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गर्मियों का सुपरफ्रूट है खरबूजा, लेकिन खाने से पहले जान लें ये खास बातें नहीं तो पड़ेगा पछताना

खरबूजा के फायदे

Last Updated:May 05, 2026, 06:28 IST गर्मियों में शरीर को ठंडक और हाइड्रेशन देने के लिए खरबूजा सबसे बेहतरीन फलों में से एक है. लगभग 90% पानी से भरपूर यह फल न सिर्फ प्यास बुझाता है, बल्कि पाचन सुधारने, शरीर को तरोताजा रखने और कई बीमारियों से बचाने में भी मदद करता है. सही तरीके से और सीमित मात्रा में सेवन करने पर यह सेहत के लिए बेहद फायदेमंद साबित होता है. तेज धूप और लू के बीच शरीर को हाइड्रेटेड रखना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है, लेकिन खरबूजा इस गर्मी में लाभकारी और गुणकारी साबित हो सकता हैं. खरबूजा के नियमित सेवन से शरीर में पानी की कमी नहीं होती है और डिहाइड्रेशन से बचाता है. यहीं नहीं, यह पेट को ठंडक पहुंचाता है जिसके कारण गर्मी का असर भी प्रभावी नहीं होता है. हालांकि, आपको बता दें कि बलिया के गंगातटर्ती या द्वाबा क्षेत्र में खरबूजे की खूब खेती की जाती है. खरबूजा पाचन तंत्र को सही करने में भी अहम भूमिका निभाता है. इसमें फाइबर पाया जाता है, जो कब्ज जैसी समस्याओं को दूर करने में मददगार है. यह पेट को हल्का और भोजन को आसानी से पचाने में सहायक है. जिन लोगों को अक्सर अपच या पेट से जुड़ी परेशानी होती है, उनके लिए यह बहुत अच्छा है. ध्यान दीजिएगा, खरबूजा का सेवन भी सावधानी से करना चाहिए. आयुर्वेदाचार्य के अनुसार, इसे खाली पेट या भोजन से पहले खाना बहुत अच्छा माना गया है. लेकिन सूर्यास्त के बाद खाने से बचना भी जरूरी है. डायबिटीज के मरीजों को इसका सेवन कम या सीमित मात्रा में करना चाहिए. हालांकि, मरीज बगैर चिकित्सक से परामर्श लिए इसका सेवन न करें. Add News18 as Preferred Source on Google खरबूजा खाना त्वचा और आंखों के लिए भी बेहद लाभकारी और गुणकारी माना जाता है. इसमें विटामिन ए और बीटा-कैरोटीन पाए जाते हैं, जो आंखों की रोशनी को बेहतर बनाने में मददगार हैं. इसके अलावा, इसमें मौजूद विटामिन सी त्वचा में कोलेजन बढ़ाकर उसको चमकदार और जवां बनाने में मदद करती हैं. किडनी के लिए भी खरबूजा बहुत लाभकारी माना गया है. क्योंकि इसमें मूत्रवर्धक गुण भी होते हैं, जो शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने में मदद करते हैं. इससे किडनी की सफाई होती है और शरीर अंदर से हल्का महसूस करता है. इसके नियमित और सीमित मात्रा में सेवन से शरीर की कार्यक्षमता शानदार होती है. खरबूजा इम्यूनिटी मजबूत करने में भी बहुत लाभकारी और असरदार है. इसमें विटामिन सी भी पाई जाती है, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती हैं. इसके अलावा, इसमें एंटीऑक्सीडेंट्स भी पाए जाते हैं, जो शरीर को कई गंभीर बीमारियों से बचाने में मददगार साबित होते हैं. यह खाने मीठा स्वादिष्ट लगता है. खरबूजा वजन कम करने वालों के लिए भी किसी वरदान से कम नहीं है. इसमें कैलोरी बहुत कम पाई जाती है और फाइबर अधिक होता है, जिससे पेट लंबे समय तक भरा हुआ महसूस करता है. इसके कारण बार-बार खाने की आदत कम होती है और वजन कंट्रोल करने में मदद मिलती है. यह कई तरह से असरदार है. राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय नगर बलिया की पांच साल अनुभवी चिकित्साधिकारी डॉ. वंदना तिवारी के अनुसार, खरबूजा दिल की सेहत के लिए भी बहुत अच्छा है. इसमें पोटेशियम होते हैं, जो शरीर में बीपी को कंट्रोल कर सोडियम के स्तर को नियंत्रित करता है, जिससे हृदय पर अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ता हैं. निश्चित रूप से इसका नियमित सेवन दिल से जुड़ी समस्याओं के जोखिम को कम कर सकती हैं.

एमपी के दो सांसद साउथ में विधानसभा चुनाव हारे:केंद्रीय मंत्री एल मुरुगन की तमिलनाडु में शिकस्त; जॉर्ज कुरियन केरलम में तीसरे नंबर पर रहे

एमपी के दो सांसद साउथ में विधानसभा चुनाव हारे:केंद्रीय मंत्री एल मुरुगन की तमिलनाडु में शिकस्त; जॉर्ज कुरियन केरलम में तीसरे नंबर पर रहे

