Wednesday, 16 Sep 2026 | 04:50 AM

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MP Constable & RRB NTPC Recruitment 2026

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Hindi News Career MP Constable & RRB NTPC Recruitment 2026 | Latest Job Vacancy List 14 मिनट पहले कॉपी लिंक इस हफ्ते मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल और RRB NTPC सहित कई विभागों में 17,697 पदों पर नौकरियां। अगर आप भी इन पदों के लिए अप्लाई करना चाहते हैं, तो इन 5 नौकरियों की डिटेल्ड जानकारी 5 ग्राफिक्स के जरिए जानिए : ऑफिशियल नोटिफिकेशन लिंक ऑफिशियल नोटिफिकेशन लिंक ऑफिशियल नोटिफिकेशन लिंक ऑफिशियल नोटिफिकेशन लिंक ऑफिशियल नोटिफिकेशन लिंक . दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं… SSC ने 1871 पदों पर निकाली भर्ती: ग्रेजुएट्स को मौका, 1 लाख 12 हजार तक मिलेगी सैलरी 0:36Play video Play video जॉब – एजुकेशन कॉपी लिंक शेयर इंडियन आर्मी में अग्निवीर रैली के लिए टैटू पॉलिसी जारी: ट्राइबल कम्युनिटी और धार्मिक टैटू बनवा सकते हैं, ये 6 तरह के टैटू प्रतिबंधित 0:41Play video Play video जॉब – एजुकेशन कॉपी लिंक शेयर यूपी में ऑफिसर के 1251 पदों पर निकली भर्ती: फीस 25 रुपए, सैलरी 90 हजार से ज्यादा 0:41Play video Play video जॉब – एजुकेशन कॉपी लिंक शेयर

‘बिरजू को क्यों मारा?’ पर बोले रसिका-मोहित:‘कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा’ जैसी ‘मिर्जापुर मूवी की बड़ी मिस्ट्री

‘बिरजू को क्यों मारा?’ पर बोले रसिका-मोहित:‘कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा’ जैसी ‘मिर्जापुर मूवी की बड़ी मिस्ट्री

मिर्जापुर’ की दुनिया किरदारों, हिंसा और दमदार डायलॉग्स के साथ मीम्स के लिए भी मशहूर है। वेब सीरीज के पुराने मीम्स हों या फिल्म के नए किरदार बिरजू लोहार और उनके दर्दभरे सीन, सोशल मीडिया पर ‘मिर्जापुर’ का जलवा है। फिल्म में बीना त्रिपाठी का किरदार निभाने वाली रसिका दुग्गल और बिरजू लोहार बने मोहित मलिक ने दैनिक भास्कर से खास बातचीत में वायरल मीम्स, अपने किरदारों पर बने मजेदार मीम्स और सोशल मीडिया के रिएक्शन पर बात की। रसिका ने अपने सबसे पुराने और पसंदीदा ‘मिर्जापुर’ मीम का किस्सा सुनाया, वहीं मोहित ने बिरजू के दर्द पर बने मीम्स को ‘रिलेटेबल’ बताया। सवाल: ‘मिर्जापुर’ और मीम्स का रिश्ता पुराना है। पहली बार अपने किरदारों पर मीम्स बनते देखे तो कैसा लगा? जवाब/रसिका दुग्गल: मेरे लिए यह बहुत खास अनुभव रहा है। जो मीम सबसे ज्यादा पॉपुलर हुआ, वह 2018 का है और ‘मिर्जापुर’ में मेरा पहला शॉट था। उस दिन हम वह सीन शूट कर रहे थे। मैं बिस्तर से उठती हूं और लाइन बोलती हूं- ‘हर बार गर्म करके छोड़ देते हैं ठंडा।’ जब मैंने वह शॉट मॉनिटर पर देखा तो मेरे एक तरफ के बाल सचमुच खड़े हो गए थे। मैंने गुरु से कहा कि मुझे पता है कि सीन थोड़ा अस्त-व्यस्त दिखना चाहिए, लेकिन यह ज्यादा अजीब लग रहा है। ऐसा लग रहा है जैसे सिर पर कुछ उग आया हो। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ दो-तीन सेकेंड का शॉट है, ज्यादा देर नहीं रहेगा। मैंने कहा ठीक है। बाद में वही शॉट मीम बन गया। उस समय मैंने बिल्कुल नहीं सोचा था कि ऐसा होगा। उस दौर में ‘मिर्जापुर’ के साथ मीम कल्चर भी तेजी से बढ़ रहा था। मुझे लगता है कि किसी अभिनेता का काम पॉपुलर कल्चर का हिस्सा बन जाए तो यह बहुत अच्छी बात है। सवाल: अगर बीना, बिरजू से वही लाइन कहतीं- ‘हर बार गर्म करके छोड़ देते हैं ठंडा’, तो बिरजू का रिएक्शन क्या होता? जवाब/मोहित मलिक: ऐसा हो ही नहीं सकता। रसिका दुग्गल: क्योंकि यह हमारा रिश्ता नहीं है। वह लाइन अखंडा और बीना के रिश्ते की है। बिरजू और बीना के रिश्ते में ऐसा बिल्कुल नहीं हो सकता। मोहित मलिक: यहां प्यार अलग तरह का है। यह भक्ति जैसा प्यार है। बिरजू और बिना के बीच जो रिश्ता है, उसमें वह लाइन फिट ही नहीं होती। सवाल: ‘हमने मजबूरी में किया था, अब मजा आने लगा है’ मीम भी वायरल हुआ। इसके बारे में क्या कहना चाहेंगी? जवाब/रसिका दुग्गल: यह मेरा फेवरेट है। मुझे यह मीम बहुत पसंद है। सवाल: अगर इसी लाइन को बिना त्रिपाठी के अंदाज में बोलना हो तो कैसे बोलेंगी? जवाब/रसिका दुग्गल: बीना के अंदाज में मैं कहूंगी- ‘हमने मजबूरी में किया था, अब मजा आने लगा है।’ सवाल: कालीन भैया पूरी जिंदगी ‘कंट्रोल’ की बात करते हैं। क्या बीना ने कभी कालीन भैया को कंट्रोल किया है? जवाब/ रसिका दुग्गल: बहुत ज्यादा। कालीन भैया पूरी तरह बिना के कंट्रोल में हैं। कौन नहीं है? अगर आज की Gen-Z भाषा में कहें तो बिना के सामने कालीन भैया ‘पुकी’ बन जाते हैं। ‘पुकी’ का मतलब है कि जो व्यक्ति बाहर से बहुत पावरफुल और दबंग है, लेकिन किसी खास इंसान के सामने बिल्कुल नरम और थोड़ा सहमा हुआ हो जाए। पूरी दुनिया कालीन भैया से डरती है, लेकिन कालीन भैया बिना से डरते हैं। मोहित मलिक: यही कालीन भैया के किरदार की खूबसूरती है। जिस तरह से उन्होंने इस किरदार को निभाया है, उसमें यह चीज अच्छी तरह दिखाई देती है। रसिका दुग्गल: बाहर वह कालीन भैया हैं, लेकिन घर के अंदर बीना के पति हैं। वहां पूरा समीकरण बदल जाता है। सवाल: ‘मिर्जापुर’ में सबसे ज्यादा ‘जलवा’ किसका है? जवाब/ मोहित मलिक: मुन्ना का। यह उसी की लाइन है और मुझे लगता है कि ‘जलवा’ अब उसका ट्रेडमार्क बनना चाहिए। रसिका दुग्गल: लेकिन मैं कहूंगी कि त्रिपाठियों का है। बीना का भी है और अखंडा का भी। सवाल: बिरजू लोहार के किरदार पर सोशल मीडिया पर खूब मीम्स बन रहे हैं। क्या आपको अंदाजा था कि यह किरदार इस तरह वायरल होगा? जवाब/ मोहित मलिक: नहीं, बिल्कुल नहीं। कोशिश पूरी की थी। मुझे पता था कि इतने बड़े किरदारों और एक्टर्स के बीच मेरा स्क्रीन टाइम काफी कम है। इसलिए जरूरी था कि जब भी मैं स्क्रीन पर आऊं, तो बिरजू की पांच साल की जर्नी दिखाई दे। मुझे लगता है कि दर्शक भावनाओं से जल्दी जुड़ते हैं। मैंने पूरी मेहनत की, अपनी जान लगा दी। लेकिन आखिर में यह उस मोमेंट का खेल होता है कि उस समय जो चीजें सही बैठती हैं, वह मोमेंट बन जाता है। फिल्म में भी ऐसा ही हुआ। जैसे कोई माला पिरोता है, वैसे सारे मोमेंट्स एक-दूसरे से जुड़ते गए और खूबसूरत माला बन गई। शायद इसलिए लोगों को बिरजू का किरदार इतना पसंद आया। सवाल: बिरजू के दर्द और आखिरी सीन पर बने मीम्स देखकर कैसा लगा? जवाब/ मोहित मलिक: मुझे लगता है कि ये मीम्स लोगों को इसलिए इतने रिलेटेबल लगे क्योंकि हर किसी का दिल कभी न कभी टूटा है। हर कोई किसी न किसी तरह का दिलजला है। मैंने एक मीम देखा था, जिसमें बिरजू के साथ जो हुआ, उसे मजेदार तरीके से दिखाया गया था। वह काफी वायरल हुआ। मुझे लगा कि लोगों ने उस दर्द को अपने तरीके से पकड़ लिया है। क्योंकि यह सिर्फ बिरजू की कहानी नहीं रह गई थी। लोगों ने उसमें अपना दर्द देख लिया। सवाल: बीना और बिरजू के सीन की लाइन ‘लव ही तो है, लाइफटाइम थोड़ी रहता है’ मीम और पोएट्री का हिस्सा बन गई। क्या सेट पर आपको अंदाजा था कि यह लाइन इतनी बड़ी हो जाएगी? जवाब/ रसिका दुग्गल: नहीं, बिल्कुल नहीं। उस समय हम सिर्फ यही सोच रहे थे कि हमारी परफॉर्मेंस अच्छी हो जाए और सीन ठीक से शूट हो जाए। शूटिंग के दौरान ही सेट पर लोग इस लाइन को अलग-अलग तरीके से इस्तेमाल करके मजाक करने लगे थे। कोई कहता था- ‘लव ही तो है, लाइफटाइम थोड़ी रहता है।’ फिर लोग छोटी-छोटी चीजों पर भी कहते थे कि सीन खराब हो गया तो सीन ही तो है, लाइफटाइम थोड़ी रहता है। उस वक्त वह सेट

