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फिल्म धुरंधर 3 क्या बन रही है:मूवी में जमील जमाली का रोल प्ले करने वाले राकेश बेदी बोले- मुझे कोई आइडिया नहीं

फिल्म धुरंधर 3 क्या बन रही है?:मूवी में जमील जमाली का रोल प्ले करने वाले राकेश बेदी बोले- मुझे कोई आइडिया नहीं

‘धुरंधर (2025)’ और ‘धुरंधर: द रिवेंज (2026)’ की बॉक्स ऑफिस पर ऐतिहासिक सफलता के बाद फिल्म के पार्ट 3 को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह की चर्चाएं हो रही हैं। ANI से बातचीत के दौरान राकेश बेदी से धुरंधर 3 को लेकर सवाल किया गया। इस पर उन्होंने कहा कि उन्होंने भी फिल्म को लेकर कई बातें सुनी हैं, लेकिन उनके पास ऐसी कोई खबर नहीं है। उन्होंने कहा, ‘धुरंधर 3 बन रही है या नहीं, अगर बन रही है तो मैं उसका हिस्सा हूं या नहीं, मुझे इसकी कोई जानकारी नहीं है।’ राकेश बेदी ने आगे कहा कि अगर उन्हें इस बारे में कोई जानकारी मिलेगी, तो वह इसकी घोषणा जरूर करेंगे। बता दें कि फिल्ममेकर आदित्य धर की एक्शन-थ्रिलर फ्रेंचाइजी ‘धुरंधर’ और ‘धुरंधर 2’ में राकेश बेदी ने पाकिस्तानी राजनेता जमील जमाली का किरदार निभाया था। उनका यह रोल लोगों को बहुत ज्यादा पसंद आया। भारत की दूसरी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म धुरंधर 2 ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार कमाई करते हुए भारत में दूसरी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बनने का रिकॉर्ड बनाया। सैकनिल्क के मुताबिक, फिल्म ने भारत में करीब ₹1148 करोड़ नेट कलेक्शन और दुनियाभर में लगभग ₹1812 करोड़ ग्रॉस कमाई की है। ग्रॉस कलेक्शन टिकट से कुल कमाई और नेट कलेक्शन टैक्स के बाद की कमाई होती है। फिल्म में लंबी स्टारकास्ट धुरंधर 2 में रणवीर सिंह मुख्य भूमिका में थे। इसके अलावा फिल्म में संजय दत्त, आर माधवन, अर्जुन रामपाल, सारा अर्जुन, गौरव गेरा और राकेश बेदी जैसे कलाकार भी नजर आए। जबकि पहले पार्ट में अक्षय खन्ना ने भी अहम भूमिका निभाई थी। धुरंधर (2025) और धुरंधर 2 (2026) दोनों ही फिल्मों का निर्देशन आदित्य धर ने किया। फिल्म को ज्योति देशपांडे और आदित्य धर ने मिलकर जियो स्टूडियोज और B62 स्टूडियोज के बैनर तले प्रोड्यूस किया है। ……..……..……..…….. धुरंधर से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… धुरंधर के बाद ल्यारी पर आई एक और फिल्म:पाकिस्तानी फिल्म मेरा ल्यारी के फैसलाबाद में सिर्फ 22 टिकट बिके, कई शो कैंसिल पाकिस्तानी फिल्म मेरा ल्यारी 8 मई को सिनेमाघरों में रिलीज हुई। यह फिल्म पाकिस्तान के ल्यारी इलाके पर आधारित थी। गौरतलब है कि ल्यारी का जिक्र भारतीय फिल्म धुरंधर में भी हुआ, जो सुपरहिट साबित हुई। हालांकि, मेरा ल्यारी को बॉक्स ऑफिस पर कमजोर रिस्पॉन्स मिला। पूरी खबर यहां पढ़ें…

अमेरिका में 250 डॉलर के नोट पर ट्रम्प की तस्वीर:150 साल पुराना नियम बदलने की तैयारी, संसद की मंजूरी बाकी

अमेरिका में 250 डॉलर के नोट पर ट्रम्प की तस्वीर:150 साल पुराना नियम बदलने की तैयारी, संसद की मंजूरी बाकी

अमेरिका में डोनाल्ड ट्रम्प की तस्वीर वाले 250 डॉलर के नोट को जारी करने की तैयारी शुरू हो गई है। ट्रम्प सरकार का कहना है कि अगर कांग्रेस (संसद) कानून बदल देती है, तो नया नोट छापने का रास्ता साफ हो जाएगा। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने बताया कि अभी अमेरिका में एक नियम है, जिसके तहत किसी जीवित व्यक्ति की तस्वीर नोट पर नहीं छापी जा सकती। इसी नियम में बदलाव की कोशिश चल रही है। अगर प्रस्ताव पास हो जाता है, तो ट्रम्प अमेरिकी नोट पर छपने वाले 150 साल से ज्यादा समय बाद पहले जीवित व्यक्ति होंगे। 2026 में अमेरिका की स्थापना के 250 साल पूरे रहे बेसेंट ने बताया कि 2026 में अमेरिका अपनी स्थापना के 250 साल पूरे करेगा। ऐसे मौके पर उस समय के राष्ट्रपति की तस्वीर वाला स्मारक नोट जारी करने में कुछ गलत नहीं है। हालांकि फिलहाल यह सिर्फ प्रस्ताव है और इसे लागू करने के लिए कांग्रेस की मंजूरी जरूरी होगी। वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रम्प प्रशासन ने अमेरिकी करेंसी छापने वाली एजेंसी ब्यूरो ऑफ इंग्रेविंग एंड प्रिंटिंग (BEP) को नए नोट का डिजाइन तैयार करने के निर्देश दिए हैं। प्रस्तावित डिजाइन में ट्रम्प की तस्वीर नोट के बीच में रखी गई है। रिपब्लिकन सांसद विल्सन ने पेश किया था बिल ट्रम्प की तस्वीर वाले 250 डॉलर के नोट का प्रस्ताव पिछले साल साउथ कैरोलिना के रिपब्लिकन सांसद जो विल्सन ने पेश किया था। फरवरी 2025 में इस बिल को हाउस फाइनेंशियल सर्विसेज कमेटी के पास भेजा गया था। अब इसे कानून बनने के लिए हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव और सीनेट दोनों से मंजूरी लेनी होगी। इससे पहले मार्च में अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने घोषणा की थी कि अमेरिकी नोटों पर ट्रम्प के हस्ताक्षर भी जोड़े जाएंगे। इसे अमेरिका की 250वीं वर्षगांठ समारोह से जोड़कर देखा जा रहा है। ट्रेजरी विभाग के प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिकी करेंसी छापने वाली एजेंसी ब्यूरो ऑफ इंग्रेविंग एंड प्रिंटिंग (BEP) इस प्रस्ताव को लेकर शुरुआती तैयारी और जांच कर रही है। विभाग का कहना है कि अगर कानून पास हो जाता है, तो अमेरिका की 250वीं वर्षगांठ के मौके पर ट्रम्प की उपलब्धियों को सम्मान देने के लिए यह नोट जारी किया जाएगा। दावा- ट्रम्प ने खुद दिए डिजाइन के सुझाव 250 डॉलर के नोट का शुरुआती डिजाइन बनाने वाले ब्रिटिश कलाकार इयान एलेक्जेंडर ने दावा किया है कि डोनाल्ड ट्रम्प ने खुद इस डिजाइन को देखा और उसमें कुछ बदलाव सुझाए। एलेक्जेंडर के मुताबिक, ट्रम्प चाहते थे कि नोट में अमेरिकी झंडे के रंग और अमेरिका की 250वीं वर्षगांठ का खास लोगो भी शामिल किया जाए। इस प्रस्ताव को लेकर अमेरिका में राजनीतिक और कानूनी बहस भी तेज हो सकती है। ट्रम्प समर्थक इसे अमेरिका की 250वीं वर्षगांठ से जुड़ा खास सम्मान बता रहे हैं, जबकि विरोधी इसे परंपरा तोड़ने वाला कदम मान रहे हैं। नया नोट छापने में 6-8 साल लग सकते हैं ट्रम्प की तस्वीर वाला नया नोट जारी करना आसान नहीं होगा। इसे तैयार करने और बाजार में लाने में 6 से 8 साल तक लग सकते हैं। करेंसी छापने वाली एजेंसी ब्यूरो ऑफ इंग्रेविंग एंड प्रिंटिंग (BEP) के अधिकारियों के मुताबिक, नए हाई-वैल्यू नोट को जारी करने के रास्ते में कई कानूनी और तकनीकी चुनौतियां हैं। एजेंसी की पूर्व डायरेक्टर पैटी सोलिमेन ने अधिकारियों को बताया था कि किसी नए नोट के डिजाइन, मंजूरी और प्रिंटिंग की पूरी प्रक्रिया में आमतौर पर 6 से 8 साल लगते हैं। एक कर्मचारी के मुताबिक, अधिकारियों ने साफ कहा था कि फिलहाल ऐसे नोट को जारी करने की अनुमति नहीं है। इसके अलावा इस मुद्दे पर सभी संबंधित सरकारी एजेंसियों के बीच औपचारिक बैठक भी अभी तक नहीं हुई है। रिपोर्ट में कहा गया कि सोलिमेन और उनकी टीम ने प्रशासन की एक दूसरी मांग मान ली थी, जिसके तहत ट्रम्प के हस्ताक्षर वाले 100 डॉलर नोट छापे जा रहे हैं। अगर ऐसा होता है तो अमेरिकी इतिहास में पहली बार किसी मौजूदा राष्ट्रपति के हस्ताक्षर करेंसी पर होंगे। अमेरिकी करेंसी पर जीवित व्यक्ति की तस्वीर क्यों नहीं छपती?

