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dog bite first aid| kutte ke katne par kya kare| कुत्ते के काटने पर तुरंत क्या करें? प्राथमिक उपचार गाइडलाइंस क्या कहती हैं?

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Dog Bite First aid: हाल ही में सतना से एक दिल दहलाने वाली खबर सामने आई थी, जब एक ही कुत्ते ने गहरा नाला से लेकर अस्पताल चौक के बीच 40 लोगों को काट लिया. डॉग बाइट की इस घटना से पूरे शहर में हड़कंप मच गया था. जब भी कुत्ते के काटने की घटना होती है तो पीड़ित बौखला जाता है और उसे समझ में नहीं आता कि क्या करे? कई बार इसी कन्फ्यूजन में देर हो जाती है और जो इलाज समय रहते बेहतर हो सकता है, वह नहीं हो पाता है. ऐसे में आइए आपको बताते हैं कि कुत्ता काट ले तो सबसे पहले और तुरंत क्या करें? डब्ल्यूएचओ की रेबीज के लिए प्री और पोस्ट एक्सपोजर प्रॉफिलेक्सिस इन ह्यूमन कहती हैं कि अगर कुत्ता काट ले तो पैनिक होने के बजाय वहीं रहकर फर्स्ट एड की इस प्रक्रिया को करें, ताकि कुत्ते के काटने से होने वाले संक्रमण के खतरे को कम किया जा सके. घाव को साबुन-पानी से अच्छे से धाएं सबसे पहले घाव को पानी और साबुन से अच्छी तरह धोएं. इसके लिए बहते नल के नीचे पैर या हाथ जहां भी कुत्ते ने काटा है, उस अंग को ले जाएं और उस पर साबुन मलें और अच्छे से धोएं. ऐसा कम से कम 15 से 20 मिनट तक लगातार करें, ताकि 90 फीसदी तक रेबीज का इन्फेक्शन दूर हो जाए. अक्सर लोग खून निकलने के बाद उसे पानी और साबुन से धोने से घबराते हैं और उन्हें ये भ्रांति होती है कि कहीं साबुन और पानी लगने से इन्फेक्शन न हो जाए, लेकिन ऐसा नहीं होता, उल्टा यह मेडिकल साइंस में इलाज है और इसका बहुत बड़ा फायदा होता है. घाव को जोर से रगड़ें नहीं, सिर्फ धोएंवहीं नेशनल रेबीज कंट्रोल प्रोग्राम की गाइडलाइंस कहती हैं कि अगर खून ज्यादा बह रहा हो तो साफ कपड़े या पट्टी से हल्का दबाव डालकर रोकें, लेकिन उसको कपड़े बांधें नहीं. आप चाहें तो उस घाव पर एंटीसेप्टिक लगा सकते हैं. धोने के बाद अगर उपलब्ध हो तो पोविडोन आयोडीन (Betadine) या 70% अल्कोहल से घाव को डिसइन्फेक्ट कर सकते हैं. उस घाव पर मिट्टी, हल्दी, नीम, चूना, तेल या कोई भी घरेलू लेप बिल्कुल न लगाएं, ये संक्रमण बढ़ा सकते हैं. घाव को खुला रखें खून बहने की स्थिति में अक्सर लोग घाव को ढक देते हैं लेकिन ऐसा न करें. घाव पर पट्टी न बांधें और उसे खुलकर हवा लगने दें. सिर्फ खून ज्यादा बह रहा हो तभी ढकें. इसके तुरंत बाद डॉक्टर के पास पहुंचें और एंटी रेबीज की वैक्सीन लगवाएं. कोशिश करें कि प्राथमिक उपचार के बाद जितनी जल्दी हो सके नजदीकी अस्पताल या रेबीज क्लिनिक जाएं. डॉक्टर घाव की गहराई, कुत्ते के प्रकार (पालतू या आवारा) और रेबीज वैक्सीनेशन स्टेटस देखकर फैसला करेंगे. ये चीजें न करें . घाव पर चीरा न लगाएं. . टॉर्निकेट न बांधें. . इलाज में देरी न करें क्योंकि एक बार रेबीज का संक्रमण होने के बाद फिर इलाज कराना मुश्किल हो सकता है. ऐसे में कोशिश करें कि रेबीज का टीका लगावाएं और उस टीके की खुराकों को पूरा करें.

राजगढ़ में पिकअप ने ऑटो को मारी टक्कर, 9 घायल:जीरापुर के पास नेशनल हाईवे पर हादसा, टक्कर मारने के बाद पिकअप खेत में पलटी

राजगढ़ में पिकअप ने ऑटो को मारी टक्कर, 9 घायल:जीरापुर के पास नेशनल हाईवे पर हादसा, टक्कर मारने के बाद पिकअप खेत में पलटी

राजगढ़ के जीरापुर के समीप मान्याखेड़ी गांव के पास नेशनल हाईवे पर सोमवार सुबह दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। सवारी से भरे ऑटो रिक्शा को पीछे से आ रही तेज रफ्तार पिकअप वाहन ने जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर के बाद ऑटो में सवार 9 लोग घायल हो गए, जबकि पिकअप वाहन अनियंत्रित होकर सड़क किनारे खेत में पलट गया। जानकारी के अनुसार सभी यात्री सूरजपुरा में आयोजित लोधा समाज के सामूहिक विवाह सम्मेलन से लौट रहे थे। हादसा सुबह करीब 7 बजे उस समय हुआ जब पिकअप ने ऑटो को पीछे से टक्कर मार दी। हादसे के बाद घटनास्थल पर अफरा-तफरी मच गई और आसपास के लोग मौके पर पहुंच गए। ऑटो बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। एक घंटे तक तड़पते रहे घायल, एम्बुलेंस नहीं पहुंची सबसे गंभीर स्थिति यह रही कि घायल करीब एक घंटे तक सड़क पर तड़पते रहे, लेकिन 108 एम्बुलेंस नहीं पहुंची। इसके बाद स्थानीय लोगों ने निजी वाहनों से घायलों को अस्पताल पहुंचाया। पार्षद प्रतिनिधि मनोहर बरेठा, हितेश बरेठा सहित ग्रामीणों ने सभी घायलों को सिविल अस्पताल जीरापुर पहुंचाया, जहां उनका इलाज शुरू किया गया। घायलों में रोडजी (80), अमरीबाई (70), संजूबाई (35), अनार सिंह (65), सिद्धनाथ (45), पार्वतीबाई (50), वर्षा (13), मांगीलाल (60), बद्रीलाल (65) और ईश्वर (12) शामिल हैं। इनमें से रोडजी और मांगीलाल की हालत गंभीर होने पर उन्हें रेफर किया गया है, जबकि अन्य का इलाज जारी है।

