राजस्थान की देसी सुपरफूड राबड़ी, जो 45 डिग्री गर्मी में भी आपको रखेगी कूल और फिट, Video

X राजस्थान की देसी सुपरफूड राबड़ी, जो 45 डिग्री गर्मी में भी आपको रखेगी कूल Traditional Rabdi Recipe: बाड़मेर सहित पश्चिमी राजस्थान में ‘राबड़ी’ आधुनिक फास्ट फूड को कड़ी टक्कर दे रही है. बाजरा-ज्वार और छाछ से बनी यह राबड़ी भीषण गर्मी में शरीर को ठंडक देने के साथ-साथ पाचन में भी सहायक है. बुजुर्ग इसे एक ‘देसी सुपरफूड’ मानते हैं जो डायबिटीज और बीपी जैसी बीमारियों से बचाने में कारगर है. घंटों की मेहनत से तैयार होने वाली राबड़ी आज भी राजस्थान की संस्कृति और सेहत का आधार बनी हुई है. रेगिस्तानी इलाकों में जब तापमान 45 डिग्री के पार पहुंच जाता है, तब राबड़ी शरीर को ठंडक पहुंचाने और लू के असर को कम करने में रामबाण का काम करती है. ग्रामीण अंचलों में ज्येष्ठ सुदी चतुर्थी को ‘राबड़ी दिवस’ के रूप में मनाया जाता है, जहां परिवार के लोग एक साथ बैठकर इस पारंपरिक भोजन का आनंद लेते हैं. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।
खेल मंत्री का ममेरा भाई स्विमिंग पूल में डूबा, मौत:सोनीपत स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी में हादसा, क्रिकेट में पीजी डिप्लोमा कर रहा था; दिल्ली में रहता है परिवार

हरियाणा के सोनीपत की राई स्थित हरियाणा स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी में गुरुवार रात स्विमिंग पूल में डूबने से छात्र की मौत हो गई। मृतक की पहचान निशांत गौतम निवासी पलवल के रूप में हुई। वह यूनिवर्सिटी में क्रिकेट के पीजी डिप्लोमा फाइनल ईयर का छात्र था। हादसे के बाद उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। निशांत, खेल मंत्री गौरव गौतम का ममेरा भाई था। खेल मंत्री के मीडिया सलाहकार नितिन शर्मा के मुताबिक, निशांत गौतम दिल्ली का रहने वाला है। निशांत के मामा गांव चिरावटा में हैं और खेल मंत्री गौरव गौतम भी चिरावटा गांव के ही रहने वाले हैं। मगर, खेल मंत्री के परिवार का इसे डायरेक्ट कोई रिश्ता नहीं है। हालांकि, निशांत गौतम की मौत की खबर सुनने के बाद गांव में दुख का महौल है। उधर, घटना के बाद यूनिवर्सिटी परिसर में हड़कंप मच गया, जबकि पुलिस पूरे मामले की जांच में जुट गई है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, पूल हाल ही में दोबारा शुरू किया गया था। सुरक्षा व्यवस्था और लापरवाही को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। यहां सिलसिलेवार ढंग से जानिए पूरा मामला… पुलिस ने शुरू की जांच पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है। जांच अधिकारी अब यह पता लगाने में जुटे हैं कि हादसा किन परिस्थितियों में हुआ और कहीं सुरक्षा में लापरवाही तो नहीं बरती गई। पुलिस पूल परिसर की सुरक्षा व्यवस्था, स्टाफ की मौजूदगी और सीसीटीवी फुटेज की भी जांच कर रही है।
वर्ल्ड अपडेट्स:सेंट्रल अमेरिकी देश होंडुरास में गोलीबारी, 16 की मौत; बंदूकधारियों ने मजदूरों और पुलिसकर्मियों पर बरसाईं गोलियां

