Jas Manak Engagement Video | Punjabi Singer Jas Manak Komal Tanwar Viral

अपनी मंगेतर पर नोट उड़ाते हुए पंजाबी सिंगर जस मानक पंजाबी सिंगर जस मानक और उनकी मंगेतर फैशन डिजाइनर कोमल तंवर की इंगेजमेंट का एक वीडियो सामने आया है। वीडियो में जस मानक अपनी मंगेतर पर नोट उड़ाते हुए दिख रहे हैं। जस मानक के इस स्टाइल की सोशल मीडिया पर खूब चर्चा हो रही है। . जस मानक और कोमल तंवर करीब 7 साल से दोस्त हैं। उनकी दोस्ती के बारे में किसी को पता नहीं था, लेकिन जून में पहली बार दोनों की फोटोज सामने आईं और जुलाई में इंगेजमेंट हुई। इंगेजमेंट के प्रोग्राम को भी प्राइवेट रखा गया। अब इंगेजमेंट की फोटो जस मानक ने इंस्टाग्राम पर शेयर की थी, लेकिन उस फंक्शन के वीडियो अब सामने आ रहे हैं। अब उनके फेंस ने 10 सितंबर को वीडियो पोस्ट की हैं। जानिए VIDEO में क्या दिख रहा… कोमल डांस कर रही, नोट उड़ाते दिखे जस मानक इंगेजमेंट पार्टी के वीडियो में कोमल तंवर नारंगी-भूरे रंग का लहंगा पहनकर डांस करती नजर आ रही हैं। उनके पीछे जस मानक हाथ में ड्रिंक लिए खड़े दिखाई देते हैं। इसके बाद वे नोटों की गड्डी खोलकर कोमल तंवर पर नोट उड़ाते हैं। अपने ही ‘लहंगा’ सॉन्ग पर डांस पार्टी में जस मानक का ही ‘लहंगा’ सॉन्ग बज रहा था। इसी गाने पर जस मानक नोट उड़ाने के बाद कोमल के साथ डांस करते हुए दिखाई देते हैं। वीडियो में पार्टी में गिने-चुने मेहमान ही नजर आ रहे हैं। इंगेजमेंट पार्टी में डांस करती हुई कोमल तंवर जस मानक ने कब और कैसे रिलेशन ओपन किया, जानिए… 2019 से दोनों संपर्क में: पंजाबी सिंगर जस मानक व फैशन डिजाइनर कोमल तंवर 2019 से एक-दूसरे को जानते हैं और तब से ही इनकी दोस्ती भी है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार टिक-टॉक के जरिए दोनों एक-दूसरे के संपर्क में आए। हालांकि 2019 से जून 2026 तक दोनों की दोस्ती की बातें कभी सामने नहीं आईं। जून में की इंस्टाग्राम पर पहली फोटो पोस्ट: जस मानक ने 27 जून को इंस्टाग्राम पर कोमल तंवर के साथ फोटो पोस्ट की और लिखा कि “तू ही मुकद्दर है मेरा, तू ही नसीब है मेरा”। इंस्टाग्राम पर फोटो पोस्ट होने के बाद यह बात सार्वजनिक हुई कि दोनों दोस्त हैं और जल्द ही एक होने वाले हैं। 26 जुलाई को इंगेजमेंट की फोटो आई सामने: 26 जुलाई को कोमल तंवर ने जस मानक के साथ फोटोज इंस्टाग्राम पर पोस्ट कीं और उस पर लिखा कि “मैं और मेरे रब्ब दी जोड़ी”। इसके साथ ही दोनों ने अपनी इंगेजमेंट की घोषणा की। 26 जुलाई को उन्होंने सिर्फ फोटो ही पोस्ट की थीं। इंगेजमेंट में कम लोग ही इनवाइट: इंगेजमेंट फंक्शन में काफी कम लोगों को बुलाया गया था और पार्टी भी प्राइवेट थी जिसमें सीमित लोगों को ही बुलाया गया था। पार्टी में उनके कुछ दोस्तों ने वीडियो शूट की और अब वो वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट की गई।
Amritsar Woman UK Marriage Grooming Controversy

ससुराल वालों ने कोमलप्रीत के ड्रिंक करते हुए कि ये फोटो जारी की है। अमृतसर से इंग्लैंड जाकर मुस्लिम व्यक्ति के साथ शादी करने वाली कोमलप्रीत को लेकर ससुराल ने कई खुलासे किए। सास ने बताया कि कोमलप्रीत के साथ बेटे नवप्रीत सिंह की शादी 2023 में की थी। कोमलप्रीत के परिवार ने कहा था कि बेटी अमृतधारी है और कीर्तन करती है। अ . उन्होंने कहा कि बेटे को शादी के बाद उसने अंडा तक खाने से हटा दिया। बेटे ने शादी से पहले केश नहीं रखे थे। इसने उसके केश भी रखवा दिए लेकिन बाद में धोखा कर दिया। सास ने बताया कि बेटा उसके पास इंग्लैंड गया तो उसे उसका व्यवहार ठीक नहीं लगा। बेटे ने कोमलप्रीत का फोन देखना चाहा तो उसने उसकी कॉलर पकड़ ली। इसके बाद बेटे को अपने साथ नहीं रखा। इसने बेटे को अगवा करने की भी कोशिश की। उसने नंगा कर घर भेजा। उन्होंने बताया कि उन्हें भी कोमलप्रीत ने फोन पर अम्मीजान कहना शुरू कर दिया था। 2 बार तो कोमलप्रीत को वीजा रिफ्यूज होने के बाद 40 लाख रुपए लगाकर इंग्लैंड भेजा था। कोमलप्रीत ने ग्रूमिंग की भी स्क्रिप्ट घड़ी है। बहू का परिवार चाहता है कि जत्थेबंदियां बेटी को मुस्लिम के पास से ले आएंगी, लेकिन कोमलप्रीत ने सोच समझकर शादी की है। ससुराल वालों ने कोमलप्रीत के ड्रिंक करते के फोटो शेयर किए हैं। ससुराल वालों ने दावा किया कोमलप्रीत ड्रिंक करती है।