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चीन- PhD छोड़, रिसर्च पेपर की गड़बड़ियां खोजने लगा शख्स:40 वैज्ञानिकों का फर्जीवाड़ा पकड़ा गया, जिनपिंग सरकार ने फंडिंग-पुरस्कार छीने

चीन- PhD छोड़, रिसर्च पेपर की गड़बड़ियां खोजने लगा शख्स:40 वैज्ञानिकों का फर्जीवाड़ा पकड़ा गया, जिनपिंग सरकार ने फंडिंग-पुरस्कार छीने

चीन में एक पूर्व PhD छात्र गेंग होंगवेई के रिसर्च पेपर में गड़बड़ियां पकड़ने के बाद 40 से ज्यादा रिसर्चर्स पर कार्रवाई हुई है। चीन की प्रमुख रिसर्च फंडिंग संस्था नेशनल नेचुरल साइंस फाउंडेशन ऑफ चाइना (NSFC) ने 31 मामलों में कार्रवाई की है। इसे संस्था की अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है। कार्रवाई की जद में कई प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों के वरिष्ठ प्रोफेसर भी हैं। इनमें 4 ऐसे वैज्ञानिक हैं, जिनके पेपर पर पूर्व PhD छात्र गेंग होंगवेई ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाए थे। गेंग को ‘स्टूडेंट गेंग’ के नाम से जाना जाता है। उन्होंने 2025 में बायोसाइंस की PhD छोड़ दी थी। इसके बाद वह रिसर्च पेपर में डेटा, तस्वीरों और ग्राफ की गड़बड़ियां खोजकर सोशल मीडिया पर सामने लाने लगे। उनके सवालों के बाद संबंधित संस्थानों ने जांच शुरू की और अब मामला NSFC की कार्रवाई तक पहुंच गया है। PhD ड्रॉपआउट ने क्या पकड़ा? 1. आंकड़ों में अजीब पैटर्न
एक पेपर में एक कॉलम के लगभग सभी आंकड़ों का आखिरी अंक 5 था। दूसरे कॉलम में भी आंकड़े एक तय पैटर्न में थे। एक कॉलम के आंकड़े दूसरे से लगभग हर जगह 0.3 के अंतर पर थे। गेंग ने इसे डेटा की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने वाली बात बताया। 2. 196 चूहों के वजन में सटीकता
एक रिसर्च में 196 लैब चूहों का वजन दो दशमलव तक दर्ज किया गया था। गेंग ने सवाल उठाया कि चलते-फिरते चूहों का वजन इतनी सटीकता से कैसे दर्ज किया गया। इससे डेटा के साथ छेड़छाड़ की आशंका पैदा हुई। 3. एक ही तस्वीर, अलग-अलग प्रयोग
कुछ पेपर में एक जैसी तस्वीरों को अलग-अलग प्रयोगों के नतीजे के तौर पर इस्तेमाल किए जाने पर सवाल उठे। कुछ डेटा सेट भी असामान्य रूप से एक-दूसरे से मिलते थे। नेचर ने भी बताया था कि गेंग ने कई पेपर के आंकड़ों में असामान्यताएं पकड़ी थीं। चार बड़े वैज्ञानिक भी कार्रवाई की जद में गेंग ने अप्रैल में चीन के चार प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों से जुड़े वैज्ञानिकों के रिसर्च पर सवाल उठाए थे। इनमें टोंगजी यूनिवर्सिटी के वांग पिंग, नानकाई यूनिवर्सिटी के चेन चुआन, शंघाई यूनिवर्सिटी के सु जियाचन और सन यात-सेन यूनिवर्सिटी के कुआंग डोंगमिंग शामिल हैं। इन चारों को चीन का प्रतिष्ठित नेशनल साइंस फंड फॉर डिस्टिंग्विश्ड यंग स्कॉलर्स मिल चुका था। यह चीन में युवा वैज्ञानिकों को दिया जाने वाला प्रमुख सम्मान है। इनमें से तीन अपने संस्थानों में डीन या एसोसिएट डीन जैसे प्रशासनिक पदों पर रह चुके हैं। इन वैज्ञानिकों के खिलाफ उनके विश्वविद्यालयों ने भी कार्रवाई की। कुछ को प्रशासनिक पदों से हटाया गया। इसके बाद NSFC ने भी इन मामलों में कार्रवाई की। संस्था ने संबंधित रिसर्च फंडिंग और सम्मान वापस ले लिए। उन्हें पहले मिली 1 करोड़ युआन से ज्यादा यानी करीब 15 लाख डॉलर की रिसर्च ग्रांट लौटाने का आदेश दिया गया। साथ ही तीन से सात साल तक NSFC की फंडिंग के लिए दोबारा आवेदन करने पर रोक लगा दी गई। अंतरराष्ट्रीय जर्नल्स के पेपर भी जांच के घेरे में गेंग के सवालों में नेचर, नेचर कैंसर और सेल बायोलॉजी जैसे प्रतिष्ठित जर्नल्स में प्रकाशित रिसर्च पेपर भी शामिल थे। मई में साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट ने रिपोर्ट किया था कि चीनी सोशल मीडिया पर इन जर्नल्स में प्रकाशित कुछ रिसर्च पेपर को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। इसके बाद स्प्रिंगर नेचर ने कहा था कि उसे पांच पेपर को लेकर चिंताएं मिली हैं और उनकी जांच की जा रही है। जुलाई में नेचर और नेचर कैंसर ने चीन के वैज्ञानिकों के दो रिसर्च पेपर वापस ले लिए।

