जामुन कांजी रेसिपी: जामुन की कांजी, नोट करें रेसिपी

जामिन में मौजूद एंटी-डायबिटिक तत्व ब्लड ग्लूकोज लेवल को स्थिर किया जाता है, जबकि कांजी के फर्मेंटेशन में लाखों अच्छे प्रोबायोटिक्स स्टेरॉयड पैदा होते हैं जो सीधे पेट के स्वास्थ्य में सुधार करते हैं। छवि: मेटा एआई – ताजा जामिन, काली मिर्च पाउडर, काला नमक, भुना जीरा पाउडर, एक चुटकी हींग और आधा मोटा लाल मिर्च पाउडर छवि: मेटा एआई जैमिन को बहते पानी में अच्छी तरह धो लें। जामिन का सारा गूदा और बीज अलग रख। पलप को प्लास्टिक जार में नोबेल स्मूथ प्यूरी तैयार कर लें। छवि: मेटा एआई तैयार प्यूरी को कांच के साफ जार में डालें और ऊपर से 1 लीटर पानी डालें। इसके बाद राई का पाउडर, काला नमक, इसके अलावा जीरा और हींग प्लास्टर लकड़ी के मिश्रण से अच्छे से मिलाये जाते हैं। छवि: मेटा एआई जार के मुंह को कपड़े से बांधें। इसे 2 से 3 दिन तक धूप में रखें। रोज़ एक बार टोक्यो से हिलाएं ताकि फर्मेंटेशन बेहतर हो सके। छवि: मेटा एआई जामिन में लो-गैलेक्टेमिक स्टाक होता है, जो वैल्युएस्ट वैल्युएंस को ज़ार्ज स्पाइक्स को शामिल करता है। छवि: मेटा एआई फार्मास्युटिकल के माध्यम से बने गुड फूड से पेट फूलना, एसिडिटी, कब्ज और अपच को पूरी तरह से जड़ से खत्म किया जाता है। छवि: मेटा एआई यह एंटी-ऑक्सीडेंट ड्रिंक ब्लड को साफ करता है, जिससे चेहरे पर प्राकृतिक निखार आता है और त्वचा स्वस्थ होती है। छवि: मेटा एआई (टैग्सटूट्रांसलेट)जामुन कांजी रेसिपी सामग्री(टी)जामुन कूलर(टी)ग्रीष्मकालीन पेय(टी)जामुन शिकंजी इंस्टेंट(टी)जामुन शरबत रेसिपी(टी)जामुन कांजी रेसिपी(टी)मधुमेह रोगी के लिए जामुन कांजी रेसिपी(टी)पाचन के लिए जामुन कांजी रेसिपी
दुनियाभर के टॉप लग्जरी ब्रांड्स का ‘टॉप सीक्रेट’ मुंबई में:क्रिस्टियन डियोर, गुची, प्रादा के कपड़ों पर कढ़ाई चाणक्य इंटरनेशनल करती है

क्रिस्टियन डियोर, प्रादा, गुची जैसे दुनिया के 30 से ज्यादा टॉप लग्जरी ब्रांड्स के कपड़ों पर भारत में कढ़ाई होती है। ये नामी ब्रांड्स अपने कपड़ों की खास कढ़ाई मुंबई की ‘चाणक्य इंटरनेशनल’ से करवाते हैं। यहां के कारीगर हाथ की कढ़ाई से 5,000 साल पुरानी विरासत बचाए हुए हैं। चाणक्य इंटरनेशनल की शुरुआत गुजरात के विनोद शाह ने 1984 में की थी। इसका मकसद भारतीय कपड़ों पर सामूहिक रूप से की गई कारीगरी का पूरी दुनिया में पहचान दिलाना था। दुनिया के सबसे महंगे डिजाइनर और रेडीमेड कपड़ों में भारतीय कढ़ाई की मांग सबसे ज्यादा है। इसकी क्वालिटी का कोई मुकाबला नहीं है। पश्चिमी देशों में यह हुनर खत्म हो चुका है। भारत सदियों से दुनिया को कपड़े निर्यात कर रहा है। 16वीं और 17वीं सदी में भी भारत से फ्रांस सहित कई देशों को मलमल, सिल्क और कढ़ाई वाले कपड़े भेजे जाते थे। यही पुरानी विरासत आज भी भारतीय कला को आधुनिक बनाए हुए है। विनोद शाह की बेटी 49 वर्षीय करिश्मा स्वाली पिछले 30 साल से चाणक्य की मैनेजिंग और क्रिएटिव डायरेक्टर हैं। करिश्मा यहां 2,400 कारीगरों का नेतृत्व करती हैं। बचपन में जब वह पहली बार पिता की वर्कशॉप गईं, तो वहां सामूहिक काम देखकर उन्हें अहसास हुआ कि मिलकर जुटने से नतीजा उम्मीद से सुंदर होता