Saturday, 03 Oct 2026 | 06:49 AM

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ट्रम्प बोले- आज कतर में अमेरिका-ईरान की बातचीत होगी:अपने खास दूत विटकॉफ को भेजा; तेहरान ने बातचीत से इनकार किया

ट्रम्प बोले- आज कतर में अमेरिका-ईरान की बातचीत होगी:अपने खास दूत विटकॉफ को भेजा; तेहरान ने बातचीत से इनकार किया

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि मंगलवार को कतर की राजधानी दोहा में अमेरिका और ईरान के बीच अहम बातचीत होगी। ट्रम्प का कहना है कि ईरान ने खुद इस बैठक का अनुरोध किया था। व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका का लक्ष्य ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच 17 जून को हुए समझौता ज्ञापन (MoU) को आगे बढ़ाने पर चर्चा होगी। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ दोहा के लिए रवाना हो चुके हैं। हालांकि, यह साफ नहीं किया गया कि ट्रम्प के दामाद जेरेड कुशनर उनके साथ यात्रा कर रहे हैं या नहीं। दूसरी ओर, ईरान के विदेश मंत्रालय ने ट्रम्प के दावे को खारिज करते हुए कहा कि अमेरिका के साथ किसी भी स्तर पर कोई राजनीतिक वार्ता तय नहीं है। मंत्रालय ने साफ किया कि ईरान केवल एक एक्सपर्ट प्रतिनिधिमंडल दोहा भेजेगा, जो MoU को आगे बढ़ाने और कतर में फंसी ईरानी संपत्तियों को जारी करने जैसे तकनीकी मुद्दों पर काम करेगा। पिछले 24 घंटे के 4 बड़े अपडेट्स… 1. होर्मुज से जहाजों की आवाजाही घटी: समुद्री ट्रैकिंग कंपनी केप्लर के आंकड़ों के मुताबिक, शनिवार को कुल 29 मालवाहक जहाज होर्मुज से गुजरे, जबकि रविवार को यह संख्या घटकर सिर्फ 12 रह गई। 2. होर्मुज को लेकर ईरान और ओमान की मीटिंग: ईरान और ओमान ने सोमवार को मस्कट में जॉइंट होर्मुज कमेटी की पहली बैठक की। इसमें होर्मुज स्ट्रेट को चलाने को लेकर चर्चा हुई। 3. खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होगा इंडियन डेलिगेशन: ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में बिहार के राज्यपाल जनरल सैयद हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा शामिल हो सकते हैं। 4. ईरान बोला- कतर में फंसे 6 अरब डॉलर जल्द मिलेंगे: ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने कहा है कि कतर में फंसी ईरान की 12 अरब डॉलर की राशि में से 6 अरब डॉलर जल्द जारी कर दिए जाएंगे। ईरान पीस डील से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

कुणाल खेमू बोले- होस्टिंग मेरे लिए नया अनुभव:‘अलायंस’ में रियलिटी, रिश्ते और रणनीति का अनोखा मिश्रण दिखेगा

कुणाल खेमू बोले- होस्टिंग मेरे लिए नया अनुभव:‘अलायंस’ में रियलिटी, रिश्ते और रणनीति का अनोखा मिश्रण दिखेगा

बाल कलाकार से शुरुआत करने वाले कुणाल खेमू ने अभिनय, लेखन और निर्देशन में पहचान बनाई है। अब वह प्राइम वीडियो के पहले डेली रियलिटी शो ‘अलायंस’ को होस्ट कर रहे हैं। दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने शो के फॉर्मेट, होस्टिंग अनुभव, परिवार और करियर से जुड़े सवालों पर बात की। सवाल: पहली बार किसी रियलिटी शो को होस्ट कर रहे हैं। ऐसा क्या था जिसने आपको इसके लिए हामी भरने पर मजबूर किया? जवाब: मुझे यह पसंद आया कि सिर्फ मेरा ही पहला कदम नहीं था। प्राइम वीडियो भी पहली बार डेली रियलिटी शो ला रहा है। यह फॉर्मेट भारत में पहली बार बन रहा है। लगा कि हम सब साथ सीखेंगे। इसमें रियलिटी और चुनौतियां हैं। रिश्ते बनते हैं, टूटते हैं और हर दिन खेल बदलता है। यहां फैसले बाहर से नहीं होते, कंटेस्टेंट्स खुद तय करते हैं। सवाल: बिग बॉस और दूसरे रियलिटी शोज से यह कितना अलग है? जवाब: सबसे बड़ा फर्क इसका फॉर्मेट है। यहां लोग अकेले नहीं, जोड़ियों में आते हैं। चार गठबंधन बनते हैं और खेल उन्हीं के आसपास घूमता है। यहां रसोई या रोजमर्रा की लड़ाइयों से ज्यादा ध्यान रणनीति और रिश्तों पर है। सवाल: अमिताभ बच्चन, सलमान खान, करण जौहर और शिल्पा शेट्टी जैसे बड़े नाम पहले ही होस्टिंग कर चुके हैं। तुलना का दबाव महसूस हुआ? जवाब: मैंने कभी तुलना का दबाव नहीं लिया। अगर कोई बेहतर कर चुका है तो मैं उसे कॉपी क्यों करूं। निर्माताओं ने कहा कि उन्हें मेरी अलग ऊर्जा चाहिए। मैंने सोचा कि भगवान का नाम लेकर शुरुआत करता हूं। मैं पहले खुद जानना चाहता हूं कि मुझे इसमें मजा आता है या नहीं। अगर यह स्वाभाविक नहीं लगा तो मैं अपने पुराने काम पर लौट जाऊंगा। सवाल: असल जिंदगी में आप अकेले चलने वाले इंसान हैं या गठबंधन बनाने में भरोसा रखते हैं? जवाब: जिंदगी का सबसे जरूरी साथ तो मैं बना चुका हूं। हर काम के लिए अलग साथी चाहिए। दौड़ने के लिए धावक, फिल्म के लिए कलाकार और लेखन के लिए अच्छे लेखक चाहिए। मुझे जुनूनी लोगों के साथ काम करना पसंद है। सवाल: अगर शो में दोस्ती, दुश्मनी और धोखा तीनों देखने को मिलें तो आपको सबसे ज्यादा क्या पसंद आएगा? जवाब: रियलिटी शो में हर तरह की भावनाएं जरूरी हैं। सिर्फ हंसी या लड़ाई से मजा नहीं आता। मुझे लोग ज्यादा दिलचस्प लगते हैं। कई बार चुप रहने वाले लोग भी असर छोड़ जाते हैं। पहले ही दिन ऐसी घटनाएं हुईं जिनकी किसी ने कल्पना नहीं की थी। असली रियलिटी स्क्रिप्ट से अलग होती है। सवाल: अगर फिल्म इंडस्ट्री से किसी को इस शो में कंटेस्टेंट बनाकर बुलाना हो तो किसे बुलाएंगे? जवाब: अभी कहना मुश्किल है। पहले पूरा सीजन देख लूं, तब समझ आएगा कि किस तरह के लोग फिट बैठेंगे। सवाल: अगर सोहा, सैफ और करीना इस शो में आ जाएं तो किसके साथ गठबंधन बनाएंगे और किसे धोखा देंगे? जवाब: ऐसा होने वाला ही नहीं है, इसलिए अभी सोचने का मतलब नहीं। मुझे नहीं पता खेल कैसे आगे बढ़ेगा। मौका आएगा तब देखा जाएगा। सवाल: किसी कंटेस्टेंट को देखकर लगा कि यह तो गोलमाल के किसी किरदार जैसा है? जवाब: अभी तक नहीं। अरमान की ऊर्जा अलग लगी। वह प्यारा और अलग अंदाज का इंसान है। खेल आगे बढ़ने पर असली रंग सामने आएंगे। सवाल: अभिनय, निर्देशन, लेखन, संगीत और अब होस्टिंग। सबसे मुश्किल क्या लगा? जवाब: इस समय सबसे चुनौतीपूर्ण होस्टिंग लग रही है क्योंकि यह मेरे लिए नया अनुभव है। अभिनय और निर्देशन का अनुभव था, लेकिन यहां हर पल कुछ नया सीखना पड़ रहा है। सवाल: इस शो में रणनीति ज्यादा काम आएगी या भावनाएं? जवाब: रणनीति थोड़ी दूर तक साथ देती है, लेकिन लंबे समय में असली स्वभाव सामने आ जाता है। फैसले बाहर के लोग नहीं बल्कि घर के लोग करेंगे। इसलिए असली पहचान ही मायने रखती है। सवाल: कैमरे के सामने ज्यादा मजा आता है या कैमरे के पीछे? जवाब: अभिनय मेरा पहला प्यार है और हमेशा रहेगा। निर्देशन ने मुझे अलग तरह की आजादी दी। निर्देशक के तौर पर आप पूरी टीम से जुड़े रहते हैं। भावनाएं खुलकर सामने आती हैं। वह अनुभव मुझे पसंद आया। सवाल: मडगांव एक्सप्रेस के बाद अब किस पर काम चल रहा है? जवाब: मेरी लिखी और निर्देशित फिल्म ‘वाइब’ 18 सितंबर को रिलीज होगी। ‘मडगांव एक्सप्रेस 2’ की पटकथा तैयार है और उस पर काम चल रहा है। सवाल: ‘गो गोवा गॉन २’ का इंतजार आज भी हो रहा है। उस पर क्या अपडेट है? जवाब: अगर मेरे हाथ में फैसला होता तो दूसरा भाग कब का बन चुका होता। लेकिन अधिकार मेरे पास नहीं हैं। फैसला वही लोग करेंगे जिनके पास अधिकार हैं। सवाल: दर्शकों से क्या कहना चाहेंगे? जवाब: हर दिन रात 12 बजे प्राइम वीडियो पर ‘अलायंस’ देखिए। यह नया फॉर्मेट है और उम्मीद है कि दर्शकों को पसंद आएगा।

