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बरसात के मौसम में खाने से बचें: बारिश के मौसम में नुकसानदेह ये 4 टिप्स, सेहत को हो सकते हैं बड़े नुकसान

बरसात के मौसम में खाने से बचें: बारिश के मौसम में नुकसानदेह ये 4 टिप्स, सेहत को हो सकते हैं बड़े नुकसान

24 जुलाई 2026 को 22:18 IST पर अद्यतन किया गया बरसात के मौसम में खाने से बचें: बारिश का मौसम गर्मी से राहत तो देता है, लेकिन इसके साथ कई तरह के विकार और संक्रमण भी आते हैं। इस मौसम में वृद्धि के कारण बैक्टीरिया, कीट और फंगस तेजी से बढ़ते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ के अनुसार, मसूदा में अपने अंतर्विरोधों का विशेष ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक है, अन्य में पेट दर्द, खाद्य पदार्थ की खुराक और पाचन संबंधी संबद्धता शामिल हो सकती है। आइए जानते हैं कि किन खाद्य पदार्थों से परहेज करना चाहिए? (टैग्सटूट्रांसलेट)मानसून में कौन सी सब्जी नहीं खाना चाहिए(टी)मानसून आहार युक्तियाँ(टी)बरसात के मौसम में परहेज करने वाली सब्जियां(टी)बरसात के मौसम में स्वास्थ्य सावधानियां(टी)मानसून में पत्तेदार सब्जियां(टी)बरसात के मौसम में पाचन समस्याएं(टी)मानसून में खाद्य विषाक्तता(टी)मानसून स्वास्थ्य दिशानिर्देश(टी)बरसात के मौसम में जीवाणु संक्रमण(टी)स्वस्थ मानसून आहार

मानसून मच्छर रोग: बारिश में बढ़ा मच्छरों का आतंक? इन आसान नामांकन से करें आरक्षण; नहीं रहेगा सूची-मलेरिया का खतरा

मानसून मच्छर रोग

24 जुलाई 2026 को 19:27 IST पर अपडेट किया गया डेंगू मलेरिया से बचाव के उपाय: बारिश के मौसम में मच्छरों का आतंक काफी बढ़ जाता है। इस प्रकार के लेबल और मलेरियल जैसे पदार्थों का खतरा रहता है। तो जानिए क्या हैं मच्छरों से बचने के कुछ बेहद आसान तरीके। अनुसरण करना : पानी जमा होने न दें: मच्छर हमेशा अंकित रहते हैं पानी में पठते हैं। अपने घर के होने के नाते, छतों पर या खाली गैमलों और टायरों में पानी बिल्कुल जमा न हो। येही किताब के मंत्रों का सबसे बड़ा घर है। छवि: फ्रीपिक पूरी तरह से आरामदायक सुविधा: शाम के वक्ता मच्छर सबसे ज्यादा समुदाय के लोग हैं। बाहर जाने का समय या पार्क में वॉक करते समय पूरी तरह से झूलते हुए खिलौने। बच्चों को भी हमेशा पूरे कपड़े ही कपड़े, बाहरी सजावटी सामान। छवि: फ्रीपिक ब्लॉकचेन और टंकियों की सफाई: घर में रखे तालाबों, पानी की टंकियों और पक्षियों के तालाबों का पानी हर सप्ताह कम हो जाता है। अगर पानी बनाने वाले मशहूर न हों, तो इसमें थोड़ा सा मिट्टी का तेल या नीम का तेल दाल शामिल है। छवि: एआई मच्छरदानी का उपयोग: रात को मच्छरदानी मच्छरों से बचने का सबसे सुरक्षित और पुराना तरीका है। इसके अलावा आप मॉस्किटो रिपेलेन्ट क्रीम, स्प्रे या डिटर्जेंट का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। छवि: फ्रीपिक मच्छरों को भगाने के लिए शाम के समय घर में नीम के दोस्त या कपूर का धूम्रपान करें। घर में मौजूद तुलसी, बाला और लेमनग्रास जैसे उपचारों से भी मच्छर दूर रहते हैं। छवि: एआई तेज बुखार, सिरदर्द, या शरीर और जोड़ों में दर्द होना बिल्कुल भी मुश्किल नहीं है। यह विनाशकारी या मलेरियल हो सकता है। तुरंत अपने डॉक्टर से मिलें और खूब पानी लें। छवि: फ्रीपिक द्वारा प्रकाशित: समृद्धि ब्रेजा प्रकाशित 24 जुलाई 2026, 19:27 IST

लौकी पनीर का चीला रेसिपी: बेसन नहीं, सिर्फ 10 मिनट में तैयार करें लौकी और पनीर का चीला, जानें हाई प्रोटीन; विधि नोट करें

