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इंडिगो को चौथी तिमाही में ₹2,536 करोड़ का घाटा हुआ:पिछले साल ₹3,068 करोड़ का मुनाफा हुआ था; महंगे फ्यूल का बोझ यात्रियों पर डालेगी एयरलाइन

इंडिगो को चौथी तिमाही में ₹2,536 करोड़ का घाटा हुआ:पिछले साल ₹3,068 करोड़ का मुनाफा हुआ था; महंगे फ्यूल से कंपनी का नुकसान बढ़ा

इंडिगो एयरलाइन की पैरेंट कंपनी इंटरग्लोब एविएशन ने 29 मई 2026 को समाप्त हुई चौथी तिमाही (Q4FY26) के नतीजे घोषित कर दिए हैं। इस तिमाही में कंपनी को ₹2,536 करोड़ का कॉन्सोलिडेटेड नेट लॉस (शुद्ध घाटा) हुआ है। पिछले साल की इसी तिमाही में कंपनी को ₹3,068 करोड़ का कॉन्सोलिडेटेड नेट प्रॉफिट (शुद्ध मुनाफा) हुआ था। देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इस समय कई तरह की चुनौतियों से जूझ रही है। कंपनी को यह घाटा मुख्य रूप से डोमेस्टिक कैपसिटी पर लगी पाबंदियों, भारतीय रुपए में आई गिरावट और हवाई ईंधन यानी फ्यूल की बढ़ती कीमतों के कारण हुआ है। इसके अलावा इस तिमाही में कंपनी पर ₹250 करोड़ का वन-टाइम चार्ज यानी एकमुश्त शुल्क भी लगा है। सालाना आधार पर घाटे के बावजूद कंपनी के ऑपरेशनल रेवेन्यू में थोड़ी बढ़ोतरी देखी गई है। वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में इंडिगो का रेवेन्यू मामूली रूप से बढ़कर ₹22,438 करोड़ पर पहुंच गया। पिछले वित्त वर्ष (Q4FY25) की समान तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू ₹22,152 करोड़ था। फ्यूल के बढ़े हुए खर्च का बोझ यात्रियों पर डालेंगे: इंडिगो नतीजों के साथ ही इंडिगो ने घोषणा की है कि वह घरेलू और इंटरनेशनल दोनों रूटों पर फ्यूल के बढ़े हुए खर्च का बोझ यात्रियों पर डालेगी। मिडिल ईस्ट संकट की वजह से ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव आ रहा है। इसके कारण एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) यानी जेट फ्यूल की लागत बढ़ गई है, जिससे निपटने के लिए कंपनी अब किरायों में बढ़ोतरी करने जा रही है। फ्यूल हेजिंग के विकल्प पर विचार कर रही कंपनी कीमतों में लगातार हो रहे उतार-चढ़ाव को देखते हुए इंडिगो अब ‘फ्यूल हेजिंग’ की रणनीति अपनाने पर विचार कर रही है। कंपनी के एक टॉप एग्जीक्यूटिव के मुताबिक, जोखिम कम करने के उपाय पर काम किया जा रहा है। दुनिया की कई ग्लोबल एयरलाइंस तेल की कीमतों में आने वाले तेज उछाल से अपने मार्जिन को सुरक्षित रखने के लिए इस रणनीति का इस्तेमाल करती हैं। एयरलाइन मैनेजमेंट का कहना है कि एविएशन सेक्टर के लिए फ्यूल प्राइस सबसे बड़ा वेरिएबल बना हुआ है, इसलिए बाजार के हालातों को देखते हुए किरायों को एडजस्ट किया जाता रहेगा। 450 मिलियन डॉलर की प्रीपेमेंट को मंजूरी मिली इंडिगो के बोर्ड ने कंपनी के फाइनेंस लीज ऑब्लिगेशंस (लीज देनदारियों) के आंशिक प्रीपेमेंट को मंजूरी दे दी है। यह भुगतान एक या अधिक किश्तों में कंपनी की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी ‘इंटरग्लोब एविएशन फाइनेंशियल सर्विसेज IFSC प्राइवेट लिमिटेड’ को किया जाएगा। इसकी कुल रकम लगभग 450 मिलियन डॉलर तक होगी। इस फंड का इस्तेमाल सहायक कंपनी विमान, विमान के इंजन और पार्ट्स खरीदने के लिए करेगी, जिससे एयरलाइन को खुद के एविएशन एसेट्स के मालिकाना हक मिलेंगे। कुल इनकम 6% से ज्यादा बढ़ी है: कंपनी के MD कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) राहुल भाटिया ने कहा कि वित्त वर्ष 2026 बिजनेस के लिहाज से बेहद चुनौतीपूर्ण माहौल वाला रहा, जिसने हमारे मुनाफे को काफी प्रभावित किया है। इन विपरीत परिस्थितियों के बावजूद बिजनेस का बुनियादी प्रदर्शन मजबूत बना रहा। इस साल हमारी क्षमता (कैपसिटी) में 9.5% की बढ़ोतरी हुई और कुल इनकम 6% से ज्यादा बढ़ी है। अगर हम विदेशी मुद्रा (फॉरेन एक्सचेंज) के उतार-चढ़ाव और एकमुश्त मदों के प्रभाव को हटा दें, तो इंडिगो ने ₹7,500 करोड़ का मुनाफा कमाया है। हम लगातार उतार-चढ़ाव के बीच एक मजबूत बैलेंस शीट और पर्याप्त नकदी (लिक्विडिटी) बनाए रखने में सफल रहे हैं। मिडिल ईस्ट संकट और लेबर लॉ का असर पैसेंजर्स और लोड फैक्टर में गिरावट कंपनी की स्टॉक एक्सचेंज को दी गई जानकारी के अनुसार, इस तिमाही में इंडिगो के यात्रियों की संख्या में 1.1% की मामूली गिरावट आई है, जो घटकर 31.6 मिलियन रह गई। प्रति किलोमीटर कमाई (यील्ड) भी 2.2% घटकर ₹5.20 हो गई। इसके साथ ही पैसेंजर लोड फैक्टर में 1.7% की कमी आई है और यह घटकर 85.8% पर आ गया है। 6 महीने में 17.13% गिरा इंडिगो का शेयर तिमाही के नतीजों के पहले इंटरग्लोब एविएशन का शेयर आज 3.28% गिरकर 4,420 रुपए के स्तर पर बंद हुआ। कंपनी का शेयर 5 दिन में 2.3% गिरा और एक महीने में 1.72% चढ़ा है। वहीं शेयर बीते 6 महीने में 24% और एक साल में 17% गिरा है। कंपनी का मार्केट कैप 1.71 लाख करोड़ रुपए है। भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन है इंडिगो मार्केट शेयर के लिहाज से इंडिगो देश की सबसे बड़ी एयरलाइन है। भारतीय एयरलाइन मार्केट में कंपनी का मार्केट शेयर करीब 60% है। इसकी स्थापना 2006 में राहुल भाटिया और राकेश गंगवाल ने की थी। एयरलाइन की 400 से ज्यादा एयरक्राफ्ट की फ्लीट है। इसके 50 करोड़ से ज्यादा कस्टमर हैं। क्या होता है ASKs और लोड फैक्टर? अवेलेबल सीट किलोमीटर (ASKs): इसका मतलब होता है कि एयरलाइन के पास कुल कितनी सीटें उपलब्ध थीं और उन्होंने कितने किलोमीटर की दूरी तय की। यह एयरलाइन की कुल पैसेंजर क्षमता को मापने का पैमाना है। लोड फैक्टर: इससे पता चलता है कि उड़ान के दौरान एयरलाइन की कितनी प्रतिशत सीटें भरी हुई थीं। जितना ज्यादा लोड फैक्टर होगा, एयरलाइन की क्षमता का उतना ही बेहतर इस्तेमाल माना जाता है।

