यो लो, पीरियड्स में दिक्कत होने पर शराब पीने लगती हैं महिलाएं! खूब जोर की लगती है तलब, चॉकलेट दूसरे नंबर पर

महिलाओं में मासिक धर्म यानी पीरियड्स की शुरुआत होने से कुछ दिनों पहले से ही कुछ लक्षण नजर आने लगते हैं. किसी को पेट में दर्द होता है, तो किसी को बहुत ज्यादा मूड स्विंग, चिड़चिड़ापन, सिर दर्द होना शुरू हो जाता है. कुछ महिलाओं को तो पीरियड्स शुरू होने से पहले किसी चीज की क्रेविंग्स बहुत तेज होती है. आमतौर पर ये देखा गया है कि महिलाओं में प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम (PMS) में नमकीन, चॉकलेट, आइसक्रीम या फिर कोई भी मीठी चीजें खाने की जबरदस्त क्रेविंग होती है. अब कुछ शोधकर्ताओं के अनुसार, प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम में कुछ महिलाओं के अंदर शराब के सेवन की भी इच्छा उत्पन्न होती है. शोध के अनुसार, प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम में एल्कोहल लेने की क्रेविंग जटिल हार्मोनल बदलावों से जुड़ी हो सकती है. एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन के स्तर में उतार-चढ़ाव मस्तिष्क की रसायन प्रक्रिया, खासकर डोपामिन रिवार्ड सिस्टम, को प्रभावित करते हैं, जिससे साइकिल के कुछ चरणों में शराब अधिक आकर्षक लग सकती है. पीरियड्स के दौरान शराब की क्रेविंग क्यों बढ़ती है? कई महिलाओं को पीरियड्स आने से पहले मूड स्विंग्स, थकान, चिड़चिड़ापन और अलग-अलग तरह की क्रेविंग्स महसूस होती हैं. हाल में हुए शोध के अनुसार, कुछ महिलाओं में शराब पीने की इच्छा भी बढ़ सकती है. विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव अहम भूमिका निभाते हैं. पीरियड्स साइकिल और हार्मोन का असरआमतौर पर पीरियड्स साइकिल सामान्यतः 28 दिनों का होता है, जिसमें मुख्य रूप से दो चरण शामिल होते हैं: फॉलिक्युलर फेज- यह ओव्यूलेशन से पहले का समय होता है.ल्यूटियल फेज- यह ओव्यूलेशन के बाद और पीरियड्स शुरू होने से पहले का समय होता है. शोधों के अनुसार, शराब की क्रेविंग अक्सर उस समय बढ़ती है, जब शरीर में एस्ट्रोजन लेवल ऊपर जा रहा होता है. खासकर मिड-फॉलिक्युलर फेज और ल्यूटियल फेज के दौरान यह इच्छा अधिक महसूस हो सकती है. प्रोजेस्टेरोन में गिरावट और पीएमएसजब गर्भधारण नहीं होता, तो पीरियड्स से पहले एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन दोनों हार्मोन तेजी से गिरते हैं. इस दौरान कई महिलाओं को PMS के लक्षण महसूस हो सकते हैं. ये लक्षण निम्न हो सकते हैं. मूड स्विंग्सचिंता, स्ट्रेसचिड़चिड़ापनउदासीथकान जब आप शराब का सेवन करते हैं तो अस्थायी रूप से ये नर्वस सिस्टम को शांत करती है.डोपामिन बढ़ाती है, इसलिए कुछ महिलाओं में ये इमोशनल स्ट्रेस से राहत पाने का आसान तरीका लग सकती है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. क्या कहती है रिसर्च?2025 में हुई एक स्टडी में शोधकर्ताओं ने 21 से 35 वर्ष की महिलाओं को लगातार कई दिनों तक ट्रैक किया. उन्होंने पाया कि पीरियड्स साइकिल के दौरान शराब की क्रेविंग में स्पष्ट बदलाव दिखाई देते हैं. अध्ययन में कहा गया कि ओव्यूलेशन से पहले शराब की इच्छा अधिक हो सकती है. जब एस्ट्रोजन अधिक और प्रोजेस्टेरोन कम होता है, तब क्रेविंग बढ़ सकती है. ये हॉर्मोनल बदलाव बिंज ड्रिंकिंग से भी जुड़े हो सकते हैं. शराब क्यों नुकसानदायक हो सकती है?शराब थोड़ी देर के लिए राहत दे सकती है, लेकिन लंबे समय में यह पीएमएस के लक्षणों को और खराब कर सकती है. इससे आपकी नींद खराब हो सकती है. चिंता बढ़ सकती है, शरीर में सूजन और ब्लोटिंग हो सकती है. मूड अधिक अस्थिर हो सकता है. खासकर ल्यूटियल फेज में इसका असर ज्यादा महसूस हो सकता है. शराब की क्रेविंग को कैसे करें कंट्रोल?-अपने पीरियड्स साइकिल को ट्रैक करें.-ऐप्स या कैलेंडर की मदद से उन दिनों को पहचानें, जब cravings ज्यादा होती हैं. इससे आप पहले से खुद को तैयार कर सकती हैं.-शराब की जगह हेल्दी विकल्प चुनें, जैसे हर्बल टी, मॉकटेल, नारियल पानी पिएं.-अपनी लाइफस्टाइल को सुधारें. पर्याप्त नींद लें. संतुलित भोजन करें. मैग्नीशियम और बी-विटामिन युक्त डाइट लें.-योग, मेडिटेशन और हल्की एक्सरसाइज करें.-आप शराब पीना चाहती हैं तो मात्रा सीमित रखें. पर्याप्त पानी पिएं.– बहुत अधिक क्रेविंग हो तो एक बार विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
