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रोजाना सादा पान खाएं, पाचन से लेकर सांसों की बदबू तक मिलेगा फायदा, जानिए कैसे करें इस्तेमाल

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Last Updated:May 02, 2026, 22:51 IST हमारे आसपास मौजूद कई पौधों में औषधीय गुण छिपे होते हैं, जिन पर अक्सर लोग ध्यान नहीं देते. पान का पत्ता भी ऐसा ही एक प्राकृतिक विकल्प है, जिसे लोग आमतौर पर सिर्फ खाने के लिए जानते हैं, लेकिन सही तरीके से उपयोग करने पर यह सेहत के लिए कई तरह से फायदेमंद साबित हो सकता है. गोंडा: हमारे आसपास कई ऐसे पौधे मौजूद हैं, जिनके बारे में हम ज्यादा ध्यान नहीं देते, लेकिन उनमें औषधीय गुण भरपूर होते हैं. पान का पत्ता भी ऐसा ही एक पौधा है, जिसे आमतौर पर लोग सिर्फ खाने या मेहमान नवाजी के लिए इस्तेमाल करते हैं. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि पान का पत्ता सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद होता है. पान का पत्ता त्वचा के लिए भी काफी लाभकारी माना जाता है. इसमें मौजूद प्राकृतिक एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण त्वचा की समस्याओं जैसे खुजली, जलन और संक्रमण में राहत देने में मदद करते हैं. पान के पत्ते का लेप लगाने से त्वचा को ठंडक मिलती है, जिससे जलन कम होती है और सूजन में भी आराम मिलता है. नियमित उपयोग से त्वचा साफ और स्वस्थ बनी रहती है, साथ ही छोटे-मोटे दाग-धब्बों को कम करने में भी यह सहायक हो सकता है. पान का पत्ता घाव भरने में भी काफी उपयोगी माना जाता है. इसमें मौजूद एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण घाव को संक्रमण से बचाने और जल्दी ठीक करने में मदद करते हैं. अगर किसी को हल्की चोट, कट या खरोंच लग जाए, तो साफ पान के पत्ते को धोकर प्रभावित जगह पर लगाने से आराम मिल सकता है. यह सूजन को कम करता है और घाव को तेजी से भरने में सहायक होता है. हालांकि, गहरे या गंभीर घाव में डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है. Add News18 as Preferred Source on Google पान का पत्ता सर्दी-खांसी में भी काफी राहत देता है. इसमें मौजूद औषधीय गुण शरीर को गर्म रखने में मदद करते हैं और कफ को कम करते हैं. अगर किसी को खांसी या जुकाम हो, तो पान के पत्ते को हल्का गर्म करके छाती पर रखने से आराम मिल सकता है. इससे बंद छाती खुलती है और सांस लेने में आसानी होती है. इसके अलावा, पान के पत्ते का रस शहद के साथ लेने से खांसी में राहत मिलती है और गले की खराश भी कम होती है. पान का पत्ता मुंह की दुर्गंध दूर करने में काफी कारगर माना जाता है. इसमें मौजूद एंटी-बैक्टीरियल गुण मुंह में पनपने वाले हानिकारक बैक्टीरिया को खत्म करने में मदद करते हैं. यही बैक्टीरिया बदबू का मुख्य कारण होते हैं. अगर रोजाना सादा पान का पत्ता चबाया जाए, तो सांस ताजी बनी रहती है और मुंह में फ्रेशनेस महसूस होती है. इसके अलावा, यह लार के उत्पादन को बढ़ाता है, जिससे मुंह सूखने की समस्या कम होती है और ओरल हाइजीन बेहतर रहता है. पान का पत्ता सिर दर्द में भी राहत देने में सहायक माना जाता है. इसमें मौजूद प्राकृतिक तत्व ठंडक पहुंचाते हैं, जिससे सिर का तनाव कम होता है. अगर पान के पत्ते को पीसकर उसका लेप माथे पर लगाया जाए, तो सिरदर्द में आराम मिल सकता है. इसके अलावा, कुछ लोग पान के पत्ते का हल्का गर्म रस कान दर्द में भी इस्तेमाल करते हैं, जिससे दर्द में राहत महसूस होती है. हालांकि, किसी भी समस्या में इसका उपयोग करने से पहले सावधानी रखना जरूरी है और डॉक्टर से सलाह जरूर लें. जमुना प्रसाद यादव ने बताया कि पान का पत्ता पाचन तंत्र को मजबूत बनाने में मदद करता है. इसमें मौजूद प्राकृतिक तत्व पेट में बनने वाले हानिकारक गैस को कम करने में सहायक होते हैं. अगर किसी को गैस, अपच या पेट में भारीपन की समस्या रहती है, तो पान का पत्ता काफी फायदेमंद साबित हो सकता है. यह पाचन क्रिया को तेज करता है और भोजन को सही तरीके से पचाने में मदद करता है. नियमित रूप से सादा पान का पत्ता चबाने से पेट साफ रहता है और कब्ज की समस्या से भी राहत मिल सकती है. जमुना प्रसाद यादव बताते हैं कि पान का पत्ता फायदेमंद है, लेकिन इसका सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए. खासकर जब इसमें तंबाकू या अन्य हानिकारक चीजें मिलाई जाती हैं, तो यह सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है. इसलिए सादा पान का पत्ता ही उपयोग करना बेहतर होता है. आज के समय में जब लोग छोटी-छोटी बीमारियों के लिए तुरंत दवाइयों का सहारा लेते हैं, ऐसे में पान का पत्ता एक प्राकृतिक और सस्ता उपाय हो सकता है. यह आसानी से उपलब्ध होता है और सही तरीके से उपयोग करने पर कई समस्याओं में राहत देता है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।

पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: बंगाल की फाल्टा सीट पर फिर से होगा मतदान, रिजल्ट की तारीख भी बदली, चुनाव आयोग का फैसला

पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: बंगाल की फाल्टा सीट पर फिर से होगा मतदान, रिजल्ट की तारीख भी बदली, चुनाव आयोग का फैसला

