CBFC Reconstitution List | Preity Zinta Suniel Shetty Pankaj Tripathi

3 मिनट पहले कॉपी लिंक सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने सेंसर बोर्ड यानी सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) का पुनर्गठन कर दिया है। मंत्रालय ने 18 सदस्यों वाले नए बोर्ड का ऐलान किया है। इस नई टीम में सिनेमा और टीवी इंडस्ट्री के कई बड़े चेहरों को शामिल किया गया है। इनमें एक्ट्रेस प्रीति जिंटा, एक्टर सुनील शेट्टी, पंकज त्रिपाठी, टीवी एक्ट्रेस रुपाली गांगुली, पल्लवी जोशी और बंगाली सिनेमा के दिग्गज एक्टर प्रोसेनजीत चटर्जी का नाम प्रमुख है। नया बोर्ड सिनेमाग्राफ एक्ट के तहत 3 साल की अवधि या अगले आदेश तक काम करेगा। निर्देशकों और संगीतकारों को भी मिली जिम्मेदारी 18 सदस्यीय बोर्ड में सिर्फ एक्टर्स ही नहीं, बल्कि सिनेमा और संगीत जगत की अन्य हस्तियों को भी जगह दी गई है। इनमें तीन बार के ग्रैमी अवॉर्ड विजेता संगीतकार रिकी केज, जाने-माने निर्देशक प्रियदर्शन, हंसराज हंस और नीला माधब पांडा शामिल हैं। इसके अलावा मनोज जोशी, विनोद अनुपम, अभिषेक जैन, सुप्रिया यार्लागड्डा, यतींद्र मिश्र, निशिगंधा वाड, वामन केंद्रे और रमेश पतंगे को भी बोर्ड में मेंबर बनाया गया है। 2017 के बाद पहली बार हुआ बोर्ड पुनर्गठन CBFC के बोर्ड का यह पुनर्गठन लंबे समय के अंतराल के बाद हुआ है। इससे पहले सेंसर बोर्ड का औपचारिक पुनर्गठन अगस्त 2017 में किया गया था। इस महीने की शुरुआत में सेंसर बोर्ड ने 6 साल में अपनी पहली बैठक की थी। उस बैठक में बोर्ड के मेंबर्स ने फिल्मों के सर्टिफिकेशन से जुड़े मुद्दों, रिवाइजिंग कमेटियों के कामकाज और नियम-कायदों पर विस्तार से चर्चा की थी। 3 साल के कार्यकाल के लिए बनी है नई टीम सिनेमैटोग्राफ एक्ट के तहत मिले अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए केंद्र सरकार ने यह नई टीम बनाई है। नया बोर्ड अगले 3 साल तक या सरकार के अगले आदेश तक अपने पद पर बना रहेगा। यह टीम भारतीय सिनेमा में कंटेंट की प्रामाणिकता, उम्र के हिसाब से सर्टिफिकेशन और समाज पर पड़ने वाले प्रभावों को ध्यान में रखकर फिल्मों को सर्टिफिकेट जारी करने का काम करेगी। सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन के अध्यक्ष शशि शेखर वेम्पति। शशि शेखर वेम्पति होंगे सेंसर बोर्ड के चेयरमैन सूचना और प्रसारण मंत्रालय की ओर से जारी आदेश के मुताबिक, पुनर्गठित CBFC बोर्ड की कमान चेयरमैन शशि शेखर वेम्पति के हाथों में होगी। शशि शेखर वेम्पति मंत्रालय के तहत काम करने वाली इस वैधानिक फिल्म प्रमाणन संस्था के प्रमुख के रूप में जिम्मेदारी संभालेंगे। नया बोर्ड फिल्मों के सर्टिफिकेशन, कंटेंट की समीक्षा और रिवाइजिंग कमेटियों के कामकाज की निगरानी करेगा। क्या है CBFC और इसका काम? सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) एक वैधानिक संस्था है, जो सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के तहत काम करती है। सिनेमाघरों और टेलीविजन पर दिखाई जाने वाली किसी भी फिल्म के लिए इस बोर्ड से सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य होता है। बोर्ड फिल्मों को ‘U’, ‘UA’, ‘A’ और ‘S’ जैसी श्रेणियों में बांटता है, जिससे दर्शकों को पता चलता है कि फिल्म किस आयु वर्ग के लिए है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
कहीं कीचड़ में स्कूल जाते बच्चे, कहीं घुटनों तक पानी:कहीं फिसलन, कहीं सांप-बिच्छू तो, कहीं पानी में डूबने का खतरा; वीडियो वायरल

एमपी के रायसेन जिले में गैरतगंज तहसील में आने वाले देवनगर में स्कूल जाती छात्राओं का वीडियो वायरल हो रहा है। इस वीडियो में बच्चे कीचड़ भरे रास्ते से स्कूल की तरफ जा रहे हैं और उनकी पीठ पर स्कूल बैग हैं और ये इन बच्चों का आम रास्ता है। कीचड़ भरे रास्ते से रोज जाते हैं स्कूल वे आगे जाकर पहले पानी ढूंढते हैं ताकि अपने पैर साफ कर सकें उसके बाद ही स्कूल तक पहुंच पाते हैं। इसी वजह से इन बच्चों ने पैरों में किसी भी तरह की कोई चप्पल या जूते भी नहीं पहन रखे हैं। ग्रामीणों के मुताबिक बच्चे रोज इसी तरह स्कूल जाने को मजबूर हैं, कई बार वे फिसलकर गिर पड़ते हैं और चोटिल हो जाते हैं। इसी मुश्किल रास्ते की वजह से कई बार छोटे बच्चों का स्कूल जाना कठिन हो जाता है। खतरनाक रास्ते से जाने की वजह से सांप-बिच्छू के काटने का भी खतरा रहता है। स्कूल टीचर भी कर चुके हैं सड़क की मांग वहीं स्कूल टीचर का कहना है कि कई बार वे इसकी शिकायत कर चुकी हैं और पंचायत प्रशासन से सड़क बनाने के लिए आवेदन भी दे चुके हैं लेकिन अभी तक कोई भी हल नहीं निकला है। वहीं ग्रामीणों को कहना है कि सरपंच से कई बार इसकी शिकायत कर चुके हैं कि बच्चों को स्कूल जाने में परेशानी होती है। साथ ही आम लोगों को भी आने-जाने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। लेकिन सरपंच का कहना है कि वो रोड नहीं बनवाएगा। बिहार में 25 सालों से पुल की मांग ये सिर्फ एमपी के के गांव की तस्वीर नहीं है ऐसा ही एक वीडियो देशभर से आ रहे हैं। बिहार के गया जिले के मानपुर प्रखंड में कईया गांव का है। जहां बच्चे घुटने तक पानी पार करकर स्कूल जा रहे हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, यहां एक तरफ नदी है और एक तरफ नहर लेकिन कोई पुल नहीं है। इस वजह से बच्चों को रोज इसी तरह स्कूल जाना पड़ता है। 