देश की इकोनॉमी 2026-27 में 6.9% की दर से बढ़ेगी:RBI की सालाना रिपोर्ट में दावा, वैश्विक संकट के बावजूद भारत की रफ्तार मजबूत रहेगी

देश की इकोनॉमी 2026-27 में 6.9% की दर से बढ़ेगी:RBI की सालाना रिपोर्ट में दावा, वैश्विक संकट के बावजूद भारत की रफ्तार मजबूत रहेगी

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने शुक्रवार को अपनी साल 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर में जारी तनाव और आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद साल 2026-27 में भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार मजबूत बनी रहेगी। इस दौरान देश की रियल जीडीपी ग्रोथ रेट 6.9% रहने का अनुमान लगाया गया है। केंद्रीय बैंक ने कहा कि भारत के मजबूत फंडामेंटल्स, लगातार बनी हुई घरेलू मांग, निर्यात पर कम निर्भरता और स्थिर पॉलिसी माहौल की वजह से भारतीय इकोनॉमी विपरीत वैश्विक परिस्थितियों का डटकर सामना करने में सक्षम है। दुनिया के लिए सबसे बड़ा खतरा भू-राजनीतिक तनाव आरबीआई ने वैश्विक हालातों पर चिंता जताते हुए कहा कि साल 2026 में भू-राजनीतिक (जियोपॉलिटिकल) जोखिम दुनिया की आर्थिक ग्रोथ के लिए सबसे बड़ा रोड़ा बन गए हैं। विशेष रूप से फरवरी 2026 में शुरू हुए पश्चिम एशिया संकट ने दुनिया की विकास दर और महंगाई के अनुमानों को काफी प्रभावित किया है। रिपोर्ट में इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (आईएमएफ) के बेसलाइन परिदृश्य का हवाला दिया गया है। इसके अनुसार, वैश्विक अर्थव्यवस्था की ग्रोथ रेट साल 2026 में घटकर 3.1% रहने का अनुमान है, जो पहले 3.3% आंकी गई थी। इसी तरह वैश्विक व्यापार (ग्लोबल ट्रेड) की ग्रोथ भी धीमी होकर 2.8% पर आने की आशंका है। आरबीआई ने आगाह किया है कि यदि यह तनाव आगे और बढ़ता है, तो वैश्विक आर्थिक आउटलुक और ज्यादा कमजोर हो सकता है। 2026 में महंगाई दर 4.4% होने का अनुमान केंद्रीय बैंक ने दुनिया भर में बढ़ती महंगाई के खतरों की ओर भी इशारा किया है। एनर्जी की बढ़ती कीमतों और सप्लाई चेन में आ रही रुकावटों की वजह से वैश्विक स्तर पर कीमतों का दबाव काफी अधिक है। साल 2026 में वैश्विक महंगाई दर 4.4% रहने का अनुमान लगाया गया है, जो पहले के 3.8% के अनुमान से ज्यादा है। आरबीआई का मानना है कि यदि वैश्विक परिस्थितियां और बिगड़ती हैं, तो शेयर बाजारों (इक्विटी मार्केट्स) में बड़ी गिरावट और भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। 4 वजहों से बरकरार रहेगी भारत की मजबूत ग्रोथ तमाम वैश्विक अनिश्चितताओं के बाद भी केंद्रीय बैंक ने भारत के आर्थिक भविष्य को लेकर सकारात्मक नजरिया रखा है। इसके लिए मुख्य रूप से 4 वजह को जिम्मेदार माना गया है… आरबीआई ने उम्मीद जताई है कि यदि पश्चिम एशिया संकट का असर सीमित रहता है, तो भारत की 6.9% की ग्रोथ हासिल करने में कोई बड़ी रुकावट नहीं आएगी। हालांकि वैश्विक उठापटक के चलते नीचे की तरफ जोखिम अभी भी बने हुए हैं। वित्त वर्ष-27 में महंगाई दर 4.6% रहने की उम्मीद मॉनसून पर अल नीनो का साया, नए लेबर कोड से बढ़ेगी प्रोडक्टिविटी कृषि क्षेत्र को लेकर रिपोर्ट में कहा गया है कि देश का फार्म आउटपुट काफी हद तक मॉनसून पर निर्भर करेगा। इस साल अल नीनो के कारण मॉनसून को लेकर कुछ जोखिम पैदा हो सकता है, लेकिन साल के आखिरी में इंडियन ओशन डिपोल से कृषि क्षेत्र को सहारा मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही देश के लेबर मार्केट में भी बड़े सुधार की उम्मीद जताई गई है। नए लेबर कोड लागू होने से रोजगार के हालातों में सुधार होगा, जिससे न केवल लोगों की खर्च करने की क्षमता बढ़ेगी बल्कि देश की ओवरऑल प्रोडक्टिविटी में भी इजाफा होगा। विदेशी व्यापार और बैंकिंग सिस्टम की स्थिति स्थिर बाहरी सेक्टर्स के प्रदर्शन पर आरबीआई ने कहा है कि भारत के सर्विसेज एक्सपोर्ट, विदेशों से आने वाले पैसे (रेमिटेंस) और विभिन्न देशों के साथ हुए नए ट्रेड एग्रीमेंट्स के दम पर देश का करंट अकाउंट बैलेंस काफी मजबूत स्थिति में रहेगा। हालांकि, भारतीय बाजारों में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) का निवेश इस बात पर निर्भर करेगा कि वैश्विक स्तर पर निवेशकों का रुख कैसा रहता है। केंद्रीय बैंक ने देश के बैंकिंग सेक्टर को लेकर भी आश्वस्त किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय बैंकिंग प्रणाली पूरी तरह स्थिर है और बैंकों के पास पर्याप्त कैपिटल बफर मौजूद है, जिससे वे किसी भी वित्तीय संकट का सामना कर सकते हैं। हालांकि वैश्विक तनाव और मार्केट वोलेटिलिटी के कारण शॉर्ट-टर्म जोखिम लगातार बने रहेंगे। क्या होती है ‘रियल जीडीपी ग्रोथ’? देश की सीमाओं के भीतर उत्पादित कुल वस्तुओं और सेवाओं के मूल्य में महंगाई के असर को हटाकर (आधार वर्ष की कीमतों पर) जो वास्तविक बढ़त दर्ज की जाती है, उसे रियल जीडीपी ग्रोथ कहते हैं। क्या है ‘अल नीनो’ और ‘इंडियन ओशन डिपोल’?