पश्चिम बंगाल चुनाव से जुड़ी बड़ी खबर सामने आ रही है। यहां फाल्टा विधानसभा क्षेत्र में फिर से सभी वोटिंग पर वोटिंग की जाएगी। यानि 4 मई को राज्य की फाल्टा सीट को बाकी सभी 293 सीटों पर चुनाव नतीजे घोषित किये जायेंगे। वहीं, फाल्टा विधानसभा का चुनाव परिणाम अब 24 मई को आएगा। फाल्टा सीट पर धांधली का भी आरोप लगा था. यहां तक ​​कि नोटबुक पर टेप चिपकाने का दावा भी किया गया था. चुनाव आयोग ने अपने आदेश में कहा है कि सहायक मतदान सहित सभी 285 मतदान दल फिर से मतदान के लिए जाएंगे। सभी वोटिंग वोटिंग 21 मई 2026 को सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक फिर से वोटिंग के बीच। गिनती की गिनती 24 मई 2026 को होगी। चुनाव आयोग ने यह कार्रवाई इसलिए की, क्योंकि इस विधानसभा के मतदान में गंभीर अपराध और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बाधित करने का मामला सामने आया था। बीजेपी ने लगाया था आरोप, कहा था- पार्टी के चुनाव चिह्न को टेप से लगाया गया था 29 अप्रैल को फाल्टा में वोट चल रही थी। तब फालता सेनेटर्स वाली खबर आई थी। इस विधानसभा सीट पर बीजेपी ने आरोप लगाया था कि बीजेपी के चुनाव चिन्ह कमल छाप को कुछ वोटों से टेप किया गया था. इस पूरे मामले में चुनाव आयोग से अविलंब हस्तक्षेप की मांग की गई थी. हालाँकि, रिलायंस जियो की खबर के बाद फाल्टा सीट पर सुरक्षा बढ़ा दी गई थी। यहां कुछ बूथों पर स्टॉक और स्टॉक में टेप लगाने की शिकायत आई थी। तब अर्धसैनिक बलों की पेट्रोलिंग और बूथों की निगरानी को बढ़ाया गया था। इंडस्ट्रीज़ पर गंभीर आरोप थे। यहां सीएएफ के यंग बूथ का लगातार दौरा कर रहे थे। साथ ही युवा अनाउंसमेंट भी कर रहे थे. इसके अलावा उस समय फाल्टा में सायरन वाले सामिल और अतिरिक्त मोर्टार के अवशेषों को भी बढ़ावा दिया गया था। 2 मई को इन पोलिंग बूथ पर दोबारा वोटिंग होगी इससे पहले शनिवार यानी 2 मई को दक्षिण 24 परगना जिले के दो खंडों के 15 मतदान पर शनिवार को फिल्म से वोटिंग हुई। शाम 5 बजे तक 15 बूथों पर औसत मतदान प्रतिशत 86.90 दर्ज किया गया। मगराहाट (पश्चिम) विधानसभा क्षेत्र के 11 मतदान प्रतिशत 86.11 रहा। वहीं, डायमंड हार्बर विधानसभा क्षेत्र के 4 बूथों पर यह आंकड़ा 87.60 प्रतिशत दर्ज किया गया है। अंतिम मतदान प्रतिशत का आधिकारिक आंकड़ा शनिवार देर रात या रविवार सुबह जारी किया जा सकता है। मगराहाट पश्चिम में बूथ संख्या 46, 126, 127, 128, 142, 214, 215, 216, 230, 231 और 232 कंपनी की ओर से वोट डाला गया। साथ ही डायमंड हार्बर सीट के बूथ संख्या 117, 179, 194 और 243 भीमोवालो फ्लैट पर गया. देश के इतिहास में पहली बार इतना हुआ मतदान इससे पहले पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दो चरणों में 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को रिकॉर्ड मतदान हुआ था। दोनों स्टैग्स में औसत मतदान प्रतिशत 93 प्रतिशत तक पहुंच गया, जो स्वतंत्रता के बाद राज्य में सबसे अधिक बताया जा रहा है। पुरालेख में सबसे बड़ा मतदान का पिछड़ा रिकॉर्ड त्रिपुरा का नाम है। 2013 विधानसभा चुनाव में 91.82 प्रतिशत मतदान हुआ था। यह भी पढ़ें: ‘200 से ज्यादा पारियां जीतेंगे’, ममता बनर्जी ने टीएमसी की जीत का दावा किया, एलेक्टिट पोल को बताया गलत

सूजन कम करना होगा या स्किन चमकदार…कमल फूल का जवाब नहीं, 99% लोगों को पता नहीं ये बात

सूजन कम करना होगा या स्किन चमकदार...कमल फूल का जवाब नहीं, 99% लोगों को पता नहीं ये बात