तस्वीर का विवरण

सामग्री: 1 लोकी, छोटी जीरा, ½ कप चावल का आटा, 2 बड़ी बड़ी सूजी, 2 हरी मिर्च, हरा धनियां, स्लाइस अदरक, ½ छोटी काली मिर्च, स्वादानुसार नमक, ½ छोटी काली मिर्च पाउडर, आवश्यकता अनुसार पानी, तेल या घी छवि: फ्रीपिक बनाने की विधि: सबसे पहले कद्दू की हुई लौकी का अतिरिक्त पानी प्रभाव-सा चित्र लें, लेकिन उसे फेंके नहीं। छवि: इंस्टाग्राम अब एक बड़े बाउल में लौकी, पनीर, चावल का आटा, सूजी, हरी मिर्च, अदरक, हरा धनियां, जीरा, नमक और काली मिर्च के मसाले अच्छी तरह मिला लें। छवि: एआई अब जरूरत है लोकी का बचा हुआ पानी या थोड़ा सा सामान्य पानी माइक्रोवेव बैटर तैयार करने की। बैटर को 5 मिनट के लिए बढ़ा कर रख दें ताकि सूजी अच्छी तरह फूल जाए। छवि: एआई इसके बाद नॉन-स्टिक तवा गर्म करें और प्रभाव-सा तेल या घी लगाएं। एक करछी बैटरमैनेटेबल गोल आकार में फैला हुआ डेक। मीडियम एक तरफ दोनों तरफ से सोना और कुरकुरा होने तक सेक लें। छवि: एआई गरमा-गरम लौकी और पनीर का चीला हरी धनिया की चटनी, दही या टमाटर की गरमा गरम चटनी के साथ बनायें। यह शाम के गरीब जंगल या बच्चों के टिफ़िन के अलावा भी शानदार विकल्प है। छवि: एआई प्रोटीन से भरपूर होने के कारण यह पदार्थ स्वादिष्ट होता है। लोकी में मौजूद मदद से पाचन तंत्र को बेहतर बनाया जा सकता है। लंबे समय तक पेट भरने में मदद मिलती है। छवि: एआई कम तेल में तैयारी के कारण यह नामांकन का होना अच्छा विकल्प है। बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी इसे आसानी से पसंद कर सकते हैं। छवि: इंस्टाग्राम अगर आप ऐसा नाश्ता चाहते हैं जो स्वादिष्ट होने के साथ भी हो, तो बिना बेसन के बनने वाला लौकी और पनीर का चीला जरूर ट्राई करें। यह झटपट तैयार हो जाता है और आपकी सुबह की शुरुआत देता है। छवि: एआई

बांग्लादेश के राष्ट्रपति ने इस्तीफा दिया:कहा- बीमार हूं, कई बार बेहोश हो जाता हूं; दावा- शेख हसीना से बातचीत की जानकारी लीक हुई

बांग्लादेश के राष्ट्रपति ने इस्तीफा दिया:कहा- बीमार हूं, कई बार बेहोश हो जाता हूं; दावा- शेख हसीना से बातचीत की जानकारी लीक हुई

बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने शुक्रवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपना इस्तीफा संसद (जातीय संसद) के स्पीकर हाफिज उद्दीन अहमद को सौंपा। राष्ट्रपति ने इस्तीफे की वजह गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को बताया है। अपने इस्तीफे में शहाबुद्दीन ने लिखा कि वह लंबे समय से हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और किडनी की बीमारी से जूझ रहे हैं। हाल ही में डॉक्टरों ने उनमें ऑटोनॉमिक न्यूरोपैथी नाम की बीमारी का पता लगाया है। इस बीमारी की वजह से उन्हें कई बार अचानक कुछ समय के लिए बेहोशी आ जाती है। उन्होंने कहा कि शारीरिक और मानसिक स्थिति को देखते हुए अब राष्ट्रपति जैसे महत्वपूर्ण संवैधानिक पद की जिम्मेदारियां निभाना संभव नहीं है और उन्हें लंबे समय तक इलाज की जरूरत है। पिछले कुछ दिनों से बांग्लादेशी मीडिया में उनके इस्तीफे की अटकलें लगाई जा रही थीं। कई रिपोर्टों में दावा किया गया था कि लंदन दौरे पर उन्होंने पूर्व पीएम शेख हसीना से फोन पर बातचीत की कोशिश की थी। इस खबर के बाहर आने के बाद प्रधानमंत्री नाराज हो गए थे। अब स्पीकर राष्ट्रपति की जिम्मेदारी निभाएंगे बांग्लादेश के संविधान के अनुच्छेद 54 के मुताबिक, नए राष्ट्रपति के चुने जाने तक संसद के स्पीकर हाफिज उद्दीन अहमद कार्यवाहक राष्ट्रपति की जिम्मेदारी संभालेंगे। इसके बाद संसद को 90 दिनों के भीतर नया राष्ट्रपति चुनना होगा, जो मौजूदा कार्यकाल का बाकी समय पूरा करेगा।

