Monday, 07 Sep 2026 | 03:53 PM

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Thalapathy Vijay Last Film Jan Nayakan

Thalapathy Vijay Last Film Jan Nayakan

27 मिनट पहले कॉपी लिंक एक्टर से राजनेता बने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थलापति विजय की आखिरी फिल्म जन नायकन कल यानी 23 जुलाई को दुनियाभर में रिलीज हुई है। इस मौके पर उनकी रूमर्ड गर्लफ्रेंड तृषा कृष्णन फर्स्ट डे फर्स्ट शो देखने पहुंची थीं। थिएटर के बाहर स्पॉट हुईं तृषा ने इस पर बात करने से इनकार कर दिया, जबकि उनकी मां ने भावुक होकर कहा कि वो विजय को बड़े पर्दे पर देखना मिस करेंगी। तृषा कृष्णन की मां उमा कृष्णन भी फिल्म देखने पहुंचीं। विजय की आखिरी फिल्म पर उन्होंने एएनआई से बातचीत में कहा, मुझे बहुत बुरा लग रहा है, हम उन्हें बहुत मिस करेंगे। तृषा कृष्णन की मां उमा कृष्णन। फिल्म देखने पहुंचीं तृषा भीड़ में फंसी तृषा कृष्णन अपनी दोस्तों के साथ जन नायकन देखने पहुंची थीं। फिल्म देखकर निकलते हुए तृषा को भीड़ ने घेर लिया, जिसके बाद एक्ट्रेस कार तक पहुंचने में मशक्कत करती नजर आई हैं। फैंस की भीड़ के बीच पुलिस को भी एक्ट्रेस और उनकी दोस्तों को बचाने में जद्दोजहद करनी पड़ी। फिल्म देखने के कुछ देर बाद तृषा ने दोस्तों के साथ एक फोटो शेयर की है, जिसके कैप्शन में लिखा था, ‘हम जिंदा निकल कर आ गए’। वहीं फिल्म पर लिखा गया, ‘एक आखिरी बार, एक आखिरी डांस, जन नायकन का पागलपन।’ फिल्म ने पहले दिन किया 40 करोड़ से ज्यादा का कलेक्शन इंडस्ट्री ट्रैकर वेबसाइट सैकनिल्क की रिपोर्ट के अनुसार, विजय की फिल्म जन नायकन ने पहले दिन देशभर में 42.70 करोड़ का नेट कलेक्शन कर लिया है। सेंसरशिप के चलते टलती रही विजय की आखिरी फिल्म जन नायकन बता दें कि विजय ने बीते साल जन नायकन के बाद फिल्म से रिटायरमेंट का ऐलान किया था। ये फिल्म पहले जनवरी 2026 में रिलीज की जाने वाली थी। हालांकि सेंसरशिप के चलते फिल्म टलते हुए अब रिलीज हुई है। फिल्म रिलीज से पहले थलापति विजय के फैंस में काफी उत्साह देखने मिला। उनके कई फैंस विदेश से फिल्म देखने भारत आए हैं। साउथ के कई सिनेमाघरों के बाहर विजय के बड़े-बड़े कटआउट लगाए गए, जहां फैंस घंटों तक डांस करते रहे। ……………………………………… जन नायकन मूवी रिव्यू:विजय की आखिरी फिल्म पर राजनीति हावी, तीन घंटे का सफर बन गया थका देने वाला तमाशा विजय की आखिरी फिल्म होने के कारण ‘जन नायकन’ सिर्फ एक रिलीज नहीं, बल्कि करोड़ों प्रशंसकों के लिए भावनात्मक मौका थी। उम्मीद थी कि यह फिल्म उनके लंबे सिनेमाई सफर को यादगार विदाई देगी। लेकिन निर्देशक एच. विनोथ इसे कहानी से ज्यादा राजनीतिक संदेश और स्टार की छवि चमकाने का माध्यम बना देते हैं। नतीजा यह कि फिल्म कई बार मनोरंजन छोड़कर चुनावी भाषण जैसी लगने लगती है। विजय की मौजूदगी तालियां जरूर बटोरती है, लेकिन कमजोर पटकथा और जरूरत से ज्यादा लंबाई फिल्म का असर कम कर देती है। फिल्म की लंबाई 3 घंटे 3 मिनट है। दैनिक भास्कर ने फिल्म को 5 में से 2 स्टार दिए हैं। पूरा रिव्यू पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

क्वांटस के प्रोजेक्ट सनराइज की पहली टेस्ट फ्लाइट ऑस्ट्रेलिया पहुंची:फ्रांस से 19 घंटे की उड़ान भरकर इतिहास बनाया; अक्टूबर 2027 से शुरू होंगी डायरेक्ट फ्लाइट्स

क्वांटस के प्रोजेक्ट सनराइज की पहली टेस्ट फ्लाइट ऑस्ट्रेलिया पहुंची:फ्रांस से 19 घंटे की उड़ान भरकर इतिहास बनाया; अक्टूबर 2027 से शुरू होंगी डायरेक्ट फ्लाइट्स

