इंश्योरेंस सेक्टर में 100% FDI को सरकार की मंजूरी:ऑटोमैटिक रूट से विदेशी निवेश का रास्ता साफ; LIC में लिमिट 20% ही रहेगी

केंद्र सरकार ने शनिवार (2 मई) को इंश्योरेंस सेक्टर में 100% फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट यानी FDI को मंजूरी दे दी है। अब विदेशी निवेशक ऑटोमैटिक रूट के जरिए भारतीय इंश्योरेंस कंपनियों में पूरी हिस्सेदारी ले सकेंगे, हालांकि LIC के लिए निवेश की सीमा 20% पर ही बरकरार रखी गई है। इंश्योरेंस कंपनियों के लिए क्या हैं शर्तें सरकार के नोटिफिकेशन के मुताबिक, इंश्योरेंस सेक्टर में विदेशी निवेश बीमा अधिनियम-1938 के प्रावधानों के अधीन होगा। निवेश प्राप्त करने वाली कंपनियों के लिए यह अनिवार्य होगा कि वे बीमा और संबंधित गतिविधियों के लिए इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (IRDAI) से आवश्यक लाइसेंस या मंजूरी प्राप्त करें। इसके साथ ही नियमों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि जिस भारतीय बीमा कंपनी में विदेशी निवेश होगा, उसके बोर्ड के चेयरपर्सन, मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) या चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) में से कम से कम एक व्यक्ति भारतीय नागरिक होना चाहिए। LIC के लिए अलग नियम और 20% की सीमा इंश्योरेंस इंटरमीडियरीज को भी मिला फायदा दिसंबर में पास हुआ था बिल वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के तहत उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT) ने फरवरी में ही इस संबंध में जानकारी दी थी। इससे पहले दिसंबर 2025 में संसद ने ‘सबका बीमा सबकी रक्षा (बीमा कानून संशोधन) विधेयक, 2025’ पारित किया था। इस कानून के जरिए बीमा क्षेत्र से जुड़े तीन प्रमुख कानूनों—बीमा अधिनियम 1938, एलआईसी अधिनियम 1956 और IRDAI अधिनियम 1999 में जरूरी बदलाव किए गए हैं। सीमावर्ती देशों के लिए नियमों में ढील सरकार ने मार्च में भारत के साथ जमीनी सीमा साझा करने वाले देशों से आने वाले FDI के नियमों को भी आसान बना दिया है। कैबिनेट ने ‘प्रेस नोट 3’ फ्रेमवर्क में संशोधन किया है। अब सीमावर्ती देशों से 10% तक की नॉन-कंट्रोलिंग हिस्सेदारी (बिना नियंत्रण वाली हिस्सेदारी) के निवेश के लिए सरकार की पूर्व मंजूरी की आवश्यकता नहीं होगी, यह ऑटोमैटिक रूट के तहत आएगा। क्या है ऑटोमैटिक रूट? इसमें विदेशी निवेशकों को निवेश से पहले सरकार या RBI की पूर्व अनुमति लेने की जरूरत नहीं होती। क्या है प्रेस नोट 3? यह नियम उन देशों से निवेश को रेगुलेट करता है जिनकी सीमाएं भारत से लगती हैं (जैसे चीन, पाकिस्तान), ताकि निवेश की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। ये खबर पढ़ें… चीन समेत पड़ोसी देशों के लिए भारत में निवेश आसान: फॉरेन इन्वेस्टमेंट के नियम बदले; 10% से कम हिस्सेदारी पर बिना मंजूरी निवेश कर सकेंगे केंद्र सरकार ने चीन समेत भारत के साथ बॉर्डर शेयर करने वाले यानी पड़ोसी देशों से आने वाले फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) के नियमों में ढील दी है। PM मोदी की अध्यक्षता में मंगलवार (10 मार्च) को हुई कैबिनेट मीटिंग में प्रेस नोट 3 यानी FDI पॉलिसी के नियमों में बदलाव को मंजूरी दी गई। पूरी खबर पढ़ें…
इंश्योरेंस सेक्टर में 100% FDI को सरकार की मंजूरी:ऑटोमैटिक रूट से विदेशी निवेश का रास्ता साफ; LIC में लिमिट 20% ही रहेगी

