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एक्टर्स की पेमेंट रोके जाने पर भड़कीं शिल्पा शिंदे:एक्टर शहजादा धामी के 30 लाख रोके जाने पर बोलीं- सब्जी बेचूंगी, लेकिन प्रोड्यूसर की नहीं चाटूंगी

एक्टर्स की पेमेंट रोके जाने पर भड़कीं शिल्पा शिंदे:एक्टर शहजादा धामी के 30 लाख रोके जाने पर बोलीं- सब्जी बेचूंगी, लेकिन प्रोड्यूसर की नहीं चाटूंगी

टीवी इंडस्ट्री में फिर एक नॉन पेमेंट का विवाद छिड़ गया है। टीवी एक्टर शहजादा धामी 2023 से ये रिश्ता क्या कहलाता है में लीड रोल निभा रहे थे, लेकिन अनप्रोफेशनल होने का आरोप लगाते हुए उन्हें अचानक शो से निकाल दिया गया और उनकी पेमेंट रोक दी गई। शहजादा ने शो के प्रोड्यूसर राजन शाही के खिलाफ शिकायत भी दर्ज करवाई, लेकिन 3 साल बाद भी उन्हें 30 लाख रुपए की बकाया पेमेंट नहीं मिली है। उन्होंने इस मामले पर सवाल उठाए तो एक्ट्रेस शिल्पा शिंदे ने उनके सपोर्ट में प्रोड्यूसर्स को माफिया कहते हुए जमकर भड़ास निकाली। शिल्पा शिंदे ने ऑफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट से वीडियो जारी की, जिसमें उन्होंने कहा, ‘देखा आपने कि आर्टिस्ट एसोसिएशन ही आर्टिस्ट के साथ नहीं होती। ये जो टीवी इंडस्ट्री के प्रोड्यूसर होते हैं वो माफियागिरी करते हैं। जो प्रोड्यूसर साथ नहीं देते, उन्हें भी काम रोकने के लिए धमकाया जाता है। हम आर्टिस्ट ऐसा नहीं कर सकते, क्योंकि हमारे 90 दिनों का पेमेंट प्रोड्यूसर के पास होता है, वो रोक दिया जाता है।’ आगे एक्ट्रेस ने कहा, ‘आर्टिस्ट एसोसिएशन के जो एक्टर्स होते हैं, वो प्रोड्यूसर्स की चाटते हैं। उन्हें काम चाहिए होता है, तो वो उनका साथ देते हैं। तो आर्टिस्ट का साथ कौन देगा। आज किसी एक्टर की डेथ के बाद आप आकर इंस्टाग्राम पर रो रहे हो, वीडियो डाल रहे हो। इसका मतलब नहीं है। वही लोग हैं ये जो किसी के मरने के बाद कैंडल लेकर इंसाफ मांगते हो। फुटेज खाते हो बेमतलब।’ फर्जी सेक्शुअल हैरेसमेंट केस पर बोलीं- एक्ट्रेस सोकर झूठा रेप केस करती हैं शिल्पा शिंदे ने हाल ही में बताया है कि उन्होंने भाभीजी घर पर हैं शो की पेमेंट रोके जाने पर प्रोड्यूसर के खिलाफ फर्जी सेक्शुल हैरेसमेंट का केस किया था। इस पर उन्होंने कहा, ‘मेरा उस वक्त किसी ने साथ नहीं दिया। मजबूरी होगी, मैंने कुछ नहीं कहा। आज मैंने मौका दिया। आज मैंने छाती ठोककर रहा कि मैंने गलत किया। मैंने ये पैसे के लिए नहीं किया था। एक्ट्रेस लोगों के साथ सोकर आती हैं और मेडिकल चेकअप करवाकर बोलती हैं कि मेरा रेप हुआ है। जिन लोगों ने मुझ पर गलत इल्जाम लगाए हैं, वो इस कानून को समझें। ये नॉन-बेलेबल एक्ट है। हमारा मसला खत्म हो गया था, मैं 10 साल बाद काम कर रही हूं। जो मैंने किया, वो नहीं करती तो इससे निकल नहीं पाती। किसी और में ये करने की हिम्मत नहीं है।’ आगे एक्ट्रेस ने कहा, ‘जिन भी लोगों ने मुझ पर लांछन लगाए हैं, मैं उन्हें कहना चाहूंगी कि तुम लोगों में दम नहीं है खुद का इंसाफ लेने के लिए। नहीं तो सुसाइड करना पड़ता है। आज आकर रोते। मैंने पहले भी राजन जी के खिलाफ शहजादा के लिए आवाज उठाई थी। कुछ एक्टर करते हैं प्रोड्यूसर को परेशान। प्रोड्यूसर से तो मुझे कोई मतलब नहीं है। वो घटिया होते हैं, मुझे करना भी नहीं है उनके साथ काम। जब मैंने आवाज उठाई तो मीडिया ने कहा कि हम ये नहीं चला सकेंगे क्योंकि ऊपर से प्रेशर आएगा।’ आखिर में एक्ट्रेस ने कहा- ‘मुझे इस घटिया इंडस्ट्री में काम करना ही नहीं है रास्ते में सब्जी बेचूंगी, लेकिन ऐसे लोगों की नहीं चाटूंगी।’ क्या है प्रोड्यूसर पर शहजादा धामी का आरोप? एक्टर शहजादा धामी 2023 से टीवी शो ये रिश्ता क्या कहलाता है से जुड़े, लेकिन एक साल बाद ही उन्हें शो से निकाल दिया गया। प्रोड्यूसर राजन शाही ने इसकी वजह एक्टर का अनप्रोफेशनल रवैया बताया, लेकिन शहजादा की मानें तो प्रोड्यूसर ने उन्हें पूरी यूनिट के सामने अपमानित किया और उनके पेरेंट्स पर आपत्तिजनक कमेंट किए। शो से हटाए जाने के बाद शहजादा की पेमेंट रोक दी गई। जिसके बाद उन्होंने आर्टिस्ट एसोसिएशन में इसकी शिकायत दर्ज की। शिकायत के बावजूद प्रोड्यूसर के खिलाफ कोई एक्शन नहीं लिया गया। अब तीन साल बाद शहजादा ने सोशल मीडिया के जरिए बताया है कि उनकी 30 लाख की पेमेंट अब तक चुकाई नहीं गई है। उन्होंने ऑफिशियल इंस्टाग्राम से लिखा, कलाकारों को अलग-अलग कारणों से बैन किया जा रहा है, उनका बहिष्कार किया जा रहा है और उन्हें जज किया जा रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि कलाकारों की सुरक्षा और उनके अधिकारों की बात करने वाली संस्थाएं आखिर क्या कर रही हैं? आगे उन्होंने लिखा, ‘कई साल पहले मैंने अपने शो के निर्माता के खिलाफ बकाया पैसे न मिलने की शिकायत की थी। आज भी मेरे लगभग 30 लाख रुपये बाकी हैं। इसके बावजूद उस व्यक्ति के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई और वह आज भी इंडस्ट्री में खुलेआम काम कर रहा है।’ ‘मेरा सवाल है कि जब मेरी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो न कोई बैन हुआ, न बहिष्कार और न ही किसी की जवाबदेही तय हुई, ऐसा क्यों?’ आखिर में उन्होंने लिखा, ‘अगर कोई इंसान सिर्फ अपने परिवार का पेट पालने, बच्चों का भविष्य बनाने और मेहनत से काम करने की कोशिश कर रहा है, तो उससे आखिर लोग क्या चाहते हैं? क्या किसी पेशेवर मतभेद या मनमुटाव की वजह से किसी की पूरी जिंदगी और करियर बर्बाद कर देना सही है? क्या सिर्फ इसलिए किसी की सफलता से परेशानी होनी चाहिए क्योंकि कभी रिश्ते अच्छे नहीं रहे?’ ‘फिल्म और टीवी इंडस्ट्री को प्रतिभा, प्रोफेशनलिज्म और निष्पक्षता के आधार पर चलना चाहिए, न कि व्यक्तिगत दुश्मनी, अहंकार या किसी को नीचे गिराने की मानसिकता पर।’ अगर कलाकारों से जवाबदेही की उम्मीद की जाती है, तो ताकत और अधिकार रखने वाले लोगों से भी उतनी ही जवाबदेही की उम्मीद होनी चाहिए।’