एसपी ने 2027 के चुनावों से पहले ‘गुरिल्ला युद्ध’ की राजनीति की योजना बनाई: यह क्या है और क्या यह काम करेगी? | व्याख्याकार समाचार

CBSE 12th results 2026 expected to be out anytime soon on cbse.gov.in. (Representative/File)

आखरी अपडेट:27 अप्रैल, 2026, 15:39 IST इस पुनर्गणना का तात्कालिक कारण इस महीने की शुरुआत में ग़ाज़ीपुर में हुई एक घटना थी समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव. (एपी फ़ाइल) क्या समाजवादी पार्टी की नई रणनीति काम करेगी या फिर पड़ेगा उल्टा असर? जैसा कि अखिलेश यादव ने 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले समाजवादी पार्टी को राजनीति की “गुरिल्ला युद्ध” शैली की ओर धकेल दिया है, इस कदम को सड़क पर लामबंदी की वापसी और एक उच्च जोखिम वाले राजनीतिक जुआ के रूप में देखा जा रहा है। इस रणनीति के तहत, सपा नेता अब पुलिस या स्थानीय अधिकारियों को पहले से सूचित किए बिना अपराध और प्रशासनिक विफलता के पीड़ितों तक पहुंचेंगे। पार्टी का कहना है कि इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उसके प्रतिनिधिमंडलों को रोका या प्रतिबंधित न किया जाए, साथ ही वास्तविक समय में जिसे वह शासन की विफलताएं कहती है, उसे उजागर करने की अनुमति भी दी जाए। ट्रिगर इस पुनर्गणना का तात्कालिक कारण इस महीने की शुरुआत में ग़ाज़ीपुर में हुई एक घटना थी। 15 अप्रैल को ओबीसी समुदाय की एक युवती की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई. जब 22 अप्रैल को समाजवादी पार्टी के एक प्रतिनिधिमंडल ने परिवार से मिलने का प्रयास किया, तो स्थिति ग्रामीणों के साथ झड़प में बदल गई, जिसमें पूर्व मंत्री राम आसरे विश्वकर्मा सहित पार्टी के कई नेता घायल हो गए। पार्टी ने आरोप लगाया कि आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय, पुलिस ने उसके कार्यकर्ताओं के खिलाफ मामले दर्ज किए, जिससे उसकी धारणा मजबूत हुई कि अधिकारियों को पूर्व सूचना देना उसके हितों के खिलाफ काम करता है। इसके बाद, यादव ने सार्वजनिक रूप से घोषणा की कि उनकी पार्टी अब पीड़ितों से मिलने से पहले प्रशासन को सूचित नहीं करेगी। उन्होंने तर्क दिया कि ऐसी जानकारी अक्सर रुकावट पैदा करती है, और प्रभावित परिवारों के लिए न्याय सुनिश्चित करने के लिए प्रत्यक्ष, अघोषित पहुंच आवश्यक है। राजनीतिक बदलाव यह रणनीति व्यापक राजनीतिक बदलाव का भी संकेत देती है। हाल के वर्षों में, निरंतर ज़मीनी लामबंदी के बजाय सोशल मीडिया मैसेजिंग और प्रेस कॉन्फ्रेंस पर अधिक भरोसा करने के लिए समाजवादी पार्टी की अक्सर आलोचना की गई है। जिसे वह “गुरिल्ला युद्ध” मॉडल कहती है, उसे अपनाकर पार्टी राजनीति की अपनी पुरानी शैली में वापसी का प्रयास करती दिख रही है – जिसमें भौतिक उपस्थिति, तेजी से लामबंदी और स्थानीय मुद्दों के साथ सीधे जुड़ाव पर जोर दिया जाता था। यह दृष्टिकोण मुलायम सिंह यादव के तहत “हल्ला बोल” चरण के समान है, जब पार्टी ने आक्रामक विरोध प्रदर्शन और सड़क-स्तरीय सक्रियता के माध्यम से अपनी पहचान बनाई थी। मौजूदा बदलाव उस विरासत को पुनर्जीवित करने के प्रयास का सुझाव देता है, खासकर ऐसे समय में जब पार्टी अपने मूल समर्थन आधार को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। पीडीए पर ध्यान दें नई रणनीति का एक प्रमुख घटक पीडीए समुदायों – पिछड़े वर्गों, दलितों और अल्पसंख्यकों पर ध्यान केंद्रित करना है। पार्टी नेताओं का कहना है कि इन समूहों से जुड़ी घटनाओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, खासकर उन मामलों में जहां प्रशासनिक निष्क्रियता या पूर्वाग्रह के आरोप हों। प्रतिनिधिमंडल न केवल पीड़ितों से मिलेंगे बल्कि कानूनी और संगठनात्मक सहायता भी प्रदान करेंगे। राजनीतिक पर्यवेक्षक इसे जमीनी स्तर पर प्रासंगिकता हासिल करने के लिए एक सुविचारित कदम के रूप में देखते हैं। स्थानीय घटनाओं पर त्वरित प्रतिक्रिया देकर और प्रभावित परिवारों तक भौतिक रूप से पहुंचकर, पार्टी का लक्ष्य खुद को एक सक्रिय और उत्तरदायी विपक्ष के रूप में स्थापित करना है। यह समाजवादी पार्टी को अपना ध्यान व्यापक राष्ट्रीय आख्यानों से हटकर राज्य-स्तरीय शासन के मुद्दों पर स्थानांतरित करने की अनुमति देता है जो सीधे मतदाताओं को प्रभावित करते हैं। जोखिम और प्रतिक्रियाएँ हालाँकि, रणनीति जोखिम से रहित नहीं है। संवेदनशील स्थानों पर अघोषित दौरे से कानून-व्यवस्था की चुनौतियाँ पैदा हो सकती हैं, जैसा कि ग़ाज़ीपुर की घटना में देखा गया है। स्थानीय समुदायों या अधिकारियों के साथ टकराव की भी संभावना है, जिसे सावधानी से प्रबंधित नहीं किया गया तो राजनीतिक रूप से प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी पहले ही इस कदम की आलोचना कर चुकी है। पार्टी नेताओं का तर्क है कि पारदर्शिता और संचार के युग में ऐसी रणनीति पुरानी और अनावश्यक हैं। उन्होंने यह भी सवाल किया है कि क्या यह दृष्टिकोण जमीनी स्तर पर टालने योग्य तनाव पैदा कर सकता है। आलोचना के बावजूद समाजवादी पार्टी पूरे राज्य में इस रणनीति का परीक्षण करने के लिए प्रतिबद्ध दिख रही है। अखिलेश यादव के लिए, यह उनकी नेतृत्व शैली को फिर से परिभाषित करने के प्रयास का प्रतिनिधित्व करता है – एक नियंत्रित, संदेश-संचालित दृष्टिकोण से आगे बढ़ते हुए जो अधिक तत्काल, दृश्यमान और हस्तक्षेपकारी है। यदि यह पार्टी को जमीनी मुद्दों और समुदायों के साथ फिर से जोड़ने में सफल हो जाती है, तो यह एक विश्वसनीय विपक्षी ताकत के रूप में समाजवादी पार्टी की स्थिति को मजबूत कर सकती है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: 27 अप्रैल, 2026, 15:37 IST समाचार समझाने वाले एसपी ने 2027 के चुनावों से पहले ‘गुरिल्ला युद्ध’ की राजनीति की योजना बनाई: यह क्या है और क्या यह काम करेगी? अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)समाजवादी पार्टी की रणनीति(टी)अखिलेश यादव की राजनीति(टी)गुरिल्ला युद्ध की राजनीति(टी)उत्तर प्रदेश विपक्ष(टी)जमीनी स्तर पर लामबंदी(टी)पीडीए समुदायों का फोकस(टी)गाजीपुर घटना(टी)2027 विधानसभा चुनाव

