Sunday, 27 Sep 2026 | 02:58 PM

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सास मां बन जाए तो रिश्ते खूबसूरत बनते हैं:रेणुका शहाणे बोलीं- नहीं तो बेटा और पति सास-बहू के झगड़ों में पिसेंगे

सास मां बन जाए तो रिश्ते खूबसूरत बनते हैं:रेणुका शहाणे बोलीं- नहीं तो बेटा और पति सास-बहू के झगड़ों में पिसेंगे

मराठी वेब सीरीज ‘अगं आई अहो आई’ में रेणुका शहाणे ऐसी मां का किरदार निभा रही हैं, जो रिश्तों को जोड़ने में विश्वास रखती है। दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने बताया कि ‘अगं आई’ और ‘अहो आई’ का मतलब क्या है, सास-बहू के रिश्तों को लेकर धारणाएं कैसे बदल सकती हैं, परिवार क्यों टूट रहे हैं और बेटी की शादी के बाद मां किन भावनाओं से गुजरती है। सवाल: सबसे पहले हमारे हिंदी पाठकों को बताइए कि ‘अगं आई अहो आई’ का मतलब क्या है? जवाब: ‘अगं आई’ का मतलब अपनी मां है। मराठी में मां को प्यार से ‘आई’ कहते हैं। शादी के बाद लड़की ससुराल जाती है तो सम्मान से सास को ‘अहो आई’ कहा जाता है। सीरीज की खूबसूरती यही है कि नई दुल्हन की यात्रा अपनी मां ‘अगं आई’ से शुरू होकर सास को भी उसी अपनत्व से ‘अहो आई’ बनाने तक पहुंचती है। सवाल: यानी सास और बहू का रिश्ता भी मां-बेटी जैसा हो सकता है? जवाब: बिल्कुल। हमारी सीरीज दिखाती है कि सास सिर्फ नियम बनाने वाली नहीं, दोस्त भी बन सकती है। वह बहू को इतना अपनापन देती है कि कई बार मां से भी ज्यादा दुलार करती नजर आती है। वहीं लड़की की मां को डर रहता है कि कहीं बेटी उससे दूर न हो जाए। रिश्तों की यही भावनाएं कहानी को खास बनाती हैं। सवाल: इस कहानी की ऐसी कौन-सी बात थी जिसने आपको सबसे ज्यादा प्रभावित किया? जवाब: दो बातें। पहली, यह हमारे घरों जैसी कहानी है। लगता है जैसे किसी ने कैमरा घर के अंदर लगा दिया हो। दूसरी, हम अक्सर नई पीढ़ी की लड़कियों के बारे में पहले से राय बना लेते हैं कि उनके संस्कार कमजोर होंगे या वे परंपराओं को नहीं मानेंगी। लेकिन कहानी दिखाती है कि रिश्ते सिर्फ बहू की जिम्मेदारी नहीं होते। जब लड़की नए परिवार में आती है तो उसे अपनाने की जिम्मेदारी ससुराल वालों की भी होती है। सास उसे समझ और स्वीकार कर ले तो रिश्ते अपने आप मधुर हो जाते हैं। सवाल: अक्सर लोग पहले से ही बहू के बारे में राय बना लेते हैं, आप क्या सोचती हैं? जवाब: यही सबसे बड़ी गलती है। अगर शुरुआत ही इस सोच से होगी कि लड़की कैसी होगी, उसके संस्कार कैसे होंगे या उसके मायके को नीचा दिखाया जाएगा, तो रिश्ता कभी अच्छा नहीं बन सकता। इसका असर बेटे और पति पर पड़ता है। सबसे ज्यादा वही बीच में पिसते हैं। सवाल: अगर बहू को बेटी और दोस्त की तरह स्वीकार कर लिया जाए तो शायद आधी समस्याएं खत्म हो जाएं? जवाब: बिल्कुल। दो महिलाओं के बीच दोस्ती बन जाए तो पूरा घर मजबूत हो जाता है। हमारी सीरीज सिर्फ सास-बहू का रिश्ता नहीं, बल्कि दो परिवारों के बीच सम्मान और अपनापन भी दिखाती है। जब लड़की की मां देखती है कि बेटी को ससुराल में प्यार मिल रहा है, तो उसके मन में भी उस परिवार के लिए सम्मान अपने आप आ जाता है। सवाल: टीवी और फिल्मों में अक्सर सास-बहू के रिश्ते लड़ाई-झगड़े वाले ही दिखाए जाते हैं। आपकी सीरीज इससे अलग नजर आती है? जवाब: हां, हम हमेशा सुनते आए हैं कि औरत ही औरत की दुश्मन होती है। लेकिन ऐसा होना जरूरी नहीं है। बहू परिवार की अगली पीढ़ी को आगे बढ़ाने वाली है। अगर इस रिश्ते को प्यार और सम्मान से निभाया जाए तो पूरा परिवार खुश रहता है। सवाल: क्या इस किरदार में आपको अपनी मां या खुद की झलक दिखाई दी? जवाब: मेरी मां और मैं इस किरदार जितनी सख्त नहीं हैं। मेरी मां बहुत अनुशासित थीं, लेकिन उनका तरीका अलग था। इस किरदार में मुझे थोड़ा स्ट्रिक्ट दिखना था, इसलिए यह नया अनुभव था। लेकिन एक भावना से मैं पूरी तरह जुड़ गई। हर मां चाहती है कि उसकी बेटी को संस्कारों की वजह से कभी कुछ सुनना न पड़े। खासकर जब बेटी इकलौती हो और शादी के बाद घर खाली हो जाए, तब मां के भीतर का खालीपन बहुत गहरा होता है। सवाल: आज भी बेटियों को शादी से पहले अलग तरह की सीख दी जाती है, आप क्या मानती हैं? जवाब: पहले बेटियों और बेटों में फर्क किया जाता था। अब हालात काफी बदले हैं, लेकिन आज भी मां बेटी से कहती है, “ये सीख लो, वो सीख लो, नहीं तो आगे सुनना पड़ेगा।” यह सोच अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। सवाल: आज परिवार तेजी से टूट रहे हैं। आपको इसका सबसे बड़ा कारण क्या लगता है? जवाब: अगर हम रोज झगड़े और कलह वाली चीजें देखते रहेंगे तो उसका असर जरूर पड़ेगा। लेकिन फैसला हमारे हाथ में है कि हमें कैसा परिवार चाहिए। हर घर में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन उन्हें सुलझाने का तरीका सकारात्मक होना चाहिए। हर छोटी बात बढ़ाने का असर सिर्फ पति-पत्नी पर नहीं, पूरे परिवार और खासकर बच्चों पर पड़ता है। सवाल: और,बच्चे वही सीखते हैं जो घर में देखते हैं। आपका क्या कहना है? जवाब: बिल्कुल। अगर बच्चे रोज मां-बाप को लड़ते देखेंगे तो वही उनके व्यक्तित्व का हिस्सा बन जाएगा। इसलिए रिश्तों को संभालना सिर्फ दो लोगों की नहीं, पूरे परिवार की जिम्मेदारी है। सवाल: शूटिंग के दौरान कोई ऐसा भावुक सीन आया जिसने आपको अंदर तक छू लिया? जवाब: हां। एक सीन करते समय मुझे अपनी मां की याद आ गई। मेरी शादी के बाद उन्होंने भी शायद यही महसूस किया होगा कि बेटी अब उनके साथ नहीं रहती। मां-बेटी का रिश्ता कितना भी मजबूत हो, शादी के बाद एक खालीपन जरूर आ जाता है। फोन पर बातें होती रहती हैं, लेकिन साथ रहने जैसा नहीं होता। उस सीन ने मुझे सचमुच भावुक कर दिया। सवाल: आप बेटी भी हैं और मां भी। आपके मुताबिक एक अच्छी मां कैसी होती है? जवाब: मेरे लिए मेरी मां आदर्श हैं। उन्होंने कभी नंबरों का दबाव नहीं बनाया। हमेशा कहा कि पूरी ईमानदारी से मेहनत करो। नतीजा हमारे हाथ में नहीं होता, लेकिन कोशिश जरूर हमारे हाथ में होती है। मैं भी अपने बच्चों को यही सिखाना चाहती हूं कि पूरी मेहनत करो और परिणाम की चिंता में मत जीओ। मेरी मां ने मुझे जितना प्यार और संस्कार दिए, वही मैं भी