छह विद्रोही शिवसेना (यूबीटी) सांसद 21 जून को शिंदे गुट में जाने की घोषणा कर सकते हैं | भारत समाचार

BAN vs AUS Live Score: Follow latest updates from 2nd T20I. (AP Photo)

आखरी अपडेट:19 जून, 2026, 13:19 IST कथित तौर पर सांसद अपने अगले राजनीतिक कदम की घोषणा करने से पहले लोकसभा अध्यक्ष के फैसले का इंतजार कर रहे हैं। पार्टी के नौ लोकसभा सांसदों में से छह – जो उसकी संसदीय ताकत का दो-तिहाई हिस्सा बनाने के लिए पर्याप्त हैं – कथित तौर पर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के साथ विलय की तैयारी कर रहे हैं। शिवसेना यूबीटी संकट: सूत्रों ने कहा कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व के खिलाफ विद्रोह करने वाले छह शिव सेना (यूबीटी) सांसद 21 जून को औपचारिक रूप से एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिव सेना में शामिल हो सकते हैं, जिससे महाराष्ट्र में विपक्षी गुट और कमजोर हो सकता है। न्यूज18 इंडिया के अनुसार, सूत्रों का हवाला देते हुए, छह सांसदों के शनिवार को दिल्ली पहुंचने की उम्मीद है और वे शिवसेना (यूबीटी) द्वारा उनके खिलाफ शुरू की गई संभावित अयोग्यता कार्यवाही के घटनाक्रम पर बारीकी से नजर रख रहे हैं। कथित तौर पर सांसद अपने अगले राजनीतिक कदम की घोषणा करने से पहले लोकसभा अध्यक्ष के फैसले का इंतजार कर रहे हैं। देश में चल रहे सियासी ड्रामे में 21 जून को अहम तारीख के तौर पर देखा जा रहा है. 2022 में इसी दिन एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे के खिलाफ अपना विद्रोह शुरू किया था, जिससे अविभाजित शिवसेना में विभाजन हो गया और अंततः महाराष्ट्र में एक नई सरकार का गठन हुआ। सूत्रों ने संकेत दिया कि बागी सांसद शनिवार को एक बड़ी राजनीतिक घोषणा कर सकते हैं, जिससे अटकलें तेज हो गई हैं कि वे औपचारिक रूप से शिंदे गुट में शामिल हो सकते हैं। यह चर्चा उस रिपोर्ट के एक दिन बाद आई है जिसमें कहा गया था कि शुक्रवार को पार्टी के 60वें स्थापना दिवस समारोह के दौरान छह सांसदों को शिवसेना में शामिल किया जाएगा। हालाँकि, शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना और उद्धव ठाकरे खेमे दोनों ने इस बात से इनकार किया कि कार्यक्रम के दौरान किसी को शामिल करने की योजना बनाई गई थी। छह सांसद – नागेश पाटिल-आष्टिकर, संजय देशमुख, संजय जाधव, संजय दीना पाटिल, ओमप्रकाश राजे निंबालकर और भाऊसाहेब वाकचौरे – व्हिप जारी होने के बावजूद गुरुवार को नई दिल्ली में शिवसेना (यूबीटी) संसदीय दल की बैठक में शामिल नहीं हुए। उनकी अनुपस्थिति ने “ऑपरेशन टाइगर” के बारे में अटकलों को हवा दे दी, जो कि शिंदे खेमे द्वारा उद्धव ठाकरे गुट के और अधिक नेताओं को अपने पाले में लाने का एक कथित प्रयास था। बैठक में केवल अरविंद सावंत, अनिल देसाई और राजाभाऊ वाजे ही शामिल हुए, जिससे सेना (यूबीटी) के भीतर गहराते विभाजन का पता चला। बहिष्कार के बाद, शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने घोषणा की कि छह सांसदों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है और पार्टी दल-बदल विरोधी प्रावधानों के तहत उन्हें अयोग्य ठहराने की मांग करेगी। राउत ने कहा, “कार्रवाई करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। हम उन्हें अयोग्य ठहराने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे।” औपचारिक बदलाव की संभावना को तब बल मिला जब शिवसेना एमएलसी चंद्रकांत रघुवंशी ने दावा किया कि छह सांसदों ने शिंदे के नेतृत्व में विश्वास व्यक्त किया है और उनके गुट में शामिल होने के लिए तैयार हैं। यदि यह कदम सफल होता है, तो यह 2022 के विभाजन के बाद से उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी के लिए सबसे महत्वपूर्ण झटका होगा, जिसने महाराष्ट्र के राजनीतिक परिदृश्य को नया आकार दिया। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना लेखक के बारे में शोभित गुप्ता शोभित गुप्ता News18.com में उप-संपादक हैं और भारत और अंतर्राष्ट्रीय समाचारों को कवर करते हैं। वह भारत के रोजमर्रा के राजनीतिक मामलों और भू-राजनीति में रुचि रखते हैं। उन्होंने बीए पत्रकारिता (ऑनर्स) की डिग्री हासिल की…और पढ़ें न्यूज़ इंडिया छह बागी शिवसेना (यूबीटी) सांसद 21 जून को शिंदे गुट में जाने की घोषणा कर सकते हैं अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)शिवसेना यूबीटी संकट(टी)शिवसेना यूबीटी(टी)उद्धव ठाकरे गुट(टी)महाराष्ट्र की राजनीति(टी)पार्टी नेतृत्व विवाद(टी)शिवसेना विभाजन(टी)मुंबई राजनीतिक संकट(टी)भारतीय क्षेत्रीय दल

लोकसभा चुनाव 2029: 2029 लोकसभा चुनाव के लिए ECI ने बनाया टैग प्लान, सरकार से 500 करोड़ रुपये, मगर क्यों?

लोकसभा चुनाव 2029: 2029 लोकसभा चुनाव के लिए ECI ने बनाया टैग प्लान, सरकार से 500 करोड़ रुपये, मगर क्यों?

