टोफू मसाला डोसा रेसिपी: सिंपल आलू नहीं, ऐसे चुनें हाई प्रोटीन टोफू मसाला डोसा, सेहत के साथ स्वाद से भी समझौता नहीं करना होगा

खुराक के लिए: 2 कप डोसा बैटर, 1-2 मसाला तेल या घी। टोफू मसाला बनाने के लिए: 200 ग्राम टोफू, 1 प्याज, 1 टमाटर, 1 हरी मिर्च, 1 छोटा अदरक-लहसुन पास्ता, 8-10 कैरी पत्ते, ½ छोटा प्याज और जीरा, छवि: फ्रीपिक ¼ छोटा काली मिर्च, ½ छोटा काली मिर्च और धनिया पाउडर, ½ छोटा काली मिर्च मसाला, नमक, तेल, हरा धनिया। इससे स्वाद के साथ-साथ पोषण भी बढ़ेगा। छवि: एआई डोसा बनाने की विधि: सबसे पहले एक पैन में तेल गर्म करके राय और जीरा स्टाइक तड़काएं। कारी पत्ता, हरी मिर्च और प्याज स्टोन सोन्डर होने तक भून लें। इसके बाद अदरकलहसुन का पेस्ट एक मिनट तक का लक्ष्य। छवि: फ्रीपिक फिर होने लगे टमाटर और उसे तब तक अच्छे से भून लें। अब हल्दी, लाल मिर्च, धनिया पाउडर, गर्म मसाला और नमक के मसाले को अच्छी तरह मिला लें। छवि: एआई क्रंबल ने टोफू डाला और 3-4 मिनट तक मध्यम गति पर प्रशिक्षण लिया। फाइनल में हरा धनिया मोनोमॅला गैस बंद कर दिया। अब तवा गर्म करें और उस पर डोसा बैटर फेलकर सोलोमन डोसा जरूर पढ़ें। छवि: एआई बच्चे पर थोड़ा सा तेल या घी डालें। जब डोसा कुरकुरा होने लगे, तब बीच में टोफू मसाला तैयार करें और खुराक को बदल दें। आपका स्वादिष्ट और हाई प्रोटीन टोफू मसाला डोसा तैयार है। छवि: एआई टोफू मसाला डोसा को नारियल की चटनी, टमाटर की चटनी और सांभर के साथ गर्मागर्म रेस्तरां। यह एक शानदार विकल्प है। शरीर को भरपूर प्रोटीन मिलता है। छवि: एआई लंबे समय तक पेट भरा रहता है, जिससे बार-बार भूख नहीं लगती। मसालों को मजबूत बनाने में मददगार है। यह स्वाद और सेहत का बेहतरीन संयोजन है। छवि: फ्रीपिक फिटनेस और कार्मिक लाइफस्टाइल स्टाइल वालों के लिए यह एक आदर्श नाश्ता है। यदि आप डोसे को और अधिक मात्रा में रासायनिक पदार्थ बनाना चाहते हैं, तो टोफू सोलो में साबुत काली मिर्च, पालक, गाजर या मक्का भी मिला सकते हैं। छवि: एआई (टैग्सटूट्रांसलेट)टोफू मसाला डोसा(टी)टोफू मसाला डोसा(टी)दक्षिण भारतीय रेसिपी(टी)मसाला डोसा(टी)पनीर डोसा(टी)टोफू रेसिपी(टी)स्वस्थ नाश्ता(टी)ब्रेकफास्ट रेसिपी(टी)हाई प्रोटीन रेसिपी(टी)हाई प्रोटीन ब्रेकफास्ट रेसिपी
त्वचा को निखारने के टिप्स: चेहरे की बेदाग और चमकदार त्वचा के लिए, किचन में रखें इन 2 नाखूनों से ऐसे तैयार करें फेस पैक

21 जुलाई 2026 को 19:06 IST पर अद्यतन किया गया स्किन ब्राइटनिंग टिप्स: बेहतरीन फेसियल का असर कुछ ही दिनों में खत्म हो जाता है और त्वचा फिर से बेजान दिखने लगती है। बिना किसी दुष्प्रभाव के और हमेशा रहने वाला ग्लो पाने के लिए आप घर पर ही कीटनाशकों का प्रयोग कर सकते हैं। कम्युनिस्ट सेकेंदर और बेसन का एक समूह एक कमज़ोर कम्युनिस्ट पार्टी तैयार करता है। चुकंदर का रस त्वचा को अंदर से लीक करके रंगीन रंग देता है, जबकि बेसन मृत त्वचा त्वचा को निकालने में मदद करता है। आइए जानते हैं इसे बनाने और बनाने के आसान तरीकों के बारे में… अनुसरण करना : इस फेस पैक को बनाने के लिए बेसन 2 बड़े बिग, ताजा चौकोर का रस 2 से 3 बड़े बिग, कच्चा दूध या गुलाब जल 1 छोटा मसाला अपनी त्वचा टाइप के अनुसार और आधा छोटा मोती शहद की जरूरत होगी। छवि: एआई सबसे पहले एक छोटे आकार के चुकंदर को छीलकर कद्दू कर लें। अब इसे एक साफ़ सूती कपड़े में नामांकित करें, जिससे इसका ताज़ा रस आसानी से निकल जाए। छवि: एआई कटोरी में 2 एरिया बेसन लें। इसमें ताजा चुकंदर का रस शामिल है। तुम्हारी खाल बहुत दिलचस्प है, तो इसमें आधा अमेरीका और थोड़ा सा कच्चा दूध मिला लें। तैलीय त्वचा पर दूध की जगह गुलाब जल का प्रयोग करें। छवि: एआई सबसे पहले अपने चेहरे को पानी से अच्छे तरीके से धोकर साफ कर लें। अब इस पैक को अपने चेहरे और गर्दन के ऊपर की दिशा में एक समान रूप से बालों और आंखों के आसपास के हिस्सों को छोड़ दें। छवि: एआई पैक को फेस पर 15 से 20 मिनट में प्रभावित किया जाए। फ्रिज के बाद हाथों में थोड़ा सा पानी या गुलाब जल लेकर चेहरे की 2 मिनट तक सर्कुलर मोशन में मसाज करें और ठंडे पानी से धोकर दोस्त लगा लें। छवि: एआई द्वारा प्रकाशित: कीर्ति सोनी प्रकाशित 21 जुलाई 2026, 19:06 IST (टैग्सटूट्रांसलेट) चमकदार त्वचा के टिप्स (टी) बेसन और चुकंदर का फेस पैक (टी) चमकती त्वचा के लिए घरेलू फेस पैक (टी) प्राकृतिक गुलाबी चमक (टी) त्वचा को चमकदार बनाने के उपाय (टी) प्राकृतिक रूप से चमकदार त्वचा कैसे पाएं (टी) ब्यूटी टिप्स हिंदी में
जापान में सिंहासन के सिर्फ 3 उत्तराधिकारी, शाही नियम बदले:राजा दूर के रिश्तेदारों को गोद लेकर बचाएंगे राजवंश, सम्राट नहीं बन पाएंगी राजकुमारी आइको