अरशद वारसी बोले- अच्छे लोगों के साथ काम जरूरी:कुछ फिल्में पसंद से, कुछ जिंदगी की मजबूरी में करनी पड़ती हैं

अरशद वारसी बोले- अच्छे लोगों के साथ काम जरूरी:कुछ फिल्में पसंद से, कुछ जिंदगी की मजबूरी में करनी पड़ती हैं

‘प्रीतम एंड पेड्रो’ में दिलचस्प किरदार निभा रहे अरशद वारसी ने दैनिक भास्कर से बातचीत में सीरीज के साथ अपने काम के नजरिए और करियर पर बात की। उन्होंने बताया कि कहानी में क्या खास लगा, राजकुमार हिरानी के साथ काम करना क्यों आसान और मजेदार है और क्यों उनके लिए अच्छी स्क्रिप्ट के साथ अच्छा माहौल भी जरूरी है। उन्होंने गोवा शूट के किस्से, एक्टिंग प्रोसेस और सफलता की सोच भी साझा की। सवाल: जब आपने ‘प्रीतम एंड पेड्रो’ की स्क्रिप्ट पढ़ी तो ऐसी कौन-सी बात थी जिसने आपको इस प्रोजेक्ट के लिए तुरंत तैयार कर दिया? जवाब: सबसे पहले इसका विषय मुझे महत्वपूर्ण लगा। साइबर क्राइम आज का बड़ा मुद्दा है और इसके बारे में ज्यादा जागरूक होने की जरूरत है। लेकिन सिर्फ यही वजह नहीं थी। मुझे राजू ( राजकुमार हिरानी) की कहानी कहने की शैली पसंद है। उनके किरदार मानवीय होते हैं। ‘पेड्रो’ का किरदार बहुत प्यारा लगा, जिसमें ह्यूमर, खुशी और भावनाएं हैं। यह कहानी बाहर से आसान लगती है, लेकिन अंदर कई परतें हैं और यही बात मुझे सबसे ज्यादा पसंद आई। सवाल: राजकुमार हिरानी के साथ काम करने में सबसे ज्यादा क्या पसंद आता है? जवाब:दो बातें हैं। पहली प्रोफेशनल और दूसरी पर्सनल। प्रोफेशनल तौर पर उन्हें स्क्रिप्ट की शानदार समझ है और वे हर सीन को बेहतर बनाते हैं। उनके साथ काम करते हुए बहुत कुछ सीखने को मिलता है। पर्सनल तौर पर उनके साथ काम करना मजेदार होता है। सेट पर बातचीत और हंसी-मजाक का अच्छा माहौल रहता है। लोग उन्हें गंभीर समझते हैं, लेकिन उनका सेंस ऑफ ह्यूमर अच्छा है। सवाल: शूटिंग के दौरान कोई ऐसा पल जो हमेशा याद रहेगा? जवाब: इस बार मैंने राजू से ऐसा काम करवाया जो उन्होंने पहले कभी नहीं किया होगा। मेरे पास एक खुला पिकअप ट्रक है। हम दोनों पीछे बैठकर गोवा घूमने गए, जैसे कॉलेज के दिनों की मस्ती हो। गोवा में हमने टीनएजर वाली हरकतें कीं। वह अनुभव बहुत मजेदार था और आज भी याद रहेगा। सवाल: क्या कभी ऐसा लगा कि करियर आपकी उम्मीदों के मुताबिक नहीं चल रहा? जवाब: हर इंसान की जिंदगी में ऐसा समय आता है। कुछ काम दिल से होते हैं और कुछ जिम्मेदारियों की वजह से करने पड़ते हैं। लेकिन समय के साथ मैंने सीखा कि मेरे लिए अच्छे लोगों के साथ काम करना ज्यादा जरूरी है। अगर माहौल अच्छा हो तो काम का अनुभव बेहतर होता है। मैं ऐसे लोगों के साथ काम करना पसंद करता हूं जहां बेवजह का तनाव न हो। सवाल: एक एक्टर के तौर पर आप किसी प्रोजेक्ट में कितना इन्वॉल्व रहते हैं? जवाब: मेरे हिसाब से एक्टिंग सिर्फ डायलॉग बोलना नहीं है। अगर आपके पास कोई आइडिया है या सीन को बेहतर बनाने की सोच है, तो उसे टीम के साथ साझा करना चाहिए। मुझे लगता है जितनी ज्यादा भागीदारी होगी, उतना बेहतर काम निकलेगा। सवाल: अगर एक लाइन में ‘प्रीतम एंड पेड्रो’ को बताना हो तो क्या कहेंगे? जवाब: यह दो लोगों की कहानी है जो मुश्किल हालात से गुजर रहे हैं। उनके बीच एक रिश्ता बनता है और वे एक-दूसरे की जिंदगी बदल देते हैं। इस कहानी में दोस्ती, इमोशन और हंसी है। इसमें ऐसे पल हैं जो दर्शकों को छू जाएंगे। लोगों को यह सफर पसंद आएगा। __________________________________ यह इंटरव्यू भी पढ़ें.. राजकुमार हिरानी का ओटीटी डेब्यू:बोले- नई कहानी की तलाश में फ्रस्ट्रेशन होना तय, यही बेचैनी नई कहानी तक ले जाती है साइबर क्राइम जैसे गंभीर विषय को मनोरंजक अंदाज में पर्दे पर लाने की तैयारी कर रहे राजकुमार हिरानी अपनी पहली वेब सीरीज ‘प्रीतम एंड पेड्रो’ से ओटीटी डेब्यू कर रहे हैं। दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने कहानी के आइडिया, फिल्म और ओटीटी में फर्क, क्रिएटिव प्रोसेस, दर्शकों की उम्मीदों और सीरीज के भावनात्मक संदेश पर बात की। पूरा इंटरव्यू पढ़ें..