3 महीने में 3 हफ्ते ही स्कूल जा पा रहे बच्चे ग्रामीणों की शिकायत है कि बच्चे बारिश के समय कई-कई दिनों तक स्कूल नहीं जा पाते हैं क्योंकि पानी बढ़ जाता है और न रोड है न पुल है। जिससे बच्चों के डूबने का खतरा होता है इसलिए बच्चे 3 महीने की बारिश में हफ्ते में 1-2 दिन ही स्कूल जा पाते हैं, उन्हें मजबूरी में क्लास छोड़नी पड़ती हैं। ‘डीएम साहब हमारे स्कूल की रोड बनवा दीजिए’ ऐसा ही एक ओर वीडियो वायरल हो रहा है, दावा है कि ये वीडियो एमपी के बुरहानपुर जिले के देवला ग्राम पंचायत का है। इस वीडियो में बच्चे कीचड़ में सिर पर किताबें लेकर स्कूल से वापस घर की तरफ आ रहे हैं। इस वीडियो में बच्चे अपना स्कूल दिखा रहे हैं और कह रहे हैं ‘डीएम साहब हमारे स्कूल की रोड बनवा दीजिए, वो हमारा स्कूल है, स्कूल जाने में दिक्कत होती है। ‘ शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के मुताबिक शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 (RTE Act 2009) के सेक्शन 6 के तहत बच्चों के स्कूल की दूरी के स्पष्ट नियम बनाए गए हैं। साथ ही रास्ते पर बेहतर रोशनी और पैदल चलने वालों के लिए फुटपाथ होना चाहिए। ————————– मिड डे मील में कहीं कीड़े, कहीं सड़े आलू:आरोप छात्रों से प्रिंसिपल कहते हैं- शिकायत की तो केस कर देंगे, देशभर के कई राज्यों के मामले एमपी के छिंदवाड़ा के मानेगांव में स्कूली बच्चों के मध्यान भोजन यानी मिड डे मील में खाने की गुणवत्ता, सामग्री और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए गए हैं। पूरी खबर पढ़ें..
Canada to Join EU as First Associate Member

9 मिनट पहले कॉपी लिंक स्ट्रासबर्ग में यूरोपीय संसद में यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला फॉन डेर लेयेन और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी। अमेरिका के साथ बढ़ते तनाव के बीच कनाडा अब यूरोप के करीब जाने की तैयारी में है। यूरोपीय संघ (EU) कनाडा को अपना पहला ‘एसोसिएट मेंबर’ बनाने पर काम कर रहा है। एसोसिएट मेंबर के तौर पर कनाडा यूरोपीय संघ के 27 देशों में शामिल नहीं होगा और उसे वोटिंग का अधिकार भी नहीं मिलेगा, लेकिन रक्षा, AI, टेक्नोलॉजी, ऊर्जा, जरूरी खनिज और व्यापार जैसे मामलों में यूरोपीय संघ के साथ उसका सहयोग बढ़ेगा। इसके साथ ही कनाडा ब्रिटेन और यूक्रेन जैसे EU से बाहर के देशों के साथ यूरोप की सुरक्षा मजबूत करने के लिए एक नई सिक्योरिटी काउंसिल में भी शामिल हो सकता है। कनाडा के प्रधानमंत्री ने यूरोपीय संघ के साथ जुड़ने की इच्छा जताई थी EU कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने बुधवार को कहा कि यूरोपीय संघ कनाडा के लिए अपने दरवाजे खोलना चाहता है। इस दौरान कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी भी मौजूद थे। कार्नी ने पिछले हफ्ते EU के साथ एक ‘अनोखा गठबंधन’ बनाने की इच्छा जताई थी। वॉन डेर लेयेन ने कहा कि कनाडा और यूरोप दुनिया को एक जैसी नजर से देखते हैं और लोकतंत्र में विश्वास रखते हैं। कनाडा के लिए यूरोपीय संघ को नई व्यवस्था बनानी पड़ेगी यूरोपीय संघ की मौजूदा संधियों में ‘एसोसिएट मेंबर’ बनने का कोई प्रावधान नहीं है। यानी कनाडा को इस तरह का दर्जा देने के लिए नई व्यवस्था बनानी पड़ सकती है। ऐसा प्रस्ताव इस साल जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने यूक्रेन के लिए दिया था। हालांकि यूक्रेन ने इस विचार को ज्यादा समर्थन नहीं दिया, क्योंकि वह यूरोपीय संघ की पूर्ण सदस्यता चाहता है। उस प्रस्ताव के तहत यूक्रेन को यूरोपीय संघ की बैठकों में शामिल होने और यूरोपीय आयोग में अपना प्रतिनिधि भेजने की अनुमति मिल सकती थी। उसे यूरोपीय संघ के बजट के कुछ हिस्से का लाभ भी मिलता, लेकिन पूर्ण सदस्य देशों की तरह वोटिंग अधिकार नहीं होते। यूरोपीय संघ और कनाडा के बीच व्यापार बढ़ा अमेरिकी टैरिफ और चीन से बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच यूरोपीय संघ और कनाडा पहले से ही कई क्षेत्रों में सहयोग कर रहे हैं। दोनों के बीच CETA नाम का मुक्त व्यापार समझौता है। इसके तहत दोनों पक्षों के बीच लगभग सभी आयात शुल्क हटा दिए गए हैं। 2016 के बाद से यूरोपीय संघ और कनाडा के बीच वस्तुओं और सेवाओं का व्यापार 80% से ज्यादा बढ़ा है। इस साल कनाडा EU के एक प्रमुख रक्षा ऋण कार्यक्रम में शामिल होने वाला पहला गैर-EU देश भी बना। वॉन डेर लेयेन ने कहा कि ताकत सिर्फ सबसे शक्तिशाली, अमीर या सबसे ज्यादा आवाज उठाने वाले देशों के पास नहीं होनी चाहिए। लोकतांत्रिक देशों को यह आजादी होनी चाहिए कि वे तय कर सकें कि उन्हें किसके साथ काम करना है। उन्होंने कहा, “इसलिए हम स्वेच्छा से एक साथ आ रहे हैं।” ————————- ये खबर भी पढ़ें… अमेरिका का कनाडा के डेयरी प्रोडक्ट और शराब पर बैन: मोटरसाइकिलों पर भी रोक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कनाडा से आने वाले डेयरी प्रोडक्ट, शराब और मोटरसाइकिलों पर रोक लगाने का फैसला किया है। पूरी खबर यहां पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Haryana Teachers HTET Mandatory Exam Notice