है। डियोर फॉल 2023 शो के दौरान चाणक्य इंटरनेशनल को एक बड़ी टेक्सटाइल कलाकृति बनाने की जिम्मेदारी मिली थी। इसमें 1,008 मास्टर्स और महिलाओं ने मिलकर एक विशाल पारंपरिक तोरण बनाया था, जिसका इस्तेमाल घरों में स्वागत के लिए होता है। करिश्मा ने हाल ही में वेनिस बिएनाले और रोम की वेटिकन लाइब्रेरी में चाणक्य की कलाकृतियों का प्रदर्शन किया है। करिश्मा का मानना है कि इस कला की सबसे बड़ी ताकत यह है कि एआई कभी भी हाथ के इस हुनर की जगह नहीं ले सकता है। हुनर – नई पीढ़ी को सिखा रहे कढ़ाई, एआई भी नहीं ले सकती इंसानी कला की जगह करिश्मा ने नई पीढ़ी के लिए ‘चाणक्य स्कूल ऑफ क्राफ्ट’ खोला है। सबसे बड़ी चुनौती करिकुलम बनाना नहीं, बल्कि स्टूडेंट्स का न आना था। करिश्मा ने खुद गरीब बस्तियों में घर-घर जाकर महिलाओं को मुफ्त हुनर सिखाने के लिए मनाया। तब संदेह के बीच सिर्फ 22 महिलाएं अपने पतियों और सास के साथ आईं, जो बाहर बैठकर इंतजार करते थे। आज 10 साल बाद स्कूल में 1,400 महिलाएं हैं और लंबी वेटिंग लिस्ट है।
कंगना रनोट के बयान पर भड़के अशोक पंडित:बोले- वो बकवास करती है, इसलिए बैन किया था; एक्ट्रेस ने रणवीर सिंह को सपोर्ट किया था

फिल्म ‘डॉन 3’ विवाद में रणवीर सिंह के समर्थन में दिए गए कंगना रनोट के बयान पर FWICE के चीफ एडवाइजर अशोक पंडित ने रिएक्शन दिया। उन्होंने कहा कि कंगना बकवास करती हैं, इसलिए मैंने उन्हें बैन किया था। हिन्दुस्तान टाइम्स के साथ बातचीत में पंडित ने कहा, “इंडस्ट्री के बहुत से लोग हमें गालियां देने लगे हैं। कल कंगना ने भी कुछ कहा। लोग पूरे मामले को समझे बिना ही कमेंट कर रहे हैं। कंगना ने यह भी कहा कि मुझे इंडस्ट्री ने बैन कर दिया है। मैंने कहा, ‘तुम बेकार की बातें करती हो, इसलिए मैंने तुम्हें बैन किया था।” उन्होंने आगे कहा, “मुझे इसकी परवाह नहीं है। यहां पूरी फिल्म इंडस्ट्री का बड़ा मुद्दा चल रहा है। तुम्हें तो असली मामला भी नहीं पता, फिर भी बोल रही हो। हम रणवीर के खिलाफ नहीं हैं। हम सिर्फ उस घटना की बात कर रहे हैं जो हुई है।” रणवीर को लेकर कंगना ने क्या कहा था? रणवीर सिंह को मिलने नॉन-कोऑपरेशन को लेकर कंगना ने कहा था, “आप मुझसे यह सवाल पूछ रहे हैं, मुझे तो हर किसी ने बैन किया हुआ है। मैं यही कहना चाहूंगी कि जब आपकी हैसियत बढ़ती है, तो आपके दुश्मन भी बढ़ते हैं। ऐसा कभी नहीं हो सकता कि आपकी हैसियत बढ़े और दुश्मन न बढ़ें। आज रणवीर सिंह को सोचना चाहिए कि उनकी क्या हैसियत है कि उनके इतने दुश्मन बन गए हैं। यह एक तरह से अच्छा ही है।” कंगना ने अपनी जिंदगी का उदाहरण देते हुए आगे कहा था कि जब आप लाइफ में आगे बढ़ते हैं तो कई तरह की मुश्किलें आती हैं। उन्होंने कहा था, “मेरे साथ तो इतना सब कुछ हुआ है, लेकिन देखिए आज मैं अच्छा काम कर रही हूं। मेरी गाड़ी भी अच्छी चल रही है। इसलिए इन चीजों से कोई फर्क नहीं पड़ता है, समय के साथ सब कुछ ठीक हो जाएगा।” बता दें कि बुधवार को फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज (FWICE) ने रणवीर सिंह के खिलाफ जारी नॉन-कोऑपरेशन डायरेक्टिव (NCD) को तत्काल प्रभाव से वापस ले लिया। रणवीर पर नॉन-कोऑपरेशन का फैसला FWICE