बाजार के ड्रिंक को कहें बाय-बाय, अपनाएं छतरपुर का देसी एनर्जी बूस्टर, गर्मी में बना वरदान

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होमताजा खबरlifestyle देसी जड़ी-बूटी से तैयार एनर्जी ड्रिंक, गर्मी में रखे आपको फिट और कूल Last Updated:April 27, 2026, 15:26 IST Kamraj Energy Drink Recipe: छतरपुर जिले में कामराज नाम की एक ऐसी घास पाई जाती है. जिसे तोड़ने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं. ये महंगी औषधि फ्री में मिल जाती है. इस औषधि से गर्मी भर एनर्जी ड्रिंक बनाते हैं जिसके चलते बाजारों का एनर्जी ड्रिंक नहीं खरीदना पड़ता है. इसे पीने से गर्मी भी छूमंतर हो जाती है, जानें इसे बनाने की आसान रेसिपी… Kamraj Energy Drink Recipe: छतरपुर जिले में एक ऐसी घास पाई जाती है. जिसे तोड़ने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं. इस घास को क्षेत्रीय भाषा में कामराज औषधि के नाम से जाना जाता है. ग्रामीणों के मुताबिक, ये महंगी औषधि उन्हें फ्री में मिल जाती है. इस औषधि से गर्मी भर एनर्जी ड्रिंक बनाते हैं जिसके चलते उन्हें बाजारों का एनर्जी ड्रिंक नहीं खरीदना पड़ता है. इसके सेवन से गर्मी भी छू-मंतर हो जाती है. छतरपुर जिले में एक ऐसी औषधि पाई जाती है जो चित्रकूट के जंगल पहाड़ों में पाई जाती है. इस औषधि को क्षेत्रीय भाषा में कामराज कहा जाता है. इस औषधि को दूर-दूर से भी लोग लेने आते हैं. ये औषधि पहाड़ी क्षेत्रों में उगती है. हालांकि, हर पहाड़ी में भी ये औषधि देखने को नहीं मिलती है. इस औषधि की मांग तो 12 महीने रहती है लेकिन गर्मी सीजन में इसकी डिमांड तेजी से बढ़ जाती है. दरअसल, इस कामराज औषधि से ग्रामीण क्षेत्रों में एक एनर्जी बूस्टर ड्रिंक बनाया जाता है जो गर्मी, लू और डिहाइड्रेशन से बचाता है. ऐसे तैयार करें कामराज एनर्जी ड्रिंक आयुर्वेदिक वैद्य बताते हैं कि सबसे पहले आपको पहाड़ से कामराज तोड़कर लाना होता है. अगर बाजार में मिलता है तो वहां से खरीद सकते हैं. इसे तोड़ने के बाद पानी में 20 मिनट के लिए फुला देना है. 20 मिनट बाद आप देखेंगे कि सूखा कामराज हरा है गया है. इस कामराज को सिलबट्टे की सहायता से पीस लेना है. इसके बाद इसे पानी में शक्कर के साथ मिला देना है. अगर आप दूध में पीना चाहते हैं तो दूध में पिसा कामराज शक्कर के साथ मिलाकर पी सकते हैं. कुछ लोग तो बगैर शक्कर सीधे पानी में ही घोलकर पी जाते हैं. इतनी मात्रा में करें सेवन आयुर्वेदिक वैद्य बताते हैं कि कामराज का सेवन करने से पहले इसकी मात्रा का ध्यान जरूर देना है क्योंकि इसकी ज्यादा मात्रा शरीर को बहुत ठंडा कर सकती है. ये बहुत ठंडा होता है इसलिए हर दिन आपको 1 से 2 ग्राम कामराज ही पानी में फुलाना है. एक व्यक्ति के लिए 1 से 2 ग्राम कामराज की मात्रा पर्याप्त होती है. लू और गर्मी से बचाता है कोई भी व्यक्ति अगर इसे लगातार 8 दिन तक इसका ड्रिंक बनाकर पीता है तो उसकी भयंकर गर्मी भी खत्म हो जाती है. अगर आप इसे हर दिन पीते हैं और धूप में भी चलना-फिरना करते हैं तो आपको लू भी नहीं लगती है. अगर यूरीन पास करने में जलन होती है तो इसके सेवन से जलन नहीं होती है. About the Author Deepti Sharma Deepti Sharma, currently working with News18MPCG (Digital), has been creating, curating and publishing impactful stories in Digital Journalism for more than 6 years. Before Joining News18 she has worked with Re…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Chhatarpur,Madhya Pradesh First Published : April 27, 2026, 15:26 IST