बांग्लादेश के राष्ट्रपति ने इस्तीफा दिया:कहा- बीमार हूं, कई बार बेहोश हो जाता हूं; दावा- शेख हसीना से बातचीत की जानकारी लीक हुई

बांग्लादेश के राष्ट्रपति ने इस्तीफा दिया:कहा- बीमार हूं, कई बार बेहोश हो जाता हूं; दावा- शेख हसीना से बातचीत की जानकारी लीक हुई

बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने शुक्रवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपना इस्तीफा संसद (जातीय संसद) के स्पीकर हाफिज उद्दीन अहमद को सौंपा। राष्ट्रपति ने इस्तीफे की वजह गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को बताया है। अपने इस्तीफे में शहाबुद्दीन ने लिखा- मैं लंबे समय से हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और किडनी की बीमारी से जूझ रहा हूं। हाल ही में डॉक्टरों ने मुझमें ऑटोनॉमिक न्यूरोपैथी नाम की बीमारी का पता लगाया है। इस बीमारी की वजह से कई बार अचानक कुछ समय के लिए बेहोशी आ जाती है। शारीरिक और मानसिक स्थिति को देखते हुए अब राष्ट्रपति जैसे महत्वपूर्ण संवैधानिक पद की जिम्मेदारियां निभाना संभव नहीं है। पिछले कुछ दिनों से बांग्लादेशी मीडिया में उनके इस्तीफे की अटकलें लगाई जा रही थीं। कई रिपोर्टों में दावा किया गया था कि उन्होंने पूर्व पीएम शेख हसीना से फोन पर बातचीत की कोशिश की थी। इस खबर के बाहर आने के बाद प्रधानमंत्री नाराज हो गए थे। हसीना के देश छोड़ने के बाद भी पद नहीं छोड़ा था मोहम्मद शहाबुद्दीन ने अप्रैल 2023 में राष्ट्रपति पद संभाला था। जुलाई-अगस्त 2024 में हुए छात्र आंदोलन के बाद अवामी लीग सरकार सत्ता से बाहर हो गई थी। उस आंदोलन के कारण तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना को देश छोड़ना पड़ा था। इसके बाद शहाबुद्दीन ही अवामी लीग सरकार के दौर के एकमात्र संवैधानिक पदाधिकारी थे, जो 2 साल बाद भी पद पर बने हुए थे। लंदन दौरे पर शेख हसीना से बातचीत का आरोप वह 9 मई को इलाज के लिए लंदन गए थे और 18 मई को ढाका लौटे थे। बांग्लादेशी समाचार पत्रों की रिपोर्टों में सूत्रों के हवाले से बताया गया था कि इस यात्रा के दौरान राष्ट्रपति ने भारत में रह रहीं पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना से फोन पर बातचीत की थी। जैसे ही इस बातचीत की भनक बीएनपी (BNP) के शीर्ष नेतृत्व को लगी, उन्होंने इसे बहुत गंभीरता से लिया। इसके बाद राष्ट्रपति तक यह मैसेज पहुंचाया कि शेख हसीना से संपर्क साधना या बातचीत करना मौजूदा राजनीतिक माहौल में स्वीकार्य नहीं है और उन्हें अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। अखबार प्रोथोम आलो ने भी सरकार के एक सीनियर अधिकारी के हवाले से बताया कि सरकार इस बात से नाराज है कि राष्ट्रपति ने हाल ही में शेख हसीना से दोबारा संपर्क करने की कोशिश की थी। वहीं द डेली स्टार ने बीएनपी के एक सीनियर नेता के हवाले से लिखा था कि शहाबुद्दीन और शेख हसीना के बीच कथित फोन पर हुई बातचीत ही इस्तीफे की एकमात्र वजह नहीं है। दरअसल शेख हसीना ने इसी साल दिसंबर में बांग्लादेश लौटने का ऐलान किया है। इससे देश का राजनीतिक माहौल और ज्यादा संवेदनशील हो गया है। अब स्पीकर राष्ट्रपति की जिम्मेदारी निभाएंगे बांग्लादेश के संविधान के अनुच्छेद 54 के मुताबिक, नए राष्ट्रपति के चुने जाने तक संसद के स्पीकर हाफिज उद्दीन अहमद कार्यवाहक राष्ट्रपति की जिम्मेदारी संभालेंगे। इसके बाद संसद को 90 दिनों के भीतर नया राष्ट्रपति चुनना होगा, जो मौजूदा कार्यकाल का बाकी समय पूरा करेगा। मोहम्मद शहाबुद्दीन ने 24 अप्रैल 2023 को बांग्लादेश के 22वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली थी। वह सत्तारूढ़ अवामी लीग के उम्मीदवार थे और निर्विरोध चुने गए थे। उनका कार्यकाल अप्रैल 2028 तक चलना था। स्पीकर इलाज के लिए बैंकॉक गए थे स्पीकर हाफिज उद्दीन अहमद 19 जुलाई को इलाज के लिए थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक गए थे। उनकी वापसी रविवार को तय थी, लेकिन उन्होंने अपना दौरा बीच में ही खत्म कर दो दिन पहले ढाका लौटने का फैसला किया। ढाका हवाई अड्डे पर पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा था कि विदेश में होने के कारण उन्हें राष्ट्रपति के इस्तीफे के फैसले की जानकारी नहीं थी।