Health Tips: मटन-चिकन छोड़ गर्मियों में खाएं ये मछली, शरीर रहेगा ठंडा और फिट, जानिए डॉक्टर की राय

Last Updated:May 21, 2026, 12:10 IST Health Tips: मई-जून की तेज गर्मी में सही आहार चुनना बेहद जरूरी है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि सही भोजन आपको लू और कमजोरी से बचा सकता है. रोहू और कतला जैसी ताजी मछलियां इस मौसम में खास फायदेमंद हैं. ये सिर्फ शरीर को ठंडक नहीं देतीं, बल्कि इनमें मौजूद ओमेगा-3 थकान को भी जल्दी दूर करता है. जानिए क्यों इस गर्मी में मटन या चिकन के बजाय ताजी मछली चुनना बेहतर है और कौन-सी डाइट टिप्स डॉक्टर सलाह देते हैं. (रिपोर्ट: शिवांक द्विवेदी/सतना) मई-जून की तपती गर्मी में जब पारा 45 डिग्री के पार जाने लगता है तब सबसे बड़ा सवाल हमारे खान-पान को लेकर होता है. क्या इस मौसम में नॉन-वेज खाना सही है? तो चलिए जानते है कौन सी मछली आपकी सेहत के लिए सुपर फूड साबित हो सकती है? ये मछलियां न केवल आपके स्वाद का ध्यान रखेंगी बल्कि इस भीषण गर्मी में आपके शरीर को ठंडक और ताकत भी देंगी. भीषण गर्मी के मौसम में हमारा शरीर जल्दी थक जाता है और डिहाइड्रेशन की समस्या बनी रहती है. जिला पशु चिकित्सालय प्रभारी डॉ. बृहस्पति भारती ने लोकल 18 से बातचीत में कहा कि इस मौसम में रोहू और कतला जैसी मछलियां सेहत के लिए वरदान हैं. रोहू को तो मछलियों का राजा माना जाता है. डॉक्टरों का मानना है कि रोहू और कतला में भरपूर मात्रा में ओमेगा-3 फैटी एसिड पाया जाता है. यह न केवल आपके दिल का ख्याल रखता है बल्कि गर्मी के कारण होने वाली थकान और कमजोरी को दूर कर शरीर को इंस्टेंट एनर्जी देता है. Add News18 as Preferred Source on Google सबसे बड़ी बात यह है कि ये मछलियां लीन प्रोटीन का स्रोत हैं जो पेट को भारी नहीं करतीं. क्योंकि मछलियों में प्रोटीन की मात्रा चिकन और मटन से कही अधिक होती है साथ ही यह पचने में भी उनसे कहीं ज्यादा हल्की होती है. मई और जून का महीना मत्स्य पालकों के लिए भी उत्सव जैसा होता है. इसी समय तालाबों में मछलियों के बीज डाले जाते हैं और टमस व सतना जैसी नदियों में ताजी मछलियां पकड़ी जाती हैं. डॉ. भारती बताते हैं कि ग्रामीण इलाकों में लोग आज भी नदी, नालों, तालाबों में मिलने वाली पारंपरिक मछलियों जैसे सिंघी, पॉम, पाहिन और कैटफिश को काफी पसंद करते हैं. पुराने बुजुर्गों का मानना है कि प्राकृतिक बहते पानी की मछलियां ज्यादा पौष्टिक होती हैं. हालांकि, खाने वालों की अपनी पसंद होती है जहां रोहू अपने लाजवाब स्वाद के लिए जानी जाती है वहीं इसमें कांटों की संख्या थोड़ी ज्यादा होती है. जो लोग कांटों से बचना चाहते हैं उनके लिए सिंगल बोन वाली पाहिन और पॉम मछलियां बेहतरीन विकल्प साबित होती हैं. गर्मी में मछली खाते समय कुछ बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है. डॉक्टरों की सलाह है कि हमेशा ताजी मछली ही खरीदें. बासी या बर्फ में बहुत दिनों से रखी मछली पेट खराब कर सकती है. साथ ही गर्मी में मछली को बहुत ज्यादा तेल-मसाले में बनाने के बजाय हल्का ग्रिल करके या कम मसालों वाली करी बनाकर खाना ज्यादा फायदेमंद होता है. वहीं बघेलखंड के खानपान की बात करें तो यहां रोहू और कतला का क्रेज सबसे ज्यादा है. यह न केवल किफायती हैं बल्कि स्थानीय स्तर पर आसानी से उपलब्ध भी हैं. यह आपको गर्मी से लड़ने की शक्ति भी देगी और आपकी जीभ को वो खास जायका भी. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।
क्या ज्यादा धूप में रहने से मोतियाबिंद का खतरा बढ़ जाता है? डॉक्टर से जानिए क्या है सच्चाई