अमेरिका में 250 डॉलर के नोट पर ट्रम्प की तस्वीर:150 साल पुराना नियम बदलने की तैयारी, संसद की मंजूरी बाकी

अमेरिका में 250 डॉलर के नोट पर ट्रम्प की तस्वीर:150 साल पुराना नियम बदलने की तैयारी, संसद की मंजूरी बाकी

अमेरिका में डोनाल्ड ट्रम्प की तस्वीर वाले 250 डॉलर के नोट को जारी करने की तैयारी शुरू हो गई है। ट्रम्प सरकार का कहना है कि अगर कांग्रेस (संसद) कानून बदल देती है, तो नया नोट छापने का रास्ता साफ हो जाएगा। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने बताया कि अभी अमेरिका में एक नियम है, जिसके तहत किसी जीवित व्यक्ति की तस्वीर नोट पर नहीं छापी जा सकती। इसी नियम में बदलाव की कोशिश चल रही है। अगर प्रस्ताव पास हो जाता है, तो ट्रम्प अमेरिकी नोट पर छपने वाले 150 साल से ज्यादा समय बाद पहले जीवित व्यक्ति होंगे। 2026 में अमेरिका की स्थापना के 250 साल पूरे रहे बेसेंट ने बताया कि 2026 में अमेरिका अपनी स्थापना के 250 साल पूरे करेगा। ऐसे मौके पर उस समय के राष्ट्रपति की तस्वीर वाला स्मारक नोट जारी करने में कुछ गलत नहीं है। हालांकि फिलहाल यह सिर्फ प्रस्ताव है और इसे लागू करने के लिए कांग्रेस की मंजूरी जरूरी होगी। वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रम्प प्रशासन ने अमेरिकी करेंसी छापने वाली एजेंसी ब्यूरो ऑफ इंग्रेविंग एंड प्रिंटिंग (BEP) को नए नोट का डिजाइन तैयार करने के निर्देश दिए हैं। प्रस्तावित डिजाइन में ट्रम्प की तस्वीर नोट के बीच में रखी गई है। रिपब्लिकन सांसद विल्सन ने पेश किया था बिल ट्रम्प की तस्वीर वाले 250 डॉलर के नोट का प्रस्ताव पिछले साल साउथ कैरोलिना के रिपब्लिकन सांसद जो विल्सन ने पेश किया था। फरवरी 2025 में इस बिल को हाउस फाइनेंशियल सर्विसेज कमेटी के पास भेजा गया था। अब इसे कानून बनने के लिए हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव और सीनेट दोनों से मंजूरी लेनी होगी। इससे पहले मार्च में अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने घोषणा की थी कि अमेरिकी नोटों पर ट्रम्प के हस्ताक्षर भी जोड़े जाएंगे। इसे अमेरिका की 250वीं वर्षगांठ समारोह से जोड़कर देखा जा रहा है। ट्रेजरी विभाग के प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिकी करेंसी छापने वाली एजेंसी ब्यूरो ऑफ इंग्रेविंग एंड प्रिंटिंग (BEP) इस प्रस्ताव को लेकर शुरुआती तैयारी और जांच कर रही है। विभाग का कहना है कि अगर कानून पास हो जाता है, तो अमेरिका की 250वीं वर्षगांठ के मौके पर ट्रम्प की उपलब्धियों को सम्मान देने के लिए यह नोट जारी किया जाएगा। दावा- ट्रम्प ने खुद दिए डिजाइन के सुझाव 250 डॉलर के नोट का शुरुआती डिजाइन बनाने वाले ब्रिटिश कलाकार इयान एलेक्जेंडर ने दावा किया है कि डोनाल्ड ट्रम्प ने खुद इस डिजाइन को देखा और उसमें कुछ बदलाव सुझाए। एलेक्जेंडर के मुताबिक, ट्रम्प चाहते थे कि नोट में अमेरिकी झंडे के रंग और अमेरिका की 250वीं वर्षगांठ का खास लोगो भी शामिल किया जाए। इस प्रस्ताव को लेकर अमेरिका में राजनीतिक और कानूनी बहस भी तेज हो सकती है। ट्रम्प समर्थक इसे अमेरिका की 250वीं वर्षगांठ से जुड़ा खास सम्मान बता रहे हैं, जबकि विरोधी इसे परंपरा तोड़ने वाला कदम मान रहे हैं। नया नोट छापने में 6-8 साल लग सकते हैं ट्रम्प की तस्वीर वाला नया नोट जारी करना आसान नहीं होगा। इसे तैयार करने और बाजार में लाने में 6 से 8 साल तक लग सकते हैं। करेंसी छापने वाली एजेंसी ब्यूरो ऑफ इंग्रेविंग एंड प्रिंटिंग (BEP) के अधिकारियों के मुताबिक, नए हाई-वैल्यू नोट को जारी करने के रास्ते में कई कानूनी और तकनीकी चुनौतियां हैं। एजेंसी की पूर्व डायरेक्टर पैटी सोलिमेन ने अधिकारियों को बताया था कि किसी नए नोट के डिजाइन, मंजूरी और प्रिंटिंग की पूरी प्रक्रिया में आमतौर पर 6 से 8 साल लगते हैं। एक कर्मचारी के मुताबिक, अधिकारियों ने साफ कहा था कि फिलहाल ऐसे नोट को जारी करने की अनुमति नहीं है। इसके अलावा इस मुद्दे पर सभी संबंधित सरकारी एजेंसियों के बीच औपचारिक बैठक भी अभी तक नहीं हुई है। रिपोर्ट में कहा गया कि सोलिमेन और उनकी टीम ने प्रशासन की एक दूसरी मांग मान ली थी, जिसके तहत ट्रम्प के हस्ताक्षर वाले 100 डॉलर नोट छापे जा रहे हैं। अगर ऐसा होता है तो अमेरिकी इतिहास में पहली बार किसी मौजूदा राष्ट्रपति के हस्ताक्षर करेंसी पर होंगे। अमेरिकी करेंसी पर जीवित व्यक्ति की तस्वीर क्यों नहीं छपती?