नेपाल के प्रधानमंत्री पर सुप्रीम कोर्ट में दखल का आरोप:3 जजों पर इस्तीफे का दवाब बना रहे बालेन शाह; अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने चेतावनी दी

नेपाल के प्रधानमंत्री पर सुप्रीम कोर्ट में दखल का आरोप:3 जजों पर इस्तीफे का दवाब बना रहे बालेन शाह; अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने चेतावनी दी

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह की सरकार पर सुप्रीम कोर्ट को अपने पक्ष में करने की कोशिश के आरोप लगे हैं। तीन अंतरराष्ट्रीय संगठनों एमनेस्टी इंटरनेशनल, ह्यूमन राइट्स वॉच और इंटरनेशनल कमीशन ऑफ ज्यूरिस्ट्स (ICJ) ने संयुक्त बयान जारी कर यह आरोप लगाया है। संगठनों का कहना कि सरकार तीन वरिष्ठ न्यायाधीशों पर इस्तीफा देने का दबाव बना रही है। अगर वे ऐसा नहीं करते हैं तो उनके खिलाफ महाभियोग लाया जा सकता है। संगठनों का कहना है कि सरकार का मकसद सुप्रीम कोर्ट की संरचना बदलना है। उनका आरोप है कि हाल के महीनों में ऐसे कई कदम उठाए गए हैं, जिनसे अदालत की स्वतंत्रता कमजोर हो सकती है और संवैधानिक मामलों की सुनवाई प्रभावित हो सकती है। मुख्य न्यायधीश की नियुक्ति को लेकर भी विवाद बयान में मनोज कुमार शर्मा को नेपाल का मुख्य न्यायाधीश बनाए जाने पर भी सवाल उठाए गए हैं। संगठनों का कहना है कि नेपाल में लंबे समय से यह परंपरा रही है कि सुप्रीम कोर्ट के सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश को ही मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया जाता है। इस बार इस परंपरा का पालन नहीं किया गया और मनोज शर्मा को उस समय मुख्य न्यायाधीश बना दिया गया, जब उनसे तीन सीनियर चीफ जस्टिस सपना प्रधान मल्ला, कुमार रेग्मी और हरि फुयाल मौजूद थे। तीन सीनियर जजों पर इस्तीफे का दबाव बयान में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के तीन सीनियर जस्टिस सपना प्रधान मल्ला, कुमार रेग्मी और हरि फुयाल पर इस्तीफा देने का दबाव बनाया जा रहा है। संगठनों का कहना है कि अब तक इन तीनों के खिलाफ ऐसा कोई सार्वजनिक आरोप या ठोस सबूत सामने नहीं आया है, जिससे यह साबित हो कि उन्होंने कोई गंभीर संवैधानिक या कानूनी गलती की है। नेपाल के संविधान के अनुसार किसी सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को केवल गंभीर आरोप साबित होने और महाभियोग जैसी संवैधानिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही हटाया जा सकता है। अगर बिना ऐसी प्रक्रिया अपनाए या सिर्फ राजनीतिक दबाव के कारण इन न्यायाधीशों को इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया जाता है, तो इससे न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर सवाल उठेंगे। संवैधानिक परिषद में बदलाव पर आपत्ति जताई इन संगठनों ने मई 2026 में संवैधानिक परिषद अधिनियम में अध्यादेश के जरिए किए गए संशोधन पर भी आपत्ति जताई है। नेपाल में संवैधानिक परिषद एक अहम संस्था है। यही परिषद मुख्य न्यायाधीश, चुनाव आयोग, मानवाधिकार आयोग और अन्य संवैधानिक निकायों के प्रमुखों की नियुक्ति के लिए नामों की सिफारिश करती है। विवाद इस बात पर है कि बालेन शाह सरकार ने मई 2026 में संसद से कानून पारित कराने के बजाय अध्यादेश के जरिए परिषद के काम करने के नियम बदल दिए। पहले बैठक के लिए ज्यादा सदस्यों की मौजूदगी जरूरी थी। नियुक्तियों पर व्यापक सहमति या पूरे परिषद के बहुमत की जरूरत पड़ती थी। लेकिन संशोधन के बाद कम सदस्यों की मौजूदगी में भी बैठक हो सकती है। इतना ही नहीं बैठक में मौजूद सदस्यों के साधारण बहुमत से फैसला लिया जा सकता है।