ने वापस लिया FWICE ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद आधिकारिक बयान में कहा कि इंडियन मोशन पिक्चर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (IMPPA) के हस्तक्षेप और अपील के बाद यह फैसला लिया गया है। अशोक पंडित बोले- बैन नहीं था अशोक पंडित ने कहा कि FWICE ने कभी भी रणवीर सिंह पर बैन नहीं लगाया था। उन्होंने मीडिया से अपील की कि इस मामले को बैन के तौर पर पेश न किया जाए, क्योंकि इससे कन्फ्यूजन पैदा होता है। पंडित ने यह भी कहा कि FWICE के पास किसी को बैन करने का अधिकार नहीं है। संगठन केवल नॉन-कोऑपरेशन यानी सहयोग न करने का फैसला ले सकता है। उनके मुताबिक, यह एक लोकतांत्रिक अधिकार है कि कोई तकनीशियन, वर्कर, निर्माता या कलाकार किसी व्यक्ति के साथ काम करना चाहता है या नहीं। पूरी खबर यहां पढ़ें…
कंगना रनोट के बयान पर भड़के अशोक पंडित:बोले- वो बकवास करती है, इसलिए बैन किया था; एक्ट्रेस ने रणवीर सिंह को सपोर्ट किया था

फिल्म ‘डॉन 3’ विवाद में रणवीर सिंह के समर्थन में दिए गए कंगना रनोट के बयान पर FWICE के चीफ एडवाइजर अशोक पंडित ने रिएक्शन दिया। उन्होंने कहा कि कंगना बकवास करती हैं, इसलिए मैंने उन्हें बैन किया था। हिन्दुस्तान टाइम्स के साथ बातचीत में पंडित ने कहा, “इंडस्ट्री के बहुत से लोग हमें गालियां देने लगे हैं। कल कंगना ने भी कुछ कहा। लोग पूरे मामले को समझे बिना ही कमेंट कर रहे हैं। कंगना ने यह भी कहा कि मुझे इंडस्ट्री ने बैन कर दिया है। मैंने कहा, ‘तुम बेकार की बातें करती हो, इसलिए मैंने तुम्हें बैन किया था।” उन्होंने आगे कहा, “मुझे इसकी परवाह नहीं है। यहां पूरी फिल्म इंडस्ट्री का बड़ा मुद्दा चल रहा है। तुम्हें तो असली मामला भी नहीं पता, फिर भी बोल रही हो। हम रणवीर के खिलाफ नहीं हैं। हम सिर्फ उस घटना की बात कर रहे हैं जो हुई है।” रणवीर को लेकर कंगना ने क्या कहा था? रणवीर सिंह को मिलने नॉन-कोऑपरेशन को लेकर कंगना ने कहा था, “आप मुझसे यह सवाल पूछ रहे हैं, मुझे तो हर किसी ने बैन किया हुआ है। मैं यही कहना चाहूंगी कि जब आपकी हैसियत बढ़ती है, तो आपके दुश्मन भी बढ़ते हैं। ऐसा कभी नहीं हो सकता कि आपकी हैसियत बढ़े और दुश्मन न बढ़ें। आज रणवीर सिंह को सोचना चाहिए कि उनकी क्या हैसियत है कि उनके इतने दुश्मन बन गए हैं। यह एक तरह से अच्छा ही है।” कंगना ने अपनी जिंदगी का उदाहरण देते हुए आगे कहा था कि जब आप लाइफ में आगे बढ़ते हैं तो कई तरह की मुश्किलें आती हैं। उन्होंने कहा था, “मेरे साथ तो इतना सब कुछ हुआ है, लेकिन देखिए आज मैं अच्छा काम कर रही हूं। मेरी गाड़ी भी अच्छी चल रही है। इसलिए इन चीजों से कोई फर्क नहीं पड़ता है, समय के साथ सब कुछ ठीक हो जाएगा।” बता दें कि बुधवार को फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज (FWICE) ने रणवीर सिंह के खिलाफ जारी नॉन-कोऑपरेशन डायरेक्टिव (NCD) को तत्काल प्रभाव से वापस ले लिया। रणवीर पर नॉन-कोऑपरेशन का फैसला FWICE ने वापस लिया FWICE ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद आधिकारिक बयान में कहा कि इंडियन मोशन पिक्चर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (IMPPA) के