Tuesday, 21 Jul 2026 | 06:49 PM

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Akshay Kumar, Saif Ali Khan, Taimur Spotted at Lords Cricket Match

Akshay Kumar, Saif Ali Khan, Taimur Spotted at Lords Cricket Match

13 मिनट पहले कॉपी लिंक बॉलीवुड एक्टर अक्षय कुमार रविवार को लंदन के लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड में भारत और इंग्लैंड के बीच खेले गए तीसरे वनडे मैच के दौरान नजर आए। इस दौरान उनका नया सफेद दाढ़ी वाला लुक चर्चा में रहा। उन्होंने सफेद और बेज रंग की ड्रेस के साथ काले बालों वाला नया लुक अपनाया था। स्टेडियम में अक्षय कुमार के साथ सैफ अली खान, उनके बेटे तैमूर अली खान भी मौजूद थे। सोशल मीडिया पर मैच के दौरान की कई तस्वीरें और वीडियो सामने आए, जिनमें सभी मैच को एंजॉय करते दिखाई दिए। मैच के दौरान अक्षय और सैफ बातचीत करते भी नजर आए। वहीं, मैच के बाद सामने आए एक वीडियो में चलते समय अक्षय कुमार अचानक लड़खड़ा गए। हालांकि, वो गिरने से बच गए। इस पर सैफ अली खान और तैमूर हंसने लगे। अक्षय ने भी इस पल को मजाकिया अंदाज में लिया और सभी साथ में हंसते हुए आगे बढ़ गए। 18 साल बाद साथ फिल्म में नजर आएंगे अक्षय और सैफ अक्षय कुमार और सैफ अली खान जल्द ही फिल्म ‘हैवान’ में साथ दिखाई देंगे। यह फिल्म 11 सितंबर 2026 को रिलीज होने वाली है। दोनों करीब 18 साल बाद एक साथ स्क्रीन शेयर करेंगे। इससे पहले वे ‘मैं खिलाड़ी तू अनाड़ी’, ‘ये दिल्लगी’, ‘आरजू’ और 2008 में रिलीज हुई ‘टशन’ में साथ काम कर चुके हैं। फिल्म में सयामी खेर भी अहम भूमिका निभा रही हैं। अर्जुन कपूर और साहिबा साथ दिखे वहीं, बॉलीवुड एक्टर अर्जुन कपूर और एक्ट्रेस साहिबा बाली रविवार को लंदन के लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड में एक साथ दिखे। दोनों वहां भारत और इंग्लैंड के बीच खेले गए तीसरे वनडे मैच को देखने पहुंचे थे। स्टेडियम से दोनों की तस्वीरें सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर उनकी डेटिंग की चर्चा शुरू हो गई। अब साहिबा बाली ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर अर्जुन कपूर के साथ एक फोटो शेयर करते हुए इन अफवाहों पर प्रतिक्रिया दी है। साहिबा ने एक मैसेज लिखकर फैंस से ऐसी खबरों पर भरोसा न करने की बात कही है। साहिबा बाली ने इंस्टाग्राम पर अर्जुन कपूर के साथ यह तस्वीर शेयर की। साहिबा बाली ने अपने इंस्टाग्राम स्टोरीज पर लॉर्ड्स स्टेडियम की एक तस्वीर शेयर की, जिसमें वे अर्जुन कपूर के साथ पोज देती नजर आ रही हैं। इस तस्वीर के साथ साहिबा ने सीधे तौर पर अफेयर की खबरों को खारिज नहीं किया, बल्कि अलग अंदाज में लिखा, ‘डोंट बिलीव एवरीथिंग पार्ट 2’ (हर बात पर भरोसा मत करो)। पूरी खबर यहां पढ़ें… इंग्लैंड ने तीसरे वनडे में भारत को हराया इंग्लैंड ने तीसरे वनडे में भारत को 27 रन से हराकर तीन मैचों की सीरीज 2-1 से अपने नाम कर ली। लॉर्ड्स में इंग्लैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 50 ओवर में 387/3 रन बनाए। जवाब में भारतीय टीम 50 ओवर में 360 रन ही बना सकी। रोहित शर्मा ने 138 रन की पारी खेली, लेकिन जीत नहीं दिला सके। पूरी खबर यहां पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Akshay Kumar, Saif Ali Khan, Taimur Spotted at Lords Cricket Match

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29 मिनट पहले कॉपी लिंक बॉलीवुड एक्टर अक्षय कुमार रविवार को लंदन के लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड में भारत और इंग्लैंड के बीच खेले गए तीसरे वनडे मैच के दौरान नजर आए। इस दौरान उनका नया सफेद दाढ़ी वाला लुक चर्चा में रहा। उन्होंने सफेद और बेज रंग की ड्रेस के साथ काले बालों वाला नया लुक अपनाया था। स्टेडियम में अक्षय कुमार के साथ सैफ अली खान, उनके बेटे तैमूर अली खान भी मौजूद थे। सोशल मीडिया पर मैच के दौरान की कई तस्वीरें और वीडियो सामने आए, जिनमें सभी मैच को एंजॉय करते दिखाई दिए। मैच के दौरान अक्षय और सैफ बातचीत करते भी नजर आए। वहीं, मैच के बाद सामने आए एक वीडियो में चलते समय अक्षय कुमार अचानक लड़खड़ा गए। हालांकि, वो गिरने से बच गए। इस पर सैफ अली खान और तैमूर हंसने लगे। अक्षय ने भी इस पल को मजाकिया अंदाज में लिया और सभी साथ में हंसते हुए आगे बढ़ गए। 18 साल बाद साथ फिल्म में नजर आएंगे अक्षय और सैफ अक्षय कुमार और सैफ अली खान जल्द ही फिल्म ‘हैवान’ में साथ दिखाई देंगे। यह फिल्म 11 सितंबर 2026 को रिलीज होने वाली है। दोनों करीब 18 साल बाद एक साथ स्क्रीन शेयर करेंगे। इससे पहले वे ‘मैं खिलाड़ी तू अनाड़ी’, ‘ये दिल्लगी’, ‘आरजू’ और 2008 में रिलीज हुई ‘टशन’ में साथ काम कर चुके हैं। फिल्म में सयामी खेर भी अहम भूमिका निभा रही हैं। अर्जुन कपूर और साहिबा साथ दिखे वहीं, बॉलीवुड एक्टर अर्जुन कपूर और एक्ट्रेस साहिबा बाली रविवार को लंदन के लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड में एक साथ दिखे। दोनों वहां भारत और इंग्लैंड के बीच खेले गए तीसरे वनडे मैच को देखने पहुंचे थे। स्टेडियम से दोनों की तस्वीरें सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर उनकी डेटिंग की चर्चा शुरू हो गई। अब साहिबा बाली ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर अर्जुन कपूर के साथ एक फोटो शेयर करते हुए इन अफवाहों पर प्रतिक्रिया दी है। साहिबा ने एक मैसेज लिखकर फैंस से ऐसी खबरों पर भरोसा न करने की बात कही है। साहिबा बाली ने इंस्टाग्राम पर अर्जुन कपूर के साथ यह तस्वीर शेयर की। साहिबा बाली ने अपने इंस्टाग्राम स्टोरीज पर लॉर्ड्स स्टेडियम की एक तस्वीर शेयर की, जिसमें वे अर्जुन कपूर के साथ पोज देती नजर आ रही हैं। इस तस्वीर के साथ साहिबा ने सीधे तौर पर अफेयर की खबरों को खारिज नहीं किया, बल्कि अलग अंदाज में लिखा, ‘डोंट बिलीव एवरीथिंग पार्ट 2’ (हर बात पर भरोसा मत करो)। पूरी खबर यहां पढ़ें… इंग्लैंड ने तीसरे वनडे में भारत को हराया इंग्लैंड ने तीसरे वनडे में भारत को 27 रन से हराकर तीन मैचों की सीरीज 2-1 से अपने नाम कर ली। लॉर्ड्स में इंग्लैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 50 ओवर में 387/3 रन बनाए। जवाब में भारतीय टीम 50 ओवर में 360 रन ही बना सकी। रोहित शर्मा ने 138 रन की पारी खेली, लेकिन जीत नहीं दिला सके। पूरी खबर यहां पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

चीन में फूड डिलीवरी ब्वॉय को सबसे बड़ा साहित्यिक सम्मान:खाना पहुंचाते समय लिखी कई कविताएं; 14 साल में पढ़ाई छूट गई थी