Nepal Balen Shah Controversy | PM Pressuring Supreme Court Judges

नेपाल के प्रधानमंत्री पर सुप्रीम कोर्ट में दखल का आरोप:3 जजों पर इस्तीफे का दवाब बना रहे बालेन शाह; अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने चेतावनी दी

काठमांडू3 मिनट पहले कॉपी लिंक नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह की सरकार पर सुप्रीम कोर्ट को अपने पक्ष में करने की कोशिश के आरोप लगे हैं। तीन अंतरराष्ट्रीय संगठनों एमनेस्टी इंटरनेशनल, ह्यूमन राइट्स वॉच और इंटरनेशनल कमीशन ऑफ ज्यूरिस्ट्स (ICJ) ने संयुक्त बयान जारी कर यह आरोप लगाया है। संगठनों का कहना कि सरकार तीन वरिष्ठ न्यायाधीशों पर इस्तीफा देने का दबाव बना रही है। अगर वे ऐसा नहीं करते हैं तो उनके खिलाफ महाभियोग लाया जा सकता है। संगठनों का कहना है कि सरकार का मकसद सुप्रीम कोर्ट की संरचना बदलना है। उनका आरोप है कि हाल के महीनों में ऐसे कई कदम उठाए गए हैं, जिनसे अदालत की स्वतंत्रता कमजोर हो सकती है और संवैधानिक मामलों की सुनवाई प्रभावित हो सकती है। मुख्य न्यायधीश की नियुक्ति को लेकर भी विवाद बयान में मनोज कुमार शर्मा को नेपाल का मुख्य न्यायाधीश बनाए जाने पर भी सवाल उठाए गए हैं। शर्मा उस समय वरिष्ठता क्रम में चौथे स्थान पर थे। उनसे सीनियर तीन न्यायाधीश को नजरअंदाज कर दिया गया। इसी वजह से विवाद शुरू हुआ। नेपाल में लंबे समय से यह परंपरा रही है कि सुप्रीम कोर्ट के सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश को ही मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया जाता है। इस बार इस परंपरा का पालन नहीं किया गया और मनोज शर्मा को उस समय मुख्य न्यायाधीश बना दिया गया, जब उनसे तीन सीनियर चीफ जस्टिस सपना प्रधान मल्ला, कुमार रेग्मी और हरि फुयाल मौजूद थे। इसके अलावा संगठन का आरोप है कि मनोज कुमार शर्मा के खिलाफ मिली शिकायतों की भी खुली और निष्पक्ष जांच नहीं की गई। संसदीय सुनवाई समिति को शर्मा के खिलाफ कुल 16 शिकायतें मिली थीं। हालांकि ये शिकायतें गोपनीय रखी गई और मीडिया के सामने पेश नहीं की गई। नेपाल के मुख्य न्यायधीष मनोज कुमार शर्मा ने मई 2016 में पद की शपथ ली। बिना सबूत के जजों पर इस्तीफे का दबाव बयान में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के तीन सीनियर जस्टिस सपना प्रधान मल्ला, कुमार रेग्मी और हरि फुयाल पर इस्तीफा देने का दबाव बनाया जा रहा है। संगठनों का कहना है कि अब तक इन तीनों के खिलाफ ऐसा कोई सार्वजनिक आरोप या ठोस सबूत सामने नहीं आया है, जिससे यह साबित हो कि उन्होंने कोई गंभीर संवैधानिक या कानूनी गलती की है। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि नेपाल के संविधान के मुताबिक, किसी न्यायाधीश के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया शुरू होते ही उसे तुरंत निलंबित कर दिया जाता है। अगर सुप्रीम कोर्ट के तीनों वरिष्ठ न्यायाधीशों को एक साथ निलंबित किया गया तो अदालत की संरचना और कामकाज पर बड़ा असर पड़ेगा। यह ऐसे समय में होगा, जब सुप्रीम कोर्ट सरकार के कई अहम फैसलों और संवैधानिक मामलों की सुनवाई कर रही है। संगठनों का कहना है कि अगर बिना ठोस संवैधानिक आधार के महाभियोग का इस्तेमाल किया गया तो इससे यह संदेश जाएगा कि सरकार अदालत की संरचना बदलकर लंबित मामलों के फैसलों को प्रभावित करना चाहती है। इससे न्यायपालिका की स्वतंत्रता और निष्पक्षता पर जनता का भरोसा भी कमजोर हो सकता है। नेपाल के नवनियुक्त मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार शर्मा ने 19 मई को पद और गोपनीयता की शपथ ली थी। राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने राष्ट्रपति भवन शीतल निवास में आयोजित विशेष समारोह में उन्हें शपथ दिलाई थी। संवैधानिक परिषद में बदलाव पर आपत्ति जताई इन संगठनों ने मई 2026 में संवैधानिक परिषद अधिनियम में अध्यादेश के जरिए किए गए संशोधन पर भी आपत्ति जताई है। नेपाल में संवैधानिक परिषद एक अहम संस्था है। यही परिषद मुख्य न्यायाधीश, चुनाव आयोग, मानवाधिकार आयोग और अन्य संवैधानिक निकायों के प्रमुखों की नियुक्ति के लिए नामों की सिफारिश करती है। विवाद इस बात पर है कि बालेन शाह सरकार ने मई 2026 में संसद से कानून पारित कराने के बजाय अध्यादेश के जरिए परिषद के काम करने के नियम बदल दिए। पहले बैठक के लिए ज्यादा सदस्यों की मौजूदगी जरूरी थी। नियुक्तियों पर व्यापक सहमति या पूरे परिषद के बहुमत की जरूरत पड़ती थी। लेकिन संशोधन के बाद कम सदस्यों की मौजूदगी में भी बैठक हो सकती है। इतना ही नहीं बैठक में मौजूद सदस्यों के साधारण बहुमत से फैसला लिया जा सकता है। —————————— नेपाल से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… नेपाली PM बालेन शाह ने अपना ही नियम क्यों तोड़ा:भारत और चीन के राजदूतों से मुलाकात करेंगे; 3 महीने में ही फैसले से पलटे नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह (बालेन शाह) पहली बार अपने बनाए नियम से हटकर विदेशी राजदूतों से अलग-अलग मुलाकात करने जा रहे हैं। प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने तय किया था कि वह किसी भी विदेशी राजदूत से अकेले मुलाकात नहीं करेंगे। नेपाली मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बालेन शाह भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव और चीन के राजदूत झांग माओमिंग से अलग-अलग मुलाकात करेंगे। पूरी खबर यहां पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