₹10 और ₹20 के 200 करोड़ प्लास्टिक नोट आएंगे:ये ट्रायल, सफल हुआ तो आगे और नोट आएंगे; कागज करेंसी भी चलेगी

₹10 और ₹20 के 200 करोड़ प्लास्टिक नोट आएंगे:ये ट्रायल, सफल हुआ तो आगे और नोट आएंगे; कागज करेंसी भी चलेगी

बाजार में जल्द ही ₹10 और ₹20 के प्लास्टिक नोट नजर आएंगे। रिजर्व बैंक 100-100 करोड़ यानी टोटल 200 करोड़ पॉलिमर यानी प्लास्टिक से बने नोट छापेगी। यह प्लास्टिक करेंसी का ट्रायल है, अगर यह सफल होता है तो आगे और नोट भी छापे जाएंगे। केंद्र सरकार ने इसकी मंजूरी दे दी है। यह जानकारी वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने सोमवार को लोकसभा में दी। पॉलिमर बैंकनोट के ट्रायल सफल होने के बाद RBI ₹10 और ₹20 दोनों वैल्यू के नोटों को रेगुलर तौर पर जारी करेगा। हालांकि कागज की मौजूदा करेंसी भी चलती रहेगी। इसे बंद नहीं किया जाएगा। 10 दिन पहले मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया था कि RBI जल्द ही देश में पॉलीमर से बने नोटों का पहला पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने जा रहा है। यह देश में नए जनरेशन की करेंसी लाने के RBI के प्लान का अगला कदम है। नए नोट के साथ पुराने कागजी नोट भी चलेंगे भारतीय बाजार में पॉलीमर नोटों के आने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि मौजूदा कागजी नोट तुरंत चलन से बाहर हो जाएंगे। सरकार ने साफ किया है कि नई करेंसी पुराने पेपर नोटों की जगह नहीं लेगी। RBI ने जारी किया ग्लोबल टेंडर RBI की नोट-प्रिंटिंग यूनिट ने ग्लोबल लेवल पर ‘एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट’ (EOI) जारी किया। यह टेंडर विशेष प्रकार की ‘पॉलीमर सबस्ट्रेट शीट’ की मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई के लिए मंगाया गया है, जिसका इस्तेमाल इन नोटों को छापने के लिए किया जाता है। डॉक्यूमेंट्स के मुताबिक, दुनिया भर के मैन्युफैक्चरर को एडवांस सेफ्टी फीचर्स से लैस पॉलीमर सबस्ट्रेट की सप्लाई के लिए इनवाइट किया गया है। इस टेंडर के तहत बोलियां जमा करने की आखिरी तारीख 18 अगस्त तय की गई है। नोटों की उम्र बढ़ाने और बढ़ती मांग के लिए कदम मई में आई एक रिपोर्ट में बताया गया था कि आरबीआई नोटों की शेल्फ लाइफ बढ़ाने और पिछले कुछ सालों में बढ़ी मांग को पूरा करने के लिए पॉलिमर बैंकनोट्स छापने पर विचार कर रहा था। इसके बाद जून में आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने पुष्टि की थी कि पॉलिमर बैंकनोट्स का प्रस्ताव विचाराधीन है और केंद्रीय बैंक इसके नफा-नुकसान का वैल्यूएशन कर रहा है। दुनिया के 60 देशों में पहले से चल रहे पॉलीमर नोटा दुनिया के 60 से ज्यादा देशों में पॉलिमर बैंकनोट्स चलन में शामिल किए जा चुके हैं। इनमें ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, यूनाइटेड किंगडम (यूके) और न्यूजीलैंड जैसे देश शामिल हैं। भारत ने पहली बार नोटों की शेल्फ लाइफ बढ़ाने के लिए 2012 में पॉलिमर बैंकनोट्स लाने का प्रयास किया था। हालांकि, उस समय तकनीकी चुनौतियों के कारण इस प्रोजेक्ट को रोक दिया गया था। नए नोट फटेंगे नहीं, पानी-धूल से भी सुरक्षित रहेंगे पॉलीमर से बने बैंकनोट ट्रेडिशनल कागजी नोटों की तुलना में बहुत ज्यादा टिकाऊ होते हैं। यह नोट पानी, गंदगी और धूल में भी सुरक्षित रहते हैं। इसके अलावा यह नोट आसानी से फटते भी नहीं हैं। इस वजह से ये बाजार में लंबे समय तक बिना फटे और साफ-सुथरे बने रहते हैं। पॉलीमर शीट का सबसे बड़ा फायदा यह भी है कि इसमें एडवांस सेफ्टी फीचर्स को आसानी से जोड़ा जा सकता है। इससे नकली नोट बनाने वाले जालसाजों के लिए इनकी नकल करना लगभग नामुमकिन हो जाता है, जिससे देश का सेफ्टी सिस्टम और मजबूत होगा। 2024-25 में छपाई पर ₹6,372.8 करोड़ खर्च हुए RBI की वित्त वर्ष 2024-25 की एनुअल रिपोर्ट के अनुसार, कागजी नोटों की छपाई पर ₹6,372.8 करोड़ का खर्च आया। पिछले वित्त वर्ष (FY24) में यह खर्च ₹5,101.4 करोड़ था। छपाई के खर्च में बढ़ोतरी के कारण इस खर्च में इजाफा दर्ज किया गया है। क्या होते हैं पॉलीमर बैंकनोट्स? ये नोट कागज के बजाय एक खास किस्म के प्लास्टिक मटेरियल यानी पॉलीमर सबस्ट्रेट पर छापे जाते हैं। ये छूने में तो सामान्य नोटों जैसे ही हल्के होते हैं, लेकिन पानी में भीगने पर भी नहीं गलते और लंबे समय तक चलते हैं। क्या होता है एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट? यह एक तरह का ग्लोबल टेंडर डॉक्यूमेंट होता है, जिसके जरिए रिजर्व बैंक दुनिया भर की अनुभवी और योग्य कंपनियों को प्रोजेक्ट के लिए अपनी क्षमता, तकनीक और कीमतों के साथ प्रस्ताव भेजने का न्योता देता है।