चीन में फूड डिलीवरी ब्वॉय को सबसे बड़ा साहित्यिक सम्मान:खाना पहुंचाते समय लिखी कई कविताएं; 14 साल में पढ़ाई छूट गई थी

चीन में फूड डिलीवरी का काम करने वाले 56 वर्षीय वांग जिबिंग को देश के सबसे प्रतिष्ठित साहित्यिक सम्मानों में से एक लू शुन साहित्य पुरस्कार मिला है। उनकी कविता संग्रह ‘लो फ्लाइट’ को यह सम्मान दिया गया है। इस किताब की कई कविताएं उन्होंने फूड डिलीवरी के बीच मिले खाली समय में कागज के छोटे-छोटे टुकड़ों पर लिखी थीं। वांग 2019 के आसपास फूड डिलीवरी राइडर बने थे। उनकी कविताएं सोशल मीडिया पर काफी लोकप्रिय हुए। उनकी नई किताब ‘लो फ्लाइट’ डिलीवरी राइडर्स की रोजमर्रा की परेशानियों, संघर्ष और जीवन पर आधारित है। यह किताब उन्होंने 2024 में प्रकाशित की थी। इसके लिए उन्होंने करीब 200 डिलीवरी राइडर्स से बातचीत की और उनके अनुभवों को अपनी कविताओं में दर्ज किया। उनकी एक कविता की पंक्ति है, “किसने कहा कि पंख फैलाने का मतलब सिर्फ ऊंची उड़ान भरना है? नीचे उड़ना भी उड़ान ही है।” वांग का जन्म चीन के जियांगसू प्रांत में हुआ था। आर्थिक तंगी के कारण उन्हें 14 साल की उम्र में ही पढ़ाई छोड़नी पड़ी। इसके बाद उन्होंने निर्माण मजदूर, कबाड़ बीनने वाले और सड़क किनारे सामान बेचने जैसे कई छोटे-मोटे काम किए। बाद में वे फूड डिलीवरी राइडर बन गए। हालांकि, पढ़ने-लिखने का उनका शौक कभी खत्म नहीं हुआ। एक कविता से मिली पहचान 2022 में उनकी कविता ‘मैन इन ए हरी’ सोशल मीडिया पर वायरल हो गई थी। यह कविता 2019 की एक घटना से प्रेरित थी। उस समय वह जियांगसू के कुनशान शहर में फूड डिलीवरी का काम कर रहे थे। एक ग्राहक ने गलत पता दर्ज कर दिया था। सही घर ढूंढने के लिए वांग को तीन रिहायशी इमारतों में भटकना पड़ा और 18 मंजिल तक सीढ़ियां चढ़नी पड़ीं। जब वह आखिरकार खाना लेकर पहुंचे तो ग्राहक ने देर होने पर उन्हें डांट दिया। घर लौटते समय उन्होंने अपनी नाराजगी और दर्द को शब्दों में ढाल दिया। इसी से उनकी कविता ‘मैन इन ए हरी’ जन्मी। यह कविता सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। यही से उनके साहित्यिक सफर की शुरुआत हुई। इसके बाद 2023 में उनका पहला कविता संग्रह ‘मैन इन ए हरी: पोएम्स ऑफ ए फूड डिलीवरी राइडर’ प्रकाशित हुआ। पुरस्कार मिलने के बाद भी नौकरी नहीं छोड़ेंगे पुरस्कार जीतने के बाद वांग ने सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स से कहा कि पुरस्कार मिलने की खबर आने तक वे बेहद घबराए हुए थे। उन्होंने बताया कि मीडिया का बढ़ता ध्यान उनके लिए मानसिक दबाव भी लेकर आया। उन्होंने साफ किया कि पुरस्कार मिलने के बावजूद वे अपनी नौकरी नहीं छोड़ेंगे। उनका कहना है कि वे 60 साल की उम्र तक फूड डिलीवरी का काम जारी रखना चाहते हैं। वांग ने कहा, अब मुझे जीवनयापन के लिए इस नौकरी की जरूरत नहीं है, लेकिन मुझे यह काम पसंद है। इससे मैं सक्रिय और फिट रहता हूं। मैं जमीन से जुड़ी जिंदगी जीना चाहता हूं और यह पुरस्कार मुझे नहीं बदलेगा। चीन में बढ़ रही है मजदूर लेखकों की पहचान वांग जिबिंग उन ब्लू-कॉलर कामगारों की नई पीढ़ी का हिस्सा हैं, जिन्हें हाल के कुछ साल में उनके साहित्यिक लेखन के लिए पहचान मिली है। उनकी रचनाएं चीन की तेजी से बढ़ती गिग इकोनॉमी में काम करने वाले लाखों लोगों के संघर्ष, दबाव और जीवन की सच्चाई को सामने लाती हैं। साल 2023 में पूर्व डिलीवरी कर्मी हू आनयान की आत्मकथा ‘आई डिलीवर पार्सल्स इन बीजिंग’ प्रकाशित हुई थी। यह किताब चीन में बेस्टसेलर बनी और विदेशों में भी चर्चा का विषय रही। पिछले साल इसका अंग्रेजी अनुवाद भी प्रकाशित हुआ। इसी तरह 2017 में प्रवासी मजदूर फान यूसु का आत्मकथात्मक लेख ‘आई एम फान यूसु’ चीन में इंटरनेट पर जबरदस्त वायरल हुआ था। इसे इतनी बड़ी प्रतिक्रिया मिली कि लगातार मीडिया की भीड़ से बचने के लिए फान को कुछ समय के लिए अपना घर तक छोड़ना पड़ा। लू शुन पुरस्कार चीन का सबसे बड़ा साहित्यिक सम्मान वांग जिबिंग को जिस लू शुन साहित्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया है, उसका नाम चीन के महान साहित्यकार लू शुन के नाम पर रखा गया है। उन्हें 20वीं सदी के चीन का सबसे प्रभावशाली लेखक माना जाता है। उन्होंने अपने व्यंग्यात्मक उपन्यासों और कहानियों के जरिए पारंपरिक चीनी समाज की कमियों और सामाजिक बुराइयों पर हमला बोला। लू शुन साहित्य पुरस्कार का आयोजन चाइना राइटर्स एसोसिएशन करता है। यह पुरस्कार हर चार साल में दिया जाता है और इसे चीन के सबसे बड़े साहित्यिक सम्मानों में गिना जाता है। इसकी शुरुआत समकालीन चीनी साहित्य की उत्कृष्ट रचनाओं को सम्मानित करने के लिए की गई थी। सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, यह पुरस्कार लंबे समय से चीन के मुख्यधारा के साहित्य का सबसे बड़ा पैमाना माना जाता रहा है और साहित्य जगत में इसका खास महत्व है।

चीन में फूड डिलीवरी ब्वॉय को सबसे बड़ा साहित्यिक सम्मान:खाना पहुंचाते समय लिखी कई कविताएं; 14 साल में पढ़ाई छूट गई थी

चीन में फूड डिलीवरी ब्वॉय को सबसे बड़ा साहित्यिक सम्मान:खाना पहुंचाते समय लिखी कई कविताएं; 14 साल में पढ़ाई छूट गई थी

