महिला क्रिकेट लीग के लिए जयपुर पहुंचे अभिनेता मनोज जोशी:बोले- जयपुर आना हमेशा खास, महिलाओं का खेलों से जुड़ना बेहद जरूरी

बॉलीवुड और रंगमंच के दिग्गज अभिनेता मनोज जोशी रविवार को एयर इंडिया की उड़ान से जयपुर पहुंचे हैं। जयपुर एयरपोर्ट पर बेटी प्रीमियर लीग के आयोजकों की ओर से उनका स्वागत किया गया। जोशी जयपुर में आयोजित होने वाली महिला क्रिकेट लीग के प्रचार-प्रसार के सिलसिले में पहुंचे हैं। एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने जयपुर से अपने पुराने जुड़ाव को याद किया और महिलाओं के खेलों से जुड़ने को महत्वपूर्ण बताया। मनोज जोशी ने कहा कि जयपुर आना हमेशा उनके लिए खास रहा है। इससे पहले भी वह शूटिंग और रंगमंच की प्रस्तुतियों के सिलसिले में जयपुर आते रहे हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं का खेलों से जुड़ना बेहद खास है और इसी पहल को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से वह जयपुर पहुंचे हैं। आत्मविश्वास, अनुशासन और नेतृत्व क्षमता विकसित करने का माध्यम है खेल उन्होंने महिला खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने और उन्हें खेलों में आगे बढ़ने के अवसर देने की जरूरत पर भी जोर दिया। उनका कहना है कि खेल केवल प्रतियोगिता का माध्यम नहीं है, बल्कि यह आत्मविश्वास, अनुशासन और नेतृत्व क्षमता विकसित करने का भी माध्यम है। रंगमंच से शुरू हुआ अभिनय का सफर मनोज जोशी का अभिनय सफर रंगमंच से शुरू हुआ। उन्होंने मराठी रंगमंच के साथ-साथ गुजराती और हिंदी रंगमंच पर भी काम किया। इसके बाद उन्होंने टेलीविजन और फिल्मों की दुनिया में कदम रखा। उनकी शुरुआती चर्चित टेलीविजन भूमिकाओं में ‘चाणक्य’, ‘एक महल हो सपनों का’ और मराठी धारावाहिक ‘राऊ’ शामिल रहे। फिल्मों में उन्होंने ‘सरफरोश’ से अपनी पहचान बनानी शुरू की। इसके बाद ‘हंगामा’, ‘हलचल’, ‘धूम’, ‘फिर हेरा फेरी’, ‘चुप चुप के’, ‘भागम भाग’, ‘भूल भुलैया’ और ‘बिल्लू’ जैसी फिल्मों में उनके अलग-अलग किरदारों ने दर्शकों के बीच खास पहचान बनाई। ‘कचरा सेठ’ से मिली अलग पहचान मनोज जोशी को हास्य और चरित्र भूमिकाओं के लिए खास तौर पर जाना जाता है। ‘फिर हेरा फेरी’ में निभाया गया ‘कचरा सेठ’ का किरदार उनके सबसे लोकप्रिय किरदारों में शामिल है। इसके अलावा ‘हंगामा’, ‘भूल भुलैया’ और ‘ढोल’ जैसी फिल्मों में भी उनके अभिनय और हास्य अंदाज को दर्शकों ने पसंद किया। उन्होंने केवल हास्य भूमिकाओं तक खुद को सीमित नहीं रखा। गंभीर और ऐतिहासिक किरदारों में भी उन्होंने अपनी अभिनय क्षमता दिखाई। टेलीविजन धारावाहिक ‘चक्रवर्ती सम्राट अशोक’ में उन्होंने चाणक्य की भूमिका निभाई, जिसके लिए उन्हें भारतीय टेलीविजन अकादमी पुरस्कार में सहायक अभिनेता का सम्मान मिला। राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और पद्मश्री से सम्मानित मनोज जोशी को मराठी फिल्म ‘दशक्रिया’ में अभिनय के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का सम्मान मिला। इसके अलावा उन्हें टेलीविजन और गुजराती सिनेमा के लिए भी पुरस्कार मिले हैं। वर्ष 2018 में भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया। अभिनय के क्षेत्र में उनके लंबे योगदान और रंगमंच, टेलीविजन और फिल्मों में उनकी सक्रियता ने उन्हें भारतीय मनोरंजन जगत में एक अलग पहचान दिलाई है। मनोज जोशी ने अभिनय के अलावा टेलीविजन पर एंकर के रूप में भी अपनी प्रतिभा दिखाई। ‘स्वराज : भारत के स्वतंत्रता संग्राम की समग्र गाथा’ कार्यक्रम में उन्होंने एंकर की भूमिका निभाई और इसके लिए वर्ष 2023 में भारतीय टेली पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ एंकर का सम्मान प्राप्त किया।
हनुमान अंश पार्ट-2 में दिखेगा नैनीताल का कैंची धाम:1960 के बाद की कहानी; 2006 में डायरेक्टर ने टेका था माथा, कमाई 107 करोड़ के पार