केंद्र सरकार ने शनिवार (2 मई) को इंश्योरेंस सेक्टर में 100% फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट यानी FDI को मंजूरी दे दी है। अब विदेशी निवेशक ऑटोमैटिक रूट के जरिए भारतीय इंश्योरेंस कंपनियों में पूरी हिस्सेदारी ले सकेंगे, हालांकि LIC के लिए निवेश की सीमा 20% पर ही बरकरार रखी गई है। इंश्योरेंस कंपनियों के लिए क्या हैं शर्तें सरकार के नोटिफिकेशन के मुताबिक, इंश्योरेंस सेक्टर में विदेशी निवेश बीमा अधिनियम-1938 के प्रावधानों के अधीन होगा। निवेश प्राप्त करने वाली कंपनियों के लिए यह अनिवार्य होगा कि वे बीमा और संबंधित गतिविधियों के लिए इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (IRDAI) से आवश्यक लाइसेंस या मंजूरी प्राप्त करें। इसके साथ ही नियमों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि जिस भारतीय बीमा कंपनी में विदेशी निवेश होगा, उसके बोर्ड के चेयरपर्सन, मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) या चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) में से कम से कम एक व्यक्ति भारतीय नागरिक होना चाहिए। LIC के लिए अलग नियम और 20% की सीमा इंश्योरेंस इंटरमीडियरीज को भी मिला फायदा दिसंबर में पास हुआ था बिल वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के तहत उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT) ने फरवरी में ही इस संबंध में जानकारी दी थी। इससे पहले दिसंबर 2025 में संसद ने ‘सबका बीमा सबकी रक्षा (बीमा कानून संशोधन) विधेयक, 2025’ पारित किया था। इस कानून के जरिए बीमा क्षेत्र से जुड़े तीन प्रमुख कानूनों—बीमा अधिनियम 1938, एलआईसी अधिनियम 1956 और IRDAI अधिनियम 1999 में जरूरी बदलाव किए गए हैं। सीमावर्ती देशों के लिए नियमों में ढील सरकार ने मार्च में भारत के साथ जमीनी सीमा साझा करने वाले देशों से आने वाले FDI के नियमों को भी आसान बना दिया है। कैबिनेट ने ‘प्रेस नोट 3’ फ्रेमवर्क में संशोधन किया है। अब सीमावर्ती देशों से 10% तक की नॉन-कंट्रोलिंग हिस्सेदारी (बिना नियंत्रण वाली हिस्सेदारी) के निवेश के लिए सरकार की पूर्व मंजूरी की आवश्यकता नहीं होगी, यह ऑटोमैटिक रूट के तहत आएगा। क्या है ऑटोमैटिक रूट? इसमें विदेशी निवेशकों को निवेश से पहले सरकार या RBI की पूर्व अनुमति लेने की जरूरत नहीं होती। क्या है प्रेस नोट 3? यह नियम उन देशों से निवेश को रेगुलेट करता है जिनकी सीमाएं भारत से लगती हैं (जैसे चीन, पाकिस्तान), ताकि निवेश की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। ये खबर पढ़ें… चीन समेत पड़ोसी देशों के लिए भारत में निवेश आसान: फॉरेन इन्वेस्टमेंट के नियम बदले; 10% से कम हिस्सेदारी पर बिना मंजूरी निवेश कर सकेंगे केंद्र सरकार ने चीन समेत भारत के साथ बॉर्डर शेयर करने वाले यानी पड़ोसी देशों से आने वाले फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) के नियमों में ढील दी है। PM मोदी की अध्यक्षता में मंगलवार (10 मार्च) को हुई कैबिनेट मीटिंग में प्रेस नोट 3 यानी FDI पॉलिसी के नियमों में बदलाव को मंजूरी दी गई। पूरी खबर पढ़ें…
‘200 से ज्यादा वोट जीतेंगे’, ममता बनर्जी ने टीएमसी की जीत का दावा किया, एलॉगिट पोल को बताया गलत