हस्तक्षेप और अपील के बाद यह फैसला लिया गया है। अशोक पंडित बोले- बैन नहीं था अशोक पंडित ने कहा कि FWICE ने कभी भी रणवीर सिंह पर बैन नहीं लगाया था। उन्होंने मीडिया से अपील की कि इस मामले को बैन के तौर पर पेश न किया जाए, क्योंकि इससे कन्फ्यूजन पैदा होता है। पंडित ने यह भी कहा कि FWICE के पास किसी को बैन करने का अधिकार नहीं है। संगठन केवल नॉन-कोऑपरेशन यानी सहयोग न करने का फैसला ले सकता है। उनके मुताबिक, यह एक लोकतांत्रिक अधिकार है कि कोई तकनीशियन, वर्कर, निर्माता या कलाकार किसी व्यक्ति के साथ काम करना चाहता है या नहीं। पूरी खबर यहां पढ़ें…
एलिस पेरी की युवा खिलाड़ियों को सलाह:अलग-अलग तरह के खेल खेलें, बेहतर खिलाड़ी के साथ बेहतर इंसान भी बनेंगे

जब 16 साल की एक लड़की 2007 में ऑस्ट्रेलिया की जर्सी पहनकर डार्विन के एक छोटे से मैदान पर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने उतरी थी, तब शायद किसी ने नहीं सोचा होगा कि वही खिलाड़ी एक दिन सदी की सर्वश्रेष्ठ महिला क्रिकेटर चुनी जाएगी। लगभग दो दशक बाद एलिस पेरी के नाम रिकॉर्डों का अंबार है, लेकिन उनके लिए सबसे बड़ी उपलब्धि खेल के साथ बना रहा वह रिश्ता है, जिसने उन्हें लगातार आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। 35 वर्षीय ऑलराउंडर पेरी कहती हैं कि उनके करियर का सबसे खूबसूरत पहलू यह रहा कि हर साल कुछ नया सीखने और खुद को बेहतर बनाने का मौका मिला। क्रिकेट लगातार बदलता रहा। खासकर टी20 में नए शॉट्स और नई टेक्निक सीखना उनके लिए चुनौती भी था और आनंद भी। उनके अनुसार, खेल में असली संतोष तब मिलता है, जब आप अपनी सीमाओं को पहचानकर उन्हें आगे बढ़ाने की कोशिश करते हैं। इंग्लैंड के खिलाफ एशेज टेस्ट भी पेरी की यादों का अहम हिस्सा हैं। खासकर 2017 में नॉर्थ सिडनी ओवल पर लगाया गया दोहरा शतक। वे कहती हैं कि उस पारी की सबसे बड़ी खुशी यह थी कि उनके पिता स्टैंड में बैठकर उसे देख रहे थे। क्रिकेट सिखाने से लेकर हर मैच से पहले बात करने तक, उनके पिता आज भी उनकी सबसे बड़ी ताकत हैं। पेरी अपनी सफलता का सबसे बड़ा श्रेय परिवार को देती हैं। उनके लिए मां प्रेरणा हैं, पिता मार्गदर्शक और बड़ा भाई सबसे अच्छा दोस्त। वहीं, कप्तानों की बात करें तो मेग लैनिंग की शांत नेतृत्व क्षमता और कठिन परिस्थितियों में फैसले लेने की कला ने उन्हें सबसे ज्यादा प्रभावित किया। नई पीढ़ी के खिलाड़ियों को सलाह देते हुए पेरी कहती हैं कि सिर्फ एक खेल तक सीमित न रहें। जितने ज्यादा खेल खेलेंगे और जितने ज्यादा अनुभव हासिल करेंगे, उतना बेहतर खिलाड़ी और इंसान बनेंगे। उनके मुताबिक खेल का असली मकसद आनंद है। अगर मजा खत्म हो गया, तो खेल का सबसे खूबसूरत हिस्सा भी खो जाएगा। 2020 वर्ल्ड कप उनका सबसे यादगार लम्हा महिला क्रिकेट के इतिहास की सबसे यादगार तस्वीरों में से एक 2020 टी20 वर्ल्ड कप फाइनल की है, जब मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड में 86 हजार से ज्यादा दर्शक मौजूद थे। दिलचस्प बात यह है कि उस मैच में पेरी चोट के कारण नहीं खेल सकीं, लेकिन फिर भी वह इसे अपने करियर के सबसे खास पलों में गिनती हैं। उनके मुताबिक यह सिर्फ एक मैच नहीं था, बल्कि उन सभी खिलाड़ियों और लोगों के संघर्ष का सम्मान था जिन्होंने वर्षों तक महिला क्रिकेट को आगे बढ़ाने के लिए काम किया।
