Sunday, 11 Oct 2026 | 08:27 AM

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फिल्म अभिनेता आर.माधवन के संघर्ष की कहानी:फौजी नहीं बन पाए, सर्जरी ने 3 साल रोक दिया करिअर; आज हैं पैन-इंडिया स्टार

फिल्म अभिनेता आर.माधवन के संघर्ष की कहानी:फौजी नहीं बन पाए, सर्जरी ने 3 साल रोक दिया करिअर; आज हैं पैन-इंडिया स्टार

हिंदी और तमिल सिनेमा जगत में आर.माधवन आज न सिर्फ एक स्थापित अभिनेता, बल्कि जाने-माने निर्माता-निर्देशक भी हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 25 मई को उन्हें पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित करेंगी। जानते हैं उनकी संघर्ष से सफलता की कहानी… जमशेदपुर में एक मध्यमवर्गीय तमिल परिवार में 1 जून 1970 को जन्मे आर.माधवन का जीवन आर्थिक व शारीरिक संघर्षों और करिअर की चुनौतियों से भरा रहा है। माधवन कॉलेज के दिनों में सर्वश्रेष्ठ एनसीसी ​कैडेट थे। फौज में अफसर बनना उनका सपना था, लेकिन उम्र संबंधी नियमों के चलते वह परीक्षा में अयोग्य कर दिए गए। संघर्ष -गुजारे के लिए कोचिंग देते, फिल्मों में रिजेक्शन झेले 1993 में माधवन मुम्बई आए तो उनके पास पैसे नहीं थे। वे पब्लिक स्पीकिंग की कोचिंग और छोटी-मोटी मॉडलिंग से गुजारा करते थे। तमिल फिल्म “इरुवर’ के लिए स्क्रीन टेस्ट में मणिरत्नम ने उन्हें रिजेक्ट कर दिया। चॉकलेटी छवि के कारण उन्हें गंभीर भूमिकाओं के लिए कई रिजेक्शन झेलने पड़े। माधवन जब करिअर के शिखर पर थे तो थ्री ईडियट्स की शूटिंग में उनके घुटने में चोट आई। डॉक्टरों की सलाह को अनदेखा कर वे तमिल फिल्म शूट करने लगे और वापस उसी घुटने में इतनी गंभीर चोट लगी कि उनकी ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका में दो सर्जरी करनी पड़ीं। यह कॅरिअर का सबसे बुरा दौर था। 3 साल तक वे फिल्मों से दूर रहे। फिर “रॉक्रेट्री’ की शूटिंग के दौरान कोरोना आ गया। माधवन बताते हैं कि तब चार साल तक उनकी कोई कमाई नहीं हुई। सफलता – तमिल सिनेमा से चमके, रहना है से बने स्टार माधवन उन गिने-चुने अभिनेताओं में हैं, जो अंग्रेजी, हिंदी और दक्षिण भारतीय भाषाओं में 70 से ज्यादा फिल्में कर चुके हैं। सबसे पहले 1997 में माधवन ने अंग्रेजी फिल्म “इन्फर्नो’ में छोटी-सी भूमिका निभाई। इससे पहले वे टीवी एड और धारावाहिक करते थे। 1998 में “शांति,शांति,शांति’ से कन्नड डेब्यू किया। 2000 में तमिल ब्लाॅकबस्टर “अलाईपायुथे’ उनके कॅरिअर का टर्निंग पॉइंट रही। इससे पहचान मिली और माधवन ने “रहना है तेरे दिल में’ से धमाकेदार बॉलीवुड डेब्यू किया। 2006 से 2015 के बीच माधवन ने रंग देे बसंती, थ्री ईडियट्स, तनु वेड्स मनु में दमदार अभिनय से दर्शकों का दिल जीता। “रॉक्रेट्री: द नंबी इफेक्ट’ से वो निर्माता भी बन गए। माधवन को आइफा, राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार, टेलीविजन अकादमी अवॉर्ड के अलावा कई प्रतिष्ठित पुरस्कार मिल चुके हैं।

कर्नाटक स्विच ऑन कार्ड? अटकलें तेज, कांग्रेस नेतृत्व ने सिद्धारमैया को दिल्ली बुलाया | भारत समाचार