रेसलर विनेश फोगाट को मिली सुप्रीम कोर्ट से राहत:एशियन गेम्स के लिए ट्रायल दे सकेंगी; WFI ने शीर्षकोर्ट में दी थी चुनौती

रेसलर विनेश फोगाट को मिली सुप्रीम कोर्ट से राहत:एशियन गेम्स के लिए ट्रायल दे सकेंगी; WFI ने शीर्षकोर्ट में दी थी चुनौती

सुप्रीम कोर्ट ने ओलिंपियन रेसलर विनेश फोगाट को एशियन गेम्स के ट्रायल की अनुमति दे दी है। कल यानी 28 मई WFI (रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया) ने ट्रायल रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अर्जी लगाई थी, जिसे जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक आराधे की बेंच ने ठुकरा दिया। ये ट्रायल 30 व 31 मई को दिल्ली में होने हैं। इन ट्रायल में प्रदर्शन के आधार पर सितंबर में जापान में होने वाले एशियन गेम्स में खिलाड़ियों का चयन होगा। दिल्ली हाईकोर्ट ने 22 मई को दिए आदेश में विनेश फोगाट को 30-31 मई को होने वाले चयन ट्रायल में भाग लेने की अनुमति दी थी। इसी फैसले को WFI ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने निर्देश दिया था- ट्रायल की पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग कराई जाए। इसे पारदर्शी बनाने के लिए भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) और भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) द्वारा नियुक्त स्वतंत्र पर्यवेक्षकों की निगरानी में कराया जाए। दिल्ली हाईकोर्ट से मिली थी विनेश फोगाट को राहत इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की डिवीजन बेंच ने विनेश के पक्ष में फैसला सुनाया था। कोर्ट विनेश फोगाट की उस अपील पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें उन्होंने सिंगल बेंच के अंतरिम आदेश को चुनौती दी थी। सिंगल जज बेंच ने उनकी याचिका पर अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया था। विनेश फोगाट ने अपनी याचिका में WFI की चयन नीति और उन्हें जारी किए गए शो-कॉज नोटिस को चुनौती दी थी। पेरिस ओलिंपिक में खेला आखिरी मुकाबला विनेश फोगाट ने 2024 में पेरिस ओलिंपिक में अपना आखिरी कुश्ती मैच खेला था। विनेश ने 50 किलोग्राम वेट कैटेगरी में 6 अगस्त 2024 को एक ही दिन में 3 मैच खेले थे। सेमीफाइनल में क्यूबा की रेसलर को पटखनी दी। फाइनल खेलने से पहले वजन की जांच की गई तो उनका वजन 100 ग्राम ज्यादा निकला। इसके बाद उन्हें अयोग्य करार दे दिया गया। विनेश फोगाट ने 8 अगस्त 2024 को कुश्ती से संन्यास लेने का ऐलान कर दिया। 12 दिसंबर 2025 को विनेश ने संन्यास वापस लेने का ऐलान करते हुए कहा था कि वह 2028 में लॉस एंजिलिस ओलिंपिक में हिस्सा लेना चाहती हैं। विनेश हरियाणा के जींद जिले की जुलाना सीट से कांग्रेस की विधायक हैं। सिलसिलेवार ढंग से जानिए पूरा विवाद क्या… डब्ल्यूएफआई ने एंटी-डोपिंग नियमों के तहत संन्यास से वापसी करने वाले एथलीटों के लिए अनिवार्य छह महीने की नोटिस अवधि का हवाला देते हुए फोगाट को 26 जून, 2026 तक घरेलू प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए अयोग्य घोषित कर दिया था। अनुशासनहीनता और एंटी-डोपिंग नियमों के उल्लंघन के आरोप में कारण बताओ नोटिस भी जारी किया था। कुश्ती महासंघ ने लिखा था- विनेश ने संन्यास से वापसी के लिए छह महीने पहले सूचना नहीं दी। इससे WFI संविधान, यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग (UWW) नियमों तथा एंटी-डोपिंग प्रावधानों का उल्लंघन हुआ। WFI ने आगे कहा- उनके व्यवहार से भारतीय कुश्ती की छवि को नुकसान पहुंचा और राष्ट्रीय स्तर पर शर्मिंदगी हुई। साथ ही विनेश से चार प्रमुख आरोपों पर जवाब मांगा था। साथ ही पूछा था कि कार्रवाई क्यों नहीं की जाए। WFI के बैन लगाने पर विनेश की वीडियो पोस्ट कर ये बातें कही थीं… पिछले डेढ़ साल से रेसलिंग मैट से दूर थी विनेश ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट करते हुए कहा- आप सब को नमस्कार। जैसा की सभी को पता है कि पिछले डेढ़ साल से मैं रेसलिंग मैट से काफी दूर थी। लेकिन अब कुछ महीनों से मैं रेसलिंग की तैयारियां कर रह रही हूं। बड़ी मेहनत और ईमानदारी से मेहनत कर रही हूं। जैसे मैंने पहले देश के लिए मेडल जीते, परमात्मा के आशीर्वाद से, आप सबके सहयोग से फिर से रेसलिंग मैट पर जाऊं और देश के लिए ढेर सारे मेडल जीतूं और देश के तिरंगे का मान बनाए रखूं। एक महीने पहले कॉम्पिटीशन अनाउंस हुआ विनेश ने आगे कहा कि मैं आप सबके साथ वीडियो के माध्यम से कुछ बातें साझा करना चाहती हूं। आज से करीब एक महीना पहले रेसलिंग फेडरेशन ने एक कॉम्पिटीशन का अनाउंसमेंट किया गया। यह टूर्नामेंट जहां पर ऑर्गनाइज करवाया जा रहा है, वो गोंडा यूपी है। जहां बृजभूषण का घर है। वहां उसका प्राइवेट कॉलेज है। वहां पर मेहनत करने वाले हर खिलाड़ी को उसका हक मिलेगा, यह बड़ा नामुमकिन और बहुत इम्पॉसिबल चीज है। सरकार ने सब बृजभूषण के सहारे छोड़ा विनेश ने कहा, कौन रेफरी, किसके मैच में जाएगा। कौन रेफरी कितने पॉइंट देगा, कौन मैच चेयरमैन कहां पर बैठेगा, किसको जितवाना है, किसको हरवाना है। ये सब बृजभूषण और उसके लोगों द्वारा कंट्रोल किया जाएगा। सरकार और हमारा खेल मंत्रालय मूक दर्शक बनकर इस चीज को देख रहा है। कोई खिलाड़ियों की मदद के लिए आगे नहीं आ रहा, मानो बृजभूषण को फ्री हैंड दिया हुआ है कि तुम जो मर्जी करो। चाहे तुम महिला पहलवानों के साथ कुछ करो या तुम कुश्ती जगत के साथ कुछ भी करो। हम तुम्हारे साथ में खड़े हैं। सभी मेहनती खिलाड़ियों का वजन सही से चेक किया जाएगा, उनकी मेहनत का असल रिजल्ट मैट पर निकलकर आएगा, ऐसा मुझे नहीं लगता। तीन साल से केस कोर्ट में पेंडिंग है विनेश ने कहा कि आज से तीन साल पहले हमने सेक्सुअल हैरेसमेंट के खिलाफ भी आवाज उठाई थी। उससे संबंधित केस कोर्ट में पेंडिंग है। 6 महिला खिलाड़ियों ने उसमें शिकायत और गवाही दी थी, उस केस में गवाहियां चल रही है। सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन है कि किसी भी पीड़ित की पहचान को सार्वजनिक न किया जाए, क्योंकि उनकी गरिमा और मान सम्मान की बात होती है। आज कुछ मजबूरियां ऐसी है कि मैं आप सभी को कुछ बताना चाहती हूं। मैं अभी नहीं बोलना चाहती थी, क्योंकि कोर्ट में केस पेडिंग है। देश के सामने सब सच्चाई सामने आ जाएगी। मैं बताना चाहती हूं कि उन 6 में से एक विक्टिम मैं खुद हूं, जिन्होंने शिकायत दी थी। अब जानिए क्या है यौन उत्पीड़न का पूरा मामला… बृजभूषण पर लगाए थे यौन उत्पीड़न के आरोप 18 जनवरी 2023 को रेसलर विनेश फोगाट, साक्षी मलिक और बजरंग पूनिया ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना देकर

