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श्रीसंत बोले- इंडिया को कोच नहीं, धोनी जैसा मेंटर चाहिए:गंभीर की कोचिंग पर सवाल उठाए, कहा- उनका तरीका गलत

श्रीसंत बोले- इंडिया को कोच नहीं, धोनी जैसा मेंटर चाहिए:गंभीर की कोचिंग पर सवाल उठाए, कहा- उनका तरीका गलत

पूर्व भारतीय पेसर एस श्रीसंत ने टीम इंडिया के हेड कोच गौतम गंभीर की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा है कि इंडिया को ट्रेडिशनल कोच नहीं, बल्कि एमएस धोनी जैसे मेंटर की जरूरत है। 43 साल के श्रीसंत ने कहा- ‘कोच बदल दीजिए। भारत को कोच नहीं, मेंटर की जरूरत है।’ उन्होंने लल्लनटॉप से कहा- ‘खिलाड़ियों पर ज्यादा दबाव बनाने के बजाय मार्गदर्शन और भरोसा देने वाला नेतृत्व टीम के लिए ज्यादा फायदेमंद होता है।’ श्रीसंत ने भारतीय टेस्ट टीम के हालिया प्रदर्शन पर भी सवाल उठाए। उन्होंने न्यूजीलैंड और साउथ अफ्रीका के खिलाफ मिली सीरीज हार पर गंभीर की कोचिंग शैली पर आपत्ति जताई। भारतीय टीम पिछले साल अपने घर में साउथ अफ्रीका से 2-0 से हार गई थी। तब भी गंभीर की कोचिंग पर सवाल उठे थे। कहा- टीम के साथ बड़े भाई जैसा रिश्ता चाहिए श्रीसंत ने कहा कि टीम के साथ बड़े भाई जैसा रिश्ता होना चाहिए। केवल जीत पर खुश होना और हार पर नाराज होना काफी नहीं है। खिलाड़ियों को सहयोग और विश्वास की जरूरत होती है। उन्होंने महेंद्र सिंह धोनी का उदाहरण देते हुए कहा कि भारतीय टीम की कई सफलताओं के पीछे उनकी सोच और नेतृत्व शैली रही है। वर्ल्ड कप की जीत में सिर्फ कोच का योगदान नहीं श्रीसंत ने 2026 टी-20 वर्ल्ड कप जीत का पूरा श्रेय गौतम गंभीर को दिए जाने पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि खिलाड़ियों और कप्तान के योगदान को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा, ‘जब टीम ने वर्ल्ड कप जीता तो पूरा श्रेय गंभीर को दिया गया। लेकिन, सैमसन नहीं होते, सूर्यकुमार यादव कप्तानी नहीं करते और सही समय पर गेंदबाजी में बदलाव नहीं होते, तो क्या भारत जीत पाता?’ भारत के लिए 2 वर्ल्ड कप जीत चुके हैं श्रीसंथ दाएं हाथ के तेज गेंदबाज एस श्रीसंथ ने भारत की ओर से 2 वर्ल्ड कप जीते हैं। वे 2011 में वनडे और 2007 में टी-20 वर्ल्ड कप जीतने वाली टीम इंडिया का हिस्सा रहे हैं। उन्होंने 27 टेस्ट मैचों में 87 विकेट झटके हैं। उन्होंने 53 वनडे और टी-20 इंटरनेशनल मैच भी खेले हैं। IPL के 44 मैच में श्रीसंत के नाम 40 विकेट हैं। 2013 में फिक्सिंग के आरोप में श्रीसंत पर लगा था बैन मई 2013 में IPL के दौरान उन पर स्पॉट फिक्सिंग के आरोप लगे थे। उन्हें दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया था। इसके बाद BCCI ने उन्हें लाइफ टाइम के लिए बैन कर दिया गया था। हालांकि, इन आरोपों के खिलाफ श्रीसंत ने लंबी लड़ाई और साल 2015 में विशेष अदालत ने उन्हें आरोपों से बरी कर दिया था। साल 2018 में केरल हाईकोर्ट ने उन पर लगे अजीवन प्रतिबंध को खत्म किया। लेकिन, 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने BCCI को उसकी सजा कम करने को कहा। बाद में बोर्ड ने उन पर लगे आजीवन प्रतिबंध को 7 साल तक कम कर दिया था, जो सितंबर 2020 में खत्म हो गया। 3 साल पहले उन पर केरल पुलिस ने धोखाधडी और ठगी का मामला दर्ज किया। ———————————– टीम इंडिया से जुड़ी यह खबर भी पढ़िए… हर्षित राणा तीसरे वनडे के लिए भारतीय टीम में शामिल तेज गेंदबाज हर्षित राणा को अफगानिस्तान के खिलाफ तीसरे वनडे के लिए टीम इंडिया में शामिल किया गया है। BCCI ने शुक्रवार को बताया कि राणा ने सेंटर ऑफ एक्सीलेंसी में रिहैबिटेशन पूरा कर लिया है। वे चेन्नई में भारतीय टीम से जुड़ गए हैं। पढ़ें पूरी खबर

अमेरिका के 11 शहरों की कहानी कहता फीफा वर्ल्ड कप:फुटबॉल का अनूठा रंग; कहीं लैटिन कार्निवल तो कहीं मैक्सिकन फुटबॉल का कल्चर

अमेरिका के 11 शहरों की कहानी कहता फीफा वर्ल्ड कप:फुटबॉल का अनूठा रंग; कहीं लैटिन कार्निवल तो कहीं मैक्सिकन फुटबॉल का कल्चर

