाएंगे। छवि: एआई दही भल्लों का असली स्वाद दही पर वर्जित है। दही को अच्छी तरह से फेंटें या छन्नी से अच्छी लें ताकि वह एकदम सही और क्रीमी हो जाए। इसमें स्वाद में आधा चीनी और नमक मिला हुआ है। छवि: एआई अपुष्ट हाथों से चित्रित किए गए भल्लों को प्लेटों में रखा गया और ऊपर से नवजात शिशु को रखा गया। इसके बाद इमली की खट्टी-मीठी चटनी, हरी चटनी, जीरा पाउडर, लाल मिर्च पाउडर और अनार के दानों से सजाकर सजावटें हुईं। छवि: एआई द्वारा प्रकाशित: कीर्ति सोनी प्रकाशित 18 जुलाई 2026 को 20:46 IST पर (टैग्सटूट्रांसलेट)दही भल्ला रेसिपी(टी)सॉफ्ट दही भल्ला(टी)सॉफ्ट दही भल्ला कैसे बनाएं(टी)दही वड़ा रेसिपी हिंदी में(टी)परफेक्ट दही भल्ला टिप्स(टी)इंडियन स्ट्रीट फूड रेसिपी(टी)दही स्नैक्स रेसिपी
Profit Jumps 16 Percent, Asset Quality Improves

नई दिल्ली7 मिनट पहले कॉपी लिंक ICICI बैंक लिमिटेड ने अप्रैल-जून तिमाही के लिए अपने स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट में साल-दर-साल 15.95% की बढ़त दर्ज की है। यह बढ़कर 14,804.5 करोड़ रुपए पर पहुंच गया है। बैंक का यह मुनाफा बाजार के अनुमानों से काफी बेहतर रहा। इस निजी क्षेत्र के बड़े बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) भी उम्मीद से ज्यादा तेजी से बढ़ते हुए 12.7% की एनुअल ग्रोथ के साथ 24,384.35 करोड़ रुपए रही। बाजार के अनुमानों को पीछे छोड़ा CNBC-TV18 के एनालिस्ट पोल के अनुसार, बाजार को उम्मीद थी कि इस तिमाही में ICICI बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) 9% की बढ़त के साथ 23,689 करोड़ रुपए रह सकती है। वहीं, नेट प्रॉफिट में पिछले साल के मुकाबले 7% की ग्रोथ का अनुमान था, जिसके तहत इसके 13,616 करोड़ रुपए रहने की उम्मीद जताई गई थी। बैंक ने मुनाफे और इंटरेस्ट इनकम दोनों ही मामलों में इन अनुमानों को पीछे छोड़ दिया। मार्जिन और एसेट क्वालिटी में सुधार जून तिमाही के दौरान बैंक के नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) में तिमाही और सालाना दोनों आधार पर सुधार देखने को मिला है। इस तिमाही में NIM 4.36% दर्ज किया गया। हालांकि, मार्च तिमाही में यह 4.32% और पिछले साल की समान अवधि में 4.34% के स्तर पर था। इसके साथ ही बैंक की एसेट क्वालिटी को भी और मजबूती मिली है। लोन बुक और डिपॉजिट में 14% की ग्रोथ 30 जून 2026 तक बैंक का कुल लोन पोर्टफोलियो सालाना आधार पर 19.6% की रफ्तार से बढ़कर 16,31,260 करोड़ रुपए हो गया। वहीं कुल डिपॉजिट में भी 14% की बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह 18,33,586 करोड़ रुपए पर पहुंच गई। इसी तरह औसत डिपॉजिट भी 14% बढ़कर 17,48,028 करोड़ रुपए रहा है, जबकि बैंक का एवरेज कासा (CASA) रेशियो 38.1% दर्ज किया गया है। बैंक को एनपीए के मोर्चे पर राहत मिली 30 जून 2026 तक बैंक का ग्रॉस एनपीए (Gross NPA) रेशियो घटकर 1.38% पर आ गया है, जो मार्च के अंत में 1.40% और पिछले साल की समान अवधि में 1.67% था। वहीं बैंक का नेट एनपीए रेशियो की बात करें तो यह 0.35% रहा, जो पिछली तिमाही में 0.33% और एक साल पहले 0.41% के स्तर पर था। बैंक ने 2026 में अब तक 8.7% रिटर्न दिया शुक्रवार को ICICI बैंक के शेयर 1.84% की बढ़त के साथ 1,444.3 रुपए पर बंद हुए थे। साल 2026 में अब तक इस स्टॉक ने निवेशकों को 8.7% का रिटर्न दिया है। इसकी तुलना में देखें तो इसी अवधि के दौरान शेयर बाजार के प्रमुख इंडेक्स निफ्टी 50 में 6.9% की गिरावट दर्ज की गई है, यानी बैंक ने मार्केट के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया है। क्या होती है नेट इंटरेस्ट इनकम और नेट इंटरेस्ट मार्जिन? नेट इंटरेस्ट इनकम (NII): बैंक मुख्य रूप से दो काम करता है- जमा यानी डिपॉजिट स्वीकार करना और लोन देना। लोन देने पर बैंक को जो ब्याज मिलता है, उसमें से जमाकर्ताओं को दिए जाने वाले ब्याज को घटाने के बाद बची रकम को नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) कहते हैं। यह