सेंट्रल अमेरिकी देश होंडुरास में गुरुवार को दो अलग-अलग हमलों में कम से कम 16 लोगों की मौत हो गई। पुलिस के मुताबिक, हमलों में 10 मजदूर और 6 पुलिसकर्मी मारे गए। पहला हमला उत्तरी होंडुरास के ट्रूजिलो नगर में एक प्लांटेशन पर हुआ। नेशनल पुलिस के प्रवक्ता एडगार्डो बाराहोना के मुताबिक, बंदूकधारियों ने वहां काम कर रहे मजदूरों पर अंधाधुंध फायरिंग की, जिसमें कम से कम 10 लोगों की मौत हो गई। उन्होंने कहा कि मृतकों की सही संख्या अब भी स्पष्ट नहीं है, क्योंकि कुछ परिजन शव अपने साथ ले गए। रिपोर्ट के मुताबिक, यह इलाका लंबे समय से जमीन और खेती को लेकर संघर्ष का केंद्र रहा है। दूसरा हमला ग्वाटेमाला सीमा के पास कॉर्टेस विभाग के ओमोआ नगर में हुआ। यहां हमलावरों ने पुलिस टीम पर गोलीबारी की, जिसमें 6 पुलिसकर्मी मारे गए। मृतकों में एक वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल है। पुलिस के मुताबिक, ये अधिकारी गैंग विरोधी अभियान में तैनात थे और राजधानी टेगुसिगाल्पा से ओमोआ जा रहे थे। होंडुरास के सुरक्षा मंत्रालय ने कहा है कि दोनों हमलों की जांच के लिए फोरेंसिक विशेषज्ञों और अभियोजकों की टीमें बनाई जाएंगी। साथ ही प्रभावित इलाकों में पुलिस और सेना की अतिरिक्त तैनाती की जाएगी।
अमेरिकी पुलिस गुरुद्वारे में जूते पहनकर घुसी, VIDEO:सिर भी नंगा; गोलक को लेकर हुआ था झगड़ा; SGPC बोली- दोषियों पर कार्रवाई हो

अमेरिका की पुलिस एक गुरुद्वारे में जूते पहनकर ही अंदर घुस गई। जिस जगह पुलिस वाले खड़े थे, वहीं पर श्री गुरू ग्रंथ साहिब का पवित्र स्वरूप भी रखा हुआ था। इसका वीडियो सामने आते ही पंजाब में सिख संगठनों में गुस्सा है। उन्होंने इसे मर्यादा के उलट बताया है। पुलिस यहां गोलक को लेकर हुए विवाद के बाद आई थी। हालांकि इस बारे में अभी तक गुरुद्वारा कमेटी या अमेरिकी पुलिस की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि अमेरिका में रहने वाले कुछ लोगों का दावा है कि जूते भी अमेरिकी पुलिस की यूनिफॉर्म का हिस्सा हैं। ऑन ड्यूटी होने पर वह इसे नहीं उतार सकते। वहीं SGPC ने इस मामले में श्री अकाल तख्त साहिब से मामले की जांच करवाकर ऐसे हालात बनाने के दोषियों को तलब करने और उन पर कार्रवाई की मांग की है। जानिए क्या है पूरा मामला:- जानकारी के मुताबिक अमेरिका के फिलाडेल्फिया में गुरुद्वारा है। 19 मई को यहां पर गोलक में आए डॉलर और नोट गिने जा रहे थे। इस दौरान गिनती में अंतर को लेकर दो पक्षों में विवाद हो गया। झगड़ा इतना बढ़ गया कि किसी ने फोन कर वहां अमेरिकी पुलिस बुला ली। पुलिस वाले सीधे गुरुद्वारे के अंदर आ गए। इस दौरान भी 2 पक्षों में वहां बहस होती दिखी। किसी व्यक्ति ने इसका वीडियो रिकॉर्ड कर दिया। वीडियो में नजर आ रहा है कि जहां पर पुलिसकर्मी खड़ा है, वहीं पर श्री गुरू ग्रंथ साहिब के पवित्र स्वरूप भी हैं। वहीं पास में ही डॉलर और नोट भी जमीन पर गिरे हुए हैं। इस दौरान