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पाकिस्तान में आतंकी हमजा बुरहान की गोली मारकर हत्या:पुलवामा हमले का मास्टरमाइंड था, 2022 में UAPA के तहत आतंकी घोषित हुआ

पाकिस्तान में आतंकी हमजा बुरहान की गोली मारकर हत्या:पुलवामा हमले का मास्टरमाइंड था, 2022 में UAPA के तहत आतंकी घोषित हुआ

पुलवामा आतंकी हमले के कथित मास्टरमाइंड हमजा बुरहान की पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) में गोली मारकर हत्या कर दी गई। बताया जा रहा है कि POK में अज्ञात हमलावरों ने हमजा बुरहान को निशाना बनाकर कई गोलियां चलाईं। हमले के बाद उसकी मौके पर ही मौत हो गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, हमजा बुरहान लंबे समय से पाकिस्तान और POK में सक्रिय था। उसे 2019 के पुलवामा आतंकी हमले की साजिश रचने वालों में शामिल माना जाता था। इस हमले में 40 जवान शहीद हुए थे। भारत सरकार ने 2022 में हमजा बुरहान को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम UAPA के तहत आतंकी घोषित किया था।

वायरल कॉकरोच जनता पार्टी का एक्स अकाउंट भारत में रोका गया, संस्थापक ने लॉन्च किया नया हैंडल | भारत समाचार

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आखरी अपडेट:21 मई, 2026, 15:04 IST 200K से अधिक फॉलोअर्स हासिल करने के बाद भारत में कॉकरोच जनता पार्टी का एक्स अकाउंट बंद कर दिया गया, संस्थापक अभिजीत डुबके ने एक नया हैंडल बनाने की घोषणा की। भारत में कॉकरोच जनता पार्टी के एक्स अकाउंट पर प्रतिबंध और नए हैंडल की घोषणा का स्क्रीनग्रैब। (स्रोत: एक्स) देश की जेन जेड के बीच बढ़ती लोकप्रियता के बीच कॉकरोच जनता पार्टी का एक्स अकाउंट गुरुवार को भारत में रोक दिया गया। एक्स पर अकाउंट बैन करने की पुष्टि करते हुए पार्टी के संस्थापक अभिजीत डुपके ने एक स्क्रीनशॉट पोस्ट किया, जिसमें दिखाया गया कि अकाउंट को भारत में बैन कर दिया गया है। पोस्ट में उन्होंने लिखा, ”जैसा कि उम्मीद थी, कॉकरोच जनता पार्टी का अकाउंट भारत में रोक दिया गया है।” संस्थापक ने आगे दावा किया कि खाते पर प्रतिबंध लगा दिया गया था क्योंकि उसके 200K से अधिक अनुयायी थे। उन्होंने कहा, “कॉकरोच जनता पार्टी का अकाउंट 16 मई को शुरू किया गया था। 4 दिनों के भीतर अकाउंट पर प्रतिबंध लगा दिया गया क्योंकि इसे 200K से ज्यादा फॉलोअर्स मिल गए थे।” कॉकरोच जनता पार्टी का अकाउंट 16 मई को शुरू हुआ था। 4 दिन के अंदर ही अकाउंट को 200K से ज्यादा फॉलोअर्स मिलने के कारण बैन कर दिया गया। pic.twitter.com/q93MTXIbrm – अभिजीत डुपके (@abhajet_dipke) 21 मई 2026 एक घंटे के भीतर डुपके ने घोषणा की कि उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कॉकरोच जनता पार्टी का एक नया अकाउंट बनाया है। यह भी पढ़ें: कॉकरोच जनता पार्टी ने इंस्टाग्राम पर मारा जैकपॉट, 5 दिनों में बने 11 मिलियन से ज्यादा फॉलोअर्स सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जबरदस्त वृद्धि के बीच एक्स पर कॉकरोच जनता पार्टी का अकाउंट ब्लॉक कर दिया गया। कॉकरोच जनता पार्टी क्या है? “कॉकरोच जनता पार्टी” शब्द की उत्पत्ति हाल ही में एक अदालती सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत द्वारा कथित तौर पर की गई टिप्पणी पर व्यंग्यात्मक प्रतिक्रिया के रूप में हुई थी। कार्यवाही के दौरान, सीजेआई ने कथित तौर पर कुछ बेरोजगार युवाओं और सोशल मीडिया कार्यकर्ताओं को “कॉकरोच” और “परजीवी” के रूप में संदर्भित किया था, जिसकी ऑनलाइन व्यापक आलोचना हुई थी। कुछ ही दिन पहले सोशल मीडिया पर एक मेम-संचालित विरोध अभियान के रूप में जो शुरू हुआ वह तेजी से एक वायरल डिजिटल आंदोलन में विकसित हो गया है, जो बेरोजगारी, परीक्षा पेपर लीक, राजनीतिक बयानबाजी और संस्थागत जवाबदेही के आसपास के सवालों से निराश युवाओं के साथ दृढ़ता से गूंज रहा है। यह भी पढ़ें: कौन हैं अभिजीत डुबके? वायरल कॉकरोच जनता पार्टी के पीछे का दिमाग अपने व्यंग्यपूर्ण लहजे के बावजूद, समूह के घोषणापत्र में कई गंभीर राजनीतिक मांगें शामिल हैं। इनमें पूर्व मुख्य न्यायाधीशों को सेवानिवृत्ति के बाद राज्यसभा पद स्वीकार करने से रोकना, चुनाव आयोग की जवाबदेही बढ़ाना, संसद और मंत्री पदों में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करना और मीडिया स्वामित्व और रोजगार अधिकारों से संबंधित सुधार पेश करना शामिल है। इस आंदोलन ने हास्य, मीम्स और तीखी राजनीतिक टिप्पणियों पर बहुत अधिक भरोसा किया है, जिससे इसे कम समय में ऑनलाइन बड़े पैमाने पर लोकप्रियता हासिल करने में मदद मिली है। जैसे-जैसे इस चलन ने गति पकड़ी, सोशल मीडिया प्रभावितों द्वारा लॉन्च किया गया “इंडियन नेशनल कॉकरोचेस” नामक एक और पैरोडी संगठन भी ऑनलाइन सामने आया। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया वायरल कॉकरोच जनता पार्टी का एक्स अकाउंट भारत में रोका गया, संस्थापक ने नया हैंडल लॉन्च किया अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)कॉकरोच जनता पार्टी(टी)एक्स अकाउंट रोक दिया गया(टी)सोशल मीडिया प्रतिबंध भारत(टी)जेन जेड राजनीतिक आंदोलन(टी)व्यंग्यात्मक राजनीतिक पार्टी(टी)मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत टिप्पणी(टी)वायरल डिजिटल विरोध(टी)बेरोजगारी और युवा सक्रियता