जब फुटबॉल का बुखार अमेरिका पहुंचता है, तो वह किसी एक राष्ट्रीय संस्कृति से बंधे देश में प्रवेश नहीं करता। अर्जेंटीना, ब्राजील, इंग्लैंड या जर्मनी जैसे देशों में फुटबॉल पूरे देश को एक धागे में पिरोता है। लेकिन अमेरिका इसके ठीक उलट एक बिल्कुल अलग और अनूठा अनुभव पेश कर रहा है। इस बार का फीफा वर्ल्ड कप अमेरिका के 11 अलग-अलग शहरों में खेला जा रहा है और इनमें से हर शहर का अपना एक अलग प्रवासी इतिहास, अपनी खेल परंपराएं और अपनी एक विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान है। इस वजह से अमेरिका के इन 11 अलग-अलग श्शहर रूपी देशों’ के अनूठे मिजाज का एक वैश्विक जश्न नजर आ रहा है। मियामी के लैटिन कार्निवल वाले माहौल से लेकर लॉस एंजिलिस की मैक्सिकन फुटबॉल संस्कृति तक, यह वर्ल्ड कप किसी एक राष्ट्र की कहानी न होकर, अलग-अलग शहरों की कहानी बनता जा रहा है। 1. मियामी – मेसी का गढ़, कैफे और बार में स्पेनिश फैंस का शोर जब से मेसी इंटर मियामी क्लब से जुड़े हैं, तब से दक्षिण फ्लोरिडा में फुटबॉल एक सांस्कृतिक घटना बन गया है। बार और कैफे स्पेनिश, अंग्रेजी और पुर्तगाली भाषाओं के शोर से गूंज उठते हैं। इस दौरान मियामी एक अमेरिकी शहर की तरह कम और लैटिन अमेरिका की फुटबॉल राजधानी की तरह ज्यादा महसूस होने वाला है। 2. लॉस एंजिलिस – मैक्सिकन मूल की सबसे बड़ी आबादी यहीं यह मैक्सिको के बाहर मैक्सिकन मूल की सबसे बड़ी आबादी वाला शहर है। दीवारों पर बने भित्ति चित्र, स्थानीय लीग और फैन ग्रुप इस शहर को एक ऐसी फुटबॉल पहचान देते हैं, जिससे यहां का माहौल ग्वाडलहारा या मॉन्टेरी (मैक्सिको के शहर) जैसा लगता है। 3. डलास – जहां फुटबॉल से मिलती है टेक्सास की भव्यता यहां हर चीज बहुत बड़ी और भव्य होती है। डलास मजबूत मैक्सिकन-अमेरिकी फुटबॉल परंपराओं को टेक्सास शैली की महत्वाकांक्षा के साथ जोड़ता है। कॉर्पोरेट हॉस्पिटैलिटी जोन, बड़े पैमाने पर फैन फेस्टिवल और विशाल बुनियादी ढांचा इस शहर को टूर्नामेंट के मुख्य आकर्षणों में से एक बनाती हैं। 4. न्यूयॉर्क – न्यू जर्सी: एक स्टेडियम में बसी पूरी दुनिया यह क्षेत्र बड़ी संख्या में भारतीय, बांग्लादेशी, पाकिस्तानी, डोमिनिकन, इक्वाडोरियन, नाइजीरियाई, मिस्र, इतालवी, आयरिश, लैटिन अमेरिकी समुदायों का घर है। स्टेडियम तक की ट्रेन यात्रा में ही आधा दर्जन देशों के समर्थक एक साथ मिल सकते हैं। 5. ह्यूस्टन – लैटिन अमेरिकी कल्चर, फुटबॉल पहले से जीवन का हिस्सा शहर की बड़ी मैक्सिकन, मध्य अमेरिकी और दक्षिण अमेरिकी आबादी ने दशकों से यहां एक संपन्न फुटबॉल संस्कृति का निर्माण किया है। सामुदायिक लीग और युवा एकेडमी पहले से ही प्रवासी लोगों के लिए मेलजोल का जरिया हैं। यहां फुटबॉल रोजमर्रा के जीवन का हिस्सा है। 6. सिएटल – डिजिटल युग का फुटबॉल, यहां उच्च शिक्षित फैंस सिएटल ने जिस स्वाभाविक तरीके से फुटबॉल को अपनाया है, वैसा बहुत कम अमेरिकी शहरों ने किया है। शहर की संस्कृति में पारंपरिक समर्थकों के जुनून के साथ-साथ एक युवा, उच्च शिक्षित टेक वर्कफोर्स का प्रभाव दिखता है। डेटा-संचालित फैन एंगेजमेंट और डिजिटल समुदाय यहां की फुटबॉल का हिस्सा है। 7. सैन फ्रांसिस्को – ‘सिलिकॉन वैली’ से मिलेगा खूबसूरत खेल बे एरिया की फुटबॉल कहानी खुद इस क्षेत्र को दर्शाती है। मैच सांता क्लारा में हो रहे हैं, जो सिलिकॉन वैली का दिल है। भारत, चीन से लेकर लैटिन अमेरिका और यूरोप तक के इस क्षेत्र के अप्रवासी समुदाय फुटबॉल का सपोर्ट कर रहे हैं। एआई, ऑगमेंटेड रि​यलिटी के जरिए फैंस को लुभाया जा रहा है। 8. फिलाडेल्फिया – यूरोप के पारंपरिक फुटबॉल जैसा जुनून यहां के फैंस अपने भावनात्मक जुड़ाव और वफादारी के लिए जाने जाते हैं। यह संस्कृति इस शहर को टूर्नामेंट के सबसे शानदार माहौल वाले स्थानों में से एक बनाती है। फिलाडेल्फिया के फैंस की भीड़ यूरोप के पारंपरिक फुटबॉल शहरों की याद दिलाती है। 9. बोस्टन – क्लब फुटबॉल का भी रोमांच आयरिश, पुर्तगाली, इतालवी और लैटिन अमेरिकी समुदायों ने पीढ़ियों से स्थानीय फुटबॉल परंपराओं को कायम रखा है। पूरे शहर के पब नियमित रूप से प्रीमियर लीग, चैम्पियंस लीग जैसे क्लब फुटबॉल टूर्नामेंट के दौरान भर जाते हैं। 10. अटलांटा – सबसे तेजी से उभरता शहर यह शहर अमेरिका के दक्षिण में सबसे तेजी से बढ़ते अंतरराष्ट्रीय केंद्रों में से एक के रूप में उभरा है, जो अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और एशिया के प्रवासियों को आकर्षित कर रहा है। हालांकि, लोग अभी भी अटलांटा की फुटबॉल संस्कृति को कम आंकते हैं। 11. कंसास – अमेरिका की फुटबॉल राजधानी फुटबॉल के जानकारों के बीच कंसास सिटी की प्रतिष्ठा अक्सर बाहरी लोगों को आश्चर्यचकित करती है। इस शहर ने फुटबॉल के बुनियादी ढांचे में भारी निवेश किया है और यह अमेरिका में सबसे मजबूत फुटबॉल समुदायों में से एक है।