अशोकनगर में तराजू पर लटका मिला युवक का शव:तार का फंदा बनाया, पत्नी शादी में गई थी, बच्चे घर में थे

अशोकनगर में तराजू पर लटका मिला युवक का शव:तार का फंदा बनाया, पत्नी शादी में गई थी, बच्चे घर में थे

अशोकनगर जिले के नईसराय थाना क्षेत्र के डुंगासरा गांव में 40 वर्षीय देवेंद्र पुत्र बुंदेल परिहार ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। रविवार रात उन्होंने अपने घर में लगे एक बड़े तराजू पर तार का फंदा बनाकर खुदकुशी की। सोमवार सुबह उनकी बेटी ने उन्हें फंदे पर लटका देखा और परिवार के अन्य सदस्यों को सूचना दी। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। रात को शराब के नशे में घर आया था जानकारी के अनुसार मृतक के परिजनों के अनुसार, देवेंद्र की पत्नी रिश्तेदारी में एक शादी में गई हुई थीं। घर पर बच्चे मौजूद थे। बताया गया कि देवेंद्र रात में शराब के नशे में घर लौटे थे, जिससे बच्चों को लगा कि वे सो गए हैं। सुबह जब उनकी छोटी बेटी उस कमरे में पहुंची जहां चक्की लगी थी, तो उसने देवेंद्र को तराजू पर लटका पाया। परिजनों की सूचना पर नईसराय पुलिस मौके पर पहुंची और पंचनामा तैयार कर शव को नीचे उतारा। शव को पोस्टमार्टम के लिए ईसागढ़ सिविल अस्पताल भेजा गया, जहां प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।

AIims New delhi| Nikhil tondon| एम्स दिल्ली की कमान अब डॉक्टर निखिल टंडन के हाथ, कौन हैं, क्या करते हैं? जानें इनके बारे में