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चीन में एक पूर्व PhD छात्र गेंग होंगवेई के रिसर्च पेपर में गड़बड़ियां पकड़ने के बाद 40 से ज्यादा रिसर्चर्स पर कार्रवाई हुई है। चीन की प्रमुख रिसर्च फंडिंग संस्था नेशनल नेचुरल साइंस फाउंडेशन ऑफ चाइना (NSFC) ने 31 मामलों में कार्रवाई की है। इसे संस्था की अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है। कार्रवाई की जद में कई प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों के वरिष्ठ प्रोफेसर भी हैं। इनमें 4 ऐसे वैज्ञानिक हैं, जिनके पेपर पर पूर्व PhD छात्र गेंग होंगवेई ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाए थे। गेंग को ‘स्टूडेंट गेंग’ के नाम से जाना जाता है। उन्होंने 2025 में बायोसाइंस की PhD छोड़ दी थी। इसके बाद वह रिसर्च पेपर में डेटा, तस्वीरों और ग्राफ की गड़बड़ियां खोजकर सोशल मीडिया पर सामने लाने लगे। उनके सवालों के बाद संबंधित संस्थानों ने जांच शुरू की और अब मामला NSFC की कार्रवाई तक पहुंच गया है। PhD ड्रॉपआउट ने क्या पकड़ा? 1. आंकड़ों में अजीब पैटर्न
एक पेपर में एक कॉलम के लगभग सभी आंकड़ों का आखिरी अंक 5 था। दूसरे कॉलम में भी आंकड़े एक तय पैटर्न में थे। एक कॉलम के आंकड़े दूसरे से लगभग हर जगह 0.3 के अंतर पर थे। गेंग ने इसे डेटा की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने वाली बात बताया। 2. 196 चूहों के वजन में सटीकता
एक रिसर्च में 196 लैब चूहों का वजन दो दशमलव तक दर्ज किया गया था। गेंग ने सवाल उठाया कि चलते-फिरते चूहों का वजन इतनी सटीकता से कैसे दर्ज किया गया। इससे डेटा के साथ छेड़छाड़ की आशंका पैदा हुई। 3. एक ही तस्वीर, अलग-अलग प्रयोग
कुछ पेपर में एक जैसी तस्वीरों को अलग-अलग प्रयोगों के नतीजे के तौर पर इस्तेमाल किए जाने पर सवाल उठे। कुछ डेटा सेट भी असामान्य रूप से एक-दूसरे से मिलते थे। नेचर ने भी बताया था कि गेंग ने कई पेपर के आंकड़ों में असामान्यताएं पकड़ी थीं। चार बड़े वैज्ञानिक भी कार्रवाई की जद में गेंग ने अप्रैल में चीन के चार प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों से जुड़े वैज्ञानिकों के रिसर्च पर सवाल उठाए थे। इनमें टोंगजी यूनिवर्सिटी के वांग पिंग, नानकाई यूनिवर्सिटी के चेन चुआन, शंघाई यूनिवर्सिटी के सु जियाचन और सन यात-सेन यूनिवर्सिटी के कुआंग डोंगमिंग शामिल हैं। इन चारों को चीन का प्रतिष्ठित नेशनल साइंस फंड फॉर डिस्टिंग्विश्ड यंग स्कॉलर्स मिल चुका था। यह चीन में युवा वैज्ञानिकों को दिया जाने वाला प्रमुख सम्मान है। इनमें से तीन अपने संस्थानों में डीन या एसोसिएट डीन जैसे प्रशासनिक पदों पर रह चुके हैं। इन वैज्ञानिकों के खिलाफ उनके विश्वविद्यालयों ने भी कार्रवाई की। कुछ को प्रशासनिक पदों से हटाया गया। इसके बाद NSFC ने भी इन मामलों में कार्रवाई की। संस्था ने संबंधित रिसर्च फंडिंग और सम्मान वापस ले लिए। उन्हें पहले मिली 1 करोड़ युआन से ज्यादा यानी करीब 15 लाख डॉलर की रिसर्च ग्रांट लौटाने का आदेश दिया गया। साथ ही तीन से सात साल तक NSFC की फंडिंग के लिए दोबारा आवेदन करने पर रोक लगा दी गई। अंतरराष्ट्रीय जर्नल्स के पेपर भी जांच के घेरे में गेंग के सवालों में नेचर, नेचर कैंसर और सेल बायोलॉजी जैसे प्रतिष्ठित जर्नल्स में प्रकाशित रिसर्च पेपर भी शामिल थे। मई में साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट ने रिपोर्ट किया था कि चीनी सोशल मीडिया पर इन जर्नल्स में प्रकाशित कुछ रिसर्च पेपर को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। इसके बाद स्प्रिंगर नेचर ने कहा था कि उसे पांच पेपर को लेकर चिंताएं मिली हैं और उनकी जांच की जा रही है। जुलाई में नेचर और नेचर कैंसर ने चीन के वैज्ञानिकों के दो रिसर्च पेपर वापस ले लिए।

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