ऑस्ट्रेलियाई एयरलाइन क्वांटस के विमान ने सबसे लंबी दूरी तय करने का रिकॉर्ड बनाया है। इस कॉमर्शियल एयरक्राफ्ट ने शुक्रवार 24 जुलाई की सुबह ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में लैंडिंग की। 19 घंटे 13 मिनट में तय किया 17,000 किमी का सफर विमान ने फ्रांस के टूलूज शहर से स्थानीय समयानुसार गुरुवार सुबह 7:33 बजे उड़ान भरी थी। 19 घंटे और 13 मिनट का लंबा सफर तय करके इसने मेलबर्न में टचडाउन किया। खास फ्यूल सिस्टम की जांच: 20,000 लीटर का एक्स्ट्रा टैंक अक्टूबर 2027 से सिडनी-लंदन और न्यू यॉर्क रूट की शुरुआत क्वांटस ने साल 2017 में पहली बार ‘प्रोजेक्ट सनराइज’ का ऐलान किया था और 2022 में एयरबस को 12 कस्टमाइज्ड A350-1000ULR एयरक्राफ्ट का ऑर्डर दिया था। पहले विमान की डिलीवरी इसी साल होनी थी, लेकिन अब इसमें देरी हुई है और पहला विमान अप्रैल 2027 में मिलेगा। इसके बाद बाकी 11 विमान अगले ढाई सालों में डिलीवर किए जाएंगे। प्रोजेक्ट सनराइज का पहला कॉमर्शियल रूट सिडनी-लंदन होगा। टिकटों की बिक्री फरवरी में शुरू होगी और उड़ानें अक्टूबर 2027 से शुरू होंगी। सिडनी-न्यू यॉर्क रूट भी 2027 के आखिरी महीनों में शुरू होने की उम्मीद है। प्रत्येक रूट पर रोजाना सर्विस के लिए क्वांटस को 3 एयरक्राफ्ट की जरूरत होगी। मेलबर्न को कब मिलेगी नॉन-स्टॉप फ्लाइट? भले ही टेस्ट फ्लाइट मेलबर्न में उतरी है, लेकिन मेलबर्न से लंदन या न्यू यॉर्क के लिए सीधी फ्लाइट कब शुरू होगी, इस पर फिलहाल कोई स्पष्ट समयसीमा तय नहीं है। क्वांटस की सीईओ वैनेसा हडसन ने बताया कि सिडनी रूट शुरू होने के बाद ही मेलबर्न पर चर्चा की जाएगी। कंपनी के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) रॉब मार्कोलिना ने बताया कि बाजार का बड़ा आकार होने के कारण सिडनी को मेलबर्न के मुकाबले प्राथमिकता दी गई है। क्वांटस का इरादा पहले 6 विमानों के बाद आने वाले एयरक्राफ्ट्स को पर्थ-लंदन और ऑकलैंड-न्यू यॉर्क जैसे मौजूदा रूट्स पर तैनात करने का है। इससे पुराने बोइंग 787 विमान फ्री होंगे, जिन्हें शिकागो, कनाडा, दक्षिण अमेरिका या पर्थ से एथेंस व अफ्रीका जैसे नए रूट्स पर लगाया जा सकेगा। नॉर्थ पोल वाला अनोखा रूट: हवाओं से बचकर दूरी बचेगी क्वांटस के चीफ टेक्निकल पायलट एलेक्स पासेरिनी ने बताया कि सिडनी-लंदन नॉन-स्टॉप फ्लाइट के लिए एक अनोखा ‘नॉर्थ पोलर फ्लाइट पाथ’ इस्तेमाल किया जाएगा। लगभग 20% उड़ानों में, खासकर उत्तरी गोलार्ध की सर्दियों में, इसी रूट का उपयोग होगा। दूरी के हिसाब से यह लंबा लग सकता है, लेकिन साल के खास समय में तेज हवाओं से बचने और कम एयर ट्रैफिक के कारण यह रूट असल में सबसे तेज साबित होता है। इसमें विमान नॉर्थ पैसिफिक, अलास्का, ग्रीनलैंड और आइसलैंड के ऊपर से गुजरते हुए उत्तर दिशा से लंदन में प्रवेश करेगा। क्वांटस की प्लानिंग के मुताबिक, सिडनी से लंदन की सबसे तेज उड़ान 19 घंटे 25 मिनट और सबसे धीमी 20 घंटे 55 मिनट की होगी। वहीं लंदन से सिडनी की उड़ान 18 से 20 घंटे के बीच तेज रहेगी। 12 घंटे अंधेरा रहेगा: जेट लेग से बचाने के लिए स्पेशल लाइट्स और खाना इस यात्रा के दौरान यात्री 9 से 11 टाइम जोन पार करेंगे (न्यू यॉर्क रूट पर 14 से 16 टाइम जोन)। 21 घंटे तक लगातार प्लेन में रहने से यात्रियों को नींद की कमी, थकान, जेट लेग और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इससे निपटने के लिए सिडनी यूनिवर्सिटी के चार्ल्स पर्किन्स सेंटर के प्रोफेसर पीटर सिस्टुली की मदद ली गई है। उन्होंने बताया कि सही समय पर खाना और लाइटिंग का सही इस्तेमाल बॉडी क्लॉक को एडजस्ट करने में बहुत मददगार होता है। क्या है क्वांटस का ‘प्रोजेक्ट सनराइज’? ‘प्रोजेक्ट सनराइज’ ऑस्ट्रेलियाई एयरलाइन क्वांटस की एक ऐतिहासिक योजना है, जिसका मकसद दुनिया के किसी भी कोने को ऑस्ट्रेलिया से सीधे (नॉन-स्टॉप) जोड़ना है। इसका नाम द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान उड़ने वाली उन गुप्त उड़ानों पर रखा गया है, जो इतने लंबे समय तक हवा में रहती थीं कि यात्री अपनी यात्रा के दौरान दो बार सनराइज देखते थे। इस प्रोजेक्ट के तहत सिडनी से लंदन (19+ घंटे) और सिडनी से न्यू यॉर्क की सीधी उड़ानें शुरू की जा रही हैं।

क्वांटस के प्रोजेक्ट सनराइज की पहली टेस्ट फ्लाइट ऑस्ट्रेलिया पहुंची:फ्रांस से 19 घंटे की उड़ान भरकर इतिहास बनाया; अक्टूबर 2027 से शुरू होंगी डायरेक्ट फ्लाइट्स

क्वांटस के प्रोजेक्ट सनराइज की पहली टेस्ट फ्लाइट ऑस्ट्रेलिया पहुंची:फ्रांस से 19 घंटे की उड़ान भरकर इतिहास बनाया; अक्टूबर 2027 से शुरू होंगी डायरेक्ट फ्लाइट्स