- फाइल फोटो सास-ससुर ने सुनाई बहू की पूरी कहानी… डेढ़ साल तक साथ रही, भनक नहीं लगने दी: सास बीर कौर और ससुर बलविंदर सिंह ने निजी चैनल से बातचीत करते हुए बताया कि बहू के इंग्लैंड जाने के बाद उसने करीब डेढ़ साल तक बेटे को अपने पास नहीं बुलाया। कई बार कहने पर उसने पति को फरवरी 2026 में इंग्लैंड बुलाया, लेकिन वहां पहुंचने के कुछ ही दिनों बाद दोनों के बीच विवाद शुरू हो गया। छोटी-छोटी बातों को लेकर विवाद बढ़ने लगा। मोबाइल फोन को लेकर भी दोनों में कहासुनी हुई। बहू ने बेटे के साथ हाथापाई की। इसके बाद बेटे ने उसके मायके वालों से संपर्क किया, लेकिन वहां से भी उसे ही गलत ठहराया गया। अमृतधारी थी और कीर्तन करती थी: उन्होंने कहा कि बहू ने इंग्लैंड जाने के बाद अपने ककार उतार दिए। शादी के समय बहू अमृतधारी थी और कीर्तन करती थी। उन्होंने कभी इस बात पर आपत्ति नहीं की कि बहू किसके साथ रहना चाहती है। उनकी मुख्य शिकायत यह है कि विदेश भेजने में खर्च किए गए 35-40 लाख रुपए और बेटे के साथ हुए धोखे का समाधान होना चाहिए। बहू को बेटी की तरह रखा: सास ने बताया कि शादी के समय उन्होंने बहू को बेटी की तरह रखा। यहां तक कि उसके विदेश जाने के लिए घर में मांस और अंडा तक बंद कर दिया था। उन्हें उम्मीद थी कि शादी के बाद बेटा-बहू विदेश में साथ रहेंगे और परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक होगी। बहू के मायके वालों ने बाद में उनसे संपर्क रखना लगभग बंद कर दिया। विवाद के बाद कई बार पंचायत और पुलिस स्तर पर समझौते की कोशिश हुई, लेकिन परिवार के अनुसार बहू तलाक लेने पर अड़ी रही। बेटे को नंगा कर घर भेजा: उन्होंने बताया कि बेटे नवप्रीत को जब कोमलप्रीत के बारे में सब पता चला तो उसने उसके 1 लाख रुपए भी ले लिए। इसके बाद उसे कार में बैठाकर कहीं बाहर ले गई। वहां पर उसके कपड़े उतरवा लिए। बेटे को नंगा कर कार से उतार लिया। इसके बाद बेटे ने रिश्तेदारों को फोन कर कपड़े मंगवाए और घर गया। बेटे ने कोमलप्रीत के वीडियो इसलिए बनाए ताकि उसके साथ हुई घटना का सच सामने आ सके। सास बीर कौर और ससुर बलविंदर सिंह ने बताया कि कोमलप्रीत को पढ़ाई के लिए विदेश भेजा था। कार में घुमाया, फिर गलत व्यवहार करने लगी वहीं, नवदीप के भाई ने बताया कि इंग्लैंड जाने के बाद छोटे भाई ने उसे फोन पर बताया कि कोमलप्रीत का व्यवहार ठीक नहीं लग रहा है। उसने एक दिन उसे कार में घुमाया और उसके बाद अजीब व्यवहार कर रही है। उसके चाय के कप रखने, बाथरूम में नहाने तक पर गलतियां निकाल रही है। कोमलप्रीत की हरकतों के बारे में जब नवदीप ने अपने ससुर घुग्गी को बताया तो उसने उसे गालियां निकालीं, जिससे कोमलप्रीत पर शक बढ़ता गया। परिवार की प्रशासन से पैसा वापस दिलाने की मांग परिवार ने प्रशासन से विदेश भेजने में खर्च हुए 40 लाख रुपए वापस दिलाने की मांग की है। उनका कहना है कि उन्होंने बेटे की शादी और विदेश भेजने के लिए अपनी इनकम से ज्यादा खर्च किया। उन्हें न तो युवती की ओर से कोई आर्थिक मदद मिली और न ही अब तक उनका खर्च वापस हुआ। परिवार ने पुलिस और प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और उनकी शिकायत पर कार्रवाई करने की मांग की है। कोमलप्रीत की नवदीप के साथ 2023 में शादी हुई थी। कोमलप्रीत कैसे बनी आइरा, 4 पॉइंट… मुस्लिम ड्राइविंग टीचर के संपर्क में आई: कोमलप्रीत कौर लंदन में करीब 6 महीने पहले ड्राइविंग सीखने के दौरान वह पाकिस्तानी मूल के मुस्लिम ड्राइविंग टीचर के संपर्क में आई, जिसने उसका ब्रेनवॉश कर धर्म परिवर्तन करवा दिया। आरोपी पहले कर चुका दो शादियां: परिवार का आरोप है कि आरोपी पहले से दो शादियां कर चुका है। उसने कोमलप्रीत का नाम बदलकर आइरा रख दिया और उसे परिवार से दूर कर दिया। पिछले एक महीने से वह माता-पिता के फोन भी नहीं उठा रही थी। पहले धार्मिक थी कोमलप्रीत: पिता के मुताबिक, उनकी बेटी पहले नियमित रूप से पाठ और सेवा करती थी। परिवार को आशंका है कि उसके साथ गलत हो सकता है और वह किसी खतरे में हो सकती है। बेटी को सुरक्षित वापस लाने की मांग: परिवार ने केंद्र सरकार, ब्रिटेन की सिख संस्थाओं और गुरुद्वारा कमेटियों से मदद की अपील की है। उनकी मांग है कि कोमलप्रीत को सुरक्षित निकालकर भारत वापस लाया जाए। ———– ये खबर भी पढ़ें… सिख से मुस्लिम बनी पंजाबी युवती पहले से शादीशुदा निकली:पति ने इंग्लैंड में 7 दिन झाड़ियों में छिपकर रखी नजर, युवक संग
BRICS Summit Security Arrangements 2026; Vladimir Putin Xi Jinping Hotels – NSG Commando

12-13 सितंबर को BRICS समिट के लिए दिल्ली में 20 से ज्यादा देशों के नेता होंगे। इनमें जिनपिंग, पुतिन, पजशकियान जैसे बड़े खतरे वाले नेता शामिल हैं। इनके लिए दिल्ली की किलेबंदी की गई है। . आसमान से सड़क तक, होटल से भारत मंडपम तक; दुनिया के ताकतवर नेताओं के सुरक्षा इंतजामों की पूरी कहानी… ******** रिपोर्टर्स इनपुटः सुनील मौर्य, उदय भटनागर ग्राफिक्सः गौतम रजक, दृगचंद्र भुर्जी ———— ये खबर भी पढ़िए… BRICS में जिनपिंग-पुतिन दोनों आएंगे: चीनी राष्ट्रपति का गलवान झड़प के बाद पहला भारत दौरा, PM मोदी से बैठक संभव BRICS समिट में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दोनों भारत आएंगे। चीन के विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को जिनपिंग के भारत दौरे की पुष्टि की। इससे दो दिन पहले रूस ने भी पुतिन के भारत आने की पुष्टि की थी। पूरी खबर पढ़िए…
Nepal Flood Vs China; Rainfall Glacial Collapse Early Warning – Data Sharing Row

