UPL Warns of Fake Electron Seed Treatment; Farmers Alert in UP

मेरठ11 मिनट पहले कॉपी लिंक मई 2026 में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कृषि विभाग की छापेमारी के दौरान UPL के बीज उपचार उत्पाद ‘इलेक्ट्रॉन’ (Electron) की 2,500 लीटर नकली खेप जब्त की गई है। ‘इलेक्ट्रॉन’ की निर्माता कंपनी UPL ने नकली कृषि उत्पादों की बढ़ती मौजूदगी को लेकर एक नई चेतावनी जारी की है। कंपनी ने किसानों से बीज उपचार उत्पाद खरीदते समय सावधानी बरतने का आग्रह किया है। ‘इलेक्ट्रॉन’ UPL का बीज उपचार समाधान है जिसे फसल उगने के शुरुआती चरणों में बीजों और अंकुरों की सुरक्षा के लिए बनाया गया है। यह उत्पाद फफूंदनाशक और कीटनाशक सुरक्षा का मिश्रण है, जो बीजों को शुरुआती कीटों और बीमारियों से बचाता है और साथ ही फसल के स्वस्थ विकास में मदद करता है। UPL का कहना है कि असली बीज उपचार उत्पादों का उपयोग फसल के सही विकास और खेत की दीर्घकालिक उत्पादकता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। असली और नकली का फर्क समझ लें किसान छापेमारी के दौरान जब्त किए गए नकली सामान में उत्पाद से जुड़ी कई बुनियादी जानकारियां गायब थीं, जो असली कृषि उत्पादों पर होनी चाहिए। इनमें निर्माण और एक्सपायरी की जानकारी और बैच नंबर शामिल हैं। UPL ने कहा कि ऐसी जानकारी का न होना किसानों के लिए खरीदारी से पहले एक चेतावनी का संकेत होना चाहिए और जोर दिया कि बिना सही लेबलिंग वाले उत्पाद खरीदने से बचना चाहिए। कंपनी ने कहा कि यह घटना किसानों के बीच मिलते-जुलते दिखने वाले कृषि-रसायन उत्पादों के बारे में अधिक जागरूकता की आवश्यकता को उजागर करती है। UPL लगातार ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों में जागरूकता को बढ़ावा दे रही है जिनका उद्देश्य उत्पादकों को जिम्मेदार कृषि पद्धतियों और सोच-समझकर उत्पाद चुनने के बारे में शिक्षित करना है। कंपनी का मानना है कि ऐसी पहल देश भर में चलाए जा रहे व्यापक किसान जागरूकता अभियानों की पूरक हैं, जिनका उद्देश्य सोच-समझकर निर्णय लेने और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहित करना है। UPL ने कहा कि बाजार में आने वाले नकली या मिलते-जुलते उत्पादों से किसानों को बचाने के लिए जागरूकता सबसे मज़बूत तरीकों में से एक है। कंपनी ने किसानों को सलाह दी कि वे उत्पादों के लेबल को ध्यान से देखें, एक्सपायरी डेट और मैन्युफैक्चरिंग की जानकारी चेक करें, सामग्री के बारे में जानकारी देखें, रिटेलर से इनवॉइस की कॉपी लें, असली होने की पुष्टि के लिए पैक पर मौजूद QR कोड को स्कैन करें, पैक की सील जांचें और यह पक्का करने के बाद ही उत्पाद खरीदें कि पैकेजिंग पर सभी जरूरी जानकारी मौजूद है। कंपनी ने चेतावनी दी कि बहुत सस्ते मिलने वाले उत्पाद आकर्षक लग सकते हैं। लेकिन ऐसे उत्पाद उम्मीद के मुताबिक काम नहीं करते और समय के साथ फसल की सेहत पर बुरा असर डाल सकते हैं। किसानों से सतर्कता बरतने की अपील UPL के एक प्रवक्ता ने कहा, “नकली कृषि उत्पादों का बढ़ना किसान समुदाय के लिए गंभीर चिंता का विषय है। किसानों को सतर्क रहना चाहिए और यह पक्का करना चाहिए कि वे अपनी फसलों के लिए बीज उपचार से जुड़े सही और असली उत्पाद खरीदें। सस्ते विकल्प चुनने से मनचाहा नतीजा नहीं मिलता और ऐसे उत्पाद लंबे समय में उनकी पैदावार को नुकसान पहुंचा सकते हैं। कुछ भी खरीदने से पहले उसकी असलियत की जांच करना बहुत जरूरी है। मिलते-जुलते उत्पादों को बाजार में आने से रोकने और किसानों के मूल्यवान निवेश की सुरक्षा के लिए उनके बीच जागरूकता पैदा करना भी जरूरी है। हम किसानों से अपील करते हैं कि वे इस मामले में किसी भी मदद के लिए UPL के प्रतिनिधियों से संपर्क करें और अपने आसपास नजर आने वाले किसी भी संदिग्ध व्यापार के बारे में जानकारी दें।” कंपनी ने दोहराया कि नकली कृषि उत्पादों से किसानों की सुरक्षा करना उसकी प्राथमिकता है। UPL नकली उत्पादों की चुनौती से निपटने के लिए अधिकारियों के साथ मिलकर काम करते हुए जागरूकता अभियानों में सहयोग करना जारी रखेगी। UPL का मानना है कि जानकारी के साथ खरीदारी के फैसले और किसानों के स्तर पर ज्यादा सतर्कता नकली उत्पादों की सप्लाई को रोकने और फसल की उत्पादकता सुरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। UPL SAS के बारे में UPL सस्टेनेबल एग्रीकल्चर सॉल्यूशंस (UPL SAS) भारत का सबसे बड़ा इंटीग्रेटेड एग्री-टेक प्लेटफॉर्म है। यह किसानों को फसल सुरक्षा और पोषण, बीज उपचार, मिट्टी के पोषण, कृषि और डिजिटल सेवाओं में अपनी विशेषज्ञता का इस्तेमाल करके कृषि से जुड़ी लगभग सभी जरूरतों के लिए एक ही जगह समाधान देता है। UPL SAS किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए भारतीय कृषि में बदलाव लाने पर काम कर रहा है। UPL ग्रुप के खास प्लेटफॉर्म में से एक होने के नाते, UPL SAS हर खाद्य उत्पाद को ज्यादा पर्यावरण हितैषी बनाकर भारत में सस्टेनेबल एग्रीकल्चर यानी टिकाऊ कृषि की ओर बदलाव में तेजी ला रहा है। अधिक जानकारी के लिए लॉग इन करें: https://www.upl-ltd.com/ ————————————————————————————————————— दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
