भास्कर अपडेट्स:जम्मू के बंतलाब में निर्माणाधीन पुल का हिस्सा गिरने से 3 मजदूरों की मौत, दो अधिकारी निलंबित

जम्मू के बंतलाब इलाके में एक निर्माणाधीन पुल का हिस्सा गिरने से शनिवार देर शाम तीन मजदूरों की मौत हो डिप्टी सीएम सुरिंदर चौधरी ने बताया कि चार मजदूर मलबे में दब गए थे, जिनमें से तीन की मौत हो गई। जबकि एक को सुरक्षित बचा लिया गया। उन्होंने आगे बताया कि संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई है। चौधरी ने आगे कहा- दो अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है और एक को अटैच कर दिया गया है। जांच के आदेश दे दिए गए हैं और ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई की जा रही है। आज की अन्य बड़ी खबरें… विश्वजीत सहाय ने रक्षा मंत्रालय के नए रक्षा वित्त सचिव का पदभार संभाला वर्ष 1990 बैच के भारतीय रक्षा लेखा सेवा के वरिष्ठ अधिकारी विश्वजीत सहाय रक्षा मंत्रालय के नए रक्षा वित्त सचिव नियुक्त किए गए हैं। उन्होंने 1 मई को रक्षा मंत्रालय में रक्षा वित्त सचिव का पद संभाला। इससे पहले वह कंट्रोलर जनरल ऑफ डिफेंस अकाउंट्स के पद पर कार्यरत थे। विश्वजीत सहाय लॉ ग्रेजुएट भी हैं। रक्षा मंत्रालय के अनुसार सहाय के पास रक्षा वित्त और प्रशासन के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है। मंत्रालय ने बताया कि रक्षा सहाय कई बड़े पदों पर काम कर चुके हैं। साथ ही विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग में अतिरिक्त सचिव और वित्तीय सलाहकार भी रह चुके हैं। कर्नाटक में 44 मोरों की मौत, H5N1 बर्ड फ्लू से होने की पुष्टि कर्नाटक के तुमकुरु जिले में 44 मोरों की मौत H5N1 बर्ड फ्लू से होने की पुष्टि हुई है। प्रशासन ने एहितायतन 10 किलोमीटर का एरिया कंटेनमेंट जोन घोषित कर दिया है। स्वास्थ्य और वन विभाग मिलकर संक्रमण रोकने में जुटे हैं और निगरानी बढ़ा दी गई है। इन मोरों की मौत केसारामाडु, हीरेहली और गुलूर में 16 अप्रैल से 23 अप्रैल के बीच हुई थीं। मृत मोरों के सैंपल भोपाल स्थित आईसीएआर-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाई सिक्योरिटी एनिमल डिजीज भेजे गए थे। रिपोर्ट में H5N1 बर्ड फ्लू की पुष्टि हुई।
भास्कर अपडेट्स:मणिपुर के उखरुल और तेंगनौपाल जिलों में सुरक्षा बलों ने 23 अवैध बंकर नष्ट किए, 18 IED बरामद

मणिपुर के उखरुल और तेंगनौपाल जिलों में सुरक्षा बलों ने बड़े ऑपरेशन में 23 अवैध बंकर नष्ट किए और 18 IED बरामद किए हैं। पुलिस के मुताबिक ये कार्रवाई गुरुवार और बुधवार को अलग-अलग जगहों पर की गई। पुलिस बयान के अनुसार, उखरुल जिले के लितान थाना क्षेत्र के पहाड़ी गांवों—मोंगकोट चेपू, शोंगफेल, मुल्लम, सिराराखोंग और रिंगुए में गुरुवार को 23 बंकर तोड़े गए। इन जगहों पर लंबे समय से तनाव की स्थिति बनी हुई थी। इसी ऑपरेशन में सुरक्षा बलों को एक 12-बोर पंप एक्शन गन, अलग-अलग कैलिबर की 17 कारतूस और 111 खाली खोखे भी मिले। पुलिस ने बताया कि ये सभी सामान जब्त कर लिया गया है। आज की अन्य बड़ी खबरें… विश्वजीत सहाय ने रक्षा मंत्रालय के नए रक्षा वित्त सचिव का पदभार संभाला वर्ष 1990 बैच के भारतीय रक्षा लेखा सेवा के वरिष्ठ अधिकारी विश्वजीत सहाय रक्षा मंत्रालय के नए रक्षा वित्त सचिव नियुक्त किए गए हैं। उन्होंने 1 मई को रक्षा मंत्रालय में रक्षा वित्त सचिव का पद संभाला। इससे पहले वह कंट्रोलर जनरल ऑफ डिफेंस अकाउंट्स के पद पर कार्यरत थे। विश्वजीत सहाय लॉ ग्रेजुएट भी हैं। रक्षा मंत्रालय के अनुसार सहाय के पास रक्षा वित्त और प्रशासन के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है। मंत्रालय ने बताया कि रक्षा सहाय कई बड़े पदों पर काम कर चुके हैं। साथ ही विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग में अतिरिक्त सचिव और वित्तीय सलाहकार भी रह चुके हैं। कर्नाटक में 44 मोरों की मौत, H5N1 बर्ड फ्लू से होने की पुष्टि कर्नाटक के तुमकुरु जिले में 44 मोरों की मौत H5N1 बर्ड फ्लू से होने की पुष्टि हुई है। प्रशासन ने एहितायतन 10 किलोमीटर का एरिया कंटेनमेंट जोन घोषित कर दिया है। स्वास्थ्य और वन विभाग मिलकर संक्रमण रोकने में जुटे हैं और निगरानी बढ़ा दी गई है। इन मोरों की मौत केसारामाडु, हीरेहली और गुलूर में 16 अप्रैल से 23 अप्रैल के बीच हुई थीं। मृत मोरों के सैंपल भोपाल स्थित आईसीएआर-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाई सिक्योरिटी एनिमल डिजीज भेजे गए थे। रिपोर्ट में H5N1 बर्ड फ्लू की पुष्टि हुई।
ajay rai| sodium deficiency| summer risk| अजय राय सोडियम की कमी से बेहोश! गर्मी में आपको भी हो सकती है ये परेशानी, सिर्फ पानी काफी नहीं, तो क्या करें?