‘बिरजू को क्यों मारा?’ पर बोले रसिका-मोहित:‘कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा’ जैसी ‘मिर्जापुर मूवी की बड़ी मिस्ट्री

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मिर्जापुर’ की दुनिया किरदारों, हिंसा और दमदार डायलॉग्स के साथ मीम्स के लिए भी मशहूर है। वेब सीरीज के पुराने मीम्स हों या फिल्म के नए किरदार बिरजू लोहार और उनके दर्दभरे सीन, सोशल मीडिया पर ‘मिर्जापुर’ का जलवा है। फिल्म में बीना त्रिपाठी का किरदार निभाने वाली रसिका दुग्गल और बिरजू लोहार बने मोहित मलिक ने दैनिक भास्कर से खास बातचीत में वायरल मीम्स, अपने किरदारों पर बने मजेदार मीम्स और सोशल मीडिया के रिएक्शन पर बात की। रसिका ने अपने सबसे पुराने और पसंदीदा ‘मिर्जापुर’ मीम का किस्सा सुनाया, वहीं मोहित ने बिरजू के दर्द पर बने मीम्स को ‘रिलेटेबल’ बताया। सवाल: ‘मिर्जापुर’ और मीम्स का रिश्ता पुराना है। पहली बार अपने किरदारों पर मीम्स बनते देखे तो कैसा लगा? जवाब/रसिका दुग्गल: मेरे लिए यह बहुत खास अनुभव रहा है। जो मीम सबसे ज्यादा पॉपुलर हुआ, वह 2018 का है और ‘मिर्जापुर’ में मेरा पहला शॉट था। उस दिन हम वह सीन शूट कर रहे थे। मैं बिस्तर से उठती हूं और लाइन बोलती हूं- ‘हर बार गर्म करके छोड़ देते हैं ठंडा।’ जब मैंने वह शॉट मॉनिटर पर देखा तो मेरे एक तरफ के बाल सचमुच खड़े हो गए थे। मैंने गुरु से कहा कि मुझे पता है कि सीन थोड़ा अस्त-व्यस्त दिखना चाहिए, लेकिन यह ज्यादा अजीब लग रहा है। ऐसा लग रहा है जैसे सिर पर कुछ उग आया हो। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ दो-तीन सेकेंड का शॉट है, ज्यादा देर नहीं रहेगा। मैंने कहा ठीक है। बाद में वही शॉट मीम बन गया। उस समय मैंने बिल्कुल नहीं सोचा था कि ऐसा होगा। उस दौर में ‘मिर्जापुर’ के साथ मीम कल्चर भी तेजी से बढ़ रहा था। मुझे लगता है कि किसी अभिनेता का काम पॉपुलर कल्चर का हिस्सा बन जाए तो यह बहुत अच्छी बात है। सवाल: अगर बीना, बिरजू से वही लाइन कहतीं- ‘हर बार गर्म करके छोड़ देते हैं ठंडा’, तो बिरजू का रिएक्शन क्या होता? जवाब/मोहित मलिक: ऐसा हो ही नहीं सकता। रसिका दुग्गल: क्योंकि यह हमारा रिश्ता नहीं है। वह लाइन अखंडा और बीना के रिश्ते की है। बिरजू और बीना के रिश्ते में ऐसा बिल्कुल नहीं हो सकता। मोहित मलिक: यहां प्यार अलग तरह का है। यह भक्ति जैसा प्यार है। बिरजू और बिना के बीच जो रिश्ता है, उसमें वह लाइन फिट ही नहीं होती। सवाल: ‘हमने मजबूरी में किया था, अब मजा आने लगा है’ मीम भी वायरल हुआ। इसके बारे में क्या कहना चाहेंगी? जवाब/रसिका दुग्गल: यह मेरा फेवरेट है। मुझे यह मीम बहुत पसंद है। सवाल: अगर इसी लाइन को बिना त्रिपाठी के अंदाज में बोलना हो तो कैसे बोलेंगी? जवाब/रसिका दुग्गल: बीना के अंदाज में मैं कहूंगी- ‘हमने मजबूरी में किया था, अब मजा आने लगा है।’ सवाल: कालीन भैया पूरी जिंदगी ‘कंट्रोल’ की बात करते हैं। क्या बीना ने कभी कालीन भैया को कंट्रोल किया है? जवाब/ रसिका दुग्गल: बहुत ज्यादा। कालीन भैया पूरी तरह बिना के कंट्रोल में हैं। कौन नहीं है? अगर आज की Gen-Z भाषा में कहें तो बिना के सामने कालीन भैया ‘पुकी’ बन जाते हैं। ‘पुकी’ का मतलब है कि जो व्यक्ति बाहर से बहुत पावरफुल और दबंग है, लेकिन किसी खास इंसान के सामने बिल्कुल नरम और थोड़ा सहमा हुआ हो जाए। पूरी दुनिया कालीन भैया से डरती है, लेकिन कालीन भैया बिना से डरते हैं। मोहित मलिक: यही कालीन भैया के किरदार की खूबसूरती है। जिस तरह से उन्होंने इस किरदार को निभाया है, उसमें यह चीज अच्छी तरह दिखाई देती है। रसिका दुग्गल: बाहर वह कालीन भैया हैं, लेकिन घर के अंदर बीना के पति हैं। वहां पूरा समीकरण बदल जाता है। सवाल: ‘मिर्जापुर’ में सबसे ज्यादा ‘जलवा’ किसका है? जवाब/ मोहित मलिक: मुन्ना का। यह उसी की लाइन है और मुझे लगता है कि ‘जलवा’ अब उसका ट्रेडमार्क बनना चाहिए। रसिका दुग्गल: लेकिन मैं कहूंगी कि त्रिपाठियों का है। बीना का भी है और अखंडा का भी। सवाल: बिरजू लोहार के किरदार पर सोशल मीडिया पर खूब मीम्स बन रहे हैं। क्या आपको अंदाजा था कि यह किरदार इस तरह वायरल होगा? जवाब/ मोहित मलिक: नहीं, बिल्कुल नहीं। कोशिश पूरी की थी। मुझे पता था कि इतने बड़े किरदारों और एक्टर्स के बीच मेरा स्क्रीन टाइम काफी कम है। इसलिए जरूरी था कि जब भी मैं स्क्रीन पर आऊं, तो बिरजू की पांच साल की जर्नी दिखाई दे। मुझे लगता है कि दर्शक भावनाओं से जल्दी जुड़ते हैं। मैंने पूरी मेहनत की, अपनी जान लगा दी। लेकिन आखिर में यह उस मोमेंट का खेल होता है कि उस समय जो चीजें सही बैठती हैं, वह मोमेंट बन जाता है। फिल्म में भी ऐसा ही हुआ। जैसे कोई माला पिरोता है, वैसे सारे मोमेंट्स एक-दूसरे से जुड़ते गए और खूबसूरत माला बन गई। शायद इसलिए लोगों को बिरजू का किरदार इतना पसंद आया। सवाल: बिरजू के दर्द और आखिरी सीन पर बने मीम्स देखकर कैसा लगा? जवाब/ मोहित मलिक: मुझे लगता है कि ये मीम्स लोगों को इसलिए इतने रिलेटेबल लगे क्योंकि हर किसी का दिल कभी न कभी टूटा है। हर कोई किसी न किसी तरह का दिलजला है। मैंने एक मीम देखा था, जिसमें बिरजू के साथ जो हुआ, उसे मजेदार तरीके से दिखाया गया था। वह काफी वायरल हुआ। मुझे लगा कि लोगों ने उस दर्द को अपने तरीके से पकड़ लिया है। क्योंकि यह सिर्फ बिरजू की कहानी नहीं रह गई थी। लोगों ने उसमें अपना दर्द देख लिया। सवाल: बीना और बिरजू के सीन की लाइन ‘लव ही तो है, लाइफटाइम थोड़ी रहता है’ मीम और पोएट्री का हिस्सा बन गई। क्या सेट पर आपको अंदाजा था कि यह लाइन इतनी बड़ी हो जाएगी? जवाब/ रसिका दुग्गल: नहीं, बिल्कुल नहीं। उस समय हम सिर्फ यही सोच रहे थे कि हमारी परफॉर्मेंस अच्छी हो जाए और सीन ठीक से शूट हो जाए। शूटिंग के दौरान ही सेट पर लोग इस लाइन को अलग-अलग तरीके से इस्तेमाल करके मजाक करने लगे थे। कोई कहता था- ‘लव ही तो है, लाइफटाइम थोड़ी रहता है।’ फिर लोग छोटी-छोटी चीजों पर भी कहते थे कि सीन खराब हो गया तो सीन ही तो है, लाइफटाइम थोड़ी रहता है। उस वक्त वह सेट