26 अगस्त की सुबह नेपाल के रसुवा में आसमान साफ था। अचानक भोटेकोशी नदी में मलबा, पत्थर और पानी का ऐसा सैलाब आया कि सब बहता चला गया। 1300 से ज्यादा मौतें हुईं और 5 हजार से ज्यादा लोग लापता हैं। ये तबाही चीन की तरफ बनी झील फटने से हुई थी। सवाल उठा कि क्य . चीन के विदेश विभाग के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने दावा किया कि चीन ने नेपाल को समय-समय पर मौसम का डेटा और चेतावनियां दी थीं। ब्रिटिश न्यूज एजेंसी रायटर्स की रिपोर्ट में भी दावा किया गया कि आपदा से करीब 12 दिन पहले चीन ने नेपाल को ईमेल भेजकर भारी बारिश की जानकारी दी थी। इससे लगता है कि नेपाल के पास खबर थी कि तबाही हो सकती है, लेकिन कहानी इतनी सीधी नहीं है। पढ़िए रिपोर्ट… चीन-नेपाल के एक्सपर्ट चार महीने में तीन बार मिले अप्रैल से जुलाई के बीच चीन और नेपाल के पर्यावरण, मौसम और आपदा प्रबंधन से जुड़े अधिकारी और वैज्ञानिक कम से कम तीन अलग-अलग मंचों पर मिले। इस दौरान ग्लेशियर, ग्लेशियल झील, जलवायु से जुड़े जोखिम और अर्ली वार्निंग पर बात हुई। पहली बैठक: 22 अप्रैल–5 मई, बीजिंग चीन की नेशनल अकैडमी ऑफ फॉरेस्टी एंड ग्रासलैंड एडमिनिस्ट्रेशन ने पर्यावरण संरक्षण और ग्रीन ट्रांसफॉर्मेशन पर सेमिनार किया। नेपाल के प्रतिनिधियों ने इसमें हिस्सा लिया। दूसरी बैठक: 27 मई, काठमांडू नेपाल के 10 और चीन-तिब्बत के 12 अधिकारियों के बीच बैठक हुई। इसमें ग्लेशियल झीलों की मैपिंग और ग्लेशियर लेक आउटबर्स्ट फ्लड यानी अचानक जलस्तर बढ़ने या ग्लेशियर झील फटने के खतरे को कम करने पर चर्चा हुई। तीसरी बैठक: जुलाई, तिब्बत तिब्बत के निंगची में 5th ट्रांस हिमालय इंटरनेशनल कोऑपरेशन फोरम हुआ। इसमें 29 देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए। नेपाल भी इनमें शामिल था। इसी दौरान चीन ने अपना मल्टी हेजार्ड अर्ली वार्निंग सिस्टम भी पेश किया। 12 दिन पहले चीन ने क्या चेतावनी दी थी रायटर्स के मुताबिक, 14 अगस्त के आसपास चीन के विश्व मौसम विज्ञान केंद्र ने नेपाल को ईमेल भेजा था। इसमें 14 से 19 अगस्त के बीच भारी बारिश और मानसूनी दबाव की आशंका जताई गई थी। हालांकि, यह भी 26 अगस्त के लिए नहीं था। यहां एक अहम फर्क है। भारी बारिश का पूर्वानुमान और किसी खास ग्लेशियर के टूटने की चेतावनी एक बात नहीं है। बाढ़ आने के दो हफ्ते बाद भी घरों में घुसा मलबा साफ नहीं हो पाया है। लोग कैंपों में रह रहे हैं और दिन में घर की सफाई के लिए आ जाते हैं। नेपाल के सबसे बड़े आपदा अधिकारी बोले- स्पेसिफिक वार्निंग नहीं मिली नेपाल की नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी के कार्यकारी प्रमुख डॉ. धरम उप्रेती ने चीन के दावे पर सीधे आधिकारिक टिप्पणी करने से परहेज किया। उनके मुताबिक पानी इतनी तेजी से नीचे आया कि सीमा क्षेत्र में लगा रिवर मॉनिटरिंग सिस्टम भी प्रभावित हुआ। नीचे की तरफ अलर्ट जारी करने का समय मिला, लेकिन ऊपरी इलाके में लोगों के पास बचने के लिए पर्याप्त समय नहीं था। डॉ. उप्रेती बताते हैं कि नेपाल में नदियों पर रिवर गेज स्टेशन लगे हैं। पानी के तय सीमा से ऊपर जाते ही प्रभावित इलाकों में SMS अलर्ट भेजे जाते हैं। यह व्यवस्था 2015 से चल रहे फ्लड अर्ली वार्निंग सिस्टम का हिस्सा है। नदी और जगह के हिसाब से सामान्य स्थिति में करीब 6 मिनट से 6 घंटे तक का लीड टाइम मिल सकता है। 26 अगस्त को खतरे की जानकारी मिलते ही 1-2 मिनट में निचले इलाकों के लिए SMS अलर्ट जारी किए गए। पहला अलर्ट करीब 9:15 बजे और दूसरा 11:50 बजे भेजा गया। इसके बाद भी स्थिति के हिसाब से अलर्ट जारी होते रहे। सोशल मीडिया, टीवी और रेडियो से भी चेतावनी दी गई। डॉ. उप्रेती के मुताबिक करीब 4 हजार लोगों के फोन पर अलर्ट भेजा गया था। कितने लोगों ने उसे देखा, इसका डेटा नहीं है। डॉ. उप्रेती के मुताबिक, पानी करीब 180 किमी प्रति घंटे या उससे ज्यादा की रफ्तार से नीचे आया। इससे अलर्ट जारी करने और उसके लोगों तक पहुंचने के बीच का समय बहुत कम रह गया। ‘सिर्फ ईमेल भेजना चेतावनी नहीं, सही एजेंसी को, सही वक्त पर मिलना जरूरी’ चीन की तरफ से भेजे गए ईमेल पर डॉ. उप्रेती कहते हैं, ‘मुझे नहीं पता कि 26 अगस्त से पहले किस अधिकारी को, कब और किस स्तर की चेतावनी भेजी गई थी। सिर्फ ईमेल भेज देना पर्याप्त नहीं है। सूचना सही एजेंसी तक सही समय पर पहुंचे और उस पर कार्रवाई हो, तभी वह वास्तविक चेतावनी बनती है।’ यहीं चीन के दावे पर सवाल खड़ा होता है। अगर 12 दिन पहले इतनी अहम जानकारी थी, तो वह नेपाल की किस एजेंसी तक पहुंची, किस अधिकारी ने उसे देखा और उसके आधार पर क्या कदम उठाए गए। बैठकों में ग्लेशियर पर चर्चा हुई, लेकिन खास चेतावनी नहीं डॉ. उप्रेती के मुताबिक, चीन और नेपाल के वैज्ञानिक हिमालय में बढ़ते तापमान, ग्लेशियरों के पिघलने और एवलॉन्च जैसे खतरों पर लगातार चर्चा करते रहे हैं। 27 मई की बैठक में भी इसके जोखिमों पर बात हुई थी। किसी खास ग्लेशियर के टूटने की स्पेसिफिक वार्निंग नहीं मिली थी। दो अलग-अलग बातें हैं। पहली- हिमालय में ग्लेशियर और जलवायु परिवर्तन से खतरा बढ़ रहा है। दूसरी- किसी खास ग्लेशियर के टूटने और उससे अचानक बाढ़ आने की पहले से चेतावनी। दूसरी तरह की चेतावनी का कोई स्पष्ट प्रमाण सामने नहीं आया। मौजूदा सिस्टम क्यों वॉर्निंग नहीं दे पाया सामान्य GLOF यानी ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड में ग्लेशियर के पास बनी झील का पानी अचानक बाहर निकलता है। 