जापान की संसद ने 17 जुलाई को शाही परिवार के उत्तराधिकार से जुड़े कानून में बड़ा बदलाव किया। नए कानून के तहत अब शाही परिवार 15 साल या उससे अधिक उम्र के दूर के पुरुष रिश्तेदारों को गोद लेकर दोबारा शाही परिवार में शामिल कर सकेगा। इसके अलावा, अब शाही परिवार की महिलाएं किसी आम नागरिक से शादी करने के बाद भी अपना शाही दर्जा और आधिकारिक जिम्मेदारियां नहीं खोएंगी। हालांकि, सबसे अहम नियम नहीं बदला गया। जापान में अब भी सिर्फ पुरुष ही सम्राट बन सकते हैं। यानी सम्राट नारुहितो की इकलौती बेटी राजकुमारी आइको भविष्य में भी सिंहासन की उत्तराधिकारी नहीं बन सकेंगी। शाही परिवार में नियम बदलने की जरूरत क्यों पड़ी जापान का शाही परिवार दुनिया का सबसे पुराना लगातार चला आ रहा राजवंश माना जाता है, लेकिन आज वह उत्तराधिकार के गंभीर संकट से जूझ रहा है। मौजूदा सम्राट की सिर्फ एक बेटी है। वह उत्तराधिकारी नहीं बन सकती, क्योंकि कानून सिर्फ पुरुषों को ही सिंहासन का अधिकार देता है। शाही परिवार में सिंहासन के सिर्फ 3 उत्तराधिकारी हैं। उत्तराधिकार की कतार में पहले नंबर पर सम्राट के छोटे भाई प्रिंस फुमिहितो, दूसरे नंबर पर उनके 19 वर्षीय बेटे प्रिंस हिसाहितो और तीसरे नंबर पर 90 वर्षीय प्रिंस हिताची हैं। अगर भविष्य में पुरुष उत्तराधिकारी नहीं बढ़े, तो शाही परिवार के सामने उत्तराधिकार का संकट और गहरा सकता है। सरकार के सामने दो ही रास्ते थे- सरकार ने दूसरा रास्ता क्यों चुना जापान में महिला को सम्राट बनाने का मुद्दा कई वर्षों से चर्चा में है। जनमत सर्वेक्षणों में अधिकांश जापानी नागरिक महिला सम्राट के पक्ष में रहे हैं। 2024 में क्योडो न्यूज के सर्वे में 90% जापानी नागरिकों ने महिला सम्राट का समर्थन किया था। लेकिन सत्तारूढ़ लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (LDP) के परंपरावादी नेता इसका विरोध करते रहे हैं। इन नेताओं का तर्क है कि जापान का शाही परिवार करीब 2,000 वर्षों से पुरुष वंश के आधार पर चला आ रहा है। उनके अनुसार, अगर किसी महिला को सम्राट बनाया गया और उसके बच्चे भविष्य में सिंहासन पर बैठे, तो शाही परिवार की पितृवंश परंपरा टूट जाएगी। उनका मानना है कि यही परंपरा जापान की राजशाही की पहचान है और इसे नहीं बदला जाना चाहिए। इसी वजह से सरकार ने महिला सम्राट या महिलाओं की संतान को उत्तराधिकारी बनाने का कानून बदलने के बजाय दूसरा रास्ता चुना। 11 पूर्व शाही शाखाएं क्या हैं, जिन्हें सम्राट गोद ले सकेंगे सम्राट को उत्तराधिकारी चुनने के लिए गोद लेने का अधिकार मिला है। लेकिन वे किसी भी बच्चे को गोद नहीं ले सकते। वे केवल 11 पूर्व शाही शाखाओं के वंशज के पुरुषों को ही गोद ले सकेंगे। दरअसल, दूसरे विश्व युद्ध से पहले जापान के शाही परिवार में सिर्फ मुख्य राजपरिवार ही नहीं था, बल्कि उससे जुड़ी 11 अलग-अलग शाही शाखाएं भी थीं। इन शाखाओं के सदस्य भी सम्राट के पुरुष वंशज थे और जरूरत पड़ने पर सिंहासन के उत्तराधिकारी बन सकते थे। साल 1947 में, दूसरे विश्व युद्ध के बाद अमेरिकी कब्जे वाली प्रशासनिक व्यवस्था और जापानी सरकार ने शाही परिवार का आकार छोटा करने का फैसला किया। इसके तहत इन 11 शाखाओं के 51 सदस्यों से शाही दर्जा वापस ले लिया गया। वे आम नागरिक बन गए और उनके परिवारों का शाही परिवार से कानूनी रिश्ता खत्म हो गया। नियम बदलने के बाद शाही परिवार में पुरुष सदस्यों की संख्या लगातार घटती गई। दूसरी ओर, शाही परिवार की महिलाएं जब आम नागरिकों से शादी करती थीं, तो कानून के मुताबिक उन्हें भी शाही परिवार छोड़ना पड़ता था। इससे शाही परिवार छोटा होता चला गया और उत्तराधिकार का संकट गहराने लगा। इसी वजह से जापानी सरकार ने करीब 79 साल बाद नियमों में बदलाव किया है। अब इन 11 पूर्व शाही शाखाओं के 15 वर्ष या उससे अधिक उम्र के पुरुष वंशजों को कानूनी प्रक्रिया के जरिए गोद लेकर फिर से शाही परिवार में शामिल किया जा सकेगा। महिलाओं का आम नागरिक से शादी करने पर शाही दर्जा नहीं छिनेगा नए कानून के तहत अब शाही परिवार की महिला सदस्य अगर किसी आम नागरिक से शादी करती हैं, तब भी वे अपना शाही दर्जा और आधिकारिक जिम्मेदारियां नहीं खोएंगी। यह पहले के नियम से बिल्कुल अलग है। पुराने कानून के तहत आम नागरिक से शादी करने वाली महिला को शाही परिवार छोड़ना पड़ता था। नए कानून के पीछे सबसे बड़ा कारण राजकुमारी माको का मामला माना जा रहा है। सम्राट नारुहितो की भतीजी माको ने 2021 में अपने कॉलेज के साथी केई कोमुरो से शादी की थी। दोनों की मुलाकात 2013 में टोक्यो की इंटरनेशनल क्रिश्चियन यूनिवर्सिटी में हुई थी। दोनों ने गुपचुप सगाई कर ली थी, जिसके बाद पूरे जापान में इस रिश्ते को लेकर काफी विवाद हुआ। अक्टूबर 2021 में दोनों की शादी बेहद सादगी से हुई। परंपरा के मुताबिक होने वाला जुलूस और भव्य समारोह भी नहीं हुआ। शादी के बाद कानून के तहत माको को अपना शाही दर्जा छोड़ना पड़ा और वे अपने पति के साथ न्यूयॉर्क चली गईं, जहां उनके पति वकील हैं। माको ने शाही परिवार छोड़ने पर मिलने वाली करीब 10 लाख पाउंड (करीब 11 करोड़ रुपए) की सरकारी राशि भी लेने से इनकार कर दिया था। दूसरे विश्व युद्ध के बाद ऐसा करने वाली वे शाही परिवार की पहली सदस्य थीं। जापान की सम्राट बन चुकी हैं 8 महिलाएं जापान के इतिहास में अब तक 8 महिलाएं सम्राट (महारानी) बन चुकी हैं। हालांकि, इनमें से कोई भी अपने बच्चों को उत्तराधिकारी नहीं बना सकी। वे केवल तब सिंहासन पर बैठीं, जब कोई उपयुक्त पुरुष उत्तराधिकारी उपलब्ध नहीं था या वह बहुत छोटा था। इसलिए उन्हें अक्सर अस्थायी शासक माना गया और बाद में सत्ता फिर किसी पुरुष उत्तराधिकारी को सौंप दी गई। जापान की आखिरी महिला शासक महारानी गोसाकुरामाची थीं। उन्होंने 1762 से 1770 तक शासन किया। उनके बाद से पिछले 250 से अधिक साल में जापान में कोई महिला सम्राट नहीं बनी। फिर महिलाओं के लिए रास्ता क्यों बंद हो गया? पहले जापान में कानून में यह साफ नहीं लिखा था कि केवल पुरुष ही सम्राट बन सकते हैं। 19वीं सदी के आखिर में जापान ने खुद को एक आधुनिक राष्ट्र बनाने की शुरुआत की। जापान