Composer Dhirendra Mulkalwar Interview | Hanuman Ansh Music Journey

Composer Dhirendra Mulkalwar Interview | Hanuman Ansh Music Journey

10 मिनट पहलेलेखक: वीरेंद्र मिश्र कॉपी लिंक फिल्म ‘हनुमान अंश’ बाबा नीम करोली के जीवन पर आधारित है। फिल्म के बैकग्राउंड स्कोर और ‘सियावर रामचंद्र की जय’ गाने को धीरेंद्र मुलकलवार ने कंपोज किया है। खास बात यह है कि यह गाना पहले कहानी का हिस्सा था ही नहीं। एक सीन के बैकग्राउंड म्यूजिक से इसकी शुरुआत हुई और बाद में यही गाना फिल्म की पहचान बन गया। धीरेंद्र बताते हैं कि फिल्म से जुड़ने से पहले ही वे कैंची धाम जाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन सफल नहीं हो पा रहे थे। कैंची धाम पहुंचने के कुछ ही महीनों बाद उन्हें फिल्म का ऑफर मिला। धीरेंद्र ने दैनिक भास्कर से बातचीत में फिल्म के दौरान हुए चमत्कार, गाने की मेकिंग और 20 साल के संघर्ष पर बात की। सवाल: फिल्म ‘हनुमान अंश’ से आपका जुड़ना भी किसी चमत्कार से कम नहीं रहा। कैसे? जवाब: मैं पिछले चार-पांच साल से कैंची धाम जाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन किसी न किसी वजह से जा नहीं पा रहा था। पिछले साल अप्रैल में आखिरकार कैंची धाम पहुंचा और बाबा जी के दर्शन हुए। इसके करीब दो महीने बाद जुलाई में विशाल चतुर्वेदी जी का फोन आया। वे बाबा नीम करोली पर फिल्म बना रहे थे और 43 दिनों का हनुमान चालीसा पाठ कर रहे थे। उसी दौरान उन्होंने मुझसे फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर करने के लिए पूछा। मैंने बिना सोचे हां कर दी। मुझे लगा कि यह बाबा जी की कृपा से हुआ है। सवाल: फिल्म का साउंड तय करने वाली शुरुआती धुन कैसे बनी? जवाब: विशाल जी ने मुझे फिल्म की कहानी सुनाई और शूट पर जाने से पहले एक थीम बनाने को कहा। मैं करीब दो महीने तक अलग-अलग आइडिया बनाता और खुद ही रिजेक्ट करता रहा। मुझे लग रहा था कि बाबा जी पर बनी फिल्म के लिए जो बनाऊं, वह मेरे स्तर का सबसे अच्छा काम होना चाहिए। एक दिन मुझे एक किस्सा याद आया। विशाल जी ने बताया था कि एक कंपोजर ने बाबा जी की तस्वीर के सामने बैठकर कुछ पंक्तियों को पांच मिनट में कंपोज कर दिया था। वही बात मेरे दिमाग में आई। मैंने बाबा जी का स्मरण किया और अचानक एक धुन दिमाग में आई। सिस्टम ऑन किया और करीब पांच से सात मिनट में पूरी धुन तैयार हो गई। सवाल: वही धुन आगे फिल्म की पहचान बन गई? जवाब: हां। मैंने धुन का अरेंजमेंट करके विशाल जी को भेज दिया। दो-तीन दिन बाद उनके ऑफिस गया तो देखा कि उन्होंने उसे एडिट पर लगा दिया था और ऑफिस में लोग उसे बार-बार सुन रहे थे। फिल्म की शुरुआत में बांसुरी और सितार पर यही धुन आती है। यही फिल्म का साउंड तय करने वाली मुख्य थीम बन गई। सवाल: ‘सियावर रामचंद्र की जय’ गाना कैसे बना? जवाब: फिल्म में एक सीन है, जिसमें एक क्रांतिकारी, जो नास्तिक है, बाबा जी के पास लौटता है। बाबा जी उसे कंबल ओढ़ाते हैं, हाथ में काठी देते हैं और भस्म लगाकर कहते हैं- ‘जाओ, देश का काम करो।’ इस सीन में देशभक्ति और आध्यात्मिकता दोनों का भाव चाहिए था। मैंने एक म्यूजिक बनाया, लेकिन विशाल जी को लगा कि कुछ कमी है। फिर मैंने विजुअल्स बंद कर दिए और सिर्फ सीन का भाव दिमाग में रखा। अचानक एक रिदम आई और मेरे मुंह से अपने आप निकला- ‘सीताराम, सीताराम।’ वहीं से ‘जय जय श्री राम, सीताराम’ की धुन बनी। इसके बाद मंदिरों में होने वाला जयघोष याद आया- ‘सियावर रामचंद्र की जय, पवनसुत हनुमान की जय, उमापति महादेव की जय।’ मैंने इसे धुन में जोड़ दिया। गाना पहले फिल्म में था ही नहीं। बैकग्राउंड म्यूजिक से इसकी शुरुआत हुई। सवाल: फिर बैकग्राउंड म्यूजिक से पूरा गाना कैसे बना? जवाब: जब यह म्यूजिक एडिट पर लगा तो सबको लगा कि यह ट्रेलर के अंत में भी अच्छा बैठेगा। ट्रेलर में इस्तेमाल करने के बाद लगा कि सिर्फ ‘सीताराम’ और ‘सियावर रामचंद्र की जय’ तक सीमित नहीं रहना चाहिए। फिर इसे पूरा गाना बनाने का फैसला हुआ। मेरे दोस्त शांतनु सुदामे ने इसे लिखा और गाया, जबकि कंपोज मैंने किया। बजट बहुत कम था, इसलिए स्टूडियो का खर्च उठाना मुश्किल था। मैंने अपना घर ही स्टूडियो में बदल दिया था। शांतनु पुणे से आए और करीब एक महीने मेरे घर पर रहकर रिकॉर्डिंग की। सवाल: कम बजट में भी म्यूजिक की क्वालिटी से समझौता नहीं किया? जवाब: बिल्कुल नहीं। फिल्म सिनेमाघरों में दिखाई जानी थी, इसलिए सिनेमैटिक अनुभव जरूरी था। शांतनु ने इंस्ट्रूमेंट्स बजाए। सिताराम और दिलरुबा की रिकॉर्डिंग हुई। स्वर