ऑस्ट्रेलियाई एयरलाइन क्वांटस के विमान ने सबसे लंबी दूरी तय करने का रिकॉर्ड बनाया है। इस कॉमर्शियल एयरक्राफ्ट ने शुक्रवार 24 जुलाई की सुबह ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में लैंडिंग की। 19 घंटे 13 मिनट में तय किया 17,000 किमी का सफर विमान ने फ्रांस के टूलूज शहर से स्थानीय समयानुसार गुरुवार सुबह 7:33 बजे उड़ान भरी थी। 19 घंटे और 13 मिनट का लंबा सफर तय करके इसने मेलबर्न में टचडाउन किया। खास फ्यूल सिस्टम की जांच: 20,000 लीटर का एक्स्ट्रा टैंक अक्टूबर 2027 से सिडनी-लंदन और न्यू यॉर्क रूट की शुरुआत क्वांटस ने साल 2017 में पहली बार ‘प्रोजेक्ट सनराइज’ का ऐलान किया था और 2022 में एयरबस को 12 कस्टमाइज्ड A350-1000ULR एयरक्राफ्ट का ऑर्डर दिया था। पहले विमान की डिलीवरी इसी साल होनी थी, लेकिन अब इसमें देरी हुई है और पहला विमान अप्रैल 2027 में मिलेगा। इसके बाद बाकी 11 विमान अगले ढाई सालों में डिलीवर किए जाएंगे। प्रोजेक्ट सनराइज का पहला कॉमर्शियल रूट सिडनी-लंदन होगा। टिकटों की बिक्री फरवरी में शुरू होगी और उड़ानें अक्टूबर 2027 से शुरू होंगी। सिडनी-न्यू यॉर्क रूट भी 2027 के आखिरी महीनों में शुरू होने की उम्मीद है। प्रत्येक रूट पर रोजाना सर्विस के लिए क्वांटस को 3 एयरक्राफ्ट की जरूरत होगी। मेलबर्न को कब मिलेगी नॉन-स्टॉप फ्लाइट? भले ही टेस्ट फ्लाइट मेलबर्न में उतरी है, लेकिन मेलबर्न से लंदन या न्यू यॉर्क के लिए सीधी फ्लाइट कब शुरू होगी, इस पर फिलहाल कोई स्पष्ट समयसीमा तय नहीं है। क्वांटस की सीईओ वैनेसा हडसन ने बताया कि सिडनी रूट शुरू होने के बाद ही मेलबर्न पर चर्चा की जाएगी। कंपनी के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) रॉब मार्कोलिना ने बताया कि बाजार का बड़ा आकार होने के कारण सिडनी को मेलबर्न के मुकाबले प्राथमिकता दी गई है। क्वांटस का इरादा पहले 6 विमानों के बाद आने वाले एयरक्राफ्ट्स को पर्थ-लंदन और ऑकलैंड-न्यू यॉर्क जैसे मौजूदा रूट्स पर तैनात करने का है। इससे पुराने बोइंग 787 विमान फ्री होंगे, जिन्हें शिकागो, कनाडा, दक्षिण अमेरिका या पर्थ से एथेंस व अफ्रीका जैसे नए रूट्स पर लगाया जा सकेगा। नॉर्थ पोल वाला अनोखा रूट: हवाओं से बचकर दूरी बचेगी क्वांटस के चीफ टेक्निकल पायलट एलेक्स पासेरिनी ने बताया कि सिडनी-लंदन नॉन-स्टॉप फ्लाइट के लिए एक अनोखा ‘नॉर्थ पोलर फ्लाइट पाथ’ इस्तेमाल किया जाएगा। लगभग 20% उड़ानों में, खासकर उत्तरी गोलार्ध की सर्दियों में, इसी रूट का उपयोग होगा। दूरी के हिसाब से यह लंबा लग सकता है, लेकिन साल के खास समय में तेज हवाओं से बचने और कम एयर ट्रैफिक के कारण यह रूट असल में सबसे तेज साबित होता है। इसमें विमान नॉर्थ पैसिफिक, अलास्का, ग्रीनलैंड और आइसलैंड के ऊपर से गुजरते हुए उत्तर दिशा से लंदन में प्रवेश करेगा। क्वांटस की प्लानिंग के मुताबिक, सिडनी से लंदन की सबसे तेज उड़ान 19 घंटे 25 मिनट और सबसे धीमी 20 घंटे 55 मिनट की होगी। वहीं लंदन से सिडनी की उड़ान 18 से 20 घंटे के बीच तेज रहेगी। 12 घंटे अंधेरा रहेगा: जेट लेग से बचाने के लिए स्पेशल लाइट्स और खाना इस यात्रा के दौरान यात्री 9 से 11 टाइम जोन पार करेंगे (न्यू यॉर्क रूट पर 14 से 16 टाइम जोन)। 21 घंटे तक लगातार प्लेन में रहने से यात्रियों को नींद की कमी, थकान, जेट लेग और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इससे निपटने के लिए सिडनी यूनिवर्सिटी के चार्ल्स पर्किन्स सेंटर के प्रोफेसर पीटर सिस्टुली की मदद ली गई है। उन्होंने बताया कि सही समय पर खाना और लाइटिंग का सही इस्तेमाल बॉडी क्लॉक को एडजस्ट करने में बहुत मददगार होता है। क्या है क्वांटस का ‘प्रोजेक्ट सनराइज’? ‘प्रोजेक्ट सनराइज’ ऑस्ट्रेलियाई एयरलाइन क्वांटस की एक ऐतिहासिक योजना है, जिसका मकसद दुनिया के किसी भी कोने को ऑस्ट्रेलिया से सीधे (नॉन-स्टॉप) जोड़ना है। इसका नाम द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान उड़ने वाली उन गुप्त उड़ानों पर रखा गया है, जो इतने लंबे समय तक हवा में रहती थीं कि यात्री अपनी यात्रा के दौरान दो बार सनराइज देखते थे। इस प्रोजेक्ट के तहत सिडनी से लंदन (19+ घंटे) और सिडनी से न्यू यॉर्क की सीधी उड़ानें शुरू की जा रही हैं। ये खबर भी पढ़ें… खुद की एयरलाइंस शुरू नहीं करेगा अडाणी ग्रुप: अभी एयरपोर्ट ऑपरेशन संभालता है ग्रुप, नियमों में ढील देने की बात चल रही थी अडाणी ग्रुप ने उन सभी खबरों और अटकलों को खारिज कर दिया है, जिनमें दावा किया जा रहा था कि ग्रुप खुद की एयरलाइन शुरू करने की योजना बना रहा है। कंपनी ने आधिकारिक बयान जारी कर इन मीडिया रिपोर्ट्स को पूरी तरह से गलत और बेबुनियाद बताया है। पूरी खबर पढ़ें…

मियामी बना अरबपतियों का नया गढ़:अमेरिका का नया दुबई; 870 करोड़ के पेंटहाउस और 1,000 फीट ऊंचे टावर

मियामी बना अरबपतियों का नया गढ़:अमेरिका का नया दुबई; 870 करोड़ के पेंटहाउस और 1,000 फीट ऊंचे टावर

