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भारत समेत 4 विमेंस टीमें ओलिंपिक के लिए सीधे क्वालिफाई:क्रिकेट के क्वालिफिकेशन नियमों को मंजूरी, मेंस का कटऑफ 2026 रैंकिंग से

भारत समेत 4 विमेंस टीमें ओलिंपिक के लिए सीधे क्वालिफाई:क्रिकेट के क्वालिफिकेशन नियमों को मंजूरी, मेंस का कटऑफ 2026 रैंकिंग से

Hindi News Sports Cricket Olympics Cricket Qualification, Los Angeles 2028, Cricket 2026 Ranking, Women Cricket Olympics, Men Cricket Olympics, ICC IOC Approval, Pomona Cricket Matches, India Cricket स्पोर्ट्स डेस्क12 मिनट पहले कॉपी लिंक 1900 में पेरिस ओलिंपिक में क्रिकेट का एक ही मैच खेला गया था। भारत, ऑस्ट्रेलिया, ग्रेट ब्रिटेन और साउथ अफ्रीका की विमेंस टीमों ने लॉस एंजिल्स ओलिंपिक 2028 के क्रिकेट इवेंट के लिए सीधे क्वालिफाई कर लिया है। ICC और IOC ने क्वालिफिकेशन नियमों को मंजूरी दे दी है। मेंस और विमेंस दोनों कैटेगरी में 6-6 टीमें हिस्सा लेंगी। पोमोना में खेले जाएंगे मैच सभी मुकाबले लॉस एंजिल्स से लगभग 50 किलोमीटर दूर पोमोना के फेयरग्राउंड्स मैदान पर खेले जाएंगे। ओलिंपिक में क्रिकेट मैच 12 से 29 जुलाई 2028 तक होंगे। विमेंस कैटेगरी की बाकी दो टीमों का फैसला 2027 में होने वाले ओलिंपिक क्वालिफायर टूर्नामेंट से होगा। ओलिंपिक 2028 में क्रिकेट मुकाबले पोमोना स्थित फेयरग्राउंड्स मैदान पर खेले जाएंगे। मेंस टीमें रैंकिंग के आधार पर मेंस में 31 दिसंबर 2026 तक की ICC टी-20 इंटरनेशनल रैंकिंग के आधार पर अफ्रीका, एशिया, यूरोप, अमेरिका और ओशिनिया की टॉप रैंकिंग टीमों को सीधे ओलिंपिक का टिकट मिलेगा। यानी पांच महाद्वीपों से एक-एक टीम सीधे क्वालिफाई करेगी। छठी और अंतिम टीम का फैसला 2027 के ओलिंपिक क्वालिफायर टूर्नामेंट से होगा, जिसमें सभी महाद्वीपों की टीमें हिस्सा लेंगी। 2027 में होगा ICC ओलिंपिक क्वालिफायर मेंस और विमेंस दोनों कैटेगरी में छठी और अंतिम टीम का फैसला 2027 में ICC ओलिंपिक क्वालिफायर से होगा। इसमें दोनों कैटेगरी की 8-8 टीमें हिस्सा लेंगी। इनमें 31 दिसंबर 2026 तक सीधे क्वालिफाई नहीं कर पाने वाली ICC रैंकिंग की शीर्ष टीमें शामिल होंगी। टूर्नामेंट की तारीख और मेजबान देश का ऐलान ICC बाद में करेगी। 15 खिलाड़ियों का स्क्वॉड, 3-3 टीमों के दो ग्रुप हर टीम अपने स्क्वॉड में अधिकतम 15 खिलाड़ी रख सकेगी। मेंस और विमेंस कैटेगरी में 6-6 टीमों को 3-3 टीमों के दो ग्रुप में बांटा जाएगा। ग्रुप स्टेज में हर टीम अपने ग्रुप की बाकी दोनों टीमों और दूसरे ग्रुप की दो टीमों से मुकाबला करेगी। इस तरह हर टीम कुल चार लीग मैच खेलेगी। दोनों कैटेगरी को मिलाकर 28 मैच होंगे। सभी मुकाबले पोमोना में बन रहे क्रिकेट स्टेडियम में खेले जाएंगे। एक बार हुआ है ओलिंपिक में क्रिकेट साल 1900 के पेरिस ओलिंपिक में क्रिकेट को शामिल किया गया था। इसके बाद क्रिकेट ओलिंपिक्स में नहीं खेला गया। पेरिस ओलिंपिक के क्रिकेट इवेंट में सिर्फ इंग्लैंड और फ्रांस ने हिस्सा लिया था। इसमें इंग्लैंड ने गोल्ड और फ्रांस ने सिल्वर जीता था। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

जून-तिमाही में घरों की बिक्री जनवरी-2023 के बाद सबसे कम:वेस्ट एशिया वॉर और सप्लाई चेन संकट से सेंटीमेंट बिगड़ा; टॉप-7 शहरों में 90,715 घर बिके

जून-तिमाही में घरों की बिक्री जनवरी-2023 के बाद सबसे कम:वेस्ट एशिया वॉर और सप्लाई चेन संकट से सेंटीमेंट बिगड़ा; टॉप-7 शहरों में 90,715 घर बिके