देश में जल्द चलेंगे ₹10 और ₹20 के प्लास्टिक-नोट:ट्रायल के लिए 200 करोड़ नोट छपेंगे; कागज के नोट भी चलेंगे

देश में जल्द चलेंगे ₹10 और ₹20 के प्लास्टिक-नोट:ट्रायल के लिए 200 करोड़ नोट छपेंगे; कागज के नोट भी चलेंगे

बाजार में जल्द ही ₹10 और ₹20 के प्लास्टिक नोट नजर आएंगे। रिजर्व बैंक 100-100 करोड़ यानी टोटल 200 करोड़ पॉलिमर यानी प्लास्टिक से बने नोट छापेगी। यह प्लास्टिक करेंसी का ट्रायल है, अगर यह सफल होता है तो आगे और नोट भी छापे जाएंगे। केंद्र सरकार ने इसकी मंजूरी दे दी है। यह जानकारी वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने सोमवार को लोकसभा में दी। पॉलिमर बैंकनोट के ट्रायल सफल होने के बाद RBI ₹10 और ₹20 दोनों वैल्यू के नोटों को रेगुलर तौर पर जारी करेगा। हालांकि कागज की मौजूदा करेंसी भी चलती रहेगी। इसे बंद नहीं किया जाएगा। 10 दिन पहले मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया था कि RBI जल्द ही देश में पॉलीमर से बने नोटों का पहला पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने जा रहा है। यह देश में नए जनरेशन की करेंसी लाने के RBI के प्लान का अगला कदम है। नए नोट के साथ पुराने कागजी नोट भी चलेंगे भारतीय बाजार में पॉलीमर नोटों के आने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि मौजूदा कागजी नोट तुरंत चलन से बाहर हो जाएंगे। सरकार ने साफ किया है कि नई करेंसी पुराने पेपर नोटों की जगह नहीं लेगी। RBI ने जारी किया ग्लोबल टेंडर RBI की नोट-प्रिंटिंग यूनिट ने ग्लोबल लेवल पर ‘एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट’ (EOI) जारी किया। यह टेंडर विशेष प्रकार की ‘पॉलीमर सबस्ट्रेट शीट’ की मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई के लिए मंगाया गया है, जिसका इस्तेमाल इन नोटों को छापने के लिए किया जाता है। डॉक्यूमेंट्स के मुताबिक, दुनिया भर के मैन्युफैक्चरर को एडवांस सेफ्टी फीचर्स से लैस पॉलीमर सबस्ट्रेट की सप्लाई के लिए इनवाइट किया गया है। इस टेंडर के तहत बोलियां जमा करने की आखिरी तारीख 18 अगस्त तय की गई है। नोटों की उम्र बढ़ाने और बढ़ती मांग के लिए कदम मई में आई एक रिपोर्ट में बताया गया था कि आरबीआई नोटों की शेल्फ लाइफ बढ़ाने और पिछले कुछ सालों में बढ़ी मांग को पूरा करने के लिए पॉलिमर बैंकनोट्स छापने पर विचार कर रहा था। इसके बाद जून में आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने पुष्टि की थी कि पॉलिमर बैंकनोट्स का प्रस्ताव विचाराधीन है और केंद्रीय बैंक इसके नफा-नुकसान का वैल्यूएशन कर रहा है। दुनिया के 60 देशों में पहले से चल रहे पॉलीमर नोट दुनिया के 60 से ज्यादा देशों में पॉलिमर बैंकनोट्स चलन में शामिल किए जा चुके हैं। इनमें ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, यूनाइटेड किंगडम (यूके) और न्यूजीलैंड जैसे देश शामिल हैं। भारत ने पहली बार नोटों की शेल्फ लाइफ बढ़ाने के लिए 2012 में पॉलिमर बैंकनोट्स लाने का प्रयास किया था। हालांकि, उस समय तकनीकी चुनौतियों के कारण इस प्रोजेक्ट को रोक दिया गया था। नए नोट फटेंगे नहीं, पानी-धूल से भी सुरक्षित रहेंगे पॉलीमर से बने बैंकनोट ट्रेडिशनल कागजी नोटों की तुलना में बहुत ज्यादा टिकाऊ होते हैं। यह नोट पानी, गंदगी और धूल में भी सुरक्षित रहते हैं। इसके अलावा यह नोट आसानी से फटते भी नहीं हैं। इस वजह से ये बाजार में लंबे समय तक बिना फटे और साफ-सुथरे बने रहते हैं। पॉलीमर शीट का सबसे बड़ा फायदा यह भी है कि इसमें एडवांस सेफ्टी फीचर्स को आसानी से जोड़ा जा सकता है। इससे नकली नोट बनाने वाले जालसाजों के लिए इनकी नकल करना लगभग नामुमकिन हो जाता है, जिससे देश का सेफ्टी सिस्टम और मजबूत होगा। 2024-25 में छपाई पर ₹6,372.8 करोड़ खर्च हुए RBI की वित्त वर्ष 2024-25 की एनुअल रिपोर्ट के अनुसार, कागजी नोटों की छपाई पर ₹6,372.8 करोड़ का खर्च आया। पिछले वित्त वर्ष (FY24) में यह खर्च ₹5,101.4 करोड़ था। छपाई के खर्च में बढ़ोतरी के कारण इस खर्च में इजाफा दर्ज किया गया है। क्या होते हैं पॉलीमर बैंकनोट्स? ये नोट कागज के बजाय एक खास किस्म के प्लास्टिक मटेरियल यानी पॉलीमर सबस्ट्रेट पर छापे जाते हैं। ये छूने में तो सामान्य नोटों जैसे ही हल्के होते हैं, लेकिन पानी में भीगने पर भी नहीं गलते और लंबे समय तक चलते हैं। क्या होता है एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट? यह एक तरह का ग्लोबल टेंडर डॉक्यूमेंट होता है, जिसके जरिए रिजर्व बैंक दुनिया भर की अनुभवी और योग्य कंपनियों को प्रोजेक्ट के लिए अपनी क्षमता, तकनीक और कीमतों के साथ प्रस्ताव भेजने का न्योता देता है।