लू लगने पर पैरासिटामोल क्यों हो जाती है बेअसर, हीट स्ट्रोक का शिकार होने पर क्या करें, यहां जानें सबकुछ

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Last Updated:May 21, 2026, 14:36 IST Heat Stroke Prevention Tips: हीट स्ट्रोक एक इमरजेंसी कंडीशन है, जिसमें शरीर का टेंपरेचर 40 डिग्री या इससे ज्यादा हो जाता है. डॉक्टर्स के अनुसार हीट स्ट्रोक होने पर शरीर को तुरंत ठंडा करना और मेडिकल मदद लेना जरूरी है, वरना व्यक्ति की जान जा सकती है. हीट स्ट्रोक में पैरासिटामोल दवा भी काम नहीं करती है, क्योंकि कोर टेंपरेचर बाहरी कारणों से बढ़ता है. गर्मी हीट स्ट्रोक से बचने के लिए धूप में बाहर न निकलें. Can Paracetamol Help in Heat Stroke: देश के कई हिस्सों में इस वक्त गर्मी से बुरा हाल है. आसमान से आग बरस रही है और गर्म हवाएं लोगों का जीना मुश्किल कर रही हैं. कई जगहों पर भीषण हीटवेव यानी लू चल रही है. तेज धूप और अत्यधिक तापमान शरीर पर गंभीर असर डाल सकते हैं. कई लोग लू लगने पर बुखार समझकर पैरासिटामोल खा लेते हैं, लेकिन एक्सपर्ट्स के मुताबिक हीट स्ट्रोक में यह दवा अक्सर असरदार नहीं होती. ऐसे में यह समझना बेहद जरूरी है कि लू लगने और सामान्य बुखार में क्या फर्क होता है और हीट स्ट्रोक की स्थिति में तुरंत क्या करना चाहिए. लखनऊ के मेदांता हॉस्पिटल के इमरजेंसी डिपार्टमेंट के हेड डॉ. लोकेंद्र गुप्ता ने News18 को बताया जब गर्म हवाएं और धूप के कारण हमारे शरीर का कूलिंग सिस्टम फेल हो जाता है, तब इस कंडीशन को हीट स्ट्रोक कहा जाता है. हीट स्ट्रोक के कारण शरीर का कोर टेंपरेचर तेजी से बढ़कर 40°C या उससे ज्यादा हो जाता है और शरीर खुद को ठंडा रखने में असफल हो जाता है. समय पर इलाज न मिलने पर यह हीट स्ट्रोक जानलेवा साबित हो सकता है. हीट स्ट्रोक के दौरान शरीर में कई गंभीर लक्षण दिखाई दे सकते हैं. इनमें तेज बुखार, चक्कर आना, अत्यधिक कमजोरी, सिरदर्द, उल्टी, भ्रम की स्थिति, तेज धड़कन, ड्राई स्किन और बेहोशी शामिल हो सकते हैं. कई बार मरीज को पसीना आना भी बंद हो जाता है, जो गंभीर संकेत माना जाता है. लू लगने पर पैरासिटामोल क्यों नहीं करती असर? डॉक्टर के अनुसार पैरासिटामोल सामान्य बुखार में इसलिए काम करती है, क्योंकि वह शरीर के तापमान को कंट्रोल करने वाले ब्रेन के हिस्से पर असर डालती है. हीट स्ट्रोक में शरीर का तापमान संक्रमण की वजह से नहीं, बल्कि बाहरी गर्मी और शरीर की कूलिंग सिस्टम फेल होने की वजह से बढ़ता है. इसलिए पैरासिटामोल इस स्थिति में ज्यादा फायदा नहीं पहुंचाती है. हीट स्ट्रोक में पैरासिटामोल लेने से बचना चाहिए. अगर किसी व्यक्ति में हीट स्ट्रोक के लक्षण दिखाई दें, तो उसे तुरंत ठंडी और छायादार जगह पर ले जाएं. शरीर का तापमान कम करने के लिए गीले कपड़े या ठंडे पानी की पट्टियां इस्तेमाल करें. पंखा या कूलर चलाएं और अगर व्यक्ति होश में है, तो उसे पानी या ORS पिलाने की कोशिश करें. किन लोगों को ज्यादा खतरा और कैसे करें बचाव? एक्सपर्ट की मानें तो छोटे बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और पहले से बीमार लोग हीट स्ट्रोक के ज्यादा शिकार हो सकते हैं. जो लोग लंबे समय तक धूप में काम करते हैं, जैसे मजदूर, डिलीवरी वर्कर्स या ट्रैफिक पुलिस, उनमें भी इसका खतरा अधिक रहता है. हीट स्ट्रोक से बचने के लिए दोपहर 12 बजे से 4 बजे के बीच तेज धूप में निकलने से बचना चाहिए. शरीर को हाइड्रेट रखने के लिए पर्याप्त पानी, नारियल पानी, छाछ और ORS का सेवन करें. हल्के रंग के ढीले कपड़े पहनें और बाहर निकलते समय सिर को ढककर रखें. ज्यादा कैफीन और शराब से बचना भी जरूरी माना जाता है, क्योंकि इससे डिहाइड्रेशन बढ़ सकता है. कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए? अगर किसी व्यक्ति का शरीर बहुत ज्यादा गर्म हो, वह बार-बार उल्टी कर रहा हो, बेहोश हो जाए या भ्रम की स्थिति में हो, तो तुरंत डॉक्टर या इमरजेंसी सेवा से संपर्क करना चाहिए. हीट स्ट्रोक को नजरअंदाज करना खतरनाक साबित हो सकता है. सही समय पर इलाज मिलने से गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है. गंभीर स्थिति में तुरंत मेडिकल सहायता लेना जरूरी होता है, क्योंकि हीट स्ट्रोक इमरजेंसी स्थिति मानी जाती है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 हिंदी की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें

पार्क-मैदानों में दिखने वाली इस मामूली हरी घास में छिपा है सेहत का बड़ा राज, इसके फायदे जान चौंक जाएंगे

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Last Updated:May 21, 2026, 14:04 IST Summer Health Tips: गर्मियों के मौसम में शरीर को ठंडा और हाइड्रेट रखने के लिए लोग न जाने कितने तरह के महंगे प्रोडक्ट्स और ड्रिंक्स का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपके घर के आस-पास उगने वाली एक मामूली सी हरी घास औषधीय गुणों का खजाना है. आयुर्वेद में इसे एक बेहतरीन हेल्थ टॉनिक माना गया है, जो बिना किसी खर्च के शरीर को अंदर से एकदम कूल रखता है. आखिर क्या है यह चीज और इसके इस्तेमाल का सही तरीका क्या है, आइए जानते हैं. Summer Health Tips: चिलचिलाती गर्मी और लू के थपेड़ों से बचने के लिए लोग अक्सर महंगे ठंडे पेय पदार्थों और पैकेज्ड जूस का सहारा लेते हैं. लेकिन हमारे आस-पास ही प्रकृति ने कई ऐसी अनमोल चीजें दी हैं, जो बेहद कम खर्च में शरीर को न सिर्फ ठंडा रखती हैं बल्कि बीमारियों से भी बचाती हैं. ऐसी ही एक प्राकृतिक और गुणकारी चीज है दूब घास (दूर्वा). आम तौर पर लोग इसे सिर्फ पूजा-पाठ या बगीचे की हरियाली तक ही सीमित समझते हैं, लेकिन आयुर्वेद में इसे सेहत के लिए वरदान माना गया है. ऋषिकेश के डॉ राजकुमार (आयुष) ने इस साधारण सी दिखने वाली घास के कुछ ऐसे अचूक फायदे बताए हैं, जो गर्मियों में आपके बड़े काम आ सकते हैं. शरीर को अंदर से ठंडा रखता है दूब का रस डॉ राजकुमार के अनुसार, दूब घास में प्राकृतिक रूप से ठंडक देने वाले गुण मौजूद होते हैं. तेज गर्मी और लू के मौसम में इसका रस पीना बेहद फायदेमंद माना जाता है. यह शरीर के तापमान को संतुलित रखता है और अंदरूनी गर्मी को शांत करता है. गांव और पहाड़ी इलाकों में आज भी बुजुर्ग सुबह खाली पेट दूब घास का रस पानी में मिलाकर पीते हैं. यह एक ऐसा देसी और आसान उपाय है, जो शरीर को लू के हानिकारक असर से सुरक्षित रखता है. यह भी पढ़ें : वजन कंट्रोल से लेकर मजबूत हड्डियों तक, गर्मी में मिलेट्स खाने के कई फायदे, सेवन का तरीका जान लें हर्बल ड्रिंक की तरह करें इस्तेमाल, शरीर रहेगा हाइड्रेटदूब घास का उपयोग सिर्फ रस निकालने तक ही सीमित नहीं है. इसे पानी में अच्छी तरह उबालकर और फिर ठंडा करके एक बेहतरीन हर्बल ड्रिंक की तरह भी पिया जा सकता है. यह ड्रिंक चिलचिलाती गर्मी में शरीर को लंबे समय तक हाइड्रेट रखने में मदद करती है. बाजार में मिलने वाले केमिकल वाले कोल्ड ड्रिंक्स के मुकाबले यह प्राकृतिक ड्रिंक शरीर को बिना किसी नुकसान के ताजगी और हल्कापन महसूस कराती है. यही वजह है कि पहाड़ी क्षेत्रों में लोग आज भी पैकेज्ड चीजों के बजाय इस पारंपरिक नुस्खे पर भरोसा करते हैं. ओस से भीगी घास पर नंगे पैर चलने के फायदेदूब घास का एक और बेहतरीन उपयोग है सुबह के समय इस पर नंगे पैर टहलना. सुबह की ताजी ओस से भीगी हुई दूब घास पर चलने से पैरों को गजब की ठंडक मिलती है. आयुर्वेद और घरेलू मान्यताओं के अनुसार, ऐसा करने से मानसिक तनाव बहुत कम होता है और मन को गहरी शांति मिलती है. दिन की एक सकारात्मक शुरुआत करने के लिए पहाड़ों और गांवों में आज भी लोग सुबह-सुबह पार्कों या खेतों के किनारे दूब घास पर टहलना पसंद करते हैं. इसके अलावा यह त्वचा की छोटी-मोटी समस्याओं को दूर करने में भी मददगार मानी जाती है. हालांकि, हर किसी का शरीर अलग होता है, इसलिए किसी भी नुस्खे को अपनाने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें. About the Author Seema Nath सीमा नाथ 6 साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत शाह टाइम्स में रिपोर्टिंग के साथ की जिसके बाद कुछ समय उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Rishikesh,Dehradun,Uttarakhand

DU PG कोर्सेज के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू:82 कोर्स में ले सकते हैं एडमिशन, जानें पूरी एप्लीकेशन प्रोसेस

DU PG कोर्सेज के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू:82 कोर्स में ले सकते हैं एडमिशन, जानें पूरी एप्लीकेशन प्रोसेस