‘भारी अनियमितताएं, भ्रष्टाचार’: कांग्रेस सांसद ने टीएन चुनाव टिकट वितरण को लेकर पार्टी पर लगाए बड़े आरोप | भारत समाचार

People show their identity cards as they wait in a queue at a polling station to cast their votes during the Municipal Corporation elections, in Amritsar. (Source: PTI)

आखरी अपडेट:29 मई, 2026, 13:24 IST सांसद एस जोथिमनी ने कांग्रेस तमिलनाडु टिकट आवंटन में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार का आरोप लगाया, एआईसीसी जांच की मांग की। सांसद एस जोथिमनी ने तमिलनाडु कांग्रेस में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार का आरोप लगाया। (स्रोत: एक्स/पीटीआई) कांग्रेस सांसद एस जोथिमणि ने शुक्रवार को तमिलनाडु विधानसभा चुनावों के लिए निर्वाचन क्षेत्रों के आवंटन और पार्टी उम्मीदवारों के चयन को लेकर पार्टी पर बड़े आरोप लगाए। सांसद ने दावा किया कि पार्टी के भीतर “बड़े पैमाने पर अनियमितताएं” हुईं, और निर्वाचन क्षेत्रों की पहचान की गई और उन्हें इस तरह से आवंटित किया गया कि उन उम्मीदवारों को फायदा पहुंचाया जाए जो पहले ही चुने जा चुके थे। जोथिमनी ने दावा किया, “तमिलनाडु विधान सभा चुनावों के लिए निर्वाचन क्षेत्र आवंटन और उम्मीदवार चयन प्रक्रिया में, कांग्रेस पार्टी के भीतर बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुई हैं। जो उम्मीदवार पहले ही चुने जा चुके थे, उनके लिए निर्वाचन क्षेत्र मांगे गए और आवंटित किए गए।” तमिलनाडु विधान सभा चुनावों के लिए निर्वाचन क्षेत्र आवंटन और उम्मीदवार चयन प्रक्रिया में, कांग्रेस पार्टी के भीतर बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुई हैं। पहले से ही चयनित उम्मीदवारों के लिए निर्वाचन क्षेत्रों की मांग की गई और उन्हें आवंटित किया गया। अंतर्गत… – जोथिमनी (@jothims) 29 मई, 2026 करूर के सांसद ने कहा, “‘सर्वेक्षण’ की आड़ में कथित तौर पर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ है। दशकों तक पार्टी की सेवा करने वाले वरिष्ठ पार्टी कार्यकर्ताओं और वास्तविक जीत की संभावनाओं वाले व्यक्तियों को पूरी तरह से दरकिनार कर दिया गया, जबकि कई नए लोगों और बहुत कम या कोई चुनावी संभावना वाले उम्मीदवारों को विशेष रूप से उनके लिए निर्वाचन क्षेत्रों पर बातचीत के बाद अवसर दिए गए।” यह भी पढ़ें: कांग्रेस बनाम कांग्रेस: ​​मनिकम टैगोर ने मेकेदातु जलाशय पर कर्नाटक सरकार के कदम की आलोचना की जोथिमनी ने कहा कि मजबूत संभावित उम्मीदवारों के साथ-साथ संगठन के लिए दशकों तक समर्पित रहने वाले वरिष्ठ पार्टी कार्यकर्ताओं को कथित तौर पर नजरअंदाज कर दिया गया, जबकि नए लोगों और सीमित चुनावी व्यवहार्यता वाले लोगों को कथित तौर पर उनके लिए निर्वाचन क्षेत्र तैयार करने के बाद टिकट दिए गए। उन्होंने आगे दावा किया कि जिन लोगों को मैदान में उतारा गया उनमें से कई ने या तो पार्टी छोड़ दी या चुनाव के तुरंत बाद निष्क्रिय हो गए। “जिन लोगों को चुनाव लड़ने का अवसर दिया गया उनमें से कुछ ने या तो पार्टी छोड़ दी या चुनाव के कुछ दिनों के भीतर निष्क्रिय हो गए। इन व्यक्तियों को किसने अवसर दिया? उनका चयन किस आधार पर किया गया? इन गलतियों के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है?” सांसद ने एक्स पर पूछा. उन्होंने कहा कि निर्वाचन क्षेत्र आवंटन और उम्मीदवार चयन की जांच किए बिना, चुनाव के दौरान केवल कथित पार्टी विरोधी गतिविधियों की जांच के लिए एक समिति का गठन करना, अनियमितताओं के लिए वास्तव में जिम्मेदार लोगों को बचाने का प्रयास है। जोथिमनी ने कहा, “निर्वाचन क्षेत्र आवंटन और उम्मीदवार चयन में शामिल समिति का नेतृत्व तमिलनाडु प्रभारी गिरीश चोदनकर ने किया था। कांग्रेस पार्टी के नियमों के अनुसार, उस समिति के खिलाफ आरोपों की जांच केवल अखिल भारतीय कांग्रेस समिति द्वारा की जा सकती है। तमिलनाडु कांग्रेस समिति के पदाधिकारियों के पास ऐसी जांच करने का अधिकार नहीं है।” सांसद ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की उन्होंने कहा कि अगर कांग्रेस पार्टी आंतरिक सुधार को लेकर गंभीर है, तो उसे तमिलनाडु विधानसभा चुनाव प्रक्रिया की व्यापक जांच का आदेश देना चाहिए और कथित अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए, उन्होंने कहा कि तभी पार्टी कार्यकर्ताओं का विश्वास बहाल किया जा सकता है। उन्होंने आगे कहा कि निर्वाचन क्षेत्र आवंटन और उम्मीदवार चयन के संबंध में इसी तरह की शिकायतें कई राज्यों के चुनावों में सामने आई थीं और कुछ मामलों में, इन मुद्दों ने चुनावी असफलताओं में योगदान दिया था। हालाँकि, उन्होंने आरोप लगाया कि जांच शुरू करने के बजाय, जिम्मेदार लोगों को अक्सर बचाया जाता था। यह भी पढ़ें: भारत गुट तनाव में: कांग्रेस पर सीपीआई (एम) का हमला बढ़ती ग़लतियों को उजागर करता है जोथिमनी ने कहा, “तमिलनाडु के उम्मीदवार चयन प्रक्रिया को करीब से देखना बेहद चौंकाने वाला था। इस तरह की खुली और स्पष्ट अनियमितताएं पार्टी के भविष्य के लिए एक बड़ा झटका बन जाएंगी। कांग्रेस पार्टी इस देश को भाजपा और नरेंद्र मोदी से बचाने की ऐतिहासिक जिम्मेदारी निभाती है। हमारे नेता राहुल गांधी जी इस मुद्दे के लिए बिना समझौता किए लड़ रहे हैं।” उन्होंने कहा कि इस तरह की आंतरिक अनियमितताएं धीरे-धीरे कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं के आत्मविश्वास को कमजोर कर रही हैं। सांसद ने कहा, “अगर हमें एक मजबूत विपक्षी ताकत के रूप में मजबूती से खड़ा होना है और राजनीतिक रूप से सफल होना है, तो पार्टी के भीतर जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं और जिला और ब्लॉक अध्यक्षों की आवाज का सम्मान किया जाना चाहिए। पार्टी को ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ काम करना चाहिए। कांग्रेस पार्टी को जिन चुनावी सुधारों की तत्काल जरूरत है, उन्हें तमिलनाडु से शुरू करें।” ‘तमिलनाडु में कांग्रेस बनाम कांग्रेस’: बीजेपी ने सांसद के ट्वीट पर विपक्ष पर हमला बोला जोथिमणि द्वारा तमिलनाडु कांग्रेस के भीतर अनियमितताओं को उजागर करने के तुरंत बाद, भाजपा नेता शहजाद पूनावाला ने पार्टी को भ्रष्ट और विभाजित होने के लिए नारा दिया। कर्नाटक और केरल के बाद अब तमिलनाडु में कांग्रेस बनाम कांग्रेस- कांग्रेस सांसद जोथिमणि ने किया चौतरफा हमला- पार्टी प्रणाली को भ्रष्ट और चालाकी भरा बताया कहते हैं, टिकट आवंटन, सर्वेक्षण, उम्मीदवार चयन में भारी भ्रष्टाचार टुकड़े-टुकड़े कांग्रेसhttps://t.co/8YEAi9Jrtu pic.twitter.com/mK5EILFjlO – शहजाद जय हिंद (कांग्रेस पारिस्थितिकी तंत्र के अनुसार चौकीदार) (@Shehzad_Ind) 29 मई, 2026 एक्स को लेते हुए, उन्होंने लिखा, “कर्नाटक और केरल के बाद अब। तमिलनाडु में कांग्रेस बनाम कांग्रेस – कांग्रेस सांसद जोथिमनी ने चौतरफा हमला किया – पार्टी की प्रणाली को भ्रष्ट और चालाक बताया। टिकट आवंटन, सर्वेक्षण और उम्मीदवार चयन में भारी भ्रष्टाचार कहा। टुकड़े-टुकड़े कांग्रेस।” तमिलनाडु चुनाव में कांग्रेस को महज पांच सीटों पर जीत मिली थी. हालाँकि, पार्टी DMK के साथ अपना गठबंधन तोड़कर और विजय के नेतृत्व वाली