मिडिल ईस्ट में शुरू हो सकती है एक नई जंग:सऊदी अरब का यमन की राजधानी सना पर हमला, हूती ने शुरू की समुद्री नाकेबंदी

मिडिल ईस्ट में शुरू हो सकती है एक नई जंग:सऊदी अरब का यमन की राजधानी सना पर हमला, हूती ने शुरू की समुद्री नाकेबंदी

28 फरवरी को जब अमेरिका और ईरान के बीच जंग शुरू हुई थी, तभी माना जा रहा था कि इसमें ईरान के सहयोगी हूती विद्रोही भी कूद सकते हैं। करीब पांच महीने बाद वही आशंका सच साबित होती दिख रही है। पिछले एक हफ्ते में हूतियों ने सऊदी अरब और रेड सी में जहाजों पर मिसाइल और ड्रोन से कई हमले किए हैं। जवाब में सऊदी नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन ने भी हूती ठिकानों पर हवाई हमले शुरू कर दिए हैं। यानी करीब चार साल से किसी तरह टला हुआ यमन का युद्ध फिर भड़कने की कगार पर है। हूतियों ने सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी का ऐलान कर दिया है, जबकि दोनों तरफ से हमले लगातार बढ़ रहे हैं। इससे मिडिल ईस्ट में एक नई जंग शुरू होने का खतरा बढ़ गया है। हूती और सऊदी के बीच विवाद की शुरुआत हूती और सऊदी के बीच ताजा विवाद 13 जुलाई को शुरू हुआ। दरअसल, कुछ हूती नेता अली खामेनेई की अंतिम यात्रा में शामिल होने के बाद ईरान से यमन लौट रहे थे। लेकिन यमन की सऊदी समर्थित सरकार ने इस प्लेन को सना एयरपोर्ट पर उतरने ही नहीं दिया। यमन सरकार का कहना था कि हूती अधिकारी यमन की राष्ट्रीय एयरलाइन से ही वापस लौटें। उन्हें ईरान की एयरलाइन में आने नहीं दिया जाएगा। वहीं हूती ईरानी विमान को सीधे सना में उतारने पर अड़े रहे। इसके बाद सरकार समर्थित फोर्स ने सना एयरपोर्ट के रनवे को बम से उड़ा दिया, ताकि ईरानी विमान वहां उतर न सके। नतीजतन, हूती नेताओं वाला प्लेन सना एयरपोर्ट पर उतर ही नहीं सका। प्लेन ने अपना रास्ता बदलकर हूदैदाह एयरपोर्ट पर लैंडिंग की, जो हूतियों के कंट्रोल में है। इस घटना के बाद हूतियों ने सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी का ऐलान कर दिया। शुरुआत में ईरान जंग से दूर रहे हूती विद्रोही फरवरी में जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू किया था, तब हूती सीधे इस लड़ाई में शामिल होने से बचते दिखे। लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर टूटने के बाद उनका रुख बदल गया। कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि ईरान ने हूतियों पर जंग में शामिल होने का दबाव बनाया। हालांकि उनका कहना है कि इससे सिर्फ ईरान को ही नहीं, बल्कि हूतियों को भी फायदा है। वे इस मौके का इस्तेमाल यमन में अपनी राजनीतिक ताकत और पकड़ और मजबूत करने के लिए करना चाहते हैं। 4 साल से यमन-सऊदी के बीच जंग रूकी थी यमन में 2022 हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच हुए युद्धविराम के बाद लड़ाई लगभग रुक गई थी। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं था कि दोनों पक्षों के बीच विवाद खत्म हो गया था। हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच स्थायी शांति समझौते पर बातचीत आगे नहीं बढ़ सकी। इससे तनाव बना रहा, लेकिन दोनों पक्ष दोबारा बड़े युद्ध से बचना चाहते थे। खासकर सऊदी अरब, क्योंकि कई साल के युद्ध में उसे भारी आर्थिक और सैन्य नुकसान उठाना पड़ा था। हालात तब बदले, जब अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध छिड़ गया। ईरान हूती विद्रोहियों का सबसे बड़ा समर्थक माना जाता है। इस वजह से पूरे पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ गया और इसका असर यमन पर भी पड़ा। पिछले कुछ हफ्तों में हूती और सऊदी अरब के बीच फिर टकराव बढ़ने लगा है और एक बार फिर से जंग का खतरा बढ़ गया है। हूती से जंग नहीं चाहता सऊदी अरब सऊदी अरब इस समय हूतियों के साथ दोबारा युद्ध नहीं चाहता। इसकी वजह पिछला युद्ध है, जो करीब एक दशक तक चला। इस लड़ाई में सऊदी अरब ने भारी पैसा खर्च किया, लेकिन उसे कोई बड़ा फायदा नहीं मिला। उल्टा उसकी छवि खराब हुई और युद्ध, भूख व बीमारियों की वजह से लाखों यमनियों की जान चली गई। दूसरी ओर, हूतियों को लगता है कि अगर वे सऊदी अरब पर दबाव बढ़ाते हैं तो उन्हें फायदा हो सकता है। अधिकारियों के मुताबिक, वे यमन के तेल से होने वाली कमाई में ज्यादा हिस्सा और देश में ज्यादा राजनीतिक ताकत चाहते हैं। यमन मामलों के विशेषज्ञ फारिया अल-मुस्लिमी कहते हैं, “हूतियों के लिए हर समस्या का एक ही जवाब है- युद्ध। वहीं सऊदी अरब हर समस्या को पैसे से सुलझाने की कोशिश करता है, जबकि हूती हथियारों से जवाब देते हैं।” ईरान की मदद से मजबूत हुए हूती विद्रोही हूती कभी यमन के उत्तरी पहाड़ी इलाकों में सक्रिय शिया विद्रोहियों का एक छोटा समूह थे। उनका नारा था- “अमेरिका और इजराइल की मौत।” ईरान के समर्थन से उन्होंने 2014 में गृहयुद्ध शुरू किया और राजधानी सना पर कब्जा कर अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार को वहां से हटा दिया। यमन की उत्तरी सीमा से लगे सऊदी अरब को अपने पड़ोस में ईरान समर्थित हूती संगठन का मजबूत होना बड़ा खतरा लगा। साल 2015 में सऊदी अरब ने 8 और अरब देशों के साथ मिलकर एक गठबंधन बनाया और हूतियों के खिलाफ जंग छेड़ दी। इसका मकसद राष्ट्रपति अब्दरब्बुह मंसूर हादी की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार को फिर से सत्ता में लाना था, जिसे हूती विद्रोहियों ने राजधानी सना से हटा दिया था। करीब 8 साल तक जंग लड़ने के बाद सऊदी अरब को समझ आ गया कि सिर्फ सैन्य ताकत से हूती को हराना संभव नहीं है। इसलिए 2022 के बाद उसने बातचीत का रास्ता अपनाया और सीधे हूती नेताओं से भी संपर्क शुरू किया। फिलहाल हूती विद्रोहियों का उत्तरी यमन के बड़े हिस्से पर अपना प्रभावी नियंत्रण स्थापित कर लिया था। वहीं दक्षिणी यमन पर अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार का कंट्रोल है, लेकिन वह आर्थिक और सैन्य मदद के लिए काफी हद तक सऊदी अरब पर निर्भर है। आज भी यमन के कई अहम मामलों में सऊदी अरब का प्रभाव बना हुआ है। गाजा जंग की वजह से शांति प्रक्रिया पटरी से उतरी 2022 में युद्धविराम लागू होने के बाद पहली बार लगा कि यमन में शांति लौट सकती है। संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता में सऊदी अरब और हूतियों के बीच समझौते की बातचीत आगे बढ़ी। दोनों पक्ष ऐसे फॉर्मूले पर काम कर रहे थे, जिससे वर्षों से चला आ रहा युद्ध खत्म हो सके। इस बातचीत में