Last Updated:May 02, 2026, 21:57 IST Lotus benefits : तालाब में खिलखिलाते कमल के फूल सदियों से इंसानों का मनमोहते रहे हैं. लेकिन कम ही लोगों को पता होगा कि इनमें कई ऐसे गुण भी पाए जाते हैं जो शरीर को ठंडक पहुंचाते हैं और कई रोगों से बचाते हैं. इसमें एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन और मिनरल्स अच्छी मात्रा में होते हैं, जो शरीर को स्वस्थ रखने में सहायक हैं. लोकल 18 से गोंडा के वैद्य नंदू प्रसाद बताते हैं कि इसके नियमित और संतुलित सेवन से ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है. इसमें मौजूद विटामिन, मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट त्वचा को अंदर से पोषण देते हैं, जिससे स्किन साफ, मुलायम और चमकदार बनती है. कमल का फूल हृदय स्वास्थ्य के लिए काफी लाभकारी माना जाता है. इसमें मौजूद प्राकृतिक गुण शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करते हैं, जिससे रक्त वाहिकाएं साफ रहती हैं और ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है. यूपी स्थित गोंडा के वैद्य नंदू प्रसाद बताते हैं कि इसके नियमित और संतुलित सेवन से ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में भी सहायता मिलती है. कमल में पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट तत्व दिल को मजबूत बनाने और सूजन को कम करने में मदद करते हैं. जो लोग हाई ब्लड प्रेशर या हृदय संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं, उनके लिए यह रामबाण है. हालांकि इसका सेवन सीमित मात्रा में और विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार ही करें. कमल का फूल देखने में जितना सुंदर है, उतना ही सेहत के लिए लाभकारी है. भारत में इसका अपना धार्मिक और सांस्कृतिक महत्त्व भी है. लेकिन पूजा-पाठ में इस्तेमाल होने वाला कमल सिर्फ आस्था का प्रतीक ही नहीं, बल्कि आयुर्वेद में इसे एक औषधि के रूप में भी उपयोग किया जाता है. कमल के फूल के साथ-साथ इसकी जड़, पत्ते और बीज भी कई तरह की बीमारियों में काम आते हैं. कमल का फूल त्वचा के लिए भी बेहद लाभकारी है. इसमें मौजूद विटामिन, मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट त्वचा को अंदर से पोषण देते हैं, जिससे स्किन साफ, मुलायम और चमकदार बनती है. कमल का उपयोग फेस पैक या प्राकृतिक स्किन केयर के रूप में किया जा सकता है. यह मुंहासे, दाग-धब्बे और झांइयों को कम करने में सहायक है. त्वचा को हाइड्रेट रखता है. प्राकृतिक ग्लो देता है. Add News18 as Preferred Source on Google वैद्य नंदू प्रसाद के मुताबिक, इसका उपयोग सही मात्रा में ही करें. अगर आप इसे नियमित रूप से उपयोग करना चाहते हैं, तो किसी आयुर्वेद विशेषज्ञ या डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर रहेगा. कमल का फूल सिर्फ देखने में ही सुंदर नहीं होता, बल्कि यह स्वास्थ्य के लिए भी एक अनमोल उपहार है. कमल का फूल पाचन तंत्र को भी ठीक रखता है. इसके बीज और जड़ में ऐसे गुण पाए जाते हैं जो पाचन क्रिया को मजबूत बनाते हैं और भोजन को सही तरीके से पचाने में मदद करते हैं. यह पेट से जुड़ी आम समस्याओं जैसे गैस, कब्ज और अपच में राहत दिलाने में सहायक है. कमल के बीज हल्के और सुपाच्य होते हैं, जिससे पेट पर अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ता और पाचन तंत्र बेहतर तरीके से काम करता है. जिन लोगों को बार-बार पेट खराब रहने या एसिडिटी की शिकायत रहती है, उनकों ये राहत दिला सकता है. कमल का उपयोग मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में भी किया जाता है. इसमें पाए जाने वाले प्राकृतिक गुण तनाव और चिंता को कम करने में सहायक हैं. इसके सेवन से मन शांत रहता है और दिमाग को सुकून मिलता है, जिससे रोजमर्रा की भागदौड़ में भी व्यक्ति खुद को संतुलित महसूस करता है. कमल के नियमित और संतुलित उपयोग से नींद की गुणवत्ता में भी सुधार हो सकता है, जिससे अनिद्रा जैसी समस्याओं में राहत मिलती है. कमल के बीज को मखाना भी कहा जाता है, सेहत के लिए बहुत लाभकारी हैं. ये प्रोटीन, कैल्शियम और आयरन से भरपूर होते हैं. मखाने का सेवन करने से हड्डियां मजबूत होती हैं और शरीर को ऊर्जा मिलती है. यह डायबिटीज के मरीजों के लिए भी अच्छा माना जाता है क्योंकि यह ब्लड शुगर को नियंत्रित करता है. महिलाओं के हार्मोन को संतुलित रखने में मदद करता है और पीरियड्स से जुड़ी समस्याओं में राहत देता है. शरीर की कमजोरी दूर करने में भी सहायक है. कमल का फूल प्राकृतिक रूप से शरीर को ठंडक पहुंचाने वाला माना जाता है. गर्मियों में इसका सेवन शरीर के तापमान को संतुलित रखता है. इसमें मौजूद तत्व शरीर की अंदरूनी गर्मी को कम करते हैं, जिससे लू लगने का खतरा घटता है. जिन लोगों को अधिक गर्मी महसूस होती है या शरीर में जलन की शिकायत रहती है, उनके लिए कमल का उपयोग लाभकारी है. यह शरीर को तरोताजा रखने के साथ-साथ ऊर्जा बनाए रखने में भी सहायक है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।

ये पेड़ बरगद का छोटा भाई… इसका फल जादू! गर्मी, दस्त, उल्टी, सिरदर्द का रामबाण इलाज, जानें फार्मूला