मानसून में पर्यटन स्थल: बारिश में पहाड़ों पर यात्रा से बचना चाहते हैं? तो आपके लिए वो 6 जगहें हैं जहां घूमने पर कोई खतरा नहीं है

तस्वीर का विवरण

अलपुज्जा, केरला: अलेप्पी को पूर्व का वेनिस कहा जाता है और यह उनके बैकवाटर्स और हाउसबोट के लिए दुनिया भर में मशहूर है। बारिश के बीच हाउसबोट में पानी की सैर का एक अलग ही आनंद मिलता है। छवि: एआई ओरछा, मध्य प्रदेश: बेतवा नदी के किनारे बसा यह ऐतिहासिक शहर की धरोहर बिल्कुल हरा-भरा हो जाता है। शांत महल और पुराना महल आपको बहुत पसंद आएगा। यह यात्रा बिल्कुल भरोसेमंद रहेगी। छवि: एआई दुविधा का गाँव: ऑफ-सीजन के कारण बारिश में गोवा घूमना काफी सस्ता है। यहां आपको हरियाली, शांत समंदर और सैमुअल होटल मिलेंगे। कम बजट वाले यात्रियों के लिए यह सटीक गंतव्य है। छवि: एआई यूके, राजस्थान: बारिश में यूके की झीलें और महल और भी खूबसूरत हो जाते हैं। यहां आप कम बजट में शाही अंदाज का अनुभव ले सकते हैं। जैसे पहाड़ों में कोई जोखिम नहीं। छवि: एआई पुडुचेरी: फ्रेंच स्टाइल की इमारतें बारिश और से धुली सासा सड़कें। पुडुचेरी में बेहद शांत और खूबसूरत नज़ारे हैं। यहां रहना और खाना-पीना काफी बजट-अनुकूल है। छवि: एआई माउंट आबू,राजस्थान: राजस्थान का हिल स्टेशन, पहाड़ों का मतलब है लेकिन यहां जोखिम बराबर नहीं है। बारिश के मौसम में नक्की झील के पास चाय-पकौड़े का बागान जरूर पढ़ें। छवि: एआई डिजाईन ट्रिप पर हमेशा साझीदार बैग, छाता और अच्छी पकड़ वाले उपभोक्ता साथ-साथ रहते हैं। तो देर किस बात की? कम बजट में अपना बैग पैक करें और सुरक्षित जगह पर आनंद लें। छवि: एआई (टैग्सटूट्रांसलेट)मानसून ट्रिप प्लान(टी)मानसून ट्रिप(टी)मानसून ट्रिप प्लानिंग(टी)परिवार यात्रा विचार(टी)बजट में युगल यात्रा(टी)सर्वोत्तम स्थान(टी)भारत में सर्वोत्तम स्थान(टी)मानसून में सर्वोत्तम स्थान