मिडिल ईस्ट में शुरू हो सकती है एक नई जंग:सऊदी अरब का यमन की राजधानी सना पर हमला, हूती ने शुरू की समुद्री नाकेबंदी

मिडिल ईस्ट में शुरू हो सकती है एक नई जंग:सऊदी अरब का यमन की राजधानी सना पर हमला, हूती ने शुरू की समुद्री नाकेबंदी

28 फरवरी को जब अमेरिका और ईरान के बीच जंग शुरू हुई थी, तभी माना जा रहा था कि इसमें ईरान के सहयोगी हूती विद्रोही भी कूद सकते हैं। करीब पांच महीने बाद वही आशंका सच साबित होती दिख रही है। पिछले एक हफ्ते में हूतियों ने सऊदी अरब और रेड सी में जहाजों पर मिसाइल और ड्रोन से कई हमले किए हैं। जवाब में सऊदी नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन ने भी हूती ठिकानों पर हवाई हमले शुरू कर दिए हैं। यानी करीब चार साल से किसी तरह टला हुआ यमन का युद्ध फिर भड़कने की कगार पर है। हूतियों ने सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी का ऐलान कर दिया है, जबकि दोनों तरफ से हमले लगातार बढ़ रहे हैं। इससे मिडिल ईस्ट में एक नई जंग शुरू होने का खतरा बढ़ गया है। हूती और सऊदी के बीच विवाद की शुरुआत हूती और सऊदी के बीच ताजा विवाद 13 जुलाई को शुरू हुआ। दरअसल, कुछ हूती नेता अली खामेनेई की अंतिम यात्रा में शामिल होने के बाद ईरान से यमन लौट रहे थे। लेकिन यमन की सऊदी समर्थित सरकार ने इस प्लेन को सना एयरपोर्ट पर उतरने ही नहीं दिया। यमन सरकार का कहना था कि हूती अधिकारी यमन की राष्ट्रीय एयरलाइन से ही वापस लौटें। उन्हें ईरान की एयरलाइन में आने नहीं दिया जाएगा। वहीं हूती ईरानी विमान को सीधे सना में उतारने पर अड़े रहे। इसके बाद सरकार समर्थित फोर्स ने सना एयरपोर्ट के रनवे को बम से उड़ा दिया, ताकि ईरानी विमान वहां उतर न सके। नतीजतन, हूती नेताओं वाला प्लेन सना एयरपोर्ट पर उतर ही नहीं सका। प्लेन ने अपना रास्ता बदलकर हूदैदाह एयरपोर्ट पर लैंडिंग की, जो हूतियों के कंट्रोल में है। इस घटना के बाद हूतियों ने सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी का ऐलान कर दिया। शुरुआत में ईरान जंग से दूर रहे हूती विद्रोही फरवरी में जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू किया था, तब हूती विद्रोही सीधे इस लड़ाई में उतरने से बचते दिखे। लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम टूटने के बाद उनका रुख बदल गया। कई विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान ने हूतियों पर जंग में सक्रिय भूमिका निभाने का दबाव बनाया। हालांकि उनका कहना है कि इससे सिर्फ ईरान ही नहीं, बल्कि हूतियों को भी फायदा है। वे इस मौके का इस्तेमाल यमन में अपनी राजनीतिक पकड़ और ताकत बढ़ाने के लिए करना चाहते हैं। 4 साल से यमन-सऊदी के बीच जंग रूकी थी 2022 में हुए युद्धविराम के बाद यमन में हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच लड़ाई लगभग रुक गई थी। हालांकि इसका मतलब यह नहीं था कि दोनों पक्षों के बीच विवाद खत्म हो गया था। संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता में स्थायी शांति समझौते पर बातचीत भी शुरू हुई, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। तनाव बना रहा, मगर दोनों पक्ष बड़े युद्ध से बचने की कोशिश करते रहे। अब अमेरिका-ईरान युद्ध के बाद हालात तेजी से बदल गए हैं। पिछले कुछ हफ्तों में हूती और सऊदी अरब के बीच फिर टकराव बढ़ा है और चार साल पुराना युद्धविराम टूटने की कगार पर पहुंच गया है। हूती से जंग नहीं चाहता सऊदी अरब सऊदी अरब इस समय हूतियों के साथ फिर युद्ध नहीं चाहता। इसकी वजह पिछला संघर्ष है, जो करीब एक दशक तक चला। इस लड़ाई में सऊदी अरब ने अरबों डॉलर खर्च किए, लेकिन उसे कोई निर्णायक सफलता नहीं मिली। उल्टा उसकी अंतरराष्ट्रीय छवि को नुकसान पहुंचा और युद्ध, भूख व बीमारियों की वजह से लाखों यमनियों की जान चली गई। दूसरी ओर, हूतियों को लगता है कि सऊदी अरब पर दबाव बढ़ाकर वे अपनी शर्तें मनवा सकते हैं। अधिकारियों के मुताबिक, वे यमन के तेल से होने वाली कमाई में ज्यादा हिस्सा और देश की राजनीति में बड़ी भूमिका चाहते हैं। यमन मामलों के विशेषज्ञ फारिया अल-मुस्लिमी कहते हैं, हूतियों के लिए हर समस्या का एक ही जवाब है- युद्ध। वहीं सऊदी अरब हर समस्या को पैसे से सुलझाने की कोशिश करता है, जबकि हूती हथियारों से जवाब देते हैं। ईरान की मदद से मजबूत हुए हूती विद्रोही हूती कभी यमन के उत्तरी पहाड़ी इलाकों में सक्रिय शिया विद्रोहियों का एक छोटा समूह थे। उनका नारा था- “अमेरिका और इजराइल की मौत।” 2011 में ट्यूनीशिया से शुरू हुई अरब क्रांति की लहर यमन भी पहुंची। उस समय राष्ट्रपति अली अब्दुल्ला सालेह करीब 33 साल से सत्ता में थे। युवाओं के प्रदर्शन की वजह से उनकी गद्दी छीन गई। फरवरी 2012 में अब्दरब्बू मंसूर हादी राष्ट्रपति बने। लेकिन उनकी सरकार कमजोर थी। हूती विद्रोहियों ने इसका फायदा उठाया और सितंबर 2014 में राजधानी सना पर कब्जा कर लिया और अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार को वहां से हटा दिया। हालात इतने बिगड़ गए कि 2015 में राष्ट्रपति हादी को देश छोड़कर सऊदी अरब में शरण लेनी पड़ी। सऊदी ने 2015 में हूती के खिलाफ जंग शुरू की हादी के पद छोड़ने के बाद से यमन पर किसी एक सरकार का कंट्रोल नहीं रह गया। इससे पड़ोस के सऊदी अरब को खतरा महसूस हुआ क्योंकि हूती का समर्थन ईरान कर रहा था। ऐसे में सऊदी ने 2015 में आठ अरब देशों के साथ मिलकर सैन्य गठबंधन बनाया और हूतियों के खिलाफ जंग शुरू कर दी। इस गठबंधन का मकसद राष्ट्रपति अब्दरब्बुह मंसूर हादी की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार को फिर सत्ता में लाना था। करीब आठ साल तक लड़ाई के बाद सऊदी अरब को समझ आ गया कि सिर्फ सैन्य ताकत से हूतियों को हराना संभव नहीं है। इसके बाद उसने बातचीत का रास्ता अपनाया और सीधे हूती नेताओं से संपर्क शुरू किया। आज उत्तरी यमन के बड़े हिस्से पर हूतियों का नियंत्रण है। वहीं दक्षिणी यमन अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार के नियंत्रण में है, लेकिन वह आर्थिक और सैन्य मदद के लिए काफी हद तक सऊदी अरब पर निर्भर है। गाजा युद्ध ने बिगाड़ दिया शांति समझौता 2022 में युद्धविराम लागू होने के बाद पहली बार लगा कि यमन में स्थायी शांति लौट सकती है। संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता में सऊदी अरब और हूतियों के बीच समझौते पर बातचीत आगे बढ़ रही थी। दोनों पक्ष ऐसे फॉर्मूले पर काम कर रहे थे, जिससे वर्षों