कार रखने के लिए लिफ्ट, 80वें माले पर स्विमिंग पूल वाले बैकयार्ड, सोने-संगमरमर से सजे टावर और हेलिपैड। यह किसी साइंस-फिक्शन फिल्म का सेट नहीं, बल्कि अमेरिका के मियामी शहर का नया नजारा है। कभी समुद्र तटों और नाइटलाइफ के लिए पहचाना जाने वाला मियामी आज दुनिया भर के अरबपतियों और लग्जरी डेवलपर्स का ‘प्लेग्राउंड’ बन चुका है। इतिहास में पहली बार मियामी, न्यूयॉर्क और लॉस एंजिल्स जैसे दिग्गजों को पछाड़कर अमेरिका का दूसरा सबसे महंगा महानगर बन गया है। हाल ही में 950 फीट ऊंचे ‘सिप्रियानी रेजिडेंसेस’ ने मियामी की सबसे ऊंची इमारत का खिताब हासिल किया था, लेकिन यह बादशाहत महज कुछ महीनों की है। इस साल के अंत तक 1,049 फीट ऊंचा ‘वॉल्डऑर्फ एस्टोरिया’ इसे पीछे छोड़कर शहर का पहला ‘सुपरटॉल’ (984 फीट से ऊंचा) बन जाएगा। मियामी के आसमान को छूने की इस होड़ में डॉल्चे एंड गबाना, बेंटले और लेम्बोर्गिनी जैसे ग्लोबल लग्जरी ब्रांड्स भी उतर चुके हैं। रियल एस्टेट के विशेषज्ञों के मुताबिक कोविड-19 महामारी के बाद अमेरिका के धनकुबेरों ने कम टैक्स और उदार कानूनों वाले फ्लोरिडा राज्य का रुख किया। शिकागो से सिटाडेल ग्रुप के प्रमुख केन ग्रिफिन के हेडक्वार्टर शिफ्ट करने के बाद मार्क जुकरबर्ग, पीटर थील और लैरी पेज जैसे दिग्गजों ने यहां अपने ठिकाने बनाए। फुटबॉल स्टार लियोनेल मेसी से लेकर टोनी रॉबिंस तक ने यहां करोड़ों डॉलर के पेंटहाउस खरीदे हैं। 2010 से 2022 के बीच फ्लोरिडा में करोड़पतियों की संख्या चार गुना बढ़ गई। यही वजह है कि वित्तीय जगत में अब मियामी को ‘वॉल स्ट्रीट साउथ’ कहा जा रहा है। हालांकि स्विस इन्वेस्टमेंट बैंक यूबीएस ने मियामी को दुनिया भर में ‘रियल एस्टेट बबल’ की सूची में सबसे ऊपर रखा है। गल्फ जैसी चमक, पर यहां जमीन धंस रही है मियामी में अचानक आए इस बदलाव पर यूनिवर्सिटी ऑफ मियामी के आर्किटेक्चर प्रोफेसर जीन-फ्रांस्वा लेज्यून कहते हैं, ‘यह शहर का विकास नहीं, बल्कि सीईओ पावर का प्रदर्शन है।’ जहां अरबपतियों के लिए 90वें माले पर निजी गार्डन हैं, वहीं आम निवासियों के लिए आय की असमानता की खाई बढ़ रही है। मियामी यूनिवर्सिटी के 2024 के अध्ययन के अनुसार, मियामी बीच से गोल्ड बीच तक तटीय इलाकों में बनी दर्जनों लग्जरी बहुमंजिला इमारतें हर साल 3 इंच तक धंस रही हैं। अमेरिकी शहर की रेस – कौन कितना महंगा? सैन फ्रांसिस्को अमेरिका का सबसे महंगा शहर मियामी – न्यूयॉर्क को पछाड़कर दूसरे नंबर पर न्यूयॉर्क – तीसरे स्थान पर खिसका

चांदी आज ₹2,924 सस्ती, ₹2.19 लाख पर आई:सोना ₹1,848 गिरकर ₹1.42 लाख पर आया; चांदी ऑल टाइम हाई से ₹1.67 लाख सस्ती हुई

चांदी आज ₹2,924 सस्ती, ₹2.19 लाख पर आई:सोना ₹1,848 गिरकर ₹1.42 लाख पर आया; चांदी ऑल टाइम हाई से ₹1.67 लाख सस्ती हुई

सोने-चांदी की कीमतों में आज यानी 24 जुलाई को गिरावट है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, एक किलो चांदी 2,924 रुपए घटकर 2.19 लाख रुपए पर आ गई है। वहीं, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 1,848 रुपए गिरकर 1.42 लाख रुपए पर आ गया है। एक दिन पहले चांदी 2.22 लाख रुपए और सोना 1.44 लाख रुपए पर था। ऑल टाइम हाई से 1.67 लाख रुपए गिरी चांदी इस साल सोने-चांदी की कीमत में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। 31 दिसंबर 2025 को सोने के दाम 1.33 लाख रुपए थे, जो 29 जनवरी को बढ़कर 1.76 लाख रुपए के सबसे ऊपरी स्तर पर पहुंच गए थे। तब से अब तक सोना 34,000 रुपए सस्ता हो चुका है। वहीं, चांदी की कीमत 31 दिसंबर 2025 को 2.30 लाख रुपए थी, जो 29 जनवरी को 3.86 लाख रुपए के ऑल टाइम हाई पर पहुंच गई थी। तब से अब तक चांदी 1.67 लाख रुपए सस्ती हो गई है। सोने-चांदी के दाम में आगे तेजी देखने को मिल सकती है कमोडिटी एक्सपर्ट अजय केडिया के मुताबिक सोने-चांदी के दाम अपने हाई से काफी नीचे आ चुके हैं। ऐसे में निवेशक इसमें निवेश कर सकते हैं। हालांकि इनमें एकमुश्त निवेश करने से बचना चाहिए। अजय केडिया के अनुसार साल के आखिर तक सोना एक बार फिर 1.60 लाख और चांदी 2.80 लाख रुपए तक जा सकती है।

चांदी आज ₹2,924 सस्ती, ₹2.19 लाख पर आई:सोना ₹1,848 गिरकर ₹1.42 लाख पर आया; चांदी ऑल टाइम हाई से ₹1.67 लाख सस्ती हुई

चांदी आज ₹2,924 सस्ती, ₹2.19 लाख पर आई:सोना ₹1,848 गिरकर ₹1.42 लाख पर आया; चांदी ऑल टाइम हाई से ₹1.67 लाख सस्ती हुई

सोने-चांदी की कीमतों में आज यानी 24 जुलाई को गिरावट है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, एक किलो चांदी 2,924 रुपए घटकर 2.19 लाख रुपए पर आ गई है। वहीं, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 1,848 रुपए गिरकर 1.42 लाख रुपए पर आ गया है। एक दिन पहले चांदी 2.22 लाख रुपए और सोना 1.44 लाख रुपए पर था। ऑल टाइम हाई से 1.67 लाख रुपए गिरी चांदी इस साल सोने-चांदी की कीमत में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। 31 दिसंबर 2025 को सोने के दाम 1.33 लाख रुपए थे, जो 29 जनवरी को बढ़कर 1.76 लाख रुपए के सबसे ऊपरी स्तर पर पहुंच गए थे। तब से अब तक सोना 34,000 रुपए सस्ता हो चुका है। वहीं, चांदी की कीमत 31 दिसंबर 2025 को 2.30 लाख रुपए थी, जो 29 जनवरी को 3.86 लाख रुपए के ऑल टाइम हाई पर पहुंच गई थी। तब से अब तक चांदी 1.67 लाख रुपए सस्ती हो गई है। सोने-चांदी के दाम में आगे तेजी देखने को मिल सकती है कमोडिटी एक्सपर्ट अजय केडिया के मुताबिक सोने-चांदी के दाम अपने हाई से काफी नीचे आ चुके हैं। ऐसे में निवेशक इसमें निवेश कर सकते हैं। हालांकि इनमें एकमुश्त निवेश करने से बचना चाहिए। अजय केडिया के अनुसार साल के आखिर तक सोना एक बार फिर 1.60 लाख और चांदी 2.80 लाख रुपए तक जा सकती है।

