अमीषा पटेल के माता-पिता के घर चोरी:डायमंड-सोने की जूलरी चुराने वाली नौकरानी गिरफ्तार, एक्ट्रेस बोलीं- शुक्र है किसी को चोट नहीं पहुंचाई, सब सुरक्षित हैं

अमीषा पटेल के माता-पिता के घर से करीब 5 लाख रुपए की सोने और हीरे की ज्वेलरी चोरी हुई है। वह चर्चगेट में रहते हैं। मरीन ड्राइव पुलिस ने चोरी के आरोप में घर में काम करने वाली 40 साल की नौकरानी को गिरफ्तार किया है। आरोपी 15 सितंबर तक पुलिस कस्टडी में है। चोरी की घटना पर अमीषा पटेल ने टाइम्स ऑफ इंडिया से कहा, मैंने कल अपने पेरेंट्स से कॉल पर एक घंटे बात की है। पुलिस ने चोरी करने वाली नौकरानी को गिरफ्तार कर लिया है। वो अब जेल में है। उसने चोरी का जुर्म कबूल कर लिया है। सबसे ज्यादा खुशी मुझे इस बात की है कि मेरा परिवार सुरक्षित है और किसी को भी चोट नहीं पहुंचाई गई है। अश्मित बोले- जनवरी में हुई थी चोरी, पेरेंट्स ने नौकरानी से खुद पूछताछ की थी अश्मित अपने माता-पिता के साथ उसी घर में रहते हैं। उन्होंने कहा, “हमारे यहां करीब एक साल से काम कर रही हाउस हेल्प ने जनवरी में चोरी की थी, लेकिन हमने शिकायत हाल ही में दर्ज करवाई है। मेरे पेरेंट्स ने उससे चोरी के बारे में पूछा और उसे सोचने, जूलरी लौटाने का समय भी दिया था, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। आगे अश्मित ने कहा, जूलरी की कीमत करीब 5 लाख रुपए है। वो एक साल से हमारे घर में काम कर रही थी, लेकिन जून के आखिर में उसने नौकरी छोड़ दी। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है, फिलहाल जांच जारी है। कैसे हुई नौकरानी की गिरफ्तारी? 40 साल की सीमा घाटे नाम की महिला पिछले एक साल से अमीषा पटेल के घर में काम कर रही थी। वह पालघर की रहने वाली है। पुलिस के मुताबिक, जनवरी 2026 में उनके घर से एक कंगन चोरी हुआ था। चोरी के बाद अमीषा की मां आशा को सीमा पर शक था। उन्होंने अगले पांच से छह महीनों तक सीमा से चोरी कबूल करने और ज्वेलरी लौटाने को कहा।वो लगातार चोरी से इनकार करती रही और फिर नौकरी छोड़ दी। कुछ समय पहले ही अमीषा की मां ने मरीन ड्राइव पुलिस स्टेशन में अज्ञात महिला के नाम से शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायत के बाद वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक के निर्देश पर क्राइम डिटेक्शन टीम ने जांच शुरू की। टीम ने संदिग्ध महिला को विरार से ट्रेस किया। इसके बाद सीमा घाटे को हिरासत में लिया गया। उसे कोर्ट में पेश किया गया, जहां से 15 सितंबर तक पुलिस कस्टडी मिली। पुलिस गायब ज्वेलरी बरामद करने की कोशिश कर रही है। यह भी जांच की जा रही है कि आरोपी का कोई पिछला आपराधिक रिकॉर्ड है या नहीं। अमीषा पटेल का बॉलीवुड करियर बॉलीवुड एक्ट्रेस अमीषा पटेल ने साल 2000 में ऋतिक रोशन के साथ फिल्म ‘कहो ना… प्यार है’ से एक्टिंग की शुरुआत की थी। यह रोमांटिक थ्रिलर फिल्म बड़ी हिट रही और अमीषा रातों-रात स्टार बन गईं। इसके बाद उन्होंने कई हिट और सुपरहिट फिल्मों में काम किया। इनमें ‘गदर: एक प्रेम कथा’, ‘हमराज’, ‘हनीमून ट्रैवल्स प्राइवेट लिमिटेड’, ‘भूल भुलैया’ और ‘रेस 2’ जैसी फिल्में शामिल हैं। अमीषा पटेल ने साल 2023 में फिल्म ‘गदर 2’ से बड़े पर्दे पर वापसी की।
RPSC SI Re-Exam 2021 Update

राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) की ओर से उपनिरीक्षक/प्लाटून कमांडर (री-एग्जाम)-2021 परीक्षा में 20 सितंबर को होगी। वहीं इस परीक्षा से RPSC पहली बार भर्ती एग्जाम में फेस रिकग्निशन-थंब इम्प्रेशन लागू करेगा। साथ ही पहले लागू किए गए ओएमआर शीट में पांचवें व . यह भर्ती एग्जाम 859 पदों के लिए होगी। वहीं परीक्षा के लिए आवंटित सेंटर के जिले की जानकारी वेबसाइट पर अपलोड कर दी गई है। इसकी जानकारी SSO पोर्टल पर लॉगिन कर प्राप्त कर सकेंगे। एडमिट कार्ड 17 सितंबर को अपलोड किए जाएंगे। इसे RPSC की वेबसाइट और SSO पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। एग्जाम में करीब दो लाख 35 हजार कैंडिडेट्स शामिल होंगे। पिछली भर्ती में 7 लाख 97 हजार कैंडिडेट ने किया था आवेदन उपनिरीक्षक/प्लाटून कमांडर परीक्षा-2021 का विज्ञापन 3 फरवरी 2021 को जारी किया गया था। इस भर्ती के लिए पहले हुई परीक्षा में 7 लाख 97 हजार अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। इनमें से 3 लाख 83 हजार 97 अभ्यर्थी पिछली परीक्षा (13 से 15 सितंबर 2021) में शामिल हुए थे। पेपर लीक के कारण परीक्षा रद्द कर दी गई। जब री-एग्जाम कराने का निर्णय लिया गया, तब 8 मई 2025 को पहले केवल परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों को ही मौका दिया गया था। बाद में सभी अभ्यर्थियों को इस परीक्षा में शामिल होने की छूट दे दी गई। हालांकि इसमें केवल 2 लाख 35 हजार ने सहमति दी। एक घंटे पहले तक ही मिलेगी एंट्री परीक्षा केंद्र पर किसी भी परीक्षार्थी को एग्जाम शुरू होने के 60 मिनट पहले तक ही प्रवेश दिया जाएगा। इसके बाद किसी भी परीक्षार्थी को एग्जाम सेंटर पर प्रवेश नहीं दिया जाएगा। अभ्यर्थी परीक्षा शुरू होने के लगभग 2 घंटे पहले परीक्षा केंद्र पर प्रवेश के लिए उपस्थित हों, ताकि सुरक्षा जांच, फेस रिकग्निशन-थंब इम्प्रेशन आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन, पहचान का काम समय पर पूरा हो सके। फोटो युक्त पहचान जरूरी अभ्यर्थियों को पहचान के लिए परीक्षा सेंटर पर नया कलर आधार कार्ड लेकर आना होगा। यदि मूल आधार कार्ड पर फोटो पुरानी या अस्पष्ट है तो अन्य मूल फोटो युक्त