26 अगस्त की घटना में ग्लेशियल झील के फटने की प्रक्रिया सामने नहीं आई। शुरुआती वैज्ञानिक आकलन के मुताबिक, यहां मुख्य ट्रिगर रॉक-आइस एवलॉन्च और ग्लेशियर का हिस्सा टूटना था। यही सबसे बड़ी तकनीकी चुनौती है। नदी का पानी बढ़ने पर गेज स्टेशन पकड़ सकता है। ग्लेशियल झील में पानी बढ़े, तो उसकी निगरानी की जा सकती है। पहाड़ पर ग्लेशियर का एक हिस्सा किस दिन, किस समय टूटेगा, इसे पहले से पकड़ना मुश्किल है। इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट के सीनियर रिसोर्स एसोसिएट श्रवण स्विफ्ट बताते हैं, ‘यह नहीं कहा जा सकता कि चीन ने कोई जानकारी दी
Ravi Kishan Struggle Success Story; Laapataa Ladies Tere Naam | Hindi Bhojpuri Movies

8 मिनट पहलेलेखक: वीरेंद्र मिश्र कॉपी लिंक जिस सफर की शुरुआत गरीबी और पैदल मुंबई नापने से हुई, वही आज 750+ फिल्मों और संसद तक पहुंच चुका है। एक मिट्टी के घर से निकला लड़का, परिवार पर जिम्मेदारियों का बोझ, खेत गिरवी और पेट भरने के लिए 12 लोगों के बीच एक खिचड़ी। फिर मुंबई का सफर, जहां वड़ा पाव और चाय के सहारे दिन गुजरे और 15 साल तक काम के बदले सम्मानजनक पैसे नहीं मिले। यही रवि किशन की उस जिंदगी की तस्वीर है, जिसे वे आज भी भूल नहीं पाए हैं। कभी काम पाने के लिए संघर्ष करने वाले रवि किशन ने भोजपुरी सिनेमा में स्टारडम हासिल किया, हिंदी फिल्मों और OTT में पहचान बनाई और अब राजनीति में भी सक्रिय हैं। 750 से ज्यादा फिल्मों का सफर तय कर चुके रवि किशन आज गोरखपुर से दूसरी बार लोकसभा सांसद हैं। आज की सक्सेस स्टोरी में रवि किशन के जीवन और करियर से जुड़ी कुछ और खास बातें। मिट्टी के घर से शुरू हुई कहानी रवि किशन का जन्म 17 जुलाई 1969 को मुंबई (तब बॉम्बे) में हुआ, लेकिन आर्थिक परिस्थितियों के कारण उनका बचपन उत्तर प्रदेश के जौनपुर में बीता। परिवार आर्थिक संकट से गुजर रहा था। खेत गिरवी था और घर की जिम्मेदारियां बढ़ती जा रही थीं। बाद में अभिनय को अपना सपना बनाकर उन्होंने मुंबई का रुख किया। रवि किशन ने अपने संघर्ष को याद करते हुए बताया है कि उनका परिवार बेहद गरीबी में रहा। एक समय ऐसा था जब 12 लोगों के लिए एक ही खिचड़ी बनती थी और उसमें पेट भरने के लिए पानी मिला दिया जाता था। शुभांकर मिश्रा से बातचीत में रवि किशन ने कहा था- घनघोर गरीबी देखी। हम लोग घनघोर गरीबी वाले। एक ही खिचड़ी बन रही है, उसमें 12 लोग खा रहे हैं, पानी भर के।” उनके मुताबिक गरीबी सिर्फ आर्थिक स्थिति नहीं थी, बल्कि वह अनुभव उनके व्यक्तित्व का हिस्सा बन गया। 17 साल की उम्र में मुंबई पहुंचे रवि किशन को बचपन से एक्टिंग का शौक था। गांव में रामलीला में वो मां सीता का रोल निभाते थे और इसके लिए मां की साड़ी पहनते थे। जब उनके पुजारी पिता ने उन्हें सीता के रोल में देखा तो बेल्ट से बहुत मारा, जिससे उनकी चमड़ी छिल गई। इसके बाद मां ने डरकर 500 रुपए दिए और कहा कि बेटा भाग जा, नहीं तो आज मारा जाएगा। अपनी जान बचाने के लिए वो घर से भागे और ट्रेन पकड़कर मुंबई पहुंच गए। उस समय रवि 17 साल के थे। ‘लोग चलकर आते हैं, मैं रेंग कर आया हूं’ मुंबई में फिल्म इंडस्ट्री की चमक के पीछे का संघर्ष उन्होंने करीब से देखा। यहां न कोई बड़ा फिल्मी बैकग्राउंड था, न मजबूत आर्थिक सहारा और न ही इंडस्ट्री में पहचान। रवि किशन कहते हैं- लोग चलकर आते हैं, मैं रेंगकर आया हूं। जब मैं मुंबई आया था, तब ये बंबई हुआ करता था। पापा मेरे ऐक्टिंग करियर के खिलाफ थे। वे कहते थे- ‘नचनिया बनबे का रे’। वे चाहते थे कि मैं खेती करूं, सरकारी नौकरी करूं या दूध बेचूं। लेकिन मुझे इन चीजों में दिल नहीं लगता था। मुझे बस डांस में मजा आता था। ये मेरा गॉड गिफ्ट था। मैं इसी राह पर चलता गया। इसमें बहुत वक्त लगा। हिंदी सिनेमा में काम मिला, लेकिन पहचान नहीं रवि किशन ने 1990 के दशक में हिंदी फिल्मों से अभिनय करियर की शुरुआत की। ‘पीतांबर’ आग का तूफान’, ‘रानी और महारानी’, ‘जख्मी दिल’, ‘उधार की जिंदगी,’ आतंक, कोई किसी से कम नहीं, अग्नि मोर्चा जैसी फिल्में कीं। लेकिन इन फिल्मों से न तो खास पहचान मिली, न सम्मानजनक मेहनताना। रवि किशन के मुताबिक, फिल्म इंडस्ट्री में करीब 15 साल तक उन्हें काम के बदले वह पैसा नहीं मिला, जिसे वे सम्मानजनक मेहनताना मानते थे। फिल्म ‘तेरे नाम’ से रवि किशन को मिली पहचान हिंदी फिल्मों में रवि किशन ने दर्शकों का ध्यान तब खींचा, जब वो फिल्म ‘तेरे नाम’ में पंडित रमेश्वर के रोल में नजर आए थे। रवि किशन ने बताया था कि यह फिल्म उन्हें कैसे मिली। एक बार वे नितिन मनमोहन के ऑफिस में डायरेक्टर सतीश कौशिक से मिले। सतीश कौशिक ने कहा था कि उन्हें ऐसा लड़का चाहिए जो पंडित का किरदार निभाए और भूमिका