दीपिका चिखलिया ने साई पल्लवी के लुक पर उठाए सवाल:कहा- रामायण में सीता के घुंघराले बालों का कहीं वर्णन नहीं; मेकर्स ने पोस्टपोन किया ट्रेलर

दीपिका चिखलिया ने साई पल्लवी के लुक पर उठाए सवाल:कहा- रामायण में सीता के घुंघराले बालों का कहीं वर्णन नहीं; मेकर्स ने पोस्टपोन किया ट्रेलर

रणबीर कपूर की मोस्ट अवेटेड फिल्म रामायणः पार्ट-1 का ट्रेलर पोस्टपोन हो चुका है। ये ट्रेलर पहले 24 जुलाई यानी आज रिलीज किया जाना था, लेकिन आखिरी वक्त में इसे टाल दिया गया है। इस फैसले से फैंस काफी नाराज दिखे। वहीं दूसरी तरफ रामानंद सागर के टीवी शो रामायण में माता सीता का किरदार निभाने वालीं दीपिका चिखलिया ने फिल्म में तथ्यों को गलत तरह दिखाने पर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि फिल्म रामायण, टीवी शो रामायण को टक्कर नहीं दे पाएगी। दीपिका चिखलिया ने तथ्य गलत दिखाने पर उठाए सवाल रामानंद सागर के टीवी शो रामायण में माता सीता बनीं दीपिका चिखलिया ने फिल्म रामायण में सीता बनीं साई पल्लवी के घुंघराले बाल दिखाए जाने पर सवाल उठाए। वैराइटी इंडिया को दिए इंटरव्यू में दीपिका ने साई पल्लवी पर कहा, “तुलसीदास की रामायण में सीता का वर्णन बादाम जैसी आंखों वाली, एक निश्चित कद-काठी, लंबे बालों और गौर वर्ण वाली स्त्री के रूप में किया गया है। यही बात रामानंद सागर भी तलाश रहे थे और उन्हें वह रूप मुझमें दिखाई दिया।” आगे उन्होंने कहा, “मेरी पहचान आज भी सीता के रूप में है। कई बार लोग मेरा नाम भूल जाते हैं, लेकिन उन्हें याद रहता है कि मैंने सीता का किरदार निभाया था। यही मेरी पहचान है। मुझे लगता है कि हमारी रामायण का प्रभाव फिल्म ‘रामायण’ पर बहुत गहरा रहेगा। महामारी के दौरान जब हमारी रामायण का दूरदर्शन पर दोबारा प्रसारण हुआ था, तब नई पीढ़ी ने भी उसे देखा। ऐसे में उस छवि को मिटा पाना बहुत मुश्किल है। रामायण में कहीं भी यह उल्लेख नहीं है कि सीता जी के घुंघराले बाल थे।” अन्नू कपूर भी उठा चुके हैं साई पल्लवी की कास्टिंग पर सवाल सीनियर एक्टर अन्नू कपूर ने हाल ही में रणबीर कपूर स्टारर फिल्म रामायण में माता सीता का किरदार साउथ एक्ट्रेस साई पल्लवी को देने पर सवाल खड़े किए हैं। अन्नू कपूर ने हाल ही में जूम को दिए इंटरव्यू में कहा है कि भारत में बायोपिक नहीं बनानी चाहिए। आगे अन्नू कपूर ने नितेश तिवारी की अपकमिंग फिल्म रामायण पर कहा, ‘क्या बनाएंगे, जो बनाएंगे, वो रामानंद सागर की रामायण को टेक्नोलॉजिकली बहुत शू शां और फूं फां और शोशेबाजी कर देंगे। लेकिन उसके बाद आप ये सोचिए कि किसको आपने सीता का रोल दिया है। सीता मां हैं, इस देश का हिंदू श्री राम चंद्र को नारायण का अवतार मानते हैं और किनको लिया है माता सीता के रोल में। अब आप सोचिए।’ रामायण का ट्रेलर हुआ पोस्टपोन फिल्म रामायण के प्रोड्यूसर नमित मल्होत्रा ने ऑफिशियल सोशल मीडिया से स्टेटमेंट जारी कर ट्रेलर पोस्टपोन होने की जानकारी दी है। उन्होंने बताया है कि सोनी पिक्चर्स एंटरटेनमेंट से पार्टनरशिप होने के बाद ट्रेलर टाला गया है, क्योंकि वो अब इसे वर्ल्ड लेवल पर लाने की कोशिश कर रहे हैं। स्टेटमेंट के आखिर में नमित मल्होत्रा ने स्टूडेंट प्रोटेस्ट का भी जिक्र किया है। उन्होंने लिखा, मैं रामायण पर विश्वास रखने वाले सभी प्रशंसकों और समर्थकों का दिल से आभार व्यक्त करता हूं, जिनकी वजह से यह संभव हो पाया। हमारे देश का युवा ही हमारा भविष्य है। आइए, हम सभी मिलकर अपने भविष्य की रक्षा और उसे बेहतर बनाने के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान दें। जय हिंद। 8 नवंबर को रिलीज होगी रामायणः पार्ट-1 बता दें कि एपिक सागा फिल्म रामायण, इंडियन सिनेमा की मोस्ट अवेटेड फिल्मों में से एक है। नितेश तिवारी के निर्देशन में बनी इस फिल्म में रणबीर कपूर भगवान राम और साई पल्लवी माता सीता के किरदार में हैं। ये फिल्म 8 नवंबर को रिलीज होने के लिए शेड्यूल है। सबसे मंहगे बिकेंगे रामायण के डिस्ट्रीब्यूशन राइट्स वैराइटी इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, फिल्म रामायण के हिंदी वर्जन के डिस्ट्रीब्यूशन के लिए फिल्म के प्रोड्यूसर्स 450 करोड़ रुपए की मांग कर रहे हैं। जबकि अब तक सबसे मंहगे डिस्ट्रीब्यूशन राइट्स शाहरुख खान की अपकमिंग फिल्म किंग के 250 करोड़ में बिके हैं। अगर ये फिल्म 450 की बजाए 300 करोड़ तक में भी डील करती है, तो ये बॉलीवुड के इतिहास की सबसे बड़ी डिस्ट्रीब्यूशन डील बन जाएगी। फिल्म ‘रामायण’ से जुड़ी अहम बातें-

दीपिका चिखलिया ने साई पल्लवी के लुक पर उठाए सवाल:कहा- रामायण में सीता के घुंघराले बालों का कहीं वर्णन नहीं; मेकर्स ने पोस्टपोन किया ट्रेलर

दीपिका चिखलिया ने साई पल्लवी के लुक पर उठाए सवाल:कहा- रामायण में सीता के घुंघराले बालों का कहीं वर्णन नहीं; मेकर्स ने पोस्टपोन किया ट्रेलर