शर्मा के अलाप लिए गए। इंटरवल के एक बड़े सीन के लिए भारी परकशन चाहिए था। इसके लिए परकशनिस्ट जैनत पटनायक को फोन किया। मैंने उन्हें फिल्म और बाबा जी के बारे में बताया तो उन्होंने कहा कि बाबा जी के लिए वे जरूर आएंगे। उन्होंने दो दिन दिए और हमने लगातार रिकॉर्डिंग की। सवाल: फिल्म की कमाई बढ़ने के बाद क्या आपको ज्यादा पैसे मिले? जवाब: मेरे और विशाल जी के बीच दोस्ती है, इसलिए पैसों को लेकर ज्यादा बातचीत नहीं हुई। मैंने उनसे कहा था कि जितनी न्यूनतम तकनीकी लागत आए, वह कर दीजिए। उससे ज्यादा मैं कुछ नहीं मांगूंगा। मेरे लिए यह बाबा जी की फिल्म थी। मुझे जो सबसे बड़ा प्रसाद मिलना था, वह मुझे पहले ही मिल चुका था। बाकी बाबा जी जो देंगे, वही मिलेगा। सवाल: कैंची धाम में आपका अनुभव कैसा रहा? जवाब: हम आरती के समय पहुंचे और पांच मिनट के अंदर दर्शन हो गए। जहां बाबा जी की मूर्ति है, वहां आमतौर पर लोगों को जाने का मौका नहीं मिलता, लेकिन हमें वहां जाने और बैठकर ध्यान करने का भी अवसर मिला। वह अनुभव इतना अद्भुत था कि वहां से आने के बाद भी मैं उसी भाव में रहा। दो महीने बाद जब फिल्म का ऑफर आया तो मुझे लगा कि शायद बाबा जी ने ही यह रास्ता बनाया था। सवाल: आपके 20 साल के करियर में फिल्मी संगीत तक पहुंचने का सफर कैसा रहा? जवाब: बचपन से सपना था कि फिल्मों में म्यूजिक करूं। मेरे बड़े भाई ने मुझे अच्छा संगीत सुनाया और वहीं से संगीत के प्रति लगाव बढ़ा। घर में

पंजाबी सिंगर सिंग्गा बोले-मेरा दिल अब पत्थर, VIDEO:रोते हुए कहा- यार मार करदे देखे, गेमा पांदे; इंडस्ट्री वालों ने पैसे देकर ट्रोल करवाया

पंजाबी सिंगर सिंग्गा बोले-मेरा दिल अब पत्थर, VIDEO:रोते हुए कहा- यार मार करदे देखे, गेमा पांदे; इंडस्ट्री वालों ने पैसे देकर ट्रोल करवाया

पंजाबी सिंगर सिंग्गा ने इंस्टाग्राम पर 49 सेकंड का वीडियो शेयर किया है, जिसमें वो रोते और भड़कते नजर आ रहे हैं। सिंग्गा ने खुलासा किया कि सफलता से जलने वाले इंडस्ट्री के ही लोगों ने उन्हें नीचे गिराने के लिए पैसे देकर ट्रोल करवाया। वीडियो में आगे सिंग्गा ने अपने ही दोस्तों पर धोखा देने का आरोप लगाया और कहा कि उनके खिलाफ साजिशें रची गईं। वीडियो के साथ उन्होंने कैप्शन में लिखा- जर्नी इज हार्ड। सिंग्गा कहते हैं कि लोगों को पुराना सिंग्गा चाहिए, लेकिन उन्होंने जिंदगी में इतना कुछ देख लिया है कि अब वह पुराना सिंग्गा नहीं रहा। आगे वो कहते हैं- यार आपा यार मार करदे देखे, गेमा पांदे देखे। लोग सोचदे किते सिंग्गा अगे न लंग जावे। पुराना सिंग्गा डड्डू मिले, पर्चे भी देख ले, खर्चे भी देख ले। पुराना सिंग्गा किथे रेहा, पत्थर हो गया। पहले जानिए वीडियो में सिंग्गा क्या कह रहे… ‘यार-मार करदे और मेरे खिलाफ गेमा पांदे’ वीडियो में सिंग्गा हुडी और कैप पहने सड़क पर चलते दिखाई दे रहे हैं और साथ में इंस्टा लाइव पर होते हैं। इस पर एक फैन उन्हें पुराने अंदाज में लौटने को कहता है। इस पर वो कहते हैं कि अब पुराना सिंग्गा नहीं रहा। दुनिया के धोखे खाने के बाद उनका दिल पत्थर हो चुका है। ‘पर्चे भी देख लिए और भारी खर्चे भी’ सिंग्गा ने अपने पुराने मुश्किल दौर का जिक्र करते हुए पुलिस केस और खर्चों की भी बात की। उन्होंने कहा कि वे पर्चे भी देख चुके हैं और भारी खर्चे भी झेल चुके हैं। इसके बाद उन्होंने फिर कहा कि अब पुराना सिंग्गा कहां से आएगा, उनका दिल पत्थर हो चुका है। किसी सिंगर या प्रोड्यूसर का नाम नहीं लिया 49 सेकंड के इस वीडियो में सिंग्गा ने ट्रोलिंग और साजिश के आरोप तो लगाए, लेकिन किसी सिंगर, प्रोड्यूसर या दूसरे व्यक्ति का नाम नहीं लिया। इसलिए फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि वे किन लोगों की बात कर रहे हैं। उनके इस वीडियो के बाद फैंस के बीच भी इसे लेकर चर्चा शुरू हो गई है। वीडियो में रोते और गुस्से में दिखे सिंग्गा पूरे वीडियो में भावुक नजर आते हैं। उनके चेहरे पर नाराजगी दिखती है। फैंस की ओर से पुराने सिंग्गा की वापसी की मांग के जवाब में उन्होंने अपनी जिंदगी के मुश्किल दौर का जिक्र किया। वीडियो सामने आने के बाद उनके फैंस सोशल मीडिया पर उनके बयान को लेकर चर्चा कर रहे हैं। फैंस बोले-दुनिया मतलब दी कपूरथला में हुई थी FIR 10 अगस्त 2023 को कपूरथला पुलिस ने सिंग्गा और उनके साथियों के खिलाफ एक एफआईआर दर्ज की थी। यह मामला उनके गाने ‘स्टिल अलाइव’ में कथित तौर पर अश्लीलता फैलाने और हथियारों का महिमामंडन करने की शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया था।

