AIIMS की रिसर्च ने बढ़ाई माता-पिता की टेंशन! 2 साल से पहले बच्चे को मोबाइल दिया तो हो सकता है बड़ा खतरा

देश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल AIIMS New Delhi में बच्चों की सेहत को लेकर हुई एक रिसर्च ने माता-पिता की चिंता बढ़ा दी है. विशेषज्ञों के अनुसार, जन्म से लेकर 18 महीने तक के बच्चों को जरूरत से ज्यादा मोबाइल या स्क्रीन दिखाना उनके मानसिक और व्यवहारिक विकास पर असर डाल सकता है. डॉक्टरों का कहना है कि शुरुआती उम्र में अत्यधिक स्क्रीन एक्सपोजर बच्चों में भाषा विकास, सामाजिक व्यवहार और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है. इसी वजह से छोटे बच्चों के लिए मोबाइल फोन को मनोरंजन का साधन बनाने से बचने की सलाह दी जा रही है. विशेषज्ञों ने बताया कि जन्म के बाद पहले दो साल बच्चे के मस्तिष्क विकास के लिए बेहद अहम होते हैं. इस समय बच्चा अपने आसपास के माहौल, माता-पिता के चेहरे के भाव, आवाज, स्पर्श और बातचीत से सीखता है. अगर इस उम्र में बच्चे का अधिक समय मोबाइल स्क्रीन के सामने बीतता है, तो उसकी सीखने की प्राकृतिक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है. डॉक्टरों के मुताबिक, कुछ मामलों में ऐसे बच्चों में बोलने में देरी, आंखों से कम संपर्क करना, नाम पुकारने पर प्रतिक्रिया न देना, सामाजिक गतिविधियों में रुचि कम होना और दोहराव वाली हरकतें देखने को मिल सकती हैं. ये लक्षण ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर जैसे न्यूरोडेवलपमेंटल कंडीशन से जुड़े हो सकते हैं, हालांकि सिर्फ मोबाइल देखने से ऑटिज्म होना सीधे तौर पर तय नहीं माना जाता. जन्म लेने के बाद इतने महीने तक दूर रखें फोनबाल तंत्रिका विज्ञान विभाग की प्रोफेसर शेफाली गुलाटी ने माता-पिता को स्क्रीन टाइम को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी है. डॉक्टरों ने बताया कि, जन्म से 18 महीने तक बच्चों को मोबाइल, टैबलेट या टीवी स्क्रीन से यथासंभव दूर रखना चाहिए. 18 महीने से 6 साल तक के बच्चों के लिए भी स्क्रीन टाइम सीमित और निगरानी में होना चाहिए. अगर स्क्रीन दिखाई भी जाए तो शैक्षिक और इंटरैक्टिव कंटेंट हो, और माता-पिता की मौजूदगी में हो. बच्चे को अकेले मोबाइल देकर चुप कराने की आदत लंबे समय में नुकसानदायक हो सकती है. बच्चों का स्क्रीन टाइम कम होने से क्या होता है?डॉक्टरों का कहना है कि जिन बच्चों का स्क्रीन टाइम कम होता है, उनमें शारीरिक और मानसिक गतिविधियां ज्यादा होती हैं. ऐसे बच्चे खेलते हैं, दौड़ते हैं, चीजों को छूकर सीखते हैं, लोगों से बातचीत करते हैं और नई आवाजों व चेहरों को पहचानते हैं. यही गतिविधियां दिमागी विकास को मजबूत बनाती हैं. इसलिए बच्चों को मोबाइल देने के बजाय कहानी सुनाना, रंग-बिरंगे खिलौनों से खेलाना, आउटडोर एक्टिविटी कराना और परिवार के साथ समय बिताना ज्यादा फायदेमंद है. धीरे-धीरे स्क्रीन टाइम कम करेंअगर बच्चा पहले से मोबाइल का आदी हो चुका है, तो डॉक्टर सलाह देते हैं कि अचानक मोबाइल पूरी तरह बंद न करें. धीरे-धीरे स्क्रीन टाइम कम करें और उसकी जगह दूसरे रोचक विकल्प दें. जैसे ड्राइंग, ब्लॉक्स, किताबें, म्यूजिक, पार्क में खेलना या परिवार के साथ बातचीत. अचानक मोबाइल छीनने पर बच्चे में चिड़चिड़ापन, रोना या गुस्सा बढ़ सकता है. कब करना पड़ सकता है न्यूरोडेवलपमेंट से संपर्क?विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि अगर बच्चे में बोलने में देरी, सामाजिक व्यवहार में बदलाव, आंख मिलाने में कमी, या समझने की क्षमता कमजोर लगे तो तुरंत बाल रोग विशेषज्ञ या न्यूरोडेवलपमेंट विशेषज्ञ से संपर्क करें. शुरुआती पहचान होने पर थेरेपी, बिहेवियर सपोर्ट और मेडिकल देखभाल से काफी सुधार संभव है. माता-पिता की जागरूकता और सही समय पर कदम उठाना ही बच्चों के बेहतर भविष्य की सबसे बड़ी कुंजी है.