बैंक की मुख्य कमाई होती है। नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM): यह किसी बैंक की वित्तीय सेहत को मापने का एक पैमाना है। बैंक अपनी कुल ब्याज कमाने वाली संपत्तियों (जैसे लोन) पर जितना ब्याज कमाता है और जमा राशि पर जितना ब्याज चुकाता है, उसके अंतर को प्रतिशत में व्यक्त करने पर इसे नेट इंटरेस्ट मार्जिन कहा जाता है। नॉन परफॉर्मिंग एसेट या NPA क्या है? जब कोई व्यक्ति या संस्था किसी बैंक से लोन लेकर उसे वापस नहीं करती, तो उसे बैड लोन या नॉन परफॉर्मिंग एसेट या NPA कहा जाता है। यानी इन लोन्स की रिकवरी की उम्मीद काफी कम होती है। नतीजतन बैंकों का पैसा डूब जाता है और बैंक घाटे में चला जाता है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नियमों के मुताबिक, अगर किसी बैंक लोन की किस्त 90 दिनों तक यानी तीन महीने तक नहीं चुकाई जाती है, तो उस लोन को NPA घोषित कर दिया जाता है। अन्य वित्तीय संस्थाओं के मामले में यह सीमा 120 दिन की होती है। बुक को क्लियर करने के लिए बैंकों को ऐसा करना होता है। ये खबर भी पढ़ें… HDFC बैंक का मुनाफा 5% बढ़कर ₹19,060 करोड़: नेट इंटरेस्ट इनकम 6.7% बढ़ी; बैंक के नतीजे एक्सपर्ट्स के अनुमान से कम रहे HDFC बैंक लिमिटेड ने शनिवार को चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही के नतीजे घोषित कर दिए हैं। इस तिमाही (Q1 FY27) में बैंक का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 4.98% बढ़कर 19,059.72 करोड़ रुपए रहा। हालांकि, यह मुनाफा CNBC-TV18 पोल के 19,332 करोड़ रुपए के अनुमान से कम रहा। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Profit Jumps 16 Percent, Asset Quality Improves

नई दिल्ली1 घंटे पहले कॉपी लिंक ICICI बैंक लिमिटेड ने अप्रैल-जून तिमाही के लिए अपने स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट में साल-दर-साल 15.95% की बढ़त दर्ज की है। यह बढ़कर 14,804.5 करोड़ रुपए पर पहुंच गया है। बैंक का यह मुनाफा बाजार के अनुमानों से काफी बेहतर रहा। इस निजी क्षेत्र के बड़े बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) भी उम्मीद से ज्यादा तेजी से बढ़ते हुए 12.7% की एनुअल ग्रोथ के साथ 24,384.35 करोड़ रुपए रही। बाजार के अनुमानों को पीछे छोड़ा CNBC-TV18 के एनालिस्ट पोल के अनुसार, बाजार को उम्मीद थी कि इस तिमाही में ICICI बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) 9% की बढ़त के साथ 23,689 करोड़ रुपए रह सकती है। वहीं, नेट प्रॉफिट में पिछले साल के मुकाबले 7% की ग्रोथ का अनुमान था, जिसके तहत इसके 13,616 करोड़ रुपए रहने की उम्मीद जताई गई थी। बैंक ने मुनाफे और इंटरेस्ट इनकम दोनों ही मामलों में इन अनुमानों को पीछे छोड़ दिया। मार्जिन और एसेट क्वालिटी में सुधार जून तिमाही के दौरान बैंक के नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) में तिमाही और सालाना दोनों आधार पर सुधार देखने को मिला है। इस तिमाही में NIM 4.36% दर्ज किया गया। हालांकि, मार्च तिमाही में यह 4.32% और पिछले साल की समान अवधि में 4.34% के स्तर पर था। इसके साथ ही बैंक की एसेट क्वालिटी को भी और मजबूती मिली है। लोन बुक और डिपॉजिट में 14% की ग्रोथ 30 जून 2026 तक बैंक का कुल लोन पोर्टफोलियो सालाना आधार पर 19.6% की रफ्तार से बढ़कर 16,31,260 करोड़ रुपए हो गया। वहीं कुल डिपॉजिट में भी 14% की बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह 18,33,586 करोड़ रुपए पर पहुंच गई। इसी तरह औसत डिपॉजिट भी 14% बढ़कर 17,48,028 करोड़ रुपए रहा है, जबकि बैंक का एवरेज कासा (CASA) रेशियो 38.1% दर्ज किया गया है। बैंक को एनपीए के मोर्चे पर राहत मिली 30 जून 2026 तक बैंक का ग्रॉस एनपीए (Gross NPA) रेशियो घटकर 1.38% पर आ गया है, जो मार्च के अंत में 1.40% और पिछले साल की समान अवधि में 1.67% था। वहीं बैंक का नेट एनपीए रेशियो की बात करें तो यह 0.35% रहा, जो पिछली तिमाही में 0.33% और एक