Muthoot Finance MY FM Launch Sunheri Soch Campaign

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नई दिल्ली1 मिनट पहले कॉपी लिंक भारत का गोल्ड लोन बाजार पिछले पांच सालों में 14.85% CAGR की दर से बढ़ा है। भारतीय घरों में लगभग 27,000 टन सोना मौजूद है, लेकिन इसमें से सिर्फ 20% ही अभी तक गिरवी रखा गया है। अभी भी 65% गोल्ड लोन बाजार अनऑर्गेनाइज्ड सेक्टर के हाथ में है। सवाल यह उठता है कि इतना सोना होते हुए भी लोग बैंक या NBFC का दरवाजा क्यों नहीं खटखटाते? जवाब आंकड़ों में नहीं, भावनाओं में है। भारत में सोना सिर्फ गहना नहीं होता, यह पीढ़ियों की कमाई है, मां की विरासत है, परिवार की सुरक्षा का प्रतीक है। जब यही सोना जरूरत के समय गिरवी रखने की नौबत आती है, तो मन में एक ही आवाज गूंजती है कि लोग क्या कहेंगे? यही झिझक, यही सामाजिक डर दशकों से करोड़ों भारतीयों को अपने सोने का सही फायदा उठाने से रोकता रहा है। इसी दीवार को तोड़ने का बेड़ा मुथूट फाइनेंस गोल्ड लोन ने उठाया और माध्यम बना रेडियो। मुथूट फाइनेंस लगातार कई सालों से भारत का नंबर-1 सबसे भरोसेमंद फाइनेंशियल सर्विसेज ब्रांड है। हालांकि, नंबर-1 बने रहना काफी नहीं था। मुथूट फाइनेंस चाहता था कि गोल्ड लोन मजबूरी का साथी ना बनकर सपनों को सच करने का जरिया बने। सुनहरी सोच- एक विज्ञापन नहीं, एक आंदोलन मुथूट फाइनेंस ने रेडियो के साथ साझेदारी करके ‘सुनहरी सोच’ अभियान की शुरुआत की है। इस अभियान के तहत लोगों की प्रेरणादायक कहानियां बताई गई हैं, जो गोल्ड लोन से जुड़ी झिझक को तोड़ती हैं। यह सिर्फ विज्ञापन नहीं था, यह उन लोगों की जिंदगी की कहानी थी, जिन्होंने अपने सपनों को सच करने के लिए घर पर रखे सोने को काम पर लगाया। इस बार MYFM ने इस अभियान को एक नई ऊंचाई पर ले जाने में भागीदारी निभाई अपने बड़े लिसनर बेस के साथ, शहरों, कस्बों और गांव तक ‘सुनहरी सोच’ की आवाज पहुंचाई। MYFM के RJs ने मुथूट फाइनेंस के असली कस्टमर्स की कहानियां, अपनी बोली में, अपने अंदाज में लिसनर तक पहुंचाईं। मुथूट ग्रुप के मार्केटिंग एंड स्ट्रेटेजी के चीफ जनरल मैनेजर अभिनव अय्यर ने कहा कि गोल्ड सिर्फ एक एसेट नहीं है, बल्कि यह अवसरों का एक फाइनेंशियल जरिया है। हम चाहते हैं कि ‘सुनहरी सोच’ एक ऐसा आंदोलन बने जो करोड़ों भारतीयों की जिंदगी बदले। रेडियो क्यों? क्योंकि भरोसा वहीं से आता है डिजिटल के इस दौर में भी रेडियो की ताकत कम नहीं हुई, बल्कि टियर 2, टियर 3 शहरों में यह एक भरोसेमंद माध्यम है। इस पूरे अभियान की मीडिया इन्वेंट्री का बड़ा हिस्सा रेडियो पर खर्च किया गया। मुथूट फाइनेंस का इरादा साफ है कि गोल्ड लोन को हर भारतीय का ड्रीम फंड बनाना है। भारत का गोल्ड लोन बाजार FY 2025-26 में ₹9.24 लाख करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है, जो 14% से ज्यादा की सालाना ग्रोथ को दर्शाता है। इस बढ़ते बाजार में मुथूट फाइनेंस और रेडियो की साझेदारी सिर्फ एक कैंपेन नहीं, बल्कि नए भारत की आर्थिक सोच की आवाज है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

Muthoot Finance MY FM Launch Sunheri Soch Campaign

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नई दिल्ली33 मिनट पहले कॉपी लिंक भारत का गोल्ड लोन बाजार पिछले पांच सालों में 14.85% CAGR की दर से बढ़ा है। भारतीय घरों में लगभग 27,000 टन सोना मौजूद है, लेकिन इसमें से सिर्फ 20% ही अभी तक गिरवी रखा गया है। अभी भी 65% गोल्ड लोन बाजार अनऑर्गेनाइज्ड सेक्टर के हाथ में है। सवाल यह उठता है कि इतना सोना होते हुए भी लोग बैंक या NBFC का दरवाजा क्यों नहीं खटखटाते? जवाब आंकड़ों में नहीं, भावनाओं में है। भारत में सोना सिर्फ गहना नहीं होता, यह पीढ़ियों की कमाई है, मां की विरासत है, परिवार की सुरक्षा का प्रतीक है। जब यही सोना जरूरत के समय गिरवी रखने की नौबत आती है, तो मन में एक ही आवाज गूंजती है कि लोग क्या कहेंगे? यही झिझक, यही सामाजिक डर दशकों से करोड़ों भारतीयों को अपने सोने का सही फायदा उठाने से रोकता रहा है। इसी दीवार को तोड़ने का बेड़ा मुथूट फाइनेंस गोल्ड लोन ने उठाया और माध्यम बना रेडियो। मुथूट फाइनेंस लगातार कई सालों से भारत का नंबर-1 सबसे भरोसेमंद फाइनेंशियल सर्विसेज ब्रांड है। हालांकि, नंबर-1 बने रहना काफी नहीं था। मुथूट फाइनेंस चाहता था कि गोल्ड लोन मजबूरी का साथी ना बनकर सपनों को सच करने का जरिया बने। सुनहरी सोच- एक विज्ञापन नहीं, एक आंदोलन मुथूट फाइनेंस ने रेडियो के साथ साझेदारी करके ‘सुनहरी सोच’ अभियान की शुरुआत की है। इस अभियान के तहत लोगों की प्रेरणादायक कहानियां बताई गई हैं, जो गोल्ड लोन से जुड़ी झिझक को तोड़ती हैं। यह सिर्फ विज्ञापन नहीं था, यह उन लोगों की जिंदगी की कहानी थी, जिन्होंने अपने सपनों को सच करने के लिए घर पर रखे सोने को काम पर लगाया। इस बार MYFM ने इस अभियान को एक नई ऊंचाई पर ले जाने में भागीदारी निभाई अपने बड़े लिसनर बेस के साथ, शहरों, कस्बों और गांव तक ‘सुनहरी सोच’ की आवाज पहुंचाई। MYFM के RJs ने मुथूट फाइनेंस के असली कस्टमर्स की कहानियां, अपनी बोली में, अपने अंदाज में लिसनर तक पहुंचाईं। मुथूट ग्रुप के मार्केटिंग एंड स्ट्रेटेजी के चीफ जनरल मैनेजर अभिनव अय्यर ने कहा कि गोल्ड सिर्फ एक एसेट नहीं है, बल्कि यह अवसरों का एक फाइनेंशियल जरिया है। हम चाहते हैं कि ‘सुनहरी सोच’ एक ऐसा आंदोलन बने जो करोड़ों भारतीयों की जिंदगी बदले। रेडियो क्यों? क्योंकि भरोसा वहीं से आता है डिजिटल के दौर में भी रेडियो की ताकत कम नहीं हुई, बल्कि टियर 2, टियर 3 शहरों में यह एक भरोसेमंद माध्यम है। इस पूरे अभियान की मीडिया इन्वेंट्री का बड़ा हिस्सा रेडियो पर खर्च किया गया। मुथूट फाइनेंस का इरादा है कि गोल्ड लोन को हर भारतीय का ड्रीम फंड बनाना है। भारत का गोल्ड लोन बाजार FY 2025-26 में ₹9.24 लाख करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है, जो 14% से ज्यादा की सालाना ग्रोथ को दर्शाता है। इस बढ़ते बाजार में मुथूट फाइनेंस और रेडियो की साझेदारी सिर्फ एक कैंपेन नहीं, बल्कि नए भारत की आर्थिक सोच की आवाज है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

Movie Review_ Cocktail 2, the story of changing equation of love, friendship and relations, shahid, kriti and rashmika stole the show

Movie Review_ Cocktail 2, the story of changing equation of love, friendship and relations, shahid, kriti and rashmika stole the show

