मशहूर शेफ विकास खन्ना की स्वीकारोक्ति:मां को मेरे हाथ का खाना पसंद नहीं आया, तब लगा भोजन की आत्मा छूना जरूरी

‘अमृतसर की गलियों में मेरा बचपन बीता और वहां मैंने एक बात सीखी- भोजन सिर्फ पकाया नहीं जाता, ‘अर्पित’ किया जाता है। मुझे याद है, मेरी दादी सुबह के धुंधलके में सहज प्रवृत्ति और अगाध श्रद्धा के साथ बड़े-बड़े पतीले चढ़ाती थीं। वे रसोईघर विलासिता या महंगी सामग्रियों से नहीं सजे थे, लेकिन वे सुंदर अनुष्ठानों और बेपनाह देखभाल से भरे हुए थे। मुझे मिशेलिन स्टार्स मिले, दुनियाभर में सराहना मिली, लेकिन इस दौड़ में मैं उस भोजन से दूर होता गया जिसने मुझे पहली पहचान दी थी। एक पल आज भी मुझे झकझोर देता है- मेरी मां मेरे रेस्त्रां में खाना खाने बैठी थीं और उन्होंने मेरे बनाए भोजन का एक ग्रास भी पसंद नहीं किया। वह बात मेरे मन में गहराई से घर कर गई। मैंने वर्षों उस उत्कृष्टता को पाने में लगाए थे जिसे दुनिया ने परिभाषित किया था, पर जिस व्यक्ति का मैं सबसे ज्यादा सम्मान करता था, वह मेरे भोजन में खुद को नहीं ढूंढ पा रही थीं। उस घटना ने मेरे भीतर एक सवाल जगा दिया जिसे मैं और टाल नहीं सकता था- महान स्वाद तय कौन करता है?’ वैश्विक पाक मानक विशेष इतिहास में विकसित हुए हैं। उन्होंने तकनीक, सटीकता और निरंतरता को महत्व दिया है और इसके लिए वे सम्मान के पात्र हैं, लेकिन वे हमेशा उन व्यंजनों की आत्मा को नहीं पकड़ पाते जो स्मृतियों और जीवन के अनुभवों से आकार लेते हैं। व्यंजन की सफलता सिर्फ स्टार्स या रैंकिंग से नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पहचान से आंकी जानी चाहिए- उन लोगों से जो उसमें खुद को देख पाते हैं। हर संस्कृति को एक सांचे में फिट करने के बजाय हमें दायरा बड़ा करना होगा, जहां उत्कृष्टता की कई परिभाषाएं साथ रह सकें। भोजन हमेशा जुड़ाव और हमारी पहचान का प्रतिबिंब रहा है; उसकी इस विविधता को स्वीकार करना ही उसकी सबसे बड़ी जीत है।’ भारतीय भोजन का अस्तित्व हमेशा से घरों, मंदिरों और लंगरों में रहा है। इसे किसी को प्रभावित करने के लिए नहीं, बल्कि पोषण देने, सबको साथ लाने और घाव भरने के लिए बनाया गया था। पर विडंबना देखिए, लंबे समय तक दुनिया ने भारतीय भोजन को इन्हीं खूबियों की वजह से नजरअंदाज किया। मैंने भारत के कुलीनरी स्कूल में फ्रेंच सॉस और यूरोपीय तकनीकें सीखीं, जिसने अनुशासन और ढांचा दिया। परंतु मन तो भारतीय भोजन की गहराई की ओर खिंचा रहता था, जिसे सिखाया नहीं जाता बल्कि आत्मा से महसूस किया जाता है। उडुपी के कृष्ण मंदिर की अनानास-नारियल करी, अमृतसर के स्वर्ण मंदिर की दाल, पुरी के जगन्नाथ मंदिर के मीठे चावल और मुंबई के सिद्धिविनायक मंदिर के मोदक… इन स्वादों ने मेरे भीतर कलिनेरी स्कूल की किसी भी सॉस से कहीं गहरी गूंज जगाई। जब सहपाठी यूरोपीय पाठ्यक्रम के तय रास्ते पर बढ़ रहे थे, मैं बार-बार उन्हीं स्वादों की ओर लौट रहा था, जिनके साथ मेरा बचपन और मेरी आत्मा जुड़ी रही। हमारे स्कूल की लाइब्रेरी की दीवार पश्चिमी शेफ की तस्वीरों से भरी थी, जिन्हें आदर्श मानने को कहा जाता था। मैंने एक बार पूछा था,‘यहां कोई मेरी तरह क्यों नहीं दिखता?’ जवाब था…‘क्योंकि दुनिया पर इन्हीं का नियंत्रण है।’ यही नियंत्रण तय करता है कि किस व्यंजन की अहमियत है और किसे कमतर माना जाए। इस तरह खाने-पीने के मामले में समाज में एक तरह का ऊंच-नीच का भेदभाव बन गया है। इसमें कुछ खास तरह के खान-पान (जैसे विदेशी या बड़े शहरों के पकवान) को ‘बेहतर और स्टैंडर्ड’ मान लिया जाता है, जबकि हमारे अपने स्थानीय या गांव-देहात के पारंपरिक खाने को ‘क्षेत्रीय’ कहकर उतना महत्व नहीं दिया जाता। नतीजा यह हुआ कि भोजन का एक ही ढांचा हावी हो गया और बाकी सबसे उसी में ढलने की उम्मीद की जाती रही। कुलीनरी स्कूल के बाद मैंने उसी सिस्टम में नाम कमाया। लगातार 6 बार ‘कुकिंग का ऑस्कर’ जीता, मास्टरशेफ इंडिया के जज रहे शेफ विकास खन्ना ने न्यूयॉर्क स्थित रेस्टोरेंट ‘जुनून’ के लिए लगातार 6 बार (6 साल) मिशेलिन स्टार हासिल किए। ये रेस्टोरेंट की दुनिया का सबसे प्रतिष्ठित सम्मान है, जिसे ‘कुकिंग का ऑस्कर’ भी कहा जाता है। विकास ने कोविड-19 के दौरान ‘Feed India’ नाम से दुनिया का सबसे बड़ा फूड ड्राइव चलाया, जिसके लिए उन्हें ‘एशिया गेम चेंजर अवॉर्ड’ से नवाजा गया। उन्होंने ‘मास्टरशेफ इंडिया’ को जज किया है और दर्जनों किताबें लिखी हैं। उनकी किताब ‘उत्सव’ दुनिया की सबसे महंगी और भारी किताबों में गिनी जाती है। 15-16 किलो वजनी इस किताब में 1200 पन्ने हैं। इसकी शुरुआती 12 प्रतियां बहुत खास थीं। इनमें एक प्रति 30 लाख रु. में नीलाम हुई थी, जिसके पैसे दान किए गए थे। इस किताब की एक प्रति का अंकित मूल्य 8 लाख रु. था।
IPL में आज DC-RR का मैच:3 छक्के लगाते ही वैभव बन जाएंगे भारत के नए सिक्सर किंग, अबतक 11 मैचों में बनाए हैं 440 रन

IPL में आज दिल्ली कैपिटल्स (DC) और राजस्थान रॉयल्स (RR) के बीच मुकाबला खेला जाएगा। नई दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में शाम 7:30 बजे से मैच शुरू होगा। वैभव ने 11 मैचों में 236.55 के स्ट्राइक रेट से 440 रन बनाए हैं, जिसमें 40 छक्के शामिल हैं। आज वैभव भारत के नए सिक्सर किंग बन सकते हैं। 15 साल के वैभव ने अगर आज दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ 3 छक्के जड़ दिए, तो वह एक सीजन में सबसे ज्यादा छक्के जड़ने वाले भारतीय बल्लेबाज बन जाएंगे। अभिषेक शर्मा को पछाड़ देंगे वैभव यह रिकॉर्ड अभी तक अभिषेक शर्मा के नाम दर्ज है, जिन्होंने 2024 में सनराइजर्स हैदराबाद के लिए खेलते हुए 42 छक्के जड़े थे, जबकि वैभव सूर्यवंशी आईपीएल 2026 में अब तक 40 छक्के लगा चुके हैं। ऐसे में मिचेल स्टार्क के सामने भी वह हवाई फायर करते हुए दिखाई दे सकते हैं। वैभव के बाद पंजाब किंग्स के श्रेयस अय्यर है, जिन्होंने 2025 में 39 छक्के लगाए थे। वहीं, आरसीबी के विराट कोहली 2016 और 2024 में 38 छक्के लगा चुके हैं। वैभव सूर्यवंशी ने टी-20 में सबसे तेज 100 छक्के जड़े राजस्थान रॉयल्स के लिए ओपनिंग करते हुए वैभव ने अब तक 11 मैचों में 440 रन बना लिए हैं। वैभव सूर्यवंशी ने गुजरात के खिलाफ मुकाबले में टी-20 में सबसे तेज 100 छक्के पूरा करने का रिकॉर्ड बनाया। उन्होंने पहले ही ओवर में यह उपलब्धि हासिल की। वैभव ने 514 गेंदों में 100 छक्के पूरे कर वेस्टइंडीज के किरोन पोलार्ड का रिकॉर्ड तोड़ा। पोलार्ड ने 843 गेंदें खेली थीं। IPL इतिहास में तीसरा सबसे तेज शतक लगाने वाले यंगेस्ट प्लेयर 15 साल के वैभव सूर्यवंशी सबसे तेज 50 छक्के पूरे करने वाले बल्लेबाज बन गए। उन्होंने मात्र 36 गेंदों में अपना दूसरा शतक जड़ दिया। उन्होंने 36 गेंदों में 103 रन बनाए। इस धमाकेदार पारी में उन्होंने 12 छक्के और 5 चौके लगाए। इसी के साथ वे आईपीएल के इतिहास में तीसरे सबसे तेज शतक लगाने वाले खिलाड़ी बन गए हैं। पहले नंबर पर क्रिस गेल हैं। गेल ने 2013 में पुणे वॉरियर्स इंडिया के खिलाफ 30 गेंद पर शतक लगाया था। इसके अलावा वैभव IPL में सबसे तेज शतक लगाने वाले भारतीय भी बन गए हैं। एक IPL इनिंग में सबसे ज्यादा सिक्स लगाने वाले भारतीय वैभव ने अपनी शतकीय पारी में 12 छक्के लगाए। वे IPL की एक पारी में सबसे ज्यादा छक्के लगाने वाले भारतीय बन गए हैं। इससे पहले यह रिकॉर्ड मुरली विजय के नाम था, जिन्होंने 2010 में