दिल्ली में एब्सोल्यूट वोदका-शिवास रीगल की बिक्री पर रोक बरकरार:पेरनोड रिकार्ड पर ₹3,000 करोड़ का टैक्स बकाया; ED के आरोपों के बाद लाइसेंस रद्द

दिल्ली में एब्सोल्यूट वोदका-शिवास रीगल की बिक्री पर रोक बरकरार:पेरनोड रिकार्ड पर ₹3,000 करोड़ का टैक्स बकाया; ED के आरोपों के बाद लाइसेंस रद्द

दिल्ली में एब्सोल्यूट वोदका और शिवास रीगल जैसी शराब की बिक्री पर रोक बरकरार है। दिल्ली हाई कोर्ट ने फ्रांस की दिग्गज शराब कंपनी पेरनोड रिकार्ड की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें कंपनी ने दिल्ली में अपने प्रोडक्ट्स बेचने की इजाजत मांगी थी। कंपनी साल 2021 की दिल्ली लिकर पॉलिसी (शराब नीति) जांच में आरोपी होने के कारण साल 2023 से ही दिल्ली के मार्केट से बाहर है। ED के गंभीर आरोप, रिटेलर्स के साथ मिलीभगत का मामला दिल्ली के अधिकारियों ने पेरनोड रिकार्ड के लिकर लाइसेंस आवेदन को खारिज कर दिया है। इसकी वजह प्रवर्तन निदेशालय (ED) के लगाए गए वे गंभीर आरोप हैं, जिसमें कहा गया है कि कंपनी ने साल 2021 में अवैध रूप से अपना मार्केट शेयर बढ़ाने के लिए रिटेलर्स (शराब विक्रेताओं) के साथ मिलीभगत की थी। अब पूरा विवाद इस बात पर टिका है कि जांच के दायरे में आई इस कंपनी को दिल्ली में दोबारा कारोबार करने की अनुमति दी जा सकती है या नहीं। इस अदालती फैसले पर पेरनोड रिकार्ड की तरफ से फिलहाल कोई रिएक्शन सामने नहीं आया है। व्हिस्की की सही उम्र छुपाई, ₹2,996 करोड़ का टैक्स बकाया शराब नीति विवाद के अलावा पेरनोड रिकार्ड भारतीय टैक्स अधिकारियों के साथ भी बड़े कानूनी विवाद में फंसी है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय जांचकर्ताओं ने निष्कर्ष निकाला है कि कंपनी ने अपने स्कॉच व्हिस्की इम्पोर्ट (आयात) की सही उम्र और कंपोजिशन (मिश्रण की जानकारी) को जानबूझकर छुपाया। ऐसा इसलिए किया गया ताकि आयातित माल की असली कीमत को कम दिखाया जा सके और कम कस्टम ड्यूटी (टैरिफ) चुकानी पड़े। इस खुलासे के बाद फ्रांस की इस कंपनी को 314 मिलियन डॉलर यानी करीब ₹2,996 करोड़ का पिछला बकाया टैक्स चुकाने के लिए कहा गया है। कोडनेम का इस्तेमाल कर कस्टम अधिकारियों को उलझाया अदालती दस्तावेजों और जांच रिपोर्टों से सामने आया है कि पेर्नोड ने पिछले साल सितंबर में पूरी हुई जांच के दौरान जानबूझकर अपनी जानकारियों को उलझाया था। कंपनी ने इंटरनल माल्ट के लिए नए कोडनेम पेश किए, जिससे कस्टम अधिकारियों के लिए इस इम्पोर्ट की तुलना कॉम्पिटिटर्स कंपनियों के सामान से करना बेहद मुश्किल हो गया। जांचकर्ताओं की रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी ने इम्पोर्टेड माल्ट की सही डीटेल्स (सटीक कंपोजिशन और उम्र) नहीं बताई, जिसका मकसद टैक्स चोरी और असली वैल्यू को छुपाना था। हालांकि, पेरनोड इंडिया ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि उसने सभी नियमों का पालन किया है और वह कानूनी माध्यमों से इसका जवाब दे रही है। 150% टैरिफ से बचने के लिए 67.49% कम दिखाई वैल्यू पेरनोड को केस हारने पर ₹5,725 करोड़ पेनल्टी देनी होगी वॉल्यूम (बिक्री की मात्रा) के मामले में पेरनोड के लिए भारत दुनिया का सबसे बड़ा बाजार है। इस विवाद से पहले कंपनी की कुल भारतीय बिक्री का लगभग 5% हिस्सा अकेले दिल्ली से आता था। वर्तमान में अदालती रिकॉर्ड के अनुसार कंपनी पर करीब ₹3,000 करोड़ की टैक्स लायबिलिटी है। लेकिन अगर कंपनी यह कानूनी लड़ाई हार जाती है, तो नियमानुसार पेनल्टी (जुर्माने) के साथ कुल भुगतान 600 मिलियन डॉलर यानी करीब ₹5,725 करोड़ से ज्यादा हो सकता है। यह भारी-भरकम रकम कंपनी के पिछले साल के भारतीय रेवेन्यू (2.9 बिलियन डॉलर या करीब ₹27,676 करोड़) का पांचवां हिस्सा और उसके कुल मुनाफे का तीन गुना है। कैसे बनती है व्हिस्की? पेरनोड रिकार्ड जैसी कंपनियां विदेशों से ‘बल्क स्कॉच कंसंट्रेट’ भारत में इम्पोर्ट करती हैं। इसके बाद इस गाढ़े मटीरियल में तय मात्रा में पानी, न्यूट्रल स्प्रिट और कैरामेल जैसी अन्य सामग्रियां मिलाकर भारत में ‘रॉयल स्टैग’ जैसे पॉपुलर ब्रांड्स तैयार किए जाते हैं। इस कंसंट्रेट के आयात पर भारत में 150% तक का भारी कस्टम टैरिफ लागू होता है।