अरशद वारसी बोले- अच्छे लोगों के साथ काम जरूरी:कुछ फिल्में पसंद से, कुछ जिंदगी की मजबूरी में करनी पड़ती हैं

अरशद वारसी बोले- अच्छे लोगों के साथ काम जरूरी:कुछ फिल्में पसंद से, कुछ जिंदगी की मजबूरी में करनी पड़ती हैं

‘प्रीतम एंड पेड्रो’ में दिलचस्प किरदार निभा रहे अरशद वारसी ने दैनिक भास्कर से बातचीत में सीरीज के साथ अपने काम के नजरिए और करियर पर बात की। उन्होंने बताया कि कहानी में क्या खास लगा, राजकुमार हिरानी के साथ काम करना क्यों आसान और मजेदार है और क्यों उनके लिए अच्छी स्क्रिप्ट के साथ अच्छा माहौल भी जरूरी है। उन्होंने गोवा शूट के किस्से, एक्टिंग प्रोसेस और सफलता की सोच भी साझा की। सवाल: जब आपने ‘प्रीतम एंड पेड्रो’ की स्क्रिप्ट पढ़ी तो ऐसी कौन-सी बात थी जिसने आपको इस प्रोजेक्ट के लिए तुरंत तैयार कर दिया? जवाब: सबसे पहले इसका विषय मुझे महत्वपूर्ण लगा। साइबर क्राइम आज का बड़ा मुद्दा है और इसके बारे में ज्यादा जागरूक होने की जरूरत है। लेकिन सिर्फ यही वजह नहीं थी। मुझे राजू ( राजकुमार हिरानी) की कहानी कहने की शैली पसंद है। उनके किरदार मानवीय होते हैं। ‘पेड्रो’ का किरदार बहुत प्यारा लगा, जिसमें ह्यूमर, खुशी और भावनाएं हैं। यह कहानी बाहर से आसान लगती है, लेकिन अंदर कई परतें हैं और यही बात मुझे सबसे ज्यादा पसंद आई। सवाल: राजकुमार हिरानी के साथ काम करने में सबसे ज्यादा क्या पसंद आता है? जवाब:दो बातें हैं। पहली प्रोफेशनल और दूसरी पर्सनल। प्रोफेशनल तौर पर उन्हें स्क्रिप्ट की शानदार समझ है और वे हर सीन को बेहतर बनाते हैं। उनके साथ काम करते हुए बहुत कुछ सीखने को मिलता है। पर्सनल तौर पर उनके साथ काम करना मजेदार होता है। सेट पर बातचीत और हंसी-मजाक का अच्छा माहौल रहता है। लोग उन्हें गंभीर समझते हैं, लेकिन उनका सेंस ऑफ ह्यूमर अच्छा है। सवाल: शूटिंग के दौरान कोई ऐसा पल जो हमेशा याद रहेगा? जवाब: इस बार मैंने राजू से ऐसा काम करवाया जो उन्होंने पहले कभी नहीं किया होगा। मेरे पास एक खुला पिकअप ट्रक है। हम दोनों पीछे बैठकर गोवा घूमने गए, जैसे कॉलेज के दिनों की मस्ती हो। गोवा में हमने टीनएजर वाली हरकतें कीं। वह अनुभव बहुत मजेदार था और आज भी याद रहेगा। सवाल: क्या कभी ऐसा लगा कि करियर आपकी उम्मीदों के मुताबिक नहीं चल रहा? जवाब: हर इंसान की जिंदगी में ऐसा समय आता है। कुछ काम दिल से होते हैं और कुछ जिम्मेदारियों की वजह से करने पड़ते हैं। लेकिन समय के साथ मैंने सीखा कि मेरे लिए अच्छे लोगों के साथ काम करना ज्यादा जरूरी है। अगर माहौल अच्छा हो तो काम का अनुभव बेहतर होता है। मैं ऐसे लोगों के साथ काम करना पसंद करता हूं जहां बेवजह का तनाव न हो। सवाल: एक एक्टर के तौर पर आप किसी प्रोजेक्ट में कितना इन्वॉल्व रहते हैं? जवाब: मेरे हिसाब से एक्टिंग सिर्फ डायलॉग बोलना नहीं है। अगर आपके पास कोई आइडिया है या सीन को बेहतर बनाने की सोच है, तो उसे टीम के साथ साझा करना चाहिए। मुझे लगता है जितनी ज्यादा भागीदारी होगी, उतना बेहतर काम निकलेगा। सवाल: अगर एक लाइन में ‘प्रीतम एंड पेड्रो’ को बताना हो तो क्या कहेंगे? जवाब: यह दो लोगों की कहानी है जो मुश्किल हालात से गुजर रहे हैं। उनके बीच एक रिश्ता बनता है और वे एक-दूसरे की जिंदगी बदल देते हैं। इस कहानी में दोस्ती, इमोशन और हंसी है। इसमें ऐसे पल हैं जो दर्शकों को छू जाएंगे। लोगों को यह सफर पसंद आएगा। __________________________________ यह इंटरव्यू भी पढ़ें.. राजकुमार हिरानी का ओटीटी डेब्यू:बोले- नई कहानी की तलाश में फ्रस्ट्रेशन होना तय, यही बेचैनी नई कहानी तक ले जाती है साइबर क्राइम जैसे गंभीर विषय को मनोरंजक अंदाज में पर्दे पर लाने की तैयारी कर रहे राजकुमार हिरानी अपनी पहली वेब सीरीज ‘प्रीतम एंड पेड्रो’ से ओटीटी डेब्यू कर रहे हैं। दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने कहानी के आइडिया, फिल्म और ओटीटी में फर्क, क्रिएटिव प्रोसेस, दर्शकों की उम्मीदों और सीरीज के भावनात्मक संदेश पर बात की। पूरा इंटरव्यू पढ़ें..

