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Rajesh Khanna Interesting Facts; Amitabh Bachchan Anand – Suitcase Gifts

Rajesh Khanna Interesting Facts; Amitabh Bachchan Anand - Suitcase Gifts

1 घंटे पहले

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18 जुलाई 2012

दोपहर में खबर आई, सुपरस्टार राजेश खन्ना, ‘काका बाबू’ अब नहीं रहे।

राजेश खन्ना पिछले कुछ दिनों से काफी बीमार थे। फैंस की भीड़ कई दिनों से उनकी सलामती के लिए कार्टर रोड स्थित आशीर्वाद बंगले के बाहर भीड़ लगाकर दुआ कर रहे थे। फिर जैसे ही हर न्यूज चैनल, फेसबुक, ट्विटर में उनकी मौत की खबर आई, जल्द ही आशीर्वाद के सामने मातम मना रहे फैंस का जन सैलाब आ गया।

तेज बारिश भी फैंस को रोक नहीं सकी। 5 दशकों के फिल्मी करियर में बनाए गए उनके दोस्त-यार भी जल्द ही घर पहुंचने लगे।

अमिताभ बच्चन ने राजेश खन्ना के आखिरी दर्शन किए और उनके घर में रखे सोफे पर जा बैठे, तभी राजेश खन्ना के करीबी उनके पास आकर खड़े हुए और भारी गले, लड़खड़ाती हुई आवाज में कहा- उनके आखिरी शब्द थे, ‘टाइम हो गया है, पैक अप।’ नम आखों के साथ वो शख्स वहां से चला गया।

आशीर्वाद बंगले के आसपास की ट्रैफिक व्यवस्था ठप होने लगी। भारी पुलिस फोर्स तैनात किया गया, कई बैरिकेड्स लगाए गए, लेकिन भीड़ पर काबू पाना मुश्किल था। न्यूज चैनलों में राजेश खन्ना की फिल्म आनंद का एक सीन बार-बार चल रहा था, जिसमें उन्होंने कहा था- ‘बाबूमोशाय जिंदगी बड़ी होनी चाहिए, लंबी नहीं।’

फिल्म में जब उन्हें मरते देखने में ही फैंस का कलेजा फटता था, फिर तो आज उनकी असल में मौत हो चुकी थी।

अगले दिन 19 जुलाई 2012 को उनका अंतिम संस्कार हुआ। सुबह से ही तेज बारिश हो रही थी। उनके शव वाहन को सफेद फूलों से सजाया गया।

भीड़ इस कदर थी कि शव वाहन निकलने की भी जगह नहीं थी। ट्रैफिक कंट्रोल के बाद सुबह 10 बजे उनकी अंतिम यात्रा शुरू हुई। पत्नि डिंपल कपाड़िया, बेटी डिंपल, दामाद अक्षय कुमार, नातिन आरव और छोटी बेटी रिंकी उनकी शव पेटी को हाथ लगाए खड़ी रहीं।

भीड़ में चीख-पुकार मची थी, लोग फूल फेंक रहे थे, जैसे-जैसे वाहन आगे बढ़ता, वैसे-वैसे भीड़ भी बढ़ती जाती। मुंबई ने शायद इससे पहले ऐसी अंतिम यात्रा कभी नहीं देखी थी।

लोकल ट्रेन के स्टेशनों, फ्लायओवर्स, खंबो तक में लोग चढ़कर, एक अंतिम दर्शन चाहते थे। दूर-दूर के शहरों से लोग पहुंचे। फैंस की संख्या करीब 9 लाख थी। कई जगह लाठीचार्ज हुआ। सड़कों पर चप्पलें बिखरी पड़ी थीं।

पवनहंस श्मशान भूमि में राजेश खन्ना का अंतिम संस्कार हुआ, नातिन आरव ने पिता अक्षय की मदद से मुखाग्नि दी।

राजेश खन्ना पिछले कुछ दिनों से काफी बीमार चल रहे थे। इसके बावजूद वो अभिनय करना चाहते थे। वो कैमरा और लाइट के बीच जीना चाहते थे, जबकि कैंसर के इलाज के बीच ही हेयरलाइन फ्रैक्चर के चलते वो ठीक तरह चल नहीं पाते थे।

अप्रैल 2012 में जब डेट्स की बात हुई, तो सवाल उठा कि क्या वो इस बिगड़ती हेल्थ कंडीशन में बैंग्लोर में शूट कर पाएंगे। राजेश खन्ना डॉक्टर्स की सलाह के विरुद्ध शूट करने पर अड़े थे। शूटिंग से ठीक पहले उन्हें नानावटी अस्पताल में भर्ती करवाया गया, हैवी पेनकिलर्स लेते हुए भी वो शूटिंग की लाइनें याद करते थे। डिस्चार्ज मिलते ही वो घर जाने की बजाए वह टीम के साथ सीधे एयरपोर्ट रवाना हुए और बैंग्लोर पहुंच गए।

टक्सीडो पहने राजेश खन्ना ने मेकअप करवाया और बार-बार शीशे में खुदको देखते रहे।

जैसे ही डायरेक्टर आर.बाल्कि ने कहा लाइट, कैमरा, एक्शन, राजेश खन्ना ने लाइनें बोलना शुरू कीं- ‘फैंस क्या होते हैं, मुझसे पूछो, प्यार को वो तूफान, मोहब्बत की वो आंधी, वो जज्बा, वो जुनून, हवा बदल सकती है, लेकिन मेरे फैंस हमेशा मेरे रहेंगे। बाबूमोशाय, मेरे फैंस मुझसे कोई नहीं छीन सकता। (बैकग्राउंड में उनकी फिल्म कटी पतंग का गाना ये शाम मस्तानी बज रहा था)।’

शाम 7 बजे जैसे ही डायरेक्टर ने चिल्लाया- पैकअप, हर कोई खड़ा होकर राजेश खन्ना के लिए तालियां बजाने लगा। आहिस्ता चलते हुए वह व्हीलचेयर पर बैठे और टीम से वैनिटी की ओर चलने को कहा, कुछ दूर जाकर उन्होंने एक नजर मुड़कर सेट देखा और फिर मुड़ गए।

कुछ दिनों बाद अचानक तबीयत बिगड़ने से उन्हें लीलावती अस्पताल में भर्ती करवाया गया। वो ट्विंकल और रिंकी के साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताना चाहते थे। ट्विंकल उस समय प्रेग्नेंट थीं, इसके बावजूद वो पिता के साथ ही रहतीं। इसी बीच 16 जून को खबर आई कि उनकी तबीयत नाजुक बनी हुई है। उसी दिन सोशल मीडिया पर उनके निधन की खबर चर्चा में आ गई।

फैंस की भीड़ अस्पताल और आशीर्वाद बंगले के बाहर जमा होने लगी जल्द ही इन अफवाहों पर विराम लगाया गया। दूसरी तरफ अस्पताल में राजेश खन्ना, बार-बार होश खो रहे थे। परिवार पूरे समय उनके साथ था। 20 जून को उन्हें अच्छी तरह होश आया। उन्होंने परिवार को देखा और धीमी आवाज में कहा- ‘मैं घर जाना चाहता हूं, अपने कमरे में रहना है। यहां नहीं रह सकता।’

घर वापसी की तैयारी हुई और आशीर्वाद बंगले लौटते हुए कई फैंस और मीडिया के कैमरे उनके लिए रास्ते भर लगे रहे।

अगले दिन 21 जून को राजेश खन्ना ने परिवार से कहा कि वो फैंस को देखना चाहते हैं। काला चश्मा, सफेद कुर्ता-पजामा और शॉल औढ़े राजेश खन्ना छत पर आए, तो झलक मिलते ही फैंस खुशी से चिल्ला पड़े। डिंपल, अक्षय और करीबी दोस्त भूूपेश रसीन साथ खड़े थे। विक्ट्री साइन के साथ राजेश खन्ना ने फैंस से मुलाकात की।

अगले दिन हर अखबार में वही तस्वीर थी, लेकिन इसी दिन राजेश खन्ना की तबीयत काफी बिगड़ गई। उन्होंने खाना छोड़ दिया और अगले दिन 23 जून को उन्हें दोबारा लीलावती अस्पताल में भर्ती करवाया गया। कुछ हफ्ते अस्पताल में ही बीते। राजेश खन्ना बार-बार घर जाने की जिद करते, लेकिन परिवार इसके खिलाफ था। एक दिन राजेश खन्ना ने कहा, मैं अस्पताल में नहीं मरना चाहता। परिवार को झुकना पड़ा। 17 जुलाई को उन्हें आशीर्वाद बंगले ले जाया गया। अगले दिन 18 जुलाई को अपने कमरे में लेटे राजेश खन्ना ने कहा, टाइम हो गया है, पैक-अप। कुछ देर बाद उनकी सांसें रुक गईं।

राजेश खन्ना को कुछ महीनों पहले ही मौत का आभास हो गया था। 29 दिसंबर को आने वाले उनके जन्मदिन के लिए जब 2011 में परिवार ने गोवा वेकेशन प्लान की, तो वो दोस्तों को यही कहकर बुला रहे थे कि ये मेरा आखिरी बर्थडे होने वाला है।

मौत के कुछ दिनों बाद परिवार को उनका एक रिकॉर्डेड मैसेज मिला, जिसमें उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी की कहानी परिवार और चाहनेवालों के लिए रिकॉर्ड की थी। ठीक वैसे ही जैसे आनंद फिल्म में अमिताभ बच्चन के लिए की थी।

चौथे के दिन परिवार ने वो मैसेज सुनाया।

सुनिए राजेश खन्ना का फैंस के लिए रिकॉर्ड किया गया आखिरी मैसेज-

रिकॉर्डिंग में राजेश खन्ना ने अपने सफर की पूरी कहानी सुनाई कि कैसे थिएटर से उनका जन्म हुआ। उनका कहना था कि वो आज जो कुछ भी हैं थिएटर की बदौलत हैं।

आगे चाहनेवालों के लिए उन्होंने कहा-

‘फिल्मों में आ तो गया, लेकिन वो खूबसूरत कामयाबी की सीढ़ी चढ़ने का मौका, ये सेहरा तो आपके सिर है। ये आप हैं, जिन्होंने मुझे एक्टर से स्टार और स्टार से सुपरस्टार बनाया। किन अल्फाजों में आपका शुक्रिया अदा करूं समझ नहीं आता। प्यार आप मुझे भेजते रहे, लेकिन वो प्यार कभी लौटा नहीं पाया। लेकिन जो भी कहना चाहूंगा, जिन अल्फाजों में आपका शुक्रिया अदा करना चाहूंगा, वो मेरे दिल की सच्चाई, ईमानदारी और जमीर होगा। आज मेरा दिल हल्का हुआ आपसे गुल्फ्गू करके। दिल हल्का हुआ। मुझे अच्छा लगा कि इस बहाने आपसे मुलाकात हुई।’

आखिरी में उन्होंने कहा, ‘किसे अपना कहें, कोई इस काबिल नहीं मिलता। यहां पत्थर तो बहुत मिलते हैं, लेकिन दिल नहीं मिलता।

‘दोस्तों आपका एक हिस्सेदार मैं भी हूं। आपने अपना कीमती वक्त निकाला। आपका ये प्यार था कि आप यहां मौजूद हुए और इतनी भारी संख्या में। मैं यही कहूंगा कि बहुत बहुत शुक्रिया, थैंक्यू और मेरा बहुत बहुत सलाम।’

राजेश खन्ना के आखिरी साल उलथ-पुथल रहे। हर कोई किसी न किसी तरह उनसे रिश्ता बनाना चाहता था, लेकिन असल परिवार उनसे दूर रहा। करियर के शुरुआत में राजेश खन्ना 7 सालों तक अंजू महेंद्रू के साथ रिलेशनशिप में रहे। आगे राजेश खन्ना ने 1973 में डिंपल कपाड़िया से शादी की, जिससे उन्हें 2 बेटियां ट्विंकल और रिंकी थीं। लेकिन 1982 में दोनों अलग हो गए। दोनों ने तलाक कभी नहीं लिया और बेटियों की मिलकर परवरिश की। दोनों अलग-अलग घरों में रहते।

80 के दशक में राजेश खन्ना और टीना मुनीम रिलेशनशिप में रहे। टीना राजेश से शादी करना चाहती थीं, लेकिन राजेश खन्ना को यकीन था कि डिंपल देर से ही सही लौट आएंगी। यही वजह रही कि टीना उनसे अलग हो गईं।

राजेश खन्ना ने सालों अकेले बिताए, लेकिन जब उन्हें कैंसर हुआ और तबीयत नासाज रहने लगीं तो डिंपल कपाड़िया उनके साथ आशीर्वाद बंगले में आकर रहने लगीं।

राजेश खन्ना की मौत से कुछ महीनों पहले ही अनीता आडवाणी ने उनके साथ लिव-इन में रहने का दावा किया। मिड डे को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि वो पिछले 8 सालों से राजेश खन्ना के साथ आशीर्वाद में रह रही थीं। दावा ये भी था कि उन्हें राजेश खन्ना के अंतिम संस्कार में आने नहीं दिया और न ही दोबारा आशीर्वाद बंगले में आने की इजाजत मिली। उन्होंने डिंपल के खिलाफ प्रॉपर्टी से जुड़े केस भी किए हैं।

जब राजेश खन्ना का निधन हुआ तो पत्नी, बच्चे और एक्स गर्लफ्रेंड अंजू महेंद्रू भी मौजूद रहीं। वहीं अंजू जिनसे ब्रेकअप के बाद राजेश खन्ना ने उन्हीं के घर के नीचे से धूमधाम से अपनी बारात निकाली थीं।

घर में मिले तोहफों से भरे 65 सूटकेस

काका बाबू के निधन के बाद आशीर्वाद बंगले में 65 ऐसे बंद सूटकेस मिले, जिनमें सिर्फ तोहफे भरे हुए थे। वो जब भी विदेश जाते तो करीबियों के लिए बढ़-चढ़कर तोहफे खरीदते थे। कुछ तोहफे देना याद रहता तो कई बार वो भूल जाते थे।

अब कहानी जतिन से सुपरस्टार राजेश खन्ना बनने की-

मां-बाप ने छोड़ा तो गोद लिए पेरेंट्स ने दी आलीशान जिंदगी

29 दिसंबर 1942 में राजेश खन्ना का जन्म ब्रिटिश इंडिया के अमृतसर में लाला हीरानंद और चंद्रानी खन्ना के घर हुआ। नाम दिया गया, जतिन। जब विभाजन में लालाहीरानंद ने पाकिस्तान जाने का फैसला किया, तो उन्होंने बेटे जतिन को रिश्तेदारों चुन्निलाल और लीलावती खन्ना को गोद दे लिया, जो बॉम्बे में रहा करते थे।

राजेश खन्ना के बायोलॉजिकल पेरेंट्स।

राजेश खन्ना के बायोलॉजिकल पेरेंट्स।

गोद लेने वाले पिता चुन्नीलाल रेलवे के बड़े कॉन्ट्रैक्टर थे। बचपन रईसी में गुजरा और इकलौती संतान होने पर घर में वो हर किसी के सबसे प्रिय थे। हर डिमांड बोलते ही पूरी होती, चाहे मॉडर्न साइकिल हो, रेडियो हो। राजेश मां से डिमांड करते थे कि जब वो घर लौटें तो दरवाजे पर खड़े रहकर स्वागत किया जाए।

राजेश खन्ना के बचपन का घर, जहां पिता चुन्नीलाल के नाम का बोर्ड लगा है।

राजेश खन्ना के बचपन का घर, जहां पिता चुन्नीलाल के नाम का बोर्ड लगा है।

11 की उम्र में जतिन (राजेश खन्ना) को बिल्डिंग में रहने वाली 16 साल की सुरेखा से प्यार हो गया। वो लड़की भी उन्हें चाहती थी, लेकिन 2 साल बाद सुरेखा की शादी करवा दी गई।

जतिन ने पुणे के बाद बॉम्बे में कॉलेज पूरा किया। बचपन से ही थिएटर के शौकीन जतिन हीरो बनने का ख्वाब देखते थे। कई दफा वो अपनी तस्वीरें राज कपूर के पते पर भेजते थे। कॉलेज पूरा होते-होते राजेश खन्ना ज्यादातर समय कॉलेज के पास INT ड्रामा कंपनी में बिताने लगे। यहीं उनका दोस्त थिएटर करता था। खुद हीरो बनने का ख्वाब देखने वाले राजेश भी उसके साथ इस उम्मीद में रिहर्सल करते कि किसी दिन वहां आने वाले डायरेक्टर वी.के. शर्मा की उन पर नजर पड़ जाए और उन्हें ब्रेक मिल जाए।

एक दिन उम्मीद रंग लाई। थिएटर का एक लड़का प्ले से ठीक 2 दिन पहले बीमार पड़ गया। वी.के.शर्मा की जतिन पर नजर पड़ी और उन्होंने पूछा, ‘तुम छोटा सा रोल करोगे?’

जतिन खुशी से झूमना चाहते थे, लेकिन तब महज जी बोलकर रुक गए। उन्हें डोरमैन का रोल दिया गया, जिसे दरवाजा खोलकर कहना था- ‘जी हुजूर, साहब घर में हैं।’

3 मई 1961 में नागपुर में प्ले हुआ और राजेश खन्ना हजारों दर्शकों के सामने घबराने लगे। जैसे ही लाइन बोलने की बारी आई, उन्होंने कंपकंपाती जुबान से डायलॉग मिला दिए और कहा- ‘जी साहब, हुजूर घर में हैं।’

ऐसे उनका थिएटर करियर शुरू हुआ और जल्द ही वो प्रोफेशनल थिएटर आर्टिस्ट बन गए। इसी समय उन्हें अंजू महेंद्रू के साथ एक प्ले करने का मौका मिला। अंजू महेंद्रू के नाना फिल्मिस्तान स्टूडियो के मालिक थे, जबकि मामा मशहूर कंपोजर मदन मोहन। साथ काम करते हुए दोनों एक दूसरे को पसंद करने लगे।

अंजू महेंद्रू सीनियर एक्ट्रेस हैं।

अंजू महेंद्रू सीनियर एक्ट्रेस हैं।

इसी बीच 1965 में जतिन (राजेश खन्ना) ने फिल्मफेयर के ऑल इंडिया टैलेंट कॉन्टेस्ट में हिस्सा लिया। फरीदा जलाल, सुभाष घई, धीरज कुमार, विनोद मेहरा जैसे कई बड़े चेहरे भी उस कॉन्टेस्ट के पार्टिसिपेंट थे, लेकिन राजेश खन्ना ने इसे जीत लिया।

इस जीत के बाद उन्हें कई फिल्मों के ऑफर मिलने लगे। कुछ स्क्रीनटेस्ट में फेल होने के बाद उन्होंने केतन आनंद की फिल्म ‘आखिरी खत’ (1969) से हिंदी सिनेमा में डेब्यू किया।

फिल्मों में आने के लिए उनके अंकल ने नाम जतिन से राजेश खन्ना कर दिया। औरत और बहारों के सपने जैसी फिल्मों के बाद 1969 की फिल्म अराधना से राजेश खन्ना को स्टारडम हासिल हुआ, जिसमें द ट्रेन, सच्चा झूठा, सफर, आन मिलो सजना, कटी पतंग, महबूब की मेहंदी, आनंद, अंदाज, मर्यादा और हाथी मेरे साथी जैसी फिल्मों ने इजाफा किया। उनकी 3 सालों में 17 हिट फिल्में रिलीज हुईं, जिससे वो हिंदी सिनेमा के पहले सुपरस्टार कहे जाने लगे।

‘ऊपर आका, नीचे काका’, पढ़िए फैन फॉलोविंग और स्टारडम के किस्से-

लड़कियां उनकी ऐसी फैन थीं कि उनके घर में रोज हजारों खत आते, कुछ तो खून से लिखे होते, तो बड़े-बड़े तोहफे मिलना भी आम था। कार जहां भी जाती, भीड़ साथ-साथ चलती। लड़कियां कार चूमतीं तो कुछ कार के टायर के निशान चूमते।

मुमताज ने एक इंटरव्यू में बताया कि जब वो एक फिल्म की शूटिंग के लिए मद्रास गए तो होटल के बाहर करीब 600 लड़कियां राजेश खन्ना का इंतजार कर रही थीं।

हावड़ा ब्रिज टूटने के डर से रोक दी गई शूटिंग

किस्सा है फिल्म अमर प्रेम का। राजेश खन्ना और शर्मिला टैगोर को हावड़ा ब्रिज के नीचे से नांव से निकलता था। हालांकि एथोरिटी ने आखिरी समय पर परमिशन देने से इनकार कर दिया। उनका कहना था कि राजेश खन्ना को देखने के लिए जमा हुई भीड़ से हावड़ा ब्रिज टूट सकता है।

नैनीताल झील को नांव से किया गया कवर, हादसे का डर था

राजेश खन्ना फिल्म कटी पतंग की शूटिंग के लिए नैनीताल गए थे। शूटिंग लोकेशन नैनी झील के आस-पास का था इसलिए उस झील को 3 दिनों के लिए चारों तरफ से नाव से बांध दिया गया। वजह ये थी कि लोग उन्हें देखने के लिए बड़ी तादाद में वहां जरूर पहुंचेंगे जिस वजह से हादसा होने का भी खतरा था।

थिएटर में राजेश खन्ना को देख लोग हो गए थे पागल, फाड़ दी थी उनकी शर्ट

राजेश खन्ना करीबी दोस्त कमल हासन के साथ एक अमेरिकन फिल्म देखने गए। अंधेरे में लोग उन्हें नहीं पहचान सके। फिल्म खत्म हुई तो राजेश खन्ना अड़ गए कि एंड क्रेडिट देखे बिना नहीं जाएंगे। जैसे ही लाइट्स ऑन हुईं, लोगों ने राजेश खन्ना को पहचान लिया और उन्हें छूने के लिए खींचातानी होने लगी। कमल हासन ने उस भीड़ से राजेश खन्ना को बचाकर बाहर निकाला, लेकिन लोगों की खींचातानी में राजेश खन्ना की शर्ट फट गई। हालांकि इसके बावजूद वो मुस्कुरा रहे थे।

फैन का फोटो कलेक्शन देखकर इंप्रेस हुए राजेश खन्ना, तोहफे में दिया फूड ट्रक

राजेश खन्ना के लिए फैंस की दीवानगी कभी खत्म नहीं हुई। एक बार उनसे एक फैन की मुलाकात हुई जिसने उन्हें एक उनकी फोटो का कलेक्शन दिखाया। उसे देखकर राजेश खन्ना हैरान रह गए और खुश भी हुए। वो कलेक्शन उन्हें इतना पसंद आया कि उन्होंने उस फैन को एक फूड ट्रक गिफ्ट में दिया जो आज भी दिल्ली में चालू है। इस फूड ट्रक पर खुद राजेश खन्ना 500 बार गए थे और वहां के खानों का जायका लिया था।

राजेश खन्ना हॉस्पिटलाइज हुए तो डायरेक्टर्स ने बुक करवा लिए आसपास के कमरे

एक दौर में राजेश खन्ना का स्टारडम ऐसा था कि वो किसी फिल्ममेकर से मिल नहीं पाते थे। ऐसे में जब एक बार उन्हें पाइल्स के ऑपरेशन के लिए हॉस्पिटल में भर्ती होना पड़ा, तो स्क्रिप्ट सुनाने के लिए डायरेक्टर्स ने उनके रूम के आसपास के कमरे बुक करवा लिए थे।

(नोट- ये स्टोरी राजेश खन्ना पर लिखी गई बुक- राजेश खन्नाः द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ इंडियाज फर्स्ट सुपरस्टार के कुछ हिस्सों और रिसर्च के आधार पर लिखी गई है।)

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राजनीति

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18 जुलाई 2012

दोपहर में खबर आई, सुपरस्टार राजेश खन्ना, ‘काका बाबू’ अब नहीं रहे।

राजेश खन्ना पिछले कुछ दिनों से काफी बीमार थे। फैंस की भीड़ कई दिनों से उनकी सलामती के लिए कार्टर रोड स्थित आशीर्वाद बंगले के बाहर भीड़ लगाकर दुआ कर रहे थे। फिर जैसे ही हर न्यूज चैनल, फेसबुक, ट्विटर में उनकी मौत की खबर आई, जल्द ही आशीर्वाद के सामने मातम मना रहे फैंस का जन सैलाब आ गया।

तेज बारिश भी फैंस को रोक नहीं सकी। 5 दशकों के फिल्मी करियर में बनाए गए उनके दोस्त-यार भी जल्द ही घर पहुंचने लगे।

अमिताभ बच्चन ने राजेश खन्ना के आखिरी दर्शन किए और उनके घर में रखे सोफे पर जा बैठे, तभी राजेश खन्ना के करीबी उनके पास आकर खड़े हुए और भारी गले, लड़खड़ाती हुई आवाज में कहा- उनके आखिरी शब्द थे, ‘टाइम हो गया है, पैक अप।’ नम आखों के साथ वो शख्स वहां से चला गया।

आशीर्वाद बंगले के आसपास की ट्रैफिक व्यवस्था ठप होने लगी। भारी पुलिस फोर्स तैनात किया गया, कई बैरिकेड्स लगाए गए, लेकिन भीड़ पर काबू पाना मुश्किल था। न्यूज चैनलों में राजेश खन्ना की फिल्म आनंद का एक सीन बार-बार चल रहा था, जिसमें उन्होंने कहा था- ‘बाबूमोशाय जिंदगी बड़ी होनी चाहिए, लंबी नहीं।’

फिल्म में जब उन्हें मरते देखने में ही फैंस का कलेजा फटता था, फिर तो आज उनकी असल में मौत हो चुकी थी।

अगले दिन 19 जुलाई 2012 को उनका अंतिम संस्कार हुआ। सुबह से ही तेज बारिश हो रही थी। उनके शव वाहन को सफेद फूलों से सजाया गया।

भीड़ इस कदर थी कि शव वाहन निकलने की भी जगह नहीं थी। ट्रैफिक कंट्रोल के बाद सुबह 10 बजे उनकी अंतिम यात्रा शुरू हुई। पत्नि डिंपल कपाड़िया, बेटी डिंपल, दामाद अक्षय कुमार, नातिन आरव और छोटी बेटी रिंकी उनकी शव पेटी को हाथ लगाए खड़ी रहीं।

भीड़ में चीख-पुकार मची थी, लोग फूल फेंक रहे थे, जैसे-जैसे वाहन आगे बढ़ता, वैसे-वैसे भीड़ भी बढ़ती जाती। मुंबई ने शायद इससे पहले ऐसी अंतिम यात्रा कभी नहीं देखी थी।

लोकल ट्रेन के स्टेशनों, फ्लायओवर्स, खंबो तक में लोग चढ़कर, एक अंतिम दर्शन चाहते थे। दूर-दूर के शहरों से लोग पहुंचे। फैंस की संख्या करीब 9 लाख थी। कई जगह लाठीचार्ज हुआ। सड़कों पर चप्पलें बिखरी पड़ी थीं।

पवनहंस श्मशान भूमि में राजेश खन्ना का अंतिम संस्कार हुआ, नातिन आरव ने पिता अक्षय की मदद से मुखाग्नि दी।

राजेश खन्ना पिछले कुछ दिनों से काफी बीमार चल रहे थे। इसके बावजूद वो अभिनय करना चाहते थे। वो कैमरा और लाइट के बीच जीना चाहते थे, जबकि कैंसर के इलाज के बीच ही हेयरलाइन फ्रैक्चर के चलते वो ठीक तरह चल नहीं पाते थे।

अप्रैल 2012 में जब डेट्स की बात हुई, तो सवाल उठा कि क्या वो इस बिगड़ती हेल्थ कंडीशन में बैंग्लोर में शूट कर पाएंगे। राजेश खन्ना डॉक्टर्स की सलाह के विरुद्ध शूट करने पर अड़े थे। शूटिंग से ठीक पहले उन्हें नानावटी अस्पताल में भर्ती करवाया गया, हैवी पेनकिलर्स लेते हुए भी वो शूटिंग की लाइनें याद करते थे। डिस्चार्ज मिलते ही वो घर जाने की बजाए वह टीम के साथ सीधे एयरपोर्ट रवाना हुए और बैंग्लोर पहुंच गए।

टक्सीडो पहने राजेश खन्ना ने मेकअप करवाया और बार-बार शीशे में खुदको देखते रहे।

जैसे ही डायरेक्टर आर.बाल्कि ने कहा लाइट, कैमरा, एक्शन, राजेश खन्ना ने लाइनें बोलना शुरू कीं- ‘फैंस क्या होते हैं, मुझसे पूछो, प्यार को वो तूफान, मोहब्बत की वो आंधी, वो जज्बा, वो जुनून, हवा बदल सकती है, लेकिन मेरे फैंस हमेशा मेरे रहेंगे। बाबूमोशाय, मेरे फैंस मुझसे कोई नहीं छीन सकता। (बैकग्राउंड में उनकी फिल्म कटी पतंग का गाना ये शाम मस्तानी बज रहा था)।’

शाम 7 बजे जैसे ही डायरेक्टर ने चिल्लाया- पैकअप, हर कोई खड़ा होकर राजेश खन्ना के लिए तालियां बजाने लगा। आहिस्ता चलते हुए वह व्हीलचेयर पर बैठे और टीम से वैनिटी की ओर चलने को कहा, कुछ दूर जाकर उन्होंने एक नजर मुड़कर सेट देखा और फिर मुड़ गए।

कुछ दिनों बाद अचानक तबीयत बिगड़ने से उन्हें लीलावती अस्पताल में भर्ती करवाया गया। वो ट्विंकल और रिंकी के साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताना चाहते थे। ट्विंकल उस समय प्रेग्नेंट थीं, इसके बावजूद वो पिता के साथ ही रहतीं। इसी बीच 16 जून को खबर आई कि उनकी तबीयत नाजुक बनी हुई है। उसी दिन सोशल मीडिया पर उनके निधन की खबर चर्चा में आ गई।

फैंस की भीड़ अस्पताल और आशीर्वाद बंगले के बाहर जमा होने लगी जल्द ही इन अफवाहों पर विराम लगाया गया। दूसरी तरफ अस्पताल में राजेश खन्ना, बार-बार होश खो रहे थे। परिवार पूरे समय उनके साथ था। 20 जून को उन्हें अच्छी तरह होश आया। उन्होंने परिवार को देखा और धीमी आवाज में कहा- ‘मैं घर जाना चाहता हूं, अपने कमरे में रहना है। यहां नहीं रह सकता।’

घर वापसी की तैयारी हुई और आशीर्वाद बंगले लौटते हुए कई फैंस और मीडिया के कैमरे उनके लिए रास्ते भर लगे रहे।

अगले दिन 21 जून को राजेश खन्ना ने परिवार से कहा कि वो फैंस को देखना चाहते हैं। काला चश्मा, सफेद कुर्ता-पजामा और शॉल औढ़े राजेश खन्ना छत पर आए, तो झलक मिलते ही फैंस खुशी से चिल्ला पड़े। डिंपल, अक्षय और करीबी दोस्त भूूपेश रसीन साथ खड़े थे। विक्ट्री साइन के साथ राजेश खन्ना ने फैंस से मुलाकात की।

अगले दिन हर अखबार में वही तस्वीर थी, लेकिन इसी दिन राजेश खन्ना की तबीयत काफी बिगड़ गई। उन्होंने खाना छोड़ दिया और अगले दिन 23 जून को उन्हें दोबारा लीलावती अस्पताल में भर्ती करवाया गया। कुछ हफ्ते अस्पताल में ही बीते। राजेश खन्ना बार-बार घर जाने की जिद करते, लेकिन परिवार इसके खिलाफ था। एक दिन राजेश खन्ना ने कहा, मैं अस्पताल में नहीं मरना चाहता। परिवार को झुकना पड़ा। 17 जुलाई को उन्हें आशीर्वाद बंगले ले जाया गया। अगले दिन 18 जुलाई को अपने कमरे में लेटे राजेश खन्ना ने कहा, टाइम हो गया है, पैक-अप। कुछ देर बाद उनकी सांसें रुक गईं।

राजेश खन्ना को कुछ महीनों पहले ही मौत का आभास हो गया था। 29 दिसंबर को आने वाले उनके जन्मदिन के लिए जब 2011 में परिवार ने गोवा वेकेशन प्लान की, तो वो दोस्तों को यही कहकर बुला रहे थे कि ये मेरा आखिरी बर्थडे होने वाला है।

मौत के कुछ दिनों बाद परिवार को उनका एक रिकॉर्डेड मैसेज मिला, जिसमें उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी की कहानी परिवार और चाहनेवालों के लिए रिकॉर्ड की थी। ठीक वैसे ही जैसे आनंद फिल्म में अमिताभ बच्चन के लिए की थी।

चौथे के दिन परिवार ने वो मैसेज सुनाया।

सुनिए राजेश खन्ना का फैंस के लिए रिकॉर्ड किया गया आखिरी मैसेज-

रिकॉर्डिंग में राजेश खन्ना ने अपने सफर की पूरी कहानी सुनाई कि कैसे थिएटर से उनका जन्म हुआ। उनका कहना था कि वो आज जो कुछ भी हैं थिएटर की बदौलत हैं।

आगे चाहनेवालों के लिए उन्होंने कहा-

‘फिल्मों में आ तो गया, लेकिन वो खूबसूरत कामयाबी की सीढ़ी चढ़ने का मौका, ये सेहरा तो आपके सिर है। ये आप हैं, जिन्होंने मुझे एक्टर से स्टार और स्टार से सुपरस्टार बनाया। किन अल्फाजों में आपका शुक्रिया अदा करूं समझ नहीं आता। प्यार आप मुझे भेजते रहे, लेकिन वो प्यार कभी लौटा नहीं पाया। लेकिन जो भी कहना चाहूंगा, जिन अल्फाजों में आपका शुक्रिया अदा करना चाहूंगा, वो मेरे दिल की सच्चाई, ईमानदारी और जमीर होगा। आज मेरा दिल हल्का हुआ आपसे गुल्फ्गू करके। दिल हल्का हुआ। मुझे अच्छा लगा कि इस बहाने आपसे मुलाकात हुई।’

आखिरी में उन्होंने कहा, ‘किसे अपना कहें, कोई इस काबिल नहीं मिलता। यहां पत्थर तो बहुत मिलते हैं, लेकिन दिल नहीं मिलता।

‘दोस्तों आपका एक हिस्सेदार मैं भी हूं। आपने अपना कीमती वक्त निकाला। आपका ये प्यार था कि आप यहां मौजूद हुए और इतनी भारी संख्या में। मैं यही कहूंगा कि बहुत बहुत शुक्रिया, थैंक्यू और मेरा बहुत बहुत सलाम।’

राजेश खन्ना के आखिरी साल उलथ-पुथल रहे। हर कोई किसी न किसी तरह उनसे रिश्ता बनाना चाहता था, लेकिन असल परिवार उनसे दूर रहा। करियर के शुरुआत में राजेश खन्ना 7 सालों तक अंजू महेंद्रू के साथ रिलेशनशिप में रहे। आगे राजेश खन्ना ने 1973 में डिंपल कपाड़िया से शादी की, जिससे उन्हें 2 बेटियां ट्विंकल और रिंकी थीं। लेकिन 1982 में दोनों अलग हो गए। दोनों ने तलाक कभी नहीं लिया और बेटियों की मिलकर परवरिश की। दोनों अलग-अलग घरों में रहते।

80 के दशक में राजेश खन्ना और टीना मुनीम रिलेशनशिप में रहे। टीना राजेश से शादी करना चाहती थीं, लेकिन राजेश खन्ना को यकीन था कि डिंपल देर से ही सही लौट आएंगी। यही वजह रही कि टीना उनसे अलग हो गईं।

राजेश खन्ना ने सालों अकेले बिताए, लेकिन जब उन्हें कैंसर हुआ और तबीयत नासाज रहने लगीं तो डिंपल कपाड़िया उनके साथ आशीर्वाद बंगले में आकर रहने लगीं।

राजेश खन्ना की मौत से कुछ महीनों पहले ही अनीता आडवाणी ने उनके साथ लिव-इन में रहने का दावा किया। मिड डे को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि वो पिछले 8 सालों से राजेश खन्ना के साथ आशीर्वाद में रह रही थीं। दावा ये भी था कि उन्हें राजेश खन्ना के अंतिम संस्कार में आने नहीं दिया और न ही दोबारा आशीर्वाद बंगले में आने की इजाजत मिली। उन्होंने डिंपल के खिलाफ प्रॉपर्टी से जुड़े केस भी किए हैं।

जब राजेश खन्ना का निधन हुआ तो पत्नी, बच्चे और एक्स गर्लफ्रेंड अंजू महेंद्रू भी मौजूद रहीं। वहीं अंजू जिनसे ब्रेकअप के बाद राजेश खन्ना ने उन्हीं के घर के नीचे से धूमधाम से अपनी बारात निकाली थीं।

घर में मिले तोहफों से भरे 65 सूटकेस

काका बाबू के निधन के बाद आशीर्वाद बंगले में 65 ऐसे बंद सूटकेस मिले, जिनमें सिर्फ तोहफे भरे हुए थे। वो जब भी विदेश जाते तो करीबियों के लिए बढ़-चढ़कर तोहफे खरीदते थे। कुछ तोहफे देना याद रहता तो कई बार वो भूल जाते थे।

अब कहानी जतिन से सुपरस्टार राजेश खन्ना बनने की-

मां-बाप ने छोड़ा तो गोद लिए पेरेंट्स ने दी आलीशान जिंदगी

29 दिसंबर 1942 में राजेश खन्ना का जन्म ब्रिटिश इंडिया के अमृतसर में लाला हीरानंद और चंद्रानी खन्ना के घर हुआ। नाम दिया गया, जतिन। जब विभाजन में लालाहीरानंद ने पाकिस्तान जाने का फैसला किया, तो उन्होंने बेटे जतिन को रिश्तेदारों चुन्निलाल और लीलावती खन्ना को गोद दे लिया, जो बॉम्बे में रहा करते थे।

राजेश खन्ना के बायोलॉजिकल पेरेंट्स।

राजेश खन्ना के बायोलॉजिकल पेरेंट्स।

गोद लेने वाले पिता चुन्नीलाल रेलवे के बड़े कॉन्ट्रैक्टर थे। बचपन रईसी में गुजरा और इकलौती संतान होने पर घर में वो हर किसी के सबसे प्रिय थे। हर डिमांड बोलते ही पूरी होती, चाहे मॉडर्न साइकिल हो, रेडियो हो। राजेश मां से डिमांड करते थे कि जब वो घर लौटें तो दरवाजे पर खड़े रहकर स्वागत किया जाए।

राजेश खन्ना के बचपन का घर, जहां पिता चुन्नीलाल के नाम का बोर्ड लगा है।

राजेश खन्ना के बचपन का घर, जहां पिता चुन्नीलाल के नाम का बोर्ड लगा है।

11 की उम्र में जतिन (राजेश खन्ना) को बिल्डिंग में रहने वाली 16 साल की सुरेखा से प्यार हो गया। वो लड़की भी उन्हें चाहती थी, लेकिन 2 साल बाद सुरेखा की शादी करवा दी गई।

जतिन ने पुणे के बाद बॉम्बे में कॉलेज पूरा किया। बचपन से ही थिएटर के शौकीन जतिन हीरो बनने का ख्वाब देखते थे। कई दफा वो अपनी तस्वीरें राज कपूर के पते पर भेजते थे। कॉलेज पूरा होते-होते राजेश खन्ना ज्यादातर समय कॉलेज के पास INT ड्रामा कंपनी में बिताने लगे। यहीं उनका दोस्त थिएटर करता था। खुद हीरो बनने का ख्वाब देखने वाले राजेश भी उसके साथ इस उम्मीद में रिहर्सल करते कि किसी दिन वहां आने वाले डायरेक्टर वी.के. शर्मा की उन पर नजर पड़ जाए और उन्हें ब्रेक मिल जाए।

एक दिन उम्मीद रंग लाई। थिएटर का एक लड़का प्ले से ठीक 2 दिन पहले बीमार पड़ गया। वी.के.शर्मा की जतिन पर नजर पड़ी और उन्होंने पूछा, ‘तुम छोटा सा रोल करोगे?’

जतिन खुशी से झूमना चाहते थे, लेकिन तब महज जी बोलकर रुक गए। उन्हें डोरमैन का रोल दिया गया, जिसे दरवाजा खोलकर कहना था- ‘जी हुजूर, साहब घर में हैं।’

3 मई 1961 में नागपुर में प्ले हुआ और राजेश खन्ना हजारों दर्शकों के सामने घबराने लगे। जैसे ही लाइन बोलने की बारी आई, उन्होंने कंपकंपाती जुबान से डायलॉग मिला दिए और कहा- ‘जी साहब, हुजूर घर में हैं।’

ऐसे उनका थिएटर करियर शुरू हुआ और जल्द ही वो प्रोफेशनल थिएटर आर्टिस्ट बन गए। इसी समय उन्हें अंजू महेंद्रू के साथ एक प्ले करने का मौका मिला। अंजू महेंद्रू के नाना फिल्मिस्तान स्टूडियो के मालिक थे, जबकि मामा मशहूर कंपोजर मदन मोहन। साथ काम करते हुए दोनों एक दूसरे को पसंद करने लगे।

अंजू महेंद्रू सीनियर एक्ट्रेस हैं।

अंजू महेंद्रू सीनियर एक्ट्रेस हैं।

इसी बीच 1965 में जतिन (राजेश खन्ना) ने फिल्मफेयर के ऑल इंडिया टैलेंट कॉन्टेस्ट में हिस्सा लिया। फरीदा जलाल, सुभाष घई, धीरज कुमार, विनोद मेहरा जैसे कई बड़े चेहरे भी उस कॉन्टेस्ट के पार्टिसिपेंट थे, लेकिन राजेश खन्ना ने इसे जीत लिया।

इस जीत के बाद उन्हें कई फिल्मों के ऑफर मिलने लगे। कुछ स्क्रीनटेस्ट में फेल होने के बाद उन्होंने केतन आनंद की फिल्म ‘आखिरी खत’ (1969) से हिंदी सिनेमा में डेब्यू किया।

फिल्मों में आने के लिए उनके अंकल ने नाम जतिन से राजेश खन्ना कर दिया। औरत और बहारों के सपने जैसी फिल्मों के बाद 1969 की फिल्म अराधना से राजेश खन्ना को स्टारडम हासिल हुआ, जिसमें द ट्रेन, सच्चा झूठा, सफर, आन मिलो सजना, कटी पतंग, महबूब की मेहंदी, आनंद, अंदाज, मर्यादा और हाथी मेरे साथी जैसी फिल्मों ने इजाफा किया। उनकी 3 सालों में 17 हिट फिल्में रिलीज हुईं, जिससे वो हिंदी सिनेमा के पहले सुपरस्टार कहे जाने लगे।

‘ऊपर आका, नीचे काका’, पढ़िए फैन फॉलोविंग और स्टारडम के किस्से-

लड़कियां उनकी ऐसी फैन थीं कि उनके घर में रोज हजारों खत आते, कुछ तो खून से लिखे होते, तो बड़े-बड़े तोहफे मिलना भी आम था। कार जहां भी जाती, भीड़ साथ-साथ चलती। लड़कियां कार चूमतीं तो कुछ कार के टायर के निशान चूमते।

मुमताज ने एक इंटरव्यू में बताया कि जब वो एक फिल्म की शूटिंग के लिए मद्रास गए तो होटल के बाहर करीब 600 लड़कियां राजेश खन्ना का इंतजार कर रही थीं।

हावड़ा ब्रिज टूटने के डर से रोक दी गई शूटिंग

किस्सा है फिल्म अमर प्रेम का। राजेश खन्ना और शर्मिला टैगोर को हावड़ा ब्रिज के नीचे से नांव से निकलता था। हालांकि एथोरिटी ने आखिरी समय पर परमिशन देने से इनकार कर दिया। उनका कहना था कि राजेश खन्ना को देखने के लिए जमा हुई भीड़ से हावड़ा ब्रिज टूट सकता है।

नैनीताल झील को नांव से किया गया कवर, हादसे का डर था

राजेश खन्ना फिल्म कटी पतंग की शूटिंग के लिए नैनीताल गए थे। शूटिंग लोकेशन नैनी झील के आस-पास का था इसलिए उस झील को 3 दिनों के लिए चारों तरफ से नाव से बांध दिया गया। वजह ये थी कि लोग उन्हें देखने के लिए बड़ी तादाद में वहां जरूर पहुंचेंगे जिस वजह से हादसा होने का भी खतरा था।

थिएटर में राजेश खन्ना को देख लोग हो गए थे पागल, फाड़ दी थी उनकी शर्ट

राजेश खन्ना करीबी दोस्त कमल हासन के साथ एक अमेरिकन फिल्म देखने गए। अंधेरे में लोग उन्हें नहीं पहचान सके। फिल्म खत्म हुई तो राजेश खन्ना अड़ गए कि एंड क्रेडिट देखे बिना नहीं जाएंगे। जैसे ही लाइट्स ऑन हुईं, लोगों ने राजेश खन्ना को पहचान लिया और उन्हें छूने के लिए खींचातानी होने लगी। कमल हासन ने उस भीड़ से राजेश खन्ना को बचाकर बाहर निकाला, लेकिन लोगों की खींचातानी में राजेश खन्ना की शर्ट फट गई। हालांकि इसके बावजूद वो मुस्कुरा रहे थे।

फैन का फोटो कलेक्शन देखकर इंप्रेस हुए राजेश खन्ना, तोहफे में दिया फूड ट्रक

राजेश खन्ना के लिए फैंस की दीवानगी कभी खत्म नहीं हुई। एक बार उनसे एक फैन की मुलाकात हुई जिसने उन्हें एक उनकी फोटो का कलेक्शन दिखाया। उसे देखकर राजेश खन्ना हैरान रह गए और खुश भी हुए। वो कलेक्शन उन्हें इतना पसंद आया कि उन्होंने उस फैन को एक फूड ट्रक गिफ्ट में दिया जो आज भी दिल्ली में चालू है। इस फूड ट्रक पर खुद राजेश खन्ना 500 बार गए थे और वहां के खानों का जायका लिया था।

राजेश खन्ना हॉस्पिटलाइज हुए तो डायरेक्टर्स ने बुक करवा लिए आसपास के कमरे

एक दौर में राजेश खन्ना का स्टारडम ऐसा था कि वो किसी फिल्ममेकर से मिल नहीं पाते थे। ऐसे में जब एक बार उन्हें पाइल्स के ऑपरेशन के लिए हॉस्पिटल में भर्ती होना पड़ा, तो स्क्रिप्ट सुनाने के लिए डायरेक्टर्स ने उनके रूम के आसपास के कमरे बुक करवा लिए थे।

(नोट- ये स्टोरी राजेश खन्ना पर लिखी गई बुक- राजेश खन्नाः द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ इंडियाज फर्स्ट सुपरस्टार के कुछ हिस्सों और रिसर्च के आधार पर लिखी गई है।)

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