Last Updated:May 21, 2026, 12:09 IST Sunlight and Cataract Risk: लंबे समय तक तेज धूप में रहने से मोतियाबिंद का खतरा बढ़ सकता है. डॉक्टर तुषार ग्रोवर के अनुसार धूप में अल्ट्रावॉयलेट किरणें होती हैं, जो आंखों को नुकसान पहुंचा सकती हैं. इससे ड्राइनेस, एलर्जी, इंफेक्शन और कई तरह के आंखों के कैंसर का खतरा भी बढ़ सकता है. गर्मी में बाहर निकलते समय सनग्लासेस जरूर पहनने चाहिए. डॉक्टर की मानें तो मोतियाबिंद एक उम्र संबंधी समस्या है, लेकिन धूप से इसका खतरा थोड़ा-बहुत बढ़ जाता है. Cataract and Sun Exposure: गर्मियों में तेज धूप और अल्ट्रावॉयलेट किरणों का कहर बढ़ जाता है. अधिकतर लोग यह जानते हैं कि तेज धूप में बाहर जाने से स्किन को नुकसान होता है, लेकिन इससे आंखों को भी गंभीर नुकसान हो सकता है. गर्मी में आंखों से जुड़ी कई समस्याएं भी बढ़ जाती हैं. कई लोग मानते हैं कि ज्यादा धूप में रहने से मोतियाबिंद का खतरा बढ़ सकता है. मोतियाबिंद एक ऐसी बीमारी है, जो 50 से 60 साल की उम्र के बाद ज्यादातर लोगों को होती है. डॉक्टर से जानने की कोशिश करते हैं कि क्या वाकई तेज धूप से मोतियाबिंद का जोखिम बढ़ जाता है. दिल्ली के विजन आई सेंटर के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. तुषार ग्रोवर ने News18 को बताया मोतियाबिंद आंखों की एक आम समस्या है, जिसमें आंख के लेंस में धुंधलापन आने लगता है. इसकी वजह से चीजें साफ दिखाई नहीं देतीं और धीरे-धीरे नजर कमजोर होने लगती है. मोतियाबिंद एक एज रिलेटेड समस्या है और अधिकतर बुजुर्गों को मोतियाबिंद का ऑपरेशन कराना पड़ता है. हालांकि आंख में चोट, ज्यादा धूप में रहना और डायबिटीज के कारण कम उम्र में भी इसका रिस्क बढ़ जाता है. लंबे समय तक आंखें अल्ट्रावॉयलेट किरणों के संपर्क में रहेंगी, तो मोतियाबिंद समेत कई खतरनाक आई डिजीज का रिस्क बढ़ जाएगा. इसलिए गर्मी के मौसम में धूप से आंखों का बचाव जरूरी है, ताकि आंखें हेल्दी रहें. आंखों के लिए खतरनाक हैं UV किरणें डॉक्टर ग्रोवर के मुताबिक ज्यादा धूप और अल्ट्रावॉयलेट किरणों से मोतियाबिंद की स्पीड थोड़ी बढ़ सकती है, लेकिन इसे सबसे बड़ी वजह मानना सही नहीं होगा. UV किरणों की वजह से गर्मी में आई ड्राइनेस, एलर्जी और कंजंक्टिवाइटिस का रिस्क बढ़ जाता है. यूवी किरणों से कई तरह के आंखों के कैंसर का खतरा भी बढ़ सकता है. इसलिए लोगों को अल्ट्रावॉयलेट किरणों को लेकर लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए और इससे बचाव करने की पूरी कोशिश करनी चाहिए. यूवी किरणों से बचने के लिए क्या करें एक्सपर्ट ने बताया कि गर्मी में अपनी आंखों को हेल्दी रखने के लिए यूवी किरणों से प्रोटेक्ट करने वाले सनग्लासेस पहनें. अगर यूवी प्रोटेक्शन वाला चश्मा न हो, तो नॉर्मल सनग्लासेस भी पहन सकते हैं. इससे भी कुछ हद तक आंखों का बचाव होगा. गर्मी में बाहर धूप में निकलने से बचें और दोपहर के वक्त घर में अंदर रहने की कोशिश करें. आंखों में ड्राइनेस होने पर लुब्रिकेंट ड्रॉप्स का इस्तेमाल करें. पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं, ताकि आंखों की नमी बरकरार रहे. अगर किसी तरह की परेशानी हो, तो डॉक्टर से संपर्क करें और सही इलाज कराएं. आंखों को लेकर लापरवाही बिल्कुल न बरतें. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 हिंदी की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें
ग्रीष्मकाल में बच्चों के लिए ठंडक देने वाले खाद्य पदार्थ: गर्म पेय पदार्थ गर्मी का तोड़…बच्चों के आहार में शामिल करें ये 6 चीजें, लू और डायहाइड्रेशन से वास्तविक छुट्टी

21 मई 2026 को 12:05 IST पर अद्यतन किया गया गर्मियों में बच्चों के लिए ठंडे खाद्य पदार्थ: गर्मी का पारा चढ़ा ही बच्चों की सेहत को लेकर चिंता का विषय है। लू और चिलचिलाती धूप इस मौसम में बच्चे सबसे जल्दी बीमार होते हैं। ऐसे में इनके ‘कूलिंग फूड्स’ में विशेष रूप से आमंत्रित तासीर वाली सामग्रियों को शामिल किया जाना बेहद जरूरी है। अनुसरण करना : तरबूज में 92% पानी होता है, जो बच्चों के शरीर में पानी की कमी नहीं होती है। विटामिन ए और सी प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जो बच्चों की इम्युनिटी की सराहना करते हैं और विटामिन ए और सी प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। छवि: फ्रीपिक खेड़ा शरीर के तापमान को नियंत्रित करने में मदद करता है। इसमें मौजूद शाकाहारी बच्चों के पाचन को मापा जाता है। गर्मी में बच्चों को प्लास्टिक के मसाले पर चॉकलेट मसाला छिड़क कर बिस्कुट के रूप में डालें। छवि: फ्रीपिक दही में मौजूद प्रोबायोटिक्स पेट को ठंडा रखते हैं और लू से बचाते हैं। बच्चों को मीठी लस्सी, छाछ या समुद्री फलों के साथ दही देना सबसे अच्छा विकल्प है। छवि: फ्रीपिक कोको पानी इलेक्ट्रोलाइट्स इलेक्ट्रोलाइट्स की प्रचुरता होती है, जो कि डायमंड्स के कारण