भारत ने यूक्रेन के राजदूत को तलब किया:ब्लैक सी में जहाज पर हमले में भारतीय चीफ ऑफिसर सागर गुप्ता की मौत

भारत ने यूक्रेन के राजदूत को तलब किया:ब्लैक सी में जहाज पर हमले में भारतीय चीफ ऑफिसर सागर गुप्ता की मौत

भारत ने ब्लैक सी में एक जहाज पर हुए हमले में भारतीय नाविक की मौत के मामले में यूक्रेन के राजदूत डॉ. ओलेक्सांद्र पोलिशचुक को तलब किया है। भारतीय नाविकों की यूनियनों ने हमले के लिए यूक्रेनी ड्रोन को जिम्मेदार बताया है। विदेश मंत्रालय ने इस मामले को यूक्रेन के सामने मजबूती से उठाया है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, जहाज एमवी ओमोर्फी पर 18 जुलाई को ब्लैक सी से गुजरते समय हमला हुआ था। मंत्रालय ने पिछले हफ्ते जारी एक बयान में कहा था कि यह हमला कथित तौर पर रूसी क्षेत्रीय जलक्षेत्र में हुआ। हमले के समय जहाज पर 10 क्रू मेंबर सवार थे। इनमें 3 भारतीय नागरिक थे। हमले में भारतीय क्रू मेंबर और चीफ ऑफिसर सागर गुप्ता की मौत हो गई। जहाज पर मौजूद दो अन्य भारतीय क्रू मेंबर सुरक्षित बताए गए हैं। भारत ने हमले की निंदा की भारत ने जहाज पर हुए हमले की कड़ी निंदा की है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि कमर्शियल शिपिंग और नागरिक क्रू मेंबर पर हमले स्वीकार नहीं किए जा सकते। मंत्रालय ने सभी पक्षों से समुद्री आवाजाही की सुरक्षा सुनिश्चित करने और वैश्विक व्यापार के मुक्त प्रवाह को बनाए रखने की अपील की है। भारत का कहना है कि कमर्शियल शिपिंग रूट्स की सुरक्षा जरूरी है और नागरिक नाविकों की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जाना चाहिए। मार्शल आइलैंड्स के झंडे वाला जहाज था एमवी ओमोर्फी एमवी ओमोर्फी मार्शल आइलैंड्स के झंडे वाला बल्क कैरियर है। इसे 2010 में बनाया गया था। यह उस क्षेत्र में संचालित हो रहा था, जहां रूस-यूक्रेन संघर्ष के बीच व्यापारी जहाजों पर बार-बार हमले हुए हैं। इस घटना ने ब्लैक सी क्षेत्र में काम कर रहे भारतीय नाविकों के सामने बढ़ते सुरक्षा जोखिम को भी सामने रखा है। भारतीय नाविक दुनिया की मर्चेंट नेवी में सबसे बड़े समूहों में शामिल हैं। भारतीय नाविकों और शिपिंग कंपनियों को एडवाइजरी भारतीय अधिकारियों ने नाविकों और शिपिंग कंपनियों को एडवाइजरी जारी कर ब्लैक सी या उसके आसपास के इलाकों में काम से पहले सुरक्षा जोखिमों का सावधानी से आकलन करने को कहा है। एडवाइजरी में नाविकों और शिपिंग कंपनियों को समुद्री मार्गों की पुष्टि करने, इंश्योरेंस कवरेज की जांच करने और इमरजेंसी प्रक्रियाओं को समझने की सलाह दी गई है। अधिकारियों ने कहा है कि किसी भी असाइनमेंट को स्वीकार करने से पहले इन पहलुओं पर ध्यान देना जरूरी है। हमले में यूक्रेनी ड्रोन के इस्तेमाल का आरोप भारतीय नाविकों की यूनियनों ने इस हमले के लिए यूक्रेनी ड्रोन को जिम्मेदार बताया है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में यूक्रेन की ओर से इस आरोप की पुष्टि का उल्लेख नहीं है। हमले की जिम्मेदारी और इसकी पूरी परिस्थितियों को लेकर उपलब्ध कॉपी में आगे की जानकारी नहीं दी गई है। भारत ने इससे पहले भी कमर्शियल शिपिंग लेन की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। नई दिल्ली लगातार इस बात पर जोर देता रहा है कि समुद्री रास्तों से होने वाले वैश्विक व्यापार को सुरक्षित रखा जाए और नागरिक नाविकों की सुरक्षा से किसी भी स्थिति में समझौता न हो।

