Dr T Srinivas Kumar Appointed Earth Sciences Secretary

Hindi News Career Dr T Srinivas Kumar Appointed Earth Sciences Secretary | Vikram Rocket Launch 3 मिनट पहले कॉपी लिंक आज के प्रमुख करेंट अफेयर्स, जो सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स के लिए जरूरी हैं- नेशनल (NATIONAL) आज प्राइवेट ऑर्बिटल-क्लास रॉकेट विक्रम-1 की पहली टेस्टिंग होगी 18 जुलाई को भारत की प्राइवेट स्पेस कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस अपने पहले ऑर्बिटल-क्लास रॉकेट विक्रम-1 की पहली टेस्टिंग करेगी। स्काईरूट एयरोस्पेस का ये मिशन आगमन के नाम से ऑपरेट किया जा रहा है। इसकी लॉन्चिंग श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष सेंटर से की जाएगी। ये रॉकेट छोटे उपग्रहों को पृथ्वी की कक्षा में स्थापित करेगा। इस मिशन में कई पेलोड ले जाए जाने की उम्मीद है। अपनी पहली टेस्ट फ्लाइट के दौरान, विक्रम-1 60 डिग्री के झुकाव पर 450 किलोमीटर की कक्षा (ऑर्बिट) तक पहुंचेगा। विक्रम-1 कॉस्मोसर्व का मकसद ऑर्बिट में दुनिया के पहले ‘सॉफ्ट रोबोटिक कैप्चर सिस्टम’ को टेस्ट करना है। इस टेक्नोलॉजी को फ्लेक्सिबल रोबोटिक आर्म्स का इस्तेमाल करके बेकार हो चुके सैटेलाइट और ऑर्बिटल मलबे को कैप्चर करने के लिए डिजाइन किया गया है। इस टेक्नोलॉजी का मकसद स्पेस इंडस्ट्री के सामने मौजूद सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक – स्पेस जंक (अंतरिक्ष का कचरा) की समस्या को हल करना है। कंपनी ने कहा कि ‘मिशन आगमन’ का मकसद उड़ान के दौरान स्काईरूट के ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल और अहम टेक्नोलॉजी की परफॉर्मेंस को परखना भी है। विक्रम-1 स्काईरूट का दूसरा स्पेस मिशन है। इससे पहले 2022 में स्काईरूट विक्रम-S सबऑर्बिटल की भी सफल टेस्टिंग कर चुका है। विक्रम-S भारतीय जमीन से अंतरिक्ष तक पहुंचने वाला पहला प्राइवेट तौर पर बनाया गया रॉकेट था। विक्रम-1 विक्रम-1 को स्काईरूट एयरोस्पेस ने डिजाइन और विकसित किया है। इसका नाम भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक डॉ. विक्रम साराभाई के नाम पर रखा गया है। इस व्हीकल को 350 किलोग्राम तक वजन वाले छोटे सैटेलाइट्स को लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में के लिए डिजाइन किया गया है। ये रॉकेट पूरी तरह से कार्बन-कंपोजिट सामग्री से बना है, जो स्टील से 5 गुना हल्का और अत्यधिक मजबूत है 2. देश में पहली हाइड्रोजन ट्रेन शुरू हुई 17 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाई। इस ट्रेन को हरियाणा के जींद रेलवे स्टेशन से रवाना किया गया। इसका नाम ‘नमो ग्रीन रेल’ रखा गया है। ये पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक पर आधारित एक ‘जीरो पॉल्यूशन’ ट्रेन है। इसमें बिजली बनाने के लिए फ्यूल सेल का उपयोग किया जाता है, जिससे ट्रेन की इलेक्ट्रिक मोटर चलती है। इसके साथ ही भारत, जर्मनी, फ्रांस, स्वीडन और चीन के बाद हाइड्रोजन ट्रेन चलाने वाला दुनिया का पांचवां देश बन गया है। हाइड्रोजन ट्रेन प्रदूषण कम करने और ग्रीन ट्रांसपोर्ट की दिशा में एक बड़ा कदम होगा। ये हाइड्रोजन ट्रेन ‘हाइड्रोजन फॉर हेरिटेज’ योजना का हिस्सा है। इसके तहत देश के अलग-अलग ऐतिहासिक (हेरिटेज) और पहाड़ी रूटों पर ऐसी 35 हाइड्रोजन ट्रेनें चलाने की योजना है। हाइड्रोजन ट्रेन ये ऐसी ट्रेन होती हैं जो डीजल के बजाय हाइड्रोजन ईंधन से चलती है। इसमें बिजली बनाने के लिए फ्यूल सेल का उपयोग किया जाता है, जिससे ट्रेन की इलेक्ट्रिक मोटर चलती है। ट्रेन की छत पर हाइड्रोजन गैस टैंकों में संग्रहित रहती है और फ्यूल सेल में हाइड्रोजन और हवा की ऑक्सीजन की रासायनिक अभिक्रिया होती है। इस प्रक्रिया से बिजली बनती है। यही बिजली ट्रेन के इलेक्ट्रिक मोटरों को चलाती है। पीएम मोदी