पहचान-पत्र जैसे मतदाता पहचान-पत्र, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, जिसमें कलर और नई स्पष्ट फोटो हो, लेकर परीक्षा केंद्र पर उपस्थित होंगे। साथ ही अभ्यर्थी प्रवेश-पत्र पर भी नई कलर फोटो ही चिपकाएं। स्पष्ट मूल फोटो युक्त पहचान-पत्र के अभाव में परीक्षा केंद्र में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। अपील- बहकावे में नहीं आएं अभ्यथी आयोग की ओर से अपील की गई है कि आयोजित परीक्षा में सम्मिलित होने वाले अभ्यर्थी किसी दलाल, मीडिएटर, समाजकंटक या अपराधी के बहकावे में न आएं। यदि कोई परीक्षा में पास कराने के नाम पर रिश्वत की मांग या अन्य कोई प्रलोभन व झांसा देता है तो प्रमाण सहित इस संबंध में जांच एजेंसी और आयोग के कंट्रोल रूम नंबर 0145-2635200, 2635212 एवं 2635255 पर सूचना दें। परीक्षा में अनुचित साधन अपनाए जाने और अनुचित कृत्यों में शामिल होने पर राजस्थान सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम के अध्युपाय) अधिनियम-2022 के तहत आजीवन कारावास, 10 करोड़ रुपए तक के जुर्माने से दंडित और चल-अचल संपत्ति कुर्क कर जब्त की जा सकती है। ………. ये खबर भी पढ़ें… SI भर्ती-2021: 2.30 लाख कैंडिडेट ही देंगे री-एग्जाम:7 लाख 97 हजार ने भरा था फॉर्म; RPSC अध्यक्ष ने चुनाव आयोग को लिखा लेटर सब इंस्पेक्टर (SI) भर्ती-2021 का री-एग्जाम केवल 2 लाख 30 हजार अभ्यर्थी ही देंगे। इसका कारण यह है कि री-एग्जाम के लिए पहले भरे गए आवेदन पत्रों में सुधार और अपडेट करने का अवसर दिया गया था। ज्यादातर अभ्यर्थियों ने इसमें रुचि नहीं दिखाई। पहले यह परीक्षा 3 दिन में आयोजित की गई थी। अब परीक्षा एक ही दिन (20 सितंबर 2026) को होगी। ऐसे में नॉर्मलाइजेशन की जरूरत नहीं पड़ेगी। रिजल्ट भी जल्दी घोषित हो सकेगा। (पूरी खबर पढें)
Tigmanshu Dhulia Slams KGF Star Yash Look

2 मिनट पहले कॉपी लिंक निर्देशक तिग्मांशु धूलिया ने हाल ही में साउथ फिल्मों में दिखाए जा रहे हीरोज के लुक और हिंसा पर अपनी राय रखी। उन्होंने फिल्म ‘KGF’ के हीरो यश के लुक पर तंज कसा। तिग्मांशु ने कहा कि आजकल फिल्मों में हीरो लंबे बाल और बड़ी दाढ़ी में नजर आते हैं, जो उन्हें राक्षस जैसे लगते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जिस तरह के किरदार पहले रामायण और महाभारत में राक्षसों के होते थे, वे आज फिल्मों में हीरो बनकर युवाओं को पसंद आ रहे हैं। तिग्मांशु धूलिया ने यह बात कोशाला साहित्य महोत्सव में बातचीत के दौरान कही। उन्होंने कहा कि आजकल फिल्मों में बहुत ज्यादा गुस्से वाले और हिंसक किरदार दिखाए जा रहे हैं। उनके मुताबिक, ‘बाहुबली’ के बाद ‘KGF’ और ‘कांतारा’ जैसी फिल्मों में मार-काट और खून-खराबा काफी बढ़ गया है। तिग्मांशु ने कहा कि उन्हें इस तरह का सिनेमा बिल्कुल पसंद नहीं है। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि दर्शक ऐसी फिल्मों को पसंद कर रहे हैं। उनके मुताबिक, इसकी एक वजह समाज में लोगों के अंदर मौजूद गुस्सा हो सकता है। उन्होंने कहा कि शायद लोगों को अपना गुस्सा निकालने का कोई जरिया नहीं मिल रहा, इसलिए वे फिल्मों के इन किरदारों में खुद को देखते हैं और उन्हें देखकर मजा लेते हैं। यश ने KGF फिल्म फ्रेंचाइजी में रॉकी का किरदार निभाया था। उन्होंने कहा कि उन्हें समझ नहीं आता कि इन फिल्मों का लोगों पर इतना असर क्यों है। तिग्मांशु ने यह भी कहा कि लगातार ऐसी फिल्में बन रही हैं और दर्शक उन्हें पसंद कर रहे हैं। उन्होंने साफ किया कि यह उनकी निजी पसंद का सिनेमा नहीं है। तिग्मांशु धूलिया ने ‘धुरंधर’ की कहानी पर सवाल उठाए हाल ही में तिग्मांशु धूलिया ने मौजूदा हिंदी सिनेमा में कहानी कहने के तरीके पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि कॉरपोरेट कल्चर और एक जैसे फिल्मी टेम्पलेट के कारण फिल्मों में मौलिक कहानियां कम होती जा रही हैं। धूलिया ने यह टिप्पणी हाल ही में एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया (EGI) की ओर से आयोजित राजेंद्र माथुर मेमोरियल लेक्चर के दौरान की थी। धूलिया ने कमर्शियल मेनस्ट्रीम सिनेमा का उदाहरण देते हुए ‘पुष्पा’, ‘KGF’ और ‘धुरंधर’ का जिक्र किया। उन्होंने कहा, “हर फिल्म एक फिक्शनल बायोपिक है।” ‘धुरंधर’ का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि अगर किसी से फिल्म की कहानी पूछी जाए तो शायद वह उसे ठीक से बता नहीं पाएगा। निर्देशक तिग्मांशु धूलिया ने ‘पान सिंह तोमर’, ‘हासिल’ और ‘साहेब बीवी और गैंगस्टर’ जैसी फिल्में डायरेक्ट की हैं। उन्होंने कहा, “मैंने वह फिल्म देखी है। मुझे फिल्म का पहला पार्ट काफी पसंद आया। बहुत अच्छी तरह प्रेजेंट किया गया है, काफी एंगेजिंग है और म्यूजिक भी अच्छा है, लेकिन आप उसकी कहानी पूछिएगा तो आप कहानी बता नहीं पाएंगे।” धूलिया ने फिल्म की कहानी को अपने अंदाज में समझाते हुए कहा, “एक आदमी है, अंडरकवर स्पाई है, पाकिस्तान जाता है और वहां तबाही मचा देता है। ये कोई कहानी हुई?” उन्होंने आगे कहा कि फिल्मों में कहानी कहने वाले लोग कम हो गए हैं और जो लोग अलग तरह की कहानी कहना चाहते हैं, उन्हें बनाने का मौका नहीं मिलता। उनके मुताबिक मेकर्स को डर रहता है कि ऐसी फिल्में चलेंगी नहीं। धूलिया बोले- फिल्मों में एक जैसा टेंपलेट दिखाई दे रहा है धूलिया ने कहा कि एक ही जैसा टेंपलेट हर जगह दिखाई दे रहा है। उन्होंने इसे एक्सट्रीम कैपिटलिज्म से जोड़ते हुए कहा कि जिस तरह शहरों, फैशन, गाड़ियों और दुकानों में एकरूपता बढ़ रही है, उसी तरह फिल्मों में भी इंडिविजुअलिटी कम होती जा रही है। उन्होंने पुराने हिंदी सिनेमा का जिक्र करते हुए कहा कि बिमल रॉय, शक्ति सामंत, मनमोहन देसाई, प्रकाश मेहरा और सुभाष घई जैसे फिल्मकारों से लेकर 2017 तक हिंदी सिनेमा में स्थिति ठीक थी। इसके बाद अचानक बदलाव आया और हम कहानी कहना ही भूल चुके हैं। खबर यहां पढ़ें… तिग्मांशु धूलिया के वर्कफ्रंट की बात करें तो उनकी फिल्म ‘घमासान’ 11 सितंबर 2026 को ZEE5 पर रिलीज हुई है। फिल्म में प्रतीक गांधी और अरशद वारसी मुख्य भूमिकाओं में हैं। फिल्म बुंदेलखंड के डकैत संसार से प्रेरित कहानी पर आधारित है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