पांच राज्यों के चुनाव परिणामों में भाजपो को पश्चिम बंगाल, असम और पुडुचेरी में बड़ी जीत मिली है। वहीं, एमपी कोटे से राज्यसभा के दो सांसदों को दक्षिण भारत के चुनावी रण में करारी हार का सामना करना पड़ा है। केंद्र सरकार में मंत्री एल. मुरुगन को तमिलनाडु और जॉर्ज कुरियन को केरलम विधानसभा चुनाव में हार का मुंह देखना पड़ा है। जॉर्ज कुरियन (केरल): कांजीरापल्ली में तीसरे नंबर पर खिसके मध्य प्रदेश से राज्यसभा सांसद और केंद्रीय राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन को भाजपा ने केरलम की कांजीरापल्ली सीट से मैदान में उतारा था। ईसाई बहुल इस इलाके में कुरियन से काफी उम्मीदें थीं। हालांकि कुरियन मुख्य मुकाबले से पूरी तरह बाहर नजर आए। वे तीसरे नंबर पर रहे। उन्हें महज 26984 के करीब वोट मिले। केरल में एलडीएफ (LDF) और यूडीएफ (UDF) के बीच हुए सीधे मुकाबले में भाजपा के बड़े चेहरे जॉर्ज कुरियन जमीन नहीं बचा सके। कांजीरापल्ली विधानसभा चुनाव परिणाम 1980 के दशक से पार्टी से जुड़े, कई पदों पर रहे वर्तमान में केंद्रीय अल्पसंख्यक कल्याण और मत्स्य पालन राज्य मंत्री और मध्य प्रदेश से राज्यसभा के सांसद जॉर्ज कुरियन केरल में बीजेपी के सबसे पुराने चेहरों में से एक हैं। वे 1980 के दशक से पार्टी से जुड़े हुए हैं और संगठन में अलग-अलग पदों पर रहे हैं। केरल में ईसाइयों और भाजपा के बीच एक सेतु का काम कुरियन को केरल में ईसाइयों और भाजपा के बीच एक सेतु (Bridge) माना जाता है। वे राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष भी रह चुके हैं। जब मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल का गठन हुआ, तो कुरियन बिना सांसद रहे मंत्री बनाए गए थे। बाद में बीजेपी ने उन्हें मध्य प्रदेश से खाली हुई राज्यसभा सीट (ज्योतिरादित्य सिंधिया के इस्तीफे के बाद) से निर्विरोध निर्वाचित करवाकर संसद भेजा। पार्टी ने उन्हें केरल विधानसभा चुनाव में कांजीरापल्ली से उम्मीदवार बनाया ताकि ईसाई वोटों का ध्रुवीकरण किया जा सके, लेकिन वे तीसरे नंबर पर सिमट गए। एल. मुरुगन (तमिलनाडु): अविनाशी सीट पर दूसरे नंबर पर रहे मध्य प्रदेश से एक और राज्य सभा सांसद और केंद्रीय सूचना-प्रसारण राज्य मंत्री एल. मुरुगन तमिलनाडु की अविनाशी (SC) सीट से किस्मत आजमा रहे थे। तमिलनाडु भाजपा का पूर्व अध्यक्ष होने के नाते यह चुनाव उनकी साख का सवाल था। मुरुगन ने लड़ाई तो लड़ी, लेकिन जीत का स्वाद नहीं चख सके। वे परिणामों में दूसरे नंबर पर रहे। उन्हें 56,200 से ज्यादा वोट मिले, लेकिन विपक्षी उम्मीदवार ने उन्हें बड़े अंतर से हरा दिया। तमिलनाडु में क्षेत्रीय अस्मिता और टीवीके (थलापति विजय की पार्टी) की लहर के आगे मुरुगन का ‘दिल्ली कार्ड’ काम नहीं आया। एक्टर विजय की पार्टी के उम्मीदवार से हारे इस सीट पर मुकाबला बेहद दिलचस्प और त्रिकोणीय रहा। यहां अभिनेता विजय की पार्टी (TVK) ने बड़ा उलटफेर करते हुए भाजपा और अन्नाद्रमुक (AIADMK) के समीकरण बिगाड़ दिए। मुरुगन ने अपनी सीट पर कड़ी टक्कर दी और अन्नाद्रमुक कैंडिडेट को तीसरे नंबर पर धकेल दिया। तमिलनाडु: अविनाशी (SC) विधानसभा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रचारक रहे तमिलनाडु भाजपा का दलित चेहरा हैं। वर्तमान में केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण और संसदीय कार्य राज्य मंत्री व मध्य प्रदेश से राज्यसभा सांसद हैं। एल. मुरुगन ने अपने करियर की शुरुआत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रचारक के रूप में की थी। वे लंबे समय तक अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से भी जुड़े रहे। वकालत से सियासत तक: राजनीति में आने से पहले वे मद्रास हाई कोर्ट में एक सफल वकील थे। उन्होंने 15 साल तक वकालत की और राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) के उपाध्यक्ष भी रहे। वेल यात्रा से बनी हिंदूवादी नेता की पहचान तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष रहते हुए मुरुगन ने ‘वेल यात्रा’ निकाली थी, जिसने राज्य में भाजपा को आक्रामक हिंदूवादी पहचान दिलाने में मदद की। बीजेपी ने उन्हें 2021 में मध्य प्रदेश से राज्यसभा भेजा था। हाल ही में हुए चुनावों में पार्टी ने उन पर भरोसा जताते हुए तमिलनाडु की अविनाशी सीट से मैदान में उतारा, लेकिन वे दूसरे नंबर पर रहे। ये खबर भी पढ़ें… राहुल गांधी बोले- बंगाल में BJP ने 100 सीटें चुराईं भाजपा का 5 राज्यों में से 3 (पश्चिम बंगाल, असम और पुडुचेरी) में सरकार बना रही है। बंगाल में बीजेपी रिकॉर्ड सीटें जीती है। इस पर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि बंगाल और असम के परिणाम भी उसी ‘प्लेबुक’ का हिस्सा हैं, जो हमने मध्य प्रदेश, हरियाणा और महाराष्ट्र में देखी है। पढ़ें पूरी खबर…

बिहार-हरियाणा में आंधी-बारिश से 21 की मौत:राजस्थान के उत्तर-पश्चिमी हिस्से पर चक्रवात बना; ओडिशा के अगले 6 दिन बारिश की चेतावनी

बिहार-हरियाणा में आंधी-बारिश से 21 की मौत:राजस्थान के उत्तर-पश्चिमी हिस्से पर चक्रवात बना; ओडिशा के अगले 6 दिन बारिश की चेतावनी

राजस्थान के उत्तर-पश्चिमी हिस्से पर चक्रवात बनने से देश के बड़े हिस्से में मौसम बदल चुका है। दक्षिण-पूर्व उत्तर प्रदेश से लेकर तमिलनाडु तक बादलों का लंबा ट्रफ बना हुआ है, जिससे उत्तर, मध्य और दक्षिण भारत में बारिश की गतिविधियां तेज हो गई हैं। जबकि, पिछले 24 घंटों में बिहार, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पूर्वोत्तर राज्यों में तेज हवाएं और भारी बारिश दर्ज की गई है। बिहार में बिजली गिरने और मौसम जनित हादसों में 6 जिलों में 20 से अधिक लोगों की मौत हो गई है। अगले 48 से 72 घंटे राज्य के लिए बेहद संवेदनशील माने जा रहे हैं। वहीं, हरियाणा में रविवार-सोमवार की रात 30 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चली आंधी में 15 हजार से ज्यादा पेड़ टूट गए। फतेहाबाद के टोहाना में पेड़ गिरने से हरियाणा कौशल रोजगार निगम (एचकेआरएन) के कर्मचारी आदेश कुमार (29) की मौत हो गई। राजस्थान पर चक्रवात का नया दौर सक्रिय है, जिससे 24 घंटों के दौरान हरियाणा, दिल्ली एनसीआर और मध्य प्रदेश में 30-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने और ओलावृष्टि की संभावना है। जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में भी 48 घंटों तक बारिश और बर्फबारी का सिलसिला जारी रह सकता है। दक्षिण भारत में छत्तीसगढ़ से कर्नाटक और तमिलनाडु तक 5 दिनों तक रुक-रुक कर वर्षा और बिजली गिरने के आसार हैं। ओडिशा में अगले छह दिनों के दौरान तेज आंधी-बारिश का अलर्ट जारी किया है।