ने जींद रेलवे स्टेशन पर हाइड्रोजन ट्रेन को सोनीपत के लिए रवाना किया। अपॉइंट (APPOINTMENT) 3. टी श्रीनिवास कुमार पृथ्वी विज्ञान के सचिव अपॉइंट हुए 16 जुलाई को केंद्र सरकार ने सीनियर ओशनोग्राफर डॉ. टी. श्रीनिवास कुमार तुम्मला को अर्थ साइंस मिनिस्ट्री (MoES) का नया सेक्रेटरी अपॉइंट किया। अर्थ साइंस भारत सरकार का एक प्रमुख मंत्रालय है, जो मौसम, जलवायु, महासागर, भूकंप विज्ञान और प्राकृतिक आपदाओं के पूर्वानुमान और अनुसंधान के लिए काम करती है। वे इस पद पर 2 साल तक के लिए होंगे। उन्होंने 1998 में श्रीनाथ ISRO में वैज्ञानिक के तौर पर अपने करियर की शुरुआत की थी। श्रीनाथ ने 2001 में रिमोट सेंसिंग, भू-स्थानिक तकनीक और आपदा प्रबंधन परियोजनाओं पर कार्य किया। श्रीनाथ ने एड्वाइजर सर्विस एंड सैटेलाइट ओशियनग्राफी ग्रुप में भी काम कर चुके हैं। श्रीनाथ महासागर सूचना सेवाओं, समुद्री पूर्वानुमान और उपग्रह आधारित महासागर निगरानी कार्यक्रमों को लीड कर चुके हैं। 2024 में श्रीनाथ UNESCO-IOC के हेड, इंडियन ओसियन सुनामी वार्निंग एंड मिटिगेशन सिस्टम (IOTWMS) पर्थ (ऑस्ट्रेलिया) में सेक्रेट्रेट में काम किया। श्रीनाथ ने एड्वाइजर सर्विस एंड सैटेलाइट ओशियनग्राफी ग्रुप में भी काम कर चुके हैं। 4. पीएम नरेंद्र मोदी ने चंडीगढ़ और पंजाब का दौरा किया 17 जुलाई को पीएम नरेंद्र मोदी ने चंडीगढ़ और पंजाब का दौरा किया। पीएम मोदी ने ₹12,070 करोड़ से ज्यादा के प्रोजेक्टों की नींव रखी और उद्घाटन किया। साथ ही पीएम मोदी जालंधर से देश के 75 अमृत भारत स्कीम वाले रेलवे स्टेशनों का भी उद्घाटन करेंगे। पीएम मोदी में जालंधर कैंट रेलवे स्टेशन का उद्धगहटन किया और अमृतसर-वाराणसी के बीच चलने वाली नई श्रीसंत रविदास एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाई। इंटरनेशनल (INTERNATIONAL) 5. राफेल लड़ाकू विमान डार्विन पहुंचा 17 जुलाई को भारतीय वायुसेना (IAF) की एक टुकड़ी युद्धाभ्यास ‘पिच ब्लैक 2026’ में हिस्सा लेने के लिए ऑस्ट्रेलिया पहुंची है। भारतीय वायुसेना ने चार राफेल और दो C-17 एयरक्राफ्ट के साथ 120 से ज्यादा सैनिकों की टुकड़ी युद्धाभ्यास के लिए ऑस्ट्रेलिया भेजा है। ‘पिच ब्लैक 2026’ युद्धाभ्यास 20 जुलाई से 7 अगस्त तक उत्तरी ऑस्ट्रेलिया में रॉयल ऑस्ट्रेलियन एयर फोर्स (RAAF) के डार्विन, टिंडल और एंबरली बेस पर आयोजित होगा। इस युद्धाभ्यास में 20 देशों के करीब 100 जेट एयरक्राफ्ट और 2,500 से अधिक जवान हिस्सा लेंगे। भारतीय वायुसेना की टुकड़ी इंडो-पैसिफिक और यूरोप के देशों की वायु सेनाओं के साथ मिलकर जटिल हवाई अभ्यास में हिस्सा लेगी। ये दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग बढ़ाने की दिशा में एक और कदम है। जिससे दोनों देशों के बीच आपसी तालमेल और ऑपरेशनल जानकारी बढ़ेगी। अभ्यास ‘पिच ब्लैक 2026’ हमारे सहयोगियों और मित्र देशों के साथ वायुसेना की सबसे बड़ी ट्रेनिंग है। 1983 से डार्विन में आयोजित होने वाला ‘पिच ब्लैक’ अभ्यास RAAF का प्रमुख अंतरराष्ट्रीय हवाई युद्धाभ्यास है। इस अभ्यास में भारत, अमेरिका, जापान,
Rajesh Khanna Interesting Facts; Amitabh Bachchan Anand – Suitcase Gifts

3 मिनट पहले कॉपी लिंक 18 जुलाई 2012 दोपहर में खबर आई, सुपरस्टार राजेश खन्ना, ‘काका बाबू’ अब नहीं रहे। राजेश खन्ना पिछले कुछ दिनों से काफी बीमार थे। फैंस की भीड़ कई दिनों से उनकी सलामती के लिए कार्टर रोड स्थित आशीर्वाद बंगले के बाहर भीड़ लगाकर दुआ कर रहे थे। फिर जैसे ही हर न्यूज चैनल, फेसबुक, ट्विटर में उनकी मौत की खबर आई, जल्द ही आशीर्वाद के सामने मातम मना रहे फैंस का जन सैलाब आ गया। तेज बारिश भी फैंस को रोक नहीं सकी। 