कैम्ब्रिज के सबसे कम उम्र के ब्लैक प्रोफेसर की मौत:घर में बेहोश मिले, रिसर्च पर उठे सवालों के बाद यूनिवर्सिटी से इस्तीफा दिया था

इंग्लैंड की कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के सबसे कम उम्र के अश्वेत प्रोफेसर रहे जेसन अर्डे का 41 साल की उम्र में निधन हो गया। वे शिक्षा और समाज से जुड़े विषयों पर रिसर्च और अध्यापन करते थे। शुक्रवार दोपहर करीब 3 बजे उन्हें दक्षिण लंदन के बैटरसी स्थित उनके घर में बेहोश पाया गया। एंबुलेंस टीम ने उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन उनकी मौत हो गई। पुलिस के मुताबिक, उनकी मौत अचानक हुई। अभी तक ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है जिससे मौत को संदिग्ध माना जाए। पुलिस परिवार के संपर्क में है और मामले की जांच कर रही है। मौत से कुछ दिन पहले ही कैम्ब्रिज से दिया था इस्तीफा जेसन अर्डे ने 5 अगस्त को कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से इस्तीफा दिया था। यह फैसला उनकी कुछ रिसर्च को लेकर उठे सवालों के बीच आया था। कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी ने उनकी नियुक्ति और यूनिवर्सिटी में उनके कामकाज की जांच भी शुरू की थी। यूनिवर्सिटी यह पता लगा रही थी कि अर्डे को 2022 में प्रोफेसर की नौकरी कैसे मिली और उनके काम के दौरान क्या हुआ। इस्तीफा देने के बाद अर्डे ने कहा था कि लगातार लग रहे आरोपों और उनके बारे में सार्वजनिक रूप से की जा रही टिप्पणियों का उन पर बहुत गहरा असर पड़ा। रिसर्च के कुछ हिस्सों पर नकल के आरोप लगे थे अर्डे ने 2015 में ब्रिटेन की लिवरपूल जॉन मूर्स यूनिवर्सिटी से पीएचडी की थी। इस दौरान उन्होंने एक रिसर्च रिपोर्ट लिखी थी। बाद में उनकी रिसर्च के कुछ हिस्सों पर आरोप लगे कि उन्होंने दूसरे लोगों के लिखे काम को बिना उचित श्रेय दिए अपनी रिसर्च में इस्तेमाल किया। आसान भाषा में कहें तो उन पर रिसर्च में नकल करने का आरोप लगा था। अर्डे ने इन आरोपों को गलत बताया था। इसके बाद उनकी कुछ दूसरी रिसर्च में भी गलतियां होने के आरोप लगाए गए। नियुक्ति पर भी उठे थे सवाल अर्डे की कैम्ब्रिज में नियुक्ति को लेकर भी विवाद हुआ था। कुछ लोगों ने आरोप लगाया था कि उन्हें उनकी योग्यता के बजाय यूनिवर्सिटी की विविधता बढ़ाने वाली नीति के तहत नौकरी दी गई। इस तरह की नीतियों को आम तौर पर DEI कहा जाता है। इसका मतलब है कि अलग-अलग समुदायों और कम प्रतिनिधित्व वाले लोगों को संस्थानों में बराबर मौके दिए जाएं और उनकी भागीदारी बढ़ाई जाए। हालांकि, ब्रिटेन की शिक्षक यूनियन के नेता डेनियल कबेडे ने अर्डे का बचाव किया था। उन्होंने कहा था कि अर्डे को सार्वजनिक रूप से बहुत बुरी तरह निशाना बनाया गया। उन्होंने ब्रिटिश मीडिया और दक्षिणपंथी टिप्पणीकारों के एक वर्ग पर अर्डे के खिलाफ नस्लवादी अभियान चलाने का आरोप लगाया था। परिवार बोला- गलत जानकारी के अभियान ने उन्हें बहुत परेशान किया अर्डे के परिवार ने उनके निधन पर गहरा दुख जताया। परिवार ने कहा कि जेसन के बारे में फैलाई जा रही गलत जानकारी के अभियान का उन पर बहुत बुरा असर पड़ा था। परिवार के मुताबिक, अर्डे शांत स्वभाव के व्यक्ति थे और हमेशा दूसरों में अच्छाई देखने की कोशिश करते थे। परिवार ने मीडिया से अपील की कि अब उन्हें अकेला छोड़ दिया जाए। उन्होंने जेसन और उनके परिवार के खिलाफ लंबे समय से चल रहे उत्पीड़न को रोकने की भी अपील की। कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी की प्रमुख डेबोरा प्रेंटिस ने अर्डे की मौत पर दुख जताया। उन्होंने कहा कि इस मुश्किल समय में उनकी संवेदनाएं अर्डे के परिवार और दोस्तों के साथ हैं। ब्रिटेन की शिक्षा मंत्री लूसी पॉवेल ने भी उनके निधन पर शोक जताया। 2022 में कैम्ब्रिज में बनाया था इतिहास जेसन अर्डे 2022 में कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के शिक्षा विभाग में प्रोफेसर बने थे। वे यूनिवर्सिटी के सबसे कम उम्र के अश्वेत प्रोफेसर थे। कैम्ब्रिज में लंबे समय से अश्वेत लोगों की संख्या कम रही है। ऐसे में अर्डे की नियुक्ति को यूनिवर्सिटी के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना गया था। उनकी मौत ऐसे समय हुई है, जब उनकी नियुक्ति और रिसर्च को लेकर यूनिवर्सिटी में जांच चल रही थी।
कैम्ब्रिज के सबसे कम उम्र के ब्लैक प्रोफेसर की मौत:घर में बेहोश मिले, रिसर्च पर उठे सवालों के बाद यूनिवर्सिटी से इस्तीफा दिया था