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Last Updated:May 02, 2026, 21:40 IST Summer Health Tips. छतरपुर में एक ऐसा भी पेड़ पाया जाता है, जिसके फल गर्मी के लिए रामबाण माने जाते हैं. इस पेड़ को क्षेत्रीय भाषा में बरगद का भाई (कटवर) कहा जाता है. इसमें छोटे-छोटे फल पाए जाते हैं. आयुर्वेद इन फलों का इस्तेमाल सदियों से करता आ रहा है.   Health Tips. छतरपुर समेत पूरे मध्य प्रदेश में गर्मी से हाल बेहाल है. इस चिलचिलाती गर्मी ने सभी को परेशान कर दिया है. ऐसे में लोग गर्मी से बेहाल हैं. वहीं,छतरपुर में एक ऐसा भी पेड़ पाया जाता है, जिसके फल गर्मी के लिए रामबाण माने जाते हैं. दरअसल, यहां कटवर नाम के पेड़ पाए जाते हैं, जिसके फल का उपयोग गर्मी शांत करने में किया जाता है. दावा किया जाता कि इस फल से सिरदर्द और गर्मी दूर भाग जाती है. कटवर पेड़ को क्षेत्रीय भाषा में बरगद का छोटा भाई कहा जाता है जिसमें छोटे-छोटे फल पाए जाते हैं. वैद्य ईश्वरदीन के मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति इसके कुछ फल को बांटकर माथे में लगा लेता है तो उसकी भयंकर गर्मी मिनटों में शांत हो जाती है. स्थानीय लोग इन फलों को गर्मी शांत करने में उपयोग करते हैं. वैद्य ईश्वरदीन ने लोकल 18 का बताया कि छतरपुर में बरगद जैसे ही पेड़ पाया जाता है. ये भी बताया कि इसके फलों का सेवन कैसे करना चाहिए. बरगद जैसा ही कटवर पेड़वैद्य ईश्वरदीन बताते हैं कटवर विशाल वृक्ष तो है ही, इसकी शाखाएं जमीन में छूती हैं. यही शाखाएं पीका फोड़ फिर से हरा होने लगती हैं. जिससे यह पेड़ दूसरों को छाया भी देता है. ठंडक के तौर पर इसका उपयोग किया जाता है. साथ में जो इसके फल होते हैं, उसका भी औषधीय तौर पर उपयोग किया जाता है. औषधीय गुणों से भरपूर फल वैद्य बताते हैं कि इसमें जो छोटे-छोटे फल लगे होते हैं, वह बड़े काम के होते हैं. आयुर्वेद और पुराणों में भी इस पेड़ के फलों का जिक्र है. जब अस्पताल नहीं होते थे, तब इस पेड़ के फलों का उपयोग बहुत होता था. जब भी किसी को गर्मी लगती थी, उसका सिर फटने लगता था तो वह इसी के फलों को बांटकर या पीसकर माथे में चंदन की तरह लगा लेता था. दावा किया कि इसके लगाने के बाद गर्मी और सिरदर्द में मिनटों में राहत मिल जाती है. लूज मोशन करता ठीक वैद्य बताते हैं कि इन फलों का उपयोग सिर्फ सिरदर्द ही ठीक नहीं करता, बल्कि गर्मी से उल्टी और दस्त वाली समस्या भी ठीक कर देता है. वहीं ग्रामीण बताते हैं कि ये पेड़ बहुत फायदेमंद है. हमें जब भी गर्मी होती है और गर्मी की वजह से सिरदर्द होता है तो इसके फलों को पीसकर ठंडक के तौर पर माथे में मल लेते हैं. इससे पूरा सिर ठंडा हो जाता है. About the Author Rishi mishra एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Chhatarpur,Madhya Pradesh Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

Fertility Crisis in India & World | इंसानी स्पर्म और अंडों पर भारी पड़ रहा है प्लास्टिक का जहर, वैज्ञानिकों ने दी फर्टिलिटी संकट की भयानक चेतावनी

Fertility Crisis in India & World | इंसानी स्पर्म और अंडों पर भारी पड़ रहा है प्लास्टिक का जहर, वैज्ञानिकों ने दी फर्टिलिटी संकट की भयानक चेतावनी