देश में अप्रैल-जून तिमाही (Q2 2026) के दौरान रेसिडेंशियल घरों की बिक्री में बड़ी गिरावट आई है। यह जनवरी 2023 के बाद के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। एनरॉक के डेटा के मुताबिक, ईरान वॉर के कारण बनी अनिश्चितता और सप्लाई चेन में रुकावटों की वजह से देश भर में बायर्स का सेंटीमेंट प्रभावित हुआ है। वित्त-वर्ष 2026 में कुल 4,04,005 यूनिट्स की बिक्री हुई है, जो FY23 के बाद सबसे कम है। घरों की बिक्री 6% घटी, पुणे में सबसे ज्यादा 15% गिरावट एनरॉक के डेटा के अनुसार, इस तिमाही में घरों की बिक्री सालाना आधार पर 6% घटकर 90,715 यूनिट्स रह गई है, जबकि Q2 2025 में 96,285 यूनिट्स बिकी थीं। तिमाही-दर-तिमाही आधार पर देखें तो हाउसिंग सेल्स में 11% की गिरावट आई है। टॉप 7 शहरों में से केवल कोलकाता में 10%, हैदराबाद में 2% और बेंगलुरु में 1% की सालाना बढ़ोतरी देखी गई है। दूसरी तरफ पुणे में इस तिमाही के दौरान सबसे ज्यादा 15% की सालाना गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि, प्रीमियम हाउसिंग सेगमेंट, जीसीसी आधारित रोजगार केंद्रों और इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर में अभी भी सबसे ज्यादा सेल्स ग्रोथ है। एमएमआर और बेंगलुरु की हिस्सेदारी 48% से ज्यादा रही देश के टॉप-7 शहरों की कुल बिक्री में मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन और बेंगलुरु की हिस्सेदारी 48% से ज्यादा रही है। Q2 2026 में इन दोनों शहरों में कुल मिलाकर लगभग 43,995 यूनिट्स की बिक्री हुई है। एनरॉक ग्रुप के चेयरमैन अनुज पुरी ने कहा कि ये आंकड़े अनुमान के मुताबिक ही हैं, क्योंकि पूरे सेक्टर पर मिडल ईस्ट वॉर का असर साफ दिख रहा था। इसके अलावा युद्ध के कारण पैदा हुई रुकावटों और आईटी/आईटीईएस सेक्टर में एआई से जुड़ी अनिश्चितताओं ने बायर्स को फिलहाल इंतजार करने पर मजबूर कर दिया है। नए प्रोजेक्ट्स की लॉन्चिंग सालाना 7% बढ़ी मार्केट में नए घरों की लॉन्चिंग में सालाना आधार पर 7% की बढ़ोतरी हुई है। यह Q2 2025 के 98,625 यूनिट्स से बढ़कर Q2 2026 में 1,06,000 यूनिट्स पर पहुंच गई। नए सप्लाई में एमएमआर और बेंगलुरु का दबदबा रहा, जो कुल नई इन्वेंट्री का 53% है। कुल नई लॉन्चिंग में एमएमआर, पुणे, हैदराबाद और बेंगलुरु की हिस्सेदारी 81% रही। तिमाही आधार पर टॉप शहरों में नई सप्लाई 16% घटी अनुज पुरी ने बताया कि बड़े और लिस्टेड डेवलपर्स ने 2025 में खरीदे गए बड़े लैंड पार्सल पर प्रोजेक्ट्स लॉन्च किए, जिससे सालाना आधार पर नए लॉन्च मजबूत रहे। हालांकि, तिमाही आधार पर टॉप शहरों में नई सप्लाई 16% घटी है, क्योंकि कमजोर बायर्स सेंटीमेंट के कारण कई डेवलपर्स ने नए सप्लाई की रफ्तार धीमी कर दी है। घरों की औसत कीमतों में 7% की सालाना बढ़ोतरी, NCR में सबसे ज्यादा उछाल क्या होती है इन्वेंट्री? रियल एस्टेट भाषा में ‘इन्वेंट्री’ का मतलब उन तैयार या निर्माणाधीन घरों से होता है जो डेवलपर्स के पास बेचने के लिए उपलब्ध हैं लेकिन अभी तक बिके नहीं हैं। मार्केट सेंटीमेंट बिगड़ने के मुख्य कारण मिडल ईस्ट में चल रहा युद्ध, ग्लोबल सप्लाई चेन में आ रही रुकावटें और आईटी सेक्टर में एआई के कारण पैदा हुई नौकरियों की अनिश्चितता।

जून-तिमाही में घरों की बिक्री जनवरी-2023 के बाद सबसे कम:वेस्ट एशिया वॉर और सप्लाई चेन संकट से सेंटीमेंट बिगड़ा; टॉप-7 शहरों में 90,715 घर बिके

जून-तिमाही में घरों की बिक्री जनवरी-2023 के बाद सबसे कम:वेस्ट एशिया वॉर और सप्लाई चेन संकट से सेंटीमेंट बिगड़ा; टॉप-7 शहरों में 90,715 घर बिके

देश में अप्रैल-जून तिमाही के दौरान रेसिडेंशियल घरों की बिक्री में बड़ी गिरावट आई है। यह जनवरी 2023 के बाद के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। इस बात की जानकारी रियल एस्टेट कंसलटेंट फर्म एनरॉक ने दी। ईरान वॉर के कारण बनी अनिश्चितता और सप्लाई चेन में रुकावटों की वजह से देश भर में बायर्स का सेंटीमेंट प्रभावित हुआ है। वित्त-वर्ष 2026 में कुल 4,04,005 यूनिट्स की बिक्री हुई है, जो FY23 के बाद सबसे कम है। घरों की बिक्री 6% घटी, पुणे में सबसे ज्यादा 15% गिरावट एनरॉक के डेटा के अनुसार, इस तिमाही में घरों की बिक्री सालाना आधार पर 6% घटकर 90,715 यूनिट्स रह गई है, जबकि Q2 2025 में 96,285 यूनिट्स बिकी थीं। तिमाही-दर-तिमाही आधार पर देखें तो हाउसिंग सेल्स में 11% की गिरावट आई है। टॉप 7 शहरों में से केवल कोलकाता में 10%, हैदराबाद में 2% और बेंगलुरु में 1% की सालाना बढ़ोतरी देखी गई है। दूसरी तरफ पुणे में इस तिमाही के दौरान सबसे ज्यादा 15% की सालाना गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि, प्रीमियम हाउसिंग सेगमेंट, जीसीसी आधारित रोजगार केंद्रों और इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर में अभी भी सबसे ज्यादा सेल्स ग्रोथ है। एमएमआर और बेंगलुरु की हिस्सेदारी 48% से ज्यादा रही देश के टॉप-7 शहरों की कुल बिक्री में मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन और बेंगलुरु की हिस्सेदारी 48% से ज्यादा रही है। Q2 2026 में इन दोनों शहरों में कुल मिलाकर लगभग 43,995 यूनिट्स की बिक्री हुई है। एनरॉक ग्रुप के चेयरमैन अनुज पुरी ने कहा कि ये आंकड़े अनुमान के मुताबिक ही हैं, क्योंकि पूरे सेक्टर पर मिडल ईस्ट वॉर का असर साफ दिख रहा था। इसके अलावा युद्ध के कारण पैदा हुई रुकावटों और आईटी/आईटीईएस सेक्टर में एआई से जुड़ी अनिश्चितताओं ने बायर्स को फिलहाल इंतजार करने पर मजबूर कर दिया है। नए प्रोजेक्ट्स की लॉन्चिंग सालाना 7% बढ़ी मार्केट में नए घरों की लॉन्चिंग में सालाना आधार पर 7% की बढ़ोतरी हुई है। यह Q2 2025 के 98,625 यूनिट्स से बढ़कर Q2 2026 में 1,06,000 यूनिट्स पर पहुंच गई। नए सप्लाई में एमएमआर और बेंगलुरु का दबदबा रहा, जो कुल नई इन्वेंट्री का 53% है। कुल नई लॉन्चिंग में एमएमआर, पुणे, हैदराबाद और बेंगलुरु की हिस्सेदारी 81% रही। तिमाही आधार पर टॉप शहरों में नई सप्लाई 16% घटी अनुज पुरी ने बताया कि बड़े और लिस्टेड डेवलपर्स ने 2025 में खरीदे गए बड़े लैंड पार्सल पर प्रोजेक्ट्स लॉन्च किए, जिससे सालाना आधार पर नए लॉन्च मजबूत रहे। हालांकि, तिमाही आधार पर टॉप शहरों में नई सप्लाई 16% घटी है, क्योंकि कमजोर बायर्स सेंटीमेंट के कारण कई डेवलपर्स ने नए सप्लाई की रफ्तार धीमी कर दी है। घरों की औसत कीमतों में 7% की सालाना बढ़ोतरी, NCR में सबसे ज्यादा उछाल क्या होती है इन्वेंट्री? रियल एस्टेट भाषा में ‘इन्वेंट्री’ का मतलब उन तैयार या निर्माणाधीन घरों से होता है जो डेवलपर्स के पास बेचने के लिए उपलब्ध हैं लेकिन अभी तक बिके नहीं हैं। मार्केट सेंटीमेंट बिगड़ने के मुख्य कारण मिडल ईस्ट में चल रहा युद्ध, ग्लोबल सप्लाई चेन में आ रही रुकावटें और आईटी सेक्टर में एआई के कारण पैदा हुई नौकरियों की अनिश्चितता। ये खबर भी पढ़ें… ब्रिटिश अमेरिकन टोबैको इस साल 9,000 कर्मचारियों को निकालेगी: खर्च घटाने और AI अपनाने के लिए कदम उठाया; ग्लोबल सिगरेट वॉल्यूम 2.5% घटने का अनुमान लंदन स्थित दुनिया की सबसे बड़ी तंबाकू कंपनियों में से एक ब्रिटिश अमेरिकन टोबैको इस साल अपने कुल 47,000 कर्मचारियों में से लगभग पांचवें हिस्से यानी करीब 20% की कटौती करने जा रही है। पूरी खबर पढ़ें…