Hindi News Career Haryana Teachers HTET Mandatory Exam Notice | Compulsory Retirement News 2 मिनट पहले कॉपी लिंक हरियाणा के सरकारी स्कूलों में कार्यरत उन 12 हजार शिक्षकों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं, जिन्होंने अब तक हरियाणा अध्यापक पात्रता परीक्षा (HTET) पास नहीं की है। विद्यालय शिक्षा निदेशालय (हरियाणा) ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन करते हुए एक नोटिस जारी किया है। इस नोटिस के तहत बिना HTET पास किए नौकरी कर रहे शिक्षकों को अब यह परीक्षा पास करनी होगी। जो टीचर यह परीक्षा नहीं देंगे, उन्हें नौकरी छोड़नी होगी या कंप्लसरी रिटायरमेंट दे दिया जाएगा। उन्हें प्रमोशन भी नहीं मिलेगा। हालांकि, सरकार ने इसमें रिटायरमेंट के 5 साल से कम या अधिक सेवा वाली शर्त भी जोड़ी है। निदेशालय ने भिवानी बोर्ड (BSEH) को साल में दो बार HTET परीक्षा आयोजित करने के निर्देश दिए हैं, ताकि शिक्षकों को परीक्षा पास करने का पर्याप्त मौका मिल सके। सुप्रीम कोर्ट के आदेश से हुई थी टीचर्स के लिए HTET शुरू शिक्षा निदेशालय के अनुसार, यह फैसला सुप्रीम कोर्ट द्वारा सिविल अपील संख्या 1385/2025 (अंजुमन इशात-ए-तलीम ट्रस्ट बनाम महाराष्ट्र राज्य व अन्य) में 1 सितंबर 2025 को दिए गए आदेश और रिव्यू पिटीशन में 29 मई 2026 को पारित आदेशों के अनुसार लिया गया है। शिक्षा निदेशालय द्वारा HTET के लिए जारी किया गया नोटिस निदेशालय ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों (DEOs) और जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों (DEEOs) को निर्देश जारी किए हैं कि वे अपने अधिकार क्षेत्र के सभी शिक्षकों तक यह सूचना तुरंत पहुंचाएं। इस फैसले के खिलाफ हरियाणा प्राइमरी टीचर एसोसिएशन फिर से सुप्रीम कोर्ट की डिवीजन बैंच में याचिका दायर करने पर विचार कर रही है। इसके बाद पश्चिम बंगाल में TET की तैयारी पश्चिम बंगाल के स्कूल शिक्षा विभाग ने इन-सर्विस प्राइमरी शिक्षकों के लिए टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (TET) कराने की प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया है। यह कदम सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के चलते उठाया गया है। इस प्रक्रिया के अंदर करीब 90 हजार इन-सर्विस शिक्षक आ सकते हैं। हालांकि, अभी परीक्षा की तारीख, आवेदन प्रक्रिया और शेड्यूल जारी नहीं किया गया है। किन शिक्षकों को देना होगा TET यह मामला खास तौर पर उन इन-सर्विस शिक्षकों से जुड़ा है, जिनकी नियुक्ति RTE Act, 2009 के लागू होने से पहले हुई थी। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार, जिन शिक्षकों की सेवा में पांच साल से अधिक समय बाकी है, उन्हें TET पास करना होगा, तभी वे सेवा में बने रह सकेंगे। वहीं, जिन शिक्षकों के रिटायरमेंट में पांच साल या उससे कम समय बचा है, उन्हें नौकरी जारी रखने के लिए TET से छूट दी गई है। हालांकि, जो शिक्षक प्रमोशन चाहते हैं उनके लिए भी TET पास करना जरूरी होगा। शिक्षकों ने जताई नाराजगी सरकार के इस कदम के बाद पश्चिम बंगाल में शिक्षक संगठनों की ओर से विरोध भी किया जा रहा है। कुछ संगठनों का कहना है कि लंबे समय से पढ़ा रहे शिक्षकों पर नौकरी के दौरान दोबारा पात्रता परीक्षा का फैसला सही नहीं है। उन्होंने खासकर पुराने नियुक्त शिक्षकों को TET की अनिवार्यता से बाहर रखने की मांग की है। यूपी में टीचर के लिए UPTET पास करना जरूरी 1 सितंबर, 2025 को सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस मनमोहन की पीठ ने फैसला दिया कि बगैर TET पास किए प्राइमरी शिक्षक बने उम्मीदवारों को भी अब TET पास करना अनिवार्य होगा। ऐसा न करने पर उन्हें नौकरी से निकाल दिया जाएगा। ऐसे में 1.85 लाख कैंडिडेट्स ने 2 से 4 जुलाई 2026 के बीच आयोजित हुई UPTET परीक्षा दी। हालांकि, शिक्षकों ने इस फैसले का जमकर विरोध किया। इस संबंध में प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजे गए और संसद में भी इस कानून में संशोधन की मांग उठाई। लेकिन ये सारी कोशिशें सुप्रीम कोर्ट के परीक्षा अनिवार्य करने के फैसले के सामने बेकार रहीं। तनाव में हुई 2 शिक्षकों की मौत कई ऐसे शिक्षक भी हैं, जो 20 – 25 साल से पढ़ा रहे हैं। उनका कहना है कि इतनी नौकरी के बाद फिर से परीक्षा