UPL Warns of Fake Electron Seed Treatment; Farmers Alert in UP

मेरठ28 मिनट पहले कॉपी लिंक मई 2026 में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कृषि विभाग की छापेमारी के दौरान UPL के बीज उपचार उत्पाद ‘इलेक्ट्रॉन’ (Electron) की 2,500 लीटर नकली खेप जब्त की गई है। ‘इलेक्ट्रॉन’ की निर्माता कंपनी UPL ने नकली कृषि उत्पादों की बढ़ती मौजूदगी को लेकर एक नई चेतावनी जारी की है। कंपनी ने किसानों से बीज उपचार उत्पाद खरीदते समय सावधानी बरतने का आग्रह किया है। ‘इलेक्ट्रॉन’ UPL का बीज उपचार समाधान है जिसे फसल उगने के शुरुआती चरणों में बीजों और अंकुरों की सुरक्षा के लिए बनाया गया है। यह उत्पाद फफूंदनाशक और कीटनाशक सुरक्षा का मिश्रण है, जो बीजों को शुरुआती कीटों और बीमारियों से बचाता है और साथ ही फसल के स्वस्थ विकास में मदद करता है। UPL का कहना है कि असली बीज उपचार उत्पादों का उपयोग फसल के सही विकास और खेत की दीर्घकालिक उत्पादकता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। असली और नकली का फर्क समझ लें किसान छापेमारी के दौरान जब्त किए गए नकली सामान में उत्पाद से जुड़ी कई बुनियादी जानकारियां गायब थीं, जो असली कृषि उत्पादों पर होनी चाहिए। इनमें निर्माण और एक्सपायरी की जानकारी और बैच नंबर शामिल हैं। UPL ने कहा कि ऐसी जानकारी का न होना किसानों के लिए खरीदारी से पहले एक चेतावनी का संकेत होना चाहिए और जोर दिया कि बिना सही लेबलिंग वाले उत्पाद खरीदने से बचना चाहिए। कंपनी ने कहा कि यह घटना किसानों के बीच मिलते-जुलते दिखने वाले कृषि-रसायन उत्पादों के बारे में अधिक जागरूकता की आवश्यकता को उजागर करती है। UPL लगातार ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों में जागरूकता को बढ़ावा दे रही है जिनका उद्देश्य उत्पादकों को जिम्मेदार कृषि पद्धतियों और सोच-समझकर उत्पाद चुनने के बारे में शिक्षित करना है। कंपनी का मानना है कि ऐसी पहल देश भर में चलाए जा रहे व्यापक किसान जागरूकता अभियानों की पूरक हैं, जिनका उद्देश्य सोच-समझकर निर्णय लेने और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहित करना है। UPL ने कहा कि बाजार में आने वाले नकली या मिलते-जुलते उत्पादों से किसानों को बचाने के लिए जागरूकता सबसे मज़बूत तरीकों में से एक है। कंपनी ने किसानों को सलाह दी कि वे उत्पादों के लेबल को ध्यान से देखें, एक्सपायरी डेट और मैन्युफैक्चरिंग की जानकारी चेक करें, सामग्री के बारे में जानकारी देखें, रिटेलर से इनवॉइस की कॉपी लें, असली होने की पुष्टि के लिए पैक पर मौजूद QR कोड को स्कैन करें, पैक की सील जांचें और यह पक्का करने के बाद ही उत्पाद खरीदें कि पैकेजिंग पर सभी जरूरी जानकारी मौजूद है। कंपनी ने चेतावनी दी कि बहुत सस्ते मिलने वाले उत्पाद आकर्षक लग सकते हैं। लेकिन ऐसे उत्पाद उम्मीद के मुताबिक काम नहीं करते और समय के साथ फसल की सेहत पर बुरा असर डाल सकते हैं। किसानों से सतर्कता बरतने की अपील UPL के एक प्रवक्ता ने कहा, “नकली कृषि उत्पादों का बढ़ना किसान समुदाय के लिए गंभीर चिंता का विषय है। किसानों को सतर्क रहना चाहिए और यह पक्का करना चाहिए कि वे अपनी फसलों के लिए बीज उपचार से जुड़े सही और असली उत्पाद खरीदें। सस्ते विकल्प चुनने से मनचाहा नतीजा नहीं मिलता और ऐसे उत्पाद लंबे समय में उनकी पैदावार को नुकसान पहुंचा सकते हैं। कुछ भी खरीदने से पहले उसकी असलियत की जांच करना बहुत जरूरी है। मिलते-जुलते उत्पादों को बाजार में आने से रोकने और किसानों के मूल्यवान निवेश की सुरक्षा के लिए उनके बीच जागरूकता पैदा करना भी जरूरी है। हम किसानों से अपील करते हैं कि वे इस मामले में किसी भी मदद के लिए UPL के प्रतिनिधियों से संपर्क करें और अपने आसपास नजर आने वाले किसी भी संदिग्ध व्यापार के बारे में जानकारी दें।” कंपनी ने दोहराया कि नकली कृषि उत्पादों से किसानों की सुरक्षा करना उसकी प्राथमिकता है। UPL नकली उत्पादों की चुनौती से निपटने के लिए अधिकारियों के साथ मिलकर काम करते हुए जागरूकता अभियानों में