Delhi Declaration | BRICS Summit India China Global Influence Analysis

नई दिल्ली11 मिनट पहले कॉपी लिंक नई दिल्ली में BRICS समिट के दौरान सदस्य देशों के नेताओं ने फैमिली फोटो खिंचवाई। BRICS समिट के बाद जारी नई दिल्ली डिक्लेरेशन ने दुनिया का ध्यान खींचा। घोषणापत्र में BRICS देशों ने एकतरफा प्रतिबंधों का विरोध किया, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को कम करने की अपील की और विकासशील देशों को वैश्विक फैसलों में ज्यादा भागीदारी देने की बात कही। समिट को लेकर दुनिया के अलग-अलग मीडिया संस्थानों ने अपने-अपने नजरिए से रिपोर्टिंग की। कहीं भारत की कूटनीति चर्चा में रही, तो कहीं BRICS के भीतर भारत और चीन के बढ़ते प्रभाव की होड़ पर फोकस रहा। पढ़िए, दुनिया के बड़े मीडिया संस्थानों ने BRICS समिट और नई दिल्ली डिक्लेरेशन को किस नजरिए से देखा… रॉयटर्स- भारत अलग-अलग हितों वाले देशों को एक मंच पर लाया रॉयटर्स ने BRICS के नई दिल्ली घोषणापत्र को लेकर लिखा कि भारत ने ईरान, सऊदी अरब, UAE, चीन और रूस जैसे अलग-अलग हितों वाले देशों के बीच सहमति बनाने में अहम भूमिका निभाई। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और इन देशों के अलग-अलग रुख के बीच सभी को एक साझा बयान पर सहमत कराना भारत के लिए बड़ी चुनौती थी। NYT- चीन और भारत में प्रभाव बढ़ाने की होड़ द न्यूयॉर्क टाइम्स ने BRICS समिट को भारत और चीन के बीच बढ़ते प्रभाव की होड़ के नजरिए से देखा। रिपोर्ट के मुताबिक, चीन BRICS को अमेरिकी दबदबे को चुनौती देने वाले मंच के तौर पर मजबूत करना चाहता है। वहीं, भारत की कोशिश है कि BRICS किसी एक देश या शक्ति के प्रभाव में न आए। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत चाहता है कि BRICS में अलग-अलग सोच और हित रखने वाले देश भी साथ मिलकर काम करें। यानी संगठन का फोकस किसी एक खेमे के साथ खड़े होने के बजाय आपसी सहयोग और विकासशील देशों की आवाज को मजबूत करने पर रहे। चाइना डेली: BRICS बदल सकता है दुनिया में ताकत का संतुलन चीन के अखबार चाइना डेली ने BRICS को ऐसे मंच के तौर पर पेश किया, जो दुनिया में ताकत का संतुलन बदलने में बड़ी भूमिका निभा सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, विकासशील देश अब दुनिया के बड़े मुद्दों और फैसलों में अपनी आवाज ज्यादा मजबूती से रखना चाहते हैं। BRICS उन्हें इसके लिए एक ऐसा मंच दे रहा है, जहां वे मिलकर अपनी बात उठा सकते हैं। रिपोर्ट में चीन के इस रुख को भी प्रमुखता दी गई कि दुनिया की मौजूदा व्यवस्था में बदलाव होना चाहिए और वैश्विक फैसलों पर कुछ गिने-चुने ताकतवर देशों का दबदबा नहीं रहना चाहिए। GT: BRICS में भारत-चीन साथ आए तो ग्लोबल साउथ को फायदा चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने BRICS को सिर्फ चीन या भारत के हितों का मंच नहीं, बल्कि ग्लोबल साउथ के लिए बड़े सहयोग के मौके के तौर पर पेश किया। रिपोर्ट में विशेषज्ञों के हवाले से कहा गया कि BRICS में भारत और चीन का सहयोग सिर्फ दोनों देशों के आपसी रिश्तों तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे पूरे ग्लोबल साउथ को फायदा हो सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और सर्विस सेक्ट में मजबूत है, जबकि चीन मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर और सप्लाई चेन के मामले में आगे है। दोनों देशों की ये अलग-अलग ताकतें BRICS के भीतर सहयोग को और मजबूत कर सकती हैं। द गार्जियन: भारत-चीन रिश्तों में सुधार, लेकिन BRICS में सबकुछ ठीक नहीं ब्रिटिश मीडिया द गार्जियन ने BRICS समिट में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मौजूदगी को भारत-चीन रिश्तों में सुधार की शुरुआत के तौर पर देखा। 2020 के सीमा विवाद के बाद यह शी की पहली भारत यात्रा थी। दिल्ली में उनका जोरदार स्वागत हुआ। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले कुछ महीनों में दोनों देशों के बीच बातचीत और आने-जाने में भी सुधार हुआ है। हालांकि, BRICS के अंदर सब कुछ ठीक नहीं है। सदस्य देशों के अपने-अपने हित हैं और ईरान-सऊदी अरब जैसे देशों के बीच तनाव भी संगठन के लिए चुनौती है। इसके बावजूद BRICS देश एक साझा घोषणापत्र पर सहमत हुए। इसमें आपसी विवादों को बातचीत और शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने की बात कही गई। FT: चीन BRICS को ताकतवर बनाना चाहता है, भारत की राह अलग ब्रिटिश मीडिया फाइनेंशियल टाइम्स के मुताबिक, चीन BRICS को ऐसी वैश्विक ताकत के रूप में देखता है, जो अमेरिकी लीडरशिप वाली मौजूदा सिस्टम का विकल्प बन सके। शी जिनपिंग की मौजूदगी और उनकी अपील को भी इसी नजरिए से देखा गया। लेकिन भारत का रुख इससे अलग है। भारत BRICS को सीधे अमेरिका-विरोधी समूह के तौर पर आगे बढ़ाने के बजाय ऐसा मंच बनाए रखना चाहता है, जहां अलग-अलग देशों के हित और विचार होने के बावजूद साझा मुद्दों पर साथ काम किया जा सके। —————————– ये खबरें भी पढ़ें… BRICS समिट- दिल्ली में मोदी की डिनर पार्टी:पनीर के साथ सूखी सब्जी, चुकंदर का रायता; मिठाई में फ्रूट क्रीम विद जलेबी पीएम मोदी ने शनिवार को भारत मंडपम में BRICS सदस्य देशों के नेताओं के लिए डिनर पार्टी को होस्ट किया। मेन्यू में पनीर के साथ सूखी सब्जी, चुकंदर का रायता और मिलेट्स का पुलाव रखा गया है। मिठाई में फ्रूट क्रीम विद जलेबी मिलेगी। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Delhi Declaration | BRICS Summit India China Global Influence Analysis