दतिया पहुंचीं एक्टर शिल्पा शेट्टी, पीतांबरा पीठ में किए दर्शन:मंदिर में हलचल बढ़ी, सुरक्षा कड़ी रही, दर्शन के बाद ग्वालियर रवाना हुईं

दतिया में बॉलीवुड अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी शुक्रवार शाम अचानक दतिया पहुंचीं। उनके साथ पति और उद्योगपति राज कुंद्रा भी मौजूद रहे। दोनों सड़क मार्ग से विश्व प्रसिद्ध शक्तिपीठ पीतांबरा पीठ पहुंचे, जहां उन्होंने मां बगलामुखी के दर्शन कर पूजा-अर्चना की। इसके बाद मंदिर परिसर स्थित वानखंडेश्वर महादेव मंदिर में जलाभिषेक भी किया। शिल्पा शेट्टी और राज कुंद्रा के अचानक मंदिर पहुंचने की खबर लगते ही परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं में उत्सुकता बढ़ गई। दर्शन के दौरान कुछ देर के लिए मंदिर परिसर में हलचल और सन्नाटा दोनों का माहौल देखने को मिला। श्रद्धालु उनकी एक झलक पाने के लिए रुक गए। हालांकि अभिनेत्री ने किसी से औपचारिक मुलाकात नहीं की और पूजा के बाद सीधे रवाना हो गईं। दरबार में विधि-विधान से पूजा की बताया गया है कि शिल्पा शेट्टी ने मां पीतांबरा और मां बगलामुखी के दरबार में विधि-विधान से पूजा की। मंदिर प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां पहले से सतर्क रहीं। उनकी मौजूदगी को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ाई गई थी। पूजा-अर्चना के बाद शिल्पा शेट्टी और राज कुंद्रा सड़क मार्ग से ग्वालियर के लिए रवाना हो गए। अभिनेत्री की अचानक धार्मिक यात्रा शहर में चर्चा का विषय बनी रही।
गर्मियों में रामबाण कन्नौज का गुलाब जल, त्वचा और आंखों के लिए फायदेमंद

Last Updated:May 01, 2026, 20:11 IST कन्नौज, जिसे इत्र नगरी के नाम से जाना जाता है, अपने शुद्ध और प्राकृतिक गुलाब जल के लिए देशभर में खास पहचान रखता है. यहां सदियों पुरानी “देग-भाप” विधि से तैयार किया जाने वाला गुलाब जल न सिर्फ अपनी भीनी-भीनी खुशबू के लिए मशहूर है, बल्कि त्वचा, आंखों और स्वास्थ्य के लिए इसके प्राकृतिक फायदे भी इसे खास बनाते हैं. बिना किसी केमिकल के तैयार यह गुलाब जल आज भी परंपरा, कारीगरी और शुद्धता का अनोखा संगम पेश करता है. कन्नौज, जिसे इत्र नगरी के नाम से जाना जाता है, अपने शुद्ध और सुगंधित गुलाब जल के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध है. यहां तैयार किया जाने वाला गुलाब जल सिर्फ एक उत्पाद नहीं, बल्कि सदियों पुरानी परंपरा और कारीगरी का प्रतीक है. इसकी मनमोहक खुशबू और प्राकृतिक गुण इसे बाजार में अलग पहचान दिलाते हैं. कन्नौज के गुलाब जल की सबसे बड़ी खासियत इसकी पारंपरिक “देग-भाप” विधि है. इस प्रक्रिया में ताजे देसी गुलाब की पंखुड़ियों को पानी के साथ उबालकर उनका प्राकृतिक अर्क निकाला जाता है. खास बात यह है कि इस पूरी प्रक्रिया में किसी भी प्रकार के केमिकल का उपयोग नहीं किया जाता, जिससे इसकी शुद्धता और गुणवत्ता बरकरार रहती है. गुलाब जल को त्वचा के लिए बेहद लाभकारी माना जाता है, यह त्वचा को ठंडक पहुंचाता है, उसे तरोताजा बनाता है और प्राकृतिक निखार लाने में मदद करता है. Add News18 as Preferred Source on Google गर्मियों में इसका उपयोग विशेष रूप से फायदेमंद होता है, क्योंकि यह त्वचा को हाइड्रेट रखने के साथ-साथ सन टैन और जलन को भी कम करता है. इत्र व्यापारी विवेक नारायण मिश्रा बताते हैं कि गुलाब जल आंखों के लिए भी बेहद उपयोगी