चुनाव आयोग ने 2029 के लिए नामांकन की तैयारी अभी से शुरू कर दी है। इसके लिए आयोग ने नई इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) की खरीद के लिए केंद्र सरकार से 500 करोड़ रुपये से अधिक की मांग की है। इसकी बड़ी वैलनेस वोटिंग प्लांट्स की बहुलता और पुरानी संख्या का समय पूरा कर लिया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 के आम चुनाव में देश में करीब 10.53 लाख मतदान केंद्र थे। साल 2029 तक युसी की संख्या लगभग 15.39 लाख होने का अनुमान है। मतदान में लगभग 46 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई चुनाव आयोग को अतिरिक्त पुष्टि की आवश्यकता महसूस हो रही है। आयोग की योजना करीब 3.57 मिलियन बैलेट यूनिट (बीयू) और 1.25 मिलियन कंट्रोल यूनिट (सीयू) की कमी है। इन सोसायटी की खरीद पर कुल खर्च 500 करोड़ रुपये से ज्यादा आने का अनुमान है। बताया गया है कि खर्च विभाग ने इस खरीद के लिए करीब 512.4 करोड़ रुपये की मंजूरी भी दे दी है। वर्तमान चुनाव आयोग के पास लगभग 30.77 मिलियन बैलेट यूनिट और 22.14 मिलियन कंट्रोल यूनिट उपलब्ध हैं। यह भी पढ़ें : NEET पेपर लीक: कॉकरोच जनता पार्टी ने पीएम मोदी को लिखी चिट्ठी, अभिजीत डाइके ने सरकार से कहा NEET मामले में कर दी बड़ी डील विवरण बैलेट यूनिट (बीयू) नियंत्रण इकाई (सीयू) 15.39 लाख मतदान आवेदन की आवश्यकता 26,31,068 19,23,295 कुल आवश्यकता (राष्ट्रीय रिजर्व सहित) 30,48,039 21,92,557 वर्तमान में उपलब्ध वस्तु 30,78,000 22,14,000 घाटियाँ: 2013-14 की सेवा अवधि पूर्ण कराधान निगम 3,57,000 1,25,000 शुद्ध 27,21,000 20,89,000 कमी (शॉर्टफॉल) 3,27,039 1,03,557 बबमी की जरूरत2013-14 में कई बेरोजगार हुए 2029 तक प्रति 15 वर्ष की निर्धारित सेवा अवधि पूरी कर लेगी। इसके कारण करीब 3.57 लाख बैलेट यूनिट और 1.25 लाख कंट्रोल यूनिट उपलब्ध नहीं है। चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, 15.39 लाख वोटिंग के लिए 26.31 लाख बैलेट यूनिट और 19.23 लाख कंट्रोल यूनिट की जरूरत होगी। नेशनल रिज़र्व और अन्य संस्थाओं को जोड़ने पर कुल मांग 30.48 लाख बैलेट यूनिट और 21.92 लाख कंट्रोल यूनिट तक पहुंचेगी। इसके बाद भी लगभग 3.27 मिलियन बैलेट यूनिट और 1.03 मिलियन कंट्रोल यूनिट की कमी रह सकती है। रियासत माँगरिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यदि भविष्य में ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ योजना लागू होती है तो अंकित की मांग और वृद्धि हो सकती है। अनुमान है कि विपक्ष और विधानसभा चुनाव एक साथ की स्थिति में करीब 48 लाख बैलेट यूनिट, 35 लाख कंट्रोल यूनिट और 34 लाख वीआईपी सुविधा की आवश्यकता होगी। इससे खर्च 5,300 करोड़ रुपये से ज्यादा तक पहुंचा जा सकता है। चुनाव आयोग का लक्ष्य है कि मार्च 2027 तक नई मशीनरी का निर्माण और आपूर्ति पूरी कर ली जाए, ताकि 2029 के चुनाव के निर्वाचन में किसी तरह की परेशानी न आए। यह भी पढ़ें: राम मंदिर में चढ़वा चोरी मामले के बीच अयोध्या में सीएम योगी का पहला बयान, कहा- तब अपमान नहीं हुआ जब…

ईरानी सिंगर को 74 कोड़े की सजा:2 साल देश छोड़ने पर बैन; दो साल पहले बिना हिजाब स्लीवलेस ड्रेस पहनकर गाना गाया था

ईरानी सिंगर को 74 कोड़े की सजा:2 साल देश छोड़ने पर बैन; दो साल पहले बिना हिजाब स्लीवलेस ड्रेस पहनकर गाना गाया था