भारत ने यूक्रेन के राजदूत को तलब किया:ब्लैक सी में जहाज पर हमले में भारतीय चीफ ऑफिसर सागर गुप्ता की मौत

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भारत ने ब्लैक सी में एक जहाज पर हुए हमले में भारतीय नाविक की मौत के मामले में यूक्रेन के राजदूत डॉ. ओलेक्सांद्र पोलिशचुक को तलब किया है। भारतीय नाविकों की यूनियनों ने हमले के लिए यूक्रेनी ड्रोन को जिम्मेदार बताया है। विदेश मंत्रालय ने इस मामले को यूक्रेन के सामने मजबूती से उठाया है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, जहाज एमवी ओमोर्फी पर 18 जुलाई को ब्लैक सी से गुजरते समय हमला हुआ था। मंत्रालय ने पिछले हफ्ते जारी एक बयान में कहा था कि यह हमला कथित तौर पर रूसी क्षेत्रीय जलक्षेत्र में हुआ। हमले के समय जहाज पर 10 क्रू मेंबर सवार थे। इनमें 3 भारतीय नागरिक थे। हमले में भारतीय क्रू मेंबर और चीफ ऑफिसर सागर गुप्ता की मौत हो गई। जहाज पर मौजूद दो अन्य भारतीय क्रू मेंबर सुरक्षित बताए गए हैं। भारत ने हमले की निंदा की भारत ने जहाज पर हुए हमले की कड़ी निंदा की है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि कमर्शियल शिपिंग और नागरिक क्रू मेंबर पर हमले स्वीकार नहीं किए जा सकते। मंत्रालय ने सभी पक्षों से समुद्री आवाजाही की सुरक्षा सुनिश्चित करने और वैश्विक व्यापार के मुक्त प्रवाह को बनाए रखने की अपील की है। भारत का कहना है कि कमर्शियल शिपिंग रूट्स की सुरक्षा जरूरी है और नागरिक नाविकों की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जाना चाहिए। मार्शल आइलैंड्स के झंडे वाला जहाज था एमवी ओमोर्फी एमवी ओमोर्फी मार्शल आइलैंड्स के झंडे वाला बल्क कैरियर है। इसे 2010 में बनाया गया था। यह उस क्षेत्र में संचालित हो रहा था, जहां रूस-यूक्रेन संघर्ष के बीच व्यापारी जहाजों पर बार-बार हमले हुए हैं। इस घटना ने ब्लैक सी क्षेत्र में काम कर रहे भारतीय नाविकों के सामने बढ़ते सुरक्षा जोखिम को भी सामने रखा है। भारतीय नाविक दुनिया की मर्चेंट नेवी में सबसे बड़े समूहों में शामिल हैं। भारतीय नाविकों और शिपिंग कंपनियों को एडवाइजरी भारतीय अधिकारियों ने नाविकों और शिपिंग कंपनियों को एडवाइजरी जारी कर ब्लैक सी या उसके आसपास के इलाकों में काम से पहले सुरक्षा जोखिमों का सावधानी से आकलन करने को कहा है। एडवाइजरी में नाविकों और शिपिंग कंपनियों को समुद्री मार्गों की पुष्टि करने, इंश्योरेंस कवरेज की जांच करने और इमरजेंसी प्रक्रियाओं को समझने की सलाह दी गई है। अधिकारियों ने कहा है कि किसी भी असाइनमेंट को स्वीकार करने से पहले इन पहलुओं पर ध्यान देना जरूरी है। हमले में यूक्रेनी ड्रोन के इस्तेमाल का आरोप भारतीय नाविकों की यूनियनों ने इस हमले के लिए यूक्रेनी ड्रोन को जिम्मेदार बताया है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में यूक्रेन की ओर से इस आरोप की पुष्टि का उल्लेख नहीं है। हमले की जिम्मेदारी और इसकी पूरी परिस्थितियों को लेकर उपलब्ध कॉपी में आगे की जानकारी नहीं दी गई है। भारत ने इससे पहले भी कमर्शियल शिपिंग लेन की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। नई दिल्ली लगातार इस बात पर जोर देता रहा है कि समुद्री रास्तों से होने वाले वैश्विक व्यापार को सुरक्षित रखा जाए और नागरिक नाविकों की सुरक्षा से किसी भी स्थिति में समझौता न हो।

पेंशनर्स के लिए काम की गाइड:पेंशन रुकने पर न हों परेशान; जानें 5 समस्याएं और उनका समाधान

पेंशनर्स के लिए काम की गाइड:पेंशन रुकने पर न हों परेशान; जानें 5 समस्याएं और उनका समाधान