चीन में फूड डिलीवरी का काम करने वाले 56 वर्षीय वांग जिबिंग को देश के सबसे प्रतिष्ठित साहित्यिक सम्मानों में से एक लू शुन साहित्य पुरस्कार मिला है। उनकी कविता संग्रह ‘लो फ्लाइट’ को यह सम्मान दिया गया है। इस किताब की कई कविताएं उन्होंने फूड डिलीवरी के बीच मिले खाली समय में कागज के छोटे-छोटे टुकड़ों पर लिखी थीं। वांग 2019 के आसपास फूड डिलीवरी राइडर बने थे। उनकी कविताएं सोशल मीडिया पर काफी लोकप्रिय हुए। उनकी नई किताब ‘लो फ्लाइट’ डिलीवरी राइडर्स की रोजमर्रा की परेशानियों, संघर्ष और जीवन पर आधारित है। यह किताब उन्होंने 2024 में प्रकाशित की थी। इसके लिए उन्होंने करीब 200 डिलीवरी राइडर्स से बातचीत की और उनके अनुभवों को अपनी कविताओं में दर्ज किया। उनकी एक कविता की पंक्ति है, “किसने कहा कि पंख फैलाने का मतलब सिर्फ ऊंची उड़ान भरना है? नीचे उड़ना भी उड़ान ही है।” वांग का जन्म चीन के जियांगसू प्रांत में हुआ था। आर्थिक तंगी के कारण उन्हें 14 साल की उम्र में ही पढ़ाई छोड़नी पड़ी। इसके बाद उन्होंने निर्माण मजदूर, कबाड़ बीनने वाले और सड़क किनारे सामान बेचने जैसे कई छोटे-मोटे काम किए। बाद में वे फूड डिलीवरी राइडर बन गए। हालांकि, पढ़ने-लिखने का उनका शौक कभी खत्म नहीं हुआ। एक कविता से मिली पहचान 2022 में उनकी कविता ‘मैन इन ए हरी’ सोशल मीडिया पर वायरल हो गई थी। यह कविता 2019 की एक घटना से प्रेरित थी। उस समय वह जियांगसू के कुनशान शहर में फूड डिलीवरी का काम कर रहे थे। एक ग्राहक ने गलत पता दर्ज कर दिया था। सही घर ढूंढने के लिए वांग को तीन रिहायशी इमारतों में भटकना पड़ा और 18 मंजिल तक सीढ़ियां चढ़नी पड़ीं। जब वह आखिरकार खाना लेकर पहुंचे तो ग्राहक ने देर होने पर उन्हें डांट दिया। घर लौटते समय उन्होंने अपनी नाराजगी और दर्द को शब्दों में ढाल दिया। इसी से उनकी कविता ‘मैन इन ए हरी’ जन्मी। यह कविता सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। यही से उनके साहित्यिक सफर की शुरुआत हुई। इसके बाद 2023 में उनका पहला कविता संग्रह ‘मैन इन ए हरी: पोएम्स ऑफ ए फूड डिलीवरी राइडर’ प्रकाशित हुआ। इस किताब की एक कविता में वह लिखते हैं, सड़क पर दौड़ता हर आम इंसान अपने हाथ में एक छोटी-सी रोशनी लिए चलता है। यही रोशनी पहले हमें रास्ता दिखाती है और फिर धीरे-धीरे पूरी दुनिया को रोशन कर देती है। 6 हजार से ज्यादा कविताएं लिख चुके वांग अब तक वह 6 हजार से अधिक कविताएं लिख चुके हैं। उनकी कई रचनाएं प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं। वांग कहते हैं, “लोग शायद मुझे याद न रखें, लेकिन उन्हें तेज रफ्तार से गुजरता एक फूड डिलीवरी राइडर जरूर याद रहता है।” यही सोच उन्हें लाखों डिलीवरी कर्मियों की जिंदगी पर किताब लिखने की प्रेरणा बनी। वांग का कहना है, मैं चाहता हूं कि इस किताब को पढ़ने के बाद लोग डिलीवरी राइडर्स के प्रति ज्यादा समझदारी और धैर्य दिखाएं, ताकि उनके साथ होने वाले विवाद कम हों। पुरस्कार मिलने के बाद भी नौकरी नहीं छोड़ेंगे पुरस्कार जीतने के बाद वांग ने सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स से कहा कि पुरस्कार मिलने की खबर आने तक वे बेहद घबराए हुए थे। उन्होंने बताया कि मीडिया का बढ़ता ध्यान उनके लिए मानसिक दबाव भी लेकर आया। उन्होंने साफ किया कि पुरस्कार मिलने के बावजूद वे अपनी नौकरी नहीं छोड़ेंगे। उनका कहना है कि वे 60 साल की उम्र तक फूड डिलीवरी का काम जारी रखना चाहते हैं। वांग ने कहा, अब मुझे जीवनयापन के लिए इस नौकरी की जरूरत नहीं है, लेकिन मुझे यह काम पसंद है। इससे मैं सक्रिय और फिट रहता हूं। मैं जमीन से जुड़ी जिंदगी जीना चाहता हूं और यह पुरस्कार मुझे नहीं बदलेगा। चीन में बढ़ रही है मजदूर लेखकों की पहचान वांग जिबिंग उन ब्लू-कॉलर कामगारों की नई पीढ़ी का हिस्सा हैं, जिन्हें हाल के कुछ साल में उनके साहित्यिक लेखन के लिए पहचान मिली है। उनकी रचनाएं चीन की तेजी से बढ़ती गिग इकोनॉमी में काम करने वाले लाखों लोगों के संघर्ष, दबाव और जीवन की सच्चाई को सामने लाती हैं। साल 2023 में पूर्व डिलीवरी कर्मी हू आनयान की आत्मकथा ‘आई डिलीवर पार्सल्स इन बीजिंग’ प्रकाशित हुई थी। यह किताब चीन में बेस्टसेलर बनी और विदेशों में भी चर्चा का विषय रही। पिछले साल इसका अंग्रेजी अनुवाद भी प्रकाशित हुआ। इसी तरह 2017 में प्रवासी मजदूर फान यूसु का आत्मकथात्मक लेख ‘आई एम फान यूसु’ चीन में इंटरनेट पर जबरदस्त वायरल हुआ था। इसे इतनी बड़ी प्रतिक्रिया मिली कि लगातार मीडिया की भीड़ से बचने के लिए फान को कुछ समय के लिए अपना घर तक छोड़ना पड़ा। लू शुन चीन का सबसे बड़ा साहित्यिक सम्मान वांग जिबिंग को जिस लू शुन साहित्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया है, उसका नाम चीन के महान साहित्यकार लू शुन के नाम पर रखा गया है। उन्हें 20वीं सदी के चीन का सबसे प्रभावशाली लेखक माना जाता है। उन्होंने अपने व्यंग्यात्मक उपन्यासों और कहानियों के जरिए पारंपरिक चीनी समाज की कमियों और सामाजिक बुराइयों पर हमला बोला। लू शुन साहित्य पुरस्कार का आयोजन चाइना राइटर्स एसोसिएशन करता है। यह पुरस्कार हर चार साल में दिया जाता है और इसे चीन के सबसे बड़े साहित्यिक सम्मानों में गिना जाता है। इसकी शुरुआत समकालीन चीनी साहित्य की उत्कृष्ट रचनाओं को सम्मानित करने के लिए की गई थी। सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, यह पुरस्कार लंबे समय से चीन के मुख्यधारा के साहित्य का सबसे बड़ा पैमाना माना जाता रहा है और साहित्य जगत में इसका खास महत्व है।

अर्जुन कपूर और साहिबा बाली भारत-इंग्लैंड का मैच देखने पहुंचे:डेटिंग की खबरों पर एक्ट्रेस ने दिया रिएक्शन, अनुष्का शर्मा समझ बैठे थे लोग

अर्जुन कपूर और साहिबा बाली भारत-इंग्लैंड का मैच देखने पहुंचे:डेटिंग की खबरों पर एक्ट्रेस ने दिया रिएक्शन, अनुष्का शर्मा समझ बैठे थे लोग