वासु भगनानी ने डेविड धवन पर किया केस:फिल्म ‘है जवानी तो इश्क होना है’ के चुनरी चुनरी गाने पर विवाद; रिलीज रोकने की मांग

वासु भगनानी ने डेविड धवन पर किया केस:फिल्म ‘है जवानी तो इश्क होना है’ के चुनरी चुनरी गाने पर विवाद; रिलीज रोकने की मांग

फिल्म प्रोड्यूसर वासु भगनानी की कंपनी पूजा एंटरटेनमेंट ने टिप्स इंडस्ट्रीज और फिल्म मेकर डेविड धवन के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट में 400 करोड़ रुपए का केस किया है। यह विवाद वरुण धवन की आने वाली फिल्म ‘है जवानी तो इश्क होना है’ में 1999 की हिट फिल्म ‘बीवी नंबर 1’ के दो गानों के इस्तेमाल को लेकर है। वासु भगनानी का दावा है कि टिप्स के पास इन गानों के विजुअल राइट्स नहीं हैं। उन्होंने फिल्म की रिलीज रोकने और इसका टाइटल बदलने की मांग की है। वहीं टिप्स ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया है। ‘चुनरी चुनरी’ और ‘इश्क सोना है’ गानों पर विवाद डायरेक्टर डेविड धवन की वरुण धवन, पूजा हेगड़े और मृणाल ठाकुर स्टारर यह फिल्म 5 जून 2026 को रिलीज होने वाली है। इसमें ‘बीवी नंबर 1’ के दो मशहूर गानों ‘चुनरी चुनरी’ और ‘इश्क सोना है’ को रीक्रिएट किया गया है। पूजा एंटरटेनमेंट ने वकील वीके दुबे एसोसिएट्स के जरिए कोर्ट में याचिका लगाई है। इसमें फिल्म की रिलीज, डिस्ट्रीब्यूशन और स्ट्रीमिंग पर तुरंत रोक लगाने की मांग की गई है। कंपनी का कहना है कि फिल्म का टाइटल भी गाने से लिया गया है, इसलिए इसे बदला जाए। बात न मानने पर 100 करोड़ रुपए का अतिरिक्त हर्जाना मांगा गया है। टिप्स के पास सिर्फ ऑडियो राइट्स थे वासु भगनानी के वकील ने न्यूज एजेंसी ANI को बताया कि पहले फिल्मों के राइट्स समझौतों के आधार पर तय होते थे। टिप्स के पास केवल इन गानों के ऑडियो राइट्स थे। साल 2018 में टिप्स ने ईमेल भेजकर विजुअल राइट्स मांगे थे, लेकिन दोनों पक्षों में कोई सहमति नहीं बन सकी। पूजा एंटरटेनमेंट ने अब एक नोटिस भेजकर टिप्स को दिए गए पुराने ऑडियो राइट्स भी कैंसिल कर दिए हैं। वकील ने कहा कि अगर टिप्स के पास कानूनी राइट्स हैं, तो उन्हें कोर्ट में दस्तावेज दिखाने होंगे। टिप्स कंपनी ने आरोपों को गलत बताया दूसरी तरफ टिप्स इंडस्ट्रीज के रमेश तौरानी ने इन सभी आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। टिप्स ने गुरुवार को एक आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि उनके पास इन गानों के म्यूजिक और ऑडियो राइट्स कानूनी रूप से मौजूद हैं। वासु भगनानी की ओर से लगाए गए सभी आरोप पूरी तरह गलत हैं। वे कोर्ट में अपना पक्ष मजबूती से रखेंगे। वीडियो जारी कर नाराजगी जताई थी इससे पहले मामले को लेकर वीडियो जारी कर वाशु भगनानी ने कहा था, ‘मेरी एक बहुत बड़ी फिल्म ‘बीवी नंबर 1’ थी, जिसके गाने चुराए गए थे। कल हमने इस मामले पर प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। मैंने साफ कहा था कि मैंने किसी को भी इसके विजुअल इस्तेमाल करने का अधिकार नहीं दिया है। मामला कोर्ट में है और अगर कोई इसका इस्तेमाल करता है, तो यह कोर्ट की अवमानना होगी।’ उन्होंने आगे कहा, ‘आज सुबह मैंने देखा कि इसका थिएट्रिकल ट्रेलर लॉन्च हो रहा है। वहां आम प्रेस पब्लिक बैठी है और इस बीच यह कहा जा रहा है कि हमारा मामला सुलझ गया है, हमारी बात हो गई है, लेकिन मुझसे किसने बात की? मैं मालिक हूं और किसी ने मुझे कॉल तक नहीं किया। न व्हाट्सऐप मैसेज आया, न कोई बातचीत हुई। न कानूनी तौर पर, न इमोशनली तौर पर किसी ने संपर्क नहीं किया। मुझे समझ नहीं आ रहा कि देश में क्या हो रहा है। एक मामला कोर्ट में चल रहा है और उसके बाद भी खुलेआम झूठ बोला जा रहा है और चीजें रिलीज की जा रही हैं।’

वासु भगनानी ने डेविड धवन पर किया केस:फिल्म ‘है जवानी तो इश्क होना है’ के चुनरी चुनरी गाने पर विवाद; रिलीज रोकने की मांग

वासु भगनानी ने डेविड धवन पर किया केस:फिल्म ‘है जवानी तो इश्क होना है’ के चुनरी चुनरी गाने पर विवाद; रिलीज रोकने की मांग

