कुणाल कोहली बोले-रणवीर सिंह फिर फ्लॉप फिल्म कर सकते हैं:फ्लॉप फिल्मों से स्टारडम खत्म नहीं होता, बॉक्स ऑफिस से एक्टर को जज न करें

फिल्म डायरेक्टर कुणाल कोहली ने अभिनेता रणवीर सिंह की फिल्मों के फ्लॉप परफॉरमेंस और बॉक्स ऑफिस के दबाव पर खुलकर बात की है। एनडीटीवी को दिए इंटरव्यू में कुणाल ने कहा कि रणवीर सिंह आगे भी हिट फिल्में देंगे और वे फिर से फ्लॉप फिल्म भी दे सकते हैं, यह कोई बड़ी बात नहीं है। कुणाल के मुताबिक, दुनिया का कोई भी बड़ा स्टार फ्लॉप फिल्मों से बच नहीं सकता है। उन्होंने दर्शकों से अपील की कि किसी भी कलाकार के टैलेंट को सिर्फ फिल्म के हिट या फ्लॉप होने से तय न करें। फ्लॉप फिल्म देना कोई बड़ी बात नहीं कुणाल कोहली ने फिल्म इंडस्ट्री और दर्शकों के रवैये पर बात की। उन्होंने कहा कि जब किसी स्टार की फिल्म नहीं चलती, तो लोग जरूरत से ज्यादा प्रतिक्रिया देने लगते हैं। फिल्म इंडस्ट्री में कोई भी ऐसा सुपरस्टार नहीं है जिसकी कोई फिल्म फ्लॉप न हुई हो। हर एक्टर, प्रोड्यूसर और डायरेक्टर के जीवन में ऐसा समय आता है। एक फ्लॉप फिल्म किसी कलाकार की काबिलियत तय नहीं कर सकती। रणवीर सिंह फिर से हिट फिल्म देंगे और वे दोबारा फ्लॉप फिल्म भी दे सकते हैं। यह सब फिल्म बिजनेस का हिस्सा है, इसे लेकर ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं है। बॉक्स ऑफिस से जज करना दर्शकों की कमजोरी रणवीर सिंह की एक्टिंग की तारीफ करते हुए कुणाल ने कहा कि वे एक शानदार अभिनेता हैं। फिल्म ‘धुरंधर’ में उन्होंने कुछ दृश्यों में बेहतरीन काम किया है। यही नहीं, रणवीर ने उन फिल्मों में भी शानदार एक्टिंग की है जो बॉक्स ऑफिस पर नहीं चल सकी थीं। कुणाल ने दर्शकों को नसीहत देते हुए कहा कि केवल टिकटों की बिक्री देखकर किसी के काम का फैसला करना फिल्म देखने वालों की कमजोरी को दिखाता है। दर्शकों को इस सोच से आगे बढ़कर फिल्म की कहानी और परफॉर्मेंस पर ध्यान देना चाहिए। ‘धुरंधर 2’ का समर्थन किया था इससे पहले रिलीज होने के समय कुणाल धुरंधर 2 का समर्थन किया था। उन्होंने बताया कि फिल्म की रिलीज से पहले इंडस्ट्री के कई बड़े निर्देशकों का मानना था कि यह फिल्म फ्लॉप हो जाएगी। कुणाल कोहली ने स्क्रीन से बातचीत में कहा कि जब फिल्म रिलीज होने वाली थी, तब उन्होंने कई बड़े निर्देशकों से बात की थी। कुणाल के मुताबिक, इंडस्ट्री ने इस फिल्म का सपोर्ट नहीं किया था। मैंने जिन बड़े डायरेक्टर्स से बात की, उनका कहना था कि फिल्म सोमवार को बैठ जाएगी। भारत की दूसरी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म धुरंधर 2 ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार कमाई करते हुए भारत में दूसरी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बनने का रिकॉर्ड बनाया। सैकनिल्क के मुताबिक, फिल्म ने अब तक 1800 करोड़ रुपए ग्रॉस कमाई कर ली है। धुरंधर 2 में रणवीर सिंह मुख्य भूमिका में थे। इसके अलावा फिल्म में संजय दत्त, आर माधवन, अर्जुन रामपाल, सारा अर्जुन, गौरव गेरा और राकेश बेदी जैसे कलाकार भी नजर आए। जबकि पहले पार्ट में अक्षय खन्ना ने भी अहम भूमिका निभाई थी। धुरंधर (2025) और धुरंधर 2 (2026) दोनों ही फिल्मों का निर्देशन आदित्य धर ने किया। फिल्म को ज्योति देशपांडे और आदित्य धर ने मिलकर जियो स्टूडियोज और B62 स्टूडियोज के बैनर तले प्रोड्यूस किया है।
एनएफएल प्लेयर जैक क्रॉफर्ड का लाइफ लेसन:स्टेडियम के स्टार को 12 लोगों ने डराया, ओपन माइक ने सिखाया- डर का सामना करो