अमेरिका के कैलिफोर्निया में भारतीय महिला की हत्या:शादी से इनकार करने पर 16 साल छोटे लड़के ने गोली मारी, सुसाइड किया

अमेरिका के कैलिफोर्निया में भारतीय महिला की हत्या:शादी से इनकार करने पर 16 साल छोटे लड़के ने गोली मारी, सुसाइड किया

अमेरिका के कैलिफोर्निया में भारतीय मूल की महिला शालिनी ठाकुर की हत्या कर दी गई। आरोपी ने कैलिफोर्निया के सैक्रामेंटो में मंगलवार को 38 साल की शालिनी का पीछा कर रेस्टोरेंट के बाहर गोली मार दी। आरोपी की पहचान 22 साल रोहित नाम के शख्स के तौर पर हुई। रोहित को जब पुलिस की टीम ने घेरा तो उसने अपने सिर में गोली मारकर सुसाइड कर लिया। शादी करने की जिद पर अड़ा था शालिनी की मां सुदेश कुमारी ने बताया कि रोहित एक साल से 38 वर्षीय शालिनी का पीछा कर रहा था और उसे परेशान कर रहा था। उन्होंने बताया कि रोहित उनकी बेटी से शादी करना चाहता था लेकिन उम्र के अंतर की वजह से उसने मना कर दिया। इससे रोहित भड़का हुआ था। सैक्रामेंटो काउंटी शेरिफ ऑफिस के अनुसार, शालिनी सैक्रामेंटो के आर्डन आर्केड इलाके में एक शॉपिंग प्लाजा में काम करती थी। काम पर जाने के दौरान ही रोहित ने उसका पीछा किया। उसने शालिनी को एक रेस्टोरेंट के बाहर रोक लिया। शालिनी जान बचाने भागी, लेकिन रोहित ने पीछा किया और कई गोलियां मार दी। लोगों ने पुलिस को संदिग्ध की गाड़ी का हुलिया बताया। गाड़ी की आखिरी लोकेशन जल्द ही पता चल गई। कुछ ही मिनटों बाद गाड़ी ईस्टबाउंड हाईवे 50 पर मिली। जब अधिकारियों ने गाड़ी को रोकने की कोशिश की तो रोहित ने अचानक ब्रेक लगाए और हाईवे पर गाड़ी रोक दी। पुलिस कार तक पहुंची तो देखा कि रोहित ड्राइवर सीट पर खून से लथपथ हालत में पड़ा हुआ थी। उसने खुद को गोली मार ली थी।

California Indian Woman Murder | Sacramento Shooting Suicide Case

California Indian Woman Murder | Sacramento Shooting Suicide Case

कैलिफोर्निया48 मिनट पहले कॉपी लिंक शालिनी सैक्रामेंटो के आर्डन आर्केड इलाके में एक शॉपिंग प्लाजा में काम करती थी। अमेरिका के कैलिफोर्निया में भारतीय मूल की महिला शालिनी ठाकुर की हत्या कर दी गई। आरोपी ने कैलिफोर्निया के सैक्रामेंटो में मंगलवार को 38 साल की शालिनी का पीछा कर रेस्टोरेंट के बाहर गोली मार दी। आरोपी की पहचान 22 साल रोहित नाम के शख्स के तौर पर हुई। रोहित को जब पुलिस की टीम ने घेरा तो उसने अपने सिर में गोली मारकर सुसाइड कर लिया। शालिनी की मां सुदेश कुमारी ने बताया कि रोहित एक साल से 38 वर्षीय शालिनी का पीछा कर रहा था और उसे परेशान कर रहा था। उन्होंने बताया कि रोहित उनकी बेटी से शादी करना चाहता था लेकिन उम्र के अंतर की वजह से उसने मना कर दिया। इससे रोहित भड़का हुआ था। शालिनी की हत्या का आरोपी रोहित। भागकर जान बचाने की कोशिश की, लेकिन नाकाम रही सैक्रामेंटो काउंटी शेरिफ ऑफिस के अनुसार, शालिनी सैक्रामेंटो के आर्डन आर्केड इलाके में एक शॉपिंग प्लाजा में काम करती थी। काम पर जाने के दौरान ही रोहित ने उसका पीछा किया। उसने शालिनी को एक रेस्टोरेंट के बाहर रोक लिया। शालिनी जान बचाने भागी, लेकिन रोहित ने पीछा किया और कई गोलियां मार दी। लोगों ने पुलिस को संदिग्ध की गाड़ी का हुलिया बताया। गाड़ी की आखिरी लोकेशन जल्द ही पता चल गई। कुछ ही मिनटों बाद गाड़ी ईस्टबाउंड हाईवे 50 पर मिली। जब अधिकारियों ने गाड़ी को रोकने की कोशिश की तो रोहित ने अचानक गाड़ी रोक दी। पुलिस कार तक पहुंची तो देखा कि रोहित ड्राइवर सीट पर खून से लथपथ हालत में पड़ा हुआ थी। उसने खुद को गोली मार ली थी। शालिनी ने मई में रोहित के खिलाफ मामला दर्ज कराया था। जनवरी से कर रहा था पीछा स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक, रोहित जनवरी 2026 से शालिनी का पीछा कर रहा था। कई बार वह मदद करने के बहाने शालिनी की कार के टायरों की हवा निकाल देता था। वह काम पर जाते समय उसका पीछा करता था। एक बार उसने शालिनी के अपार्टमेंट की चाबी की कॉपी हासिल कर ली थी। इसके बाद वह हर कभी उसके घर में घुस जाता था। शालिनी ने मई में रोहित के खिलाफ मामला दर्ज कराया था। कोर्ट ने रोहित को चेतावानी भी दी थी। इसके बावजूद, उसने शालिनी का पीछा नहीं छोड़ा था। 2023 में एरिजोना के रास्ते अमेरिका अवैध तरीके से दाखिल हुआ था रोहित अवैध तरीके से अमेरिका में रह रहा था अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग के प्रवक्ता के अनुसार, रोहित बिना वैध दस्तावेजों के अमेरिका में रह रहा था। प्रवक्ता ने बताया कि 2023 में एरिजोना के रास्ते अमेरिका में दाखिल होने के बाद उसे अमेरिकी सीमा गश्ती दल ने गिरफ्तार किया था। इसके बाद बाइडन प्रशासन के दौरान उसे रिहा कर दिया गया था। हालांकि, उसके इमिग्रेशन से जुड़ी सटीक जानकारी साफ नहीं हो पाई है। —————- ये खबर भी पढ़ें… अमेरिका में भारतीय मूल के कारोबारी की हत्या:19 साल की बेटी के सामने लुटेरे ने पिता को गोली मारी अमेरिका में भारतीय मूल के कारोबारी सुरेश पटेल की गोली मारकर हत्या कर दी गई। घटना 20 अगस्त को टेनेसी राज्य के जैक्सनविले शहर में हुई। फायरिंग के समय सुरेश पटेल की 19 साल की बेटी भी दुकान में मौजूद थी। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

