भारत में घुसपैठ के बाद आतंकी हेयर ट्रांसप्लांट कराने पहुंचा:स्लीपर सेल नेटवर्क बनाने आया था; जांच एजेंसी से बोला- कश्मीर देखकर मकसद बदल गए

भारत में आतंकी हमलों को अंजाम देने के मकसद से घुसे लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के एक पाकिस्तानी आतंकी ने अपना सपना पूरा करने के लिए मिशन को बीच में रोक दिया। आतंकी ने श्रीनगर में हेयर ट्रांसप्लांट कराया और फर्जी आधार-पैन बनवाकर भारत से भागने की योजना बना रहा था। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने रविवार को बताया कि आतंकी का नाम मोहम्मद उस्मान जट्ट उर्फ ‘चाइनीज’ है। पिछले महीने श्रीनगर पुलिस ने जट्ट और अब्दुल्ला उर्फ अबू हुरैरा को गिरफ्तार किया था। दोनों पर जम्मू-कश्मीर से बाहर स्लीपर बेस तैयार करने का आरोप है। बाद में जांच NIA को सौंप दी गई। NIA की पूछताछ में जट्ट ने दावा किया कि कश्मीर की असली जिंदगी देखने के बाद उसके मकसद पूरी तरह बदल गए। उसने बताया कि पाकिस्तान में लश्कर के ट्रेनिंग कैंपों में उसे कश्मीर को लेकर जो बताया गया था, वहां तस्वीर बिल्कुल अलग थी। भारत में स्लीपर सेल नेटवर्क बनाने आया था आतंकी अधिकारियों के मुताबिक, उस्मान जट्ट लाहौर का रहने वाला है और लश्कर का प्रशिक्षित ऑपरेटिव है। वह उत्तर और मध्य कश्मीर में आतंकी गतिविधियों में शामिल रहा। उसे भारत में घुसपैठ के बाद जम्मू-कश्मीर के बाहर आतंकियों का स्लीपर सेल नेटवर्क बनाने का काम सौंपा गया था। NIA के अनुसार, जट्ट भारत में घुसने के बाद श्रीनगर की ऊपरी पहाड़ियों में रहा। इस दौरान उसकी मुलाकात पाकिस्तानी आतंकियों- जरगाम और अब्दुल्ला उर्फ अबू हुरैरा से हुई। अबू हुरैरा लश्कर से जुड़ा पुराना आतंकी है। दुकानदार से हेयर ट्रांसप्लांट की जानकारी मिली जट्ट के मुताबिक, आतंकी जरगाम श्रीनगर में उसे एक दुकान पर ले गया और बताया कि दुकान का मालिक भरोसेमंद व्यक्ति है। दुकानदार से बातचीत के दौरान जट्ट को पता चला कि उसने हेयर ट्रांसप्लांट कराया है। इसके बाद आतंकी जट्ट ने भी हेयर ट्रांसप्लांट ट्रीटमेंट लेने का फैसला किया। जांच एजेंसियों के मुताबिक, वह कई सालों से गंभीर हेयर लॉस की समस्या से जूझ रहा था। वह हेयर ट्रांसप्लांट कराना चाहता था, लेकिन उसे लगता था कि यह सुविधाएं सिर्फ पश्चिमी देशों में ऊंचे दामों पर मिलती है। आतंकी पंजाब गया, अंग्रेजी सीखने की कोशिश की आतंकी ने अधिकारियों को बताया कि वह दुकानदार के संपर्क में रहा और उससे हेयर ट्रांसप्लांट कराने में मदद मांगी। इसके बाद वह दुकानदार उसे शहर के भीतर ही एक क्लिनिक ले गया, जहां आतंकी का हेयर ट्रांसप्लांट किया गया। इस दौरान कई सेशन हुए। इसके लिए आतंकी को कई बार क्लिनिक में रातभर रुकना भी पड़ा। ट्रांसप्लांट के बाद जट्ट पैसेंजर गाड़ी से जम्मू गया और फिर स्लीपर बस से पंजाब के मालेरकोटला पहुंचा। वहां उसने तुर्की के टीवी शो देखे और अंग्रेजी सीखने की कोशिश की। फर्जी आधार-पैन और पासपोर्ट बनवाने की तैयारी पूछताछ में आतंकी ने बताया कि वह असली आधार कार्ड, PAN कार्ड और बाद में पासपोर्ट बनवाना चाहता था ताकि भारत से भाग सके। अधिकारियों के अनुसार वह उमर उर्फ ‘खरगोश’ की तरह भागने की योजना बना रहा था। उमर पाकिस्तान के कराची का रहने वाला आतंकी है, जो 2024 में जयपुर से फर्जी पासपोर्ट बनवाकर इंडोनेशिया भाग गया था। अभी खाड़ी के देश में छिपा है। दिल्ली बम धमाके के बाद भी पकड़ाया था टेरर मॉड्यूल लश्कर-ए-तैयबा के इस अंतरराज्यीय मॉड्यूल का खुलासा नवंबर 2025 में अल-फलाह मॉड्यूल के भंडाफोड़ के करीब छह महीने बाद हुआ है। उस मॉड्यूल में डॉक्टरों समेत कई पढ़े-लिखे लोगों के कट्टरपंथी नेटवर्क का खुलासा हुआ था। आरोपियों में अल फलाह यूनिवर्सिटी का डॉ. उमर-उन-नबी भी शामिल था, जो पिछले साल 10 नवंबर को लाल किले के बाहर विस्फोटकों से भरी कार चला रहा था। उस धमाके में एक दर्जन से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी
एएमएमके के एकमात्र विधायक एस कामराज को विजय के नेतृत्व वाली टीवीके सरकार को समर्थन देने के लिए अयोग्यता का सामना करना पड़ रहा है | भारत समाचार

आखरी अपडेट:17 मई, 2026, 16:57 IST एएमएमके के एकमात्र विधायक एस कामराज ने बाद में अपनी पार्टी से निष्कासन का सामना करने के बावजूद टीवीके सरकार का समर्थन किया। एएमएमके विधायक एस कामराज। (छवि: मायनेटा) एएमएमके प्रमुख टीटीवी दिनाकरन ने रविवार को कहा कि उनकी पार्टी के एकमात्र विधायक एस कामराज को 13 मई को महत्वपूर्ण फ्लोर टेस्ट के दौरान तमिलनाडु में मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय की टीवीके सरकार का समर्थन करने के लिए अयोग्यता का सामना करना पड़ेगा। एएमएमके, जो अन्नाद्रमुक और भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का हिस्सा था, ने तमिलनाडु चुनाव में 11 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ा और केवल मन्नारगुडी निर्वाचन क्षेत्र जीता। हालांकि, अभिनेता से नेता बने विजय ने बुधवार को तमिलनाडु विधानसभा में 144 वोटों के साथ बहुमत परीक्षण आसानी से जीत लिया। अतिरिक्त बढ़ावा एएमएमके विधायक एस कामराज से मिला, जिन्होंने बाद में अपनी पार्टी से निष्कासन का सामना करने के बावजूद टीवीके सरकार का समर्थन किया। यह भी पढ़ें: ‘बेहद हैरान’: विजय के तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बनने पर रजनीकांत की प्रतिक्रिया, स्टालिन से मुलाकात पर दी सफाई टीवीके के लिए कामराज के समर्थन के बाद, दिनाकरण ने कहा, “मैंने अब कामराज को पार्टी से निकाल दिया है। उन्हें जाने दें और दूसरी तरफ (टीवीके) में शामिल हो जाएं और अगर वे उन्हें पद की पेशकश करते हैं तो मंत्री बन जाएं। फिर हम देखेंगे कि अगला कदम क्या है।” दिनाकरम ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि वह कामराज की अयोग्यता पर जोर देंगे। उन्होंने कहा, “उन्हें लगता है कि हम कार्रवाई नहीं कर सकते क्योंकि वह पार्टी के अकेले विधायक हैं। हम आवश्यक कदम उठाएंगे। टीवीके द्वारा उनका समर्थन स्वीकार करना कानूनी रूप से संदिग्ध है। हम जिसे ‘हॉर्स-ट्रेडिंग’ का मामला मानते हैं, हम उसका पुरजोर विरोध करेंगे।” दिनाकरन ने पार्टी नेताओं से एकता बनाए रखने और अन्नाद्रमुक के संस्थापक एमजी रामचंद्रन (एमजीआर) और तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जे जयललिता की विरासत का हवाला देते हुए जल्दबाजी में लिए गए फैसलों से बचने का आग्रह किया, जो “कार्यकर्ताओं का मनोबल गिरा सकते हैं”। इस बीच, विजय सरकार ने विश्वास मत में अन्नाद्रमुक के 25 बागी विधायकों का समर्थन भी हासिल कर लिया, जिन्हें बाद में उनकी अपनी पार्टी से भी निष्कासित कर दिया गया था। एसपी वेलुमणि और सी वे षणमुगम के नेतृत्व वाले अन्नाद्रमुक के विद्रोही खेमे ने पार्टी प्रमुख एडप्पादी के पलानीस्वामी पर कट्टर प्रतिद्वंद्वी द्रमुक के साथ सरकार बनाने का प्रयास करने का आरोप लगाने के बाद विजय को बाहरी समर्थन दिया है। अन्नाद्रमुक ने यह भी कहा कि उन्होंने उन 25 विधायकों को अयोग्य ठहराने के लिए आवेदन किया है जिन्होंने पार्टी के व्हिप की अवज्ञा की और टीवीके के नेतृत्व वाली सरकार को समर्थन देने के लिए मतदान किया, जो ईपीएस नेतृत्व के तहत पार्टी में सबसे गंभीर संकट को दर्शाता है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया एएमएमके के एकमात्र विधायक एस कामराज को विजय के नेतृत्व वाली टीवीके सरकार को समर्थन देने के लिए अयोग्य ठहराया जा सकता है अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट) कामराज अयोग्यता पर टीटीवी दिनाकरन(टी)एएमएमके विधायक अयोग्यता(टी)एस कामराज समर्थन(टी)विजय टीवीके सरकार(टी)तमिलनाडु फ्लोर टेस्ट(टी)एआईएडीएमके बागी विधायक(टी)एनडीए गठबंधन की राजनीति(टी) खरीद फरोख्त के आरोप
भूल जाओगे पेप्सी-कोला…भीषण गर्मी में जौ के पानी का कोई तोड़ नहीं, वजन घटाने में भी बेजोड़

Last Updated:May 17, 2026, 16:47 IST Barley Water Benefits : भीषण गर्मी में डिहाइड्रेशन, थकान, चक्कर आना, पेट खराब होना और बार-बार दस्त लगने जैसी समस्याएं आम हैं. इससे बचने के लिए जौ का पानी का आ सकता है, जिसे हमारे बुजुर्ग वर्षों से स्वास्थ्यवर्धक पेय के रूप में इस्तेमाल करते आ रहे हैं. लोकल 18 से अंबाला शहर नागरिक अस्पताल में की आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. मीनाक्षी शर्मा बताती हैं कि इसे किडनी स्टोन, पेशाब में जलन और हाई ब्लड प्रेशर जैसी स्थितियों में भी सहायक पेय के रूप में दिया जाता है. अंबाला. भीषण गर्मी के मौसम में शरीर से अत्यधिक पसीना निकलने से पानी और आवश्यक खनिजों की कमी होने लगती है. इसका परिणाम डिहाइड्रेशन, थकान, चक्कर आना, पेट खराब होना और बार-बार दस्त लगने जैसी समस्याओं के रूप में सामने आता है. ऐसे समय में शरीर को ठंडक देने और ऊर्जा बनाए रखने के लिए घरेलू उपाय कारगर साबित होते हैं. इन्हीं में से एक है जौ का पानी है, जिसे हमारे बुजुर्ग वर्षों से स्वास्थ्यवर्धक पेय के रूप में इस्तेमाल करते आ रहे हैं. यह न केवल शरीर को हाइड्रेट रखता है, बल्कि पाचन को मजबूत बनाने और कई रोगों में राहत पहुंचाने में भी सहायक माना जाता है. लोकल 18 से अंबाला शहर नागरिक अस्पताल में की आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. मीनाक्षी शर्मा बताती हैं कि जौ का पानी कई स्वास्थ्य समस्याओं में लाभकारी हो सकता है. इसे किडनी स्टोन, पेशाब में जलन, यूरिन इंफेक्शन और हाई ब्लड प्रेशर जैसी स्थितियों में सहायक पेय के रूप में दिया जाता है. यह शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने, पेट की जलन और एसिडिटी को कम करने में मदद करता है. गर्मियों में इसका नियमित सेवन शरीर को अंदर से ठंडक पहुंचाता है और लू से बचाने में सहायक हो सकता है. रोटी से सत्तू तक डॉ. मीनाक्षी कहती हैं कि जौ के पानी में मौजूद कण कोलेस्ट्रॉल के साथ शुगर को कंट्रोल करते हैं. जौ का इस्तेमाल रोटी, दलिया और सत्तू के रूप में भी किया जाता है. जौ का पानी वजन घटाने की चाह रखने वालों के लिए भी उपयोगी है. इसमें मौजूद फाइबर लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस कराते हैं, जिससे बार-बार भूख नहीं लगती. यह मेटाबॉलिज्म को सक्रिय बनाकर शरीर की अतिरिक्त चर्बी कम करने में मदद करता है. कैसे बनाएं जौ का पानी बनाना बेहद आसान है. इसके लिए दो चम्मच जौ को एक गिलास पानी में डालकर लगभग एक घंटे के लिए भिगो दें. इसके बाद पानी छान लें. फिर स्वाद बढ़ाने के लिए इसमें नींबू का रस और थोड़ा शहद मिलाया जा सकता है. चाहें तो इसे ठंडा करके पिएं. गर्मियों में दिन में एक से दो गिलास जौ का पानी शरीर को तरोताजा रखने के लिए पर्याप्त है. हालांकि, यदि डिहाइड्रेशन के लक्षण गंभीर हों, लगातार दस्त या उल्टी हो रही हो या अत्यधिक कमजोरी महसूस हो रही हो, तो घरेलू उपचार के बजाय तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें. About the Author Priyanshu Gupta प्रियांशु गुप्ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें
नई फिल्म:कांस में रिलीज हुआ वामिका की ‘डीसी’ का ट्रेलर

वामिका गब्बी मौजूदा वक्त में इंडस्ट्री की सबसे व्यस्त एक्ट्रेसेस में से एक हैं। पिछले महीने ‘भूत बंगला’ की सफलता के बाद कल ही उनकी नई फिल्म ‘पति पत्नी और वो दो’ रिलीज हुई है। अब उनकी आगामी फिल्म ‘डीसी’ रिलीज को तैयार है। फिल्म का ट्रेलर 79वें कांस फिल्म फेस्टिवल में जारी किया गया है। ‘डीसी’ से निर्देशक से एक्टर बने लोकेश कनगराज अपना एक्टिंग डेब्यू कर रहे हैं। 3 मिनट 13 सेकेंड के इस ट्रेलर में लोकेश कनगराज को देवदास और वामिका को चंद्रा के रूप में दिखाया गया है। ट्रेलर में दिखाया जाता है कि चंद्रा के माता-पिता ने कोलकाता में उसे कई साल पहले अवैध रूप से देह व्यापार में बेच दिया था। अब उसके पास रहने की कोई जगह नहीं है। जल्द ही पता चलता है कि देवदास एक पुलिस वाले और डॉक्टर चंद्रा की हत्या के आरोप में वॉन्टेड है। इसके बाद ट्रेलर में जबरदस्त एक्शन, खूनखराबा, बम धमाके और गोलीबारी देखने को मिलती है।
नया खलनायक:राम चरण स्टारर फिल्म ‘पेड्डी’ से दिव्येंदु का फर्स्ट लुक हुआ रिवील

साउथ सुपरस्टार राम चरण की अगली फिल्म ‘पेड्डी’ लगातार चर्चा में बनी हुई है। ‘गेम चेंजर’ के बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं करने के बाद दर्शकों को इस फिल्म से काफी उम्मीदें हैं। फिल्म में जाह्नवी कपूर भी लीड रोल में नजर आएंगी। अब मेकर्स ने फिल्म से दिव्येंदु का पहला लुक भी जारी कर दिया है। वेब सीरीज ‘मिर्जापुर’ से लोकप्रिय हुए दिव्येंदु शर्मा को फिल्म में ‘रामबुज्जी’ के किरदार में पेश किया गया है। पोस्टर में उनका दमदार और आक्रामक अंदाज देखने को मिल रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक दिव्येंदु फिल्म में ग्रामीण आंध्र प्रदेश की क्रिकेट दुनिया पर दबदबा रखने वाले एक खतरनाक खलनायक की भूमिका निभा रहे हैं। उनका लुक कहानी में बड़े टकराव और तीव्र संघर्ष की ओर इशारा करता है। पोस्टर में उनका गंभीर और जोशीला अंदाज सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। फिल्म का निर्देशन बुची बाबू सना कर रहे हैं। इस फिल्म को बड़े स्तर पर तैयार किया जा रहा है और इसे पैन-इंडिया रिलीज के तौर पर पेश किया जाएगा। मेकर्स ने यह भी घोषणा की है कि फिल्म का ट्रेलर 18 मई को रिलीज किया जाएगा। वहीं, यह फिल्म 4 जून को सिनेमाघरों में दस्तक देगी। बता दें कि दिव्येंदु को हाल ही में वेब सीरीज ‘ग्लोरी’में देगा गया था। इस सीरीज में उनके साथ पुलकित सम्राट ने भी लीड रोल प्ले किया है।
भरवां करेला रेसिपी: भरवां करेला बनाने के ये सीक्रेट तरीके, कड़वापन होगा छूमंतर; विधि नोट करें

भरवां करेला सामग्री बनाने के लिए 250 से 500 ग्राम करेला पेज हरी मिर्च अदरक-लहसुन सौंफ पाउडर अमचूर पाउडर धनिया पाउडर हल्दी लाल मिर्च हींग जीरा नमक हल्दी के तेल छवि: एआई करेले की चॉकलेटहट दूर करने के लिए, सबसे पहले करेले को धोकर छीन लें। अब सभी करेले के बीच में चीरा लगा लें। अब उन पर अच्छे तरह का नमक लगाएं 30 से 40 मिनट के लिए छोड़ दें। छवि: एआई इसके बाद करेलों को साफ पानी से धोकर निशान लें। इस ट्रिक को फॉलो करके देखें काफी हद तक बकवासहट कम हो जाता है। छवि: Pexels अगर आप करेले की चॉकलेटहट पूरी तरह से खत्म करना चाहते हैं तो नमक डालकर धोने के बाद 5 से 7 मिनट के लिए स्टीम में पका लें। यह ट्रिक करेले को स्वादिष्ट बनाने में काफी मदद करती है। छवि: एआई कच्चे ही में तेल गर्म करें। इसमें हिंग और जीरा डाला गया। कॉम्बिनेशन काटा, प्याज हरी मिर्च, अदरक-लहसुन, करेले के अनोखे सितारे भून लें। हल्दी, धनिया पाउडर, सौंफ पाउडर, काली मिर्च, अमचूर पाउडर, नमक मोनोलेमिक को घटक। छवि: फ्रीपिक जब मसाला ठंडा हो जाए तो इसे करेलों के अंदर अच्छी तरह भर दें। इसके बाद करेलों को गेज से बांध लें ताकि पकाते समय मसाला बाहर न निकले। छवि: फ्रीपिक अब कच्ची राख में सरसों का तेल गर्म करें और भरवां करेलों को शामिल करें। 10 से 15 मिनट तक अधूरा औसत पर आदर्श। बीच-बीच में करेलों को पलटते रहें ताकि वे हर तरफ से पतले और कुरकुरे हो जाएं। छवि: फ्रीपिक करेला ब्लॉक समय अमचूर पाउडर, नींबू अवश्य लगाएं। इससे खूबसूरत रिश्ता हो जाता है। स्टफिंग में प्याज से स्वाद सबसे अच्छा हो जाता है। वहीं अन्यत्र के तेल में पकाने से भरवां करेला स्वादिष्ट लगता है। छवि: फ्रीपिक (टैग्सटूट्रांसलेट)भरवा करेला रेसिपी(टी)भरवा करेला रेसिपी(टी)बिना कड़वाहट वाला करेला(टी)भारतीय करेला रेसिपी(टी)भरवा करेला कुकिंग टिप्स(टी)घर का बना भरवा करेला(टी)करेला मसाला रेसिपी(टी)स्वस्थ भारतीय सब्जी(टी)करेला रेसिपी हिंदी में(टी)सरसों तेल करेला रेसिपी
इस हफ्ते शेयर बाजार में काफी हलचल की उम्मीद:अमेरिका-ईरान तनाव, विदेशी निवेशकों की बिकवाली जैसे 5 फैक्टर तय करेंगे चाल

कल 18 मई से शुरू होने वाले हफ्ते में शेयर बाजार में काफी हलचल रहने वाली है। अमेरिका-ईरान तनाव और विदेशी निवेशकों की बिकवाली से लेकर टेक्निकल फैक्टर बाजार की दिशा तय करेंगे। चलिए समझते हैं अगले हफ्ते बाजार में क्या हो सकता है… सपोर्ट और रेजिस्टेंस सपोर्ट जोन: 23,466 | 23,345 | 23,320 | 22,858 | 22,780 | 22,558 सपोर्ट यानी, वह स्तर जहां शेयर या इंडेक्स को नीचे गिरने से सहारा मिलता है। यहां खरीदारी बढ़ने से कीमत आसानी से नीचे नहीं जाती। यहां खरीदारी का मौका हो सकता है। रेजिस्टेंस जोन: 23,812 | 23,872 | 23,935 | 24,140 | 24,382 | 24,450 रेजिस्टेंस यानी, वह स्तर जहां शेयर या इंडेक्स को ऊपर जाने में रुकावट आती है। ऐसा बिकवाली बढ़ने से होता है। रजिस्टेंस जोन पार करने पर तेजी की उम्मीद रहती है। नोट: सपोर्ट और रेजिस्टेंस के लेवल्स वेल्थ व्यू एनालिटिक्स की रिपोर्ट के अनुसार है। अब 5 फैक्टर्स जो बाजार की दिशा तय कर सकते हैं… 1. अमेरिका-ईरान युद्ध और शांति वार्ता अमेरिका-ईरान युद्ध को शुरू हुए लगभग तीन महीने होने वाले हैं। ईरान ने घोषणा की है कि वह जल्द ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जरिए समुद्री ट्रैफिक को मैनेज करने का प्रस्ताव पेश करेगा। इस कदम पर प्रतिक्रिया देते हुए डोनाल्ड ट्रम्प ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान शांति समझौते पर आगे बढ़ने से इनकार करता है, तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। 2. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और ईरान के विदेश मंत्री के बयानों के बाद शुक्रवार को कच्चे तेल की कीमतों में 3% से ज्यादा की तेजी आई। इन बयानों से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास जहाजों पर हमलों को रोकने के समझौते की उम्मीदें कमजोर हुई हैं। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 3.35% बढ़कर 109.26 प्रति बैरल पर बंद हुआ। 3. चौथी तिमाही के नतीजों का छठा हफ्ता 500 से ज्यादा कंपनियां 31 मार्च, 2026 को समाप्त तिमाही के अपने वित्तीय नतीजे जारी करेंगी। प्रमुख दिग्गज कंपनियों में भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (BEL), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (BPCL), लेंसकार्ट सॉल्यूशंस, LIC और एफएसएन ई-कॉमर्स वेंचर्स (नायका) शामिल हैं। 4. FII की लगातार बिकवाली विदेशी निवेशकों ने इस महीने की 16 तारीख तक ₹27,177 करोड़ के शेयर बेचे हैं। इसके साथ ही साल 2026 में अब तक उनकी कुल बिकवाली ₹2,31,486 रुपए करोड़ तक पहुंच गई है। 5. टेक्निकल फैक्टर्स सेंसेक्स एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर ने कहा कि सेंसेक्स अभी 75,200 से 75,300 के जोन के आसपास है। यह दिखाता है कि लगातार बनी वैश्विक अनिश्चितता और बाजार के उतार-चढ़ाव वाले माहौल के बीच बाजार धीरे-धीरे और संभलकर रिकवरी करने की कोशिश कर रहा है। बाजार के लिए तुरंत का रेजिस्टेंस 75,600 से 76,000 के दायरे में है, जबकि मजबूत सपोर्ट 74,500 से 74,200 के जोन के आसपास दिख रहा है। बाजार अब किसी भी तरफ एक बड़ा ब्रेकआउट (दायरा तोड़ना) देगा, तभी आगे के लिए बाजार की असली चाल तय होगी। निफ्टी 50 निफ्टी 50 के आउटलुक पर चॉइस ब्रोकिंग के टेक्निकल रिसर्च एनालिस्ट आकाश शाह ने कहा कि अगर बाजार ऊपर की तरफ जाता है, तो इसके लिए इमिडिएट रेजिस्टेंस 24,000 और 24,250 पर रहेगा। वहीं अगर बाजार गिरता है, तो इसे 23,250 पर सपोर्ट मिल सकता है। अगर निफ्टी 23,000 का स्तर तोड़ता है, तो बिकवाली का दबाव और ज्यादा बढ़ सकता है। बाजार के मौजूदा हालातों को देखते हुए ट्रेडर्स को सलाह दी जाती है कि वे अनुशासन में रहें और इस उतार-चढ़ाव के बीच सख्त स्टॉप-लॉस स्ट्रैटेजी (नुकसान से बचने का नियम) का पालन करें। शुक्रवार को सेंसेक्स 160 अंक गिरकर बंद हुआ था
अरिजीत सिंह के सपोर्ट में आए अदनान सामी:सिंगर बोले- प्लेबैक सिंगिंग छोड़ने का फैसला सोच-समझकर लिया, उनकी प्राइवेसी का सम्मान करें

सिंगर और कंपोजर अदनान सामी ने अरिजीत सिंह के प्लेबैक सिंगिंग से संन्यास लेने के फैसले का समर्थन किया है। अदनान ने कहा कि अरिजीत के इस कदम का सम्मान किया जाना चाहिए और इस पर किसी भी तरह की अटकलें नहीं लगाई जानी चाहिए। अरिजीत ने इसी साल सोशल मीडिया पर अचानक संन्यास की घोषणा कर फिल्म इंडस्ट्री और फैंस को चौंका दिया था। अदनान बोले- अरिजीत का फैसला जल्दबाजी में नहीं न्यूज एजेंसी पीटीआई (PTI) को दिए एक इंटरव्यू में 54 वर्षीय अदनान सामी ने कहा, “अरिजीत ने प्लेबैक सिंगिंग से संन्यास लेने का फैसला पूरे होशोहवास में किया है। हमें उनके इस फैसले का सम्मान करना चाहिए। यह कोई जल्दबाजी में लिया गया निर्णय नहीं है, बल्कि इसके पीछे उनकी गहरी सोच होगी।” अदनान ने यह बात जी म्यूजिक कंपनी के तहत रिलीज हुए अपने नए सिंगल ‘लिपस्टिक लगा के, नजर उतार ले’ के लॉन्च के दौरान कही। वजह बताने के लिए अरिजीत बाध्य नहीं अदनान ने आगे कहा कि अरिजीत के लिए जनता को अपनी वजह बताना बिल्कुल जरूरी नहीं है। उन्होंने कहा, इसके पीछे जरूर कोई बड़ी वजह होगी, जिसे वे खुद बेहतर जानते हैं। दुनिया को इसे तुरंत बताने की कोई जरूरत नहीं है। समय आने पर सबको पता चल ही जाएगा। यह उनकी जिंदगी है, जब वे सहज महसूस करेंगे, खुद वजह साझा कर देंगे। तब तक हमें उन्हें पर्सनल स्पेस देना चाहिए। करियर के पीक पर छोड़ी सिंगिंग इसी साल जनवरी में अरिजीत सिंह ने अपने करियर के सबसे ऊंचे मुकाम पर प्लेबैक सिंगिंग को अलविदा कह दिया था। उन्होंने इंस्टाग्राम पोस्ट पर यह जानकारी दी थी। अरिजीत ने लिखा- हैलो, सबको नया साल मुबारक, इतने सालों तक प्यार देने के लिए धन्यवाद। मैं खुशी से बताना चाहता हूं कि अब प्लेबैक वोकलिस्ट के तौर पर कोई नए असाइनमेंट्स नहीं लूंगा। इसे यहीं खत्म कर रहा हूं। ये सफर शानदार रहा। भगवान ने बहुत दया की। अदनान बोले- कोई सिर पर बंदूक नहीं रखता म्यूजिक कंपनियों के दबाव के सवाल पर अदनान ने साफ कहा कि हर कंपनी की अपनी पॉलिसी होती है। कुछ कंपनियां बहुत सख्त होती हैं और कुछ कलाकारों को पूरी आजादी देती हैं। उन्होंने कहा, “अगर आपको उनकी पॉलिसी पसंद नहीं है, तो कोई आपके सिर पर बंदूक नहीं रख रहा है। समस्या तब होती है जब कलाकार खुद यह सोचने लगता है कि बात न मानने पर वह मुसीबत में पड़ जाएगा। यह प्रेशर कलाकार खुद पर खुद ही हावी कर लेता है।” एक नजर अरिजीत सिंह के करियर पर 25 अप्रैल 1987 को अरिजीत सिंह का जन्म पश्चिम बंगाल के जीयागंज में हुआ था। उनकी मां शास्त्रीय गायिका और मौसी तबला वादक थीं। बचपन से ही उनकी रुचि गायिकी में थी। शास्त्रीय संगीत सीखने के बाद अरिजीत सिंह ने 18 साल की उम्र में साल 2005 में सिंगिंग रियलिटी शो ‘फेम गुरुकुल’ में हिस्सा लिया था। अरिजीत ये शो नहीं जीत सके, हालांकि उनकी परफॉर्मेंस से इंप्रेस होकर संजय लीला भंसाली ने उन्हें फिल्म सांवरिया का गाना यूं शबनमी ऑफर किया था। अरिजीत ने ये गाना गाया, हालांकि कुछ बदलाव के चलते उस गाने से सिंगर रिप्लेस करवा दिया गया। आगे उन्होंने बतौर बैकग्राउंड सिंगर काम किया। गोलमाल 3, क्रूक, एक्शन रीप्ले जैसी फिल्मों में म्यूजिक कोलेबोरेशन के बाद अरिजीत सिंह ने मर्डर 2 के गाने फिर मोहब्बत करने चला है से बतौर प्लेबैक सिंगर डेब्यू किया। इस गाने की पॉपुलैरिटी के बाद उन्हें एजेंट विनोद का गाना राब्ता मिला। ये गाना भी हिट रहा और अरिजीत ने समय के साथ बेहतरीन गाने देते हुए स्टारडम हासिल किया। अरिजीत सिंह ने अपने म्यूजिकल करियर में 532 हिंदी, 144 बंगाली और 25 तेलुगु समेत कई भाषाओं में 700 से ज्यादा गाने गाए हैं। वो 2 नेशनल अवॉर्ड, 8 फिल्मफेयर समेत कुल 122 अवॉर्ड जीत चुके हैं। अरिजीत सिंह को पहला नेशनल अवॉर्ड साल 2018 में पद्मावत के गाने बिनते दिल के लिए और दूसरा नेशनल अवॉर्ड 2022 में फिल्म ब्रह्मास्त्र के गाने केसरिया के लिए मिला है। साल 2015 में अरिजीत सिंह को पद्मश्री से सम्मानित किया जा चुका है।
अरिजीत सिंह के सपोर्ट में आए अदनान सामी:सिंगर बोले- प्लेबैक सिंगिंग छोड़ने का फैसला सोच-समझकर लिया, उनकी प्राइवेसी का सम्मान करें

सिंगर और कंपोजर अदनान सामी ने अरिजीत सिंह के प्लेबैक सिंगिंग से संन्यास लेने के फैसले का समर्थन किया है। अदनान ने कहा कि अरिजीत के इस कदम का सम्मान किया जाना चाहिए और इस पर किसी भी तरह की अटकलें नहीं लगाई जानी चाहिए। अरिजीत ने इसी साल सोशल मीडिया पर अचानक संन्यास की घोषणा कर फिल्म इंडस्ट्री और फैंस को चौंका दिया था। अदनान बोले- अरिजीत का फैसला जल्दबाजी में नहीं न्यूज एजेंसी पीटीआई (PTI) को दिए एक इंटरव्यू में 54 वर्षीय अदनान सामी ने कहा, “अरिजीत ने प्लेबैक सिंगिंग से संन्यास लेने का फैसला पूरे होशोहवास में किया है। हमें उनके इस फैसले का सम्मान करना चाहिए। यह कोई जल्दबाजी में लिया गया निर्णय नहीं है, बल्कि इसके पीछे उनकी गहरी सोच होगी।” अदनान ने यह बात जी म्यूजिक कंपनी के तहत रिलीज हुए अपने नए सिंगल ‘लिपस्टिक लगा के, नजर उतार ले’ के लॉन्च के दौरान कही। वजह बताने के लिए अरिजीत बाध्य नहीं अदनान ने आगे कहा कि अरिजीत के लिए जनता को अपनी वजह बताना बिल्कुल जरूरी नहीं है। उन्होंने कहा, इसके पीछे जरूर कोई बड़ी वजह होगी, जिसे वे खुद बेहतर जानते हैं। दुनिया को इसे तुरंत बताने की कोई जरूरत नहीं है। समय आने पर सबको पता चल ही जाएगा। यह उनकी जिंदगी है, जब वे सहज महसूस करेंगे, खुद वजह साझा कर देंगे। तब तक हमें उन्हें पर्सनल स्पेस देना चाहिए। करियर के पीक पर छोड़ी सिंगिंग इसी साल जनवरी में अरिजीत सिंह ने अपने करियर के सबसे ऊंचे मुकाम पर प्लेबैक सिंगिंग को अलविदा कह दिया था। उन्होंने इंस्टाग्राम पोस्ट पर यह जानकारी दी थी। अरिजीत ने लिखा- हैलो, सबको नया साल मुबारक, इतने सालों तक प्यार देने के लिए धन्यवाद। मैं खुशी से बताना चाहता हूं कि अब प्लेबैक वोकलिस्ट के तौर पर कोई नए असाइनमेंट्स नहीं लूंगा। इसे यहीं खत्म कर रहा हूं। ये सफर शानदार रहा। भगवान ने बहुत दया की। अदनान बोले- कोई सिर पर बंदूक नहीं रखता म्यूजिक कंपनियों के दबाव के सवाल पर अदनान ने साफ कहा कि हर कंपनी की अपनी पॉलिसी होती है। कुछ कंपनियां बहुत सख्त होती हैं और कुछ कलाकारों को पूरी आजादी देती हैं। उन्होंने कहा, “अगर आपको उनकी पॉलिसी पसंद नहीं है, तो कोई आपके सिर पर बंदूक नहीं रख रहा है। समस्या तब होती है जब कलाकार खुद यह सोचने लगता है कि बात न मानने पर वह मुसीबत में पड़ जाएगा। यह प्रेशर कलाकार खुद पर खुद ही हावी कर लेता है।” एक नजर अरिजीत सिंह के करियर पर 25 अप्रैल 1987 को अरिजीत सिंह का जन्म पश्चिम बंगाल के जीयागंज में हुआ था। उनकी मां शास्त्रीय गायिका और मौसी तबला वादक थीं। बचपन से ही उनकी रुचि गायिकी में थी। शास्त्रीय संगीत सीखने के बाद अरिजीत सिंह ने 18 साल की उम्र में साल 2005 में सिंगिंग रियलिटी शो ‘फेम गुरुकुल’ में हिस्सा लिया था। अरिजीत ये शो नहीं जीत सके, हालांकि उनकी परफॉर्मेंस से इंप्रेस होकर संजय लीला भंसाली ने उन्हें फिल्म सांवरिया का गाना यूं शबनमी ऑफर किया था। अरिजीत ने ये गाना गाया, हालांकि कुछ बदलाव के चलते उस गाने से सिंगर रिप्लेस करवा दिया गया। आगे उन्होंने बतौर बैकग्राउंड सिंगर काम किया। गोलमाल 3, क्रूक, एक्शन रीप्ले जैसी फिल्मों में म्यूजिक कोलेबोरेशन के बाद अरिजीत सिंह ने मर्डर 2 के गाने फिर मोहब्बत करने चला है से बतौर प्लेबैक सिंगर डेब्यू किया। इस गाने की पॉपुलैरिटी के बाद उन्हें एजेंट विनोद का गाना राब्ता मिला। ये गाना भी हिट रहा और अरिजीत ने समय के साथ बेहतरीन गाने देते हुए स्टारडम हासिल किया। अरिजीत सिंह ने अपने म्यूजिकल करियर में 532 हिंदी, 144 बंगाली और 25 तेलुगु समेत कई भाषाओं में 700 से ज्यादा गाने गाए हैं। वो 2 नेशनल अवॉर्ड, 8 फिल्मफेयर समेत कुल 122 अवॉर्ड जीत चुके हैं। अरिजीत सिंह को पहला नेशनल अवॉर्ड साल 2018 में पद्मावत के गाने बिनते दिल के लिए और दूसरा नेशनल अवॉर्ड 2022 में फिल्म ब्रह्मास्त्र के गाने केसरिया के लिए मिला है। साल 2015 में अरिजीत सिंह को पद्मश्री से सम्मानित किया जा चुका है।
मशहूर शेफ विकास खन्ना की स्वीकारोक्ति:मां को मेरे हाथ का खाना पसंद नहीं आया, तब लगा भोजन की आत्मा छूना जरूरी

‘अमृतसर की गलियों में मेरा बचपन बीता और वहां मैंने एक बात सीखी- भोजन सिर्फ पकाया नहीं जाता, ‘अर्पित’ किया जाता है। मुझे याद है, मेरी दादी सुबह के धुंधलके में सहज प्रवृत्ति और अगाध श्रद्धा के साथ बड़े-बड़े पतीले चढ़ाती थीं। वे रसोईघर विलासिता या महंगी सामग्रियों से नहीं सजे थे, लेकिन वे सुंदर अनुष्ठानों और बेपनाह देखभाल से भरे हुए थे। मुझे मिशेलिन स्टार्स मिले, दुनियाभर में सराहना मिली, लेकिन इस दौड़ में मैं उस भोजन से दूर होता गया जिसने मुझे पहली पहचान दी थी। एक पल आज भी मुझे झकझोर देता है- मेरी मां मेरे रेस्त्रां में खाना खाने बैठी थीं और उन्होंने मेरे बनाए भोजन का एक ग्रास भी पसंद नहीं किया। वह बात मेरे मन में गहराई से घर कर गई। मैंने वर्षों उस उत्कृष्टता को पाने में लगाए थे जिसे दुनिया ने परिभाषित किया था, पर जिस व्यक्ति का मैं सबसे ज्यादा सम्मान करता था, वह मेरे भोजन में खुद को नहीं ढूंढ पा रही थीं। उस घटना ने मेरे भीतर एक सवाल जगा दिया जिसे मैं और टाल नहीं सकता था- महान स्वाद तय कौन करता है?’ वैश्विक पाक मानक विशेष इतिहास में विकसित हुए हैं। उन्होंने तकनीक, सटीकता और निरंतरता को महत्व दिया है और इसके लिए वे सम्मान के पात्र हैं, लेकिन वे हमेशा उन व्यंजनों की आत्मा को नहीं पकड़ पाते जो स्मृतियों और जीवन के अनुभवों से आकार लेते हैं। व्यंजन की सफलता सिर्फ स्टार्स या रैंकिंग से नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पहचान से आंकी जानी चाहिए- उन लोगों से जो उसमें खुद को देख पाते हैं। हर संस्कृति को एक सांचे में फिट करने के बजाय हमें दायरा बड़ा करना होगा, जहां उत्कृष्टता की कई परिभाषाएं साथ रह सकें। भोजन हमेशा जुड़ाव और हमारी पहचान का प्रतिबिंब रहा है; उसकी इस विविधता को स्वीकार करना ही उसकी सबसे बड़ी जीत है।’ भारतीय भोजन का अस्तित्व हमेशा से घरों, मंदिरों और लंगरों में रहा है। इसे किसी को प्रभावित करने के लिए नहीं, बल्कि पोषण देने, सबको साथ लाने और घाव भरने के लिए बनाया गया था। पर विडंबना देखिए, लंबे समय तक दुनिया ने भारतीय भोजन को इन्हीं खूबियों की वजह से नजरअंदाज किया। मैंने भारत के कुलीनरी स्कूल में फ्रेंच सॉस और यूरोपीय तकनीकें सीखीं, जिसने अनुशासन और ढांचा दिया। परंतु मन तो भारतीय भोजन की गहराई की ओर खिंचा रहता था, जिसे सिखाया नहीं जाता बल्कि आत्मा से महसूस किया जाता है। उडुपी के कृष्ण मंदिर की अनानास-नारियल करी, अमृतसर के स्वर्ण मंदिर की दाल, पुरी के जगन्नाथ मंदिर के मीठे चावल और मुंबई के सिद्धिविनायक मंदिर के मोदक… इन स्वादों ने मेरे भीतर कलिनेरी स्कूल की किसी भी सॉस से कहीं गहरी गूंज जगाई। जब सहपाठी यूरोपीय पाठ्यक्रम के तय रास्ते पर बढ़ रहे थे, मैं बार-बार उन्हीं स्वादों की ओर लौट रहा था, जिनके साथ मेरा बचपन और मेरी आत्मा जुड़ी रही। हमारे स्कूल की लाइब्रेरी की दीवार पश्चिमी शेफ की तस्वीरों से भरी थी, जिन्हें आदर्श मानने को कहा जाता था। मैंने एक बार पूछा था,‘यहां कोई मेरी तरह क्यों नहीं दिखता?’ जवाब था…‘क्योंकि दुनिया पर इन्हीं का नियंत्रण है।’ यही नियंत्रण तय करता है कि किस व्यंजन की अहमियत है और किसे कमतर माना जाए। इस तरह खाने-पीने के मामले में समाज में एक तरह का ऊंच-नीच का भेदभाव बन गया है। इसमें कुछ खास तरह के खान-पान (जैसे विदेशी या बड़े शहरों के पकवान) को ‘बेहतर और स्टैंडर्ड’ मान लिया जाता है, जबकि हमारे अपने स्थानीय या गांव-देहात के पारंपरिक खाने को ‘क्षेत्रीय’ कहकर उतना महत्व नहीं दिया जाता। नतीजा यह हुआ कि भोजन का एक ही ढांचा हावी हो गया और बाकी सबसे उसी में ढलने की उम्मीद की जाती रही। कुलीनरी स्कूल के बाद मैंने उसी सिस्टम में नाम कमाया। लगातार 6 बार ‘कुकिंग का ऑस्कर’ जीता, मास्टरशेफ इंडिया के जज रहे शेफ विकास खन्ना ने न्यूयॉर्क स्थित रेस्टोरेंट ‘जुनून’ के लिए लगातार 6 बार (6 साल) मिशेलिन स्टार हासिल किए। ये रेस्टोरेंट की दुनिया का सबसे प्रतिष्ठित सम्मान है, जिसे ‘कुकिंग का ऑस्कर’ भी कहा जाता है। विकास ने कोविड-19 के दौरान ‘Feed India’ नाम से दुनिया का सबसे बड़ा फूड ड्राइव चलाया, जिसके लिए उन्हें ‘एशिया गेम चेंजर अवॉर्ड’ से नवाजा गया। उन्होंने ‘मास्टरशेफ इंडिया’ को जज किया है और दर्जनों किताबें लिखी हैं। उनकी किताब ‘उत्सव’ दुनिया की सबसे महंगी और भारी किताबों में गिनी जाती है। 15-16 किलो वजनी इस किताब में 1200 पन्ने हैं। इसकी शुरुआती 12 प्रतियां बहुत खास थीं। इनमें एक प्रति 30 लाख रु. में नीलाम हुई थी, जिसके पैसे दान किए गए थे। इस किताब की एक प्रति का अंकित मूल्य 8 लाख रु. था।