है. आंखों में जलन, खुजली या थकान जैसी समस्याओं में यह राहत देता है. कॉटन में गुलाब जल लगाकर आंखों पर रखने से ठंडक मिलती है और आंखें तरोताजा महसूस करती हैं. कन्नौज का गुलाब जल केवल सौंदर्य उत्पाद तक सीमित नहीं है. इसका प्रयोग धार्मिक अनुष्ठानों, पूजा-पाठ और प्रसाद में भी किया जाता है. इसके अलावा, मिठाइयों, शरबत और कई व्यंजनों में इसका इस्तेमाल स्वाद और खुशबू बढ़ाने के लिए किया जाता है. इत्र व्यापारी विवेक नारायण मिश्रा बताते हैं कि गुलाब जल का उपयोग कई प्रकार के कॉस्मेटिक उत्पादों में भी किया जाता है, जैसे फेस वॉश, टोनर, क्रीम और फेस पैक. इसकी प्राकृतिक खुशबू और त्वचा के लिए लाभकारी गुण इसे ब्यूटी इंडस्ट्री का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाते हैं. कन्नौज में बनने वाला गुलाब जल पूरी तरह प्राकृतिक और केमिकल-फ्री होता है. यही कारण है कि यह न केवल भारत बल्कि विदेशों में भी अपनी गुणवत्ता के लिए जाना जाता है. कन्नौज का यह गुलाब जल आज भी परंपरा, शुद्धता और प्राकृतिक सुंदरता का प्रतीक बना हुआ है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।
चुनाव आयोग के बंगाल स्टाफ नियम के खिलाफ टीएमसी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया; सीजेआई ने कल तत्काल सुनवाई का आदेश दिया | भारत समाचार

आखरी अपडेट:01 मई, 2026, 19:59 IST यह कलकत्ता उच्च न्यायालय द्वारा मतगणना केंद्रों में पर्यवेक्षकों के रूप में केंद्र सरकार के कर्मचारियों की नियुक्ति को चुनौती देने वाली टीएमसी की याचिका को खारिज करने के बाद आया। भारत का सर्वोच्च न्यायालय. (फ़ाइल) तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने दो चरणों वाले पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के लिए केवल केंद्र सरकार के कर्मचारियों को गिनती पर्यवेक्षकों के रूप में नियुक्त करने के भारत के चुनाव आयोग (ईसीआई) के फैसले को चुनौती देते हुए शुक्रवार को तत्काल सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने शनिवार को मामले की तत्काल सुनवाई के निर्देश दिये. पश्चिम बंगाल चुनाव के नतीजों से दो दिन पहले शनिवार को टीएमसी तत्काल सुनवाई के लिए शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटा रही है। यह कलकत्ता उच्च न्यायालय द्वारा मतगणना केंद्रों में पर्यवेक्षकों के रूप में केंद्र सरकार के कर्मचारियों की नियुक्ति को चुनौती देने वाली टीएमसी की याचिका को खारिज करने के बाद आया। अपने फैसले में, न्यायमूर्ति कृष्ण राव ने कहा कि राज्य सरकार के कर्मचारियों के बजाय केंद्र सरकार या पीएसयू कर्मचारियों से गिनती पर्यवेक्षकों और सहायकों को नियुक्त करने के चुनाव आयोग के फैसले में कोई अवैधता नहीं थी। अदालत ने कहा, “मतगणना पर्यवेक्षक और मतगणना सहायक की नियुक्ति राज्य सरकार या केंद्र सरकार से करना चुनाव आयोग के कार्यालय का विशेषाधिकार है।” याचिका टीएमसी द्वारा दायर की गई थी, जिसमें पश्चिम बंगाल के अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी द्वारा जारी 30 अप्रैल के संचार को चुनौती दी गई थी, जिसमें कहा गया था कि प्रत्येक टेबल पर कम से कम एक मतगणना पर्यवेक्षक या सहायक केंद्र सरकार या पीएसयू कर्मचारी होना चाहिए। टीएमसी की ओर से पेश होते हुए, वकील कल्याण बनर्जी ने तर्क दिया कि संचार अधिकार क्षेत्र के बिना जारी किया गया