शरीर से बाहर निकलता है। यह थकान को दूर करता है और बच्चों को सांस्कृतिक गतिविधि में बनाए रखता है। छवि: इंस्टाग्राम सत्तू का शर्बत बच्चों को लू से बच में सबसे बड़ा अपहरण माना जाता है। यह प्रोटीन का भी अच्छा स्रोत है और बच्चों का पेट लंबे समय तक भरा हुआ महसूस होता है। छवि: इंस्टाग्राम तेज धूप और खेल कूद के कारण बच्चे जल्दी थक जाते हैं। नींबू पानी में मौजूद कार्बोहाइड्रेट और पोषक तत्व बच्चों को बिना किसी कृत्रिम शर्करा या ठंडे पेय के तत्काल ऊर्जा देते हैं। छवि: फ्रीपिक द्वारा प्रकाशित: आर्या पांडे प्रकाशित 21 मई 2026 12:05 IST (टैग्सटूट्रांसलेट)बच्चों के लिए ग्रीष्मकालीन आहार चार्ट(टी)बच्चों में निर्जलीकरण को कैसे रोकें(टी)बच्चों के लिए स्वस्थ ग्रीष्मकालीन भोजन(टी)गर्मियों में बच्चों के लिए सबसे अच्छा हाइड्रेटिंग पेय(टी)बच्चे के पेट के लिए दही चावल के फायदे(टी)बच्चों के लिए प्राकृतिक इलेक्ट्रोलाइट्स(टी)बच्चों को लू से बचाने के लिए बेल का शरबत(टी)माता-पिता के लिए ग्रीष्मकालीन स्वास्थ्य देखभाल युक्तियाँ(टी)गर्मी में बच्चों का आहार चार्ट(टी) आहार से संबंधित आहार
असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने विधायक के रूप में शपथ ली

असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने नए विधानसभा क्षेत्र के पहले दिन विधायक के रूप में शपथ ली। असम विधानसभा के अस्थायी अध्यक्ष चंद्र मोहन पटवारी ने शर्मा को 16वीं विधानसभा के सदस्य के रूप में शपथ दिलाई। शर्मा ने असमिया भाषा में शपथ ली. अंतरिम अध्यक्ष पटवारी ने कहा, ‘सभी सदस्य अपनी इच्छानुसार किसी भी अनुमोदित भाषा में शपथ ले सकते हैं। वे अपनी शपथ की शुरुआत विधानसभा कार्यालय में जमा कर सकते हैं। ‘मुख्यमंत्री के बाद, अन्य नामों ने भी असमिया, डेमोक्रेट, बोडो और संस्कृत जैसे विभिन्न समुद्रों में शपथ ली। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) ने राज्य विधानसभा चुनाव में ऐतिहासिक जीत हासिल की, जिसमें 126 विधान सभाओं में 102 पर जीत दर्ज की गई। इस गठबंधन में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी), असम गण परिषद (बीजेपी) और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) शामिल हैं। बीजेपी ने अकेले 82 रनों पर जीत हासिल की, जबकि बीजेपी और बीपीएफ ने 10-10 पर जीत हासिल की. इसके अलावा, छह ऑर्केस्ट्रा के डेमोक्रेटिक एलायंस का हिस्सा क्रांतिकारी कांग्रेस और रायजोर दल ने क्रमशः 19 और दो प्रतिभागियों का प्रदर्शन किया। इसके अलावा अकेले चुनावी मैदान में उतरने वाले ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूपी दोष) ने दो और विपक्षी कांग्रेस ने एक सीट पर जीत हासिल की। यह भी पढ़ें: ‘पार्टी ने कूड़ा-कचरा’, बंगाल चुनाव में हार के बाद टीएमसी में फूटा पत्ता! ममता बनर्जी की मुसीबत, उगलने लगे विधायक (टैग्सटूट्रांसलेट)हेमंत बिस्वा सरमा(टी)असम
बिहार चुनाव में हार के बाद प्रशांत किशोर ने अपना ठिकाना पटना आश्रम में स्थानांतरित किया: ‘अगले चुनाव तक मेरा निवास’ | भारत समाचार

आखरी अपडेट:21 मई, 2026, 11:40 IST प्रशांत किशोर अगले बिहार चुनाव तक शेखपुरा हाउस से आईआईटी पटना के पास बिहार नवनिर्माण आश्रम में शिफ्ट हो गए हैं। जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने पीटीआई के साथ एक साक्षात्कार में कहा। जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने बुधवार को घोषणा की कि वह बिहार में अगले विधानसभा चुनाव होने तक पटना के बाहरी इलाके में स्थित एक आश्रम में चले गए हैं। बिहार के दरभंगा में पत्रकारों से बात करते हुए, प्रशांत किशोर ने कहा, “पिछली रात, मैं पटना में उस जगह से बाहर चला गया जहां मैं रह रहा था। आईआईटी-पटना के करीब स्थित बिहार नवनिर्माण आश्रम, अगले विधानसभा चुनावों तक मेरा निवास स्थान होगा, जब जन सुराज पार्टी, उम्मीद है, प्रभाव डालेगी।” हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों से पहले अपनी पार्टी शुरू करने के बाद चुनावी रणनीतिकार से नेता बने ने एक आश्रम में स्थानांतरित होने का फैसला किया, लेकिन एक भी सीट जीतने में असफल रहे। अब तक, प्रशांत किशोर ‘शेखपुरा हाउस’ से काम कर रहे थे, जो पटना हवाई अड्डे के करीब एक विशाल बंगला है। यह