ईरान की मशहूर सिंगर परस्तू अहमदी और उनके साथ काम करने वाले 8 लोगों को ऑनलाइन कॉन्सर्ट के लिए 74-74 कोड़े मारने की सजा सुनाई गई है। उन पर 2 साल तक देश छोड़ने और 2 साल तक किसी भी आर्टिस्टिक एक्टिविटीज पर रोक लगाई गई है। यह सजा ईरान के कोम प्रांत की अदालत ने यूट्यूब पर पब्लिश किए गए एक कॉन्सर्ट के मामले में सुनाई है। अदालत ने आर्टिस्ट पर अश्लील कंटेट पब्लिश करने और सार्वजनिक शालीनता का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। यह मामला दिसंबर 2024 का है। उस समय 29 साल की परस्तू अहमदी ने बिना हिजाब पहने यूट्यूब पर एक लाइव कॉन्सर्ट किया था। इस दौरान उन्होंने ईरान का लोकप्रिय देशभक्ति गीत ‘अज खूने जवानाने वतन’ (मातृभूमि के युवाओं के खून से) गाया था। कॉन्सर्ट का वीडियो कुछ ही समय में वायरल हो गया। यूट्यूब पर इसे लाखों लोगों ने देखा। वीडियो जारी होने के बाद ईरानी अधिकारियों ने परस्तू अहमदी और कई संगीतकारों को कुछ समय के लिए हिरासत में लिया था। बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया, लेकिन वीडियो प्रकाशित करने के मामले में उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी रही। गाने 4 पुरुषों के साथ स्लीवेस ड्रेस में दिखी परस्तू अहमदी ने 27 मिनट का एक वीडियो शेयर किया था, जिसमें वह बिना हिजाब और स्लीव ड्रेस पहनकर चार पुरुष संगीतकारों के साथ गाना गाती नजर आ रही थीं। वीडियो के कैप्शन में उन्होंने इसे काल्पनिक कॉन्सर्ट बताया था। परस्तू के इस प्रोग्राम का वीडियो यूट्यूब पर लाखों बार देखा गया। कई लोगों ने इसे महिलाओं की अभिव्यक्ति की आजादी का प्रतीक बताया, जबकि ईरानी अधिकारियों ने इसे कानून के खिलाफ माना। ईरान में महिलाओं के लिए सार्वजनिक जगहों पर हिजाब पहनना अनिवार्य है। अधिकारियों ने बिना हिजाब पहनकर गाने को नियमों का उल्लंघन माना। पब्लिक में अकेले गाना नहीं गा सकती महिलाएं ईरान के कानून के मुताबिक महिलाएं सार्वजनिक रूप से अकेले गाना नहीं गा सकतीं और न ही बिना हिजाब लोगों के सामने आ सकती हैं। परस्तू अहमदी ने बिना हिजाब और खुले कंधों के साथ परफॉर्म कर इन लंबे समय से लागू प्रतिबंधों को खुली चुनौती दी। वीडियो वायरल होने के बाद परस्तू अहमदी और उनके साथ मौजूद कुछ सिंगर्स को हिरासत में लिया गया था। हालांकि बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया, लेकिन उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी रही। परस्तू 2022 में हिजाब विरोधी प्रदर्शनों के दौरान पहली बार चर्चा में आई थीं। तब उन पर हिजाब विरोधी प्रदर्शन के समर्थन में गाने का आरोप लगा था। इसके बाद सुरक्षा एजेंसियों ने उन्हें पूछताछ के लिए बुलाया था और उनके घर की तलाशी भी ली गई थी। मानवाधिकार संगठनों ने नाराजगी जताई अमेरिका स्थित मानवाधिकार संगठन सेंटर फॉर ह्यूमन राइट्स इन ईरान की एडवोकेसी डायरेक्टर बहार घंदेहरी ने इस सजा की कड़ी आलोचना की है। उनका कहना है कि सिर्फ गाना गाने और बिना हिजाब सार्वजनिक रूप से नजर आने पर 74 कोड़ों की सजा देना दिखाता है कि ईरान में मानवाधिकारों की स्थिति अब भी नहीं बदली है। घंदेहरी ने कहा कि ईरानी सरकार दुनिया के सामने खुद को उदार और सुधारवादी दिखाने की कोशिश करती है, लेकिन कलाकारों के खिलाफ ऐसे कदम उसकी असली तस्वीर सामने लाते हैं। उनके मुताबिक, सरकार जो दिखाती है और जमीन पर जो होता है, दोनों में बड़ा फर्क है। मानवाधिकार वकील मोइन खजाएली ने भी फैसले पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि ईरानी कानून में महिलाओं के गाना गाने, संगीत कार्यक्रम करने या संगीत से जुड़ा कंटेंट बनाने को अपराध नहीं माना गया है। ऐसे में इन कामों को अश्लीलता फैलाने जैसा अपराध बताकर सजा देना कानूनी तौर पर भी कमजोर दलील है। खजाएली का कहना है कि कलाकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं या आम लोगों को कोड़े मारने जैसी सजा सिर्फ कानूनी मुद्दा नहीं, बल्कि मानवाधिकारों का मामला भी है। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई मानवाधिकार संगठन कोड़ों की सजा को न्यायिक दंड नहीं, बल्कि यातना और अमानवीय व्यवहार मानते हैं। ईरान में हिजाब को लेकर लंबे समय से विवाद 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद से ईरान में महिलाओं के लिए हिजाब पहनना कानूनी रूप से जरूरी है। कानून के मुताबिक महिलाओं को पुरुषों की मौजूदगी में सिर ढकना होता है। हालांकि कई महिलाएं इन नियमों का विरोध करती रही हैं। यह मुद्दा 2022 में पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बन गया था, जब 22 वर्षीय महसा अमिनी को तेहरान में हिजाब सही तरीके से न पहनने के आरोप में हिरासत में लिया गया था। गिरफ्तारी के तीन दिन बाद उनकी मौत हो गई थी। ईरानी सरकार ने कहा था कि उनकी मौत पहले से मौजूद स्वास्थ्य समस्याओं के कारण हुई। लेकिन मानवाधिकार संगठनों और संयुक्त राष्ट्र की जांच टीम ने इस दावे पर सवाल उठाए। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में कहा गया था कि अमीनी की मौत ईरानी अधिकारियों की पिटाई के कारण हुई। महसा अमीनी की मौत के बाद पूरे ईरान में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए। हजारों महिलाएं सड़कों पर उतरीं और हिजाब कानूनों के खिलाफ आवाज उठाई। हालांकि सरकार ने इन प्रदर्शनों को सख्ती से दबाया। ईरान में पहले भी महिलाओं को सजा मिली