इंग्लैंड की कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के सबसे कम उम्र के अश्वेत प्रोफेसर रहे जेसन अर्डे का 41 साल की उम्र में निधन हो गया। वे शिक्षा और समाज से जुड़े विषयों पर रिसर्च और अध्यापन करते थे। शुक्रवार दोपहर करीब 3 बजे उन्हें दक्षिण लंदन के बैटरसी स्थित उनके घर में बेहोश पाया गया। एंबुलेंस टीम ने उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन उनकी मौत हो गई। पुलिस के मुताबिक, उनकी मौत अचानक हुई। अभी तक ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है जिससे मौत को संदिग्ध माना जाए। पुलिस परिवार के संपर्क में है और मामले की जांच कर रही है। मौत से कुछ दिन पहले ही कैम्ब्रिज से दिया था इस्तीफा जेसन अर्डे ने 5 अगस्त को कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से इस्तीफा दिया था। यह फैसला उनकी कुछ रिसर्च को लेकर उठे सवालों के बीच आया था। कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी ने उनकी नियुक्ति और यूनिवर्सिटी में उनके कामकाज की जांच भी शुरू की थी। यूनिवर्सिटी यह पता लगा रही थी कि अर्डे को 2022 में प्रोफेसर की नौकरी कैसे मिली और उनके काम के दौरान क्या हुआ। इस्तीफा देने के बाद अर्डे ने कहा था कि लगातार लग रहे आरोपों और उनके बारे में सार्वजनिक रूप से की जा रही टिप्पणियों का उन पर बहुत गहरा असर पड़ा। रिसर्च के कुछ हिस्सों पर नकल के आरोप लगे थे अर्डे ने 2015 में ब्रिटेन की लिवरपूल जॉन मूर्स यूनिवर्सिटी से पीएचडी की थी। इस दौरान उन्होंने एक रिसर्च रिपोर्ट लिखी थी। बाद में उनकी रिसर्च के कुछ हिस्सों पर आरोप लगे कि उन्होंने दूसरे लोगों के लिखे काम को बिना उचित श्रेय दिए अपनी रिसर्च में इस्तेमाल किया। आसान भाषा में कहें तो उन पर रिसर्च में नकल करने का आरोप लगा था। अर्डे ने इन आरोपों को गलत बताया था। इसके बाद उनकी कुछ दूसरी रिसर्च में भी गलतियां होने के आरोप लगाए गए। नियुक्ति पर भी उठे थे सवाल अर्डे की कैम्ब्रिज में नियुक्ति को लेकर भी विवाद हुआ था। कुछ लोगों ने आरोप लगाया था कि उन्हें उनकी योग्यता के बजाय यूनिवर्सिटी की विविधता बढ़ाने वाली नीति के तहत नौकरी दी गई। इस तरह की नीतियों को आम तौर पर DEI कहा जाता है। इसका मतलब है कि अलग-अलग समुदायों और कम प्रतिनिधित्व वाले लोगों को संस्थानों में बराबर मौके दिए जाएं और उनकी भागीदारी बढ़ाई जाए। हालांकि, ब्रिटेन की शिक्षक यूनियन के नेता डेनियल कबेडे ने अर्डे का बचाव किया था। उन्होंने कहा था कि अर्डे को सार्वजनिक रूप से बहुत बुरी तरह निशाना बनाया गया। उन्होंने ब्रिटिश मीडिया और दक्षिणपंथी टिप्पणीकारों के एक वर्ग पर अर्डे के खिलाफ नस्लवादी अभियान चलाने का आरोप लगाया था। परिवार बोला- गलत जानकारी के अभियान ने उन्हें बहुत परेशान किया अर्डे के परिवार ने उनके निधन पर गहरा दुख जताया। परिवार ने कहा कि जेसन के बारे में फैलाई जा रही गलत जानकारी के अभियान का उन पर बहुत बुरा असर पड़ा था। परिवार के मुताबिक, अर्डे शांत स्वभाव के व्यक्ति थे और हमेशा दूसरों में अच्छाई देखने की कोशिश करते थे। परिवार ने मीडिया से अपील की कि अब उन्हें अकेला छोड़ दिया जाए। उन्होंने जेसन और उनके परिवार के खिलाफ लंबे समय से चल रहे उत्पीड़न को रोकने की भी अपील की। कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी की प्रमुख डेबोरा प्रेंटिस ने अर्डे की मौत पर दुख जताया। उन्होंने कहा कि इस मुश्किल समय में उनकी संवेदनाएं अर्डे के परिवार और दोस्तों के साथ हैं। ब्रिटेन की शिक्षा मंत्री लूसी पॉवेल ने भी उनके निधन पर शोक जताया। 2022 में कैम्ब्रिज में बनाया था इतिहास जेसन अर्डे 2022 में कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के शिक्षा विभाग में प्रोफेसर बने थे। वे यूनिवर्सिटी के सबसे कम उम्र के अश्वेत प्रोफेसर थे। कैम्ब्रिज में लंबे समय से अश्वेत लोगों की संख्या कम रही है। ऐसे में अर्डे की नियुक्ति को यूनिवर्सिटी के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना गया था।
कंगना रनोट के 2 साल में सिर्फ 16 काम पूरे:वर्क कंप्लीशन रेट सबसे कम; अनुराग ठाकुर समेत हिमाचल के चारों सांसदों का रिपोर्ट कार्ड जानिए

हिमाचल प्रदेश की मंडी लोकसभा सीट की जनता ने बेहतर विकास की उम्मीद में कांग्रेस सरकार के PWD मंत्री विक्रमादित्य सिंह को हराकर सेलिब्रिटी कंगना रनोट को संसद भेजा। मगर, कंगना का 2 साल से अधिक का ‘रिपोर्ट कार्ड’ हिमाचल के चारों सांसदों में सबसे निराशाजनक रहा है। मिनिस्ट्री ऑफ स्टेटिस्टिक्स एंड प्रोग्राम इम्प्लीमेंटेशन (MoSPI) के अनुसार, कंगना के चुनाव क्षेत्र में कुल 314 काम चल रहे हैं। दो साल बीतने पर भी महज 16 काम ही पूरे हुए हैं। कंगना की वर्क कम्पलीशन रेट चारों सांसदों में सबसे कम 5.1% है। कंगना को अब तक सांसद निधि के ₹14.7 करोड़ मिले हैं। इसमें से कंगना 11 अगस्त तक मात्र ₹4.1 करोड़ खर्च कर पाई हैं। कंगना की फंड यूटिलाइजेशन दर 27.6% है, जबकि राष्ट्रीय औसत 32.9% है। अनुराग ठाकुर भी कंगना से बेहतर नहीं हमीरपुर के सांसद व पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर का ‘रिपोर्ट कार्ड’ भी कंगना से बेहतर नहीं है। अनुराग ₹15 करोड़ में से दो साल में मात्र ₹1.7 करोड़ खर्च कर पाए हैं, जबकि ₹13.2 करोड़ अनस्पेंट है। अनुराग का चारों सांसदों में सबसे ज्यादा अनस्पेंट बजट है। फंड यूटिलाइजेशन में शिमला के सांसद सुरेश कश्यप और वर्क कम्पलीशन में कांगड़ा के सांसद राजीव भारद्वाज आगे जरूर हैं, लेकिन राष्ट्रीय औसत से दोनों पीछे हैं। कंगना समेत चारों सांसदों का रिपोर्ट कार्ड… सांसदों को MPLADS में कितना पैसा मिलता है? हर सांसद को सालाना ₹5 करोड़ का MPLADS फंड मिलता है। यह पैसा सांसद के खाते में सीधे नहीं आता। सांसद अपने क्षेत्र में विकास कार्यों की सिफारिश करते हैं, जबकि राशि जिला प्राधिकरण को जारी होती है और संबंधित सरकारी एजेंसी काम करवाती है। फंड खर्च करने में फिसड्डी क्यों? बेशक, MPLADS का पैसा सांसद खुद खर्च नहीं करते। फिर भी सांसदों की जिम्मेदारी बनती है कि उनके क्षेत्र में विकास कार्य समय पर पूरे हो सकें। वे जरूरी कामों की पहचान, उनकी प्राथमिकता तय करने और उनकी प्रगति की निगरानी कर सकते हैं। खासकर जब बड़ी संख्या में काम स्वीकृत या अनुशंसित हों, तो सांसद कार्यालय की ओर से जिला प्रशासन और संबंधित एजेंसियों के साथ नियमित फॉलोअप महत्वपूर्ण हो जाता है।
हाथ फ्रैक्चर था, अगले दिन विराट कोहली के साथ शूट:मिहिर आहूजा बोले- शाहरुख की तारीफ से लगा, मेहनत सही दिशा में जा रही है

जमशेदपुर से मुंबई आए मिहिर आहूजा ने एक्टिंग के लिए करीब चार साल तक ऑडिशन दिए। सुपर 30 से फिल्मी सफर शुरू हुआ, द आर्चीज से पहचान मिली और अब ऑपरेशन सफेद सागर में एयरफोर्स ऑफिसर के किरदार में नजर आ रहे हैं। दैनिक भास्कर से बातचीत में मिहिर ने संघर्ष, रिजेक्शन, शाहरुख खान से मुलाकात और प्यार पैसा प्राफिट को लेकर हुई चर्चा पर बात की। सवाल: जमशेदपुर में रहते हुए एक्टिंग की तरफ आपका झुकाव कैसे हुआ? जवाब: मुझे याद नहीं कि मैंने कभी एक्टिंग के अलावा कुछ और करने के बारे में सोचा हो। सातवीं-आठवीं क्लास में ही तय कर लिया था कि मुझे एक्टर बनना है। घर के फंक्शन में मैं रिश्तेदारों की मिमिक्री करता था। लोग खुश होते थे और मुझे भी परफॉर्म करने में मजा आता था। वहीं से लगा कि मुझे यही करना है। सवाल: स्कूल के दिनों में जब आप एक्टिंग को लेकर इतने सीरियस थे, तो क्या लोगों ने आपका मजाक भी उड़ाया? जवाब: जमशेदपुर में मैंने एक छोटी-सी शॉर्ट फिल्म की थी। उसके बाद स्कूल में चर्चा होने लगी कि मैं फिल्म शूट करके आया हूं। उसी दौरान 10वीं में एक दिन मैं नोटबुक नहीं लेकर आया। टीचर ने मेरी नोटबुक डस्टबिन में फेंकते हुए कहा, ‘तुम खुद को सुपरस्टार समझते हो? तुम सुपरस्टार नहीं हो और कभी बन भी नहीं पाओगे।’ मैंने उसी दिन उनकी ये बात लिखकर रख ली थी। आज भी वो कागज मेरे पास है। उस दिन उन्होंने जो पत्थर मुझ पर फेंका था, मैंने उसी से अपनी इमारत बनाना सीख लिया। मैंने इंडिया गॉट टैलेंट में भी कोशिश की थी, लेकिन वहां से रिजेक्ट हो गया। उस समय दुख हुआ, लेकिन बाद में समझ आया कि रिजेक्शन इस फील्ड का हिस्सा है। सवाल: फिर मुंबई आने का फैसला कब किया? जवाब: 2017 में मैं मुंबई आया। हालांकि उससे पहले 10वीं के बाद छुट्टियों में भी मुंबई आया था। परिवार के साथ आकर देखा कि ऑडिशन कहां होते हैं। मैंने कई जगह अपना परिचय दिया। जमशेदपुर लौटने के बाद भी एड्स के लिए ऑडिशन आने लगे। इससे भरोसा बढ़ा कि अगर कोशिश करता रहूंगा तो कुछ न कुछ जरूर होगा। सवाल: मुंबई आने के बाद आपने पढ़ाई और ऑडिशन दोनों कैसे संभाले? जवाब: मैं कॉलेज के लिए मुंबई आया था, इसलिए रूटीन बन गया था- सुबह कॉलेज और शाम को ऑडिशन। यही मेरे लिए अच्छा रहा। अगर मैं सिर्फ एक्टिंग के लिए आता और काम नहीं मिलता तो शायद बहुत मुश्किल होती। मैंने ऑडिशन देने के अपने तरीके भी निकाल लिए थे। कई बार दोस्तों या आसपास के लोगों को नहीं बताता था कि एक्टर बनने आया हूं। ऑडिशन के कपड़े बैग में रखता और कह देता था कि ट्यूशन के लिए जा रहा हूं। सवाल: इतने साल ऑडिशन देने के बाद पहला बड़ा मौका कैसे मिला? जवाब: करीब चार साल तक ऑडिशन देने के बाद मुझे विराट कोहली के साथ कोलगेट का एड मिला। लेकिन शूट से एक दिन पहले मेरा एक्सीडेंट हो गया। बाइक ने मुझे टक्कर मार दी और मेरा हाथ फ्रैक्चर हो गया। अस्पताल पहुंचा तो डॉक्टर ने आराम करने को कहा। लेकिन मेरे दिमाग में सिर्फ यही था कि अगले दिन मेरा पहला बड़ा शूट है, वह भी विराट कोहली के साथ। मैंने डॉक्टर से कहा कि प्लास्टर मत कीजिए, मुझे शूट करना है। पेनकिलर लेकर अगले दिन शूट पर चला गया। सवाल: उसके बाद फिल्म में पहला मौका कब मिला? जवाब: सुपर 30 से मेरा फिल्मी सफर शुरू हुआ। ऋतिक रोशन के साथ काम करने का मौका