Ajay Rai Sodium deficiency: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ तीन बार बनारस से ताल ठोकने वाले कांग्रेस के फायर ब्रांड नेता अजय राय की तबीयत अचानक खराब हो गई. उन्हें पहले सीने में दर्द और बेचैनी हुई और फिर वे अचानक बेहोश हो गए. लखनऊ के मेदांता अस्पताल के आईसीयू में भर्ती राय की जांच में पता चला है कि उनके शरीर में सोडियम की कमी हो गई थी. शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स घटने की यह घटना भले ही राय के साथ पहली बार हुई हो लेकिन डॉक्टरों की मानें तो गर्मी में सोडियम की कमी ज्यादातर लोगों में हो जाती है और कई लोगों में राय की तरह सीवियर हो जाती है. जो लोग ज्यादा पानी पीते हैं उनको भी ये समस्या होती है तो फिर इस कमी को कैसे दूर किया जाए और कैसे बचा जाए? आइए विशेषज्ञों से ही जानते हैं…. हैदराबाद के गैस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट डॉ. बी रविंदर रेड्डी कहते हैं कि शरीर में सोडियम की कमी को हाइपोनेट्रेमिया कहते हैं. गर्मी में बहुत ज्यादा पसीना आने के कारण शरीर में सोडियम और अन्य इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी हो जाती है. जिसकी वजह से कमजोरी, थकान, चक्कर आना और कई बार व्यक्ति बेहोश तक हो जाता है. इस दौरान सबसे खास बात है कि सिर्फ पानी पीने से इस समस्या से छुटकारा नहीं मिल सकता, बल्कि इलेक्ट्रोलाइट युक्त पेय पदार्थ पीना जरूरी होता है. डॉ. रेड्डी कहते हैं कि भारत में तापमान 40 डिग्री से ऊपर जाने के बाद शरीर में जरूरी तत्वों की कमी होने लगती है लेकिन लोग इसे सिर्फ पानी की कमी समझकर पानी भारी मात्रा में पी लेते हैं, जबकि यह इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी है, जिसमें सोडियम भी आता है. सिर्फ पानी इलेक्ट्रोलाइट्स को और पतला कर सकता है और स्थिति और खराब हो सकती है. इसलिए जरूरी है कि शरीर में हाइड्रेशन के लिए जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स, नमक और सोडियम की मात्रा को बनाए रखा जाए. आइए एक्सपर्ट से सवालों के माध्यम से जानते हैं कि शरीर में सोडियम की कमी कैसे होती है और उसकी पूर्ति के लिए क्या करें? शरीर में सोडियम की कमी कैसे होती है?सोडियम की कमी तब होती है जब खून में सोडियम का स्तर 135 mmol/L से नीचे चला जाता है. यह मुख्य रूप से दो कारणों से होता है. या तो कोई व्यक्ति बहुत ज्यादा पानी पी ले (खासकर पसीना आने पर), जिससे सोडियम पतला हो जाता है. या फिर ज्यादा पसीना, उल्टी और दस्त या दवाओं (जैसे डाइयूरेटिक्स से शरीर में सोडियम की कमी हो जाना. क्या गर्मी में यह आम बीमारी है?हां. गर्मी में (खासकर भारत जैसे देशों में) यह काफी आम है. ज्यादा पसीना आने, केवल सादा पानी पीने और इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बिगड़ने से गर्मी में हाइपोनेट्रेमिया का रिस्क बढ़ जाता है. ऐसा खासकर बुजुर्गों, महिलाओं और भारी काम करने वालों में देखा जाता है. क्या सोडियम की कमी जानलेवा है?सोडियम की हल्की कमी आमतौर पर ठीक हो जाती है, लेकिन गंभीर या तेजी से होने वाली कमी खतरनाक हो सकती है. इससे दौरे (seizures), कोमा या मौत भी हो सकती है. सोडियम की कमी होने पर क्या होता है?अगर शरीर में सोडियम घट रहा है तो इससे सिरदर्द, उल्टी, थकान, भ्रम (confusion), मांसपेशियों में कमजोरी या ऐंठन, चक्कर, बेचैनी और गंभीर मामलों में दौरे या बेहोशी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं. सोडियम शरीर के लिए क्यों जरूरी है?सोडियम एक जरूरी इलेक्ट्रोलाइट है. यह शरीर में पानी का संतुलन बनाए रखता है. यह नर्व सिग्नल्स भेजने, मांसपेशियों के सिकुड़ने और ब्लड प्रेशर नियंत्रित करने में मदद करता है. WHO के अनुसार, सोडियम प्लाज्मा वॉल्यूम, एसिड-बेस बैलेंस और नॉर्मल सेल फंक्शन के लिए बेहद जरूरी है. शरीर में सोडियम इंटेक कैसे बढ़ाएं? . संतुलित भोजन लें- गर्मी में घर का सादा खाना खाएं. इसमें नमक वाली घर की सब्जी, दाल, रोटी, अचार, छाछ, नमकीन शामिल कर सकते हैं. . नमक वाले प्रोसेस्ड फूड कम करें लेकिन पूरी तरह न छोड़ें. . ज्यादा गर्मी और ज्यादा पसीना आ रहा है तो अपने पास हमेशा ORS (ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन) रखें और इसे पानी में डालकर पीएं इसमें सोडियम (75 mmol/L), पोटैशियम, ग्लूकोज और सिट्रेट होते हैं जो पानी और नमक दोनों को शरीर में बनाए रखते हैं. . अगर ओआरएस नहीं है तो घर पर भी 1 लीटर साफ पानी में 6 चम्मच चीनी और आधा चम्मच नमक मिलाकर इसे बनाकर पी सकते हैं. . गर्म केवल पानी न पिएं, इलेक्ट्रोलाइट ड्रिंक्स या नमक वाली लस्सी या छाछ लें. . अगर कोई परेशानी या लक्षण दिखे तो तत्काल डॉक्टर के पास जाएं और देर न करें.