Indigo Market Share Surge | Air India Capacity Cut & Record Engine Deal

नई दिल्ली2 मिनट पहले कॉपी लिंक देश के एविएशन सेक्टर में इंडिगो की हिस्सेदारी और मजबूत हो गई है। जून महीने में इंडिगो ने 66.3% का अब तक का अपना सबसे बड़ा मार्केट शेयर हासिल किया है। DGCA के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, यह तेजी ऐसे समय आई है जब प्रतिस्पर्धी एयरलाइन एअर इंडिया ने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों रूटों पर अपनी क्षमता में कटौती की है। मार्केट में अपनी बढ़त को बनाए रखने के लिए इंडिगो ने एयरबस फ्लीट के लिए 1,000 से ज्यादा सीएफएम लीप इंजनों की खरीद के लिए एक ऐतिहासिक समझौता (MoU) भी किया है। जून में 89.2 लाख यात्रियों ने इंडिगो से यात्रा की जून के आंकड़ों के अनुसार, इंडिगो ने 89.2 लाख यात्रियों को उनके डेस्टिनेशन तक पहुंचाया। इससे पहले मई में इंडिगो से 99 लाख और अप्रैल में 89.7 लाख यात्रियों ने सफर किया था। इंडिगो अपनी मजबूत फ्लीट और नेटवर्क के दम पर लगातार नंबर वन पर बनी हुई है। एअर इंडिया 32 लाख यात्रियों के साथ इस साल के सबसे निचले स्तर पर टाटा ग्रुप द्वारा संचालित एअर इंडिया का प्रदर्शन जून में कमजोर रहा। एअर इंडिया ने जून में 32 लाख पैसेंजर्स को सर्विसेज दीं, जो इस साल का इसका सबसे कम आंकड़ा है। इससे पहले जनवरी में एअर इंडिया ने इस साल का अपना उच्चतम स्तर 40 लाख पैसेंजर्स का छुआ था। एअर इंडिया को वित्त वर्ष 2025 में ₹26,000 करोड़ से ज्यादा का घाटा एअर इंडिया ने वित्त वर्ष 2024-25 में ₹26,000 करोड़ से ज्यादा का रेवेन्यू लॉस दर्ज किया। भारी नुकसान के बाद एयरलाइन ने अगस्त के अंत तक अपने ऑपरेशन्स को छोटा करने और नेटवर्क राशनलाइजेशन का फैसला लिया है। एअर इंडिया के चीफ कॉमर्शियल एंड ट्रांसफॉर्मेशन ऑफिसर निपुण अग्रवाल ने कहा कि एयरलाइन सितंबर से अपनी सस्पेंड की गई डोमेस्टिक और इंटरनेशनल कैपेसिटी को फिर से शुरू करने का प्लान बना रही है। हालांकि, विमानों की उपलब्धता में कमी (एयरक्राफ्ट अवेलेबिलिटी इश्यूज) के कारण शिकागो और वॉशिंगटन के लिए उड़ानों का संचालन फिलहाल स्थगित ही रहने की उम्मीद है। अकासा एयर का भी रिकॉर्ड प्रदर्शन, मार्केट शेयर 6.4% पर पहुंचा अकासा एयर ने भी जून में अपना अब तक का सबसे बेहतरीन 6.4% मार्केट शेयर दर्ज किया है। यह एयरलाइन सबसे तेजी से आगे बढ़ रही है। पश्चिम एशिया संघर्ष से पैदा हुई चुनौतियों के बावजूद कंपनी अपने ऑपरेशन्स के लिए ₹10,000 करोड़ जुटाने की तैयारी में है। अकासा एयर ने जून में देश में सबसे ज्यादा 92.2% का पैसेंजर लोड फैक्टर (सीट ऑक्यूपेंसी) दर्ज किया। मिडिल ईस्ट तनाव का एविएशन सेक्टर पर असर भू-राजनीतिक तनाव और मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष के कारण भारतीय एयरलाइंस को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। मार्च और अप्रैल में मिडिल ईस्ट रूट की उड़ानों में भारी कटौती करनी पड़ी थी। भारतीय एयरलाइंस के कुल रेवेन्यू में खाड़ी देशों का बड़ा हिस्सा है। एयर इंडिया एक्सप्रेस और स्पाइसजेट की 90% से ज्यादा इंटरनेशनल कैपेसिटी गल्फ रीजन में ही तैनात रहती है। इंडिगो ने 510 एयरबस विमानों के लिए 1,000+ लीप इंजन ऑर्डर किए ग्लोबल एयरलाइन बनने की राह पर अग्रसर इंडिगो ने CFM इंटरनेशनल के साथ 510 एयरबस A320neo फैमिली एयरक्राफ्ट को पावर देने के लिए 1,000 से ज्यादा LEAP-1A इंजनों की खरीद के लिए एक MoU साइन किया है। रिकॉर्ड डील: यह सीएफएम इंटरनेशनल के इतिहास में किसी एक एयरलाइन द्वारा LEAP इंजनों के लिए दिया गया अब तक का सबसे बड़ा सिंगल ऑर्डर है। MRO फैसिलिटी में मदद: इस समझौते के तहत CFM इंडिगो की आगामी इंजन मेंटेनेंस, रिपेयर एंड ओवरहाल (MRO) फैसिलिटी स्थापित करने में भी मदद करेगा। स्पेयर पार्ट्स: इसके अलावा एक लॉन्ग-टर्म मटेरियल सर्विसेज एग्रीमेंट भी शामिल है जो स्पेयर पार्ट्स की निर्बाध सप्लाई सुनिश्चित करेगा। 10 साल से मजबूत है इंडिगो और CFM की साझेदारी इंडिगो और CFM इंटरनेशनल के बीच सहयोग का इतिहास एक दशक पुराना है। 2016: इंडिगो ने अपने एयरबस A320ceo फ्लीट के लिए CFM56-5B इंजनों का इस्तेमाल शुरू किया। 