RR के खिलाफ 11 छक्के लगाए थे। वैभव ने भी 2025 में GT के खिलाफ 11 छक्के लगाए थे। वैभव IPL में सबसे तेज 50 सिक्स लगाने वाले खिलाड़ी वैभव ने IPL में सबसे तेज 50 छक्के पूरे करने का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। उन्होंने सिर्फ 15 पारियों में यह उपलब्धि हासिल की। उन्होंने क्रिस गेल को पीछे छोड़ा, जिन्होंने 21 पारियों में 50 छक्के पूरे किए थे। तीसरे नंबर पर 23 पारियों के साथ रजत पाटीदार हैं। IPL में सबसे तेज 500 रन बनाने वाले पहले खिलाड़ी वैभव सूर्यवंशी ने अपने IPL करियर में 500 रन पूरे कर लिए हैं। वे लीग में सबसे कम गेंदों में यह मुकाम हासिल करने वाले बल्लेबाज बन गए हैं। उन्होंने लखनऊ के खिलाफ मैच में पहली ही गेंद पर चौका लगाकर यह उपलब्धि हासिल की। वैभव ने सिर्फ 227 गेंदों पर 500 रन बनाए हैं। उन्होंने ग्लेन मैक्सवेल का रिकॉर्ड तोड़ा, जिन्होंने 260 गेंदों में अपने पहले 500 रन पूरे किए थे। प्रियांश आर्या ने ये कमाल 278 गेंदों में किया। वहीं सहवाग को 500 रन बनाने में 280 गेंदें लगी थी। नमन धीर ने 283 गेंदों में 500 विकेट पूरे किए।
पनीर-मटन को भी टक्कर देती है तालाब में मिलने वाली ये सब्जी! डायबिटीज से लेकर एनीमिया तक में असरदार

Last Updated:May 17, 2026, 15:08 IST Kamal Kakdi Benefits in Hindi: भारतीय रसोई में कई ऐसी सब्जियां हैं जो स्वाद के साथ-साथ शरीर के लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं. इन्हीं में से एक है कमल ककड़ी, जिसके आगे स्वाद और सेहत के मामले में पनीर से लेकर मटन तक फेल हैं. तालाब में खिलने वाले कमल के फूल की जड़ से तैयार होने वाली यह सब्जी न सिर्फ खाने का जायका बढ़ाती है, बल्कि शरीर को अंदर से ताकतवर भी बनाती है. आयुर्वेद विशेषज्ञों के अनुसार, इसका सही तरीके से सेवन करने पर कई गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है. Kamal Kakdi Benefits in Hindi: अभी तक आपने कई तरह की हरी और मौसमी सब्जियों का स्वाद चखा होगा, लेकिन आज हम आपको एक ऐसी शाकाहारी सब्जी के बारे में बताने जा रहे हैं जिसके आगे स्वाद में पनीर और मटन भी फीके पड़ जाते हैं. हम बात कर रहे हैं ‘कमल ककड़ी’ की. यह सब्जी असल में तालाबों में खिलने वाले कमल के पौधे की जड़ होती है. हल्के मीठे स्वाद और कुरकुरी बनावट वाली कमल ककड़ी न केवल खाने का स्वाद बढ़ाती है, बल्कि शरीर को कई तरह के रोगों से दूर रखकर अंदर से फौलादी बनाने का काम भी करती है. पोषक तत्वों की खान है यह सब्जीआयुर्वेदाचार्य डॉ. प्रियंका सिंह ने बताया कि कमल ककड़ी को नेचुरल हेल्थ बूस्टर भी कहा जाता है. इसमें फाइबर, आयरन, पोटैशियम, विटामिन सी, कैल्शियम और प्रोटीन जैसे कई जरूरी पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं. यह सब्जी शरीर को अंदर से पोषण देने के साथ-साथ पाचन तंत्र को भी दुरुस्त रखती है. इसमें मौजूद फाइबर पेट को लंबे समय तक भरा रखता है, जिससे बार-बार भूख नहीं लगती और कब्ज जैसी पेट की परेशानियां दूर होती हैं. इसके अलावा यह कैंसर के संभावित खतरे को कम करने में भी असरदार मानी गई है. वजन और डायबिटीज को रखती है कंट्रोलमोटापा कम करने की कोशिश में जुटे लोगों के लिए कमल ककड़ी फायदेमंद है. इसमें कैलोरी की मात्रा बहुत कम होती है और इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स भी काफी लो होता है. इसका सीधा फायदा यह होता है कि इसे खाने के बाद शरीर में ब्लड शुगर का लेवल तेजी से नहीं बढ़ता. खून की कमी और दिल की बीमारियों में वरदानएनीमिया से जूझ रहे मरीजों के लिए कमल ककड़ी किसी वरदान से कम नहीं है. इसमें आयरन और कॉपर दोनों ही तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं का निर्माण कर हीमोग्लोबिन के स्तर को तेजी से बढ़ाते हैं. वहीं, इसमें मौजूद पोटैशियम दिल की सेहत का ख्याल रखता है. यह हाई ब्लड प्रेशर को संतुलित बनाए रखने और शरीर से खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने में भी काफी मददगार साबित होता है. तनाव को करती है दूर, ऐसे करें इस्तेमालकमल ककड़ी न केवल शारीरिक स्वास्थ्य बल्कि मानसिक सेहत के लिए भी बहुत फायदेमंद है. इसमें विटामिन बी6 पाया जाता है, जो दिमाग को शांत रखने, तनाव कम करने और मूड को बेहतर बनाने में मददगार होता है. इसके एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण शरीर के अंदरूनी हिस्सों की सूजन को कम करते हैं. रसोई में इसका उपयोग सब्जी, सूप, सलाद, अचार या कुरकुरे चिप्स के रूप में किया जा सकता है. इसे हमेशा अच्छी तरह धोकर और पकाकर ही खाना चाहिए, क्योंकि कच्ची कमल ककड़ी में बैक्टीरिया होने का खतरा रहता है. साथ ही, यदि आप पहले से किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं, तो इसका सेवन शुरू करने से पहले एक बार डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें. About the Author Seema Nath सीमा नाथ 6 साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत शाह टाइम्स में रिपोर्टिंग के साथ की जिसके बाद कुछ समय उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Ballia,Uttar Pradesh Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.
सॉफ्टवेयर टूल्स से चल रही जापान की अनोखी पार्टी ‘मिराई’:हर मुश्किल का हल डेटा से, जनता से डिजिटल फीडबैक लेते हैं

जापान की राजनीति में एक अनोखी पार्टी ‘टीम फ्यूचर मिराई’ चर्चा में है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) समर्थक एजेंडे और टेक्नोलॉजी आधारित राजनीति के वादे के साथ उभरी इस पार्टी का चेहरा अन्नो ताकाहिरो हैं, जो सॉफ्टवेयर इंजीनियर और एआई उद्यमी से पहले साइंस फिक्शन लेखक भी रहे हैं। ताकाहिरो सरकार और लोकतंत्र में भी इंजीनियरिंग सोच और टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल की पैरवी कर दुनिया में तकनीक-आधारित राजनीति की नई बहस को आगे बढ़ा रहे हैं। वे 2024 में टोक्यो गवर्नर चुनाव लड़कर राजनीति में आए। सोशल मीडिया और एआई के जरिए वोटरों से फीडबैक लेने के तरीके से वे चर्चा में आए। उन्होंने 2025 में ‘मिराई’ पार्टी बनाई। पार्टी ने पहले ऊपरी सदन में एक सीट, फिर इस साल निचले सदन में 11 सीटें जीतकर मौजूदगी दर्ज कराई। छोटी पार्टी होने के बावजूद मिराई शुरुआती सफल एआई समर्थक राजनीतिक पार्टियों में से एक मानी जा रही है। जब दुनियाभर में लोग डर रहे हैं कि एआई इंसानों की नौकरियां खा जाएगा, अन्नो ताकाहिरो इसे जापान की बड़ी समस्या ‘बूढ़ी होती आबादी’ के समाधान के रूप में देख रहे हैं। एआई के जरिए फीडबैक टीम मिराई में जनता की राय जानने के लिए पारंपरिक सर्वे की बजाय सोशल मीडिया और डिजिटल फीडबैक पर ज्यादा जोर रहता है। अन्नो का दावा है कि इससे जनता की आवाज पहले से ज्यादा गहराई से सुनी जा सकती है। ताइवान की मंत्री ऑड्रे टेंग से ली प्रेरणा अन्नो ताकाहिरो ने ताइवान की पूर्व डिजिटल मंत्री ऑड्रे टेंग से प्रेरणा ली है। अन्नो व्यवस्था बदलने नहीं, बल्कि तकनीक से सिस्टम को बेहतर बनाने की बात करते हैं। मिराई खुद को फैक्ट्स और डेटा आधारित राजनीति वाली पार्टी बताती है। इसी सोच के तहत उसने जापान में उपभोग कर (कंजम्प्शन टैक्स) घटाने का विरोध किया, यह कहते हुए कि इससे भविष्य का बजट प्रभावित हो सकता है। टेक फोकस: प्रत्याशियों की औसत उम्र 40 साल जनता से संवाद का तरीका: मिराई पार्टी ‘ब्रॉड लिसनिंग’ मॉडल अपनाती है। इडोबेटा, टॉकिंग मैनिफेस्टो जैसे टूल्स से एआई इंटरव्यू प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों की राय लेकर उसका विश्लेषण किया जाता है। डिजिटल लोकतंत्र है पार्टी का एजेंडा। उम्मीदवारों की औसत उम्र: 40 साल रखने पर जोर (जापान के बाकी सांसदों की औसत उम्र 55 साल है)। राजनीतिक विचारधारा: न दक्षिणपंथी और न वामपंथी, सिर्फ फैक्ट्स और तकनीक पर है पार्टी का फोकस।