लेना कहां तक तर्कसंगत है? शिक्षक संघों का दावा है कि इसी तनाव में 2 शिक्षकों की मौत भी हो चुकी है। एग्जाम देने के लिए दी स्कूल से छुट्टी यूपी सरकार ने इस एग्जाम को लेकर सेवारत शिक्षकों के लिए दो बड़े फैसले लिए हैं। पहला अब कार्यरत शिक्षकों के लिए भी TET आयोजित की जाएगी। दूसरा UPTET में शामिल होने वाले सेवारत शिक्षकों को परीक्षा देने के लिए स्कूल से छुट्टी भी मिलेगी। यह परीक्षा साल में 2 बार कराई जाएगी। विभाग ने परीक्षा पास करने के लिए 2 साल का समय तय किया है। इसके बाद भी परीक्षा पास न कर पाने पर नौकरी जाएगी। फिर चाहे टीचर्स की उम्र 40-45 साल ही क्यों न हो। —————————————————————————- खबर भी पढ़ें इंडियन आर्मी में अग्निवीर रैली के लिए टैटू पॉलिसी जारी:ट्राइबल कम्युनिटी और धार्मिक टैटू बनवा सकते हैं, ये 6 तरह के टैटू प्रतिबंधित इंडियन आर्मी ने अग्निवीर रैली के लिए टैटू पॉलिसी जारी की है। इसमें बताया गया है कि शरीर पर कहां टैटू बनवाया जा सकता है और कहां नहीं। अग्निवीर भर्ती में शारीरिक गतिविधियों के साथ उम्मीदवारों के पूरे शरीर की जांच की जाती है। साथ में शरीर पर टैटू भी देखा जाता है क्योंकि सेना में टैटू को लेकर कड़े नियम तय किए गए हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Anant Nag Honored With Dada Saheb Phalke Award 2026

6 मिनट पहले कॉपी लिंक PM मोदी ने अनंत नाग को पुरस्कार मिलने पर बधाई दी है। दिग्गज अभिनेता अनंत नाग को भारतीय सिनेमा में उनके योगदान के लिए दादा साहेब फाल्के पुरस्कार 2024 से सम्मानित किया जाएगा। प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) ने बुधवार को इसकी घोषणा की। 22 सितंबर को गुजरात के केवडिया में आयोजित होने वाले 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में अनंत नाग को पुरस्कार दिया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पोस्ट करके अनंत नाग को बधाई दी। उन्होंने लिखा- कई दशकों तक उनके सहज अभिनय, बेहतरीन बहुमुखी प्रतिभा ने भारतीय सिनेमा, खासकर कन्नड़ सिनेमा पर एक मजबूत छाप छोड़ी है। 300 से ज्यादा फिल्मों में कर चुके हैं काम 4 सितंबर 1948 को जन्मे अनंत नाग (अनंत नागरकट्टे) कन्नड़ सिनेमा के सबसे सम्मानित और दिग्गज अभिनेताओं में से एक हैं। अपने लंबे करियर के दौरान उन्होंने 300 से ज्यादा फिल्मों में अभिनय किया है, जिनमें 250 से ज्यादा कन्नड़ फिल्में शामिल हैं। कन्नड़ के अलावा उन्होंने हिंदी, तेलुगु, तमिल, मराठी, मलयालम और अंग्रेजी भाषाओं की फिल्मों में भी अपनी अदाकारी का जादू चलाया है। कन्नड़ सुपरस्टार यश की ब्लॉकबस्टर फिल्म KGF के दोनों पार्ट में वह नजर आए थे। ‘मालगुडी डेज’ से घर-घर में मिली पहचान फिल्मों के अलावा अनंत नाग को आरके नारायण की कहानियों पर आधारित दूरदर्शन के लोकप्रिय सीरियल ‘मालगुडी डेज’ से घर-घर में पहचान मिली थी। वे अब तक 5 बार कर्नाटक राज्य फिल्म पुरस्कार जीत चुके हैं। 2025 में मिला था ‘पद्म भूषण’ सम्मान सिनेमा और कला के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए भारत सरकार ने साल 2025 में अनंत नाग को देश के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘पद्म भूषण’ से नवाजा था। दादा साहेब फाल्के पुरस्कार को भारतीय सिनेमा का सर्वोच्च सम्मान माना जाता है, जो भारतीय सिनेमा के विकास और प्रगति में किसी व्यक्ति के विशेष योगदान के लिए दिया जाता है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
अमेरिका में AI को लेकर तीन खेमे:मस्क को सभ्यता मिटने का डर, ट्रम्प को चीन से पिछड़ने की चिंता, तीसरा पक्ष इंसानी कंट्रोल चाहता

अमेरिका में AI के विकास की रफ्तार को लेकर बहस तेज है। इसे लेकर तीन अलग-अलग खेमे बन गए हैं। इलॉन मस्क समेत कुछ टेक दिग्गजों को डर है कि AI अगर इंसानों के कंट्रोल से बाहर हुआ तो पूरी मानव सभ्यता के लिए खतरा बन सकता है। वे इसे परमाणु हथियार से भी ज्यादा खतरनाक मानते हैं। वहीं, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प AI की रफ्तार धीमी करने के पक्ष में नहीं हैं। उनका जोर अमेरिका को AI की दौड़ में चीन से आगे रखने पर है। उनका मानना है कि ज्यादा रोक-टोक से अमेरिका पीछे रह सकता है। तीसरा खेमा AI को लेकर बीच का रास्ता चाहता है। वह इसकी रफ्तार रोकने के बजाय सुरक्षा नियम और इंसानी निगरानी बनाए रखने के पक्ष में है। राष्ट्रपति ट्रम्प AI पर निगरानी के खिलाफ पिछले एक हफ्ते में AI के विकास को धीमा करने की मांग अमेरिकी राजनीति के बड़े मुद्दों में शामिल हो गई है। कई टेक कंपनियों के बड़े अधिकारी AI पर ज्यादा सावधानी और नियमों की बात कर रहे हैं, जबकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प इसका विरोध कर रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि AI पर नियंत्रण की मांग करने वालों में अमेरिका के राजनीतिक वामपंथी और दक्षिणपंथी, दोनों तरफ के लोग शामिल हैं। आम