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पुराने जमाने के ये 7 फूड अब बन गया अमीरों के घरों की शान, हर किसी में सुपरफूड वाला गुण

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7 Old Foods Become Superfoods: क्या आपको पता है कि आपके दादा-परदादा क्या खाते हैं. अगर नहीं पता है तो अपने पिताजी से एक बार जरूर पूछिए. तब के जमाने में बाहर की इतनी चीजें नहीं मिलती थी. पिज्जा, बर्गर, चॉकलेट, बिस्कुट, आइस्क्रीम, केक, पेस्ट्रीज आदि नहीं होते थे. वे लोग घर का शुद्ध खाना खाते थे. साबुत अनाज से बनी हुई चीज, फल, हरी सब्जी, सीड्स आदि का भरपूर सेवन करते हैं. यही लंच होता था, यही डिनर और यही नाश्ता. पर समय के साथ खान-पान में प्रोसेस्ड चीजें मिलने लगी. यानी मशीन से तैयार चीजों से मिलावट वाली चीजें. आज फास्ट फूड, जंक फूड की भरमार है जो हमारी सेहत के लिए दुश्मन से कम नहीं है. पर अच्छी बात यह है कि पिछले कुछ सालों में हमारे दादा-परदादा के यही फूड दोबारा से ट्रेंड में आ गए हैं और अब तो यह अमीरों के घरों की शान होने लगी है. आइए इन फूड के बारे में जानते हैं.

वो 7 पुराने फूड जो बन गया सुपरफूड

मोटा अनाज : मोटे अनाजों में ज्वार, बाजरा, रागी, कंगनी, कुटकी जैसे श्री अन्न आते थे. पहले के जमाने के लोग इसे अपने भोजन का जरूरी हिस्सा मानते थे. लेकिन समय के साथ मोटे अनाजों को चलन खत्म होने लगा. पहले अमीर लोग इसे थाली से हटाया. बाद में यह सिर्फ गरीबों का भोजन हो गया लेकिन पिछले दो-तीन दशकों में गरीब भी इन अनाजों को खाने से कतराने लगे लेकिन अब ये फूड दोबारा से चलन में आ गए हैं. रिसर्च में वैज्ञानिकों ने इन फूड को सुपरफूड माना है. ये फूड कई बीमारियों से लड़ने में मददगार है. इसलिए अब ये फूड अमीरों के घरों की शान बनने लगे है. इनसे शुगर कम होती है और हार्ट और लिवर डिजीज का खतरा कम हो जाता है. इन फूड को रोस्टेट करके 500 से 2000 प्रति किलो के हिसाब से बेचा जा रहा है.

गुड़ : कुछ साल पहले तक गुड़ हमारे खान-पान से एकदम से हट ही गया था. लेकिन बहुत समय तक भारतीय घरों में चीनी की जगह गुड़ ही मिठास का मुख्य स्रोत हुआ करता था. इसे गर्म दूध में मिलाया जाता था, मिठाइयों में घोला जाता था, खाने के बाद खाया जाता था और सर्दियों के व्यंजनों में गर्माहट और ऊर्जा के लिए इस्तेमाल किया जाता था. आज के समय में गुड़ को फिर से एक नेचुरल विकल्प के रूप में देखा जा रहा है. गुड़ का स्वाद गहरा और देसी होता है. इसमें एक पारंपरिक अपनापन महसूस होता है. यही कारण है कि गुड़ फिर से ट्रेंड में आ गया है.

घर की बनी चटनियां: पुराने समय में चटनियां महज भोजन के साथ परोसी जाने वाली कोई अतिरिक्त चीज नहीं थीं, बल्कि खाने का एक अनिवार्य हिस्सा मानी जाती थीं. नारियल, मूंगफली, पुदीना, टमाटर और लहसुन की चटनियां भोजन में ताजगी और तीखापन लाती थीं. ये चटनियां सिर्फ स्वाद नहीं बढ़ातीं, बल्कि सेहत के लिहाज से भी बेमिसाल हैं. आधुनिक समय में लोग फिर से यह समझ रहे हैं कि स्वाद और स्वास्थ्य एक साथ रह सकते हैं, जो साधारण खाने को भी पूरा और संतोषजनक बना देता है.

फर्मेंटेड फूड्स: आज दुनिया भर में माइक्रोबायोम और गट हेल्थ की चर्चा होती है लेकिन भारतीय रसोई में इडली, डोसा, ढोकला, कांजी और अचार जैसे फर्मेंटेड (खमीर वाले) खाद्य पदार्थ सदियों से बन रहे हैं. ये चीजें किसी फैशनेबल वेलनेस प्रोडक्ट की तरह नहीं बल्कि मौसम और परंपरा के अनुसार व्यावहारिक रूप से बनाई जाती थीं. आज विज्ञान इन्हें पाचन सुधारने और आंतों के अच्छे बैक्टीरिया बढ़ाने के लिए सराह रहा है, लेकिन भारत के लिए यह पुराना और आजमाया हुआ ज्ञान है.

शुद्ध घी: इस धरती पर शुद्ध घी सबसे शुद्ध खाद्य पदार्थ है. घी की छवि में पिछले कुछ दशकों में बहुत उतार-चढ़ाव आए हैं. एक समय इसे संदेह की नजर से देखा जाने लगा था लेकिन अब यह एक बार फिर सम्मान के साथ रसोई में लौट आया है. दादा-दादी की पीढ़ी के लिए घी कोई विलासिता नहीं, बल्कि ताकत, पोषण और अपनेपन का प्रतीक था. लोग अब इसे संतुलित मात्रा में अपना रहे हैं क्योंकि यह न केवल शरीर के लिए फायदेमंद है, बल्कि भावनात्मक रूप से भी सुकून देता है.

मखाना: मखाना लंबे समय तक भारतीय घरों में एक सादे स्नैक या व्रत के भोजन के रूप में इस्तेमाल होता रहा. इसे घी में भूनकर खाना एक पुरानी परंपरा है. आज वही मखाना आकर्षक पैकेजिंग में एक ‘डिज़ाइनर स्नैक’ बन चुका है, जिसे हाई-प्रोटीन और लो-फैट डाइट के लिए आदर्श माना जाता है. यह हल्का और बहुउपयोगी है, इसलिए इतने वर्षों बाद भी यह लोगों की पसंदीदा पसंद बना हुआ है. आज अमीरों के घरों में मखाना किसी शान से कम नहीं है.

दही: दही भारतीय थाली का एक स्थायी हिस्सा रहा है जो दोपहर के भोजन, छाछ या चावल के साथ खाया जाता था. आज इसे प्रोबायोटिक कहकर दोबारा पेश किया जा रहा है, लेकिन पुराने लोग इसे हमेशा से इसकी ठंडक और पाचन शक्ति के कारण अपनाते आए हैं. पेट खराब होने पर या तपती गर्मी में राहत देने के लिए दही एक शांत और भरोसेमंद उपाय है, जिसे किसी नए रूप की नहीं बल्कि बस फिर से याद करने की जरूरत है.

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7 Old Foods Become Superfoods: क्या आपको पता है कि आपके दादा-परदादा क्या खाते हैं. अगर नहीं पता है तो अपने पिताजी से एक बार जरूर पूछिए. तब के जमाने में बाहर की इतनी चीजें नहीं मिलती थी. पिज्जा, बर्गर, चॉकलेट, बिस्कुट, आइस्क्रीम, केक, पेस्ट्रीज आदि नहीं होते थे. वे लोग घर का शुद्ध खाना खाते थे. साबुत अनाज से बनी हुई चीज, फल, हरी सब्जी, सीड्स आदि का भरपूर सेवन करते हैं. यही लंच होता था, यही डिनर और यही नाश्ता. पर समय के साथ खान-पान में प्रोसेस्ड चीजें मिलने लगी. यानी मशीन से तैयार चीजों से मिलावट वाली चीजें. आज फास्ट फूड, जंक फूड की भरमार है जो हमारी सेहत के लिए दुश्मन से कम नहीं है. पर अच्छी बात यह है कि पिछले कुछ सालों में हमारे दादा-परदादा के यही फूड दोबारा से ट्रेंड में आ गए हैं और अब तो यह अमीरों के घरों की शान होने लगी है. आइए इन फूड के बारे में जानते हैं.

वो 7 पुराने फूड जो बन गया सुपरफूड

मोटा अनाज : मोटे अनाजों में ज्वार, बाजरा, रागी, कंगनी, कुटकी जैसे श्री अन्न आते थे. पहले के जमाने के लोग इसे अपने भोजन का जरूरी हिस्सा मानते थे. लेकिन समय के साथ मोटे अनाजों को चलन खत्म होने लगा. पहले अमीर लोग इसे थाली से हटाया. बाद में यह सिर्फ गरीबों का भोजन हो गया लेकिन पिछले दो-तीन दशकों में गरीब भी इन अनाजों को खाने से कतराने लगे लेकिन अब ये फूड दोबारा से चलन में आ गए हैं. रिसर्च में वैज्ञानिकों ने इन फूड को सुपरफूड माना है. ये फूड कई बीमारियों से लड़ने में मददगार है. इसलिए अब ये फूड अमीरों के घरों की शान बनने लगे है. इनसे शुगर कम होती है और हार्ट और लिवर डिजीज का खतरा कम हो जाता है. इन फूड को रोस्टेट करके 500 से 2000 प्रति किलो के हिसाब से बेचा जा रहा है.