'कोमा से बाहर आया तो परिवार को नहीं पहचान पाया':रोहतक में रेसलर को केमिस्ट ने गलत इंजेक्शन लगाया, बोला- ओलिंपिक खेलने का सपना था

'कोमा से बाहर आया तो परिवार को नहीं पहचान पाया':रोहतक में रेसलर को केमिस्ट ने गलत इंजेक्शन लगाया, बोला- ओलिंपिक खेलने का सपना था

मेरा सपना ओलिंपिक में देश के लिए खेलने और मेडल जीतने का था, लेकिन एक गलत इंजेक्शन ने सब कुछ बदल दिया। कोमा से बाहर आया तो अपने परिवार तक को नहीं पहचान पाया। अब नेशनल भी नहीं खेल पाऊंगा। यह कहना है राजस्थान के सीकर निवासी नेशनल रेसलिंग खिलाड़ी विजय कुमार लांबा का। विजय का आरोप है कि रोहतक में हल्का बुखार होने पर मेडिकल स्टोर संचालक ने उन्हें गलत इंजेक्शन लगा दिया। इंजेक्शन लगते ही वह बेहोश होकर गिर पड़े और चार दिन तक कोमा में रहे। अब तबीयत में कुछ सुधार होने पर उन्होंने पुलिस को बयान देकर मेडिकल स्टोर संचालक के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। सिलसिलेवार पढ़िए पूरा मामला… हल्का बुखार हुआ तो मेडिकल स्टोर पहुंचे राजस्थान के सीकर जिले के नीमका थाना क्षेत्र निवासी विजय कुमार लांबा रोहतक के गुरु मेहर सिंह अखाड़े में प्रैक्टिस करते हैं। विजय के अनुसार, 11 मार्च को उन्हें हल्का बुखार हुआ, जिसके बाद वह देव कॉलोनी स्थित एक मेडिकल स्टोर पर दवा लेने पहुंचे। उनका आरोप है कि मेडिकल स्टोर संचालक सोनू गुज्जर ने उन्हें एक इंजेक्शन लगा दिया, जिसके तुरंत बाद उनकी हालत बिगड़ गई। इंजेक्शन लगते ही बेहोश होकर गिर पड़े विजय का कहना है कि इंजेक्शन लगते ही वह बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़े। गिरने से उनका एक दांत टूट गया और कंधे में भी चोट आई। साथी खिलाड़ी उन्हें तुरंत अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां वह चार दिन तक कोमा में रहे। होश आने पर वह किसी को पहचान नहीं पा रहे थे। 15 दिन अस्पताल में भर्ती रहे, अब भी आते हैं दौरे विजय के साथियों ने घटना की सूचना उनके परिवार को दी। वह करीब 15 दिन तक एक निजी अस्पताल में भर्ती रहे। इस दौरान वह अपने परिवार के सदस्यों तक को नहीं पहचान पा रहे थे। बाद में उन्हें दौरे आने लगे। दवाइयों से उनकी हालत में कुछ सुधार हुआ है और अब वह परिवार के कुछ लोगों को पहचानने लगे हैं, लेकिन अभी भी उन्हें दौरे पड़ रहे हैं। डॉक्टर ने बताया- ऑपरेशन में इस्तेमाल होने वाला इंजेक्शन विजय का आरोप है कि मेडिकल स्टोर संचालक ने उन्हें Atracurium नाम का इंजेक्शन लगाया था। बाद में जब उन्होंने डॉक्टरों को इसकी जानकारी दी तो पता चला कि यह मांसपेशियों को शिथिल करने वाली दवा है। इसका उपयोग ऑपरेशन के दौरान एनेस्थीसिया के साथ या आईसीयू में वेंटिलेटर पर भर्ती मरीजों की मांसपेशियों को आराम देने के लिए किया जाता है। चार बार गोल्ड मेडल जीत चुके हैं विजय विजय ने बताया कि वह राजस्थान के स्टेट चैंपियन हैं और चार बार गोल्ड मेडल जीत चुके हैं। वह कई बार नेशनल प्रतियोगिताओं में भी हिस्सा ले चुके हैं। हाल ही में उनका चयन खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स के लिए हुआ था, लेकिन खराब स्वास्थ्य के कारण अब वह उसमें भाग नहीं ले सकेंगे। कुछ दिन बाद होने वाली नेशनल प्रतियोगिता भी उनसे छूट सकती है। ‘ओलिंपिक का सपना टूटता नजर आ रहा’ विजय का कहना है कि उनका सपना ओलिंपिक में देश के लिए पदक जीतने का है, लेकिन गलत इंजेक्शन लगाए जाने के बाद वह अपना खेल जारी नहीं रख पा रहे हैं। उनका आरोप है कि मेडिकल स्टोर संचालक की लापरवाही ने उनके करियर को संकट में डाल दिया है। अब पुलिस को दिए बयान विजय ने बताया कि घटना के बाद पीजीआई थाना पुलिस को शिकायत दी गई थी, लेकिन उस समय उनकी हालत ठीक नहीं थी, इसलिए बयान दर्ज नहीं हो सके। अब स्वास्थ्य में सुधार होने पर उन्होंने पुलिस को बयान दर्ज कराए हैं और मेडिकल स्टोर संचालक के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। SHO बोले- 15 मार्च को केस दर्ज किया था PGI थाना SHO नवीन ने बताया कि मेडिकल स्टोर संचालक के खिलाफ लापरवाही की शिकायत मिलने पर 15 मार्च को मामला दर्ज किया गया था। अब पीड़ित के बयान भी दर्ज कर लिए गए हैं। पुलिस मामले की जांच कर रही है और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

कौन है अक्षरा जिसे फीमेल वैभव सूर्यवंशी कहा जा रहा:8 साल की उम्र में बल्ला उठाया, 15 में ट्रिपल सेंचुरी; मां बनीं पहली कोच

कौन है अक्षरा जिसे फीमेल वैभव सूर्यवंशी कहा जा रहा:8 साल की उम्र में बल्ला उठाया, 15 में ट्रिपल सेंचुरी; मां बनीं पहली कोच