रणबीर कपूर की मोस्ट अवेटेड फिल्म रामायणः पार्ट-1 का ट्रेलर पोस्टपोन हो चुका है। ये ट्रेलर पहले 24 जुलाई यानी आज रिलीज किया जाना था, लेकिन आखिरी वक्त में इसे टाल दिया गया है। इस फैसले से फैंस काफी नाराज दिखे। वहीं दूसरी तरफ रामानंद सागर के टीवी शो रामायण में माता सीता का किरदार निभाने वालीं दीपिका चिखलिया ने फिल्म में तथ्यों को गलत तरह दिखाने पर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि फिल्म रामायण, टीवी शो रामायण को टक्कर नहीं दे पाएगी। दीपिका चिखलिया ने तथ्य गलत दिखाने पर उठाए सवाल रामानंद सागर के टीवी शो रामायण में माता सीता बनीं दीपिका चिखलिया ने फिल्म रामायण में सीता बनीं साई पल्लवी के घुंघराले बाल दिखाए जाने पर सवाल उठाए। वैराइटी इंडिया को दिए इंटरव्यू में दीपिका ने साई पल्लवी पर कहा, “तुलसीदास की रामायण में सीता का वर्णन बादाम जैसी आंखों वाली, एक निश्चित कद-काठी, लंबे बालों और गौर वर्ण वाली स्त्री के रूप में किया गया है। यही बात रामानंद सागर भी तलाश रहे थे और उन्हें वह रूप मुझमें दिखाई दिया।” आगे उन्होंने कहा, “मेरी पहचान आज भी सीता के रूप में है। कई बार लोग मेरा नाम भूल जाते हैं, लेकिन उन्हें याद रहता है कि मैंने सीता का किरदार निभाया था। यही मेरी पहचान है। मुझे लगता है कि हमारी रामायण का प्रभाव फिल्म ‘रामायण’ पर बहुत गहरा रहेगा। महामारी के दौरान जब हमारी रामायण का दूरदर्शन पर दोबारा प्रसारण हुआ था, तब नई पीढ़ी ने भी उसे देखा। ऐसे में उस छवि को मिटा पाना बहुत मुश्किल है। रामायण में कहीं भी यह उल्लेख नहीं है कि सीता जी के घुंघराले बाल थे।” अन्नू कपूर भी उठा चुके हैं साई पल्लवी की कास्टिंग पर सवाल सीनियर एक्टर अन्नू कपूर ने हाल ही में रणबीर कपूर स्टारर फिल्म रामायण में माता सीता का किरदार साउथ एक्ट्रेस साई पल्लवी को देने पर सवाल खड़े किए हैं। अन्नू कपूर ने हाल ही में जूम को दिए इंटरव्यू में कहा है कि भारत में बायोपिक नहीं बनानी चाहिए। आगे अन्नू कपूर ने नितेश तिवारी की अपकमिंग फिल्म रामायण पर कहा, ‘क्या बनाएंगे, जो बनाएंगे, वो रामानंद सागर की रामायण को टेक्नोलॉजिकली बहुत शू शां और फूं फां और शोशेबाजी कर देंगे। लेकिन उसके बाद आप ये सोचिए कि किसको आपने सीता का रोल दिया है। सीता मां हैं, इस देश का हिंदू श्री राम चंद्र को नारायण का अवतार मानते हैं और किनको लिया है माता सीता के रोल में। अब आप सोचिए।’ रामायण का ट्रेलर हुआ पोस्टपोन फिल्म रामायण के प्रोड्यूसर नमित मल्होत्रा ने ऑफिशियल सोशल मीडिया से स्टेटमेंट जारी कर ट्रेलर पोस्टपोन होने की जानकारी दी है। उन्होंने बताया है कि सोनी पिक्चर्स एंटरटेनमेंट से पार्टनरशिप होने के बाद ट्रेलर टाला गया है, क्योंकि वो अब इसे वर्ल्ड लेवल पर लाने की कोशिश कर रहे हैं। स्टेटमेंट के आखिर में नमित मल्होत्रा ने स्टूडेंट प्रोटेस्ट का भी जिक्र किया है। उन्होंने लिखा, मैं रामायण पर विश्वास रखने वाले सभी प्रशंसकों और समर्थकों का दिल से आभार व्यक्त करता हूं, जिनकी वजह से यह संभव हो पाया। हमारे देश का युवा ही हमारा भविष्य है। आइए, हम सभी मिलकर अपने भविष्य की रक्षा और उसे बेहतर बनाने के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान दें। जय हिंद। 8 नवंबर को रिलीज होगी रामायणः पार्ट-1 बता दें कि एपिक सागा फिल्म रामायण, इंडियन सिनेमा की मोस्ट अवेटेड फिल्मों में से एक है। नितेश तिवारी के निर्देशन में बनी इस फिल्म में रणबीर कपूर भगवान राम और साई पल्लवी माता सीता के किरदार में हैं। ये फिल्म 8 नवंबर को रिलीज होने के लिए शेड्यूल है। सबसे मंहगे बिकेंगे रामायण के डिस्ट्रीब्यूशन राइट्स वैराइटी इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, फिल्म रामायण के हिंदी वर्जन के डिस्ट्रीब्यूशन के लिए फिल्म के प्रोड्यूसर्स 450 करोड़ रुपए की मांग कर रहे हैं। जबकि अब तक सबसे मंहगे डिस्ट्रीब्यूशन राइट्स शाहरुख खान की अपकमिंग फिल्म किंग के 250 करोड़ में बिके हैं। अगर ये फिल्म 450 की बजाए 300 करोड़ तक में भी डील करती है, तो ये बॉलीवुड के इतिहास की सबसे बड़ी डिस्ट्रीब्यूशन डील बन जाएगी। फिल्म ‘रामायण’ से जुड़ी अहम बातें-