सहयोग करना जारी रखेगी। UPL का मानना है कि जानकारी के साथ खरीदारी के फैसले और किसानों के स्तर पर ज्यादा सतर्कता नकली उत्पादों की सप्लाई को रोकने और फसल की उत्पादकता सुरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। UPL SAS के बारे में UPL सस्टेनेबल एग्रीकल्चर सॉल्यूशंस (UPL SAS) भारत का सबसे बड़ा इंटीग्रेटेड एग्री-टेक प्लेटफॉर्म है। यह किसानों को फसल सुरक्षा और पोषण, बीज उपचार, मिट्टी के पोषण, कृषि और डिजिटल सेवाओं में अपनी विशेषज्ञता का इस्तेमाल करके कृषि से जुड़ी लगभग सभी जरूरतों के लिए एक ही जगह समाधान देता है। UPL SAS किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए भारतीय कृषि में बदलाव लाने पर काम कर रहा है। UPL ग्रुप के खास प्लेटफॉर्म में से एक होने के नाते, UPL SAS हर खाद्य उत्पाद को ज्यादा पर्यावरण हितैषी बनाकर भारत में सस्टेनेबल एग्रीकल्चर यानी टिकाऊ कृषि की ओर बदलाव में तेजी ला रहा है। अधिक जानकारी के लिए लॉग इन करें: https://www.upl-ltd.com/ ————————————————————————————————————— दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
Gold & Silver Prices Fall Today

नई दिल्ली6 मिनट पहले कॉपी लिंक सोने-चांदी के दाम में 19 जून को गिरावट है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, एक किलो चांदी 9,209 रुपए गिरकर 2.31 लाख रुपए पर आ गई। इससे पहले इसकी कीमत 2.40 रुपए प्रति किलो थी। वहीं 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 3,152 रुपए गिरकर 1.45 लाख रुपए पर आ गया है। एक दिन पहले इसकी कीमत 1.48 रुपए थी। इस महीने 19 दिन में सोना अब तक 11 हजार रुपए और चांदी 32 हजार रुपए सस्ती हुई है। सोने-चांदी के दाम में गिरावट की वजह यूएस-ईरान समझौता: अमेरिका-ईरान के बीच युद्धविराम समझौता साइन हुआ है। इसकी वजह से पश्चिम एशिया में युद्ध का खतरा कम हो गया, जिससे निवेशकों ने सोने-चांदी जैसे ‘सुरक्षित निवेश’ से अपना पैसा निकालना शुरू कर दिया। यूएस फेडरल रिजर्व का रुख: फेडरल रिजर्व ने हाल ही में संकेत दिए हैं कि वह इस साल ब्याज दरों में कटौती करने के बजाय उन्हें बढ़ा सकता है। ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीद से सोने जैसी बिना ब्याज वाली धातु की चमक कम हो जाती है। मजबूत अमेरिकी डॉलर: फेडरल रिजर्व के संकेतों के बाद वैश्विक बाजार में अमेरिकी डॉलर इंडेक्स मजबूत हुआ है। आमतौर पर जब डॉलर मजबूत होता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी की कीमतें गिरती हैं। मुनाफावसूली: पिछले कुछ समय पहले सोने और चांदी की कीमतें अपने रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुकी थीं। दामों में इतनी बड़ी तेजी आने के बाद बड़े निवेशकों और ट्रेडर्स ने मुनाफावसूली की, जिससे कीमतों में अचानक तेज गिरावट आई। ईटीएफ में बिकवाली: सुरक्षित निवेश का आकर्षण कम होने से गोल्ड-सिल्वर ETFs में भारी बिकवाली देखी गई। आज सिल्वर ईटीएफ में 6% और गोल्ड ईटीएफ में 3% की गिरावट है, जिसने घरेलू बाजार के भाव को नीचे खींचा है। ऑल टाइम हाई से 31 हजार रुपए गिरा सोना इस साल सोने-चांदी की कीमत में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। 31 दिसंबर 2025 को सोने के दाम 1.33 लाख रुपए थे, जो 29 जनवरी को बढ़कर 1.76 लाख रुपए के सबसे ऊपरी स्तर पर पहुंच गए थे। तब से अब तक सोना 32 हजार रुपए सस्ता हो चुका है। वहीं चांदी की कीमत 31 दिसंबर 2025 को 2.30 लाख रुपए थी, जो 29 जनवरी को 3.86 लाख रुपए के ऑलटाइम हाई पर पहुंच गई थी। तब से अब तक चांदी 1.55 लाख रुपए सस्ती हो गई है। ज्वेलर्स से सोना खरीदते समय इन 2 बातों का रखें ध्यान सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें: हमेशा ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) का हॉलमार्क लगा हुआ सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें। ये नंबर अल्फान्यूमेरिक यानी कुछ इस तरह से हो सकता है- AZ4524। हॉलमार्किंग से पता चलता है कि सोना कितने कैरेट का है। कीमत क्रॉस चेक करें: सोने का सही वजन और खरीदने के दिन उसकी कीमत कई सोर्सेज (जैसे इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट) से क्रॉस चेक करें। सोने का भाव 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट के हिसाब से अलग-अलग होता है। असली चांदी की पहचान करने के 4 तरीके मैग्नेट टेस्ट: असली सिल्वर चुंबक से नहीं चिपकती। अगर चिपक जाए तो फेक है। आइस टेस्ट: सिल्वर पर बर्फ रखें। असली सिल्वर पर बर्फ तेजी से पिघलती है। स्मेल टेस्ट: असली सिल्वर में गंध नहीं होती। फेक में कॉपर जैसी गंध आती है। क्लॉथ टेस्ट: चांदी को सफेद कपड़े से रगड़ें। अगर काला निशान आए तो असली है। ये खबर भी पढ़ें… सेंसेक्स 800 अंक गिरकर 76,600 पर आया: निफ्टी भी 200 अंक गिरा; IT शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली, इंफोसिस 8% तक टूटा शेयर बाजार में आज यानी 19 जून को गिरावट है। सेंसेक्स करीब 800 अंक गिरकर 76,600 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। निफ्टी में भी 200 अंकों की गिरावट है, ये 23,950 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Reliance 49th AGM | Big Signal on Jio, Retail IPO Listing Date & Market Watch