दिल्ली विश्वविद्यालय यानी DU ने 2026-27 सत्र के लिए पोस्ट ग्रेजुएट प्रोग्राम्स में एडमिशन के लिए 16 मई से रजिस्ट्रेशन शुरू कर दिया है। रजिस्टर करने की आखिरी तारीख 7 जून है। यूनिवर्सिटी के अलग-अलग कॉलेजों में पीजी कोर्स में एडमिशन लेने के इच्छुक छात्र अब ऑफिशियल एडमिशन पोर्टल पर अप्लाई कर सकते हैं। रजिस्ट्रार ऑफिस के मुताबिक, जो छात्र अभी अपने ग्रेजुएशन के तीसरे या चौथे साल में पढ़ रहे हैं, वे दो साल के मास्टर्स प्रोग्राम में अप्लाई कर सकते हैं। DU PG कोर्स में एडमिशन के लिए 50% मार्क्स जरूरी DU में PG कोर्स के लिए अप्लाई कर रहे UR/OBC-NCL/EWS कैटेगरी के छात्रों को UG क्वालिफाइंग एग्जाम में कम से कम 50% टोटल मार्क्स या उसके बराबर ग्रेड होना जरूरी है। वहीं, SC/ST/PwBD कैटेगरी के छात्रों के लिए क्वालिफाइंग एग्जाम में कम से कम 45% टोटल मार्क्स या उसके बराबर ग्रेड होना चाहिए। स्टूडेंट्स को जिस कोर्स में एडमिशन लेना है, उसकी एलिजिबिलिटी पूरी करने के साथ ही पीजी एडमिशन के लिए होने वाला कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट यानी CUET (PG)- 2026 एग्जाम देना जरूरी है। DU मास्टर्स में 82 कोर्स ऑफर कर रहा DU की टोटल 16 फैकल्टीज में करीब 6.5+ लाख स्टूडेंट्स हर साल पढ़ते हैं। यूनिवर्सिटी में 86 डिपार्टमेंट और 91 कॉलेज हैं। DU मास्टर्स में 82 कोर्स ऑफर करती है। पूरे कोर्स और फैकल्टी की लिस्ट देखने के लिए लिंक पर क्लिक करें। 250 रुपए एप्लीकेशन फीस लगेगी अनारक्षित, OBC और EWS कैटेगरी के लिए अप्लीकेशन फीस 250 रुपए प्रति कोर्स है। SC/ST और PwBD के लिए एप्लीकेशन फीस 100 रुपए प्रति कोर्स ली जाएगी। इस बार यूनिवर्सिटी ने छात्रों के लिए एक नई सुविधा शुरू की है। अब DigiLocker/API Setu प्लेटफॉर्म के जरिए छात्रों की जानकारी जैसे नाम, जन्मतिथि, कैटेगरी, जेंडर, माता-पिता का नाम और CUET स्कोर अपने-आप जुड़ जाएंगे। DU के PG CSAS 2026 पोर्टल पर ऐसे करें रजिस्टर नोट: नए नियमों के मुताबिक, सारी डिटेल्स की बजाय सिर्फ डिजिलॉकर या API SETU के लिंक करने को कहा जा सकता है। इससे पोर्टल पर जरूरी जानकारी जैसे कैंडिडेट का नाम, D.O.B, CUET स्कोर, अपने आप अपलोड हो जाएगी। ये 4 डॉक्यूमेंट्स अपलोड करें पोर्टल पर एडमिशन के आवेदन के 10 स्‍टेप्‍स यूनिवर्सिटी ने यह भी कहा है कि नई शिक्षा नीति यानी NEP 2020 के तहत शुरू किए गए एक साल के PG प्रोग्राम्स के लिए जल्द ही अलग पोर्टल पर एप्लीकेशन शुरू होंगे। छात्रों को अपडेट के लिए admission.uod.ac.in वेबसाइट देखते रहने की सलाह दी गई है। DU में 27% OBC और SC/ST स्टूडेंट्स के लिए 22.5% सीटें आरक्षित DU के कॉलेजों में 27% सीटें OBC (सेंट्रल लिस्ट में नॉन क्रिमी लेयर) के लिए आरक्षित हैं। SC/ST के लिए टोटल 22.5% आरक्षित है, इनमें भी SC को 15% और ST को 7.5%। EWS कोटा के लिए भी 10% सीटें आरक्षित हैं, लेकिन EWS सर्टिफिकेट 31 मार्च 2026 के बाद का अपडेटेड होना चाहिए। PwBD कैंडिडेट्स के लिए हर कोर्स में 5% सीटों आरक्षित हैं। इनके लिए अलग से सीट एलोकेशन रिजल्ट डिकलेयर किया जाएगा। स्टोरी – सोनाली राय ——————— ये खबर भी पढ़ें… कीड़ों की तरह रेंगकर शिक्षा मंत्री आवास पहुंचे कैंडिडेट्स:यूपी 69000 शिक्षक भर्ती रिजर्वेशन घोटाले के खिलाफ कैंडिडेट्स का अनोखा प्रदर्शन उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में कैंडिडेट्स कीड़ों की तरह रेंगकर यूपी शिक्षा मंत्री के आवास पहुंच रहे हैं। इसका वीडियो सोशल मीडिया वायरल हो रहा है। कैंडिडेट्स यूपी में 69 हजार शिक्षक भर्ती की मांग के लिए प्रदर्शन कर रहे हैं। साथ ही कैंडिडेट्स इस तरह से चीफ जस्टिस के ‘कॉकरोज’ वाले बयान का भी प्रतिकात्मक विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार ने कीड़ा समझा, इसीलिए रेंग कर प्रोटेस्ट कर रहे हैं। पूरी खबर पढ़ें…