साल पहले 0.41% के स्तर पर था। बैंक ने 2026 में अब तक 8.7% रिटर्न दिया शुक्रवार को ICICI बैंक के शेयर 1.84% की बढ़त के साथ 1,444.3 रुपए पर बंद हुए थे। साल 2026 में अब तक इस स्टॉक ने निवेशकों को 8.7% का रिटर्न दिया है। इसकी तुलना में देखें तो इसी अवधि के दौरान शेयर बाजार के प्रमुख इंडेक्स निफ्टी 50 में 6.9% की गिरावट दर्ज की गई है, यानी बैंक ने मार्केट के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया है। क्या होती है नेट इंटरेस्ट इनकम और नेट इंटरेस्ट मार्जिन? नेट इंटरेस्ट इनकम (NII): बैंक मुख्य रूप से दो काम करता है- जमा यानी डिपॉजिट स्वीकार करना और लोन देना। लोन देने पर बैंक को जो ब्याज मिलता है, उसमें से जमाकर्ताओं को दिए जाने वाले ब्याज को घटाने के बाद बची रकम को नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) कहते हैं। यह बैंक की मुख्य कमाई होती है। नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM): यह किसी बैंक की वित्तीय सेहत को मापने का एक पैमाना है। बैंक अपनी कुल ब्याज कमाने वाली संपत्तियों (जैसे लोन) पर जितना ब्याज कमाता है और जमा राशि पर जितना ब्याज चुकाता है, उसके अंतर को प्रतिशत में व्यक्त करने पर इसे नेट इंटरेस्ट मार्जिन कहा जाता है। नॉन परफॉर्मिंग एसेट या NPA क्या है? जब कोई व्यक्ति या संस्था किसी बैंक से लोन लेकर उसे वापस नहीं करती, तो उसे बैड लोन या नॉन परफॉर्मिंग एसेट या NPA कहा जाता है। यानी इन लोन्स की रिकवरी की उम्मीद काफी कम होती है। नतीजतन बैंकों का पैसा डूब जाता है और बैंक घाटे में चला जाता है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नियमों के मुताबिक, अगर किसी बैंक लोन की किस्त 90 दिनों तक यानी तीन महीने तक नहीं चुकाई जाती है, तो उस लोन को NPA घोषित कर दिया जाता है। अन्य वित्तीय संस्थाओं के मामले में यह सीमा 120 दिन की होती है। बुक को क्लियर करने के लिए बैंकों को ऐसा करना होता है। ये खबर भी पढ़ें… HDFC बैंक का मुनाफा 5% बढ़कर ₹19,060 करोड़: नेट इंटरेस्ट इनकम 6.7% बढ़ी; बैंक के नतीजे एक्सपर्ट्स के अनुमान से कम रहे HDFC बैंक लिमिटेड ने शनिवार को चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही के नतीजे घोषित कर दिए हैं। इस तिमाही (Q1 FY27) में बैंक का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 4.98% बढ़कर 19,059.72 करोड़ रुपए रहा। हालांकि, यह मुनाफा CNBC-TV18 पोल के 19,332 करोड़ रुपए के अनुमान से कम रहा। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Iran Political Crisis | President Pazeshkian Faces Hardliner Backlash

5 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिका के साथ युद्धविराम समझौते के बाद ईरान के भीतर राजनीतिक टकराव खुलकर सामने आ गया है। राष्ट्रपति मसूद पजशकियान, विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ पर अब ईरान के कट्टरपंथी धड़े ‘सॉफ्ट कूप’ यानी बिना हथियारों के सत्तापलट करने का आरोप लगा रहे हैं। कट्टरपंथियों का कहना है कि इन नेताओं ने अमेरिका से समझौता करके ईरान के सिद्धांतों से समझौता किया है। CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले सप्ताह तेहरान में सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के दौरान यह नाराजगी खुलकर दिखाई दी। राष्ट्रपति मसूद पजशकियान जब खामेनेई के ताबूत के साथ चल रहे थे, तब काले कपड़े पहने कुछ लोगों ने राष्ट्रपति के खिलाफ नारे लगाए। वहीं, अंतिम संस्कार स्थल से कुछ दूरी पर विदेश मंत्री अब्बास अराघची पर पत्थर फेंके गए और उन्हें देश बेचने वाला गद्दार कहा गया। हालात इतने बिगड़ गए कि उन्हें वहां से भागना पड़ा। तेहरान में 3 जुलाई को एक कार्यक्रम में पहुंचे, रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के सीनियर कमांडर जनरल मोहसिन रेजाई, विदेश मंत्री अब्बास अराघची, मुख्य न्यायाधीश गुलाम-हुसैन मोहसेनी एजेई, ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ, राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ये सभी मिलकर ही अभी देश चला रहे हैं। कट्टरपंथियों का आरोप- अमेरिका के सामने सरकार झुक गई CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, कट्टरपंथी गुटों का मानना है कि अली खामेनेई की हत्या का बदला लेने के बजाय सरकार ने अमेरिका के सामने झुककर समझौता कर लिया। उनका कहना है कि यह समझौता नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई के आदेशों के खिलाफ किया गया। मुजतबा खामेनेई अब तक सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं। उन्होंने न तो देश को संबोधित किया है और न ही खुलकर अपनी सत्ता का प्रदर्शन किया है, जबकि उनके नाम पर सरकार बातचीत भी कर रही है और देश भी चला रही है। कट्टरपंथियों का आरोप है कि मुजतबा की गैरमौजूदगी का फायदा उठाकर मौजूदा सरकार अपनी ताकत बढ़ाने में लगी है। उनका दावा है कि वे संसद को कमजोर करना चाहती है। मुजतबा खामेनेई के लगातार सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आने के कारण राष्ट्रपति मसूद पजशकियान, संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची युद्ध के बाद ईरान के सबसे प्रमुख चेहरे बन गए हैं। कट्टरपंथियों की नाराजगी की एक बड़ी वजह यही है। 14 जुलाई को तेहरान के इमाम खुमैनी मुसल्ला ग्रैंड मस्जिद में आयोजित दिवंगत सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की श्रद्धांजलि सभा में शामिल शोकाकुल लोग मुट्ठियां उठाकर नारे लगाते हुए। अंतिम संस्कार में जंग का संदेश, कुछ दिन बाद ही टूट गया युद्धविराम ईरान में युद्ध के दौरान राष्ट्रीय एकता बनाए रखने की लगातार अपील की जा रही थी, लेकिन अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में कट्टरपंथी गुटों का दबदबा साफ दिखाई दिया। रिपोर्ट के मुताबिक, कट्टरपंथी गुटों ने इस मौके का इस्तेमाल अमेरिका के खिलाफ फिर से युद्ध छेड़ने की मांग उठाने और ट्रम्प सरकार के साथ हुए किसी भी समझौते को पूरी तरह खारिज करने के लिए किया। कट्टरपंथियों की यह इच्छा कुछ ही दिनों बाद पूरी होती नजर आई। इस सप्ताह ईरान और अमेरिका के बीच हुआ नाजुक युद्धविराम लगभग टूट गया। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों को निशाना बनाकर इस समुद्री मार्ग पर अपना कंट्रोल दिखाने की कोशिश की। इसके जवाब में अमेरिका ने जवाबी हमले किए। राष्ट्रपति को खुलेआम दी गई थी जान से मारने की धमकी युद्ध दोबारा शुरू होने से पहले भी कट्टरपंथी नेता अमेरिका से समझौता करने वाले अधिकारियों पर लगातार हमला बोल रहे थे। ईरानी शासन से जुड़े धार्मिक गायक मोहम्मद अली बख्शी ने एक कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति मसूद पजशकियान को खुलेआम धमकी दी थी। उन्होंने कहा, “राष्ट्रपति महोदय, अगर सुप्रीम लीडर की शर्तें पूरी नहीं हुईं तो हमारी तलवार होगी और आपका गला होगा। हम आपकी जिंदगी को जहन्नुम बना देंगे।” राष्ट्रपति को जान से मारने की इस धमकी की ईरान में काफी आलोचना हुई, लेकिन बख्शी के खिलाफ किसी कानूनी कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई। गालिबाफ भी कट्टरपंथियों के निशाने पर कट्टरपंथियों के निशाने पर सिर्फ राष्ट्रपति और विदेश मंत्री ही नहीं हैं। अमेरिका के साथ बातचीत करने वाले मुख्य वार्ताकार और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ भी उनके निशाने पर हैं। गालिबाफ पहले रिवोल्यूशनरी गार्ड्स में कमांडर रह चुके हैं और लंबे समय से ईरान की राजनीति में सक्रिय हैं। कट्टरपंथी सांसद कमरान गजनफारी ने जुलाई की शुरुआत में जारी एक वीडियो मैसेज में आरोप लगाया कि मौजूदा नेतृत्व सर्वोच्च नेता और संसद की भूमिका कमजोर कर रहा है। संसद स्पीकर बाघेर गालिबाफ अमेरिका के साथ बातचीत में ईरान का नेतृत्व कर रहे थे। कट्टरपंथियों को किनारे करने की कोशिश तेज ईरान में करीब चार महीने बाद 14 जुलाई को संसद का विशेष सत्र बुलाया गया। इसमें सत्ता संघर्ष खुलकर सामने आया और