Hindi News Entertainment Bollywood Movie Review_ Cocktail 2, The Story Of Changing Equation Of Love, Friendship And Relations, Shahid, Kriti And Rashmika Stole The Show कुछ ही क्षण पहले कॉपी लिंक कास्ट- शाहिद कपूर, कृति सेनन, रश्मिका मंदाना डायरेक्टर- होमी अदजानिया ड्यूरेशन- 2 घंटे 30 मिनट रेटिंग- 3.5/5 14 साल पहले आई ‘कॉकटेल’ ने दोस्ती, प्यार और रिश्तों की उलझनों को एक नए अंदाज में पेश किया था। अब निर्देशक होमी अदजानिया ‘कॉकटेल 2’ लेकर आए हैं। इस बार कहानी पहले से ज्यादा परिपक्व है। फिल्म प्यार मिलने की नहीं, बल्कि प्यार को बचाए रखने की मुश्किलों पर बात करती है। यही वजह है कि इसकी कहानी आज के युवाओं और लंबे रिश्तों में रह रहे लोगों से जुड़ती हुई नजर आती है। कैसी है फिल्म की कहानी? कुणाल (शाहिद कपूर) और दिया (रश्मिका मंदाना) कई सालों से साथ हैं। दोनों का रिश्ता बाहर से स्थिर दिखता है, लेकिन भीतर कई अनकहे सवाल मौजूद हैं। शादी, करियर और भविष्य को लेकर दोनों की सोच अलग होने लगती है। इसी दौरान उनकी जिंदगी में एली (कृति सेनन) की एंट्री होती है। एली की मौजूदगी सिर्फ रिश्ते में हलचल नहीं लाती, बल्कि तीनों किरदारों को अपने फैसलों और भावनाओं का सामना करने पर मजबूर करती है। फिल्म की अच्छी बात यह है कि यह किसी एक किरदार को सही या गलत साबित करने की कोशिश नहीं करती। कहानी धीरे-धीरे आगे बढ़ती है और रिश्तों के उन पहलुओं को छूती है, जिनसे ज्यादातर लोग कभी न कभी गुजरते हैं। कैसी है स्टारकास्ट की एक्टिंग? शाहिद कपूर ने कुणाल के किरदार को काफी सहजता से निभाया है। उनके हिस्से में ज्यादा शोर मचाने वाले सीन नहीं हैं, लेकिन इमोशनल सीन में वह असर छोड़ते हैं। रश्मिका मंदाना का काम भी अच्छा है। उन्होंने अपने किरदार की उलझनों और असमंजस को स्वाभाविक तरीके से पर्दे पर उतारा है। कृति सेनन फिल्म की मजबूत कड़ी बनकर सामने आती हैं। उनका किरदार सिर्फ ग्लैमर तक सीमित नहीं रहता, बल्कि कहानी आगे बढ़ने के साथ कई परतें खोलता है। तीनों कलाकारों के बीच की केमिस्ट्री फिल्म को विश्वसनीय बनाती है। डायरेक्शन और तकनीकी पक्ष? होमी अदजानिया रिश्तों पर आधारित फिल्मों को हमेशा एक अलग विजुअल ट्रीटमेंट देते रहे हैं और यहां भी ऐसा ही देखने को मिलता है। फिल्म की रफ्तार ज्यादातर हिस्सों में संतुलित रहती है। संवाद बनावटी नहीं लगते और कई जगह सीधे दिल तक पहुंचते हैं। सिसिली की खूबसूरत लोकेशंस फिल्म को आकर्षक बनाती हैं। सिनेमैटोग्राफी शानदार है और कई दृश्य लंबे समय तक याद रहते हैं। कॉस्ट्यूम और प्रोडक्शन डिजाइन भी कहानी के माहौल को मजबूत बनाते हैं। हालांकि फिल्म का दूसरा भाग कुछ जगह थोड़ा लंबा महसूस होता है। कुछ भावनात्मक दृश्यों को छोटा रखा जाता तो प्रभाव और बेहतर हो सकता था। कुछ मोड़ ऐसे भी हैं जिनका अंदाजा पहले से लगाया जा सकता है। कैसा है फिल्म का म्यूजिक? प्रीतम का संगीत फिल्म के मूड के साथ चलता है। गाने कहानी पर हावी होने की बजाय उसका हिस्सा बनते हैं। बैकग्राउंड स्कोर भी भावनात्मक दृश्यों को बेहतर बनाता है। हालांकि एल्बम में ऐसा कोई गीत नहीं है जो फिल्म खत्म होने के बाद लंबे समय तक साथ रहे, लेकिन कहानी के भीतर गानों का इस्तेमाल प्रभावी है। फाइनल वर्डिक्ट: फिल्म देखें या नहीं? ‘कॉकटेल 2’ रिश्तों की जटिलताओं को समझने और महसूस करने वाली फिल्म है। यह बड़े दावे नहीं करती और न ही हर सवाल का आसान जवाब देती है। कुछ कमजोरियों के बावजूद मजबूत अभिनय, खूबसूरत विजुअल्स और भावनात्मक ईमानदारी इसे एक अच्छी वीकेंड वॉच बनाते हैं। अगर आपको रिश्तों पर आधारित फिल्में पसंद हैं तो यह फिल्म आपको निराश नहीं करेगी। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

मूवी रिव्यू- कॉकटेल 2:प्यार और दोस्ती के बदलते मायनों की कहानी, शाहिद, कृति और रश्मिका की तिकड़ी छोड़ती है असर