मिला। हालांकि फिल्म में मेरा रोल छोटा रह गया और मेरे हिस्से का काफी काम एडिट हो गया। लेकिन मेरे लिए वह बड़ा अनुभव था। सवाल: सुपर 30 के बाद भी आपको पहचान मिलने में समय लगा? जवाब: हां, मैंने उसके बाद भी काम किया। मेड इन हेवन, फील्स लाइक इश्क और दूसरे प्रोजेक्ट किए। लेकिन द आर्चीज के बाद चीजें बदलीं। फिल्म में मुझे जुगहेड जोन्स का किरदार मिला और लोगों ने मुझे नोटिस किया। सवाल: द आर्चीज के दौरान शाहरुख खान से मुलाकात का मौका भी मिला? जवाब: हां, वह मेरे लिए खास अनुभव था। शाहरुख सर से मिलना अपने आप में बड़ी बात थी। मैं उन्हें देखकर बड़ा हुआ हूं। द आर्चीज के प्रीमियर में उनसे मिलने और बात करने का मौका मिला। उन्होंने मेरे काम को लेकर जो बातें कहीं, वह मेरे लिए बहुत मायने रखती हैं। उन्होंने कहा था- बेटा, बस अच्छा काम करते रहो, यही मैंने भी किया है।ऐसे पलों से आपको लगता है कि आपकी मेहनत सही दिशा में जा रही है। सवाल: इसके बाद प्यार पैसा प्राफिट में महवश के साथ काम किया। इस शो को लेकर काफी बातें हुईं, खासकर इंटिमेट सीन को लेकर, क्या कहना चाहोगे? जवाब: वह बात काफी बढ़ा-चढ़ाकर कही गई। शो में ऐसा कोई इंटिमेट सीन नहीं था, जैसा सोशल मीडिया के कुछ थंबनेल में दिखाया गया। एक किसिंग सीन भी था, जिसे हमने चीट करके शूट किया था। असल में कहानी अच्छी थी और मुझे अपना किरदार पसंद आया, इसलिए मैंने शो किया। कुछ लोगों ने सिर्फ व्यूज के लिए चीजों को अलग तरह से पेश किया। सवाल: इसी शो के दौरान आपको ऑपरेशन सफेद सागर का ऑफर मिला? जवाब: हां। जब प्यार पैसा प्राफिट की शूटिंग चल रही थी, उसी दौरान मुझे ऑपरेशन सफेद सागर के ऑडिशन का फोन आया। पहले मुझसे मूंछों में तस्वीरें मांगी गईं। मैंने मूंछ रखकर फोटो भेजी और सोचा कि पता नहीं कैसा किरदार होगा। बाद में पता चला कि एयरफोर्स ऑफिसर का रोल है। स्क्रिप्ट पढ़ी तो मेरे रोंगटे खड़े हो गए। यह कारगिल युद्ध और एयरफोर्स की एक सच्ची कहानी से जुड़ी है। मुझे लगा कि ऐसा किरदार करने का मौका छोड़ना नहीं चाहिए। सवाल: एयरफोर्स ऑफिसर बनने के लिए सबसे अलग अनुभव क्या रहा? जवाब: असली एयरफोर्स स्टेशन पर शूट करना। फाइटर जेट के सामने खड़े होना और कॉकपिट में बैठना मेरे लिए अविश्वसनीय था। कॉकपिट में इतने कंट्रोल थे कि मैं सोच रहा था कि पायलट इन्हें याद कैसे रखते हैं। जिस मिग में मैं बैठा, वह कारगिल युद्ध के समय इस्तेमाल हुआ था। उसे देखकर एहसास होता
हाथ फ्रैक्चर था, अगले दिन विराट कोहली के साथ शूट:मिहिर आहूजा बोले- शाहरुख की तारीफ से लगा, मेहनत सही दिशा में जा रही है

जमशेदपुर से मुंबई आए मिहिर आहूजा ने एक्टिंग के लिए करीब चार साल तक ऑडिशन दिए। सुपर 30 से फिल्मी सफर शुरू हुआ, द आर्चीज से पहचान मिली और अब ऑपरेशन सफेद सागर में एयरफोर्स ऑफिसर के किरदार में नजर आ रहे हैं। दैनिक भास्कर से बातचीत में मिहिर ने संघर्ष, रिजेक्शन, शाहरुख खान से मुलाकात और प्यार पैसा प्राफिट को लेकर हुई चर्चा पर बात की। सवाल: जमशेदपुर में रहते हुए एक्टिंग की तरफ आपका झुकाव कैसे हुआ? जवाब: मुझे याद नहीं कि मैंने कभी एक्टिंग के अलावा कुछ और करने के बारे में सोचा हो। सातवीं-आठवीं क्लास में ही तय कर लिया था कि मुझे एक्टर बनना है। घर के फंक्शन में मैं रिश्तेदारों की मिमिक्री करता था। लोग खुश होते थे और मुझे भी परफॉर्म करने में मजा आता था। वहीं से लगा कि मुझे यही करना है। सवाल: स्कूल के दिनों में जब आप एक्टिंग को लेकर इतने सीरियस थे, तो क्या लोगों ने आपका मजाक भी उड़ाया? जवाब: जमशेदपुर में मैंने एक छोटी-सी शॉर्ट फिल्म की थी। उसके बाद स्कूल में चर्चा होने लगी कि मैं फिल्म शूट करके आया हूं। उसी दौरान 10वीं में एक दिन मैं नोटबुक नहीं लेकर आया। टीचर ने मेरी नोटबुक डस्टबिन में फेंकते हुए कहा, ‘तुम खुद को सुपरस्टार समझते हो? तुम सुपरस्टार नहीं हो और कभी बन भी नहीं पाओगे।’ मैंने उसी दिन उनकी ये बात लिखकर रख ली थी। आज भी वो कागज मेरे पास है। उस दिन उन्होंने जो पत्थर मुझ पर फेंका था, मैंने उसी से अपनी इमारत बनाना सीख लिया। मैंने इंडिया गॉट टैलेंट में भी कोशिश की थी, लेकिन वहां से रिजेक्ट हो गया। उस समय दुख हुआ, लेकिन बाद में समझ आया कि रिजेक्शन इस फील्ड का हिस्सा है। सवाल: फिर मुंबई आने का फैसला कब किया? जवाब: 2017 में मैं मुंबई आया। हालांकि उससे पहले 10वीं के बाद छुट्टियों में भी मुंबई आया था। परिवार के साथ आकर देखा कि ऑडिशन कहां होते हैं। मैंने कई जगह अपना परिचय दिया। जमशेदपुर लौटने के बाद भी एड्स के लिए ऑडिशन आने लगे। इससे भरोसा बढ़ा कि अगर कोशिश करता रहूंगा तो कुछ न कुछ जरूर होगा। सवाल: मुंबई आने के बाद आपने पढ़ाई और ऑडिशन दोनों कैसे संभाले? जवाब: मैं कॉलेज के लिए मुंबई आया था, इसलिए रूटीन बन गया था- सुबह