A file photo of Twisha Sharma

आखरी अपडेट:25 मई, 2026, 12:44 IST 2023 में कर्नाटक में कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद से, अफवाहें बनी हुई हैं कि सिद्धारमैया और शिवकुमार के बीच अनौपचारिक रूप से एक “घूर्णी सीएम” व्यवस्था पर काम किया गया था। कांग्रेस ने सिद्धारमैया को मुख्यमंत्री के रूप में चुना, जबकि शिवकुमार ने उपमुख्यमंत्री पद के लिए समझौता किया, लेकिन दिल्ली में गहन बातचीत से पहले ऐसा नहीं हुआ। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को दिल्ली बुलाने के कांग्रेस आलाकमान के फैसले ने एक बार फिर अटकलें तेज कर दी हैं कि क्या पार्टी आखिरकार कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन की तैयारी कर रही है; एक सवाल जो 2023 में गठन के दिन से ही राज्य सरकार को परेशान करता रहा है। अटकलों का ताजा दौर तब शुरू हुआ जब सिद्धारमैया ने पुष्टि की कि उन्हें कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने दिल्ली बुलाया है। उन्होंने कहा, “मुझे दिल्ली बुलाया गया है, लेकिन मुझे चर्चा का विषय नहीं पता। कल (मंगलवार) सुबह 11 बजे मेरी बैठक होनी है। वेणुगोपाल ने मुझे बैठक में शामिल होने के लिए बुलाया। अटकलें हमेशा रहेंगी।” कुछ ही समय बाद, कर्नाटक कांग्रेस में सत्ता के दूसरे ध्रुव शिवकुमार ने भी उतनी ही सतर्क प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कांग्रेस प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला का जिक्र करते हुए कहा, “मुझे नहीं पता कि सुरजेवाला ने आपसे क्या कहा। अगर वह मुझे जाने के लिए कहेंगे तो मैं दिल्ली जाऊंगा। जब भी पार्टी बुलाएगी, हमें जाना होगा। मैं नेतृत्व परिवर्तन पर टिप्पणी नहीं करना चाहता। यह मेरा काम नहीं है।” वह डील जो कभी आधिकारिक तौर पर अस्तित्व में नहीं थी 2023 में कर्नाटक में कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद से, अफवाहें बनी हुई हैं कि सिद्धारमैया और शिवकुमार के बीच अनौपचारिक रूप से एक “घूर्णी मुख्यमंत्री” की व्यवस्था पर काम किया गया था। पार्टी ने कभी भी इस तरह के समझौते को आधिकारिक तौर पर स्वीकार नहीं किया। फिर भी अटकलें वास्तव में कभी गायब नहीं हुईं क्योंकि दोनों नेता शीर्ष पद के लिए मजबूत और प्रतिस्पर्धी दावों के साथ चुनाव से उभरे। सिद्धारमैया बड़े पैमाने पर अपील, अहिंदा सामाजिक गठबंधन का समर्थन और प्रशासनिक अनुभव लेकर आए। इस बीच, शिवकुमार को संगठनात्मक प्रबंधन, संसाधन जुटाने और विपक्ष में वर्षों के दौरान कांग्रेस को एकजुट रखने का श्रेय दिया गया। अंततः, कांग्रेस ने सिद्धारमैया को मुख्यमंत्री के रूप में चुना, जबकि शिवकुमार ने उपमुख्यमंत्री पद के लिए समझौता किया, लेकिन दिल्ली में गहन बातचीत से पहले ऐसा नहीं हुआ। टिप्पणियों ने अफवाहों को जीवित रखा उत्तराधिकार की बहस को फिर से हवा देने वाली बात यह है कि दोनों खेमों के नेता समय-समय पर विचारोत्तेजक टिप्पणियाँ करते रहते हैं। इस साल की शुरुआत में, शिवकुमार ने कहा था कि कांग्रेस आलाकमान जो भी निर्णय लेगा, वह उसका पालन करेंगे, इस सूत्रीकरण की व्यापक रूप से व्याख्या की गई कि सिद्धारमैया को खुले तौर पर चुनौती दिए बिना अपने दावे को जीवित रखा गया है। विभिन्न बिंदुओं पर, शिवकुमार के करीबी कांग्रेस विधायकों ने सार्वजनिक रूप से सरकार गठन के दौरान कथित तौर पर की गई “प्रतिबद्धताओं का सम्मान” करने की बात कही है। हालाँकि, सिद्धारमैया के वफादार लगातार पीछे हटते रहे हैं। मुख्यमंत्री ने खुद बार-बार कहा है कि वह पूरे पांच साल का कार्यकाल पूरा करेंगे। कुछ महीने पहले ही सिद्धारमैया ने नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा को सिरे से खारिज कर दिया था और जोर देकर कहा था कि सीएम पद के लिए कोई पद खाली नहीं है। कांग्रेस आलाकमान ने भी अस्पष्टता और खंडन के बीच बारी-बारी से काम किया है, न तो अफवाहों को पूरी तरह से खारिज किया है और न ही उनकी पुष्टि की है। अब समय क्यों मायने रखता है दिल्ली की यह ताज़ा बैठक कर्नाटक सरकार के लिए राजनीतिक रूप से संवेदनशील समय पर हुई है। कांग्रेस नेतृत्व भविष्य की चुनावी लड़ाई से पहले गुटीय तनाव को प्रबंधित करने की कोशिश कर रहा है, साथ ही पार्टी के सबसे महत्वपूर्ण राज्यों में से एक में अस्थिरता को भी रोक रहा है। कर्नाटक वर्तमान में दक्षिण भारत में कांग्रेस की सबसे बड़ी राज्य सरकार है और भाजपा के खिलाफ पार्टी की राष्ट्रीय कहानी के लिए महत्वपूर्ण बनी हुई है। लेकिन राज्य इकाई के भीतर प्रतिस्पर्धी महत्वाकांक्षाएं सामने आने के कारण संतुलन बनाना कठिन हो गया है। विपक्षी भाजपा ने बार-बार इन तनावों का फायदा उठाने की कोशिश की है, कांग्रेस सरकार को आंतरिक रूप से विभाजित और उत्तराधिकार की राजनीति से विचलित बताया है। साथ ही, शिवकुमार के समर्थक तेजी से तर्क दे रहे हैं कि उपमुख्यमंत्री ने धैर्यपूर्वक इंतजार किया है और अगर वास्तव में कोई समझ मौजूद है तो वह अपनी बारी के हकदार हैं। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया कर्नाटक स्विच ऑन कार्ड? अटकलें तेज, कांग्रेस नेतृत्व ने सिद्धारमैया को दिल्ली बुलाया अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)कर्नाटक कांग्रेस नेतृत्व परिवर्तन(टी)कर्नाटक के मुख्यमंत्री(टी)सिद्धारमैया नेतृत्व(टी)डीके शिवकुमार(टी)कांग्रेस आलाकमान(टी)घूर्णी मुख्यमंत्री(टी)कर्नाटक की राजनीति(टी)कांग्रेस गुटबाजी