बाबा नीब करौरी के जीवन पर बनी फिल्म हनुमान अंश के पार्ट-2 की तैयारी शुरू हो गई है। फिल्म के डायरेक्टर डॉ. विशाल चतुर्वेदी ने इसकी घोषणा की है। पार्ट-2 में कैंची धाम की कहानी भी दिखाई जाएगी। बाबा 1960 के दशक की शुरुआत में कैंची पहुंचे थे और 15 जून 1964 को यहां हनुमान मंदिर व आश्रम की स्थापना हुई। जीवन के अंतिम वर्षों में कैंची उनका प्रमुख आध्यात्मिक केंद्र रहा। डॉ. विशाल चतुर्वेदी 2006 के आसपास अपनी पोस्टिंग के दौरान कई बार कैंची धाम गए थे। यहीं उनका पहली बार नीम करोली बाबा की शिक्षाओं से परिचय हुआ। इस अनुभव का उन पर गहरा असर पड़ा और करीब दो दशकों बाद यही जुड़ाव ‘हनुमान अंश’ की कहानी की प्रेरणा बना। नैनीताल में भवाली के पास शिप्रा नदी के किनारे स्थित कैंची धाम बाबा से जुड़े प्रमुख आध्यात्मिक स्थलों में शामिल है। नैनीताल में उनसे जुड़े चार प्रमुख धाम बताए जाते हैं- कैंची धाम, काकड़ीघाट, हनुमानगढ़ी और भूमियाधार। 2 करोड़ के बजट में बनी, 107 करोड़ के पार पहुंची कमाई ‘हनुमान अंश’ की सफलता ने फिल्म इंडस्ट्री को भी चौंका दिया। करीब 2 करोड़ रुपए के बजट में बनी यह फिल्म शुरुआत में सीमित स्क्रीन पर रिलीज हुई थी। पहले सप्ताह में इसके शो और स्क्रीन घटकर करीब 25 रह गए थे। इसके बाद दर्शकों की सकारात्मक प्रतिक्रिया और वर्ड ऑफ माउथ ने फिल्म की किस्मत बदल दी। चौथे सप्ताह तक फिल्म करीब 1,200 स्क्रीन तक पहुंच गई। अलग-अलग उद्योग स्रोतों में कमाई के आंकड़ों में अंतर है, लेकिन 4 सितंबर तक फिल्म करीब 107 करोड़ रुपए का कारोबार कर चुकी थी। यानी फिल्म ने अपनी लागत से 50 गुना से ज्यादा कमाई की। इस तरह ‘हनुमान अंश’ बेहद कम बजट में बड़ी कमाई करने वाली हिंदी फिल्मों की सूची में शामिल हो गई है। फिल्म के अहम चेहरों के बारे में जानिए… डायरेक्टर- विशाल चतुर्वेदी फिल्म हनुमान अंश को 42 साल के विशाल चतुर्वेदी ने बनाया है। फिल्मों में करियर शुरू करने से पहले विशाल एक डॉक्टर थे। ये उनके निर्देशन की दूसरी फिल्म है, इससे पहले उन्होंने 2013 की फिल्म वॉर्निंग डायरेक्ट की थी। एक्टर- शोभिनव सत्या एक्टर शोभिनव सत्या ने हनुमान अंश में नीम करोली बाबा का किरदार निभाया। उन्होंने FTII, पुणे से पढ़ाई की है। एक्टिंग के साथ वह असिस्टेंट डायरेक्टर, सेकंड यूनिट डायरेक्टर, स्क्रिप्ट और कंटिन्यूटी विभाग में काम कर चुके हैं। उन्होंने ‘महापौर’, ‘CID’, ‘रागिनी एमएमएस’ और ‘हैप्पीली एवर आफ्टर’ जैसे प्रोजेक्ट्स में काम किया है। एक्टर- चंदन के.आनंद चंदन आनंद ने फिल्म में डॉ. राम नंदन भोसले का अहम रोल निभाया है। इससे पहले वो कई फिल्मों और टीवी शो में साइड रोल कर चुके हैं। वह आलू चाट, पार्च्ड, लव आज कल, गुंजन सक्सेना, फाइटर, होमबाउंड जैसी फिल्मों के अलावा टीवी शो बैरिस्टर बाबू, ये प्यार न होगा कम, मीत जैसे कई शो कर चुके हैं। सिंगर-सुनील लोधी फिल्म ‘हनुमान अंश’ के चर्चित वायरल गाने ‘मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान’ को सिंगर सुनील लोधी ने गाया है। 25 वर्षीय सुनील नेत्रहीन (दिव्यांग) हैं और वे मध्य प्रदेश के सागर जिले के छोटे से गांव ‘अगरा’ के रहने वाले हैं। वर्षों तक सुनील ने अपने गांव, स्थानीय मेलों और यहां तक कि ट्रेनों में भी भजन व बुंदेली लोकगीत गाए हैं। सोशल मीडिया पर उनके वीडियो वायरल हुए, जिसके बाद उन्हें फिल्म ‘हनुमान अंश’ में गाने का मौका मिला। स्टीव जॉब्स से विराट कोहली तक बाबा नीम करोली के भक्त स्टीव जॉब्स: 1974 में बाबा से मिलने की चाह लेकर एप्पल कंपनी के को-फाउंडर स्टीव जॉब्स भारत आए। तब तक बाबा के निधन को एक साल हो चुका था। जॉब्स कुछ दिन कैंची धाम में रहे। फिर वापस लौटकर 1976 में एप्पल की शुरुआत की। मार्क जकरबर्ग: 2015 में फेसबुक के फाउंडर मार्क जुकरबर्ग ने भारत यात्रा के दौरान बताया था कि स्टीव जॉब्स ने फेसबुक के शुरुआती दिनों में उन्हें भारत के एक मंदिर जाने की सलाह दी थी। यह नीम करौली बाबा का कैंची धाम ही था। जूलिया रॉबर्ट्स: हॉलीवुड एक्ट्रेस जूलिया रॉबर्ट्स हिंदू धर्म मानती हैं। उन्होंने 2010 में एक इंटरव्यू में बताया था कि नीम करौली बाबा की एक तस्वीर देखकर उनकी हिंदू धर्म में रुचि जागी थी। अनुष्का शर्मा और विराट कोहली: एक्ट्रेस अनुष्का शर्मा नीम करौली बाबा को अपना गुरु बता चुकी हैं। 2022 में विराट कोहली और अनुष्का शर्मा बेटी के साथ कैंची धाम गए थे। मनोज बाजपाई: एक्टर मनोज बाजपाई ने एक इंटरव्यू में बताया था कि वेब सीरीज ‘द फैमिली मैन’ से पहले करीब एक साल तक उनके पास कोई काम नहीं था। इसी समय वे फिल्म डायरेक्टर राम रेड्डी के साथ जुगनुमा फिल्म की रिसर्च के लिए कैंची धाम गए थे। यहां ध्यान करके उन्हें शांति और नई राह मिली। ———————————— ये खबर भी पढ़ें… बाबा नीब करौरी के थप्पड़ ने बदल दी जिंदगी:हाथ जलने पर कंबल में दबाया, पलभर में गायब हुआ दर्द; बस हादसे में बची पूरी बारात कैंची धाम और बाबा नीब करौरी (आम बोलचाल में बाबा नीम करौली के नाम से भी जाने जाते हैं) से जुड़ी उनके भक्तों के जीवन में ऐसी अनेक घटनाएं दर्ज हैं, जिन्हें वे गुरु कृपा का प्रत्यक्ष अनुभव मानते हैं। ऐसी ही एक कहानी दिल्ली निवासी रवींद्र जोशी उर्फ ‘रब्बू दादा’ की है, जिन्होंने अपना पूरा जीवन महाराजजी की सेवा में समर्पित कर दिया। (पढ़ें पूरी खबर)