भारत का पहला AI-पावर्ड म्यूजिकल माइक्रो-ड्रामा ‘मोहिनी: खुद से प्यार’:अमिता बोलीं- AI कहानी नहीं लिखेगा, उसे कहने का तरीका जरूर बदलेगा

भारत का पहला AI-पावर्ड म्यूजिकल माइक्रो-ड्रामा ‘मोहिनी: खुद से प्यार’:अमिता बोलीं- AI कहानी नहीं लिखेगा, उसे कहने का तरीका जरूर बदलेगा

प्रख्यात फिल्मकार राम माधवानी की पत्नी और क्रिएटिव प्रोड्यूसर अमिता माधवानी इन दिनों अपने नए प्रोजेक्ट ‘मोहिनी: खुद से प्यार’ को लेकर चर्चा में हैं। इसे भारत का पहला AI-पावर्ड म्यूजिकल माइक्रो-ड्रामा बताया जा रहा है, जिसे सोशल मीडिया के लिए 12 एपिसोड की सीरीज के रूप में तैयार किया गया है। अमिता के मुताबिक, तकनीक बदल सकती है लेकिन कहानी कहने का मूल अब भी इंसान ही रहेगा। मोहिनी’ की पहले कहानी लिखी गई और बाद में AI का यूज हुआ अमिता कहती हैं कि ‘AI को लेकर सबसे बड़ी गलतफहमी यही है कि लोग उसे रचनात्मक निर्णय लेने वाली इकाई मानने लगे हैं। AI खुद कुछ तय नहीं करता, बल्कि इंसान तय करता है कि उससे क्या करवाना है। ‘मोहिनी’ के मामले में भी पहले कहानी लिखी गई और बाद में AI को एक क्रिएटिव टूल की तरह इस्तेमाल किया गया। जैसे मोबाइल, कंप्यूटर और डिजिटल कैमरे ने फिल्म निर्माण की प्रक्रिया बदली थी, उसी तरह AI भी नई संभावनाएं लेकर आया है। हालांकि संवेदनशीलता, भावनाएं और कहानी की आत्मा अब भी इंसानी सोच से ही आती है। आज AI को लेकर जितनी उत्सुकता है, उतना ही भ्रम भी है।’ कहानी का उद्देश्य तकनीक नहीं, कला का नया रूप दिखाना है अमिता के अनुसार…‘मोहिनी: खुद से प्यार’ का मकसद केवल AI का प्रदर्शन नहीं है। मैं इसके जरिए भारतीय कला, कथक, संगीत और कहानी को नई तकनीक के साथ जोड़कर एक नया अनुभव देना चाहती हूं। मेरे लिए AI मंजिल नहीं, एक माध्यम है। अंत में वही कंटेंट टिकेगा जिसमें सच्चाई, इमोशन और मजबूत कहानी होगी।’ माइक्रो-ड्रामा की पूरी मेकिंग प्रोसेस में इंसानों ने ही काम किया है ‘मोहिनी’ की पूरी मेकिंग में इंसानों ने ही काम किया। अमिता बोलीं…‘AI अकेले कोई फिल्म नहीं बना सकता। AI हालांकि के कारण कलाकारों और तकनीकी टीमों की जरूरत कम होने वाली आशंकाओं से भी मैं सहमत नहीं हूं। आज बहस सिर्फ इतनी नहीं होनी चाहिए कि टीम का आकार कितना कम होगा, बल्कि यह भी देखना चाहिए कि तकनीक से कंटेंट आउटपुट कितना बढ़ेगा। अगर एक टीम पहले एक साल में एक प्रोजेक्ट करती थी और अब कई प्रोजेक्ट कर सकती है, तो नए अवसर भी पैदा होंगे। AI कहानी नहीं लिखेगा, बल्कि उसे कहने का तरीका बदलेगा।’ टाइगर स्टारर नई फिल्म के विजुअल्स पर भी ली जा रही AI की मदद बकौल अमिता, ‘हमारी टीम फिलहाल AI का इस्तेमाल फिल्म बनाने के लिए नहीं, बल्कि प्री-प्रोडक्शन और विजुअल डेवलपमेंट में कर रही है। राम माधवानी भी टाइगर श्रॉफ के साथ अगली फिल्म की तैयारी में AI आधारित विजुअल प्लानिंग का उपयोग कर रहे हैं। पहले सीन और फ्रेम की कल्पना स्केच व रेफरेंस से समझाई जाती थी, जबकि अब AI तेजी से विजुअल रेफरेंस तैयार कर देता है। इससे प्रोडक्शन, सिनेमैटोग्राफी और कॉस्ट्यूम टीम बेहतर तालमेल के साथ काम कर पाती है। AI एक सहयोगी टूल है, विकल्प नहीं।’