शहर से प्रत्येक जीतने वाले उम्मीदवार को प्रमुख विस्तार में एक मंत्रालय मिलता है

शहर से प्रत्येक जीतने वाले उम्मीदवार को प्रमुख विस्तार में एक मंत्रालय मिलता है

तमिलनाडु में तमिलागा वेट्री कज़गम (टीवीके) द्वारा सरकार बनाने के कुछ दिनों बाद, मुख्यमंत्री विजय 21 मई को 23 नए मंत्रियों को शामिल करने के साथ अपने मंत्रिमंडल का विस्तार करने के लिए तैयार हैं। राज्यपाल कार्यालय की घोषणा के अनुसार, शपथ ग्रहण समारोह सुबह 10 बजे चेन्नई के राजभवन में होने वाला है, जहां राज्यपाल आरएन रवि अर्लेकर नए मंत्रियों को पद की शपथ दिलाएंगे। यह विस्तार हाल के तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में टीवीके द्वारा 108 सीटें हासिल करने और कांग्रेस, वामपंथी दलों, विदुथलाई चिरुथिगल काची (वीसीके) और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) के समर्थन से सरकार बनाने के बाद हुआ है। विजय ने इस महीने की शुरुआत में शपथ ली: विजय ने 10 मई को चेन्नई के नेहरू इंडोर स्टेडियम में मंत्रियों के प्रारंभिक समूह के साथ मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, जिसमें एन आनंद, सेनगोट्टैयन, अधव अर्जुन, निर्मल कुमार, वेंकटरमणन और अरुणराज शामिल थे। जबकि मंत्रियों के पहले बैच को विभाग आवंटित किए गए थे, बड़े कैबिनेट विस्तार की प्रत्याशा में कई विभाग जानबूझकर खाली छोड़ दिए गए थे। मंत्रिमंडल में शामिल होंगे कांग्रेस नेता: नवीनतम विस्तार औपचारिक रूप से दशकों में पहली बार कांग्रेस को तमिलनाडु कैबिनेट में लाएगा। शपथ लेने वालों में विजय के करीबी सहयोगी और थूथुकुडी विधायक श्रीनाथ के साथ-साथ दो कांग्रेस विधायक भी शामिल हैं। मेलूर कांग्रेस विधायक विश्वनाथन मंत्रिमंडल में शामिल होने वाले प्रमुख नामों में से एक हैं। उनका शामिल होना विशेष रूप से उल्लेखनीय है क्योंकि वह एक सामान्य निर्वाचन क्षेत्र से जीते थे। अनुसूचित जाति के नेताओं के लिए मजबूत प्रतिनिधित्व: कैबिनेट विस्तार के सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक अनुसूचित जाति समुदायों के नेताओं को बड़ा प्रतिनिधित्व दिया जाना है। अनुसूचित जाति के छह विधायक मंत्री पद की शपथ लेने वाले हैं, जिनमें अराक्कोनम विधायक गांधीराज, अविनाशी विधायक कमली, रासीपुरम विधायक लोकेश तमीज़सेल्वन, ओट्टापिदारम विधायक मदनराज, श्रीपेरंबुदूर विधायक थेन्नारासु और मेलूर कांग्रेस विधायक विश्वनाथन शामिल हैं। इससे पहले, राज मोहन, जिन्हें स्कूल शिक्षा विभाग सौंपा गया था, पहले ही कैबिनेट में शामिल किए जा चुके हैं और वह भी अनुसूचित जाति समुदाय से हैं। छह नए मंत्रियों के शामिल होने के साथ, टीवीके के नेतृत्व वाले मंत्रिमंडल में अब अनुसूचित जाति समुदायों से सात मंत्री होंगे। वीसीके को एक मंत्री पद मिलने की भी उम्मीद है, जिससे तमिलनाडु कैबिनेट में अनुसूचित जाति का प्रतिनिधित्व कुल मिलाकर आठ मंत्रियों तक बढ़ जाएगा। विस्तारित तमिलनाडु कैबिनेट में कुल 32 मंत्री होंगे, जिनमें पहले ही पदभार ग्रहण कर चुके नौ मंत्री और गुरुवार को शपथ लेने वाले 23 मंत्री शामिल हैं। दिलचस्प बात यह है कि मंत्री सेंगोट्टैयन और कांग्रेस विधायक राजेशकुमार को छोड़कर, नए मंत्रिमंडल में लगभग सभी मंत्री पहली बार मंत्री बने हैं जिन्होंने हाल ही में विधानसभा चुनाव लड़ा और जीता। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि यह कदम अनुभवी राजनीतिक दिग्गजों पर बहुत अधिक भरोसा करने के बजाय एक नई नेतृत्व टीम पेश करने के टीवीके के प्रयास को दर्शाता है। विरुधुनगर जिले में पहले से ही मंत्री कीर्तन के माध्यम से प्रतिनिधित्व है। अब जगदीश्वरी के मंत्री बनने के साथ, जिले को कैबिनेट में दूसरा स्थान मिलेगा। चेन्नई का प्रतिनिधित्व भी बढ़ रहा है. राजधानी शहर में पहले से ही पांच मंत्री हैं – विजय, एन आनंद, अधव अर्जुन, राजमोहन और वेंकटरमणन। अब, आरके नगर विधायक मारिया विल्सन और वेलाचेरी विधायक कुमार के भी मंत्रालय में शामिल होने की उम्मीद है, जिससे कैबिनेट में चेन्नई की उपस्थिति और मजबूत होगी। नई कैबिनेट में अल्पसंख्यक समुदायों के तीन मंत्री भी शामिल होंगे, जो विजय के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा प्रशासन के भीतर व्यापक सामाजिक और राजनीतिक प्रतिनिधित्व बनाए रखने के प्रयास का संकेत है। इस विस्तार पर बारीकी से नजर रखी जा रही है क्योंकि टीवीके दशकों में तमिलनाडु की पहली प्रमुख गठबंधन-शैली सरकार को आकार देते हुए जाति, क्षेत्रीय और गठबंधन प्रतिनिधित्व को संतुलित करने का प्रयास कर रहा है। (टैग्सटूट्रांसलेट)अभिनेता विजय(टी)चेन्नई समाचार(टी)कांग्रेस पार्टी समाचार(टी)तमिलनाडु(टी)तमिलनाडु सरकार(टी)तमिलनाडु सरकार(टी)तमिलनाडु राजनीति(टी)टीवीके

‘एसवी एल्वरसबर्ग’ पहली बार ‘बुंदेसलीगा’ के लिए क्वालिफाई:1907 में बना एल्वरसबर्ग जर्मन लीग में खेलने वाला सबसे छोटा और कुल 59वां क्लब बनेगा

‘एसवी एल्वरसबर्ग’ पहली बार ‘बुंदेसलीगा’ के लिए क्वालिफाई:1907 में बना एल्वरसबर्ग जर्मन लीग में खेलने वाला सबसे छोटा और कुल 59वां क्लब बनेगा