संडे प्रोफाइल : मैथ्यू बर्गमैन:सोशल मीडिया कंपनियों केखिलाफ बर्गमैन की लड़ाई

अमेरिकी वकील मैथ्यू बर्गमैन इन दिनों बच्चों को सोशल मीडिया से होने वाले नुकसान के खिलाफ अपनी कानूनी मुहिम के कारण चर्चा में हैं। वे सोशल मीडिया विक्टिम्स लॉ सेंटर के संस्थापक हैं। अगस्त के अंतिम सप्ताह में मेटा ने अमेरिका के दर्जनों राज्यों की ओर से दायर मामलों को निपटाने के लिए 18 अरब डॉलर यानी करीब 1.70 लाख करोड़ रुपए के समझौते पर सहमति दी। इन मुकदमों में आरोप है कि सोशल मीडिया की लत किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य और सुरक्षा को खतरे में डाल रही है। बर्गमैन इस मुख्य मुकदमे की कार्रवाई में गहराई से जुड़े रहे हैं। बर्गमैन के मुताबिक, मेटा लगातार यह दलील देती रही है कि उसके प्लेटफॉर्म लोगों को लती नहीं बनाते। कंपनी का तर्क रहा है कि अगर बच्चों को कोई नुकसान हुआ है तो उसके लिए बच्चे या उनके माता-पिता जिम्मेदार हैं। इसके विपरीत बर्गमैन का कहना है कि सोशल मीडिया कंपनियों को अपने प्रोडक्ट से जुड़े जोखिमों के लिए जवाबदेह होना चाहिए। बर्गमैन का लगभग पूरा समय अब सोशल मीडिया कंपनियों के खिलाफ मुकदमों में बीतता है। अमेरिका में कम्युनिकेशन डिसेंसी एक्ट की धारा 230 डिजिटल कंपनियों को उनके प्लेटफॉर्म पर मौजूद कंटेंट के लिए काफी हद तक कानूनी जिम्मेदारी से छूट देती है। यह प्रावधान लंबे समय से माता-पिता, वकीलों और पीड़ित परिवारों के लिए बड़ी बाधा रहा है। बर्गमैन ने इसी के खिलाफ अलग कानूनी रास्ता अपनाया है। पिछले चार वर्षों में बर्गमैन इंस्टाग्राम, टिकटॉक और स्नैपचैट समेत प्रमुख सोशल मीडिया कंपनियों के खिलाफ मामले लड़ चुके हैं। वे चार हजार से ज्यादा मुवक्किलों के करीब 1,500 मामलों से जुड़े हैं। सिएटल में पले-बढ़े बर्गमैन ने 1986 में ग्रेजुएशन के बाद कानून की डिग्री हासिल की। करिअर की शुरुआत उन्होंने सिएटल की एक बड़ी कानूनी फर्म से की। शुरुआत में वे एक एसबेस्टस कंपनी के वकील थे। बाद में उन्होंने पेसिफिक नॉर्थवेस्ट कंपनी बनाई, जो एसबेस्टस पीड़ितों को मुआवजा दिलाने के मामले लड़ती थी। 2021 में उन्होंने सोशल मीडिया लॉ सेंटर शुरू किया, जिसका फोकस बच्चों को नुकसान पहुंचाने वाले सोशल मीडिया मामलों पर है। बर्गमैन सोशल मीडिया कंपनियों की तुलना एसबेस्टस कंपनियों से करते हैं। उनका कहना है कि एसबेस्टस कंपनियां अपने प्रोडक्ट के खतरों से परिचित थीं, फिर भी सबूत छिपाती और वैज्ञानिक जानकारी को तोड़-मरोड़कर पेश करती थीं। उनके मुताबिक सोशल मीडिया कंपनियां भी कुछ इसी तरह के सवालों का सामना कर रही हैं।
अमेरिका में एआई से जॉब संकट टला:अगस्त में 1.62 लाख जॉब पैदा हुए, उम्मीद से तीन गुना ज्यादा बढ़ोतरी

एआई को लेकर लंबे समय से डर जताया जा रहा था कि यह तकनीक लाखों इंसानों की नौकरियां छीनकर उन्हें बेरोजगार बना देगी। हालांकि हालिया आंकड़े इस डर को पूरी तरह खारिज करते दिख रहे हैं। अमेरिका में 4 सितंबर को जारी ब्यूरो ऑफ लेबर स्टैटिस्टिक्स की रिपोर्ट के अनुसार अगस्त में 1,62,000 नई नौकरियां पैदा हुईं। ये अर्थशास्त्रियों के अनुमान से करीब 3 गुना ज्यादा हैं। अमेरिका में कुल बेरोजगारी दर गिरकर 4.1 फीसदी पर बनी हुई है। ये पिछले 50 वर्षों के लगभग 90 फीसदी महीनों की तुलना में सबसे कम है। जिन युवा श्रमिकों को एआई का पहला शिकार माना जा रहा था, उनका प्रदर्शन सबसे बेहतर रहा है। अनुमान है कि अमेरिका में एआई ने अब तक करीब 10 लाख से ज्यादा नई नौकरियां पैदा की हैं। एआई में 40% ज्यादा सैलरी मिल रही कर्मचारियों की बढ़ती मांग का असर वेतन पर भी दिख रहा है। इनडीड के अनुसार, डेटा सेंटर्स में इंस्टॉलेशन और मेंटेनेंस की नौकरियों के लिए वेतन अन्य जगहों पर इसी तरह के काम की तुलना में लगभग 40% अधिक है। जून तक के आंकड़ों के मुताबिक इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट निर्माण में औसत प्रति घंटा आय में 13% से अधिक और विद्युत ठेकेदारों में लगभग 8% की वृद्धि हुई। भारत: आईटी सर्विसेज में एक्टिव जॉब ओपनिंग 18 माह के उच्चतम स्तर पर कई इंटरनेशनल रिसर्च और जॉब प्लेटफॉर्म के मुताबिक आई स्किल की मांग वाली नौकरियों की ग्रोथ सामान्य नौकरियों से 3.5 गुना तेज हो रही है। एआई से करीब 9.2 करोड़ पारंपरिक नौकरियां प्रभावित होंगी, लेकिन 17 करोड़ नई नौकरियां पैदा होंगी। एक्सफेनो के मुताबिक भारतीय आईटी सर्विसेज में एक्टिव जॉब ओपनिंग बढ़कर 57,000 तक पहुंच गईं। यह 18 माह का उच्चतम स्तर है।