IPL 2026 में हर 100 में से 20 कैच छूटे:पांच शतकवीरों ने जीवनदान के बाद जमाई सेंचुरी

क्रिकेट में एक पुरानी कहावत है- ‘कैच पकड़ो, मैच जीतो’। लेकिन आईपीएल 2026 में ‘कैच छोड़ो, मैच हारो’ का नया चलन हावी हो गया है। टीमों की कैच टपकाने की गलती उन्हें सीधे हार की ओर धकेल रही है क्योंकि जीवनदान मिलने के बाद बल्लेबाज विपक्षी टीमों को बुरी तरह धो रहे हैं। सीजन में अब तक लगे 9 शतकों में से 5 शतक ऐसे बल्लेबाजों ने जड़े हैं, जिन्हें फील्डिंग टीम ने कम से कम एक बार कैच छोड़कर ‘जीवनदान’ दिया था। शुरुआती 41 मैचों तक सीजन में टीमों की कैचिंग एफिशिएंसी 80.25 प्रतिशत है। इसका मतलब फील्डर्स ने कैचिंग के हर 100 में से लगभग 20 मौके गंवाए हैं। यह 2018 से अब तक एक आईपीएल सीजन में पांचवां सबसे खराब फील्डिंग प्रदर्शन है। इस मामले में टॉप पर पिछला सीजन है, जहां 41 मैचों के फेज तक टीमों की कैचिंग एफिशिएंसी सिर्फ 75.89% थी। जीवनदान के बाद बैटर के 40+ रन; 78 प्रतिशत मैच हारी टीमें कैच टपकाने का खामियाजा टीमों को हार के रूप में चुकाना पड़ रहा है। मौजूदा सीजन में 18 पारियां ऐसी रही हैं, जहां जीवनदान पाने वाले बल्लेबाज ने 40+ रन बनाए। इनमें से 14 मैचों में (लगभग 78%) फील्डिंग करने वाली टीम को शिकस्त झेलनी पड़ी। यह आंकड़ा पिछले नौ आईपीएल सीजनों में सबसे खराब है। कैच छूटने के बाद बैटर्स औसतन 17 रन जोड़ रहे हैं, जो 2018 के बाद से सबसे बेहतरीन प्रदर्शन है। दिल्ली को 5 में से 3 हार तब मिलीं, जब उन्होंने किसी का कैच छोड़ा और उसने मैच जिताऊ प्रदर्शन किया। इसमें सैमसन (115*), अभिषेक (135*) के शतक हैं। इन 3 मौकों पर कैच छोड़ना पड़ा टीमों पर भारी एक ही दिन में रिकॉर्ड 16 कैच छूटे, इससे रिकॉर्ड 986 रन बन गए 25 अप्रैल को सीजन के सातवें डबल हेडर के दो मैचों में रिकॉर्ड 16 कैच छोड़े गए थे। इसका आलम यह रहा कि दोनों मुकाबले मिलाकर कुल 986 रन बने, जो आईपीएल इतिहास में एक दिन में सर्वाधिक हैं। इस दौरान पंजाब ने दिल्ली के खिलाफ 265 रन का लीग इतिहास का सर्वोच्च और हैदराबाद ने राजस्थान के खिलाफ 229 रन का जयपुर वेन्यू का सर्वोच्च रन चेज किया।
IPL 2026 में हर 100 में से 20 कैच छूटे:पांच शतकवीरों ने जीवनदान के बाद जमाई सेंचुरी

क्रिकेट में एक पुरानी कहावत है- ‘कैच पकड़ो, मैच जीतो’। लेकिन आईपीएल 2026 में ‘कैच छोड़ो, मैच हारो’ का नया चलन हावी हो गया है। टीमों की कैच टपकाने की गलती उन्हें सीधे हार की ओर धकेल रही है क्योंकि जीवनदान मिलने के बाद बल्लेबाज विपक्षी टीमों को बुरी तरह धो रहे हैं। सीजन में अब तक लगे 9 शतकों में से 5 शतक ऐसे बल्लेबाजों ने जड़े हैं, जिन्हें फील्डिंग टीम ने कम से कम एक बार कैच छोड़कर ‘जीवनदान’ दिया था। शुरुआती 41 मैचों तक सीजन में टीमों की कैचिंग एफिशिएंसी 80.25 प्रतिशत है। इसका मतलब फील्डर्स ने कैचिंग के हर 100 में से लगभग 20 मौके गंवाए हैं। यह 2018 से अब तक एक आईपीएल सीजन में पांचवां सबसे खराब फील्डिंग प्रदर्शन है। इस मामले में टॉप पर पिछला सीजन है, जहां 41 मैचों के फेज तक टीमों की कैचिंग एफिशिएंसी सिर्फ 75.89% थी। जीवनदान के बाद बैटर के 40+ रन; 78 प्रतिशत मैच हारी टीमें कैच टपकाने का खामियाजा टीमों को हार के रूप में चुकाना पड़ रहा है। मौजूदा सीजन में 18 पारियां ऐसी रही हैं, जहां जीवनदान पाने वाले बल्लेबाज ने 40+ रन बनाए। इनमें से 14 मैचों में (लगभग 78%) फील्डिंग करने वाली टीम को शिकस्त झेलनी पड़ी। यह आंकड़ा पिछले नौ आईपीएल सीजनों में सबसे खराब है। कैच छूटने के बाद बैटर्स औसतन 17 रन जोड़ रहे हैं, जो 2018 के बाद से सबसे बेहतरीन प्रदर्शन है। दिल्ली को 5 में से 3 हार तब मिलीं, जब उन्होंने किसी का कैच छोड़ा और उसने मैच जिताऊ प्रदर्शन किया। इसमें सैमसन (115*), अभिषेक (135*) के शतक हैं। इन 3 मौकों पर कैच छोड़ना पड़ा टीमों पर भारी एक ही दिन में रिकॉर्ड 16 कैच छूटे, इससे रिकॉर्ड 986 रन बन गए 25 अप्रैल को सीजन के सातवें डबल हेडर के दो मैचों में रिकॉर्ड 16 कैच छोड़े गए थे। इसका आलम यह रहा कि दोनों मुकाबले मिलाकर कुल 986 रन बने, जो आईपीएल इतिहास में एक दिन में सर्वाधिक हैं। इस दौरान पंजाब ने दिल्ली के खिलाफ 265 रन का लीग इतिहास का सर्वोच्च और हैदराबाद ने राजस्थान के खिलाफ 229 रन का जयपुर वेन्यू का सर्वोच्च रन चेज किया।