5 दशकों के फिल्मी करियर में बनाए गए उनके दोस्त-यार भी जल्द ही घर पहुंचने लगे। अमिताभ बच्चन ने राजेश खन्ना के आखिरी दर्शन किए और उनके घर में रखे सोफे पर जा बैठे, तभी राजेश खन्ना के करीबी उनके पास आकर खड़े हुए और भारी गले, लड़खड़ाती हुई आवाज में कहा- उनके आखिरी शब्द थे, ‘टाइम हो गया है, पैक अप।’ नम आखों के साथ वो शख्स वहां से चला गया। आशीर्वाद बंगले के आसपास की ट्रैफिक व्यवस्था ठप होने लगी। भारी पुलिस फोर्स तैनात किया गया, कई बैरिकेड्स लगाए गए, लेकिन भीड़ पर काबू पाना मुश्किल था। न्यूज चैनलों में राजेश खन्ना की फिल्म आनंद का एक सीन बार-बार चल रहा था, जिसमें उन्होंने कहा था- ‘बाबूमोशाय जिंदगी बड़ी होनी चाहिए, लंबी नहीं।’ फिल्म में जब उन्हें मरते देखने में ही फैंस का कलेजा फटता था, फिर तो आज उनकी असल में मौत हो चुकी थी। अगले दिन 19 जुलाई 2012 को उनका अंतिम संस्कार हुआ। सुबह से ही तेज बारिश हो रही थी। उनके शव वाहन को सफेद फूलों से सजाया गया। भीड़ इस कदर थी कि शव वाहन निकलने की भी जगह नहीं थी। ट्रैफिक कंट्रोल के बाद सुबह 10 बजे उनकी अंतिम यात्रा शुरू हुई। पत्नि डिंपल कपाड़िया, बेटी डिंपल, दामाद अक्षय कुमार, नातिन आरव और छोटी बेटी रिंकी उनकी शव पेटी को हाथ लगाए खड़ी रहीं। भीड़ में चीख-पुकार मची थी, लोग फूल फेंक रहे थे, जैसे-जैसे वाहन आगे बढ़ता, वैसे-वैसे भीड़ भी बढ़ती जाती। मुंबई ने शायद इससे पहले ऐसी अंतिम यात्रा कभी नहीं देखी थी। लोकल ट्रेन के स्टेशनों, फ्लायओवर्स, खंबो तक में लोग चढ़कर, एक अंतिम दर्शन चाहते थे। दूर-दूर के शहरों से लोग पहुंचे। फैंस की संख्या करीब 9 लाख थी। कई जगह लाठीचार्ज हुआ। सड़कों पर चप्पलें बिखरी पड़ी थीं। पवनहंस श्मशान भूमि में राजेश खन्ना का अंतिम संस्कार हुआ, नातिन आरव ने पिता अक्षय की मदद से मुखाग्नि दी। राजेश खन्ना पिछले कुछ दिनों से काफी बीमार चल रहे थे। इसके बावजूद वो अभिनय करना चाहते थे। वो कैमरा और लाइट के बीच जीना चाहते थे, जबकि कैंसर के इलाज के बीच ही हेयरलाइन फ्रैक्चर के चलते वो ठीक तरह चल नहीं पाते थे। अप्रैल 2012 में जब डेट्स की बात हुई, तो सवाल उठा कि क्या वो इस बिगड़ती हेल्थ कंडीशन में बैंग्लोर में शूट कर पाएंगे। राजेश खन्ना डॉक्टर्स की सलाह के विरुद्ध शूट करने पर अड़े थे। शूटिंग से ठीक पहले उन्हें नानावटी अस्पताल में भर्ती करवाया गया, हैवी पेनकिलर्स लेते हुए भी वो शूटिंग की लाइनें याद करते थे। डिस्चार्ज मिलते ही वो घर जाने की बजाए वह टीम के साथ सीधे एयरपोर्ट रवाना हुए और बैंग्लोर पहुंच गए। टक्सीडो पहने राजेश खन्ना ने मेकअप करवाया और बार-बार शीशे में खुदको देखते रहे। जैसे ही डायरेक्टर आर.बाल्कि ने कहा लाइट, कैमरा, एक्शन, राजेश खन्ना ने लाइनें बोलना शुरू कीं- ‘फैंस क्या होते हैं, मुझसे पूछो, प्यार को वो तूफान, मोहब्बत की वो आंधी, वो जज्बा, वो जुनून, हवा बदल सकती है, लेकिन मेरे फैंस हमेशा मेरे रहेंगे। बाबूमोशाय, मेरे फैंस मुझसे कोई नहीं छीन सकता। (बैकग्राउंड में उनकी फिल्म कटी पतंग का गाना ये शाम मस्तानी बज रहा था)।’ शाम 7 बजे जैसे ही डायरेक्टर ने चिल्लाया- पैकअप, हर कोई खड़ा होकर राजेश खन्ना के लिए तालियां बजाने लगा। आहिस्ता चलते हुए वह व्हीलचेयर पर बैठे और टीम से वैनिटी की ओर चलने को कहा, कुछ दूर जाकर उन्होंने एक नजर मुड़कर सेट देखा और फिर मुड़ गए। कुछ दिनों बाद अचानक तबीयत बिगड़ने से उन्हें लीलावती अस्पताल में भर्ती करवाया गया। वो ट्विंकल और रिंकी के साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताना चाहते थे। ट्विंकल उस समय प्रेग्नेंट थीं, इसके बावजूद वो पिता के साथ ही रहतीं। इसी बीच 16 जून को खबर आई कि उनकी तबीयत नाजुक बनी हुई है। उसी दिन सोशल मीडिया पर उनके निधन की खबर चर्चा में आ गई। फैंस की भीड़ अस्पताल और आशीर्वाद बंगले के बाहर जमा होने लगी जल्द ही इन अफवाहों पर विराम लगाया गया। दूसरी तरफ अस्पताल में राजेश खन्ना, बार-बार होश खो रहे थे। परिवार पूरे समय उनके साथ था। 