नई दिल्ली27 मिनट पहले कॉपी लिंक नई दिल्ली में BRICS समिट के दौरान सदस्य देशों के नेताओं ने ग्रुप फोटो खिंचवाई। BRICS समिट के बाद जारी नई दिल्ली डिक्लेरेशन में अलग-अलग हितों वाले देशों के बीच सहमति बनी। वर्ल्ड मीडिया ने इसे भारत की बड़ी कामयाबी माना। खास बात यह रही कि BRICS अमेरिका-विरोधी गुट बनने के बजाय साझा मुद्दों पर साथ आया। समिट की रिपोर्टिंग में भारत की कूटनीति के साथ BRICS में भारत-चीन के बढ़ते प्रभाव की होड़ भी चर्चा में रही। पढ़िए, दुनिया के बड़े मीडिया ने BRICS समिट और नई दिल्ली डिक्लेरेशन को कैसे देखा… रॉयटर्स- भारत अलग-अलग हितों वाले देशों को एक मंच पर लाया रॉयटर्स ने BRICS के नई दिल्ली घोषणापत्र को लेकर लिखा कि भारत ने ईरान, सऊदी अरब, UAE, चीन और रूस जैसे अलग-अलग हितों वाले देशों के बीच सहमति बनाने में अहम भूमिका निभाई। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और इन देशों के अलग-अलग रुख के बीच सभी को एक साझा बयान पर सहमत कराना भारत के लिए बड़ी चुनौती थी। NYT- चीन और भारत में प्रभाव बढ़ाने की होड़ द न्यूयॉर्क टाइम्स ने BRICS समिट को भारत और चीन के बीच बढ़ते प्रभाव की होड़ के नजरिए से देखा। रिपोर्ट के मुताबिक, चीन BRICS को अमेरिकी दबदबे को चुनौती देने वाले मंच के तौर पर मजबूत करना चाहता है। वहीं, भारत की कोशिश है कि BRICS किसी एक देश या शक्ति के प्रभाव में न आए। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत चाहता है कि BRICS में अलग-अलग सोच और हित रखने वाले देश भी साथ मिलकर काम करें। यानी संगठन का फोकस किसी एक खेमे के साथ खड़े होने के बजाय आपसी सहयोग और विकासशील देशों की आवाज को मजबूत करने पर रहे। चाइना डेली: BRICS बदल सकता है दुनिया में ताकत का संतुलन चीन के अखबार चाइना डेली ने BRICS को ऐसे मंच के तौर पर पेश किया, जो दुनिया में ताकत का संतुलन बदलने में बड़ी भूमिका निभा सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, विकासशील देश अब दुनिया के बड़े मुद्दों और फैसलों में अपनी आवाज ज्यादा मजबूती से रखना चाहते हैं। BRICS उन्हें इसके लिए एक ऐसा मंच दे रहा है, जहां वे मिलकर अपनी बात उठा सकते हैं। रिपोर्ट में चीन के इस रुख को भी प्रमुखता दी गई कि दुनिया की मौजूदा व्यवस्था में बदलाव होना चाहिए और वैश्विक फैसलों पर कुछ गिने-चुने ताकतवर देशों का दबदबा नहीं रहना चाहिए। GT: BRICS में भारत-चीन साथ आए तो ग्लोबल साउथ को फायदा चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने BRICS को सिर्फ चीन या भारत के हितों का मंच नहीं, बल्कि ग्लोबल साउथ के लिए बड़े सहयोग के मौके के तौर पर पेश किया। रिपोर्ट में विशेषज्ञों के हवाले से कहा गया कि BRICS में भारत और चीन का सहयोग सिर्फ दोनों देशों के आपसी रिश्तों तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे पूरे ग्लोबल साउथ को फायदा हो सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और सर्विस सेक्ट में मजबूत है, जबकि चीन मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर और सप्लाई चेन के मामले में आगे है। दोनों देशों की ये अलग-अलग ताकतें BRICS के भीतर सहयोग को और मजबूत कर सकती हैं। द गार्जियन: भारत-चीन रिश्तों में सुधार, लेकिन BRICS में सबकुछ ठीक नहीं ब्रिटिश मीडिया द गार्जियन ने BRICS समिट में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मौजूदगी को भारत-चीन रिश्तों में सुधार की शुरुआत के तौर पर देखा। 2020 के सीमा विवाद के बाद यह शी की पहली भारत यात्रा थी। दिल्ली में उनका जोरदार स्वागत हुआ। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले कुछ महीनों में दोनों देशों के बीच बातचीत और आने-जाने में भी सुधार हुआ है। हालांकि, BRICS के अंदर सब कुछ ठीक नहीं है। सदस्य देशों के अपने-अपने हित हैं और ईरान-सऊदी अरब जैसे देशों के बीच तनाव भी संगठन के लिए चुनौती है। इसके बावजूद BRICS देश एक साझा घोषणापत्र पर सहमत हुए। इसमें आपसी विवादों को बातचीत और शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने की बात कही गई। FT: चीन BRICS को ताकतवर बनाना चाहता है, भारत की राह अलग ब्रिटिश मीडिया फाइनेंशियल टाइम्स के मुताबिक, चीन BRICS को ऐसी वैश्विक ताकत के रूप में देखता है, जो अमेरिकी लीडरशिप वाली मौजूदा सिस्टम का विकल्प बन सके। शी जिनपिंग की मौजूदगी और उनकी अपील को भी इसी नजरिए से देखा गया। लेकिन भारत का रुख इससे अलग है। भारत BRICS को सीधे अमेरिका-विरोधी समूह के तौर पर आगे बढ़ाने के बजाय ऐसा मंच बनाए रखना चाहता है, जहां अलग-अलग देशों के हित और विचार होने के बावजूद साझा मुद्दों पर साथ काम किया जा सके। —————————– ये खबरें भी पढ़ें… BRICS समिट- दिल्ली में मोदी की डिनर पार्टी:पनीर के साथ सूखी सब्जी, चुकंदर का रायता; मिठाई में फ्रूट क्रीम विद जलेबी पीएम मोदी ने शनिवार को भारत मंडपम में BRICS सदस्य देशों के नेताओं के लिए डिनर पार्टी को होस्ट किया। मेन्यू में पनीर के साथ सूखी सब्जी, चुकंदर का रायता और मिलेट्स का पुलाव रखा गया है। मिठाई में फ्रूट क्रीम विद जलेबी मिलेगी। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