पिछले कुछ महीनों में भारतीय क्रिकेट में बिहार का नाम सबसे ज्यादा वैभव सूर्यवंशी की वजह से चर्चा में रहा। महज 15 साल की उम्र में IPL 2026 में सबसे ज्यादा 776 रन और टीम इंडिया के लिए चुने जाने वाले सबसे युवा क्रिकेटर भी बने। लेकिन अब बिहार से एक और टीनएजर ने क्रिकेट जगत का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार चर्चा महिला क्रिकेट की है। नाम है अक्षरा गुप्ता। उम्र सिर्फ 15 साल। बिहार विमेंस अंडर-19 वनडे ट्रॉफी में उन्होंने महज 126 गेंदों में नाबाद 306 रन बना दिए। उनकी पारी में 55 चौके और 8 छक्के शामिल रहे। 233 मिनट तक क्रीज पर टिककर उन्होंने 242.86 की स्ट्राइक रेट से रन बनाए। उन्होंने महज 16 गेंदों में अर्धशतक और 34 गेंदों में तिहरा शतक पूरा कर लिया। लेकिन यह कहानी सिर्फ 306 रन की नहीं है। यह कहानी बिहार के नेपाल बॉर्डर से सटे एक छोटे से शहर रक्सौल की है, जहां न कोई बड़ी क्रिकेट अकादमी थी, न आधुनिक सुविधाएं और न ही लड़कियों के लिए क्रिकेट खेलने का माहौल। आगे पढ़िए अक्षरा कैसे बनीं फीमेल वैभव सूर्यवंशी… 8 साल की उम्र में बल्ला उठाया, घर के पीछे बनी पिच ने बदली जिंदगी अक्षरा के पिता राज किशोर शाह चिकन की दुकान चलाते हैं। मां रीना देवी हाउस वाइफ हैं। बेटी का क्रिकेट के प्रति जुनून देखकर पिता ने घर के पीछे नेट और प्रैक्टिस पिच बनवा दी। मां रोज सुबह 5 बजे उठाकर दूध पिलातीं और दौड़ने भेजती थीं। अक्षरा ने 8 साल की उम्र में भाइयों और मोहल्ले के लड़कों के साथ क्रिकेट खेलना शुरू किया। चाचा रामकृपा ने उनका टैलेंट पहचाना और रोज थ्रोडाउन कराकर अभ्यास कराया। 2020 से रेगुलर ट्रेनिंग और अक्षरा आज भी रोज करीब 5 घंटे प्रैक्टिस करती हैं। 14 साल में मिली U-19 की कप्तानी, उसी उम्र में सीनियर टीम में भी जगह अक्षरा के कजिन ऋषभ, जो बिहार क्रिकेट से जुड़े हैं, उनके पहले आइडल बने। 2024 उनके करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। बिहार अंडर-19 टीम में चयन के कुछ ही समय बाद महज 14 साल की उम्र में उन्हें कप्तानी सौंप दी गई। हरियाणा और पंजाब जैसी मजबूत टीमों के खिलाफ अर्धशतक जड़कर उन्होंने पहचान बनाई। इसका इनाम उन्हें फरवरी 2026 में मिला। 14 साल की उम्र में ही उनका सिलेक्शन बिहार की सीनियर महिला टीम में हो गया। वह राज्य के लिए सीनियर क्रिकेट खेलने वाली सबसे कम उम्र की महिला क्रिकेटर बनीं। एक ही सीजन में BCCI के चार एज ग्रुप खेले, फिर 126 गेंदों में जड़ दिया तिहरा शतक अक्षरा एक ही सीजन में BCCI के चारों एज ग्रुप (अंडर-15, अंडर-19 टी-20, अंडर-19 वनडे और अंडर-23) टूर्नामेंट खेलने वाली बिहार की पहली महिला क्रिकेटर बनीं। इसके कुछ ही समय बाद उन्होंने लगातार दो ऐसी पारियां खेलीं, जिसने उन्हें देशभर में पहचान दिला दी। 19 जून को भागलपुर के संदीस कंपाउंड ग्राउंड में बिहार महिला अंडर-19 वनडे ट्रॉफी के मुकाबले में अक्षरा ने 126 गेंदों में नाबाद 306 रन ठोक दिए। इस दौरान उन्होंने 55 चौके और 8 छक्के लगाए। 242.86 की स्ट्राइक रेट से बल्लेबाजी करते हुए 233 मिनट तक क्रीज पर डटी रहीं। उनकी पारी की बदौलत टीम ने 40 ओवर में 450 रन बनाए, जबकि विपक्षी टीम 121 रन पर सिमट गई। चार दिन बाद अक्षरा ने 68 गेंदों में 164 रन बनाए, जिसमें 24 चौके और 6 छक्के शामिल रहे। क्यों कहा जा रहा ‘फीमेल वैभव सूर्यवंशी’? अक्षरा और वैभव दोनों बिहार से हैं, दोनों बाएं हाथ के बल्लेबाज हैं और दोनों पहली ही गेंद से गेंदबाजों पर हमला करने में भरोसा रखते हैं। यही वजह है कि क्रिकेट जगत और सोशल मीडिया पर अक्षरा को ‘फीमेल वैभव सूर्यवंशी’ कहा जाने लगा। अक्षरा का पसंदीदा शॉट कवर ड्राइव है। स्पिन गेंदबाजों के खिलाफ उनकी बल्लेबाजी सबसे मजबूत मानी जाती है। स्मृति से इंस्पायर, विराट की मेंटालिटी पसंद अक्षरा की सबसे बड़ी इंस्पिरेशन स्मृति मंधाना हैं। उनकी बल्लेबाजी, टाइमिंग और कवर ड्राइव अक्षरा को सबसे ज्यादा पसंद हैं। वहीं वे विराट कोहली की अटैकिंग सोच, फिटनेस की फैन हैं। अक्षरा WPL और IPL में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) को सपोर्ट करती हैं। अक्षरा कहती हैं कि उनका सबसे बड़ा सपना भारतीय महिला टीम की जर्सी पहनना है।

कौन है अक्षरा जिसे फीमेल वैभव सूर्यवंशी कहा जा रहा:8 साल की उम्र में बल्ला उठाया, 15 में ट्रिपल सेंचुरी; मां बनीं पहली कोच

कौन है अक्षरा जिसे फीमेल वैभव सूर्यवंशी कहा जा रहा:8 साल की उम्र में बल्ला उठाया, 15 में ट्रिपल सेंचुरी; मां बनीं पहली कोच