अमेरिकी पुलिस का जवान लोगों को शांत करने की कोशिश कर रहा है। इस दौरान एक पुलिसकर्मी ने सिख मर्यादा के मुताबिक सिर भी नहीं ढका जबकि दूसरे ने टोपी पहन रखी थी। मनजीत जीके बोले- गोलक का झगड़ा निंदनीय, दूसरों को क्या कहेंगे दिल्ली सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी (DSGMC) के पूर्व अध्यक्ष मनजीत सिंह जीके ने कहा- मैंने फिलाडेल्फिया का वीडियो देखा। यहां झगड़ा भी गोलक को लेकर हुआ। मैं समझता हूं कि इससे निंदनीय बात नहीं हो सकती कि गोलक का झगड़ा हो और उसके पीछे पुलिस आ जाए। पुलिस जूतों समेत नंगे सिर गुरुघर में आ जाती है। यही नहीं, श्री गुरू ग्रंथ साहिब के बिल्कुल आगे खड़ी हो जाती है, जहां हम माथा टेकते हैं। इस दौरान संगत उनसे गुजारिश करती है और प्रबंधक मौके से भाग जाते हैं। मुझे ये समझ नहीं आती, कि प्रबंधक गुरुघर के कस्टोडियन हैं। ये ऐसा काम क्यों करते हैं कि पुलिस अंदर आए। SGPC मेंबर बोले- सिख कौम की भावनाएं आहत हुईं इस बारे में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के सदस्य गुरचरण सिंह ग्रेवाल ने कहा कि अमेरिका के फिलाडेल्फिया स्थित गुरुद्वारा साहिब में पुलिस कर्मियों के जूते पहनकर आना दुखदाई और चिंताजनक है। इस वीडियो ने पूरी सिख कौम की भावनाओं को आहत किया है। गुरुद्वारा साहिब, जो श्रद्धा और मर्यादा का केंद्र होता है, वहां इस प्रकार की घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। ग्रेवाल ने कहा कि चाहे यह मामला गुरुद्वारे के प्रबंधन, गोलक या आपसी विवाद से जुड़ा हो, लेकिन गुरु साहिब की हजूरी में पुलिस का जूतों सहित खड़ा होना सिख परंपराओं और मर्यादा के खिलाफ है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर ऐसे हालात क्यों बने और इसके लिए जिम्मेदार लोग कौन हैं। उन्होंने संगत से भी सहयोग की अपील की, ताकि भविष्य में किसी भी गुरुद्वारा साहिब में ऐसी स्थिति दोबारा पैदा न हो और गुरुघर की मर्यादा हमेशा कायम रहे।
हीट वेव से बचने के लिए क्या करें? एम्स डॉक्टर ने दी अहम सलाह

Last Updated:May 21, 2026, 23:24 IST Heat Waves Tips: गर्मी के मौसम में लू के कारण सिचुएशन सीरियस हो जाती है. कई बार ये जानलेवा भी साबित हो सकता है. ऐसे एम्स के डॉक्टर ने सुरक्षित रहने के कुछ आसान उपायों को बताया है, जो आपके लिए मददगार साबित हो सकते हैं. ख़बरें फटाफट देश के कई राज्यों में लगातार बढ़ती गर्मी और लू लोगों की सेहत पर बुरा असर डाल रही है. तेज धूप और ऊंचे तापमान की वजह से लोगों में कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं देखने को मिल रही हैं. एम्स के डॉ. नीरज निश्चल ने आइएनएस लोगों को गर्मी से बचने के लिए सावधानी बरतने की सलाह दी है. डॉक्टर ने बताया कि गर्मी में सबसे आम समस्या डिहाइड्रेशन होती है. इसका मतलब है कि शरीर में पानी और जरूरी नमक की कमी हो जाना. ज्यादा पसीना आने से शरीर कमजोर होने लगता है और अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए तो स्थिति गंभीर हो सकती है. कई बार यह हीट स्ट्रोक यानी लू में बदल जाता है. हीट स्ट्रोक होने पर शरीर का तापमान बहुत बढ़ जाता है और व्यक्ति बेहोश भी हो सकता है. हीट वेव से बचने के उपायडॉक्टर का कहना है कि दोपहर के समय धूप सबसे ज्यादा तेज होती है. इसलिए सुबह 11 बजे से शाम 4 या 5 बजे तक बाहर निकलने से बचना चाहिए. अगर किसी जरूरी काम से बाहर जाना पड़े तो शरीर को पूरी तरह ढककर निकलें. ढीले और हल्के रंग के कपड़े पहनें, सिर पर टोपी, गमछा या पगड़ी रखें और छाते का इस्तेमाल करें. कोशिश करें कि ज्यादा समय धूप में न बिताएं. गर्मी में शरीर को हाइड्रेट रखना बहुत जरूरी है. घर से निकलने से पहले पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए. डॉक्टर ने सलाह दी है कि दिनभर में ओआरएस या इलेक्ट्रोलाइट्स वाले पेय लेते रहें. केवल पानी पीना काफी नहीं होता, क्योंकि पसीने के साथ शरीर से नमक और जरूरी मिनरल्स भी बाहर निकल जाते हैं. ओआरएस शरीर में पानी और नमक का संतुलन बनाए रखने में मदद करता है. डॉ. नीरज निश्चल ने बताया कि बेल का शरबत, शिकंजी और दाल का पानी जैसे घरेलू पेय गर्मी में काफी फायदेमंद होते हैं. ये शरीर को ठंडक देने के साथ-साथ ऊर्जा भी बनाए रखते हैं. अस्पतालों में इन दिनों कमजोरी, चक्कर आना, सिरदर्द, उल्टी, ज्यादा पसीना और ब्लड प्रेशर कम होने जैसी समस्याओं वाले मरीज बढ़ रहे हैं. गंभीर मामलों में हीट स्ट्रोक के कारण तेज बुखार, भ्रम, बेहोशी और दौरे तक पड़ सकते हैं. बुजुर्ग, छोटे बच्चे, गर्भवती महिलाएं और पहले से बीमार लोग सबसे ज्यादा खतरे में रहते हैं. इसलिए गर्मी के मौसम में हल्का भोजन करें, छांव में रहें और शरीर में होने वाले बदलावों को नजरअंदाज न करें. समय पर सावधानी बरतने से गर्मी से होने वाली गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. About the Author शारदा सिंहSenior Sub Editor शारदा सिंह मध्यप्रदेश की रहने वाली हैं. उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपना सफर शुरू किया. उनके पास डिजिटल मीडिया और लाइफस्टाइल पत्रक…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.
लौकी की मिस्सी रोटी रेसिपी: नान-पराठा नहीं, मिनटों में असली लौकी वाली मिस्सी रोटी, खाते ही भूल जाएंगे होटल का स्वाद; विधि नोट करें

सामग्री: 1 कप आटे का आटा, 1/2 कप बेसन, 1 लोकी, 1 प्याज, 2 हरी मिर्च, 1 छोटा चम्मच अजवायन, 1/2 छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर, 1/2 छोटा चम्मच हल्दी, नमक, हरा धनिया, 1 छोटा चम्मच तेल, घी छवि: फ्रीपिक सबसे पहले एक बड़े पैमाने पर बर्तनों का आटा और बेसन पेश किया गया। अब इसमें कद्दू की हुई लौकी, प्याज, हरी मिर्च, अजवायन, हल्दी, लाल मिर्च, नमक और हरा धनिया गुड़िया से मिला लें। छवि: एआई ध्यान दें कि लौकी पानी छोड़ती है, इसलिए आटा गूंथते समय पानी बहुत कम लगता है। जरूरत है बस थोड़ी सी पानी की आपूर्ति। अब थोड़ा सा तरल तेल तैयार कर लें। छवि: एआई इसके बाद एसोसिएट्स के लो अवशेष मित्र हाथ से बेल लें। गैस पर तवा गरम करें और रोटी को दोनों तरफ से घी या तेल में लपेट कर सुनहरा होने तक सेंक लें। गर्मियों में यह ब्रेड पेट के लिए भी काफी आरामदायक मानी जाती है। छवि: एआई रोटी में कसूरी मेथी का स्वाद और सुगंध बढ़ जाती है। इसे दही, लहसुन की चटनी या मिर्च के अचार के साथ बनायें। बच्चों के लिए इसमें छोटे-छोटे पनीर भी मिला सकते हैं। छवि: एआई लौकी खरगोश और पानी की सबसे अच्छी समानता है, जो पेट को प्रभावित करती है। वहीं बेसन प्रोटीन का अच्छा स्रोत माना जाता है। ऐसे में यह मिस्सी ब्रेड स्वादिष्ट होने के साथ-साथ वैगन भी बन जाती है। छवि: एआई (टैग्सटूट्रांसलेट) लोकी मिस्सी रोटी रेसिपी(टी)घर पर मिस्सी रोटी कैसे बनाएं(टी)घर पर बनी लौकी मिस्सी रोटी रेसिपी:(टी)लौकी की मिस्सी रोटी(टी)स्वस्थ रेसिपी(टी)बेसन की रोटी(टी)घीया मिस्सी रोटी(टी)लौकी
मूंग दाल हलवा रेसिपी: घर में बिना चीनी के स्वादिष्ट मूंग दाल का हलवा, अब स्वाद के साथ सेहत भी

मूंग दाल का हलवा ज्यादातर लोगों को पसंद होता है। अगर आपको भी ये हलवा पसंद है लेकिन चीनी नहीं चाहिए तो आपके लिए एक आसान सी रेसिपी लेकर आए हैं। छवि: फ्रीपिक मूंग दाल का हलवा बनाने की सामग्री- 1 कप मूंग दाल, देसी घी, 2 कप दूध, गुड़ का पाउडर या स्टीविया, हरी इलायची पाउडर, मिठाई छवि: फ्रीपिक मूंग दाल का हलवा बनाने के लिए मूंग दाल को 3-4 बार पानी से अच्छी तरह से खरीदें और थोड़ी देर के लिए छोड़ दें। अब इस दाल को एक मसाला में मध्यम आंच पर थोड़ी देर के लिए जबतक इसका पानी न सुख जाए। छवि: एआई जब ये भुनी हुई दाल यूनिवर्सल हो जाए तो इसे मिक्सी में दरदरा पीस लें। अब पकौड़े में घी गरम कीजिये. पिसी दाल का पाउडर इसमें मिलाया जाता है और रासायनिक संरचना पर आधारित जबतक इसका रंग सुनहरा न हो जाए। छवि: एआई थोड़ा-थोड़ा करके इसमें फुल क्रीम दूध पकौड़े और लगातार शौकीन बने रहें ताकि पेट न पड़े। इसे तबतक पराक्रमी जबतक सारा दूध दाल ना सोख ले। छवि: एआई अब इस मिश्रण में गुड़ का पाउडर या स्टीविया पाउडर मिलाएं। ऊपर से कालीमिर्च पाउडर भी डालें। अब इस पूरे मिश्रण को तबतक बहादुर जबतक हलवा से घी न छोड़ना पड़ा। छवि: एआई जब आपका हलवा तैयार हो जाए तो उसमें काजू, बादाम, टेलेज़ल जैसे फ़्लोरिडा विज़नल्स डाल लें। आपका टेस्टी और कार्मिक मूंग दाल का हलवा तैयार है। छवि: एआई
फेंकने से पहले जान लें आम की गुठली के फायदे, शुगर से लेकर मोटापे तक कंट्रोल करती है ये घरेलू औषधि

X फेंकने से पहले जान लें आम की गुठली के फायदे, शुगर से मोटापा तक करती है कंट्रोल Aam Ki Guthli Ke Fayde: आम का गूदा खाने के बाद फेंक दी जाने वाली गुठली सेहत के लिए किसी रामबाण से कम नहीं है, जो ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर और वजन घटाने जैसी कई समस्याओं में बेहद फायदेमंद साबित होती है. मेडिकल कॉलेज सुल्तानपुर के आयुर्वेद चिकित्सक डॉक्टर संतोष कुमार श्रीवास्तव के अनुसार, इसका उपयोग