Iran Singer Concert Hijab Controversy; 74 Lashes Punishment

Iran Singer Concert Hijab Controversy; 74 Lashes Punishment

तेहरान39 मिनट पहले कॉपी लिंक ईरान की मशहूर सिंगर परस्तू अहमदी और उनके साथ काम करने वाले 8 लोगों को ऑनलाइन कॉन्सर्ट के लिए 74-74 कोड़े मारने की सजा सुनाई गई है। उन पर 2 साल तक देश छोड़ने और 2 साल तक किसी भी आर्टिस्टिक एक्टिविटीज पर रोक लगाई गई है। यह सजा ईरान के कोम प्रांत की अदालत ने यूट्यूब पर पब्लिश किए गए एक कॉन्सर्ट के मामले में सुनाई है। अदालत ने आर्टिस्ट पर अश्लील कंटेट पब्लिश करने और सार्वजनिक शालीनता का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। यह मामला दिसंबर 2024 का है। उस समय 29 साल की परस्तू अहमदी ने बिना हिजाब पहने यूट्यूब पर एक लाइव कॉन्सर्ट किया था। इस दौरान उन्होंने ईरान का लोकप्रिय देशभक्ति गीत ‘अज खूने जवानाने वतन’ (मातृभूमि के युवाओं के खून से) गाया था। कॉन्सर्ट का वीडियो कुछ ही समय में वायरल हो गया। यूट्यूब पर इसे लाखों लोगों ने देखा। वीडियो जारी होने के बाद ईरानी अधिकारियों ने परस्तू अहमदी और कई संगीतकारों को कुछ समय के लिए हिरासत में लिया था। बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया, लेकिन वीडियो प्रकाशित करने के मामले में उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी रही। यूट्यूब पर अपलोड होने के बाद परस्तू के गाने को 24 घंटे में 2 मिलियन से ज्यादा व्यूज मिले थे। गाने 4 पुरुषों के साथ स्लीवेस ड्रेस में दिखी परस्तू अहमदी ने 27 मिनट का एक वीडियो शेयर किया था, जिसमें वह बिना हिजाब और स्लीव ड्रेस पहनकर चार पुरुष संगीतकारों के साथ गाना गाती नजर आ रही थीं। वीडियो के कैप्शन में उन्होंने इसे काल्पनिक कॉन्सर्ट बताया था। परस्तू के इस प्रोग्राम का वीडियो यूट्यूब पर लाखों बार देखा गया। कई लोगों ने इसे महिलाओं की अभिव्यक्ति की आजादी का प्रतीक बताया, जबकि ईरानी अधिकारियों ने इसे कानून के खिलाफ माना। ईरान में महिलाओं के लिए सार्वजनिक जगहों पर हिजाब पहनना अनिवार्य है। अधिकारियों ने बिना हिजाब पहनकर गाने को नियमों का उल्लंघन माना। परस्तू कई तस्वीरों में स्लीवड्रेस और बिना हिजाब के नजर आ चुकी हैं। पब्लिक में अकेले गाना नहीं गा सकती महिलाएं ईरान के कानून के मुताबिक महिलाएं सार्वजनिक रूप से अकेले गाना नहीं गा सकतीं और न ही बिना हिजाब लोगों के सामने आ सकती हैं। परस्तू अहमदी ने बिना हिजाब और खुले कंधों के साथ परफॉर्म कर इन लंबे समय से लागू प्रतिबंधों को खुली चुनौती दी। परस्तू 2022 में हिजाब विरोधी प्रदर्शनों के दौरान पहली बार चर्चा में आई थीं। तब उन पर हिजाब विरोधी प्रदर्शन के समर्थन में गाने का आरोप लगा था। इसके बाद सुरक्षा एजेंसियों ने उन्हें पूछताछ के लिए बुलाया था और उनके घर की तलाशी भी ली गई थी। ईरान में हिजाब प्रदर्शन के समय महिलाओं के समर्थन में गाना गाने के लिए ईरान सरकार ने परस्तू पर कार्रवाई की थी। मानवाधिकार संगठनों ने नाराजगी जताई अमेरिका स्थित मानवाधिकार संगठन सेंटर फॉर ह्यूमन राइट्स इन ईरान की एडवोकेसी डायरेक्टर बहार घंदेहरी ने इस सजा की कड़ी आलोचना की है। उनका कहना है कि सिर्फ गाना गाने और बिना हिजाब सार्वजनिक रूप से नजर आने पर 74 कोड़ों की सजा देना दिखाता है कि ईरान में मानवाधिकारों की स्थिति अब भी नहीं बदली है। मानवाधिकार वकील मोइन खजाएली ने भी फैसले पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि ईरानी कानून में महिलाओं के गाना गाने, संगीत कार्यक्रम करने या संगीत से जुड़ा कंटेंट बनाने को अपराध नहीं माना गया है। ऐसे में इन कामों को अश्लीलता फैलाने जैसा अपराध बताकर सजा देना कानूनी तौर पर भी कमजोर दलील है। ईरान में हिजाब को लेकर लंबे समय से विवाद 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद से ईरान में महिलाओं के लिए हिजाब पहनना कानूनी रूप से जरूरी है। कानून के मुताबिक महिलाओं को पुरुषों की मौजूदगी में सिर ढकना होता है। हालांकि कई महिलाएं इन नियमों का विरोध करती रही हैं। यह मुद्दा 2022 में पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बन गया था, जब 22 वर्षीय महसा अमिनी को तेहरान में हिजाब सही तरीके से न पहनने के आरोप में हिरासत में लिया गया था। गिरफ्तारी के तीन दिन बाद उनकी मौत हो गई थी। ईरानी सरकार ने कहा था कि उनकी मौत पहले से मौजूद स्वास्थ्य समस्याओं के कारण हुई। लेकिन मानवाधिकार संगठनों और संयुक्त राष्ट्र की जांच टीम ने इस दावे पर सवाल उठाए। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में कहा गया था कि अमीनी की मौत ईरानी अधिकारियों की पिटाई के कारण हुई। महसा अमीनी की मौत के बाद पूरे ईरान में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए। हजारों महिलाएं सड़कों पर उतरीं और हिजाब कानूनों के खिलाफ आवाज उठाई। हालांकि सरकार ने इन प्रदर्शनों को सख्ती से दबाया। ईरान में महसा अमिनी की मौत के बाद कई महीने तक देश विरोधी प्रदर्शन हुए थे। ईरान में पहले भी महिलाओं को सजा मिली जनवरी 2024- रोया हेशमती पर बिना हिजाब के कई बार घूमने का आरोप लगा। कोर्ट ने 74 कोड़े मारने की सजा सुनाई। 24 हजार रुपए का जुर्माना भी लगा। अप्रैल 2023- हिजाब न पहनने पर एक आदमी ने 2 महिलाओं के सिर पर दही डाल दिया था। इसके बाद पुलिस ने उन दोनों महिलाओं को ही गिरफ्तार कर लिया था। ————————————— ईरान से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… ईरान पीस डील का सबसे बड़ा चेहरा बने जेडी वेंस:जंग रुकी तो अगले राष्ट्रपति बनने के सबसे बड़े दावेदार, फेल हुई तो करियर तबाह अमेरिका और ईरान के बीच बुधवार रात ऐतिहासिक और विवादित पीस डील हुई। इसके बाद से अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इसका सबसे बड़ा चेहरा बनकर उभरे हैं। ‌BBC की रिपोर्ट के मुताबिक वेंस लगातार फ्रंट फुट पर आकर इस फैसले का बचाव कर रहे हैं। पूरी खबर पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