न्यूयॉर्क में सिख टैक्सी ड्राइवर से बदसलूकी का VIDEO:2 युवतियों को लेकर झगड़ा, अश्वेत युवक ने बीच सड़क धक्का दिया, बुजुर्ग 15 फीट दूर जा गिरा

न्यूयॉर्क में सिख टैक्सी ड्राइवर से बदसलूकी का VIDEO:2 युवतियों को लेकर झगड़ा, अश्वेत युवक ने बीच सड़क धक्का दिया, बुजुर्ग 15 फीट दूर जा गिरा

अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में एक सिख टैक्सी ड्राइवर की दो अश्वेत युवकों के साथ बहस और हाथापाई का वीडियो सामने आया है। इस दौरान अश्वेत युवक बुजुर्ग टैक्सी ड्राइवर को धक्का देकर सड़क पर गिरा देता है। बुजुर्ग धक्का लगने से करीब 15 फीट दूर सड़क पर गिरा। युवक बुजुर्ग टैक्सी ड्राइवर पर आरोप लगा रहा था कि उसने उसकी दो महिला दोस्तों को अपनी गाड़ी से टक्कर मारी है। जबकि, बुजुर्ग इन आरोपों से इनकार कर रहा था। उल्टा वह कह रहा था कि ये युवतियां खुद उसकी गाड़ी की ओर आईं। हाथापाई के बाद बुजुर्ग सिख ड्राइवर ने मौके पर पुलिस बुलाई। इसके बाद पुलिस दोनों पक्षों के बीच झगड़ा सुलझाकर वहां से चली जाती है। हालांकि, यह मामला कब का है और इसमें दिख रहा सिख ड्राइवर कौन है, यह जानकारी सामने नहीं आई है। 2 युवतियों की टक्कर के आरोप से विवाद हुआ जानकारी के अनुसार, विवाद तब शुरू हुआ जब एक युवक ने यह आरोप लगाया कि बुजुर्ग सिख टैक्सी ड्राइवर ने सड़क पर 2 युवतियों को अपनी टैक्सी से टक्कर मार दी। इसके बाद वहां से भागने की कोशिश की। वहीं, सिख टैक्सी ड्राइवर ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि कोई दुर्घटना नहीं हुई। उल्टा युवतियां खुद उसकी गाड़ी के पास आई थीं, जिससे यह स्थिति बनी। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में दिख रहा है मौके पर मौजूद 2 युवक लगातार बुजुर्ग ड्राइवर को रोक रहे हैं और उसे अपनी गाड़ी तक जाने नहीं दे रहे। बहस इतनी बढ़ गई कि स्थिति हाथापाई तक पहुंच गई। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि एक अश्वेत युवक अचानक आक्रामक हो जाता है और बुजुर्ग ड्राइवर को जोर से धक्का दे देता है, जिससे बुजुर्ग सड़क पर गिर जाता है। इस दौरान वीडियो बनाने वाला युवक उसे लगातार अपराधी कहकर संबोधित करता है। पुलिस के आने पर युवकों का व्यवहार बदला कुछ समय बाद मौके पर न्यूयॉर्क पुलिस (NYPD स्कूल सेफ्टी ऑफिसर्स) पहुंचती है। पुलिस के सामने सिख ड्राइवर अपनी बात रखने की कोशिश करता है। जबकि, युवक दावा करता है कि उसके पास पूरी घटना का वीडियो सबूत मौजूद है। पुलिस के पहुंचने के बाद युवक का व्यवहार अचानक बदल जाता है और वह शांत होकर अधिकारियों से बातचीत करता दिखाई देता है। वह युवाओं के लिए सकारात्मक संदेश देने की भी बात करता है। पुलिस अधिकारियों ने मौके पर स्थिति को संभाला और दोनों पक्षों से जानकारी ली। यह पूरा मामला सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। वीडियो में क्या दिख रहा एक बुजुर्ग सिख टैक्सी ड्राइवर (पगड़ी और चेक शर्ट पहने हुए) कुछ युवकों से बहस कर रहा है। वहां मौजूद युवक टैक्सी ड्राइवर पर चिल्ला रहे हैं कि उसने अपनी गाड़ी से लड़कियों को टक्कर मारी है। वे यह भी आरोप लगा रहे हैं कि ड्राइवर बिना रुके मौके से भागने की कोशिश कर रहा था। इसके जवाब में बुजुर्ग ड्राइवर कहता है कि उसने कोई टक्कर नहीं मारी, बल्कि लड़कियां खुद उसकी गाड़ी से टकराई हैं। वह यह भी कहता है कि उसकी टैक्सी में सवारी बैठी हुई है और वह सिर्फ अपना काम कर रहा था। युवक ड्राइवर को वहां से जाने नहीं देते। जब ड्राइवर वहां से जाने की कोशिश करता है, तो एक युवक उसे धक्का देकर गिरा देता है। इसके बाद बुजुर्ग कहता है, तुमने मुझे धक्का क्यों मारा? इसके बाद बुजुर्ग पुलिस को फोन करता है। मौके पर पुलिस पहुंचती है और आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी रहता है। ॰॰॰॰॰॰॰॰ यह खबर भी पढ़ें… पंजाबियों के लिए न्यूजीलैंड जाना हुआ मुश्किल:42% स्टडी वीजा कैंसिल, एंट्री में दिक्कतें, सबको अंग्रेजी जरूरी, सरप्राइज इंटरव्यू में फेल तो डिपोर्ट न्यूजीलैंड सरकार ने इमिग्रेशन पॉलिसी में बदलाव किए हैं, जिनका असर भारतीयों खासकर पंजाबियों पर दिखने लगा है। एक हफ्ते के भीतर पंजाब के दो लोगों को देश में एंट्री के दौरान दिक्कतों का सामना करना पड़ा, जबकि 42 फीसदी स्टूडेंट वीजा रद्द होने की बात सामने आई है। पढ़ें पूरी खबर…

बंगाल जीता, पंजाब के लिए BJP की क्या तैयारी:MLA-नेताओं की तोड़फोड़ कब, क्या हिंदू-सिख पोलराइजेशन होगा; 3 एक्सपर्ट्स से जानिए

बंगाल जीता, पंजाब के लिए BJP की क्या तैयारी:MLA-नेताओं की तोड़फोड़ कब, क्या हिंदू-सिख पोलराइजेशन होगा; 3 एक्सपर्ट्स से जानिए

‘बंगाल में जीत हमारी है, अब पंजाब की बारी है’ बंगाल में चुनाव जीतने के बाद ये नारे दिल्ली BJP हेडक्वार्टर में लगे, जिसके बाद PM नरेंद्र मोदी ने यहां से वर्करों को संबोधित किया। इस नारे से BJP की पंजाब को लेकर 2027 चुनाव की मंशा साफ जाहिर होती है। जो खेल बंगाल में भाजपा ने ममता बनर्जी के साथ किया, अब वही पंजाब में आम आदमी पार्टी (AAP) के साथ भी हो सकता है। मगर, क्या ये सब इतना आसान है, क्या पंजाब में भी हिंदू-सिख ध्रुवीकरण जैसी कोई बात होगी, आखिर BJP का पंजाब को लेकर क्या गेम प्लान होगा, इसको लेकर दैनिक भास्कर ने 3 एक्सपर्ट्स से बात की। जिन्होंने बताया कि पंजाब BJP के लिए मुश्किल जरूर है, लेकिन भाजपा कुछ अलग तरीके से यहां पॉलिटिक्स करेगी, जिससे पंजाब के इमोशन से कोई छेड़छाड़ न हो और वह सिखों को अपने साथ भी जोड़ सके। ऐसा इसलिए भी कि विरोधी दल भाजपा को सिर्फ हिंदुओं की पार्टी बताते हैं। 1. क्या भाजपा पंजाब में धर्म के आधार पर पोलराइजेशन करेगी? इंजीनियर पवनदीप शर्मा कहते हैं- बंगाल की तर्ज पर पंजाब में धर्म के आधार पर पोलराइजेशन संभव नहीं है। भाजपा की खुद की भी नीति है कि वह हिंदुओं और सिखों को अलग-अलग करके नहीं देख सकती। वहीं पंजाब में सिखों की गिनती भी ज्यादा है, ऐसे में पोलराइजेशन से ज्यादा बेनिफिट नहीं होगा। इसके विकल्प के तौर पर भाजपा यहां धर्मांतरण को मुद्दा बनाएगी। इसका इशारा गृहमंत्री अमित शाह मोगा रैली में दे चुके हैं, जब उन्होंने कहा था कि पंजाब में BJP की सरकार बनते ही पहली कैबिनेट बैठक में धर्मांतरण के खिलाफ कानून आएगा। BJP की यही चालाकी होगी कि धर्मांतरण के मुद्दे पर ही भाजपा सिख-हिंदू वोटर्स का अपने हक में पोलराइजेशन की कोशिश कर सकती है। 2. धर्मातरण को मुद्दा बनाने से भाजपा को क्या फायदा होगा? प्रोफेसर केके रत्तू का कहना है कि पंजाब के गुरदासपुर जिले में ईसाई आबादी सबसे तेजी से बढ़ी है। 2011 की जनगणना के मुताबिक, यहां दलित आबादी 7.68% यानी 1.77 लाख थी, जो अब बढ़कर अनुमानित तौर पर 4 लाख से ज्यादा हो गई है। यहां की 6 विधानसभा सीटों में से 4 पर कांग्रेस और दो पर AAP के विधायक हैं। वैसे धर्म परिवर्तन का ट्रेंड पूरे पंजाब में है, लेकिन बार्डर इलाकों में ज्यादा है। इनमें गुरदासपुर के साथ अमृतसर, पठानकोट, फाजिल्का, तरनतारन, फिरोजपुर, लुधियाना, कपूरथला, बठिंडा और जालंधर जिले शामिल हैं। इस मुद्दे से ये इलाके जरूर प्रभावित हो सकते हैं। 3. भाजपा की 2027 के पंजाब चुनाव के लिए क्या स्ट्रेटजी हो सकती है? इंजीनियर पवनदीप शर्मा का कहना है कि पंजाब के चुनाव में डेरे अहम भूमिका निभाते हैं, ऐसे में भाजपा डेरों को साधने की स्ट्रेटजी बना चुकी है। भाजपा की टॉप लीडरशिप डेरों के संपर्क में है। प्रधानमंत्री हाल ही में डेरा सचखंड बल्लां गए। उससे पहले राधा स्वामी डेरे में भी भाजपा के शीर्ष नेता जा चुके हैं। डेरों के जरिए भाजपा पंजाब के 38% दलित और OBC वोटर्स को भी साधने में जुटी है। इसका फायदा ये है कि डेरों से हिंदु और सिख, दोनों जुड़े हैं, यहां धर्म के आधार पर पोलराइजेशन की जरूरत नहीं पड़ेगी। 4. पंजाब में BJP के खिलाफ किसान विरोधी नेरेटिव अभी भी है, उसे कैसे सेट करेगी? PAU के पूर्व वाइस चांसलर डॉ. किरपाल सिंह औलख कहते हैं- भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती किसान विरोधी नेरेटिव ही है। किसान आंदोलन में 700 किसानों की मौत हुई, यह मुद्दा बंगाल रिजल्ट के बाद सीएम भगवंत मान ने भी उठाया। इससे बाहर निकलना BJP की परेशानी है। हां, अगर भाजपा हरियाणा की तर्ज पर फसलों पर MSP और एग्रीकल्चर लोन में छूट दे तो किसान भाजपा का साथ दे सकते हैं। पंजाब के किसानों को अभी तक किसी भी सरकार ने कुछ खास नहीं दिया है। AAP भी MSP का वादा कर आई थी वो भी नहीं दे पाई। इससे पहले कांग्रेस व अकाली दल की सरकारें रही वो भी ऐसा नहीं कर पाई। 5. भाजपा को हिंदुओं की पार्टी माना जाता है, इसीलिए सिख सपोर्ट नहीं करते, यह नैरेटिव कैसे तोड़ेगी? डॉ किरपाल सिंह औलख का कहना है कि कट्‌टरपंथी सिख भाजपा के खिलाफ हैं और उन्होंने भाजपा के खिलाफ नेरेटिव सेट किया है। भाजपा बंदी सिखों को जेल से रिहा करके सिख विरोधी होने के नैरेटिव को खत्म कर सकती है। ज्यादातर सिख बंदी अपनी सजाएं पूरी कर चुके हैं और उन्हें रिहा करने में कोई कानूनी अड़चन भी नहीं आएगी। इससे सिखों के एक बड़े वर्ग को भाजपा के साथ आने में कोई प्रॉब्लम नहीं होगी। 6. सिख डोमिनेंस वाली ग्रामीण सीटों के लिए भाजपा क्या गेमप्लान बना सकती है? DAU यूनिवर्सिटी के पूर्व डीन प्रोफेसर डॉ. केके रत्तू कहते हैं- ये बात भाजपा भी जानती है। इसालिए फोकस शहरी सीटों पर रखती है। मगर, सिर्फ इससे सरकार बनाने का सपना पूरा नहीं हो सकता। इसीलिए आपने देखा होगा कि भाजपा ग्रामीण क्षेत्रों में व्यक्तिगत जनाधार वाले सिख चेहरों को पार्टी में शामिल कर रही है। इसके जरिए वह रूरल वोट बैंक में सेंध लगा सकती है। हालांकि जब तक किसानों का विरोध खत्म नहीं होता, तब तक ग्रामीण क्षेत्रों में जीत हासिल करना भाजपा के लिए मुश्किल हो सकता है। 7. क्या भाजपा विरोधी दलों में तोड़फोड़ करेगी? डॉ. केके रत्तू कहते हैं- BJP के पास पंजाब में ऐसे नेताओं की कमी है, जिन्हें हम विनिंग फेस कह सकें। जीतने की क्षमता वाले नेताओं को लाने के लिए भाजपा जरूर विरोधी दलों में तोड़फोड़ करेगी। भाजपा का ज्यादा फोकस कांग्रेस और AAP को तोड़ना रहेगा क्योंकि इससे एक तरफ भाजपा मजबूत होगी और दूसरी तरफ ये दोनों प्रमुख दल कमजोर होंगे। भाजपा ने इसकी प्लानिंग शुरू भी कर दी होगी। 8. पंजाब में फिलहाल CM भगवंत मान AAP का सबसे बड़ा चेहरा होंगे, उनके लिए क्या प्लान हो सकता है? इंजीनियर पवनदीप शर्मा कहते हैं- ये बिल्कुल सही है कि पंजाब के मौजूदा पॉलिटिकल माहौल में CM भगवंत मान ही वह चेहरा हैं, जिस पर पूरी AAP डिपेंड है। भाजपा पहले AAP में सेंधमारी करेगी। केंद्र की योजनाओं को लागू न करने को लेकर