संडे प्रोफाइल : विनोद खोसला:टेक में जोखिम भरे निवेश के लिए जाने जाते हैं खोसला

भारतीय मूल के अमेरिकी इन्वेस्टर विनोद खोसला फोर्ब्स की 2026 अमीर इमिग्रेंट्स सूची में सबसे अमीर भारतीय आप्रवासी के रूप में नामित हुए हैं। वे जोखिम भरी टेक्नोलॉजी कंपनियों में निवेश के लिए जाने जाते हैं। विनोद खोसला मानते हैं कि हर बड़ी समस्या में एक बड़ा अवसर छिपा होता है। उनकी यह सोच निवेश के फैसलों में भी दिखती है। 2011 में स्केटिंग के दौरान घुटने में चोट लगने पर डॉक्टरों ने इलाज को लेकर अलग-अलग राय दी। हेल्थ केयर सिस्टम से निराश खोसला ने एक लेख में लिखा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के अल्गोरिदम डॉक्टरों से बेहतर काम कर सकते हैं। इस पर लंबे समय तक बहस हुई। इसके बाद उनकी फर्म ने रोबोटिक्स और मेडिकल टेक्नोलॉजी कंपनियों में कई निवेश किए। खोसला आज भी अपनी बात पर कायम हैं। सिलिकॉन वैली की प्रमुख हस्तियों में शामिल 71 वर्षीय खोसला ने तीन अन्य लोगों के साथ 1982 में कंप्यूटिंग कंपनी सन माइक्रोसिस्टम्स की स्थापना की थी। 2010 में उन्होंने इसे ओरेकल को बेच दिया। इसके बाद उनकी वेंचर कैपिटल कंपनी खोसला वेंचर्स ने ग्रीन टेक, हेल्थ केयर और एआई स्टार्टअप्स में बड़े दांव लगाए। 2019 में खोसला वेंचर्स ने ओपनएआई में 50 मिलियन डॉलर यानी करीब 477 करोड़ रुपए का निवेश किया था। उस समय कंपनी आज जैसी बड़ी नहीं थी। खोसला ने बाद में कहा कि ओपनएआई के असफल होने की 90% संभावना भी होती तो दुनिया बदलने की 10% संभावना के लिए यह दांव लगाने लायक था। आज ओपनएआई दुनिया की सबसे मूल्यवान कंपनियों में शामिल है। 2023 में जब सीईओ सैम आल्टमैन को कंपनी से बाहर किया गया तो खोसला उनके समर्थन में खड़े हुए थे। नई दिल्ली में जन्मे खोसला के पिता सेना में थे। वे चाहते थे कि बेटा भी सेना में जाए। लेकिन विनोद की दिलचस्पी तकनीक में थी। उन्होंने आईआईटी दिल्ली से इंजीनियरिंग की और इसके बाद स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से एमबीए तथा कार्नेगी मेलोन यूनिवर्सिटी से साइंस में मास्टर्स किया। पढ़ाई पूरी करने के बाद वे अमेरिका में बस गए। खोसला का भरोसा शुरू से एआई में रहा है। वे बताते हैं कि 2014 में एआई रेडियोलॉजी से उनका पहला एआई निवेश शुरू हुआ। उनके मुताबिक ओपनएआई में निवेश बहुत बड़ा दांव था, जबकि वे आमतौर पर बड़े दांव नहीं लगाते। उनका मानना है कि ऊंचे जोखिम वाली नई टेक्नोलॉजी में निवेश जरूरी है। वे कहते हैं कि एआई से खतरे हो सकते हैं, लेकिन इसके फायदों को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। खोसला के मुताबिक अभी अमेरिकी एआई मॉडल्स का दबदबा है, लेकिन देश राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अपने मॉडल विकसित कर सकते हैं। चीन अपना मॉडल बनाएगा तो भारत भी अपना मॉडल बना सकता है। उन्हें भरोसा है कि एआई के फायदे धीरे-धीरे बढ़ेंगे। वे भारत के पेमेंट सिस्टम का उदाहरण देते हैं। उनके अनुसार तकनीक की मदद से डॉक्टर और एआई ट्यूटर जैसी सेवाएं कम लागत में अधिक लोगों तक पहुंचाई जा सकती हैं।
अमेरिका में अच्छी कमाई के लिए नामचीन डिग्री जरूरी नहीं:पिछड़े कॉलेजों के ग्रेजुएट भी हार्वर्ड जैसा कमा रहे, सैलरी औसतन 95 लाख सालाना

अमेरिका की फोर्ब्स टॉप-500 कॉलेज रैंकिंग के मुताबिक सालाना 95 लाख रुपए से ज्यादा कमाई के लिए किसी ‘बड़े’ या ‘नामचीन’ कॉलेज की डिग्री जरूरी नहीं है। रैंकिंग में सबसे नीचे वाले कॉलेजों के ग्रेजुएट्स भी डिग्री लेने के 10 साल बाद औसतन 95 लाख रुपए से ज्यादा कमा रहे हैं। फोर्ब्स की लिस्ट में एमआईटी, प्रिंसटन और हार्वर्ड सबसे ऊपर हैं। इन कॉलेजों से पढ़ने वालों की 10 साल बाद कमाई 1.15 करोड़ रुपए से ज्यादा बताई गई है। वहीं, लिस्ट में 500वें नंबर पर ओहायो के ग्रामीण इलाके का निजी मेरिएटा कॉलेज है। यहां से पढ़ने वालों की 10 साल बाद औसत कमाई करीब 1 करोड़ रुपए है। रिपोर्ट के मुताबिक लिस्ट में लगभग हर कॉलेज के ग्रेजुएट्स की औसत कमाई 86 लाख रुपए से ज्यादा है। यानी कम मशहूर कॉलेजों से पढ़ने वालों की कमाई भी काफी अच्छी हो सकती है। कॉलेज चुनने में कमाई को आधार न बनाएं रिपोर्ट में कहा गया है कि कॉलेज चुनते समय सिर्फ कमाई को आधार नहीं बनाना चाहिए। ऊंची रैंक वाले कॉलेजों में पुराने छात्रों का मजबूत नेटवर्क और कॉलेज के नाम की पहचान जैसे फायदे मिलते हैं। पर ये फायदे 10 साल बाद की कमाई के आंकड़ों में सीधे नहीं दिखते। अमेरिका में बैचलर डिग्री पर औसतन 33 लाख कर्ज एजुकेशन डेटा इनिशिएटिव के मुताबिक पिछले 20 साल में कॉलेज की औसत लागत दोगुने से ज्यादा हो गई है। इसी वजह से अब एक बैचलर डिग्री के लिए औसतन 33 लाख रुपए से ज्यादा का कर्ज लेना पड़ रहा है। डिग्री सफलता की गारंटी नहीं: सीईओ कई बड़े कारोबारी भी मानते हैं कि डिग्री सफलता की पक्की गारंटी नहीं है। मेटा के सीईओ मार्क जकरबर्ग ने कहा कि कॉलेज लोगों से जुड़ने और रिश्ते बनाने में मदद करता है, लेकिन सवाल यह है कि क्या कॉलेज आज की नौकरियों के लिए युवाओं को तैयार कर रहा है?