भारत का पहला AI-पावर्ड म्यूजिकल माइक्रो-ड्रामा ‘मोहिनी: खुद से प्यार’:अमिता बोलीं- AI कहानी नहीं लिखेगा, उसे कहने का तरीका जरूर बदलेगा

भारत का पहला AI-पावर्ड म्यूजिकल माइक्रो-ड्रामा ‘मोहिनी: खुद से प्यार’:अमिता बोलीं- AI कहानी नहीं लिखेगा, उसे कहने का तरीका जरूर बदलेगा

प्रख्यात फिल्मकार राम माधवानी की पत्नी और क्रिएटिव प्रोड्यूसर अमिता माधवानी इन दिनों अपने नए प्रोजेक्ट ‘मोहिनी: खुद से प्यार’ को लेकर चर्चा में हैं। इसे भारत का पहला AI-पावर्ड म्यूजिकल माइक्रो-ड्रामा बताया जा रहा है, जिसे सोशल मीडिया के लिए 12 एपिसोड की सीरीज के रूप में तैयार किया गया है। अमिता के मुताबिक, तकनीक बदल सकती है लेकिन कहानी कहने का मूल अब भी इंसान ही रहेगा। मोहिनी’ की पहले कहानी लिखी गई और बाद में AI का यूज हुआ अमिता कहती हैं कि ‘AI को लेकर सबसे बड़ी गलतफहमी यही है कि लोग उसे रचनात्मक निर्णय लेने वाली इकाई मानने लगे हैं। AI खुद कुछ तय नहीं करता, बल्कि इंसान तय करता है कि उससे क्या करवाना है। ‘मोहिनी’ के मामले में भी पहले कहानी लिखी गई और बाद में AI को एक क्रिएटिव टूल की तरह इस्तेमाल किया गया। जैसे मोबाइल, कंप्यूटर और डिजिटल कैमरे ने फिल्म निर्माण की प्रक्रिया बदली थी, उसी तरह AI भी नई संभावनाएं लेकर आया है। हालांकि संवेदनशीलता, भावनाएं और कहानी की आत्मा अब भी इंसानी सोच से ही आती है। आज AI को लेकर जितनी उत्सुकता है, उतना ही भ्रम भी है।’ कहानी का उद्देश्य तकनीक नहीं, कला का नया रूप दिखाना है अमिता के अनुसार…‘मोहिनी: खुद से प्यार’ का मकसद केवल AI का प्रदर्शन नहीं है। मैं इसके जरिए भारतीय कला, कथक, संगीत और कहानी को नई तकनीक के साथ जोड़कर एक नया अनुभव देना चाहती हूं। मेरे लिए AI मंजिल नहीं, एक माध्यम है। अंत में वही कंटेंट टिकेगा जिसमें सच्चाई, इमोशन और मजबूत कहानी होगी।’ माइक्रो-ड्रामा की पूरी मेकिंग प्रोसेस में इंसानों ने ही काम किया है ‘मोहिनी’ की पूरी मेकिंग में इंसानों ने ही काम किया। अमिता बोलीं…‘AI अकेले कोई फिल्म नहीं बना सकता। AI हालांकि के कारण कलाकारों और तकनीकी टीमों की जरूरत कम होने वाली आशंकाओं से भी मैं सहमत नहीं हूं। आज बहस सिर्फ इतनी नहीं होनी चाहिए कि टीम का आकार कितना कम होगा, बल्कि यह भी देखना चाहिए कि तकनीक से कंटेंट आउटपुट कितना बढ़ेगा। अगर एक टीम पहले एक साल में एक प्रोजेक्ट करती थी और अब कई प्रोजेक्ट कर सकती है, तो नए अवसर भी पैदा होंगे। AI कहानी नहीं लिखेगा, बल्कि उसे कहने का तरीका बदलेगा।’ टाइगर स्टारर नई फिल्म के विजुअल्स पर भी ली जा रही AI की मदद बकौल अमिता, ‘हमारी टीम फिलहाल AI का इस्तेमाल फिल्म बनाने के लिए नहीं, बल्कि प्री-प्रोडक्शन और विजुअल डेवलपमेंट में कर रही है। राम माधवानी भी टाइगर श्रॉफ के साथ अगली फिल्म की तैयारी में AI आधारित विजुअल प्लानिंग का उपयोग कर रहे हैं। पहले सीन और फ्रेम की कल्पना स्केच व रेफरेंस से समझाई जाती थी, जबकि अब AI तेजी से विजुअल रेफरेंस तैयार कर देता है। इससे प्रोडक्शन, सिनेमैटोग्राफी और कॉस्ट्यूम टीम बेहतर तालमेल के साथ काम कर पाती है। AI एक सहयोगी टूल है, विकल्प नहीं।’

साबूदाना ब्रेड कटलेट रेसिपी: बिना डीप फ्राई करें ऐसे बनाएं साबूदाना और ब्रेड वाला कटलेट; नोट करें रेसिपी के लिए