UPL Warns of Fake Electron Seed Treatment; Farmers Alert in UP

UPL Warns of Fake Electron Seed Treatment; Farmers Alert in UP

मेरठ11 मिनट पहले कॉपी लिंक मई 2026 में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कृषि विभाग की छापेमारी के दौरान UPL के बीज उपचार उत्पाद ‘इलेक्ट्रॉन’ (Electron) की 2,500 लीटर नकली खेप जब्त की गई है। ‘इलेक्ट्रॉन’ की निर्माता कंपनी UPL ने नकली कृषि उत्पादों की बढ़ती मौजूदगी को लेकर एक नई चेतावनी जारी की है। कंपनी ने किसानों से बीज उपचार उत्पाद खरीदते समय सावधानी बरतने का आग्रह किया है। ‘इलेक्ट्रॉन’ UPL का बीज उपचार समाधान है जिसे फसल उगने के शुरुआती चरणों में बीजों और अंकुरों की सुरक्षा के लिए बनाया गया है। यह उत्पाद फफूंदनाशक और कीटनाशक सुरक्षा का मिश्रण है, जो बीजों को शुरुआती कीटों और बीमारियों से बचाता है और साथ ही फसल के स्वस्थ विकास में मदद करता है। UPL का कहना है कि असली बीज उपचार उत्पादों का उपयोग फसल के सही विकास और खेत की दीर्घकालिक उत्पादकता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। असली और नकली का फर्क समझ लें किसान छापेमारी के दौरान जब्त किए गए नकली सामान में उत्पाद से जुड़ी कई बुनियादी जानकारियां गायब थीं, जो असली कृषि उत्पादों पर होनी चाहिए। इनमें निर्माण और एक्सपायरी की जानकारी और बैच नंबर शामिल हैं। UPL ने कहा कि ऐसी जानकारी का न होना किसानों के लिए खरीदारी से पहले एक चेतावनी का संकेत होना चाहिए और जोर दिया कि बिना सही लेबलिंग वाले उत्पाद खरीदने से बचना चाहिए। कंपनी ने कहा कि यह घटना किसानों के बीच मिलते-जुलते दिखने वाले कृषि-रसायन उत्पादों के बारे में अधिक जागरूकता की आवश्यकता को उजागर करती है। UPL लगातार ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों में जागरूकता को बढ़ावा दे रही है जिनका उद्देश्य उत्पादकों को जिम्मेदार कृषि पद्धतियों और सोच-समझकर उत्पाद चुनने के बारे में शिक्षित करना है। कंपनी का मानना है कि ऐसी पहल देश भर में चलाए जा रहे व्यापक किसान जागरूकता अभियानों की पूरक हैं, जिनका उद्देश्य सोच-समझकर निर्णय लेने और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहित करना है। UPL ने कहा कि बाजार में आने वाले नकली या मिलते-जुलते उत्पादों से किसानों को बचाने के लिए जागरूकता सबसे मज़बूत तरीकों में से एक है। कंपनी ने किसानों को सलाह दी कि वे उत्पादों के लेबल को ध्यान से देखें, एक्सपायरी डेट और मैन्युफैक्चरिंग की जानकारी चेक करें, सामग्री के बारे में जानकारी देखें, रिटेलर से इनवॉइस की कॉपी लें, असली होने की पुष्टि के लिए पैक पर मौजूद QR कोड को स्कैन करें, पैक की सील जांचें और यह पक्का करने के बाद ही उत्पाद खरीदें कि पैकेजिंग पर सभी जरूरी जानकारी मौजूद है। कंपनी ने चेतावनी दी कि बहुत सस्ते मिलने वाले उत्पाद आकर्षक लग सकते हैं। लेकिन ऐसे उत्पाद उम्मीद के मुताबिक काम नहीं करते और समय के साथ फसल की सेहत पर बुरा असर डाल सकते हैं। किसानों से सतर्कता बरतने की अपील UPL के एक प्रवक्ता ने कहा, “नकली कृषि उत्पादों का बढ़ना किसान समुदाय के लिए गंभीर चिंता का विषय है। किसानों को सतर्क रहना चाहिए और यह पक्का करना चाहिए कि वे अपनी फसलों के लिए बीज उपचार से जुड़े सही और असली उत्पाद खरीदें। सस्ते विकल्प चुनने से मनचाहा नतीजा नहीं मिलता और ऐसे उत्पाद लंबे समय में उनकी पैदावार को नुकसान पहुंचा सकते हैं। कुछ भी खरीदने से पहले उसकी असलियत की जांच करना बहुत जरूरी है। मिलते-जुलते उत्पादों को बाजार में आने से रोकने और किसानों के मूल्यवान निवेश की सुरक्षा के लिए उनके बीच जागरूकता पैदा करना भी जरूरी है। हम किसानों से अपील करते हैं कि वे इस मामले में किसी भी मदद के लिए UPL के प्रतिनिधियों से संपर्क करें और अपने आसपास नजर आने वाले किसी भी संदिग्ध व्यापार के बारे में जानकारी दें।” कंपनी ने दोहराया कि नकली कृषि उत्पादों से किसानों की सुरक्षा करना उसकी प्राथमिकता है। UPL नकली उत्पादों की चुनौती से निपटने के लिए अधिकारियों के साथ मिलकर काम करते हुए जागरूकता अभियानों में सहयोग करना जारी रखेगी। UPL का मानना है कि जानकारी के साथ खरीदारी के फैसले और किसानों के स्तर पर ज्यादा सतर्कता नकली उत्पादों की सप्लाई को रोकने और फसल की उत्पादकता सुरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। UPL SAS के बारे में UPL सस्टेनेबल एग्रीकल्चर सॉल्यूशंस (UPL SAS) भारत का सबसे बड़ा इंटीग्रेटेड एग्री-टेक प्लेटफॉर्म है। यह किसानों को फसल सुरक्षा और पोषण, बीज उपचार, मिट्टी के पोषण, कृषि और डिजिटल सेवाओं में अपनी विशेषज्ञता का इस्तेमाल करके कृषि से जुड़ी लगभग सभी जरूरतों के लिए एक ही जगह समाधान देता है। UPL SAS किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए भारतीय कृषि में बदलाव लाने पर काम कर रहा है। UPL ग्रुप के खास प्लेटफॉर्म में से एक होने के नाते, UPL SAS हर खाद्य उत्पाद को ज्यादा पर्यावरण हितैषी बनाकर भारत में सस्टेनेबल एग्रीकल्चर यानी टिकाऊ कृषि की ओर बदलाव में तेजी ला रहा है। अधिक जानकारी के लिए लॉग इन करें: https://www.upl-ltd.com/ ————————————————————————————————————— दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