धनिया पराठा रेसिपी: आलू-पनीर नहीं, स्वादिष्ट हरा धनिया का पराठा, दही या मक्खन के साथ वैकल्पिक टेस्टी; विधि नोट करें

तस्वीर का विवरण

सामग्री: 2 कप आटे का आटा, हरा धनियां, 2 हरी मिर्च, 1 छोटा चम्मच, आधा छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर, आधा छोटा चम्मच गरम मसाला, नमक का स्वाद, 1 बड़ा मसाला तेल, पानी आवश्यक, घी या तेल छवि: फ्रीपिक हरा धनिया पराठा बनाने की विधि: सबसे पहले एक बड़ा बर्तन में बर्तन का आटा लें। अब इसमें हरा धनिया, प्याज, हरी मिर्च, जीरा, लाल मिर्च पाउडर और नमक दाल शामिल हैं। छवि: फ्रीपिक इसके बाद थोड़ा-थोड़ा पानी डाले गए नर आटा गूंध लें। आटे में थोड़ा सा तेल मिलाकर अच्छी तरह से मसल लें और 10 मिनट के लिए बढ़ाकर रख दें। छवि: फ्रीपिक अब असिस्टेंट की छोटी-छोटी लो डेट और बेलन की मदद से पराठा बेल लें। गैस पर तवा गरम करें और परांठे को दोनों तरफ से प्रभाव सेंक लें। फिर होने लगे घी या तेल की परत गोल्डन ब्राउन तक अच्छे से सेकें। छवि: एआई गर्मागर्म धनिया पराठा तैयार है। यह दही, मक्खन या मक्खन के साथ सर्व करें। छवि: एआई गरमागरम हरा धनिया पराठा दही, हरी चटनी, अचार या चाय के साथ सर्व करें। सुबह के समय इसे टिफिन में भी रखा जा सकता है। छवि: एआई हरा धनिया स्वाद बढ़ाने के साथ-साथ शरीर के लिए भी स्वादिष्ट माना जाता है। इसमें विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं। छवि: फ्रीपिक यही कारण है कि यह पराठा स्वाद और स्वास्थ्य दोनों का अच्छा संयोजन बनता है। छवि: एआई

‘मैं कैसे कह सकता हूं कि शपथ कब है?’: शिवकुमार ने महत्वपूर्ण सीएलपी वोट से पहले अटकलों को खारिज कर दिया | भारत समाचार