तस्वीर का विवरण

सामग्री: 1 कप बड़ा साबूदाना, 4 छोटे आलू, 2 छोटे आलू, 2 हरी मिर्च, हरा धनियां, 1 छोटा चम्मच अदरक का पेस्ट, ½ छोटा चम्मच जीरा, ½ छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर छवि: फ्रीपिक ½ छोटा चम्मच काली मिर्च पाउडर, स्वादानुसार नमक, 2-3 बड़ा चम्मच काली मिर्च का तेल। छवि: एआई बनाने की विधि: सबसे पहले भीगे हुए साबूदाने का अतिरिक्त पानी निकाला हुआ लें। अब बेडलैब को गैबल बनाकर अच्छी तरह की विशिष्टता लें। एक बड़े बाउल में आलू मैश किये हुए आलू मैश करें। छवि: फ्रीपिक इसमें साबूदाना, ब्रेड, हरी मिर्च, अदरक, हरा धनियां, जीरा, लाल मिर्च, काली मिर्च और नमक के मसाले सभी को अच्छी तरह मिला लें। अब इस मिश्रण से अपनी पसंद के अनुसार गोल या ओवल साइज के कटलेट तैयार करें। छवि: फ्रीपिक एक नॉन-स्टिक तवा गर्म और उस पर थोड़ा-सा तेल डालें। कटलेट को दोनों तरफ से मध्यम आंच पर सोना और कुरकुरा होने तक सेकें। छवि: एआई फ्लाइट तोहफे एयर फ़्रेयर में भी 180 डिग्री सेल्सियस पर 12-15 मिनट तक पका सकते हैं। बीच में एक बार पलटें ताकि दोनों तरफ से अच्छी तरह क्रिस्पी हो जाएं। छवि: सोशल मीडिया गरमा-गरम साबूदाना ब्रेड कटलेट को हरी धनिया की चटनी, टमाटर की चटनी या टमाटर केचप के साथ सर्व करें। साथ में एक कप चाय या कॉफ़ी मिल जाए तो फ़िल्म का मज़ा डबल हो जाएगा। छवि: एआई साबूदाने में पानी बिल्कुल ना रहे, नहीं तो फिर मिलाया जा सकता है। अगर मिक्सचर नैचुरल लगे तो इसमें लिटिल बेडर्ड क्रैम्ब्स मिल सकते हैं। छवि: फ्रीपिक स्वाद बढ़ाने के लिए इसमें कद्दूकस की हुई चीज़ या इलेक्ट्रोनिक कटी भी मिलाई जा सकती है. कटलेट को हमेशा मध्यम स्पर्श पर सेकें, इससे वे बाहर से कुरकुरे और अंदर से अच्छी तरह पकेंगे। छवि: एआई

राजकुमार हिरानी का ओटीटी डेब्यू:बोले- नई कहानी की तलाश में फ्रस्ट्रेशन होना तय, यही बेचैनी नई कहानी तक ले जाती है

राजकुमार हिरानी का ओटीटी डेब्यू:बोले- नई कहानी की तलाश में फ्रस्ट्रेशन होना तय, यही बेचैनी नई कहानी तक ले जाती है

साइबर क्राइम जैसे गंभीर विषय को मनोरंजक अंदाज में पर्दे पर लाने की तैयारी कर रहे राजकुमार हिरानी अपनी पहली वेब सीरीज ‘प्रीतम एंड पेड्रो’ से ओटीटी डेब्यू कर रहे हैं। दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने कहानी के आइडिया, फिल्म और ओटीटी में फर्क, क्रिएटिव प्रोसेस, दर्शकों की उम्मीदों और सीरीज के भावनात्मक संदेश पर बात की। सवाल: ‘प्रीतम एंड पेड्रो’ की कहानी का आइडिया कैसे आया? कब लगा कि यही कहानी बनानी चाहिए? जवाब: इस कहानी की शुरुआत कुछ छोटी कहानियों से हुई। मैंने साइबर क्राइम पर लिखी कुछ शॉर्ट स्टोरी पढ़ी थीं। उनसे समझ आया कि साइबर क्राइम कैसे होता है, उसे कैसे सुलझाया जाता है और उससे कैसे बचा जा सकता है। उसी दौरान लगा कि इस विषय में एक बड़ी और दिलचस्प कहानी बन सकती है। फिर किरदारों पर काम शुरू किया। धीरे-धीरे कहानी विकसित हुई, गोवा की सेटिंग आई, एक क्राइम ब्रांच का पुलिस ऑफिसर और एक हैकर जुड़ा। इस तरह पूरी दुनिया तैयार होती चली गई। सवाल: आपकी फिल्मों में अक्सर ह्यूमर के साथ एक गहरा मैसेज भी होता है। क्या इस सीरीज में भी दर्शकों को वैसा कुछ देखने मिलेगा? जवाब: देखिए, हमारी कोशिश हमेशा पहले दर्शकों का मनोरंजन करने की होती है। हम यह सोचकर कहानी नहीं बनाते कि हर बार कोई संदेश देना है। लेकिन इंसानी रिश्तों और समाज से जुड़ी कहानी में कुछ बातें अपने आप सामने आ जाती हैं। इस सीरीज में भी ऐसा ही है। यह साइबर क्राइम की कहानी है, लेकिन इसे हल्के और मनोरंजक अंदाज में बताया गया है। कहानी के आखिर में एक छोटा सा मैसेज जरूर आता है, लेकिन वह थोपा हुआ नहीं लगेगा। सवाल: फिल्मों और ओटीटी के लिए कहानी लिखने में सबसे बड़ा फर्क क्या होता है? जवाब: कुछ कहानियां ऐसी होती हैं जिन्हें आप दो या ढाई घंटे में कह सकते हैं, लेकिन कुछ कहानियों को ज्यादा समय चाहिए होता है। ओटीटी आपको किरदारों को गहराई से दिखाने, उनके सफर को विस्तार देने और कई ट्रैक साथ चलाने का मौका देता है। फिल्मों में यह आजादी कम होती है। इसलिए कुछ कहानियां वेब सीरीज के लिए ज्यादा सही होती हैं। सवाल 4: इस बार ह्यूमर में नया क्या देखने को मिलेगा? जवाब: ह्यूमर हमेशा किरदारों से निकलता है। नए किरदारों का व्यवहार और सोच भी अलग होती है। इस सीरीज में ‘पेड्रो’ ऐसा किरदार है जिसकी अपनी अलग दुनिया है। वह लोगों से जिस तरह बात करता है और केस को देखता-सुलझाता है, उसी से ह्यूमर निकलता है। सवाल: गोवा इस कहानी का हिस्सा कैसे बना? जवाब: दिलचस्प बात यह है कि शुरुआत में कहानी गोवा में नहीं थी। हमने पहला ड्राफ्ट हरियाणा को ध्यान में रखकर में लिखा था। लेकिन बाद में मैं और अभिजीत लिखने के लिए गोवा गए। वहां का माहौल, लोग और अनुभव अलग लगे, जिससे कहानी धीरे-धीरे बदलती गई और आखिर में इसे गोवा में सेट कर दिया। कई बार जगह खुद कहानी बदल देती है। सवाल: गोवा में शूटिंग का कोई ऐसा किस्सा जो आज भी याद आता हो? जवाब: एक मजेदार किस्सा यह हुआ कि हमारा एक असिस्टेंट गोवा पहुंचते ही छुट्टी वाले मूड में आ गया। एक रात वह दोस्त की कार लेकर घूमने गया और सुबह कार की हालत खराब करके लौटा। सबसे मजेदार बात यह थी कि अगले दिन वह ऐसे बैठा था जैसे कुछ हुआ ही नहीं। तब समझ आया कि गोवा ऐसी जगह है जहां कहानी अपने आप बनने लगती है। सवाल: सेट पर एक्टर्स और टीम के सुझावों को कितना महत्व देते हैं? जवाब: सिनेमा पूरी तरह टीमवर्क है। यह किसी एक इंसान का काम नहीं है। आप कहानी लिख लेते हैं, लेकिन उसके बाद कैमरा, म्यूजिक, डायरेक्शन और एक्टर्स मिलकर उसे बेहतर बनाते हैं। हर इंसान अपना नजरिया लेकर आता है। जितना खुलकर आप सबकी राय लेते हैं, काम उतना बेहतर होता जाता है। सवाल: आपकी फिल्मों से दर्शकों की उम्मीदें बहुत ज्यादा रहती हैं। क्या इसका दबाव महसूस होता है? जवाब: दबाव से ज्यादा यह एक चुनौती होती है। हर बार आपको नई कहानी खोजनी पड़ती है। मेरा मानना है कि फिल्म ऐसी चीज नहीं है जिसे लोग बार-बार एक जैसा देखना चाहें। हर बार कुछ नया देना जरूरी होता है। इसी वजह से स्क्रिप्ट को लेकर लगातार सोच चलता रहता है कि क्या नया किया जाए। कई बार फ्रस्ट्रेशन भी होता है। लगता है कि सही आइडिया क्यों नहीं मिल रहा। लेकिन जब कहानी का कोई हिस्सा खुलता है तो उसकी खुशी भी उतनी ही बड़ी होती है। राइटिंग ऐसा काम है जो कभी खत्म नहीं होता। आप काम बंद कर देते हैं, लेकिन दिमाग कहानी में लगा रहता है। कई बार नई कहानी की तलाश आपको सोने भी नहीं देती। सवाल: अगर एक लाइन में ‘प्रीतम एंड पेड्रो’ को बताना हो तो क्या कहेंगे? जवाब: यह दो बिल्कुल अलग तरह के लोगों की कहानी है, जो एक साथ आते हैं। उनके जरिए हम साइबर क्राइम की दुनिया दिखाते हैं। यह एक हार्ट-वॉर्मिंग कहानी है, जिसमें मनोरंजन, रिश्ते और एक खूबसूरत सफर भी है।

ब्रिटिश अमेरिकन टोबैको इस साल 9,000 कर्मचारियों की छंटनी करेगी:खर्च घटाने और AI अपनाने के लिए कदम उठाया; ग्लोबल सिगरेट वॉल्यूम 2.5% घटने का अनुमान

ब्रिटिश अमेरिकन टोबैको इस साल 9,000 कर्मचारियों की छंटनी करेगी:खर्च घटाने और AI अपनाने के लिए कदम उठाया; ग्लोबल सिगरेट वॉल्यूम 2.5% घटने का अनुमान

लंदन स्थित दुनिया की सबसे बड़ी तंबाकू कंपनियों में से एक ब्रिटिश अमेरिकन टोबैको इस साल अपने कुल 47,000 कर्मचारियों में से लगभग पांचवें हिस्से यानी करीब 20% की कटौती करने जा रही है। कंपनी ने घोषणा की है कि वह लागत कम करने और टेक्नोलॉजी इनेबल्ड बनने के लिए इस साल के अंत तक 5,500 नौकरियां खत्म करेगी और 3,500 अन्य पदों को आउटसोर्स करेगी, जिससे कुल 9,000 कर्मचारी प्रभावित होंगे। FTSE 100 में शामिल यह कंपनी वर्तमान में ट्रेडिशनल सिगरेट की घटती डिमांड और निकोटीन के अन्य विकल्पों (जैसे वेप्स और पाउच) में निवेश बढ़ाने के दबाव का सामना कर रही है। सालाना 600 मिलियन पाउंड की बचत का लक्ष्य CEO बोले- हम फ्यूचर-रेडी ऑर्गेनाइजेशन बना रहे BAT के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) टेडू मार्रोको ने कहा कि हम एक फ्यूचर-रेडी ऑर्गेनाइजेशन बना रहे हैं, जो अधिक फुर्तीला, लागत के मामले में अनुशासित और टेक्नोलॉजी इनेबल्ड है। इन बदलावों से हमारे कई सहयोगी प्रभावित हो रहे हैं और हम इस बदलाव के दौरान उन्हें देखभाल और सम्मान के साथ सहयोग देने पर फोकस कर रहे हैं, क्योंकि हम बिजनेस को भविष्य के लिए तैयार कर रहे हैं। अमेरिका में कोई छंटनी नहीं, एक्सेंचर संभालेगी काम कंपनी ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका में उसके बिजनेस में कोई छंटनी नहीं होगी, जहां वह अपनी सहायक कंपनी रेनॉल्ड्स अमेरिकन के तहत काम करती है। पिछले साल BAT ने अपने कुछ कामों को आउटसोर्स करने के लिए टेक्नोलॉजी कंसल्टेंसी कंपनी एक्सेंचर के साथ साझेदारी की थी। CEO मार्रोको ने उस समय कहा था कि इस डील से कंपनी को एक्सेंचर के एडवांस AI सॉल्यूशंस (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सॉल्यूशंस) तक पहुंच मिलेगी। BAT के मुताबिक, इस डील के बाद से यूके, पोलैंड, रोमानिया, कोस्टा रिका, मैक्सिको, सिंगापुर और मलेशिया में कुछ नौकरियां एक्सेंचर द्वारा ले ली गई हैं। बिजनेस को डिजिटल और AI-फोकेस्ड बनाने की तैयारी ग्लोबल सिगरेट वॉल्यूम 2.5% घटने का अनुमान ग्रुप ने अनुमान जताया है कि इस साल ग्लोबल लेवल पर सिगरेट इंडस्ट्री के वॉल्यूम में करीब 2.5% की गिरावट आएगी। यही वजह है कि लंदन में लिस्टेड और मुख्यालय वाली यह कंपनी अब स्मोक-फ्री प्रोडक्ट्स जैसे कि व्यूज वेप्स और वेलो निकोटीन पाउच में भारी निवेश कर रही है। कंपनी ने इस महीने की शुरुआत में निवेशकों को बताया था कि बिजनेस के इस ‘न्यू कैटेगरीज’ वाले हिस्से में रेवेन्यू ग्रोथ तेज हो रही है और इस साल इसमें 15% के आसपास की ग्रोथ होने की उम्मीद है। सोमवार को BAT और कॉम्पिटिटर कंपनियों के शेयर गिरे सोमवार को शुरुआती कारोबार में BAT के शेयरों में करीब 1.4% की गिरावट दर्ज की गई, हालांकि इस साल अब तक (साल-दर-तारीख) इसके शेयर लगभग 11.8% ऊपर हैं। BAT के इस फैसले का असर बाजार की दूसरी कंपनियों पर भी दिखा और शुरुआती कारोबार में इसकी कॉम्पिटिटर कंपनी इम्पीरियल ब्रांड्स के शेयर भी 1% तक गिर गए। क्या होता है FTSE 100 और आउटसोर्सिंग? FTSE 100: इसे ‘Footsie’ भी कहा जाता है। यह लंदन स्टॉक एक्सचेंज (LSE) पर लिस्टेड मार्केट कैप के हिसाब से 100 सबसे बड़ी कंपनियों का एक शेयर इंडेक्स है, जैसे भारत में सेंसेक्स या निफ्टी होता है। आउटसोर्सिंग: जब कोई कंपनी अपने किसी आंतरिक काम या बिजनेस प्रोसेस को खुद न करके किसी बाहरी विशेषज्ञ कंपनी को सौंप देती है, तो उसे आउटसोर्सिंग कहते हैं। इससे कंपनियों को अपनी लागत घटाने और एडवांस टेक्नोलॉजी (जैसे AI) का इस्तेमाल करने में मदद मिलती है।

जयपुर पहुंची एक्ट्रेस आलिया-शरवरी, महिला बाइकर्स के साथ ली सेल्फी:एक्ट्रेस बोलीं-फिल्म सिर्फ एंटरटेनमेंट के लिए होती हैं, वुमन ऑरिएंटेड फिल्म जैसा कुछ नहीं होता

जयपुर पहुंची एक्ट्रेस आलिया-शरवरी, महिला बाइकर्स के साथ ली सेल्फी:एक्ट्रेस बोलीं-फिल्म सिर्फ एंटरटेनमेंट के लिए होती हैं, वुमन ऑरिएंटेड फिल्म जैसा कुछ नहीं होता

यशराज बैनर की बहुप्रतीक्षित स्पाई यूनिवर्स फिल्म ‘अल्फा’ के प्रमोशन के लिए बॉलीवुड अभिनेत्री आलिया भट्ट और शरवरी सोमवार को जयपुर पहुंचीं। जवाहर सर्किल से बड़ी संख्या में महिला बाइकर्स ने दोनों का स्वागत किया। बाइक राइड के साथ उनका काफिला मिराज सिनेमा तक पहुंचा। मिराज सिनेमा पहुंचने पर आलिया और शरवरी ने महिला बाइकर्स के साथ सेल्फी ली। इतनी बड़ी संख्या में महिला बाइकर्स को एक साथ देखकर आलिया काफी उत्साहित नजर आईं। कार्यक्रम के दौरान फिल्म ‘अल्फा’ का नाम बाइकर्स के साथ मिलकर बनाने की योजना थी, लेकिन दर्शकों की भीड़ के कारण सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए दोनों अभिनेत्रियों को सीधे थिएटर के अंदर आयोजित मीट एंड ग्रीट कार्यक्रम में ले जाया गया। जयपुर आकर शरवरी के गाल भी हो गए पिंक इंटरेक्शन के दौरान आलिया भट्ट ने हल्के-फुल्के अंदाज में शरवरी से कहा कि जयपुर आकर तुम्हारे गाल भी पिंक हो गए हैं। यह सुनते ही शरवरी मुस्कुरा उठीं और शर्माते हुए हामी भर दी। दोनों के बीच की यह प्यारी बातचीत दर्शकों को खूब पसंद आई और पूरा हॉल तालियों से गूंज उठा। जवाहर सर्किल पर आलिया और शरवरी को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंच गए। अचानक बढ़ी भीड़ के कारण कुछ देर के लिए सुरक्षाकर्मियों को मशक्कत करनी पड़ी। धक्का-मुक्की के दौरान एक मीडियाकर्मी का चश्मा भी टूट गया, जिससे कुछ देर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। हालांकि सुरक्षा टीम ने जल्द ही स्थिति को संभाल लिया। लगातार व्हिसल से नाराज हुईं आलिया थिएटर के भीतर फिल्म के टीजर और ट्रेलर की प्रस्तुति के दौरान दर्शक लगातार व्हिसल बजाते रहे। शोर इतना अधिक था कि डायलॉग स्पष्ट सुनाई नहीं दे रहे थे। इस पर आलिया भट्ट ने नाराजगी जताते हुए इवेंट टीम से सवाल किया कि दर्शकों को व्हिसल क्यों बांटी गई। मंच संचालक को भी बार-बार दर्शकों से व्हिसल बंद करने की अपील करनी पड़ी, जिसके बाद माहौल सामान्य हुआ। आलिया भट्ट ने कहा कि अल्फा 3 जुलाई को रिलीज हो रही है और हमने अपने प्रमोशन सिटी टूर की शुरुआत जयपुर से की है। यह हमारे लिए बेहद खास है। पिंक सिटी वास्तव में हैप्पी सिटी है। यहां की सकारात्मक ऊर्जा हमें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रही है। उन्होंने कहा कि फिल्म एक हाई-ऑक्टेन एक्शन फिल्म है और इसकी शूटिंग के दौरान कई बार चोट भी लगी, लेकिन कलाकारों का काम दर्द को भूलकर आगे बढ़ना होता है। आलिया ने कहा कि एक्शन करना बिल्कुल आसान नहीं होता। इस फिल्म के लिए हमने काफी मेहनत की है। शरवरी के साथ काम करना शानदार अनुभव रहा। फिल्म में कई ऐसे गाने हैं, जो दर्शकों को बिल्कुल नए अंदाज में देखने को मिलेंगे। खासकर कश्मीर में फिल्माया गया गीत बेहद खूबसूरत है। फिल्म सिर्फ फिल्म होती है: आलिया महिला प्रधान फिल्मों को लेकर पूछे गए सवाल पर आलिया ने कहा कि फिल्म सिर्फ फिल्म होती है। उसमें मेल या फीमेल जैसी कोई बात नहीं होती। आखिरकार हमारा उद्देश्य सिर्फ दर्शकों का मनोरंजन करना है। अच्छी कहानी सबसे बड़ी चीज होती है। उन्होंने आगे कहा कि ‘अल्फा’ का टीजर और ट्रेलर अभी सिर्फ एक झलक है। हमने अभी बहुत कुछ छिपाकर रखा है। अनिल कपूर और बॉबी देओल दोनों के किरदार बेहद अलग हैं। हम चाहते हैं कि दर्शक थिएटर आएं और पूरी फिल्म देखकर सरप्राइज महसूस करें। आलिया ने बताया कि शरवरी के साथ यह उनकी पहली फिल्म है। हर फिल्म की शूटिंग के दौरान एक नया परिवार बन जाता है। रोज साथ काम करते हैं, मस्ती भी करते हैं और सीखते भी हैं। इस फिल्म में हम सभी निर्देशक के विजन के अनुसार काम कर रहे थे। उनका मकसद था कि दर्शकों को कुछ बिल्कुल नया और बड़े पर्दे पर भरपूर मनोरंजन मिले। अनिल कपूर सर और बॉबी देओल सर जैसे कलाकारों के साथ काम करना मेरे लिए बेहद खास अनुभव रहा। कई साल की मेहनत का फल अब मिल रहा है: शरवरी शरवरी ने कहा कि यह समय उनके करियर का सबसे खास दौर है। इस दिन तक पहुंचने में कई साल लग गए। मेरी फिल्मों को दर्शकों ने हमेशा प्यार दिया है। हाल ही में रिलीज हुई ‘मैं वापस आऊंगा’ को भी लोगों का शानदार रिस्पॉन्स मिल रहा है। इसके लिए मैं दर्शकों की दिल से आभारी हूं। उन्होंने बताया कि ‘अल्फा’ में उनका किरदार दर्शकों के लिए एक बड़ा सरप्राइज होगा। मैं इतना ही कहूंगी कि थिएटर में दर्शकों को बहुत मजा आने वाला है। शरवरी ने कहा कि आलिया भट्ट, अनिल कपूर और बॉबी देओल जैसे कलाकारों के साथ काम करना उनके लिए किसी अभिनय विद्यालय से कम नहीं था। हर कलाकार से कुछ न कुछ सीखने को मिला। यही अनुभव मेरे पूरे करियर में काम आएगा। जयपुर के स्वागत से अभिभूत शरवरी ने कहा कि यहां के लोगों ने हमें जो प्यार और ऊर्जा दी है, उसी ऊर्जा के साथ अब हम फिल्म के प्रमोशन को आगे बढ़ाएंगे।