जर्मनी के एक बेहद छोटे से कस्बे एल्वरसबर्ग ने फुटबॉल की दुनिया में एक बड़ा चमत्कार कर दिखाया है। महज 13 हजार लोगों की आबादी वाले इस इलाके की टीम ‘एसवी एल्वरसबर्ग’ ने पहली बार जर्मनी की सबसे बड़ी और मशहूर फुटबॉल लीग ‘बुंदेसलीगा’ के लिए क्वालिफाई किया है। इसके साथ ही एल्वरसबर्ग बुंदेसलीगा में पहुंचने वाला सबसे छोटा क्लब और यह टॉप लीग खेलने वाली जर्मनी की 59वीं टीम बन गई है। क्वालिफिकेशन के एक अहम मुकाबले में एल्वरसबर्ग ने प्रूसेन मुंस्टर को 3-0 से करारी शिकस्त दी और पॉइंट टेबल में दूसरा स्थान पक्का कर लिया। मैच के शुरुआती 15 मिनट में ही बंबासे कोंटे और डेविड मोकवा ने गोल दागकर टीम को मजबूत स्थिति में ला दिया था। दूसरे हाफ में मोकवा ने एक और गोल कर टीम की ऐतिहासिक जीत सुनिश्चित कर दी। 1907 में बनी यह टीम 2021-22 तक जर्मनी की चौथी लीग (फोर्थ टियर) में खेलती थी। पिछले 5 सालों में यह उनका तीसरा प्रमोशन है। पिछले सीजन (2024-25) में भी वे बुंदेसलीगा में जाने के बेहद करीब थे, लेकिन प्लेऑफ के 95वें मिनट में हीडेनहाइम से गोल खाकर उनका दिल टूट गया था। उस झटके के बाद उनके सफल कोच होर्स्ट स्टीफन और 5 प्रमुख खिलाड़ी टीम छोड़कर चले गए थे। लेकिन नए हेड कोच विन्सेंट वैगनर ने हार नहीं मानी। उन्होंने हॉफेनहाइम से लोन पर आए बंबासे कोंटे, विंगर लुकास पेटकोव (13 गोल, 7 असिस्ट) और जनवरी में 16 करोड़ में खरीदे गए स्ट्राइकर डेविड मोकवा जैसे युवा खिलाड़ियों के दम पर नया इतिहास रच दिया। शहर में कोई रेलवे स्टेशन नहीं, सिर्फ तीन बेकरियां स्पाइसन-एल्वरसबर्ग की कुल आबादी 13,000 है, लेकिन मूल एल्वरसबर्ग गांव में सिर्फ 7,000 लोग रहते हैं। इस कस्बे में कोई रेलवे स्टेशन नहीं है और गिनती की सिर्फ तीन बेकरियां हैं। दिलचस्प बात यह है कि यहां के स्टेडियम की क्षमता (10,000) कस्बे की आबादी से भी ज्यादा है। अब बुंदेसलीगा के कड़े नियमों के तहत 2027 तक इस क्लब के स्टेडियम की क्षमता को बढ़ाकर 15,000 किया जा रहा है, ताकि तय मानक पूरे हो सकें।

59 साल का इंतजार खत्म: 1967 के बाद पहली बार कांग्रेस की तमिलनाडु कैबिनेट में वापसी

59 साल का इंतजार खत्म: 1967 के बाद पहली बार कांग्रेस की तमिलनाडु कैबिनेट में वापसी

1967 के बाद पहली बार, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने तमिलनाडु कैबिनेट में जगह हासिल की है, जो लंबे समय तक एकल-पार्टी शासन वाले राज्य में एक बड़े राजनीतिक बदलाव का प्रतीक है। यह घटनाक्रम हाल के विधानसभा चुनावों में त्रिशंकु जनादेश आने के बाद आया है, जिससे पार्टियों को तमिलागा वेट्री कज़गम (टीवीके) के नेतृत्व में गठबंधन सरकार बनाने के लिए एक साथ आने के लिए मजबूर होना पड़ा। कांग्रेस, वामपंथी दलों, विदुथलाई चिरुथिगल काची (वीसीके) और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) के समर्थन से, टीवीके विजय के नेतृत्व में सरकार बनाने में कामयाब रही। गठबंधन ने अब लगभग छह दशकों के बाद कांग्रेस के लिए तमिलनाडु में शासन में सीधे भागीदारी के दरवाजे खोल दिए हैं। तमिलनाडु का राजनीतिक इतिहास काफी हद तक गठबंधन व्यवस्था के बजाय स्पष्ट बहुमत के साथ बनी सरकारों के इर्द-गिर्द घूमता रहा है। दशकों तक, या तो सत्तारूढ़ दल ने स्वतंत्र रूप से पर्याप्त सीटें जीतीं या छोटे दलों ने औपचारिक रूप से सरकार का हिस्सा बने बिना चुनाव के बाद समर्थन दिया। परिणामस्वरूप, राज्य को शायद ही कभी उस तरह की गठबंधन राजनीति का अनुभव हुआ जैसा कई उत्तरी और पश्चिमी भारतीय राज्यों में देखा गया। विशेष रूप से 1977 के बाद से, तमिलनाडु की राजनीति में दो प्रमुख द्रविड़ पार्टियों – द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) और ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) का वर्चस्व रहा है। हालाँकि दोनों पार्टियों ने नियमित रूप से चुनावी गठबंधन बनाए, लेकिन उन्होंने पारंपरिक रूप से अपनी विधायी ताकत का उपयोग करके सरकारें बनाईं और गठबंधन सहयोगियों को शायद ही कभी कैबिनेट पदों की पेशकश की। तमिलनाडु की पहली त्रिशंकु विधानसभा 1952 में आई: आजादी के बाद राज्य के शुरुआती चुनावों के दौरान गठबंधन की राजनीति की संभावना पहली बार तमिलनाडु में उभरी। 1952 के विधानसभा चुनाव में, जब मद्रास राज्य विधानसभा में 375 सीटें थीं, किसी भी पार्टी ने 188 के आवश्यक बहुमत का आंकड़ा हासिल नहीं किया। कांग्रेस 152 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, जिससे त्रिशंकु विधानसभा हुई। सत्ता बरकरार रखने के लिए कांग्रेस को छोटी पार्टियों का समर्थन मिला. मणिकवेलर के नेतृत्व वाली कॉमनवील पार्टी का बाद में कांग्रेस में विलय हो गया, जिसके बाद मणिकवेलर को सी राजगोपालाचारी के मंत्रिमंडल में शामिल किया गया। बाद में के कामराज के नेतृत्व में लेबर पार्टी भी कांग्रेस में शामिल हो गई और उसके नेता रामासमियार को कैबिनेट में जगह दी गई। हालाँकि, इन व्यवस्थाओं को व्यापक रूप से औपचारिक गठबंधन सरकारों के रूप में नहीं देखा गया क्योंकि कांग्रेस प्रमुख सत्तारूढ़ शक्ति बनी रही जबकि अन्य दलों ने विलय किया या मुख्य रूप से राजनीतिक भागीदारी के लिए समर्थन बढ़ाया। 2006 के चुनाव ने लगभग एक गठबंधन सरकार बना दी: 2006 के विधानसभा चुनावों के बाद तमिलनाडु फिर से गठबंधन शासन देखने के करीब पहुंच गया। उस चुनाव में डीएमके ने अपने दम पर केवल 96 सीटें जीतीं। इसके सहयोगियों ने जोरदार प्रदर्शन किया, जिसमें कांग्रेस को 34 सीटें, पीएमके को 18 सीटें, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) को 9 सीटें और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी को 6 सीटें मिलीं। गठबंधन ने 163 सीटों के साथ बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया, जिससे डीएमके को सरकार बनाने का मौका मिल गया। उस समय, कई लोगों को उम्मीद थी कि तमिलनाडु में अंततः एक औपचारिक गठबंधन कैबिनेट देखने को मिलेगी। हालाँकि, तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने घोषणा की कि कांग्रेस राज्य मंत्रिमंडल में शामिल नहीं होगी। पीएमके और वामपंथी दलों ने भी मंत्री पद की मांग करने के बजाय सरकार को बाहर से समर्थन देने का विकल्प चुना। परिणामस्वरूप गठबंधन शासन का अवसर एक बार फिर हाथ से निकल गया। टीवीके के उदय ने दशकों के दो-पक्षीय प्रभुत्व को तोड़ा: नवीनतम चुनाव परिणाम ने तमिलनाडु के राजनीतिक परिदृश्य को महत्वपूर्ण रूप से बदल दिया है। कोई भी पार्टी स्वतंत्र रूप से सरकार बनाने में सक्षम नहीं होने के कारण, टीवीके कांग्रेस, वामपंथी दलों, वीसीके और आईयूएमएल द्वारा समर्थित गठबंधन व्यवस्था के केंद्रबिंदु के रूप में उभरी। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि टीवीके के उदय ने द्रमुक और अन्नाद्रमुक के दशकों पुराने प्रभुत्व को बाधित कर दिया है, जिससे तमिलनाडु प्रभावी रूप से तीन-पक्षीय राजनीतिक ढांचे की ओर स्थानांतरित हो गया है। मंत्रिमंडल में कांग्रेस को शामिल किए जाने को इस परिवर्तन में सबसे प्रतीकात्मक परिवर्तनों में से एक के रूप में देखा जा रहा है, विशेष रूप से 1967 के बाद से राज्य में प्रत्यक्ष शासन से पार्टी की लंबी अनुपस्थिति को देखते हुए। गठबंधन की राजनीति का एक नया युग? टीवीके के तहत गठबंधन सरकार के गठन को तमिलनाडु में एक नई राजनीतिक संस्कृति की शुरुआत के रूप में भी देखा जा रहा है, जो एकल-पार्टी प्रभुत्व के बजाय सत्ता-साझाकरण पर केंद्रित है। दशकों तक, राज्य में गठबंधन बड़े पैमाने पर केवल चुनावी व्यवस्था के रूप में कार्य करते रहे। अब, कई वर्षों में पहली बार, गठबंधन सहयोगी सीधे शासन और कैबिनेट निर्णय लेने में भाग ले रहे हैं। विश्लेषकों का मानना ​​है कि यह आने वाले वर्षों में तमिलनाडु की राजनीति को नया आकार दे सकता है, खासकर अगर राज्य में गठबंधन शासन एक स्थिर और स्वीकार्य मॉडल बन जाता है। (टैग्सटूट्रांसलेट)अभिनेता विजय(टी)चेन्नई(टी)चेन्नई समाचार(टी)गठबंधन(टी)कांग्रेस पार्टी समाचार(टी)राहुल गांधी(टी)तमिलनाडु(टी)तमिलनाडु समाचार(टी)तमिलनाडु की राजनीति(टी)टीवीके