20 जून को उन्हें अच्छी तरह होश आया। उन्होंने परिवार को देखा और धीमी आवाज में कहा- ‘मैं घर जाना चाहता हूं, अपने कमरे में रहना है। यहां नहीं रह सकता।’ घर वापसी की तैयारी हुई और आशीर्वाद बंगले लौटते हुए कई फैंस और मीडिया के कैमरे उनके लिए रास्ते भर लगे रहे। अगले दिन 21 जून को राजेश खन्ना ने परिवार से कहा कि वो फैंस को देखना चाहते हैं। काला चश्मा, सफेद कुर्ता-पजामा और शॉल औढ़े राजेश खन्ना छत पर आए, तो झलक मिलते ही फैंस खुशी से चिल्ला पड़े। डिंपल, अक्षय और करीबी दोस्त भूूपेश रसीन साथ खड़े थे। विक्ट्री साइन के साथ राजेश खन्ना ने फैंस से मुलाकात की। अगले दिन हर अखबार में वही तस्वीर थी, लेकिन इसी दिन राजेश खन्ना की तबीयत काफी बिगड़ गई। उन्होंने खाना छोड़ दिया और अगले दिन 23 जून को उन्हें दोबारा लीलावती अस्पताल में भर्ती करवाया गया। कुछ हफ्ते अस्पताल में ही बीते। राजेश खन्ना बार-बार घर जाने की जिद करते, लेकिन परिवार इसके खिलाफ था। एक दिन राजेश खन्ना ने कहा, मैं अस्पताल में नहीं मरना चाहता। परिवार को झुकना पड़ा। 17 जुलाई को उन्हें आशीर्वाद बंगले ले जाया गया। अगले दिन 18 जुलाई को अपने कमरे में लेटे राजेश खन्ना ने कहा, टाइम हो गया है, पैक-अप। कुछ देर बाद उनकी सांसें रुक गईं। राजेश खन्ना को कुछ महीनों पहले ही मौत का आभास हो गया था। 29 दिसंबर को आने वाले उनके जन्मदिन के लिए जब 2011 में
अक्षय को OMG-2 से दूर रखना चाहते थे परेश रावल:फिल्म का क्रेडिट मांगने पर भड़के मेकर्स; बोले- फिल्म की कहानी चुराना चाहते थे परेश

फिल्म ‘ओएमजी-2’ के निर्माता अश्विन वर्दे ने अभिनेता परेश रावल के आरोपों पर चुप्पी तोड़ी है। अश्विन ने परेश के दावों को पूरी तरह गलत और निराधार बताया है। हाल ही में परेश रावल ने एक पॉडकास्ट में आरोप लगाया था कि ओह माय गॉड 2 उन्होंने लिखी थी, लेकिन उन्हें इसका क्रेडिट नहीं दिया गया। इस पर पलटवार करते हुए अश्विन ने कहा कि परेश रावल इस स्क्रिप्ट को किसी दूसरे नाम से बनाना चाहते थे और वे अक्षय कुमार को इस प्रोजेक्ट से दूर रखना चाहते थे। अश्विन ने पूरी कहानी को सबके सामने रखा है। ‘फिल्म का नाम बदलकर बनाना चाहते थे परेश’ अश्विन वर्दे के मुताबिक, फिल्म ‘ओएमजी’ के कॉपीराइट और बौद्धिक संपदा (आईपी) अधिकार केवल अक्षय कुमार के पास हैं। लेखक अमित राय ने ‘ओएमजी-2’ की मूल स्क्रिप्ट लिखी थी। परेश रावल इस स्क्रिप्ट को किसी दूसरे नाम से बनाना चाहते थे ताकि अक्षय कुमार को इस प्रोजेक्ट से पूरी तरह दूर रखा जा सके। अश्विन ने परेश की इस कोशिश को सीधे-सीधे स्क्रिप्ट चोरी और अनैतिक काम बताया है, क्योंकि वे बिना अक्षय कुमार की मंजूरी के उनकी फिल्म के फॉर्मेट का इस्तेमाल करना चाहते थे। फिल्म इंडस्ट्री के अन्य अभिनेताओं ने भी इसमें काम करने से इसीलिए मना कर दिया था क्योंकि वे जानते थे कि यह अक्षय कुमार की फिल्म है और उनकी अनुमति के बिना इसे बनाना गलत होगा। अक्षय कुमार को दूर रखने की कोशिश की इस चोरी को रोकने और स्क्रिप्ट को सुरक्षित करने के लिए अश्विन वर्दे की कंपनी ने अमित राय से इसके अधिकार खरीद लिए। इसके बाद जब अश्विन ने परेश रावल से कहा कि नैतिकता के नाते वे यह स्क्रिप्ट सबसे पहले अक्षय कुमार को दिखाएंगे, तो परेश अड़ गए कि फिल्म ‘ओएमजी’ के नाम से नहीं बननी चाहिए। अक्षय कुमार और अश्विन के काफी समझाने के बाद भी परेश रावल फिल्म में काम करने को तैयार नहीं हुए और वे फिल्म से अलग हो गए। इसके बावजूद, फिल्म रिलीज होने पर परेश रावल को बिना किसी योगदान के उनकी पत्नी और बिजनेस पार्टनर के नाम पर निर्माता का क्रेडिट दिया गया और उनकी पूरी फीस भी दी गई। अश्विन ने साफ किया कि उन्होंने परेश के साथ कोई धोखा नहीं किया, बल्कि उन्हें एक अनैतिक काम करने से रोका था। फिल्म के डायरेक्टर भी परेश पर भड़के ओएमजी-2 के डायरेक्टर और लेखक अमित राय ने भी परेश रावल के