हिमाचल के 10 जिलों में आंधी-तूफान का अलर्ट:धर्मशाला में 30.6MM बारिश, कल्पा का तापमान 2.6॰C तक लुढ़का; चार जगह 4॰C से नीचे गिरा पारा

हिमाचल के 10 जिलों में आंधी-तूफान का अलर्ट:धर्मशाला में 30.6MM बारिश, कल्पा का तापमान 2.6॰C तक लुढ़का; चार जगह 4॰C से नीचे गिरा पारा

हिमाचल की राजधानी शिमला समेत राज्य के ज्यादातर भागों में सुबह से ही आसमान में बादल छाए हुए हैं। मौसम विभाग (IMD) ने आज किन्नौर और लाहौल स्पीति को छोड़कर अन्य सभी जिलों में आंधी-तूफान के साथ आसमानी बिजली गिरने की चेतावनी जारी की है। कल भी चंबा, कांगड़ा, कुल्लू और मंडी जिला में यलो अलर्ट जारी किया गया है। 7 से 9 मई तक वेस्टर्न डिस्टरबेंस थोड़ा कमजोर जरूर पड़ेगा, लेकिन इस दौरान अधिक ऊंचे व मध्यम ऊंचाई वाले कुछेक क्षेत्रों में हल्की बारिश जारी रहने के आसार हैं। 10 मई और 11 मई को पूरे प्रदेश में अच्छी बारिश होगी। वहीं, बीते 24 घंटे के दौरान भी अधिकांश भागों में बारिश और शिमला जिला के कई क्षेत्रों में भारी ओलावृष्टि हुई। धर्मशाला में सबसे ज्यादा 30.6 मिमी, कांगड़ा 29.4 मिमी, चौपाल 18.0, शिलारू 15.8, सराहन 15.5, पालमपुर 15.4, रोहड़ू 14.0, मंडी 13.4, जोगेंद्रनगर 9.0, कल्पा 7.2 और बरठी में 5.2 मिमी बारिश हुई। बारिश-ओलावृष्टि के बाद तापमान में भारी गिरावट बारिश-ओलावृष्टि के बाद तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है। विशेषकर किन्नौर और लाहौल स्पीति के कई क्षेत्रों में रात का पारा जमाव बिंदू के आसपास पहुंच गया है। किन्नौर के कल्पा का पारा 2.6 डिग्री, लाहौल स्पीति के ताबो का 2.7, कुकुमसैरी 2.9 और केलांग का 4.4 डिग्री सेल्सियस रह गया है। नाहन का न्यूनतम तापमान सामान्य से 8.1 डिग्री नीचे गिरा राज्य के अन्य शहरों का रात का पारा भी सामान्य से नीचे गिरा है। नाहन के तापमान में सामान्य की तुलना में सबसे ज्यादा 8.1 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई और यहां का रात का पारा 14.6 डिग्री तक लुढ़क गया है। शिमला का पारा सामान्य से 3.0 डिग्री नीचे गिरने के बाद 11.0 डिग्री रह गया है। भुंतर का अधिकतम तापमान नॉर्मल से 9.6 डिग्री नीचे लुढ़का इसी तरह, अधिकतम तापमान में भी भारी गिरावट दर्ज की गई है। भुंतर का अधिकतम तापमान सामान्य से 9.6 डिग्री नीचे गिरने के बाद 20.3 डिग्री, मंडी का 6.6 डिग्री गिरने के बाद 26.2 डिग्री, नाहन का 6.5 डिग्री लुढ़कने के बाद 26.8 डिग्री, ऊना का 6.4 डिग्री कम होने के बाद 31.0 डिग्री और शिमला का पारा सामान्य से 4.9 डिग्री नीचे गिरने के बाद 18.8 डिग्री सेल्सियस रह गया है।

भाजपा ने पोलिंग एजेंट भी परीक्षा लेकर बनाए:कुछ पॉकेट्स से निकल भाजपा पूरे प्रदेश में छाई; जनता ने ‘बंगाली अस्मिता’ की जगह ‘डबल इंजन’ चुना

भाजपा ने पोलिंग एजेंट भी परीक्षा लेकर बनाए:कुछ पॉकेट्स से निकल भाजपा पूरे प्रदेश में छाई; जनता ने ‘बंगाली अस्मिता’ की जगह ‘डबल इंजन’ चुना

बंगाल ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के ‘बंगाली अस्मिता’ नैरेटिव के मुकाबले पीएम नरेंद्र मोदी के ‘डबल इंजन’ के वादे को चुना। कमल की आंधी में तृणमूल बिल्कुल तिनकों की तरह ही उड़ गई। भाजपा लंबे समय से संगठन के स्तर पर तैयारी में जुटी थी। पोलिंग एजेंट चुनने के लिए भी मौखिक और लिखित परीक्षाएं तक ली गई थीं। पिछले छह महीने से पार्टी का ध्यान दो लक्ष्यों के साथ जमीनी नेटवर्क पर रहा। पहला, ग्रामीण इलाकों में डर के माहौल का मुकाबला और सुनिश्चित करना कि वोटर पोलिंग बूथ तक पहुंचे। ग्राउंड पर तमाम प्रयासों का नतीजा ये रहा कि भाजपा अपने साथ नए वोटर्स को जोड़ने में सफल रही। पिछले चुनाव में टीएमसी का वोट शेयर 48.5% था, जो इस बार 40.80% रह गया। वहीं, भाजपा 38.4% से बढ़कर 45.85% वोट पर पहुंच गई। इसके पीछे हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण बड़ा कारण है। हालांकि, सिर्फ ध्रुवीकरण ही इकलौती वजह नहीं है। रोजगार की कमी, पलायन, औद्योगिक ठहराव, पंचायत स्तर की दादागिरी और स्थानीय टीएमसी कैडर से नाराजगी निर्णायक रही। पश्चिमी औद्योगिक पट्टी आसनसोल, दुर्गापुर और बैरकपुर जैसे इलाकों में भाजपा ने बंद मिलों, नौकरी, लॉजिस्टिक्स हब और सिंडिकेट राज के खिलाफ अभियान चलाया। हर क्षेत्र में अलग रणनीति, कहीं ध्रुवीकरण तो कहीं रोजगार मुद्दा बंगाल का राजनीतिक भूगोल बदल गया। 2021 में भाजपा उत्तर बंगाल, जंगलमहल और मतुआ बेल्ट में सिमटी थी। इस बार टीएमसी के गढ़ दक्षिण बंगाल में भी भगवा रंग में रंग गए। भाजपा ने हर क्षेत्र की अलग रणनीति बनाई। टीएमसी के गढ़ दक्षिण बंगाल में एंटी इंकंबेंसी, ध्रुवीकरण और गुंडागर्दी का मुद्दा उठाया। प्रेसीडेंसी में सीटें 14 से 27 तक पहुंच गईं। उत्तर बंगाल में चाय-बागान मजदूर और राजबंशी समुदाय साधा। जंगलमहल में आवास-पानी, राष्ट्रपति के अपमान जैसे मुद्दों से टीएमसी को पीछे धकेला। टीएमसी अल्पसंख्यक बेल्ट में टूटी करीब 115 सीटें मुस्लिम बहुल हैं। इनमें से 69 पर टीएमसी जीती। करीब 39 सीटें भाजपा के खाते में गईं। मुस्लिम-सेक्युलर वोट टीएमसी के पक्ष में एकजुट माने जाते रहे हैं। पर, इस बार स्थिति अलग दिखी। मालदा की 12 में से 6 और उत्तर दिनाजपुर की 9 में से 4 भाजपा के खाते में गई। इससे टीएमसी की ‘अभेद्य अल्पसंख्यक बेल्ट’ का भरोसा कमजोर हुआ। मुर्शिदाबाद जैसे कोर मुस्लिम जिलों में टीएमसी का दबदबा अभी बचा है। यहां की 22 सीटों में से टीएमसी 9 और भाजपा 8 सीटें जीती। भाजपा की असली बढ़त चार बड़े इलाकों से आई। जंगलमहल-आदिवासी बेल्ट में 40 में से करीब 36 सीटें निकालकर टीएमसी की 2021 वाली वापसी को पलट दिया। उत्तर 24 परगना में भाजपा 33 में से 18 सीटों पर पहुंची। हुगली में भाजपा ने 18 में से 16 सीटें जीत टीएमसी के दक्षिण बंगाल किले को भी झटका दिया है। नदिया में भाजपा 17 में से 14 सीटों पर विजयी रही। यहां मतुआ-नामशूद्र और सीमावर्ती हिंदू वोट निर्णायक रहे। माटीगाड़ा-नक्सलबाड़ी सीट पर भाजपा के आनंदमय बर्मन ने टीएमसी के शंकर मालाकार को 1,04,265 वोटों से हराया। राज्य में जीत का सबसे बड़ा अंतर है। लोकल नेताओं को तवज्जो, पुराने लोगों को पद देकर मैदान में उतारा भाजपा ने बंगाल में सिर्फ दिल्ली मॉडल नहीं चलाया। पुराने और वरिष्ठ नेताओं को तवज्जो दी। वाजपेयी-आडवाणी के दौर से जुड़े रहे शमिक भट्टाचार्य प्रदेशाध्यक्ष बनाए। सुवेंदु ग्रामीण बंगाल में चेहरा रहे। वहीं, भट्टाचार्य ने कोलकाता और उपनगरीय बंगाल के ‘भद्रलोक’ को जोड़ा। पूर्व प्रदेशाध्यक्ष दिलीप घोष को सक्रिय किया। राहुल सिन्हा राज्यसभा सांसद बनाए। पीएम मोदी ने एक रैली में घोष से लेकर पूर्व राज्यपाल तथागत रॉय तक बंगाल के वरिष्ठ नेताओं को मंच पर बुला अभिनंदन किया। ईडी 7 मामलों की जांच कर रही है, इन पर कार्रवाई तेज हो सकती है भ्रष्टाचार संबंधी मामले नई सरकार की प्राथमिकता हो सकते हैं। शिक्षक भर्ती, नगरपालिका भर्ती, राशन घोटाला, कोयला तस्करी, मवेशी तस्करी और संदेशखाली सहित कम से कम सात मामलों की जांच ईडी कर रही है। इन पर कार्रवाई में तेजी आ सकती है। पुरानी फाइलों की पड़ताल भी शुरू हो सकती है। दूसरी तरफ, राज्य सरकार के समक्ष सातवां वेतन आयोग लागू करना, तीन हजार रुपए मासिक नकद सहायता और डीए देने जैसे वादों पर अमल की चुनौती भी रहेगी। ———————————– ये खबर भी पढ़ें… 49 साल में पहली बार देश में लेफ्ट सरकार नहीं:1957 में केरलम में नंबूदरीपाद ने सत्ता दिलवाई; 2026 में केरलम से ही खत्म केरलम विधानसभा चुनाव में पिनराई विजयन की अगुवाई वाले लेफ्ट एलायंस LDF को हार का सामना करना पड़ा है। कांग्रेस की अगुवाई वाली UDF ने 140 में से 90 से ज्यादा सीटें जीतकर 10 साल बाद सत्ता में वापसी कर ली है। पूरी खबर पढ़ें…

भाजपा ने पोलिंग एजेंट भी परीक्षा लेकर बनाए:कुछ पॉकेट्स से निकल भाजपा पूरे प्रदेश में छाई; जनता ने ‘बंगाली अस्मिता’ की जगह ‘डबल इंजन’ चुना