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होमताजा खबरDelhi एम्स दिल्ली की कमान अब डॉक्टर निखिल टंडन के हाथ, कौन हैं, क्या करते हैं? जानें Last Updated:April 27, 2026, 15:20 IST डॉक्‍टर न‍िख‍िल टंडन को एम्स नई दिल्ली का कार्यकारी निदेशक बनाया गया है. डॉक्‍टर निखिल टंडन को यह ज‍िम्‍मेदारी एम्‍स के पूर्व न‍िदेशक डॉक्टर एम श्रीनिवास के नीति आयोग सदस्य बनने के बाद सौंपी गई. डॉ. टंडन एम्‍स में एंडोक्राइनोलॉजी व‍िभाग के एचओडी हैं. अब एम्‍स की कमान संभालेंगे डॉ. न‍िख‍िल टंडन. AIIMS News: ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज नई दिल्ली के कार्यकारी निदेशक के रूप में अब डॉक्टर निखिल टंडन को कमान सौंपी गई है. डॉ. टंडन को यह जिम्मेदारी एम्स के निदेशक डॉक्टर एम श्रीनिवास के नीति आयोग के सदस्य के रूप में नियुक्ति के बाद सौंपी गई है. डॉ. निखिल एम्स फैकल्टी में काफी वरिष्ठ हैं और एम्स के नए निदेशक के रूप में इनके नाम का अनुमान भी लगाया जा रहा था. बता दें कि डॉ. निखिल टंडन एम्स के एंडोक्राइनोलॉजी एंड मेटाबॉलिज्म विभाग के एचओडी और प्रोफेसर थे. इसके अलावा इन्हें डीन एकेडमिक्स की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी दी गई थी और जिसे वे लंबे समय से निभा रहे थे. डॉ. न‍िख‍िल टंडन को एम्‍स के कार्यकारी नि‍देशक पद की जिम्‍मेदारी दी गई है. एम्स की ओर से जारी ऑफिस मेमोरेंडम में कहा गया है कि एम्स के पूर्व निदेशक डॉ. एम श्रीनिवास को नीति आयोग के स्थाई सदस्य के रूप में नियुक्त होने के बाद एम्स की जिम्मेदारियों से रिलीव किया जाता है और उनकी जगह अब एंडोक्राइनोलॉजी विभाग के एचओडी और डीन एकेडमिक्स डॉ. निखिल टंडन बतौर निदेशक जिम्मेदारियां संभालेंगे और अपने पुराने कामों को भी करते रहेंगे. जारी लेटर में कहा गया है कि यह नियुक्ति 6 महीने या नए निदेशक की नियुक्ति जो भी पहले हो तब तक जारी रहेगी. कौन हैं डॉक्टर टंडन? डॉ. निखिल टंडन भारत के प्रमुख एंडोक्रिनोलॉजिस्ट (मधुमेह, थायरॉइड और हार्मोन संबंधी विशेषज्ञ) हैं. वे फिलहाल AIIMS नई दिल्ली में एंडोक्रिनोलॉजी एंड मेटाबॉलिज्म विभाग के प्रोफेसर और हेड हैं. वे डीन (एकेडमिक्स) की भूमिका भी निभा चुके हैं और अब AIIMS दिल्ली के अंतरिम डायरेक्टर बने हैं. डॉ. टंडन का जन्म 28 नवंबर 1963 को दिल्ली में ही हुआ था इन्होंने एम्स नई दिल्ली से MBBS और MD की डिग्री हासिल की फिर ये PhD के लिए यूनिवर्सिटी ऑफ कैम्ब्रिज (यूके) गए 1993 में AIIMS में फैकल्टी के रूप में शामिल हुए और तब से यहीं काम कर रहे हैं. ये स्टडीज हैं काफी पॉपुलर डॉ. टंडन पिछले 25 साल से सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली में क्लिनिशियन-रिसर्चर के रूप में काम कर रहे हैं. उनका मुख्य फोकस कार्डियो-मेटाबॉलिक रोग (मधुमेह, हृदय रोग और मेटाबॉलिक समस्याएं) पर है. इन्होंने 871 से ज्यादा रिसर्च पेपर प्रकाशित किए हैं, जिन्हें 1 लाख से ज्यादा साइटेशन मिल चुके हैं. इसके साथ ही ये CARRS Cohort Study के फाउंडिंग इन्वेस्टिगेटर हैं. यह दक्षिण एशिया में कार्डियो-मेटाबॉलिक रिस्क और बीमारियों का बड़ा पॉपुलेशन-बेस्ड अध्ययन है. I-TREC प्रोजेक्ट: इन्होंने मधुमेह और हाई ब्लड प्रेशर के बेहतर प्रबंधन के लिए क्लिनिकल डिसीजन सपोर्ट सॉफ्टवेयर विकसित किया, जो राष्ट्रीय NCD पोर्टल से जुड़ा है. जेस्टेशनल डायबिटीज: महिलाओं में गर्भावस्था के बाद मधुमेह को रोकने के लिए बड़े पैमाने पर लाइफस्टाइल इंटरवेंशन अध्ययन किया (भारत, बांग्लादेश और श्रीलंका में 1600+ महिलाओं पर). थायरॉइड एपिडेमियोलॉजी, मेटाबॉलिक बोन डिजीज और बचपन की घटनाओं का वयस्क काल में मेटाबॉलिक रोगों पर प्रभाव इन क्षेत्रों में उनका विशेष योगदान है. डॉ. टंडन डब्ल्यूएचओ के Technical Advisory Group on Diabetes के चेयरमैन रहे हैं और ICMR, DBT, NIH, British Heart Foundation जैसी संस्थाओं से जुड़े रहे हैं. इसके साथ ही ये एंडोक्राइन सोसायटी ऑफ इंडिया के पूर्व प्रेसिडेंट भी हैं. पद्मश्री से हो चुके हैं सम्मानित डॉ. निखिल को साल 2015 में भारत सरकार का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म श्री मिला था. इसके साथ ही डॉ. बी.सी. रॉय अवॉर्ड (2005) — चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में सर्वोच्च सम्मान (Eminent Medical Teacher) भी इन्हें मिला है. About the Author प्रिया गौतमSenior Correspondent Priya Gautam is an accomplished journalist currently working with Hindi.News18.com with over 14 years of extensive field reporting experience. Previously worked with Hindustan times group (Hindustan Hindi) and …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Delhi,Delhi,Delhi First Published : April 27, 2026, 14:28 IST

रिहाना के संघर्ष और सफलता की अनकही कहानी:गुजारे के लिए सड़क पर कपड़े बेचे, हिंसा की ​शिकार हुईं, आज हैं ग्लोबल पॉप स्टार

रिहाना के संघर्ष और सफलता की अनकही कहानी:गुजारे के लिए सड़क पर कपड़े बेचे, हिंसा की ​शिकार हुईं, आज हैं ग्लोबल पॉप स्टार

पॉप स्टार रिहाना ​की गिनती आज भले ही दुनिया के अमीर और सफलतम कलाकारों में होती हो, लेकिन एक वक्त उनको सड़कों पर कपड़े बेचने पड़े थे। उनका जीवन गहरे सामाजिक और आर्थिक संघर्षों से गुजरा है। अभी वह अपनी भारत यात्रा को लेकर चर्चा में हैं। जानते हैं उनकी संघर्ष से सफलता की कहानी संघर्ष का दौर – मानसिक तनाव से जूझीं, परिवार भी टूट गया तीन भाई-बहनों में सबसे बड़ी रॉबिन रिहाना फेंटी का जन्म 20 फरवरी 1988 को बारबाडोस के सेंट माइकल इलाके में हुआ था। 7 साल की उम्र से ही संगीत के प्रति उनकी गहरी रुचि थी। स्कूली दिनों में उन्होंने सहपाठियों के सा​थ म्यूजिक बैंड बनाया। उनके पिता को शराब और कोकीन की लत थी। इसके कारण धीरे-धीरे परिवार की ​आ​र्थिक स्थिति बदतर होती गई। गुजारे के लिए रिहाना को पिता के साथ सड़क पर कपड़े बेचने पड़े। आर्थिक तंगी और घर में झगड़ों के कारण मानसिक तनाव से रिहाना को गंभीर माइग्रेन हो गया, जिसका वर्षों तक इलाज चला। वह 14 साल की थीं तो माता-पिता के तलाक से परिवार टूट गया। रिहाना के लिए यह बेहद मुश्किलों भरा दौर रहा। उतार-चढ़ाव – अमेरिका में करिअर शुरू, लेकिन लाखों डॉलर गंवाए 2003 में रिकॉर्ड प्रोड्यूसर इवान रोजर्स ने रिहाना को अमेरिका बुलाया। 2005 में उनका पहला एलबम रिलीज हुआ। लेकिन 2009 में बॉयफ्रेंड के हमले में रिहाना बुरी तरह घायल हो गईं। फिर इसी साल उनकी अकाउंटिंग फर्म के कथित कुप्रबंधन से उन्हें लाखों डॉलर भी गंवाने पड़े थे। सफलता – 9 ग्रैमी अवॉर्ड जीते, अपने देश की ‘नेशनल हीरो’ बनीं आज रिहाना न सिर्फ ग्लोबल पॉप स्टार, बल्कि ‘फेंटी ब्यूटी’ जैसे प्रसिद्ध ब्यूटी ब्रांड की मालिक हैं। उनकी सम्पत्ति 1.4 अरब डॉलर बताई जाती है। 9 बार ग्रैमी और कई वैश्विक पुरस्कार जीत चुकीं। उन्हें बारबाडोस का ‘नेशनल हीरो’ घोषित किया गया है।

इजराइल में नेतन्याहू को हटाने एकजुट हुए दो पूर्व प्रधानमंत्री:बेनेट-लैपिड अपनी पार्टी का विलय करेंगे, 2021 में दोनों ने मिलकर बेंजामिन को हराया था

इजराइल में नेतन्याहू को हटाने एकजुट हुए दो पूर्व प्रधानमंत्री:बेनेट-लैपिड अपनी पार्टी का विलय करेंगे, 2021 में दोनों ने मिलकर बेंजामिन को हराया था

इजराइल में दो पूर्व प्रधानमंत्रियों नफ्ताली बेनेट और येर लैपिड ने मौजूदा पीएम बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ एक साथ चुनाव लड़ने का फैसला किया है। उनका मकसद लंबे समय से सत्ता में रहे नेतन्याहू को हटाना है। दोनों पहले भी 2021 में साथ आए थे और उन्होंने अलग-अलग विचारधाराओं वाली पार्टियों को जोड़कर 12 साल से चली आ रही नेतन्याहू की सत्ता गिरा दी थी। अब दोनों नेताओं ने फिर से साथ आने का फैसला किया है। उन्होंने तय किया है कि अपनी-अपनी पार्टियों को मिलाकर एक नई पार्टी बनाई जाएगी, जिसकी अगुवाई बेनेट करेंगे। इजराइल में अक्टूबर 2027 में चुनाव होने हैं लेकिन माना जा रहा है कि नेतन्याहू इसी साल संसद भंग कर चुनाव करा सकते हैं। 2022 में टूट गया था गठबंधन 2021 में हुए समझौते के तहत पहले बेनेट प्रधानमंत्री बने और बाद में लैपिड को यह जिम्मेदारी संभालनी थी। हालांकि यह सरकार बहुत कम बहुमत पर टिकी थी। इसमें दक्षिणपंथी, वामपंथी, मध्यमार्गी और एक अरब पार्टी शामिल थी। इनकी अलग-अलग विचारधारा वाली इन पार्टियों में सुरक्षा, फिलिस्तीन और बस्तियों जैसे मुद्दों पर सबकी सोच अलग थी, जिससे बार-बार टकराव होता रहा। आखिरकार हालात ऐसे बन गए कि सरकार चलाना मुश्किल हो गया। तब बेनेट और लैपिड ने संसद भंग करने का फैसला किया और नए चुनाव कराए गए। इसमें नेतन्याहू की जीत हुई और वे फिर से सत्ता में लौट आए। तब से लैपिड विपक्ष के नेता हैं, जबकि बेनेट कुछ समय के लिए राजनीति से दूर हो गए थे। उनकी पार्टी यमीना ने भी चुनाव नहीं लड़ा था। लैपिड की पार्टी का कहना है कि इस कदम का मकसद विपक्ष को एकजुट करना, आपसी झगड़ों को खत्म करना और आने वाले अहम चुनाव जीतने पर पूरा ध्यान लगाना है। बेनेट-लैपिड की सोच अलग-अलग बेनेट की छवि एक कट्टरपंथी यहूदी राष्ट्रवादी नेता की रही है। वे लंबे समय से दक्षिणपंथी राजनीति से जुड़े रहे हैं और फिलिस्तीन मुद्दे पर उनका रुख काफी सख्त माना जाता है। वे वेस्ट बैंक में यहूदी बस्तियों के समर्थक रहे हैं और फिलिस्तीनी राज्य बनाने के विचार के खिलाफ भी रहे हैं। उनका मानना रहा है कि इजराइल की सुरक्षा सबसे ऊपर है और इस मामले में किसी तरह की ढील नहीं दी जानी चाहिए। इसके उलट, लैपिड को एक धर्मनिरपेक्ष और उदार सोच वाला नेता माना जाता है। उनकी राजनीति ज्यादा व्यावहारिक और संतुलित मानी जाती है। वे शहरी मध्यम वर्ग, प्रोफेशनल लोगों और उदार विचारधारा वाले मतदाताओं में काफी लोकप्रिय हैं। लैपिड और बेनेट दोनों के लिए यह गठबंधन जरूरी लैपिड के लिए यह गठबंधन बहुत अहम माना जा रहा है। उनकी पार्टी येश अतीद इस समय विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी है और संसद में 24 सीटें हैं, लेकिन हाल के सर्वे बताते हैं कि अगली बार यह घटकर सिर्फ 5 सीटें रह सकती हैं। ऐसे में बेनेट के साथ आने से उनकी स्थिति मजबूत हो सकती है। दूसरी तरफ बेनेट के लिए भी यह गठबंधन जरूरी था। एक्सपर्ट का मानना है कि पूर्व चीफ ऑफ स्टाफ गादी आइजनकोट के आने से पूरा समीकरण बदल गया है। आइजनकोट की मजबूूत छवि और लोकप्रियता की वजह से वे बेनेट के वोट बैंक में सेंध लगा रहे थे। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सुरक्षा और सेना के मुद्दों को अहम मानने वाले वोटर अब आइजनकोट की तरफ जा रहे हैं। ऐसे में बेनेट के पास केंद्र की राजनीति छोड़कर लैपिड के साथ आने के अलावा ज्यादा विकल्प नहीं बचा था। इस गठबंधन से बेनेट को आर्थिक फायदा भी होगा। इजराइल में पार्टियों को मिलने वाला सरकारी फंड उनकी संसद में सीटों के आधार पर तय होता है। बेनेट की पार्टी को जहां करीब 11 मिलियन शेकेल मिलते, वहीं लैपिड की पार्टी को 27 मिलियन शेकेल मिलते हैं, क्योंकि उनके पास ज्यादा सीटें हैं। क्या यह गठबंधन नेतन्याहू को हरा पाएगा इजराइल की संसद में कुल 120 सीटें हैं। कुछ सर्वे बताते हैं कि अगर बेनेट, लैपिड और आइजनकोट तीनों साथ चुनाव लड़ें, तो उन्हें करीब 38 सीटें मिल सकती हैं और वे सबसे बड़ा दल बन सकते हैं। लेकिन इससे दोनों खेमों की कुल ताकत में बहुत बड़ा बदलाव नहीं होगा। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस गठबंधन का सबसे बड़ा असर मनोवैज्ञानिक हो सकता है। अगर लोगों को लगे कि विपक्ष एकजुट है और मजबूत है, तो ज्यादा वोटर वोट डालने के लिए बाहर आ सकते हैं। टाइम्स ऑफ इजराइल के मुताबिक इन सबमें सबसे बड़ा फैक्टर अब भी गादी आइजनकोट हैं। अगर वे इस गठबंधन में शामिल होते हैं तो विपक्ष और मजबूत हो सकता है। लेकिन अगर वे अलग चुनाव लड़ते हैं, तो वे दक्षिणपंथी वोटरों को ज्यादा आकर्षित कर सकते हैं, जो लैपिड के साथ नहीं जाना चाहते।

benefits of soaking rice I गर्मीयों में चावल खाने का सही तरीका

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Last Updated:April 27, 2026, 15:02 IST गर्मियों में चावल खाने को लेकर लोगों के मन में कई तरह के सवाल उठते हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि सही तरीके से तैयार किया गया चावल सेहत के लिए फायदेमंद हो सकता है. चावल को पकाने से पहले करीब 30 मिनट तक भिगोने से इसमें मौजूद एंटी-न्यूट्रिएंट्स कम हो जाते हैं और यह पाचन में आसान हो जाता है. साथ ही, चावल शरीर को तुरंत ऊर्जा देने का काम करता है. हालांकि, बेहतर पाचन और सुस्ती से बचने के लिए इसे दाल, सब्जियों या सलाद जैसे फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों के साथ संतुलित मात्रा में खाना जरूरी है. चंदौली. गर्मियों के मौसम में चावल खाने को लेकर लोगों के मन में कई सवाल रहते हैं. जैसे क्या चावल रोज खाना ठीक है, इसे कैसे पकाया जाए और क्या यह पाचन के लिए अच्छा होता है? इन्हीं सवालों पर डॉक्टर रिद्धी पांडे ने लोकल18 से बातचीत में महत्वपूर्ण जानकारी साझा की. डॉ. पांडे ने बताया कि चावल को सही तरीके से पकाया जाए, तो यह न सिर्फ आसानी से पचता है, बल्कि शरीर को तुरंत ऊर्जा भी देता है. चावल को पकाने से पहले कम से कम 30 मिनट तक पानी में भिगोकर रखना बेहद फायदेमंद होता है, ऐसा करने से चावल में मौजूद कुछ एंटी-न्यूट्रिएंट्स जैसे फाइटिक एसिड कम हो जाते हैं, जो पाचन में बाधा डाल सकते हैं. भिगोने की प्रक्रिया से डाइजेस्टिव एंजाइम भी सक्रिय हो जाते हैं, जिससे चावल शरीर में जल्दी और आसानी से पचता है. बेहतर हो जाता है टेक्सचर उन्होंने बताया कि भिगोए हुए चावल पकाने पर उनका टेक्सचर भी बेहतर हो जाता है और उनमें मौजूद हानिकारक तत्व काफी हद तक निकल जाते हैं. इससे न सिर्फ पाचन सुधरता है, बल्कि पेट से जुड़ी समस्याओं की संभावना भी कम हो जाती है, जो लोग चावल खाने के बाद भारीपन या गैस की समस्या महसूस करते हैं, उनके लिए यह तरीका खासतौर पर लाभकारी हो सकता है. चावल खाने से आती है नींद रिद्धी पांडे ने बताया कि जहां तक चावल और रोटी की तुलना का सवाल है, तो आमतौर पर चावल को रोटी के मुकाबले हल्का और जल्दी पचने वाला माना जाता है. यही वजह है कि बीमार या कमजोर पाचन वाले लोगों को अक्सर चावल खाने की सलाह दी जाती है. हालांकि, चावल खाने के बाद खासकर गर्मियों में नींद आने की समस्या भी कई लोगों को होती है, इसका कारण चावल का हाई ग्लाइसेमिक इंडेक्स हो सकता है, जिससे ब्लड शुगर तेजी से बढ़ता और फिर गिरता है, जिससे सुस्ती महसूस होती है. ऊर्जावान बनाने में करता है मददवहीं, उन्होंने बताया कि इससे बचने के लिए चावल के साथ फाइबर युक्त चीजें जैसे दाल, सब्जियां या सलाद शामिल करना चाहिए. साथ ही, ज्यादा मात्रा में चावल खाने से बचना और संतुलित आहार लेना जरूरी है. अगर सही तरीके से चावल को भिगोकर और संतुलित मात्रा में खाया जाए, तो यह न केवल पाचन के लिए अच्छा है, बल्कि शरीर को स्वस्थ और ऊर्जावान बनाए रखने में भी मदद करता है. About the Author Monali Paul नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Chandauli,Uttar Pradesh First Published : April 27, 2026, 15:02 IST

गर्मी में शराब पीने के भयंकर नुकसान! जानिए कैसे बढ़ता है डिहाइड्रेशन, बिगड़ता है पेट, कमजोर हो जाती है शरीर की एनर्जी

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Last Updated:April 27, 2026, 14:51 IST Alcohol Side Effects in Summer: गर्मी में शराब पीने से शरीर में पानी की कमी तेजी से बढ़ती है. यह एनर्जी को कम कर देती है और थकान बढ़ाती है. पेट और पाचन तंत्र पर इसका सीधा बुरा असर पड़ता है. हीट स्ट्रोक और सिर दर्द जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं. स्किन और दिल की सेहत पर भी इसका नकारात्मक असर दिखता है. Alcohol Side Effects in Summer: गर्मियों का मौसम अपने आप में शरीर के लिए एक चैलेंज लेकर आता है. तेज धूप, पसीना और लगातार पानी की कमी शरीर को जल्दी थका देती है. ऐसे में अगर इस मौसम में शराब का सेवन किया जाए, तो इसका असर कई गुना बढ़ जाता है. बहुत से लोग पार्टी, वीकेंड या रिलैक्स होने के लिए शराब पीते हैं, लेकिन उन्हें यह समझ नहीं आता कि गर्मी में इसका असर सर्दियों से बिल्कुल अलग होता है. शरीर पहले ही गर्मी से जूझ रहा होता है और शराब उसे और ज्यादा कमजोर कर देती है. नतीजा यह होता है कि डिहाइड्रेशन, सिर दर्द, चक्कर, पेट खराब और थकान जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ने लगती हैं. कई बार लोग इसे हल्के में लेते हैं, लेकिन धीरे धीरे यह आदत शरीर को अंदर से नुकसान पहुंचाने लगती है. डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ जाता है: गर्मी में शराब पीने का सबसे बड़ा नुकसान है डिहाइड्रेशन. शराब शरीर से पानी को तेजी से बाहर निकालती है. जब पहले से ही शरीर पसीने के कारण पानी खो रहा होता है, तब शराब इसे और ज्यादा बढ़ा देती है. इससे शरीर में कमजोरी, मुंह सूखना और चक्कर आने जैसी समस्या हो सकती है. अगर समय पर पानी न पिया जाए तो हालत और खराब हो सकती है. शरीर की एनर्जी तेजी से गिरती है: शराब पीने के बाद आपको थोड़ी देर के लिए रिलैक्स महसूस हो सकता है, लेकिन असल में यह आपकी एनर्जी को कम कर देती है. गर्मी में जब शरीर को ज्यादा एनर्जी की जरूरत होती है, तब शराब उसे कमजोर कर देती है. इसके कारण थकान, सुस्ती और काम में मन न लगने जैसी दिक्कतें होने लगती हैं. Add News18 as Preferred Source on Google पेट और पाचन पर बुरा असर: गर्मी में शराब पीने से पेट पर सीधा असर पड़ता है. इससे एसिडिटी, गैस और अपच की समस्या बढ़ जाती है. कई बार लोगों को उल्टी या पेट दर्द भी होने लगता है. अगर लगातार ऐसा होता रहे तो पाचन तंत्र कमजोर पड़ सकता है. हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ता है: शराब शरीर के तापमान को कंट्रोल करने की क्षमता को कमजोर कर देती है. ऐसे में अगर आप धूप या गर्म माहौल में हैं, तो हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है. यह स्थिति खतरनाक हो सकती है और इसमें तुरंत इलाज की जरूरत पड़ती है. नींद और दिमाग पर असर: कई लोग सोचते हैं कि शराब पीने से नींद अच्छी आती है, लेकिन गर्मी में इसका उल्टा असर होता है. शराब नींद को खराब कर देती है और दिमाग को सही तरह से आराम नहीं मिल पाता. इसके कारण अगली सुबह सिर भारी रहना, चिड़चिड़ापन और ध्यान की कमी जैसी समस्याएं होती हैं. स्किन और शरीर की चमक पर असर: गर्मी में शराब पीने से स्किन पर भी असर दिखने लगता है. डिहाइड्रेशन के कारण त्वचा सूखी और बेजान हो जाती है. चेहरे की चमक कम हो जाती है और कई बार पिंपल या जलन की समस्या भी हो सकती है. दिल और ब्लड प्रेशर पर प्रभाव: शराब का ज्यादा सेवन दिल और ब्लड प्रेशर पर भी असर डालता है. गर्मी में यह असर और ज्यादा खतरनाक हो सकता है. इससे दिल की धड़कन तेज होना और ब्लड प्रेशर का असंतुलन जैसी समस्याएं हो सकती हैं. First Published : April 27, 2026, 14:51 IST