करने के लिए गुठली को धूप में अच्छी तरह सुखाकर उसके अंदर का हिस्सा निकाल लें और फिर उसका पाउडर बनाकर या सीधे खाली पेट ताजे पानी के साथ सीमित मात्रा में सेवन करें. हालांकि, इसके बेहतरीन फायदों के बावजूद इसका जरूरत से ज्यादा सेवन नुकसानदेह हो सकता है, इसलिए किसी गंभीर बीमारी या पहले से दवा चलने की स्थिति में व्यक्ति की उम्र और स्वास्थ्य के हिसाब से इसकी सही खुराक तय करने के लिए आयुर्वेदिक विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।
Health Tips: गर्मी में अमृत समान हरा पुदीना, पेट, त्वचा और शरीर को देता है ठंडक व ताजगी, जाने इसके फायदे

गर्मी के मौसम में हरा पुदीना शरीर को ठंडक देने, पेट की समस्याओं से राहत पहुंचाने और ताजगी बनाए रखने में बेहद फायदेमंद माना जाता है. चटनी, शरबत और घरेलू नुस्खों में इस्तेमाल होने वाला पुदीना त्वचा, सिरदर्द और मुंह की बदबू जैसी समस्याओं में भी लाभकारी माना जाता है.
प्लेट छोड़िए, पत्ता अपनाइए, जानिए केले के पत्ते पर खाने के फायदे और परंपरा के पीछे का विज्ञान

Last Updated:May 21, 2026, 21:25 IST Benefits of Eating Food on Banana Leaves: दक्षिण भारत में केले के पत्ते पर भोजन परोसने की परंपरा स्वास्थ्य, संस्कृति और पर्यावरण का अनूठा संगम माना जाता है. इसमें पत्ते की प्राकृतिक संरचना का उपयोग कर भोजन को अधिक स्वादिष्ट और सुरक्षित बनाया जाता है. गरम भोजन परोसने से पत्ते के प्राकृतिक यौगिक भोजन में मिलकर पाचन और इम्युनिटी को लाभ पहुंचाते हैं. पत्ते में मौजूद पॉलीफेनोल्स जैसे एंटीऑक्सीडेंट्स गरम भोजन के संपर्क में आकर स्वास्थ्य लाभ देते हैं. यह परंपरा प्लास्टिक मुक्त और इको-फ्रेंडली है और पर्यावरण संरक्षण में अहम भूमिका निभाती है. मंदिरों और घरों में इसका विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है. दक्षिण भारत में केले के पत्ते पर भोजन करना स्वास्थ्य, पर्यावरण और संस्कृति का अनूठा संगम माना जाता है. गरमा-गरम भोजन परोसने से पत्ते में मौजूद पॉलीफेनोल्स जैसे प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट भोजन में मिल जाते हैं जो पाचन और सेहत के लिए लाभकारी होते हैं. यह परंपरा केमिकल-मुक्त और इको-फ्रेंडली मानी जाती है और पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान देती है. इसके साथ ही यह मेहमान-नवाजी और समृद्धि का प्रतीक है. पत्ते को बिछाने, धोने और मोड़ने की प्रक्रिया में सांस्कृतिक शिष्टाचार भी जुड़ा होता है. दक्षिण भारतीय घरों और मंदिरों में इसका विशेष महत्व है और यह परंपरा आज भी प्रचलित है. केले के पत्तों में पॉलीफेनोल्स एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं जो ग्रीन टी में भी मौजूद होते हैं. जब गरम भोजन इन पत्तों पर परोसा जाता है तो इनमें मौजूद जैव सक्रिय यौगिक भोजन में मिल जाते हैं जो स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होते हैं. ये तत्व शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्युनिटी