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Hindi News Career Mayurbhanj Sisters Crack Neet Without Coaching Odisha Study Struggle 7 मिनट पहले कॉपी लिंक ओडिशा के मयूरभंज जिले के कपतिपदा ब्लॉक स्थित महुलापंखा गांव में रहने वाली दो बहनों यज्ञसेनी और दिव्यसेनी खतुआ ने बिना किसी कोचिंग के NEET परीक्षा पास की है। दिव्यसेनी ने पहले अटेम्प्ट में NEET क्लियर किया वहीं बड़ी बहन ने यज्ञसेनी तीसरे अटेम्प्ट में सफल हुईं। नेटवर्क की कमी की वजह से पहाड़ियों पर बैठकर पढ़ाई की परिवार के मुताबिक, गांव में मोबाइल नेटवर्क की भारी दिक्कत थी, जिससे ऑनलाइन क्लास अटेंड करना या स्टडी मटीरियल डाउनलोड करना दोनों बहनों के लिए मुश्किल हो जाता था। पढ़ने के लिए दोनों बहनें किताबें और मोबाइल फोन लेकर गांव के पास की पहाड़ियों पर जाकर पढ़ती थीं। चाहे कोई भी मौसम हो दोनों बहने पढ़ने के लिए पहाड़ पर जाती थीं। यज्ञसेनी और दिव्यसेनी शाम होने तक इसी तरह पहाड़ी पर बैठकर पढ़ती थीं। पिता किसान, मां आंगनबाड़ी सहायिका दोनों के पिता गौरांग खतुआ खेती करते हैं और मां सुनीता आंगनबाड़ी सहायिका हैं। परिवार की सीमित आमदनी के चलते NEET की महंगी कोचिंग फीस चुकाना संभव नहीं था, इसलिए दोनों बहनों ने ऑनलाइन क्लास और सेल्फ-स्टडी का सहारा लिया। आर्थिक तंगी से दोनों बहनों का कोचिंग नहीं जा सकती थीं। उसके बाद दोनों ने सेल्फ स्टडी और इंटरनेट का सहारा लिया। लेकिन चुनौती अब भी थी। मोबाइल नेटवर्क ठीक से नहीं आता था। ऑनलाइन क्लास अटेंड करना या स्टडी मटेरियल डाउनलोड करना मुश्किल होता था। ग्रामीण डिजिटल डिवाइड की झलक दूरसंचार विभाग (DoT) के आंकड़े बताते हैं कि देश में आज भी सैकड़ों गांव ऐसे हैं, जहां मोबाइल नेटवर्क या तो बेहद कमजोर है या पहुंचा ही नहीं है। खासकर पहाड़ी, आदिवासी और घने जंगलों वाले इलाकों में। शायद इसीलिए झारखंड, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड से भी ‘नेटवर्क के लिए पहाड़ी चढ़ने’ जैसी खबरें समय-समय पर आती रही हैं यानी ये सिर्फ मयूरभंज की कहानी नहीं है। योजना और असली तस्वीर में फासला केंद्र सरकार ने नेटवर्क की समस्या को दूर करने के लिए भारतनेट परियोजना 2011 में शुरू की थी।ये योजना से ग्रामीण भारत को हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड इंटरनेट से जोड़ने की दुनिया की सबसे बड़ी ग्रामीण दूरसंचार पहल है। इसका मकसद हर ग्राम पंचायत तक ब्रॉडबैंड पहुंचाना है। पर जमीन पर स्थिति अभी भी अलग है। योजना कागज पर जितनी आगे बढ़ी है, गांवों तक उसका असर उतनी तेजी से नहीं पहुंचा है। इन दो बहनों को पढ़ाई के लिए घर छोड़कर पहाड़ी की चोटी तक जाना पड़ा इसी फासले की एक तस्वीर है। ———————– ये खबर भी पढ़ें… हॉस्टल में खराब खाने, बदहाली के खिलाफ छात्राओं का प्रदर्शन:छात्राओं ने रामधुन गाकर किया विरोध, खाने में प्लास्टिक, सिगरेट के टुकड़े मिले सूरत के सरकारी समरस गर्ल्स हॉस्टल की छात्राओं ने 1 सितंबर की रात को विरोध प्रदर्शन किया। उनका ये प्रदर्शन खाने की खराब क्वालिटी, पानी की सप्लाई और रहने की खराब व्यवस्थाओं को लेकर था। छात्राओं ने “रामधुन” गाया और कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, तब तक विरोध जारी रहेगा। पूरी खबर यहां पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
दुनिया के नए नक्शे पर भारत की आपत्ति:कहा- जम्मू-कश्मीर, लद्दाख हमारे नक्शे के मुताबिक दिखें, UN में इक्वल अर्थ प्रोजेक्शन का सपोर्ट किया था