Hindi News Business Reliance 49th AGM | Big Signal On Jio, Retail IPO Listing Date & Market Watch मुंबई8 मिनट पहले कॉपी लिंक रिलायंस इंडस्ट्रीज अपनी 49वीं एनुअल जनरल मीटिंग आज दोपहर 2 बजे होगी। इस बार निवेशक किसी नए बिजनेस के ऐलान के बजाय इस बात पर क्लैरिटी चाहते हैं कि जियो प्लेटफॉर्म्स की लिस्टिंग कब होगी। पिछले साल रिलायंस ने इस आईपीओ का ऐलान किया था और संकेत दिया था कि जियो को 2026 की पहली छमाही में लिस्ट किया जा सकता है। रिलायंस रिटेल के आईपीओ का भी ऐलान हो सकता है जियो के साथ-साथ, निवेशक रिलायंस रिटेल के संभावित आईपीओ को लेकर भी संकेतों का इंतजार कर रहे हैं। नए स्टोर खोलने, लगातार बढ़ती ग्राहकों की संख्या और डिजिटल व क्विक-कॉमर्स चैनलों में ग्रोथ के दम पर रिटेल बिजनेस ग्रुप के सबसे अहम ग्रोथ इंजनों में से एक बनकर उभरा है। ऐसे में लिस्टिंग के प्लान या लॉन्ग-टर्म ग्रोथ टारगेट को लेकर बयान पर निवेशकों की नजरें रहेंगी। चौथी तिमाही में कंपनी का मुनाफा 13% गिरा वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च) में रिलायंस का नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 13% घटकर 16,971 करोड़ रुपए रहा। एक साल पहले की समान तिमाही में प्रॉफिट ₹19,407 करोड़ था। हालांकि, इस दौरान कंपनी का रेवेन्यू 13% बढ़कर 2.98 लाख करोड़ रुपए पहुंच गया है। एक साल पहले की समान तिमाही यानी जनवरी-मार्च 2025 में 2.64 लाख करोड़ रुपए रहा था। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
फैक्ट्री रीसेट से नहीं मिटता डेटा, सर्वे में हुआ खुलासा:69 फीसदी भारतीय फोन बेचने से कतरा रहे; डेटा के गलत इस्तेमाल का डर

भारत में स्मार्टफोन रीसेल मार्केट तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन डेटा सुरक्षा की चिंता अब भी सबसे बड़ी रुकावट बनी हुई है। रीकॉमर्स प्लेटफॉर्म कैशिफाई के एक सर्वे के मुताबिक, 69% उपभोक्ता प्राइवेसी को लेकर डर की वजह से अपना पुराना फोन बेचने से बचते हैं। 8,000 लोगों पर हुए इस सर्वे में 74% ने कहा कि फोन बेचने के बाद पर्सनल डेटा के गलत इस्तेमाल की आशंका रहती है, हालांकि 56.6% लोग पहले ही अपना स्मार्टफोन बेच या एक्सचेंज कर चुके हैं, यानी रीसेल अब आम चलन बन गया है। कैशिफाई के सह-संस्थापक नकुल कुमार के मुताबिक, भागीदारी और जागरूकता दोनों बढ़ रही हैं, लेकिन डेटा सुरक्षा की जिम्मेदारी अब भी ज्यादातर उपभोक्ता पर ही टिकी है। उनका कहना है कि हर डिवाइस में सालों की पर्सनल, फाइनेंशियल और पहचान से जुड़ी जानकारी जमा होती है, इसलिए यह जिम्मेदारी संगठित प्लेटफॉर्म और नीतिगत ढांचे को भी उठानी चाहिए। सर्वे बताता है कि अब फोन बेचने का फैसला सिर्फ कीमत पर नहीं टिका। 45.3% लोगों ने डेटा प्राइवेसी और सुरक्षा को सबसे जरूरी फैक्टर बताया, जबकि सिर्फ 29.5% ने कीमत को तरजीह दी। फोन बेचने से पहले 83.3 फीसदी लोग फैक्ट्री रीसेट करते हैं, लेकिन 41.1 फीसदी मानते हैं कि इससे डेटा हमेशा के लिए नहीं मिटता। 31 फीसदी लोगों ने तो डिलीट किया गया डेटा वापस निकालने में भी कामयाबी पाई। सर्वे में भरोसे से जुड़े आंकड़े भी सामने आए। 68.6% लोगों ने कहा कि सर्टिफाइड सिक्योर डेटा डिलीशन देने वाले प्लेटफॉर्म पर उनका भरोसा बढ़ेगा, जबकि 83.3 फीसदी के लिए डेटा डिलीशन सर्टिफिकेट जरूरी शर्त है। आधे से ज्यादा, यानी 50.8 फीसदी लोग इसके लिए छोटी सी फीस देने को भी तैयार हैं। 15.6% लोगों को तो यह पता ही नहीं था कि सुरक्षित रीसेल के विकल्प मौजूद हैं, जबकि सिर्फ 6.3% ने खरीदारों के दबाव की शिकायत की। फैक्ट्री रीसेट और सिक्योर डिलीशन में फर्क समझना जरूरी कैशिफाई के सीईओ मंदीप मनोचा के मुताबिक, ज्यादातर उपभोक्ता फैक्ट्री रीसेट और सिक्योर डेटा डिलीशन को एक ही समझते हैं, जो गलत है। फैक्ट्री रीसेट सिर्फ फाइलों और ऐप्स का एक्सेस हटाता है, लेकिन डिवाइस के हार्डवेयर में डेटा बना रह सकता है, जिसे स्पेशल रिकवरी टूल्स से वापस निकाला जा सकता है। सिक्योर या सर्टिफाइड डेटा डिलीशन में डेटा को बार-बार ओवरराइट किया जाता है, जिससे उसे वापस पाना लगभग नामुमकिन हो जाता है।