दावों को पूरी तरह खारिज किया है। अमित ने साफ किया कि फिल्म की कहानी, स्क्रिप्ट, कॉन्सेप्ट और किरदारों के डिजाइन से लेकर हर एक चीज उनकी खुद की लिखी हुई है। यह पूरा काम स्क्रीनराइटर्स एसोसिएशन में उनके नाम पर रजिस्टर्ड है और इसके हर ड्राफ्ट पर एसोसिएशन की मुहर लगी है। उन्होंने परेश रावल के करियर पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनके पूरे सफर में ऐसी कोई फिल्म नहीं है जिसे उन्होंने खुद सोचकर किसी को बनाने के लिए दिया हो। अमित ने हैरानी जताते हुए कहा कि फिल्म रिलीज होने के तीन साल बाद परेश रावल गलत इरादे से ये बातें क्यों कह रहे हैं, जबकि फिल्म की शुरुआत में ही उन्हें और उनके पार्टनर को प्रोड्यूसर का क्रेडिट साफ तौर पर दिया गया है। OMG-2 मैंने लिखी, क्रेडिट तक नहीं दिया अक्षय कुमार से विवाद के बीच परेश रावल ने दावा किया है कि उन्होंने ही फिल्म ओह माय गॉड 2 की स्क्रिप्ट लिखी थी, लेकिन बाद में इसे बदल दिया गया और उन्हें क्रेडिट भी नहीं दिया गया। विक्की लालवानी ने इंटरव्यू में परेश रावल से ओह माय गॉड 2 फिल्म न करने की वजह पूछी, तो उन्होंने कहा- ‘मैंने अमित राय (डायरेक्टर) के साथ रोड टू संगम की थी। मैं उनका प्रशंसक हूं। तो मैंने उनसे पूछा कि क्या कुछ और करने का सोचा है। मैंने उनसे कहा कि मेरे पास एक आइडिया है मिलकर करते हैं।’ ‘आइडिया था कि एक लड़का पकड़ा गया है, मास्टरबेट करते हुए, उसका वीडियो वायरल हुआ है, मजाक बन रहा है। उसके पिता खजुराहो का टूरिस्ट गाइड हैं। लेकिन अमित ने पिता को महाकाल का पुजारी भी दिखाने का सोचा। मैंने सेक्सोलॉजिस्ट फ्रेंड से 5-5 घंटे बैठकर इस पर चर्चा किया, जिससे ये आइडिया वल्गर न दिखे।’ सलमान-अजय को करना चाहते थे कास्ट आगे परेश रावल ने कहा, ‘फिर हमने एक बाइकर या सामान बेचने वाले शख्स का ऐसा कैरेक्टर जोड़ा, जो बीच-बीच में 4-5 सीन के लिए आएगा और नॉलेज देकर चला जाएगा। मैं अजय देवगन के पास गया बाइकर के रोल के लिए, सलमान खान के पास भी गया। अगर मैं अक्षय के पास जाता तो यही लगता कि ये ओह माय गॉड 2 बन रही है। विपुल शाह के पास भी गया, मीटिंग भी हुई। बाद में मेरे पास अमित का कॉल आया कि थोड़ी गड़बड़ हो गई है। मैंने पूछा ’क्या हुआ?’, तो उसने कहा, ‘वो लोग इस फिल्म में दिलचस्पी ले रहे हैं।’ जब पूछा गया कौन, तो उन्होंने कहा- ‘अक्षय को फिल्म करनी है।’ आगे परेश रावल ने कहा, ‘अमित ने अनजाने में या बेवकूफी में इस स्क्रिप्ट के ऊपर ओएमजी 2 लिख दिया था। जबकि हमें ओहएमजी जैसा आउट ऑफ द बॉक्स आइडिया करना था, ये ओएमजी 2 नहीं थी। उन लोगों ने अमित से स्क्रिप्ट ले ली। मैंने अमित से कहा कि ये फ्रैंचाइजी नहीं है। लेकिन मैं तुमसे झगड़ा नहीं कर सकता।’ अक्षय चाहते थे फिल्म करें परेश रावल परेश रावल ने बताया है कि अक्षय उनके पास आए और फिल्म करने के लिए कहा, लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया। इस पर परेश रावल ने कहा- ‘अगर ये सीक्वल होती, तो मैं फिल्म जरूर करता, दबाकर पैसे लेता, स्टोरी का क्रेडिट भी लेता। दुख की बात है कि मुझे तो स्टोरी का क्रेडिट भी नहीं मिला। मैं कहानीकार नहीं हूं, लेकिन कहानी का आइडिया परेश का था, ऐसा क्रेडिट भी नहीं दिया।’ परेश ने आगे बताया कि अक्षय कुमार जानते थे कि कहानी उन्होंने लिखी। करण जौहर को भी पता है, सोमेन मिश्रा, अश्विन वर्दे को भी पता है। सलमान खान को भी पता था। अमित राय ने ही डायरेक्ट की ओएमजी 2 परेश रावल के फिल्म से हटने के बाद उनकी
अक्षय को OMG-2 से दूर रखना चाहते थे परेश रावल:फिल्म का क्रेडिट मांगने पर भड़के मेकर्स; बोले- फिल्म की कहानी चुराना चाहते थे परेश