भाजपा ने पोलिंग एजेंट भी परीक्षा लेकर बनाए:कुछ पॉकेट्स से निकल भाजपा पूरे प्रदेश में छाई; जनता ने ‘बंगाली अस्मिता’ की जगह ‘डबल इंजन’ चुना

बंगाल ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के ‘बंगाली अस्मिता’ नैरेटिव के मुकाबले पीएम नरेंद्र मोदी के ‘डबल इंजन’ के वादे को चुना। कमल की आंधी में तृणमूल बिल्कुल तिनकों की तरह ही उड़ गई। भाजपा लंबे समय से संगठन के स्तर पर तैयारी में जुटी थी। पोलिंग एजेंट चुनने के लिए भी मौखिक और लिखित परीक्षाएं तक ली गई थीं। पिछले छह महीने से पार्टी का ध्यान दो लक्ष्यों के साथ जमीनी नेटवर्क पर रहा। पहला, ग्रामीण इलाकों में डर के माहौल का मुकाबला और सुनिश्चित करना कि वोटर पोलिंग बूथ तक पहुंचे। ग्राउंड पर तमाम प्रयासों का नतीजा ये रहा कि भाजपा अपने साथ नए वोटर्स को जोड़ने में सफल रही। पिछले चुनाव में टीएमसी का वोट शेयर 48.5% था, जो इस बार 40.80% रह गया। वहीं, भाजपा 38.4% से बढ़कर 45.85% वोट पर पहुंच गई। इसके पीछे हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण बड़ा कारण है। हालांकि, सिर्फ ध्रुवीकरण ही इकलौती वजह नहीं है। रोजगार की कमी, पलायन, औद्योगिक ठहराव, पंचायत स्तर की दादागिरी और स्थानीय टीएमसी कैडर से नाराजगी निर्णायक रही। पश्चिमी औद्योगिक पट्टी आसनसोल, दुर्गापुर और बैरकपुर जैसे इलाकों में भाजपा ने बंद मिलों, नौकरी, लॉजिस्टिक्स हब और सिंडिकेट राज के खिलाफ अभियान चलाया। हर क्षेत्र में अलग रणनीति, कहीं ध्रुवीकरण तो कहीं रोजगार मुद्दा बंगाल का राजनीतिक भूगोल बदल गया। 2021 में भाजपा उत्तर बंगाल, जंगलमहल और मतुआ बेल्ट में सिमटी थी। इस बार टीएमसी के गढ़ दक्षिण बंगाल में भी भगवा रंग में रंग गए। भाजपा ने हर क्षेत्र की अलग रणनीति बनाई। टीएमसी के गढ़ दक्षिण बंगाल में एंटी इंकंबेंसी, ध्रुवीकरण और गुंडागर्दी का मुद्दा उठाया। प्रेसीडेंसी में सीटें 14 से 27 तक पहुंच गईं। उत्तर बंगाल में चाय-बागान मजदूर और राजबंशी समुदाय साधा। जंगलमहल में आवास-पानी, राष्ट्रपति के अपमान जैसे मुद्दों से टीएमसी को पीछे धकेला। टीएमसी अल्पसंख्यक बेल्ट में टूटी करीब 115 सीटें मुस्लिम बहुल हैं। इनमें से 69 पर टीएमसी जीती। करीब 39 सीटें भाजपा के खाते में गईं। मुस्लिम-सेक्युलर वोट टीएमसी के पक्ष में एकजुट माने जाते रहे हैं। पर, इस बार स्थिति अलग दिखी। मालदा की 12 में से 6 और उत्तर दिनाजपुर की 9 में से 4 भाजपा के खाते में गई। इससे टीएमसी की ‘अभेद्य अल्पसंख्यक बेल्ट’ का भरोसा कमजोर हुआ। मुर्शिदाबाद जैसे कोर मुस्लिम जिलों में टीएमसी का दबदबा अभी बचा है। यहां की 22 सीटों में से टीएमसी 9 और भाजपा 8 सीटें जीती। भाजपा की असली बढ़त चार बड़े इलाकों से आई। जंगलमहल-आदिवासी बेल्ट में 40 में से करीब 36 सीटें निकालकर टीएमसी की 2021 वाली वापसी को पलट दिया। उत्तर 24 परगना में भाजपा 33 में से 18 सीटों पर पहुंची। हुगली में भाजपा ने 18 में से 16 सीटें जीत टीएमसी के दक्षिण बंगाल किले को भी झटका दिया है। नदिया में भाजपा 17 में से 14 सीटों पर विजयी रही। यहां मतुआ-नामशूद्र और सीमावर्ती हिंदू वोट निर्णायक रहे। माटीगाड़ा-नक्सलबाड़ी सीट पर भाजपा के आनंदमय बर्मन ने टीएमसी के शंकर मालाकार को 1,04,265 वोटों से हराया। राज्य में जीत का सबसे बड़ा अंतर है। लोकल नेताओं को तवज्जो, पुराने लोगों को पद देकर मैदान में उतारा भाजपा ने बंगाल में सिर्फ दिल्ली मॉडल नहीं चलाया। पुराने और वरिष्ठ नेताओं को तवज्जो दी। वाजपेयी-आडवाणी के दौर से जुड़े रहे शमिक भट्टाचार्य प्रदेशाध्यक्ष बनाए। सुवेंदु ग्रामीण बंगाल में चेहरा रहे। वहीं, भट्टाचार्य ने कोलकाता और उपनगरीय बंगाल के ‘भद्रलोक’ को जोड़ा। पूर्व प्रदेशाध्यक्ष दिलीप घोष को सक्रिय किया। राहुल सिन्हा राज्यसभा सांसद बनाए। पीएम मोदी ने एक रैली में घोष से लेकर पूर्व राज्यपाल तथागत रॉय तक बंगाल के वरिष्ठ नेताओं को मंच पर बुला अभिनंदन किया। ईडी 7 मामलों की जांच कर रही है, इन पर कार्रवाई तेज हो सकती है भ्रष्टाचार संबंधी मामले नई सरकार की प्राथमिकता हो सकते हैं। शिक्षक भर्ती, नगरपालिका भर्ती, राशन घोटाला, कोयला तस्करी, मवेशी तस्करी और संदेशखाली सहित कम से कम सात मामलों की जांच ईडी कर रही है। इन पर कार्रवाई में तेजी आ सकती है। पुरानी फाइलों की पड़ताल भी शुरू हो सकती है। दूसरी तरफ, राज्य सरकार के समक्ष सातवां वेतन आयोग लागू करना, तीन हजार रुपए मासिक नकद सहायता और डीए देने जैसे वादों पर अमल की चुनौती भी रहेगी। ———————————– ये खबर भी पढ़ें… 49 साल में पहली बार देश में लेफ्ट सरकार नहीं:1957 में केरलम में नंबूदरीपाद ने सत्ता दिलवाई; 2026 में केरलम से ही खत्म केरलम विधानसभा चुनाव में पिनराई विजयन की अगुवाई वाले लेफ्ट एलायंस LDF को हार का सामना करना पड़ा है। कांग्रेस की अगुवाई वाली UDF ने 140 में से 90 से ज्यादा सीटें जीतकर 10 साल बाद सत्ता में वापसी कर ली है। पूरी खबर पढ़ें…