अमेरिका के साथ हुए समझौते का विरोध करने वाले दो प्रमुख कट्टरपंथी सांसदों को अहम संसदीय पदों से हटा दिया गया। सबसे पहले अमेरिका से समझौते का सबसे ज्यादा विरोध करने वाले कट्टरपंथी सांसद महमूद नबावियन को संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग (नेशनल सिक्योरिटी कमीशन) से हटा दिया गया। इसके अलावा इसके प्रवक्ता रहे इब्राहिम रेजाई को भी हटा दिया गया। नबावियन पहले अमेरिका के साथ बातचीत करने वाले ईरानी प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा रह चुके हैं, लेकिन बाद में उन्होंने वार्ता का विरोध शुरू कर दिया। आरोप है कि उन्होंने पिछले महीने समझौते पर हस्ताक्षर होने से पहले उसका मसौदा मीडिया में लीक कर दिया था, ताकि समझौता रुक सके। ईरान में 14 जुलाई को संसद का विशेष सत्र बुलाया गया था। विशेषज्ञ बोले- सरकार कट्टरपंथियों का असर कम करना चाहती है एक्सपर्ट्स का मानना है कि ईरान की मौजूदा सरकार अब इन कट्टरपंथी गुटों का प्रभाव कम करने की कोशिश कर रही है। हामिदरेजा अजीजी ने CNN से कहा, “हम देख रहे हैं कि गालिबाफ इन कट्टरपंथी नेताओं को धीरे-धीरे किनारे कर रहे हैं। ये लोग अब व्यवस्था के लिए बोझ बन चुके हैं और देश में अस्थिरता बढ़ने के साथ अपनी आपसी लड़ाई भी खुलकर सामने ला रहे हैं।” हालांकि इन कट्टरपंथियों की संख्या ज्यादा नहीं है, लेकिन संसद और सरकारी न्यूज एजेंसीज आईआरआईबी (IRIB) जैसे कई प्रभावशाली संस्थानों में उनकी मजबूत पकड़
Iran Political Crisis | President Pazeshkian Faces Hardliner Backlash

22 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिका के साथ युद्धविराम समझौते के बाद ईरान के भीतर राजनीतिक टकराव खुलकर सामने आ गया है। राष्ट्रपति मसूद पजशकियान, विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ पर अब ईरान के कट्टरपंथी धड़े ‘सॉफ्ट कूप’ यानी बिना हथियारों के सत्तापलट करने का आरोप लगा रहे हैं। कट्टरपंथियों का कहना है कि इन नेताओं ने अमेरिका से समझौता करके ईरान के सिद्धांतों से समझौता किया है। CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले सप्ताह तेहरान में सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के दौरान यह नाराजगी खुलकर दिखाई दी। राष्ट्रपति मसूद पजशकियान जब खामेनेई के ताबूत के साथ चल रहे थे, तब काले कपड़े पहने कुछ लोगों ने राष्ट्रपति के खिलाफ नारे लगाए। वहीं, अंतिम संस्कार स्थल से कुछ दूरी पर विदेश मंत्री अब्बास अराघची पर पत्थर फेंके गए और उन्हें देश बेचने वाला गद्दार कहा गया। हालात इतने बिगड़ गए कि उन्हें वहां से भागना पड़ा। तेहरान में 3 जुलाई को एक कार्यक्रम में पहुंचे, रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के सीनियर कमांडर जनरल मोहसिन रेजाई, विदेश मंत्री अब्बास अराघची, मुख्य न्यायाधीश गुलाम-हुसैन मोहसेनी एजेई, ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ, राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ये सभी मिलकर ही अभी देश चला रहे हैं। कट्टरपंथियों का आरोप- अमेरिका के सामने सरकार झुक गई CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, कट्टरपंथी गुटों का मानना है कि अली खामेनेई की हत्या का बदला लेने के बजाय सरकार ने अमेरिका के सामने झुककर समझौता कर लिया। उनका कहना है कि यह समझौता नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई के आदेशों के खिलाफ किया गया। मुजतबा खामेनेई अब तक सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं। उन्होंने न तो देश को संबोधित किया है और न ही खुलकर अपनी सत्ता का प्रदर्शन किया है, जबकि उनके नाम पर सरकार बातचीत भी कर रही है और देश भी चला रही है। कट्टरपंथियों का आरोप है कि मुजतबा की गैरमौजूदगी का फायदा उठाकर मौजूदा सरकार अपनी ताकत बढ़ाने में लगी है। उनका दावा है कि वे संसद को कमजोर करना चाहती है। मुजतबा खामेनेई के लगातार सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आने के कारण राष्ट्रपति मसूद पजशकियान, संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची युद्ध के बाद ईरान के सबसे प्रमुख चेहरे बन गए हैं। कट्टरपंथियों की नाराजगी की एक बड़ी वजह यही है। 