फिल्म ‘ओएमजी-2’ के निर्माता अश्विन वर्दे ने अभिनेता परेश रावल के आरोपों पर चुप्पी तोड़ी है। अश्विन ने परेश के दावों को पूरी तरह गलत और निराधार बताया है। हाल ही में परेश रावल ने एक पॉडकास्ट में आरोप लगाया था कि ओह माय गॉड 2 उन्होंने लिखी थी, लेकिन उन्हें इसका क्रेडिट नहीं दिया गया। इस पर पलटवार करते हुए अश्विन ने कहा कि परेश रावल इस स्क्रिप्ट को किसी दूसरे नाम से बनाना चाहते थे और वे अक्षय कुमार को इस प्रोजेक्ट से दूर रखना चाहते थे। अश्विन ने पूरी कहानी को सबके सामने रखा है। ‘फिल्म का नाम बदलकर बनाना चाहते थे परेश’ अश्विन वर्दे के मुताबिक, फिल्म ‘ओएमजी’ के कॉपीराइट और बौद्धिक संपदा (आईपी) अधिकार केवल अक्षय कुमार के पास हैं। लेखक अमित राय ने ‘ओएमजी-2’ की मूल स्क्रिप्ट लिखी थी। परेश रावल इस स्क्रिप्ट को किसी दूसरे नाम से बनाना चाहते थे ताकि अक्षय कुमार को इस प्रोजेक्ट से पूरी तरह दूर रखा जा सके। अश्विन ने परेश की इस कोशिश को सीधे-सीधे स्क्रिप्ट चोरी और अनैतिक काम बताया है, क्योंकि वे बिना अक्षय कुमार की मंजूरी के उनकी फिल्म के फॉर्मेट का इस्तेमाल करना चाहते थे। फिल्म इंडस्ट्री के अन्य अभिनेताओं ने भी इसमें काम करने से इसीलिए मना कर दिया था क्योंकि वे जानते थे कि यह अक्षय कुमार की फिल्म है और उनकी अनुमति के बिना इसे बनाना गलत होगा। अक्षय कुमार को दूर रखने की कोशिश की इस चोरी को रोकने और स्क्रिप्ट को सुरक्षित करने के लिए अश्विन वर्दे की कंपनी ने अमित राय से इसके अधिकार खरीद लिए। इसके बाद जब अश्विन ने परेश रावल से कहा कि नैतिकता के नाते वे यह स्क्रिप्ट सबसे पहले अक्षय कुमार को दिखाएंगे, तो परेश अड़ गए कि फिल्म ‘ओएमजी’ के नाम से नहीं बननी चाहिए। अक्षय कुमार और अश्विन के काफी समझाने के बाद भी परेश रावल फिल्म में काम करने को तैयार नहीं हुए और वे फिल्म से अलग हो गए। इसके बावजूद, फिल्म रिलीज होने पर परेश रावल को बिना किसी योगदान के उनकी पत्नी और बिजनेस पार्टनर के नाम पर निर्माता का क्रेडिट दिया गया और उनकी पूरी फीस भी दी गई। अश्विन ने साफ किया कि उन्होंने परेश के साथ कोई धोखा नहीं किया, बल्कि उन्हें एक अनैतिक काम करने से रोका था। फिल्म के डायरेक्टर भी परेश पर भड़के ओएमजी-2 के डायरेक्टर और लेखक अमित राय ने भी परेश रावल के दावों को पूरी तरह खारिज किया है। अमित ने साफ किया कि फिल्म की कहानी, स्क्रिप्ट, कॉन्सेप्ट और किरदारों के डिजाइन से लेकर हर एक चीज उनकी खुद की लिखी हुई है। यह पूरा काम स्क्रीनराइटर्स एसोसिएशन में उनके नाम पर रजिस्टर्ड है और इसके हर ड्राफ्ट पर एसोसिएशन की मुहर लगी है। उन्होंने परेश रावल के करियर पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनके पूरे सफर में ऐसी कोई फिल्म नहीं है जिसे उन्होंने खुद सोचकर किसी को बनाने के लिए दिया हो। अमित ने हैरानी जताते हुए कहा कि फिल्म रिलीज होने के तीन साल बाद परेश रावल गलत इरादे से ये बातें क्यों कह रहे हैं, जबकि फिल्म की शुरुआत में ही उन्हें और उनके पार्टनर को प्रोड्यूसर का क्रेडिट साफ तौर पर दिया गया है। OMG-2 मैंने लिखी, क्रेडिट तक नहीं दिया अक्षय कुमार से विवाद के बीच परेश रावल ने दावा किया है कि उन्होंने ही फिल्म ओह माय गॉड 2 की स्क्रिप्ट लिखी थी, लेकिन बाद में इसे बदल दिया गया और उन्हें क्रेडिट भी नहीं दिया गया। विक्की लालवानी ने इंटरव्यू में परेश रावल से ओह माय गॉड 2 फिल्म न करने की वजह पूछी, तो उन्होंने कहा- ‘मैंने अमित राय (डायरेक्टर) के साथ रोड टू संगम की थी। मैं उनका प्रशंसक हूं। तो मैंने उनसे पूछा कि क्या कुछ और करने का सोचा है। मैंने उनसे कहा कि मेरे पास एक आइडिया है मिलकर करते हैं।’ ‘आइडिया था कि एक लड़का पकड़ा गया है, मास्टरबेट करते हुए, उसका वीडियो वायरल हुआ है, मजाक बन रहा है। उसके पिता खजुराहो का टूरिस्ट गाइड हैं। लेकिन अमित ने पिता को महाकाल का पुजारी भी दिखाने का सोचा। मैंने सेक्सोलॉजिस्ट फ्रेंड से 5-5 घंटे बैठकर इस पर चर्चा किया, जिससे ये आइडिया वल्गर न दिखे।’ सलमान-अजय को करना चाहते थे कास्ट आगे परेश रावल ने कहा, ‘फिर हमने एक बाइकर या सामान बेचने वाले शख्स का ऐसा कैरेक्टर जोड़ा, जो बीच-बीच में 4-5 सीन के लिए आएगा और नॉलेज देकर चला जाएगा। मैं अजय देवगन के पास गया बाइकर के रोल के लिए, सलमान खान के पास भी गया। अगर मैं अक्षय के पास जाता तो यही लगता कि ये ओह माय गॉड 2 बन रही है। विपुल शाह के पास भी गया, मीटिंग भी हुई। बाद में मेरे पास अमित का कॉल आया कि थोड़ी गड़बड़ हो गई है। मैंने पूछा ’क्या हुआ?’, तो उसने कहा, ‘वो लोग इस फिल्म में दिलचस्पी ले रहे हैं।’ जब पूछा गया कौन, तो उन्होंने कहा- ‘अक्षय को फिल्म करनी है।’ आगे परेश रावल ने कहा, ‘अमित ने अनजाने में या बेवकूफी में इस स्क्रिप्ट के ऊपर ओएमजी 2 लिख दिया था। जबकि हमें ओहएमजी जैसा आउट ऑफ द बॉक्स आइडिया करना था, ये ओएमजी 2 नहीं थी। उन लोगों ने अमित से स्क्रिप्ट ले ली। मैंने अमित से कहा कि ये फ्रैंचाइजी नहीं है। लेकिन मैं तुमसे झगड़ा नहीं कर सकता।’ अक्षय चाहते थे फिल्म करें परेश रावल परेश रावल ने बताया है कि अक्षय उनके पास आए और फिल्म करने के लिए कहा, लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया। इस पर परेश रावल ने कहा- ‘अगर ये सीक्वल होती, तो मैं फिल्म जरूर करता, दबाकर पैसे लेता, स्टोरी का क्रेडिट भी लेता। दुख की बात है कि मुझे तो स्टोरी का क्रेडिट भी नहीं मिला। मैं कहानीकार नहीं हूं, लेकिन कहानी का आइडिया परेश का था, ऐसा क्रेडिट भी नहीं दिया।’ परेश ने आगे बताया कि अक्षय कुमार जानते थे कि कहानी उन्होंने लिखी। करण जौहर को भी पता है, सोमेन मिश्रा, अश्विन वर्दे को भी पता है। सलमान खान को भी पता था। अमित राय ने ही डायरेक्ट की ओएमजी 2 परेश रावल के फिल्म से हटने के बाद उनकी
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1 घंटे पहले कॉपी लिंक 18 जुलाई 2012 दोपहर में खबर आई, सुपरस्टार राजेश खन्ना, ‘काका बाबू’ अब नहीं रहे। राजेश खन्ना पिछले कुछ दिनों से काफी बीमार थे। फैंस की भीड़ कई दिनों से उनकी सलामती के लिए कार्टर रोड स्थित आशीर्वाद बंगले के बाहर भीड़ लगाकर दुआ कर रहे थे। फिर जैसे ही हर न्यूज चैनल, फेसबुक, ट्विटर में उनकी मौत की खबर आई, जल्द ही आशीर्वाद के सामने मातम मना रहे फैंस का जन सैलाब आ गया। तेज बारिश भी फैंस को रोक नहीं सकी। 5 दशकों के फिल्मी करियर में बनाए गए उनके दोस्त-यार भी जल्द ही घर पहुंचने लगे। अमिताभ बच्चन ने राजेश खन्ना के आखिरी दर्शन किए और उनके घर में रखे सोफे पर जा बैठे, तभी राजेश खन्ना के करीबी उनके पास आकर खड़े हुए और भारी गले, लड़खड़ाती हुई आवाज में कहा- उनके आखिरी शब्द थे, ‘टाइम हो गया है, पैक अप।’ नम आखों के साथ वो शख्स वहां से चला गया। आशीर्वाद बंगले के आसपास की ट्रैफिक व्यवस्था ठप होने लगी। भारी पुलिस फोर्स तैनात किया गया, कई बैरिकेड्स लगाए गए, लेकिन भीड़ पर काबू पाना मुश्किल था। न्यूज चैनलों में राजेश खन्ना की फिल्म आनंद का एक सीन बार-बार चल रहा था, जिसमें उन्होंने कहा था- ‘बाबूमोशाय जिंदगी बड़ी होनी चाहिए, लंबी नहीं।’ फिल्म में जब उन्हें मरते देखने में ही फैंस का कलेजा फटता था, फिर तो आज उनकी असल में मौत हो चुकी थी। अगले दिन 19 जुलाई 2012 को उनका अंतिम संस्कार हुआ। सुबह से ही तेज बारिश हो रही थी। उनके शव वाहन को सफेद फूलों से सजाया गया। भीड़ इस कदर थी कि शव वाहन निकलने की भी जगह नहीं थी। ट्रैफिक कंट्रोल के बाद सुबह 10 बजे उनकी अंतिम यात्रा शुरू हुई। पत्नि डिंपल कपाड़िया, बेटी डिंपल, दामाद अक्षय कुमार, नातिन आरव और छोटी बेटी रिंकी उनकी शव पेटी को हाथ लगाए खड़ी रहीं। भीड़ में चीख-पुकार मची थी, लोग फूल फेंक रहे थे, जैसे-जैसे वाहन आगे बढ़ता, वैसे-वैसे भीड़ भी बढ़ती जाती। मुंबई ने शायद इससे पहले ऐसी अंतिम यात्रा कभी नहीं देखी थी। लोकल ट्रेन के स्टेशनों, फ्लायओवर्स, खंबो तक में लोग चढ़कर, एक अंतिम दर्शन