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आखरी अपडेट:29 मई, 2026, 16:39 IST आगामी राज्यसभा चुनावों के लिए लंबित नामांकन पर, मनोनीत सीएम ने संकेत दिया कि कर्नाटक के लिए कांग्रेस उम्मीदवारों की सूची अलग से घोषित नहीं की जाएगी। शिवकुमार के अनुसार, पार्टी आलाकमान ने अन्य राज्यों के लिए उम्मीदवारों की सूची के साथ-साथ राज्यसभा उम्मीदवारों के नाम भी जारी करने का फैसला किया है, जिससे एक समकालिक राष्ट्रीय रोलआउट सुनिश्चित हो सके। फ़ाइल चित्र कर्नाटक कांग्रेस प्रमुख और मनोनीत सीएम डीके शिवकुमार ने आगामी सरकार गठन पर सख्ती से मापा रुख बनाए रखते हुए धैर्य रखने का आह्वान किया है। शुक्रवार को पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने मंत्री पद के शपथ ग्रहण समारोह की आधिकारिक समयसीमा के बारे में चल रही अटकलों को खारिज कर दिया। शिवकुमार ने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी निश्चित घोषणा से पहले महत्वपूर्ण विधायी प्रोटोकॉल पूरे किए जाने चाहिए, इस बात पर जोर देते हुए कि नेतृत्व का औपचारिक चयन तत्काल प्राथमिकता बनी हुई है। शिवकुमार ने परिवर्तन समयरेखा के बारे में प्रश्नों को संबोधित करते हुए कहा, “मुझे अभी तक नहीं पता कि कांग्रेस विधायक दल (सीएलपी) के नेता के रूप में किसे चुना जाएगा।” “जब तक उस निर्णय को विधायकों द्वारा आधिकारिक तौर पर औपचारिक रूप नहीं दिया जाता, मैं कैसे कह सकता हूं कि शपथ ग्रहण समारोह कब होगा?” उनकी टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब राज्य निवर्तमान मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के पद छोड़ने के फैसले के बाद राजनीतिक उथल-पुथल पर करीब से नजर रख रहा है, एक ऐसा कदम जिसने सत्तारूढ़ पार्टी के आंतरिक गठबंधन को प्रभावी ढंग से पुनर्गठित किया है। राज्य की राजधानी में तत्काल नेतृत्व परिवर्तन के अलावा, शिवकुमार ने नई दिल्ली में पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के समन्वय में वर्तमान में अंतिम रूप दिए जा रहे महत्वपूर्ण संगठनात्मक निर्णयों पर भी प्रकाश डाला। आगामी राज्यसभा चुनावों के लिए लंबित नामांकन को संबोधित करते हुए, उन्होंने संकेत दिया कि कर्नाटक के लिए उम्मीदवारों की सूची अलग से घोषित नहीं की जाएगी। शिवकुमार के अनुसार, पार्टी आलाकमान ने अन्य राज्यों के लिए उम्मीदवारों की सूची के साथ-साथ राज्यसभा उम्मीदवारों के नाम भी जारी करने का फैसला किया है, जिससे एक समकालिक राष्ट्रीय रोलआउट सुनिश्चित हो सके। भारत के चुनाव आयोग ने कर्नाटक की चार राज्यसभा सीटों के लिए आगामी द्विवार्षिक चुनाव 18 जून को निर्धारित किया है। राज्य से सेवानिवृत्त होने वाले चार सदस्य मल्लिकार्जुन खड़गे (कांग्रेस), एचडी देवेगौड़ा (जनता दल – सेक्युलर), इरन्ना कडाडी (भारतीय जनता पार्टी) और के नारायण (भारतीय जनता पार्टी) हैं, जिनका छह साल का कार्यकाल 25 जून को समाप्त हो रहा है। साथ ही, कर्नाटक विधान परिषद में नियुक्तियों को लेकर भी विचार-विमर्श तेजी से आगे बढ़ रहा है। राज्य इकाई के अध्यक्ष के रूप में, शिवकुमार ने पुष्टि की कि उन्होंने आलाकमान को व्यापक सिफारिशें सौंपकर अपनी संस्थागत जिम्मेदारियों को पहले ही निभा लिया है। उन्होंने कहा, ”मैंने एमएलसी नामों पर अपने सुझाव दे दिए हैं,” उन्होंने संकेत दिया कि उच्च सदन के लिए चयन प्रक्रिया अब अंतिम चरण में है। जैसे ही पार्टी जटिल जाति समीकरणों और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को संतुलित करती है, शिवकुमार का दृष्टिकोण उच्च जोखिम वाले संक्रमण के दौरान पूर्ण संगठनात्मक स्थिरता बनाए रखने पर उनके ध्यान को उजागर करता है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया ‘मैं कैसे कह सकता हूं कि शपथ कब है?’: शिवकुमार ने महत्वपूर्ण सीएलपी वोट से पहले अटकलों को खारिज कर दिया अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें

चंबल की लोककथाओं पर बेस्ड होगी 'शक्तिशालिनी':असली बीहड़ों में पहुंचे मेकर्स; अनीत पड्डा का रहस्यमयी किरदार, विशाल का खतरनाक अवतार

चंबल की लोककथाओं पर बेस्ड होगी 'शक्तिशालिनी':असली बीहड़ों में पहुंचे मेकर्स; अनीत पड्डा का रहस्यमयी किरदार, विशाल का खतरनाक अवतार

कभी डकैतों और खूनी संघर्षों की कहानियों के लिए चर्चा में रहने वाले चंबल के बीहड़ इन दिनों एक अलग वजह से सुर्खियों में हैं। इस बार वहां फिल्मों की शूटिंग का माहौल देखने को मिल रहा है। मैडॉक फिल्म्स ने अपनी अगली फिल्म ‘शक्तिशालिनी’ की शूटिंग के लिए मुंबई और हैदराबाद के स्टूडियो सेट्स की बजाय चंबल के असली बीहड़ों को चुना है। ‘स्त्री’, ‘भेड़िया’, ‘मुंज्या’ और ‘थामा’ जैसी फिल्मों के बाद मैडॉक अब एक नई हॉरर-ड्रामा फिल्म पर काम कर रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ‘फिल्म में तंत्र-विद्या, लोककथाएं, चंबल की पृष्ठभूमि और एक्शन का मिश्रण देखने को मिल सकता है। इसमें अनीत पड्डा, विशाल जेठवा और विनीत कुमार सिंह नजर आएंगे।’ लोकेशन नहीं फिल्म का किरदार होगा चंबल फिल्म से जुड़े सूत्रों के मुताबिक ‘इसमें चंबल को सिर्फ एक शूटिंग लोकेशन नहीं, बल्कि कहानी के अहम हिस्से के तौर पर दिखाया जाएगा। बीहड़ों की वीरानी, गुफाएं, मिट्टी और रात का सन्नाटा फिल्म के माहौल को और प्रभावी बनाएंगे। विशाल का अब तक का सबसे खतरनाक अवतार ‘मर्दानी 2’ से पहचान बनाने वाले विशाल जेठवा इस फिल्म में बिलकुल नए और इंटेंस अवतार में नजर आने वाले हैं। शुरुआती शूटिंग के दौरान उन्हें स्कूल यूनिफॉर्म में देखा गया था, जिससे माना जा रहा है कि कहानी का एक हिस्सा किरदारों के बचपन या फ्लैशबैक से जुड़ा हो सकता है। हालांकि बाद में उनका लुक पूरी तरह बदलता दिखाई दिया। 15 दिनों में बनीं रहस्यमयी ‘तांत्रिक गुफाएं’ रिपोर्ट्स के मुताबिक ‘फिल्म के लिए मेकर्स ने स्टूडियो सेट्स का सहारा लेने के बजाय चंबल के असली बीहड़ों के बीच एक बड़ा सेट तैयार किया। बताया जा रहा है कि करीब 15 दिनों की मेहनत के बाद वहां प्राचीन तांत्रिक गुफाओं जैसा माहौल बनाया गया। इन गुफाओं की डिजाइन लोककथाओं, पुराने मंदिरों और मध्य भारत की तांत्रिक परंपराओं से प्रेरित है। सेट के अंदर गुप्त रास्ते, विशाल मूर्तियां, अग्निकुंड और कई रहस्यमयी प्रतीकों का इस्तेमाल किया गया है, जिससे फिल्म का माहौल और प्रभावी दिखे। जानकारी यह भी सामने आई है कि फिल्म के कुछ अहम ट्विस्ट और क्लाइमैक्स सीन्स इन्हीं गुफाओं में शूट किए गए। शूटिंग के दौरान गोपनीयता बनाए रखने के लिए यूनिट पर मोबाइल फोन के इस्तेमाल को लेकर भी सख्त निर्देश दिए गए थे। अनीत निभा रहीं रहस्यमयी किरदार फिल्म में अनीत पड्डा, शालिनी के किरदार में नजर आएंगी। बता दें कि कहानी एक साधारण ग्रामीण लड़की से शुरू होती है, जिसकी जिंदगी रहस्यमयी घटनाओं के बाद पूरी तरह बदल जाती है। धीरे-धीरे उसे अपने भीतर ऐसी शक्तियों का एहसास होता है, जो सामान्य इंसानों से अलग हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, फिल्म में शालिनी का किरदार डर और शक्ति दोनों का मिश्रण होगा। मेकर्स ने उनके ट्रांसफॉर्मेशन को विजुअली अलग दिखाने की कोशिश की है।