श्रीसंत बोले- इंडिया को कोच नहीं, धोनी जैसा मेंटर चाहिए:गंभीर की कोचिंग पर सवाल उठाए, कहा- उनका तरीका गलत

पूर्व भारतीय तेज गेंदबाज एस श्रीसंत ने टीम इंडिया के हेड कोच गौतम गंभीर की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा है कि टीम इंडिया को ट्रेडिशनल कोच नहीं, बल्कि महेंद्र सिंह धोनी जैसे मेंटर की जरूरत है। 43 साल के श्रीसंत ने कहा- ‘कोच बदल दीजिए। भारत को कोच नहीं, मेंटर की जरूरत है।’ लल्लनटॉप को दिए एक इंटरव्यू में श्रीसंत ने कहा- ‘खिलाड़ियों पर अतिरिक्त दबाव बनाने के बजाय मार्गदर्शन और भरोसा देने वाली लीडरशिप टीम के लिए ज्यादा फायदेमंद होता है। श्रीसंत से टेस्ट क्रिकेट में भारतीय टेस्ट टीम के हालिया प्रदर्शन पर सवाल किया गया था। श्रीसंत ने कहा कि उन्हें न्यूजीलैंड और साउथ अफ्रीका के खिलाफ मिली सीरीज हार गौतम गंभीर के कार्यकाल में आई। उनकी कोचिंग शैली से आपत्ति है। पिछले साल भारतीय टीम अपने घर में साउथ अफ्रीका के खिलाफ 2-0 से हार गई थी। तब भी गंभीर की कोचिंग पर सवाल उठे थे। कहा- टीम के साथ बड़े भाई जैसा रिश्ता चाहिए श्रीसंत ने कहा कि टीम के साथ बड़े भाई जैसा रिश्ता होना चाहिए। केवल जीत पर खुश होना और हार पर नाराज होना काफी नहीं है। खिलाड़ियों को सहयोग और विश्वास की जरूरत होती है। उन्होंने पूर्व तेज गेंदबाज ने महेंद्र सिंह धोनी का उदाहरण देते हुए कहा कि भारतीय टीम की कई सफलताओं के पीछे उनकी सोच और नेतृत्व शैली रही है। वर्ल्ड कप की जीत में सिर्फ कोच का योगदान नहीं श्रीसंत ने 2026 टी20 विश्व कप जीत का पूरा श्रेय गौतम गंभीर को दिए जाने पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि खिलाड़ियों और कप्तान के योगदान को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा, ‘जब टीम ने वर्ल्ड कप जीता तो पूरा श्रेय गंभीर को दिया गया। लेकिन, अगर सैमसन नहीं होते, सूर्यकुमार यादव कप्तानी नहीं करते और सही समय पर गेंदबाजी में बदलाव नहीं होते, तो क्या भारत जीत पाता?’ श्रीसंत ने यह भी कहा कि मैदान पर फैसले खिलाड़ी और कप्तान लेते हैं। भारत के लिए 2 वर्ल्ड कप जीत चुके हैं श्रीसंथ दाएं हाथ के तेज गेंदबाज एस श्रीसंथ ने भारत की ओर से 2 वर्ल्ड कप जीते हैं। वे 2011 में वनडे और 2007 में टी-20 वर्ल्ड कप जीतने वाली टीम इंडिया का हिस्सा रहे हैं। उन्होंने 27 टेस्ट मैचों में 87 विकेट झटके हैं। उन्होंने 53 वनडे और टी-20 इंटरनेशनल मैच भी खेले हैं। IPL के 44 मैच में श्रीसंत के नाम 40 विकेट हैं। 2013 में फिक्सिंग के आरोप में श्रीसंत पर लगा था बैन मई 2013 में IPL के दौरान उन पर स्पॉट फिक्सिंग के आरोप लगे थे। उन्हें दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया था। इसके बाद BCCI ने उन्हें लाइफ टाइम के लिए बैन कर दिया गया था। हालांकि, इन आरोपों के खिलाफ श्रीसंत ने लंबी लड़ाई और साल 2015 में विशेष अदालत ने उन्हें आरोपों से बरी कर दिया था। साल 2018 में केरल हाईकोर्ट ने उन पर लगे अजीवन प्रतिबंध को खत्म किया। लेकिन, 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने उनके अपराध को बरकरार रखा। कोर्ट ने BCCI को उसकी सजा कम करने को कहा। बाद में बोर्ड ने उनपर लगे आजीवन प्रतिबंध को 7 साल तक कम कर दिया था, जो सितंबर 2020 में खत्म हो गया। 3 साल पहले उन पर केरल पुलिस ने धोखाधडी और ठगी का मामला दर्ज किया। ———————————– टीम इंडिया से जुड़ी यह खबर भी पढ़िए… हर्षित राणा तीसरे वनडे के लिए भारतीय टीम में शामिल तेज गेंदबाज हर्षित राणा को अफगानिस्तान के खिलाफ तीसरे वनडे के लिए टीम इंडिया में शामिल किया गया है। BCCI ने शुक्रवार को बताया कि राणा ने सेंटर ऑफ एक्सीलेंसी में रिहैबिटेशन पूरा कर लिया है। वे चेन्नई में भारतीय टीम से जुड़ गए हैं। पढ़ें पूरी खबर
श्रीसंत बोले- इंडिया को कोच नहीं, धोनी जैसा मेंटर चाहिए:गंभीर की कोचिंग पर सवाल उठाए, कहा- उनका तरीका गलत