बॉलीवुड एक्टर अर्जुन कपूर और एक्ट्रेस साहिबा बाली रविवार को लंदन के लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड में एक साथ देखा गया। दोनों वहां भारत और इंग्लैंड के बीच खेले जा रहे तीसरे वनडे मैच को देखने पहुंचे थे। स्टेडियम से दोनों की तस्वीरें सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर उनके डेटिंग की चर्चा शुरू हो गई। अब साहिबा बाली ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर अर्जुन कपूर के साथ एक फोटो शेयर करते हुए इन अफवाहों पर प्रतिक्रिया दी है। साहिबा ने एक मैसेज लिखकर फैंस से ऐसी खबरों पर भरोसा न करने की बात कही है। स्टोरी पर लिखा- ‘हर बात पर भरोसा मत करो’ साहिबा बाली ने अपने इंस्टाग्राम स्टोरीज पर लॉर्ड्स स्टेडियम की एक तस्वीर शेयर की है, जिसमें वे अर्जुन कपूर के साथ पोज देती नजर आ रही हैं। इस तस्वीर के साथ साहिबा ने सीधे तौर पर अफेयर की खबरों को खारिज नहीं किया, बल्कि एक अलग अंदाज में लिखा, ‘डोंट बिलीव एवरीथिंग पार्ट 2’ (हर बात पर भरोसा मत करो)। साहिबा की इस पोस्ट से साफ है कि वे अपने और अर्जुन के रिश्ते को लेकर सोशल मीडिया पर चल रहे दावों को गलत बता रही हैं। अनुष्का शर्मा समझ बैठे थे लोग साहिबा ने अपनी पोस्ट में ‘पार्ट 2’ लिखने की वजह भी साफ की है। दरअसल, अर्जुन कपूर के साथ फोटो शेयर करने से ठीक पहले उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट का स्क्रीनशॉट शेयर किया था। उस पोस्ट में किसी यूजर ने साहिबा को भूल से विराट कोहली की पत्नी और एक्ट्रेस अनुष्का शर्मा समझ लिया था। इस गलती पर रिएक्शन देते हुए साहिबा ने पहले लिखा था, ‘डोंट बिलीव एवरीथिंग पार्ट 1’। इसके तुरंत बाद उन्होंने अर्जुन के साथ वाली फोटो पोस्ट की और उसे पार्ट 2 नाम दिया। इम्तियाज अली की फिल्म से किया था डेब्यू साहिबा बाली ने साल 2018 में इम्तियाज अली की रोमांटिक ड्रामा फिल्म ‘लैला मजनू’ से बॉलीवुड में अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद वे ‘बार्ड ऑफ ब्लड’, ‘अमर सिंह चमकीला’ और ‘तनाव’ जैसी चर्चित वेब सीरीज और फिल्मों में नजर आ चुकी हैं। एक्टिंग के अलावा साहिबा सोशल मीडिया पर कंटेंट क्रिएशन, पॉडकास्ट और ब्रैंड एंडोर्समेंट के लिए भी जानी जाती हैं, जहां उनकी अच्छी खासी फैन फॉलोइंग है। मलाइका अरोड़ा से 2024 में अलग हुए थे अर्जुन कपूर अर्जुन कपूर के पर्सनल लाइफ की बात करें तो वे लंबे समय तक मलाइका अरोड़ा के साथ रिलेशनशिप में थे। दोनों ने साल 2018 में एक-दूसरे को डेट करना शुरू किया था। वे बॉलीवुड के सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाले कपल्स में से एक थे। करीब 6 साल तक साथ रहने के बाद साल 2024 में दोनों के अलग होने की खबरें सामने आई थीं। इसके बाद से अर्जुन कपूर का नाम किसी के साथ नहीं जुड़ा था, लेकिन लंदन में साहिबा के साथ दिखने पर फिर से कयास लगाए जाने लगे। हाल ही में फिल्म ‘मेरे हस्बैंड की बीवी’ में आए नजर वर्कफ्रंट पर अर्जुन कपूर को आखिरी बार साल 2025 में रिलीज हुई रोमांटिक कॉमेडी फिल्म ‘मेरे हस्बैंड की बीवी’ में देखा गया था। मुदस्सर अजीज के डायरेक्शन में बनी इस फिल्म में उनके साथ भूमि पेडनेकर और रकुल प्रीत सिंह मुख्य भूमिकाओं में थीं। अर्जुन ने अभी अपने किसी नए प्रोजेक्ट की घोषणा नहीं की है।

अर्जुन कपूर और साहिबा बाली भारत-इंग्लैंड का मैच देखने पहुंचे:डेटिंग की खबरों पर एक्ट्रेस ने दिया रिएक्शन, अनुष्का शर्मा समझ बैठे थे लोग

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बॉलीवुड एक्टर अर्जुन कपूर और एक्ट्रेस साहिबा बाली रविवार को लंदन के लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड में एक साथ देखा गया। दोनों वहां भारत और इंग्लैंड के बीच खेले जा रहे तीसरे वनडे मैच को देखने पहुंचे थे। स्टेडियम से दोनों की तस्वीरें सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर उनके डेटिंग की चर्चा शुरू हो गई। अब साहिबा बाली ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर अर्जुन कपूर के साथ एक फोटो शेयर करते हुए इन अफवाहों पर प्रतिक्रिया दी है। साहिबा ने एक मैसेज लिखकर फैंस से ऐसी खबरों पर भरोसा न करने की बात कही है। स्टोरी पर लिखा- ‘हर बात पर भरोसा मत करो’ साहिबा बाली ने अपने इंस्टाग्राम स्टोरीज पर लॉर्ड्स स्टेडियम की एक तस्वीर शेयर की है, जिसमें वे अर्जुन कपूर के साथ पोज देती नजर आ रही हैं। इस तस्वीर के साथ साहिबा ने सीधे तौर पर अफेयर की खबरों को खारिज नहीं किया, बल्कि एक अलग अंदाज में लिखा, ‘डोंट बिलीव एवरीथिंग पार्ट 2’ (हर बात पर भरोसा मत करो)। साहिबा की इस पोस्ट से साफ है कि वे अपने और अर्जुन के रिश्ते को लेकर सोशल मीडिया पर चल रहे दावों को गलत बता रही हैं। अनुष्का शर्मा समझ बैठे थे लोग साहिबा ने अपनी पोस्ट में ‘पार्ट 2’ लिखने की वजह भी साफ की है। दरअसल, अर्जुन कपूर के साथ फोटो शेयर करने से ठीक पहले उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट का स्क्रीनशॉट शेयर किया था। उस पोस्ट में किसी यूजर ने साहिबा को भूल से विराट कोहली की पत्नी और एक्ट्रेस अनुष्का शर्मा समझ लिया था। इस गलती पर रिएक्शन देते हुए साहिबा ने पहले लिखा था, ‘डोंट बिलीव एवरीथिंग पार्ट 1’। इसके तुरंत बाद उन्होंने अर्जुन के साथ वाली फोटो पोस्ट की और उसे पार्ट 2 नाम दिया। इम्तियाज अली की फिल्म से किया था डेब्यू साहिबा बाली ने साल 2018 में इम्तियाज अली की रोमांटिक ड्रामा फिल्म ‘लैला मजनू’ से बॉलीवुड में अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद वे ‘बार्ड ऑफ ब्लड’, ‘अमर सिंह चमकीला’ और ‘तनाव’ जैसी चर्चित वेब सीरीज और फिल्मों में नजर आ चुकी हैं। एक्टिंग के अलावा साहिबा सोशल मीडिया पर कंटेंट क्रिएशन, पॉडकास्ट और ब्रैंड एंडोर्समेंट के लिए भी जानी जाती हैं, जहां उनकी अच्छी खासी फैन फॉलोइंग है। मलाइका अरोड़ा से 2024 में अलग हुए थे अर्जुन कपूर अर्जुन कपूर के पर्सनल लाइफ की बात करें तो वे लंबे समय तक मलाइका अरोड़ा के साथ रिलेशनशिप में थे। दोनों ने साल 2018 में एक-दूसरे को डेट करना शुरू किया था। वे बॉलीवुड के सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाले कपल्स में से एक थे। करीब 6 साल तक साथ रहने के बाद साल 2024 में दोनों के अलग होने की खबरें सामने आई थीं। इसके बाद से अर्जुन कपूर का नाम किसी के साथ नहीं जुड़ा था, लेकिन लंदन में साहिबा के साथ दिखने पर फिर से कयास लगाए जाने लगे। हाल ही में फिल्म ‘मेरे हस्बैंड की बीवी’ में आए नजर वर्कफ्रंट पर अर्जुन कपूर को आखिरी बार साल 2025 में रिलीज हुई रोमांटिक कॉमेडी फिल्म ‘मेरे हस्बैंड की बीवी’ में देखा गया था। मुदस्सर अजीज के डायरेक्शन में बनी इस फिल्म में उनके साथ भूमि पेडनेकर और रकुल प्रीत सिंह मुख्य भूमिकाओं में थीं। अर्जुन ने अभी अपने किसी नए प्रोजेक्ट की घोषणा नहीं की है।

India Crude Oil Price Hike

India Crude Oil Price Hike

नई दिल्ली9 मिनट पहले कॉपी लिंक ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर तेजी देखी जा रही है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड ऑयल आज 90 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। तेल की बढ़ती कीमतों ने भारत में महंगाई और एनर्जी शॉक के जोखिम को बढ़ा दिया है। इससे भारतीय रुपए और विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) के फ्लो पर असर पड़ने की संभावना है। दूसरी ओर, कच्चे तेल के महंगे होने से भारत की ऑइल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) के रिटेल फ्यूल मार्जिन पर भारी दबाव पड़ा है, जिससे डीजल पर कंपनियों को प्रति लीटर 20.4 रुपए का घाटा हो रहा है। हालांकि, रिफाइनिंग मार्जिन में भारी उछाल के कारण कंपनियों का ओवरऑल मुनाफा फिलहाल संभला हुआ है। 1. ब्रेंट क्रूड 90 डॉलर के पार, एक हफ्ते में 16% उछला अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 2.69 डॉलर (3.05%) बढ़कर 90.79 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जो 11 जून के बाद का उच्चतम स्तर है। बीते एक हफ्ते में ब्रेंट क्रूड में 16% की तेजी आई है, जो अप्रैल के बाद किसी एक हफ्ते की सबसे बड़ी बढ़त है। अभी ब्रेंट क्रूड 88.43 डॉलर प्रति बैरल और अमेरिकी WTI क्रूड 82.40 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। वहीं इंडियन क्रूड बास्केट 81 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है। 2. एक्सपर्ट्स बोले- भारत पर एनर्जी शॉक और रुपए का खतरा जीओजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वी.के. विजयकुमार ने कहा कि मार्केट के सामने अभी नियर-टर्म में कई चुनौतियां हैं। सबसे बड़ा दबाव अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड का 90 डॉलर के पार जाना है। अगर यह ट्रेंड जारी रहता है, तो भारत में एनर्जी शॉक का खतरा फिर उभरेगा। इसका सीधा नकारात्मक असर रुपए की चाल और FPI फ्लो पर पड़ सकता है। बैंक ऑफ बड़ौदा ने भी अपनी रिपोर्ट में चेतावनी दी है कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से वैश्विक स्तर पर ‘महंगाई की चिंताएं’ फिर से उभर आई हैं। 3. अमेरिका में फिर बढ़ सकती हैं ब्याज दरें: रेट हाइक की संभावना 52% बैंक ऑफ बड़ौदा की रिपोर्ट के अनुसार, क्लीवलैंड फेड अध्यक्ष के बयान के बाद अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा सितंबर 2026 की मीटिंग में ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना बढ़ गई है। फेड रेट हाइक की संभावना: सितंबर 2026 की बैठक में ब्याज दर बढ़ने की संभावना 16 जुलाई 2026 के 47% से बढ़कर अब 52.4% हो गई है। US इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन: अमेरिका में मई 2026 के दौरान इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन में महीने-दर-महीने आधार पर 0.1% की मामूली बढ़त दर्ज हुई है। करेंसी मार्केट पर असर: अमेरिका-ईरान तनाव के बीच ब्रिटिश पाउंड में सबसे ज्यादा गिरावट आई। वहीं रुपया अन्य एशियाई मुद्राओं की तर्ज पर कमजोर हुआ है। 4. अमेरिकी शेयर बाजारों में हलचल, 2000 अंक के उछाल पर ब्रेक एचडीएफसी सिक्योरिटीज के प्राइम रिसर्च हेड देवर्ष वकील ने बताया कि अमेरिकी बाजारों में इस हफ्ते भारी अस्थिरता देखने को मिली है। देवर्ष वकील के मुताबिक, अमेरिका-ईरान संघर्ष में नए हमलों, टेक सेक्टर में रोटेशन और महंगाई के आंकड़ों ने प्रमुख इंडेक्स को नीचे खींच दिया, जिससे मिड-समर की बढ़त का सिलसिला टूट गया। वीकेंड पर अमेरिका और ईरान के बीच नए हमले हुए हैं। ईरान ने कहा है कि दोनों देशों के बीच सीजफायर पूरी तरह खत्म हो चुका है, जिससे दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री तेल मार्गों में सप्लाई बाधित होने का डर बढ़ गया है। 5. तेल कंपनियों का पेट्रोल मार्जिन गिरा, डीजल पर प्रति लीटर ₹20 का घाटा इक्किरिटी सिक्योरिटीज की साप्ताहिक रिपोर्ट के मुताबिक, कच्चे तेल के दामों में उछाल से भारत की सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियों- BPCL, HPCL, IOCL का फ्यूल रिटेलिंग मार्जिन काफी कम हो गया है। पेट्रोल मार्जिन: पेट्रोल का मार्केटिंग मार्जिन हफ्ते-दर-हफ्ते 42.1% गिरकर 4.5 रुपए प्रति लीटर रह गया है। डीजल मार्जिन: डीजल का मार्जिन भी गिरा है। पिछले हफ्ते -15.4 रुपए प्रति लीटर की तुलना में अब कंपनियों को प्रति लीटर -20.4 रुपए का घाटा हो रहा। 6. रिफाइनिंग स्प्रेड में उछाल: डीजल क्रैक 99% बढ़कर सपोर्ट दे रहा रिटेल मार्जिन में नुकसान के बावजूद तेल कंपनियों के रिफाइनिंग कारोबार में जोरदार सुधार आया है, जिससे कंपनियों की कुल इंटीग्रेटेड प्रॉफिटेबिलिटी बची हुई है। गैसोलीन (पेट्रोल) क्रैक स्प्रेड: 15.8% बढ़कर 27.3 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचा, जो 1 साल के औसत से 69% ज्यादा है। गैसऑयल (डीजल) क्रैक स्प्रेड: 12.5% बढ़कर 65.2 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचा, जो 1 साल के औसत से 99% ज्यादा है। रूसी एक्सपोर्ट बैन: रूस द्वारा डीजल निर्यात पर लगाए प्रतिबंधों और पश्चिम एशिया के तनाव से ग्लोबल मार्केट में रिफाइंड प्रोडक्ट्स की तंग सप्लाई बनी हुई है। 7. 1-2 तिमाही तक रिफाइनर्स को मिल सकती है राहत इक्किरिटी सिक्योरिटीज के अनुसार, भले ही रिटेल फ्यूल मार्जिन कमजोर हुआ हो, लेकिन रिफाइनिंग और मार्केटिंग के 1:1 के संयुक्त मार्जिन अभी भी ऐतिहासिक स्तरों से काफी ऊपर हैं। पेट्रोल का इंटीग्रेटेड मार्जिन 4.3% घटकर 21.0 रुपए/लीटर और डीजल का 2.5% घटकर 19.1 रुपए/लीटर पर आ गया है। हालांकि, यह 3 महीने के औसत से क्रमश: 58.7% और 34.6% अधिक है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगले 1 से 2 तिमाहियों तक मजबूत डीजल क्रैक कंपनियों की कमाई को सपोर्ट देंगे। रिफाइनरी का इस्तेमाल बढ़ने और इन्वेंट्री रीबिल्ड होने के बाद ये असाधारण मार्जिन सामान्य हो जाएंगे। क्या होते हैं ‘क्रैक स्प्रेड्स’ और ‘इंटीग्रेटेड मार्जिन’? क्रैक स्प्रेड: कच्चे तेल की कीमत और उससे बनने वाले रिफाइंड प्रोडक्ट्स (जैसे पेट्रोल, डीजल, एटीएफ) के बाजार मूल्य के बीच का अंतर ही ‘क्रैक स्प्रेड’ कहलाता है। यह रिफाइनिंग कंपनियों के मुनाफे को दर्शाता है। इंटीग्रेटेड मार्जिन: जब किसी तेल कंपनी के रिफाइनिंग मार्जिन (कच्चा तेल प्रोसेस करने का मुनाफा) और मार्केटिंग मार्जिन (पेट्रोल पंप पर पेट्रोल-डीजल बेचने का फायदा/नुकसान) दोनों को 1:1 के अनुपात में मिलाकर देखा जाता है, तो उसे इंटीग्रेटेड मार्जिन कहते हैं। ये खबर भी पढ़ें… आज सोना ₹756 और चांदी ₹3493 महंगी हुई: 10 ग्राम गोल्ड ₹1.42 लाख पर और 1 किलो चांदी की कीमत ₹2.19 लाख पहुंची सोने-चांदी की कीमतों में आज तेजी है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, एक किलो चांदी 3,493