6 फीट 5 इंच लंबा शरीर, एनएफएल के बड़े-बड़े स्टेडियमों का अनुभव और करोड़ों दर्शकों के सामने खेलने का आत्मविश्वास। लेकिन जब अमेरिकी फुटबॉलर जैक क्रॉफर्ड पहली बार न्यूयॉर्क के एक छोटे से कॉमेडी क्लब में ओपन माइक करने पहुंचे, तो उनके हाथ कांप रहे थे। कमरे में मुश्किल से 12 लोग थे। पांच मिनट की परफॉर्मेंस में उनके जोक्स पर कोई नहीं हंसा। इसी असफलता ने उन्हें जिंदगी का सबसे बड़ा सबक सिखाया कि डर से भागने के बजाय उसका सामना करो। 1. डर का सामना करने से बढ़ता है आत्मविश्वास 37 वर्षीय जैक क्रॉफर्ड कई सालों से स्टैंडअप कॉमेडी करना चाहते थे, लेकिन लोगों के जज करने का डर उन्हें रोकता रहा। फिर एक दिन उनका दोस्त उन्हें अचानक ओपन माइक में ले गया। पहली परफॉर्मेंस बुरी रही, लेकिन उसी दिन उन्होंने महसूस किया कि सबसे बड़ा डर असलियत में उतना बड़ा नहीं होता। इसके बाद उनका आत्मविश्वास बढ़ता गया। उन्होंने कहा, ‘जब आप सबसे डरावनी चीज कर लेते हैं, तो बाकी चीजें छोटी लगने लगती हैं। ’2. गलतियां करना हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा नेशनल फुटबॉल लीग (एनएफएल) के करियर में भी क्रॉफर्ड का सबसे बड़ा दुश्मन डर ही था। अभ्यास में वे शानदार खेलते थे, लेकिन मैच में गलती का डर उन्हें रोक देता था। डलास काउबॉयज के कोच रॉड मारिनेली ने उनसे कहा, ‘खूब गलती करो, लेकिन मैच में पूरी ताकत से खेलो।’ इसी सोच से उनकी जिंदगी बदल गई। क्रॉफर्ड ने समझा कि हर गलती शर्मिंदगी नहीं होती, बल्कि सीखने का मौका होती है। यही सोच उन्हें स्टैंडअप कॉमेडी में भी काम आई। 3. असहजता कमजोरी नहीं, बल्कि ग्रोथ का संकेत शिकागो यूनिवर्सिटी की एक रिसर्च में पाया गया कि जो लोग असहज और शर्मिंदगी वाले हालात को सीखने का हिस्सा मानते हैं, वे तेजी से आगे बढ़ते हैं। क्रॉफर्ड के मुताबिक, स्टैंडअप कॉमेडी ‘एक्सपोजर थेरेपी’ की तरह है। जब इंसान बार-बार शर्मिंदगी झेलता है, तो डर खत्म होने लगता है। उन्होंने महसूस किया कि लोग उतना ध्यान नहीं देते जितना हम सोचते हैं। यही सोच मानसिक मजबूती देती है। 4. कभी भी शर्मिंदगी से भागना नहीं चाहिए हाल ही में क्रॉफर्ड ने फिर खराब परफॉर्म किया। दर्शक उनके मजाक से जुड़ नहीं पाए। उन्हें बुरा लगा, लेकिन फर्क यह था कि अब वे उस डर से टूटते नहीं हैं। उन्होंने कहा, ‘अब शर्मिंदगी चुभती जरूर है, लेकिन पहले जितनी नहीं। सबसे जरूरी बात यह है कि अब मैं उससे डरता नहीं हूं।’ क्रॉफर्ड की कहानी यही बताती है कि आत्मविश्वास का मतलब डर खत्म होना नहीं, बल्कि डर के बावजूद आगे बढ़ते रहना है।
करनाल के युवक की अमेरिका में मौत:ट्रक खाई में गिरा, परिवार का इकलौता बेटा, पिता ने जमीन बेचकर भेजा था विदेश

अमेरिका के कैलिफोर्निया में करनाल के एक युवक की रोड एक्सीडेंट में मौत हो गई। युवक ट्रक ड्राइवर था। हादसे के दौरान उसका ट्रक अनियंत्रित होकर खाई में जा गिरा। घटना की सूचना जैसे ही परिवार तक पहुंची, घर में मातम छा गया। परिजन अब शव को भारत लाने के लिए सरकार से मदद मांग रहे हैं और इसके लिए फंड भी जुटाया जा रहा है। गांव बालरागड़ान निवासी गौरव कुमार अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए करीब 2 साल पहले अमेरिका गया था। उसे विदेश भेजने के लिए उसके पिता रामफल ने जमीन तक बेच दी और कर्ज भी लिया। परिवार ने करीब 50 लाख रुपए खर्च किए। गौरव डंकी रूट से कई महीनों में अमेरिका पहुंचा था। काम बदलने के बाद दोबारा ट्रक चलाना शुरू किया अमेरिका पहुंचने के बाद गौरव ने शुरुआत में करीब छह महीने तक ट्रक चलाया। बाद में वह एक स्टोर पर काम करने लगा, लेकिन वहां इनकम कम होने के कारण उसने फिर से ट्रक चलाने का फैसला लिया। परिवार को उम्मीद थी कि इससे घर की आर्थिक हालत सुधरेगी। 26 मई को आखिरी बार घर किया था कॉल जानकारी के अनुसार, 26 मई को गौरव ट्रक लेकर निकला था। रास्ते में एक रेस्टोरेंट पर चाय पीने के लिए रुका और उसने घर फोन कर बताया कि वह ट्रक चला रहा है और कुछ देर बाद फिर बात करेगा। यह कॉल उसकी जिंदगी की आखिरी कॉल साबित हुई। ट्रक का बैलेंस बिगड़ा, खाई में गिरने से मौत रेस्टोरेंट से निकलने के बाद वह कुछ ही दूरी चला था कि अचानक ट्रक का संतुलन बिगड़ गया और ट्रक खाई में जा गिरा। इस हादसे में उसकी मौके पर ही मौत हो गई। 27 मई को दोपहर करीब ढाई बजे परिवार को फोन आया, जिसमें पुलिस ने हादसे और मौत की जानकारी दी। इकलौता बेटा था, परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़ गौरव कुमार अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। उसकी एक बहन है, जिसकी शादी हो चुकी है। पिता रामफल ने बताया कि गौरव हर सुबह करीब 8 बजे घर फोन करता था और परिवार के सभी सदस्यों से बात करता था, लेकिन 26 मई की कॉल आखिरी साबित हुई। शव को भारत लाने के लिए फंड जुटा रहा परिवार गौरव का पार्थिव शरीर अभी अमेरिका में ही है। परिवार उसे भारत लाकर अंतिम संस्कार करना चाहता है, ताकि उसे अपने गांव की मिट्टी नसीब हो सके। इसके लिए ऑनलाइन फंड जुटाया जा रहा है और सरकार से भी आर्थिक मदद की गुहार लगाई गई है।
बीजेपी ने 4 राज्यों के लिए नए अध्यक्षों की घोषणा की, दिल्ली के लिए हर्ष मल्होत्रा को चुना | भारत समाचार

आखरी अपडेट:28 मई, 2026, 12:32 IST भाजपा ने हर्ष मल्होत्रा को दिल्ली प्रमुख, अर्चना गुप्ता को हरियाणा, अभिषेक देबरॉय को त्रिपुरा, केवल सिंह डिल्लन को पंजाब में नियुक्त किया है, जो व्यापक संगठनात्मक बदलाव का संकेत है। बीजेपी ने चार राज्यों में नए प्रदेश अध्यक्षों की घोषणा कर दी है. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने गुरुवार को संगठनात्मक नियुक्तियों के नए दौर की घोषणा की, जिसमें दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और त्रिपुरा के लिए नए राज्य इकाई अध्यक्षों की नियुक्ति की गई। फेरबदल के तहत, केंद्रीय राज्य मंत्री और सांसद हर्ष मल्होत्रा को पार्टी की दिल्ली इकाई का अध्यक्ष नियुक्त किया गया, जबकि अर्चना गुप्ता को हरियाणा में भाजपा का नेतृत्व करने के लिए चुना गया। त्रिपुरा में, पार्टी ने अभिषेक देबरॉय को अपना नया राज्य प्रमुख नियुक्त किया, जबकि केवल सिंह डिलन को राज्य में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले पंजाब इकाई का प्रमुख नियुक्त किया गया। नियुक्तियों को भाजपा नेतृत्व के तहत व्यापक संगठनात्मक बदलाव की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें राज्य और राष्ट्रीय दोनों स्तरों पर नए पदाधिकारियों के चयन की तैयारी चल रही है। सभी नियुक्तियाँ भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन द्वारा की गईं, और घोषणाएँ भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह द्वारा जारी अलग-अलग अधिसूचनाओं में की गईं। सिंह ने कहा, ”ये सभी नियुक्तियां तत्काल प्रभाव से लागू होंगी।” संगठनात्मक परिवर्तन ऐसे समय में आए हैं जब भाजपा प्रमुख आगामी चुनावी लड़ाइयों से पहले अपने राज्य-स्तरीय नेतृत्व ढांचे को सक्रिय रूप से मजबूत कर रही है, पार्टी अपने केंद्रीय नेतृत्व और क्षेत्रीय इकाइयों के बीच समन्वय को सुव्यवस्थित करने की कोशिश कर रही है। नए प्रदेश अध्यक्ष कौन हैं? हर्ष मल्होत्रा पहली बार सांसद बने हर्ष मल्होत्रा को उनके मजबूत संगठनात्मक कौशल और दिल्ली की राजनीति में व्यापक जमीनी अनुभव के लिए भाजपा के भीतर व्यापक रूप से माना जाता है। वह वर्तमान में केंद्रीय कॉर्पोरेट मामलों और सड़क परिवहन और राजमार्ग राज्य मंत्री के रूप में कार्यरत हैं, और लोकसभा में पूर्वी दिल्ली निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। 2024 के आम चुनावों में, मल्होत्रा को पूर्व क्रिकेटर गौतम गंभीर के स्थान पर पूर्वी दिल्ली से मैदान में उतारा गया था, जो क्रिकेट प्रतिबद्धताओं पर ध्यान केंद्रित करने के लिए वापस चले गए। उन्होंने इंडिया ब्लॉक के उम्मीदवार कुलदीप कुमार को 93,663 वोटों के अंतर से हराकर सीट जीत ली। संसद में प्रवेश करने से पहले, मल्होत्रा ने भाजपा की दिल्ली इकाई में महासचिव के रूप में कार्य करने सहित प्रमुख संगठनात्मक भूमिकाएँ निभाईं। उनका राजनीतिक सफर नगर निगम स्तर से शुरू हुआ, जहां वे 2012 में तत्कालीन पूर्वी दिल्ली नगर निगम में वेलकम कॉलोनी से पार्षद चुने गए। बाद में उन्होंने नागरिक निकाय की शिक्षा समिति की अध्यक्षता की और 2015-16 में पूर्वी दिल्ली के मेयर के रूप में कार्य किया। केवल सिंह ढिल्लों बरनाला के पूर्व विधायक, केवल सिंह ढिल्लों पंजाब की राजनीति में लंबे समय से चर्चित रहे हैं और पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के करीबी माने जाते हैं। 2022 में भाजपा में जाने से पहले उन्होंने अपना राजनीतिक करियर कांग्रेस के साथ शुरू किया। ढिल्लों ने 2007 से 2017 तक कांग्रेस विधायक के रूप में बरनाला विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। बाद में वह 2017 में AAP उम्मीदवार गुरमीत सिंह मीत हेयर से सीट हार गए, और 2019 में संगरूर से लोकसभा चुनाव लड़े, जहां वह भगवंत मान से हार गए। बीजेपी में शामिल होने के बाद उन्होंने 2022 में संगरूर लोकसभा उपचुनाव और 2024 में बरनाला विधानसभा उपचुनाव भी लड़ा, लेकिन दोनों में असफल रहे। अर्चना गुप्ता मूल रूप से पानीपत की रहने वाली अर्चना गुप्ता पार्टी की नई राज्य इकाई के अध्यक्ष बनने से पहले भाजपा की हरियाणा राज्य महासचिव के रूप में कार्यरत थीं। अभिषेक देबरॉय अभिषेक देबरॉय ने 2023 त्रिपुरा विधान सभा चुनाव में हाई-प्रोफाइल मातरबारी निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा, जहां उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार प्रणजीत रॉय को 9,000 से अधिक मतों के अंतर से हराकर जीत हासिल की। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया बीजेपी ने 4 राज्यों के लिए नए अध्यक्षों की घोषणा की, दिल्ली के लिए हर्ष मल्होत्रा को चुना अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)बीजेपी संगठनात्मक नियुक्तियां(टी)बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष(टी)दिल्ली बीजेपी प्रमुख(टी)हरियाणा बीजेपी अध्यक्ष(टी)पंजाब बीजेपी इकाई(टी)त्रिपुरा बीजेपी प्रमुख(टी)हर्ष मल्होत्रा बीजेपी(टी)अर्चना गुप्ता हरियाणा
न्यूजीलैंड vs आयरलैंड पहला टेस्ट:न्यूजीलैंड ने पहले दिन 361 रन बनाए, रचिन-ब्लंडेल के बीच 217 रन की पार्टनरशिप; ब्लंडेल 142 पर नाबाद

न्यूजीलैंड ने आयरलैंड के खिलाफ पहले टेस्ट के पहले दिन 5 विकेट पर 361 रन बनाए। टॉम ब्लंडेल 142 और डीन फॉक्सक्रॉफ्ट 38 रन पर नाबाद रहे। बेलफास्ट में खेले जा रहे इस मुकाबले में टॉस हारकर बल्लेबाजी करने उतरी कीवी टीम ने 86 रन पर 4 विकेट गंवा दिए थे। इसके बाद रचिन रवींद्र और टॉम ब्लंडेल ने शतकीय पारियां खेलकर टीम को संभाला। दोनों ने पांचवें विकेट के लिए रिकॉर्ड 217 रन जोड़े। 86 रन पर 4 विकेट गिर गए थे शुरुआत में मार्क अडेयर ने कीवी टॉप ऑर्डर को झटके दिए। उन्होंने दूसरी ही गेंद पर टॉम लाथम को इनस्विंगर पर बोल्ड किया। इसके बाद डेवोन कॉनवे फ्लिक शॉट खेलते हुए आउट हुए, जहां डेब्यू कर रहे लियाम मैकार्थी ने मिडविकेट पर कैच पकड़ा। अडेयर ने डेरियल मिचेल को भी विकेटकीपर के हाथों कैच आउट कराया। इससे न्यूजीलैंड शुरुआती सत्र में दबाव में आ गई थी। डेब्यू कर रहे मैकार्थी ने पहला टेस्ट विकेट लिया डेब्यू मैच खेल रहे लियाम मैकार्थी ने टेस्ट करियर का पहला विकेट लिया। इस दौरान केन विलियमसन भी सहज नजर नहीं आए और टाइमिंग के लिए संघर्ष करते दिखे। उन्होंने 70 गेंदों में 36 रन बनाए। विलियमसन कई बार स्लिप में कैच होने से बचे, जब गेंद बल्ले का बाहरी किनारा लेकर गई। हालांकि, उनका संघर्ष ज्यादा देर नहीं चला। लियाम मैकार्थी ने उन्हें एलबीडब्ल्यू आउट कर टेस्ट करियर का पहला विकेट लिया। चोटों से परेशान आयरलैंड टीम से तीन गेंबाजों ने डेब्यू किया 86 रन पर 4 विकेट लेने के बाद आयरलैंड इस दबाव का फायदा नहीं उठा सका। टीम के गेंदबाजों की अनुभवहीनता साफ नजर आई। खिलाड़ियों की चोटों के कारण आयरलैंड को इस मैच में तीन नए तेज गेंदबाजों को डेब्यू का मौका देना पड़ा। तीनों डेब्यू गेंदबाजों में सिर्फ लियाम मैकार्थी को 1 विकेट मिला। उन्होंने 20 ओवर में 96 रन दिए। थॉमस मेयेस ने 17 ओवर में 96 रन खर्च किए, जबकि रूबेन विल्सन 18 ओवर में विकेट नहीं ले सके। दोनों गेंदबाज लाइन और लेंथ से प्रभावित नहीं कर सके। रवींद्र को मिला जीवनदान, लगाया करियर का 5वां टेस्ट शतक 38वें ओवर में रूबेन विल्सन की गेंद पर दूसरी स्लिप में एंड्रयू बालबिर्नी ने रचिन रवींद्र का आसान कैच छोड़ दिया। इसके बाद रचिन और ब्लंडेल ने दूसरे सेशन में कोई विकेट नहीं गिरने दिया। दोनों ने तेजी से रन भी बनाए। रचिन ने 70वें ओवर में मैकार्थी की गेंद पर स्विवेल पुल शॉट पर छक्का लगाकर 175 गेंदों में अपना 5वां टेस्ट शतक पूरा किया। यह उनके टेस्ट करियर का दूसरा सबसे धीमा शतक रहा। शतक के बाद वे हैरी टेक्टर की गेंद पर डीप मिडविकेट में कैच आउट हो गए। ब्लंडेल ने दिसंबर 2024 के बाद लगाया टेस्ट शतक दूसरी ओर टॉम ब्लंडेल आक्रामक बल्लेबाजी कर रहे थे। उन्होंने ऑफ-साइड में कई अच्छे शॉट खेले। एंडी मैकब्राइन की गेंद पर स्वीप शॉट लगाकर ब्लंडेल ने टेस्ट करियर का छठा शतक पूरा किया। यह दिसंबर 2024 के बाद उनका पहला टेस्ट शतक है। शतक पूरा करने के बाद ब्लंडेल ने अगले ओवर में हैरी टेक्टर की गेंदों पर 4, 4, 4 और 6 रन बटोरे। दिन का खेल खत्म होने तक ब्लंडेल और डेब्यू कर रहे डीन फॉक्सक्रॉफ्ट क्रीज पर डटे रहे। यह 4 दिवसीय मुकाबला न्यूजीलैंड के जून में होने वाले इंग्लैंड दौरे की तैयारियों के लिहाज से अहम है।
‘सीएम के इस्तीफे का सिंड्रोम जारी’: सिद्धारमैया के इस्तीफे की पुष्टि के बाद बीजेपी ने कांग्रेस पर कटाक्ष किया | भारत समाचार

आखरी अपडेट:28 मई, 2026, 11:29 IST कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने घोषणा की कि वह कांग्रेस आलाकमान के निर्देश के बाद मुख्यमंत्री पद छोड़ देंगे। नाश्ते की बैठक में कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने डीके शिवकुमार को गले लगाया (दाएं)। भाजपा नेता बसवराज बोम्मई (बाएं)। (स्रोत: पीटीआई) कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया द्वारा गुरुवार को कैबिनेट सहयोगियों के साथ नाश्ते पर बैठक के दौरान यह घोषणा करने के तुरंत बाद कि वह पद छोड़ देंगे, भाजपा ने राज्य में शासन के संचालन को लेकर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। मीडिया से बात करते हुए, भाजपा नेता बसवराज बोम्मई ने कांग्रेस पर मुख्यमंत्रियों के इस्तीफा देने के सिंड्रोम को बढ़ावा देने का आरोप लगाया और कहा कि कर्नाटक में उनका शासन शून्य है। यहां लाइव अपडेट्स फॉलो करें उन्होंने आगे आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री पद को लेकर पार्टी के भीतर अंदरूनी कलह के कारण राज्य को नुकसान हुआ है। बोम्मई ने कहा, “कांग्रेस के मुख्यमंत्री के इस्तीफा देने का सिलसिला जारी है। पहले दिन से ही डीके शिवकुमार ने स्पष्ट कर दिया था कि वह 2.5 साल बाद सत्ता संभालेंगे। कर्नाटक में कांग्रेस का शासन पूरी तरह से शून्य था। मुख्यमंत्री पद को लेकर कांग्रेस की अंदरूनी कलह के कारण राज्य को नुकसान हुआ है।” ‘मैं इस्तीफा दे रहा हूं’: सीएम सिद्धारमैया ने कैबिनेट मंत्रियों से कहा गुरुवार सुबह कैबिनेट सहयोगियों के साथ बैठक के दौरान, सिद्धारमैया ने घोषणा की कि वह कांग्रेस आलाकमान के निर्देशों के बाद मुख्यमंत्री पद छोड़ देंगे, जिससे औपचारिक रूप से कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त होगा। यह भी पढ़ें: सिद्धारमैया ने कर्नाटक कैबिनेट से इस्तीफे की पुष्टि की: ‘आलाकमान अगले सीएम का फैसला करेगा’ उन्होंने कहा कि पार्टी नेतृत्व उनके उत्तराधिकारी पर अंतिम निर्णय लेगा। सिद्धारमैया ने कहा, “मैं आलाकमान के निर्देशानुसार इस्तीफा दे रहा हूं। अगले मुख्यमंत्री का फैसला आलाकमान करेगा।” उन्होंने आगे यह भी आश्वासन दिया कि जो कोई भी उनका उत्तराधिकारी बनेगा उसे पूरा समर्थन दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा, “जो भी अगले मुख्यमंत्री के रूप में चुना जाएगा, उन्हें मेरा पूरा सहयोग मिलेगा।” उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार, जिन्हें व्यापक रूप से मुख्यमंत्री पद की दौड़ में सबसे आगे माना जा रहा है, भी नाश्ते की बैठक में शामिल हुए। डीके शिवकुमार बनेंगे कर्नाटक के अगले सीएम? चल रहे राजनीतिक मंथन ने कर्नाटक कांग्रेस के भीतर लंबे समय से अटकले वाले रोटेशनल मुख्यमंत्री फॉर्मूले के बारे में चर्चा फिर से शुरू कर दी है। विशेष रूप से, सिद्धारमैया और शिवकुमार ने संभावित शक्ति-साझाकरण व्यवस्था पर इसी तरह की चर्चा के बीच दिसंबर 2025 में व्यापक रूप से चर्चा की गई “ब्रेकफास्ट डिप्लोमेसी” बैठक की थी। यह भी पढ़ें: कर्नाटक में सत्ता की चर्चा के बीच शिवकुमार ने सिद्धारमैया को गले लगाया, नाश्ते पर उनका आशीर्वाद लिया सूत्रों के मुताबिक, डीके शिवकुमार कर्नाटक के अगले मुख्यमंत्री बन सकते हैं और उनके शनिवार (30 मई) को शपथ लेने की उम्मीद है। जब से कांग्रेस ने कर्नाटक में सरकार बनाई है, राजनीतिक गलियारों में सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच संभावित मुख्यमंत्री पद की व्यवस्था को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। हालांकि पार्टी नेतृत्व ने कभी भी सार्वजनिक रूप से किसी भी सत्ता-साझाकरण समझौते की पुष्टि नहीं की है, लेकिन “2.5-वर्षीय सीएम फॉर्मूले” की अफवाहें बार-बार सामने आई हैं, खासकर दिल्ली में कर्नाटक के नेताओं और कांग्रेस आलाकमान के बीच प्रमुख बैठकों के दौरान। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया ‘सीएम के इस्तीफे का सिंड्रोम जारी’: सिद्धारमैया के इस्तीफे की पुष्टि के बाद बीजेपी ने कांग्रेस पर कटाक्ष किया अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)कर्नाटक के मुख्यमंत्री का इस्तीफा(टी)सिद्धारमैया का इस्तीफा(टी)डीके शिवकुमार अगले सीएम(टी)कर्नाटक कांग्रेस की राजनीति(टी)घूर्णी मुख्यमंत्री पद(टी)कांग्रेस आलाकमान का फैसला(टी)बसवराज बोम्मई प्रतिक्रिया(टी)कर्नाटक शासन संकट
तेजस्वी यादव ने गाजियाबाद में बेटे इराज का पहला जन्मदिन मनाया। यहां बताया गया है कि किसने भाग लिया – और किसने नहीं लिया

राजद नेता तेजस्वी यादव के बेटे इराज के पहले जन्मदिन के अवसर पर दिल्ली के पास गाजियाबाद में एक भव्य जन्मदिन समारोह का आयोजन किया गया। लालू प्रसाद यादव की बेटी रागिनी यादव के आवास पर आयोजित यह कार्यक्रम एक हाई-प्रोफाइल पारिवारिक समारोह में बदल गया, जिसमें लालू परिवार के सदस्यों के साथ-साथ कई राजनेताओं और विपक्षी नेताओं ने भाग लिया, जिससे बिहार और दिल्ली में ताजा राजनीतिक हलचल मच गई। इस अवसर पर राजद संरक्षक लालू प्रसाद यादव, बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और परिवार के अधिकांश सदस्य मौजूद थे, जिन्होंने कथित तौर पर उत्सव में भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए कार्यक्रम से एक दिन पहले फ्लाइट से पटना से दिल्ली की यात्रा की थी। निवास को विस्तृत रूप से सजाया गया था, मेहमानों और उत्सवों के लिए विस्तृत व्यवस्था की गई थी, जो इस अवसर पर परिवार द्वारा दिए गए महत्व को उजागर करता था। उत्सव के सबसे चर्चित क्षणों में से एक तेजस्वी यादव के बड़े भाई तेज प्रताप यादव का आगमन था। राजद और परिवार के आंतरिक मामलों दोनों से उनकी लंबे समय से दूरी को देखते हुए, उनकी उपस्थिति को महत्वपूर्ण माना गया। परिवार के भीतर चल रहे राजनीतिक और व्यक्तिगत तनाव के बीच तेज प्रताप अपने भतीजे इराज को आशीर्वाद देने पहुंचे। राजनीतिक हलकों में उनकी भागीदारी को उल्लेखनीय माना जा रहा है, खासकर इसलिए क्योंकि पिछले साल के घटनाक्रम के बाद बढ़े आंतरिक मतभेदों के बाद उन्हें पहले ही पार्टी और परिवार दोनों से अलग कर दिया गया था। जहां तेज प्रताप की उपस्थिति ने ध्यान खींचा, वहीं लालू प्रसाद यादव की बेटी और तेजस्वी यादव की बहन रोहिणी आचार्य की अनुपस्थिति भी चर्चा का विषय बन गई. राजनीतिक चर्चाओं में उनकी अनुपस्थिति को परिवार के भीतर जारी आंतरिक तनाव से जोड़ा जा रहा है, खासकर 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल के झटके के बाद। रिपोर्टों से पता चलता है कि हार के बाद, परिवार के भीतर मतभेद गहरा गए, रोहिणी आचार्य ने पहले भावनात्मक स्थिति में पटना में राबड़ी देवी आवास छोड़ दिया और दिल्ली की यात्रा की। तब से, प्रमुख पारिवारिक कार्यक्रमों से उनकी दूरी को व्यापक रूप से नोट किया गया है। तेजस्वी यादव ने स्वयं इस अवसर के भावनात्मक महत्व को उजागर करते हुए “इराज के पिता” शब्दों वाली एक व्यक्तिगत पोशाक के साथ ध्यान आकर्षित किया। वह केक काटने के समारोह सहित समारोहों में बारीकी से शामिल थे, जहां लालू प्रसाद यादव भी मुख्य मंच पर थे और उत्सव का आनंद ले रहे थे। कथित तौर पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी सहित कई प्रमुख राष्ट्रीय विपक्षी नेताओं को निमंत्रण दिया गया था। हालाँकि, इस कार्यक्रम में कोई भी प्रमुख विपक्षी नेता मौजूद नहीं था। इस जश्न को 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में महत्वपूर्ण चुनावी हार के बाद लालू परिवार की पहली बड़ी पारिवारिक और अर्ध-सार्वजनिक सभा के रूप में देखा जा रहा है। यह कार्यक्रम, एक व्यक्तिगत मील के पत्थर पर केंद्रित होने के साथ-साथ, आंतरिक पारिवारिक गतिशीलता और राजद के प्रथम परिवार के भीतर बदलते राजनीतिक समीकरणों पर भी चर्चा को पुनर्जीवित कर दिया है। (टैग्सटूट्रांसलेट)बिहार समाचार(टी)जन्मदिन पार्टी(टी)गाजियाबाद समाचार(टी)लालू प्रसाद यादव(टी)राजद नेता तेजस्वी यादव(टी)राष्ट्रीय जनता दल
पैरा जैवलिन थ्रोअर सुमित ने अपना ही वर्ल्ड रिकॉर्ड तोड़ा:74.82 मीटर दूर भाला फेंका; दो बार पैरालंपिक में गोल्ड जीत चुके

पैरा जैवलिन थ्रोअर सुमित अंतिल ने अपना ही वर्ल्ड रिकॉर्ड तोड़ दिया। बुधवार को बेंगलुरु में उन्होंने 74.82 मीटर का भाला फेंका। सुमित ने यह कारनामा 8वीं इंडियन ओपन पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में पुरुषों की जैवलिन थ्रो F64 स्पर्धा में किया।उन्होंने पांचवें प्रयास में यह उपलब्धि हासिल की। एशियन पैरा गेम्स में 73.29 मीटर का थ्रो किया था सुमित ने अपना ही पुराना वर्ल्ड रिकॉर्ड तोड़ा। इससे पहले उन्होंने 2023 में चीन के हांगझोउ में हुए एशियन पैरा गेम्स में 73.29 मीटर का थ्रो किया था। इस बार उन्होंने अपने पिछले बेस्ट प्रदर्शन से 1.53 मीटर ज्यादा दूरी हासिल की। एशियन गेम्स में भी इससे बेहतर प्रदर्शन करेंगे- सुमित रिकॉर्ड बनाने के बाद सुमित ने कहा, सोच रहा था कि वर्ल्ड रिकॉर्ड क्यों नहीं तोड़ पा रहा हूं। काफी समय हो गया था, लेकिन आज मैं यहां सिर्फ अपना पर्सनल बेस्ट करने आया था। उन्होंने आगे कहा, मुझे खुशी है कि मैंने अपना रिकॉर्ड 1.5 मीटर बेहतर किया। उम्मीद है कि मैं और मेरी टीम आने वाले पैरा एशियन गेम्स में भी इससे बेहतर प्रदर्शन करेंगे। 7 बार वर्ल्ड रिकॉर्ड तोड़ चुके सुमित अब तक सात बार वर्ल्ड रिकॉर्ड तोड़ चुके हैं। उन्होंने जून 2019 में इटली में हुए वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स में 60.45 मीटर का भाला फेंककर पहला वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया था। उस मुकाबले में उन्होंने सिल्वर मेडल भी जीता था। इसके बाद नवंबर 2019 में दुबई में हुए वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में उन्होंने 62.88 मीटर का थ्रो किया। मार्च 2021 में बेंगलुरु में हुई नेशनल पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में सुमित ने 66.90 मीटर का थ्रो कर फिर नया वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया। अगस्त 2021 में टोक्यो पैरालंपिक के फाइनल में सुमित ने एक ही मुकाबले में तीन बार वर्ल्ड रिकॉर्ड तोड़ा। उन्होंने 66.95 मीटर, 68.08 मीटर और आखिर में 68.55 मीटर का थ्रो किया। इसी प्रदर्शन के साथ उन्होंने गोल्ड मेडल जीता। इसके बाद जुलाई 2023 में पेरिस में हुए वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में सुमित ने पहली बार 70 मीटर का आंकड़ा पार किया। उन्होंने 70.83 मीटर का थ्रो कर गोल्ड मेडल अपने नाम किया। फिर 2023 में ही चीन के हांगझोउ में एशियन पैरा गेम्स में सुमित ने 73.29 मीटर का थ्रो किया। नीरज चोपड़ा से प्रेरणा मिली- सुमित सुमित को 2021 में मेजर ध्यानचंद खेल रत्न और 2022 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया। सुमित हरियाणा के सोनीपत से हैं और ओलिंपिक मेडलिस्ट पहलवान योगेश्वर दत्त को अपना आदर्श मानते हैं। वहीं, जैवलिन स्टार नीरज चोपड़ा से भी उन्हें काफी प्रेरणा मिली है। पैरा जैवलिन क्या है? पैरा जैवलिन दिव्यांग एथलीटों की भाला फेंक स्पर्धा है। इसमें खिलाड़ी दौड़कर भाले को ज्यादा से ज्यादा दूरी तक फेंकते हैं। F64 पैरा एथलेटिक्स में वे खिलाड़ी शामिल होते हैं जिनका पैर घुटने के नीचे से कटा होता है। इस वर्ग के खिलाड़ी कार्बन-फाइबर से बने कृत्रिम पैर का उपयोग करते हैं। इसी की मदद से वे दौड़ते और थ्रो करते हैं।