चावला का मंगेतर बने। रवि किशन ने बिना देर किए हामी भर दी। उन्होंने बताया था कि सतीश कौशिक ने बाल कटवाने को कहा तो भी वे तुरंत तैयार हो गए। ‘तेरे नाम’ के लिए रवि किशन को नेशनल अवॉर्ड का नॉमिनेशन मिला था। बार-बार अपमानित होना पड़ता था लेकिन लगातार काम मिलने के बावजूद रवि किशन को वह पहचान नहीं मिल रही थी, जिसकी उन्हें तलाश थी। यही वह दौर था जब एक अभिनेता के तौर पर खुद को साबित करने के साथ-साथ उन्हें समझना पड़ा कि इंडस्ट्री में टिके रहने के लिए सिर्फ प्रतिभा काफी नहीं होती। भाषा, बैकग्राउंड, पहचान और मौके भी मायने रखते हैं। रवि किशन ने अपने अनुभवों को याद करते हुए कहा कि उन्होंने हजारों बार अपमान झेला है। रवि किशन कहते हैं- “लोग एक-दो बार ह्यूमिलिएट होते हैं, मैं हजारों बार हुआ हूं। ये सब अद्भुत है जीवन का रंग। भोजपुरी सिनेमा ने बदल दी जिंदगी हिंदी फिल्मों में लंबे संघर्ष के बाद रवि किशन को भोजपुरी सिनेमा में बड़ा मौका मिला। 2003 में उन्होंने मोहनजी प्रसाद की फिल्म ‘सैयां हमार’ से भोजपुरी सिनेमा में कदम रखा। हालांकि, शुरुआत में वे इस इंडस्ट्री को लेकर आश्वस्त नहीं थे, लेकिन परिवार के प्रोत्साहन ने उन्हें भोजपुरी फिल्मों की ओर जाने के लिए तैयार किया। यही फैसला उनके करियर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट बना। भोजपुरी सिनेमा में उन्हें ऐसा दर्शक मिला, जिसने उन्हें स्टार बना दिया। वे लगातार फिल्मों में नजर आने लगे और उनकी लोकप्रियता उत्तर भारत के बड़े हिस्से तक पहुंच गई। खुद रवि किशन के मुताबिक, एक समय ऐसा भी आया जब उन्हें लगातार फिल्मों के ऑफर मिलने लगे और वे एक दिन में कई फिल्मों की शूटिंग तक करते थे। जिस अभिनेता को हिंदी सिनेमा में लंबे समय तक पहचान के लिए इंतजार करना पड़ा था, वही भोजपुरी सिनेमा में बड़ा नाम बन गया। यहीं से
India-Russia BRICS Summit | PM Modi Putin Su-57 Brahmos Defense Deal

नई दिल्ली4 मिनट पहले कॉपी लिंक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने 31 अगस्त को बिश्केक में SCO समिट के दौरान मुलाकात की थी। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन BRICS समिट में शामिल होने के लिए भारत पहुंच गए हैं। पुतिन का प्लेन रात करीब 3 बजे नई दिल्ली पहुंचा। ब्रिक्स समिट से पहले प्रधानमंत्री मोदी और पुतिन की बैठक होगी। इसमें Su-57 फाइटर जेट और अपडेटेड ब्रह्मोस समेत कई डिफेंस डील पर चर्चा हो सकती है। रूस भारत को विमान की बिक्री के साथ भारत में इसका उत्पादन और जरूरी तकनीक साझा करने की पेशकश पहले ही कर चुका है। भारत चाहता है कि इस डील से उसे ऐसी तकनीक मिले, जिसका इस्तेमाल आगे स्वदेशी लड़ाकू विमान बनाने में भी किया जा सके। इससे पहले, रूस की दूसरी Il-96 स्पेशल फ्लाइट राजनयिकों के साथ दिल्ली पहुंच गई है। पहले डिप्टी PM डेनिस मंतुरोव भी भारत पहुंच चुके हैं। पुतिन के भारत दौरे से पहले गुरुवार को नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर रूस के 3 सैन्य विमान उतरे। इनमें रूस का भारी मिलिट्री ट्रांसपोर्ट विमान IL-76 भी शामिल है। S-400 की बाकी खेप और रखरखाव पर भी बात भारत, S-400 की बाकी खेप की आपूर्ति और उसके रखरखाव से जुड़े मुद्दों पर रूस से बात कर सकता है। इसके अलावा SU-30MKI लड़ाकू विमानों को अपग्रेड करने पर भी बात हो सकती है। ‘सुपर सुखोई’ योजना के तहत इनमें बेहतर रडार और नए हथियार लगाए जाएंगे। ब्रह्मोस को लेकर दोनों देश इसके नए और हल्के संस्करण पर मिलकर काम बढ़ाने की तैयारी में हैं। इसमें ब्रह्मोस-NG अहम है। यह मौजूदा ब्रह्मोस से हल्की होगी और इसे तेजस जैसे लड़ाकू विमानों से भी दागा जा सकेगा। रक्षा के बाद परमाणु बिजली पर फोकस रक्षा के अलावा परमाणु बिजली के क्षेत्र में भी भारत और रूस के बीच बातचीत हो सकती है। रूस की सरकारी कंपनी रोसाटॉम भारत में कुडनकुलम परमाणु बिजली संयंत्र पर काम कर रही है। अब भारत में रूसी तकनीक से नए परमाणु बिजली संयंत्र लगाने पर भी चर्चा हो सकती है। दोनों देश छोटे आकार के परमाणु रिएक्टर बनाने में भी साथ काम करने की संभावनाएं तलाश सकते हैं। ये रिएक्टर बड़े परमाणु बिजली संयंत्रों के मुकाबले छोटे होते हैं। रुपए-रूबल में कारोबार बढ़ाने की कोशिश भारत और रूस डॉलर की जगह रुपये और रूबल में कारोबार बढ़ाना चाहते हैं। इससे दोनों देशों के बीच भुगतान अपनी-अपनी करेंसी में हो सकेगा। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा था कि रूस डॉलर हटाने की कोशिश नहीं कर रहा, बल्कि भुगतान के आसान तरीकों के लिए तैयार है। उन्होंने बताया कि BRICS देशों के साथ रूस का करीब 90% कारोबार स्थानीय करेंसी में हो रहा है। दोनों देशों के पास एक-दूसरे की करेंसी भी जमा हो गई है। अब इन पैसों को कारोबार और निवेश में इस्तेमाल करने और रुपये-रूबल में भुगतान आसान बनाने पर बातचीत हो सकती है। रूस तक पहुंचने के रास्ते होंगे आसान दोनों देश व्यापार बढ़ाने के लिए इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) और चेन्नई-व्लादिवोस्तोक समुद्री मार्ग को आगे बढ़ाने पर भी बात कर सकते हैं। INSTC भारत को ईरान के रास्ते रूस से जोड़ता है। वहीं चेन्नई-व्लादिवोस्तोक समुद्री मार्ग से भारत और रूस के पूर्वी हिस्से के बीच सामान पहुंचाने का समय करीब 40 दिन से घटकर 20-22 दिन हो सकता है। ————————— यह खबर भी पढ़ें… BRICS समिट में भारत नहीं आएंगे बांग्लादेशी PM रहमान:बांग्लादेश बोला- प्रधानमंत्री के तौर पर न्योता नहीं मिला था; दूसरी बार भारत यात्रा टली बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान BRICS समिट में शामिल होने भारत नहीं आएंगे। विदेश राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने इसकी पुष्टि की है। पूरी खबर यहां पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
कांगो के 2 स्कूलों में आग, 24 स्टूडेंट्स की मौत:29 का इलाज जारी; जान बचाने खिड़कियों से कूदे बच्चे

कांगो के पूर्वी शहर बुकावु में गुरुवार को आग लगने की घटना में 24 छात्रों की मौत हो गई। शहर को नियंत्रित करने वाले M23 विद्रोही प्रशासन ने बताया कि मृतकों में 19 लड़कियां और 5 लड़के हैं। 29 लोगों का इलाज चल रहा है। स्थानीय अधिकारी मोज लुबाला के मुताबिक, आग पहले एक घर में लगी। इसके बाद यह फुराहा सेकेंडरी स्कूल और उजामा प्राइमरी स्कूल तक फैल गई। M23 विद्रोही समूह के प्रवक्ता लॉरेंस कनयुका ने मृतकों की संख्या की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 29 लोगों का इलाज स्थानीय चिकित्सा केंद्रों में जारी है। मोज लुबाला ने बताया कि कई छात्र फुराहा सेकेंडरी स्कूल के अंदर फंस गए थे। इनमें से कुछ का दम घुट गया। फुराहा और उजामा स्कूलों के अलग-अलग उम्र के छात्र न्यमुलागिरा BDOM हेल्थ सेंटर लाए गए। इनमें लड़के और लड़कियां दोनों शामिल थे। नर्स सिजा जीन-बैप्टिस्ट ने बताया कि छात्र स्कूल यूनिफॉर्म में हेल्थ सेंटर पहुंचे थे। घायलों की संख्या बहुत ज्यादा होने से मेडिकल स्टाफ के लिए सही संख्या दर्ज करना मुश्किल हो रहा था। निकलने की जगह संकरी थी लुबाला के मुताबिक, स्कूल से बाहर निकलने का रास्ता बहुत संकरा था। कुछ छात्रों ने खिड़कियों से छलांग लगानी शुरू कर दी। कुछ छात्र दरवाजे की ओर भागे। सभी के एक साथ बाहर निकलने की कोशिश में कई छात्र गिर गए और उनके ऊपर से लोग गुजर गए। आग लगने की वजह अभी पता नहीं चली है। लुबाला के मुताबिक, जिस इलाके से आग शुरू हुई, वह घनी आबादी वाला है। उन्होंने बताया कि इलाके के ज्यादातर घर लकड़ी से बने हैं।
हूती विद्रोहियों ने यमन के मोखा शहर पर कब्जा किया:यह बाब अल-मंदेब से सिर्फ 75km दूर, इससे आगे बढ़े तो तेल सप्लाई पर संकट

यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने लाल सागर के रणनीतिक बंदरगाह शहर मोखा पर कब्जा कर लिया है। यह बाब-अल मंदेब स्ट्रेट से सिर्फ 75 किमी दूर है। बाब अल-मंदेब लाल सागर को अदन की खाड़ी और हिंद महासागर से जोड़ता है। दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में इसकी गिनती होती है। यहां से एशिया, यूरोप और खाड़ी क्षेत्र के बीच बड़ी मात्रा में सामान और ऊर्जा उत्पादों की आवाजाही होती है। यमन फोर्स और हूती विद्रोहियों के बीच 9 दिन से लड़ाई चल रही है। मोखा शहर पर कब्जे के बाद पिछले 4 साल में हूतियों की यह सबसे बड़ी क्षेत्रीय कामयाबी मानी जा रही है। मोखा पर कब्जे से हूतियों की पकड़ मजबूत मोखा लंबे समय से यमन की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार के नियंत्रण में था। पिछले करीब 10 दिनों से हूती लड़ाके ताइज की पश्चिमी दिशा में लगातार आगे बढ़ रहे थे। उन्होंने रास्ते में पड़ने वाले अल-शकीरा इलाके पर भी कब्जा कर लिया। यह इलाका ताइज शहर को पश्चिमी तट से जोड़ने वाले अहम रास्ते पर है। इस पर कब्जे से हूतियों की इस इलाके में पकड़ और मजबूत हो गई। हूती पहले से ही यमन की राजधानी सना और लाल सागर के बड़े बंदरगाह होदेइदा पर नियंत्रण रखते हैं। मोखा पर कब्जे से उनके कब्जे वाले उत्तरी और पश्चिमी इलाकों के बीच संपर्क और मजबूत हुआ है। यही वजह है कि मोखा की लड़ाई को सिर्फ एक बंदरगाह शहर पर कब्जे के तौर पर नहीं देखा जा रहा। इससे यमन के पश्चिमी तट पर हूतियों की सैन्य और रणनीतिक स्थिति और मजबूत हो सकती है। बाब अल-मंदेब के करीब पहुंचे हूती, जहाजों पर बढ़ा खतरा मोखा पर कब्जे के बाद हूती बाब अल-मंदेब के और करीब पहुंच गए हैं। उन्होंने लाल सागर में मौजूद हनीश द्वीपों की ओर भी बढ़त बनाई है। धुबाब और उसके सामने मौजूद ये द्वीप बाब अल-मंदेब के बहुत करीब हैं। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि अगर हूती इस इलाके में अपनी पकड़ और मजबूत करते हैं, तो लाल सागर से गुजरने वाले जहाजों पर नजर रखना और उन पर दबाव बनाना उनके लिए आसान हो सकता है। बाब अल-मंदेब समुद्र का एक संकरा रास्ता है। यहां से गुजरने वाले जहाजों को खतरा पैदा करने के लिए किसी बहुत बड़े इलाके पर कब्जा करना जरूरी नहीं है। यानी आसपास के कुछ रणनीतिक इलाकों पर पकड़ बनाकर भी हूती जहाजों के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं। खबर अपडेट हो रही है…
