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कैम्ब्रिज के सबसे कम उम्र के ब्लैक प्रोफेसर की मौत:घर में बेहोश मिले, रिसर्च पर उठे सवालों के बाद यूनिवर्सिटी से इस्तीफा दिया था

कैम्ब्रिज के सबसे कम उम्र के ब्लैक प्रोफेसर की मौत:घर में बेहोश मिले, रिसर्च पर उठे सवालों के बाद यूनिवर्सिटी से इस्तीफा दिया था

इंग्लैंड की कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के सबसे कम उम्र के अश्वेत प्रोफेसर रहे जेसन अर्डे का 41 साल की उम्र में निधन हो गया। वे शिक्षा और समाज से जुड़े विषयों पर रिसर्च और अध्यापन करते थे। शुक्रवार दोपहर करीब 3 बजे उन्हें दक्षिण लंदन के बैटरसी स्थित उनके घर में बेहोश पाया गया। एंबुलेंस टीम ने उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन उनकी मौत हो गई। पुलिस के मुताबिक, उनकी मौत अचानक हुई। अभी तक ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है जिससे मौत को संदिग्ध माना जाए। पुलिस परिवार के संपर्क में है और मामले की जांच कर रही है। मौत से कुछ दिन पहले ही कैम्ब्रिज से दिया था इस्तीफा जेसन अर्डे ने 5 अगस्त को कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से इस्तीफा दिया था। यह फैसला उनकी कुछ रिसर्च को लेकर उठे सवालों के बीच आया था। कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी ने उनकी नियुक्ति और यूनिवर्सिटी में उनके कामकाज की जांच भी शुरू की थी। यूनिवर्सिटी यह पता लगा रही थी कि अर्डे को 2022 में प्रोफेसर की नौकरी कैसे मिली और उनके काम के दौरान क्या हुआ। इस्तीफा देने के बाद अर्डे ने कहा था कि लगातार लग रहे आरोपों और उनके बारे में सार्वजनिक रूप से की जा रही टिप्पणियों का उन पर बहुत गहरा असर पड़ा। रिसर्च के कुछ हिस्सों पर नकल के आरोप लगे थे अर्डे ने 2015 में ब्रिटेन की लिवरपूल जॉन मूर्स यूनिवर्सिटी से पीएचडी की थी। इस दौरान उन्होंने एक रिसर्च रिपोर्ट लिखी थी। बाद में उनकी रिसर्च के कुछ हिस्सों पर आरोप लगे कि उन्होंने दूसरे लोगों के लिखे काम को बिना उचित श्रेय दिए अपनी रिसर्च में इस्तेमाल किया। आसान भाषा में कहें तो उन पर रिसर्च में नकल करने का आरोप लगा था। अर्डे ने इन आरोपों को गलत बताया था। इसके बाद उनकी कुछ दूसरी रिसर्च में भी गलतियां होने के आरोप लगाए गए। नियुक्ति पर भी उठे थे सवाल अर्डे की कैम्ब्रिज में नियुक्ति को लेकर भी विवाद हुआ था। कुछ लोगों ने आरोप लगाया था कि उन्हें उनकी योग्यता के बजाय यूनिवर्सिटी की विविधता बढ़ाने वाली नीति के तहत नौकरी दी गई। इस तरह की नीतियों को आम तौर पर DEI कहा जाता है। इसका मतलब है कि अलग-अलग समुदायों और कम प्रतिनिधित्व वाले लोगों को संस्थानों में बराबर मौके दिए जाएं और उनकी भागीदारी बढ़ाई जाए। हालांकि, ब्रिटेन की शिक्षक यूनियन के नेता डेनियल कबेडे ने अर्डे का बचाव किया था। उन्होंने कहा था कि अर्डे को सार्वजनिक रूप से बहुत बुरी तरह निशाना बनाया गया। उन्होंने ब्रिटिश मीडिया और दक्षिणपंथी टिप्पणीकारों के एक वर्ग पर अर्डे के खिलाफ नस्लवादी अभियान चलाने का आरोप लगाया था। परिवार बोला- गलत जानकारी के अभियान ने उन्हें बहुत परेशान किया अर्डे के परिवार ने उनके निधन पर गहरा दुख जताया। परिवार ने कहा कि जेसन के बारे में फैलाई जा रही गलत जानकारी के अभियान का उन पर बहुत बुरा असर पड़ा था। परिवार के मुताबिक, अर्डे शांत स्वभाव के व्यक्ति थे और हमेशा दूसरों में अच्छाई देखने की कोशिश करते थे। परिवार ने मीडिया से अपील की कि अब उन्हें अकेला छोड़ दिया जाए। उन्होंने जेसन और उनके परिवार के खिलाफ लंबे समय से चल रहे उत्पीड़न को रोकने की भी अपील की। कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी की प्रमुख डेबोरा प्रेंटिस ने अर्डे की मौत पर दुख जताया। उन्होंने कहा कि इस मुश्किल समय में उनकी संवेदनाएं अर्डे के परिवार और दोस्तों के साथ हैं। ब्रिटेन की शिक्षा मंत्री लूसी पॉवेल ने भी उनके निधन पर शोक जताया। 2022 में कैम्ब्रिज में बनाया था इतिहास जेसन अर्डे 2022 में कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के शिक्षा विभाग में प्रोफेसर बने थे। वे यूनिवर्सिटी के सबसे कम उम्र के अश्वेत प्रोफेसर थे। कैम्ब्रिज में लंबे समय से अश्वेत लोगों की संख्या कम रही है। ऐसे में अर्डे की नियुक्ति को यूनिवर्सिटी के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना गया था। उनकी मौत ऐसे समय हुई है, जब उनकी नियुक्ति और रिसर्च को लेकर यूनिवर्सिटी में जांच चल रही थी।