US Saudi Nuclear Deal Conditions; Donald Trump Abraham Accords

US Saudi Nuclear Deal Conditions; Donald Trump Abraham Accords

वॉशिंगटन डीसी3 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिका और सऊदी अरब के बीच करीब दो दशक से अटके परमाणु समझौते पर बुधवार को हस्ताक्षर हुए, लेकिन 24 घंटे के भीतर ही यह डील अटक गई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने समझौते में नई शर्त जोड़ दी है। उन्होंने कहा कि डील तभी आगे बढ़ेगी, जब सऊदी अरब अब्राहम अकॉर्ड्स में शामिल होकर इजराइल से राजनयिक रिश्ते सामान्य करेगा। ट्रम्प ने यह भी कहा कि सऊदी अरब को यूरेनियम संवर्धन (एनरिचमेंट) की अनुमति नहीं मिलेगी। ट्रम्प ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट कर सऊदी से अब्राहम समझौते में शामिल होने के लिए कहा। बिना बताए डील की घोषणा से ट्रम्प नाराज वॉशिंगटन में हुए हस्ताक्षर समारोह में अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट शामिल हुए थे। रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रम्प इस बात से नाराज थे कि राइट ने उनकी मंजूरी के बिना समझौते की घोषणा कर दी। इसके बाद फॉक्स न्यूज और वॉल स्ट्रीट जर्नल में हुई आलोचना से उनकी नाराजगी और बढ़ गई। रिपोर्ट के अनुसार, व्हाइट हाउस ने ऊर्जा विभाग से समझौते की घोषणा टालने को कहा था, लेकिन विभाग ने हस्ताक्षर समारोह भी किया और मीडिया में इसकी जानकारी भी दी। हालांकि व्हाइट हाउस का कहना है कि अब्राहम अकॉर्ड्स की शर्त शुरू से ही ट्रम्प की नीति का हिस्सा थी। वहीं ऊर्जा विभाग ने किसी भी मतभेद से इनकार किया। तस्वीर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प (दाएं) और ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट की है। ट्रम्प की नई शर्त ने सऊदी को भी चौंकाया CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रम्प की घोषणा से सऊदी अरब भी हैरान रह गया। समझौते के मसौदे में कुछ शर्तें पूरी होने पर सऊदी अरब को अपनी जमीन पर यूरेनियम संवर्धन की अनुमति मिलने की बात थी, लेकिन ट्रम्प ने इसे सार्वजनिक रूप से खारिज कर दिया। दोनों देशों ने करीब दो दशक पहले परमाणु ऊर्जा सहयोग की पहल की थी। पिछले साल अक्टूबर में प्रारंभिक सहमति बनी थी। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान युद्ध और कांग्रेस की संभावित आपत्तियों के कारण समझौता महीनों तक अटका रहा। पिछले सप्ताह ऊर्जा विभाग को लगा कि ट्रम्प की मंजूरी मिल गई है, जिसके बाद इसकी घोषणा कर दी गई। परमाणु एक्सपर्ट्स ने यूरेनियम संवर्धन की अनुमति और IAEA के अतिरिक्त सुरक्षा प्रोटोकॉल की गैरमौजूदगी पर चिंता जताई। वहीं समर्थकों का तर्क था कि अगर अमेरिका पीछे हटता है तो चीन या रूस सऊदी अरब में अपनी रणनीतिक पकड़ मजबूत कर सकते हैं। आखिर अब्राहम अकॉर्ड्स है क्या, जिसे लेकर डील अटक गई? दरअसल, अब्राहम अकॉर्ड्स 2020 में अमेरिका की पहल पर हुआ ऐसा समझौता है, जिसके तहत कुछ अरब देशों ने पहली बार इजराइल के साथ अपने रिश्ते सामान्य किए। यूएई, बहरीन, मोरक्को और सूडान इसके तहत इजराइल से जुड़ चुके हैं। अब अमेरिका चाहता है कि सऊदी अरब भी इसी समझौते का हिस्सा बने। ट्रम्प का मानना है कि अगर सऊदी इजराइल से रिश्ते सामान्य करता है, तो पश्चिम एशिया में अमेरिका का रणनीतिक गठजोड़ और मजबूत होगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि बाइडेन प्रशासन भी सऊदी परमाणु समझौते को इजराइल से रिश्ते सामान्य करने से जोड़कर आगे बढ़ा रहा था। हालांकि 7 अक्टूबर 2023 के हमास हमले और गाजा युद्ध के बाद यह प्रक्रिया रुक गई। सऊदी का कहना है कि फिलिस्तीन के लिए अलग राज्य का रास्ता साफ हुए बिना वह इजराइल से आधिकारिक रिश्ते नहीं बनाएगा। यही वजह है कि अब न्यूक्लियर डील भी इस शर्त पर अटक गई है। ट्रम्प ने यूरेनियम एनरिचमेंट पर इनकार क्यों किया परमाणु बिजलीघर चलाने के लिए यूरेनियम को एक खास स्तर तक एनरिच (संवर्धित) किया जाता है। लेकिन यही तकनीक अगर बहुत अधिक स्तर तक पहुंच जाए, तो उसी यूरेनियम का इस्तेमाल परमाणु हथियार बनाने में भी किया जा सकता है। इसलिए यूरेनियम एनरिचमेंट को दुनिया की सबसे संवेदनशील परमाणु तकनीकों में माना जाता है। यही वजह है कि अमेरिका आमतौर पर किसी भी देश को अपनी जमीन पर यूरेनियम एनरिचमेंट की अनुमति देने से बचता है। उसे आशंका रहती है कि भविष्य में इस तकनीक का इस्तेमाल सैन्य कार्यक्रम के लिए भी हो सकता है। सऊदी अरब को लेकर भी यही चिंता है, इसलिए ट्रम्प ने साफ कर दिया कि न्यूक्लियर डील होगी, लेकिन यूरेनियम एनरिचमेंट की इजाजत नहीं मिलेगी। ——————— अमेरिका-सऊदी परमाणु समझौते से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… ईरान जंग के बीच अमेरिका का सऊदी से परमाणु समझौता:इजराइल के विरोध के बावजूद ट्रम्प की मंजूरी; एक्सपर्ट बोले- परमाणु हथियारों का खतरा बढ़ेगा सऊदी अरब ने बुधवार को अमेरिका के साथ एक अहम परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। इसके तहत अमेरिका, सऊदी अरब को असैन्य (बिजली बनाने के लिए) परमाणु तकनीक देगा। यह समझौता ऐसे समय में हुआ है, जब पूरे मिडिल ईस्ट में युद्ध और तनाव का माहौल है। पूरी खबर यहां पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