2019: साझेदारी को विस्तार देते हुए A320neo और A321neo फ्लीट के लिए LEAP-1A इंजनों को चुना गया। दुनिया भर में अब तक 10,000 से अधिक LEAP इंजनों की डिलीवरी की जा चुकी है। भारत CFM का तीसरा सबसे बड़ा मार्केट है। यहां 5 भारतीय एयरलाइंस 400 से ज्यादा लीप-पावर्ड विमानों का संचालन कर रही हैं और लगभग 2,000 इंजनों के ऑर्डर पाइपलाइन में हैं। क्या होता है MRO फैसिलिटी और LEAP इंजन? MRO: यह एविएशन सेक्टर का वह इंफ्रास्ट्रक्चर है, जहां हवाई जहाजों के पार्ट्स, इंजनों और पूरे ढांचे की नियमित जांच, मरम्मत और ओवरहालिंग की जाती है। भारत में MRO बनने से एयरलाइंस को मरम्मत के लिए विमानों को विदेश भेजने की जरूरत नहीं पड़ती और भारी लागत बचती है। लीप इंजन: यह ‘लीडिंग एज एविएशन प्रोपेल्शन’ का छोटा रूप है। इसे CFM इंटरनेशनल (GE और सफरान का संयुक्त उद्यम) द्वारा बनाया जाता है। यह इंजन आधुनिक कमर्शियल विमानों में ईंधन की खपत को 15-20% तक घटाने और कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए जाना जाता है। ये खबर भी पढ़ें… अडाणी एनर्जी का मुनाफा 124% बढ़कर ₹1,149 करोड़: पहली तिमाही में रेवेन्यू 42% चढ़ा; कंपनी का शेयर 1,737 रुपए पर पहुंचा अडाणी ग्रुप की कंपनी अडाणी एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) के नतीजे घोषित कर दिए हैं। कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट दोगुना से ज्यादा यानी 124% बढ़कर 1,149 करोड़ रुपए पर पहुंच गया है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
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नई दिल्ली9 मिनट पहले कॉपी लिंक देश के एविएशन सेक्टर में इंडिगो की हिस्सेदारी और मजबूत हो गई है। जून महीने में इंडिगो ने 66.3% का अब तक का अपना सबसे बड़ा मार्केट शेयर हासिल किया है। DGCA के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, यह तेजी ऐसे समय आई है जब प्रतिस्पर्धी एयरलाइन एअर इंडिया ने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों रूटों पर अपनी क्षमता में कटौती की है। मार्केट में अपनी बढ़त को बनाए रखने के लिए इंडिगो ने एयरबस फ्लीट के लिए 1,000 से ज्यादा सीएफएम लीप इंजनों की खरीद के लिए एक ऐतिहासिक समझौता (MoU) भी किया है। जून में 89.2 लाख यात्रियों ने इंडिगो से यात्रा की जून के आंकड़ों के अनुसार, इंडिगो ने 89.2 लाख यात्रियों को उनके डेस्टिनेशन तक पहुंचाया। इससे पहले मई में इंडिगो से 99 लाख और अप्रैल में 89.7 लाख यात्रियों ने सफर किया था। इंडिगो अपनी मजबूत फ्लीट और नेटवर्क के दम पर लगातार नंबर वन पर बनी हुई है। एअर इंडिया 32 लाख यात्रियों के साथ इस साल के सबसे निचले स्तर पर टाटा ग्रुप द्वारा संचालित एअर इंडिया का प्रदर्शन जून में कमजोर रहा। एअर इंडिया ने जून में 32 लाख पैसेंजर्स को सर्विसेज दीं, जो इस साल का इसका सबसे कम आंकड़ा है। इससे पहले जनवरी में एअर इंडिया ने इस साल का अपना उच्चतम स्तर 40 लाख पैसेंजर्स का छुआ था। एअर इंडिया को वित्त वर्ष 2025 में ₹26,000 करोड़ से ज्यादा का घाटा एअर इंडिया ने वित्त वर्ष 2024-25 में ₹26,000 करोड़ से ज्यादा का रेवेन्यू लॉस दर्ज किया। भारी नुकसान के बाद एयरलाइन ने अगस्त के अंत तक अपने ऑपरेशन्स को छोटा करने और नेटवर्क राशनलाइजेशन का फैसला लिया है। एअर इंडिया के चीफ कॉमर्शियल एंड ट्रांसफॉर्मेशन ऑफिसर निपुण अग्रवाल ने कहा कि एयरलाइन सितंबर से अपनी सस्पेंड की गई डोमेस्टिक और इंटरनेशनल कैपेसिटी को फिर से शुरू करने का प्लान बना रही है। हालांकि, विमानों की उपलब्धता में कमी (एयरक्राफ्ट अवेलेबिलिटी इश्यूज) के कारण शिकागो और वॉशिंगटन के लिए उड़ानों का संचालन फिलहाल स्थगित ही रहने की उम्मीद है। अकासा एयर का भी रिकॉर्ड प्रदर्शन, मार्केट शेयर 6.4% पर पहुंचा अकासा एयर ने भी जून में अपना अब तक का सबसे बेहतरीन 6.4% मार्केट शेयर दर्ज किया है। यह एयरलाइन सबसे तेजी से आगे बढ़ रही है। पश्चिम एशिया संघर्ष से पैदा हुई चुनौतियों के बावजूद कंपनी अपने ऑपरेशन्स के लिए ₹10,000 करोड़ जुटाने की तैयारी में है। अकासा एयर ने जून में देश में सबसे ज्यादा 92.2% का पैसेंजर लोड फैक्टर (सीट ऑक्यूपेंसी) दर्ज किया। मिडिल ईस्ट तनाव का एविएशन सेक्टर पर असर भू-राजनीतिक तनाव और मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष के कारण भारतीय एयरलाइंस को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। मार्च और अप्रैल में मिडिल ईस्ट रूट की उड़ानों में भारी कटौती करनी पड़ी थी। भारतीय एयरलाइंस के कुल रेवेन्यू में खाड़ी देशों का बड़ा हिस्सा है। एयर इंडिया एक्सप्रेस और स्पाइसजेट की 90% से ज्यादा इंटरनेशनल कैपेसिटी गल्फ रीजन में ही तैनात रहती है। इंडिगो ने 510 एयरबस विमानों के लिए 1,000+ लीप इंजन ऑर्डर किए ग्लोबल एयरलाइन बनने की राह पर अग्रसर इंडिगो ने CFM इंटरनेशनल के साथ 510 एयरबस A320neo फैमिली एयरक्राफ्ट को पावर देने के लिए 1,000 से ज्यादा LEAP-1A इंजनों की खरीद के लिए एक MoU साइन किया है। रिकॉर्ड डील: यह सीएफएम इंटरनेशनल के इतिहास में किसी एक एयरलाइन द्वारा LEAP इंजनों के लिए दिया गया अब तक का सबसे बड़ा सिंगल ऑर्डर है। MRO फैसिलिटी में मदद: इस समझौते के तहत CFM इंडिगो की आगामी इंजन मेंटेनेंस, रिपेयर एंड ओवरहाल (MRO) फैसिलिटी स्थापित करने में भी मदद करेगा। स्पेयर पार्ट्स: इसके अलावा एक लॉन्ग-टर्म मटेरियल सर्विसेज एग्रीमेंट भी शामिल है जो स्पेयर पार्ट्स की निर्बाध सप्लाई सुनिश्चित करेगा। 10 साल से मजबूत है इंडिगो और CFM की साझेदारी इंडिगो और CFM इंटरनेशनल के बीच सहयोग का इतिहास एक दशक पुराना है। 2016: इंडिगो ने अपने एयरबस A320ceo फ्लीट के लिए CFM56-5B इंजनों का इस्तेमाल शुरू किया। 