BRICS Summit Finale | PM Modi To Meet 4 Global Leaders In India

BRICS Summit Finale | PM Modi To Meet 4 Global Leaders In India

नई दिल्ली6 मिनट पहले कॉपी लिंक ब्रिक्स समिट के दौरान शनिवार को PM मोदी, पुतिन और जिनपिंग का हाथ थामे नजर आए। BRICS समिट का आज आखिरी दिन है। आज ओपन मीटिंग होगी, जिसमें सदस्य देशों के नेता और दूसरे आमंत्रित देशों के प्रमुख शामिल होंगे। बैठक में BRICS से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा होगी। इसके बाद PM मोदी 4 देशों के नेताओं के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें करेंगे। समिट के पहले दिन भारत ने साफ कर दिया कि फिलहाल BRICS देशों की अपनी कोई साझा करेंसी बनाने का प्रस्ताव नहीं है। हालांकि, विदेश मंत्रालय ने कहा कि BRICS में स्थानीय करेंसी में आपसी व्यापार और भुगतान को बढ़ावा देने पर चर्चा जरूर चल रही है। इसका मकसद देशों के बीच व्यापार को आसान बनाना और लेन-देन की लागत कम करना है। BRICS देशों ने नई दिल्ली डेक्लरेशन को मंजूरी दी BRICS देशों ने शनिवार को समिट के दौरान नई दिल्ली डेक्लरेशन को मंजूरी दी। इसमें कई मुद्दों पर साझा बयान जारी किया गया। डेक्लरेशन में रूस और चीन समेत BRICS देशों ने पहलगाम आतंकी हमले की निंदा की। देशों ने कहा कि आतंकियों को पनाह देने वालों के खिलाफ मिलकर कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही, आतंकियों तक पहुंचने वाली फंडिंग रोकने और उन्हें सुरक्षित ठिकाने देने वालों पर कार्रवाई करने पर भी सहमति बनी। BRICS देशों के बीच संयुक्त बयान जारी करने पर सहमति ऐसे समय में बनी है, जब पश्चिम एशिया में तनाव है और ईरान, सऊदी अरब और UAE के कई मुद्दों पर अलग-अलग रुख हैं। ब्रिक्स समिट में PM मोदी के बयान की 5 अहम बातें अगले 20 साल का नया एजेंडा बनाएं: BRICS के अगले 20 साल के लिए नया एजेंडा और फैसलों पर अमल की स्थायी व्यवस्था बनाने का प्रस्ताव। ग्लोबल साउथ नियम बनाने में हिस्सा ले: AI, साइबरस्पेस, अंतरिक्ष और बायोटेक्नोलॉजी के नियम तय करने में विकासशील देशों की बराबर भागीदारी पर जोर। युवाओं को तैयार करें: युवा राजनयिकों और नीति-निर्माताओं को बातचीत और कानून की ट्रेनिंग देने का सुझाव। नाविकों के लिए इमरजेंसी नेटवर्क बने: मुसीबत में फंसे नाविकों को इलाज, परिवार से संपर्क और सुरक्षित निकालने के लिए देशों के बीच नेटवर्क बनाने की बात। भविष्य सबका, फैसला भी सबका: मोदी ने कहा- दुनिया का भविष्य साझा है तो उसे तय करने का अधिकार भी सभी देशों के पास होना चाहिए। PM मोदी ने शनिवार को BRICS समिट 2026 के औपचारिक शुरुआत की घोषणा की। तनाव के बीच ईरान-UAE राष्ट्रपतियों ने बातचीत की ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने BRICS समिट से इतर UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद से मुलाकात की। दोनों नेताओं की यह मुलाकात ऐसे समय हुई है, जब पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा हुआ है और कई क्षेत्रीय मुद्दों पर दोनों देशों के रुख अलग हैं। हालांकि, ईरान और UAE पिछले कुछ सालों से रिश्ते सुधारने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में यह मुलाकात तनाव के बीच दोनों देशों के बातचीत का रास्ता खुला रखने का संकेत है। पश्चिमी देशों के लिए BRICS की बढ़ती चुनौती BRICS देश अब आपस में कारोबार करते समय डॉलर का इस्तेमाल कम करने की कोशिश कर रहे हैं। इसके लिए वे एक-दूसरे की अपनी-अपनी करेंसी में लेन-देन बढ़ाना चाहते हैं। साथ ही, अलग-अलग देशों के ऑनलाइन पेमेंट सिस्टम को आपस में जोड़ने पर भी काम हो रहा है। हालांकि, अभी BRICS का अपना कोई एक पेमेंट सिस्टम या एक साझा करेंसी नहीं है। इस साल भारत की अध्यक्षता में होने वाले BRICS समिट में भी अपनी करेंसी में कारोबार और आसान ऑनलाइन पेमेंट पर जोर दिया जाएगा। भारत चाहता है कि BRICS देशों के डिजिटल पेमेंट सिस्टम और उनकी डिजिटल करेंसी को आपस में जोड़ा जाए। इससे एक देश से दूसरे देश में पैसे भेजना आसान हो सकता है और हर बार डॉलर की जरूरत कम हो सकती है। एक बैंक की रिपोर्ट से निकला BRICS का नाम BRICS की शुरुआत किसी सरकार ने नहीं, बल्कि एक बैंक की रिपोर्ट से हुई थी। 2001 में अमेरिकी निवेश बैंक गोल्डमैन सैक्स के अर्थशास्त्री जिम ओ’नील ने अपनी रिपोर्ट में BRIC शब्द इस्तेमाल किया। उन्होंने ब्राजील, रूस, भारत और चीन को तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाएं बताया। तब BRIC कोई संगठन नहीं था। 2006 में चारों देश साथ आए और BRIC समूह बना। 2009 में रूस के येकातेरिनबर्ग में इसकी पहली आधिकारिक बैठक हुई। 2010 में दक्षिण अफ्रीका के जुड़ने के बाद इसका नाम BRICS हो गया। पिछले साल ईरान, मिस्र और इथियोपिया भी पूर्ण सदस्य बने। आज BRICS दुनिया के बड़े आर्थिक मंचों में शामिल है। इसके सदस्य देशों की ग्लोबल GDP में हिस्सेदारी 27% से ज्यादा है, जबकि यूरोपियन यूनियन की करीब 14% है। ———————- BRICS से जुड़ी यह खबरें भी पढ़ें… 1. BRICS के साझा बयान में पहलगाम हमले की निंदा: टेरर फंडिंग रोकने पर जोर; कहा- आतंकियों को पनाह देने वालों पर मिलकर एक्शन लेंगे रूस और चीन समेत BRICS देशों ने पहलगाम आतंकी हमले की निंदा की है। देशों ने कहा कि आतंकियों को पनाह देने वालों के खिलाफ मिलकर कार्रवाई की जाएगी। पूरी खबर पढ़ें… 2. पुतिन का अमेरिका-यूरोप पर तंज:कमजोर देश खुद को G7 क्यों कहते हैं; मोदी बोले- ब्रिक्स देशों में दुनिया की 40% GDP प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समेत ब्रिक्स लीडर्स ने शुक्रवार को ब्रिक्स बिजनेस फोरम में ग्लोबल ट्रेड पर बात की। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Malaysia PM Anwar Ibrahim Sings Kishore Kumar Song at Brics Dinner