कॉलेज और शाम को ऑडिशन। यही मेरे लिए अच्छा रहा। अगर मैं सिर्फ एक्टिंग के लिए आता और काम नहीं मिलता तो शायद बहुत मुश्किल होती। मैंने ऑडिशन देने के अपने तरीके भी निकाल लिए थे। कई बार दोस्तों या आसपास के लोगों को नहीं बताता था कि एक्टर बनने आया हूं। ऑडिशन के कपड़े बैग में रखता और कह देता था कि ट्यूशन के लिए जा रहा हूं। सवाल: इतने साल ऑडिशन देने के बाद पहला बड़ा मौका कैसे मिला? जवाब: करीब चार साल तक ऑडिशन देने के बाद मुझे विराट कोहली के साथ कोलगेट का एड मिला। लेकिन शूट से एक दिन पहले मेरा एक्सीडेंट हो गया। बाइक ने मुझे टक्कर मार दी और मेरा हाथ फ्रैक्चर हो गया। अस्पताल पहुंचा तो डॉक्टर ने आराम करने को कहा। लेकिन मेरे दिमाग में सिर्फ यही था कि अगले दिन मेरा पहला बड़ा शूट है, वह भी विराट कोहली के साथ। मैंने डॉक्टर से कहा कि प्लास्टर मत कीजिए, मुझे शूट करना है। पेनकिलर लेकर अगले दिन शूट पर चला गया। सवाल: उसके बाद फिल्म में पहला मौका कब मिला? जवाब: सुपर 30 से मेरा फिल्मी सफर शुरू हुआ। ऋतिक रोशन के साथ काम करने का मौका मिला। हालांकि फिल्म में मेरा रोल छोटा रह गया और मेरे हिस्से का काफी काम एडिट हो गया। लेकिन मेरे लिए वह बड़ा अनुभव था। सवाल: सुपर 30 के बाद भी आपको पहचान मिलने में समय लगा? जवाब: हां, मैंने उसके बाद भी काम किया। मेड इन हेवन, फील्स लाइक इश्क और दूसरे प्रोजेक्ट किए। लेकिन द आर्चीज के बाद चीजें बदलीं। फिल्म में मुझे जुगहेड जोन्स का किरदार मिला और लोगों ने मुझे नोटिस किया। सवाल: द आर्चीज के दौरान शाहरुख खान से मुलाकात का मौका भी मिला? जवाब: हां, वह मेरे लिए खास अनुभव था। शाहरुख सर से मिलना अपने आप में बड़ी बात थी। मैं उन्हें देखकर बड़ा हुआ हूं। द आर्चीज के प्रीमियर में उनसे मिलने और बात करने का मौका मिला। उन्होंने मेरे काम को लेकर जो बातें कहीं, वह मेरे लिए बहुत मायने रखती हैं। उन्होंने कहा था- बेटा, बस अच्छा काम करते रहो, यही मैंने भी किया है।ऐसे पलों से आपको लगता है कि आपकी मेहनत सही दिशा में जा रही है। सवाल: इसके बाद प्यार पैसा प्राफिट में महवश के साथ काम किया। इस शो को लेकर काफी बातें हुईं, खासकर इंटिमेट सीन को लेकर, क्या कहना चाहोगे? जवाब: वह बात काफी बढ़ा-चढ़ाकर कही गई। शो में ऐसा कोई इंटिमेट सीन नहीं था, जैसा सोशल मीडिया के कुछ थंबनेल में दिखाया गया। एक किसिंग सीन भी था, जिसे हमने चीट करके शूट किया था। असल में कहानी अच्छी थी और मुझे अपना किरदार पसंद आया, इसलिए मैंने शो किया। कुछ लोगों ने सिर्फ व्यूज के लिए चीजों को अलग तरह से पेश किया। सवाल: इसी शो के दौरान आपको ऑपरेशन सफेद सागर का ऑफर मिला? जवाब: हां। जब प्यार पैसा प्राफिट की शूटिंग चल रही थी, उसी दौरान मुझे ऑपरेशन सफेद सागर के ऑडिशन का फोन आया। पहले मुझसे मूंछों में तस्वीरें मांगी गईं। मैंने मूंछ रखकर फोटो भेजी और सोचा कि पता नहीं कैसा किरदार होगा। बाद में पता चला कि एयरफोर्स ऑफिसर का रोल है। स्क्रिप्ट पढ़ी तो मेरे रोंगटे खड़े हो गए। यह कारगिल युद्ध और एयरफोर्स की एक सच्ची कहानी से जुड़ी है। मुझे लगा कि ऐसा किरदार करने का मौका छोड़ना नहीं चाहिए। सवाल: एयरफोर्स ऑफिसर बनने के लिए सबसे अलग अनुभव क्या रहा? जवाब: असली एयरफोर्स स्टेशन पर शूट करना। फाइटर जेट के सामने खड़े होना और कॉकपिट में बैठना मेरे लिए अविश्वसनीय था। कॉकपिट में इतने कंट्रोल थे कि मैं सोच रहा था कि पायलट इन्हें याद कैसे रखते हैं। जिस मिग में मैं बैठा, वह कारगिल युद्ध के समय इस्तेमाल हुआ था। उसे देखकर एहसास होता
अमिताभ बच्चन ने स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दी:हाथ में तिरंगा पकड़कर जोर से वंदे मातरम कहा

बॉलीवुड अभिनेता अमिताभ बच्चन ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दीं। इस दौरान वह हाथ में तिरंगा पकड़े हुए नजर आए और उन्होंने जोर से वंदे मातरम कहा।
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बॉलीवुड अभिनेता अमिताभ बच्चन ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दीं। इस दौरान वह हाथ में तिरंगा पकड़े हुए नजर आए और उन्होंने जोर से वंदे मातरम कहा।
विद्युत जामवाल का देसी मार्शल आर्ट अंदाज:स्वतंत्रता दिवस पर शेयर किया वीडियो, गतका के वड़ा-चक्कर से दिखाया हुनर; 16 अक्टूबर को रिलीज होगी 'स्ट्रीट फाइटर'

बॉलीवुड एक्टर और मार्शल आर्टिस्ट विद्युत जामवाल अपने फिजिकल हुनर से चर्चा में हैं। स्वतंत्रता दिवस पर उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर किया, जिसमें वे भारत की पारंपरिक मार्शल आर्ट गतका के खास हथियार ‘वड़ा-चक्कर’ का इस्तेमाल करते नजर आए। विद्युत ने बताया कि इस हथियार को नियंत्रित करने और इसकी घूमने की गति समझने के लिए वर्षों की प्रैक्टिस जरूरी होती है। उनका यह अंदाज हॉलीवुड फिल्म ‘स्ट्रीट फाइटर’ के किरदार धालसिम से भी जुड़ता है। फिल्म में विद्युत भारतीय योगी और मार्शल आर्टिस्ट धालसिम का किरदार निभा रहे हैं। विद्युत जामवाल सिर्फ फिल्मों में एक्शन करने वाले अभिनेता नहीं हैं, बल्कि मार्शल आर्ट उनकी पहचान का अहम हिस्सा है। यही वजह है कि ‘स्ट्रीट फाइटर’ में भारतीय फाइटर धालसिम के किरदार में नजर आने को लेकर उनके प्रशंसकों में खास उत्साह है। स्वतंत्रता दिवस पर शेयर किए वीडियो में विद्युत ने दिखाया कि भारतीय मार्शल आर्ट की बारीकियों पर उनकी मजबूत पकड़ है। वीडियो में विद्युत ‘वड़ा-चक्कर’ का इस्तेमाल करते दिखाई देते हैं। यह गतका से जुड़ा पारंपरिक हथियार है। इसे तेजी से घुमाते हुए नियंत्रण बनाए रखना आसान नहीं होता। विद्युत बताते हैं कि इसकी घूमने की गति और मोमेंटम समझने में लंबे समय की ट्रेनिंग लगती है। उनके मूवमेंट में स्पीड के साथ संतुलन और सटीकता भी नजर आती है। विद्युत ने सिर्फ गतका के इस हथियार का प्रदर्शन नहीं किया, बल्कि भारतीय मार्शल आर्ट की अलग-अलग परंपराओं के बीच समानताओं की ओर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने वड़ा-चक्कर की तुलना केरल की पारंपरिक मार्शल आर्ट कलरिपयट्टू के ‘उरुमी’ से की। दोनों हथियारों की अलग तकनीक और इस्तेमाल का तरीका है, लेकिन इनके साथ काम करने के लिए शरीर के संतुलन, गति और नियंत्रण की जरूरत होती है। धालसिम से जुड़ता है विद्युत का असली हुनर ‘स्ट्रीट फाइटर’ में विद्युत जामवाल धालसिम की भूमिका निभा रहे हैं। पैरामाउंट पिक्चर्स की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक फिल्म में उनका किरदार धालसिम है। गेम की दुनिया में धालसिम भारतीय योगी और मार्शल आर्टिस्ट के तौर पर जाना जाता है। उसकी पहचान सिर्फ लड़ाई की तकनीक से नहीं, बल्कि योग, अनुशासन और आध्यात्मिक सोच से भी जुड़ी है। ऐसे में विद्युत की असल जिंदगी की मार्शल आर्ट ट्रेनिंग इस किरदार को अलग तरह की प्रामाणिकता देती है। विद्युत लंबे समय से अलग-अलग भारतीय मार्शल आर्ट और फिजिकल ट्रेनिंग का अभ्यास करते रहे हैं। फिल्मों में भी उनकी पहचान ऐसे एक्टर की रही है, जो एक्शन सीक्वेंस में स्टंट और मार्शल आर्ट खुद करने के लिए जाने जाते हैं। अब हॉलीवुड की बड़ी गेम-फ्रेंचाइजी में भारतीय फाइटर का किरदार निभाना उनके करियर का बड़ा पड़ाव माना जा रहा है। हॉलीवुड में विद्युत का डेब्यू ‘स्ट्रीट फाइटर’ विद्युत जामवाल का हॉलीवुड डेब्यू है। फिल्म में उनके साथ नोआ सेंटीनियो, एंड्रयू कोजी, कैलिना लियांग, जेसन मोमोआ, 50 सेंट, कोडी रोड्स और डेविड डास्टमालचियन जैसे कलाकार नजर आएंगे। फिल्म का निर्देशन किताओ सकुराई ने किया है। फिल्म की कहानी 1993 के दौर में सेट है। इसमें चन-ली, रयू और केन को एक नए वर्ल्ड वॉरियर टूर्नामेंट में शामिल होने के लिए बुलाती हैं। टूर्नामेंट आगे चलकर बड़ी साजिश का हिस्सा बन जाता है और किरदारों को न सिर्फ अपने विरोधियों, बल्कि अपने अतीत का भी सामना करना पड़ता है। फिल्म का ट्रेलर अप्रैल 2026 में रिलीज हो चुका है, जिसमें विद्युत धालसिम के रूप में नजर आए। ट्रेलर के बाद उनके किरदार और एक्शन को लेकर भारतीय दर्शकों में खास दिलचस्पी देखने को मिली। 16 अक्टूबर को रिलीज होगी फिल्म ‘स्ट्रीट फाइटर’ 16 अक्टूबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। पैरामाउंट पिक्चर्स ने भी फिल्म की रिलीज डेट यही बताई है। भारत में फिल्म अंग्रेजी के साथ हिंदी, तमिल और तेलुगु में भी रिलीज होगी। स्वतंत्रता दिवस पर विद्युत का भारतीय मार्शल आर्ट प्रदर्शित करना सिर्फ सोशल मीडिया वीडियो नहीं, बल्कि उनके आने वाले हॉलीवुड किरदार से भी जुड़ा खास क्षण है। धालसिम जैसे भारतीय किरदार को निभाने वाले अभिनेता का देश की पारंपरिक युद्ध कलाओं को दुनिया के सामने दिखाना फिल्म के भारतीय कनेक्शन को और मजबूत करता है।
विद्युत जामवाल का देसी मार्शल आर्ट अंदाज:स्वतंत्रता दिवस पर शेयर किया वीडियो, गतका के वड़ा-चक्कर से दिखाया हुनर; 16 अक्टूबर को रिलीज होगी 'स्ट्रीट फाइटर'

बॉलीवुड एक्टर और मार्शल आर्टिस्ट विद्युत जामवाल अपने फिजिकल हुनर से चर्चा में हैं। स्वतंत्रता दिवस पर उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर किया, जिसमें वे भारत की पारंपरिक मार्शल आर्ट गतका के खास हथियार ‘वड़ा-चक्कर’ का इस्तेमाल करते नजर आए। विद्युत ने बताया कि इस हथियार को नियंत्रित करने और इसकी घूमने की गति समझने के लिए वर्षों की प्रैक्टिस जरूरी होती है। उनका यह अंदाज हॉलीवुड फिल्म ‘स्ट्रीट फाइटर’ के किरदार धालसिम से भी जुड़ता है। फिल्म में विद्युत भारतीय योगी और मार्शल आर्टिस्ट धालसिम का किरदार निभा रहे हैं। विद्युत जामवाल सिर्फ फिल्मों में एक्शन करने वाले अभिनेता नहीं हैं, बल्कि मार्शल आर्ट उनकी पहचान का अहम हिस्सा है। यही वजह है कि ‘स्ट्रीट फाइटर’ में भारतीय फाइटर धालसिम के किरदार में नजर आने को लेकर उनके प्रशंसकों में खास उत्साह है। स्वतंत्रता दिवस पर शेयर किए वीडियो में विद्युत ने दिखाया कि भारतीय मार्शल आर्ट की बारीकियों पर उनकी मजबूत पकड़ है। वीडियो में विद्युत ‘वड़ा-चक्कर’ का इस्तेमाल करते दिखाई देते हैं। यह गतका से जुड़ा पारंपरिक हथियार है। इसे तेजी से घुमाते हुए नियंत्रण बनाए रखना आसान नहीं होता। विद्युत बताते हैं कि इसकी घूमने की गति और मोमेंटम समझने में लंबे समय की ट्रेनिंग लगती है। उनके मूवमेंट में स्पीड के साथ संतुलन और सटीकता भी नजर आती है। विद्युत ने सिर्फ गतका के इस हथियार का प्रदर्शन नहीं किया, बल्कि भारतीय मार्शल आर्ट की अलग-अलग परंपराओं के बीच समानताओं की ओर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने वड़ा-चक्कर की तुलना केरल की पारंपरिक मार्शल आर्ट कलरिपयट्टू के ‘उरुमी’ से की। दोनों हथियारों की अलग तकनीक और इस्तेमाल का तरीका है, लेकिन इनके साथ काम करने के लिए शरीर के संतुलन, गति और नियंत्रण की जरूरत होती है। धालसिम से जुड़ता है विद्युत का असली हुनर ‘स्ट्रीट फाइटर’ में विद्युत जामवाल धालसिम की भूमिका निभा रहे हैं। पैरामाउंट पिक्चर्स की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक फिल्म में उनका किरदार धालसिम है। गेम की दुनिया में धालसिम भारतीय योगी और मार्शल आर्टिस्ट के तौर पर जाना जाता है। उसकी पहचान सिर्फ लड़ाई की तकनीक से नहीं, बल्कि योग, अनुशासन और आध्यात्मिक सोच से भी जुड़ी है। ऐसे में विद्युत की असल जिंदगी की मार्शल आर्ट ट्रेनिंग इस किरदार को अलग तरह की प्रामाणिकता देती है। विद्युत लंबे समय से अलग-अलग भारतीय मार्शल आर्ट और फिजिकल ट्रेनिंग का अभ्यास करते रहे हैं। फिल्मों में भी उनकी पहचान ऐसे एक्टर की रही है, जो एक्शन सीक्वेंस में स्टंट और मार्शल आर्ट खुद करने के लिए जाने जाते हैं। अब हॉलीवुड की बड़ी गेम-फ्रेंचाइजी में भारतीय फाइटर का किरदार निभाना उनके करियर का बड़ा पड़ाव माना जा रहा है। हॉलीवुड में विद्युत का डेब्यू ‘स्ट्रीट फाइटर’ विद्युत जामवाल का हॉलीवुड डेब्यू है। फिल्म में उनके साथ नोआ सेंटीनियो, एंड्रयू कोजी, कैलिना लियांग, जेसन मोमोआ, 50 सेंट, कोडी रोड्स और डेविड डास्टमालचियन जैसे कलाकार नजर आएंगे। फिल्म का निर्देशन किताओ सकुराई ने किया है। फिल्म की कहानी 1993 के दौर में सेट है। इसमें चन-ली, रयू और केन को एक नए वर्ल्ड वॉरियर टूर्नामेंट में शामिल होने के लिए बुलाती हैं। टूर्नामेंट आगे चलकर बड़ी साजिश का हिस्सा बन जाता है और किरदारों को न सिर्फ अपने विरोधियों, बल्कि अपने अतीत का भी सामना करना पड़ता है। फिल्म का ट्रेलर अप्रैल 2026 में रिलीज हो चुका है, जिसमें विद्युत धालसिम के रूप में नजर आए। ट्रेलर के बाद उनके किरदार और एक्शन को लेकर भारतीय दर्शकों में खास दिलचस्पी देखने को मिली। 16 अक्टूबर को रिलीज होगी फिल्म ‘स्ट्रीट फाइटर’ 16 अक्टूबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। पैरामाउंट पिक्चर्स ने भी फिल्म की रिलीज डेट यही बताई है। भारत में फिल्म अंग्रेजी के साथ हिंदी, तमिल और तेलुगु में भी रिलीज होगी। स्वतंत्रता दिवस पर विद्युत का भारतीय मार्शल आर्ट प्रदर्शित करना सिर्फ सोशल मीडिया वीडियो नहीं, बल्कि उनके आने वाले हॉलीवुड किरदार से भी जुड़ा खास क्षण है। धालसिम जैसे भारतीय किरदार को निभाने वाले अभिनेता का देश की पारंपरिक युद्ध कलाओं को दुनिया के सामने दिखाना फिल्म के भारतीय कनेक्शन को और मजबूत करता है।
सुनीता ने कहा- बेटी की उम्र की लड़की घुमा रहे:भड़ककर गोविंदा बोले- हद में रहो, बदनाम करने की कोई कसर नहीं छोड़ रहीं, जानिए पूरा बयान

पत्नी सुनीता के आपत्तिजनक बयानों पर गोविंदा भड़क गए हैं। सुनीता ने गोविंदा के को-एक्ट्रेस कोमल रानी स्वर्णकर के साथ स्पॉट होने पर कहा था कि गोविंदा बेटी की उम्र की लड़की घुमा रहे हैं, उन्हें शर्म आनी चाहिए। इतना ही नहीं सुनीता ने गोविंदा को एक्ट्रेस का शुगर डैडी तक कहा था। अब सुनीता के इन बयानों पर गोविंदा ने चेतावनी देकर कहा है कि उन्हें हद में रहना चाहिए। साथ ही एक्टर ने को-स्टार का बचाव भी किया और कहा कि सुनीता उन्हें बदनाम करने की कोई कसर नहीं छोड़ रही हैं। हाल ही में गोविंदा ने सुनीता पर कहा- ‘जो काम बाहर मिलता है, वो मैं करता नहीं हूं और जो मैं कर रहा हूं, उसमें आप हस्तक्षेप कर रही हैं। और जब अपना काम आप कर रही थीं, फिर चाहे वो कुकिंग शो (लाफ्टर शेफ) हो या लॉकअप हो, टीना (बेटी) से कहकर मुझे उसमें बुलवाया, मेरी सेवाएं लीं। खैर वो तो आपका हक है, लेकिन जिस वक्त मैंने फिल्म शुरू की है, आप एक भी कसर नहीं छोड़ रही हैं कि मैं लोगों के दिल से उतर जाऊं बदनाम हो जाऊं, या कुछ ऐसा हो जाए कि मेरा बिजनेस न हो।’ गोविंदा ने इस दौरान को-एक्ट्रेस कोमल रानी स्वर्णकर का बचाव करते हुए कहा, ‘कोई गरीब परिवार के लोग अगर फिल्म में आए हैं, तो उन्हें इस तरह बदनाम या लज्जित न कीजिए कि वो भाग जाएं। आप में क्षमता है, ताकत है, इज्जत, दौलत, शोहरत, सब दिया है ऊपर वाले ने। इसका मतलब ये नहीं कि जिसके पास ये नहीं है आप उसे जलील करें। ये आप पर शोभा नहीं देता।’ गोविंदा बोले- हद में रहिए सुनीता बार-बार बयान दे रही हैं कि गोविंदा इस उम्र में बेटी की उम्र की लड़की घुमा रहे हैं और शुगर डैडी बने हैं। इस पर गोविंदा ने कहा है, ‘ये जो उम्र का आपने सिलसिला चलाया है, तो आपको बता दूं कि देश के हर बड़े सुपरस्टार ने कम उम्र की नई लड़कियों के साथ काम किया है, उन्हें बड़ी फिल्में मिलीं। युवाओं के साथ काम करने पर वो युवा नजर आए। आप चाह नहीं रहीं कि मैं युवा कैसे लग सकता हूं। आप छोटी सी अपेक्षा के चलते एक बड़े बिजनेस में घात करने पर लगी हैं। आपके पीछे जो गैंग है, उससे हर कोई वाकिफ है। वो जल्द ही सामने आएगा, लेकिन आपके लिए ये शोभा नहीं देगा। मुझे लगता है कि आगे भी आपको कहीं न कहीं जरूरत पड़ेगी। कृपया ऐसे बयान देकर, जो आप ये पॉडकास्ट चला रही हैं, थोड़ा हद में रहिए, ऐसी आपसे प्रार्थना है।’ बहुत ज्यादा मां-बहन की गालियां देने लगी हैं- गोविंदा गोविंदा ये बयान देकर निकल ही रहे थे कि कुछ सेकेंड बाद वो पलटकर आए और कहा, ‘मैं ये भी कहना चाहूंगा कि सुनीता जी आप बहुत मां-बहन की गालियां देने लगी हैं। ईश्वर को मनाइए कि अगर लोग आपसे प्रेरित हो गए तो आप कहां आइना देखेंगी। कहीं आपके साथ ही लोग मां-बहन की गालियां देना शुरू कर देंगे, तो हम सब बहुत लज्जित हो जाएंगे। ये ठीक नहीं है। बहुत सस्ता कर दिया है मां-बहन का नाम। आपसे उम्मीद नहीं है।’ जानिए सुनीता के किस बयान पर भड़के गोविंदा हाल ही में गोविंदा को उनकी अपकमिंग कमबैक फिल्म रूपा की को-एक्ट्रेस के साथ स्पॉट किया गया। इस पर सुनीता ने कहा, गोविंदा अपनी बेटी की उम्र की लड़की को लेकर घूम रहे हैं और उन्हें इस बात पर थोड़ी शर्म आनी चाहिए। तुम्हारा शुगर डैडी इतना अमीर है, तो कपड़े ढंग के पहनो- सुनीता सुनीता आहूजा ने गोविंदा साथ दिखीं एक्ट्रेस कोमल के ड्रेसिंग सेंस पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि अगर सामने वाले का शुगर डैडी इतना अमीर है, तो कम से कम कपड़े तो ढंग के पहनने चाहिए। इंसान का अपना एक स्टैंडर्ड होना चाहिए। सुनीता ने खुद का उदाहरण देते हुए कहा कि लोगों को देखना चाहिए कि वे किस तरह स्टाइल के साथ रहते हैं। उन्होंने पूरे वाकये को बहुत खराब और घटिया सोच करार दिया। को-एक्ट्रेस के साथ गोविंदा स्पॉट हुए थे गोविंदा हाल ही में एक्ट्रेस कोमल रानी स्वर्णकार के साथ एयरपोर्ट पर दूसरी बार स्पॉट हुए थे। बता दें कि सुनीता ने कुछ समय पहले ही कहा था कि उन्हें कोमल नाम से नफरत है। गोविंदा को एक्ट्रेस कोमल रानी स्वर्णकार के साथ 7 अगस्त को एयरपोर्ट पर एक साथ स्पॉट किया गया था। सुनीता ने मिस मालिनी को दिए इंटरव्यू में गोविंदा के अफेयर रूमर्स पर बात करते हुए कहा था कि जवानी में गलतियां होती हैं, लेकिन 63 की उम्र में ये सब सुनना ठीक नहीं है। करियर के चलते गोविंदा ने सुनीता से शादी को लगभग दो साल तक दुनिया से छिपाकर रखा था। सुनीता ने कहा था, ‘ये नाम थोड़ा गड़बड़ है। मुझे कोमल नाम से नफरत है। एक है कोमल, एक्स वाय जेड है कोई। मुझे उससे नफरत है।’ गोविंदा के साथ बॉलीवुड डेब्यू करने वाली हैं कोमल गोविंदा 7 साल बाद बॉलीवुड कमबैक कर रहे हैं और अपने प्रोडक्शन की इस फिल्म से कोमल को भी लॉन्च कर रहे हैं। सिर्फ यही नहीं कोमल के गोविंदा की दूसरी फिल्म दुनियादारी में होने की भी खबरें हैं। गोविंदा ने जुलाई में अपकमिंग फिल्म रूपा से जुड़ी एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कोमल का मीडिया से परिचय करवाया और तारीफ कर कहा कि फिल्म देखने के बाद दर्शक उन्हें अच्छी एक्ट्रेस मानेंगे। गोविंदा ने हाल ही में सुनीता के उन आरोपों पर जवाब दिया, जिनमें उन्होंने उनके अफेयर्स की बात कही थी। सुनीता के लगाए हुए अफेयर के आरोपों पर ANI से बातचीत में गोविंदा ने कहा, वह मुझे बहुत प्यार से गाली देती हैं और मैं उनके हाथ से खाता भी हूं। मुझे लगता है कि जो लोग जहां हैं और भगवान ने उन्हें जो भी भूमिका दी है, अगर वो वहां नहीं होते हम कामयाब नहीं हो सकते थे। गोविंदा बोले- दूरी बनाने के लिए आरोप लगाना जरूरी नहीं गोविंदा ने इशारा किया कि उनके बारे में खुलकर बोलने के बाद सुनीता को स्टारडम मिला। उन्होंने कहा, बहुत सी बातें ऐसी होती हैं, जो बयां नहीं की जातीं। क्या दूरी बनाने