फिल्म प्रोड्यूसर वासु भगनानी की कंपनी पूजा एंटरटेनमेंट ने टिप्स इंडस्ट्रीज और फिल्म मेकर डेविड धवन के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट में 400 करोड़ रुपए का केस किया है। यह विवाद वरुण धवन की आने वाली फिल्म ‘है जवानी तो इश्क होना है’ में 1999 की हिट फिल्म ‘बीवी नंबर 1’ के दो गानों के इस्तेमाल को लेकर है। वासु भगनानी का दावा है कि टिप्स के पास इन गानों के विजुअल राइट्स नहीं हैं। उन्होंने फिल्म की रिलीज रोकने और इसका टाइटल बदलने की मांग की है। वहीं टिप्स ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया है। ‘चुनरी चुनरी’ और ‘इश्क सोना है’ गानों पर विवाद डायरेक्टर डेविड धवन की वरुण धवन, पूजा हेगड़े और मृणाल ठाकुर स्टारर यह फिल्म 5 जून 2026 को रिलीज होने वाली है। इसमें ‘बीवी नंबर 1’ के दो मशहूर गानों ‘चुनरी चुनरी’ और ‘इश्क सोना है’ को रीक्रिएट किया गया है। पूजा एंटरटेनमेंट ने वकील वीके दुबे एसोसिएट्स के जरिए कोर्ट में याचिका लगाई है। इसमें फिल्म की रिलीज, डिस्ट्रीब्यूशन और स्ट्रीमिंग पर तुरंत रोक लगाने की मांग की गई है। कंपनी का कहना है कि फिल्म का टाइटल भी गाने से लिया गया है, इसलिए इसे बदला जाए। बात न मानने पर 100 करोड़ रुपए का अतिरिक्त हर्जाना मांगा गया है। टिप्स के पास सिर्फ ऑडियो राइट्स थे वासु भगनानी के वकील ने न्यूज एजेंसी ANI को बताया कि पहले फिल्मों के राइट्स समझौतों के आधार पर तय होते थे। टिप्स के पास केवल इन गानों के ऑडियो राइट्स थे। साल 2018 में टिप्स ने ईमेल भेजकर विजुअल राइट्स मांगे थे, लेकिन दोनों पक्षों में कोई सहमति नहीं बन सकी। पूजा एंटरटेनमेंट ने अब एक नोटिस भेजकर टिप्स को दिए गए पुराने ऑडियो राइट्स भी कैंसिल कर दिए हैं। वकील ने कहा कि अगर टिप्स के पास कानूनी राइट्स हैं, तो उन्हें कोर्ट में दस्तावेज दिखाने होंगे। टिप्स कंपनी ने आरोपों को गलत बताया दूसरी तरफ टिप्स इंडस्ट्रीज के रमेश तौरानी ने इन सभी आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। टिप्स ने गुरुवार को एक आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि उनके पास इन गानों के म्यूजिक और ऑडियो राइट्स कानूनी रूप से मौजूद हैं। वासु भगनानी की ओर से लगाए गए सभी आरोप पूरी तरह गलत हैं। वे कोर्ट में अपना पक्ष मजबूती से रखेंगे। वीडियो जारी कर नाराजगी जताई थी इससे पहले मामले को लेकर वीडियो जारी कर वाशु भगनानी ने कहा था, ‘मेरी एक बहुत बड़ी फिल्म ‘बीवी नंबर 1’ थी, जिसके गाने चुराए गए थे। कल हमने इस मामले पर प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। मैंने साफ कहा था कि मैंने किसी को भी इसके विजुअल इस्तेमाल करने का अधिकार नहीं दिया है। मामला कोर्ट में है और अगर कोई इसका इस्तेमाल करता है, तो यह कोर्ट की अवमानना होगी।’ उन्होंने आगे कहा, ‘आज सुबह मैंने देखा कि इसका थिएट्रिकल ट्रेलर लॉन्च हो रहा है। वहां आम प्रेस पब्लिक बैठी है और इस बीच यह कहा जा रहा है कि हमारा मामला सुलझ गया है, हमारी बात हो गई है, लेकिन मुझसे किसने बात की? मैं मालिक हूं और किसी ने मुझे कॉल तक नहीं किया। न व्हाट्सऐप मैसेज आया, न कोई बातचीत हुई। न कानूनी तौर पर, न इमोशनली तौर पर किसी ने संपर्क नहीं किया। मुझे समझ नहीं आ रहा कि देश में क्या हो रहा है। एक मामला कोर्ट में चल रहा है और उसके बाद भी खुलेआम झूठ बोला जा रहा है और चीजें रिलीज की जा रही हैं।’

2029 पर नजर: कांग्रेस का कर्नाटक स्विच सिद्धारमैया के लिए दिल्ली ऑफर लेकर आया | भारत समाचार

People show their identity cards as they wait in a queue at a polling station to cast their votes during the Municipal Corporation elections, in Amritsar. (Source: PTI)

आखरी अपडेट:29 मई, 2026, 13:06 IST कांग्रेस नेताओं को पता है कि सिद्धारमैया को अचानक दरकिनार करने से ओबीसी मतदाताओं का एक वर्ग अलग-थलग पड़ सकता है और कर्नाटक में सावधानी से तैयार किया गया जातीय गठबंधन अस्थिर हो सकता है। समझा जाता है कि राहुल गांधी ने सिद्धारमैया से कहा है कि वह पिछड़े वर्ग से कांग्रेस के “सबसे बड़े नेता” बने रहेंगे और उनसे राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी की ओबीसी पहुंच को बढ़ावा देने की उम्मीद की जाएगी। (एक्स @सिद्धारमैया) भले ही कांग्रेस कर्नाटक में सावधानीपूर्वक प्रबंधित नेतृत्व परिवर्तन की तैयारी कर रही है, लेकिन पार्टी की असली चुनौती कहीं और हो सकती है – बेंगलुरु में डीके शिवकुमार के लिए जगह बनाते हुए सिद्धारमैया को राष्ट्रीय राजनीतिक संपत्ति के रूप में कैसे बनाए रखा जाए। सूत्रों ने सीएनएन-न्यूज18 को बताया कि राहुल गांधी की हाल ही में दिल्ली में सिद्धारमैया के साथ बंद कमरे में हुई बैठक के केंद्र में वह संतुलन साधने की कोशिश नजर आई, जो कर्नाटक की तत्काल सत्ता-साझाकरण व्यवस्था से कहीं आगे थी। सूत्रों ने कहा कि गांधी का संदेश स्पष्ट था: सिद्धारमैया को “कर्नाटक से परे देखना चाहिए”। सूत्रों ने संकेत दिया कि कांग्रेस नेतृत्व अनुभवी नेता को न केवल एक क्षेत्रीय क्षत्रप के रूप में देख रहा है, बल्कि 2028 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव और 2029 की लोकसभा लड़ाई से पहले पार्टी के सबसे महत्वपूर्ण ओबीसी चेहरों में से एक के रूप में देख रहा है। यह भी पढ़ें | कर्नाटक सत्ता परिवर्तन: कैसे कांग्रेस ने सिद्धारमैया को शिवकुमार के लिए रास्ता बनाने के लिए मनाया? कथित तौर पर पिच कई आश्वासनों के साथ आई थी। समझा जाता है कि गांधी ने सिद्धारमैया से कहा था कि वह पिछड़े वर्गों से कांग्रेस के “सबसे बड़े नेता” बने रहेंगे और उनसे राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी की ओबीसी पहुंच का समर्थन करने की उम्मीद की जाएगी – एक ऐसा मुद्दा जो जाति जनगणना की बहस के जोर पकड़ने के बाद कांग्रेस की राजनीतिक रणनीति का केंद्र बन गया है। कथित तौर पर बातचीत में दिल्ली में एक बड़ी भूमिका के संकेत भी शामिल थे, जिसमें भविष्य में संभावित राज्यसभा मार्ग के आसपास नए सिरे से चर्चा भी शामिल थी। इस तरह की व्यवस्था से कांग्रेस को राष्ट्रीय स्तर पर सिद्धारमैया के राजनीतिक कद को बरकरार रखते हुए कर्नाटक में पीढ़ीगत और गुटीय पुनर्गठन को एक साथ अंजाम देने की अनुमति मिल जाएगी। फिलहाल, सिद्धारमैया ने सार्वजनिक रूप से तुरंत दिल्ली जाने की अनिच्छा का संकेत दिया है, रिपोर्टों से पता चलता है कि वह विधायक बने रहना चाहते हैं और कर्नाटक की राजनीति में सक्रिय रहना चाहते हैं। बेंगलुरु से परे कांग्रेस को सिद्धारमैया की जरूरत क्यों है? राहुल गांधी के लिए, कर्नाटक परिवर्तन केवल एक मुख्यमंत्री को हटाकर दूसरे मुख्यमंत्री को लाने के बारे में नहीं है। यह कांग्रेस को उन गलतियों को दोहराने से रोकने के बारे में है जिन्होंने अतीत में क्षेत्रीय बदलावों को नुकसान पहुंचाया है। यह भी पढ़ें | सिद्धारमैया का ‘बिदाई शॉट’: क्यों जाति सर्वेक्षण डेटा कर्नाटक की राजनीति को फिर से परिभाषित कर सकता है, शिवकुमार के नेतृत्व का परीक्षण करें सिद्धारमैया स्वतंत्र पिछड़ा वर्ग जनाधार, प्रशासनिक विश्वसनीयता और अंतर-क्षेत्रीय अपील वाले कुछ कांग्रेस नेताओं में से एक हैं। उनके अहिंदा सामाजिक गठबंधन-अल्पसंख्यकों, पिछड़े वर्गों और दलितों-ने 2023 में कर्नाटक में कांग्रेस की व्यापक जीत में मदद की और राज्य से परे राजनीतिक रूप से प्रासंगिक बना हुआ है। यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि राहुल गांधी तेजी से राष्ट्रीय राजनीति को जाति प्रतिनिधित्व, सामाजिक न्याय और ओबीसी सशक्तिकरण के इर्द-गिर्द बुनते हैं। पिछले दो वर्षों में जाति जनगणना की राजनीति के लिए कांग्रेस के आक्रामक प्रयास ने राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी विमर्श को पहले ही नया आकार दे दिया है। उस ढांचे के भीतर, सिद्धारमैया कांग्रेस को कुछ ऐसा प्रदान करते हैं जिसका कई राज्यों में अभाव है: शासन की साख वाला एक सिद्ध ओबीसी नेता जो विशुद्ध रूप से वैचारिक रूप से प्रकट हुए बिना सामाजिक न्याय की राजनीति का संचार कर सकता है। सूत्रों का कहना है कि राहुल गांधी ने यह भी बताया कि सिद्धारमैया कर्नाटक की 2028 विधानसभा चुनाव रणनीति में एक प्रमुख भूमिका निभाते रहेंगे, भले ही वह राज्य प्रशासन से दूर चले जाएं। ऐसा प्रतीत होता है कि यह विचार चुनावी प्रभाव को प्रशासनिक कार्यालय से अलग करने का है; शिवकुमार को सरकार चलाने की इजाजत दी गई जबकि सिद्धारमैया पार्टी के सामाजिक गठबंधन के केंद्र में बने रहे। कांग्रेस नेताओं को पता है कि सिद्धारमैया को अचानक दरकिनार करने से ओबीसी मतदाताओं का एक वर्ग अलग-थलग पड़ सकता है और कर्नाटक में सावधानी से तैयार किया गया जातीय गठबंधन अस्थिर हो सकता है। तो, समाधान एक दोहरे ट्रैक फॉर्मूला जैसा प्रतीत होता है: कर्नाटक में शिवकुमार, बड़ी राष्ट्रीय सामाजिक न्याय परियोजना के लिए सिद्धारमैया। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया 2029 पर नजर: कांग्रेस का कर्नाटक स्विच सिद्धारमैया के लिए दिल्ली ऑफर लेकर आया है अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)सिद्धारमैया राष्ट्रीय भूमिका(टी)कांग्रेस नेतृत्व परिवर्तन(टी)कर्नाटक राजनीति(टी)राहुल गांधी रणनीति(टी)डीके शिवकुमार सत्ता साझेदारी(टी)ओबीसी राजनीतिक आउटरीच(टी)जाति जनगणना राजनीति(टी)अहिंदा गठबंधन