Malaysia PM Anwar Ibrahim Sings Kishore Kumar Song at Brics Dinner

Hindi News National Malaysia PM Anwar Ibrahim Sings Kishore Kumar Song At Brics Dinner | Video नई दिल्ली42 मिनट पहले कॉपी लिंक मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम BRICS समिट में हिस्सा लेने दिल्ली आए हैं। मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने शनिवार को नई दिल्ली में BRICS समिट के डिनर के दौरान किशोर कुमार का मशहूर गाना ‘ख्वाब हो तुम या कोई हकीकत…’ और मुकेश का गीत दोस्त दोस्त ना रहा… गाना गाकर सबका ध्यान खींचा। अनवर ने किशोर कुमार के जिस गाने को अपनी आवाज दी, वह 1965 की फिल्म ‘तीन देवियां’ का है। इसे किशोर कुमार ने गाया था। संगीत एसडी बर्मन ने दिया था। गीत के बोल मजरूह सुल्तानपुरी ने लिखे थे। मुकेश का गाया दोस्त दोस्त न रहा गाना ‘संगम’ मूवी का है। इसका संगीत शंकर-जयकिशन ने दिया था। गीत के बोल शैलेंद्र ने लिखे थे। अनवर ने इस वीडियो को अपने X सोशल मीडिया अकाउंट पर शेयर भी किया। वीडियो करीब डेढ़ मिनट का है। इसमें वे पियानो की धुन पर एक दो स्टेंजा गाते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो शेयर करते हुए उन्होंने लिखा- गुरु, थोड़ा सा गाने की इजाजत है? उनके गाने के 2 फोटो दोस्त-दोस्त न रहा… गाने के शब्द गुनगुनाते हुए पीएम अनवर इब्राहिम। ख्वाब हो या तुम कोई हकीकत… गाने के दौरान झूमते हुए भी नजर आए। अनवर किशोर कुमार के फैन हैं, पहले भी यह गाना गुनगुना चुके मलेशिया के पीएम पहले भी किशोर कुमार के फैन होने की बात कह चुके हैं। उन्होंने 2024 में भारत में एक इंटरव्यू के दौरान भी यही गीत गुनगुनाया था। इसके अलावा, फरवरी 2026 में पीएम मोदी की मलेशिया यात्रा के दौरान उन्होंने एक आधिकारिक वीडियो मोंटाज साझा किया था। इसमें ‘कभी खुशी कभी गम’ का लोकप्रिय गाना ‘बोले चूड़ियां’ इस्तेमाल किया गया था। पीएम मोदी इस साल 8 फरवरी को मलेशिया दौरे पर पहुंचे थे। तब अनवर इब्राहिम उनका स्वागत करने खुद एयरपोर्ट पहुंचे थे। मलेशिया में 27 लाख लोग भारतीय मूल के, बॉलीवुड और तमिल मूवी लोकप्रिय विदेश मंत्रालय के अनुसार मलेशिया में करीब 27.5 लाख भारतीय मूल के लोग हैं, जो देश की आबादी का लगभग 9% हैं। इनमें करीब 20 लाख लोग तमिल बोलते हैं। यहां बॉलीवुड और तमिल मूवी काफी देखी जाती हैं। शाहरुख खान की ‘दिलवाले’ ने मलेशिया में करीब 29 करोड़ रुपए की कमाई की थी। वहीं ‘जवान’ ने करीब 22 करोड़ और ‘पठान’ ने करीब 9 करोड़ रुपए का कारोबार किया था। तमिल फिल्मों का भी यहां बड़ा बाजार है। 2025 में रिलीज हुई रजनीकांत की ‘कुली’ ने मलेशिया में करीब ₹26-27 करोड़, जबकि अजित कुमार की ‘ गुड बैड अग्ली’ ने करीब ₹22 करोड़ का कारोबार किया था। 2026 की सूर्या स्टारर ‘ करुप्पु’ भी करीब ₹22 करोड़ के कलेक्शन के साथ मलेशिया की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली भारतीय फिल्मों में शामिल है। वहीं, विजय की ‘गोट’ ने करीब ₹32 करोड़ और शिवकार्तिकेयन की ‘अमरन’ ने करीब ₹26 करोड़ का कारोबार किया था। डिप्टी पीएम भी रह चुके हैं अनवर अनवर इब्राहिम मलेशिया के 10वें प्रधानमंत्री हैं। उन्होंने 24 नवंबर 2022 को पदभार ग्रहण किया था। इससे पहले वे 1993 में मलेशिया के 7वें डिप्टी पीएम बने थे। 1998 में, अनवर को तत्कालीन प्रधानमंत्री महाथिर मोहम्मद ने सभी सरकारी पदों से हटा दिया गया था। उन्हें अप्रैल 1999 में भ्रष्टाचार और समलैंगिकता के आरोपों में जेल भेज दिया गया था और 2004 में उनकी सजा पलटने के बाद रिहा कर दिया गया था। इसके बाद अनवर 2008 से 2015 तक विपक्ष के नेता रहे। 2022 के आम चुनावों में जीत के बाद प्रधानमंत्री बने। ————— ये खबरें भी पढ़ें… BRICS समिट- दिल्ली में मोदी की डिनर पार्टी:पनीर के साथ सूखी सब्जी, चुकंदर का रायता; मिठाई में फ्रूट क्रीम विद जलेबी पीएम मोदी ने शनिवार को भारत मंडपम में BRICS सदस्य देशों के नेताओं के लिए डिनर पार्टी को होस्ट किया। मेन्यू में पनीर के साथ सूखी सब्जी, चुकंदर का रायता और मिलेट्स का पुलाव रखा गया है। मिठाई में फ्रूट क्रीम विद जलेबी मिलेगी। पूरी खबर पढ़ें… मोदी–जिनपिंग बोले- मतभेद विवाद में न बदलें:आपसी संबंध लंबे चले; गलवान झड़प के बाद चीन से इम्पोर्ट दोगुना हुआ पीएम मोदी ने दिल्ली में BRICS समिट से अलग चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से द्विपक्षीय बैठक की। यह मीटिंग करीब 50 मिनट चली। मोदी और जिनपिंग ने इस बात पर भी सहमति जताई कि मतभेदों को विवाद नहीं बनने देना चाहिए और संबंध लंबे चलने चाहिए। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

यश की ‘टॉक्सिक’ 300 करोड़ के नुकसान में:तरण आदर्श बोले- कमजोर कंटेंट ने बिगाड़ा खेल, शानदार ओपनिंग के बाद भी क्यों डूबी फिल्म

यश की ‘टॉक्सिक’ 300 करोड़ के नुकसान में:तरण आदर्श बोले- कमजोर कंटेंट ने बिगाड़ा खेल, शानदार ओपनिंग के बाद भी क्यों डूबी फिल्म