पिछले कुछ महीनों में भारतीय क्रिकेट में बिहार का नाम सबसे ज्यादा वैभव सूर्यवंशी की वजह से चर्चा में रहा। महज 15 साल की उम्र में IPL 2026 में सबसे ज्यादा 776 रन और टीम इंडिया के लिए चुने जाने वाले सबसे युवा क्रिकेटर भी बने। लेकिन अब बिहार से एक और टीनएजर ने क्रिकेट जगत का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार चर्चा महिला क्रिकेटर की है। नाम है अक्षरा गुप्ता। उम्र सिर्फ 15 साल। बिहार विमेंस अंडर-19 वनडे ट्रॉफी में उन्होंने महज 126 गेंदों में नाबाद 306 रन बना दिए। उनकी पारी में 55 चौके और 8 छक्के शामिल रहे। 233 मिनट तक क्रीज पर टिककर उन्होंने 242.86 की स्ट्राइक रेट से रन बनाए। उन्होंने महज 16 गेंदों में अर्धशतक और 34 गेंदों में शतक पूरा कर लिया। लेकिन यह कहानी सिर्फ 306 रन की नहीं है। यह कहानी बिहार के नेपाल बॉर्डर से सटे एक छोटे से शहर रक्सौल की है, जहां न कोई बड़ी क्रिकेट अकादमी थी, न आधुनिक सुविधाएं और न ही लड़कियों के लिए क्रिकेट खेलने का माहौल। आगे पढ़िए अक्षरा कैसे बनीं फीमेल वैभव सूर्यवंशी… 8 साल की उम्र में बल्ला उठाया, घर के पीछे बनी पिच ने बदली जिंदगी अक्षरा के पिता राज किशोर शाह चिकन की दुकान चलाते हैं। मां रीना देवी हाउस वाइफ हैं। बेटी का क्रिकेट के प्रति जुनून देखकर पिता ने घर के पीछे नेट और प्रैक्टिस पिच बनवा दी। मां रोज सुबह 5 बजे उठाकर दूध पिलातीं और दौड़ने भेजती थीं। अक्षरा ने 8 साल की उम्र में भाइयों और मोहल्ले के लड़कों के साथ क्रिकेट खेलना शुरू किया। चाचा रामकृपा ने उनका टैलेंट पहचाना और रोज थ्रोडाउन कराकर अभ्यास कराया। 2020 से रेगुलर ट्रेनिंग और अक्षरा आज भी रोज करीब 5 घंटे प्रैक्टिस करती हैं। 14 साल में मिली U-19 की कप्तानी, उसी उम्र में सीनियर टीम में भी जगह अक्षरा के कजिन ऋषभ, जो बिहार क्रिकेट से जुड़े हैं, उनके पहले आइडल बने। 2024 उनके करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। बिहार अंडर-19 टीम में चयन के कुछ ही समय बाद महज 14 साल की उम्र में उन्हें कप्तानी सौंप दी गई। हरियाणा और पंजाब जैसी मजबूत टीमों के खिलाफ अर्धशतक जड़कर उन्होंने पहचान बनाई। इसका इनाम उन्हें फरवरी 2026 में मिला। 14 साल की उम्र में ही उनका सिलेक्शन बिहार की सीनियर महिला टीम में हो गया। वह राज्य के लिए सीनियर क्रिकेट खेलने वाली सबसे कम उम्र की महिला क्रिकेटर बनीं। एक ही सीजन में BCCI के चार एज ग्रुप खेले, फिर 126 गेंदों में जड़ दिया तिहरा शतक अक्षरा एक ही सीजन में BCCI के चारों एज ग्रुप (अंडर-15, अंडर-19 टी-20, अंडर-19 वनडे और अंडर-23) टूर्नामेंट खेलने वाली बिहार की पहली महिला क्रिकेटर बनीं। इसके कुछ ही समय बाद उन्होंने लगातार दो ऐसी पारियां खेलीं, जिसने उन्हें देशभर में पहचान दिला दी। 19 जून को भागलपुर के संदीस कंपाउंड ग्राउंड में बिहार महिला अंडर-19 वनडे ट्रॉफी के मुकाबले में अक्षरा ने 126 गेंदों में नाबाद 306 रन ठोक दिए। इस दौरान उन्होंने 55 चौके और 8 छक्के लगाए। 242.86 की स्ट्राइक रेट से बल्लेबाजी करते हुए 233 मिनट तक क्रीज पर डटी रहीं। उनकी पारी की बदौलत टीम ने 40 ओवर में 450 रन बनाए, जबकि विपक्षी टीम 121 रन पर सिमट गई। चार दिन बाद अक्षरा ने 68 गेंदों में 164 रन बनाए, जिसमें 24 चौके और 6 छक्के शामिल रहे। क्यों कहा जा रहा ‘फीमेल वैभव सूर्यवंशी’? अक्षरा और वैभव दोनों बिहार से हैं, दोनों बाएं हाथ के बल्लेबाज हैं और दोनों पहली ही गेंद से गेंदबाजों पर हमला करने में भरोसा रखते हैं। यही वजह है कि क्रिकेट जगत और सोशल मीडिया पर अक्षरा को ‘फीमेल वैभव सूर्यवंशी’ कहा जाने लगा। अक्षरा का पसंदीदा शॉट कवर ड्राइव है। स्पिन गेंदबाजों के खिलाफ उनकी बल्लेबाजी सबसे मजबूत मानी जाती है। स्मृति से इंस्पायर, विराट की मेंटेलिटी पसंद अक्षरा की सबसे बड़ी इंस्पिरेशन स्मृति मंधाना हैं। उनकी बल्लेबाजी, टाइमिंग और कवर ड्राइव अक्षरा को सबसे ज्यादा पसंद हैं। वहीं वे विराट कोहली की अटैकिंग सोच, फिटनेस की फैन हैं। अक्षरा WPL और IPL में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) को सपोर्ट करती हैं। अक्षरा कहती हैं कि उनका सबसे बड़ा सपना भारतीय महिला टीम की जर्सी पहनना है।

न्यूजीलैंड ने 27 साल बाद इंग्लैंड में टेस्ट सीरीज जीती:160 रन से हराया; स्टोक्स के आखिरी मैच में इंग्लैंड 212 रन पर सिमटा

न्यूजीलैंड ने 27 साल बाद इंग्लैंड में टेस्ट सीरीज जीती:160 रन से हराया; स्टोक्स के आखिरी मैच में इंग्लैंड 212 रन पर सिमटा

बेन स्टोक्स अपने आखिरी इंटरनेशनल मैच को जीत के साथ यादगार बनाना चाहते थे, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। ट्रेंट ब्रिज में खेले गए तीसरे टेस्ट में न्यूजीलैंड ने इंग्लैंड को 160 रन से हराकर तीन मैचों की सीरीज 2-1 से जीत ली। 373 रन का पीछा कर रही इंग्लैंड की दूसरी पारी 212 रन पर सिमट गई। इसी के साथ कीवी टीम ने 27 साल बाद इंग्लैंड में कोई सीरीज जीती। टीम ने इससे पहले 1999 यह कारनामा किया था। यह न्यूजीलैंड की इंग्लैंड में 20 टेस्ट सीरीज में सिर्फ चौथी जीत है। खास बात यह रही कि टीम ने पहला टेस्ट हारने के बाद लगातार दो मुकाबले जीतकर सीरीज अपने नाम की। ऐसा उसने इंग्लैंड में दूसरी बार किया है। दूसरी ओर इंग्लैंड को 2012 के बाद पहली बार घर में तीन या उससे ज्यादा टेस्ट की सीरीज गंवानी पड़ी। स्टोक्स की विदाई जीत के साथ नहीं हुई मैच का सबसे बड़ा पल बेन स्टोक्स का संन्यास था। 35 साल के ऑलराउंडर ने चौथे दिन संन्यास की घोषणा की थी। टारगेट का पीछा करते हुए स्टोक्स ने पनिंग की और सिर्फ 20 गेंदों में 30 रन बनाकर तेज शुरुआत दी, लेकिन बड़ी पारी नहीं खेल सके। पांचवें दिन दो रनआउट ने बदला मुकाबला इंग्लैंड ने अंतिम दिन 103/4 से खेलना शुरू किया, लेकिन सुबह के पहले घंटे में ही मैच हाथ से निकल गया। पहले नाथन स्मिथ ने एमिलियो गे (10) को आउट किया। इसके बाद हेनरी निकोल्स के शानदार डायरेक्ट हिट पर जो रूट (18) रन आउट हो गए। इसके बाद न्यूजीलैंड ने लगातार दबाव बनाए रखा। मिचेल सैंटनर ने गस एटकिंसन को LBW किया, जबकि दूसरे डयरेक्ट हिट पर जोश टंग रन आउट हुए। आखिर में सैंटनर ने जेमी स्मिथ (60) को आउट कर इंग्लैंड की पारी 212 रन पर समेट दी। जेमी स्मिथ ने 60 रन बनाए टॉप ऑर्डर के फ्लॉप होने के बाद विकेटकीपर जेमी स्मिथ ने 60 रन की पारी खेली। उन्होंने गस एटकिंसन के साथ 75 रन जोड़कर कुछ देर मुकाबला रोके रखा, लेकिन दूसरे छोर से लगातार विकेट गिरते रहे। जेमी के आउट होते ही इंग्लैंड की उम्मीदें भी खत्म हो गईं। पहली पारी में न्यूजीलैंड ने 438 रन बनाए मैच का आधार न्यूजीलैंड की पहली पारी रही। कप्तान टॉम लैथम (151) और डेवोन कॉनवे (157) ने पहले विकेट के लिए 317 रन जोड़कर इंग्लैंड के गेंदबाजों को पूरी तरह बैकफुट पर धकेल दिया। न्यूजीलैंड ने पहली पारी में 438 रन बनाए। इंग्लैंड ने जवाब में 354 रन बनाए, जिससे न्यूजीलैंड को 84 रन की बढ़त मिली। दूसरी पारी में डेरिल मिचेल (100)* और रचिन रवींद्र (94) की बदौलत टीम ने 288/9 पर पारी घोषित कर इंग्लैंड के सामने 373 रन का लक्ष्य रखा। चोटों के बावजूद न्यूजीलैंड ने जीत हासिल की पूरे मैच के दौरान न्यूजीलैंड चोटों से जूझता रहा। मैट हेनरी पहले ही बाहर थे। ब्लेयर टिकनर चोटिल हुए तो उनकी जगह कन्कशन सब्स्टीट्यूट जैक फाउल्क्स मैदान पर उतरे। अंतिम दिन विल ओ’रूर्के भी हैमस्ट्रिंग की वजह से मैदान छोड़ गए। इंग्लैंड का 14 साल बाद घर में सीरीज हारना इंग्लैंड को 2012 के बाद पहली बार अपने घर में तीन या उससे ज्यादा टेस्ट मैचों की सीरीज में हार का सामना करना पड़ा। इंग्लैंड ने पिछले 9 टेस्ट में से 7 गंवा दिए हैं। बेन स्टोक्स और ब्रेंडन मैकुलम के ‘बैजबॉल’ में यह टीम का सबसे खराब दौर माना जा रहा है। स्टोक्स का सपना अधूरा रह गया बेन स्टोक्स ने चौथे दिन अचानक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास का ऐलान कर सभी को चौंका दिया था। उन्होंने कहा कि चार साल कप्तानी करने के बाद अब वह मानसिक और शारीरिक रूप से थक चुके हैं। स्टोक्स ने कहा, सीरीज जीतकर विदाई लेना शानदार होता, लेकिन मुझे अपने करियर और कप्तानी पर गर्व है। अब कई भावनाएं हैं, क्योंकि दोबारा इंग्लैंड के लिए नहीं खेलूंगा। डेरिल मिचेल की पारी बनी जीत की नींव दूसरी पारी में डेरिल मिचेल ने नाबाद 100 रन बनाए। इंग्लैंड के तेज गेंदबाजों की कई गेंदें उनके शरीर पर लगीं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। मैच के बाद मिचेल ने कहा, हम इंग्लैंड जीतने के इरादे से आए थे। सीरीज जीतना हमारे लिए बेहद खास है।