तौर पर इन दोनों विचारधाराओं में बहुत कम मुद्दों पर सहमति होती है, लेकिन AI के मामले में दोनों तरफ के कुछ नेता इसे नियंत्रित करने की जरूरत मानते हैं। AI को लेकर इस लड़ाई का असर सिर्फ टेक कंपनियों तक सीमित नहीं रहेगा। इससे तय होगा कि आने वाले समय में AI हमारी रोजमर्रा की जिंदगी में किस तरह इस्तेमाल होगा और दुनिया के लिए इसके नियम कौन तय करेगा। AI का विकास धीमा करने के पक्ष में… डारियो अमोडेई डारियो अमोडेई AI कंपनी एंथ्रोपिक के को-फाउंडर और CEO हैं। उन्होंने 2021 में OpenAI छोड़कर एंथ्रोपिक शुरू की थी। कंपनी ने खुद को AI की सुरक्षा पर ज्यादा ध्यान देने वाली कंपनी के तौर पर पेश किया है। अमोडेई कई बार चेतावनी दे चुके हैं कि भविष्य की AI बेहद खतरनाक हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा है कि इसका इस्तेमाल जैविक हथियार बनाने जैसे खतरनाक कामों में हो सकता है। वह AI पर सरकारी नियम बनाए जाने की मांग करते रहे हैं। हाल ही में उन्होंने 3,800 शब्दों का एक लेख लिखकर दुनियाभर में AI के विकास की रफ्तार धीमी करने की योजना सामने रखी। रुख बदलने वाले… सैम ऑल्टमैन सैम ऑल्टमैन OpenAI के को-फाउंडर और CEO हैं। 2023 में उन्होंने AI से इंसानों के खत्म होने के खतरे से जुड़े एक बयान पर हस्ताक्षर किए थे। उसी साल अमेरिकी सीनेट में उन्होंने ताकतवर AI मॉडल पर नियम बनाने का समर्थन भी किया था। हालांकि, 2025 के बीच तक उनका रुख कुछ बदल गया। उन्होंने कहा कि AI में बड़े बदलाव धीरे-धीरे होंगे और उन्हें संभालना संभव होगा। लेकिन जुलाई 2026 में OpenAI ने खुद माना कि टेस्ट के दौरान उसके दो मॉडल्स जानबूझकर टेस्टिंग से निकल भागे और चोरी की लॉगिन डिटेल्स और सिक्योरिटी खामी का इस्तेमाल कर AI कंपनी Hugging Face के सर्वर तक पहुंच गए। वो भी बिना किसी इंसानी दखल के। इसके बाद ऑल्टमैन ने कहा कि अब AI के विकास की रफ्तार धीमी करने का समय आ गया है। उन्होंने अमोडेई की इस बात से सहमति जताई कि AI मॉडल के विकास की रफ्तार कम होनी चाहिए। इलॉन मस्क इलॉन मस्क xAI, स्पेसX और टेस्ला के CEO हैं। मस्क लंबे समय से कहते रहे हैं कि AI के खतरनाक होने की संभावना करीब 10 से 20% है। उन्होंने AI को परमाणु हथियारों से भी ज्यादा खतरनाक बताया है और समय रहते नियम बनाने की मांग की है। हालांकि, उन्होंने xAI शुरू की और राष्ट्रपति ट्रम्प को चुनाव में जिताने के लिए बड़ी रकम खर्च की। ट्रम्प प्रशासन में वह कुछ समय तक नियमों में ढील देने से जुड़े काम से भी जुड़े रहे। इसके बावजूद शनिवार को सोशल मीडिया पर मस्क ने अमोडेई की AI को धीमा करने की मांग का समर्थन किया और लिखा कि “डारियो सही हैं।” AI पर बीच का रास्ता चाहते हैं… सत्या नडेला सत्या नडेला माइक्रोसॉफ्ट के चेयरमैन और CEO हैं। उन्होंने माइक्रोसॉफ्ट और OpenAI के बीच बड़ी साझेदारी को आगे बढ़ाया है। हाल के समय में माइक्रोसॉफ्ट ने अपने खुद के AI टूल्स पर भी जोर बढ़ाया। नडेला ने हाल ही में कहा कि AI का विकास सोच-समझकर और कंट्रोल्ड रफ्तार से होना चाहिए। वह एडवांस्ड AI सिस्टम पर इंसानों की निगरानी के पक्ष में हैं। उनका कहना है कि ऐसी सुपरइंटेलिजेंस विकसित करने का कोई मतलब नहीं है जो इंसानों के कंट्रोल में न रहे या जिसका फायदा लोगों को न मिले। इसके साथ ही वह AI के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल और खुले AI सिस्टम का भी समर्थन करते हैं। सुंदर पिचाई सुंदर पिचाई अल्फाबेट और गुगल के CEO हैं। पिचाई कई सालों से कहते रहे हैं कि AI इतना जरूरी है कि इस पर सही तरीके से नियम बनने चाहिए। उन्होंने AI के खतरों को भी माना है। हालांकि, वह बहुत कड़े नियमों के बजाय AI के अलग-अलग इस्तेमाल के हिसाब से नियम बनाने के पक्ष में हैं। उनका कहना है कि AI से मिलने वाले फायदों को हासिल करने में पीछे रहना भी बड़ा खतरा हो सकता है। मार्क जुकरबर्ग मार्क जुकरबर्ग मेटा के चेयरमैन और CEO हैं। उनका मानना है कि AI का कुछ बड़ी कंपनियों के हाथों में सीमित हो जाना ज्यादा बड़ा खतरा है। इसके मुकाबले AI तक ज्यादा लोगों की पहुंच को वह सुरक्षा का एक तरीका मानते हैं। जुकरबर्ग ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका में AI मॉडल जारी करने की रफ्तार धीमी हुई तो इसका फायदा चीन को मिल सकता है। हालांकि, वह AI की सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को भी मानते हैं। उन्होंने संकेत दिया है कि मेटा भविष्य में अपने सबसे शक्तिशाली AI मॉडल सभी के लिए खुले तौर पर जारी नहीं कर सकती। एलेक्जेंडर वेंग एलेक्जेंडर वेंग 2025 में Meta से जुड़े और कंपनी में AI से जुड़े बड़े कामों की जिम्मेदारी संभाली। वह मेटा के डिजिटल असिस्टेंट AI एजेंट ‘म्यूस’ के विकास से भी
अमेरिका से पैसा निकालने लगे दुनिया के बड़े निवेशक:40 ट्रिलियन डॉलर के कर्ज से बढ़ी चिंता, सोना खरीद रहे, चीन में निवेश बढ़ा रहे