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कास्ट- शाहिद कपूर, कृति सेनन, रश्मिका मंदाना डायरेक्टर- होमी अदजानिया ड्यूरेशन- 2 घंटे 30 मिनट रेटिंग- 3.5/5 14 साल पहले आई ‘कॉकटेल’ ने दोस्ती, प्यार और रिश्तों की उलझनों को एक नए अंदाज में पेश किया था। अब निर्देशक होमी अदजानिया ‘कॉकटेल 2’ लेकर आए हैं। इस बार कहानी पहले से ज्यादा परिपक्व है। फिल्म प्यार मिलने की नहीं, बल्कि प्यार को बचाए रखने की मुश्किलों पर बात करती है। यही वजह है कि इसकी कहानी आज के युवाओं और लंबे रिश्तों में रह रहे लोगों से जुड़ती हुई नजर आती है। कैसी है फिल्म की कहानी? कुणाल (शाहिद कपूर) और दिया (रश्मिका मंदाना) कई सालों से साथ हैं। दोनों का रिश्ता बाहर से स्थिर दिखता है, लेकिन भीतर कई अनकहे सवाल मौजूद हैं। शादी, करियर और भविष्य को लेकर दोनों की सोच अलग होने लगती है। इसी दौरान उनकी जिंदगी में एली (कृति सेनन) की एंट्री होती है। एली की मौजूदगी सिर्फ रिश्ते में हलचल नहीं लाती, बल्कि तीनों किरदारों को अपने फैसलों और भावनाओं का सामना करने पर मजबूर करती है। फिल्म की अच्छी बात यह है कि यह किसी एक किरदार को सही या गलत साबित करने की कोशिश नहीं करती। कहानी धीरे-धीरे आगे बढ़ती है और रिश्तों के उन पहलुओं को छूती है, जिनसे ज्यादातर लोग कभी न कभी गुजरते हैं। कैसी है स्टारकास्ट की एक्टिंग? शाहिद कपूर ने कुणाल के किरदार को काफी सहजता से निभाया है। उनके हिस्से में ज्यादा शोर मचाने वाले सीन नहीं हैं, लेकिन इमोशनल सीन में वह असर छोड़ते हैं। रश्मिका मंदाना का काम भी अच्छा है। उन्होंने अपने किरदार की उलझनों और असमंजस को स्वाभाविक तरीके से पर्दे पर उतारा है। कृति सेनन फिल्म की मजबूत कड़ी बनकर सामने आती हैं। उनका किरदार सिर्फ ग्लैमर तक सीमित नहीं रहता, बल्कि कहानी आगे बढ़ने के साथ कई परतें खोलता है। तीनों कलाकारों के बीच की केमिस्ट्री फिल्म को विश्वसनीय बनाती है। डायरेक्शन और तकनीकी पक्ष? होमी अदजानिया रिश्तों पर आधारित फिल्मों को हमेशा एक अलग विजुअल ट्रीटमेंट देते रहे हैं और यहां भी ऐसा ही देखने को मिलता है। फिल्म की रफ्तार ज्यादातर हिस्सों में संतुलित रहती है। संवाद बनावटी नहीं लगते और कई जगह सीधे दिल तक पहुंचते हैं। सिसिली की खूबसूरत लोकेशंस फिल्म को आकर्षक बनाती हैं। सिनेमैटोग्राफी शानदार है और कई दृश्य लंबे समय तक याद रहते हैं। कॉस्ट्यूम और प्रोडक्शन डिजाइन भी कहानी के माहौल को मजबूत बनाते हैं। हालांकि फिल्म का दूसरा भाग कुछ जगह थोड़ा लंबा महसूस होता है। कुछ भावनात्मक दृश्यों को छोटा रखा जाता तो प्रभाव और बेहतर हो सकता था। कुछ मोड़ ऐसे भी हैं जिनका अंदाजा पहले से लगाया जा सकता है। कैसा है फिल्म का म्यूजिक? प्रीतम का संगीत फिल्म के मूड के साथ चलता है। गाने कहानी पर हावी होने की बजाय उसका हिस्सा बनते हैं। बैकग्राउंड स्कोर भी भावनात्मक दृश्यों को बेहतर बनाता है। हालांकि एल्बम में ऐसा कोई गीत नहीं है जो फिल्म खत्म होने के बाद लंबे समय तक साथ रहे, लेकिन कहानी के भीतर गानों का इस्तेमाल प्रभावी है। फाइनल वर्डिक्ट: फिल्म देखें या नहीं? ‘कॉकटेल 2’ रिश्तों की जटिलताओं को समझने और महसूस करने वाली फिल्म है। यह बड़े दावे नहीं करती और न ही हर सवाल का आसान जवाब देती है। कुछ कमजोरियों के बावजूद मजबूत अभिनय, खूबसूरत विजुअल्स और भावनात्मक ईमानदारी इसे एक अच्छी वीकेंड वॉच बनाते हैं। अगर आपको रिश्तों पर आधारित फिल्में पसंद हैं तो यह फिल्म आपको निराश नहीं करेगी।

कॉम्प्रोमाइज के लिए ऑफर हुए थे 1 लाख:पीके एक्ट्रेस मानवी बोलीं- ये नॉन-नेपोकिड के साथ होता रहता है, इन एक्ट्रेसेस ने भी झेला कास्टिंग काउच

कॉम्प्रोमाइज के लिए ऑफर हुए थे 1 लाख:पीके एक्ट्रेस मानवी बोलीं- ये नॉन-नेपोकिड के साथ होता रहता है, इन एक्ट्रेसेस ने भी झेला कास्टिंग काउच

पीके, किल दिल और शुभ मंगल ज्यादा सावधान जैसी फिल्मों में नजर आ चुकीं एक्ट्रेस मानवी गागरू ने कास्टिंग काउच पर बड़ा खुलाया किया है। उन्होंने कहा है कि करियर की शुरुआत में उन्हें कॉम्प्रोमाइज करने के लिए 1 करोड़ रुपए का ऑफर मिला था। हाल ही में टू गर्ल्स विद टू कप्स के पॉडकास्ट में मानवी गागरू ने बताया है कि उन्हें करियर की शुरुआत में एक कॉर्डिनेटर की तरफ से मैसेज आया, जिसमें लिखा था, ‘बजट 1 लाख और साथ में कॉम्प्रोमाइज।’ एक्ट्रेस को लगा कि शायद बजट में कॉम्प्रोमाइज की बात हो रही होगी। आगे उन्होंने बताया, मैं उस समय इंडस्ट्री में नई थी। मैंने जवाब में लिखा कॉम्प्रोमाइज क्या। लेकिन फिर मैंने सवाल किया कि क्या वो इतनी बड़ी बात इतने आराम से लिख सकता है। इस इंसिडेंट के बाद एक्ट्रेस एक कास्टिंग डायरेक्टर के पास गईं, जिनके साथ वो काम कर रही थीं। उन्होंने कास्टिंग डायरेक्टर को मैसेज दिखाकर पूछा कि क्या ये उस तरह के कॉम्प्रोमाइज की बात कर रहे हैं। इस पर उन्हें उस शख्स को ब्लॉक करने की सलाह दी गई। एक्ट्रेस ने ये किस्सा शेयर करते हुए कहा है, ‘मुझे पहले वाकई लगा कि कॉम्प्रोमाइज मतलब, बजट से जुड़ा कॉम्प्रोमाइज होगा या GST जैसा कुछ होगा। ये वो चीज है, जो नॉन नेपोकिड्स के साथ होती रहती है।’ इन एक्ट्रेसेस के साथ भी हुआ कास्टिंग काउच जैसा एक्सपीरियंस राधिका आप्टे राधिका आप्टे ने बताया था कि एक फिल्म में रोल देने के बदले उनसे पूछा गया कि क्या वे उस व्यक्ति के साथ सोने में सहज होंगी। उन्होंने कहा कि इंडस्ट्री में कई लोग ऐसे अनुभवों से गुजरते हैं लेकिन खुलकर बोल नहीं पाते। सुरवीन चावला सुरवीन चौला ने 2025 में एक इंटरव्यू में बताया कि एक निर्देशक ने उनसे मिलने के दौरान अचानक उन्हें किस करने की कोशिश की थी। उन्होंने कहा कि यह घटना उनकी शादी के बाद हुई थी और इससे वे काफी असहज हो गई थीं। मल्लिका शेरावत मल्लिका शेरावत ने कई बार कहा है कि कुछ लोग फिल्मों में काम देने के बदले निजी संबंधों की उम्मीद करते हैं। उनके अनुसार, अगर एक्ट्रेस ऐसी मांगों को ठुकरा दे तो कई बार उसे प्रोजेक्ट से बाहर भी कर दिया जाता है। ऋचा चड्ढा रिचा चड्ढा ने अपने शुरुआती करियर में मिले आपत्तिजनक ऑफर का जिक्र किया था। उन्होंने कहा कि नए कलाकारों को अक्सर ऐसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। ईशा कोपिकर ईशा कोप्पिकर ने दावा किया था कि एक बड़े एक्टर ने उन्हें किसी निर्माता के साथ दोस्ती बढ़ाने की सलाह दी थी ताकि उन्हें फिल्म मिल सके। उनके बयान ने उस समय काफी चर्चा बटोरी थी।

JD Vance Defends US-Iran Deal as Trump Jokes About Blaming Him if Agreement Fails