दावा-पंड्या 22 मई को दूसरी बार शादी करने वाले हैं:माहिका शर्मा के साथ रिलेशनशिप में हैं; दोनों की तरफ से कोई ऐलान नहीं

हार्दिक पंड्या इन दिनों चोट के कारण आईपीएल के कुछ मैच नहीं खेल पाए हैं। इसी बीच सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि वो और उनकी गर्लफ्रेंड माहिका शर्मा शादी कर सकते हैं। हालांकि, दोनों की तरफ से अब तक इस बारे में कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक यूजर ने दावा किया है कि हार्दिक पंड्या और मॉडल माहिका शर्मा 22 मई को राजस्थान के उदयपुर में शादी करने वाले हैं। वहीं, एक यूजर ने अपनी पोस्ट में दावा किया कि माहिका लगातार मैचों के दौरान स्टेडियम में मौजूद रहती थीं और हार्दिक मैच खत्म होने के बाद सीधे उनके पास चले जाते थे। पोस्ट में यह भी कहा गया कि टीम की निजी चर्चाएं लीक होने की शिकायत के बाद BCCI ने खिलाड़ियों की गर्लफ्रेंड्स के टीम कैंप में आने पर सख्ती की। दावा किया गया कि हार्दिक इन नियमों से नाराज थे और इसी वजह से शादी का फैसला लिया गया। हालांकि, इन दावों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स इन वायरल पोस्ट्स को फर्जी भी बता रहे हैं। हार्दिक ने 2020 में नताशा स्टेनकोविक से शादी की थी बता दें कि हार्दिक ने मई 2020 में नताशा स्टेनकोविक से शादी की थी। उसी साल नताशा ने बेटे अगस्त्य को 30 जुलाई 2020 को जन्म दिया। साल 2024 में दोनों अलग हो गए। हार्दिक अब माहिका शर्मा को डेट कर रहे हैं। हाल ही में उन्होंने माहिका के नाम के पहले अक्षर का टैटू भी बनवाया है। 2026 टी20 विश्व कप जीत के बाद स्टेडियम में जश्न के दौरान हार्दिक और माहिका साथ नजर आए थे। दोनों का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया था, जिसमें वे एक-दूसरे के साथ समय बिताते दिखाई दिए थे। वहीं, 19 फरवरी को हार्दिक ने माहिका के जन्मदिन पर इंस्टाग्राम पर वीडियो शेयर करते हुए लिखा था, “जन्मदिन मुबारक हो मेरी राजकुमारी… मैं तुमसे प्यार करता हूं।”
टॉप-10-कंपनियों में से 9 की वैल्यू ₹3.12 लाख करोड़ घटी:रिलायंस टॉप लूजर रही, वैल्यू ₹1.34 लाख करोड़ घटी; SBI-TCS का मार्केट कैप भी घटा

मार्केट कैप के लिहाज से देश की 10 सबसे बड़ी कंपनियों में से 9 की वैल्यू बीते हफ्ते के कारोबार में 3.12 लाख करोड़ रुपए घट गई। इस दौरान रिलायंस इंडस्ट्रीज की मार्केट वैल्यू सबसे ज्यादा घटी है। रिलायंस की मार्केट वैल्यू ₹1.34 लाख करोड़ घटकर ₹18.08 लाख करोड़ पर आ गई। वहीं SBI की की मार्केट वैल्यू ₹52,245 करोड़ घटकर ₹8.89 लाख करोड़ पर आ गई। इसके अलावा TCS, बजाज फाइनेंस, HDFC बैंक, ICICI बैंक, लार्सन एंड टुब्रो, HUL और LIC की मार्केट वैल्यू भी घटी है। वहीं बीते हफ्ते सिर्फ भारतीय एयरटेल की मार्केट वैल्यू बढ़ी है। देश की टॉप-10 कंपनियों में से 9 की वैल्यू ₹3.12 लाख करोड़ घटी सोर्स: BSE (11 मई – 15 मई, 2026) बीते हफ्ते सेंसेक्स 2,090 अंक गिरा था पिछले हफ्ते सेंसेक्स 2,090 (2.7%) अंक और निफ्टी 532 (2.2%) अंक गिरा था। वहीं बीते हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन यानी शुक्रवार को सेंसेक्स 516 अंक की गिरावट के साथ 77,328 पर