अमेरिका पर 40 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा का कर्ज है। इसके साथ ब्याज दरें, टैरिफ और दूसरे देशों पर लगाए जा रहे आर्थिक प्रतिबंध भी बढ़ रहे हैं। इससे दुनिया के कुछ निवेशक अब सोच रहे हैं कि अपना पैसा अमेरिका के अलावा कहां लगाया जाए। कुछ बड़े सरकारी फंड अमेरिकी बॉन्ड में निवेश घटा रहे हैं। कई देशों के केंद्रीय बैंक सोना खरीदकर अपना भंडार बढ़ा रहे हैं। वहीं, जर्मनी की कंपनियों ने 2026 की पहली छमाही में अमेरिका में निवेश कम किया और चीन में निवेश बढ़ाया। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि दुनिया अमेरिका से पूरी तरह दूर हो रही है। डॉलर अभी भी दुनिया की सबसे बड़ी रिजर्व करेंसी है और अमेरिकी शेयर बाजार व बॉन्ड में अब भी बड़ी मात्रा में पैसा लगा हुआ है। अमेरिका को कर्ज लेने के लिए ज्यादा ब्याज देना पड़ रहा अमेरिकी बॉन्ड बाजार में निवेशकों की चिंता अब साफ दिखने लगी है। 10 साल के अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड सितंबर में करीब 5% तक पहुंच गई। 11 सितंबर को यह 4.93% थी, जबकि इससे पहले 4.979% तक पहुंच चुकी थी। आसान भाषा में समझें तो यील्ड बढ़ने का मतलब है कि अमेरिका को कर्ज लेने के लिए निवेशकों को ज्यादा ब्याज देना पड़ रहा है। यानी सरकार के लिए कर्ज लेना महंगा होता जा रहा है। इसका असर आगे चलकर सरकारी खर्च पर भी पड़ सकता है। बॉन्ड में निवेशकों की दिलचस्पी बनाए रखने के लिए अमेरिकी ट्रेजरी पुराने बॉन्ड की खरीद बढ़ा रहा है। हालांकि, ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट का कहना है कि अमेरिकी वित्तीय व्यवस्था मजबूत है और बॉन्ड की हाल की नीलामियां अच्छी रही हैं। नॉर्वे अमेरिकी बॉन्ड में निवेश घटा सकता है अमेरिका से निवेश कम करने वालों में नॉर्वे का सरकारी फंड भी शामिल है। करीब 2.3 ट्रिलियन डॉलर (₹218.5 लाख करोड़) का यह फंड अमेरिकी सरकारी बॉन्ड में अपना पैसा कम करने की योजना बना रहा है। नॉर्वे के फंड में सरकारी बॉन्ड का हिस्सा 70% से घटाकर 50% करने का प्रस्ताव है। इसमें सबसे बड़ी कटौती अमेरिकी बॉन्ड में होने की संभावना है। इससे अमेरिका के बॉन्ड में नॉर्वे का निवेश करीब 80 अरब डॉलर तक कम हो सकता है। हालांकि, नॉर्वे सिर्फ अमेरिका से दूरी बनाने के लिए यह बदलाव नहीं कर रहा। वह जापान के सरकारी बॉन्ड और दूसरे तरह के बॉन्ड में पैसा लगाने पर भी विचार कर रहा है। इसका मकसद अपना पैसा अलग-अलग जगह लगाना और बेहतर कमाई के मौके तलाशना है। जर्मन कंपनियों का अमेरिका में निवेश 65% घटा, चीन में एक-तिहाई बढ़ा अमेरिका और चीन में जर्मन कंपनियों के निवेश के आंकड़ों में इस साल बड़ा फर्क दिखा है। 2026 की पहली छमाही में अमेरिका में उनका निवेश 65% घटकर 4.3 अरब यूरो रह गया। वहीं, चीन में निवेश करीब एक-तिहाई बढ़कर 5.6 अरब यूरो पहुंच गया। जर्मन इकोनॉमिक इंस्टीट्यूट की स्टडी के मुताबिक, अमेरिका में जर्मन कंपनियों का निवेश ऐसे समय घटा है, जब ट्रम्प की टैरिफ और व्यापार नीतियों को लेकर कारोबार में अनिश्चितता बनी हुई है। वहीं, चीन में पहले से काम कर रही जर्मन कंपनियां अपने कारोबार में लगातार पैसा लगा रही हैं। डॉलर की हिस्सेदारी धीरे-धीरे घट रही डॉलर अभी भी दुनिया में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली रिजर्व करेंसी है। लेकिन दुनिया के केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार में डॉलर का हिस्सा धीरे-धीरे कम कर रहे हैं। आईएमएफ के मुताबिक, 2025 की आखिरी तिमाही में दुनिया के विदेशी मुद्रा भंडार में डॉलर की हिस्सेदारी 56.77% थी। इससे पिछली तिमाही में यह 56.93% थी। वहीं, चीन की मुद्रा रेनमिन्बी की हिस्सेदारी सिर्फ 1.95% थी। इसका मतलब यह नहीं है कि चीन की मुद्रा अभी डॉलर की जगह लेने वाली है। डॉलर की पकड़ अब भी बहुत मजबूत है। बस कुछ देश अपने पैसे को अलग-अलग जगह रख रहे हैं। वे डॉलर के साथ दूसरी मुद्राओं और सोने में भी अपना भंडार बढ़ा रहे हैं। केंद्रीय बैंक लगातार सोना खरीद रहे डॉलर के साथ अब सोना भी केंद्रीय बैंकों के लिए अहम रिजर्व बनता जा रहा है। कई देश अपने विदेशी मुद्रा भंडार में सोने का हिस्सा बढ़ा रहे हैं। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के मुताबिक, दुनिया के केंद्रीय बैंकों ने 2025 में कुल 863 टन सोना खरीदा। यह 2024 के मुकाबले कम था, लेकिन लंबे समय के औसत से अब भी काफी ज्यादा रहा। 2022 से 2025 के बीच केंद्रीय बैंकों ने हर साल औसतन करीब 1,000 टन सोना खरीदा। यानी सोने को रिजर्व में शामिल करने का चलन पिछले कुछ सालों से लगातार बना हुआ है। 2026 में भी खरीद जारी चीन-भारत में भी सोने की मांग बढ़ी सोने की बढ़ती मांग सिर्फ केंद्रीय बैंकों तक सीमित नहीं है। आम निवेशक भी सोने में ज्यादा पैसा लगा रहे हैं। 