पूर्व भारतीय पेसर एस श्रीसंत ने टीम इंडिया के हेड कोच गौतम गंभीर की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा है कि इंडिया को ट्रेडिशनल कोच नहीं, बल्कि एमएस धोनी जैसे मेंटर की जरूरत है। 43 साल के श्रीसंत ने कहा- ‘कोच बदल दीजिए। भारत को कोच नहीं, मेंटर की जरूरत है।’ उन्होंने लल्लनटॉप से कहा- ‘खिलाड़ियों पर ज्यादा दबाव बनाने के बजाय मार्गदर्शन और भरोसा देने वाला नेतृत्व टीम के लिए ज्यादा फायदेमंद होता है।’ श्रीसंत ने भारतीय टेस्ट टीम के हालिया प्रदर्शन पर भी सवाल उठाए। उन्होंने न्यूजीलैंड और साउथ अफ्रीका के खिलाफ मिली सीरीज हार पर गंभीर की कोचिंग शैली पर आपत्ति जताई। भारतीय टीम पिछले साल अपने घर में साउथ अफ्रीका से 2-0 से हार गई थी। तब भी गंभीर की कोचिंग पर सवाल उठे थे। कहा- टीम के साथ बड़े भाई जैसा रिश्ता चाहिए श्रीसंत ने कहा कि टीम के साथ बड़े भाई जैसा रिश्ता होना चाहिए। केवल जीत पर खुश होना और हार पर नाराज होना काफी नहीं है। खिलाड़ियों को सहयोग और विश्वास की जरूरत होती है। उन्होंने महेंद्र सिंह धोनी का उदाहरण देते हुए कहा कि भारतीय टीम की कई सफलताओं के पीछे उनकी सोच और नेतृत्व शैली रही है। वर्ल्ड कप की जीत में सिर्फ कोच का योगदान नहीं श्रीसंत ने 2026 टी-20 वर्ल्ड कप जीत का पूरा श्रेय गौतम गंभीर को दिए जाने पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि खिलाड़ियों और कप्तान के योगदान को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा, ‘जब टीम ने वर्ल्ड कप जीता तो पूरा श्रेय गंभीर को दिया गया। लेकिन, सैमसन नहीं होते, सूर्यकुमार यादव कप्तानी नहीं करते और सही समय पर गेंदबाजी में बदलाव नहीं होते, तो क्या भारत जीत पाता?’ भारत के लिए 2 वर्ल्ड कप जीत चुके हैं श्रीसंथ दाएं हाथ के तेज गेंदबाज एस श्रीसंथ ने भारत की ओर से 2 वर्ल्ड कप जीते हैं। वे 2011 में वनडे और 2007 में टी-20 वर्ल्ड कप जीतने वाली टीम इंडिया का हिस्सा रहे हैं। उन्होंने 27 टेस्ट मैचों में 87 विकेट झटके हैं। उन्होंने 53 वनडे और टी-20 इंटरनेशनल मैच भी खेले हैं। IPL के 44 मैच में श्रीसंत के नाम 40 विकेट हैं। 2013 में फिक्सिंग के आरोप में श्रीसंत पर लगा था बैन मई 2013 में IPL के दौरान उन पर स्पॉट फिक्सिंग के आरोप लगे थे। उन्हें दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया था। इसके बाद BCCI ने उन्हें लाइफ टाइम के लिए बैन कर दिया गया था। हालांकि, इन आरोपों के खिलाफ श्रीसंत ने लंबी लड़ाई और साल 2015 में विशेष अदालत ने उन्हें आरोपों से बरी कर दिया था। साल 2018 में केरल हाईकोर्ट ने उन पर लगे अजीवन प्रतिबंध को खत्म किया। लेकिन, 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने BCCI को उसकी सजा कम करने को कहा। बाद में बोर्ड ने उन पर लगे आजीवन प्रतिबंध को 7 साल तक कम कर दिया था, जो सितंबर 2020 में खत्म हो गया। 3 साल पहले उन पर केरल पुलिस ने धोखाधडी और ठगी का मामला दर्ज किया। ———————————– टीम इंडिया से जुड़ी यह खबर भी पढ़िए… हर्षित राणा तीसरे वनडे के लिए भारतीय टीम में शामिल तेज गेंदबाज हर्षित राणा को अफगानिस्तान के खिलाफ तीसरे वनडे के लिए टीम इंडिया में शामिल किया गया है। BCCI ने शुक्रवार को बताया कि राणा ने सेंटर ऑफ एक्सीलेंसी में रिहैबिटेशन पूरा कर लिया है। वे चेन्नई में भारतीय टीम से जुड़ गए हैं। पढ़ें पूरी खबर
अमेरिका के 11 शहरों की कहानी कहता फीफा वर्ल्ड कप:फुटबॉल का अनूठा रंग; कहीं लैटिन कार्निवल तो कहीं मैक्सिकन फुटबॉल का कल्चर

जब फुटबॉल का बुखार अमेरिका पहुंचता है, तो वह किसी एक राष्ट्रीय संस्कृति से बंधे देश में प्रवेश नहीं करता। अर्जेंटीना, ब्राजील, इंग्लैंड या जर्मनी जैसे देशों में फुटबॉल पूरे देश को एक धागे में पिरोता है। लेकिन अमेरिका इसके ठीक उलट एक बिल्कुल अलग और अनूठा अनुभव पेश कर रहा है। इस बार का फीफा वर्ल्ड कप अमेरिका के 11 अलग-अलग शहरों में खेला जा रहा है और इनमें से हर शहर का अपना एक अलग प्रवासी इतिहास, अपनी खेल परंपराएं और अपनी एक विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान है। इस वजह से अमेरिका के इन 11 अलग-अलग श्शहर रूपी देशों’ के अनूठे मिजाज का एक वैश्विक जश्न नजर आ रहा है। मियामी के लैटिन कार्निवल वाले माहौल से लेकर लॉस एंजिलिस की मैक्सिकन फुटबॉल संस्कृति तक, यह वर्ल्ड कप किसी एक राष्ट्र की कहानी न होकर, अलग-अलग शहरों की कहानी बनता जा रहा है। 1. मियामी – मेसी का गढ़, कैफे और बार में स्पेनिश फैंस का शोर जब से मेसी इंटर मियामी क्लब से जुड़े हैं, तब से दक्षिण फ्लोरिडा में फुटबॉल एक सांस्कृतिक घटना बन गया है। बार और कैफे स्पेनिश, अंग्रेजी और पुर्तगाली भाषाओं के शोर से गूंज उठते हैं। इस दौरान मियामी एक अमेरिकी शहर की तरह कम और लैटिन अमेरिका की फुटबॉल राजधानी की तरह ज्यादा महसूस होने वाला है। 2. लॉस एंजिलिस – मैक्सिकन मूल की सबसे बड़ी आबादी यहीं यह मैक्सिको के बाहर मैक्सिकन मूल की सबसे बड़ी आबादी वाला शहर है। दीवारों पर बने भित्ति चित्र, स्थानीय लीग और फैन ग्रुप इस शहर को एक ऐसी फुटबॉल पहचान देते हैं, जिससे यहां का माहौल ग्वाडलहारा या मॉन्टेरी (मैक्सिको के शहर) जैसा लगता है। 