JD Vance Defends US-Iran Deal as Trump Jokes About Blaming Him if Agreement Fails

वॉशिंगटन डीसी3 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिका और ईरान के बीच बुधवार रात ऐतिहासिक और विवादित पीस डील हुई। इसके बाद से अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इसका सबसे बड़ा चेहरा बनकर उभरे हैं। ‌BBC की रिपोर्ट के मुताबिक वेंस लगातार फ्रंट फुट पर आकर इस फैसले का बचाव कर रहे हैं। व्हाइट हाउस की प्रेस ब्रीफिंग से लेकर द न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए इंटरव्यू तक, वेंस इस डील को डिफेंड करने की पूरी कमान संभाले हुए हैं। जब इस समझौते को लेकर इजराइल और अमेरिकी रिपब्लिकन पार्टी के अंदर से ही तीखी आलोचना शुरू हुई, तो वेंस ने बेहद कड़े शब्दों में जवाब दिया। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक रिपोर्टर ने उनसे पूछा कि क्या राष्ट्रपति ट्रम्प ने उन्हें अमेरिका-ईरान समझौते के लिए ‘बलि का बकरा’ बना दिया है। इस पर वेंस ने कहा कि उन्हें लगता है कि ट्रम्प मजाक कर रहे थे। दरअसल, एक दिन पहले ट्रम्प ने कहा था कि अगर यह समझौता विफल हो जाता है तो वह इसका दोष वेंस पर डाल सकते हैं। हाल के महीनों में वह कई बार ऐसा बयान दे चुके हैं। रिपोर्ट के मुताबिक अगर ईरान के साथ हुआ समझौता कामयाब होता है तो वे 2028 में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव के सबसे बड़े दावेदार हो सकते हैं। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों के सख्त सवालों के जवाब दिए। ईरान के साथ बातचीत का जिम्मा वेंस के कंधे पर व्हाइट हाउस के मुताबिक, जेडी वेंस राष्ट्रपति ट्रम्प की राष्ट्रीय सुरक्षा टीम के सबसे भरोसेमंद सदस्य बनकर उभरे हैं। ट्रम्प के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जैरेड कुशनर के साथ मिलकर वेंस ने इस डील की बैक-चैनल बातचीत की अगुआई की है। स्विट्जरलैंड में होने वाली आगामी 60 दिनों की औपचारिक तकनीकी वार्ताओं की देखरेख का जिम्मा भी वेंस के कंधों पर है। चूंकि ट्रम्प ने इस पूरी बातचीत की प्रक्रिया में वेंस को प्रमुख भूमिका दी है, इसलिए इस समझौते की सफलता या विफलता का सबसे बड़ा राजनीतिक असर भी उन्हीं पर पड़ सकता है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि यह शांति समझौता सफल रहता है और मिडिल ईस्ट में युद्ध रुक जाता है, तो साल 2028 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में जेडी वेंस खुद को एक कुशल डिप्लोमैट और युद्ध खत्म कराने वाले ‘ग्लोबल लीडर’ के रूप में पेश कर सकेंगे। वेंस की किताब की अमेरिकी मीडिया खूब चर्चा हो रही 16 जून को वेंस की किताब ‘कम्यूनियन: फाइंडिंग माई वे बैक टु फेथ’ रिलीज हुई है। राजनीतिक गलियारों और अमेरिकी मीडिया में इस किताब की टाइमिंग और इसके कंटेंट को सीधे तौर पर साल 2028 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में उनकी संभावित दावेदारी से जोड़कर देखा जा रहा है। अमेरिकी राजनीति के इतिहासकार इस किताब की तुलना 1975 में जिमी कार्टर की लिखी गई किताब ‘व्हाए नॉट द बेस्ट’ से कर रहे हैं। कार्टर ने राष्ट्रपति चुनाव जीतने से ठीक पहले अपनी आस्था और धर्म पर किताब लिखी थी, जिसने अमेरिकी जनता, विशेषकर धार्मिक झुकाव वाले वोटर्स के बीच उन्हें एक ‘भरोसेमंद चेहरा’ बना दिया था। जेडी वेंस भी इसी रास्ते पर चल रहे हैं। अपनी राजनीतिक उपलब्धियों के बजाय अपनी आस्था और धर्म (ईसाई धर्म और कैथोलिक बनने के सफर) पर किताब लिखकर वे खुद को 2028 के चुनाव से पहले देश के सामने एक बेहद गंभीर, ईमानदार और पारिवारिक व्यक्ति के रूप में पेश कर रहे हैं। वेंस 2019 में नास्तिकता छोड़कर कैथोलिक ईसाई बने थे। इस किताब के जरिए वे रिपब्लिकन पार्टी (GOP) के पारंपरिक और धार्मिक आधार को मजबूत कर रहे हैं। 2028 के प्राइमरी चुनावों (पार्टी के भीतर उम्मीदवार चुनने की रेस) में यह धार्मिक कार्ड उन्हें अन्य रिपब्लिकन दावेदारों (जैसे मार्को रूबियो) के मुकाबले मजबूत बढ़त दिला सकता है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस वेटिकन चर्च में पोप लियो के साथ। मार्को रूबियो 2028 के राष्ट्रपति पद के दावेदार माने जाते हैं विदेश मंत्री मार्को रूबियो, जिन्हें 2028 के रिपब्लिकन राष्ट्रपति पद की दौड़ का संभावित दावेदार माना जाता है। अमेरिका ने जनवरी में बिना किसी बड़े सैन्य खर्च या अमेरिकी सैनिकों की जान जोखिम में डाले वेनेजुएला के तानाशाह निकोलस मादुरो को सत्ता से बेदखल करने में कामयाबी हासिल की थी। उनकी निगरानी में ही इस पूरे ऑपरेशन को अंजाम दिया गया था ऐसे में इस पूरे मामले का क्रेडिट मार्को रूबियो को मिला। इस घटना ने उन्हें रिपब्लिकन वोटर्स के बीच एक ‘एक्शन-ओरिएंटेड’ लीडर बना दिया। मार्को रुबियो की सबसे बड़ी यूएसपी (USP) यह है कि वे पार्टी के भीतर दो विरोधी विचारधाराओं (पारंपरिक रिपब्लिकन वोटर्स और ट्रम्प की अमेरिका फर्स्ट समर्थक वोटर्स) को एक साथ जोड़ सकते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के पीछे उपराष्ट्रपति वेंस (बांए) और रूबियो (दाएं)। राष्ट्रपति ट्रम्प अपने संभावित उत्तराधिकारी को लेकर जानबूझकर स्थिति साफ नहीं कर रहे हैं। वे उन दोनों को यह महसूस कराते रहते हैं कि वे दोनों ही राष्ट्रपति पद की रेस में हैं। हालांकि, उन्होंने किसी एक का भी खुलकर समर्थन नहीं किया है। ज्यादातर सर्वे में वेंस को बढ़त, रूबियो कड़ी टक्कर दे रहे दुनिया के सबसे बड़े प्रेडिक्शन मार्केट पॉलिमार्केट के मुताबिक रूबियो सर्वे में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। साल 2026 की शुरुआत में रुबियो सिंगल डिजिट पर थे। जून 2026 की ताजा ट्रेडिंग के मुताबिक, रिपब्लिकन उम्मीदवार बनने की रेस में मार्को रुबियो के शेयर बढ़कर 30% के ऑल-टाइम हाई पर पहुंच गए हैं। हालांकि इस प्लेटफॉर्म पर वेंस अभी भी 33% के साथ मामूली बढ़त बनाए हुए हैं। वही, प्रेडिक्शन मार्केट कालशी के मुताबिक मार्को रुबियो 18% की संभावना के साथ पहले स्थान पर आ गए हैं। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस 17% के साथ दूसरे और डेमोक्रेट गेविन न्यूसम 16% के साथ तीसरे स्थान पर खिसक चुके हैं। एक तीसरी सर्वे एजेंसी एमरसन कॉलेज पोल के मुताबिक मई 2026 में वेंस और रूबियो दोनों ही 35% के साथ बराबरी पर थे। जबकि फरवरी में यह आंकड़ा वेंस (52%) और रूबियो (20%) था। वेंस को बड़े राजनीतिक नुकसान की आशंका कुछ रिपब्लिकन नेताओं का मानना है कि ईरान से जुड़े इस समझौते की जिम्मेदारी वेंस के लिए एक ऐसा काम बन गई है, जिसमें मेहनत तो ज्यादा है लेकिन राजनीतिक फायदा कम। नाम न बताने की शर्त पर

Telegram Ban Update; NEET Re-Exam 2026 | Delhi HC

Telegram Ban Update; NEET Re-Exam 2026 | Delhi HC

Hindi News National Telegram Ban Update; NEET Re Exam 2026 | Delhi HC Paper Leak Govt Action नई दिल्ली23 मिनट पहले कॉपी लिंक केंद्र सरकार ने 16 जून को टेलीग्राम पर बैन लगाया था। देश में टेलीग्राम पर NEET री-एग्जाम तक रोक रहेगी। दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को टेलीग्राम की केंद्र सरकार के बैन के खिलाफ लगाई याचिका को खारिज कर दिया। जस्टिस तेजस कारिया ने कहा, ‘ सरकार के पास आईटी एक्ट की धारा 69A के तहत बैन लगाने का अधिकार है।’ कोर्ट ने कहा, ‘इस मामले पर कोर्ट की रिव्यू कमेटी ने भी सरकार के फैसले की जांच की थी। सरकार ने पूरी समझदारी से काम लिया है, इसमें किसी तरह की जल्दबाजी या लापरवाही नहीं दिखती।’ केंद्र सरकार ने 16 जून को NEET री-एग्जाम से पहले टेलीग्राम पर 22 जून तक अस्थायी बैन लगा दिया था। इसके बाद टेलीग्राम ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी। गुरुवार को मामले की सुनवाई पूरी हुई और कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। कोर्ट ने पूछा था- 15 करोड़ यूजर्स के अधिकार को कैसे रोक सकते हैं कोर्ट में गुरुवार को सरकार ने दलील दी थी कि री-एग्जाम से पहले टेलीग्राम के दुरुपयोग की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। इस पर कोर्ट ने पूछा था कि कुछ परीक्षार्थियों की वजह से 15 करोड़ टेलीग्राम यूजर्स के अधिकारों पर रोक कैसे लगाई जा सकती है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि टेलीग्राम में एक अकाउंट से 40 बॉट बन सकते हैं, जबकि वाट्सएप में हर यूजर पर एक बॉट होता है। टेलीग्राम साइबर क्राइम, पेपर लीक, चाइल्ड पोर्नोग्राफी, आतंकवाद बढ़ाने और वित्तीय धोखाधड़ी में इस्तेमाल हो रहा है। इसके बाद सरकार ने 5 दावे किए… टेलीग्राम में एक अकाउंट से 40 बॉट बनाए जा सकते हैं। व्हाट्सएप में हर यूजर की एक बॉट की सीमा है। यह प्लेटफॉर्म क्लाउड के जरिए संचालित होता है। अपराध करने वालों का पता नहीं लगाया जा सकता। यानी इसे ब्लॉक भी कर दें और कोई गड़बड़ करे, तो जांच एजेंसियां ​​असली यूजर तक नहीं पहुंच सकतीं। किसी चैनल के एक लाख सदस्यों को कुछ ही सेकंड में दूसरे चैनल पर ट्रांसफर किया जा सकता है। इससे गंभीर खतरा है। टेलीग्राम में तारीख और समय एडिट कर सकते हैं। जिससे इसका दुरुपयोग किया जा सकता है। 2024 में ऐसा हुआ था। परीक्षा के बाद पेपर पब्लिश किया गया था, लेकिन उसमें तारीख को परीक्षा से एक दिन पहले की तारीख में बदल दिया गया था। टेलीग्राम का दावा- NEET से जुड़े 900 से ज्यादा लिंक हटाए टेलीग्राम का पक्ष एडवोकेट ध्रुव मेहता ने रखा। उन्होंने कोर्ट में कहा कि जो कुछ हुआ, हम सब जानते हैं। बहुत सारे छात्र प्रभावित हुए। दूसरा पहलू यह है कि क्या उस एक घटना को रोकने के लिए पूरे प्लेटफॉर्म को ब्लॉक किया जा सकता है? टेलीग्राम ने बताया कि 9 जून को अधिकारियों से विशिष्ट यूआरएल मिलने के एक घंटे के भीतर ही प्रतिबंधित सामग्री को हटा दिया। यह भी दावा किया कि उसने गैर-कानूनी NEET सामग्री से जुड़े 900 से ज्यादा लिंक हटाए हैं। नियमों के उल्लंघन की पहचान करने के लिए AI, मशीन लर्निंग टूल और मैन्युअल मॉडरेशन का इस्तेमाल किया है। चीन, फ्रांस, रूस जर्मनी में टेलीग्राम पर हो चुकी कार्रवाई सरकार ने कोर्ट को यह भी बताया कि पिछले कुछ सालों में नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर इस ऐप से जुड़ी धोखाधड़ी की शिकायतों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। अकेले 2025 में 2.75 लाख से ज्यादा शिकायतें दर्ज की गईं, जिनमें 3,086 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी शामिल है। सरकार ने चीन, ईरान, फ्रांस, रूस, जर्मनी और ब्राजील जैसे कई देशों में टेलीग्राम के खिलाफ की गई रेगुलेटरी और एनफोर्समेंट कार्रवाई का भी जिक्र किया। ये कार्रवाई स्थानीय कानूनों का पालन न करने, कंटेंट मॉडरेशन में कमी और कानून लागू करने से जुड़ी चिंताओं जैसे मुद्दों पर की गई थीं। पेपर लीक के कारण 3 मई को हुई परीक्षा रद्द हुई NEET-UG परीक्षा 3 मई 2026 को देश भर में आयोजित की गई थी। करीब 23 लाख छात्र परीक्षा में शामिल हुए। परीक्षा के बाद कई राज्यों से प्रश्नपत्र लीक होने और कुछ अभ्यर्थियों को पहले से पेपर मिलने के आरोप सामने आए। जांच में गड़बड़ियों के संकेत मिलने पर NTA ने 12 मई को परीक्षा रद्द कर दी। इसके बाद केंद्र सरकार और जांच एजेंसियों की समीक्षा के आधार पर दोबारा परीक्षा कराने का फैसला लिया गया। NEET से 1 लाख से ज्यादा मेडिकल कॉलेज में एडमिशन NEET यानी नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट भारत में मेडिकल और डेंटल कोर्सेज में एडमिशन के लिए होने वाली राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षा है। इसकी शुरुआत 2013 में हुई थी। इस परीक्षा के माध्यम से देश के सभी सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में MBBS, BDS, आयुष (BAMS, BHMS) और नर्सिंग जैसे कोर्सेज में एडमिशन मिलता है, जिसमें AIIMS और JIPMER जैसे प्रतिष्ठित संस्थान भी शामिल हैं। ——————————— ये खबर भी पढ़ें… 2 दिन में 4 NEET स्टूडेंट ने सुसाइड किया: गुजरात का छात्र छठी मंजिल से कूदा; तमिलनाडु की छात्रा ने लिखा- दोबारा एग्जाम से डर तमिलनाडु के कोयंबटूर में NEET की तैयारी कर रही 19 साल की छात्रा अनुकीर्तना ने बुधवार सुबह जहर खाकर आत्महत्या कर ली। मौत से पहले छात्रा ने अपने चाचा और करीबी रिश्तेदारों को वॉट्सएप मैसेज भेजे थे। वहीं, अहमदाबाद के न्यू रानीप इलाके में बुधवार रात करीब 2:30 बजे 17 साल के छात्र ने आनंदम फ्लैट्स के ब्लॉक बी की छठी मंजिल से छलांग लगा दी। पुलिस जांच में पता चला कि छात्र NEET परीक्षा की तैयारी कर रहा था। पढ़ें पूरी खबर… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