Jasmine Sandlas Dehradun Show Controversy

Jasmine Sandlas Dehradun Show Controversy

पंजाबी सिंगर जैस्मिन सैंडलस का 17 जुलाई को देहरादून में हुआ था LIVE शो। देहरादून में 17 जुलाई को हुए पंजाबी सिंगर जैस्मिन सैंडलस के शो की कुछ फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल किए जा रहे हैं। इन पोस्ट में कुछ यूजर्स ने दावा किया है कि शो के दौरान जैस्मिन के साथ कथित तौर पर छेड़छाड़ की गई। हालांकि, कार्यक्रम के दौरान या . जैस्मिन शाम करीब 8 बजे देहरादून के परेड ग्राउंड पहुंची थीं। भारत सरकार के अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय और उत्तराखंड अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ विकास निगम की ओर से आयोजित लोकपर्व कार्यक्रम में उन्हें प्रस्तुति के लिए बुलाया गया था। शो के दौरान जैस्मिन ने खुद कुछ लड़कियों को स्टेज के पास बुलाया था। इस दौरान कई लड़कियों ने उनसे गले मिलकर फोटो और वीडियो बनवाए। इन्हीं तस्वीरों और वीडियो को अब सोशल मीडिया पर अलग-अलग दावों के साथ शेयर किया जा रहा है। कार्यक्रम के दौरान जैस्मिन ने महिलाओं की सुरक्षा और ग्राउंड में मौजूद लड़कियों की सेफ्टी का मुद्दा भी उठाया था। पूरे शो के दौरान उन्होंने और उनकी टीम ने किसी भी तरह की कोई शिकायत या आपत्ति नहीं जताई। कार्यक्रम बिना किसी रुकावट के करीब डेढ़ घंटे तक चला। मौके पर पुलिस अधिकारी तैनात थे और जैस्मिन की सुरक्षा के लिए उनके निजी सुरक्षा गार्ड भी मौजूद थे। शो करने के बाद जैस्मिन वहां से रवाना हो गईं। जैस्मिन सैंडलस के शो की PHOTOS… देहरादून में 17 जुलाई को जैस्मिन सैंडलस ने खुद फैंस को अपने पास बुलाया था। फैंस ने जैस्मिन सैंडलस को दिए लाल गुलाब। फैंस की बढ़ती भीड़ को देख जैस्मिन ने वापस भेजा। चढ़ गई शराब तेरी गाने पर डांस करती जैस्मिन। जैस्मिन ने देहरादून में गाना धुरंधर फिल्म का गाना गया। अब पढ़िए जैस्मिन का सिंगर बनने का पूरा सफर… 1985 में पंजाब के जालंधर में जन्म: जालंधर में 1985 में जन्मी जैस्मिन को स्कूल की पढ़ाई से ज्यादा संगीत की क्लास पसंद थी। आज ग्लोबल पंजाबी पॉप स्टार बन चुकीं जैस्मिन को फैंस ने गुलाबी क्वीन का टैग दिया है। उनके जीवन की कहानी सिर्फ हिट गानों की नहीं है, बल्कि यह कहानी दूसरे देश में किए संघर्ष की है। फिल्म धुरंधर की हालिया ब्लॉकबस्टर सफलता और जैस्मिन के गीत ने फिर साबित कर दिया है कि उनका जादू बरकरार है। 6 साल की उम्र में शुरू कर दिया था गाना: जैस्मिन सैंडलस बताती हैं कि स्कूल में उन्हें मैथ या साइंस की क्लास बोरिंग लगती थी। उनका मन हमेशा म्यूजिक क्लास में रमता था। 6 साल की उम्र में उन्होंने गाना शुरू कर दिया था। उनकी मां ने हमेशा उनके इस जुनून को समझा और उन्हें प्रोत्साहित किया। 13 साल की उम्र में परिवार जालंधर से कैलिफोर्निया गया: जब जैस्मिन 13 साल की थी तब उनके जीवन में एक बड़ा मोड़ आया। उनका परिवार स्टॉकटन, कैलिफोर्निया (अमेरिका) शिफ्ट हो गया। एक नए देश में बिना किसी दोस्त और बिना किसी जान-पहचान के जैस्मिन ने अपनी पहचान बनाई। इस मुश्किल दौर में संगीत ही उनका एकमात्र सहारा बना। उन्होंने कविताएं लिखने शुरू कीं और धीरे-धीरे उन्हें धुनों में ढालने लगीं। यहीं पर उन्होंने अपनी पंजाबी जड़ों के संगीत को वेस्ट कोस्ट हिप-हॉप के साथ मिलाकर अलग स्टाइल बनाया। 20 रुपए की सीडी बेचने के लिए क्लबों के बाहर खड़ी रहीं: एक इंटरव्यू में जैस्मिन ने बताया कि सक्सेस रातों-रात नहीं मिली। इसके लिए अपने गीतों की सीडी बनाकर और उसे 20 रुपए में बेचने के लिए घर से निकलती थीं। वह अमेरिका के क्लबों के बाहर घंटों खड़ी रहती थीं। आने-जाने वाले लोगों को अपनी सीडी थमाती थीं। इस उम्मीद में कि कोई एक बार उनका संगीत सुन ले। उनके पास कोई गॉडफादर नहीं था। जैस्मिन ने देहरादून में ज्यादातर पंजाबी गाने गए। गुलाबी एल्बम से मिली पहचान, बॉलीवुड तक पहुंचीं जैस्मिन का 2008 में पहला गाना मुस्कान हिट हुआ। लेकिन असली पहचान उन्हें 2012 में एल्बम गुलाबी से मिली, जिसमें उन्होंने रैपर बोहेमिया के साथ काम किया। 2014 में बॉलीवुड ने उनकी आवाज को पहचाना। सलमान खान की फिल्म किक के लिए यो यो हनी सिंह के साथ गाए गाने यार ना मिले को लोगों ने खूब पसंद किया। इस एक गाने ने जैस्मिन को रातों-रात स्टार बना दिया। इसके बाद गैरी संधू के साथ इलीगल वेपन जैसे गानों ने उन्हें घर-घर में फेमस कर दिया। सबसे मोटी फीस और करोड़ों की नेटवर्थ संघर्ष के दिनों से लेकर आज तक जैस्मिन की फीस में जमीन-आसमान का अंतर आया है। अब जैस्मिन बॉलीवुड या फिल्म के गानों के लिए 30 लाख से 35 लाख प्रति गाना चार्ज करती हैं। उनके एक लाइव कॉन्सर्ट की फीस भी लगभग 10 लाख से 25 लाख के बीच बताई जाती है। उनकी अनुमानित नेटवर्थ लगभग 60 करोड़ रुपए है। इंडिया टूर का शानदार आगाज आपको बता दें कि ‘द ड्रीम गर्ल इंडिया टूर’ 11 जुलाई को दिल्ली से शुरू हुआ है। इसके बाद यह कारवां 17 जुलाई को देहरादून, 18 जुलाई को मुंबई, 25 जुलाई को बेंगलुरु और 29 अगस्त को चंडीगढ़ पहुंचेगा। ————————————————————— ये खबर भी पढ़ें… उत्तराखंड कूच करने वाले निहंग की पिटाई का VIDEO:आपत्तिजनक PHOTOS हुई थी लीक; डंडे पड़े तो जसदीप बोला- हाय बाबा जी उत्तराखंड कूच के दौरान निहंगों में शामिल रहे निहंग जसदीप सिंह की एक युवक के साथ आपत्तिजनक स्थिति में कई तस्वीरें सामने आने के बाद अब उन पर कार्रवाई की गई है। पंजाब में निहंग जसदीप सिंह को धार्मिक सजा दी गई है। इसके तहत जसदीप सिंह को जंजीरों से बांधा गया और डंडों से पैरों के तलवों पर मार भी लगाई गई। (पढ़ें पूरी खबर)

'पाकिस्तान में घिर गए थे शायर निदा फाजली':कहा गया- बच्चे को अल्लाह से बड़ा बता रहे हो? अतुल गंगवार ने बताया क्या था जवाब

'पाकिस्तान में घिर गए थे शायर निदा फाजली':कहा गया- बच्चे को अल्लाह से बड़ा बता रहे हो? अतुल गंगवार ने बताया क्या था जवाब