होमफोटोनॉलेज सूनी रह जाएगी कोख, खाली होंगे घोंसले! कहीं देर न हो जाए, नेचर का बिगड़ा बैलेंस Last Updated:May 02, 2026, 20:20 IST Fertility Crisis: नई रिसर्च ने खुलासा किया है कि पूरी दुनिया इस समय सिंथेटिक केमिकल्स के समंदर में तैर रही है. इन केमिकल्स की मात्रा इतनी ज्यादा बढ़ गई है कि हमने पृथ्वी की सुरक्षित सीमा को पार कर लिया है. टॉक्सिकोलॉजिस्ट और बायोलॉजिस्ट की एक टीम ने चेतावनी दी है कि पेस्टिसाइड्स, प्रदूषण और प्लास्टिक मिलकर एक ‘साइलेंट’ फर्टिलिटी संकट को जन्म दे रहे हैं. यह संकट केवल इंसानों तक सीमित नहीं है बल्कि जानवरों की प्रजनन क्षमता को भी बुरी तरह प्रभावित कर रहा है. रिसर्च के मुताबिक खराब होते क्लाइमेट चेंज और बढ़ते प्रदूषण के तालमेल ने फर्टिलिटी, बायोडायवर्सिटी और हेल्थ के लिए ग्लोबल लेवल पर रिस्क पैदा कर दिया है. इसका सीधा असर इंसानों के अलावा समुद्री स्तनधारियों, पक्षियों, मछलियों और रेंगने वाले जीवों पर दिख रहा है. पिछले 50 सालों में दुनिया की वाइल्डलाइफ आबादी में दो-तिहाई से ज्यादा की कमी आई है. इसके पीछे सबसे बड़ा कारण पॉल्यूटेंट्स और बदलता मौसम ही माना जा रहा है. इसी दौरान इंसानी पुरुषों और महिलाओं में भी बांझपन की दर तेजी से बढ़ी है. हालांकि इसका सटीक कारण पता लगाना मुश्किल है, लेकिन वैज्ञानिक हमारे जीवन में मौजूद हॉर्मोन बिगाड़ने वाले रसायनों को इसका मुख्य जिम्मेदार मान रहे हैं. आज मार्केट में 1000 से ज्यादा ऐसे सिंथेटिक केमिकल्स मौजूद हैं जो हमारे शरीर के नेचुरल हॉर्मोन्स की नकल करते हैं या उन्हें ब्लॉक कर देते हैं. हैरानी की बात यह है कि इनमें से केवल एक प्रतिशत केमिकल्स की ही सुरक्षा जांच सही तरीके से की गई है. वैज्ञानिकों का कहना है कि इकोसिस्टम और इंसानी हेल्थ एक-दूसरे से गहरे जुड़े हुए हैं. बढ़ता तापमान और केमिकल एक्सपोजर मिलकर शरीर के रिप्रोडक्शन सिस्टम पर भारी दबाव डाल रहे हैं. यह एक ऐसा अनचाहा खतरा है जिससे कोई भी जीव सुरक्षित नहीं बचा है क्योंकि इन केमिकल्स को बिना पूरी जांच के मार्केट में उतार दिया गया है. (File Photo : Reuters) प्रदूषण और फर्टिलिटी के बीच का रिश्ता बहुत पुराना और खतरनाक रहा है. ओरेगन यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने रिसर्च में पाया कि पुराने समय में भी सिंथेटिक केमिकल्स ने जानवरों की आबादी को तबाह किया था. कीटनाशक यानी इंसेक्टिसाइड्स का इस्तेमाल फसलों को बचाने के लिए किया जाता है, लेकिन अब ये इंसानों के स्पर्म काउंट को कम करने का काम कर रहे हैं. (File Photo : Reuters) डीडीटी जैसा मशहूर कीटनाशक इसका सबसे बड़ा उदाहरण है. इसकी वजह से पक्षियों के अंडों के छिलके पतले हो गए थे, जिससे उनकी आबादी गिर गई थी. समुद्री जीवों में भी इसकी वजह से प्रजनन की कमी देखी गई थी, हालांकि बैन लगने के बाद उनकी संख्या में कुछ सुधार हुआ है. (File Photo : Reuters) Add News18 as Preferred Source on Google आजकल ‘फॉरएवर केमिकल्स’ यानी पीएफएएस (PFAS) का नाम बहुत चर्चा में है. ये ऐसे केमिकल्स हैं जो पर्यावरण में कभी खत्म नहीं होते. रिसर्च बताती है कि ये सीधे तौर पर एंडोक्राइन सिस्टम को नुकसान पहुंचाते हैं. यह सिस्टम हमारे शरीर के विकास, मेटाबॉलिज्म और रिप्रोडक्शन को कंट्रोल करता है. 1970 के दशक से कंपनियों को पता था कि ये केमिकल्स जहरीले हैं, लेकिन इसे जनता से छुपाया गया. इसकी वजह से प्रेग्नेंट महिलाओं में मिसकैरेज और बच्चों में जन्मजात बीमारियों का खतरा बढ़ गया. ये केमिकल्स इतने ताकतवर होते हैं कि बहुत कम मात्रा में भी शरीर के हॉर्मोन्स का संतुलन बिगाड़ सकते हैं. (File Photo : Reuters) प्लास्टिक प्रदूषण अब केवल जमीन और पानी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारे शरीर के अंदर तक पहुंच चुका है. माइक्रोप्लास्टिक और नैनोप्लास्टिक अब इंसानों और जानवरों के प्रजनन अंगों में जमा हो रहे हैं. सबसे डरावनी बात यह है कि हमें अभी तक इनके सटीक नुकसानों के बारे में पूरी जानकारी भी नहीं है. वैज्ञानिक आशंका जता रहे हैं कि अगर ये स्पर्म, अंडों या भ्रूण के लिए जहरीले साबित हुए, तो इस समस्या से निपटना नामुमकिन होगा. प्लास्टिक अब गहरे समंदर से लेकर ऊंचे पहाड़ों तक मौजूद है और इससे बचने का कोई रास्ता नहीं दिख रहा है. (File Photo : Reuters) वैज्ञानिकों का मानना है कि वर्तमान में चल रही ‘ग्लोबल प्लास्टिक ट्रीटी’ की बातचीत बहुत जरूरी है. यह केवल कचरे की समस्या नहीं है, बल्कि एक प्लैनेटरी हेल्थ क्राइसिस है. हजारों की संख्या में मौजूद ये रसायनों वाले प्लास्टिक हमारे अस्तित्व पर सवाल खड़े कर रहे हैं. जब ये केमिकल्स लैब से बाहर निकलकर पर्यावरण में एक-दूसरे से मिलते हैं, तो इनका असर और भी भयानक हो जाता है. रिसर्च में साफ कहा गया है कि अगर हमने अभी सख्त कदम नहीं उठाए, तो भविष्य में फर्टिलिटी का यह संकट पूरी दुनिया की आबादी को खतरे में डाल सकता है. (File Photo : Reuters) इस संकट से बचने के लिए सबसे पहले हमें उन केमिकल्स के बारे में जानना होगा जो हमारे आसपास मौजूद हैं. रोजमर्रा की चीजों में प्लास्टिक का कम इस्तेमाल और सर्टिफाइड प्रोडक्ट्स का चुनाव करना एक शुरुआत हो सकती है. हालांकि यह लड़ाई व्यक्तिगत स्तर से ज्यादा सिस्टम के स्तर पर लड़ने वाली है. सरकारों को उन केमिकल्स पर तुरंत रोक लगानी होगी जिनकी सुरक्षा जांच नहीं हुई है. जब तक हम अपनी धरती और पर्यावरण को केमिकल फ्री बनाने की दिशा में काम नहीं करेंगे, तब तक प्रजनन क्षमता पर मंडरा रहा यह ‘साइलेंट’ खतरा टलने वाला नहीं है. भविष्य की पीढ़ी को बचाने के लिए हमें आज ही अपनी केमिकल निर्भरता को कम करना होगा. (Photo : Generative AI)

‘काला नमक राइस’ के आगे हर वेरायटी है फेल, एक-एक दाने में सेहत का खजाना, जबरदस्त हैं इस चावल के फायदे

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Kalanamak rice ke fayde: भारत देश में चावल एक मुख्य भोजन है. हर दिन लाखों-करोड़ों लोग चावल-दाल जरूर खाते हैं. कई तरह के वेरायटी में चावल मिलता है. लोग अपनी पसंद से चावल मार्केट से खरीदते हैं. आज के समय में लोग अपनी सेहत को लेकर पहले से ज्यादा सजग हो गए हैं. इसी कारण वे साधारण चावल की जगह हेल्दी विकल्प ढूंढ रहे हैं. हेल्दी ऑप्शन में जो सबसे पहला नाम आता है वो है ‘काला नमक चावल’ है. ये चावल बेहद ही पौष्टिक और सुगंधित होता है. इसे ‘बुद्धा राइस’ या ‘महात्मा बुद्ध का महाप्रसाद’ भी कहा जाता है. प्राकृतिक सुगंध और शानदार स्वाद काला नमक चावल अपनी खास खुशबू और स्वाद के लिए जाना जाता है. इसकी प्राकृतिक सुगंध खाने को और भी लजीज बना देती है. इसे दाल, सब्जी या सलाद के साथ खाया जा सकता है, वहीं इसकी खिचड़ी भी बेहद पौष्टिक मानी जाती है. पोषक तत्वों से भरपूर इस चावल में आयरन, जिंक, प्रोटीन और फाइबर जैसे जरूरी पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं. ये तत्व शरीर को स्वस्थ रखने और ऊर्जा देने में अहम भूमिका निभाते हैं. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. डायबिटीज के लिए फायदेमंद काला नमक चावल का ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है, जिससे इसे खाने के बाद ब्लड शुगर तेजी से नहीं बढ़ता. यही वजह है कि डायबिटीज के मरीज इसे अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं, हालांकि डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है. वजन नियंत्रण में सहायक इसमें मौजूद फाइबर लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस कराता है, जिससे बार-बार भूख नहीं लगती. इससे वजन बढ़ने की संभावना कम होती है और वजन घटाने में मदद मिलती है. पाचन तंत्र को मजबूत बनाए फाइबर की अच्छी मात्रा के कारण यह पाचन क्रिया को बेहतर बनाता है. नियमित सेवन से कब्ज जैसी समस्याओं से राहत मिलती है और पेट स्वस्थ रहता है. दिल के लिए लाभकारी आयरन और जिंक शरीर में खून की कमी को दूर करने में मदद करते हैं और रक्त संचार को सुधारते हैं. इससे हृदय से जुड़ी बीमारियों का खतरा कम हो सकता है. बच्चों और महिलाओं के लिए उपयोगी यह चावल बच्चों और महिलाओं के लिए भी खास फायदेमंद है. आयरन एनीमिया से बचाव में मदद करता है, जिंक रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है. प्रोटीन मांसपेशियों को मजबूत बनाता है. ध्यान रखने वाली बात हालांकि, काला नमक चावल सेहत के लिए फायदेमंद है, लेकिन किसी भी नए खाद्य पदार्थ को अपनी दिनचर्या में शामिल करने से पहले डॉक्टर या न्यूट्रिशनिस्ट से सलाह लेना बेहतर होता है.