गुच्ची स्कार्फ, एलवी स्टोल और रोलेक्स घड़ी: कैसे डीके शिवकुमार ने विलासिता को राजनीतिक ब्रांडिंग में बदल दिया | भारत समाचार

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आखरी अपडेट:29 मई, 2026, 15:31 IST कर्नाटक का अगला मुख्यमंत्री बनने की ओर अग्रसर व्यक्ति ने वास्तव में कभी भी न्यूनतमवादी होने का दिखावा नहीं किया डीके शिवकुमार गुच्ची स्कार्फ, लुई वुइटन स्टोल, फेरागामो एक्सेसरीज़, कार्टियर घड़ियाँ और डिजाइनर धूप का चश्मा खुलेआम पहनते हैं; लगभग एक राजनीतिक बयान के रूप में। मुड़े हुए कुर्ते, इकोनॉमी-क्लास फोटो सेशन, रबर की चप्पलें, स्टील के गिलास और सावधानी से सीखी गई सादगी की भाषा- दशकों से, सभी पार्टियों के भारतीय राजनेताओं ने सावधानी से मितव्ययता की भावना विकसित की है। फिर, डीके शिवकुमार हैं। कर्नाटक का अगला मुख्यमंत्री बनने की ओर अग्रसर व्यक्ति ने वास्तव में कभी भी न्यूनतमवादी होने का दिखावा नहीं किया। वह गुच्ची स्कार्फ, लुई वुइटन स्टोल, फेरागामो सहायक उपकरण, कार्टियर घड़ियाँ और डिजाइनर धूप का चश्मा खुलेआम पहनते हैं; लगभग एक राजनीतिक बयान के रूप में। ऐसी राजनीतिक संस्कृति में जहां धन का प्रदर्शन करने के लिए नेताओं पर नियमित रूप से हमला किया जाता है, शिवकुमार का दृष्टिकोण सबसे अलग है क्योंकि वह शायद ही कभी इससे इनकार करते हैं या इसे कम महत्व देते हैं। “क्या मुझे अपनी पसंद की घड़ी पहनने का अधिकार नहीं है?” उन्होंने बीजेपी की आलोचना के बाद अपनी लग्जरी घड़ियों का बचाव करते हुए यह बात कही। मितव्ययिता विरोधी राजनीतिज्ञ जैसे ही कांग्रेस सिद्धारमैया से शिवकुमार तक नेतृत्व परिवर्तन की तैयारी कर रही है, ध्यान एक बार फिर भावी मुख्यमंत्री की सावधानीपूर्वक तैयार की गई सार्वजनिक छवि पर केंद्रित हो गया है। इकोनॉमिक टाइम्स ने उन्हें एक ऐसे नेता के रूप में वर्णित किया, जो “अपनी संपत्ति को अपनी आस्तीन पर पहनते हैं”, गुच्ची, बरबेरी, फेंडी और लुई वुइटन जैसे ब्रांडों के लक्जरी स्कार्फ, घड़ियों और उच्च-स्तरीय सामानों के प्रति उनके शौक को ध्यान में रखते हुए। उनका सिग्नेचर लुक – कुरकुरी सफेद शर्ट या कुर्ते के ऊपर लिपटा हुआ डिजाइनर दुपट्टा – कर्नाटक की राजनीति में उनकी आक्रामक संगठनात्मक शैली के रूप में पहचाना जाने लगा है। उन राजनेताओं के विपरीत, जो सावधानीपूर्वक अभिजात्य दिखने से बचते हैं, शिवकुमार ने बहुत पहले ही निष्कर्ष निकाला है कि मतदाता पहले से ही जानते हैं कि वह अमीर हैं और अन्यथा दिखावा करने से कोई फायदा नहीं होता है। उनके 2023 के चुनावी हलफनामे के अनुसार, शिवकुमार और उनके परिवार ने 1,400 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति घोषित की, जिससे वह भारत के सबसे अमीर राजनेताओं में शामिल हो गए। कथित तौर पर उनकी संपत्ति रियल एस्टेट, बुनियादी ढांचे, शिक्षा और उत्खनन से जुड़े हितों से आती है। फिर भी वह कुछ संभ्रांत प्रकाशिकी से बचता है हालाँकि, जो बात शिवकुमार की छवि को और अधिक परतदार बनाती है, वह यह है कि लक्जरी फैशन को अपनाते हुए भी, वह कथित तौर पर राजनीतिक अभिजात्यवाद के कुछ प्रतीकों से बचते हैं। मिंट के अनुसार, वह अक्सर चार्टर्ड जेट के बजाय अनुसूचित वाणिज्यिक उड़ानों को प्राथमिकता देते हैं और वीआईपी लाउंज से बचते हैं, इसके बजाय नियमित यात्रियों के बीच बैठना पसंद करते हैं। विद्यार्थी भवन जैसे प्रतिष्ठित स्थानीय भोजनालयों के प्रति उनके शौक और उनकी निरंतर जमीनी स्तर की नेटवर्किंग का हवाला देते हुए, कांग्रेस के अंदरूनी सूत्र भी अक्सर उन्हें संभ्रांत हलकों और पुराने बेंगलुरु की जमीनी राजनीतिक संस्कृति में समान रूप से सहज व्यक्ति के रूप में पेश करते हैं। ‘संकटमोचक’ जो ऑप्टिक्स से भी बड़ा बन गया शिवकुमार की राजनीतिक प्रासंगिकता अंततः लक्जरी ब्रांडिंग से कम और पार्टी के अंतिम संकट प्रबंधक के रूप में कांग्रेस के अंदर उनकी प्रतिष्ठा से अधिक आती है। इन वर्षों में, वह कांग्रेस आलाकमान के “संकटमोचक” बन गए, जो गुजरात, महाराष्ट्र, तेलंगाना और अन्य जगहों पर विधायकों की खरीद-फरोख्त की गतिविधियों को रोकने के लिए राज्यों में उड़ान भर रहे थे। 2019 के कर्नाटक राजनीतिक संकट के बाद उस प्रतिष्ठा में नाटकीय रूप से विस्तार हुआ, जब शिवकुमार भाजपा विस्तार के खिलाफ कांग्रेस के सबसे दृश्यमान संगठनात्मक योद्धाओं में से एक के रूप में उभरे। प्रवर्तन निदेशालय द्वारा जांच किए गए मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उन्होंने लगभग दो महीने जेल में भी बिताए, इन आरोपों से उन्होंने इनकार किया है। कर्नाटक वह क्यों स्वीकार करता है जो अन्य राज्य नहीं कर सकते? शायद, शिवकुमार की छवि का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि कर्नाटक की राजनीतिक संस्कृति कई अन्य भारतीय राज्यों की तुलना में दृश्यमान धन को अधिक स्वीकार करती है। द इकोनॉमिक टाइम्स द्वारा उद्धृत कांग्रेस नेताओं का तर्क है कि कर्नाटक में मतदाता अक्सर नेताओं द्वारा खुले तौर पर समृद्धि प्रदर्शित करने से कम असहज होते हैं, खासकर अगर उन्हें प्रभावी राजनीतिक प्रबंधकों के रूप में भी देखा जाता है। यह आंशिक रूप से बताता है कि लक्जरी घड़ियों या ब्रांडेड स्कार्फ पर विवादों ने शायद ही कभी शिवकुमार को स्थायी राजनीतिक नुकसान पहुंचाया हो। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया गुच्ची स्कार्फ, एलवी स्टोल और रोलेक्स घड़ी: कैसे डीके शिवकुमार ने विलासिता को राजनीतिक ब्रांडिंग में बदल दिया अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें

500 प्रजाति पौधों के बीच फ्रेंच ओपन का अनोखा कोर्ट:पेरिस के रोलां गैरो स्टेडियम में बना कोर्ट सिमोन-मैथ्यू; ग्रैंड स्लैम का सबसे नया कोर्ट

500 प्रजाति पौधों के बीच फ्रेंच ओपन का अनोखा कोर्ट:पेरिस के रोलां गैरो स्टेडियम में बना कोर्ट सिमोन-मैथ्यू; ग्रैंड स्लैम का सबसे नया कोर्ट

फ्रेंच ओपन के शोर, भीड़ और टेनिस के रोमांच से कुछ कदम दूर एक ऐसी जगह है, जहां पहुंचते ही माहौल बदल जाता है। फ्रेंच ओपन की मेजबानी करने वाले रोलां गैरो स्टेडियम के बीचों-बीच बना ऑटेय बॉटनिकल गार्डन मानो किसी दूसरी दुनिया का हिस्सा लगता है। यहां 500 से ज्यादा पौधों की प्रजातियां हैं, ऊंचे-ऊंचे पेड़ हैं, रंग-बिरंगे फूल हैं और उनके बीच छिपा है एक अनोखा टेनिस कोर्ट- कोर्ट सिमोन-मैथ्यू। इस कोर्ट का नाम दो बार की पूर्व महिला सिंगल्स चैम्पियन सिमोन मैथ्यू के नाम पर रखा गया है। यहां पहुंचने वाले खिलाड़ी और दर्शक पहले हरियाली के बीच से गुजरते हैं। कुछ देर के लिए ऐसा लगता है कि वे किसी बॉटनिकल पार्क में घूम रहे हैं, लेकिन जैसे ही मैच शुरू होता है, वही शांत जगह शोर और जुनून से भर उठती है। खासकर जब कोई फ्रेंच खिलाड़ी कोर्ट पर हो, तब यहां का माहौल किसी फुटबॉल स्टेडियम जैसा हो जाता है। रविवार को फ्रांस के टिटुआं द्रोगे के मुकाबले में यही देखने को मिला। दर्शक लगातार ‘द्रो-गे, अले!’ के नारे लगा रहे थे। हर पॉइंट पर तालियां और शोर गूंज रहा था। लेकिन यह समर्थन द्रोगे के लिए दबाव भी बन गया। दुनिया के 110वें नंबर के खिलाड़ी द्रोगे मैच में अपनी लय नहीं पकड़ सके और सीधे सेटों में हार गए। शाम ढलने के साथ कोर्ट सिमोन-मैथ्यू की खूबसूरती और भी अलग नजर आने लगती है। दर्शक जब सीढ़ियों से नीचे उतरकर अपनी सीटों तक पहुंचते हैं, तो उन्हें ऐसा अहसास होता है मानो वे किसी गुप्त स्टेडियम में प्रवेश कर रहे हों। ऊपर हरियाली और फूलों की खुशबू, नीचे लाल मिट्टी का कोर्ट और बीच में हजारों दर्शकों की आवाजें, यही इस कोर्ट को बाकी से अलग बनाता है। कोर्ट सिमोन-मैथ्यू सिर्फ एक टेनिस कोर्ट नहीं, बल्कि रोलां गैरो की नई पहचान बन चुका है। यहां हरियाली की शांति भी है और खेल का उन्माद भी। दिन में यह जगह किसी बगीचे जैसी लगती है, लेकिन रात होते-होते यही कोर्ट खिलाड़ियों के लिए सबसे कठिन परीक्षा बन जाता है। जमीन से साढ़े चार मीटर नीचे बना है कोर्ट साल 2019 में शुरू हुआ यह कोर्ट फ्रेंच ओपन का तीसरा सबसे बड़ा कोर्ट है। इसकी खासियत सिर्फ इसकी क्षमता या आधुनिक डिजाइन नहीं, बल्कि उसका माहौल है। चार विशाल कांच के ग्रीनहाउस के बीच बना यह कोर्ट ऐसा लगता है जैसे प्रकृति ने खुद टेनिस को अपनी गोद में जगह दी हो। कोर्ट जमीन से करीब साढ़े चार मीटर नीचे बनाया गया है, ताकि वह आसपास के बगीचों के साथ घुल-मिल जाए।