दिवंगत शायर निदा फाजली के जीवन पर बनी डॉक्यूमेंट्री ‘मैं निदा’ को 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में ‘बेस्ट आर्ट्स एंड कल्चर फिल्म’ का पुरस्कार मिला है। इस डॉक्यूमेंट्री के निर्माता अतुल गंगवार पिछले करीब ढाई दशक तक निदा फाजली के बेहद करीब रहे। उन्होंने सिर्फ उनके साथ काम ही नहीं किया, बल्कि उनकी निजी जिंदगी, संघर्ष, रिश्तों और सोच को भी बहुत करीब से देखा। दैनिक भास्कर से बातचीत में अतुल गंगवार ने निदा फाजली की निजी जिंदगी, पाकिस्तान में बसे परिवार, पिता से जुड़ा दर्द, जगजीत सिंह के साथ उनकी दोस्ती और उनकी जिंदगी के कई अनसुने किस्से शेयर किए। सवाल: निदा फाजली से आपकी पहली मुलाकात कब हुई थी? जवाब: पहली मुलाकात 1998 में हुई थी। हम ‘अदबी कॉकटेल’ नाम का एक शो बना रहे थे और उसके लेखक निदा साहब थे। उसी दौरान उन्होंने हमारी मुलाकात तलत अजीज साहब, मुकरी साहब (मोहम्मद उमर मुकरी) और कई बड़े कलाकारों से कराई। वहीं से हमारा रिश्ता शुरू हुआ, जो सालों तक चलता रहा। सवाल: आखिर कब लगा कि निदा फाजली की जिंदगी पर डॉक्यूमेंट्री बननी चाहिए? जवाब: उनके साथ काम करते-करते एहसास हुआ कि वह सिर्फ बड़े शायर नहीं, बल्कि बहुत बड़े इंसान भी थे। उनके जरिए मैं जॉनी वॉकर, टुनटुन, हसन कमाल, जावेद सिद्दीकी, राकेश बेदी और कई दिग्गजों से मिला। उन्होंने मुझे जिंदगी को देखने का नजरिया दिया। तभी लगा कि उनकी कहानी आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचनी चाहिए। सवाल: निदा फाजली के परिवार का बड़ा हिस्सा पाकिस्तान चला गया था। क्या वह इस दर्द के बारे में आपसे बात करते थे? जवाब: निजी तौर पर वह इस बारे में बहुत कम बात करते थे, लेकिन जो कहना होता था, वह अपनी शायरी में कह देते थे। अपने पिता के इंतकाल के बाद, जब वह उनके जनाजे में शामिल नहीं हो पाए, तब उन्होंने मशहूर नज्म ‘तुम्हारी कब्र पर मैं फातिहा पढ़ने नहीं आया’ लिखी। उसमें उनका पूरा दर्द दिखाई देता है। सवाल: निदा फाजली अपनी मां और पिता को किस तरह याद करते थे? जवाब: मां के लिए उन्होंने लिखा- ‘बेसन की सोंधी रोटी पे खट्टी चटनी जैसी मां।’ पिता के लिए उनकी नज्म आज भी पढ़िए तो आंखें नम हो जाती हैं, लेकिन बातचीत में वह कभी अतीत में नहीं जीते थे। उनका पूरा ध्यान वर्तमान और भविष्य पर रहता था। सवाल: निदा फाजली के साथ जुड़ा कोई ऐसा किस्सा जो आज भी याद हो? जवाब: एक बार मैं उनके घर गया तो उनके हाथ में चोट लगी थी। मैंने पूछा, “क्या हुआ?” हंसते हुए बोले, “मुशायरे में थक गया था। मंच पर पीछे टेंट समझकर टिक गया। पता चला पीछे कुछ नहीं था और सीधे नीचे गिर गया।” सबसे बड़ी बात यह थी कि वह खुद पर भी खुलकर हंस सकते थे। सवाल: निदा फाजली और जगजीत सिंह से जुड़ा कोई खास किस्सा जो आपको आज भी याद हो? जवाब: एक बार मुझे किसी बच्ची के लिए रिकमेंडेशन लेटर चाहिए था। निदा साहब ने एयरपोर्ट बुलाया। वहां जगजीत सिंह और के एस चित्रा भी मौजूद थे। मेरे पास खाली कागज था। निदा साहब ने वहीं तुरंत अपने हाथ से रिकमेंडेशन लिख दिया और जगजीत सिंह से उस पर साइन करवा दिए। उनकी हाजिरजवाबी और समझ कमाल की थी। एक बार का किस्सा मुझे बहुत अच्छे से याद है। दिल्ली यूनिवर्सिटी के मेरे एक प्रोफेसर थे। उनकी भतीजी के कुछ डॉक्यूमेंट्स पर साइन कराने थे। एक तरह का एप्रिसिएशन उनके लिए कि वो बच्ची बहुत अच्छा गाती है। तो मैंने निदा साहब से बात की। वो बोले, “मैं दिल्ली आ रहा हूं, तो तुम एयरपोर्ट मुझसे मिलने आ जाओ।” मैं वहां पहुंचा तो देखा कि साथ में जगजीत सिंह जी, चित्रा जी और निदा साहब तो थे ही। मैंने उनसे कहा, “जी, वो चिट्ठी चाहिए आपसे।” वो बोले, “लाओ।” मैं वहीं पास के एक काउंटर से कागज लेकर आया। उनके पास पहुंचा तो फिर उन्होंने जगजीत सिंह जी से कहा, “चलो, इस पर साइन कर दो।” कागज ब्लैंक था। चित्रा जी पीछे खड़ी थीं। जगजीत सिंह जी ने पीछे मुड़कर देखा तो चित्रा जी देख रही थीं कि भई, ये ब्लैंक पेपर पर साइन तो नहीं कर रहे। ब्लैंक पेपर पर साइन करना बड़ी बात है। निदा साहब समझ गए। उन्होंने खट से अपने हाथ से एक एप्रिसिएशन लेटर लिखा और फिर उस पर जगजीत सिंह जी के साइन करवा दिए। सवाल: निदा फाजली और जगजीत सिंह की दोस्ती कैसी थी? जवाब: दोनों का रिश्ता सिर्फ प्रोफेशनल नहीं, बहुत व्यक्तिगत भी था। जगजीत सिंह की सबसे चर्चित एल्बम ‘इनसाइट’ में निदा साहब की लिखी गजलें थीं। दोनों अक्सर साथ बैठते थे। हारमोनियम निकलता था और वहीं बैठकर नई गजलें तैयार होती थीं। सवाल: क्या निदा फाजली और जगजीत सिंह के बीच कभी मजेदार नोकझोंक भी होती थी? जवाब: एक बार हमारे एक परिचित को जगजीत सिंह का शो कराना था। मैंने निदा साहब से कहा कि आप बात कर देंगे तो शायद फीस कम हो जाएगी। उन्होंने हंसते हुए कहा, “मेरा नाम मत लेना। अगर मेरा नाम लिया तो वो तुम्हें डिस्काउंट नहीं देगा, उल्टा मुझे किसी मुशायरे में मुफ्त में पढ़ने बुला लेगा।” बाद में हुआ यह कि जगजीत सिंह ने अपनी फीस तो पूरी रखी, लेकिन पूरे शो की स्पॉन्सरशिप ही करवा दी। यानी आयोजकों पर कोई बोझ नहीं पड़ा। यही दोनों की दोस्ती थी। सवाल: डॉक्यूमेंट्री बनाने में सबसे बड़ी चुनौती क्या रही? जवाब: सबसे बड़ी चुनौती थी सालों की यादों और फुटेज को समेटना। दूसरी चुनौती यह थी कि लेखकों को फिल्म इंडस्ट्री उतना याद नहीं रखती, जितना अभिनेता या निर्देशक को रखती है। लेकिन जिन लोगों ने सच में निदा साहब को जाना था, उन्होंने हमारी हर संभव मदद की। सवाल: क्या किसी कलाकार ने भी इस सफर में मदद की? जवाब: जी हां। सिंगर शान ने बिना किसी हिचकिचाहट के इंटरव्यू दिया। उनके पिता मानस मुखर्जी, निदा साहब के बहुत अच्छे दोस्त थे। उन्होंने अपने पिता और निदा साहब के रिश्ते पर खुलकर बात की। इससे डॉक्यूमेंट्री और समृद्ध हुई। सवाल: पाकिस्तान में निदा फाजली की एक शायरी पर काफी विवाद हुआ था। जवाब: जी। उन्होंने पढ़ा था- ‘घर से मस्जिद है बहुत दूर, चलो यूं कर लें,

'पाकिस्तान में घिर गए थे शायर निदा फाजली':कहा गया- बच्चे को अल्लाह से बड़ा बता रहे हो? अतुल गंगवार ने बताया क्या था जवाब

'पाकिस्तान में घिर गए थे शायर निदा फाजली':कहा गया- बच्चे को अल्लाह से बड़ा बता रहे हो? अतुल गंगवार ने बताया क्या था जवाब