फ्लॉप का डर, अक्षय कुमार ने लिया भोजपुरी का सहारा:वल्गर लिरिक्स वाले गाने के बोल- रगड़के नहला देब साबुन से, ऐसे ही गाने से फंसे नोरा-संजय

फ्लॉप का डर, अक्षय कुमार ने लिया भोजपुरी का सहारा:वल्गर लिरिक्स वाले गाने के बोल- रगड़के नहला देब साबुन से, ऐसे ही गाने से फंसे नोरा-संजय

फिल्म वेलकम टू द जंगल का गाना घिस घिस घिस आज रिलीज हो चुका है। ये एक भोजपुरी गाना है, जिसमें अक्षय कुमार भोजपुरी एक्ट्रेस अक्षरा सिंह संग, वल्गर और डबल मीनिंग लिरिक्स पर थिरकते दिखे हैं। जाहिर तौर पर लगातार फ्लॉप फिल्में दे रहे अक्षय कुमार अब इस नई स्ट्रेटेजी के साथ भोजपुरी ऑडियंस को टारगेट करते हुए भोजपुरी स्टार्स का सहारा ले रहे हैं। अक्षय कुमार ने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से फिल्म वेलगम टू द जंगल गाने की एक झलक शेयर की है। गाने के कैप्शन में अक्षय कुमार ने लिखा है, फटेगा स्पीकर और ब्रेक होगा पूरा डांस फ्लोर। घिस घिस घिस सॉन्ग आज रिलीज हो रहा है। एक नजर अक्षय कुमार के भोजपुरी गाने पर फ्लॉप के डर से अक्षय कुमार ने लेनी पड़ी भोजपुरी स्टार्स की मदद! अक्षय कुमार लंबे समय से एक हिट फिल्म की तलाश में हैं। उनकी इस साल रिलीज हुई फिल्म भूत बंगला बॉक्स ऑफिस पर कोई खास कमाल नहीं दिखा सकी है। इससे पहले 2025 में आईं उनकी फिल्में कनप्पा, स्काई फोर्स, हाउसफुल 5 और जॉली एलएल बी 3 भी कोई खास इम्पैक्ट नहीं छोड़ सकीं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या अक्षय कुमार अब हिट की तलाश के लिए भोजपुरी स्टार्स और भोजपुरी गानों का सहारा ले रहे हैं। अक्षय कुमार की पिछली पिछली 6 फिल्में और उनका बजट गाने के बारे में- फिल्म वेलकम टू द जंगल गाने का टाइटल है, घिस घिस घिस। गाने की लिरिक्स में रगड़के नहला देब साबुन से, होंठवा पे काटे जैसे मधुमक्खी, रगड़े जवानी जैसे भर-भर के, जैसे बोल इस्तेमाल किए गए हैं। गाने को विक्रम मोन्तरोज, सुप्रिया पाठक ने आवाज दी है, जबकि इसकी लिरिक्स अभिनव शेखर ने लिखी है। ऐसे ही गाने से फंसे संजय दत्त-नोरा फतेही नोरा फतेही और संजय दत्त भी एक ऐसे ही बोल वाले गाने सरके चुनरिया तेरी के चलते विवादों में हैं। दोनों के खिलाफ शिकायतें दर्ज कर समन भी किया गया और महिला आयोग द्वारा दोनों को फटकार भी लगाई गई है। महिला आयोग के सामने पेश हुए संजय दत्त और नोरा फतेही दोनों ने कहा कि उन्हें लिरिक्स की जानकारी नहीं थी। आयोग के सामने माफी मांगते हुए 50 आदिवासी बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी उठाई। वहीं दूसरी तरफ नोरा ने ऐलान किया कि वो अब से आइटम सॉन्ग में काम नहीं करेंगी। विवाद के बाद इस गाने को डिलीट किया गया था।