‘कॉकटेल 2’ का ट्रेलर जारी; 19 जून को आएगी फिल्म:ट्रेलर में शाहिद, कृति और रश्मिका के किरदारों के बीच बनते-बिगड़ते रिश्तों को दिखाया गया है

शाहिद कपूर, कृति सेनन और रश्मिका मंदाना स्टारर फिल्म ‘कॉकटेल 2’ का ट्रेलर रिलीज हो गया है। फिल्म का निर्देशन होमी अदजानिया ने किया है, जिन्होंने 2012 में आई कॉकटेल का भी निर्देशन किया था। हालांकि यह फिल्म ‘कॉकटेल’ की सीधी कहानी को आगे नहीं बढ़ाती लेकिन इसकी थीम रिश्तों, दोस्ती और प्रेम के जटिल समीकरणों पर आधारित है। इस बार फिल्म में पूरी तरह नई स्टार कास्ट और नई कहानी देखने को मिलेगी। ट्रेलर में शाहिद, कृति और रश्मिका के किरदारों के बीच बनते-बिगड़ते रिश्तों को दिखाया गया है। कहानी एक ऐसे लव ट्रायंगल के इर्द-गिर्द घूमती है, जहां दोस्ती और प्यार की सीमाएं धुंधली होने लगती हैं। फिल्म आधुनिक रिश्तों की उलझनों और भावनात्मक संघर्षों को केंद्र में रखती है। फिल्म की कहानी तरुण जैन और लव रंजन ने लिखी है। इसका संगीत प्रीतम ने तैयार किया है, जबकि गीत अमिताभ भट्टाचार्य ने लिखे हैं। ट्रेलर में लोकप्रिय गीत ‘तुम्ही हो बंधु’ की वापसी भी देखने को मिलती है, जो सैफ अली खान स्टारर पहली फिल्म का चर्चित गाना था। फिल्म का निर्माण दिनेश विजान और लव रंजन ने किया है। शाहिद और कृति इससे पहले ‘तेरी बातों में ऐसा उलझा जिया’ में साथ नजर आ चुके हैं, जबकि रश्मिका पहली बार इस जोड़ी के साथ स्क्रीन साझा कर रही हैं। बता दें कि यह फिल्म 19 जून को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। रिपोर्ट्स के अनुसार शाहिद और रश्मिका की जोड़ी ‘कॉकटेल 2’ के बाद फिर एक रोमांटिक कॉमेडी में नजर आ सकती है। हालांकि इसकी आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है।
‘कारामेलो’ कुत्ते पर भिड़े ब्राजील-मैक्सिको:करेंसी और सांस्कृतिक प्रतीक का विवाद; ब्राजील बोला- सांबा ही है हमारी पहचान

दुनिया में देशों के बीच विवाद आमतौर पर सीमा, व्यापार या राजनीति को लेकर होते हैं, लेकिन इन दिनों ब्राजील और मैक्सिको के बीच बहस की वजह एक आवारा कुत्ता बना हुआ है। भूरे रंग के देसी कुत्ते, जो ब्राजील में करोड़ों की संख्या में पाए जाते हैं, वहां ‘कारामेलो’ कहलाते हैं। अब यही कुत्ते दोनों देशों के बीच पहचान की लड़ाई के केंद्र में आ गए हैं। विवाद तब शुरू हुआ जब अप्रैल में मैक्सिको ने ‘पेरो कारामेलो’ को अपनी स्थानीय नस्ल घोषित कर दिया और इसे सांस्कृतिक प्रतीक का दर्जा दिया। इसके बाद ब्राजील में सोशल मीडिया से लेकर अखबारों में बवाल मच गया, लोग सवाल उठाने लगे कि जिस कुत्ते को दशकों से ब्राजील की पहचान माना जाता है, उस पर मैक्सिको दावा कैसे कर सकता है। रियो डी जेनेरियो की लुसियाना कहती हैं, कारामेलो ब्राजील का चेहरा है। कोई इसे गैर-ब्राजीलियाई कैसे कह सकता है? कारामेलो सिर्फ आवारा जानवर नहीं हैं। वे जनजीवन में इस कदर रचे-बसे हैं कि मीम्स, टी-शर्ट्स, वायरल गानों, झांकियों और फिल्मों में भी जगह बना चुके हैं। पिछले साल नेटफ्लिक्स पर इनके ऊपर ‘कारामेलो’ नाम की फिल्म भी आई थी। इतना ही नहीं, हाल ही में इन्हें ब्राजील की करेंसी पर छापने का प्रस्ताव भी संसद में आया था। मैक्सिको के पशु कल्याण कार्यकर्ता कहते हैं कि वहां भी ऐसे ही कुत्ते बड़ी संख्या में मौजूद हैं। उनका मानना है कि दोनों देशों का मौसम और इतिहास काफी हद तक समान रहा है। यह केवल एक देश का नहीं, बल्कि पूरे लैटिन अमेरिका का कुत्ता है।’ दिलचस्प बात है कि बहस पहचान की है, लेकिन समस्या कहीं बड़ी है। ब्राजील में आज भी 2 करोड़ से अधिक आवारा कुत्ते हैं और उनमें 90% से ज्यादा कारामेलो हैं। लोकप्रिय होने के बावजूद गोद लेने के समय लोग अक्सर विदेशी नस्लों को प्राथमिकता देते हैं। यही वजह है कि दोनों देशों के पशु प्रेमी एक बात पर सहमत हैं-कारामेलो चाहे ब्राजील का हो, मैक्सिको का उसे सिर्फ ‘आवारा’ नहीं, बल्कि एक ऐसे साथी के रूप में देखा जाना चाहिए, जिसे घर और अपनापन दोनों मिल सके। 300 विदेशी प्रजातियों से विकसित है अनोखे नस्ल का यह डॉग वैज्ञानिक दृष्टि से कारामेलो किसी एक शुद्ध नस्ल के कुत्ते नहीं हैं। एक अध्ययन के मुताबिक इन कुत्तों में करीब 300 नस्लों का मिश्रण है। पुर्तगाली उपनिवेशकों और बाद में इटली, जर्मनी, स्पेन तथा जापान से आए प्रवासियों के साथ अलग-अलग नस्लों के कुत्ते ब्राजील पहुंचे थे। इन्हीं के मेल से यह अनोखा समूह विकसित हुआ। मिश्रित नस्ल होने के कारण इनमें आनुवंशिक बीमारियों का खतरा भी अपेक्षाकृत कम होता है।
सोना ₹545 बढ़कर ₹1.56 लाख का 10 ग्राम हुआ:चांदी आज ₹2,432 गिरकर 2.59 लाख पर आई, कैरेट के हिसाब से देखें गोल्ड की कीमत

सोने के दाम में आज यानी 4 जून को बढ़त है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का दाम आज 545 रुपए बढ़कर 1.56 लाख रुपए हो गया है। हालांकि चांदी के दाम में आज गिरावट है। 1 किलो चांदी की कीमत 2,432 रुपए कम होकर 2.59 लाख रुपए पर आ गई है। कैरेट के हिसाब से सोने की कीमत देश के बड़े शहरों में सोने की कीमत सोर्स: goodreturns 4 जून 2026 सोना इस साल 23 हजार और चांदी 29 हजार महंगी इस साल सोने-चांदी की कीमत में तेजी रही है। सोना 2026 में अब तक 23 हजार रुपए और चांदी 29 हजार रुपए महंगी हुई है। 31 दिसंबर 2025 को 10g सोना 1.33 लाख रुपए पर था, जो अब 1.56 लाख रुपए पर पहुंच गया है। वहीं, चांदी 2.30 लाख रुपए किलो थी, जो अब 2.59 लाख रुपए पर पहुंच गई है। इस दौरान 29 जनवरी को सोने ने 1.76 लाख रुपए और चांदी ने 3.86 लाख रुपए का ऑलटाइम हाई भी बनाया था। इस साल अब तक सोने-चांदी की चाल नोट:- सोने की कीमत प्रति 10 ग्राम और चांदी की कीमत किलो में | सोर्स:- IBJA ज्वेलर्स से सोना खरीदते समय इन 2 बातों का रखें ध्यान 1. सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें: हमेशा ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) का हॉलमार्क लगा हुआ सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें। ये नंबर अल्फान्यूमेरिक यानी कुछ इस तरह से हो सकता है- AZ4524। हॉलमार्किंग से पता चलता है कि सोना कितने कैरेट का है। 2. कीमत क्रॉस चेक करें: सोने का सही वजन और खरीदने के दिन उसकी कीमत कई सोर्सेज (जैसे इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट) से क्रॉस चेक करें।