चाहते थे। दूर-दूर के शहरों से लोग पहुंचे। फैंस की संख्या करीब 9 लाख थी। कई जगह लाठीचार्ज हुआ। सड़कों पर चप्पलें बिखरी पड़ी थीं। पवनहंस श्मशान भूमि में राजेश खन्ना का अंतिम संस्कार हुआ, नातिन आरव ने पिता अक्षय की मदद से मुखाग्नि दी। राजेश खन्ना पिछले कुछ दिनों से काफी बीमार चल रहे थे। इसके बावजूद वो अभिनय करना चाहते थे। वो कैमरा और लाइट के बीच जीना चाहते थे, जबकि कैंसर के इलाज के बीच ही हेयरलाइन फ्रैक्चर के चलते वो ठीक तरह चल नहीं पाते थे। अप्रैल 2012 में जब डेट्स की बात हुई, तो सवाल उठा कि क्या वो इस बिगड़ती हेल्थ कंडीशन में बैंग्लोर में शूट कर पाएंगे। राजेश खन्ना डॉक्टर्स की सलाह के विरुद्ध शूट करने पर अड़े थे। शूटिंग से ठीक पहले उन्हें नानावटी अस्पताल में भर्ती करवाया गया, हैवी पेनकिलर्स लेते हुए भी वो शूटिंग की लाइनें याद करते थे। डिस्चार्ज मिलते ही वो घर जाने की बजाए वह टीम के साथ सीधे एयरपोर्ट रवाना हुए और बैंग्लोर पहुंच गए। टक्सीडो पहने राजेश खन्ना ने मेकअप करवाया और बार-बार शीशे में खुदको देखते रहे। जैसे ही डायरेक्टर आर.बाल्कि ने कहा लाइट, कैमरा, एक्शन, राजेश खन्ना ने लाइनें बोलना शुरू कीं- ‘फैंस क्या होते हैं, मुझसे पूछो, प्यार को वो तूफान, मोहब्बत की वो आंधी, वो जज्बा, वो जुनून, हवा बदल सकती है, लेकिन मेरे फैंस हमेशा मेरे रहेंगे। बाबूमोशाय, मेरे फैंस मुझसे कोई नहीं छीन सकता। (बैकग्राउंड में उनकी फिल्म कटी पतंग का गाना ये शाम मस्तानी बज रहा था)।’ शाम 7 बजे जैसे ही डायरेक्टर ने चिल्लाया- पैकअप, हर कोई खड़ा होकर राजेश खन्ना के लिए तालियां बजाने लगा। आहिस्ता चलते हुए वह व्हीलचेयर पर बैठे और टीम से वैनिटी की ओर चलने को कहा, कुछ दूर जाकर उन्होंने एक नजर मुड़कर सेट देखा और फिर मुड़ गए। कुछ दिनों बाद अचानक तबीयत बिगड़ने से उन्हें लीलावती अस्पताल में भर्ती करवाया गया। वो ट्विंकल और रिंकी के साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताना चाहते थे। ट्विंकल उस समय प्रेग्नेंट थीं, इसके बावजूद वो पिता के साथ ही रहतीं। इसी बीच 16 जून को खबर आई कि उनकी तबीयत नाजुक बनी हुई है। उसी दिन सोशल मीडिया पर उनके निधन की खबर चर्चा में आ गई। फैंस की भीड़ अस्पताल और आशीर्वाद बंगले के बाहर जमा होने लगी जल्द ही इन अफवाहों पर विराम लगाया गया। दूसरी तरफ अस्पताल में राजेश खन्ना, बार-बार होश खो रहे थे। परिवार पूरे समय उनके साथ था। 20 जून को उन्हें अच्छी तरह होश आया। उन्होंने परिवार को देखा और धीमी आवाज में कहा- ‘मैं घर जाना चाहता हूं, अपने कमरे में रहना है। यहां नहीं रह सकता।’ घर वापसी की तैयारी हुई और आशीर्वाद बंगले लौटते हुए कई फैंस और मीडिया के कैमरे उनके लिए रास्ते भर लगे रहे। अगले दिन 21 जून को राजेश खन्ना ने परिवार से कहा कि वो फैंस को देखना चाहते हैं। काला चश्मा, सफेद कुर्ता-पजामा और शॉल औढ़े राजेश खन्ना छत पर आए, तो झलक मिलते ही फैंस खुशी से चिल्ला पड़े। डिंपल, अक्षय और करीबी दोस्त भूूपेश रसीन साथ खड़े थे। विक्ट्री साइन के साथ राजेश खन्ना ने फैंस से मुलाकात की। अगले दिन हर अखबार में वही तस्वीर थी, लेकिन इसी दिन राजेश खन्ना की तबीयत काफी बिगड़ गई। उन्होंने खाना छोड़ दिया और अगले दिन 23 जून को उन्हें दोबारा लीलावती अस्पताल में भर्ती करवाया गया। कुछ हफ्ते अस्पताल में ही बीते। राजेश खन्ना बार-बार घर जाने की जिद करते, लेकिन परिवार इसके खिलाफ था। एक दिन राजेश खन्ना ने कहा, मैं अस्पताल में नहीं मरना चाहता। परिवार को झुकना पड़ा। 17 जुलाई को उन्हें आशीर्वाद बंगले ले जाया गया। अगले दिन 18 जुलाई को अपने कमरे में लेटे राजेश खन्ना ने कहा, टाइम हो गया है, पैक-अप। कुछ देर बाद उनकी सांसें रुक गईं। राजेश खन्ना को कुछ महीनों पहले ही मौत का आभास हो गया था। 29 दिसंबर को आने वाले उनके जन्मदिन के लिए जब 2011 में