घर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व बीजेपी सांसद उदय सिंह के परिवार के पास है. यह भी पढ़ें: क्या तमिलनाडु में विजय लहर के पीछे प्रशांत किशोर हैं? जन सुराज नेता का पुराना वीडियो वायरल सिंह बिहार के प्रमुख राजनीतिक परिवारों में से एक हैं। उनके बड़े भाई एनके सिंह 15वें वित्त आयोग के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व राज्यसभा सांसद हैं, और उनकी दिवंगत मां, माधुरी सिंह, पूर्णिया से सांसद और एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता थीं। प्रशांत किशोर ने बिहार कैबिनेट में अपने बेटे को शामिल करने को लेकर नीतीश पर निशाना साधा प्रशांत किशोर ने अपने बेटे के राज्य का स्वास्थ्य मंत्री बनने के बाद बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की आलोचना की। किशोर ने कहा, “चुनाव के बाद जो मुख्यमंत्री के रूप में चुना गया, वह आर्थिक संकट के कारण होने वाले प्रवासन को रोकने में असमर्थ था। इसके बजाय, उन्होंने खुद प्रवासन का फैसला किया, लेकिन यह सुनिश्चित करने से पहले नहीं कि उनके बेटे को पैर जमाने का मौका मिले।” उन्होंने बिहार के मतदाताओं से अपील की कि वे अपने हितों को प्राथमिकता दें और जाति, धर्म या मौद्रिक प्रलोभन के आधार पर अपना वोट न डालें। यह भी पढ़ें: सुनेत्रा पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी एक और विभाजन की ओर बढ़ रही है? प्रशांत किशोर से मुलाकात के बाद चर्चा बढ़ी किशोर ने कहा, “बिहार के लोगों को वोट देते समय अपने बच्चों के भविष्य के बारे में जरूर सोचना चाहिए। उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, नीतीश कुमार या लालू प्रसाद जैसे नेताओं के बहकावे में नहीं आना चाहिए और न ही 10,000 रुपये में अपना वोट बेचना चाहिए।” इस बयान को विधानसभा चुनाव से पहले शुरू की गई मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना पर स्पष्ट प्रहार के रूप में देखा गया, जिसके तहत 1.5 करोड़ से अधिक महिलाओं को 10,000 रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की गई थी। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया बिहार चुनाव में हार के बाद प्रशांत किशोर ने अपना ठिकाना पटना आश्रम में स्थानांतरित किया: ‘अगले चुनाव तक मेरा निवास’ अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)प्रशांत किशोर बिहार की राजनीति(टी)जन सुराज पार्टी(टी)बिहार विधानसभा चुनाव(टी)बिहार नवनिर्माण आश्रम(टी)नीतीश कुमार आलोचना(टी)बिहार कैबिनेट में फेरबदल(टी)मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना(टी)बिहार के स्वास्थ्य मंत्री
Summer Skin care: गर्मियों में ऐसे रखें अपनी त्वचा का ख्याल, दूर होगी सनबर्न और टैनिंग की समस्या, चेहरे पर आएगा नेचुरल ग्लो

होमफोटोलाइफ़फैशन गर्मियों में ऐसे रखें अपनी त्वचा का ख्याल, दूर होगी सनबर्न और टैनिंग की समस्या Last Updated:May 21, 2026, 11:31 IST How To Care Skin In Summer: गर्मी का मौसम अपने साथ त्वचा संबंधी कई समस्याएं लेकर आता है. इस मौसम में लगभग हर किसी को त्वचा से जुड़ी कई समस्याएं होने लगती हैं. इस मौसम में लापरवाही आपकी स्किन को डैमेज कर सकती है, जिससे टैनिंग, सनबर्न और मुहांसों जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ने लगती हैं. गर्मियों में भी अपनी त्वचा को मुलायम और चमकदार बनाए रखने के लिए इन टिप्स को अपनाएं. (रिपोर्ट: शिवांक द्विवेदी/सतना) गर्मियों की तेज धूप, बढ़ता तापमान और उमस भरा मौसम त्वचा के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है. इस मौसम में लापरवाही आपकी स्किन को डैमेज कर सकती है, जिससे टैनिंग, सनबर्न और मुहांसों जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ने लगती हैं लेकिन अगर सही समय पर सही देखभाल की जाए, तो यही मौसम आपकी त्वचा को नैचुरल ग्लो भी दे सकता है. लोकल 18 से बातचीत में सतना के विशेषज्ञों ने बताया कि तेज धूप में ज्यादा देर तक रहने से त्वचा झुलस जाती है और काली पड़ने लगती है, जिसे सनबर्न और टैनिंग कहा जाता है. कुछ आसान आदतें अपनाकर आप अपनी त्वचा को हेल्दी, फ्रेश और चमकदार बनाए रख सकते हैं. कामदगिरि आयुर्वेद क्लिनिक के डॉ. सूरज कुशवाहा ने बताया कि गर्मियों में सबसे जरूरी है त्वचा को सूरज की हानिकारक किरणों से बचाना. भीषण गर्मी पड़ रही है और गर्मी के दिनों में छोटे बच्चों की त्वचा पर स्किन रैशेज और घमौरियां होना आम बात है. वहीं शरीर को हाइड्रेट रखना भी बेहद अहम है, इसलिए भरपूर पानी पीना और रसदार फलों का सेवन करना चाहिए.