तेजपत्ता के फायदे जानकर रह जाएंगे हैरान, गैस से लेकर शुगर तक में मददगार

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Last Updated:May 05, 2026, 00:01 IST Bay Leaves Benefits: तेजपत्ता सिर्फ एक मसाला नहीं है, बल्कि एक औषधि है. खासकर पेट से जुड़ी दिक्कतों के लिए यह बहुत अच्छा माना जाता है. अगर किसी को गैस, अपच या पेट फूलने की समस्या हो, तो तेजपत्ते का काढ़ा या इसे खाने में शामिल करने से राहत मिल सकती है. ख़बरें फटाफट Bay Leaves Benefits: आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग छोटी-छोटी परेशानियों के लिए भी तुरंत दवाओं का सहारा लेने लगे हैं, जबकि हमारी रसोई में मौजूद कई प्राकृतिक चीजें ऐसी हैं जो हल्की समस्याओं में असरदार राहत दे सकती हैं. उन्हीं में से एक है तेजपत्ता, जो आमतौर पर खाने का स्वाद बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन इसके फायदे सिर्फ स्वाद तक सीमित नहीं हैं. सही तरीके और संतुलित मात्रा में इसका उपयोग किया जाए, तो यह शरीर के लिए कई तरह से लाभकारी साबित हो सकता है. तेजपत्ता को पारंपरिक भारतीय चिकित्सा पद्धतियों में लंबे समय से इस्तेमाल किया जाता रहा है. इसे सिर्फ मसाले के रूप में नहीं, बल्कि एक घरेलू नुस्खे के तौर पर भी अपनाया जाता है. खासतौर पर पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने में इसका योगदान महत्वपूर्ण माना जाता है. अगर किसी को गैस, अपच, पेट फूलना या भारीपन जैसी समस्याएं होती हैं, तो तेजपत्ते को उबालकर उसका काढ़ा पीना या भोजन में इसका नियमित इस्तेमाल करना फायदेमंद हो सकता है. यह पाचन प्रक्रिया को सक्रिय करने में मदद करता है और पेट को हल्का महसूस कराता है. सिर्फ पेट ही नहीं, सांस से जुड़ी समस्याओं में भी तेजपत्ता उपयोगी माना जाता है. मौसम बदलने पर होने वाली सर्दी, खांसी या गले में खराश जैसी दिक्कतों में यह राहत पहुंचा सकता है. आयुर्वेद में इसे कफ कम करने वाला तत्व माना गया है, जो श्वसन तंत्र को साफ रखने में मदद करता है. कुछ लोग तेजपत्ते को पानी में उबालकर उसकी भाप लेते हैं या काढ़ा बनाकर पीते हैं, जिससे गले और नाक की तकलीफ में आराम मिल सकता है. आधुनिक विज्ञान ने भी तेजपत्ते के कुछ संभावित फायदों को स्वीकार किया है. कई शोधों में यह संकेत मिले हैं कि तेजपत्ता ब्लड शुगर के स्तर को संतुलित रखने में सहायक हो सकता है. इस वजह से इसे डायबिटीज से जूझ रहे लोगों के लिए एक सपोर्टिव उपाय के रूप में देखा जाता है. हालांकि यह जरूरी है कि इसे किसी भी तरह से दवाओं का विकल्प न समझा जाए, बल्कि डॉक्टर की सलाह के साथ ही इसका सेवन किया जाए. इसके अलावा तेजपत्ता में एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुण भी पाए जाते हैं, जो शरीर में सूजन को कम करने और जोड़ों के दर्द में राहत देने में मदद कर सकते हैं. हल्के दर्द, सूजन या इंफेक्शन जैसी स्थितियों में कुछ लोग इसे घरेलू उपाय के तौर पर इस्तेमाल करते हैं. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. About the Author शारदा सिंहSenior Sub Editor शारदा सिंह मध्यप्रदेश की रहने वाली हैं. उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपना सफर शुरू किया. उनके पास डिजिटल मीडिया और लाइफस्टाइल पत्रक…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

लौकी पुदीने का रायता रेसिपी: गर्मी में शरीर को बर्फ जैसी ठंडक देगा लौकी पुदीने का रायता, खाने का स्वाद भी हो जाएगा दोगुना; नोट करें रेसिपी

तस्वीर का विवरण

लोकी बॉडी को ठंडक मिलती है। पुदीना पेट को ठंडा और पाचन को बेहतर बनाता है। दही प्रोबायोटिक्स होता है, जो पेट के लिए मज़ेदार है। गर्मी में लू और डायहाइड्रेशन से बचाव में मदद मिलती है। छवि: फ्रीपिक सामग्री: 1 कप कद्दू की हुई लौकी, 1 कप ताजा दही, 2-3 रंगीन कटा हुआ पुदीना, 1 हरी मिर्च, 1/2 छोटी चम्मच जीरा पाउडर, स्वादानुसार नमक, एक चुटकी काला नमक, हल्की सी धनिया पत्ती छवि: फ्रीपिक बनाने की विधि: सबसे पहले कद्दू की हुई लौकी को पंखुड़ियां लें। बाद में उनका पानी अच्छी तरह से दिखने लगा और ठंडा होने लगा। अब एक बाउल में दही को अच्छे से फेंट लें। छवि: एआई इसमें कुली हुई लौकी डालें और मिक्स करें। अब इसमें पुदीना, हरी मिर्च, नमक, काला नमक और अन्य जीरा डालें। सब नीवे को अच्छे से पकड़ो। ऊपर से धनिया पत्ती की सजावट करें। छवि: एआई इस रायते को फ़िरोज़ में 15-20 मिनट ठंडा कर लें। ठंडा-ठंडा रायता रोटी, पराठा या पुलाव के साथ सर्व करें। रायते के लिए दही ताज़ा और ठंडा होना चाहिए। छवि: एआई ज्यादा पानी वाला रायता नहीं, बाकी स्वाद कम हो सकता है। पुदीना ताजा ही इस्तेमाल करें। लौकी पुदीना का रायता गर्मी में बिल्कुल सटीक दिखता है। छवि: फ्रीपिक यह स्वादिष्ट भी है, स्वादिष्ट भी है और बनाने में भी बेहद आसान है। एक बार इसे दोबारा बनाएं, तो बार-बार बनाने का मन है। छवि: एआई