त्वरित पढ़ें दिखाएँ एआई द्वारा उत्पन्न मुख्य बिंदु, न्यूज़ रूम द्वारा सत्यापित ममता बनर्जी ने टीएमसी की जीत का विश्वासपात्र है। एकांकीत पोल को शेयर में बाज़ार में बताया गया। सीएपीएफ पर टीएमसी की ओर से बर्बरता का आरोप। दो खंडों पर फिर से मतदान के बीच बयान। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और थोक व्यापारी कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी ने शनिवार (2 मई, 2026) को हाल ही में चुनावी मैदान में उतरीं टीएमसी की जीत का भरोसा कायम है। उन्होंने कहा कि बंगाल में चुनावी मैदान में चुनावी मैदान होगा। चुनाव ख़त्म होने के बाद सोमवार (4 मई, 2026) को होने वाली वोटिंग से पहले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शनिवार (2 मई) को पार्टी के मतगणना एजेंटों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए ऑनलाइन मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने पश्चिम बंगाल को एकजुट करने के लिए एलेक्टिट पोल के अभिलेखों को खारिज कर दिया और इसे बाजार में साझा करने का प्रयास किया। उन्होंने कहा, ‘हम बंगाल चुनाव जीत रहे हैं और 200 से अधिक सीटों के अंतर से जीत रहे हैं।’ ऑनलाइन पोल शेयर बाजार में सिर्फ हिस्सेदारी करने की एक कोशिश है। उन्होंने इससे पहले 2021, 2024 में भी ऐसा किया था और वो अब भी यही कर रहे हैं।’ केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बल को लेकर क्या बोलें मुख्यमंत्री ममता बनर्जी? इस दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग की ओर से बंगाल में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) पर भी आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल के सोल ने तीन लोगों को एकजुट किया है। उन्होंने आश्वासन दिया कि अगले कुछ दिनों में कैथोलिक कांग्रेस पार्टी के सभी लोगों ने इस्तीफा दे दिया है, जिसमें केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल सेना की बर्बरता का सामना करने की मांग की गई है। पश्चिम बंगाल की दो विधानसभाओं में फिर से हो रही वोटिंग कांग्रेस कांग्रेस (टीएमसी) की प्रमुख और सीएम ममता बनर्जी का यह बयान एक बार फिर सामने आया है जब पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के दो जिलों में फिर से वोट बनाया जा रहा है। वहीं, सीएम ममता बनर्जी के बयान से पहले भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के पश्चिम बंगाल के सह-प्रभारी अमित इंजील ने आरोप लगाया था कि राज्य में दूसरे चरण के चुनाव के दौरान डायमंड हार्बर विधानसभा क्षेत्र के फाल्टा में कई पोलिंग बूथों पर मतदाताओं ने पार्टी के उम्मीदवारों को समर्थन दिया था। यह भी पढ़ेंः ‘जिस भाव से मुसलमानों को…’, पेट्रोल-डीजल और गैस के दाम को लेकर कोयला कोयला का बड़ा बयान, जानें क्या कहा (टैग्सटूट्रांसलेट)पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026(टी)ममता बनर्जी(टी)टीएमसी(टी)बीजेपी(टी)अमित मालवीय(टी)पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026(टी)ममता बनर्जी(टी)टीएमसी(टी)बीजेपी(टी)अमित
रिपोर्ट- ED ने ₹81 हजार करोड़ की संपत्ति अटैच की:लोगों को ₹32 हजार करोड़ लौटाए; गिरफ्तारी में 27% की कमी आई, छापेमारी दोगुनी

प्रवर्तन निदेशालय (ED) की सालाना रिपोर्ट 2025-26 के मुताबिक मनी लॉन्ड्रिंग के तहत गिरफ्तारियों में कमी आई। वहीं छापों, संपत्ति अटैचमेंट और पीड़ितों को पैसे लौटाने के मामलों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई। ED ने 712 प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर जारी कर 81,422 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त की। यह पिछले साल के 30,036 करोड़ रुपए के मुकाबले 171% ज्यादा है। ये अटैचमेंट PMLA की एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी से पुष्टि के बाद स्थायी होते हैं। ED की गिरफ्तारियों में करीब 27% की