हिमाचल में तूफान में हादसा, 4 महिला टीचर्स की मौत:आनी में पेड़ गिरने से खाई में गिरी बोलेरो गाड़ी, 3 गंभीर, दो IGMC शिमला रेफर

हिमाचल में तूफान में हादसा, 4 महिला टीचर्स की मौत:आनी में पेड़ गिरने से खाई में गिरी बोलेरो गाड़ी, 3 गंभीर, दो IGMC शिमला रेफर

हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिला के अंतर्गत आते आनी क्षेत्र में शनिवार शाम एक हृदयविदारक हादसा पेश आया। शमशर-गुगरा मार्ग पर अचानक आए तूफान के कारण एक विशालकाय चीड़ का पेड़ चलती बोलेरो गाड़ी पर गिर गया। इस हादसे में गाड़ी में सवार चार महिला शिक्षकों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हैं। 200 फीट गहरी खाई में गिरी अनियंत्रित गाड़ी जानकारी के अनुसार, बोलेरो (नंबर HP01K-4621) में स्कूल से छुट्टी के बाद 6 महिला शिक्षक और चालक सवार होकर घर लौट रहे थे। शाम करीब 5:30 बजे आए तेज तूफान के कारण एक भारी पेड़ चलती गाड़ी के ऊपर आ गिरा। पेड़ गिरने से गाड़ी अनियंत्रित हो गई और सड़क से करीब 200 फीट नीचे गहरी खाई में जा गिरी। स्थानीय लोगों ने चलाया बचाव अभियान हादसे की आवाज सुनते ही आसपास के ग्रामीण तुरंत मौके पर पहुंचे और पुलिस को सूचित किया। स्थानीय लोगों की मदद से राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया और कड़ी मशक्कत के बाद मलबे में दबी महिला शिक्षकों और चालक को बाहर निकालकर सिविल अस्पताल आनी पहुंचाया गया। हादसे का शिकार हुए मृतक और घायल अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने चार शिक्षिकाओं को मृत घोषित कर दिया, जबकि दो गंभीर रूप से घायल शिक्षिकाओं को प्राथमिक उपचार के बाद आईजीएमसी (IGMC) शिमला रेफर किया गया है। चालक का उपचार आनी अस्पताल में चल रहा है। मृतकों की सूची: स्नेह लता (38): पत्नी टीका नंद, निवासी पारलीधार, आनी। बंती कौंडल: पत्नी हेम दत्त, निवासी लामीसेरी, आनी। उषा कुमारी (43): पत्नी मदन लाल, निवासी तराला, आनी। सीमा आजाद (54): पत्नी जिया लाल आजाद, निवासी रोपड़ी, आनी। घायलों के नाम: सुरेश चंद (चालक): पुत्र देश राज, निवासी रोपड़ी। तारा देवी: पत्नी रविंद्र कुमार, निवासी रोपड़ी। रीना कुमारी: पत्नी प्रेम सागर, निवासी सरकाघाट (मंडी)। बाल-बाल बची यात्रियों से भरी बस चश्मदीदों के अनुसार, हादसे के वक्त मार्ग से एक बस और अन्य वाहन भी गुजर रहे थे। गनीमत यह रही कि पेड़ सीधे बोलेरो पर गिरा, अन्यथा बस की चपेट में आने से मृतकों का आंकड़ा और बढ़ सकता था। सूचना मिलते ही पुलिस, प्रशासन और फायर ब्रिगेड की टीमें भी मौके पर पहुंच गई थीं। प्रशासन द्वारा फौरी राहत की घोषणा एसडीएम आनी, लक्ष्मण कनेट ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने बताया कि प्रशासन की ओर से मृतकों के परिजनों को 25-25 हजार रुपये और घायलों को 5-5 हजार रुपये की फौरी राहत राशि प्रदान की गई है। पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की छानबीन शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री ने हादसे पर शोक व्यक्त किया मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आनी क्षेत्र में हुए हादसे में चार लोगों की मृत्यु पर गहरा शोक व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने शोक संतप्त परिजनों के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए ईश्वर से दिवंगत की आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना की। उन्होंने घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने जिला प्रशासन को प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता प्रदान करने और घायलों को बेहतरीन चिकित्सा सुविधा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

प्रसून जोशी बने प्रसार भारती के नए अध्यक्ष:केंद्र सरकार ने की नियुक्ति, रचनात्मक दुनिया के दिग्गज को मिली बड़ी जिम्मेदारी

प्रसून जोशी बने प्रसार भारती के नए अध्यक्ष:केंद्र सरकार ने की नियुक्ति, रचनात्मक दुनिया के दिग्गज को मिली बड़ी जिम्मेदारी

केंद्र सरकार ने प्रख्यात गीतकार, लेखक और संचार विशेषज्ञ प्रसून जोशी को प्रसार भारती का नया अध्यक्ष नियुक्त किया है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने शनिवार को इसकी आधिकारिक घोषणा की। मंत्रालय द्वारा जारी बयान में कहा गया कि प्रसून जोशी एक जाने-माने क्रिएटिव प्रोफेशनल हैं, जिनका साहित्य, विज्ञापन, सिनेमा और पब्लिक कम्युनिकेशन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। अपनी प्रभावशाली लेखनी और गहरी सांस्कृतिक समझ के चलते उन्होंने भारतीय मीडिया नैरेटिव को आकार देने में अहम भूमिका निभाई है। जोशी के कार्यों में लोकप्रिय फिल्मी गीत, चर्चित विज्ञापन अभियान और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी कहानी कहने की शैली शामिल है, जो देशभर के विविध दर्शकों से जुड़ती है। उनके गीतों में संवेदनशीलता, देशभक्ति और सामाजिक सोच की झलक देखने को मिलती है। अश्विनी वैष्णव ने दी बधाई अश्विनी वैष्णव ने उन्हें बधाई देते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में प्रसार भारती को नई ऊर्जा और रचनात्मक दिशा मिलेगी। उन्होंने जोशी को साहित्य, विज्ञापन, कला और सिनेमा जगत में वैश्विक पहचान वाला बहुआयामी व्यक्तित्व बताया। सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन के रह चुके चेयरपर्सन इस नियुक्ति से पहले प्रसून जोशी अगस्त 2017 से सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) के चेयरपर्सन के रूप में कार्यरत थे। उनके कार्यकाल में फिल्म सर्टिफिकेशन प्रक्रिया को मजबूत करने और क्रिएटिव एक्सप्रेशन व नियामकीय जिम्मेदारी के बीच संतुलन बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास किए गए। अल्मोड़ा में हुआ था जन्म उत्तराखंड के अल्मोड़ा में जन्मे प्रसून जोशी ने शुरुआती शिक्षा के बाद प्रबंधन और संचार के क्षेत्र में भी अध्ययन किया। उन्होंने हिंदी सिनेमा की कई चर्चित फिल्मों जैसे तारे ज़मीन पर, रंग दे बसंती, भाग मिल्खा भाग, फना, हम तुम और ब्लैक के लिए यादगार गीत लिखे हैं।

ईरान जंग के 2 महीने, पूरी दुनिया में महंगाई बढ़ी:3,600+ मौतें, इनमें 1700+ नागरिक; जीत–हार का फैसला नहीं, 1 ट्रिलियन डॉलर का नुकसान

ईरान जंग के 2 महीने, पूरी दुनिया में महंगाई बढ़ी:3,600+ मौतें, इनमें 1700+ नागरिक; जीत–हार का फैसला नहीं, 1 ट्रिलियन डॉलर का नुकसान

ईरान के खिलाफ शुरू हुई जंग को दो महीने हो चुके हैं, लेकिन इसका कोई साफ अंत अभी तक नजर नहीं आ रहा। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इसे छोटी और निर्णायक लड़ाई बताया था, लेकिन अब हालात उलट दिख रहे हैं। जंग रुकी जरूर है, पर खत्म नहीं हुई। IMF के मुताबिक, जंग से पहले उम्मीद थी कि इस साल वैश्विक महंगाई 4.1% से घटकर 3.8% हो जाएगी। लेकिन अब उल्टा हो गया है, महंगाई 4.4% तक पहुंचने का अनुमान है। इस जंग की सबसे बड़ी कीमत आम लोग चुका रहे हैं। ईरान के मानवाधिकार संगठनों के मुताबिक, अब तक 3,600 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें 1,700 से ज्यादा नागरिक हैं। वहीं हार्वर्ड की इकोनॉमिस्ट लिंडा बिल्म्स का अनुमान है कि इस युद्ध की कुल लागत 1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच चुकी है। यानी दुनिया भर में महंगाई का दबाव और बढ़ना तय है। एक्सपर्ट- इस जंग में कोई असली विजेता नहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प कई बार कह चुके है कि इस जंग में अमेरिका कई मायनों में जीत हासिल कर चुका हैं। ब्रुकिंग्स इंस्टीट्यूट की सीनियर फेलो मेलानी सिसन ने CNN से कहा कि इस जंग में कोई असली विजेता नहीं है। अमेरिका को भी कोई बड़ा रणनीतिक फायदा नहीं मिला है। वहीं, यह संघर्ष अब सीमित नहीं रहा और इसका असर पूरी दुनिया पर दिख रहा है। सबसे ज्यादा नुकसान आम लोगों को हुआ है। ईरान, लेबनान और खाड़ी देशों से लेकर अमेरिका और पूरी दुनिया के लोग इसकी कीमत चुका रहे हैं। साथ ही, ईरान की सरकार ने भी अंदरूनी विरोध पर सख्ती बढ़ा दी है। साल की शुरुआत से अब तक 600 से ज्यादा लोगों को फांसी दी जा चुकी है। देश में आठ हफ्तों से इंटरनेट बंद है और अर्थव्यवस्था भी बुरी तरह प्रभावित हुई है। ईरान में आम जनता पर सरकार की सख्ती ईरान के लोग बाहर से भी हमलों का सामना कर रहे हैं और देश के अंदर से भी दबाव झेल रहे हैं। अमेरिका और इजराइल ने ईरान में हजारों जगहों पर हमले किए हैं, जिनमें कुछ हमले आम नागरिकों से जुड़े ढांचे (जैसे बिजली, पानी आदि) पर भी हुए। नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई के नेतृत्व में सरकार पहले से ज्यादा सख्त नजर आ रही है और किसी भी विरोध को कुचलने का मैसेज दे रही है। इससे पहले दिसंबर और जनवरी में हुए प्रदर्शनों के दौरान भी हजारों लोग मारे गए थे। साथ ही देश अर्थव्यवस्था भी बुरी तरह प्रभावित हुई है। जिससे नौकरियां जा रही हैं और गरीबी बढ़ रही है। लेबनान में भी भारी तबाही लेबनान के लोग कई दशकों से हिजबुल्लाह और इजराइल के बीच चल रहे संघर्ष में फंसे हुए हैं। फरवरी तक एक नाजुक सीजफायर बना हुआ था, लेकिन हालात तब बिगड़ गए जब इजराइल ने ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को मार दिया। इसके बाद हिजबुल्लाह ने इजराइल पर हमले शुरू कर दिए। जवाब में इजराइल ने लेबनान पर जोरदार एयरस्ट्राइक और जमीनी कार्रवाई शुरू की, जिसका मकसद हिजबुल्लाह को खत्म करना बताया गया। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, 2 मार्च से अब तक इन हमलों में 2500 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं। सैटेलाइट तस्वीरों से सामने आया है कि इजराइल वही रणनीति अपना रहा है, जो उसने पहले गाजा में अपनाई थी। यानी पूरे के पूरे गांवों को तबाह करना। हालात इतने खराब हैं कि दक्षिणी लेबनान से करीब 6 लाख लोग अपने घर छोड़ने पर मजबूर हो गए हैं। इजराइल ने साफ कहा है कि जब तक हिजबुल्लाह से उत्तरी इजराइल को खतरा खत्म नहीं होता, तब तक इन लोगों को वापस घर लौटने नहीं दिया जाएगा। खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्था पर असर खाड़ी के कई देश भी इस जंग की चपेट में आ गए हैं। सबसे ज्यादा असर UAE पर पड़ा है। यहां ईरान ने सबसे ज्यादा मिसाइल और ड्रोन हमले किए। हालांकि ज्यादातर हमले रोक दिए गए, लेकिन भारी नुकसान हुआ है और इससे UAE की एक बड़े बिजनेस और टूरिज्म हब वाली छवि को झटका लगा है। वहीं, ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने से इराक, कतर और कुवैत की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ा है। ये देश अपने तेल, गैस और दूसरे सामान की सप्लाई के लिए इसी रास्ते पर निर्भर हैं। इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) ने भी इन देशों की आर्थिक ग्रोथ के अनुमान घटा दिए हैं और माना है कि इस साल इराक, कतर और कुवैत की अर्थव्यवस्था सिकुड़ सकती है। अमेरिका में महंगाई, आम अमेरिकयों पर असर इस जंग का असर आम अमेरिकियों की जेब पर साफ दिख रहा है। पेट्रोल, हवाई टिकट और कई सर्विसेज महंगी हो गई हैं, क्योंकि कंपनियां अब कीमतों में फ्यूल सरचार्ज जोड़ रही हैं। महंगाई दर फरवरी के 2.4% से बढ़कर मार्च में 3.3% हो गई है, और लोगों का भरोसा (कंज्यूमर सेंटिमेंट) तेजी से गिर रहा है। ब्रुकिंग्स इंस्टीट्यूट के मुताबिक, अमेरिका की अर्थव्यवस्था काफी हद तक तेल पर निर्भर है। वहीं, रिन्यूएबल एनर्जी (जैसे सोलर, विंड) में निवेश अभी भी कम है और यही अब कमजोरी बन रही है। चीन और रूस को इस जंग से फायदा चीन इस जंग से अपेक्षाकृत मजबूत स्थिति में दिख रहा है। चीन ने पहले ही तेल के भंडार जोड़ रखे थे और वैकल्पिक ऊर्जा पर भी कई दशकों पहले से ध्यान दे रहा था। साथ ही, अमेरिका की छवि कमजोर होने से उसे कूटनीतिक फायदा मिला है। चीन की तेल और गैस कंपनियां भी मुनाफा कमा रही हैं। CNN के मुताबिक, 6 बड़ी कंपनियां इस साल 94 अरब डॉलर तक का फायदा कमा सकती हैं। इसके अलावा इस जंग से रूस की अर्थव्यवस्था को फायदा मिलता दिख रहा है। तेल और खाद की ऊंची कीमतों की वजह से रूस की कमाई बढ़ी है। साथ ही जब तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही थीं, तब अमेरिका ने समुद्र में मौजूद रूसी तेल पर कुछ समय के लिए पाबंदियां ढीली कर दीं, जिससे सप्लाई बढ़ सके, इससे रूस को और फायदा हुआ। अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के मुताबिक, मार्च में रूस की एनर्जी कमाई करीब दोगुनी होकर 19 अरब डॉलर पहुंच गई, जो फरवरी में 9.75 अरब

धनबाद-कोयला खदान में स्लरी ढहने से 4 मजदूरों की मौत:कोल वाशरी में स्लरी लोडिंग कर रहे थे, मलबे का बड़ा हिस्सा गिरने से हादसा

धनबाद-कोयला खदान में स्लरी ढहने से 4 मजदूरों की मौत:कोल वाशरी में स्लरी लोडिंग कर रहे थे, मलबे का बड़ा हिस्सा गिरने से हादसा

झारखंड के धनबाद में शनिवार को कोयला स्लरी (कोयले का पाउडर) धंस गई, जिससे 4 मजदूरों की मौत हो गई। ये सभी मजदूर मुनीडीह में BCCL की कोल वाशरी में काम कर रहे थे। इसी दौरान अचानक मलबा गिर गया। आसपास के मजदूरों और स्थानीय लोगों ने तुरंत बचाव काम शुरू किया और प्रशासन को सूचना दी। सूचना मिलते ही प्रशासन मौके पर पहुंचा। मलबा हटाकर चारों मजदूरों के शव बाहर निकाले गए। प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है और हादसे के कारणों का पता लगाया जा रहा है। मृतक की पहचान प्रेम बाउरी, माणिक बाउरी, दीपक बाउरी और नारायण यादव के रूप में की गई है। घटना की 4 तस्वीरें… परिजन ने BCCL प्रबंधक पर लापरवाही का आरोप लगाया घटना के बाद मृतकों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं, इस हादसे ने एक बार फिर खनन क्षेत्रों में सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिजन ने BCCL प्रबंधक पर लापरवाही का आरोप लगाया है। खबर लगातार अपडेट की जा रही है….