2019: साझेदारी को विस्तार देते हुए A320neo और A321neo फ्लीट के लिए LEAP-1A इंजनों को चुना गया। दुनिया भर में अब तक 10,000 से अधिक LEAP इंजनों की डिलीवरी की जा चुकी है। भारत CFM का तीसरा सबसे बड़ा मार्केट है। यहां 5 भारतीय एयरलाइंस 400 से ज्यादा लीप-पावर्ड विमानों का संचालन कर रही हैं और लगभग 2,000 इंजनों के ऑर्डर पाइपलाइन में हैं। क्या होता है MRO फैसिलिटी और LEAP इंजन? MRO: यह एविएशन सेक्टर का वह इंफ्रास्ट्रक्चर है, जहां हवाई जहाजों के पार्ट्स, इंजनों और पूरे ढांचे की नियमित जांच, मरम्मत और ओवरहालिंग की जाती है। भारत में MRO बनने से एयरलाइंस को मरम्मत के लिए विमानों को विदेश भेजने की जरूरत नहीं पड़ती और भारी लागत बचती है। लीप इंजन: यह ‘लीडिंग एज एविएशन प्रोपेल्शन’ का छोटा रूप है। इसे CFM इंटरनेशनल (GE और सफरान का संयुक्त उद्यम) द्वारा बनाया जाता है। यह इंजन आधुनिक कमर्शियल विमानों में ईंधन की खपत को 15-20% तक घटाने और कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए जाना जाता है। ये खबर भी पढ़ें… अडाणी एनर्जी का मुनाफा 124% बढ़कर ₹1,149 करोड़: पहली तिमाही में रेवेन्यू 42% चढ़ा; कंपनी का शेयर 1,737 रुपए पर पहुंचा अडाणी ग्रुप की कंपनी अडाणी एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) के नतीजे घोषित कर दिए हैं। कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट दोगुना से ज्यादा यानी 124% बढ़कर 1,149 करोड़ रुपए पर पहुंच गया है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
सावन साड़ी डिज़ाइन: सावन और तीज के त्योहार में चार चांद लगाएगी ये स्टाइलिश सा साड़ी, यहां देखें लेटेस्ट डिजाइंस और ट्रेंडी लुक

21 जुलाई 2026 को 18:34 IST पर अद्यतन किया गया सावन साड़ी डिज़ाइन: सावन के महीने में ही चारों तरफ हरियाली नजर आती है। हिंदू धर्म के अनुसार हरा रंग खुशहाली, प्रेम और स्वर का प्रतीक माना जाता है। यही वजह है कि सावन, तीज और अन्य शुभ स्टॉकहोम पर महिलाएं हरे रंग के कपड़े पहनना पसंद करती हैं। इस मौसम में हरियाली बेरोजगारी पर महिलाओं की पहली पसंद बन जाती है। यहां महिलाएं भारी-भरकम साडारियों की जगह आरामदायक, आरामदायक और स्टाइलिश सा-दिखावा सबसे ज्यादा पसंद कर रही हैं। अगर आप भी सावन में कुछ अलग और खूबसूरत खूबसूरत तस्वीरें हैं, तो इन ट्रेंडी साड़ियों में अनुसरण करना : बनारसी और ऑर्केस्ट्रा रोल: ट्रेडिशनल और एलिगेंट लुक चाहते हैं, तो यहां रंग की बनारसी या अपील एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है। जरी बॉर्डर और खूबसूरत डिजाइन वाली ये सा साड़ी हमेशा फैशन में बनी रहती है। छवि: एआई लहरिया और बांधानी खेती: लहरिया और बंदानी साड़ियों की मांग काफी बढ़ जाती है। रंग-बिरंगे पैटर्न वाली ये सा खूबसूरत खूबसूरत खूबसूरत हैं। गोटा-पट्टी वर्कशॉप वाली ये रॉयल लुक स्टॉक्स है। छवि: एआई फ्लोरल ऑर्गेन्ज़ा रोज़गार: सिंपल लेकिन स्टाइलिश लुक पसंद है, तो फ्लोरल प्रिंट वाली ऑर्गेंजा लगाई जा सकती हैं। इस तरह की साड़ियां पर बने फूलों के डिजाइन सावन के मौसम में बेहद प्यारे दोस्त बने हुए हैं। छवि: एआई सीक्वेंस और नट रोज़गार: फीचर के लिए सीक्वेंस वर्कशॉप वाली सा शान काफी पसंद की जा रही हैं। पेस्टल ग्रीन और ऑलिव ग्रीन जैसे शेड्स इन दिनों ट्रेंड में हैं। ऐसी सा भव्य मूर्तियां और खूबसूरत लुक वाली रियासतें हैं। छवि: एआई रफल्स और फ्रिल्स रोजगार: ट्रेडिशनल लुक से हटकर कुछ वेस्टर्न-आर्टिजेस्ट कस्टमर इच्छुक हैं, तो रफल्स या फ्रिल्स डिजाइन वाली हरी रोज़गार चुनी जा सकती हैं। यंग लड़कियों के बीच ये स्टाइल काफी लोकप्रिय हो रहा है। छवि: एआई गोटापट्टी कार्यशाला चंदेरी रोज़गार: इस सावन में चंदेरी साड़ियों का ट्रेडिशनल गोटा-पट्टी का काम चार चांद लगा देगा। मॉडलों में प्राकृतिक दिखते हैं, देखने में अनोखे ही उत्तम दर्जे के और शाही दिखते हैं। छवि: एआई मिनिमल एम्ब्रायडरी जॉर्जेट नौकरी: जंगली- सोबर सा पेड़ पसंद हैं, तो मिनिमल एम्ब्रायडरी जॉर्जेट सा फूल आकर्षक झूला। यह आपके लिए एक ग्रेसफुल और एलिगेंट लुक वाले पूरे दिन के लिए उपलब्ध है। छवि: एआई द्वारा प्रकाशित: कीर्ति सोनी प्रकाशित 21 जुलाई 2026 18:34 IST पर (टैग्सटूट्रांसलेट)सावन साड़ी डिज़ाइन(टी)सावन के लिए हरी साड़ी(टी)बनारसी सिल्क साड़ी(टी)लेहरिया साड़ी(टी)ऑर्गेंज़ा साड़ी(टी)टीज फैशन(टी)भारतीय एथनिक पहनावा(टी)स्टाइलिश हरी साड़ी
NEET Student Fake OMR Controversy

Hindi News Career NEET Student Fake OMR Controversy | Jantar Mantar Protest NTA Statement कुछ ही क्षण पहले कॉपी लिंक 21 जून को Re Neet एग्जाम देने वाली कानपुर की आर्या सिंह ने एनटीए पर गंभीर आरोप लगाए। अपनी ओएमआर शीट लेकर वे पिता के साथ NTA के विरोध में दिल्ली के जंतर-मंतर भी पहुंच गईं। अब आर्या के बारे में एनटीए ने बताया है कि उम्मीदवार की असली OMR शीट NTA के पास सुरक्षित है, जिसे OMR रिस्पॉन्स की चैलेंज विंडो के दौरान उनके रजिस्टर्ड ईमेल पर भी भेजा गया था। UP- कानपुर की NEET छात्रा आर्या सिंह दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंची है. उनके पापा उनके साथ है और NTA और शिक्षामंत्री को चिठ्ठी लिखकर आये है. आर्या के साथ NTA ने धोखा किया है.