फ्लॉप का डर, अक्षय कुमार ने लिया भोजपुरी का सहारा:वल्गर लिरिक्स वाले गाने के बोल- रगड़के नहला देब साबुन से, ऐसे ही गाने से फंसे नोरा-संजय

फ्लॉप का डर, अक्षय कुमार ने लिया भोजपुरी का सहारा:वल्गर लिरिक्स वाले गाने के बोल- रगड़के नहला देब साबुन से, ऐसे ही गाने से फंसे नोरा-संजय

फिल्म वेलकम टू द जंगल का गाना घिस घिस घिस आज रिलीज हो चुका है। ये एक भोजपुरी गाना है, जिसमें अक्षय कुमार भोजपुरी एक्ट्रेस अक्षरा सिंह संग, वल्गर और डबल मीनिंग लिरिक्स पर थिरकते दिखे हैं। जाहिर तौर पर लगातार फ्लॉप फिल्में दे रहे अक्षय कुमार अब इस नई स्ट्रेटेजी के साथ भोजपुरी ऑडियंस को टारगेट करते हुए भोजपुरी स्टार्स का सहारा ले रहे हैं। अक्षय कुमार ने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से फिल्म वेलगम टू द जंगल गाने की एक झलक शेयर की है। गाने के कैप्शन में अक्षय कुमार ने लिखा है, फटेगा स्पीकर और ब्रेक होगा पूरा डांस फ्लोर। घिस घिस घिस सॉन्ग आज रिलीज हो रहा है। एक नजर अक्षय कुमार के भोजपुरी गाने पर फ्लॉप के डर से अक्षय कुमार ने लेनी पड़ी भोजपुरी स्टार्स की मदद! अक्षय कुमार लंबे समय से एक हिट फिल्म की तलाश में हैं। उनकी इस साल रिलीज हुई फिल्म भूत बंगला बॉक्स ऑफिस पर कोई खास कमाल नहीं दिखा सकी है। इससे पहले 2025 में आईं उनकी फिल्में कनप्पा, स्काई फोर्स, हाउसफुल 5 और जॉली एलएल बी 3 भी कोई खास इम्पैक्ट नहीं छोड़ सकीं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या अक्षय कुमार अब हिट की तलाश के लिए भोजपुरी स्टार्स और भोजपुरी गानों का सहारा ले रहे हैं। अक्षय कुमार की पिछली पिछली 6 फिल्में और उनका बजट गाने के बारे में- फिल्म वेलकम टू द जंगल गाने का टाइटल है, घिस घिस घिस। गाने की लिरिक्स में रगड़के नहला देब साबुन से, होंठवा पे काटे जैसे मधुमक्खी, रगड़े जवानी जैसे भर-भर के, जैसे बोल इस्तेमाल किए गए हैं। गाने को विक्रम मोन्तरोज, सुप्रिया पाठक ने आवाज दी है, जबकि इसकी लिरिक्स अभिनव शेखर ने लिखी है। ऐसे ही गाने से फंसे संजय दत्त-नोरा फतेही नोरा फतेही और संजय दत्त भी एक ऐसे ही बोल वाले गाने सरके चुनरिया तेरी के चलते विवादों में हैं। दोनों के खिलाफ शिकायतें दर्ज कर समन भी किया गया और महिला आयोग द्वारा दोनों को फटकार भी लगाई गई है। महिला आयोग के सामने पेश हुए संजय दत्त और नोरा फतेही दोनों ने कहा कि उन्हें लिरिक्स की जानकारी नहीं थी। आयोग के सामने माफी मांगते हुए 50 आदिवासी बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी उठाई। वहीं दूसरी तरफ नोरा ने ऐलान किया कि वो अब से आइटम सॉन्ग में काम नहीं करेंगी। विवाद के बाद इस गाने को डिलीट किया गया था।

चांदी ₹3,754 बढ़कर ₹2.70 लाख किलो हुई:इस साल ₹39 हजार महंगी हो चुकी; सोना ₹505 बढ़ा, 10 ग्राम की कीमत ₹1.59 लाख

चांदी ₹3,754 बढ़कर ₹2.70 लाख किलो हुई:इस साल ₹39 हजार महंगी हो चुकी; सोना ₹505 बढ़ा, 10 ग्राम की कीमत ₹1.59 लाख

सोने-चांदी के दाम में आज यानी 25 मई को बढ़त है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार 10 ग्राम 24 कैरेट सोने के दाम 505 रुपए बढ़कर 1.59 लाख रुपए हो गया है। वहीं, 1 किलो चांदी की कीमत 3,754 रुपए बढ़कर 2.70 लाख रुपए पर पहुंच गई है। कैरेट के हिसाब से सोने की कीमत देश के बड़े शहरों में सोने की कीमत (सोर्स: goodreturns 25 मई 2026) सोना इस साल 25 हजार और चांदी 39 हजार महंगी इस साल सोने-चांदी की कीमत में तेजी रही है। सोना 2026 में अब तक 25 हजार रुपए और चांदी 39 हजार रुपए महंगी हुई है। 31 दिसंबर 2025 को 10g सोना 1.33 लाख रुपए पर था, जो अब 1.59 लाख रुपए पर पहुंच गया है। वहीं, चांदी 2.30 लाख रुपए किलो थी, जो अब 2.69 लाख रुपए पर पहुंच गई है। इस दौरान 29 जनवरी को सोने ने 1.76 लाख रुपए और चांदी ने 3.86 लाख रुपए का ऑलटाइम हाई भी बनाया था। इस साल अब तक सोने-चांदी की चाल नोट:- सोने की कीमत प्रति 10 ग्राम और चांदी की कीमत किलो में | सोर्स:- IBJA ज्वेलर्स से सोना खरीदते समय इन 2 बातों का रखें ध्यान 1. सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें: हमेशा ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) का हॉलमार्क लगा हुआ सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें। ये नंबर अल्फान्यूमेरिक यानी कुछ इस तरह से हो सकता है- AZ4524। हॉलमार्किंग से पता चलता है कि सोना कितने कैरेट का है। 2. कीमत क्रॉस चेक करें: सोने का सही वजन और खरीदने के दिन उसकी कीमत कई सोर्सेज (जैसे इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट) से क्रॉस चेक करें

चांदी ₹3,754 बढ़कर ₹2.70 लाख किलो हुई:इस साल ₹39 हजार महंगी हो चुकी; सोना ₹505 बढ़ा, 10 ग्राम की कीमत ₹1.59 लाख

चांदी ₹3,754 बढ़कर ₹2.70 लाख किलो हुई:इस साल ₹39 हजार महंगी हो चुकी; सोना ₹505 बढ़ा, 10 ग्राम की कीमत ₹1.59 लाख

सोने-चांदी के दाम में आज यानी 25 मई को बढ़त है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार 10 ग्राम 24 कैरेट सोने के दाम 505 रुपए बढ़कर 1.59 लाख रुपए हो गया है। वहीं, 1 किलो चांदी की कीमत 3,754 रुपए बढ़कर 2.70 लाख रुपए पर पहुंच गई है। सोना इस साल 25 हजार और चांदी 39 हजार महंगी इस साल सोने-चांदी की कीमत में तेजी रही है। सोना 2026 में अब तक 25 हजार रुपए और चांदी 39 हजार रुपए महंगी हुई है। 31 दिसंबर 2025 को 10g सोना 1.33 लाख रुपए पर था, जो अब 1.59 लाख रुपए पर पहुंच गया है। वहीं, चांदी 2.30 लाख रुपए किलो थी, जो अब 2.69 लाख रुपए पर पहुंच गई है। इस दौरान 29 जनवरी को सोने ने 1.76 लाख रुपए और चांदी ने 3.86 लाख रुपए का ऑलटाइम हाई भी बनाया था। ज्वेलर्स से सोना खरीदते समय इन 2 बातों का रखें ध्यान 1. सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें: हमेशा ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) का हॉलमार्क लगा हुआ सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें। ये नंबर अल्फान्यूमेरिक यानी कुछ इस तरह से हो सकता है- AZ4524। हॉलमार्किंग से पता चलता है कि सोना कितने कैरेट का है। 2. कीमत क्रॉस चेक करें: सोने का सही वजन और खरीदने के दिन उसकी कीमत कई सोर्सेज (जैसे इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट) से क्रॉस चेक करें

सत्तू-चिया सीड ड्रिंक रेसिपी: चिलचिलाती गर्मी में पेट को रहेगा कूल और शरीर को स्वादिष्ट, नोट करें सत्तू-चिया सीड की ये आसान रेसिपी

सत्तू चिया बीज पेय

25 मई 2026 को 11:33 IST पर अद्यतन किया गया सत्तू चिया सीड ड्रिंक रेसिपी: चिलचिलाती गर्मी में शरीर को नियंत्रित रखने और वजन को नियंत्रित करने में सबसे बड़ी चुनौती होती है। अगर आप पेट ठंडा और शरीर को पतला रखना चाहते हैं, तो सत्तू और चिया सीड्स का यह देसी पेय आपके लिए असर करता है। आइए जानते हैं इसे बनाने की बेहद आसान और झटपट बनने वाली रेसिपी के बारे में… अनुसरण करना : सत्तू पेट को तुरंत ठंडा करके लू से शुरू करें। चारे से अधिक चिया सीड्स लंबे समय तक भूखा नहीं रहने की सलाह देते हैं। यह कॉम्बिनेशन पाचन तंत्र को ठीक करता है। शरीर की चर्बी को तेजी से बढ़ाता है। छवि: फ्रीपिक ताजी पुदीने की सब्जी बनाने के लिए आपको दो चम्मच चने का सत्तू, एक चम्मच भीगे हुए चिया सीड्स, एक गिलास ठंडा पानी, आधा नमक, स्वाद या काला नमक, थोड़ा सा सहित जीरा पाउडर और सजावट के लिए इस्तेमाल करें। छवि: एआई रेसिपी का पहला स्टेप यही है कि चिया सीड्स को पीने में इस्तेमाल करने से कम से कम एक मिनट पहले पानी में नमककर रख दें ताकि वे अच्छे तरह से फूल सकें और उनका पूरा पोषण मिल सके। छवि: एआई एक बड़े चम्मच में दो बड़े सत्तू शामिल होते हैं और इसमें थोड़ा सा ठंडा पानी, अच्छी तरह का नासा लें शामिल होता है। शुरुआत में कम पानी से सत्तू में धूल नहीं बल्कि रेत चिकनी बनती है। छवि: एआई सत्तू के नासा में पूरा ठंडा पानी भर दें। अब पहले से भीगे हुए चिया सीड्स, नींबू का रस, काला नमक और इसी तरह जीरा पाउडर की मदद से अच्छी तरह से मिला लें। छवि: एआई ऊपर से यूरोपियन कटी पुदीना आर्किटेक्चर इसे गार्निश करें। इस लाजवाब ड्रिंक को सुबह या दोपहर के समय पिएं और चिलचिलाती गर्मी में भी पेट को कूल और खुद को फिट रखें। छवि: एआई द्वारा प्रकाशित: कीर्ति सोनी प्रकाशित 25 मई 2026 11:33 IST पर (टैग्सटूट्रांसलेट)सत्तू चिया सीड ड्रिंक(टी)गर्मियों में वजन घटाने वाली ड्रिंक(टी)सत्तू ड्रिंक रेसिपी हिंदी में(टी)वजन घटाने के लिए चिया सीड्स(टी)गर्मियों में पेट को ठंडा कैसे रखें(टी)गर्मियों में सेहतमंद ड्रिंक्स(टी)वजन घटाने की रेसिपी(टी)इम्युनिटी बूस्टर समर ड्रिंक

सगे मां-बाप को इंडियाज गॉट लेटेंट-2 में जज बनाओ:समय रैना पर फिर भड़के सुनील पाल, कहा- पेरेंट्स के सामने ही शो करे, तब मानूंगा

सगे मां-बाप को इंडियाज गॉट लेटेंट-2 में जज बनाओ:समय रैना पर फिर भड़के सुनील पाल, कहा- पेरेंट्स के सामने ही शो करे, तब मानूंगा

समय रैना और सुनील पाल के बीच विवाद खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। विवादित शो इंडियाज गॉट लेटेंग 2 शुरू होने की खबरों के बीच अब सुनील पाल ने कहा है कि समय रैना को अपने पेरेंट्स को जज बनाकर शो में लाना चाहिए। हाल ही में अपकमिंग फिल्म सितंबर 21 के प्रमोशनल इवेंट में सुनील पाल से पूछा गया था कि क्या वो समय रैना के शो इंडियाज गॉट लेटेंट-2 में बतौर जज जाएंगे। इसके जवाब में सुनील पाल ने कहा, ‘नहीं, मैं तो नहीं जाऊंगा, क्योंकि वो इतना बड़ा शो है, मेरे लायक नहीं है, मैं बहुत छोटा आर्टिस्ट हूं। लेकिन अगर समय रैना इस शो को बनाएं, तो जैसे कपिल शर्मा के शो में नवजोत सिंह सिद्धू और अर्चना पूरन सिंह जज बनती हैं, वैसे ही समय रैना के नए सीजन, 2 है न, तो वहां दो लोगों को बैठाए, अपनी माता जी, अपनी सगी मां को और अपने सगे पिता को बैठाए। और उनके सामने ये शो करे। तब मैं मानूंगा, समय है, रैना है, तो समय है और समय को उसके साथ रहना है।’ क्या है सुनील पाल और समय रैना का विवाद? समय रैना ने यूट्यूब चैनल पर इंडियाज गॉट लेटेंट शो शुरू किया। जिसमें सभी कंटेस्टेंट्स को 90 सेकेंड में कोई भी टैलेंट दिखाना था। परफॉर्मेंस से पहले कंटेस्टेंट्स को खुद को 1-10 में एक स्कोर देना था। परफॉर्मेंस के बाद जज उस कंटेस्टेंट को स्कोर देते थे। स्कोर मैच होने पर कंटेस्टेंट विनर बनता था। शो जल्द ही काफी पॉपुलर हो गया और हर एपिसोड में औसत 20 मिलियन्स व्यूज आने लगे, लेकिन साथ ही अभद्र भाषा, वल्गर जोक्स और गाली-गलौज के इस्तेमाल से शो की जमकर आलोचना भी हुई। शो में कई बड़ी हस्तियां बतौर जज पहुंच रही थीं कि तभी 8 फरवरी को पोस्ट किए गए एक एपिसोड में जज बनकर पहुंचे रणवीर अलाहाबादिया ने एक कंटेस्टेंट से पेरेंट्स पर एक बेहद अभद्र सवाल पूछा। एपिसोड आने के अगले ही दिन विवाद हो गया। शो के सभी जज और इसके मेकर्स के खिलाफ देश के कई हिस्सों में अश्लीलता फैलाने के आरोप में शिकायतें दर्ज हुईं। अगले दिन रणवीर अलाहाबादिया ने अपने बयान पर माफी मांगी, हालांकि विवाद खत्म नहीं हुआ। इसी समय सुनील पाल ने भी शो की जमकर आलोचना की और कहा कि ये शो और समय रैना जैसे कॉमेडियन समाज के लिए खतरा हैं। कई बड़ी फिल्मी हस्तियों ने भी इस शो की आलोचना की और भाषा पर सवाल उठाए। 10 फरवरी को शिकायतें दर्ज होने के बाद नेशनल ह्यूमन राइट्स कमिशन ने शो के एपिसोड डिलीट करने का आदेश दिया। समय रैना ने सारे एपिसोड डिलीट कर दिए। इसके बाद सुनील पाल ने समय रैना और उनके शो की जमकर आलोचना की। कई मौकों पर सुनील पाल समय के खिलाफ बयान देते दिखे। हाल ही में समय रैना और रणवीर अलाहाबादिया, कपिल शर्मा के शो में पहुंचे, जहां सुनील पाल ने उन पर कई बार तंज कसा। शो में समय ने उनका जमकर मजाक उड़ाया था।

सगे मां-बाप को इंडियाज गॉट लेटेंट-2 में जज बनाओ:समय रैना पर फिर भड़के सुनील पाल, कहा- पेरेंट्स के सामने ही शो करे, तब मानूंगा

सगे मां-बाप को इंडियाज गॉट लेटेंट-2 में जज बनाओ:समय रैना पर फिर भड़के सुनील पाल, कहा- पेरेंट्स के सामने ही शो करे, तब मानूंगा

समय रैना और सुनील पाल के बीच विवाद खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। विवादित शो इंडियाज गॉट लेटेंग 2 शुरू होने की खबरों के बीच अब सुनील पाल ने कहा है कि समय रैना को अपने पेरेंट्स को जज बनाकर शो में लाना चाहिए। हाल ही में अपकमिंग फिल्म सितंबर 21 के प्रमोशनल इवेंट में सुनील पाल से पूछा गया था कि क्या वो समय रैना के शो इंडियाज गॉट लेटेंट-2 में बतौर जज जाएंगे। इसके जवाब में सुनील पाल ने कहा, ‘नहीं, मैं तो नहीं जाऊंगा, क्योंकि वो इतना बड़ा शो है, मेरे लायक नहीं है, मैं बहुत छोटा आर्टिस्ट हूं। लेकिन अगर समय रैना इस शो को बनाएं, तो जैसे कपिल शर्मा के शो में नवजोत सिंह सिद्धू और अर्चना पूरन सिंह जज बनती हैं, वैसे ही समय रैना के नए सीजन, 2 है न, तो वहां दो लोगों को बैठाए, अपनी माता जी, अपनी सगी मां को और अपने सगे पिता को बैठाए। और उनके सामने ये शो करे। तब मैं मानूंगा, समय है, रैना है, तो समय है और समय को उसके साथ रहना है।’ क्या है सुनील पाल और समय रैना का विवाद? समय रैना ने यूट्यूब चैनल पर इंडियाज गॉट लेटेंट शो शुरू किया। जिसमें सभी कंटेस्टेंट्स को 90 सेकेंड में कोई भी टैलेंट दिखाना था। परफॉर्मेंस से पहले कंटेस्टेंट्स को खुद को 1-10 में एक स्कोर देना था। परफॉर्मेंस के बाद जज उस कंटेस्टेंट को स्कोर देते थे। स्कोर मैच होने पर कंटेस्टेंट विनर बनता था। शो जल्द ही काफी पॉपुलर हो गया और हर एपिसोड में औसत 20 मिलियन्स व्यूज आने लगे, लेकिन साथ ही अभद्र भाषा, वल्गर जोक्स और गाली-गलौज के इस्तेमाल से शो की जमकर आलोचना भी हुई। शो में कई बड़ी हस्तियां बतौर जज पहुंच रही थीं कि तभी 8 फरवरी को पोस्ट किए गए एक एपिसोड में जज बनकर पहुंचे रणवीर अलाहाबादिया ने एक कंटेस्टेंट से पेरेंट्स पर एक बेहद अभद्र सवाल पूछा। एपिसोड आने के अगले ही दिन विवाद हो गया। शो के सभी जज और इसके मेकर्स के खिलाफ देश के कई हिस्सों में अश्लीलता फैलाने के आरोप में शिकायतें दर्ज हुईं। अगले दिन रणवीर अलाहाबादिया ने अपने बयान पर माफी मांगी, हालांकि विवाद खत्म नहीं हुआ। इसी समय सुनील पाल ने भी शो की जमकर आलोचना की और कहा कि ये शो और समय रैना जैसे कॉमेडियन समाज के लिए खतरा हैं। कई बड़ी फिल्मी हस्तियों ने भी इस शो की आलोचना की और भाषा पर सवाल उठाए। 10 फरवरी को शिकायतें दर्ज होने के बाद नेशनल ह्यूमन राइट्स कमिशन ने शो के एपिसोड डिलीट करने का आदेश दिया। समय रैना ने सारे एपिसोड डिलीट कर दिए। इसके बाद सुनील पाल ने समय रैना और उनके शो की जमकर आलोचना की। कई मौकों पर सुनील पाल समय के खिलाफ बयान देते दिखे। हाल ही में समय रैना और रणवीर अलाहाबादिया, कपिल शर्मा के शो में पहुंचे, जहां सुनील पाल ने उन पर कई बार तंज कसा। शो में समय ने उनका जमकर मजाक उड़ाया था।

पूर्व रणजी क्रिकेटर को मैच के दौरान अटैक आया, मौत:एसएल अक्षय ने 2014-15 में कर्नाटक के लिए रणजी ट्रॉफी जीती

पूर्व रणजी क्रिकेटर को मैच के दौरान अटैक आया, मौत:एसएल अक्षय ने 2014-15 में कर्नाटक के लिए रणजी ट्रॉफी जीती

कर्नाटक के पूर्व तेज गेंदबाज एसएल अक्षय का रविवार को दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। वे 39 वर्ष के थे। वे 2014-15 के सीजन में रणजी ट्रॉफी जीतने वाली कर्नाटक टीम का हिस्सा थे। अक्षय बेंगलुरु में KSCA के थर्ड डिवीजन मैच में सैफायर सीसी की ओर से खेल रहे थे। चार ओवर गेंदबाजी करने के बाद उन्होंने असहज महसूस होने की शिकायत की और मैदान से बाहर चले गए। उन्हें तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। शुरुआती जानकारी के अनुसार उनकी मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई। कर्नाटक संघ ने शोक जताया, लिखा- समर्पण और जुनून से क्रिकेट की सेवा की कर्नाटक राज्य क्रिकेट संघ (KSCA) ने बयान जारी कर अक्षय के निधन पर शोक जताया। संघ ने कहा, ‘अक्षय ने प्रथम श्रेणी क्रिकेट में कर्नाटक का शानदार प्रतिनिधित्व किया। खेल करियर खत्म होने के बाद भी उन्होंने पूरे समर्पण और जुनून के साथ क्रिकेट की सेवा जारी रखी।’ पूर्व क्रिकेटर डी गणेश ने लिखा- मेरे पास शब्द नहीं पूर्व क्रिकेटर डोडा गणेश ने भी उनके निधन पर दुख जताया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा- ‘क्रिकेट जगत के लिए यह दुखद खबर है। मेरे पास अपने दुख को व्यक्त करने के लिए शब्द नहीं हैं।’ डोडा गणेश ने आगे लिखा कि शांत स्वभाव के अक्षय ने 2011-12 में कर्नाटक के लिए खेलते हुए अच्छी सफलता हासिल की थी। अंडर-19 टीम के कोच थे अक्षय क्रिकेट से संन्यास के बाद अक्षय कोचिंग से जुड़ गए थे। वे कर्नाटक की अंडर-19 टीम के साथ काम कर रहे थे। उन्होंने 2011 से 2013 के बीच कर्नाटक के लिए 6 फर्स्ट क्लास, तीन लिस्ट-ए और नौ टी-20 मैच खेले थे। तेज गेंदबाज के तौर पर उन्होंने घरेलू क्रिकेट में पहचान बनाई थी। ————————————————-