14 जुलाई को तेहरान के इमाम खुमैनी मुसल्ला ग्रैंड मस्जिद में आयोजित दिवंगत सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की श्रद्धांजलि सभा में शामिल शोकाकुल लोग मुट्ठियां उठाकर नारे लगाते हुए। अंतिम संस्कार में जंग का संदेश, कुछ दिन बाद ही टूट गया युद्धविराम ईरान में युद्ध के दौरान राष्ट्रीय एकता बनाए रखने की लगातार अपील की जा रही थी, लेकिन अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में कट्टरपंथी गुटों का दबदबा साफ दिखाई दिया। रिपोर्ट के मुताबिक, कट्टरपंथी गुटों ने इस मौके का इस्तेमाल अमेरिका के खिलाफ फिर से युद्ध छेड़ने की मांग उठाने और ट्रम्प सरकार के साथ हुए किसी भी समझौते को पूरी तरह खारिज करने के लिए किया। कट्टरपंथियों की यह इच्छा कुछ ही दिनों बाद पूरी होती नजर आई। इस सप्ताह ईरान और अमेरिका के बीच हुआ नाजुक युद्धविराम लगभग टूट गया। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों को निशाना बनाकर इस समुद्री मार्ग पर अपना कंट्रोल दिखाने की कोशिश की। इसके जवाब में अमेरिका ने जवाबी हमले किए। राष्ट्रपति को खुलेआम दी गई थी जान से मारने की धमकी युद्ध दोबारा शुरू होने से पहले भी कट्टरपंथी नेता अमेरिका से समझौता करने वाले अधिकारियों पर लगातार हमला बोल रहे थे। ईरानी शासन से जुड़े धार्मिक गायक मोहम्मद अली बख्शी ने एक कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति मसूद पजशकियान को खुलेआम धमकी दी थी। उन्होंने कहा, “राष्ट्रपति महोदय, अगर सुप्रीम लीडर की शर्तें पूरी नहीं हुईं तो हमारी तलवार होगी और आपका गला होगा। हम आपकी जिंदगी को जहन्नुम बना देंगे।” राष्ट्रपति को जान से मारने की इस धमकी की ईरान में काफी आलोचना हुई, लेकिन बख्शी के खिलाफ किसी कानूनी कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई। गालिबाफ भी कट्टरपंथियों के निशाने पर कट्टरपंथियों के निशाने पर सिर्फ राष्ट्रपति और विदेश मंत्री ही नहीं हैं। अमेरिका के साथ बातचीत करने वाले मुख्य वार्ताकार और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ भी उनके निशाने पर हैं। गालिबाफ पहले रिवोल्यूशनरी गार्ड्स में कमांडर रह चुके हैं और लंबे समय से ईरान की राजनीति में सक्रिय हैं। कट्टरपंथी सांसद कमरान गजनफारी ने जुलाई की शुरुआत में जारी एक वीडियो मैसेज में आरोप लगाया कि मौजूदा नेतृत्व सर्वोच्च नेता और संसद की भूमिका कमजोर कर रहा है। संसद स्पीकर बाघेर गालिबाफ अमेरिका के साथ बातचीत में ईरान का नेतृत्व कर रहे थे। कट्टरपंथियों को किनारे करने की कोशिश तेज ईरान में करीब चार महीने बाद 14 जुलाई को संसद का विशेष सत्र बुलाया गया। इसमें सत्ता संघर्ष खुलकर सामने आया और अमेरिका के साथ हुए समझौते का विरोध करने वाले दो प्रमुख कट्टरपंथी सांसदों को अहम संसदीय पदों से हटा दिया गया। सबसे पहले अमेरिका से समझौते का सबसे ज्यादा विरोध करने वाले कट्टरपंथी सांसद महमूद नबावियन को संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग (नेशनल सिक्योरिटी कमीशन) से हटा दिया गया। इसके अलावा इसके प्रवक्ता रहे इब्राहिम रेजाई को भी हटा दिया गया। नबावियन पहले अमेरिका के साथ बातचीत करने वाले ईरानी प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा रह चुके हैं, लेकिन बाद में उन्होंने वार्ता का विरोध शुरू कर दिया। आरोप है कि उन्होंने पिछले महीने समझौते पर हस्ताक्षर होने से पहले उसका मसौदा मीडिया में लीक कर दिया था, ताकि समझौता रुक सके। ईरान में 14 जुलाई को संसद का विशेष सत्र बुलाया गया था। विशेषज्ञ बोले- सरकार कट्टरपंथियों का असर कम करना चाहती है एक्सपर्ट्स का मानना है कि ईरान की मौजूदा सरकार अब इन कट्टरपंथी गुटों का प्रभाव कम करने की कोशिश कर रही है। हामिदरेजा अजीजी ने CNN से कहा, “हम देख रहे हैं कि गालिबाफ इन कट्टरपंथी नेताओं को धीरे-धीरे किनारे कर रहे हैं। ये लोग अब व्यवस्था के लिए बोझ बन चुके हैं और देश में अस्थिरता बढ़ने के साथ अपनी आपसी लड़ाई भी खुलकर सामने ला रहे हैं।” हालांकि इन कट्टरपंथियों की संख्या ज्यादा नहीं है, लेकिन संसद और सरकारी न्यूज एजेंसीज आईआरआईबी (IRIB) जैसे कई प्रभावशाली संस्थानों में उनकी मजबूत पकड़
राजकुमार राव की श्रीकांत को बेस्ट फिल्म का नेशनल अवॉर्ड:कार्तिक आर्यन बेस्ट एक्टर, यामी गौतम बेस्ट एक्ट्रेस, 72वें नेशनल अवॉर्ड का एलान

शनिवार को 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों फिल्म ‘श्रीकांत’ सर्वश्रेष्ठ हिंदी फिल्म पुरस्कार मिला है। आर्टिकल 370 के लिए यामी गौतम को लीडिंग रोल में बेस्ट एक्ट्रेस का पुरस्कार मिला। वहीं, ब्रमायुगम के लिए ममूटी और चंदू चैंपियन के लिए कार्तिक आर्यन को संयुक्त रूप से लीडिंग रोल में बेस्ट एक्टर का पुरस्कार दिया गया। घोषित विजेताओं में तमिल फिल्म ‘रायन’ को सर्वश्रेष्ठ तमिल फिल्म, ‘कमेटी कुर्रोल्लू’ को सर्वश्रेष्ठ तेलुगु फिल्म, ‘लाहरी’ को सर्वश्रेष्ठ ओड़िया फिल्म, ‘मुक्काम पोस्ट बॉम्बिलवाड़ी’ को सर्वश्रेष्ठ मराठी फिल्म और ‘सुनीता’ को सर्वश्रेष्ठ मणिपुरी फिल्म का पुरस्कार मिला। ‘कैप्टन मिलर’ और ‘मेय्याझगन’ को स्पेशल मेंशन से सम्मानित किया गया। गैर-फीचर फिल्मों के विजेता गैर-फीचर फिल्मों की श्रेणी में ‘भंगार (ऑब्सोलीट)’ को सर्वश्रेष्ठ गैर-फीचर फिल्म चुना गया। हिंदी फिल्म ‘मैं निदा’ को सर्वश्रेष्ठ कला एवं संस्कृति फिल्म का पुरस्कार मिला, जबकि ‘हमसफर’ को सर्वश्रेष्ठ शॉर्ट फिल्म का सम्मान दिया गया। (खबर अपडेट की जा रही है)
NEET UG 2026 Re-Exam Result Controversy

Hindi News Career NEET UG 2026 Re Exam Result Controversy | Marks Change Issue & Demand 5 मिनट पहले कॉपी लिंक नीट यूजी 2026 (री-एग्जाम) का रिजल्ट जारी होने के बाद एक ओर जहां स्टूडेंट नीट के ऑफिशियल पोर्टल पर अपने मार्क्स बार-बार बदलने की वजह से परेशान हैं। वहीं 71 साल के अशोक बाहरा जैसे लोग भी है जिन्होंने इस साल नीट एग्जाम दिया। फिर री नीट भी दिया। वे नीट एग्जाम में सीनियर सिटीजन के लिए 1% आरक्षण की मांग कर रहे हैं। अपनी मांगों को लेकर उन्होंने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। आर्या ने नीट रिजल्ट पर उठाए सवाल कानपुर की छात्रा आर्या सिंह ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा जारी नीट के रिजल्ट पर गंभीर सवाल उठाए हैं। आर्या का आरोप है कि उनकी ओएमआर (OMR) शीट के मिलान के हिसाब से जहां उनके 609 नंबर बन रहे थे, वहीं NTA की वेबसाइट पर उनका रिजल्ट देखने के दौरान महज दो घंटे के भीतर दो अलग-अलग स्कोर दिखाई दिए। परेशान छात्रा ने सबूत के साथ शिक्षा मंत्री और NTA को मेल भेजकर जांच की मांग की है। 13 तारीख की रात को जब NTA की ऑफिशियल वेबसाइट पर उनकी OMR शीट आई, तो उसमें प्रश्न नंबरों का सीक्वेंस (क्रम) गलत था। हालांकि, जब उन्होंने अपने प्रश्नों का मिलान किया तो उनके 609 नंबर बन रहे थे। इसके बाद आर्या ने तुरंत NTA के चैलेंज पोर्टल पर इस सीक्वेंस की शिकायत की। शिकायत के जवाब में NTA ने अपनी ऑफिशियल वेबसाइट पर अपडेटेड OMR शीट भेजी, जिसमें क्वेश्चन नंबर का सीक्वेंस तो सही कर दिया गया, लेकिन स्कोर 609 ही रहा। आर्या का सवाल है कि एक ही छात्र के कुछ घंटों के अंदर दो अलग-अलग रिजल्ट कैसे जारी हो सकते हैं। फिलहाल NTA की वेबसाइट पर उनका स्कोर 167 अंक दिख रहा है। इसी आधार पर उनकी ऑल इंडिया रैंक 12,52,036 और कैटेगरी रैंक 3,67,585 दिखाई जा रही है। एनटीए और शिक्षामंत्री को भेजी शिकायत रिजल्ट में सामने आए इस अंतर के बाद आर्या ने अपने पास मौजूद स्क्रीनशॉट, OMR शीट और अन्य डॉक्यूमेंट्स को जमा किया। इसे आर्या ने NTA तथा केंद्रीय शिक्षा मंत्री को ईमेल के जरिए भेजा। आर्या ने मांग की है कि उनके मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और अगर कोई तकनीकी गलती हुई है तो उसे जल्द से जल्द सुधारा जाए। पिछले साल भी आई थी दिक्कत आर्या ने बताया कि यह उनका दूसरा प्रयास थ। इससे पहले उन्होंने वर्ष 2025 में भी नीट परीक्षा दी थी। उनका कहना है कि उस समय भी उन्हें रिजल्ट से जुड़ी कुछ दिक्कतों का सामना करना पड़ा था, लेकिन पर्याप्त डॉक्यूमेंट्स और सबूत नहीं होने की वजह से वह शिकायत दर्ज नहीं करा सकी थीं। इस बार आर्या ने सभी जरूरी डॉक्यूमेंट्स और स्क्रीनशॉट सुरक्षित रखे हैं। उनका कहना है कि अगर उनकी शिकायत पर कार्रवाई नहीं होती है, तो वह इस मामले को राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री कार्यालय तक भी लेकर जाएंगी। अब आर्या NTA की ओर से आने वाले जवाब और कार्रवाई का इंतजार कर रही हैं। 70 साल की उम्र में बनना चाहते हैं डॉक्टर 70 वर्षीय अशोक बहरा डॉक्टर बनने का सपना पूरा करने में जुटे हैं। NEET UG 2026 के सबसे उम्रदराज उम्मीदवार के रूप में अशोक बहरा को जाना जा रहा है। वे अब मेडिकल कॉलेजों में सीनियर सिटिजन के लिए आरक्षण की मांग को लेकर कोर्ट पहुंच गए हैं। उनका कहना है कि अगर सीनियर सिटीजन को मेडिकल शिक्षा हासिल करने का अधिकार है तो उन्हें एडमिशन में भी उचित अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने मेडिकल कॉलेजों में योग्य वरिष्ठ नागरिकों के लिए 1% आरक्षण की मांग करते हुए 13 जुलाई को लखनऊ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। इस पर जल्द सुनवाई होने की संभावना है। सीनियर सिटीजन के लिए आरक्षण पर कोर्ट पहुंचे अशोक बहरा ने अपनी याचिका में कहा है कि NEET UG में दिव्यांग, स्वतंत्रता सेनानियों, पूर्व सैनिकों और अन्य विशेष वर्गों को आरक्षण का लाभ मिलता है लेकिन सीनियर सिटिजन के लिए ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है। उनका कहना है कि उम्र के इस पड़ाव पर भी यदि कोई व्यक्ति मेडिकल शिक्षा हासिल करना चाहता है और परीक्षा पास करने की क्षमता रखता है तो उसे भी समान अवसर मिलना चाहिए। उनकी मांग पर सकारात्मक फैसला नहीं हुआ मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अशोक बहरा ने इस मांग को लेकर 5 मई और 26 जून 2026 को केंद्र सरकार को आवेदन भी भेजे थे हालांकि उनकी मांग पर कोई सकारात्मक फैसला नहीं हुआ। इसके बाद उन्होंने कानूनी रास्ता अपनाने का फैसला किया। याचिका में उन्होंने केंद्र सरकार की मौजूदा नीति को मनमाना और तर्कहीन बताते हुए कहा है कि यह समानता और न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है। याचिका में अशोक बहरा ने हाईकोर्ट से अनुरोध किया है कि केंद्र सरकार को निर्देश दिया जाए कि वह सीनियर सिटिजन के लिए MBBS एडमिशन में आरक्षण या अलग कोटा देने पर विचार करे और इस संबंध में उचित नीति तैयार करे। पत्नी समेत परिवार में करीब 20 डॉक्टर अशोक बहरा का पूरा परिवार चिकित्सा क्षेत्र से जुड़ा हुआ है. उनकी पत्नी डॉ.मंजू बहरा एक अनुभवी स्त्री रोग विशेषज्ञ हैं। इसके अलावा परिवार में करीब 20 डॉक्टर हैं जो कई वर्षों से चिकित्सा सेवा दे रहे हैं। बहरा कहते हैं कि पत्नी से उन्हें हमेशा प्रेरणा मिली। डॉक्टरों के बीच रहते हुए उनका मेडिकल क्षेत्र के प्रति लगाव और मजबूत होता गया। 1974 में पहली बार दी थी मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम अशोक बहरा ने बताया कि उन्होंने पहली बार 1974 में मेडिकल प्रवेश परीक्षा दी थी। लेकिन वह सफल नहीं हो पाए। इसके बाद उन्होंने 2023 में दोबारा कोशिश की लेकिन परीक्षा केंद्र देर से पहुंचने के कारण उन्हें परीक्षा देने की अनुमति नहीं मिली7 करीब तीन साल बाद उन्होंने फिर हिम्मत जुटाई और 2026 में NEET UG परीक्षा दी। ये खबर भी पढ़ें IIT कानपुर स्टूडेंट ने एक दिन में 77 करोड़ कमाए:दो दोस्तों के साथ मिलकर खड़ा किया अपना स्टार्टअप, कंपनी की वैल्यू 415 करोड़ कम उम्र में करोड़ों की कमाई करने वाले युवाओं में सिद्धार्थ सक्सेना का नाम शामिल हो गया है। उन्होंने एक ही दिन में लगभग 8 मिलियन