भारत ने संयुक्त राष्ट्र के इक्वल अर्थ मैप को लेकर अपनी स्थति साफ की है। विदेश मंत्रालय ने रविवार को कहा कि इस प्रस्ताव का मतलब किसी खास नक्शे को मान्यता देना नहीं है। मंत्रालय ने कहा कि प्रस्ताव में देशों की सीमाओं, विवादित इलाकों या जगहों के नाम को लेकर कोई फैसला नहीं किया गया है। यह प्रस्ताव दुनिया का नक्शा इस तरह दिखाने से जुड़ा है, जिसमें हर देश का क्षेत्रफल उसके वास्तविक आकार के अनुपात में नजर आए। भारत ने अपने बयान में कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख समेत भारत का पूरा क्षेत्र आधिकारिक भारतीय नक्शे के अनुसार ही दिखाया जाना चाहिए। मंत्रालय ने कहा कि भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को लेकर उसका रुख स्पष्ट और अटल है। खबर अपडेट हो रही है…
दुनिया के नए नक्शे पर भारत की आपत्ति:कहा- जम्मू-कश्मीर, लद्दाख हमारे नक्शे के मुताबिक दिखें, UN में इक्वल अर्थ प्रोजेक्शन का सपोर्ट किया था

भारत ने दुनिया के नए नक्शे को लेकर आपत्ति जताई है। विदेश मंत्रालय ने रविवार को कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख समेत भारत का पूरा इलाका भारत के आधिकारिक नक्शे के हिसाब से ही दिखना चाहिए। भारत के इलाके को गलत या भ्रामक तरीके से दिखाना उसे मंजूर नहीं है। विदेश मंत्रालय ने बताया कि भारत ने संयुक्त राष्ट्र (UN) के उस प्रस्ताव के पक्ष में वोट किया है, जिसमें दुनिया के नक्शे पर देशों और महाद्वीपों का आकार उनके असली क्षेत्रफल के करीब दिखाने की बात कही गई है। हालांकि, भारत ने साफ किया कि इसका मतलब किसी एक खास नक्शे को मंजूरी देना नहीं है। दरअसल, संयुक्त राष्ट्र महासभा ने शुक्रवार को दुनिया के नक्शे को नए तरीके से दिखाने का प्रस्ताव पास किया। इस बदलाव से किसी देश या महाद्वीप का असली क्षेत्रफल नहीं बदलेगा। सिर्फ नक्शे पर उनका आकार पहले से कुछ छोटा या बड़ा नजर आएगा। अभी दुनिया में मर्केटर मैप काफी इस्तेमाल होता है। इसमें नक्शे पर ध्रुवों के पास के इलाके अपने असली आकार से बड़े दिखाई देते हैं। नए तरीके को इक्वल एरिया प्रोजेक्शन कहा गया है। इसमें अफ्रीका पहले से बड़ा, जबकि यूरोप और उत्तरी अमेरिका छोटे नजर आएंगे। एशिया के कुछ हिस्से भी पहले की तुलना में छोटे दिखाई दे सकते हैं। भारत की आपत्ति क्यों है भारत को UN के इस नए नक्शे के तरीके से आपत्ति नहीं है। भारत ने बराबर क्षेत्रफल दिखाने वाले नक्शे के प्रस्ताव के पक्ष में वोट किया है। उसकी आपत्ति नक्शे में भारत के क्षेत्र को गलत तरीके से दिखाए जाने की संभावना को लेकर है। विदेश मंत्रालय ने साफ कहा है कि यह प्रस्ताव किसी खास नक्शे, नक्शा बनाने के तरीके या देशों की सीमाओं को मंजूरी नहीं देता। इसलिए भारत ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख समेत भारत का पूरा संप्रभु क्षेत्र भारत के आधिकारिक नक्शे के मुताबिक ही दिखाया जाना चाहिए। भारत के क्षेत्र का कोई भी गलत या भ्रामक चित्रण स्वीकार नहीं किया जाएगा। भारत: क्षेत्रफल वही, आकार बड़ा दिख सकता है भारत की वास्तविक जमीन, अंतरराष्ट्रीय सीमाओं या क्षेत्रफल में कोई बदलाव नहीं होगा। यह बदलाव देशों की सीमाएं बदलने वाला नहीं, बल्कि नक्शे पर पृथ्वी को दिखाने का तरीका बदलने वाला है। भारत का नक्शा देखने में भी थोड़ा अलग दिख सकता है, लेकिन भारत के मामले में बदलाव बहुत बड़ा नहीं होगा। नया नक्शा क्षेत्रफल सही अनुपात में दिखाता है। पुराने नक्शे में भूमध्य रेखा के आसपास के इलाके अपने आकार से छोटे और ध्रुवों के पास के इलाके बड़े दिखते हैं। भारत भूमध्य रेखा से बहुत दूर नहीं है, इसलिए पुराने नक्शे में भी उसका आकार कुछ हद तक छोटा दिखता है। भारत के लिए इसका मतलब क्षेत्रफल: बिल्कुल वही रहेगा। सीमाएं: नहीं बदलेंगी। भारत की आकृति: थोड़ी बदली हुई/कम खिंची हुई दिखाई दे सकती है। दूसरे देशों की तुलना में आकार: भारत कुछ बड़ा दिखाई दे सकता है, खासकर जब उसकी तुलना यूरोप, रूस, कनाडा जैसे ज्यादा उत्तरी देशों से की जाए। अफ्रीका पर असर: सबसे ज्यादा नजर आएगा, क्योंकि उसका वास्तविक आकार पुराने मर्केटर नक्शे की तुलना में बहुत बड़ा दिखाई देगा। मौजूदा नक्शे में आखिर दिक्कत क्या थी? दुनिया में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले नक्शों में से एक मर्केटर नक्शा है। इसे यूरोपियन मैप मेकर जेरार्डस मर्केटर ने 1569 में बनाया था। इसका मकसद समुद्र में जहाजों के रास्ते और दिशा को समझना आसान बनाना था। लेकिन पूरी गोल धरती को सपाट नक्शे पर दिखाने की वजह से