न्यूजीलैंड ने 27 साल बाद इंग्लैंड में टेस्ट सीरीज जीती:160 रन से हराया; स्टोक्स के आखिरी मैच में इंग्लैंड 212 रन पर सिमटा

न्यूजीलैंड ने 27 साल बाद इंग्लैंड में टेस्ट सीरीज जीती:160 रन से हराया; स्टोक्स के आखिरी मैच में इंग्लैंड 212 रन पर सिमटा

बेन स्टोक्स अपने आखिरी इंटरनेशनल मैच को जीत के साथ यादगार बनाना चाहते थे, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। ट्रेंट ब्रिज में खेले गए तीसरे टेस्ट में न्यूजीलैंड ने इंग्लैंड को 160 रन से हराकर तीन मैचों की सीरीज 2-1 से जीत ली। 373 रन का पीछा कर रही इंग्लैंड की दूसरी पारी 212 रन पर सिमट गई। इसी के साथ कीवी टीम ने 27 साल बाद इंग्लैंड में कोई सीरीज जीती। टीम ने इससे पहले 1999 यह कारनामा किया था। यह न्यूजीलैंड की इंग्लैंड में 20 टेस्ट सीरीज में सिर्फ चौथी जीत है। खास बात यह रही कि टीम ने पहला टेस्ट हारने के बाद लगातार दो मुकाबले जीतकर सीरीज अपने नाम की। ऐसा उसने इंग्लैंड में दूसरी बार किया है। दूसरी ओर इंग्लैंड को 2012 के बाद पहली बार घर में तीन या उससे ज्यादा टेस्ट की सीरीज गंवानी पड़ी। स्टोक्स की विदाई जीत के साथ नहीं हुई मैच का सबसे बड़ा पल बेन स्टोक्स का संन्यास था। 35 साल के ऑलराउंडर ने चौथे दिन संन्यास की घोषणा की थी। टारगेट का पीछा करते हुए स्टोक्स ने पनिंग की और सिर्फ 20 गेंदों में 30 रन बनाकर तेज शुरुआत दी, लेकिन बड़ी पारी नहीं खेल सके। पांचवें दिन दो रनआउट ने बदला मुकाबला इंग्लैंड ने अंतिम दिन 103/4 से खेलना शुरू किया, लेकिन सुबह के पहले घंटे में ही मैच हाथ से निकल गया। पहले नाथन स्मिथ ने एमिलियो गे (10) को आउट किया। इसके बाद हेनरी निकोल्स के शानदार डायरेक्ट हिट पर जो रूट (18) रन आउट हो गए। इसके बाद न्यूजीलैंड ने लगातार दबाव बनाए रखा। मिचेल सैंटनर ने गस एटकिंसन को LBW किया, जबकि दूसरे डयरेक्ट हिट पर जोश टंग रन आउट हुए। आखिर में सैंटनर ने जेमी स्मिथ (60) को आउट कर इंग्लैंड की पारी 212 रन पर समेट दी। जेमी स्मिथ ने 60 रन बनाए टॉप ऑर्डर के फ्लॉप होने के बाद विकेटकीपर जेमी स्मिथ ने 60 रन की पारी खेली। उन्होंने गस एटकिंसन के साथ 75 रन जोड़कर कुछ देर मुकाबला रोके रखा, लेकिन दूसरे छोर से लगातार विकेट गिरते रहे। जेमी के आउट होते ही इंग्लैंड की उम्मीदें भी खत्म हो गईं। पहली पारी में न्यूजीलैंड ने 438 रन बनाए मैच का आधार न्यूजीलैंड की पहली पारी रही। कप्तान टॉम लैथम (151) और डेवोन कॉनवे (157) ने पहले विकेट के लिए 317 रन जोड़कर इंग्लैंड के गेंदबाजों को पूरी तरह बैकफुट पर धकेल दिया। न्यूजीलैंड ने पहली पारी में 438 रन बनाए। इंग्लैंड ने जवाब में 354 रन बनाए, जिससे न्यूजीलैंड को 84 रन की बढ़त मिली। दूसरी पारी में डेरिल मिचेल (100)* और रचिन रवींद्र (94) की बदौलत टीम ने 288/9 पर पारी घोषित कर इंग्लैंड के सामने 373 रन का लक्ष्य रखा। चोटों के बावजूद न्यूजीलैंड ने जीत हासिल की पूरे मैच के दौरान न्यूजीलैंड चोटों से जूझता रहा। मैट हेनरी पहले ही बाहर थे। ब्लेयर टिकनर चोटिल हुए तो उनकी जगह कन्कशन सब्स्टीट्यूट जैक फाउल्क्स मैदान पर उतरे। अंतिम दिन विल ओ’रूर्के भी हैमस्ट्रिंग की वजह से मैदान छोड़ गए। इंग्लैंड का 14 साल बाद घर में सीरीज हारना इंग्लैंड को 2012 के बाद पहली बार अपने घर में तीन या उससे ज्यादा टेस्ट मैचों की सीरीज में हार का सामना करना पड़ा। इंग्लैंड ने पिछले 9 टेस्ट में से 7 गंवा दिए हैं। बेन स्टोक्स और ब्रेंडन मैकुलम के ‘बैजबॉल’ में यह टीम का सबसे खराब दौर माना जा रहा है। स्टोक्स का सपना अधूरा रह गया बेन स्टोक्स ने चौथे दिन अचानक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास का ऐलान कर सभी को चौंका दिया था। उन्होंने कहा कि चार साल कप्तानी करने के बाद अब वह मानसिक और शारीरिक रूप से थक चुके हैं। स्टोक्स ने कहा, सीरीज जीतकर विदाई लेना शानदार होता, लेकिन मुझे अपने करियर और कप्तानी पर गर्व है। अब कई भावनाएं हैं, क्योंकि दोबारा इंग्लैंड के लिए नहीं खेलूंगा। डेरिल मिचेल की पारी बनी जीत की नींव दूसरी पारी में डेरिल मिचेल ने नाबाद 100 रन बनाए। इंग्लैंड के तेज गेंदबाजों की कई गेंदें उनके शरीर पर लगीं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। मैच के बाद मिचेल ने कहा, हम इंग्लैंड जीतने के इरादे से आए थे। सीरीज जीतना हमारे लिए बेहद खास है।