2025 में चीन में सोने की निवेश मांग 28% बढ़ी। भारत में भी सोने में निवेश की मांग 17% बढ़ी। दोनों देशों के बाजारों ने मिलकर दुनिया में सोने की छड़ों और सिक्कों की कुल मांग का आधे से ज्यादा हिस्सा अपने नाम किया। यानी सोने की मांग दो तरफ से बढ़ रही है। एक ओर केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार में सोना बढ़ा रहे हैं, तो दूसरी ओर चीन और भारत जैसे बड़े बाजारों में आम निवेशक भी सोने को निवेश का विकल्प मान रहे हैं। अमेरिका की आर्थिक ताकत अभी भी बरकरार इन बदलावों के बावजूद अमेरिका की आर्थिक ताकत अभी खत्म नहीं हुई है। दुनिया के विदेशी मुद्रा भंडार में आज भी डॉलर की हिस्सेदारी 56% से ज्यादा है। अमेरिकी शेयर बाजार और सरकारी बॉन्ड में भी दूसरे देशों का पैसा लगा हुआ है। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट का कहना है कि अमेरिकी वित्तीय व्यवस्था पर लोगों का भरोसा बना हुआ है और सरकारी बॉन्ड की नीलामी भी अच्छी चल रही है।
Vvan Movie Trailer | Siddharth Malhotra Tamannaah Bhatia Fantasy Thriller

10 मिनट पहले कॉपी लिंक सिद्धार्थ मल्होत्रा और तमन्ना भाटिया की अपकमिंग फैंटेसी फिल्म ‘वन’ (Vvan) का ट्रेलर मेकर्स ने रिलीज कर दिया है। 2 मिनट 44 सेकंड का यह ट्रेलर एक रहस्यमयी और प्रतिबंधित जंगल की कहानी दिखाता है, जहां आस्था और लोककथाओं का मिलन होता है। फिल्म में सिद्धार्थ एक नास्तिक व्यक्ति के किरदार में हैं, जो जंगल के भीतर की शक्तियों और भूतों से मुकाबला करते नजर आते हैं। ‘पंचायत’ वेब सीरीज के निर्देशक दीपक कुमार मिश्रा के निर्देशन में बनी यह फिल्म 25 सितंबर को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। छठ पूजा की छुट्टियों से शुरू होती है कहानी ट्रेलर की शुरुआत में तमन्ना भाटिया और सिद्धार्थ मल्होत्रा के किरदारों की बातचीत दिखाई गई है। तमन्ना का किरदार छठ पूजा की छुट्टियों में जंगल की तरफ जाने की बात करता है, जबकि सिद्धार्थ का किरदार बहाने बनाता दिखता है। तमन्ना का मानना है कि उन्हें देवी ने खुद बुलाया है। इसके बाद कहानी में कई अकल्पनीय घटनाएं घटने लगती हैं। यहां ‘वन देवी’ का प्राचीन मंदिर है। इस मंदिर से पुरानी लोककथाएं फिर से जीवित हो उठती हैं। ‘भुट्टका’ शक्तियां और सूर्यास्त के बाद पाबंदी का नियम फिल्म की इस रहस्यमयी दुनिया का सबसे बड़ा नियम है “सूर्यास्त के बाद वन में प्रवेश करना वर्जित है”। जंगल के भीतर ‘भुट्टका’ नाम की अंधेरी और खौफनाक शक्तियां रहती हैं, जो रात के सन्नाटे से भी ज्यादा खतरनाक मानी जाती हैं। लोकमान्यता के अनुसार, अगर कोई इंसान रात के समय इस जंगल में कदम रखता है, तो वह कभी जिंदा वापस नहीं लौट पाता। सिद्धार्थ का किरदार इन खतरों के बावजूद इस जंगल की तरफ खिंचा चला जाता है। रियल लोकेशंस पर हुई शूटिंग, लोककथाओं पर आधारित फिल्म में डर और प्रामाणिकता का अहसास कराने के लिए मेकर्स ने असली जंगलों में शूटिंग की है। ‘तुंबाद’, ‘भ्रमयुगम’ और ‘कांतारा’ जैसी लोककथाओं पर बनी फिल्मों की सफलता के बाद दर्शक इस तरह के कंटेंट को काफी पसंद कर रहे हैं। बालाजी टेलीफिल्म्स के बैनर तले बनी इस फिल्म को शोभा कपूर और एकता कपूर ने प्रोड्यूस किया है। फिल्म की स्टारकास्ट में सिद्धार्थ और तमन्ना के अलावा मनीष पॉल, श्वेता तिवारी, सुनील ग्रोवर और अनूप सोनी जैसे कलाकार मुख्य भूमिकाओं में हैं। ‘पंचायत’ के बाद दीपक मिश्रा की नई शैली में एंट्री निर्देशक दीपक कुमार मिश्रा को अब तक ‘पंचायत’ जैसी जमीनी और ग्रामीण परिवेश की कहानियों के लिए जाना जाता था। इस फिल्म के जरिए वे पहली बार फैंटेसी, एक्शन और फॉल्क हॉरर की दुनिया में कदम रख रहे हैं। ट्रेलर में पौराणिक कथाओं, हॉरर और एक्शन का तालमेल देखने को मिलता है। मेकर्स ने कहानी के सभी रहस्यों का खुलासा ट्रेलर में न करते हुए दर्शकों के लिए सस्पेंस बरकरार रखा है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
यूरोप- गर्मी से 35 हजार मौतें, नदियां सूखी, जंगल जले:यूरोपीय संघ ने गर्मी को भी आपदा माना, हीटवेव से निपटने नया सिस्टम बनाएगा

यूरोपीय यूनियन (EU) भीषण गर्मी को आपदा मानते हुए इससे निपटने के लिए नया हीटवेव प्लान बनाएगा। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने बुधवार को कहा कि इस साल की गर्मी ने यूरोप को बड़ा सबक दिया है। उन्होंने बताया कि हीटवेव के दौरान यूरोप में 35 हजार से ज्यादा मौतें हुईं। तेज गर्मी से नदियों सूख गई और कई देशों में जंगलों में भयानक आग लगी। अब जंगलों की आग पर जल्दी काबू पाने के लिए EU आग बुझाने वाले विमानों का अपना बड़ा बेड़ा तैयार करेगा। गर्मी के कारण डेन्यूब, राइन जैसी नदियों का पानी सूखा भीषण गर्मी के कारण यूरोप की कई बड़ी नदियों में पानी कम हो गया। इनमें डेन्यूब, राइन और फ्रांस की गारोन नदी भी शामिल हैं। वॉन डेर लेयेन ने कहा कि कई अस्पताल और बुजुर्गों के केयर होम इतनी ज्यादा गर्मी की चपेट में आ गए कि वहां रहना मुश्किल हो गया। उनके मुताबिक, गर्मी का असर शुरुआती अनुमान से कहीं ज्यादा रहा। आग बुझाने वाले विमानों के बेड़े में अभी कम विमान हैं इस साल यूरोप