को मजबूत करते हैं और पाचन तंत्र को सुधारते हैं. यह परंपरा सांस्कृतिक के साथ वैज्ञानिक दृष्टि से भी उपयोगी मानी जाती है. केले के पत्तों का उपयोग पर्यावरण के लिए सुरक्षित और इको-फ्रेंडली है. यह भोजन को प्राकृतिक सुगंध भी प्रदान करते हैं स्वाद बढ़ाता है. होटलों या शादियों में अक्सर प्लास्टिक या धातु की प्लेटों को साफ करने के लिए डिटर्जेंट और केमिकल वाले डिशवॉशर का उपयोग किया जाता है, जिनके सूक्ष्म अंश सतह पर रह जाने की संभावना रहती है. इसके विपरीत, केले के पत्ते प्राकृतिक रूप से शुद्ध और केमिकल-मुक्त होते हैं. इन्हें इस्तेमाल करने से पहले केवल साफ पानी से हल्का धोना पर्याप्त होता है. इनमें किसी भी प्रकार का कृत्रिम कोटिंग या प्रसंस्करण नहीं होता, जिससे भोजन पूरी तरह प्राकृतिक सतह पर परोसा जाता है. यह न केवल स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित है, बल्कि पर्यावरण के लिए भी टिकाऊ और इको-फ्रेंडली विकल्प है. Add News18 as Preferred Source on Google केले के पत्ते की ऊपरी सतह पर प्राकृतिक रूप से एक मोम जैसी पतली परत पाई जाती है. जब इस पर गरमा-गरम भोजन जैसे चावल, सांभर या रसम परोसा जाता है तो यह परत हल्की गर्मी से सक्रिय होकर भोजन में एक खास सुगंध और स्वाद जोड़ देती है. इससे खाने का स्वाद और भी अधिक बढ़ जाता है और एक पारंपरिक देसी अनुभव मिलता है. यह प्राकृतिक प्रक्रिया भोजन को हल्की सौंधी खुशबू प्रदान करती है जो इंद्रियों को आकर्षित करती है. यही कारण है कि दक्षिण भारत में केले के पत्ते पर भोजन करना स्वाद और संस्कृति दोनों के लिए विशेष माना जाता है. केले के पत्ते पर्यावरण के अनुकूल विकल्प के रूप में माने जाते हैं और डिस्पोजेबल प्लास्टिक या थर्माकोल की प्लेटों का बेहतरीन विकल्प हैं. इनका उपयोग एक बार भोजन परोसने के बाद किया जाता है, जिसके बाद इन्हें आसानी से नष्ट किया जा सकता है. ये प्राकृतिक रूप से जल्दी सड़कर मिट्टी में मिल जाते हैं और कुछ समय बाद जैविक खाद में बदल जाते हैं. इससे न तो प्लास्टिक कचरा बढ़ता है और न ही पर्यावरण प्रदूषण होता है. यह परंपरा टिकाऊ जीवनशैली को बढ़ावा देती है और प्रकृति संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. दक्षिण भारत में केले के पत्ते पर भोजन परोसने की परंपरा के पीछे सांस्कृतिक और व्यावहारिक मान्यताएं हैं. पत्ता हमेशा इस तरह बिछाया जाता है कि उसका चौड़ा हिस्सा दाईं ओर और नुकीला हिस्सा बाईं ओर रहे. ऐसा इसलिए किया जाता है क्योंकि अधिकतर लोग दाएं हाथ से भोजन करते हैं जिससे दाईं ओर अधिक जगह मिलती है और चावल व मुख्य व्यंजन आसानी से परोसे जाते हैं. पत्ते के ऊपरी हिस्से में नमक, अचार, चटनी, सूखी सब्जियां और मिठाई रखी जाती हैं. निचले हिस्से में चावल, सांबर और रसम जैसे मुख्य व्यंजन परोसे जाते हैं. यह परंपरा स्वाद और व्यवस्था दोनों को संतुलित बनाती है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।