बंद हुआ। निफ्टी में भी 150 अंकों की गिरावट रही, ये 24,176 पर आ गया। मार्केट कैपिटलाइजेशन क्या होता है? मार्केट कैप किसी भी कंपनी के टोटल आउटस्टैंडिंग शेयरों यानी वे सभी शेयर जो फिलहाल उसके शेयरहोल्डर्स के पास हैं, उनकी वैल्यू है। इसका कैलकुलेशन कंपनी के जारी शेयरों की कुल संख्या को उनकी कीमत से गुणा करके किया जाता है। इसे एक उदाहरण से समझें… मान लीजिए… कंपनी ‘A’ के 1 करोड़ शेयर मार्केट में लोगों ने खरीद रखे हैं। अगर एक शेयर की कीमत 20 रुपए है, तो कंपनी की मार्केट वैल्यू 1 करोड़ x 20 यानी 20 करोड़ रुपए होगी। कंपनियों की मार्केट वैल्यू शेयर की कीमतों के बढ़ने या घटने के चलते बढ़ता-घटता है। इसके और कई कारण हैं… मार्केट कैप के उतार-चढ़ाव का कंपनी और निवेशकों पर क्या प्रभाव पड़ता है? कंपनी पर असर : बड़ा मार्केट कैप कंपनी को मार्केट से फंड जुटाने, लोन लेने या अन्य कंपनी एक्वायर करने में मदद करता है। वहीं, छोटे या कम मार्केट कैप से कंपनी की फाइनेंशियल डिसीजन लेने की क्षमता कम हो जाती है। निवेशकों पर असर : मार्केट कैप बढ़ने से निवेशकों को डायरेक्ट फायदा होता है। क्योंकि उनके शेयरों की कीमत बढ़ जाती है। वही, गिरावट से नुकसान हो सकता है, जिससे निवेशक शेयर बेचने का फैसला ले सकते हैं। उदाहरण: अगर TCS का मार्केट कैप ₹12.43 लाख करोड़ बढ़ता है, तो निवेशकों की संपत्ति बढ़ेगी, और कंपनी को भविष्य में निवेश के लिए ज्यादा पूंजी मिल सकती है। लेकिन मार्केट कैप गिरता है तो इसका नुकसान हो सकता है।
NEET पेपर लीक पर BJP बोली- राहुल भ्रम फैला रहे:कांग्रेस 22 लाख छात्रों के भविष्य पर राजनीति कर रही, हमने तुरंत कार्रवाई की

BJP के राष्ट्रीय मीडिया सह-प्रमुख एवं राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ संजय मयूख ने NEET पेपर लीक मामले पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा दिए गए बयान को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण, संवेदनहीन और राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते हुए कड़ी आपत्ति जताई है। डॉ. मयूख ने कहा कि राहुल गांधी आखिर कब तक सिर्फ खोखले आरोपों और भ्रम फैलाने की राजनीति करते रहेंगे? यह समय देश के लाखों मेधावी छात्रों की पीड़ा को समझने और उनके भविष्य को लेकर संवेदनशील होने का है, न कि इस दुखद परिस्थिति पर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने का। डॉ. मयूख ने कहा कि केंद्र सरकार ने इस पूरे मामले में अपनी जवाबदेही निभाते हुए तुरंत CBI जांच, प्रभावित छात्रों के लिए री-एग्जाम और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने जैसे कई निर्णायक कदम उठाए हैं। ऐसे समय में विपक्ष से एक जिम्मेदार भूमिका की उम्मीद थी। उन्होंने आगे कहा, ”अगर सरकार री-NEET और CBI जांच का फैसला नहीं लेती, तो यही लोग सरकार पर निष्क्रियता का आरोप लगाते। अब जब सरकार ने त्वरित, ईमानदार और सख्त निर्णय लिए हैं, तो राहुल गांधी की राजनीति का आधार ही कमजोर पड़ गया है।” भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया सह-प्रमुख ने कांग्रेस को आईना दिखाते हुए कहा कि दूसरों पर उंगली उठाने से पहले राहुल गांधी को अपने और अपनी पार्टी के कार्यकाल के दौरान हुए अनगिनत पेपर लीक और परीक्षा घोटालों पर देश को जवाब देना चाहिए। कांग्रेस का इतिहास युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने का रहा है जैसे यूपीए शासनकाल में हुए AIPMT पेपर लीक, SSC घोटाले, CBSE पेपर लीक। डॉ. मयूख ने साफ किया कि पीएम मोदी के नेतृत्व में सरकार का संदेश बिल्कुल स्पष्ट है- छात्रों के भविष्य के साथ कोई समझौता नहीं होगा। पेपर लीक माफियाओं पर “जीरो टॉलरेंस” नीति के तहत देशव्यापी कार्रवाई की जा रही है, जो इस बात का प्रमाण है कि सरकार इस मामले को दबा नहीं रही, बल्कि जड़ से खत्म कर रही है। कथित मास्टरमाइंड पीवी कुलकर्णी को गिरफ्तार किया जा चुका है। इसमें संलिप्त बायोलॉजी लेक्चरर मनीषा मंधारे को सलाखों के पीछे भेजा गया है। जयपुर, गुरुग्राम, नासिक सहित देश के कई स्थानों से जुड़े ऑपरेटिव्स और संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने जोर देकर कहा, “यह लीपापोती नहीं है। यह चुप्पी नहीं है। यह धरातल पर दिखती हुई सख्त कार्रवाई है। राष्ट्रीय मीडिया सह-प्रमुख ने कहा कि इस संवेदनशील समय में देश के छात्रों और युवाओं को किसी राजनीतिक एजेंडे या भटकाव की नहीं, बल्कि सहयोग, संवेदनशीलता, विश्वास और समर्थन की सबसे अधिक आवश्यकता है। मोदी सरकार देश के हर एक ईमानदार और परिश्रमी छात्र के साथ चट्टान की तरह मजबूती से खड़ी है। सरकार की यह लड़ाई देश के युवाओं के हक के लिए है, और किसी भी पेपर लीक माफिया या राजनीतिक अवसरवादी को बख्शा नहीं जाएगा।
सात्विक-चिराग की जोड़ी थाईलैंड ओपन का फाइनल हारी:इंडोनेशियाई जोड़ी ने 12-21, 25-23 से हराया, इस सीजन एक भी टाइटल नहीं जीते

सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी भारतीय जोड़ी को थाईलैंड ओपन सुपर 500 बैडमिंटन टूर्नामेंट के फाइनल मुकाबले में करारी हार झेलनी पड़ी है। उन्हें रविवार को इंडोनेशिया के लियो रोली कार्नांडो और डेनियल मार्टिन को फाइनल में 12-21, 21-25 से हराया। दुनिया की चौथे नंबर की भारतीय जोड़ी (सात्विक-चिराग) ने मैच में कुल 4 चैंपियनशिप पॉइंट बचाए। लेकिन 53 मिनट तक चले इस रोमांचक मैच में वे खेल को तीसरे गेम तक नहीं ले जा सके। यह जोड़ी सीजन में पहली बार फाइनल में पहुंची है। इसने 2019 और 2024 में इस टूर्नामेंट का खिताब जीत चुके हैं। इस हार के बाद सात्विक-चिराग का इस सीजन में पहला खिताब जीतने का इंतजार और बढ़ गया है। 2 पॉइंट्स में फाइनल का रोमांच सेमीफाइनल में मलेशियाई जोड़ी को 82 मिनट में हराया था दुनिया की चौथे नंबर की भारतीय जोड़ी ने शनिवार को सेमीफाइनल में मलेशिया के गोह स्जे फी और नूर इज्जुद्दीन को 19-21, 22-20, 21-16 से हराया। यह मुकाबला 82 मिनट तक चला। सात्विक-चिराग का अभियान, अब तक अजेय रहे सात्विक-चिराग की जोड़ी इस टूर्नामेंट के सेमीफाइनल तक एक भी मैच नहीं गंवाया था। उसने राउंड ऑफ 32 में इंडोनेशिया, राउंड ऑफ 16 में मलेशिया, क्वार्टर फाइनल में जापान और सेमीफाइनल में मलेशिया की जोड़ी हो हराया था। क्या होता है BWF सुपर 500 टूर्नामेंट? BWF के वर्ल्ड टूर का ग्रेड-2 टूर्नामेंट है। दुनिया के टॉप शटलर्स यहां रैंकिंग अंक और बड़े टूर्नामेंट्स के लिए क्वालिफिकेशन हासिल करने के लिए से खेलते हैं। एक कैलेंडर इयर में दुनिया भर में 9 सुपर 500 टूर्नामेंट आयोजित होते हैं। इनमें इनामी राशि और रैंकिंग पॉइट्स मिलते हैं।
गर्मी में डायबिटीज के मरीज भूलकर भी न करें ये गलती! डॉक्टर की खास सलाह, देखें वीडियो

X गर्मी में डायबिटीज के मरीज भूलकर भी न करें ये गलती! डॉक्टर की खास सलाह, देखें Diabetes Summer Care Tips: जोधपुर के एमडीएम अस्पताल के मधुमेह विशेषज्ञ डॉक्टर रौनक गांधी के अनुसार, भीषण गर्मी में डायबिटीज मरीजों के लिए डिहाइड्रेशन का खतरा काफी बढ़ जाता है. शरीर में शुगर का स्तर बढ़ने पर ग्लूकोज के साथ पानी भी पेशाब के जरिए अधिक बाहर निकलता है. इसके अलावा, डापा और एम्पा ग्लिफ्लोज़िन जैसी दवाइयाँ लेने वाले मरीजों में भी यूरिन की मात्रा बढ़ने से पानी की कमी हो सकती है. इससे बचाव के लिए डॉक्टर ने मरीजों को बिना प्यास लगे भी समय-समय पर पर्याप्त पानी पीने, धूप से बचने और नियमित शुगर जांच की सलाह दी है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।
पाकिस्तान के लाहौर में 9 जगहों के इस्लामी नाम बदले:इस्लामपुरा अब कृष्णनगर, बाबरी चौक फिर से जैन मंदिर चौक, मुस्तफाबाद का नाम धर्मपुरा हुआ

अमृतसर से लगभग 50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित लाहौर दशकों तक इस्लामीकरण के शिकंजे में रहने के बाद जड़ों की ओर लौट रहा है। दो महीने के भीतर लाहौर में 9 जगहों के इस्लामी नाम फिर से मूल हिंदू या ब्रिटिश विरासत पर रखे गए हैं। इनमें इस्लामपुरा अब अपने पुराने नाम कृष्णनगर और बाबरी मस्जिद चौक अब पुराने जैन मंदिर चौक के नाम से आधिकारिक रूप से जाना जाएगा। इनके बोर्ड भी लगा दिए गए हैं। खास बात यह भी है कि इस बदलाव के खिलाफ वहां कोई कट्टरपंथी मोर्चा भी नहीं खोल पाया। पंजाब सूबे की सीएम मरियम नवाज के अनुसार परकोटा शहर लाहौर के आठों दरवाजे जिनमें दिल्ली गेट भी शामिल है उसका भी जीर्णोद्धार किया जाएगा। सूत्रों के अनुसार नाम परिवर्तन के दूसरे चरण में पाकिस्तान के सिंध और खैबर पखतूनख्वाह प्रांतों में भी मूल नामों का ऐलान किया जा सकता है। जैन मंदिर… नाम से ईमान पर आंच नहीं जैन मंदिर के पास के अनारकली इलाके के मौलाना वाजिद कादरी का मानना है कि इस्लाम को किसी मंदिर या गुरुद्वारे से समस्या नहीं है। 1990 के दशक में जैन मंदिर चौक का नाम बदलकर बाबरी मस्जिद चौक कर दिया गया। ये सियासी फैसला था। हमने कभी इसे बाबरी मस्जिद चौक नहीं बोला। हमें यह समझना होगा कि जिन पूर्वजों ने ये हिंदू नाम रखे थे, वे भी मुसलमान ही थे, और इससे उनके ईमान पर आंच नहीं आई थी। लक्ष्मी चौक… हमारी विरासत का हिस्सा लाहौर की बीकनहाउस यूनिवर्सिटी के लेक्चरर साद मलिक कहते हैं, यह वाकई सुखद बदलाव है। मैं इसे हमेशा लक्ष्मी चौक ही कहता रहा, क्योंकि मेरे पिता इसे इसी नाम से बुलाते थे। साद कहते हैं म्युनिसिपल कॉरपोरेशन ने अपने कागजों में भले ही इसका नाम मौलाना जफर अली चौक कर दिया हो, लेकिन मेरे और मेरे जैसे कई लोगों के लिए लक्ष्मी चौक उस विरासत का हिस्सा है, जिसे जफर अली खान के नाम से कोई लेना-देना नहीं है। लक्ष्मी चौक पीढ़ियों से जुड़ा हुआ नाम है। नवाज के दौर में बदले थे कई नाम…बेटी अब दुरुस्त कर रही; इमरान खान को नाम बदली से परहेज था नाम बदलने का दौर कब शुरू हुआ? पाक के पूर्व पीएम नवाज शरीफ और पंजाब की सीएम मरियम नवाज ने 19 मार्च को एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई। इसमें लाहौर हेरिटेज एरिया रिवाइवल (LHAR) प्रोजेक्ट पर चर्चा हुई। लाहौर के नए नामों को फिर से पुराने हिंदू या ब्रिटिश विरासत के दौर के नाम पर रखने का फैसला लिया गया था। नवाज शरीफ का कहना था कि हमें यूरोप से सीख लेनी चाहिए। वे ऐतिहासिक नामों से छेड़छाड़ नहीं करते हैं। लाहौर के पुराने नाम हमारा इतिहास है, इसे हमें सहेजना है, बदलना नहीं है। मरियम का कहना था कि लाहौर का इतिहास ही इसकी पहचान है। पुराने नाम और इमारतें इसका सबूत हैं। कट्टरपंथियों का क्या रवैया रहा? कट्टरपंथ के नाम पर सड़कों पर उत्पात मचाने के लिए कुख्यात तहरीक-लब्बैक-पाकिस्तान (TLP) को मरियम सरकार ने बैन कर रखा है। इसलिए कोई विरोध नहीं हुआ। लश्कर-ए-तैयबा ने भी मूल नाम रखने का कोई विरोध नहीं किया है। नाम बदली किसके दौर में हुई? लाहौर में नाम बदलने की कवायद 1990 के दशक में बाबरी मस्जिद के ढांचे को गिराने के बाद हुई। उस दौर में केंद्र में नवाज शरीफ, फिर बेनजीर और परवेज मुशर्रफ की सरकारें रहीं। 2018 से 2022 तक पीएम रहे इमरान खान के समय में नाम बदलने का दौर नहीं चला।