गुड़ : कुछ साल पहले तक गुड़ हमारे खान-पान से एकदम से हट ही गया था. लेकिन बहुत समय तक भारतीय घरों में चीनी की जगह गुड़ ही मिठास का मुख्य स्रोत हुआ करता था. इसे गर्म दूध में मिलाया जाता था, मिठाइयों में घोला जाता था, खाने के बाद खाया जाता था और सर्दियों के व्यंजनों में गर्माहट और ऊर्जा के लिए इस्तेमाल किया जाता था. आज के समय में गुड़ को फिर से एक नेचुरल विकल्प के रूप में देखा जा रहा है. गुड़ का स्वाद गहरा और देसी होता है. इसमें एक पारंपरिक अपनापन महसूस होता है. यही कारण है कि गुड़ फिर से ट्रेंड में आ गया है.

घर की बनी चटनियां: पुराने समय में चटनियां महज भोजन के साथ परोसी जाने वाली कोई अतिरिक्त चीज नहीं थीं, बल्कि खाने का एक अनिवार्य हिस्सा मानी जाती थीं. नारियल, मूंगफली, पुदीना, टमाटर और लहसुन की चटनियां भोजन में ताजगी और तीखापन लाती थीं. ये चटनियां सिर्फ स्वाद नहीं बढ़ातीं, बल्कि सेहत के लिहाज से भी बेमिसाल हैं. आधुनिक समय में लोग फिर से यह समझ रहे हैं कि स्वाद और स्वास्थ्य एक साथ रह सकते हैं, जो साधारण खाने को भी पूरा और संतोषजनक बना देता है.

फर्मेंटेड फूड्स: आज दुनिया भर में माइक्रोबायोम और गट हेल्थ की चर्चा होती है लेकिन भारतीय रसोई में इडली, डोसा, ढोकला, कांजी और अचार जैसे फर्मेंटेड (खमीर वाले) खाद्य पदार्थ सदियों से बन रहे हैं. ये चीजें किसी फैशनेबल वेलनेस प्रोडक्ट की तरह नहीं बल्कि मौसम और परंपरा के अनुसार व्यावहारिक रूप से बनाई जाती थीं. आज विज्ञान इन्हें पाचन सुधारने और आंतों के अच्छे बैक्टीरिया बढ़ाने के लिए सराह रहा है, लेकिन भारत के लिए यह पुराना और आजमाया हुआ ज्ञान है.

शुद्ध घी: इस धरती पर शुद्ध घी सबसे शुद्ध खाद्य पदार्थ है. घी की छवि में पिछले कुछ दशकों में बहुत उतार-चढ़ाव आए हैं. एक समय इसे संदेह की नजर से देखा जाने लगा था लेकिन अब यह एक बार फिर सम्मान के साथ रसोई में लौट आया है. दादा-दादी की पीढ़ी के लिए घी कोई विलासिता नहीं, बल्कि ताकत, पोषण और अपनेपन का प्रतीक था. लोग अब इसे संतुलित मात्रा में अपना रहे हैं क्योंकि यह न केवल शरीर के लिए फायदेमंद है, बल्कि भावनात्मक रूप से भी सुकून देता है.

मखाना: मखाना लंबे समय तक भारतीय घरों में एक सादे स्नैक या व्रत के भोजन के रूप में इस्तेमाल होता रहा. इसे घी में भूनकर खाना एक पुरानी परंपरा है. आज वही मखाना आकर्षक पैकेजिंग में एक ‘डिज़ाइनर स्नैक’ बन चुका है, जिसे हाई-प्रोटीन और लो-फैट डाइट के लिए आदर्श माना जाता है. यह हल्का और बहुउपयोगी है, इसलिए इतने वर्षों बाद भी यह लोगों की पसंदीदा पसंद बना हुआ है. आज अमीरों के घरों में मखाना किसी शान से कम नहीं है.

दही: दही भारतीय थाली का एक स्थायी हिस्सा रहा है जो दोपहर के भोजन, छाछ या चावल के साथ खाया जाता था. आज इसे प्रोबायोटिक कहकर दोबारा पेश किया जा रहा है, लेकिन पुराने लोग इसे हमेशा से इसकी ठंडक और पाचन शक्ति के कारण अपनाते आए हैं. पेट खराब होने पर या तपती गर्मी में राहत देने के लिए दही एक शांत और भरोसेमंद उपाय है, जिसे किसी नए रूप की नहीं बल्कि बस फिर से याद करने की जरूरत है.

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