UPL Warns of Fake Electron Seed Treatment; Farmers Alert in UP

UPL Warns of Fake Electron Seed Treatment; Farmers Alert in UP

मेरठ28 मिनट पहले कॉपी लिंक मई 2026 में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कृषि विभाग की छापेमारी के दौरान UPL के बीज उपचार उत्पाद ‘इलेक्ट्रॉन’ (Electron) की 2,500 लीटर नकली खेप जब्त की गई है। ‘इलेक्ट्रॉन’ की निर्माता कंपनी UPL ने नकली कृषि उत्पादों की बढ़ती मौजूदगी को लेकर एक नई चेतावनी जारी की है। कंपनी ने किसानों से बीज उपचार उत्पाद खरीदते समय सावधानी बरतने का आग्रह किया है। ‘इलेक्ट्रॉन’ UPL का बीज उपचार समाधान है जिसे फसल उगने के शुरुआती चरणों में बीजों और अंकुरों की सुरक्षा के लिए बनाया गया है। यह उत्पाद फफूंदनाशक और कीटनाशक सुरक्षा का मिश्रण है, जो बीजों को शुरुआती कीटों और बीमारियों से बचाता है और साथ ही फसल के स्वस्थ विकास में मदद करता है। UPL का कहना है कि असली बीज उपचार उत्पादों का उपयोग फसल के सही विकास और खेत की दीर्घकालिक उत्पादकता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। असली और नकली का फर्क समझ लें किसान छापेमारी के दौरान जब्त किए गए नकली सामान में उत्पाद से जुड़ी कई बुनियादी जानकारियां गायब थीं, जो असली कृषि उत्पादों पर होनी चाहिए। इनमें निर्माण और एक्सपायरी की जानकारी और बैच नंबर शामिल हैं। UPL ने कहा कि ऐसी जानकारी का न होना किसानों के लिए खरीदारी से पहले एक चेतावनी का संकेत होना चाहिए और जोर दिया कि बिना सही लेबलिंग वाले उत्पाद खरीदने से बचना चाहिए। कंपनी ने कहा कि यह घटना किसानों के बीच मिलते-जुलते दिखने वाले कृषि-रसायन उत्पादों के बारे में अधिक जागरूकता की आवश्यकता को उजागर करती है। UPL लगातार ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों में जागरूकता को बढ़ावा दे रही है जिनका उद्देश्य उत्पादकों को जिम्मेदार कृषि पद्धतियों और सोच-समझकर उत्पाद चुनने के बारे में शिक्षित करना है। कंपनी का मानना है कि ऐसी पहल देश भर में चलाए जा रहे व्यापक किसान जागरूकता अभियानों की पूरक हैं, जिनका उद्देश्य सोच-समझकर निर्णय लेने और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहित करना है। UPL ने कहा कि बाजार में आने वाले नकली या मिलते-जुलते उत्पादों से किसानों को बचाने के लिए जागरूकता सबसे मज़बूत तरीकों में से एक है। कंपनी ने किसानों को सलाह दी कि वे उत्पादों के लेबल को ध्यान से देखें, एक्सपायरी डेट और मैन्युफैक्चरिंग की जानकारी चेक करें, सामग्री के बारे में जानकारी देखें, रिटेलर से इनवॉइस की कॉपी लें, असली होने की पुष्टि के लिए पैक पर मौजूद QR कोड को स्कैन करें, पैक की सील जांचें और यह पक्का करने के बाद ही उत्पाद खरीदें कि पैकेजिंग पर सभी जरूरी जानकारी मौजूद है। कंपनी ने चेतावनी दी कि बहुत सस्ते मिलने वाले उत्पाद आकर्षक लग सकते हैं। लेकिन ऐसे उत्पाद उम्मीद के मुताबिक काम नहीं करते और समय के साथ फसल की सेहत पर बुरा असर डाल सकते हैं। किसानों से सतर्कता बरतने की अपील UPL के एक प्रवक्ता ने कहा, “नकली कृषि उत्पादों का बढ़ना किसान समुदाय के लिए गंभीर चिंता का विषय है। किसानों को सतर्क रहना चाहिए और यह पक्का करना चाहिए कि वे अपनी फसलों के लिए बीज उपचार से जुड़े सही और असली उत्पाद खरीदें। सस्ते विकल्प चुनने से मनचाहा नतीजा नहीं मिलता और ऐसे उत्पाद लंबे समय में उनकी पैदावार को नुकसान पहुंचा सकते हैं। कुछ भी खरीदने से पहले उसकी असलियत की जांच करना बहुत जरूरी है। मिलते-जुलते उत्पादों को बाजार में आने से रोकने और किसानों के मूल्यवान निवेश की सुरक्षा के लिए उनके बीच जागरूकता पैदा करना भी जरूरी है। हम किसानों से अपील करते हैं कि वे इस मामले में किसी भी मदद के लिए UPL के प्रतिनिधियों से संपर्क करें और अपने आसपास नजर आने वाले किसी भी संदिग्ध व्यापार के बारे में जानकारी दें।” कंपनी ने दोहराया कि नकली कृषि उत्पादों से किसानों की सुरक्षा करना उसकी प्राथमिकता है। UPL नकली उत्पादों की चुनौती से निपटने के लिए अधिकारियों के साथ मिलकर काम करते हुए जागरूकता अभियानों में सहयोग करना जारी रखेगी। UPL का मानना है कि जानकारी के साथ खरीदारी के फैसले और किसानों के स्तर पर ज्यादा सतर्कता नकली उत्पादों की सप्लाई को रोकने और फसल की उत्पादकता सुरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। UPL SAS के बारे में UPL सस्टेनेबल एग्रीकल्चर सॉल्यूशंस (UPL SAS) भारत का सबसे बड़ा इंटीग्रेटेड एग्री-टेक प्लेटफॉर्म है। यह किसानों को फसल सुरक्षा और पोषण, बीज उपचार, मिट्टी के पोषण, कृषि और डिजिटल सेवाओं में अपनी विशेषज्ञता का इस्तेमाल करके कृषि से जुड़ी लगभग सभी जरूरतों के लिए एक ही जगह समाधान देता है। UPL SAS किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए भारतीय कृषि में बदलाव लाने पर काम कर रहा है। UPL ग्रुप के खास प्लेटफॉर्म में से एक होने के नाते, UPL SAS हर खाद्य उत्पाद को ज्यादा पर्यावरण हितैषी बनाकर भारत में सस्टेनेबल एग्रीकल्चर यानी टिकाऊ कृषि की ओर बदलाव में तेजी ला रहा है। अधिक जानकारी के लिए लॉग इन करें: https://www.upl-ltd.com/ ————————————————————————————————————— दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

Gold & Silver Prices Fall Today

Gold & Silver Prices Fall Today

नई दिल्ली6 मिनट पहले कॉपी लिंक सोने-चांदी के दाम में 19 जून को गिरावट है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, एक किलो चांदी 9,209 रुपए गिरकर 2.31 लाख रुपए पर आ गई। इससे पहले इसकी कीमत 2.40 रुपए प्रति किलो थी। वहीं 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 3,152 रुपए गिरकर 1.45 लाख रुपए पर आ गया है। एक दिन पहले इसकी कीमत 1.48 रुपए थी। इस महीने 19 दिन में सोना अब तक 11 हजार रुपए और चांदी 32 हजार रुपए सस्ती हुई है। सोने-चांदी के दाम में गिरावट की वजह यूएस-ईरान समझौता: अमेरिका-ईरान के बीच युद्धविराम समझौता साइन हुआ है। इसकी वजह से पश्चिम एशिया में युद्ध का खतरा कम हो गया, जिससे निवेशकों ने सोने-चांदी जैसे ‘सुरक्षित निवेश’ से अपना पैसा निकालना शुरू कर दिया। यूएस फेडरल रिजर्व का रुख: फेडरल रिजर्व ने हाल ही में संकेत दिए हैं कि वह इस साल ब्याज दरों में कटौती करने के बजाय उन्हें बढ़ा सकता है। ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीद से सोने जैसी बिना ब्याज वाली धातु की चमक कम हो जाती है। मजबूत अमेरिकी डॉलर: फेडरल रिजर्व के संकेतों के बाद वैश्विक बाजार में अमेरिकी डॉलर इंडेक्स मजबूत हुआ है। आमतौर पर जब डॉलर मजबूत होता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी की कीमतें गिरती हैं। मुनाफावसूली: पिछले कुछ समय पहले सोने और चांदी की कीमतें अपने रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुकी थीं। दामों में इतनी बड़ी तेजी आने के बाद बड़े निवेशकों और ट्रेडर्स ने मुनाफावसूली की, जिससे कीमतों में अचानक तेज गिरावट आई। ईटीएफ में बिकवाली: सुरक्षित निवेश का आकर्षण कम होने से गोल्ड-सिल्वर ETFs में भारी बिकवाली देखी गई। आज सिल्वर ईटीएफ में 6% और गोल्ड ईटीएफ में 3% की गिरावट है, जिसने घरेलू बाजार के भाव को नीचे खींचा है। ऑल टाइम हाई से 31 हजार रुपए गिरा सोना इस साल सोने-चांदी की कीमत में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। 31 दिसंबर 2025 को सोने के दाम 1.33 लाख रुपए थे, जो 29 जनवरी को बढ़कर 1.76 लाख रुपए के सबसे ऊपरी स्तर पर पहुंच गए थे। तब से अब तक सोना 32 हजार रुपए सस्ता हो चुका है। वहीं चांदी की कीमत 31 दिसंबर 2025 को 2.30 लाख रुपए थी, जो 29 जनवरी को 3.86 लाख रुपए के ऑलटाइम हाई पर पहुंच गई थी। तब से अब तक चांदी 1.55 लाख रुपए सस्ती हो गई है। ज्वेलर्स से सोना खरीदते समय इन 2 बातों का रखें ध्यान सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें: हमेशा ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) का हॉलमार्क लगा हुआ सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें। ये नंबर अल्फान्यूमेरिक यानी कुछ इस तरह से हो सकता है- AZ4524। हॉलमार्किंग से पता चलता है कि सोना कितने कैरेट का है। कीमत क्रॉस चेक करें: सोने का सही वजन और खरीदने के दिन उसकी कीमत कई सोर्सेज (जैसे इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट) से क्रॉस चेक करें। सोने का भाव 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट के हिसाब से अलग-अलग होता है। असली चांदी की पहचान करने के 4 तरीके मैग्नेट टेस्ट: असली सिल्वर चुंबक से नहीं चिपकती। अगर चिपक जाए तो फेक है। आइस टेस्ट: सिल्वर पर बर्फ रखें। असली सिल्वर पर बर्फ तेजी से पिघलती है। स्मेल टेस्ट: असली सिल्वर में गंध नहीं होती। फेक में कॉपर जैसी गंध आती है। क्लॉथ टेस्ट: चांदी को सफेद कपड़े से रगड़ें। अगर काला निशान आए तो असली है। ये खबर भी पढ़ें… सेंसेक्स 800 अंक गिरकर 76,600 पर आया: निफ्टी भी 200 अंक गिरा; IT शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली, इंफोसिस 8% तक टूटा शेयर बाजार में आज यानी 19 जून को गिरावट है। सेंसेक्स करीब 800 अंक गिरकर 76,600 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। निफ्टी में भी 200 अंकों की गिरावट है, ये 23,950 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Reliance 49th AGM | Big Signal on Jio, Retail IPO Listing Date & Market Watch