चुकन्दर राय कांजी रेसिपी: दादी-नानी के कमरे का समर ड्रिंक, बाकी मौसम में तन-मन को तरोताजा ‘चुकन्दर-राय कांजी’; नोट करें रेसिपी

चुकन्दर राय कांजी रेसिपी

21 मई 2026 को 13:07 IST पर अद्यतन किया गया चुकंदर राय कांजी रेसिपी: गर्मी और गर्मी के मौसम में शरीर को ठंडक की सलाह और चुकंदर राय की कांजी बनाए रखने के लिए एक पारंपरिक समर ड्रिंक है। दादी-नानी के लिए यह पारंपरिक रेसिपी न सिर्फ स्वाद में लाजवाब है, बल्कि सेहत के लिए भी एक वरदान है। आइये इसे बनाने के तरीके के बारे में जानते हैं। अनुसरण करना : उत्तर भारत का यह प्रोबायोटिक ड्रिंक न केवल शरीर को ठंडा करता है, बल्कि हमारे पाचन तंत्र के लिए भी फायदेमंद है। ये लू और समसामयिक समुद्र में शरीर को जमा किया हुआ भंडार और ताजगी की सजा का सबसे देसी तरीका है। छवि: सोशल मीडिया सामग्री – ताजा चुकंदर, पत्थर या काली राई, काला नमक, हींग छवि: इंस्टाग्राम सबसे पहले चुकंदर को अच्छे से धोकर छीन लें। क्वेश्चन का पूरा नाम या क्यूब्स में अवलोकन। राय को सिलबट्टे या मिक्सी में दरदरा पीस लें। ध्यान रहे कि बहुत से चॉकलेट पाउडर न दें। फर्मेंटेशन का स्वाद रहे। छवि: इंस्टाग्राम जार में पानी भरा हुआ, कटे हुए टुकड़े, पीसी हुई राय, काला नमक और हिंग उपकरण अच्छी तरह से हिलाएं। छवि: फ्रीपिक जार के मुंह को सूती कपड़े से 3-4 दिन तेज धूप में रखें। छवि: मेटा एआई रोज़ एक बार साफा लकड़ी के मिश्रण से हिलाएँ। जब पानी का रंग गहरा नीला हो जाए और स्वाद-चटपटा लगे, तो निंदा कांजी तैयार है। छवि: इंस्टाग्राम इसे फ़िरोज़ में ठंडा करें और पुदीने की नाव के साथ बेचें। चुकंदर के प्रदर्शन को भी साथ में स्टाइलिश, वे बहुत ही लाजवाब लगते हैं। छवि: इंस्टाग्राम द्वारा प्रकाशित: आर्या पांडे प्रकाशित 21 मई 2026 13:07 IST (टैग्सटूट्रांसलेट) चुकंदर राय कांजी रेसिपी(टी)चुकंदर राई की कांजी(टी)चुकंदर सरसों कांजी ड्रिंक(टी)पारंपरिक देसी कांजी रेसिपी(टी)प्राकृतिक किण्वित प्रोबायोटिक पेय(टी)पेट को ठंडा करने वाले पेय(टी)ग्रीष्म पेट स्वास्थ्य पेय(टी)राय वाली कांजी बनाने की विधि(टी)घर पर चुकंदर गाजर कांजी(टी)घर पर घरेलू प्रोबायोटिक्स के लिए घर का बना कांजी रेसिपी