था और केवल आशंका पर आधारित था। और पढ़ें: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव: 2 निर्वाचन क्षेत्रों में 15 बूथों पर कल पुनर्मतदान निर्धारित टीएमसी ने यह भी चिंता जताई थी कि केंद्र सरकार के कर्मचारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से प्रभावित हो सकते हैं, जो केंद्र में शासन करती है। हालाँकि, अदालत ने मतगणना प्रक्रिया के दौरान कई हितधारकों की उपस्थिति की ओर इशारा करते हुए इस आशंका को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा, “केवल मतगणना पर्यवेक्षक और मतगणना सहायक ही मतगणना कक्ष में नहीं होंगे। माइक्रो पर्यवेक्षक, चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों के मतगणना एजेंट और मतगणना कर्मी भी मतगणना कक्ष में होंगे। इस प्रकार, याचिकाकर्ता द्वारा लगाए गए आरोप पर विश्वास करना असंभव है।” चुनाव अधिकारियों की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि नियुक्तियां स्थापित प्रक्रिया के अनुसार की गईं। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि कोई भी राजनीतिक दल आयोग के निर्णय लेने पर सवाल नहीं उठा सकता है, उन्होंने कहा कि केंद्रीय कर्मचारियों को प्राथमिकता देने का उद्देश्य पूर्वाग्रह के आरोपों को रोकना था। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया चुनाव आयोग के बंगाल स्टाफ नियम के खिलाफ टीएमसी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया; सीजेआई ने कल तत्काल सुनवाई का आदेश दिया अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)टीएमसी सुप्रीम कोर्ट याचिका(टी)तृणमूल कांग्रेस(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव(टी)भारत का चुनाव आयोग(टी)केंद्र सरकार के कर्मचारी(टी)केवल केंद्रीय कर्मचारी(टी)कलकत्ता उच्च न्यायालय का फैसला(टी)पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव
‘बीजेपी के सांसद बांग्लादेशी- रोहिंग्या कहते हैं, उनकी पत्नी ढाका की बिक्री…’,महुआ मोइत्रा ने की गिनती से पहले बोली

पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: बीजेपी को अकाउंटिंग से पहले सुपरस्टार रेसलर पर ले रही है. अब इसी तरह एक नाम और जुड़ गया है। शोर मचाने वाली भीड़ रहती है। उन्होंने बंगाल के लोगों को बांग्लादेशी और रोहिंग्या के दर्शन के लिए हाथ मिलाया है। बता दें, डिजिटल पोल जारी होने के बाद राजनीतिक पारा राज्य का मामला सामने आया है। यूक्रेनी मोइत्रा ने कहा कि बीजेपी के पेशेवर समुद्र तट पर जाने वाले मुस्लिम, बांग्लादेशी और रोहिंग्या कहते हैं। जबकि उनकी पत्नी बंगाल चुनाव प्रचार में उनके साथ हैं. लोगों को फोन करके पूछा गया कि उन्हें असली ढाकाई जामदानी कहां मिल सकता है। ये बीजेपी का असली चेहरा है. मॉडर्न मिनियन ने यह बयान एक्स पर पोस्ट करते हुए दिया है। आईपीएस अजय पाल को स्ट्रेंथ पर लगाया गया था हमेशा चर्चाओं में रहने वाली समाजवादी पार्टी के अंतिम चरण की वोटिंग से पहले एक बयान में कहा गया था कि हंगामा मच गया था। तब उन्होंने एक वीडियो जारी किया जिसमें यूपी के अनुयायी और दक्षिण 24 परगना जिले के वैज्ञानिक अजय पाल शर्मा का सारांश शामिल था। इस वीडियो में कथित तौर पर अजय पाल डांसर्स के बीच नाचते नजर आ रहे थे। तब मोइत्रा ने सोशल मीडिया पर दो वीडियो शेयर किए थे. उस दौरान एक स्पेशल फीमेल के अपोजिट स्टार ताली बजा रही थी, जबकि फीमेल डांस कर रही थी। वहीं दूसरे वीडियो में एक आदमी महिला के पास एक गाने पर थिरकता दिख रही थी। इस पर मोइत्रा ने कहा था कि फेयर एंड लवली बबुआ अजय पाल। आपको फेंटा कॉप स्टाइल में मस्ती करते हुए देखकर अच्छा लगा। ठंडा-ठंडा कूल कूल रहो. बंगाल हमेशा से बेरोजगार है. इसके अलावा उन्होंने एक पोस्ट के जरिए निंदा करते हुए कहा था कि मेरे फेयर एंड लवली बबुआ अजय पाल शर्मा अपराधी हैं, हम तो वो लोग हैं, जो कैद से आपके छोटे फैंटा और बड़े फैंटा का भी इलाज कर लेते हैं। हीरोगिरी लिटिल संभल के। ये भी पढ़ें: ‘सर्विलेंस पर इला ममता’, स्ट्रॉन्ग रूम में डोर क्या कर रही थी बंगाल के सीएम, शुभेंदु अधिकारी ने जारी की तस्वीरें (टैग्सटूट्रांसलेट)ब्रेकिंग न्यूज(टी)एबीपी न्यूज(टी)महुआ मोइत्रा(टी)टीएमसी बनाम बीजेपी(टी)चुनाव(टी)महुआ ने बीजेपी एमपी(टी)पर कटाक्ष कियाताजा समाचार(टी)ढाका साड़ी(टी)टीएमसी(टी)बीजेपी(टी)हिंदी चुनाव समाचार(टी)ब्रेकिंग न्यूज(टी)एबीपी न्यूज(टी)महुआ मोइत्रा(टी)एमसीटी बीजेपी(टी)चुनाव(टी)महुआ ने बीजेपी सांसद पर कटाक्ष(टी)ताजा खबर(टी)ढाका रोजगार(टी)टीएमसी(टी)बीजेपी(टी)हिंदी चुनाव समाचार
नाती ने रची थी दादी की हत्या की साजिश:शिवपुरी में सुपारी लेकर आए दोस्त ने पैर छूकर मार दी थी गोली

शिवपुरी जिले के तेंदुआ थाना क्षेत्र के डेहरवारा गांव में 22 अप्रैल को हुई बुजुर्ग महिला रामसखी धाकड़ की हत्या का पुलिस ने शुक्रवार को खुलासा कर दिया। पुलिस के अनुसार, इस वारदात का मास्टरमाइंड महिला का नाती निकला, जिसने अपने दोस्त के साथ मिलकर हत्या की साजिश रची थी। घटना 22 अप्रैल की दोपहर की है, जब तीन युवक बाइक पर सवार होकर डेहरवारा गांव पहुंचे। उन्होंने शादी का कार्ड देने के बहाने रामसखी धाकड़ के घर का दरवाजा खुलवाया। जैसे ही महिला बाहर आईं, एक युवक ने पहले उनके पैर छुए और फिर तुरंत उनके सिर में गोली मार दी। यह वारदात नातिन के सामने हुई थी। बंटवारे से नाखुश था परिवार जांच में सामने आया कि रामसखी धाकड़ की शादी लक्ष्मी नारायण लोधी से हुई थी। परिवार के पास करीब 35 बीघा जमीन थी, जिसका बंटवारा पहले ही हो चुका था। रामसखी अपनी हिस्से की जमीन अपने बेटे मुनेश धाकड़ के नाम करना चाहती थीं, जिससे परिवार में विवाद बढ़ गया था। शुरुआत में शक सौतेले बेटों पर गया था, जिन पर नामांतरण का विरोध करने का आरोप था। एसडीओपी संजय मिश्रा ने बताया कि पुलिस जांच के बाद इस हत्या का मास्टरमाइंड रामसखी की सौतेली बेटी गुड्डी धाकड़ का बेटा पुष्पराज धाकड़ निकला। पुलिस के मुताबिक, पुष्पराज अपनी मां के साथ रामसखी द्वारा कथित दुर्व्यवहार से नाराज था और इसी का बदला लेने के लिए उसने हत्या की योजना बनाई। पैसों का लालच देकर कराई थी हत्या पुष्पराज की दोस्ती शिवपुरी में रहने वाले निकेंद्र रावत से थी, जो कर्ज में डूबा हुआ था। पुष्पराज ने निकेंद्र को पैसों का लालच देकर हत्या के लिए राजी किया। हत्या के दिन दोनों शादी का कार्ड लेकर घर पहुंचे और वारदात को अंजाम दिया। पुलिस ने बताया कि हत्या में इस्तेमाल की गई पिस्टल निकेंद्र की थी और गोली भी उसी ने चलाई थी। वारदात से पहले करीब 36 हजार रुपए खर्च किए गए थे और आगे और पैसे देने की बात तय हुई थी। दोनों आरोपी गिरफ्तार, पिस्टल बरामद पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और हत्या में इस्तेमाल पिस्टल भी बरामद कर ली है। तेंदुआ थाना पुलिस मामले की गहन जांच कर रही है और अन्य पहलुओं को भी खंगाला जा रहा है।
आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू के 2 गुर्गों को सजा:मोहाली की NIA कोर्ट का फैसला; मोगा DC ऑफिस पर फहराया था खालिस्तानी झंडा

पंजाब की मोहाली स्थित राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की विशेष अदालत ने पांच साल पहले मोगा के डीसी आफिस में खालिस्तानी झंडा फहराने के मामले में दो आरोपियों को दोषी करार दिया करते हुए 5 साल 6 महीने की सजा सुनाई है। साथ ही 16-16 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है। दोषियों में मोगा निवासी इंद्रजीत सिंह और जसपाल सिंह के रूप में उन्हें आईपीसी, यूए(पी) एक्ट और राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी पाया गया। झंडा काटकर नीचे गिराया जांच के मुताबिक, दोनों आरोपियों ने स्वतंत्रता दिवस से एक दिन पहले मोगा के डिप्टी कमिश्नर (DC) कार्यालय की इमारत पर खालिस्तानी झंडा फहराया था। आरोपियों ने भारतीय तिरंगे की रस्सी काटकर उसे नीचे गिरा दिया और बाद में उसे घसीटा भी था। पन्नू के कहने पर रची साजिश NIA के अनुसार, यह पूरी साजिश सिख फॉर जस्टिस (SFJ) के जनरल काउंसिल और घोषित आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू के कहने पर रची गई थी। जांच में सामने आया कि SFJ से नकद इनाम के बदले यह काम कराया गया था। मामले में हरप्रीत सिंह नाम के SFJ सदस्य की भूमिका भी सामने आई है। जांच एजेंसी के मुताबिक, उसने इंद्रजीत और जसपाल को इस काम के लिए पैसे दिए थे। 2500 डॉलर नाम देने की घोषणा हुई NIA ने बताया कि गुरपतवंत सिंह पन्नू ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर पंजाब और हरियाणा के युवाओं को खालिस्तानी झंडे फहराने के लिए उकसाया था। उसने सरकारी दफ्तरों पर ऐसा झंडा लगाने वालों के लिए 2500 अमेरिकी डॉलर के इनाम की घोषणा भी की थी।
आदित्य धर को कोर्ट से राहत:धुरंधर की स्क्रिप्ट चोरी मामले में सेंसर सर्टिफिकेट रद्द करने वाली याचिका खारिज; आदित्य के खिलाफ बयान नहीं देंगे सकेंगे

फिल्म ‘धुरंधर’ की कहानी चुराने (प्लेगरिज्म) के विवाद में डायरेक्टर आदित्य धर को गुरुवार को दो अलग-अलग अदालतों से बड़ी राहत मिली है। कर्नाटक हाईकोर्ट ने फिल्म का सेंसर सर्टिफिकेट रद्द करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया। वहीं, बॉम्बे हाईकोर्ट में शिकायतकर्ता संतोष ने भरोसा दिलाया कि वह अब डायरेक्टर के खिलाफ कोई भी मानहानि वाला बयान नहीं देंगे। कर्नाटक HC ने शिकायत में नहीं पाया दम जस्टिस के एस हेमालेखा की सिंगल बेंच ने बेंगलुरु के स्क्रीनराइटर संतोष कुमार की याचिका को सिरे से खारिज कर दिया। संतोष ने मांग की थी कि फिल्म ‘धुरंधर’ का सीबीएफसी (CBFC) सर्टिफिकेट रद्द किया जाए क्योंकि यह उनकी ओरिजिनल स्क्रिप्ट ‘डी-साहब’ की नकल है। कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि इस शिकायत में कोई मेरिट नहीं है। हालांकि, संतोष द्वारा हर्जाने को लेकर किया गया मुख्य केस अभी कोर्ट में पेंडिंग है। बॉम्बे हाईकोर्ट में दी गारंटी आदित्य धर ने संतोष कुमार के खिलाफ मानहानि का केस फाइल किया था। गुरुवार को बॉम्बे हाईकोर्ट में जस्टिस आरिफ डॉक्टर के सामने संतोष के वकील ने कहा कि संतोष अब डायरेक्टर के खिलाफ सार्वजनिक रूप से कोई आपत्तिजनक टिप्पणी