Reliance 49th AGM | Big Signal on Jio, Retail IPO Listing Date & Market Watch

Hindi News Business Reliance 49th AGM | Big Signal On Jio, Retail IPO Listing Date & Market Watch मुंबई8 मिनट पहले कॉपी लिंक रिलायंस इंडस्ट्रीज अपनी 49वीं एनुअल जनरल मीटिंग आज दोपहर 2 बजे होगी। इस बार निवेशक किसी नए बिजनेस के ऐलान के बजाय इस बात पर क्लैरिटी चाहते हैं कि जियो प्लेटफॉर्म्स की लिस्टिंग कब होगी। पिछले साल रिलायंस ने इस आईपीओ का ऐलान किया था और संकेत दिया था कि जियो को 2026 की पहली छमाही में लिस्ट किया जा सकता है। रिलायंस रिटेल के आईपीओ का भी ऐलान हो सकता है जियो के साथ-साथ, निवेशक रिलायंस रिटेल के संभावित आईपीओ को लेकर भी संकेतों का इंतजार कर रहे हैं। नए स्टोर खोलने, लगातार बढ़ती ग्राहकों की संख्या और डिजिटल व क्विक-कॉमर्स चैनलों में ग्रोथ के दम पर रिटेल बिजनेस ग्रुप के सबसे अहम ग्रोथ इंजनों में से एक बनकर उभरा है। ऐसे में लिस्टिंग के प्लान या लॉन्ग-टर्म ग्रोथ टारगेट को लेकर बयान पर निवेशकों की नजरें रहेंगी। चौथी तिमाही में कंपनी का मुनाफा 13% गिरा वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च) में रिलायंस का नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 13% घटकर 16,971 करोड़ रुपए रहा। एक साल पहले की समान तिमाही में प्रॉफिट ₹19,407 करोड़ था। हालांकि, इस दौरान कंपनी का रेवेन्यू 13% बढ़कर 2.98 लाख करोड़ रुपए पहुंच गया है। एक साल पहले की समान तिमाही यानी जनवरी-मार्च 2025 में 2.64 लाख करोड़ रुपए रहा था। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

फैक्ट्री रीसेट से नहीं मिटता डेटा, सर्वे में हुआ खुलासा:69 फीसदी भारतीय फोन बेचने से कतरा रहे; डेटा के गलत इस्तेमाल का डर

फैक्ट्री रीसेट से नहीं मिटता डेटा, सर्वे में हुआ खुलासा:69 फीसदी भारतीय फोन बेचने से कतरा रहे; डेटा के गलत इस्तेमाल का डर

भारत में स्मार्टफोन रीसेल मार्केट तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन डेटा सुरक्षा की चिंता अब भी सबसे बड़ी रुकावट बनी हुई है। रीकॉमर्स प्लेटफॉर्म कैशिफाई के एक सर्वे के मुताबिक, 69% उपभोक्ता प्राइवेसी को लेकर डर की वजह से अपना पुराना फोन बेचने से बचते हैं। 8,000 लोगों पर हुए इस सर्वे में 74% ने कहा कि फोन बेचने के बाद पर्सनल डेटा के गलत इस्तेमाल की आशंका रहती है, हालांकि 56.6% लोग पहले ही अपना स्मार्टफोन बेच या एक्सचेंज कर चुके हैं, यानी रीसेल अब आम चलन बन गया है। कैशिफाई के सह-संस्थापक नकुल कुमार के मुताबिक, भागीदारी और जागरूकता दोनों बढ़ रही हैं, लेकिन डेटा सुरक्षा की जिम्मेदारी अब भी ज्यादातर उपभोक्ता पर ही टिकी है। उनका कहना है कि हर डिवाइस में सालों की पर्सनल, फाइनेंशियल और पहचान से जुड़ी जानकारी जमा होती है, इसलिए यह जिम्मेदारी संगठित प्लेटफॉर्म और नीतिगत ढांचे को भी उठानी चाहिए। सर्वे बताता है कि अब फोन बेचने का फैसला सिर्फ कीमत पर नहीं टिका। 45.3% लोगों ने डेटा प्राइवेसी और सुरक्षा को सबसे जरूरी फैक्टर बताया, जबकि सिर्फ 29.5% ने कीमत को तरजीह दी। फोन बेचने से पहले 83.3 फीसदी लोग फैक्ट्री रीसेट करते हैं, लेकिन 41.1 फीसदी मानते हैं कि इससे डेटा हमेशा के लिए नहीं मिटता। 31 फीसदी लोगों ने तो डिलीट किया गया डेटा वापस निकालने में भी कामयाबी पाई। सर्वे में भरोसे से जुड़े आंकड़े भी सामने आए। 68.6% लोगों ने कहा कि सर्टिफाइड सिक्योर डेटा डिलीशन देने वाले प्लेटफॉर्म पर उनका भरोसा बढ़ेगा, जबकि 83.3 फीसदी के लिए डेटा डिलीशन सर्टिफिकेट जरूरी शर्त है। आधे से ज्यादा, यानी 50.8 फीसदी लोग इसके लिए छोटी सी फीस देने को भी तैयार हैं। 15.6% लोगों को तो यह पता ही नहीं था कि सुरक्षित रीसेल के विकल्प मौजूद हैं, जबकि सिर्फ 6.3% ने खरीदारों के दबाव की शिकायत की। फैक्ट्री रीसेट और सिक्योर डिलीशन में फर्क समझना जरूरी कैशिफाई के सीईओ मंदीप मनोचा के मुताबिक, ज्यादातर उपभोक्ता फैक्ट्री रीसेट और सिक्योर डेटा डिलीशन को एक ही समझते हैं, जो गलत है। फैक्ट्री रीसेट सिर्फ फाइलों और ऐप्स का एक्सेस हटाता है, लेकिन डिवाइस के हार्डवेयर में डेटा बना रह सकता है, जिसे स्पेशल रिकवरी टूल्स से वापस निकाला जा सकता है। सिक्योर या सर्टिफाइड डेटा डिलीशन में डेटा को बार-बार ओवरराइट किया जाता है, जिससे उसे वापस पाना लगभग नामुमकिन हो जाता है।