धूप में निकलते समय चेहरे को कपड़े या स्कार्फ से ढकना स्किन प्रोटेक्शन के लिए बेहद कारगर उपाय है. Add News18 as Preferred Source on Google आयुर्वेद में गर्मियों के मौसम में पित्त दोष बढ़ जाता है, जो त्वचा संबंधी समस्याओं की मुख्य वजह बनता है. ज्यादा धूप में रहना, मसालेदार भोजन और कम पानी पीना इस समस्या को और बढ़ा सकता है. इससे बचने के लिए लोगों को छांव में रहना, हल्के और सूती कपड़े पहनना और ठंडी तासीर वाले खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए. गर्मियों में पसीने की ग्रंथियां बंद होने से घमौरियां हो जाती हैं, जिसमें लाल दाने, खुजली और जलन की समस्या होती है. इससे राहत पाने के लिए मुल्तानी मिट्टी और गुलाब जल का लेप बेहद फायदेमंद है. इसके अलावा बर्फ को कपड़े में लपेटकर प्रभावित जगह पर लगाने से ठंडक मिलती है. वहीं नीम की पत्तियों को उबालकर उस पानी से नहाना या पेस्ट बनाकर लगाना भी एंटीबैक्टीरियल असर देता है. तेज धूप में ज्यादा देर रहने से त्वचा झुलस जाती है और काली पड़ने लगती है, जिसे सनबर्न और टैनिंग कहा जाता है. इससे बचने के लिए ताजा एलोवेरा जेल त्वचा पर लगाने से जलन और लालिमा कम होती है. इसके अलावा दही और बेसन का पेस्ट टैनिंग हटाने में असरदार माना जाता है. वहीं खीरे का रस त्वचा को ठंडक और हाइड्रेशन देता है, जिससे स्किन फ्रेश बनी रहती है. गर्मी में पसीने और नमी के कारण फंगल इंफेक्शन जैसे दाद और खुजली की समस्या बढ़ जाती है. इसके लिए नारियल तेल, नीम, दही और नींबू का इस्तेमाल फायदेमंद हो सकता है. वहीं चेहरे पर जमा तेल और गंदगी रोमछिद्रों को बंद कर देती है, जिससे बैक्टीरिया पनपते हैं और मुहांसे बढ़ जाते हैं. दिनभर की धूल और पसीने के बाद रात में त्वचा को आराम देना भी उतना ही जरूरी है, इसलिए सोने से पहले नारियल तेल से हल्की मालिश करना चाहिए क्योंकि इससे त्वचा को पोषण मिलता है और खुजली और रैशेज में राहत मिलती है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।
तमिलनाडु कांग्रेस कैबिनेट: 59 साल बाद तमिलनाडु कांग्रेस कैबिनेट में शामिल, दो नेता आज खरीदे गए मंत्री पद की शपथ

तमिलनाडु कांग्रेस कैबिनेट: लगभग छह दशकों में पहली बार कांग्रेस तमिल कैबिनेट का हिस्सा बन रही है। पार्टी के दो नेता गुरुवार को तमिलंगा वेट्री कज़गम (टीवीके) के नेतृत्व वाली सरकार में मंत्री पद की शपथ लेने वाले हैं। यह घोषणा तब हुई, जब कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ़ विजय के नेतृत्व वाली राज्य सरकार में कांग्रेस एलिजाबेथ एस. कुमार और पी. राजेश विश्वनाथन को शामिल करने की मंजूरी दी। इस कदम को तमिल के समुद्री राजनीतिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण कदम और टीवीके सरकार के समर्थन वाले गठबंधन को मजबूत करने का एक अहम हिस्सा माना जा रहा है। सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से इस घटना की पुष्टि की गई और इसे पार्टी के लिए एक ऐतिहासिक महल स्मारक के.सी.सी. के रूप में प्रस्तुत किया गया। वेणुगोपाल ने कहा, “यह हमारे लिए एक ऐतिहासिक अवसर है क्योंकि कांग्रेस 59 साल लंबे अंतराल के बाद तमिलनाडु मंत्रिमंडल में शामिल हो रही है।” वे दोनों नेताओं ने अपनी सहमति भी जताई और विश्वास जताया कि वे एक कल्याण-शादीशाह मॉडल को आगे बढ़ाने वाले ट्रेलर में जनता के सवालों को पूरा करने की दिशा में काम करेंगे। तमिलनाडु विधानसभा में कांग्रेस के अभी 5 विधायक और चुनाव के बाद यह टीवीके सरकार की प्रमुख सहायक शक्ति के रूप में उभरी है। कांग्रेस द्वारा समर्थित, वामपंथी विचारधारा, वीसीके और एआईयू शैली सहित अन्य गठबंधन सहयोगियों के साथ मिलकर विजय के नेतृत्व वाले प्रशासन को विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा आसानी से पार करने में समर्थन साबित हुआ। राजनीतिक पर्यवेक्षक कांग्रेस विधान में शामिल होने जाने को मंत्रिमंडल विस्तार की एक सामान्य प्रक्रिया से कहीं अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। इसे टीवीके नेतृत्व द्वारा गठबंधन प्रबंधन को मजबूत करने और राजनीतिक स्थिरता बनाए रखने के लिए सहयोगी कंपनियों को अधिक प्रतिनिधित्व देने के लिए एक सोची-समझदारी रणनीति वाला कदम उठाने पर विचार किया जा रहा है। गुरुवार को होने वाले शपथ ग्रहण समारोह में तमिलनाडु की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत करने वाला माना जा रहा है, जिसमें कांग्रेस लगभग छह दशक के अंतराल के बाद राज्य में मंत्री पद की जिम्मेदारी के लिए नियुक्ति के लिए लौट रही है।
नौतपा में 50 डिग्री तक पहुंच सकता है पारा, इस बार कब पड़ेंगे साल के 9 सबसे गर्म दिन, अभी से हो जाएं अलर्ट

Extreme Heat Warning in India: देश के कई राज्यों में गर्मी ने अभी से लोगों की परेशानी बढ़ानी शुरू कर दी है. मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में तापमान और तेजी से बढ़ सकता है. इसी बीच लोग नौतपा को लेकर भी चर्चा कर रहे हैं, जिसे साल के सबसे गर्म दिनों में गिना जाता है. मान्यता है कि नौतपा के दौरान सूर्य की किरणें सीधे धरती पर ज्यादा प्रभाव डालती हैं, जिसकी वजह से भीषण गर्मी पड़ती है. नौतपा में कई इलाकों में तापमान 45 से 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है. ऐसे में लोगों को सावधानी बरतनी होगी, ताकि सेहत को नुकसान न हो. नौतपा को लेकर कई धार्मिक मान्यताएं भी हैं. क्या होता है नौतपा? हिंदू पंचांग और ज्योतिष के अनुसार जब सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करता है, तब नौतपा की शुरुआत मानी जाती है. यह अवधि लगातार 9 दिनों तक चलती है और इसे साल के सबसे गर्म दिनों का समय माना जाता है. इस दौरान सूर्य की तपिश सबसे ज्यादा महसूस होती है और उत्तर भारत समेत कई हिस्सों में लू का असर काफी बढ़ जाता है. इस साल कब शुरू होगा नौतपा? इस बार नौतपा 25 मई से शुरू होकर 2 जून तक रहने की संभावना है. इन 9 दिनों के दौरान दिन का तापमान सामान्य से काफी ज्यादा रह सकता है. मौसम विभाग के मुताबिक राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और मध्य भारत के कई हिस्सों में तेज गर्मी और हीटवेव की स्थिति बन सकती है. कितना बढ़ सकता है तापमान? नौतपा के दौरान आमतौर पर तापमान 47 से 48 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहता है. कई इलाकों में तो तापमान 45 से 52 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है. तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण हीटवेव की स्थिति बन सकती है नौतपा क्यों पड़ता है? वैज्ञानिकों के अनुसार इस समय सूर्य कर्क रेखा के करीब पहुंचता है. इससे सूर्य की किरणें ज्यादा सीधी और तीखी हो जाती हैं, जिसके कारण धरती का तापमान तेजी से बढ़ता है. इसका सेहत पर क्या असर पड़ता है? नौतपा में अत्यधिक गर्मी के कारण हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है. लोगों को डिहाइड्रेशन और कमजोरी महसूस हो सकती है. कई बार चक्कर आने और थकान की शिकायत बढ़ जाती है. नौतपा में बुजुर्गों और बच्चों को ज्यादा सावधानी की जरूरत होती है, क्योंकि उनका शरीर ज्यादा सेंसिटिव होता है. नौतपा में सभी लोगों को अत्यधिक सावधानी बरतनी चाहिए. नौतपा में कैसे करें बचाव? दोपहर 12 बजे से 4 बजे तक धूप में निकलने से बचेंज्यादा से ज्यादा पानी और समय-समय पर ORS पिएंहल्की और लिक्विड डाइट लें, सूती और ढीले कपड़े पहनेंबाहर निकलते समय सिर और चेहरे को ढककर रखें नौतपा को लेकर धार्मिक मान्यताएं धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नौतपा में सूर्य देव की तपिश सबसे अधिक होती है. इस दौरान सूर्य देव की पूजा, जल अर्पित करना और मंत्र जाप करना शुभ माना जाता है. मान्यता है कि इससे स्वास्थ्य, ऊर्जा और सकारात्मकता मिलती है. कहा जाता है कि नौतपा जितना तेज पड़ता है, मानसून उतना ही अच्छा होता है. पुराने समय में किसान इसे अच्छी बारिश और बेहतर फसल का संकेत मानते थे. नौतपा को तप का समय भी माना जाता है. धार्मिक रूप से यह आत्मसंयम, साधना और धैर्य का प्रतीक माना जाता है. कई लोग इस दौरान व्रत, दान-पुण्य और पूजा-पाठ करते हैं. भीषण गर्मी के कारण इस समय प्यासे लोगों और जानवरों को पानी पिलाना पुण्य का काम माना जाता है. कई जगहों पर प्याऊ लगाई जाती हैं और जल सेवा की जाती है.