फुटबॉल वर्ल्ड कप के लिए अर्जेंटीना की टीम का ऐलान:पिछला खिताब जीतने वाली टीम के 17 प्लेयर्स को जगह, मेसी कप्तानी करेंगे

फुटबॉल वर्ल्ड कप के लिए अर्जेंटीना की टीम का ऐलान:पिछला खिताब जीतने वाली टीम के 17 प्लेयर्स को जगह, मेसी कप्तानी करेंगे

फुटबॉल वर्ल्ड कप के लिए अर्जेंटीना की 26 सदस्यीय टीम घोषित कर दी गई। अर्जेंटीना फुटबॉल एसोसिएशन ने गुरुवार को स्क्वॉड का ऐलान किया। 39 साल के होने जा रहे लियोनेल मेसी टीम की कप्तानी करेंगे। यह उनका छठा वर्ल्ड कप होगा। इससे पहले वे 2006, 2010, 2014, 2018 और 2022 वर्ल्ड कप खेल चुके हैं। कोच लियोनेल स्कालोनी ने खिलाड़ियों की इंजरी पर कहा- ‘ज्यादातर खिलाड़ी टूर्नामेंट तक फिट हो जाएंगे।’ स्क्वॉड में 17 खिलाड़ी 2022 कतर वर्ल्ड कप जीतने वाली टीम के हैं। अर्जेंटीना ने फाइनल में फ्रांस को हराकर तीसरी बार विश्व खिताब जीता था। मेसी की हैमस्ट्रिंग में खिंचाव टीम चयन से पहले कई खिलाड़ियों की फिटनेस चिंता का विषय थी। मेसी बाएं हैमस्ट्रिंग में खिंचाव से जूझ रहे हैं। इसी कारण वे इंटर मियामी का पिछला मैच पूरा नहीं खेल पाए थे। गोलकीपर एमिलियानो मार्टिनेज की उंगली में फ्रैक्चर हुआ था। क्रिस्टियन रोमेरो, नहुएल मोलिना और गोंजालो मोंटियल भी चोट से उबर रहे हैं, लेकिन उन्हें स्क्वॉड में शामिल किया गया है। 16 जून को अल्जीरिया से मैच खेलेगी टीम अर्जेंटीना 16 जून को ग्रुप-जे में अल्जीरिया के खिलाफ अभियान शुरू करेगी। इस ग्रुप में ऑस्ट्रिया और जॉर्डन भी हैं। टीम शनिवार को कंसास सिटी स्थित बेस कैंप के लिए रवाना होगी। टूर्नामेंट से पहले अर्जेंटीना होंडुरास और आइसलैंड के खिलाफ अभ्यास मैच खेलेगा। अर्जेंटीना टीम गोलकीपर्स: एमिलियानो मार्टिनेज, जेरोनिमो रूली, जुआन मुस्सो। डिफेंडर्स: गोंजालो मोंटियल, नहुएल मोलिना, लिसांद्रो मार्टिनेज, निकोलस ओटामेंडी, लियोनार्डो बालेरडी, क्रिस्टियन रोमेरो, निकोलस टैग्लियाफिको, फाकुंडो मेडिना। मिडफील्डर्स: जियोवानी लो सेल्सो, लिएंड्रो परेडेस, रोड्रिगो डी पॉल, एक्सेकियल पलासियोस, एंजो फर्नांडीज, एलेक्सिस मैक एलिस्टर, वैलेंटिन बार्को। फॉरवर्ड: लियोनल मेसी, निकोलस गोंजालेज, गिउलियानो सिमेओने, लाउतारो मार्टिनेज, जोस मैनुएल लोपेज, जूलियन अल्वारेज, थियागो अल्माडा और निको पाज। ————————————————————

सत्तू-ओट्स चीला रेसिपी: गर्मियों में स्वादिष्ट ऊर्जा के लिए उपयोगी सत्तू-ओट्स चीला, जल्दी से नोट कर लें रेसिपी

तस्वीर का विवरण

इस सामग्री चिली को बनाने के लिए आधा कप पीसा हुआ ओट्स या ओट्स का आटा, आधा कप चना सत्तू और 3 से 4 आटा दही लें। इसके अलावा इलेक्ट्रोनिक कटे प्याज, टमाटर, मीठा मिर्च और कद्दूकस की हुई गाजर तैयार है। छवि: फ्रीपिक नमक, आधा छोटा जीरा पाउडर, आधा छोटा जीरा पाउडर और थोड़ा सा प्रयोग। साथ में ही नींबू कटी हरी मिर्च, घीसा हुआ अदरक और हरा धनियां भी इस्तेमाल करें। थोड़ा घी या जैतून का तेल रखने के लिए चीला सेंकने। छवि: फ्रीपिक सबसे पहले एक बड़े बाउल में पीसा हुआ ओट्स और चना सत्तू निर्माता अच्छी तरह मिला लें। अब इसमें दही, सभी मूल बातें, अदरक और हरी मिर्च शामिल हैं। इसके बाद इलेक्ट्रोनिक कटी हुई सब्ज़ी और हरा धनिया स्टॉक। छवि: फ्रीपिक अब मिक्चर में लिटिल-थोड़ा पानी डाले हुए वोट बैटर तैयार करें। ध्यान दें कि बैटर में पेट न रहे। इसकी कंसिस्टेंसी खुराक या सामान्य चिली जैसी होनी चाहिए ताकि टावे पर आसानी से उपलब्ध हो सके। छवि: एआई प्रस्ताव पर तवा गर्म करें और उस पर छोटी घी या तेल डालें। अब एक बड़ा आकार का बैटर टीवी पर डाला गया और गोल आकार में फैलाया गया। चिली के सामान पर छोटे घी के बर्तन और उसे मध्यम आँच पर बर्तन पर रखें। छवि: एआई जब चीला नीचे से भूरे और कुरकुरे दिखने लगें, तब उसे पलट दें। दूसरी तरफ से भी अच्छी तरह से सुनहरा होने तक सेक लें। तैयार करें सत्तू-ओट्स चिली को हरी चटनी या दही के साथ गरमा-गरम सर्व करें। छवि: एआई सत्तू और ओट्स दोनों ही प्रोटीन और घटिया के अच्छे स्रोत मिलते हैं। यह नाश्ता पेट को लंबे समय तक भरने में मदद करता है, जिससे बार-बार भूख नहीं लगती। छवि: फ्रीपिक (टैग्सटूट्रांसलेट)सत्तू ओट्स चिल्ला रेसिपी(टी)स्वस्थ नाश्ता रेसिपी(टी)प्रोटीन युक्त चिल्ला(टी)ओट्स चिल्ला(टी)सत्तू रेसिपी(टी)वजन घटाने वाला नाश्ता(टी)त्वरित भारतीय नाश्ता(टी)स्वस्थ चिल्ला रेसिपी(टी)फाइबर युक्त नाश्ता(टी)आयरन युक्त खाद्य पदार्थ

फिल्म धुरंधर 3 क्या बन रही है?:मूवी में जमील जमाली का रोल प्ले करने वाले राकेश बेदी बोले- मुझे कोई आइडिया नहीं

फिल्म धुरंधर 3 क्या बन रही है?:मूवी में जमील जमाली का रोल प्ले करने वाले राकेश बेदी बोले- मुझे कोई आइडिया नहीं

‘धुरंधर (2025)’ और ‘धुरंधर: द रिवेंज (2026)’ की बॉक्स ऑफिस पर ऐतिहासिक सफलता के बाद फिल्म के पार्ट 3 को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह की चर्चाएं हो रही हैं। ANI से बातचीत के दौरान राकेश बेदी से धुरंधर 3 को लेकर सवाल किया गया। इस पर उन्होंने कहा कि उन्होंने भी फिल्म को लेकर कई बातें सुनी हैं, लेकिन उनके पास ऐसी कोई खबर नहीं है। उन्होंने कहा, ‘धुरंधर 3 बन रही है या नहीं, अगर बन रही है तो मैं उसका हिस्सा हूं या नहीं, मुझे इसकी कोई जानकारी नहीं है।’ राकेश बेदी ने आगे कहा कि अगर उन्हें इस बारे में कोई जानकारी मिलेगी, तो वह इसकी घोषणा जरूर करेंगे। बता दें कि फिल्ममेकर आदित्य धर की एक्शन-थ्रिलर फ्रेंचाइजी ‘धुरंधर’ और ‘धुरंधर 2’ में राकेश बेदी ने पाकिस्तानी राजनेता जमील जमाली का किरदार निभाया था। उनका यह रोल लोगों को बहुत ज्यादा पसंद आया। भारत की दूसरी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म धुरंधर 2 ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार कमाई करते हुए भारत में दूसरी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बनने का रिकॉर्ड बनाया। सैकनिल्क के मुताबिक, फिल्म ने भारत में करीब ₹1148 करोड़ नेट कलेक्शन और दुनियाभर में लगभग ₹1812 करोड़ ग्रॉस कमाई की है। ग्रॉस कलेक्शन टिकट से कुल कमाई और नेट कलेक्शन टैक्स के बाद की कमाई होती है। फिल्म में लंबी स्टारकास्ट धुरंधर 2 में रणवीर सिंह मुख्य भूमिका में थे। इसके अलावा फिल्म में संजय दत्त, आर माधवन, अर्जुन रामपाल, सारा अर्जुन, गौरव गेरा और राकेश बेदी जैसे कलाकार भी नजर आए। जबकि पहले पार्ट में अक्षय खन्ना ने भी अहम भूमिका निभाई थी। धुरंधर (2025) और धुरंधर 2 (2026) दोनों ही फिल्मों का निर्देशन आदित्य धर ने किया। फिल्म को ज्योति देशपांडे और आदित्य धर ने मिलकर जियो स्टूडियोज और B62 स्टूडियोज के बैनर तले प्रोड्यूस किया है। ……..……..……..…….. धुरंधर से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… धुरंधर के बाद ल्यारी पर आई एक और फिल्म:पाकिस्तानी फिल्म मेरा ल्यारी के फैसलाबाद में सिर्फ 22 टिकट बिके, कई शो कैंसिल पाकिस्तानी फिल्म मेरा ल्यारी 8 मई को सिनेमाघरों में रिलीज हुई। यह फिल्म पाकिस्तान के ल्यारी इलाके पर आधारित थी। गौरतलब है कि ल्यारी का जिक्र भारतीय फिल्म धुरंधर में भी हुआ, जो सुपरहिट साबित हुई। हालांकि, मेरा ल्यारी को बॉक्स ऑफिस पर कमजोर रिस्पॉन्स मिला। पूरी खबर यहां पढ़ें…