Arman Malik vs Salman Khan Controversy

15 मिनट पहले कॉपी लिंक कुछ दिनों पहले सिंगिंग से ब्रेक लेने वाले अरमान मलिक ने हाल ही में सलमान खान और उनके प्रोडक्शन के खिलाफ कई पोस्ट किए। उन्होंने दावा किया है कि उन्हें प्रोडक्शन की हालिया पोस्ट में फिल्म हीरो के गाने में क्रेडिट नहीं दिया गया। इसके बाद से ही उन्हें सोशल मीडिया पर ये कहते हुए ट्रोल किया जाने लगा कि जिन सलमान ने उन्हें करियर में सपोर्ट किया, वह उन्हीं सलमान की आलोचना कर रहे हैं। अब इस विवाद पर सिंगर अमाल मलिक भी भाई के सपोर्ट में उतरे हैं। भाई अमाल के सपोर्ट में उतरे अरमान मलिक ऐसी ही एक पोस्ट के जवाब में अरमान ने लिखा, “कृपया पहले कोई ओरिजिनल गाना बनाइए, उसे लिखिए या गाइए। फिर देखिए कि जहां आपका नाम होना चाहिए, वहां उसे आसानी से छोड़ दिया जाए।” उन्होंने कहा, “मैं जानना चाहूंगा कि तब आपको कैसा लगेगा। कृतज्ञता की बात मत कीजिए। मैं अपनी शुरुआत के लिए हमेशा आभारी रहा हूं। लेकिन मैं यह भी जानता हूं कि जहां पहुंचा हूं, वहां तक पहुंचना कितना मुश्किल रहा है। अगर हम अपने हक के लिए नहीं लड़ेंगे, तो कोई और नहीं लड़ेगा।” भाई और गीतकार के क्रेडिट के लिए बोले अरमान एक फैन ने अरमान से ट्रोल्स पर ध्यान नहीं देने को कहा। इस पर उन्होंने साफ किया कि उनका जवाब भाई और गीतकार को सही क्रेडिट दिलाने के लिए था। अरमान ने कहा, “मैं सच में सिर्फ अपने भाई और गीतकार के क्रेडिट को लेकर चिंतित था। उनके बिना यह गाना कुछ भी नहीं है। मेरा क्रेडिट तो छोड़ ही दीजिए। मैंने उम्मीद करना बंद कर दिया है। मेरे लिए आप लोग ही काफी हैं।” जानिए क्या है पूरा विवाद? 11 सितंबर को साल 2015 में रिलीज हुई फिल्म हीरो की रिलीज के 11 साल पूरे हुए। इस मौके पर सलमान खान फिल्म्स प्रोडक्शन हाउस की तरफ से इंस्टाग्राम और X अकाउंट पर फिल्म से जुड़ी एक पोस्ट शेयर की गई। इस फिल्म के गानों का कंपोजिशन अमाल मलिक ने किया था, लेकिन पोस्ट में उन्हें क्रेडिट नहीं दिया गया था। क्रेडिट ने मिलने पर अमाल मलिक ने नाराजगी जताई और लिखा, “सलमान खान फिल्म्स का पेज संभालने वाले व्यक्ति में संगीतकार और गीतकार को छोड़ने की इतनी हिम्मत कैसे हुई? यह अच्छा नहीं लगता।” उन्होंने कहा कि गाना संगीतकार और गीतकार की मेहनत, खून-पसीने और दर्द से बनता है। ऐसे गाने का जश्न मनाते समय उसके क्रिएटर्स का सम्मान और जिक्र होना चाहिए। अमाल ने आगे लिखा, “बुनियादी बातें सीखिए, वरना यह पेज डिलीट कर दीजिए। मेरा कमेंट डिलीट मत करना। सलमान सर को भी इसे देखने दीजिए, ताकि उन्हें पता चले कि आप लोगों ने गलती की है।” प्रोडक्शन ने पोस्ट एडिट कर जोड़ा अमाल का नाम अमाल की पोस्ट सामने आने के बाद सलमान खान के प्रोडक्शन हाउस ने पोस्ट एडिट की और इसमें अमाल मलिक का नाम जोड़ा। इंस्टाग्राम पोस्ट एडिट कर क्रेडिट जोड़ा गया है, हालांकि X पर अब भी क्रेडिट नहीं दिया गया है। सलमान खान ने दिया था अमाल को ब्रेक अमाल मलिक के करियर में सलमान खान का योगदान रहा है। सलमान ने साल 2014 में अपनी फिल्म ‘जय हो’ से अमाल को बॉलीवुड में बतौर म्यूजिक कंपोजर ब्रेक दिया था। साथ ही सलमान ने अरमान मलिक के म्यूजिक एल्बम लॉन्च में पहुंचकर उनका सपोर्ट किया था। बुक लॉन्च में मलिक परिवार के साथ सलमान। बाएं से दाहिने अमाल मलिक, सलमान खान, डब्बू मलिक, अरमान मलिक। इसके बाद साल 2015 में सलमान खान के प्रोडक्शन हाउस की फिल्म ‘हीरो’ के लिए अमाल मलिक ने ही संगीत तैयार किया था। इस फिल्म का गाना “मैं हूं हीरो तेरा” ब्लॉकबस्टर रहा, जिसे ओरिजिनली अमाल के भाई अरमान मलिक ने गाया था और बाद में खुद सलमान खान ने भी अपनी आवाज में इसका एक स्पेशल वर्जन रिकॉर्ड किया था। बयानों से चर्चा में हैं अमाल मलिक, इंडस्ट्री पर लगाए आरोप ब्रेक का फैसला अमाल के पिछले कुछ महीनों में किए गए कई भावनात्मक पोस्ट के बाद आया है। इन पोस्ट में उन्होंने इंडस्ट्री में अपने संघर्ष के बारे में बात की थी। मई में उन्होंने फिल्म और म्यूजिक बिजनेस के कुछ प्रभावशाली लोगों पर उन्हें किनारे करने का आरोप लगाया था। उन्होंने दावा किया था कि पिछले कई सालों में उन्हें करीब पांच दर्जन प्रोजेक्ट्स से हटा दिया गया। बॉलीवुड में काम जारी रखने की अपनी कोशिशों के बारे में अमाल ने कहा था, “मैं पिछले 8 साल से पूरी ईमानदारी और काम की कुछ सम्मानजनक शर्तों के साथ अपनी पूरी कोशिश कर रहा हूं, लेकिन दुख की बात है कि इस जगह पर यह काम नहीं करता।” उन्होंने आगे कहा, “इस जगह और इसके काम करने के तरीके के बारे में सच छिपाने में मेरी असमर्थता उन्हें और परेशान करती है। इसकी वजह से मुझे और मेरे परिवार को बेकार की धमकियां मिलती हैं। कुछ बहुत ताकतवर लोगों का समूह है, जो नहीं चाहता कि मैं उनकी फिल्मों या किसी भी फिल्म का हिस्सा बनूं। यह सिर्फ लेबल्स की बात नहीं है, अब मामला इससे आगे बढ़ चुका है। यह अहंकारी लोगों का मिला-जुला सिंडिकेट है।” ग्रुपिज्म और इंडस्ट्री पॉलिटिक्स पर भी बोले अमाल ने दावा किया था कि इंडस्ट्री की पॉलिटिक्स और ग्रुपिज्म की वजह से फिल्मों में उनका संगीत कम सुनाई देता है। ब्रेक का ऐलान करने से सिर्फ दो दिन पहले अमाल ने फिल्म और म्यूजिक इंडस्ट्री के कुछ लोगों पर उनके और उनके काम के खिलाफ सोशल मीडिया पर नकारात्मक माहौल बनाने की कोशिश का आरोप लगाया था। कुछ समय पहले ही अमाल मलिक कंपोजर तनिष्क बागची से विवाद होने से भी चर्चा में रहे थे। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा था, ‘करीब 10 साल तक मैंने अपने गुस्से को दबाकर रखा, लेकिन आज एक दशक बाद मुझे खुलकर सामने आना पड़ा, क्योंकि यहां कोई भी सही बात के लिए खड़ा नहीं होता और न ही इंडस्ट्री के गलत लोगों को बेनकाब करता है। यहां किसी में सच को सच कहने की हिम्मत नहीं है, लेकिन किसी न किसी को यह करना ही था। मैं उसके गलत कामों और अनैतिक हरकतों पर बहुत समय से चुप था।’
Arman Malik vs Salman Khan Controversy

31 मिनट पहले कॉपी लिंक कुछ दिनों पहले सिंगिंग से ब्रेक लेने वाले अरमान मलिक ने हाल ही में सलमान खान और उनके प्रोडक्शन के खिलाफ कई पोस्ट किए। उन्होंने दावा किया है कि उन्हें प्रोडक्शन की हालिया पोस्ट में फिल्म हीरो के गाने में क्रेडिट नहीं दिया गया। इसके बाद से ही उन्हें सोशल मीडिया पर ये कहते हुए ट्रोल किया जाने लगा कि जिन सलमान ने उन्हें करियर में सपोर्ट किया, वह उन्हीं सलमान की आलोचना कर रहे हैं। अब इस विवाद पर सिंगर अमाल मलिक भी भाई के सपोर्ट में उतरे हैं। भाई अमाल के सपोर्ट में उतरे अरमान मलिक ऐसी ही एक पोस्ट के जवाब में अरमान ने लिखा, “कृपया पहले कोई ओरिजिनल गाना बनाइए, उसे लिखिए या गाइए। फिर देखिए कि जहां आपका नाम होना चाहिए, वहां उसे आसानी से छोड़ दिया जाए।” उन्होंने कहा, “मैं जानना चाहूंगा कि तब आपको कैसा लगेगा। कृतज्ञता की बात मत कीजिए। मैं अपनी शुरुआत के लिए हमेशा आभारी रहा हूं। लेकिन मैं यह भी जानता हूं कि जहां पहुंचा हूं, वहां तक पहुंचना कितना मुश्किल रहा है। अगर हम अपने हक के लिए नहीं लड़ेंगे, तो कोई और नहीं लड़ेगा।” भाई और गीतकार के क्रेडिट के लिए बोले अरमान एक फैन ने अरमान से ट्रोल्स पर ध्यान नहीं देने को कहा। इस पर उन्होंने साफ किया कि उनका जवाब भाई और गीतकार को सही क्रेडिट दिलाने के लिए था। अरमान ने कहा, “मैं सच में सिर्फ अपने भाई और गीतकार के क्रेडिट को लेकर चिंतित था। उनके बिना यह गाना कुछ भी नहीं है। मेरा क्रेडिट तो छोड़ ही दीजिए। मैंने उम्मीद करना बंद कर दिया है। मेरे लिए आप लोग ही काफी हैं।” जानिए क्या है पूरा विवाद? 11 सितंबर को साल 2015 में रिलीज हुई फिल्म हीरो की रिलीज के 11 साल पूरे हुए। इस मौके पर सलमान खान फिल्म्स प्रोडक्शन हाउस की तरफ से इंस्टाग्राम और X अकाउंट पर फिल्म से जुड़ी एक पोस्ट शेयर की गई। इस फिल्म के गानों का कंपोजिशन अमाल मलिक ने किया था, लेकिन पोस्ट में उन्हें क्रेडिट नहीं दिया गया था। क्रेडिट ने मिलने पर अमाल मलिक ने नाराजगी जताई और लिखा, “सलमान खान फिल्म्स का पेज संभालने वाले व्यक्ति में संगीतकार और गीतकार को छोड़ने की इतनी हिम्मत कैसे हुई? यह अच्छा नहीं लगता।” उन्होंने कहा कि गाना संगीतकार और गीतकार की मेहनत, खून-पसीने और दर्द से बनता है। ऐसे गाने का जश्न मनाते समय उसके क्रिएटर्स का सम्मान और जिक्र होना चाहिए। अमाल ने आगे लिखा, “बुनियादी बातें सीखिए, वरना यह पेज डिलीट कर दीजिए। मेरा कमेंट डिलीट मत करना। सलमान सर को भी इसे देखने दीजिए, ताकि उन्हें पता चले कि आप लोगों ने गलती की है।” प्रोडक्शन ने पोस्ट एडिट कर जोड़ा अमाल का नाम अमाल की पोस्ट सामने आने के बाद सलमान खान के प्रोडक्शन हाउस ने पोस्ट एडिट की और इसमें अमाल मलिक का नाम जोड़ा। इंस्टाग्राम पोस्ट एडिट कर क्रेडिट जोड़ा गया है, हालांकि X पर अब भी क्रेडिट नहीं दिया गया है। सलमान खान ने दिया था अमाल को ब्रेक अमाल मलिक के करियर में सलमान खान का योगदान रहा है। सलमान ने साल 2014 में अपनी फिल्म ‘जय हो’ से अमाल को बॉलीवुड में बतौर म्यूजिक कंपोजर ब्रेक दिया था। साथ ही सलमान ने अरमान मलिक के म्यूजिक एल्बम लॉन्च में पहुंचकर उनका सपोर्ट किया था। बुक लॉन्च में मलिक परिवार के साथ सलमान। बाएं से दाहिने अमाल मलिक, सलमान खान, डब्बू मलिक, अरमान मलिक। इसके बाद साल 2015 में सलमान खान के प्रोडक्शन हाउस की फिल्म ‘हीरो’ के लिए अमाल मलिक ने ही संगीत तैयार किया था। इस फिल्म का गाना “मैं हूं हीरो तेरा” ब्लॉकबस्टर रहा, जिसे ओरिजिनली अमाल के भाई अरमान मलिक ने गाया था और बाद में खुद सलमान खान ने भी अपनी आवाज में इसका एक स्पेशल वर्जन रिकॉर्ड किया था। बयानों से चर्चा में हैं अमाल मलिक, इंडस्ट्री पर लगाए आरोप ब्रेक का फैसला अमाल के पिछले कुछ महीनों में किए गए कई भावनात्मक पोस्ट के बाद आया है। इन पोस्ट में