उनके नंबर रिजल्ट आने के बाद दो बार बदल दिये गये. पहले 540 थे फिर 167 रह गये. pic.twitter.com/tLuo8Xc6mQ https://t.co/h5ahWYUGkK— Narendra Pratap (@hindipatrakar) July 19, 2026 इंटरनेट पर जो फोटो वायरल हो रही है, वो असली OMR शीट से डिजिटली छेड़छाड़ करके बनाई गई है। असली शीट पर इनविजिलेटर के सिग्नेचर का समय दोपहर 3:45 बजे दर्ज है। इसे बदलकर एडिटेड फोटो में दोपहर 2:45 बजे कर दिया गया है। इसके अलावा भी जाली शीट पर कई डिजिटल बदलाव पकड़े गए हैं। एनटीए ने बताया है कि आर्या का 167 मार्क्स का स्कोर पूरी तरह सही और बरकरार है। Regarding OMR-related claims for NEET (UG) 2026 being circulated on social media, it may be noted that the genuine OMR of every candidate concerned is on record with NTA. It was made available on the candidate portal and emailed to the candidates at the time of the OMR Response… pic.twitter.com/rN3r21c4hf— National Testing Agency (@NTA_Exams) July 20, 2026 कानूनी कार्रवाई की चेतावनी NTA ने साफ किया है कि फर्जी या एडिटेड OMR शीट बनाना, उसे फैलाना या किसी सार्वजनिक परीक्षा के रिकॉर्ड के खिलाफ झूठे दावे करना ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024’ के तहत एक गंभीर और दंडनीय अपराध है। ऐसा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। आर्या ने की थी NTA से जांच की मांग Re Neet रिजल्ट आने के बाद कानपुर की छात्रा आर्या सिंह ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) पर गंभीर सवाल उठाए थे। आर्या का आरोप है कि उनकी ओएमआर (OMR) शीट के मिलान के हिसाब से जहां उनके 609 नंबर बन रहे थे, वहीं NTA की वेबसाइट पर उनका रिजल्ट देखने के दौरान महज दो घंटे के अंदर दो अलग-अलग स्कोर दिखाई दिए। परेशान छात्रा ने सबूत के साथ शिक्षा मंत्री और NTA को मेल भेजकर जांच की मांग की है। 13 तारीख की रात को जब NTA की ऑफिशियल वेबसाइट पर उनकी OMR शीट आई, तो उसमें प्रश्न नंबरों का सीक्वेंस गलत था। हालांकि, जब उन्होंने अपने प्रश्नों का मिलान किया तो उनके 609 नंबर बन रहे थे। इसके बाद आर्या ने तुरंत NTA के चैलेंज पोर्टल पर इस सीक्वेंस की शिकायत की। शिकायत के जवाब में NTA ने अपनी ऑफिशियल वेबसाइट पर अपडेटेड OMR शीट भेजी, जिसमें क्वेश्चन नंबर का सीक्वेंस तो सही कर दिया गया, लेकिन स्कोर 609 ही रहा। आर्या का सवाल था कि एक ही छात्र के कुछ घंटों के अंदर दो अलग-अलग रिजल्ट कैसे जारी हो सकते हैं। एनटीए और शिक्षामंत्री को भेजी शिकायत रिजल्ट में सामने आए इस अंतर के बाद आर्या ने अपने पास मौजूद स्क्रीनशॉट, OMR शीट और अन्य डॉक्यूमेंट्स को जमा किया। इसे आर्या ने NTA और केंद्रीय शिक्षा मंत्री को ईमेल के जरिए भेजा। आर्या ने मांग की है कि उनके मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। अगर कोई तकनीकी गलती हुई है तो उसे जल्द से जल्द सुधारा जाए। Regarding claims by Ms. Pratibha Trivedi (App No. 260412140662) about her NEET (UG) 2026 OMR answer sheet:NTA has verified the record.The genuine OMR of the candidate is with NTA. It was also emailed to her at the registered e-mail address during the OMR Response Key…— National Testing Agency (@NTA_Exams) July 20, 2026 अभय यादव के दावों को किया खारिज छात्र अभय यादव ने भी ओएमआर शीट और असली नंबरों में अंतर का जिक्र किया था। इस पर एनटीए ने कहा, एजेंसी ने रिकॉर्ड चेक किया है। असली OMR शीट छात्र के रजिस्टर्ड ईमेल पर भी भेजी गई थी। छात्र ने सार्वजनिक रूप से दावा किया था कि उसने केवल 5 प्रश्न छोड़े थे और उसका स्कोर 634 मार्क्स होना चाहिए, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में ये बात सही नहीं निकलती है। रिकॉर्ड के मुताबिक, 180 में से 44 प्रश्न बिना हल किए छोड़ दिए गए थे। उम्मीदवार का 164 मार्क्स का स्कोर वेरिफाइड है और वही रहेगा। On the allegations circulating on social media regarding the OMR sheet of Re-NEET candidate Avaneesh Srivastava, NTA Sources said- “The image being circulated on social media is not the OMR sheet on record with the NTA. It is a digitally altered version.”The sources added that…— ANI (@ANI) July 19, 2026 अवनीश श्रीवास्तव का पकड़ा गया झूठ Re Neet के सबसे चर्चित मामलों में से एक अवनीश श्रीवास्तव का मामला भी है। उनके परिवार ने आरोप लगाया था कि एनटीए द्वारा अपलोड की गई ओएमआर शीट अजीत सिंह नामक किसी अन्य छात्र की थी। हालांकि, एनटीए ने आंसर शीट के आदान-प्रदान से पूरी तरह इंकार किया है। एजेंसी के अनुसार, फोरेंसिक जांच से पता चला है कि वायरल फोटो ऑफिशियल ओएमआर शीट नहीं थी, बल्कि अवनीश की अपनी आंसर शीट का डिजिटल रूप से संशोधित संस्करण थी। एजेंसी ने बताया कि केवल पहचान संबंधी फील्ड बदले गए थे, जबकि बारकोड सहित अन्य जानकारी असली ओएमआर शीट के समान ही थी। एजेंसी ने डिजिटल हेरफेर के कई संकेत भी बताए। इनमें वर्तनी की गलतियां शामिल थीं। Regarding claims by Ms. Pratibha Trivedi (App No. 260412140662) about her NEET (UG) 2026 OMR answer sheet:NTA has verified the record.The genuine OMR of the candidate is with NTA. It was also emailed to her at the registered e-mail address during the OMR Response Key…— National Testing Agency (@NTA_Exams) July 20, 2026 प्रतिभा त्रिवेदी की ओएमआर शीट में मिले बदलाव एनटीए ने उम्मीदवार प्रतिभा त्रिवेदी द्वारा अपनी ओएमआर शीट के संबंध में लगाए गए