वह ठग जो नहीं था? क्यों वीसीके, आईयूएमएल अभी भी विजय के मंत्रिमंडल से बाहर हैं | भारत समाचार

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय फ्लोर टेस्ट लाइव, टीवीके आज बहुमत चाहता है

आखरी अपडेट:21 मई, 2026, 13:06 IST आने वाले दिनों में वीसीके और आईयूएमएल दोनों के सरकार में शामिल होने की उम्मीद है, परामर्श के अगले दौर के बाद प्रत्येक को एक-एक पद आवंटित किए जाने की संभावना है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय जब तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने गुरुवार को अपने मंत्रिमंडल का विस्तार किया, तो सबसे बड़ा चर्चा का विषय यह नहीं था कि किसे इसमें शामिल किया गया, बल्कि यह था कि किसे नहीं मिला। सहयोगी विदुथलाई चिरुथिगल काची (वीसीके) और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल), दोनों ने 2026 के खंडित फैसले के बाद टीवीके के नेतृत्व वाले गठबंधन को बहुमत के आंकड़े को पार करने में मदद करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, सूची से गायब थे। इस चूक से तुरंत गठबंधन के भीतर मतभेद की अटकलें शुरू हो गईं। हालाँकि, एनडीटीवी ने सूत्रों के हवाले से कहा कि यह कदम राजनीतिक अपमान कम और विलंबित समायोजन अधिक हो सकता है। एनडीटीवी के अनुसार, वीसीके और आईयूएमएल दोनों के अभी भी आने वाले दिनों में सरकार में शामिल होने की उम्मीद है, परामर्श के अगले दौर के बाद प्रत्येक को एक-एक बर्थ आवंटित किए जाने की संभावना है। यह भी पढ़ें | सीपीएम ने विजय को चेतावनी दी कि अगर टीवीके एआईएडीएमके के साथ गठबंधन करती है तो वह समर्थन पर पुनर्विचार कर सकती है अंकगणित बताता है कि दोनों पार्टियां क्यों मायने रखती हैं। 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में त्रिशंकु जनादेश आने के बाद, विजय की तमिलागा वेट्री कज़गम सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, लेकिन बहुमत से कम रह गई। कांग्रेस, वीसीके, आईयूएमएल और वाम दलों के समर्थन से अभिनेता से नेता बने अभिनेता को सत्ता पर दावा करने और द्रविड़ एकाधिकार को तोड़ने में मदद मिली। वीसीके और आईयूएमएल ने, सरकारी ढांचे के बाहर द्रमुक के नेतृत्व वाले धर्मनिरपेक्ष गठबंधन के साथ संबंध जारी रखने के बावजूद, सरकार गठन संकट के दौरान विजय को समर्थन दिया। इस असामान्य व्यवस्था ने कैबिनेट वार्ता को पारंपरिक गठबंधन की तुलना में अधिक नाजुक बना दिया है। कांग्रेस लगभग छह दशकों में पहली बार सरकार में शामिल हुई है, विस्तार के दौरान दो विधायकों को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है। लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि वीसीके और आईयूएमएल तमिलनाडु में अपनी व्यापक राजनीतिक स्थिति के साथ सरकार में भागीदारी को संतुलित करते हुए अधिक सुविचारित मार्ग अपना रहे हैं। सूत्रों ने एनडीटीवी को बताया कि दोनों दलों ने अभी तक अपने मंत्री पद के चयन के बारे में मन नहीं बनाया है, जिसके कारण उन्हें मंत्रिमंडल से बाहर रखा गया है। विधानसभा की 234 सदस्यीय क्षमता से जुड़ी 15 प्रतिशत की सीमा के तहत, विजय अधिकतम 35 मंत्रियों की नियुक्ति कर सकते हैं। उन्होंने अब तक 32 नाम बताए हैं, जानबूझकर तीन बर्थ खुली छोड़ दी हैं। इसे व्यापक रूप से उनके असहज सहयोगियों, वीसीके और आईयूएमएल को समायोजित करने के उद्देश्य से एक संकेत के रूप में देखा गया है। प्रकाशिकी और अनुक्रमण का भी प्रश्न है। कार्यालय में विजय के पहले सप्ताह गठबंधन को स्थिर करने और एक अशांत सरकार गठन प्रक्रिया के बाद प्रशासनिक नियंत्रण पेश करने पर केंद्रित रहे हैं जिसमें गहन बातचीत और बाहरी समर्थन व्यवस्था शामिल थी। हर समर्थक पार्टी को तुरंत लाने से संदेश भेजना जटिल हो सकता है। फिलहाल, न तो वीसीके और न ही आईयूएमएल ने देरी को लेकर सार्वजनिक रूप से सरकार पर हमला किया है। इससे चेन्नई के राजनीतिक हलकों में यह धारणा मजबूत हुई है कि गठबंधन के भीतर किसी नतीजे के बजाय बहिष्कार अस्थायी और रणनीतिक हो सकता है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया वह ठग जो नहीं था? क्यों वीसीके, आईयूएमएल अभी भी विजय के मंत्रिमंडल से बाहर हैं? अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)तमिलनाडु कैबिनेट विस्तार(टी)विजय तमिलगा वेट्री कड़गम(टी)तमिलनाडु गठबंधन सरकार(टी)वीसीके गठबंधन राजनीति(टी)आईयूएमएल गठबंधन भूमिका(टी)त्रिशंकु विधानसभा 2026(टी)तमिलनाडु सरकार में कांग्रेस(टी)द्रविड़ एकाधिकार टूटना