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वॉशिंगटन डीसी13 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिका और सऊदी अरब के बीच करीब दो दशक से अटके परमाणु समझौते पर बुधवार को हस्ताक्षर हुए, लेकिन 24 घंटे के भीतर ही यह डील अटक गई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने समझौते में नई शर्त जोड़ दी है। उन्होंने कहा कि डील तभी आगे बढ़ेगी, जब सऊदी अरब अब्राहम अकॉर्ड्स में शामिल होकर इजराइल से राजनयिक रिश्ते सामान्य करेगा। ट्रम्प ने यह भी कहा कि सऊदी अरब को यूरेनियम संवर्धन (एनरिचमेंट) की अनुमति नहीं मिलेगी। ट्रम्प ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट कर सऊदी से अब्राहम समझौते में शामिल होने के लिए कहा। बिना बताए डील की घोषणा से ट्रम्प नाराज वॉशिंगटन में हुए हस्ताक्षर समारोह में अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट शामिल हुए थे। रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रम्प इस बात से नाराज थे कि राइट ने उनकी मंजूरी के बिना समझौते की घोषणा कर दी। इसके बाद फॉक्स न्यूज और वॉल स्ट्रीट जर्नल में हुई आलोचना से उनकी नाराजगी और बढ़ गई। रिपोर्ट के अनुसार, व्हाइट हाउस ने ऊर्जा विभाग से समझौते की घोषणा टालने को कहा था, लेकिन विभाग ने हस्ताक्षर समारोह भी किया और मीडिया में इसकी जानकारी भी दी। हालांकि व्हाइट हाउस का कहना है कि अब्राहम अकॉर्ड्स की शर्त शुरू से ही ट्रम्प की नीति का हिस्सा थी। वहीं ऊर्जा विभाग ने किसी भी मतभेद से इनकार किया। तस्वीर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प (दाएं) और ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट की है। ट्रम्प की नई शर्त ने सऊदी को भी चौंकाया CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रम्प की घोषणा से सऊदी अरब भी हैरान रह गया। समझौते के मसौदे में कुछ शर्तें पूरी होने पर सऊदी अरब को अपनी जमीन पर यूरेनियम संवर्धन की अनुमति मिलने की बात थी, लेकिन ट्रम्प ने इसे सार्वजनिक रूप से खारिज कर दिया। दोनों देशों ने करीब दो दशक पहले परमाणु ऊर्जा सहयोग की पहल की थी। पिछले साल अक्टूबर में प्रारंभिक सहमति बनी थी। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान युद्ध और कांग्रेस की संभावित आपत्तियों के कारण समझौता महीनों तक अटका रहा। पिछले सप्ताह ऊर्जा विभाग को लगा कि ट्रम्प की मंजूरी मिल गई है, जिसके बाद इसकी घोषणा कर दी गई। परमाणु एक्सपर्ट्स ने यूरेनियम संवर्धन की अनुमति और IAEA के अतिरिक्त सुरक्षा प्रोटोकॉल की गैरमौजूदगी पर चिंता जताई। वहीं समर्थकों का तर्क था कि अगर अमेरिका पीछे हटता है तो चीन या रूस सऊदी अरब में अपनी रणनीतिक पकड़ मजबूत कर सकते हैं। आखिर अब्राहम अकॉर्ड्स है क्या, जिसे लेकर डील अटक गई? दरअसल, अब्राहम अकॉर्ड्स 2020 में अमेरिका की पहल पर हुआ ऐसा समझौता है, जिसके तहत कुछ अरब देशों ने पहली बार इजराइल के साथ अपने रिश्ते सामान्य किए। यूएई, बहरीन, मोरक्को और सूडान इसके तहत इजराइल से जुड़ चुके हैं। अब अमेरिका चाहता है कि सऊदी अरब भी इसी समझौते का हिस्सा बने। ट्रम्प का मानना है कि अगर सऊदी इजराइल से रिश्ते सामान्य करता है, तो पश्चिम एशिया में अमेरिका का रणनीतिक गठजोड़ और मजबूत होगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि बाइडेन प्रशासन भी सऊदी परमाणु समझौते को इजराइल से रिश्ते सामान्य करने से जोड़कर आगे बढ़ा रहा था। हालांकि 7 अक्टूबर 2023 के हमास हमले और गाजा युद्ध के बाद यह प्रक्रिया रुक गई। सऊदी का कहना है कि फिलिस्तीन के लिए अलग राज्य का रास्ता साफ हुए बिना वह इजराइल से आधिकारिक रिश्ते नहीं बनाएगा। यही वजह है कि अब न्यूक्लियर डील भी इस शर्त पर अटक गई है। तेल के बावजूद सऊदी को परमाणु ऊर्जा की जरूरत क्यों? सवाल यह है कि दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादकों में शामिल सऊदी अरब के पास तेल की कोई कमी नहीं है, तो उसे परमाणु ऊर्जा की जरूरत क्यों पड़ रही है। इसकी वजह है विजन-2030। इसके तहत सऊदी अपनी अर्थव्यवस्था और ऊर्जा व्यवस्था को सिर्फ तेल पर निर्भर नहीं रखना चाहता। दरअसल, देश में बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है और अभी इसका बड़ा हिस्सा तेल व गैस से पूरा किया जाता है। अगर बिजली परमाणु ऊर्जा से बनने लगेगी, तो तेल और गैस की खपत घटेगी। इससे सऊदी ज्यादा तेल निर्यात कर सकेगा और उसकी कमाई भी बढ़ेगी। इसके साथ ही सऊदी सौर, पवन और परमाणु ऊर्जा का इस्तेमाल बढ़ाकर अपनी ऊर्जा व्यवस्था को भविष्य के लिए ज्यादा मजबूत और संतुलित बनाना चाहता है। इसी रणनीति के तहत वह लंबे समय से अमेरिका समेत दूसरे देशों के साथ असैन्य परमाणु सहयोग की कोशिश कर रहा है। ट्रम्प ने यूरेनियम एनरिचमेंट पर इनकार क्यों किया परमाणु बिजलीघर चलाने के लिए यूरेनियम को एक खास स्तर तक एनरिच (संवर्धित) किया जाता है। लेकिन यही तकनीक अगर बहुत अधिक स्तर तक पहुंच जाए, तो उसी यूरेनियम का इस्तेमाल परमाणु हथियार बनाने में भी किया जा सकता है। इसलिए यूरेनियम एनरिचमेंट को दुनिया की सबसे संवेदनशील परमाणु तकनीकों में माना जाता है। यही वजह है कि अमेरिका आमतौर पर किसी भी देश को अपनी जमीन पर यूरेनियम एनरिचमेंट की अनुमति देने से बचता है। उसे आशंका रहती है कि भविष्य में इस तकनीक का इस्तेमाल सैन्य कार्यक्रम के लिए भी हो सकता है। सऊदी अरब को लेकर भी यही चिंता है, इसलिए ट्रम्प ने साफ कर दिया कि न्यूक्लियर डील होगी, लेकिन यूरेनियम एनरिचमेंट की इजाजत नहीं मिलेगी। ——————— अमेरिका-सऊदी परमाणु समझौते से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… ईरान जंग के बीच अमेरिका का सऊदी से परमाणु समझौता:इजराइल के विरोध के बावजूद ट्रम्प की मंजूरी; एक्सपर्ट बोले- परमाणु हथियारों का खतरा बढ़ेगा सऊदी अरब ने बुधवार को अमेरिका के साथ एक अहम परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। इसके तहत अमेरिका, सऊदी अरब को असैन्य (बिजली बनाने के लिए) परमाणु तकनीक देगा। यह समझौता ऐसे समय में हुआ है, जब पूरे मिडिल ईस्ट में युद्ध और तनाव का माहौल है। पूरी खबर यहां पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…