Adani Energy Solutions Q1 Results

Hindi News Business Adani Energy Solutions Q1 Results | Net Profit Surges 124% Share Price Up मुंबई11 मिनट पहले कॉपी लिंक अडाणी ग्रुप की कंपनी अडाणी एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) के नतीजे घोषित कर दिए हैं। कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट दोगुना से ज्यादा यानी 124% बढ़कर 1,149 करोड़ रुपए पर पहुंच गया है। कंपनी की कुल कमाई में तेज बढ़ोतरी और रेगुलेटरी डेफरल इनकम में आए पॉजिटिव बदलाव से नतीजों को मजबूती मिली है। नतीजों की घोषणा के बाद अडाणी एनर्जी सॉल्यूशंस का शेयर दोपहर के कारोबार में 3% चढ़कर 1,781.2 रुपए पर पहुंच गया। हालांकि, यह 1,737 रुपए पर बंद हुआ। कंपनी का ऑपरेशनल रेवेन्यू 42% बढ़ा कंपनी का ऑपरेशनल रेवेन्यू सालाना आधार पर 42.4% बढ़कर 9,711 करोड़ रुपए हो गया है, जो पिछले साल की इसी तिमाही में 6,819 करोड़ रुपए था। कंपनी का ऑपरेशनल मुनाफा (EBITDA) 30% बढ़कर 3,008 करोड़ रुपए रहा। हालांकि, EBITDA मार्जिन में मामूली गिरावट देखी गई और यह पिछले साल के 33.9% से घटकर 31% पर आ गया। कंपनी को रेगुलेटरी इनकम का मिला फायदा कंपनी ने पहली तिमाही में 29 करोड़ रुपए की रेगुलेटरी डेफरल इनकम दर्ज की है। इसकी तुलना में पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही में कंपनी को 504 करोड़ रुपए का रेगुलेटरी डेफरल खर्च उठाना पड़ा था। इस पॉजिटिव बदलाव ने कंपनी के नेट मुनाफे को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है। कंपनी के बिजनेस सेगमेंट का परफॉर्मेंस कंपनी के अलग-अलग बिजनेस सेगमेंट्स में भी अच्छी ग्रोथ देखने को मिली है… ट्रांसमिशन बिजनेस: कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 52.4% की भारी बढ़ोतरी के साथ 3,335.3 करोड़ रुपए पहुंच गया। डिस्ट्रीब्यूशन बिजनेस: इस सेगमेंट से रेवेन्यू 5% बढ़कर 3,520.4 करोड़ रुपए हो गया। स्मार्ट मीटरिंग बिजनेस: इसमें 200% से अधिक की ग्रोथ दर्ज की गई और रेवेन्यू 346.9 करोड़ रुपए पर पहुंच गया। एनर्जी सॉल्यूशंस प्लेटफॉर्म: इस प्लेटफॉर्म से होने वाला रेवेन्यू 9 गुना से ज्यादा उछलकर 1,906.8 करोड़ रुपए दर्ज किया गया। 30 जून को समाप्त हुई तिमाही के आंकड़ों से साफ है कि अडाणी एनर्जी सॉल्यूशंस पावर इंफ्रास्ट्रक्चर, स्मार्ट मीटरिंग और ट्रांसमिशन नेटवर्क के विस्तार पर तेजी से ध्यान दे रही है। भारत में लगातार बढ़ती बिजली की मांग और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के चलते कंपनी के प्रदर्शन में मजबूती बनी हुई है। क्या होती है ‘रेगुलेटरी डेफरल इनकम’? पावर और यूटिलिटी सेक्टर में नियामक यानी रेगुलेटर्स बिजली की दरें तय करते हैं। कई बार जब किसी तिमाही में कंपनी की लागत बढ़ती है या सरकार से मंजूर दरों के एडजस्टमेंट में समय लगता है, तो नियामक उस अंतर की रकम को भविष्य के टैरिफ में वसूलने की मंजूरी देता है। इसे अकाउंटिंग में ‘रेगुलेटरी डेफरल आय/खर्च’ के रूप में दर्ज किया जाता है। जब यह खर्च की जगह आय बनती है, तो कंपनी के प्रॉफिट पर सीधा और पॉजिटिव असर दिखता है। ये खबर भी पढ़ें… रिजल्ट के बाद पेटीएम का शेयर 4% फिसला: बोनस शेयर का प्लान टला; पहली तिमाही में मुनाफा 79% बढ़कर ₹220 करोड़ रहा वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के नतीजे आने के बाद पेटीएम के शेयरों में आज मंगलवार 21 जुलाई को गिरावट रही। बाजार खुलते ही शेयर में 2.5% से ज्यादा की तेजी आई, लेकिन थोड़ी ही देर में यह गिर गया। ये 3.86% नीचे ₹1295 पर बंद हुआ। ये खबर भी पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Adani Energy Solutions Q1 Results

Hindi News Business Adani Energy Solutions Q1 Results | Net Profit Surges 124% Share Price Up मुंबई42 मिनट पहले कॉपी लिंक अडाणी ग्रुप की कंपनी अडाणी एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) के नतीजे घोषित कर दिए हैं। कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट दोगुना से ज्यादा यानी 124% बढ़कर 1,149 करोड़ रुपए पर पहुंच गया है। कंपनी की कुल कमाई में तेज बढ़ोतरी और रेगुलेटरी डेफरल इनकम में आए पॉजिटिव बदलाव से नतीजों को मजबूती मिली है। नतीजों की घोषणा के बाद अडाणी एनर्जी सॉल्यूशंस का शेयर दोपहर के कारोबार में 3% चढ़कर 1,781.2 रुपए पर पहुंच गया। हालांकि, यह 1,737 रुपए पर बंद हुआ। कंपनी का ऑपरेशनल रेवेन्यू 42% बढ़ा कंपनी का ऑपरेशनल रेवेन्यू सालाना आधार पर 42.4% बढ़कर 9,711 करोड़ रुपए हो गया है, जो पिछले साल की इसी तिमाही में 6,819 करोड़ रुपए था। कंपनी का ऑपरेशनल मुनाफा (EBITDA) 30% बढ़कर 3,008 करोड़ रुपए रहा। हालांकि, EBITDA मार्जिन में मामूली गिरावट देखी गई और यह पिछले साल के 33.9% से घटकर 31% पर आ गया। कंपनी को रेगुलेटरी इनकम का मिला फायदा कंपनी ने पहली तिमाही में 29 करोड़ रुपए