Putin India Visit: Russian Military Aircraft Land at Noida Airport

21 मिनट पहले कॉपी लिंक रूस का भारी मिलिट्री ट्रांसपोर्ट विमान IL-76 नोएडा एयरपोर्ट के रनवे पर उतरा। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत दौरे से पहले नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर रूस के 3 सैन्य विमान उतरे हैं। इनमें रूस का भारी मिलिट्री ट्रांसपोर्ट विमान IL-76 भी शामिल है। विमानों से रूसी सैन्य अधिकारी भारत पहुंचे हैं। इसी के साथ राष्ट्रपति पुतिन के काफिले की गाड़ियां भी भारत लाई गई हैं। तीनों विमान मंगलवार सुबह करीब 5:30 बजे नोएडा एयरपोर्ट के रनवे पर उतरे थे। बुधवार को भी तीनों विमान एयरपोर्ट पर खड़े रहे। एयरपोर्ट की सुरक्षा टीम के साथ रूसी टीम भी विमानों और सुरक्षा इंतजामों पर नजर रख रही है। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर पहली बार किसी विदेशी विमान ने लैंडिंग की है। इससे पहले विदेशी सैन्य और वीवीआईपी विमानों के लिए दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट का इस्तेमाल किया जाता रहा है। रूस के तीन एयरक्राफ्ट नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर खड़े हैं। तैयारियों का जायजा लेने पहुंची टीम किसी बड़े विदेशी नेता के दौरे से पहले उसकी एडवांस टीम एयरपोर्ट, सुरक्षा व्यवस्था और वीवीआईपी मूवमेंट से जुड़ी तैयारियों का जायजा लेती है। इसी वजह से रूसी टीम भारत आई है। पुतिन का विमान भी नोएडा एयरपोर्ट पर ही उतरेगा या नहीं, इसकी अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। रिपोर्टों में इसकी संभावना जताई गई है। IL-76 क्या है? IL-76 रूस का भारी मिलिट्री ट्रांसपोर्ट विमान है। इसका इस्तेमाल सैनिकों, सैन्य सामान और दूसरे भारी उपकरणों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के लिए किया जाता है। इस तरह के विमान किसी बड़े सैन्य या वीवीआईपी दौरे से पहले जरूरी सामान और अधिकारियों को पहुंचाने में इस्तेमाल किए जा सकते हैं। नोएडा एयरपोर्ट पर पहुंची रूसी टीम भी पुतिन के दौरे से पहले सुरक्षा और दूसरी व्यवस्थाओं की तैयारी कर रही है। पुतिन की मोदी से अहम बैठक पुतिन शुक्रवार को भारत पहुंचेंगे। BRICS समिट से पहले उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक होगी। दोनों नेताओं की बातचीत में रक्षा, Su-57 फाइटर जेट, S-400, रूसी तेल, परमाणु ऊर्जा और रुपये-रूबल में कारोबार जैसे मुद्दे शामिल हो सकते हैं। रक्षा क्षेत्र में सबसे ज्यादा नजर रूस के Su-57 5th जेनरेशन फाइटर के प्रस्ताव पर है। रूस भारत को यह विमान बेचने के साथ भारत में इसके उत्पादन और तकनीकी सहयोग का प्रस्ताव दे रहा है। ———————– यह खबर भी पढ़ें… रूस से पांचवीं पीढ़ी के सुखोई-57 ले सकता है भारत रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 12-13 सितंबर को दिल्ली में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में शामिल होने भारत आएंगे। इस दौरान भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग से जुड़े दो बड़े प्रस्तावों पर चर्चा हो सकती है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Bhopal School Protest | Divyang Students Demand Teachers & Facilities

Hindi News Career Bhopal School Protest | Divyang Students Demand Teachers & Facilities 12 मिनट पहले कॉपी लिंक पिछले 2 महीनों में यह दिव्यांग छात्रों के प्रदर्शन की तीसरी घटना है जब वे अपनी मांगों को लेकर आक्रोशित हैं और आंदोलन करने को मजबूर भी। दिव्यांगों का यह आंदोलन भोपाल में पिछले दिनों हुआ। मूक – बधिर से लेकर दृष्टिबाधित छात्रों के ऐसे ही आंदोलन चंडीगढ़ और देहरादून में भी हुए। 7 सितंबर 2026 को शासकीय दृष्टि बाधित उच्चतर माध्यमिक विद्यालय भोपाल में पढ़ने वाले विद्यार्थियों ने स्कूल के बदतर हालात के खिलाफ प्रदर्शन किया। बच्चों का आरोप है कि स्कूल में पर्याप्त शिक्षक नहीं हैं, नियमित कक्षाएं नहीं लगतीं और कई बार शिक्षक पढ़ाने के बजाय मोबाइल चलाते रहते हैं। स्थिति यह है कि पहली से 12वीं तक की पढ़ाई वाले इस स्कूल में करीब 190 विद्यार्थी हैं, जबकि शिक्षक सिर्फ 3 हैं। सबसे गंभीर स्थिति श्रवण बाधित विद्यार्थियों की है। बच्चों का कहना है कि शिक्षकों को साइन लैंग्वेज तक नहीं आती। स्कूल में उनकी बात समझने के लिए इंटरप्रेटर भी नहीं है। शिक्षक तीन, कक्षाएं पहली से 12वीं तक स्कूल प्रबंधन के अनुसार यहां पहली से 12वीं तक कक्षाएं संचालित होती हैं। दृष्टि बाधित और श्रवण बाधित विद्यार्थियों को मिलाकर करीब 190 बच्चे पढ़ते हैं। स्कूल में शिक्षक के पांच पद हैं, इसके अलावा दो व्याख्याता और प्रशिक्षकों के पद भी हैं। लेकिन फिलहाल 3 शिक्षक ही उपलब्ध हैं। प्राचार्य मोहम्मद इरफान ने बताया कि छत्तीसगढ़ से प्रतिनियुक्ति पर आए तीन शिक्षकों को वहां की सरकार ने वापस बुला लिया। इसके बाद शिक्षकों की कमी हुई। उन्होंने बताया कि खाली पदों को भरने के लिए अतिथि शिक्षक रखने की प्रक्रिया चल रही है और जल्द चार और शिक्षक रखे जाने की उम्मीद है। एक कमरे में दो-दो, तीन-तीन कक्षाएं प्राचार्य ने खुद माना कि स्कूल में कमरों की कमी है और कई बार एक कमरे में दो से तीन कक्षाएं लगानी पड़ती हैं। स्कूल में कंप्यूटर, ड्राइंग और सिलाई जैसे प्रशिक्षणों के लिए प्रशिक्षकों की जरूरत भी बताई गई है। प्रबंधन के अनुसार इसके लिए शासन से अनुमति की जरूरत है। टीचर फोन चलाते हैं, पढ़ाते नहीं विद्यार्थियों ने शिक्षकों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कई बार शिक्षक कक्षा में मोबाइल फोन चलाते रहते हैं और पढ़ाई नहीं कराते। एक छात्रा ने आरोप लगाया कि शिक्षक फोन पर स्क्रॉल करते रहते हैं। विद्यार्थियों का कहना है कि उन्हें पढ़ाई के लिए जिस मदद की जरूरत है, वह नहीं मिल रही। साइन लैंग्वेज नहीं आती तो बच्चे पढ़ेंगे कैसे? इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल श्रवण बाधित विद्यार्थियों की पढ़ाई और संवाद को लेकर है। बच्चों के अनुसार स्कूल के शिक्षकों को साइन लैंग्वेज नहीं आती और कोई इंटरप्रेटर भी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में व्यवस्था पर सीधा सवाल खड़ा होता है, जिस विद्यार्थी की भाषा साइन लैंग्वेज है, उसके शिक्षक को वही भाषा नहीं आती तो शिक्षा का अधिकार जमीन पर कैसे लागू होगा? बच्चों का कहना है कि वे अपनी समस्याएं समझाने की कोशिश करते हैं, लेकिन संवाद की व्यवस्था ही नहीं होने के कारण उनकी आवाज जिम्मेदार लोगों तक नहीं पहुंच पाती। बच्चों का कहना है कि वे लंबे समय से समस्याओं का सामना कर रहे हैं और बार-बार अपनी बात रखने के बावजूद समाधान नहीं हुआ। इसी वजह से वे आंदोलन की राह पर आए हैं। चंडीगढ़ में हुआ दिव्यांगों का ऐसा ही आंदोलन 12 अगस्त 2026 को चंडीगढ़ के सेक्टर-19 स्थित वटिका स्पेशल स्कूल के मूक-बधिर स्टूडेंट्स ने स्कूल के बाहर करीब 3 घंटे प्रदर्शन किया। ये बच्चे बोल और सुन नहीं सकते। ऐसे में अपनी आवाज उठाने के लिए उन्होंने शोर मचाना शुरू किया। छात्रों ने अपनी मांगों का ज्ञापन प्रबंधन को दिया। प्रदर्शन में स्कूल के कुछ पूर्व विद्यार्थी और पेरेंट्स भी शामिल हुए। बस चार्जिंग की सुविधा स्कूल में एक इलेक्ट्रिक बस उपलब्ध है, लेकिन छात्रों के मुताबिक कैंपस में चार्जिंग की व्यवस्था न होने से उसका नियमित इस्तेमाल नहीं हो रहा है। स्कूल प्रिंसिपल ने कहा कि चार्जिंग की समस्या को दूर किया जा रहा है। प्रशासन ने सुनी शिकायतें प्रदर्शन के दौरान पुलिस मौके पर पहुंची और छात्रों की शिकायतें समझने के लिए सोशल वेलफेयर विभाग की मदद ली। विभाग के अधिकारी ने छात्रों की शिकायतें सुनीं। स्कूल प्रिंसिपल ने भी कहा कि अब शिकायतों को लेकर विभाग के साथ समाधान की कोशिश की जाएगी। प्रिंसिपल कविता सोबती ने कहा कि छात्रों ने इससे पहले लिखित शिकायत नहीं दी थी। अब सोशल वेलफेयर विभाग के अधिकारियों के साथ मिलकर समाधान का प्रयास किया जाएगा। पिछले महीने देहरादून में भी दिव्यांगों का आंदोलन राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांगजन सशक्तिकरण संस्थान (NIEPVD), देहरादून में दृष्टिबाधित छात्र-छात्राएं बीते पांच दिनों से धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। ये बच्चे अच्छी शिक्षा, शिक्षक और किताबों जैसी सुविधाओं को लेकर सिस्टम के खिलाफ नारे लगा रहे हैं। 10 अगस्त 2026 को प्रकाशित रिपोर्ट में छात्रों ने संस्थान में हो रहे बुरे बर्ताव और शारीरिक हिंसा के गंभीर आरोप लगाए हैं। एक छात्रा के अनुसार, अलग-अलग प्रकार की दिव्यांगता वाले बच्चों के लिए अलग-अलग देखभाल और स्पेशल स्टाफ की जरूरत है, लेकिन ऐसी व्यवस्था पर्याप्त नहीं है। एक अन्य छात्रा ने आरोप लगाया कि कुछ बच्चों को चोट पहुंचाई जाती है और लात-घूंसों से मारपीट की जाती है। छात्रों का कहना है कि प्रशासन के साथ दो दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन उनकी मांगों का समाधान नहीं हुआ। इसलिए उन्होंने आंदोलन जारी रखने का फैसला किया है। छात्रों ने भूख हड़ताल शुरू करने की चेतावनी भी दी है। NIEPVD का देहरादून मॉडल स्कूल नर्सरी से कक्षा 12वीं तक दृष्टिबाधित बच्चों को शिक्षा देता है। इस समय वहां 247 बच्चे पढ़ रहे हैं। छात्राओं ने बताया कि संस्थान में किताबों के लिए पर्याप्त आर्थिक सहायता, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं, प्रशिक्षित प्रशिक्षक और स्थायी निदेशक जैसी सुविधाएं नहीं हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि डिस्पेंसरी में उनके साथ दुर्व्यवहार किया जाता है और छात्रावास के खाने की क्वालिटी लगातार खराब बनी हुई है। इसके अतिरिक्त, किताबों की बढ़ती कीमतों को लेकर भी छात्र परेशान हैं। मल्टी डिसेबल बच्चों के लिए अलग यूनिट नहीं प्रदर्शन में शामिल एक दिव्यांग छात्रा ने कहा कि इस









