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रूस गए यूपी के 13 युवकों में 10 की मौत:4 के शव भी नहीं आए; सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी के लिए गए थे, यूक्रेन जंग में झोंक दिया

रूस गए यूपी के 13 युवकों में 10 की मौत:4 के शव भी नहीं आए; सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी के लिए गए थे, यूक्रेन जंग में झोंक दिया

यूपी के आजमगढ़ के भोजपुर माधोपट्टी में योगेंद्र यादव के घर एक चारपाई पर उनकी तस्वीर, रूसी सेना की टोपी और झंडा रखा है। तीन बेटियों के पिता योगेंद्र का शव अब भी घर नहीं आ पाया है। परिजनों को बताया गया है कि 3 जून 2024 को यूक्रेन जंग में मोर्चे पर उनकी मौत हो गई थी और अब वहां से अवशेष निकालना संभव नहीं है। रूस ने सिर्फ टोपी, झंडा और मृत्यु प्रमाणपत्र भेजा है। हालांकि, योगेंद्र यादव अकेले नहीं हैं। मऊ और आजमगढ़ के 13 युवक 2024 की शुरुआत में सुरक्षा गार्ड की नौकरी के लिए रूस गए थे। आरोप है कि इन सभी को धोखे में रखकर यूक्रेन जंग में भेज दिया। इनमें 10 की मौत हो चुकी है। होमेश्वर लापता हैं और राकेश-ब्रजेश लौट आए हैं। पांच युवकों के अवशेष आए, योगेंद्र समेत चार के घर शव की जगह टोपी-झंडे पहुंचे। वहीं, दीपक के परिजन उन्हें लापता मानकर लौटने की उम्मीद में हैं। हालांकि, सूत्रों के मुताबिक रूसी रक्षा मंत्रालय दीपक की मौत की सूचना भारत को दे चुका है। इस पर दिल्ली स्थित रूसी दूतावास से पक्ष मांगा गया, पर खबर लिखे जाने तक जवाब नहीं मिला। दीपकः बहन की शादी के लिए कमाने गया था, अब भी इंतजार बहन की शादी के लिए दीपक पैसे जुटाना चाहते थे। भाई पवन के मुताबिक, एजेंट विनोद ने सुरक्षा गार्ड की नौकरी बता उसे रूस भेजा। उससे जबरन अनुबंध साइन कराया और मोर्चे पर भेज दिया। दीपक ने भारत लौटने की कोशिश की, पर सफल नहीं हुआ। वह कहते हैं कि हम उस दिन को कोसते हैं, जब उसने विनोद की बात पर भरोसा किया। होमेश्वरः ‘मोर्चे पर… फंस गए हैं’ पिता के पास यही ऑडियो बचा तीन भाई-बहनों में सबसे छोटे 19 साल के होमेश्वर इंटर पास थे। पिता इंदू प्रसाद चाहते थे कि वह आगे पढ़ें और नौकरी करें, लेकिन अच्छी कमाई की उम्मीद में रूस चले गए। सैन्य मोर्चे पर उन्होंने ढाई साल पहले कहा, ‘मोर्चे पर भेज रहे हैं, फंस गए हैं।’ इसके बाद संपर्क टूट गया। रूसी सेना ने उन्हें लापता घोषित किया है। पहचान के लिए परिवार की डीएनए रिपोर्ट रूस भेजी गई है। इंदू अब सिलाई की दुकान में बेटे की तस्वीरें संभालकर रखते हैं। अजहरः मां का आरोप- किसी और का कंकाल भेज दिया; खोज जारी अजहर के अवशेष 12 जून को लाए गए, लेकिन मां नसरीन को पहचान पर भरोसा नहीं है। वह कहती हैं, ‘मेरा बेटा लंबा-चौड़ा था, यह छोटा-सा कंकाल उसका कैसे हो सकता है?’ अजहर की तलाश में भाई अजमुद्दीन मार्च 2024 में रूस भी गए थे। अब परिवार सही पहचान और मुआवजे के लिए दोबारा रूस जाना चाहता है। दिल्ली स्थित रूसी दूतावास ने मदद का भरोसा दिया है। जिंदा लौटे राकेश बोले- ग्रेनेड लगा, 11 दिन बंकर में रहा राकेश 16 जनवरी 2024 को सेंट पीटर्सबर्ग पहुंचे थे। उनके मुताबिक, 15 दिन की ट्रेनिंग के बाद 24 अप्रैल को युवकों को तीन-तीन के समूह में मोर्चे पर भेजना शुरू किया गया। राकेश और अरविंद अंतिम समूह में थे। युद्ध के दौरान राकेश को ग्रेनेड लगा और वह 11 दिनों तक बंकर में रहे। चोट के कारण जून में उन्हें आराम मिला, जबकि दूसरे साथियों को फिर मोर्चे पर भेज दिया गया। बाद में राकेश भारत लौटे। आरोपः एजेंटों ने झांसा देकर जंग में फंसाया; फिर सैलरी भी नहीं दी राकेश का आरोप है कि विनोद नामक एजेंट ने सुरक्षा गार्ड की नौकरी बता युवकों को रूस भेजा। उसे रूस में रहने वाले दुष्यंत व सुमित से मिलने की आशंका है। राकेश के मुताबिक, दुष्यंत के होटल से खाना आता था। आरोप यह भी है कि युवकों को सैलरी भी दो या तीन माह ही मिली। विनोद की मौत हो चुकी है। दुष्यंत व सुमित की जानकारी नहीं है। ————————–

Bigg Boss 20 | Salman Khan Warns Manoj Tiwari Over Daughter Reeti Entry

Bigg Boss 20 | Salman Khan Warns Manoj Tiwari Over Daughter Reeti Entry

1 मिनट पहले कॉपी लिंक रीति तिवारी, मनोज तिवारी और उनकी पहली पत्नी रानी तिवारी की बेटी हैं। सलमान खान के रियलिटी शो ‘बिग बॉस 20’ का प्रीमियर आज रात होगा। इससे पहले शो का एक प्रोमो सामने आया। जिसमें भोजपुरी एक्टर और बीजेपी नेता मनोज तिवारी नजर आए। हालांकि, इस बार वह कंटेस्टेंट बनकर नहीं, बल्कि अपनी बेटी रीति तिवारी को शो में छोड़ने पहुंचे। प्रोमो की शुरुआत मनोज तिवारी के गाना गाते हुए स्टेज पर आने से होती है। सलमान उन्हें दोबारा शो में आने को लेकर चिढ़ाते हैं। इस पर मनोज बताते हैं कि वह खुद हिस्सा लेने नहीं, बल्कि अपनी बेटी को शो में छोड़ने आए हैं। मनोज तिवारी साल 2010 में ‘बिग बॉस सीजन 4’ के घर में कुल 62 दिन (करीब 9 हफ्ते) रहे थे। इसके बाद रीति स्टेज पर आती हैं और परफॉर्म करती हैं। सलमान उन्हें घर के अंदर होने वाले झगड़ों को लेकर सलाह देते हुए कहते हैं कि अंडों को लेकर मत लड़ना। इसके बाद सलमान कहते हैं, “ऐ बाप पे मत जाना।” रीति तिवारी की बात करें तो वह सिंगर, सॉन्गराइटर, कंपोजर और प्रोड्यूसर हैं। उन्होंने कवर सॉन्ग्स के साथ ओरिजिनल म्यूजिक पर भी काम किया है। मनोज और डॉली के बीच अंडों को लेकर विवाद हुआ था रीति की बिग बॉस एंट्री के साथ मनोज तिवारी की करीब 16 साल पुरानी बिग बॉस जर्नी भी चर्चा में आ गई। मनोज तिवारी ने 2010 में ‘बिग बॉस सीजन 4’ में हिस्सा लिया था। उस सीजन में श्वेता तिवारी, खली, डॉली बिंद्रा और मनोज तिवारी जैसे चर्चित चेहरे घर में मौजूद थे। उस सीजन की विनर श्वेता तिवारी बनी थीं। मनोज तिवारी के इस सीजन को याद करने की सबसे बड़ी वजह उनका डॉली बिंद्रा के साथ हुआ विवाद है। दरअसल, मनोज और डॉली के बीच अंडों को लेकर विवाद हुआ था। मनोज नाश्ते में ऑमलेट बनाना चाहते थे, जबकि डॉली चाहती थीं कि पहले बचा हुआ खाना खत्म किया जाए। मनोज तिवारी और डॉली बिंद्रा की लड़ाई को लेकर बने मीम्स आज भी सोशल मीडिया पर बनते हैं। इसी बहस के दौरान मनोज तिवारी ने कहा था, “किचन किसी के बाप का नहीं है।” इसके जवाब में डॉली बिंद्रा ने कहा था, “बाप पे बोलना नहीं।” दोनों के बीच हुई यह बहस बाद में काफी चर्चित हुई और इसका डायलॉग मीम्स का हिस्सा भी बना। निरहुआ भी बिग बॉस 20 के प्रोमो में नजर आए वहीं शो का एक और प्रोमो सामने आया, जिसमें भोजपुरी एक्टर और सिंगर दिनेश लाल यादव उर्फ निरहुआ नजर आए। निरहुआ रिक्शे पर सवार होकर शो के सेट पर पहुंचे। बैकग्राउंड में उनका फेमस गाना ‘निरहुआ रिक्शावाला’ बजता सुनाई दिया। सलमान ने उनका स्वागत करते हुए कहा, “स्वागत है, आवा आवा निरहुआ।” प्रोमो में सलमान निरहुआ से मजाक करते हुए कहते हैं, “आपने सिर्फ दो फेर लिए हैं, इस वजह से लगता है कि आप साथ ले के जाओगे यहां से।” इसके बाद निरहुआ सलमान को दोबारा बिग बॉस के घर में मौका देने के लिए धन्यवाद देते हैं। दिनेश लाल यादव ‘निरहुआ’ साल 2012 में प्रसारित हुए बिग बॉस 6 में एक प्रतियोगी के रूप में आए थे। निरहुआ ने शो में लगभग 40 दिन बिताए थे। हालांकि, सलमान उन्हें रोकते हुए कहते हैं, “शुक्रिया सर, लेकिन वो थोड़ी सी गलतफहमी हो गई है, आप सिर्फ यहीं तक हैं।” इस पर निरहुआ हैरानी जताते हुए कहते हैं, “सर, ये लोग तो बोले थे तथा-टू हैं।” उनकी बात सुनकर सलमान हंस पड़ते हैं। प्रोमो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर आम्रपाली दुबे की शो में एंट्री की चर्चा तेज हो गई। यह कहा जाने लगा कि निरहुआ आम्रपाली दुबे को एंट्री करवाने आए हैं। बिग बॉस 20 में कौन-कौन आ रहा है? ‘बिग बॉस 20’ में कौन-कौन कंटेस्टेंट्स आ रहे हैं, यह आज रात पता चलेगा। हालांकि, मीडिया रिपोर्ट्स में जो नाम सामने आए हैं, उनमें माही विज, कुशाल तंवर उर्फ गुल्लू, अरिश्फा खान, कनिका मान, ईशा रिखी और काजी तौकीर शामिल हैं। इसके अलावा मैरी कॉम, आम्रपाली दुबे, अमन गांधी, आसिफ खान, रोहेद खान, फैसल खान, युंग डीएसए और स्काउट जैसे नाम भी चर्चा में हैं। वहीं रिह्या अहीर और लव गिल में से सिर्फ एक को ही जनता के वोटों के आधार पर बिग बॉस के मुख्य घर में एंट्री मिलेगी। …………….. यह खबर भी पढ़ें… बिग बॉस 20 का घर बना ‘हाउस ऑफ इल्यूजन’:गार्डन में शार्क से लेकर बेडरूम में बिच्छू तक, हर कोना सुनाएगा नई कहानी ‘बिग बॉस 20’ का घर इस बार सिर्फ रहने की जगह नहीं, बल्कि एक अलग ही दुनिया नजर आ रहा है। शो की थीम ‘हाउस ऑफ इल्यूजन’ और ‘ड्युअलिटी’ को ध्यान में रखते हुए घर के हर हिस्से को अलग अंदाज में डिजाइन किया गया है। गार्डन में जानवरों और पक्षियों की आकृतियां, दीवारों पर कई आंखें, तालाब में शार्क, पेड़ पर सांप और एक अलग जिम एरिया नजर आता है। पूरी खबर यहां पढें…. दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

Mahasamund Kodar Dam News | School Students Risk Lives Crossing Dam

Mahasamund Kodar Dam News | School Students Risk Lives Crossing Dam

Hindi News Career Mahasamund Kodar Dam News | School Students Risk Lives Crossing Dam 10 मिनट पहले कॉपी लिंक छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में स्थित कोडार डैम से होकर स्कूल जाते बच्चे हर दिन अपनी जान जोखिम में डालकर स्कूल पहुंचते हैं। एक वायरल वीडियो में स्कूली बच्चे लोहार्डी स्कूल से वापिस कोडार बस्ती की तरफ आ रहे हैं। इन दिनों तेज बारिश के बीच डैम में पानी का लेवल ज्यादा है। यहां स्कूल आने – जाने का बस यही रास्ता है, जहां से गुजरकर स्कूली छात्राएं रोज जाने का मजबूर हैं। एक तरफ इन नन्हे बच्चों के हाथों में किताबें हैं, तो दूसरी तरफ रास्ते में गहरा खतरा। बच्चे स्कूल पहुंचने के लिए बांध के खतरनाक रास्ते और पानी को पार करने को मजबूर हैं। स्थानीय प्रशासन और सरकार की लगातार अनदेखी के कारण इन बच्चों की सुरक्षा भगवान भरोसे बनी हुई है। ग्रामीणों और सोशल मीडिया पर लोगों का कहना है कि यह लापरवाही कभी भी किसी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है। एमपी में भी निर्माणाधीन पुल से जाते बच्‍चों का वीडियो वायरल इससे पहले मध्य प्रदेश के विदिशा जिले का भी एक ऐसा ही वीडियो वायरल हुआ है। तेज बहाव वाली नदी पर बने स्टॉप डैम को पार करते हुए बच्चों का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो है। इसमें दिखाई दे रहा है कि बच्चे किस परेशानी के साथ स्कूल बैग हाथ में लिए स्टॉप डेम पार कर रहे हैं। वीडियो में स्कूली बच्चे अपनी जान जोखिम में डालकर बेतवा नदी पर बने स्टॉप डैम के संकरे पिलरों पर चलते और बीच के गैप को छलांग लगाकर पार करते दिखाई दे रहे हैं। पिछले 5 साल से इसी रास्ते से जा रहे हैं स्कूल यह वीडियो विदिशा जिले के पालोह गांव का है। वीडियो में दिख रहे बच्चे करुआ गांव के रहने वाले हैं और पालोह के हाई स्कूल में पढ़ते हैं। अगर ये बच्चे सड़क वाले रास्ते से स्कूल जाएं, तो उन्हें रोज करीब 8 से 10 किलोमीटर का सफर तय करना होगा। इसी वजह से वे रोज स्टॉप डैम पार कर स्कूल पहुंचते हैं। वे पिछले 5 साल से इसी रास्ते से स्कूल जा रहे हैं। वीडियो वायरल होने के बाद जागा प्रशासन वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासन ने मामले की जानकारी ली। विदिशा के एसडीएम क्षितिज शर्मा ने बताया कि बच्चों को सुरक्षित रास्ते से स्कूल आने-जाने के लिए साइकिल उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि नदी पर अस्थायी पुल बनाने का प्रस्ताव भेजा गया है। साथ ही प्रभावित गांवों के पास नया स्कूल खोलने की संभावना पर भी विचार किया जा रहा है, ताकि बच्चों को जान जोखिम में डालकर नदी पार न करना पड़े। देश भर के लोगों ने जताई चिंता वीडियो सामने आने के बाद लोगों ने प्रशासन और शिक्षा विभाग से सवाल पूछने शुरू कर दिए हैं। देशभर के लोगों ने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। कई यूजर्स ने कहा कि अगर बच्चे इतने सालों से इसी तरह स्कूल जा रहे थे, तो कार्रवाई पहले क्यों नहीं हुई? बेरखेड़ी कलां के बच्चे उफनती नदी पार करने को मजबूर मध्य प्रदेश के सागर जिले के रहली जनपद के अंतर्गत ग्राम पंचायत बेरखेड़ी कलां (बरखेड़ा कला) से वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। यहां स्कूली छात्र-छात्राएं उफनती हुई कोपरा नदी को पार कर स्कूल जाने को मजबूर हैं। कोपरा नदी पर बनी पुलिया पूरी तरह टूट चुकी है। बच्चे बिना किसी सुरक्षा व्यवस्था के एक-दूसरे का हाथ पकड़कर और ग्रामीणों के सहारे इस खतरनाक उफनती नदी को पार कर रहे हैं। कई बार भीगने की वजह से बीमार हो जाते हैं बच्चे मरम्मत नहीं होने से अब थोड़ी बारिश में ही नदी उफान पर आ जाती है। सुबह स्कूल जाने के समय छात्राओं को यूनिफॉर्म संभालते हुए घुटनो तक पानी में उतरना पड़ता है। जहां मिट्टी, कीचड़ और फिसलन मे स्कूली ड्रेस खराब हो जाती है। यहां फिसलन और तेज बहाव के कारण हादसे का डर बना रहता है। कई बार बच्चे देर से स्कूल पहुंचते हैं और भीगने की वजह से बीमार हो जाते हैं। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, हर साल मानसून के मौसम में बच्चों को इसी तरह जान दांव पर लगाकर पढ़ाई करने जाना पड़ता है। स्थानीय ग्रामीणों ने सरकार से लंबे समय से पुल या सुरक्षित मार्ग की मांग की है। यहां बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने के साथ-साथ दुर्घटना का भी जोखिम बना रहता है। ——————————————————————————————- ये खबर भी पढ़ें टीचर दो, टीचर दो-आज दो, अभी दो:इंटर लेवल में टीचर के सभी 9 पद खाली, गेस्ट और PTR टीचर के बल पर चल रही कक्षाएं नैनीताल के राजकीय बालिका इंटर कॉलेज बेतालघाट में टीचर की कमी से छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। 3 सितंबर को कक्षा 10वीं, 11वीं और 12वीं की छात्राओं ने टीचर्स की पोस्टिंग की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। पूरी खबर यहां पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Government Jobs Recruitment 2026 | IBPS Railway Vacancy List Update

Government Jobs Recruitment 2026 | IBPS Railway Vacancy List Update

Hindi News Career Government Jobs Recruitment 2026 | IBPS Railway Vacancy List Update 7 मिनट पहले कॉपी लिंक इस हफ्ते निकली हैं इंडिया पोस्ट ऑफिस और रेलवे सहित कई विभागों में 22,265 पदों पर नौकरियां। अगर आप भी इन पदों के लिए अप्लाई करना चाहते हैं, तो इन 5 नौकरियों की डिटेल्ड जानकारी 5 ग्राफिक्स के जरिए जानिए : ऑफिशियल नोटिफिकेशन लिंक ऑफिशियल नोटिफिकेशन लिंक ऑफिशियल नोटिफिकेशन लिंक ऑफिशियल नोटिफिकेशन लिंक ऑफिशियल नोटिफिकेशन लिंक . दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं… DRDO में 93 पदों पर निकली भर्ती: 11 हजार से ज्यादा स्टाइपेंड; बिना एग्जाम के होगा सिलेक्शन 0:47Play video Play video जॉब – एजुकेशन कॉपी लिंक शेयर SSC ने जूनियर इंजीनियर के 1,748 पदों पर निकाली भर्ती: एज लिमिट 32 साल, सैलरी 1 लाख 12 हजार तक 0:40Play video Play video जॉब – एजुकेशन कॉपी लिंक शेयर सूरत के बाद बेंगलुरु में भी हॉस्‍टल छात्राओं का प्रदर्शन: वाई-फाई और खराब लिफ्ट की शिकायत, कहा- खाने में कीड़े, नहाने को गर्म पानी नहीं 0:58Play video Play video जॉब – एजुकेशन कॉपी लिंक शेयर

अमेरिका- 10 लाख भारतवंशी वोटरों के नाम कटने का खतरा:ट्रम्प ने SIR जैसी वोटर लिस्ट जांच शुरू की, 125 करोड़ रुपए से डेटाबेस बनेगा

अमेरिका- 10 लाख भारतवंशी वोटरों के नाम कटने का खतरा:ट्रम्प ने SIR जैसी वोटर लिस्ट जांच शुरू की, 125 करोड़ रुपए से डेटाबेस बनेगा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत के SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) की तर्ज पर वोटर लिस्ट की जांच शुरू कर दी है। इसके लिए करीब 125 करोड़ रुपए का फंड जारी किया गया है। इस प्रक्रिया में वोटर लिस्ट की जांच कर नेशनल वोटर डेटाबेस तैयार किया जाएगा। इससे अमेरिका में मौजूद करीब 26 लाख भारतवंशी वोटरों में से लगभग 10 लाख के नाम कटने का खतरा बताया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य नवंबर में होने वाले मिडटर्म चुनाव से पहले यह प्रक्रिया पूरी करने का है। ट्रम्प ने ICE को डेटाबेस की जिम्मेदारी दी ट्रम्प प्रशासन ने अपनी इमिग्रेशन एजेंसी ICE (इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट) को वोटर डेटाबेस की निगरानी की जिम्मेदारी दी है। सभी 50 राज्यों में वोटर लिस्ट की जांच और डेटाबेस अपडेट करने के लिए कंपनियों को काम सौंपा गया है। वोटरों की जानकारी को अलग-अलग सरकारी रिकॉर्ड से मिलाया जाएगा। घर-घर जाकर सर्वे नहीं होगा अमेरिका में भारत की तरह घर-घर जाकर वोटरों का सर्वे नहीं किया जा रहा है। वोटर लिस्ट को कंप्यूटर के जरिए इमिग्रेशन रिकॉर्ड समेत दूसरे रिकॉर्ड से मिलाया जाएगा। रिकॉर्ड में नाम या जानकारी का मिलान नहीं होने पर संबंधित वोटर की जानकारी की दोबारा जांच हो सकती है और नाम हटाए जाने का खतरा रहेगा। भारतवंशी वोटरों पर ज्यादा असर की आशंका क्यों? अमेरिका में करीब 26 लाख भारतवंशी वोटर हैं। न्यूयॉर्क, न्यू जर्सी, कैलिफोर्निया और टेक्सास जैसे राज्यों में इनकी संख्या और राजनीतिक प्रभाव काफी अहम माना जाता है। इन राज्यों में वोटर पहचान और रजिस्ट्रेशन के नियम अलग-अलग हैं। नई जांच प्रक्रिया में रिकॉर्ड का मिलान होने से भारतवंशी वोटरों के नाम भी जांच के दायरे में आएंगे। रिपोर्ट के मुताबिक, भारतवंशी मतदाताओं के वोटिंग पैटर्न पर भी नजर रखी जा सकती है। हालांकि, कितने लोगों के नाम वास्तव में हटेंगे, यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही साफ होगा। अमेरिका में चुनाव भारत से अलग तरीके से होते हैं अमेरिका में भारत के चुनाव आयोग जैसी एक केंद्रीय संस्था पूरे देश के चुनाव नहीं कराती। वहां चुनाव की जिम्मेदारी मुख्य रूप से राज्य और स्थानीय प्रशासन संभालते हैं। इसी वजह से अलग-अलग राज्यों में वोटर रजिस्ट्रेशन और पहचान के नियम भी अलग हैं। अमेरिका में वोटर पहचान के नियम राज्य के हिसाब से अलग-अलग हैं। कई राज्यों में वोटर से अपनी पहचान की घोषणा कराना ही पर्याप्त होता है, जबकि कुछ राज्यों में पहचान के दस्तावेज जरूरी होते हैं। 12 राज्यों में पासपोर्ट या जन्म प्रमाणपत्र जैसे दस्तावेज मांगे जा सकते हैं। कैलिफोर्निया में वोटर के हस्ताक्षर का मिलान किया जाता है। टेक्सास में पहले भी नाम हटाने पर विवाद हुआ टेक्सास में करीब 24 हजार लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जाने के बाद मामला अदालत पहुंचा था। फेडरल कोर्ट से इस मामले में राहत मिली थी और संबंधित मामला अभी लंबित है। इसी वजह से ट्रम्प प्रशासन की नई वोटर लिस्ट जांच को लेकर भी अदालत में चुनौती मिलने की संभावना है। ट्रम्प वोटर आईडी के भी समर्थक ट्रम्प अमेरिका में वोटिंग के लिए फोटो आईडी अनिवार्य करने की मांग का समर्थन करते रहे हैं। उनका कहना है कि इससे चुनाव में गड़बड़ी रोकने में मदद मिलेगी। अब वोटर लिस्ट की देशभर में जांच और एक राष्ट्रीय डेटाबेस बनाने की कोशिश को लेकर अमेरिका में राजनीतिक विवाद बढ़ सकता है। खासकर उन राज्यों में इसका असर महत्वपूर्ण होगा, जहां भारतवंशी और दूसरे प्रवासी वोटर चुनावी नतीजों में अहम भूमिका निभाते हैं।

अमेरिका- 10 लाख भारतवंशी वोटरों के नाम कटने का खतरा:ट्रम्प ने SIR जैसी वोटर लिस्ट जांच शुरू की, 125 करोड़ रुपए से डेटाबेस बनेगा

अमेरिका- 10 लाख भारतवंशी वोटरों के नाम कटने का खतरा:ट्रम्प ने SIR जैसी वोटर लिस्ट जांच शुरू की, 125 करोड़ रुपए से डेटाबेस बनेगा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत के SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) की तर्ज पर वोटर लिस्ट की जांच शुरू कर दी है। इसके लिए करीब 125 करोड़ रुपए का फंड जारी किया गया है। इस प्रक्रिया में वोटर लिस्ट की जांच कर नेशनल वोटर डेटाबेस तैयार किया जाएगा। इससे अमेरिका में मौजूद करीब 26 लाख भारतवंशी वोटरों में से लगभग 10 लाख के नाम कटने का खतरा बताया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य नवंबर में होने वाले मिडटर्म चुनाव से पहले यह प्रक्रिया पूरी करने का है। ट्रम्प ने ICE को डेटाबेस की जिम्मेदारी दी ट्रम्प प्रशासन ने अपनी इमिग्रेशन एजेंसी ICE (इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट) को वोटर डेटाबेस की निगरानी की जिम्मेदारी दी है। सभी 50 राज्यों में वोटर लिस्ट की जांच और डेटाबेस अपडेट करने के लिए कंपनियों को काम सौंपा गया है। वोटरों की जानकारी को अलग-अलग सरकारी रिकॉर्ड से मिलाया जाएगा। घर-घर जाकर सर्वे नहीं होगा अमेरिका में भारत की तरह घर-घर जाकर वोटरों का सर्वे नहीं किया जा रहा है। वोटर लिस्ट को कंप्यूटर के जरिए इमिग्रेशन रिकॉर्ड समेत दूसरे रिकॉर्ड से मिलाया जाएगा। रिकॉर्ड में नाम या जानकारी का मिलान नहीं होने पर संबंधित वोटर की जानकारी की दोबारा जांच हो सकती है और नाम हटाए जाने का खतरा रहेगा। भारतवंशी वोटरों पर ज्यादा असर की आशंका क्यों? अमेरिका में करीब 26 लाख भारतवंशी वोटर हैं। न्यूयॉर्क, न्यू जर्सी, कैलिफोर्निया और टेक्सास जैसे राज्यों में इनकी संख्या और राजनीतिक प्रभाव काफी अहम माना जाता है। इन राज्यों में वोटर पहचान और रजिस्ट्रेशन के नियम अलग-अलग हैं। नई जांच प्रक्रिया में रिकॉर्ड का मिलान होने से भारतवंशी वोटरों के नाम भी जांच के दायरे में आएंगे। रिपोर्ट के मुताबिक, भारतवंशी मतदाताओं के वोटिंग पैटर्न पर भी नजर रखी जा सकती है। हालांकि, कितने लोगों के नाम वास्तव में हटेंगे, यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही साफ होगा। अमेरिका में चुनाव भारत से अलग तरीके से होते हैं अमेरिका में भारत के चुनाव आयोग जैसी एक केंद्रीय संस्था पूरे देश के चुनाव नहीं कराती। वहां चुनाव की जिम्मेदारी मुख्य रूप से राज्य और स्थानीय प्रशासन संभालते हैं। इसी वजह से अलग-अलग राज्यों में वोटर रजिस्ट्रेशन और पहचान के नियम भी अलग हैं। अमेरिका में वोटर पहचान के नियम राज्य के हिसाब से अलग-अलग हैं। कई राज्यों में वोटर से अपनी पहचान की घोषणा कराना ही पर्याप्त होता है, जबकि कुछ राज्यों में पहचान के दस्तावेज जरूरी होते हैं। 12 राज्यों में पासपोर्ट या जन्म प्रमाणपत्र जैसे दस्तावेज मांगे जा सकते हैं। कैलिफोर्निया में वोटर के हस्ताक्षर का मिलान किया जाता है। टेक्सास में पहले भी नाम हटाने पर विवाद हुआ टेक्सास में करीब 24 हजार लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जाने के बाद मामला अदालत पहुंचा था। फेडरल कोर्ट से इस मामले में राहत मिली थी और संबंधित मामला अभी लंबित है। इसी वजह से ट्रम्प प्रशासन की नई वोटर लिस्ट जांच को लेकर भी अदालत में चुनौती मिलने की संभावना है। ट्रम्प वोटर आईडी के भी समर्थक ट्रम्प अमेरिका में वोटिंग के लिए फोटो आईडी अनिवार्य करने की मांग का समर्थन करते रहे हैं। उनका कहना है कि इससे चुनाव में गड़बड़ी रोकने में मदद मिलेगी। अब वोटर लिस्ट की देशभर में जांच और एक राष्ट्रीय डेटाबेस बनाने की कोशिश को लेकर अमेरिका में राजनीतिक विवाद बढ़ सकता है। खासकर उन राज्यों में इसका असर महत्वपूर्ण होगा, जहां भारतवंशी और दूसरे प्रवासी वोटर चुनावी नतीजों में अहम भूमिका निभाते हैं।

ईरान बोला- US एयरक्राफ्ट कैरियर और युद्धपोत पर मिसाइलें दागीं:नुकसान के बाद दोनों जहाज इलाका छोड़कर भागे, ईरानी जहाजों को परेशान कर रहे थे

ईरान बोला- US एयरक्राफ्ट कैरियर और युद्धपोत पर मिसाइलें दागीं:नुकसान के बाद दोनों जहाज इलाका छोड़कर भागे, ईरानी जहाजों को परेशान कर रहे थे

ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसने अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर और एक युद्धपोत पर कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। IRGC ने बताया कि दोनों अमेरिकी जहाज ईरानी जहाजों को परेशान कर रहे थे और ईरान की समुद्री नाकाबंदी में शामिल थे। हमले में दोनों जहाजों को नुकसान पहुंचा। इसके बाद वे इलाका छोड़कर चले गए। हालांकि, ईरान ने यह नहीं बताया कि उसने किस एयरक्राफ्ट कैरियर पर हमला किया। अमेरिका ने पिछले महीने पश्चिम एशिया में USS जॉर्ज वॉशिंगटन को तैनात किया है। उसने USS अब्राहम लिंकन की जगह ली है। अमेरिका बोला- ईरानी मिसाइल हमलों से बच निकले जहाज अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने इससे पहले कहा था कि 5 सितंबर को एक अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर और गाइडेड-मिसाइल डेस्ट्रॉयर पर ईरान ने कई हमले किए। CENTCOM के मुताबिक, दोनों अमेरिकी युद्धपोतों ने ईरान के ‘बिना उकसावे के हमलों’ को सफलतापूर्वक टाल दिया। हमले में किसी अमेरिकी सैनिक को चोट नहीं आई। अमेरिका ने ईरानी मिसाइलों से जहाजों को नुकसान पहुंचने या उनके इलाके से भागने की बात नहीं कही है। अमेरिका ने 3 ईरानी तेल टैंकरों पर हमला किया CENTCOM ने बताया कि ईरानी हमलों के बाद अमेरिकी सेना ने तीन ईरानी क्रूड ऑयल टैंकरों को निशाना बनाया। अमेरिका के मुताबिक, M/T Downy को खार्ग द्वीप के पास और M/T Stark 1 को जास्क के पास स्थायी रूप से निष्क्रिय किया गया। तीसरा खाली तेल टैंकर M/T Kylo, जिसे ‘Noxen’ भी कहा जाता है, ओमान की खाड़ी में पूरी तरह नष्ट हो गया। ईरान का जवाबी कार्रवाई में 6 जहाजों पर हमले का दावा ईरानी IRGC नौसेना ने कहा कि अमेरिकी हमले के जवाब में उसने हॉर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे 3 तेल टैंकरों और दूसरे इलाकों में अमेरिका से जुड़े 3 जहाजों को निशाना बनाया। ईरान ने इन जहाजों के रास्ते को ‘अनधिकृत’ बताया और हॉर्मुज के आसपास मौजूद दूसरे जहाजों को भी ऐसे रास्तों से गुजरने पर कार्रवाई की चेतावनी दी। ईरान ने अमेरिका को और हमलों की चेतावनी दी IRGC ने कहा कि अगर अमेरिका ईरानी जहाजों के खिलाफ कार्रवाई जारी रखता है तो उसे ईरान की ओर से और कड़े जवाब का सामना करना पड़ेगा। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव में हॉर्मुज स्ट्रेट सबसे अहम इलाकों में से एक है। यहां से दुनिया के बड़े हिस्से का तेल समुद्र के रास्ते दूसरे देशों तक पहुंचता है।

नेपाल बाढ़ से 400 अरब रुपये का नुकसान:5 हजार लोग लापता, 1,344 शव मिले; पीक सीजन में बुकिंग रद्द कर रहे टूरिस्ट

नेपाल बाढ़ से 400 अरब रुपये का नुकसान:5 हजार लोग लापता, 1,344 शव मिले; पीक सीजन में बुकिंग रद्द कर रहे टूरिस्ट

नेपाल में 26 अगस्त को आई बाढ़ से करीब 400 अरब नेपाली रुपये के नुकसान का शुरुआती अनुमान है। हादसे में अब तक 1,344 शव मिल चुके हैं, जबकि करीब 5 हजार लोग अब भी लापता हैं। बाढ़ का असर अब नेपाल के पर्यटन कारोबार पर भी दिख रहा है। सितंबर से नवंबर के पीक टूरिस्ट सीजन में होटल और ट्रैवल कंपनियों की बुकिंग रद्द होने लगी हैं। काठमांडू के एक होटल की करीब 20% बुकिंग कैंसिल हो चुकी हैं। होटल के मैनेजिंग डायरेक्टर के मुताबिक, बाढ़ के बाद एक हफ्ते में खासकर ऑनलाइन बुकिंग में तेजी से कैंसिलेशन हुआ। खबर से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

नेपाल बाढ़ से 400 अरब रुपये का नुकसान:5 हजार लोग लापता, 1,344 शव मिले; पीक सीजन में बुकिंग रद्द कर रहे टूरिस्ट

नेपाल बाढ़ से 400 अरब रुपये का नुकसान:5 हजार लोग लापता, 1,344 शव मिले; पीक सीजन में बुकिंग रद्द कर रहे टूरिस्ट

नेपाल में 26 अगस्त को आई बाढ़ से करीब 400 अरब नेपाली रुपये के नुकसान का शुरुआती अनुमान है। हादसे में अब तक 1,344 शव मिल चुके हैं, जबकि करीब 5 हजार लोग अब भी लापता हैं। बाढ़ का असर अब नेपाल के पर्यटन कारोबार पर भी दिख रहा है। सितंबर से नवंबर के पीक टूरिस्ट सीजन में होटल और ट्रैवल कंपनियों की बुकिंग रद्द होने लगी हैं। काठमांडू के एक होटल की करीब 20% बुकिंग कैंसिल हो चुकी हैं। होटल के मैनेजिंग डायरेक्टर के मुताबिक, बाढ़ के बाद एक हफ्ते में खासकर ऑनलाइन बुकिंग में तेजी से कैंसिलेशन हुआ। नेपाल बाढ़ से जुड़ी तस्वीरें… खबर से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

अमित दुबे की साइबर कहानियां पहुंचीं हिरानी-नीरज पांडे तक:बोले- क्रिमिनल डिवाइस नहीं, पहले इंसान को हैक करता है, ऐसे बचें साइबर ठगी से

अमित दुबे की साइबर कहानियां पहुंचीं हिरानी-नीरज पांडे तक:बोले- क्रिमिनल डिवाइस नहीं, पहले इंसान को हैक करता है, ऐसे बचें साइबर ठगी से

साइबर क्राइम एक्सपर्ट और नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर अमित दुबे ने करियर में ऐसे कई मामलों की जांच की है, जो किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं थे। उनकी वास्तविक इन्वेस्टिगेशन की कहानियां राजकुमार हिरानी की वेब सीरीज ‘प्रीतम एंड पेड्रो’ और नीरज पांडे की ‘हैक क्राइम्स ऑनलाइन’ तक पहुंचीं। एटीएम चोरी, किडनैपिंग और एक एक्ट्रेस के इंस्टाग्राम अकाउंट से फॉलोअर्स गायब होने जैसे मामलों से अमित ने साइबर क्राइम की बदलती दुनिया को करीब से देखा है। उनका कहना है कि अपराधी हर बार डिवाइस को हैक नहीं करता, कई बार पहले इंसान के भरोसे को हैक करता है। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में अमित ने साइबर क्राइम की अपनी इन्वेस्टिगेशन, फिल्ममेकर्स के साथ काम करने के अनुभव और आम लोगों के लिए जरूरी सावधानियों पर खुलकर बात की। सवाल: आपकी वास्तविक साइबर इन्वेस्टिगेशन राजकुमार हिरानी की वेब सीरीज तक पहुंची। उनसे यह कनेक्शन कैसे बना? जवाब: कोविड के दौरान राजू सर से मेरा कनेक्शन हुआ। उस समय साइबर क्राइम को लेकर हमारी बातचीत शुरू हुई और फिर वीडियो कॉल पर कई बार चर्चा हुई। मैंने उन्हें अपने काम और अलग-अलग इन्वेस्टिगेशन से जुड़ी कहानियां बताईं। उन्हें लगा कि इन केसों में सिर्फ अपराध नहीं, बल्कि इंसानी व्यवहार और भावनाओं की भी काफी संभावनाएं हैं। इसके बाद हमने इन कहानियों पर काम करना शुरू किया। यह कोई छोटा प्रोसेस नहीं था। 6 साल तक कहानी और स्क्रिप्ट पर काम हुआ, कई ड्राफ्ट तैयार हुए और चीजों को लगातार बेहतर किया गया। सवाल: ‘प्रीतम एंड पेड्रो’ में एटीएम चोरी वाला सीन भी है। क्या यह आपके किसी वास्तविक केस से जुड़ा है? जवाब: हां, एटीएम चोरी का मामला मेरे वास्तविक अनुभवों से जुड़ा है। साइबर क्राइम की इन्वेस्टिगेशन में कई बार कोई केस शुरुआत में बहुत जटिल दिखाई देता है। आपको लगता है कि इसके पीछे बहुत हाईटेक तरीका होगा, लेकिन जब आप घटनाओं के पैटर्न और डिजिटल फुटप्रिंट को जोड़ते हैं तो तस्वीर धीरे-धीरे साफ होने लगती है। यही चीज इस केस में भी थी। वास्तविक घटना को स्क्रीन पर उसी रूप में रखना संभव नहीं होता, इसलिए कहानी के हिसाब से उसमें बदलाव किए जाते हैं, लेकिन उसका बेस और इन्वेस्टिगेशन का अनुभव वास्तविक होता है। सवाल: इस केस से आम लोगों के लिए भी एक सीख निकलती है कि साइबर क्राइम हमेशा बहुत हाईटेक नहीं होता, क्या कहना चाहेंगे? जवाब: बिल्कुल। हम अक्सर मान लेते हैं कि साइबर क्रिमिनल कोई बहुत बड़ा कंप्यूटर एक्सपर्ट होगा और वह ऐसी तकनीक इस्तेमाल करेगा, जिसे समझना हमारे लिए मुश्किल है। जबकि कई मामलों में अपराध बहुत साधारण तरीके से शुरू होता है। छोटी-सी लापरवाही, किसी व्यक्ति पर भरोसा या जानकारी शेयर करना आगे चलकर बड़ी समस्या बन सकता है। इन्वेस्टिगेशन में भी कई बार बड़ी सफलता किसी बहुत बड़े सुराग से नहीं, बल्कि छोटी-छोटी चीजों को जोड़ने से मिलती है। सवाल: राजकुमार हिरानी के बाद आपका जुड़ाव नीरज पांडे से भी हुआ। दोनों के काम करने के तरीके में क्या अंतर महसूस किया? जवाब: दोनों की अपनी अलग स्टोरीटेलिंग लैंग्वेज है। नीरज सर थ्रिल और सस्पेंस को बहुत मजबूत तरीके से बिल्ड करते हैं। उनके साथ काम करते हुए यह ध्यान रहता है कि दर्शक लगातार अगला मोड़ जानना चाहे। राजू सर का तरीका थोड़ा अलग है। वे गंभीर विषय में भी ह्यूमन इमोशन, ह्यूमर और रिश्तों की परतें तलाशते हैं। लेकिन एक चीज दोनों में समान है- दोनों कहानी को विश्वसनीय बनाना चाहते हैं। खासकर जब विषय साइबर क्राइम हो तो तकनीकी चीजें सही होना बहुत जरूरी है। सवाल: नीरज पांडे की ‘हैक क्राइम्स ऑनलाइन’ में साइबर क्राइम को पर्दे पर उतारना कितना चुनौतीपूर्ण था? जवाब: सबसे बड़ी चुनौती यही होती है कि साइबर क्राइम को बहुत तकनीकी भी न बना दें और इतना सरल भी न कर दें कि वह अविश्वसनीय लगे। अगर आप सिर्फ कंप्यूटर स्क्रीन, कोड या टेक्निकल शब्द दिखाएंगे तो आम दर्शक कहानी से जुड़ नहीं पाएगा। इसलिए यह जरूरी है कि टेक्नोलॉजी के साथ इंसान की कहानी भी दिखाई जाए- अपराधी ऐसा क्यों कर रहा है, पीड़ित कैसे फंसता है और जांच करने वाला किस तरह चीजों को जोड़ता है। यही संतुलन सबसे महत्वपूर्ण है। सवाल: आपकी इन्वेस्टिगेशन में ऐसा कौन-सा केस रहा, जो आपको आज भी याद है? जवाब: किडनैपिंग का एक केस काफी दिलचस्प था। उसमें डिजिटल लोकेशन और दूसरी ऑनलाइन जानकारियों को जोड़कर पुलिस उस व्यक्ति तक पहुंचने की कोशिश कर रही थी। बीच में लोकेशन से जुड़ी जानकारी बदलती रही, जिससे जांच मुश्किल हुई। लेकिन अलग-अलग डिजिटल संकेतों को जोड़ते हुए पुलिस आगे बढ़ती रही। आखिरकार उस व्यक्ति को सुरक्षित बरामद किया गया। इस तरह के मामलों में टेक्नोलॉजी अकेले काम नहीं करती। टेक्नोलॉजी से मिले संकेतों को सही तरीके से समझना और उन्हें ग्राउंड इन्वेस्टिगेशन से जोड़ना भी उतना ही जरूरी है। सवाल: यानी अपराधी अपनी डिजिटल मौजूदगी छिपाने की कोशिश करे, फिर भी कुछ न कुछ सुराग बच जाता है? जवाब: डिजिटल दुनिया में पूरी तरह गायब होना आसान नहीं है। हम फोन, ईमेल, सोशल मीडिया, क्लाउड और कई दूसरी सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं। इन सबके बीच कहीं न कहीं डिजिटल फुटप्रिंट बनते हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हर केस तुरंत सुलझ जाएगा। कई बार एक सुराग दूसरे सुराग से जुड़ता है और फिर धीरे-धीरे पूरी तस्वीर सामने आती है। इन्वेस्टिगेशन में धैर्य बहुत जरूरी है। सवाल: एक्ट्रेस के इंस्टाग्राम अकाउंट से फॉलोअर्स गायब होने वाला मामला भी काफी अलग था। आखिर उसमें क्या हुआ? जवाब : उस एक्ट्रेस की डिजिटल पहचान के साथ छेड़छाड़ हुई थी। अकाउंट का नाम और पहचान बदलने के बाद स्थिति ऐसी बन गई कि पुराना अकाउंट अलग रूप में दिखाई देने लगा। सबसे दिलचस्प बात यह थी कि उनके पुराने फॉलोअर्स उसी डिजिटल पहचान से जुड़े हुए थे। हमने अलग-अलग डिजिटल सुरागों और अकाउंट से जुड़ी जानकारियों को जोड़कर पुराने अकाउंट तक पहुंचने का रास्ता निकाला। इस केस से यह समझ आता है कि सोशल मीडिया अकाउंट सिर्फ एक यूजरनेम और पासवर्ड नहीं है। उसके पीछे आपकी पूरी डिजिटल पहचान और वर्षों की मेहनत जुड़ी होती है। सवाल: क्या सेलिब्रिटी के सोशल मीडिया अकाउंट पर आम यूजर के मुकाबले ज्यादा खतरा रहता है? जवाब: खतरा इसलिए ज्यादा