के कई देशों में जंगलों में भयानक आग लगी। इससे करीब 6.60 लाख हेक्टेयर जमीन जल गई और करीब 1.2 करोड़ टन फसलें बर्बाद हो गईं। उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा कि EU अब आग के सबसे ज्यादा खतरे वाले 100 इलाकों की पहचान करेगा। इन इलाकों में आग लगने के खतरे और उससे बचने की तैयारी की जांच की जाएगी। अभी EU के पास आग बुझाने वाले विमानों का छोटा बेड़ा है। आग लगने पर EU सदस्य देशों के बीच विमान, पानी के टैंकर और राहतकर्मी भेजने की व्यवस्था भी करता है। अब इस पूरी व्यवस्था को और बड़ा किया जाएगा। इस योजना को बेहतर बनाने के लिए अनुभवी फायरफाइटर्स और राहत टीमों से भी सुझाव लिए जा रहे हैं। जंगल की आग बुझाते समय जान गंवाने वाले पायलट को याद किया EU कमीशन की अध्यक्ष वॉन डेर लेयेन ने ग्रीस में आग बुझाते समय जान गंवाने वाले डेनमार्क के हेलिकॉप्टर पायलट रूने किंडल को भी याद किया। अगस्त में जंगल की आग बुझाने के दौरान उनकी मौत हो गई थी। वॉन डेर लेयेन ने कहा कि रूने ने दूसरों की जान बचाने के लिए अपनी जान दे दी। उनके नाम का जिक्र होते ही यूरोपीय संसद में लोगों ने तालियां बजाईं। जलवायु परिवर्तन की वजह से यूरोप में गर्मी और बढ़ेगी वर्ल्ड वेदर एट्रिब्यूशन की एक स्टडी के मुताबिक, जलवायु परिवर्तन की वजह से यूरोप में इस साल इतनी ज्यादा गर्मी देखने को मिली। वॉन डेर लेयेन ने कहा कि यूरोप दुनिया के औसत तापमान के मुकाबले करीब दोगुनी तेजी से गर्म हो रहा है। उनके मुताबिक आने वाले सालों में यूरोप को तेज गर्मी और ज्यादा झेलनी पड़ सकती है। यूरोप दुनिया के औसत से दोगुनी तेजी से क्यों गर्म हो रहा है? आर्कटिक का असर यूरोप आर्कटिक के काफी करीब है। आर्कटिक दुनिया के बाकी हिस्सों के मुकाबले ज्यादा तेजी से गर्म हो रहा है। इसका असर यूरोप के मौसम और तापमान पर भी पड़ रहा है। जमीन समुद्र से जल्दी गर्म होती है जमीन समुद्र के मुकाबले जल्दी गर्म होती है। यूरोप का बड़ा हिस्सा जमीन पर है, इसलिए यहां तापमान तेजी से बढ़ रहा है। हवाओं का बदलता पैटर्न यूरोप में हवा और जेट स्ट्रीम के रास्ते में बदलाव भी गर्मी बढ़ा रहा है। कई बार गर्म हवा एक जगह लंबे समय तक फंस जाती है। इससे हीटवेव ज्यादा तेज और लंबे समय तक चलती है। ————————— ये खबर भी पढ़ें… जंगली कुत्ते मादा की तलाश में 4000 km घूमे: 9 महीने तक जोड़ीदार तलाशते रहे जाम्बिया के काफ्यू नेशनल पार्क से निकले तीन अफ्रीकी जंगली कुत्तों ने साथी और नया इलाका तलाशने के लिए करीब 4,126 किमी का सफर तय किया। पूरी खबर यहां पढ़ें…
यूरोप- गर्मी से 35 हजार मौतें, नदियां सूखी, जंगल जले:यूरोपीय संघ ने गर्मी को भी आपदा माना, हीटवेव से निपटने नया सिस्टम बनाएगा

यूरोपीय यूनियन (EU) भीषण गर्मी को आपदा मानते हुए इससे निपटने के लिए नया हीटवेव प्लान बनाएगा। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने बुधवार को कहा कि इस साल की गर्मी ने यूरोप को बड़ा सबक दिया है। उन्होंने बताया कि हीटवेव के दौरान यूरोप में 35 हजार से ज्यादा मौतें हुईं। तेज गर्मी से नदियों सूख गई और कई देशों में जंगलों में भयानक आग लगी। अब जंगलों की आग पर जल्दी काबू पाने के लिए EU आग बुझाने वाले विमानों का अपना बड़ा बेड़ा तैयार करेगा। गर्मी के कारण डेन्यूब, राइन जैसी नदियों का पानी सूखा भीषण गर्मी के कारण यूरोप की कई बड़ी नदियों में पानी कम हो गया। इनमें डेन्यूब, राइन और फ्रांस की गारोन नदी भी शामिल हैं। वॉन डेर लेयेन ने कहा कि कई अस्पताल और बुजुर्गों के केयर होम इतनी ज्यादा गर्मी की चपेट में आ गए कि वहां रहना मुश्किल हो गया। उनके मुताबिक, गर्मी का असर शुरुआती अनुमान से कहीं ज्यादा रहा। आग बुझाने वाले विमानों का बेड़ा अभी छोटा है गर्मी और सूखे के कारण जंगलों में आग लगने का खतरा भी बढ़ गया। कई जगह आग बुझाने के लिए दूसरे यूरोपीय देशों से भी मदद भेजनी पड़ी। अभी EU के पास आग बुझाने वाले विमानों का छोटा बेड़ा है। आग लगने पर EU सदस्य देशों के बीच विमान, पानी के टैंकर और राहतकर्मी भेजने की व्यवस्था भी करता है। अब इस पूरी व्यवस्था को और बड़ा किया जाएगा। डेनमार्क के पायलट को याद किया EU कमीशन की अध्यक्ष वॉन डेर लेयेन ने ग्रीस में आग बुझाते समय जान गंवाने वाले डेनमार्क के हेलिकॉप्टर पायलट रूने किंडल को भी याद किया। अगस्त में जंगल की आग बुझाने के दौरान उनकी मौत हो गई थी। वॉन डेर लेयेन ने कहा कि रूने ने दूसरों की जान बचाने के लिए अपनी जान दे दी। उनके नाम का जिक्र होते ही यूरोपीय संसद में लोगों ने तालियां बजाईं। यूरोप में गर्मी और बढ़ेगी वर्ल्ड वेदर एट्रिब्यूशन की एक स्टडी के मुताबिक, जलवायु परिवर्तन की वजह से यूरोप में इस साल इतनी ज्यादा गर्मी देखने को मिली। वॉन डेर लेयेन ने कहा कि यूरोप दुनिया के औसत तापमान के मुकाबले करीब दोगुनी तेजी से गर्म हो रहा है। उनके मुताबिक आने वाले सालों में यूरोप को तेज गर्मी और ज्यादा झेलनी पड़ सकती है।