फाल्टा सीट पर दोपहर 3 बजे तक 74.1% मतदान, बीजेपी उम्मीदवार देबांगशु पांडा का दावा- एक से एक लाख टिपण्णी से जीत दर्ज करें

फाल्टा विधानसभा क्षेत्र में 29 अप्रैल को हुए मतदान को रद्द कर दिया गया, जिसके बाद आज गुरुवार (21 मई, 2026) को सामूहिक मतदान आयोजित किया जा रहा है। इस बार चुनाव आयोग कोई जोखिम नहीं लेना चाहता, इसलिए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मतदान हो रहा है। चुनाव आयोग ने 29 अप्रैल की वोटिंग में गड़बड़ी की वजह से उसे रद्द कर दिया था और पुनर्मतदान का आदेश दिया था। वहीं, चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, फाल्टा सीट पर दोपहर तीन बजे तक 74.1 प्रतिशत वोट हो गए। चुनाव के दौरान, इस बार फाल्टा क्षेत्र के सभी 285 मतदान केंद्रों पर केंद्रीय अर्धसैनिक सेना आयोग को मजबूत बनाया गया है। हर बूथ पर आठ सीएफ़ जवानों के जवान तैनात थे, जबकि 29 अप्रैल के मतदान के दौरान हर बूथ पर केवल चार जवानों की टुकड़ियाँ रखी गई थीं। इस बार पूरे क्षेत्र में लगभग 35 एजेंसियों के केंद्रीय बल स्थापित किये गये हैं। किसी भी तरह की गड़बड़ी से बहाली के लिए 30 क्विक रिस्पॉन्स रिकॉर्ड भी तैयार किए गए हैं। साथ ही हर बूथ के अंदर वेब कैमरा और बाहर एक अतिरिक्त कैमरा लगाया गया है। यह भी पढ़ें: फाल्टा उपचुनाव: पश्चिम बंगाल की फाल्टा सीट पर सामूहिक मतदान शुरू, 285 बूथों पर भारी संख्या में केंद्रीय दल, टीएमसी की दावेदारी जहां जागीर खान मैदान से बाहर संपूर्ण मतदान प्रक्रिया की लाइव वेबकास्टिंग की जाएगी। चुनाव प्रक्रिया की निगरानी जिला प्रशासन और मुख्य चुनाव अधिकारी द्वारा की जाएगी। वहीं, अनंतिम उम्मीदवार जहां जागीर खान ने चुनावी संग्राम से स्नातक की उपाधि प्राप्त की है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की विशेष पत्रिका की घोषणा के बाद उन्होंने यह फैसला लिया. उन्होंने यह भी कहा कि उनका सपना “गोल्डन फाल्टा” बनाना और क्षेत्र में शांति स्थापित करना था। एक लाख निवेश से जीतूंगावहीं बीजेपी उम्मीदवार देबांगशु पांडा ने दोबारा मतदान में बड़ी जीत का दावा किया है. उन्होंने कहा कि बीजेपी फल्टा सीट पर एक से एक लाख करोड़ रुपये के अंतर से जीत दर्ज करें. पांडा ने आरोप लगाया कि पहले मतदान के दौरान कई बूथों पर भारी गड़बड़ी हुई थी. उन्होंने दावा किया कि कुछ जगहों पर बीजेपी के चुनाव में सेलोटेप का इस्तेमाल किया गया और कुज़कर मतदान प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की गई। बीजेपी ने इन गठबंधन को लेकर चुनाव आयोग से पार्टी मतदान की मांग की थी, जिसके बाद आयोग ने दोबारा मतदान का फैसला लिया. अब पूरे राज्य की नजर फलता पर टिकी हुई है, जहां सीक्वल सुरक्षा और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच आज अपने फ्रैंचाइज़ी का इस्तेमाल किया जाएगा।