पलानीस्वामी के लिए बड़ा झटका, 300 से अधिक अन्नाद्रमुक सदस्य विजय-एलईडी टीवीके में शामिल हुए | भारत समाचार

People show their identity cards as they wait in a queue at a polling station to cast their votes during the Municipal Corporation elections, in Amritsar. (Source: PTI)

आखरी अपडेट:29 मई, 2026, 12:49 IST यह घटनाक्रम तमिलनाडु में जारी राजनीतिक मंथन के बीच आया है, जहां टीवीके अपने संगठनात्मक आधार का विस्तार करने और प्रतिद्वंद्वी दलों के नेताओं को आकर्षित करने का प्रयास कर रहा है। चेन्नई में 300 से अधिक अन्नाद्रमुक सदस्य टीवीके में शामिल हुए अन्नाद्रमुक दलबदल: एडप्पादी पलानीस्वामी के लिए एक बड़े झटके में, एआईएडीएमके के 300 से अधिक नेता और सदस्य गुरुवार को चेन्नई के पास पनियूर में पार्टी मुख्यालय में विजय के नेतृत्व वाली टीवीके में शामिल हो गए। विजय के नेतृत्व वाली पार्टी में शामिल होने वालों में अन्नाद्रमुक के पूर्व मंत्री वेल्लामंडी नटराजन, पूर्व विधायक साधन प्रभाकर, मायलापुर के पूर्व विधायक नटराज, अन्ना ट्रेड यूनियन फेडरेशन के राज्य सचिव कमलाक्कन्नन, तिरुपथुर शहर के सचिव डीटी कुमार और कई अन्य पार्टी पदाधिकारी शामिल थे। प्रेरण कार्यक्रम में टीवीके महासचिव एन आनंद, राजस्व और आपदा प्रबंधन मंत्री सेनगोट्टैयन और लोक निर्माण मंत्री आधव अर्जुन ने भाग लिया। यह घटनाक्रम तमिलनाडु में जारी राजनीतिक मंथन के बीच आया है, जहां टीवीके अपने संगठनात्मक आधार का विस्तार करने और प्रतिद्वंद्वी दलों के नेताओं को आकर्षित करने का प्रयास कर रहा है। टीवीके के वरिष्ठ नेताओं ने दावा किया कि नवीनतम प्रेरण उनके पूर्व संगठन की दिशा से असंतुष्ट अन्नाद्रमुक कार्यकर्ताओं के एक वर्ग के बीच पार्टी के लिए बढ़ते समर्थन को दर्शाता है। पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए सेनगोट्टैयन ने टीवीके के उत्थान की सराहना की और इसे एक ऐसा आंदोलन बताया जिसने कम समय में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु के लोगों ने स्वच्छ शासन प्रदान करने में सक्षम नेतृत्व को स्वीकार कर लिया है और कहा कि पार्टी संस्थापक विजय आने वाले वर्षों में भी राज्य के नेता बने रहेंगे। अपने राजनीतिक अनुभव का लाभ उठाते हुए, सेनगोट्टैयन ने कहा कि उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्रियों एमजी रामचंद्रन और जे जयललिता के साथ काम किया है और टीवीके के भविष्य में विश्वास व्यक्त किया है। आधव अर्जुन ने तमिलनाडु की राजनीति में टीवीके के उदय का बचाव किया और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम और अन्नाद्रमुक दोनों की आलोचना की। उन्होंने दावा किया कि चुनावी हार के बाद पार्टी नेतृत्व द्वारा लिए गए फैसलों के बाद अन्नाद्रमुक के भीतर बढ़ते असंतोष ने कई कार्यकर्ताओं को टीवीके की ओर धकेल दिया है। अर्जुन ने यह भी आरोप लगाया कि कई अन्नाद्रमुक कैडर अभी भी पूर्व मुख्यमंत्री जे जयललिता से भावनात्मक रूप से जुड़े हुए हैं और अब टीवीके की ओर बढ़ रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि आने वाले हफ्तों में अन्नाद्रमुक के और पदाधिकारियों के पार्टी में शामिल होने की संभावना है। टीवीके नेताओं ने इन आरोपों से इनकार किया कि पार्टी ने प्रतिद्वंद्वी संगठनों के नेताओं को लालच दिया था और कहा कि सभी नए प्रवेशकों का एक परिवार के सदस्यों के रूप में स्वागत किया जा रहा है। सभा को संबोधित करते हुए एन आनंद ने नए सदस्यों को आश्वासन दिया कि उन्हें पार्टी के भीतर सम्मान और अवसर मिलेंगे। उन्होंने आगामी स्थानीय निकाय चुनावों में टीवीके के प्रदर्शन के बारे में भी विश्वास व्यक्त किया और कहा कि पार्टी भ्रष्टाचार के बिना काम करना जारी रखेगी। यह आयोजन टीवीके में अन्नाद्रमुक नेताओं और कैडरों के हालिया सबसे बड़े शामिल होने में से एक है, पार्टी नेताओं ने इसे तमिलनाडु की राजनीति में संगठन के बढ़ते प्रभाव के संकेत के रूप में पेश किया। (एजेंसियों से इनपुट के साथ) चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया पलानीस्वामी के लिए बड़ा झटका, 300 से अधिक एआईएडीएमके सदस्य विजय के नेतृत्व वाले टीवीके में शामिल हुए अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें