पाकिस्तान ने अपने अवैध कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान को देश का पांचवां राज्य बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। गुरुवार को गिलगित-बाल्टिस्तान विधानसभा ने सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार से संविधान में संशोधन करके इस क्षेत्र को प्रांत का दर्जा देने की मांग की। प्रस्ताव में कहा गया है कि गिलगित-बाल्टिस्तान के लोगों को पाकिस्तान के दूसरे राज्यों के नागरिकों की तरह समान संवैधानिक, राजनीतिक और लोकतांत्रिक अधिकार दिए जाएं। इसके तहत इस क्षेत्र को नेशनल असेंबली, सीनेट और अन्य संघीय संवैधानिक संस्थाओं में भी प्रतिनिधित्व देने की मांग की गई है। प्रस्ताव की कॉपी पर मुख्यमंत्री, स्पीकर, डिप्टी स्पीकर, नेता विपक्ष और दो निर्दलीय विधायकों के हस्ताक्षर हैं। इसे अब पाकिस्तानी संसद के पास भेजा जाएगा। अस्थायी राज्य बनाने का प्रस्ताव अभी तक पाकिस्तान में केवल चार प्रांत पंजाब, सिंध, बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा हैं। गिलगित-बाल्टिस्तान अब तक सीमित स्वशासन (लिमिटेड सेल्फ-गवर्नेंस) के तहत संचालित होता रहा है और उसे पाकिस्तान के अन्य प्रांतों जैसा संवैधानिक दर्जा प्राप्त नहीं है। प्रस्ताव में कहा गया है कि गिलगित-बाल्टिस्तान को अभी स्थायी नहीं, बल्कि अस्थायी तौर पर पाकिस्तान का राज्य बनाया जाएगा। अगर भविष्य में जम्मू-कश्मीर विवाद का कोई समाधान निकलता है, तो उस फैसले के अनुसार इस क्षेत्र की स्थिति दोबारा तय की जा सकती है। यानी पाकिस्तान ने यह रास्ता खुला रखा है कि कश्मीर विवाद के अंतिम समाधान के बाद गिलगित-बाल्टिस्तान का दर्जा बदला जा सके। यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है, जब पाकिस्तान कई आंतरिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। देश में बलूचिस्तान में बिगड़ती सुरक्षा स्थिति और खैबर पख्तूनख्वा में बढ़ते आतंकी हमलों को लेकर सरकार दबाव में है। विपक्षी दलों और सरकार के आलोचकों का आरोप है कि सरकार इन घरेलू समस्याओं से लोगों का ध्यान हटाने के लिए लंबे समय से लंबित गिलगित-बाल्टिस्तान को प्रांत बनाने के मुद्दे को फिर से सामने लाई है। पिछले महीने गिलगित-बाल्टिस्तान में चुनाव हुए थे गिलगित-बाल्टिस्तान में पिछले महीने 7 जून चुनाव हुआ था जिसमें बिलावल भुट्टो की पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) को सबसे ज्यादा सीटें मिली थीं। एक पार्टी के पास पूर्ण बहुमत ना होने की वजह से PPP और शहबाज शरीफ की पार्टी PML-N के बीच पॉवर शेयरिंग एग्रीमेंट हुआ था जिसके तहत मुख्यमंत्री और स्पीकर PPP का हुआ। वहीं गवर्नर और डिप्टी स्पीकर PML-N मिला। गिलगिट-बाल्टिस्तान और भारत का क्या कनेक्शन है? गिलगिट-बाल्टिस्तान ट्रांस-हिमालयन क्षेत्र में कश्मीर घाटी के उत्तर-पश्चिम में है। यह जम्मू-कश्मीर रियासत का हिस्सा था। तब यह रियासत पांच क्षेत्रों में बंटी थी- जम्मू, कश्मीर, लद्दाख, गिलगिट वजाहत और गिलगिट एजेंसी। 1947 से भारत के जिस हिस्से पर पाकिस्तान का कब्जा है, उसमें सिर्फ 15% एरिया पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में है। 85% हिस्सा तो गिलगिट-बाल्टिस्तान या नॉर्दर्न एरियाज में है। यह चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) का मुख्य इलाका है। सिंधु नदी पाकिस्तान में गिलगिट-बाल्टिस्तान से ही होकर प्रवेश करती है। गिलगिट-बाल्टिस्तान भारत से अलग कब हुआ? 1947 में। दरअसल, 1917 में USSR बनने के बाद ब्रिटिश इंडिया ने गिलगिट एजेंसी को 1935 में जम्मू-कश्मीर के महाराजा से 60 साल की लीज पर लिया था। पर जब भारत आजाद हुआ तो 15 दिन बाद गिलगित भी महाराजा हरिसिंह के अधीन आ गया था। 26 अक्टूबर 1947 को हरि सिंह ने अपनी रियासत को भारत में मर्ज करने का फैसला किया, तब ब्रिटिश कमांडर विलियम एलेक्जेंडर ब्राउन के नेतृत्व में गिलगिट स्काउट्स ने बगावत कर दी। उसने बाल्टिस्तान पर भी कब्जा कर लिया था, जो लद्दाख का हिस्सा था। स्कार्दू, करगिल और द्रास पर भी गिलगिट स्काउट्स का कब्जा था। युद्ध में भारतीय सेनाओं ने अगस्त 1948 में करगिल और द्रास पर फिर से कब्जा हासिल किया। पर गिलगिट पर पाकिस्तान का अवैध कब्जा कायम रहा। 1 नवंबर 1947 को राजनीतिक दल रिवॉल्युशनरी काउंसिल ऑफ गिलगिट-बाल्टिस्तान ने गिलगिट-बाल्टिस्तान को स्वतंत्र देश घोषित किया था। 15 नवंबर को उसने पाकिस्तान में मर्जर की घोषणा की। पर इस मर्जर की भी शर्त ये थी कि पूरी तरह एडमिनिस्ट्रेटिव कंट्रोल के लिए यह होगा। पिछले साल पाक प्रधानमंत्री इमरान खान ने 1 नवंबर को गिलगिट-बाल्टिस्तान के स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया।

















