Delhi University Advisory | Students Teachers Avoid Jantar Mantar Protest

Delhi University Advisory | Students Teachers Avoid Jantar Mantar Protest

Hindi News Career Delhi University Advisory | Students Teachers Avoid Jantar Mantar Protest 15 मिनट पहले कॉपी लिंक राजधानी दिल्ली में NEET पेपर लीक मामले को लेकर जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) ने छात्रों और टीचर्स के लिए एडवाइजरी जारी की है। विश्वविद्यालय ने जंतर-मंतर पर होने वाले धरना-प्रदर्शनों से दूर रहने की अपील करते हुए कहा है कि ऐसे आयोजनों में शामिल होने पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है। Dear students and faculty, your safety matters to us. Please note that any unlawful assemblies or demonstrations at Jantar Mantar, New Delhi, which are strictly regulated as per the directives of the Hon’ble Supreme Court of India, may invite legal action. Such activities can…— University of Delhi (@UnivofDelhi) July 23, 2026 डीयू का कहना है कि इस तरह की गतिविधियां न केवल छात्रों की सुरक्षा के लिए खतरा हैं, बल्कि उनके एजुकेशनल रिकॉर्ड और भविष्य के करियर पर भी असर डाल सकती हैं। साथ ही छात्रों को सोशल मीडिया पर फैल रही भ्रामक और फर्जी खबरों से भी सतर्क रहने की भी सलाह दी। इस आंदोलन में सक्रिय छात्र संगठनों में स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI), आल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA), आल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (AISF), कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और विभिन्न DU कॉलेजों के स्वतंत्र छात्र समूह शामिल हैं। AdvisoryAll stakeholders of JNU’s epistemic community are advised to act responsibly and prioritize their personal safety. In accordance with the Hon’ble Supreme Court of India’s directions on public demonstrations, you are requested to refrain from participating in or visiting…— Jawaharlal Nehru University (JNU) (@JNU_official_50) July 24, 2026 JNU की एडवाइजरी : व्यक्तिगत सुरक्षा को प्राथमिकता दें जेएनयू की ओर से ट्विटर पर कहा गया है कि सभी सदस्यों को सलाह दी जाती है कि वे जिम्मेदारी से काम लें और अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा को प्राथमिकता दें। सार्वजनिक प्रदर्शनों के बारे में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, आपसे अनुरोध है कि आप नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर या उसके आस-पास होने वाली सभाओं में शामिल होने या वहा जाने से बचें। साथ ही सोशल मीडिया पर जिम्मेदारी से व्यवहार करें और शैक्षणिक जिम्मेदारी और जिम्मेदार नागरिकता के मूल्यों को बनाए रखें। IIT मद्रास की एडवाइजरी The ROOT OF TRUST of any exam is the teachers who set the question paper. We trust them for their integrity and honesty. As per reports in media regarding NEET paper leak, it is pointing to the question paper setters who are involved in the scam. Again it is disturbing to note… https://t.co/7ZaBLt2aBr— IIT Madras (@iitmadras) July 23, 2026 आईआईटी मद्रास ने कहा किसी भी परीक्षा में भरोसे की असली नींव वे शिक्षक होते हैं जो प्रश्न-पत्र तैयार करते हैं। हम उनकी ईमानदारी और सच्चाई पर भरोसा करते हैं। NEET पेपर लीक के बारे में मीडिया की खबरों से पता चलता है कि इस घोटाले में प्रश्न-पत्र तैयार करने वाले लोग ही शामिल हैं। मीडिया से यह जानकर भी हैरानी होती है कि जब CBSE ने री-इवैल्यूएशन पोर्टल शुरू किया तो साइबर अपराधियों ने कम समय में 3.8 मिलियन पैकेट भेजकर उसे ठप करने की कोशिश की थी। राहुल गांधी ने की एडवाइजरी की आलोचना लोकसभा में राहुल गांधी ने आज यानी 24 जुलाई को दिल्ली यूनिवर्सिटी DU की उस एडवाइजरी की कड़ी आलोचना की जिसमें छात्रों से जंतर-मंतर पर हो रहे प्रदर्शनों से दूर रहने को कहा गया था। कांग्रेस नेता ने यूनिवर्सिटी पर आरोप लगाया कि वह छात्रों को उनके लोकतांत्रिक अधिकारों का इस्तेमाल करने के लिए धमका रही है। How dare you threaten students for exercising their democratic rights?Please note, you are the ones that will be held accountable when the time comes. https://t.co/Mx6D19SP5h— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) July 24, 2026 DU की एडवाइजरी पर प्रतिक्रिया देते हुए गांधी ने ट्विटर पर लिखा, छात्रों को उनके लोकतांत्रिक अधिकारों का इस्तेमाल करने के लिए धमकाने की हिम्मत कैसे हुई? ध्यान रहे, जब समय आएगा तो आप ही जवाबदेह होंगे। ये खबर भी पढ़ें NEET छात्रा का दावा झूठा, बनाई फर्जी मार्कशीट:विरोध करने जंतर-मंतर तक पहुंची, NTA ने फोरेंसिक जांच से पकड़े डिजिटली बदलाव 21 जून को Re Neet एग्जाम देने वाली कानपुर की आर्या सिंह ने एनटीए पर गंभीर आरोप लगाए। अपनी ओएमआर शीट लेकर वे पिता के साथ NTA के विरोध में दिल्ली के जंतर-मंतर भी पहुंच गईं। पूरी खबर यहां पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Thalapathy Vijay Last Film Jan Nayakan