इसमें देशों और महाद्वीपों का आकार असल से अलग नजर आने लगता है। जैसे-जैसे कोई इलाका भूमध्य रेखा से दूर जाता है, वह नक्शे पर जरूरत से ज्यादा बड़ा दिखाई देने लगता है। यही वजह है कि उत्तरी और दक्षिणी हिस्सों के कई इलाके असल से काफी बड़े नजर आते हैं। ग्रीनलैंड इसका सबसे मशहूर उदाहरण है। मर्केटर नक्शे में ग्रीनलैंड दक्षिण अमेरिका के लगभग बराबर दिखाई देता है। लेकिन असल में दोनों के आकार में बहुत बड़ा अंतर है। ग्रीनलैंड का क्षेत्रफल करीब 22 लाख वर्ग किलोमीटर है। यह लगभग डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो के बराबर है। वहीं अफ्रीका का क्षेत्रफल करीब 3 करोड़ वर्ग किलोमीटर है। यानी अफ्रीका ग्रीनलैंड से करीब 14 गुना बड़ा है। फिर भी मर्केटर नक्शे को देखकर दोनों का आकार लगभग एक जैसा लग सकता है। यही वह फर्क है जिसे अब कम करने की कोशिश हो रही है। अफ्रीकी देश नक्शा बदलने की मांग क्यों कर रहे थे? अफ्रीकी देशों का कहना है कि बात सिर्फ नक्शे पर किसी देश या महाद्वीप के छोटा-बड़ा दिखने की नहीं है। दुनिया का नक्शा यह भी तय करता है कि हम अलग-अलग हिस्सों को किस नजर से देखते हैं। UN के सामने रखे गए प्रस्ताव में कहा गया था कि मर्केटर नक्शे में अफ्रीका का वास्तविक आकार काफी छोटा नजर आता है। लंबे समय तक ऐसी तस्वीर देखने से लोगों के मन में अफ्रीका के आकार और वैश्विक महत्व को लेकर गलत धारणा बन सकती है। प्रस्ताव में लैटिन अमेरिका और दक्षिण एशिया का भी जिक्र है। इसमें कहा गया है कि नक्शे में इन क्षेत्रों का छोटा नजर आना उनकी विकास जरूरतों, बुनियादी ढांचे और आर्थिक क्षमता को भी कम करके आंकने की धारणा बना सकता है। अफ्रीकी देश टोगो के विदेश मंत्री रॉबर्ट डुसे ने कहा कि नक्शे सिर्फ भूगोल समझने का साधन नहीं हैं, बल्कि वे शिक्षा और लोगों की सोच को भी प्रभावित करते हैं। यह प्रस्ताव टोगो ने पेश किया था और इसे अफ्रीकी संघ का समर्थन मिला। फ्रांस भी मर्केटर मैप छोड़ने की तैयारी में UN में मतदान से पहले फ्रांस ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन किया। फ्रांस के विदेश मंत्री ज्यां-नोएल बारो ने कहा कि उनका देश मर्केटर मैप की जगह ऐसे नक्शों का इस्तेमाल करेगा, जिनमें देशों का वास्तविक क्षेत्रफल ज्यादा सही तरीके से दिखाई दे। फ्रांस अब एकर्ट IV प्रोजेक्शन का इस्तेमाल करेगा। एकर्ट IV नक्शा 1906 में जर्मन कार्टोग्राफर मैक्स एकर्ट-ग्राइफेंडॉर्फ ने बनाया था। उन्होंने दुनिया के नक्शे के छह अलग-अलग डिजाइन तैयार किए थे। इनमें चौथा नक्शा यानी एकर्ट IV क्षेत्रफल के लिहाज से सबसे सटीक माना गया। एकर्ट IV और
मिर्जापुर: द मूवी ने दूसरे दिन ₹32 करोड़ कमाए:हनुमान अंश ने 5वें शनिवार को ₹16.50 करोड़ कमाकर धुरंधर का रिकॉर्ड तोड़ा

फिल्म हनुमान अंश बॉक्स ऑफिस पर पांचवें हफ्ते में भी मजबूत प्रदर्शन कर रही है। फिल्म ने हिंदी में 5वें शनिवार की सबसे बड़ी कमाई दर्ज करते हुए धुरंधर का पिछला रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया। शनिवार फिल्म के लिए अब तक का सबसे बड़ा कमाई वाला दिन भी रहा। सैकनिल्क के मुताबिक, हनुमान अंश ने पांचवें शनिवार को हिंदी भाषा में 16.50 करोड़ रुपए नेट का कलेक्शन किया। जबकि धुरंधर ने 5वें शनिवार को 11.75 करोड़ रुपए कमाए थे। हनुमान अंश ने बॉक्स ऑफिस पर सिर्फ 10 लाख रुपए नेट की ओपनिंग की थी। पहले दो हफ्तों में फिल्म ने करीब 1.50 करोड़ रुपए नेट कमाए। तीसरे हफ्ते में कमाई बढ़कर 10.40 करोड़ रुपए नेट हुई और चौथे हफ्ते में फिल्म ने 61 करोड़ रुपए नेट का कलेक्शन किया। पांचवें हफ्ते के पहले दो दिनों में ही फिल्म 26.25 करोड़ रुपए नेट कमा चुकी है। आगे भी इसके कलेक्शन में बढ़ोतरी की उम्मीद है। पांचवें शनिवार की कमाई के बाद हनुमान अंश भारत में 100 करोड़ रुपए नेट के आंकड़े के करीब पहुंच गई। फिल्म का कुल नेट कलेक्शन ₹99.38 करोड़ हो गया है। आज पूरी उम्मीद है कि फिल्म 100 करोड़ रुपए नेट का आंकड़ा पार कर लेगी। जिसके बाद यह पहली भारतीय फिल्म बनेगी जिसने भारतीय बॉक्स ऑफिस पर 1 करोड़ रुपए से कम की ओपनिंग के बाद 100 करोड़ रुपए नेट क्लब में जगह बनाई है। ‘मिर्जापुर: द मूवी’ ने दूसरे दिन ₹32 करोड़ कमाए वहीं, ‘मिर्जापुर: द मूवी’ ने बॉक्स ऑफिस पर दूसरे दिन भी अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखी। सैकनिल्क के मुताबिक, फिल्म ने दूसरे दिन भारत में ₹32.00 करोड़ नेट कलेक्शन किया। फिल्म का अब तक का इंडिया ग्रॉस कलेक्शन ₹69.30 करोड़ और इंडिया नेट कलेक्शन ₹57.75 करोड़ हो गया है। वहीं, ओवरसीज में दूसरे दिन फिल्म ने ₹6.00 करोड़ कमाए, जिससे कुल ओवरसीज ग्रॉस कलेक्शन ₹10.25 करोड़ हो गया है। दो दिनों में ‘मिर्जापुर: द मूवी’ का वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन ₹79.55 करोड़ पहुंच गया है। करण जौहर ने कहा- ‘सॉलिड, कड़क और मसालेदार फिल्म’ फिल्ममेकर करण जौहर ने ‘मिर्जापुर: द मूवी’ देखने के बाद फिल्म की तारीफ की है। फिल्म रिलीज होने के बाद उन्होंने इंस्टाग्राम स्टोरी पर इसका ट्रेलर शेयर किया और अपना रिएक्शन दिया। करण ने लिखा, “मिर्जापुर एक सॉलिड, कड़क और मसालेदार फिल्म है। मुझे यह सीरीज बहुत पसंद है और मैंने फिल्म को भी खूब एंजॉय किया। सभी पुराने और फेमस किरदार शानदार हैं और नए किरदारों के लिए भी जगह बनाते हैं। अगर आपने सीरीज नहीं भी देखी है, तब भी आपको फिल्म पसंद आएगी।” गौरतलब है कि मिर्जापुर द मूवी एक्सेल एंटरटेनमेंट की पहली बड़ी थिएट्रिकल फिल्मों में से एक है, जो एक सफल स्ट्रीमिंग फ्रेंचाइजी से आई है। ‘मिर्जापुर’ सीरीज अमेजन प्राइम वीडियो पर रिलीज हुई थी। ‘मिर्जापुर’ का पहला सीजन 16 नवंबर 2018 को रिलीज हुआ था, जिसमें कुल 9 एपिसोड थे। इसके बाद दूसरा सीजन 23 अक्टूबर 2020 को आया, जिसमें 10 एपिसोड शामिल थे। वहीं, तीसरा सीजन 5 जुलाई 2024 को रिलीज किया गया। इस सीजन में भी कुल 10 एपिसोड थे। फिल्म में पंकज त्रिपाठी, अली फजल, दिव्येंदु शर्मा के अलावा श्वेता त्रिपाठी, जितेंद्र कुमार, रवि किशन, अभिषेक बनर्जी, रसिका दुग्गल, श्रिया पिलगांवकर, हर्षिता गौर, सुशांत सिंह, मोहित मलिक, शीबा चड्ढा, राजेश तैलंग, कुलभूषण खरबंदा, सोनल चौहान, प्रमोद पाठक और अनंग्शा बिस्वास भी नजर आ रहे हैं। ………… यह खबर भी पढ़ें… मूवी रिव्यू- मिर्जापुरः द फिल्म:मुन्ना का पागलपन, कालीन भैया का ठहराव और गुड्डू का गुस्सा, ‘मिर्जापुर’ में फिर गरजी बंदूकें, लेकिन कहानी हुई लंबी मिर्जापुर की दुनिया में कानून से ज्यादा ताकतवर है बंदूक और बंदूक से ज्यादा ताकतवर है सही वक्त पर चली गई चाल। तीन सीजन तक ओटीटी पर इस दुनिया का भौकाल देखने के बाद अब गुरमीत सिंह इसे बड़े पर्दे पर लेकर आए हैं। अच्छी बात यह है कि फिल्म को सिर्फ सीरीज का लंबा एपिसोड बनाने की कोशिश नहीं की गई है। पूरी खबर यहां पढ़ें…
मिर्जापुर: द मूवी ने दूसरे दिन ₹32 करोड़ कमाए:हनुमान अंश ने 5वें शनिवार को ₹16.50 करोड़ कमाकर धुरंधर का रिकॉर्ड तोड़ा

फिल्म हनुमान अंश बॉक्स ऑफिस पर पांचवें हफ्ते में भी मजबूत प्रदर्शन कर रही है। फिल्म ने हिंदी में 5वें शनिवार की सबसे बड़ी कमाई दर्ज करते हुए धुरंधर का पिछला रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया। शनिवार फिल्म के लिए अब तक का सबसे बड़ा कमाई वाला दिन भी रहा। सैकनिल्क के मुताबिक, हनुमान अंश ने पांचवें शनिवार को हिंदी भाषा में 16.50 करोड़ रुपए नेट का कलेक्शन किया। जबकि धुरंधर ने 5वें शनिवार को 11.75 करोड़ रुपए कमाए थे। हनुमान अंश ने बॉक्स ऑफिस पर सिर्फ 10 लाख रुपए नेट की ओपनिंग की थी। पहले दो हफ्तों में फिल्म ने करीब 1.50 करोड़ रुपए नेट कमाए। तीसरे हफ्ते में कमाई बढ़कर 10.40 करोड़ रुपए नेट हुई और चौथे हफ्ते में फिल्म ने 61 करोड़ रुपए नेट का कलेक्शन किया। पांचवें हफ्ते के पहले दो दिनों में ही फिल्म 26.25 करोड़ रुपए नेट कमा चुकी है। आगे भी इसके कलेक्शन में बढ़ोतरी की उम्मीद है। पांचवें शनिवार की कमाई के बाद हनुमान अंश भारत में 100 करोड़ रुपए नेट के आंकड़े के करीब पहुंच गई। फिल्म का कुल नेट कलेक्शन ₹99.38 करोड़ हो गया है। आज पूरी उम्मीद है कि फिल्म 100 करोड़ रुपए नेट का आंकड़ा पार कर लेगी। जिसके बाद यह पहली भारतीय फिल्म बनेगी जिसने भारतीय बॉक्स ऑफिस पर 1 करोड़ रुपए से कम की ओपनिंग के बाद 100 करोड़ रुपए नेट क्लब में जगह बनाई है। ‘मिर्जापुर: द मूवी’ ने दूसरे दिन ₹32 करोड़ कमाए वहीं, ‘मिर्जापुर: द मूवी’ ने बॉक्स ऑफिस पर दूसरे दिन भी अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखी। सैकनिल्क के मुताबिक, फिल्म ने दूसरे दिन भारत में ₹32.00 करोड़ नेट कलेक्शन किया। फिल्म का अब तक का इंडिया ग्रॉस कलेक्शन ₹69.30 