यश की फिल्म ‘टॉक्सिक’ से बॉक्स ऑफिस पर बड़ी उम्मीदें थीं। शानदार ओपनिंग के बावजूद फिल्म की कमाई लगातार गिरती गई। ट्रेड एनालिस्ट तरण आदर्श ने इसकी सबसे बड़ी वजह कमजोर कंटेंट और कहानी की पकड़ को बताया है। फिल्म के कमजोर प्रदर्शन के बाद ‘हनुमान अंश’ और ‘मिर्जापुर: द मूवी’ जैसी फिल्मों को ज्यादा स्क्रीन मिलने से इसका थिएट्रिकल रन भी प्रभावित हुआ। पहले दिन यश ने दिलाई बड़ी ओपनिंग, फिर तेजी से गिरा कलेक्शन ‘टॉक्सिक’ ने रिलीज के पहले दिन शानदार शुरुआत की थी। आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक फिल्म ने दुनियाभर में करीब 140 करोड़ रुपए की ओपनिंग की थी, जबकि भारत में पहले दिन नेट कलेक्शन करीब 101 करोड़ रुपए रहा। लेकिन दूसरे ही दिन कमाई करीब 37 करोड़ रुपए पर आ गई। इसके बाद फिल्म की रफ्तार लगातार कमजोर होती चली गई। 15वें दिन तक फिल्म का वर्ल्डवाइड कलेक्शन करीब 339.32 करोड़ रुपए बताया गया। यानी फिल्म की सबसे बड़ी समस्या उसकी ओपनिंग नहीं, बल्कि इसके बाद दर्शकों को सिनेमाघरों तक बनाए रखना रहा। तरण आदर्श बोले- फिल्म का कंटेंट बहुत कमजोर था फिल्म के बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन पर जब ट्रेड एनालिस्ट तरण आदर्श से बात की गई तो उन्होंने इसकी असफलता की सबसे बड़ी वजह कंटेंट को बताया। तरण आदर्श के मुताबिक, फिल्म में सबसे जरूरी चीज यानी कहानी की पकड़ ही कमजोर थी। कहानी अलग-अलग जगहों पर जाती हुई महसूस होती है और दर्शक उससे लगातार जुड़ नहीं पाता। उनके मुताबिक फिल्म का अंत भी ऐसा था, जिसे दर्शकों ने पसंद नहीं किया होगा। तरण आदर्श ने साफ कहा कि व्यक्तिगत राय में उन्हें फिल्म का कंटेंट बहुत कमजोर लगा और यही इसकी बॉक्स ऑफिस असफलता का मुख्य कारण बना। रिलीज के समय की अपनी समीक्षा में भी उन्होंने फिल्म को दो स्टार देते हुए इसे निराशाजनक बताया था। उन्होंने यश के अभिनय, एक्शन और फिल्म के कुछ हिस्सों की तारीफ की थी, लेकिन दूसरे हाफ की कमजोर लेखन और कहानी को बड़ी समस्या माना था। यश की स्टार पावर ने पहले दिन बचाई फिल्म तरण आदर्श के मुताबिक, ‘टॉक्सिक’ को अच्छी ओपनिंग मिलने में सबसे बड़ा योगदान यश की स्टार पावर का था। ‘KGF: Chapter 2’ के बाद यश सिर्फ साउथ ही नहीं, बल्कि नॉर्थ इंडिया में भी बड़े स्टार बन चुके हैं। ऐसे में चार साल बाद बड़े पर्दे पर उनकी वापसी को लेकर दर्शकों में जबरदस्त उत्सुकता थी। यही वजह रही कि फिल्म की एडवांस बुकिंग शानदार रही और पहले दिन सिनेमाघरों में दर्शक पहुंचे। लेकिन तरण आदर्श के मुताबिक दूसरे दिन के बाद कलेक्शन में जिस तरह गिरावट आई, उससे साफ हो गया कि सिर्फ स्टार पावर फिल्म को लंबे समय तक नहीं चला सकी। 300 करोड़ के नुकसान की चर्चा, लेकिन पक्की रकम बताना मुश्किल ‘टॉक्सिक’ के करीब 300-350 करोड़ रुपए के नुकसान की चर्चा हो रही है। आजतक की रिपोर्ट में फिल्म का प्रोडक्शन बजट करीब 450 करोड़ रुपए और दूसरे खर्च जोड़ने पर कुल निवेश 500 करोड़ रुपए या उससे ज्यादा होने की बात कही गई है। हालांकि नुकसान का वास्तविक आंकड़ा तय करना आसान नहीं है। तरण आदर्श ने भी इस पर सावधानी बरतते हुए कहा कि असली नुकसान कितना हुआ, इसका जवाब सिर्फ प्रोड्यूसर ही दे सकते हैं। फिल्म का वास्तविक बजट कितना था, कितने में डिस्ट्रीब्यूशन राइट्स बिके और डिजिटल, सैटेलाइट व म्यूजिक राइट्स से कितनी कमाई हुई- इन सबको जोड़कर ही सही तस्वीर सामने आ सकती है। इसलिए 300 करोड़ रुपए के नुकसान को फिलहाल रिपोर्ट्स और अनुमान के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। ‘हनुमान अंश’ और ‘मिर्जापुर’ ने भी छीने स्क्रीन ‘टॉक्सिक’ के कमजोर प्रदर्शन के बीच बॉक्स ऑफिस पर दो फिल्मों ने मजबूत पकड़ बना ली- ‘हनुमान अंश’ और ‘मिर्जापुर: द मूवी’। तरण आदर्श के मुताबिक, ‘टॉक्सिक’ के पहले हफ्ते के बाद कई सिनेमाघरों में इसके स्क्रीन कम कर दिए गए और उनकी जगह बेहतर बिजनेस कर रही फिल्मों को दी गई। हालांकि उनका कहना है कि यह सिर्फ यश की फिल्म के साथ हुआ असामान्य मामला नहीं है। फिल्म इंडस्ट्री में आमतौर पर जब कोई फिल्म अच्छा प्रदर्शन नहीं करती और दूसरी फिल्म दर्शकों को खींच रही होती है, तो थिएटर संचालक ज्यादा स्क्रीन उसी फिल्म को दे देते हैं जो बेहतर बिजनेस कर रही होती है। हालिया बॉक्स ऑफिस ट्रेंड भी यही दिखाता है। ‘मिर्जापुर: द मूवी’ और ‘हनुमान अंश’ दोनों ने ‘टॉक्सिक’ के मुकाबले मजबूत पकड़ बनाई है। असली झटका: बड़ी ओपनिंग के बाद दर्शक नहीं लौटे ‘टॉक्सिक’ की पूरी कहानी देखें तो फिल्म की सबसे बड़ी विफलता कमजोर शुरुआत नहीं, बल्कि बड़ी शुरुआत के बाद टिक नहीं पाना रही। यश की लोकप्रियता ने फिल्म को पहले दिन बड़ी संख्या में दर्शक दिए। लेकिन कमजोर कहानी और दर्शकों की मिली-जुली प्रतिक्रिया के चलते दूसरे दिन से कमाई में तेज गिरावट आई। इसके बाद ‘हनुमान अंश’ और ‘मिर्जापुर: द मूवी’ जैसी फिल्मों ने दर्शकों का ध्यान अपनी तरफ खींच लिया। यही वजह है कि करोड़ों रुपए के बड़े बजट और सुपरस्टार यश की मौजूदगी के बावजूद ‘टॉक्सिक’ अपनी शुरुआती रफ्तार बरकरार नहीं रख सकी। आजतक के मुताबिक फिल्म का वर्ल्डवाइड कलेक्शन 15वें दिन तक करीब 339.32 करोड़ रुपए था, जबकि भारी बजट के मुकाबले यह आंकड़ा काफी कम माना जा रहा है।