Thalapathy Vijay Last Film Jan Nayakan

10 मिनट पहले कॉपी लिंक एक्टर से राजनेता बने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थलापति विजय की आखिरी फिल्म जन नायकन कल यानी 23 जुलाई को दुनियाभर में रिलीज हुई है। इस मौके पर उनकी रूमर्ड गर्लफ्रेंड तृषा कृष्णन फर्स्ट डे फर्स्ट शो देखने पहुंची थीं। थिएटर के बाहर स्पॉट हुईं तृषा ने इस पर बात करने से इनकार कर दिया, जबकि उनकी मां ने भावुक होकर कहा कि वो विजय को बड़े पर्दे पर देखना मिस करेंगी। तृषा कृष्णन की मां उमा कृष्णन भी फिल्म देखने पहुंचीं। विजय की आखिरी फिल्म पर उन्होंने एएनआई से बातचीत में कहा, मुझे बहुत बुरा लग रहा है, हम उन्हें बहुत मिस करेंगे। तृषा कृष्णन की मां उमा कृष्णन। फिल्म देखने पहुंचीं तृषा भीड़ में फंसी तृषा कृष्णन अपनी दोस्तों के साथ जन नायकन देखने पहुंची थीं। फिल्म देखकर निकलते हुए तृषा को भीड़ ने घेर लिया, जिसके बाद एक्ट्रेस कार तक पहुंचने में मशक्कत करती नजर आई हैं। फैंस की भीड़ के बीच पुलिस को भी एक्ट्रेस और उनकी दोस्तों को बचाने में जद्दोजहद करनी पड़ी। फिल्म देखने के कुछ देर बाद तृषा ने दोस्तों के साथ एक फोटो शेयर की है, जिसके कैप्शन में लिखा था, ‘हम जिंदा निकल कर आ गए’। वहीं फिल्म पर लिखा गया, ‘एक आखिरी बार, एक आखिरी डांस, जन नायकन का पागलपन।’ फिल्म ने पहले दिन किया 40 करोड़ से ज्यादा का कलेक्शन इंडस्ट्री ट्रैकर वेबसाइट सैकनिल्क की रिपोर्ट के अनुसार, विजय की फिल्म जन नायकन ने पहले दिन देशभर में 42.70 करोड़ का नेट कलेक्शन कर लिया है। सेंसरशिप के चलते टलती रही विजय की आखिरी फिल्म जन नायकन बता दें कि विजय ने बीते साल जन नायकन के बाद फिल्म से रिटायरमेंट का ऐलान किया था। ये फिल्म पहले जनवरी 2026 में रिलीज की जाने वाली थी। हालांकि सेंसरशिप के चलते फिल्म टलते हुए अब रिलीज हुई है। फिल्म रिलीज से पहले थलापति विजय के फैंस में काफी उत्साह देखने मिला। उनके कई फैंस विदेश से फिल्म देखने भारत आए हैं। साउथ के कई सिनेमाघरों के बाहर विजय के बड़े-बड़े कटआउट लगाए गए, जहां फैंस घंटों तक डांस करते रहे। ……………………………………… जन नायकन मूवी रिव्यू:विजय की आखिरी फिल्म पर राजनीति हावी, तीन घंटे का सफर बन गया थका देने वाला तमाशा विजय की आखिरी फिल्म होने के कारण ‘जन नायकन’ सिर्फ एक रिलीज नहीं, बल्कि करोड़ों प्रशंसकों के लिए भावनात्मक मौका थी। उम्मीद थी कि यह फिल्म उनके लंबे सिनेमाई सफर को यादगार विदाई देगी। लेकिन निर्देशक एच. विनोथ इसे कहानी से ज्यादा राजनीतिक संदेश और स्टार की छवि चमकाने का माध्यम बना देते हैं। नतीजा यह कि फिल्म कई बार मनोरंजन छोड़कर चुनावी भाषण जैसी लगने लगती है। विजय की मौजूदगी तालियां जरूर बटोरती है, लेकिन कमजोर पटकथा और जरूरत से ज्यादा लंबाई फिल्म का असर कम कर देती है। फिल्म की लंबाई 3 घंटे 3 मिनट है। दैनिक भास्कर ने फिल्म को 5 में से 2 स्टार दिए हैं। पूरा रिव्यू पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