IPL क्रिकेटर शशांक, उनके IPS पिता पर भोपाल में FIR:अच्छा खाना नहीं बनाने पर कुक को पीटा-गालियां दीं, रोते हुए VIDEO किया जारी

IPL क्रिकेटर शशांक, उनके IPS पिता पर भोपाल में FIR:अच्छा खाना नहीं बनाने पर कुक को पीटा-गालियां दीं, रोते हुए VIDEO किया जारी

मध्यप्रदेश के भोपाल में IPL टीम पंजाब किंग्स के बल्लेबाज शशांक सिंह और उनके पिता रिटायर्ड स्पेशल डीजी शैलेष सिंह IPS पर कुक से मारपीट और गाली-गलौज की FIR दर्ज हुई है। पीड़ित विपेंद्र सिंह तोमर का आरोप है कि खाना पसंद नहीं आने पर उसके साथ गाली-गलौज की गई। जब उसने काम छोड़ने की बात कही तो मोबाइल छीन लिया गया, जबरन काम कराया गया और बाद में शैलेष सिंह, शशांक और उनके ड्राइवर ने मिलकर मारपीट की। घटना के बाद युवक ने रोते हुए अपना VIDEO भी जारी किया है। इसके बाद भोपाल के रातीबड़ थाना पुलिस ने सोमवार को FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। 2 तस्वीरों में देखिए पीड़ित की चोट के निशान… सरकारी नौकरी का झांसा देकर भोपाल बुलाया रीवा निवासी विपेंद्र सिंह तोमर (31) ने बताया कि परिचित मोहित सिंह सेंगर के जरिए उसे भोपाल बुलाया गया था। उससे कहा गया कि शैलेष सिंह के यहां खाना बनाने का काम करना है और बाद में सरकारी नौकरी लगवाने में मदद की जाएगी। नीलबड़ स्थित घर पर 15 हजार रुपए मासिक वेतन, रहने और खाने की व्यवस्था तय हुई थी। कहा- ‘काम नहीं करेगा तो आया क्यों’ पीड़ित के मुताबिक, काम शुरू करने के कुछ घंटे बाद लगातार काम कराया जाने लगा। पुराने कुक को भी गालियां दी जा रही थीं। यह देखकर उसने काम छोड़ने की बात कही। आरोप है कि इस पर उससे कहा गया, “काम नहीं करेगा तो यहां आया क्यों? क्या मेरा मर्डर करने आया है?” इसके बाद उसका मोबाइल छीन लिया गया और जबरन काम कराया। कमरे में बंद हुआ तो मारपीट का आरोप युवक का कहना है कि वह डरकर कमरे में बंद हो गया था। आरोप है कि इसके बाद शैलेष सिंह, उनके बेटे शशांक सिंह और ड्राइवर ने उसके साथ मारपीट की। पीड़ित के शरीर और चेहरे पर चोट के निशान दिखाई दे रहे हैं। उसका कहना है कि मारपीट के बाद भी उसका मोबाइल वापस नहीं किया गया। बयान और जांच के बाद FIR रातीबड़ थाना पुलिस के अनुसार, शिकायत मिलने के बाद फरियादी और गवाह के बयान लिए गए। उपलब्ध तथ्यों के आधार पर शैलेष सिंह, शशांक सिंह और एक कर्मचारी के खिलाफ BNS की धारा 296(बी), 115(2) और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है। विदिशा के युवक ने भी की थी शिकायत इससे पहले 5 मई 2026 को विदिशा के गंजबासौदा निवासी राजीव विश्वकर्मा ने भी पूर्व स्पेशल डीजी शैलेष सिंह के खिलाफ डीजीपी कैलाश मकवाना से शिकायत की थी। युवक ने आरोप लगाया था कि नौकरी के दौरान उसे घर में बंधक बनाकर रखा गया, उसके साथ मारपीट की गई और मोबाइल व बैग छीन लिया गया। शिकायत में यह भी कहा गया था कि जब उसने नौकरी छोड़ने की बात कही तो उसे चोरी, छेड़छाड़ और लूट जैसे मामलों में झूठा फंसाने की धमकी दी गई। युवक का आरोप था कि उसका मोबाइल और बैग भी वापस नहीं किया गया तथा पुलिस सेवा में रहे होने का भय दिखाकर उसे लगातार धमकाया जाता रहा। शशांक इस IPL सीजन 132 रन बना सके शशांक शुरुआती IPL करियर में दिल्ली कैपिटल्स, राजस्थान रॉयल्स और सनराइजर्स हैदराबाद का हिस्सा रहे, लेकिन उन्हें मौके नहीं मिले। असली पहचान 2024 में पंजाब किंग्स के लिए खेलते हुए मिली। इसके बाद 2025 और 2026 में उन्हें 5.5 करोड़ में रिटेन किया था। शशांक ने अब तक 53 IPL मैचों में 905 रन बनाए हैं। 2026 सीजन शशांक के लिए फ्लॉप रहा। उन्होंने 12 मैचों में 132 रन बनाए। उनका बेस्ट स्कोर 56 रन रहा। शशांक जरूरत पड़ने पर ऑफ गेंदबाजी भी करते हैं। IPL करियर में उन्होंने 53 मैचों में 5 विकेट लिए हैं। इस सीजन में उन्होंने 12 मैचों में 4 विकेट लिए। ——————- ये खबर भी पढ़ें… सिया के सामने केतन मर्डर का सीन रीक्रिएट किया गया: पुलिस लोहगढ़ किला ले गई, दीवार से डमी गिराकर देखा पुणे मर्डर केस में पुलिस ने रविवार को केतन को लोहगढ़ किले से गिराने का सीन रीक्रिएट किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक इसके लिए पुलिस सुबह 6.30 बजे आरोपी सिया गोयल को लोहगढ़ किले लेकर पहुंची। टीम करीब 2.30 घंटे किले पर रही। पूरी खबर पढ़ें…