नहीं करेगा। आदित्य के वकीलों ने उन्हें ‘चोर’ कहने पर माफी की मांग की थी, लेकिन संतोष की लीगल टीम ने इससे इनकार कर दिया। उनका कहना है कि वे कानूनी लड़ाई लड़ना जारी रखेंगे। क्या है पूरा विवाद? विवाद की शुरुआत ‘धुरंधर’ और इसके सीक्वल की रिलीज के बाद हुई। संतोष कुमार का दावा है कि फिल्म की कहानी उनकी रजिस्टर्ड स्क्रिप्ट ‘डी-साहब’ से भारी मात्रा में कॉपी की गई है। उन्होंने कहा कि उनकी स्क्रिप्ट स्क्रीनराइटर्स एसोसिएशन (SWA) में रजिस्टर्ड है। जब संतोष ने सार्वजनिक तौर पर आदित्य धर पर आरोप लगाए, तो डायरेक्टर ने पहले उन्हें कानूनी नोटिस भेजा और फिर बॉम्बे हाईकोर्ट में अपील की ।
सतना में खराब ईवी स्कूटर को ‘कचरा गाड़ी’ बनाकर घुमाया:बार-बार खराबी से परेशान मालिक का अनोखा विरोध, बाजार में लोगों से कचरा डलवाया

सतना जिले के बिरसिंहपुर में एक व्यक्ति ने शुक्रवार को अपनी खराब इलेक्ट्रिक स्कूटर को ‘कचरा गाड़ी’ बनाकर बाजार में घुमाया। यह अनोखा विरोध बजाज चेतक ईवी स्कूटर की बार-बार आ रही तकनीकी खराबी से परेशान होकर किया गया। राहुल पांडे ने 14 महीने पहले अपने पिता के लिए लगभग 1 लाख 10 हजार रुपए में यह स्कूटर खरीदी थी। उनके अनुसार, खरीदने के बाद से ही इसमें लगातार तकनीकी खराबी आ रही थी। स्कूटर चलते-चलते अचानक बंद हो जाती थी, जिसे वे ‘वायरस आने’ जैसी समस्या बताते हैं। कई बार उन्हें वाहन को टैंपो में लादकर सतना स्थित एजेंसी तक ले जाना पड़ा। हाल ही में सर्विसिंग के बाद भी स्कूटर घर लौटते समय फिर से बंद हो गई, जिससे वे काफी परेशान हो गए। ‘कचरा गाड़ी’ का पोस्टर लगा बाजार में घुमाया लगातार हो रही इन समस्याओं से तंग आकर राहुल पांडे और उनके छोटे भाई रोहित पांडे ने विरोध का एक अनोखा तरीका अपनाया। उन्होंने स्कूटर को एक मालवाहक वाहन पर रखा, उस पर ‘कचरा गाड़ी’ का पोस्टर लगाया और उसे पूरे बिरसिंहपुर बाजार में घुमाया। इस दौरान उन्होंने लोगों से अपील की कि वे इस ‘कचरा गाड़ी’ में कचरा डालें और ऐसी स्कूटर खरीदने से बचें। कई स्थानीय लोगों ने स्कूटर में कचरा डालकर उनके विरोध का समर्थन किया। सर्विस व्यवस्था पर सवाल खड़े किए इस प्रदर्शन ने बाजार में लोगों का ध्यान खींचा और इलेक्ट्रिक वाहनों की गुणवत्ता तथा उनकी सर्विस व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए। स्थानीय लोगों ने कहा कि यदि उपभोक्ताओं को ऐसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है, तो संबंधित कंपनियों और एजेंसियों को इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए। इस घटना के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं, जिससे बजाज कंपनी की छवि पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
सुप्रीम-कोर्ट ने पवन खेड़ा को अग्रिम जमानत दी:कहा- बिना बताए भारत न छोड़ें; कांग्रेस बोली- खेड़ा को डराने के लिए 60 पुलिसकर्मी भेजे गए

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को अग्रिम जमानत दे दी। मामला असम सीएम हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी के पास 3 विदेशी पासपोर्ट और अमेरिका में 50 हजार करोड़ की कंपनी होने के आरोप से जुड़ा है। पवन खेड़ा ने 5 अप्रैल को दिल्ली और गुवाहाटी में प्रेस कॉन्फ्रेंस करके ये आरोप लगाए थे। इसके बाद रिनिकी भुइयां सरमा ने पवन के खिलाफ गुवाहाटी में FIR दर्ज कराई थी इसके बाद 7 अप्रैल को असम पुलिस ने खेड़ा के दिल्ली स्थित घर पर रेड की थी। सुप्रीम कोर्ट ने अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा- आरोप-प्रत्यारोप राजनीति से प्रभावित लगते हैं। लेकिन पवन खेड़ा को असम पुलिस की जांच में सहयोग करना होगा और वे बिना अदालत की अनुमति के भारत नहीं छोड़ सकते। कोर्ट के फैसले के बाद जयराम रमेश और अभिषेक मनु सिंघवी ने इस पर कहा- 60 पुलिसवालों को खेड़ा के घर पर भेज दिया। भारी संख्या में पुलिस भेजने का कारण सिर्फ डराना और उत्पीड़न करना था। कांग्रेस बोली- ऐसी कई बातें हैं जो हम बोल नहीं सकते कोर्ट की सुनवाई खत्म होने के बाद कांग्रेस नेता जयराम रमेश और अभिषेक मनु सिंघवी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने असम के मुख्यमंत्री को तीन पन्नों में कोट किया है। ऐसी कई बातें हैं जो न न्यायालय कोट कर सकता है और न हम यहां बोल सकते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे में असम के मुख्यमंत्री को सोचना चाहिए कि क्या एक संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को ये शोभा देता है? हम चाहते हैं कि असम के मुख्यमंत्री इस बारे में गंभीरतापूर्वक विचार कर खेद व्यक्त करें। हिमंता ने कहा- मुझे लोकतंत्र न सिखाएं कांग्रेस की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद असम सीएम ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर लिखा कि- मुझे किसी से भी लोकतंत्र पर सबक सीखने की जरूरत नहीं है। इस केस में असली मुद्दा यह है कि एक महिला की छवि को राष्ट्रीय स्तर पर उछाला गया, जिसका राजनीति से कुछ लेना-देना नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि मुझे पूरा विश्वास है कि अदालतें जल्द ही या बाद में इस पर संज्ञान लेंगी और चुनावी परिणामों को प्रभावित करने के लिए झूठे दस्तावेजों का इस्तेमाल करने वालों को सजा मिलेगी। समझिए क्या है पूरा मामला… 5 अप्रैल- खेड़ा ने 5 अप्रैल को आरोप लगाया था कि असम CM सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां शर्मा के पास कई देशों के पासपोर्ट हैं और विदेश में अघोषित संपत्ति है। जिनका जिक्र चुनावी हलफनामे में नहीं किया गया। इसके बाद रिनिकी भुइयां शर्मा ने गुवाहाटी क्राइम ब्रांच में खेड़ा के खिलाफ केस दर्ज कराया था। 6 अप्रैल- हिमंता ने दुबई में फ्लैट होने के आरोपों का जवाब देते हुए एक वीडियो पोस्ट किया और लिखा था कि हमने दुबई के उन 2 अपार्टमेंट के असली मालिकों का पता लगा लिया है, जिनका जिक्र कांग्रेस ने किया है। ये फ्लैट मोहम्मद अहमद और फातिमा सुलेमान के हैं। 10 अप्रैल: तेलंगाना हाईकोर्ट ने खेड़ा को एक हफ्ते की ट्रांजिट अग्रिम जमानत दी थी, ताकि वे असम की अदालत में जा सकें। असम सरकार ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, जिसके बाद 15 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी। 17 अप्रैल: सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की ट्रांजिट अग्रिम जमानत बढ़ाने की मांग खारिज कर दी थी। कोर्ट ने कहा कि वे अपनी याचिका असम की अदालत में दाखिल करें। 24 अप्रैलः गुवाहाटी हाईकोर्ट ने शुक्रवार को असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी से जुड़े मामले में कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। इसके बाद खेड़ा फिर सुप्रीम कोर्ट गए।