3. डलास – जहां फुटबॉल से मिलती है टेक्सास की भव्यता यहां हर चीज बहुत बड़ी और भव्य होती है। डलास मजबूत मैक्सिकन-अमेरिकी फुटबॉल परंपराओं को टेक्सास शैली की महत्वाकांक्षा के साथ जोड़ता है। कॉर्पोरेट हॉस्पिटैलिटी जोन, बड़े पैमाने पर फैन फेस्टिवल और विशाल बुनियादी ढांचा इस शहर को टूर्नामेंट के मुख्य आकर्षणों में से एक बनाती हैं। 4. न्यूयॉर्क – न्यू जर्सी: एक स्टेडियम में बसी पूरी दुनिया यह क्षेत्र बड़ी संख्या में भारतीय, बांग्लादेशी, पाकिस्तानी, डोमिनिकन, इक्वाडोरियन, नाइजीरियाई, मिस्र, इतालवी, आयरिश, लैटिन अमेरिकी समुदायों का घर है। स्टेडियम तक की ट्रेन यात्रा में ही आधा दर्जन देशों के समर्थक एक साथ मिल सकते हैं। 5. ह्यूस्टन – लैटिन अमेरिकी कल्चर, फुटबॉल पहले से जीवन का हिस्सा शहर की बड़ी मैक्सिकन, मध्य अमेरिकी और दक्षिण अमेरिकी आबादी ने दशकों से यहां एक संपन्न फुटबॉल संस्कृति का निर्माण किया है। सामुदायिक लीग और युवा एकेडमी पहले से ही प्रवासी लोगों के लिए मेलजोल का जरिया हैं। यहां फुटबॉल रोजमर्रा के जीवन का हिस्सा है। 6. सिएटल – डिजिटल युग का फुटबॉल, यहां उच्च शिक्षित फैंस सिएटल ने जिस स्वाभाविक तरीके से फुटबॉल को अपनाया है, वैसा बहुत कम अमेरिकी शहरों ने किया है। शहर की संस्कृति में पारंपरिक समर्थकों के जुनून के साथ-साथ एक युवा, उच्च शिक्षित टेक वर्कफोर्स का प्रभाव दिखता है। डेटा-संचालित फैन एंगेजमेंट और डिजिटल समुदाय यहां की फुटबॉल का हिस्सा है। 7. सैन फ्रांसिस्को – ‘सिलिकॉन वैली’ से मिलेगा खूबसूरत खेल बे एरिया की फुटबॉल कहानी खुद इस क्षेत्र को दर्शाती है। मैच सांता क्लारा में हो रहे हैं, जो सिलिकॉन वैली का दिल है। भारत, चीन से लेकर लैटिन अमेरिका और यूरोप तक के इस क्षेत्र के अप्रवासी समुदाय फुटबॉल का सपोर्ट कर रहे हैं। एआई, ऑगमेंटेड रियलिटी के जरिए फैंस को लुभाया जा रहा है। 8. फिलाडेल्फिया – यूरोप के पारंपरिक फुटबॉल जैसा जुनून यहां के फैंस अपने भावनात्मक जुड़ाव और वफादारी के लिए जाने जाते हैं। यह संस्कृति इस शहर को टूर्नामेंट के सबसे शानदार माहौल वाले स्थानों में से एक बनाती है। फिलाडेल्फिया के फैंस की भीड़ यूरोप के पारंपरिक फुटबॉल शहरों की याद दिलाती है। 9. बोस्टन – क्लब फुटबॉल का भी रोमांच आयरिश, पुर्तगाली, इतालवी और लैटिन अमेरिकी समुदायों ने पीढ़ियों से स्थानीय फुटबॉल परंपराओं को कायम रखा है। पूरे शहर के पब नियमित रूप से प्रीमियर लीग, चैम्पियंस लीग जैसे क्लब फुटबॉल टूर्नामेंट के दौरान भर जाते हैं। 10. अटलांटा – सबसे तेजी से उभरता शहर यह शहर अमेरिका के दक्षिण में सबसे तेजी से बढ़ते अंतरराष्ट्रीय केंद्रों में से एक के रूप में उभरा है, जो अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और एशिया के प्रवासियों को आकर्षित कर रहा है। हालांकि, लोग अभी भी अटलांटा की फुटबॉल संस्कृति को कम आंकते हैं। 11. कंसास – अमेरिका की फुटबॉल राजधानी फुटबॉल के जानकारों के बीच कंसास सिटी की प्रतिष्ठा अक्सर बाहरी लोगों को आश्चर्यचकित करती है। इस शहर ने फुटबॉल के बुनियादी ढांचे में भारी निवेश किया है और यह अमेरिका में सबसे मजबूत फुटबॉल समुदायों में से एक है।
Muthoot Finance MY FM Launch Sunheri Soch Campaign

नई दिल्ली1 मिनट पहले कॉपी लिंक भारत का गोल्ड लोन बाजार पिछले पांच सालों में 14.85% CAGR की दर से बढ़ा है। भारतीय घरों में लगभग 27,000 टन सोना मौजूद है, लेकिन इसमें से सिर्फ 20% ही अभी तक गिरवी रखा गया है। अभी भी 65% गोल्ड लोन बाजार अनऑर्गेनाइज्ड सेक्टर के हाथ में है। सवाल यह उठता है कि इतना सोना होते हुए भी लोग बैंक या NBFC का दरवाजा क्यों नहीं खटखटाते? जवाब आंकड़ों में नहीं, भावनाओं में है। भारत में सोना सिर्फ गहना नहीं होता, यह पीढ़ियों की कमाई है, मां की विरासत है, परिवार की सुरक्षा का प्रतीक है। जब यही सोना जरूरत के समय गिरवी रखने की नौबत आती है, तो मन में एक ही आवाज गूंजती है कि लोग क्या कहेंगे? यही झिझक, यही सामाजिक डर दशकों से करोड़ों भारतीयों को अपने सोने का सही फायदा उठाने से रोकता रहा है। इसी दीवार को तोड़ने का बेड़ा मुथूट फाइनेंस गोल्ड लोन ने उठाया और माध्यम बना रेडियो। मुथूट फाइनेंस लगातार कई सालों से भारत का नंबर-1 सबसे भरोसेमंद फाइनेंशियल सर्विसेज ब्रांड है। हालांकि, नंबर-1 बने रहना काफी नहीं था। मुथूट फाइनेंस चाहता था कि गोल्ड लोन मजबूरी का साथी ना बनकर सपनों को सच करने का जरिया बने। सुनहरी सोच- एक विज्ञापन नहीं, एक आंदोलन मुथूट फाइनेंस ने रेडियो के साथ साझेदारी करके ‘सुनहरी सोच’ अभियान की शुरुआत की है। इस अभियान के तहत