करोड़ और इंडिया नेट कलेक्शन ₹57.75 करोड़ हो गया है। वहीं, ओवरसीज में दूसरे दिन फिल्म ने ₹6.00 करोड़ कमाए, जिससे कुल ओवरसीज ग्रॉस कलेक्शन ₹10.25 करोड़ हो गया है। दो दिनों में ‘मिर्जापुर: द मूवी’ का वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन ₹79.55 करोड़ पहुंच गया है। करण जौहर ने कहा- ‘सॉलिड, कड़क और मसालेदार फिल्म’ फिल्ममेकर करण जौहर ने ‘मिर्जापुर: द मूवी’ देखने के बाद फिल्म की तारीफ की है। फिल्म रिलीज होने के बाद उन्होंने इंस्टाग्राम स्टोरी पर इसका ट्रेलर शेयर किया और अपना रिएक्शन दिया। करण ने लिखा, “मिर्जापुर एक सॉलिड, कड़क और मसालेदार फिल्म है। मुझे यह सीरीज बहुत पसंद है और मैंने फिल्म को भी खूब एंजॉय किया। सभी पुराने और फेमस किरदार शानदार हैं और नए किरदारों के लिए भी जगह बनाते हैं। अगर आपने सीरीज नहीं भी देखी है, तब भी आपको फिल्म पसंद आएगी।” गौरतलब है कि मिर्जापुर द मूवी एक्सेल एंटरटेनमेंट की पहली बड़ी थिएट्रिकल फिल्मों में से एक है, जो एक सफल स्ट्रीमिंग फ्रेंचाइजी से आई है। ‘मिर्जापुर’ सीरीज अमेजन प्राइम वीडियो पर रिलीज हुई थी। ‘मिर्जापुर’ का पहला सीजन 16 नवंबर 2018 को रिलीज हुआ था, जिसमें कुल 9 एपिसोड थे। इसके बाद दूसरा सीजन 23 अक्टूबर 2020 को आया, जिसमें 10 एपिसोड शामिल थे। वहीं, तीसरा सीजन 5 जुलाई 2024 को रिलीज किया गया। इस सीजन में भी कुल 10 एपिसोड थे। फिल्म में पंकज त्रिपाठी, अली फजल, दिव्येंदु शर्मा के अलावा श्वेता त्रिपाठी, जितेंद्र कुमार, रवि किशन, अभिषेक बनर्जी, रसिका दुग्गल, श्रिया पिलगांवकर, हर्षिता गौर, सुशांत सिंह, मोहित मलिक, शीबा चड्ढा, राजेश तैलंग, कुलभूषण खरबंदा, सोनल चौहान, प्रमोद पाठक और अनंग्शा बिस्वास भी नजर आ रहे हैं। ………… यह खबर भी पढ़ें… मूवी रिव्यू- मिर्जापुरः द फिल्म:मुन्ना का पागलपन, कालीन भैया का ठहराव और गुड्डू का गुस्सा, ‘मिर्जापुर’ में फिर गरजी बंदूकें, लेकिन कहानी हुई लंबी मिर्जापुर की दुनिया में कानून से ज्यादा ताकतवर है बंदूक और बंदूक से ज्यादा ताकतवर है सही वक्त पर चली गई चाल। तीन सीजन तक ओटीटी पर इस दुनिया का भौकाल देखने के बाद अब गुरमीत सिंह इसे बड़े पर्दे पर लेकर आए हैं। अच्छी बात यह है कि फिल्म को सिर्फ सीरीज का लंबा एपिसोड बनाने की कोशिश नहीं की गई है। पूरी खबर यहां पढ़ें…
SBI Recruitment 2026 | Specialist Cadre Officer Vacancy Apply Online

Hindi News Career SBI Recruitment 2026 | Specialist Cadre Officer Vacancy Apply Online 19 मिनट पहले कॉपी लिंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने 270 से अधिक पदों पर स्पेशलिस्ट कैडर ऑफिसर की वैकेंसी निकाली है। उम्मीदवार ऑफिशियल वेबसाइट onlinesbi.sbi.bank.in पर जाकर अप्लाई कर सकते हैं। यह भर्ती कॉन्ट्रैक्ट के बेसिस पर की जाएगी। एजुकेशनल क्वालिफिकेशन : मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से किसी भी विषय में ग्रेजुएशन की डिग्री। पद के अनुसार 3 से 15 साल का अनुभव। एज लिमिट : न्यूनतम : 23 साल अधिकतम : 50 साल ओबीसी : अधिकतम उम्र में 3 साल की छूट। एससी/एसटी : अधिकतम उम्र में 5 साल की छूट। पीडब्ल्यूबीडी : अधिकतम उम्र में 10-15 साल तक की छूट। सिलेक्शन प्रोसेस : इंटरव्यू के बेसिस पर फीस : सामान्य, ओबीसी, ईडब्ल्यूएस : 750 रुपए एससी, एसटी, दिव्यांग, पूर्व सैनिक : नि:शुल्क ऐसे करें आवेदन : ऑफिशियल वेबसाइट recruitment.sbi.bank.in पर जाएं। न्यू रजिस्ट्रेशन लिंक पर क्लिक करें। नाम, पासवर्ड के साथ लॉग इन करें। फॉर्म में पासपोर्ट साइज फोटो, सिग्नेचर और अन्य डॉक्यूमेंट्स अटैच करें। फीस का भुगतान करें। फॉर्म प्रिव्यू करके सब्मिट करें। इसका प्रिंटआउट निकाल कर रखें। ऑनलाइन आवेदन लिंक ऑफिशियल नोटिफिकेशन लिंक —————————————————————————– ये खबर भी पढ़ें टीचर दो, टीचर दो-आज दो, अभी दो:इंटर लेवल में टीचर के सभी 9 पद खाली, गेस्ट और PTR टीचर के बल पर चल रही कक्षाएं नैनीताल के राजकीय बालिका इंटर कॉलेज बेतालघाट में टीचर की कमी से छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। 3 सितंबर को कक्षा 10वीं, 11वीं और 12वीं की छात्राओं ने टीचर्स की पोस्टिंग की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। पूरी खबर यहां पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…