कमी आई है। ED ने 156 लोगों को गिरफ्तार किया, जबकि FY25 में यह संख्या 214 और FY24 में 272 थी। एजेंसी के मुताबिक अब वह टारगेटेड और सबूत आधारित जांच पर ज्यादा फोकस कर रही है। रेड की संख्या दोगुनी हुई साल 2025-26 में ED ने कुल 2,892 छापे मारे, जो पिछले साल 1,491 के मुकाबले लगभग दोगुने हैं। हालांकि एजेंसी अब सिर्फ फिजिकल रेड पर निर्भर नहीं है, बल्कि डेटा एनालिटिक्स, ब्लॉकचेन ट्रैकिंग और रियल-टाइम फाइनेंशियल इंटेलिजेंस का भी इस्तेमाल कर रही है। पीड़ितों को ₹32 हजार करोड़ लौटाए रिपोर्ट की सबसे बड़ी उपलब्धि फ्रॉड पीड़ितों को संपत्ति लौटाना रही। FY26 में ED ने 32,678 करोड़ रुपए की संपत्ति निवेशकों, होमबॉयर्स और बैंकों को वापस दिलाई, जो पिछले साल 15,263 करोड़ रुपए थी। इसमें PACL पोंजी स्कैम केस का बड़ा योगदान रहा, जहां अकेले 15,582 करोड़ रुपए लौटाए गए। केस रजिस्ट्रेशन और चार्जशीट में भी रिकॉर्ड केस रजिस्ट्रेशन 39% बढ़कर 1,080 हो गए हैं। वहीं इस साल 812 चार्जशीट दाखिल की गईं जो पिछले साल 457 थीं। एजेंसी का दावा है कि अब केस की जांच अवधि 3-4 साल से घटकर 1-1.5 साल रह गई है। विदेशों से कानूनी सहयोग बढ़ा मनी लॉन्ड्रिंग जांच में अंतरराष्ट्रीय सहयोग भी बढ़ा है। वहीं भारत को विदेशों से 246 रिक्वेस्ट मिले, जिनमें सबसे ज्यादा UK (79) से हैं। 31 मार्च 2026 तक 353 MLAT/LR रिक्वेस्ट लंबित हैं, जिनमें सबसे ज्यादा: प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत ED को गिरफ्तारी, तलाशी, जब्ती और संपत्ति अटैच करने के व्यापक अधिकार हैं। इस कानून के तहत जमानत मिलना भी मुश्किल होता है।
ED की 2025-26 में सबसे ज्यादा 2,892 रेड:गिरफ्तारी में 27% की कमी आई, ₹81 हजार करोड़ की संपत्ति अटैच, ₹32 हजार करोड़ लौटाए

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने साल 2025-26 में इतिहास में सबसे ज्यादा छापेमारी की। एजेंसी ने कुल 2,892 छापे मारे, जो पिछले साल 1,491 के मुकाबले लगभग दोगुने हैं। ED की सालाना रिपोर्ट 2025-26 के मुताबिक मनी लॉन्ड्रिंग के तहत गिरफ्तारियों में कमी आई। वहीं संपत्ति अटैचमेंट और पीड़ितों को पैसे लौटाने के मामलों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई। ED ने 712 प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर जारी कर 81,422 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त की। यह पिछले साल के 30,036 करोड़ रुपए के मुकाबले 171% ज्यादा है। ये अटैचमेंट PMLA की एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी से पुष्टि के बाद स्थायी होते हैं। ED की गिरफ्तारियों में करीब 27% की कमी आई है। ED ने 156 लोगों को गिरफ्तार किया, जबकि पिछले साल यह संख्या 214 और इससे पहले 272 थी। एजेंसी के मुताबिक अब वह टारगेटेड और सबूत आधारित जांच पर ज्यादा फोकस कर रही है। पीड़ितों को ₹32 हजार करोड़ लौटाए रिपोर्ट की सबसे बड़ी उपलब्धि फ्रॉड पीड़ितों को संपत्ति लौटाना रही। FY26 में ED ने 32,678 करोड़ रुपए की संपत्ति निवेशकों, होमबॉयर्स और बैंकों को वापस दिलाई, जो पिछले साल 15,263 करोड़ रुपए थी। इसमें PACL पोंजी स्कैम केस का बड़ा योगदान रहा, जहां अकेले 15,582 करोड़ रुपए लौटाए गए। केस रजिस्ट्रेशन और चार्जशीट में भी रिकॉर्ड केस रजिस्ट्रेशन 39% बढ़कर 1,080 हो गए हैं। वहीं इस साल 812 चार्जशीट दाखिल की गईं जो पिछले साल 457 थीं। एजेंसी का दावा है कि अब केस की जांच अवधि 3-4 साल से घटकर 1-1.5 साल रह गई है। विदेशों से कानूनी सहयोग बढ़ा मनी लॉन्ड्रिंग जांच में अंतरराष्ट्रीय सहयोग भी बढ़ा है। वहीं भारत को विदेशों से 246 रिक्वेस्ट मिले, जिनमें सबसे ज्यादा UK (79) से हैं। 31 मार्च 2026 तक 353 MLAT/LR रिक्वेस्ट लंबित हैं, जिनमें सबसे ज्यादा: प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत ED को गिरफ्तारी, तलाशी, जब्ती और संपत्ति अटैच करने के व्यापक अधिकार हैं। इस कानून के तहत जमानत मिलना भी मुश्किल होता है।