लोगों की प्रेरणादायक कहानियां बताई गई हैं, जो गोल्ड लोन से जुड़ी झिझक को तोड़ती हैं। यह सिर्फ विज्ञापन नहीं था, यह उन लोगों की जिंदगी की कहानी थी, जिन्होंने अपने सपनों को सच करने के लिए घर पर रखे सोने को काम पर लगाया। इस बार MYFM ने इस अभियान को एक नई ऊंचाई पर ले जाने में भागीदारी निभाई अपने बड़े लिसनर बेस के साथ, शहरों, कस्बों और गांव तक ‘सुनहरी सोच’ की आवाज पहुंचाई। MYFM के RJs ने मुथूट फाइनेंस के असली कस्टमर्स की कहानियां, अपनी बोली में, अपने अंदाज में लिसनर तक पहुंचाईं। मुथूट ग्रुप के मार्केटिंग एंड स्ट्रेटेजी के चीफ जनरल मैनेजर अभिनव अय्यर ने कहा कि गोल्ड सिर्फ एक एसेट नहीं है, बल्कि यह अवसरों का एक फाइनेंशियल जरिया है। हम चाहते हैं कि ‘सुनहरी सोच’ एक ऐसा आंदोलन बने जो करोड़ों भारतीयों की जिंदगी बदले। रेडियो क्यों? क्योंकि भरोसा वहीं से आता है डिजिटल के इस दौर में भी रेडियो की ताकत कम नहीं हुई, बल्कि टियर 2, टियर 3 शहरों में यह एक भरोसेमंद माध्यम है। इस पूरे अभियान की मीडिया इन्वेंट्री का बड़ा हिस्सा रेडियो पर खर्च किया गया। मुथूट फाइनेंस का इरादा साफ है कि गोल्ड लोन को हर भारतीय का ड्रीम फंड बनाना है। भारत का गोल्ड लोन बाजार FY 2025-26 में ₹9.24 लाख करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है, जो 14% से ज्यादा की सालाना ग्रोथ को दर्शाता है। इस बढ़ते बाजार में मुथूट फाइनेंस और रेडियो की साझेदारी सिर्फ एक कैंपेन नहीं, बल्कि नए भारत की आर्थिक सोच की आवाज है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
Muthoot Finance MY FM Launch Sunheri Soch Campaign

नई दिल्ली33 मिनट पहले कॉपी लिंक भारत का गोल्ड लोन बाजार पिछले पांच सालों में 14.85% CAGR की दर से बढ़ा है। भारतीय घरों में लगभग 27,000 टन सोना मौजूद है, लेकिन इसमें से सिर्फ 20% ही अभी तक गिरवी रखा गया है। अभी भी 65% गोल्ड लोन बाजार अनऑर्गेनाइज्ड सेक्टर के हाथ में है। सवाल यह उठता है कि इतना सोना होते हुए भी लोग बैंक या NBFC का दरवाजा क्यों नहीं खटखटाते? जवाब आंकड़ों में नहीं, भावनाओं में है। भारत में सोना सिर्फ गहना नहीं होता, यह पीढ़ियों की कमाई है, मां की विरासत है, परिवार की सुरक्षा का प्रतीक है। जब यही सोना जरूरत के समय गिरवी रखने की नौबत आती है, तो मन में एक ही आवाज गूंजती है कि लोग क्या कहेंगे? यही झिझक, यही सामाजिक डर दशकों से करोड़ों भारतीयों को अपने सोने का सही फायदा उठाने से रोकता रहा है। इसी दीवार को तोड़ने का बेड़ा मुथूट फाइनेंस गोल्ड लोन ने उठाया और माध्यम बना रेडियो। मुथूट फाइनेंस लगातार कई सालों से भारत का नंबर-1 सबसे भरोसेमंद फाइनेंशियल सर्विसेज ब्रांड है। हालांकि, नंबर-1 बने रहना काफी नहीं था। मुथूट फाइनेंस चाहता था कि गोल्ड लोन मजबूरी का साथी ना बनकर सपनों को सच करने का जरिया बने। सुनहरी सोच- एक विज्ञापन नहीं, एक आंदोलन मुथूट फाइनेंस ने रेडियो के साथ साझेदारी करके ‘सुनहरी सोच’ अभियान की शुरुआत की है। इस अभियान के तहत लोगों की प्रेरणादायक कहानियां बताई गई हैं, जो गोल्ड लोन से जुड़ी झिझक को तोड़ती हैं। यह सिर्फ विज्ञापन नहीं था, यह उन लोगों की जिंदगी की कहानी थी, जिन्होंने अपने सपनों को सच करने के लिए घर पर रखे सोने को काम पर लगाया। इस बार MYFM ने इस अभियान को एक नई ऊंचाई पर ले जाने में भागीदारी निभाई अपने बड़े लिसनर बेस के साथ, शहरों, कस्बों और गांव तक ‘सुनहरी सोच’ की आवाज पहुंचाई। MYFM के RJs ने मुथूट फाइनेंस के असली कस्टमर्स की कहानियां, अपनी बोली में, अपने अंदाज में लिसनर तक पहुंचाईं। मुथूट ग्रुप के मार्केटिंग एंड स्ट्रेटेजी के चीफ जनरल मैनेजर अभिनव अय्यर ने कहा कि गोल्ड सिर्फ एक एसेट नहीं है, बल्कि यह अवसरों का एक फाइनेंशियल जरिया है। हम चाहते हैं कि ‘सुनहरी सोच’ एक ऐसा आंदोलन बने जो करोड़ों भारतीयों की जिंदगी बदले। रेडियो क्यों? क्योंकि भरोसा वहीं से आता है डिजिटल के दौर में भी रेडियो की ताकत कम नहीं हुई, बल्कि टियर 2, टियर 3 शहरों में यह एक भरोसेमंद माध्यम है। इस पूरे अभियान की मीडिया इन्वेंट्री का बड़ा हिस्सा रेडियो पर खर्च किया गया। मुथूट फाइनेंस का इरादा है कि गोल्ड लोन को हर भारतीय का ड्रीम फंड बनाना है। भारत का गोल्ड लोन बाजार FY 2025-26 में ₹9.24 लाख करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है, जो 14% से ज्यादा की सालाना ग्रोथ को दर्शाता है। इस बढ़ते बाजार में मुथूट फाइनेंस और रेडियो की साझेदारी सिर्फ एक कैंपेन नहीं, बल्कि नए भारत की आर्थिक सोच की आवाज है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔