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इंग्लैंड की कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के सबसे कम उम्र के अश्वेत प्रोफेसर रहे जेसन अर्डे का 41 साल की उम्र में निधन हो गया। वे शिक्षा और समाज से जुड़े विषयों पर रिसर्च और अध्यापन करते थे। शुक्रवार दोपहर करीब 3 बजे उन्हें दक्षिण लंदन के बैटरसी स्थित उनके घर में बेहोश पाया गया। एंबुलेंस टीम ने उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन उनकी मौत हो गई। पुलिस के मुताबिक, उनकी मौत अचानक हुई। अभी तक ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है जिससे मौत को संदिग्ध माना जाए। पुलिस परिवार के संपर्क में है और मामले की जांच कर रही है। मौत से कुछ दिन पहले ही कैम्ब्रिज से दिया था इस्तीफा जेसन अर्डे ने 5 अगस्त को कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से इस्तीफा दिया था। यह फैसला उनकी कुछ रिसर्च को लेकर उठे सवालों के बीच आया था। कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी ने उनकी नियुक्ति और यूनिवर्सिटी में उनके कामकाज की जांच भी शुरू की थी। यूनिवर्सिटी यह पता लगा रही थी कि अर्डे को 2022 में प्रोफेसर की नौकरी कैसे मिली और उनके काम के दौरान क्या हुआ। इस्तीफा देने के बाद अर्डे ने कहा था कि लगातार लग रहे आरोपों और उनके बारे में सार्वजनिक रूप से की जा रही टिप्पणियों का उन पर बहुत गहरा असर पड़ा। रिसर्च के कुछ हिस्सों पर नकल के आरोप लगे थे अर्डे ने 2015 में ब्रिटेन की लिवरपूल जॉन मूर्स यूनिवर्सिटी से पीएचडी की थी। इस दौरान उन्होंने एक रिसर्च रिपोर्ट लिखी थी। बाद में उनकी रिसर्च के कुछ हिस्सों पर आरोप लगे कि उन्होंने दूसरे लोगों के लिखे काम को बिना उचित श्रेय दिए अपनी रिसर्च में इस्तेमाल किया। आसान भाषा में कहें तो उन पर रिसर्च में नकल करने का आरोप लगा था। अर्डे ने इन आरोपों को गलत बताया था। इसके बाद उनकी कुछ दूसरी रिसर्च में भी गलतियां होने के आरोप लगाए गए। नियुक्ति पर भी उठे थे सवाल अर्डे की कैम्ब्रिज में नियुक्ति को लेकर भी विवाद हुआ था। कुछ लोगों ने आरोप लगाया था कि उन्हें उनकी योग्यता के बजाय यूनिवर्सिटी की विविधता बढ़ाने वाली नीति के तहत नौकरी दी गई। इस तरह की नीतियों को आम तौर पर DEI कहा जाता है। इसका मतलब है कि अलग-अलग समुदायों और कम प्रतिनिधित्व वाले लोगों को संस्थानों में बराबर मौके दिए जाएं और उनकी भागीदारी बढ़ाई जाए। हालांकि, ब्रिटेन की शिक्षक यूनियन के नेता डेनियल कबेडे ने अर्डे का बचाव किया था। उन्होंने कहा था कि अर्डे को सार्वजनिक रूप से बहुत बुरी तरह निशाना बनाया गया। उन्होंने ब्रिटिश मीडिया और दक्षिणपंथी टिप्पणीकारों के एक वर्ग पर अर्डे के खिलाफ नस्लवादी अभियान चलाने का आरोप लगाया था। परिवार बोला- गलत जानकारी के अभियान ने उन्हें बहुत परेशान किया अर्डे के परिवार ने उनके निधन पर गहरा दुख जताया। परिवार ने कहा कि जेसन के बारे में फैलाई जा रही गलत जानकारी के अभियान का उन पर बहुत बुरा असर पड़ा था। परिवार के मुताबिक, अर्डे शांत स्वभाव के व्यक्ति थे और हमेशा दूसरों में अच्छाई देखने की कोशिश करते थे। परिवार ने मीडिया से अपील की कि अब उन्हें अकेला छोड़ दिया जाए। उन्होंने जेसन और उनके परिवार के खिलाफ लंबे समय से चल रहे उत्पीड़न को रोकने की भी अपील की। कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी की प्रमुख डेबोरा प्रेंटिस ने अर्डे की मौत पर दुख जताया। उन्होंने कहा कि इस मुश्किल समय में उनकी संवेदनाएं अर्डे के परिवार और दोस्तों के साथ हैं। ब्रिटेन की शिक्षा मंत्री लूसी पॉवेल ने भी उनके निधन पर शोक जताया। 2022 में कैम्ब्रिज में बनाया था इतिहास जेसन अर्डे 2022 में कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के शिक्षा विभाग में प्रोफेसर बने थे। वे यूनिवर्सिटी के सबसे कम उम्र के अश्वेत प्रोफेसर थे। कैम्ब्रिज में लंबे समय से अश्वेत लोगों की संख्या कम रही है। ऐसे में अर्डे की नियुक्ति को यूनिवर्सिटी के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना गया था। उनकी मौत ऐसे समय हुई है, जब उनकी नियुक्ति और रिसर्च को लेकर यूनिवर्सिटी में जांच चल रही थी।

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