पहलाज निहलानी का 76 साल की उम्र में निधन:शोला और शबनम, आंखें जैसी बेहतरीन फिल्में बनाईं, कभी खून की उल्टी होने की शिकायत थी

डायरेक्टर- प्रोड्यूसर और CBFC (सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन) के अध्यक्ष रहे पहलाज निहलानी का 76 साल की उम्र में निधन हो गया है। वह कई दिनों से बीमार थे। खबर लगातार अपडेट हो रही है पहलाज निहलानी की पॉपुलर फिल्में पहलाज निहलानी फिल्म प्रोड्यूसर हैं। उन्होंने शत्रुघ्न सिन्हा- रीना रॉय स्टारर ‘हथकड़ी’ (1982), गोविंदा- दिव्या भारती स्टारर ‘शोला और शबनम’ (1992), गोविंदा-चंकी पांडे स्टारर ‘आंखें’ (1993), अनिल कपूर- करिश्मा कपूर स्टारर ‘अंदाज’ (1994), अक्षय कुमार-करीना कपूर स्टारर ‘तलाश’ (2003), राय लक्ष्मी स्टारर ‘जूली 2’ (2017) और गोविंदा स्टारर ‘रंगीला राजा’ (2019) जैसी फिल्में बनाई हैं।
पहलाज निहलानी का 76 साल की उम्र में निधन:शोला और शबनम, आंखें जैसी बेहतरीन फिल्में बनाईं, गोविंदा को मानते थे इनसिक्योर

डायरेक्टर- प्रोड्यूसर और CBFC (सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन) के अध्यक्ष रहे पहलाज निहलानी का 76 साल की उम्र में निधन हो गया है। वह कई दिनों से बीमार थे, उन्हें किडनी से संबंधित दिक्कतें थीं। खबर लगातार अपडेट हो रही है पहलाज निहलानी की पॉपुलर फिल्में पहलाज निहलानी फिल्म प्रोड्यूसर हैं। उन्होंने शत्रुघ्न सिन्हा- रीना रॉय स्टारर ‘हथकड़ी’ (1982), गोविंदा- दिव्या भारती स्टारर ‘शोला और शबनम’ (1992), गोविंदा-चंकी पांडे स्टारर ‘आंखें’ (1993), अनिल कपूर- करिश्मा कपूर स्टारर ‘अंदाज’ (1994), अक्षय कुमार-करीना कपूर स्टारर ‘तलाश’ (2003), राय लक्ष्मी स्टारर ‘जूली 2’ (2017) और गोविंदा स्टारर ‘रंगीला राजा’ (2019) जैसी फिल्में बनाई हैं। 2015-17 तक CBFC के चीफ रहे, कई आरोप लगे पहलाज निहलानी 2015 से 2017 तक CBFC के चीफ रहे हैं। कई लोगों ने उन पर फिल्मों से हिंसक और इंटिमेट सीन बेवजह छोटे करने के आरोप लगाए थे और इसके चलते उनका कार्यकाल विवादित रहा था। जेम्स बॉन्ड सीरीज की फिल्म ‘स्पेक्टर’ से किसिंग सीन को छोटा कराने पर सोशल मीडिया पर उनकी खूब आलोचना हुई थी। निहलानी ने शाहिद कपूर स्टार ‘उड़ता पंजाब’ में कथित तौर पर 69 कट लगाने के लिए कहा था, जो काफी चर्चा में रहा था। बाद में बॉम्बे हाईकोर्ट ने CBFC के फैसले को गलत बताया और फिल्म सिर्फ एक कट के साथ रिलीज हुई थी। 2017 में सरकार ने उन्हें हटाकर गीतकार प्रसून जोशी को CBFC का नया चेयरमैन बनाया था। खून की उल्टियां होने पर, 5 साल पहले 29 दिनों तक एडमिट रहे थे पहलाज निहलानी को 5 साल पहले खून की उल्टियां हुई थीं, जिसके बाद वो 28 दिनों तक मुंबई के नानावटी अस्पातल में भर्ती रहे थे। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था, “एक रात अचानक से 3 बजे मुझे बेचैनी होने लगी और खून की उल्टियां भी हुईं। मुझे अस्पताल में भर्ती होने की सलाह दी गई। यह क्रोनिक फूड पॉइजनिंग का मामला था। लेकिन इमरजेंसी थी। शुरुआत में मुझे 5-6 दिनों तक आईसीयू में भर्ती रखा गया।” “जब मैं आईसीयू से बाहर आया तो सोचा कि 2-3 दिन में मैं घर चला जाऊंगा। लेकिन लंबे समय तक मेरा टेम्प्रेचर कम नहीं हुआ। मुझे बुखार आ रहा था और शाम के वक्त पेट में भी बहुत दर्द हो रहा था। डायग्नोसिस बढ़ता गया और यह चिंता का विषय बन गया।” गोविंदा को दिया था करियर का पहला बड़ा ब्रेक पहलाज निहलानी ने ही गोविंदा को उनके करियर का पहला बड़ा ब्रेक दिया था। कुछ समय पहले ही उन्होंने लर्न फ्रॉम द लीजेंड के पॉडकास्ट में गोविंदा पर बात करते हुए कहा था, ‘फिल्म आंधी तूफान के बाद मैं मिथुन चक्रवर्ती और शत्रुघ्न के साथ एक फिल्म बनाना चाहता था। लेकिन उस समय मिथुन और शत्रुघ्न 4-4 शिफ्ट करते थे। इस वजह से हमारी नहीं बनी। फिर रीक्कू राकेश, गोविंदा को मेरे पास लेकर आए। फोटोग्राफ भी लेकर आए, लेकिन मुझे पसंद नहीं आए। उसका लुक पसंद नहीं आया।’ ‘अगले दिन वो मेरे पास वीडियो कैसेट लेकर आया, जिसमें उसके डांस थे। उस समय ब्रेक डांस माइकल जैक्सन की वजह से पॉपुलर थे। उसने मुझे कैसेट दिखाया, तो मैंने पूछा क्या-क्या आता है। मुझे उसका चेहरा पसंद नहीं था, लेकिन उसका डांस और एक्शन पसंद आया। मेरी स्टोरी पूरी एक्शन थी, तो मैंने उससे एक दिन मांगा। मैं लंदन जा रहा था, तो मैं उससे कहकर गया कि तुम अपनी तैयारी करो।’ आगे उन्होंने कहा, ‘लंदन में छुट्टियों के समय मैंने कहानी पूरी की। फिर मैंने उसमें डांस डाला। आज की डेट में उसके जितना टैलेंटेड कोई एक्टर नहीं है। हालांकि उस समय वो एडवोकेट के रोल में, इंसपेक्टर के रोल में फिट नहीं होता था, हाइट की वजह से। लेकिन अब वो स्टार हो गया, स्टार से तो कुछ भी करवा लो।’ गोविंदा के पास काम नहीं था, तो दी गई शोला और शबनम उसी पॉडकास्ट में पहलाज निहलानी ने आगे कहा, जब गोविंदा के पास काम नहीं था, ‘जब शोला और शबनम हमने शुरू की तो उससे पहली बार कॉमेडी रोल करवाया। फिर जब काम नहीं था उसके बाद तब फिल्म आंखें करवाई। दोनों फिल्मों में एकदम अलग रोल था।’ पहलाज निहलानी ने कहा था- गोविंदा इनसिक्योर है जब पहलाज निहलानी से पूछा गया कि क्या गोविंदा के नेगेटिव एटीट्यूड की वजह से कई प्रोड्यूसर और डायरेक्टर उनके साथ काम नहीं करना चाहते थे, तो इसके जवाब में उन्होंने कहा, ‘जब सक्सेस मिलती है, तो आदमी हर दर्द सह लेता है, लेकिन जब सक्सेस की सीढ़ी से नीचे उतरते हैं तो तकलीफ होती है। गोविंदा में वो प्रॉब्लम शुरू से थी। क्योंकि वो खुद को इनसिक्योर मानता था।’ ‘उसके पिता बहुत बड़े हीरो रहे हैं महबूब खान के। बड़ी-बड़ी पिक्चरें की, अच्छे प्रोड्यूसर भी रहे, नुकसान हुआ। इसके बाद उसने इतना दर्द सहा, बहुत सारी चीजें उसके हाथ से निकल गईं, स्ट्रगल करना पड़ा। वो सारी चीजें उसके अंदर थीं। वो इनसिक्योरिटी रहती हैं। उसे था कि कहीं से पैसे आ जाएं। उसके पास भाई-बहन की जिम्मेदारियां थीं। वो पैसे में उलझा रहता था, उसे करना भी सब था।’ ‘इस वजह से उसका एटीट्यूड ऐसा हो गया था। जब काम और प्रेशर बहुत हो जाता है, तो आप छोड़ नहीं सके, तो चीजें बढ़ गईं। फिर आदत बन गई, वहमी हो गया। जब नहीं चलता आदमी तो सब उसे डैमेज करते हैं, वर्ना गोविंदा जैसा हीरो ढूंढने पर नहीं मिलेगा।’