दिवंगत शायर निदा फाजली के जीवन पर बनी डॉक्यूमेंट्री ‘मैं निदा’ को 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में ‘बेस्ट आर्ट्स एंड कल्चर फिल्म’ का पुरस्कार मिला है। इस डॉक्यूमेंट्री के निर्माता अतुल गंगवार पिछले करीब ढाई दशक तक निदा फाजली के बेहद करीब रहे। उन्होंने सिर्फ उनके साथ काम ही नहीं किया, बल्कि उनकी निजी जिंदगी, संघर्ष, रिश्तों और सोच को भी बहुत करीब से देखा। दैनिक भास्कर से बातचीत में अतुल गंगवार ने निदा फाजली की निजी जिंदगी, पाकिस्तान में बसे परिवार, पिता से जुड़ा दर्द, जगजीत सिंह के साथ उनकी दोस्ती और उनकी जिंदगी के कई अनसुने किस्से शेयर किए। सवाल: निदा फाजली से आपकी पहली मुलाकात कब हुई थी? जवाब: पहली मुलाकात 1998 में हुई थी। हम ‘अदबी कॉकटेल’ नाम का एक शो बना रहे थे और उसके लेखक निदा साहब थे। उसी दौरान उन्होंने हमारी मुलाकात तलत अजीज साहब, मुकरी साहब (मोहम्मद उमर मुकरी) और कई बड़े कलाकारों से कराई। वहीं से हमारा रिश्ता शुरू हुआ, जो सालों तक चलता रहा। सवाल: आखिर कब लगा कि निदा फाजली की जिंदगी पर डॉक्यूमेंट्री बननी चाहिए? जवाब: उनके साथ काम करते-करते एहसास हुआ कि वह सिर्फ बड़े शायर नहीं, बल्कि बहुत बड़े इंसान भी थे। उनके जरिए मैं जॉनी वॉकर, टुनटुन, हसन कमाल, जावेद सिद्दीकी, राकेश बेदी और कई दिग्गजों से मिला। उन्होंने मुझे जिंदगी को देखने का नजरिया दिया। तभी लगा कि उनकी कहानी आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचनी चाहिए। सवाल: निदा फाजली के परिवार का बड़ा हिस्सा पाकिस्तान चला गया था। क्या वह इस दर्द के बारे में आपसे बात करते थे? जवाब: निजी तौर पर वह इस बारे में बहुत कम बात करते थे, लेकिन जो कहना होता था, वह अपनी शायरी में कह देते थे। अपने पिता के इंतकाल के बाद, जब वह उनके जनाजे में शामिल नहीं हो पाए, तब उन्होंने मशहूर नज्म ‘तुम्हारी कब्र पर मैं फातिहा पढ़ने नहीं आया’ लिखी। उसमें उनका पूरा दर्द दिखाई देता है। सवाल: निदा फाजली अपनी मां और पिता को किस तरह याद करते थे? जवाब: मां के लिए उन्होंने लिखा- ‘बेसन की सोंधी रोटी पे खट्टी चटनी जैसी मां।’ पिता के लिए उनकी नज्म आज भी पढ़िए तो आंखें नम हो जाती हैं, लेकिन बातचीत में वह कभी अतीत में नहीं जीते थे। उनका पूरा ध्यान वर्तमान और भविष्य पर रहता था। सवाल: निदा फाजली के साथ जुड़ा कोई ऐसा किस्सा जो आज भी याद हो? जवाब: एक बार मैं उनके घर गया तो उनके हाथ में चोट लगी थी। मैंने पूछा, “क्या हुआ?” हंसते हुए बोले, “मुशायरे में थक गया था। मंच पर पीछे टेंट समझकर टिक गया। पता चला पीछे कुछ नहीं था और सीधे नीचे गिर गया।” सबसे बड़ी बात यह थी कि वह खुद पर भी खुलकर हंस सकते थे। सवाल: निदा फाजली और जगजीत सिंह से जुड़ा कोई खास किस्सा जो आपको आज भी याद हो? जवाब: एक बार मुझे किसी बच्ची के लिए रिकमेंडेशन लेटर चाहिए था। निदा साहब ने एयरपोर्ट बुलाया। वहां जगजीत सिंह और के एस चित्रा भी मौजूद थे। मेरे पास खाली कागज था। निदा साहब ने वहीं तुरंत अपने हाथ से रिकमेंडेशन लिख दिया और जगजीत सिंह से उस पर साइन करवा दिए। उनकी हाजिरजवाबी और समझ कमाल की थी। एक बार का किस्सा मुझे बहुत अच्छे से याद है। दिल्ली यूनिवर्सिटी के मेरे एक प्रोफेसर थे। उनकी भतीजी के कुछ डॉक्यूमेंट्स पर साइन कराने थे। एक तरह का एप्रिसिएशन उनके लिए कि वो बच्ची बहुत अच्छा गाती है। तो मैंने निदा साहब से बात की। वो बोले, “मैं दिल्ली आ रहा हूं, तो तुम एयरपोर्ट मुझसे मिलने आ जाओ।” मैं वहां पहुंचा तो देखा कि साथ में जगजीत सिंह जी, चित्रा जी और निदा साहब तो थे ही। मैंने उनसे कहा, “जी, वो चिट्ठी चाहिए आपसे।” वो बोले, “लाओ।” मैं वहीं पास के एक काउंटर से कागज लेकर आया। उनके पास पहुंचा तो फिर उन्होंने जगजीत सिंह जी से कहा, “चलो, इस पर साइन कर दो।” कागज ब्लैंक था। चित्रा जी पीछे खड़ी थीं। जगजीत सिंह जी ने पीछे मुड़कर देखा तो चित्रा जी देख रही थीं कि भई, ये ब्लैंक पेपर पर साइन तो नहीं कर रहे। ब्लैंक पेपर पर साइन करना बड़ी बात है। निदा साहब समझ गए। उन्होंने खट से अपने हाथ से एक एप्रिसिएशन लेटर लिखा और फिर उस पर जगजीत सिंह जी के साइन करवा दिए। सवाल: निदा फाजली और जगजीत सिंह की दोस्ती कैसी थी? जवाब: दोनों का रिश्ता सिर्फ प्रोफेशनल नहीं, बहुत व्यक्तिगत भी था। जगजीत सिंह की सबसे चर्चित एल्बम ‘इनसाइट’ में निदा साहब की लिखी गजलें थीं। दोनों अक्सर साथ बैठते थे। हारमोनियम निकलता था और वहीं बैठकर नई गजलें तैयार होती थीं। सवाल: क्या निदा फाजली और जगजीत सिंह के बीच कभी मजेदार नोकझोंक भी होती थी? जवाब: एक बार हमारे एक परिचित को जगजीत सिंह का शो कराना था। मैंने निदा साहब से कहा कि आप बात कर देंगे तो शायद फीस कम हो जाएगी। उन्होंने हंसते हुए कहा, “मेरा नाम मत लेना। अगर मेरा नाम लिया तो वो तुम्हें डिस्काउंट नहीं देगा, उल्टा मुझे किसी मुशायरे में मुफ्त में पढ़ने बुला लेगा।” बाद में हुआ यह कि जगजीत सिंह ने अपनी फीस तो पूरी रखी, लेकिन पूरे शो की स्पॉन्सरशिप ही करवा दी। यानी आयोजकों पर कोई बोझ नहीं पड़ा। यही दोनों की दोस्ती थी। सवाल: डॉक्यूमेंट्री बनाने में सबसे बड़ी चुनौती क्या रही? जवाब: सबसे बड़ी चुनौती थी सालों की यादों और फुटेज को समेटना। दूसरी चुनौती यह थी कि लेखकों को फिल्म इंडस्ट्री उतना याद नहीं रखती, जितना अभिनेता या निर्देशक को रखती है। लेकिन जिन लोगों ने सच में निदा साहब को जाना था, उन्होंने हमारी हर संभव मदद की। सवाल: क्या किसी कलाकार ने भी इस सफर में मदद की? जवाब: जी हां। सिंगर शान ने बिना किसी हिचकिचाहट के इंटरव्यू दिया। उनके पिता मानस मुखर्जी, निदा साहब के बहुत अच्छे दोस्त थे। उन्होंने अपने पिता और निदा साहब के रिश्ते पर खुलकर बात की। इससे डॉक्यूमेंट्री और समृद्ध हुई। सवाल: पाकिस्तान में निदा फाजली की एक शायरी पर काफी विवाद हुआ था। जवाब: जी। उन्होंने पढ़ा था- ‘घर से मस्जिद है बहुत दूर, चलो यूं कर लें,