विम्बलडन की ‘घास’ पर ‘हार्ड कोर्ट’ का रोमांच:आधुनिक रैकेट्स, पावर हिटिंग और बेसलाइन टेक्निक ने बदल दिया खेल का व्याकरण

विम्बलडन की ‘घास’ पर ‘हार्ड कोर्ट’ का रोमांच:आधुनिक रैकेट्स, पावर हिटिंग और बेसलाइन टेक्निक ने बदल दिया खेल का व्याकरण

लंदन के ऑल इंग्लैंड क्लब की हरी घास पर सफेद कपड़ों में टेनिस खेलना हमेशा से परंपरा, नजाकत और एक खास शैली का प्रतीक रहा है। एक दौर था जब विम्बलडन वही खिलाड़ी जीतता था, जिसे विशुद्ध रूप से ‘ग्रास-स्पेशलिस्ट’ माना जाता था। पीट सम्प्रास, बोरिस बेकर, स्टीफन एडबर्ग, रोजर फेडरर जैसे दिग्गजों का राज उनकी घातक ‘सर्व-एंड-वॉली’ (सर्विस करके तुरंत नेट पर आना) टेक्निक पर टिका था। लेकिन नए दौर के खिलाड़ियों ने घास पर खेलने के इस पारंपरिक तरीके को इतिहास बना दिया है। अब खिलाड़ी घास की पिचों को भी ‘हार्ड-कोर्ट’ की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। खिलाड़ियों ने अपने उपकरणों, फुटवर्क और खेल शैली में ऐसा बदलाव किया है कि टेनिस का पूरा व्याकरण ही बदल गया है। सोमवार से शुरू हो रहे साल के तीसरे टेनिस ग्रैंड स्लैम विम्बलडन से पहले जानिए कैसे आधुनिक खिलाड़ियों ने खेल की दशा और दिशा बदली है… 1. नए उपकरणों से मिली पावर और स्पिन पहले खिलाड़ी भारी रैकेट और प्राकृतिक (नेचुरल गट) स्ट्रिंग्स का उपयोग करते थे। इस कारण कोर्ट के पीछे से भारी स्पिन के साथ गेंद को हिट करना बहुत मुश्किल होता था। अब खिलाड़ी हल्के कार्बन-फाइबर रैकेट और पॉलिएस्टर स्ट्रिंग्स का इस्तेमाल करते हैं। यह नया कॉम्बिनेशन आधुनिक खिलाड़ियों को हाई स्पीड और भारी ‘टॉपस्पिन’ के साथ गेंद को हिट करने की अनुमति देता है। 2. नेट गेम की जगह बेसलाइन गेम का दबदबा पहले खिलाड़ी ‘सर्व-एंड-वॉली’ रणनीति अपनाते थे। वे तेज सर्विस करते और हवा में ही गेंद को हिट करने के लिए तुरंत नेट की ओर दौड़ पड़ते थे। अब आधुनिक रैकेट्स से ताकतवर शॉट्स आसान हो गए हैं, इसलिए नेट की तरफ भागना बेहद जोखिम भरा हो गया है। खिलाड़ी अब बेसलाइन पर ही जमे रहते हैं और तब तक ताकतवर शॉट्स का आदान-प्रदान करते हैं, जब तक कोई गलती न कर दे। 3. टेनिस कोर्ट की सतहें हो गईं धीमी पहले ग्रास और पारंपरिक हार्ड कोर्ट बहुत चिकने और तेज हुआ करते थे। इन पर गेंद बहुत नीची और तेज उछलती थी। अब इन ताकतवर बेसलाइन शॉट्स से निपटने के लिए टूर्नामेंट्स ने अपनी सतहों को धीमा कर दिया है। ऑल इंग्लैंड क्लब ने कोर्ट को अधिक टिकाऊ बनाने के लिए घास के मिश्रण को बदल दिया। इससे गेंद ऊंची उछलने लगी और उसकी गति धीमी हो गई, जिससे लंबी रैलियां खेलना संभव हो सका। 4. खिला​ड़ियों के फुटवर्क में बड़ा बदलाव पहले घास के कोर्ट पर, खिलाड़ी किसी भी अप्रत्याशित बाउंस से निपटने के लिए छोटे और तेज कदम रखते थे। आधुनिक एथलीट हार्ड कोर्ट पर स्लाइड करना (फिसलना) सीखते हैं। घास की सतह पर भी जूते की विशेष ग्रिप की मदद से हार्ड कोर्ट जैसी आक्रामक स्लाइडिंग करते हैं। वे ‘ओपन स्टांस’ का उपयोग करते हैं और दमदार शॉट मारने के लिए संतुलन बनाए रखते हुए सुरक्षित रूप से रुकने के लिए पैरों को स्लाइड करते हैं।