रिटायरमेंट के बाद पेंशन सिर्फ हर महीने मिलने वाली राशि नहीं, बल्कि पूरे परिवार की आर्थिक सुरक्षा होती है। लेकिन पेंशन रुक जाए, जीवन प्रमाण-पत्र जमा न हो पाए, फैमिली पेंशन शुरू न हो, बैंक बार-बार दौड़ाए या राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) और एकीकृत पेंशन योजना (यूपीएस) को लेकर भ्रम हो जाए, तो अधिकांश पेंशनर्स समझ नहीं पाते कि किस कार्यालय या सरकारी व्यवस्था में जाएं। यहां जानिए पेंशन से जुड़ी 5 सबसे बड़ी परेशानियां और उनका कैसे समाधान मिलेगा। 1. सबसे पहले जानिए किस समस्या के लिए कहां जाएं गलत कार्यालय पहुंचना पेंशनधारकों की सबसे आम गलती होती है। सही जगह जाने से समय और परेशानी दोनों से बचते हैं। पेंशन रुकी: →बैंक और CPENGRAMS में जाएं। जीवन प्रमाण पत्र: →सीएससी/बैंक या डाकघर। एनपीएस: पेंशन निधि विनियामक विकास प्राधिकरण। ईपीएस-95: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन। रक्षा पेंशन: → स्पर्श (SPARSH) में संपर्क करें। बैंक की शिकायत: →पहले बैंक फिर आरबीआई की एकीकृत लोकपाल व्यवस्था में जा सकते हैं। 2. पेंशन रुकी, देर से आई या गलत कटौती हुई तो… यदि आपकी मासिक पेंशन रुक गई है, देर से आ रही है या बैंक ने गलत कटौती कर दी है, तो सबसे पहले संबंधित बैंक शाखा या पेंशन वितरण कार्यालय में लिखित शिकायत करें। अधिकांश मामलों का समाधान यहीं हो जाता है। क्या करें – समाधान नहीं मिलने पर केंद्रीकृत पेंशन शिकायत निवारण व निगरानी प्रणाली (CPENGRAMS) में ऑनलाइन शिकायत करें। यहां पर अपना पीपीओ नंबर, बैंक विवरण और जरूरी दस्तावेज अपलोड करें। 3. जीवन प्रमाण-पत्र जमा करने के लिए कहां जाएं अधिक उम्र, बीमारी या चलने-फिरने में परेशानी होने पर अब बैंक जाने की जरूरत नहीं है। सरकार ने डिजिटल जीवन प्रमाण-पत्र जमा करने की सुविधा उपलब्ध कराई है। आप अपने घर पर बैठकर इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। क्या करें: मोबाइल पर जीवन प्रमाण एप और फेस अथेंटिकेशन की मदद से यह सर्टिफिकेट ऑनलाइन तैयार कर जमा किया जा सकता है। यदि स्मार्टफोन चलाना कठिन लगता है तो सीएससी या बैंक मित्र की मदद ले सकते हैं। 4. फैमिली पेंशन शुरू नहीं हो रही या बैंक बदलना है… मृत्यु, विवाह प्रमाण-पत्र, आश्रित का आधार, पैन नंबर व बैंक खाता विवरण, मृतक का पीपीओ नंबर,नामांकन फॉर्म आदि दस्तावेज तैयार रखें। फिर संबंधित विभाग या बैंक में आवेदन दें। देरी होने पर निर्धारित शिकायत व्यवस्था का उपयोग करें। क्या करें? : दोनों तरह के मामले में पीपीओ नंबर व आधार सबसे महत्वपूर्ण हैं। देरी होने पर एल्डर 14567 या संबंधित विभाग या बैंक की हेल्पलाइन पर कॉल करें। पीपीओ नंबर सहित अन्य जानकारी के साथ शिकायत दर्ज कराएं। 5. NPS, UPS या APY समझ में नहीं आ रही… राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली, एकीकृत पेंशन योजना या अटल पेंशन योजना (एपीवाय) से जुड़े मामलों में पेंशन निधि विनियामक-विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) के एआई चैटबॉट PFRDA पेंशन सहायक से सवाल पूछ सकते हैं। क्या करें? : PFRDA हेल्पलाइन 1800110708 पर सोमवार से शुक्रवार सुबह 9.30 से शाम 5.30 बजे के बीच बात कर सकते हैं। ईमेल: complaints@pfrda.org.in या वेबसाइट: www.pfrda.org.in →पर परेशानी बताएं। (एक्सपर्ट- डॉ. मनजीत सिंह पटेल, राष्ट्रीय अध्यक्ष, ऑल इंडिया एनपीएस एम्पलाइज फेडरेशन ∙ एससी जैन, जनरल सेक्रेटरी, एआईबीआरए)

चांदी ₹2,050 बढ़कर ₹2.25 लाख पर पहुंची:सोना ₹751 महंगा होकर ₹1.45 लाख का 10 ग्राम हुआ, इस साल ₹1.60 लाख तक जा सकता है

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सोने-चांदी की कीमतों में आज यानी 27 जुलाई को बढ़त है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, एक किलो चांदी 2,050 रुपए बढ़कर 2.25 लाख रुपए पर पहुंच गई है। वहीं, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 751 रुपए चढ़कर 1.45 लाख रुपए पर पहुंच गया है। कैरेट के हिसाब से सोने की कीमत देश के बड़े शहरों में सोने की कीमत सोर्स: goodreturns 27 जुलाई 2026 सोना इस साल ₹12 हजार महंगा हुआ इस साल सोने-चांदी की कीमत में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। सोना 2026 में अब तक 12 हजार रुपए महंगा हुआ है। 31 दिसंबर 2025 को 10g सोना 1.33 लाख रुपए के ऊपर था, जो अब 1.45 लाख रुपए पर पहुंच गया है। वहीं, चांदी की कीमत में 5 हजार रुपए की गिरावट है। चांदी 31 दिसंबर 2025 को 2.30 लाख रुपए किलो थी, जो अब 2.25 लाख रुपए पर है। इस दौरान 29 जनवरी को सोने ने 1.76 लाख रुपए और चांदी ने 3.86 लाख रुपए का ऑलटाइम हाई भी बनाया था। इस साल अब तक सोने-चांदी की चाल नोट:- सोने की कीमत प्रति 10 ग्राम और चांदी की कीमत किलो में | सोर्स:- IBJA सोना इस साल 1.60 लाख तक जा सकता है कमोडिटी एक्सपर्ट अजय केडिया के मुताबिक सोने-चांदी के दाम अपने हाई से काफी नीचे आ चुके हैं। ऐसे में निवेशक इसमें निवेश कर सकते हैं, हालांकि इनमें एकमुश्त निवेश करने से बचना चाहिए। अजय केडिया के अनुसार साल के आखिर तक सोना एक बार फिर 1.60 लाख और चांदी 2.80 लाख रुपए तक जा सकती है। ज्वेलर्स से सोना खरीदते समय इन 2 बातों का रखें ध्यान असली चांदी की पहचान करने के 4 तरीके

चांदी ₹2,050 बढ़कर ₹2.25 लाख पर पहुंची:सोना ₹751 महंगा होकर ₹1.45 लाख का 10 ग्राम हुआ, इस साल ₹1.60 लाख तक जा सकता है

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सोने-चांदी की कीमतों में आज यानी 27 जुलाई को बढ़त है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, एक किलो चांदी 2,050 रुपए बढ़कर 2.25 लाख रुपए पर पहुंच गई है। वहीं, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 751 रुपए चढ़कर 1.45 लाख रुपए पर पहुंच गया है। सोना इस साल ₹12 हजार महंगा हुआ इस साल सोने-चांदी की कीमत में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। सोना 2026 में अब तक 12 हजार रुपए महंगा हुआ है। 31 दिसंबर 2025 को 10g सोना 1.33 लाख रुपए के ऊपर था, जो अब 1.45 लाख रुपए पर पहुंच गया है। वहीं, चांदी की कीमत में 5 हजार रुपए की गिरावट है। चांदी 31 दिसंबर 2025 को 2.30 लाख रुपए किलो थी, जो अब 2.25 लाख रुपए पर है। इस दौरान 29 जनवरी को सोने ने 1.76 लाख रुपए और चांदी ने 3.86 लाख रुपए का ऑलटाइम हाई भी बनाया था। सोना इस साल 1.60 लाख तक जा सकता है कमोडिटी एक्सपर्ट अजय केडिया के मुताबिक सोने-चांदी के दाम अपने हाई से काफी नीचे आ चुके हैं। ऐसे में निवेशक इसमें निवेश कर सकते हैं, हालांकि इनमें एकमुश्त निवेश करने से बचना चाहिए। अजय केडिया के अनुसार साल के आखिर तक सोना एक बार फिर 1.60 लाख और चांदी 2.80 लाख रुपए तक जा सकती है। ज्वेलर्स से सोना खरीदते समय इन 2 बातों का रखें ध्यान असली चांदी की पहचान करने के 4 तरीके