मुंबई महिला लीग ऑक्शन- इरा जाधव की सबसे महंगी खिलाड़ी:आकाश टाइगर्स ने 10 लाख में खरीदा, U-19 में तिहरा शतक लगाया

16 साल की इरा जाधव पहली मुंबई महिला लीग नीलामी की सबसे महंगी खिलाड़ी बन गई हैं। उन्हें शनिवार को आकाश टाइगर्स ने 10 लाख रुपए में खरीदा। इरा ने पिछले साल अंडर-19 क्रिकेट में तिहरा शतक लगाया था। उन्हें आक्रामक बल्लेबाजी के लिए जाना जाता है। मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन (MCA) की ऑक्शन में कुल 363 विमेंस प्लेयर्स पर बोली लगी। इनमें से 50 खिलाड़ियों को तीन फ्रेंचाइजी ने अपनी टीम में शामिल किया। फ्रेंचाइजी ने कुल 1.47 करोड़ रुपए खर्च किए। लीग में शामिल होने वाली तीन टीमें- सोबो मुंबई फाल्कन्स, ठाणे स्काई राइजर्स और आकाश टाइगर्स हैं। जगमोहन डालमिया ट्रॉफी जीत चुकी हैं इरा इरा जाधव का हालिया प्रदर्शन शानदार रहा है। उन्हें ‘नमन अवॉर्ड्स 2026’ में बेस्ट घरेलू क्रिकेटर के लिए जगमोहन डालमिया ट्रॉफी से सम्मानित किया गया था। सिर्फ 14 साल की उम्र में उन्होंने विमेंस प्रीमियर लीग (WPL) के लिए रजिस्ट्रेशन कराया था। अब वे इस लीग में प्रदर्शन करके WPL के अगले सीजन के लिए दावा मजबूत करना चाहती हैं। सयाली, साइमा और हुमैरा बनीं ‘आइकन प्लेयर’ MCA ने लीग के पहले सीजन के लिए तीन अनुभवी खिलाड़ियों को ‘आइकन प्लेयर’ के तौर पर चुना है। भारतीय टीम का हिस्सा रह चुकीं सयाली सतघरे ‘सोबो मुंबई फाल्कन्स’ की आइकन होंगी, जबकि साइमा ठाकुर ‘ठाणे स्काई राइजर्स’ और हुमैरा काजी ‘आकाश टाइगर्स’ का प्रतिनिधित्व करेंगी। इन खिलाड़ियों का अंतरराष्ट्रीय और घरेलू अनुभव लीग के स्तर को और ऊंचा ले जाएगा। नाइक बोले- यह मुंबई क्रिकेट के लिए ऐतिहासिक शुरुआत MCA अध्यक्ष अजिंक्य नाइक ने कहा कि यह लीग भारत में महिला क्रिकेट के विकास में मील का पत्थर साबित होगी। नीलामी के लिए कुल 2,411 खिलाड़ियों ने पंजीकरण कराया था, जिनमें से अंतिम छंटनी के बाद पुरुष और महिला खिलाड़ियों की नीलामी एक साथ आयोजित की गई। जल्द ही शुरू होने वाली इस लीग से मुंबई के फैंस को रोमांचक क्रिकेट देखने की उम्मीद है। ——————————————————– महिला क्रिकेट से जुड़ी यह खबर भी पढ़िए… विमेंस टी-20 वर्ल्डकप के लिए टीम इंडिया का ऐलान BCCI ने विमेंस टी-20 वर्ल्ड कप के लिए भारतीय महिला टीम का ऐलान कर दिया है। पिछले साल वनडे वर्ल्डकप जिताने वालीं कप्तान हरमनप्रीत कौर को ही टीम की कप्तानी सौंपी गई है, जबकि स्मृति मंधाना को ही वाइस कैप्टन बनाया गया है। पढ़ें पूरी खबर
अब असम में खेला जाएगा? कांग्रेस ने डिजिटल पोल को बताया गलत, डेके शिवकुमार ने बीजेपी पर लगाया बड़ा दावा

असम चुनाव 2026: असम विधानसभा चुनाव 2026 के लिए सबसे पहले मोटरसाइकिल रैली को तेज किया गया है, जहां कांग्रेस और सहयोगी आश्रम ने दावा किया है कि राज्य में उनकी सरकार बनने जा रही है और पार्टी पोल को सांप्रदायिक बनाने की कोशिश की जा रही है। शनिवार को कांग्रेस के वरिष्ठ पर्यवेक्षक डी.के. शिवकुमार, चंबाल बजाजा और संगीतकार सिंह ने गठबंधन के सहयोगियों के साथ बैठक की, जबकि कांग्रेस ने इस चुनाव में राइजोर दल, असम जाति परिषद (एजेपी), सी.के.एल.एच.एल.सी. (एम.), ए.पी.एच.एल.सी. और सी.आर.आई. गौरव गोगोई का दावा- आराम से लेगी सरकार बैठक के बाद असम कांग्रेस के अध्यक्ष गौरव गोगोई ने दावा किया कि गठबंधन आराम से सरकार बनाएगा और कहा कि राज्य के लोगों, किसानों, युवाओं और महिलाओं ने बदलाव के लिए वोट दिया है, साथ ही उन्होंने समीक्षित दल की रणनीति पर सहमति जताते हुए कहा कि 4 मई को नतीजे आएंगे और सभी को एक मजबूत कमरे पर नजर रखनी होगी। ‘डर की वजह से लोग फ़्रांसीसी नहीं बोले’ कर्नाटक के स्नातक डी.के. शिवकुमार ने भी एलेक्टिट पोल को खारिज करते हुए कहा कि लाइब्रेरी में डार का मनोबल है, इसलिए लोग फ्रैंक राय अपने पास नहीं रख पाए, उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी से सहमति नहीं बनने वालों को सरकारी मंजूरी का लाभ नहीं मिल रहा है और उनकी टीम मजबूत और एकजुट है। शिवकुमार ने यह भी दावा किया कि बीजेपी के कुछ नेता खतरे की हार के बावजूद कांग्रेस के संपर्क में आने की कोशिश कर रहे हैं और पार्टी को अपने आंतरिक सर्वेक्षण पर पूरा भरोसा है। एक्जालिट पोल में एनडीए को बढ़त बीजेपी के नेतृत्व में एक्सिस माय इंडिया ने जहां एनडीए को 88-100 सीटें, जेवीसी ने 88-101 और मैट्रिज ने 85-95 सीटें दीं, वहीं कांग्रेस गठबंधन को 23 से 36 सीटें मिलीं। असम विधानसभा का चुनाव प्रारंभिक 4 मई को होगा और इस बार कांग्रेस ने छह गठबंधन के साथ गठबंधन बीजेपी के नेतृत्व वाले चेहरे को चुनौती दी है। (टैग्सटूट्रांसलेट)असम चुनाव 2026(टी)कांग्रेस(टी)असम चुनाव 2026(टी)कांग्रेस का दावा(टी)एग्जिट पोल विवाद(टी)एनडीए लीड(टी)गौरव गोगोई का बयान(टी)डीके शिवकुमार(टी)चुनाव परिणाम 4 मई(टी)असम की राजनीति(टी)गठबंधन सरकार(टी)बीजेपी बनाम कांग्रेस(टी)असम चुनाव 2026(टी)कांग्रेस दावा
नारियल पानी या गन्ने का जूस, गर्मी में क्या है ज्यादा फायदेमंद? डॉक्टर ने दिया सही जवाब

Last Updated:May 02, 2026, 18:08 IST गर्मी में ठंडक पाने के लिए लोग अक्सर नारियल पानी और गन्ने का जूस दो आसान विकल्पों की ओर बढ़ते हैं. लेकिन हर घूंट का असर एक जैसा नहीं होता. कभी शरीर को तुरंत ताकत की जरूरत होती है, तो कभी सिर्फ पानी की कमी पूरी करनी होती है. ऐसे में चुनाव सोच-समझकर करना जरूरी हो जाता है. सही समय, सही मात्रा और अपनी जरूरत को समझना ही असली समझदारी है. तो आइए जानते है कौन सा ड्रिंक गर्मी के लिए ज्यादा फायदेमंद है. नई दिल्ली: गर्मी के मौसम में ठंडक पाने के लिए लोग अक्सर नारियल पानी और गन्ने के जूस का सहारा लेते हैं, लेकिन दोनों का असर हर व्यक्ति पर एक जैसा नहीं होता. कभी शरीर को तुरंत ऊर्जा की जरूरत होती है, तो कभी सिर्फ पानी की कमी पूरी करनी होती है. ऐसे में सही विकल्प का चुनाव सोच-समझकर करना जरूरी है. विशेषज्ञों का मानना है कि सही समय, सही मात्रा और शरीर की जरूरत को समझकर ही इन पेयों का सेवन करना चाहिए. वरना राहत देने वाली चीज कभी-कभी परेशानी भी बढ़ा सकती है. डॉक्टर की रायडॉ. सुनीता चौधरी के अनुसार, नारियल पानी और गन्ने का जूस दोनों ही फायदेमंद हैं, लेकिन इन्हें शरीर की जरूरत के हिसाब से लेना चाहिए. नारियल पानी में पोटैशियम और सोडियम जैसे इलेक्ट्रोलाइट्स पाए जाते हैं, जो शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन को जल्दी दूर करते हैं. खासकर लू लगने या बार-बार प्यास लगने की स्थिति में नारियल पानी ज्यादा असरदार होता है. गन्ने के जूस के फायदेगन्ने का जूस शरीर को तुरंत ऊर्जा देने में मदद करता है, क्योंकि इसमें प्राकृतिक शर्करा होती है. अगर किसी को कमजोरी महसूस हो रही हो या शुगर लेवल कम लग रहा हो, तो गन्ने का जूस एक अच्छा विकल्प हो सकता है. हालांकि, इसे पीते समय साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना जरूरी है, क्योंकि जूस मशीन या गन्ने की सतह पर गंदगी होने का खतरा रहता है, जिससे संक्रमण का जोखिम बढ़ सकता है. किसे क्या चुनना चाहिएडॉक्टरों के अनुसार, डायबिटीज के मरीजों को गन्ने का जूस पीने से बचना चाहिए और उनके लिए नारियल पानी ज्यादा सुरक्षित विकल्प है. वहीं, जिन लोगों को बार-बार डिहाइड्रेशन की समस्या होती है, उनके लिए भी नारियल पानी बेहतर माना जाता है. सही समय और मात्राडॉ. चौधरी का कहना है कि दिन की शुरुआत गुनगुने पानी से करनी चाहिए. इसके बाद सुबह करीब 11 बजे के आसपास नारियल पानी या गन्ने का जूस लिया जा सकता है. मात्रा की बात करें तो एक बार में लगभग 200 मिली यानी एक गिलास पर्याप्त होता है. ज्यादा मात्रा में सेवन करने से बचना चाहिए, ताकि शरीर पर इसका नकारात्मक असर न पड़े. About the Author Amita kishor न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें
न्यूयॉर्क में सालाना 2 करोड़ या भारत में 60 लाख?:सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस; लोग बोले- जिंदगी को सिर्फ पैसों से नहीं माप सकते

भारतीय युवाओं के बीच विदेश में नौकरी करने का सपना अब सिर्फ बड़ी सैलरी तक सीमित नहीं रह गया है। बेहतर लाइफस्टाइल, ग्लोबल एक्सपोजर और करिअर ग्रोथ के साथ अब लोग यह भी सोचने लगे हैं कि क्या विदेश जाकर वास्तव में जिंदगी बेहतर होती है। इसी सवाल ने सोशल मीडिया पर तब नई बहस छेड़ दी, जब एक भारतीय प्रोफेशनल ने न्यूयॉर्क की हाई-पेइंग जॉब और भारत में आरामदायक जिंदगी के बीच अपनी दुविधा साझा की। रेडिट पर ‘भारत में सालाना 60 लाख बनाम न्यूयॉर्क में 2 करोड़’ शीर्षक से लिखी गई पोस्ट वायरल हो गई। प्रोफेशनल ने बताया कि उन्हें न्यूयॉर्क में 2.2 लाख डॉलर सालाना यानी करीब ₹2 करोड़ का ऑफर मिला है, जो बढ़कर 2.3 लाख डॉलर (2.2 करोड़ रुपए) तक जा सकता है। दूसरी तरफ भारत में रहने पर प्रमोशन के बाद उनकी सालाना सैलरी करीब ₹80 लाख तक पहुंच सकती है। प्रोफेशनल ने बताया कि उनके ऊपर कोई कर्ज नहीं है, अच्छी-खासी बचत है और भारत में हर महीने करीब ₹3.4 लाख की पैसिव इनकम भी आती है, जो विदेश जाने पर भी जारी रह सकती है। यही वजह है कि पहले जो ऑफर ‘ड्रीम मूव’ लग रहा था, अब उसी पर संदेह होने लगा है। इस पर सोशल मीडिया पर लोगों की राय दो हिस्सों में बंटी नजर आई। कई यूजर्स ने कहा कि जिंदगी को सिर्फ पैसों से नहीं मापा जा सकता। कुछ लोगों ने लिखा कि ग्लोबल एक्सपोजर, नेटवर्किंग और करिअर के मौके लंबे समय में भारत की आरामदायक नौकरी से ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकते हैं। हालांकि दूसरी तरफ कई यूजर्स ने न्यूयॉर्क के महंगी जीवनशैली की याद दिलाई। कुछ ने कहा कि 2.3 लाख डॉलर सुनने में बड़ा पैकेज लगता है, लेकिन टैक्स और किराया निकालने के बाद वहां बचत आसान नहीं होती। कई भारतीय न्यू जर्सी में रहकर रोज न्यूयॉर्क आने-जाने को मजबूर होते हैं। इसीलिए यह चर्चा उस नई सोच के केंद्र में आ गई है जिसमें युवा ‘विदेश यानी बेहतर जिंदगी’ के फॉर्मूले पर दोबारा सोचने लगे हैं। करिअर ग्रोथ, बेतहाशा खर्च, वीसा…हर पहलू पर बहस का बाजार गर्म समर्थकों का तर्क – न्यूयॉर्क में काम करने से ग्लोबल एक्सपोजर और करिअर ग्रोथ के बड़े मौके मिलेंगे। विरोध में राय – न्यूयॉर्क दुनिया के सबसे महंगे शहरों में शुमार है। भारी-भरकम टैक्स, ऊंचा घर किराया और रोजाना लंबी दूरी की यात्रा बड़ी चुनौती बन सकते हैं। वीसा को लेकर चिंता – कुछ यूजर्स ने याद दिलाया कि एच1बी या एल1 वीसा पर आय के अतिरिक्त स्रोत चलाना आसान नहीं होता।
AIIMS portable MRI| Brain Imaging technology| मशीन खुद चलकर आएगी मरीज के पास, करेगी MRI, एम्स दिल्ली में शुरू हुई कमाल की सुविधा

होमताजा खबरDelhi मशीन खुद चलकर आएगी मरीज के पास, करेगी MRI, एम्स में शुरू हुई कमाल की सुविधा Last Updated:May 02, 2026, 17:17 IST AIIMS नई दिल्ली ने देश का पहला पोर्टेबल बेडसाइड MRI शुरू किया है. इससे ICU और इमरजेंसी में बिना मरीज को हिलाए ब्रेन इमेजिंग की जा सकेगी. रेडियोसर्जरी ग्लोबल के सहयोग से इसे एम्स लाया गया है. एम्स नई दिल्ली में शुरू हुई बेडसाइड पोर्टेबल एमआरआई की सुविधा. AIIMS Delhi Portable MRI: अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) नई दिल्ली ने देश में पहली बार पोर्टेबल बेडसाइड MRI सिस्टम शुरू कर दिया है.यह तकनीक गंभीर रूप से बीमार मरीजों के लिए गेम चेंजर साबित होने वाली है. अब ICU, इमरजेंसी और न्यूरोसर्जिकल वार्ड में मरीज को बिस्तर से हिलाए बिना ब्रेन की इमेजिंग की जा सकेगी. देश में पहली बार ऐसी कोई मशीन लाई गई है जो न्यरोलॉजी विभाग में क्रांतिकारी साबित होने वाली है. परंपरागत MRI से अलगअभी तक एम्स में पारंपरिक एमआरआई मशीनों से स्कैन किया जाता था. ये एमआरआई मशीनें बड़ी, महंगी और स्थिर होती हैं. इनमें स्कैन के लिए मरीज को ICU से MRI रूम तक ले जाना पड़ता है, जो गंभीर मरीजों के लिए जोखिम भरा होता है. नया अल्ट्रा-लो-फील्ड पोर्टेबल एमआरआई छोटा, व्हील वाला और आसानी से मरीज के बेड तक ले जाया जा सकता है. यह सिस्टम न्यूरोलॉजिकल कंडीशंस सेंटर में डॉ. शैलेश गायकवाड़ की टीम के नेतृत्व में उपयोग में लाया जा रहा है. किन मरीजों को फायदा?डॉ. शैलेश गायकवाड़ ने बताया कि यह तकनीक स्ट्रोक, ट्रॉमा, ICU मॉनिटरिंग, बच्चों और पोस्ट-ऑपरेटिव न्यूरोसर्जिकल केस में तेज डायग्नोसिस की सुविधा देगी. इमरजेंसी में जहां समय की कमी होती है और मरीज को शिफ्ट करना खतरनाक है, वहां यह सिस्टम जीवन रक्षक साबित होगा. डॉक्टरों का कहना है कि इससे फैसला लेने की गति बढ़ेगी और मरीजों की जान बचाने में मदद मिलेगी. भारत के लिए ऐतिहासिक कदमभारत में इस पोर्टेबल MRI को नियामकीय मंजूरी मिलने के बाद AIIMS में लगाया गया है. अस्पताल को रेडियोसर्जरी ग्लोबल के सहयोग से यह उपलब्ध हुआ है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह पॉइंट-ऑफ-केयर न्यूरो डायग्नोस्टिक्स में नई क्रांति लाएगा. दूरदराज के क्षेत्रों और छोटे अस्पतालों में भी ब्रेन इमेजिंग की पहुंच बढ़ेगी. मरीजों और चिकित्सा क्षेत्र पर प्रभावपोर्टेबल MRI से मरीजों को अनावश्यक ट्रांसफर का खतरा कम होगा, संक्रमण का जोखिम घटेगा और समय की बचत होगी. AIIMS के इस कदम से देशभर के अस्पतालों में ऐसी तकनीक अपनाने की राह खुल सकती है. यह खासकर संसाधन सीमित क्षेत्रों के लिए वरदान साबित होगा. About the Author प्रिया गौतमSenior Correspondent Priya Gautam is an accomplished journalist currently working with Hindi.News18.com with over 14 years of extensive field reporting experience. Previously worked with Hindustan times group (Hindustan Hindi) and …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Delhi,Delhi,Delhi