की रेगुलेटरी डेफरल इनकम दर्ज की है। इसकी तुलना में पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही में कंपनी को 504 करोड़ रुपए का रेगुलेटरी डेफरल खर्च उठाना पड़ा था। इस पॉजिटिव बदलाव ने कंपनी के नेट मुनाफे को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है। कंपनी के बिजनेस सेगमेंट का परफॉर्मेंस कंपनी के अलग-अलग बिजनेस सेगमेंट्स में भी अच्छी ग्रोथ देखने को मिली है… ट्रांसमिशन बिजनेस: कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 52.4% की भारी बढ़ोतरी के साथ 3,335.3 करोड़ रुपए पहुंच गया। डिस्ट्रीब्यूशन बिजनेस: इस सेगमेंट से रेवेन्यू 5% बढ़कर 3,520.4 करोड़ रुपए हो गया। स्मार्ट मीटरिंग बिजनेस: इसमें 200% से अधिक की ग्रोथ दर्ज की गई और रेवेन्यू 346.9 करोड़ रुपए पर पहुंच गया। एनर्जी सॉल्यूशंस प्लेटफॉर्म: इस प्लेटफॉर्म से होने वाला रेवेन्यू 9 गुना से ज्यादा उछलकर 1,906.8 करोड़ रुपए दर्ज किया गया। 30 जून को समाप्त हुई तिमाही के आंकड़ों से साफ है कि अडाणी एनर्जी सॉल्यूशंस पावर इंफ्रास्ट्रक्चर, स्मार्ट मीटरिंग और ट्रांसमिशन नेटवर्क के विस्तार पर तेजी से ध्यान दे रही है। भारत में लगातार बढ़ती बिजली की मांग और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के चलते कंपनी के प्रदर्शन में मजबूती बनी हुई है। क्या होती है ‘रेगुलेटरी डेफरल इनकम’? पावर और यूटिलिटी सेक्टर में नियामक यानी रेगुलेटर्स बिजली की दरें तय करते हैं। कई बार जब किसी तिमाही में कंपनी की लागत बढ़ती है या सरकार से मंजूर दरों के एडजस्टमेंट में समय लगता है, तो नियामक उस अंतर की रकम को भविष्य के टैरिफ में वसूलने की मंजूरी देता है। इसे अकाउंटिंग में ‘रेगुलेटरी डेफरल आय/खर्च’ के रूप में दर्ज किया जाता है। जब यह खर्च की जगह आय बनती है, तो कंपनी के प्रॉफिट पर सीधा और पॉजिटिव असर दिखता है। ये खबर भी पढ़ें… रिजल्ट के बाद पेटीएम का शेयर 4% फिसला: बोनस शेयर का प्लान टला; पहली तिमाही में मुनाफा 79% बढ़कर ₹220 करोड़ रहा वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के नतीजे आने के बाद पेटीएम के शेयरों में आज मंगलवार 21 जुलाई को गिरावट रही। बाजार खुलते ही शेयर में 2.5% से ज्यादा की तेजी आई, लेकिन थोड़ी ही देर में यह गिर गया। ये 3.86% नीचे ₹1295 पर बंद हुआ। ये खबर भी पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
मारुति की कारें अगस्त से ₹30,000 तक महंगी हो जाएंगी:2 महीने में दूसरी बार कीमतें बढ़ाईं, कंपनी बोली- इनपुट कॉस्ट बढ़ने से फैसला लिया

देश की सबसे बड़ी पैसेंजर वाहन निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी ने अपने सभी मॉडल्स की कीमतों में बढ़ोत्तरी का ऐलान किया है। कंपनी अपनी कारों के दाम 30,000 रुपए तक बढ़ाएगी। नई कीमतें अगस्त 2026 से लागू होंगी। कंपनी ने 21 जुलाई, मंगलवार को शेयर बाजारों को भेजी जानकारी यानी रेगुलेटरी फाइलिंग में यह जानकारी दी है। अलग-अलग मॉडल और वैरिएंट के हिसाब से अलग-अलग दाम बढ़ाए जाएंगे। कंपनी बोली- इनपुट कॉस्ट बढ़ने से लेना पड़ा फैसला कंपनी ने बताया कि लगातार बढ़ रही इनपुट कॉस्ट यानी लागत बढ़ने की वजह से यह फैसला लेना पड़ा है। पिछले कुछ महीनों में कंपनी ने अपने स्तर पर लागत घटाने की कोशिश की, ताकि ग्राहकों पर सीधा असर न पड़े। हालांकि, महंगाई दर ऊंची रहने और कारोबारी माहौल अनुकूल न होने की वजह से बढ़ी हुई लागत का कुछ हिस्सा ग्राहकों पर डालना मजबूरी हो गया है। 2 महीने में दूसरी बार बढ़ेंगे दाम इस साल मारुति सुजुकी की तरफ से यह पहली बढ़ोत्तरी नहीं है। इससे पहले कंपनी ने जून 2026 में भी अपने सभी मॉडल्स की कीमतों में 30,000 रुपए तक का इजाफा किया था। उस बढ़ोत्तरी का ऐलान 21 मई 2026 को किया गया था। उस समय भी कंपनी ने इनपुट कॉस्ट में बढ़ोतरी और महंगाई के दबाव को ही मुख्य वजह बताया था। अगस्त से लागू होने वाला नया संशोधन जून में हुई बढ़ोतरी के ऊपर अतिरिक्त इजाफा होगा। ₹3.50 लाख से ₹25 लाख तक के वाहन बेचती है कंपनी मारुति सुजुकी भारतीय बाजार में एंट्री-लेवल हैचबैक से लेकर प्रीमियम सेगमेंट की गाड़ियां बेचती है। इनमें एंट्री-लेवल मॉडल S-Presso से लेकर प्रीमियम MPV इनविक्टो शामिल हैं। फिलहाल कंपनी के पोर्टफोलियो की एक्स-शोरूम कीमतें ₹3.50 लाख से शुरू होकर ₹25 लाख तक जाती हैं। अगस्त से होने वाली बढ़ोतरी के बाद एंट्री-लेवल और प्रीमियम दोनों सेगमेंट की कारें महंगी हो जाएंगी। रेगुलेटरी फाइलिंग और इनपुट कॉस्ट क्या होती है? रेगुलेटरी फाइलिंग: शेयर बाजार में लिस्टेड कंपनियों के लिए यह अनिवार्य होता है कि वे अपने किसी भी बड़े बिजनेस फैसले, मुनाफे, नुकसान या कीमतों में बदलाव की जानकारी ‘सेबी’ या स्टॉक एक्सचेंज को दें। इसी आधिकारिक दस्तावेज को रेगुलेटरी फाइलिंग कहते हैं। इनपुट कॉस्ट: किसी भी कार को बनाने में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल (जैसे स्टील, प्लास्टिक, एल्युमिनियम, रबर और इलेक्ट्रॉनिक्स) की कुल लागत को इनपुट कॉस्ट कहा जाता है। जब अंतरराष्ट्रीय या घरेलू बाजार में ये चीजें महंगी होती हैं, तो गाड़ियों की मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट भी बढ़ जाती है।