जेन जेड राघव चड्ढा को ‘अनफॉलो’ क्यों कर रहा है—और यह आज राजनीतिक वफादारी के बारे में क्या कहता है? | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:02 मई, 2026, 08:00 IST राघव चड्ढा के साथ जो हो रहा है वह एक राजनेता के फॉलोअर्स की संख्या से भी बड़ा है। यह सार्वजनिक हस्तियों के साथ युवा दर्शकों के जुड़ाव में एक बड़े बदलाव की ओर इशारा करता है वही पीढ़ी जिसने कभी अलग महसूस करने के लिए राघव चड्ढा को ऊपर उठाया था, अब ठीक उसी कारण से पीछे हटती दिख रही है: वह अब उतना अलग महसूस नहीं करते। फ़ाइल छवि राजनीतिक असंतोष का संकेत देने के लिए अब विरोध प्रदर्शन की आवश्यकता नहीं है – कभी-कभी, यह केवल “अनफ़ॉलो” पर टैप करता है। और जेन जेड का एक वर्ग इस समय राघव चड्ढा के साथ यही करता नजर आ रहा है। कभी आधुनिक राजनीति के युवा, मुखर चेहरे के रूप में देखे जाने वाले चड्ढा अब एक शोर-शराबे वाले ऑनलाइन पल का हिस्सा हैं – कुछ उपयोगकर्ता कम कह रहे हैं और अधिक अनफॉलो कर रहे हैं। और शायद बड़ा सवाल न केवल यह है कि यह बदलाव क्यों हो रहा है, बल्कि यह भी है कि इससे यह पता चलता है कि जेन जेड कैसे राजनीति से जुड़ता है। ‘भरोसेमंद राजनेता’ का उदय एक ऐसी पीढ़ी के लिए जो संस्थानों को तिरछी नजरों से देखती हुई बड़ी हुई है, सापेक्षता अक्सर भाषणों से बेहतर होती है। ऐसा लग रहा था कि राघव चड्ढा को यह बात पहले ही समझ आ गई थी। एक एकाउंटेंट से राजनेता बने, वह मानक ढांचे में फिट नहीं बैठते थे। वह एक ऐसी राजनीतिक संस्कृति में शांत, निपुण और स्पष्टवादी व्यक्ति के रूप में सामने आए, जो अक्सर सार से अधिक मात्रा को महत्व देती है। वह लगातार हर धार्मिक मुद्दे पर नहीं कूद रहा था या पुनर्नवीनीकरण तर्कों के माध्यम से ध्यान आकर्षित नहीं कर रहा था। युवा दर्शकों के लिए जो पहले से ही शोर से थक चुके हैं, यह मायने रखता है। फिर वायरल ब्लिंकिट डिलीवरी एपिसोड जैसे क्षण आए। इसने इसलिए काम नहीं किया क्योंकि यह क्रांतिकारी था बल्कि इसलिए कि यह सामान्य लगा। इससे ऐसा प्रतीत हुआ जैसे कोई अन्य व्यक्ति उसी दुनिया में काम कर रहा हो। ऑनलाइन कई युवा लोगों के लिए, वह किसी दूर के नेता की तरह महसूस नहीं करते थे। उसे सुलभ महसूस हुआ। परिणीति चोपड़ा के साथ उनके जुड़ाव ने भी जिज्ञासा की एक परत जोड़ दी। यह कोई कारण नहीं है कि लोगों ने उसका अनुसरण किया, बल्कि इतना है कि कुछ लोगों ने उस पर ध्यान दिया। तो क्या बदला? राजनीति में, धारणा धीरे-धीरे दूर हो सकती है या अचानक टूट सकती है। यह बाद वाले के करीब महसूस होता है। वही पीढ़ी जिसने कभी अलग महसूस करने के लिए राघव चड्ढा को ऊपर उठाया था, अब ठीक उसी कारण से पीछे हटती दिख रही है: वह अब उतना अलग महसूस नहीं करते। हालिया अनफ़ॉलो लहर आक्रोश की तरह कम और एक बयान की तरह अधिक महसूस होती है। यह बेचैनी, निराशा या बस “अब मैं आपको अलग तरह से देखता हूं” क्षण को दर्शाता है। जेएनयू में राजनीति विज्ञान के एसोसिएट प्रोफेसर अजय गुडावर्ती के अनुसार, यह बदलाव युवा नागरिकों के ऑनलाइन राजनीति से जुड़ने के तरीके में व्यापक व्यवहार परिवर्तन को दर्शाता है। वे कहते हैं, “युवा सांसदों से अक्सर सार्वजनिक नैतिकता और स्वच्छ राजनीति की एक नई संस्कृति लाने की उम्मीद की जाती है, यही कारण है कि चड्ढा का बाहर जाना – रोजमर्रा के सार्वजनिक मुद्दों से चिंतित होने की छवि बनाने के बाद – युवा अनुयायियों के साथ अच्छा नहीं रहा होगा।” गुडावर्थी कहते हैं कि प्रतिक्रिया से यह भी पता चलता है कि जेन जेड कथित विश्वासघात या व्यक्तिगत विशेषाधिकार को संरक्षित करने के रूप में देखे जाने वाले राजनीतिक कदमों के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील दिखाई देता है, यह संकेत देता है कि इस तरह की कार्रवाइयों पर न तो किसी का ध्यान जाता है और न ही उन्हें दंडित किया जाता है। एक परामर्श पेशेवर और पॉप संस्कृति और इंटरनेट व्यवहार के गहन पर्यवेक्षक, स्मिट एम कहते हैं, “उनके क्रॉसओवर को जनरल जेड द्वारा ‘उसी पुरानी, गंदी राजनीति’ की वापसी के रूप में देखा गया था। और जिन लोगों ने ‘गैर-राजनीतिक राजनीति’ के अपने ब्रांड के साथ पहचान की, वे ठगा हुआ महसूस करते हैं और बड़े पैमाने पर अस्वीकृति में अनफॉलो बटन दबा दिया है।” जेन जेड पुराने तरीके से वफादारी नहीं करता यहीं वह जगह है जहां यह दिलचस्प हो जाता है। जेन ज़ेड राजनेताओं का उस तरह अनुसरण नहीं करता जिस तरह पुरानी पीढ़ियां अक्सर किया करती थीं। कोई स्वचालित दीर्घकालिक वफादारी नहीं है, नहीं “मैं आपका समर्थन करूंगा, चाहे कुछ भी हो” ऊर्जा। यह अधिक इस प्रकार है: मैं अभी आपसे संबंधित हूं, इसलिए मैं यहां हूं। मैं अब नहीं रहा, इसलिए मैं चला गया। जिस क्षण सापेक्षता बदलती है, उसके साथ जुड़ाव भी बदल जाता है। तो कहीं ऐसा तो नहीं कि जेन जेड अचानक से राघव चड्ढा के खिलाफ हो गई हो. यह बस हो सकता है कि उन्हें उसका एक निश्चित संस्करण पसंद आया हो और अब उन्हें यकीन नहीं है कि वह संस्करण अभी भी मौजूद है। वे इस पर बहस करने के बजाय पीछे हट रहे हैं. राजनीतिक छवि के पीछे ध्यान अर्थव्यवस्था यह बदलाव न केवल राजनीतिक है बल्कि यह संरचनात्मक भी है कि डिजिटल ध्यान कैसे काम करता है। पॉप कल्चर एंड क्रिटिकल राइटिंग के सहायक प्रोफेसर कृष्टिजीत दास का कहना है कि डिजिटल स्पेस में, समय के साथ सकारात्मक लोकप्रियता बनाए रखने की तुलना में वायरल होना अक्सर आसान होता है। उन्होंने कहा, “ऐसा प्रतीत होता है कि चड्ढा के प्रशंसक युवा लोगों से संबंधित मुद्दों पर बोलने वाले नेता की छवि से जुड़े हुए हैं।” हालाँकि भारतीय राजनीति में पार्टी-होपिंग कोई नई बात नहीं है, लेकिन वह कहते हैं कि “चड्ढा के सावधानीपूर्वक तैयार किए गए ऑनलाइन व्यक्तित्व ने इस कदम पर अधिक ध्यान आकर्षित किया है।” वह आगे मानते हैं कि यह निश्चित रूप से कहना मुश्किल है कि क्या इंस्टाग्राम फॉलोइंग में गिरावट राजनीतिक स्थिति को दर्शाती है, लेकिन यह स्पष्ट रूप से उजागर करता है कि सार्वजनिक व्यक्तित्वों को विश्वसनीय, प्रासंगिक और आकर्षक बनाए रखने के लिए डिजिटल
वेटरनरी ऑफिसर-असिस्टेंट एग्रीकल्चर इंजीनियर एग्जाम की मॉडल आंसर-की जारी:कैंडिडेट्स आज से दर्ज करा सकेंगे ऑब्जेक्शन; जानिए क्या रहेगी फीस और लास्ट डेट

राजस्थान लोक सेवा आयोग की ओर से पशु चिकित्सा अधिकारी ( पशुपालन विभाग) प्रतियोगी परीक्षा-2025 एवं सहायक कृषि अभियंता (कृषि विभाग) परीक्षा-2025 की मॉडल आंसर-की वेबसाइट पर जारी कर दी गई हैं। इस संबंध में विस्तृत सूचना आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध है। यदि किसी अभ्यर्थी को इन मॉडल उतरकुंजियाँ पर कोई आपत्ति हो तो निर्धारित शुल्क के साथ 2 से 4 मई 2026 को रात्रि 12:00 बजे तक आपत्ति ऑनलाइन दर्ज करवा सकता है। बता दें कि पशु चिकित्सा अधिकारी (1100 पद) व असिस्टेंट एग्रीकल्चर इंजीनियर (281 पद) के लिए एग्जाम 19 अप्रैल को जयपुर मुख्यालय पर हुआ था। मॉडल प्रश्न-पत्र आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध आयोग के मुख्य परीक्षा नियंत्रक आशुतोष गुप्ता ने बताया- आपत्तियां आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध मॉडल प्रश्न-पत्र के क्रम अनुसार ही प्रविष्ट करनी होगी इन परीक्षाओं के मॉडल प्रश्न पत्र आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध है। आपत्ति प्रामाणिक (स्टैंडर्ड, ऑथेंटिक) पुस्तकों के प्रमाण सहित ऑनलाइन ही प्रविष्ट करनी होगी। वांछित प्रमाण संलग्न नहीं होने की स्थिति में आपत्तियों पर विचार नहीं किया जाएगा। कोई अन्य व्यक्ति आपत्ति दर्ज नहीं करा सकता। यह रहेगा शुल्क और प्रोसेस आयोग की ओर से हर प्रश्न के लिए आपत्ति शुल्क 100 रुपए (सेवा शुल्क अतिरिक्त) निर्धारित किया गया है। अभ्यर्थी एसएसओ पोर्टल पर लॉगिन कर रिक्रूटमेंट पोर्टल का चयन कर उक्त परीक्षा के लिए उपलब्ध लिंक (क्वेश्चन ऑब्जेक्शन) पर क्लिक कर प्रश्नों पर आपत्तियां दर्ज करानी होगी। प्रति प्रश्न आपत्ति शुल्क 100 रुपए (सेवा शुल्क अतिरिक्त) के हिसाब से कुल आपत्ति शुल्क ई-मित्र कियोस्क अथवा अभ्यर्थी स्वयं भी रिक्रूटमेंट पोर्टल पर उपलब्ध पेमेंट गेटवे पर भुगतान कर आपत्तियां दर्ज कर सकता है। आयोग द्वारा शुल्क वापस लौटाने का प्रावधान नहीं है। शुल्क के अभाव में आपत्तियां स्वीकार नहीं की जाएगी। आपत्तियां केवल ऑनलाइन ही प्रस्तुत करें। अन्य किसी माध्यम से भेजी गई आपत्तियां स्वीकार नहीं की जाएगी। आपत्तियां केवल एक बार ही ली जाएगी। ऑनलाइन आपत्तियों का लिंक 2 से 4 मई 2026 को रात्रि 12 बजे तक ही उपलब्ध है, उसके बाद लिंक निष्क्रिय हो जाएगा। यहां करें कॉन्टैक्ट ऑनलाइन आपत्ति दर्ज करने में किसी प्रकार की तकनीकी कठिनाई होने पर अभ्यर्थी recruitmenthelpdesk@rajasthan.gov.in पर ईमेल से अथवा फोन नम्बर 9352323625 व 7340557555 पर संपर्क कर सकते हैं।
पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: पश्चिम बंगाल के 15 बूथों पर नामांकन, शाम 6 बजे तक वोटिंग, ईवीएम में गड़बड़ी के लगे थे आरोप

पश्चिम बंगाल में चुनाव के दौरान मिलिटियनों की याचिका पर चुनाव आयोग ने बड़ा फैसला लिया. डायमंड हार्बर और मगराहाट पश्चिम क्षेत्र क्षेत्र के कुल 15 मतदान आयोग के सदस्य बनाये जा रहे हैं। पहले जारी आदेश में साफ किया गया था कि मगराहाट वेस्ट के 11 और डायमंड हार्बर के 4 बूथों पर फिल्म नामांकित होगी। राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी ने बताया कि 29 अप्रैल 2026 को हुए मतदान के दौरान कुछ छात्र सामने आए थे, जिनमें बिहारियों की बात कही गई थी। रिटर्निंग ऑफिसर ऑब्जर्वर की रिपोर्ट के आधार पर चुनाव आयोग ने रिप्रेजेंटेशन ऑफ पीपल एक्ट 1951 के तहत इन बूथों पर मतदान रद्द कर दिया। अब 2 मई 2026 को सभी 15 बूथों पर फिर से मतदान किया जा रहा है। #घड़ी | पश्चिम बंगाल चुनाव पुनर्मतदान | दक्षिण 24 परगना जिले के डायमंड हार्बर विधानसभा क्षेत्र में बूथ संख्या 117, बागदा जूनियर हाई स्कूल में वोट डालने के बाद एक मतदाता अपनी स्याही लगी उंगली दिखाती हुई। pic.twitter.com/UCDYgN99lv – एएनआई (@ANI) 2 मई 2026 ये भी पढ़ें: ‘कम से कम 10 बार खुल गया’, काउंटींग से पहले बंगाल में स्ट्रांगरूम कंसोल पर सेमेस्टर ब्रेक; बीजेपी ने भी लगाया आरोप मगराहाट पश्चिम में वोटिंग शुरू इन सभी रिकॉर्ड्स पर वोटिंग सुबह 7 बजे से शुरू होती है, जो शाम 6 बजे तक होती है। चुनाव आयोग ने यह भी कहा है कि इस मतदान की जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाई जाए। इसके लिए इलाके में ढोल बजाकर बंद करने और सभी बैंडों के लिए लिखित सूचना निर्देश के निर्देश दिए गए हैं। मगराहाट वेस्ट के जिन बूथों पर फिर से वोट हो रहे हैं, उनमें उत्तर येरपुर फिश स्कूल, नाज़रा जीपी स्कूल के अलग-अलग कमरे, देउला जीपी स्कूल, नासाआ नोयपारा गर्ल्स हाई मदरसा, यूनिटीरा मलाया फिश स्कूल और बहिरपुया कुकुरिया फिश स्कूल के कई कमरे शामिल हैं। वहीं डायमंड हार्बर में बागदा जूनियर हाई स्कूल, चंद्रा जीपी स्कूल, हरिदेवपुर जीपी स्कूल और रॉयनगर एफपी स्कूल के एक-एक रूम में फिलापीक पार्टीरियल बोर्ड जा रहा है। शुभेंदु अधिकारी क्या बोले? री-पोलिंग के सवाल पर पश्चिम बंगाल के एलओपी सुवेंदु अधिकारी ने कहा, ‘मगरहाट वेस्ट में जो कुछ भी हुआ, उसका स्वागत है। डायमंड हार्बर और पूरे फाल्टा खंड में अधिक बूथों पर री-पोलिंग होनी चाहिए थी। यह एक सिस्टम और प्रोसीजर है जिसका पालन किया जा रहा है। हम इलेक्शन कमीशन का सम्मान करते हैं।’ 4 मई को घोषित होंगे बंगाल चुनाव के नतीजे राज्य में इस बार दो चरणों में 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को मतदान हुआ था। चुनाव आयोग के मुताबिक इस बार कुल 92.47 प्रतिशत वोट बढ़े हैं, जो अब तक सबसे ज्यादा पैसा जा रहा है। अब इन चुनावों के नतीजे 4 मई को घोषित किये जायेंगे. चुनाव के बाद किसी भी तरह की हिंसा पर रोक लगाने के लिए प्रशासन पूरी तरह से प्रतिबंधित है। कोलकाता पुलिस ने उन सात जगहों पर लोगों के जमावड़े पर रोक लगा दी है, जहां मातृभाषा है। यह कदम उस समय उठाया गया था जब आलोच्य कांग्रेस के नेताओं ने इंडोर स्टेडियम में समर्थकों का विरोध किया और आरोप लगाया कि उनके संगठन के बिना बैलेट बॉक्स खोले गए। राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल ने इन आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है और कहा है कि चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह से खारिज हो रही है। ये भी पढ़ें: गिनती से पहले ग्रेगे शुभेंदु- सीएम ममता आश्रम दो दिन और नाटक रहता है,लेकिन… (टैग्सटूट्रांसलेट)डब्ल्यूबी चुनाव 2026(टी)पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव 2026(टी)चुनाव आयोग(टी)पश्चिम बंगाल(टी)पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026(टी)पश्चिम बंगाल में पुनर्मतदान(टी)विधानसभा चुनाव परिणाम(टी)पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव परिणाम(टी)तृणमूल कांग्रेस(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव 2026(टी)पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव 2026(टी)चुनाव आयोग(टी)पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026(टी)पश्चिम बंगाल में पुनर्मतदान(टी)विधानसभा चुनाव(टी)पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव परिणाम(टी)तृणमूल कांग्रेस(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव 2026(टी)पुनर्मतादान(टी)डायमंड हार्बर घोषा(टी)मगराहाट पश्चिम चुनाव(टी)इलेक्शन कमीशन(टी)बंगाल कांग्रेस न्यूज(टी)मतदान गड़बड़ी(टी)वोटिंग रीपोल
लू और गर्मी का रामबाण इलाज है शिकंजी, यहां जानिए इसके जबरदस्त फायदे और बनाने का आसान तरीका

Last Updated:May 02, 2026, 07:20 IST चिलचिलाती गर्मी में लू और डिहाइड्रेशन से बचने के लिए शिकंजी सबसे आसान और सस्ता उपाय है. नींबू, पुदीना और जीरे से बना यह देसी ड्रिंक शरीर को ठंडा रखता है, पाचन सुधारता है और इम्युनिटी बढ़ाने में भी मदद करता है. शिकंजी मुख्य रूप से नींबू, काला नमक, भुना जीरा और पुदीने के सम्मिश्रण से तैयार की जाती है. गर्मी के मौसम में पसीने के माध्यम से शरीर से बहुत सारे इलेक्ट्रोलाइट्स और नमक निकल जाते हैं. शिकंजी इन पोषक तत्वों की कमी को तुरंत पूरा करती है. इसमें मौजूद नींबू विटामिन सी का एक पावरहाउस है, जो न केवल इम्युनिटी को मजबूत बनाता है, बल्कि शरीर से विषाक्त पदार्थों (Toxins) को बाहर निकालकर डिटॉक्सिफिकेशन में मदद करता है. गर्मी का मौसम आते ही चिलचिलाती धूप और लू का प्रकोप बढ़ जाता है, ऐसे में शरीर को तरोताजा रखने और हाइड्रेशन बनाए रखने के लिए हम अक्सर बाजार में मिलने वाले कोल्ड ड्रिंक्स या कार्बोनेटेड पेयों की ओर भागते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारे रसोई में मौजूद सामग्री से बनी ‘शिकंजी’ न केवल स्वाद में लाजवाब है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए किसी वरदान से कम नहीं है? यह पारंपरिक भारतीय पेय न केवल प्यास बुझाता है, बल्कि शरीर को तुरंत ऊर्जा और ठंडक प्रदान करने में भी सक्षम है. बाजार में मिलने वाले कृत्रिम रंगों और अत्यधिक चीनी वाले पेयों से बेहतर है कि आप इसे घर पर बनाएं. इसे तैयार करना बेहद सरल है. सबसे पहले एक गिलास ठंडा पानी या सोडा लें. इसमें आधा नींबू निचोड़ें. स्वादानुसार काला नमक और थोड़ा भुना हुआ जीरा पाउडर मिलाएं. ताजगी के लिए कुछ ताजी पुदीने की पत्तियां ऊपर से डालें. यदि आप चाहें, तो स्वाद को संतुलित करने के लिए थोड़ा सा शहद या मिश्री का उपयोग कर सकते हैं. Add News18 as Preferred Source on Google वहीं, इससे शरीर को अंदरूनी ठंडक मिलती है. पुदीने की तासीर ठंडी होती है, जो गर्मी के अहसास को कम कर ताजगी का संचार करती है. डायबिटीज के मरीजों के लिए भी अगर बिना चीनी की शिकंजी का सेवन किया जाए, तो यह काफी फायदेमंद साबित हो सकती है. गर्मियों के इस मौसम में खुद को बीमारियों से बचाने और एनर्जी लेवल को बनाए रखने के लिए शिकंजी को अपनी दिनचर्या का हिस्सा जरूर बनाएं. यह सस्ता, सुलभ और स्वास्थ्यवर्धक विकल्प आपके परिवार को लू के थपेड़ों से सुरक्षित रखने में मदद करेगा. आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में पाचन संबंधी समस्याएं आम हैं. शिकंजी का नियमित सेवन पाचन क्रिया को सुचारू बनाने में सहायक होता है. शिकंजी में मिलाया जाने वाला भुना जीरा न केवल स्वाद बढ़ाता है, बल्कि यह पेट की सूजन को कम करने, गैस से राहत दिलाने और पाचन एंजाइमों को सक्रिय करने में भी मदद करता है. डॉक्टर रिद्धि पांडे ने लोकल 18 से बताया कि गर्मी के मौसम में डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) सबसे बड़ी समस्या होती है. शिकंजी एक प्राकृतिक एनर्जी ड्रिंक है, जो आपको पूरे दिन सक्रिय और तरोताजा रखती है. विशेषज्ञ भी इस बात की पुष्टि करते हैं कि रोजाना एक-दो गिलास शिकंजी पीने से थकान कम होती है, त्वचा की रंगत निखरती है. यह लिवर की सफाई (Liver Detox) के लिए भी एक बेहतरीन पेय माना जाता है, जो लोग वजन घटाने की कोशिश कर रहे हैं, उनके लिए भी शिकंजी एक प्रभावी विकल्प है. नींबू में मौजूद पेक्टिन फाइबर भूख को नियंत्रित रखता है, जिससे आप फालतू कैलोरी लेने से बच जाते हैं. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।
ट्रम्प ने जंग रोकने का ईरानी ऑफर फिर ठुकराया:परमाणु मुद्दे का जिक्र न होने से नाखुश; जर्मनी से 5000 सैनिक हटाने का ऐलान

ट्रम्प ने जंग रोकने के लिए ईरान का ऑफर फिर से ठुकरा दिया है। उन्होंने शुक्रवार देर रात कहा- बातचीत के लिए ईरान का नया ऑफर भी मुझे मंजूर नहीं है। ईरान की लीडरशिप उलझ गई है और बुरी तरह से बिखर गई है। वे समझौता करना चाहते हैं लेकिन आपस में सहमत नहीं हो पा रहे। इससे पहले ईरान 26 और 27 अप्रैल को भी अपना प्रस्ताव भेज चुका है जिसे वे ठुकरा चुके हैं। व्हाइट हाउस के एक अधिकारी के मुताबिक ईरान ने अपने नए प्रस्ताव में परमाणु मुद्दे का जिक्र नहीं किया है, इससे ट्रम्प नाखुश हैं। वहीं ईरान का कहना है कि होर्मुज को तुरंत खोलना चाहिए, परमाणु मुद्दे पर बात में बातचीत होगी। जबकि ट्रम्प चाहते हैं कि दोनों चीजें एक साथ हों। ट्रम्प कह चुके हैं कि ईरान को बातचीत के लिए आने से पहले समृद्ध यूरेनियम को सौंपना होगा। इस बीच अमेरिका ने अपने नाटो सहयोगी जर्मनी से 5,000 सैनिक हटाने का फैसला किया है। इससे पहले जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने ट्रम्प सरकार की आलोचना की थी और कहा था कि अमेरिका को ईरान के सामने अपमानित होना पड़ रहा है। इससे ट्रम्प नाराज हो गए थे। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… 1. संसदीय मंजूरी की जरूरत नहीं: ट्रम्प ने ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई को लेकर कहा है कि उन्हें इसके लिए संसद से इजाजत लेने की जरूरत नहीं है। जो लोग इसकी मांग कर रहे हैं, वे देशभक्त नहीं हैं। 2. ईरान जंग खत्म होने का दावा: व्हाइट हाउस ने संसद को आधिकारिक तौर पर बताया कि ईरान युद्ध अब खत्म हो चुका है। उस इलाके में अभी भी अमेरिकी सेना मौजूद है, इससे फर्क नहीं पड़ता। 3. अमेरिका की चेतावनी: अमेरिका ने कहा कि जो कंपनियां ईरान को होर्मुज से गुजरने के लिए पैसा देती हैं, उन पर अमेरिका पाबंदी लगा सकता है, भले ही वो पैसा चैरिटी के नाम पर ही क्यों न दिया जाए। 4. जहाजों का ट्रैफिक 90% घटा: होर्मुज में जहाजों की आवाजाही लगभग बंद हो गई है। पहले जहां हर दिन करीब 130 जहाज गुजरते थे, अब सिर्फ 10 से भी कम जहाज जा रहे हैं। 5. ट्रम्प को हमले की ब्रीफिंग: अमेरिका की सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के कमांडर ने राष्ट्रपति ट्रम्प को ईरान के खिलाफ संभावित हमला करने के विकल्पों की जानकारी दी। ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…