स्थापना दिवस पर शिवसेना के बागी यूबीटी सांसदों के शिंदे खेमे में शामिल होने की संभावना नहीं, दलबदल की चर्चा जारी | भारत समाचार

BAN vs AUS Live Score: Follow latest updates from 2nd T20I. (AP Photo)

आखरी अपडेट:19 जून, 2026, 10:29 IST व्हिप जारी होने के बावजूद गुरुवार को नई दिल्ली में बुलाई गई संसदीय दल की बैठक में शिवसेना (यूबीटी) के छह लोकसभा सांसदों के शामिल नहीं होने के बाद अटकलें तेज हो गईं। शिवसेना पहले ही एक बार विनाशकारी विभाजन का अनुभव कर चुकी है, यहां तक ​​कि एक ताजा विद्रोह की अफवाहें भी संगठन के भीतर चिंता पैदा करने के लिए पर्याप्त हैं। शिवसेना यूबीटी संकट: अटकलों के विपरीत, शिवसेना (यूबीटी) के छह लोकसभा सांसदों के एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने की संभावित संभावना के लिए इंतजार करना पड़ सकता है, सूत्रों ने संकेत दिया है कि शुक्रवार को पार्टी के स्थापना दिवस समारोह के दौरान कोई औपचारिक शामिल होने की संभावना नहीं है। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिव सेना (यूबीटी) और शिंदे के नेतृत्व वाली शिव सेना दोनों शुक्रवार को अविभाजित शिव सेना का 60वां स्थापना दिवस मना रही हैं। व्यापक अटकलें थीं कि मुंबई में एनईएससीओ में शिंदे गुट के स्थापना दिवस कार्यक्रम के दौरान छह सेना (यूबीटी) सांसद औपचारिक रूप से शिंदे गुट में शामिल होंगे। हालाँकि, सूत्रों ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि प्रेरण शुक्रवार को नहीं होगा, यह दर्शाता है कि इसे टाल दिया गया है। इसके अतिरिक्त, शिवसेना ने उन रिपोर्टों को खारिज कर दिया है जिसमें कहा गया था कि स्थापना दिवस कार्यक्रम के दौरान उद्धव ठाकरे गुट के छह सांसद पार्टी में शामिल होने वाले हैं। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने कहा कि पार्टी में शुक्रवार को ऐसा कोई शामिल नहीं किया जाएगा। शिवसेना (यूबीटी) नेतृत्व ने भी इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया। व्हिप जारी होने के बावजूद गुरुवार को नई दिल्ली में बुलाई गई संसदीय दल की बैठक में शिवसेना (यूबीटी) के छह लोकसभा सांसदों के शामिल नहीं होने के बाद अटकलें तेज हो गईं। अनुपस्थित सांसद थे नागेश पाटिल-आष्टिकर, संजय देशमुख, संजय जाधव, संजय दीना पाटिल, ओमप्रकाश राजे निंबालकर और भाऊसाहेब वाकचौरे। बैठक में केवल सांसद अरविंद सावंत, अनिल देसाई और राजाभाऊ वाजे ही शामिल हुए, जिससे उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी के भीतर बढ़ती दरार पर प्रकाश पड़ा। शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने कहा कि छह सांसदों को कारण बताओ नोटिस दिया गया है और पार्टी ने उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। राउत ने संवाददाताओं से कहा, “कार्रवाई करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। हम उन्हें अयोग्य ठहराने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे।” उन्होंने कहा कि पार्टी दल-बदल विरोधी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की मांग करेगी और लोकसभा अध्यक्ष से कानून और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार कार्य करने का आग्रह करेगी। ऑपरेशन टाइगर क्या है? संभावित दलबदल की चर्चा तब तेज हो गई जब शिवसेना एमएलसी चंद्रकांत रघुवंशी ने दावा किया कि छह सेना (यूबीटी) सांसदों ने शिंदे के नेतृत्व में विश्वास जताया है और उनके गुट में शामिल होने के लिए तैयार हैं। इस घटनाक्रम ने 2022 में शिवसेना में विभाजन की यादें ताजा कर दी हैं, जब शिंदे विधायकों के एक बड़े समूह के साथ उद्धव ठाकरे से अलग हो गए थे, जिससे पार्टी में विभाजन हो गया था। जबकि शुक्रवार के स्थापना दिवस समारोह से छह सांसदों के भविष्य पर स्पष्टता मिलने की उम्मीद थी, सूत्रों ने अब संकेत दिया है कि यदि कोई औपचारिक प्रेरण होता है, तो उसे फिलहाल के लिए टाल दिया गया है। (एजेंसियों से इनपुट के साथ) चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना लेखक के बारे में शोभित गुप्ता शोभित गुप्ता News18.com में उप-संपादक हैं और भारत और अंतर्राष्ट्रीय समाचारों को कवर करते हैं। वह भारत के रोजमर्रा के राजनीतिक मामलों और भू-राजनीति में रुचि रखते हैं। उन्होंने बीए पत्रकारिता (ऑनर्स) की डिग्री हासिल की…और पढ़ें न्यूज़ इंडिया स्थापना दिवस पर बागी शिव सेना यूबीटी सांसदों के शिंदे खेमे में शामिल होने की संभावना नहीं, दलबदल की चर्चा जारी अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)शिवसेना यूबीटी सांसदों का दलबदल(टी)शिवसेना स्थापना दिवस(टी)एकनाथ शिंदे गुट(टी)उद्धव ठाकरे गुट(टी)दलबदल विरोधी कानून भारत(टी)ऑपरेशन टाइगर शिव सेना(टी)लोकसभा सांसदों का क्रॉसओवर(टी)महाराष्ट्र राजनीति