उन्होंने इंडस्ट्री में अपने संघर्ष के बारे में बात की थी। मई में उन्होंने फिल्म और म्यूजिक बिजनेस के कुछ प्रभावशाली लोगों पर उन्हें किनारे करने का आरोप लगाया था। उन्होंने दावा किया था कि पिछले कई सालों में उन्हें करीब पांच दर्जन प्रोजेक्ट्स से हटा दिया गया। बॉलीवुड में काम जारी रखने की अपनी कोशिशों के बारे में अमाल ने कहा था, “मैं पिछले 8 साल से पूरी ईमानदारी और काम की कुछ सम्मानजनक शर्तों के साथ अपनी पूरी कोशिश कर रहा हूं, लेकिन दुख की बात है कि इस जगह पर यह काम नहीं करता।” उन्होंने आगे कहा, “इस जगह और इसके काम करने के तरीके के बारे में सच छिपाने में मेरी असमर्थता उन्हें और परेशान करती है। इसकी वजह से मुझे और मेरे परिवार को बेकार की धमकियां मिलती हैं। कुछ बहुत ताकतवर लोगों का समूह है, जो नहीं चाहता कि मैं उनकी फिल्मों या किसी भी फिल्म का हिस्सा बनूं। यह सिर्फ लेबल्स की बात नहीं है, अब मामला इससे आगे बढ़ चुका है। यह अहंकारी लोगों का मिला-जुला सिंडिकेट है।” ग्रुपिज्म और इंडस्ट्री पॉलिटिक्स पर भी बोले अमाल ने दावा किया था कि इंडस्ट्री की पॉलिटिक्स और ग्रुपिज्म की वजह से फिल्मों में उनका संगीत कम सुनाई देता है। ब्रेक का ऐलान करने से सिर्फ दो दिन पहले अमाल ने फिल्म और म्यूजिक इंडस्ट्री के कुछ लोगों पर उनके और उनके काम के खिलाफ सोशल मीडिया पर नकारात्मक माहौल बनाने की कोशिश का आरोप लगाया था। कुछ समय पहले ही अमाल मलिक कंपोजर तनिष्क बागची से विवाद होने से भी चर्चा में रहे थे। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा था, ‘करीब 10 साल तक मैंने अपने गुस्से को दबाकर रखा, लेकिन आज एक दशक बाद मुझे खुलकर सामने आना पड़ा, क्योंकि यहां कोई भी सही बात के लिए खड़ा नहीं होता और न ही इंडस्ट्री के गलत लोगों को बेनकाब करता है। यहां किसी में सच को सच कहने की हिम्मत नहीं है, लेकिन किसी न किसी को यह करना ही था। मैं उसके गलत कामों और अनैतिक हरकतों पर बहुत समय से चुप था।’
अमेरिकी AI स्कूलों के लर्निंग मॉडल की हो रही आलोचना:स्कूल बने टॉर्चर चैम्बर, पेरेंट्स के कड़वे बोल तय कर रहे भविष्य

भविष्य की शिक्षा के नाम पर अमेरिकी स्कूलों का चौंकाने वाला सच सामने आया है। यहां एडमिशन के लिए बच्चों को हार्ट मॉनिटर से जोड़कर पूरी क्लास के सामने उनके पेरेंट्स के आलोचनात्मक वीडियो दिखाई जाते हैं, जहां दिल की धड़कन बढ़ने पर वे फेल हो जाते हैं। ‘सहनशीलता’ सिखाने का यह अमानवीय एआई मॉडल बच्चों की मानसिक सेहत को कैसे प्रभावित कर रहा है, जानिए… सिलिकॉन वैली का अल्फा स्कूल… कमरे में ऐसा सन्नाटा था कि सिर्फ दीवार पर लगे विशाल मॉनिटर की ‘बीप-बीप’ सुनाई दे रही थी। यह अस्पताल का आईसीयू नहीं, बल्कि भविष्य की शिक्षा का दावा करने वाला अत्याधुनिक एआई स्कूल है। चौदह साल का रेयान मंच पर रखी एक कुर्सी पर अकेला बैठा था। उसकी उंगलियों और सीने से सेंसर जुड़े थे, जबकि सामने बैठे छात्र बड़ी स्क्रीन पर उसकी धड़कनों का ग्राफ देख रहे थे। रेयान का सामान्य हार्ट रेट 80 बीपीएम था। नियमों के मुताबिक अपनी जगह बनाए रखने के लिए रेयान को दिल की धड़कन 10% से अधिक नहीं बढ़ने देनी थी। 88 बीपीएम पार होते ही वह तुरंत अयोग्य घोषित कर दिया जाता। तभी प्रोजेक्टर की स्क्रीन जगमगाई। सामने रेयान के पेरेंट्स का पहले से रिकॉर्ड किया गया वीडियो चलने लगा। वे उसके काम, उसकी कमियों और उसकी हर नाकामी की तीखी आलोचना कर रहे थे। एक-एक शब्द रेयान के आत्मसम्मान पर हथौड़े की तरह चोट कर रहा था। पूरी क्लास की नजरें कभी उस वीडियो पर जातीं, तो कभी स्क्रीन पर दौड़ती लाल लकीर पर। ‘82… 85… 87…’ रेयान की मुट्ठियां भींच गईं। उसने अपनी आंखें बंद कीं, सांसों को जबरदस्ती धीमा करने लगा। दिल सीने से बाहर आने को बेताब था, पर बाहर दिखने वाली हर कमजोरी का मतलब था विफलता। जब वीडियो थमा, स्क्रीन पर औसत दर्ज था- 87 बीपीएम। वह सिर्फ एक धड़कन के फासले से बच गया था। पूरा हफ्ता उसके हाथ कांपते रहे। सिलिकॉन वैली के चर्चित एआई स्कूल में परीक्षा सिर्फ दिल की धड़कन नियंत्रित करने तक सीमित नहीं थी। छात्रों पर बॉट्स की मदद से कुछ ही दिनों में कठिन कोर्स पूरा करने का दबाव था। उन्हें बिना शिकायत गंदे शौचालय साफ कराए जाते और सोशल मीडिया पर खुद को ‘बेचने’ की ट्रेनिंग दी जाती। अल्फा स्कूल के अलावा जाने-माने स्कूल सिंथेसिस, अल्फा एनीवेयर और क्वेस्ट् टू लर्न यही तरीका अपना रहे हैं…सहनशीलता और ‘अदम्य साहस’ के नाम पर चल रहा यह प्रयोग शिक्षा से ज्यादा तकनीकी सैन्य प्रशिक्षण जैसा लगता था, जहां संवेदनाओं को दबाना ही सफलता की कसौटी माना जाता है। सेंसर हटाते ही रेयान ने राहत की सांस तो ली, पर उसकी आंखें शून्य में ताक रही थीं। मशीन ने उसके दिल की रफ्तार तो नाप ली थी, लेकिन उस डर और घुटन का कोई डेटा स्क्रीन पर नहीं आया, जो उसके भीतर हमेशा के लिए दर्ज हो चुका था।