SC ने कहा- ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों पर 28% GST सही:राज्यों को मनी गेम्स पर बैन लगाने का हक मिला, गेमिंग कंपनियों की याचिकाएं खारिज

सुप्रीम कोर्ट ने ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों को जारी किए गए गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) के कारण बताओ (शो-कॉज) नोटिसों को पूरी तरह से वैध ठहराया है। कोर्ट ने कहा कि गेमिंग प्लेटफॉर्म पर जमा की जाने वाली कुल राशि (फुल वैल्यू ऑफ डिपॉजिट) पर 28% टैक्स वसूलना संवैधानिक रूप से सही है। देश की सबसे बड़ी अदालत ने डेल्टा कॉर्प और अन्य गेमिंग कंपनियों की उन याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिनमें पिछली तारीख से (रिट्रोस्पेक्टिव) 28% GST लगाने के फैसले को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने साफ किया कि ऑनलाइन गेमिंग से जुड़ी एक्टिविटीज GST एक्ट के तहत एक्शन एबल क्लेम्स के दायरे में आती हैं, इसलिए इन पर टैक्स वसूलना बिल्कुल सही है। राज्यों को मनी गेम्स पर बैन लगाने का हक मिला सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी स्पष्ट किया कि राज्य सरकारों को ऑनलाइन मनी गेम्स पर प्रतिबंध लगाने का पूरा अधिकार है। भले ही उन खेलों में स्किल की जरूरत क्यों न होती हो, राज्य सरकारें उन्हें पूरी तरह बैन या रेगुलेट कर सकती हैं। इसके साथ ही कोर्ट ने तमिलनाडु और कर्नाटक सरकार की अपीलों को स्वीकार कर लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाई कोर्ट और कर्नाटक हाई कोर्ट के उन पुराने फैसलों को रद्द कर दिया है, जिन्होंने ऑनलाइन गेमिंग पर दांव लगाने (स्टेक्स) को बैन या रेगुलेट करने वाले राज्य के कानूनों को असंवैधानिक बताकर खारिज कर दिया था। कोर्ट ने कर्नाटक हाई कोर्ट द्वारा गेमिंग कंपनियों को दी गई अंतरिम राहत को भी पूरी तरह से हटा दिया है। कंपनियां टैक्स नोटिस पर दे सकती हैं जवाब सुप्रीम कोर्ट ने अब GST अथॉरिटीज को निर्देश दिया है कि वे कानून के मुताबिक इन कारण बताओ नोटिसों पर आगे की प्रोसेसिंग शुरू करें। हालांकि, इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा है कि प्रभावित ऑनलाइन गेमिंग कंपनियां GST अथॉरिटीज द्वारा जारी किए गए इन शो-कॉज नोटिसों पर अपना जवाब दाखिल करने के लिए पूरी तरह से स्वतंत्र हैं। 2.5 लाख करोड़ के टैक्स नोटिस पर था विवाद सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल अगस्त 2025 में रियल-मनी गेमिंग (RMG) प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ जारी किए गए करीब 2.5 लाख करोड़ रुपए के रिट्रोस्पेक्टिव टैक्स नोटिस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। इस पूरे विवाद की मुख्य वजह टैक्स कैलकुलेशन के तरीके को लेकर अलग-अलग व्याख्या होना था। फुल डिपॉजिट बनाम ग्रॉस गेमिंग रेवेन्यू का गणित टैक्स विभाग की मांग थी कि कंपनियों को यूजर्स द्वारा प्लेटफॉर्म पर जमा की जाने वाली पूरी रकम (फुल फेस वैल्यू ऑफ डिपॉजिट) पर 28% की दर से टैक्स चुकाना होगा। दूसरी तरफ, गेमिंग कंपनियों का तर्क था कि उन्हें केवल टूर्नामेंट होस्ट करने के बदले ली जाने वाली कमीशन राशि पर ही टैक्स देना चाहिए, जिसे ग्रॉस गेमिंग रेवेन्यू (GGR) कहा जाता है। कंपनियों के मुताबिक, यह कमीशन कुल जमा राशि का केवल 5% से 15% ही होता है। कंपनियों के बंद होने और नौकरियों पर संकट गेमिंग कंपनियों ने कोर्ट के सामने यह दलील भी दी थी कि टैक्स विभाग द्वारा मांगी गई GST की कुल रकम इन कंपनियों की कुल कमाई से भी कई गुना ज्यादा है। अगर यह टैक्स वसूला गया, तो कंपनियों को आखिरकार अपना पूरा कामकाज बंद करना पड़ेगा। नया ऑनलाइन गेमिंग कानून और संकट अगस्त 2025 में जब सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रखा था, उसके करीब दो हफ्ते बाद ही भारत सरकार ने एक नया ऑनलाइन गेमिंग कानून बनाया था, जिसे ‘प्रमोशन एंड रेगुलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग एक्ट’ (PROGA) नाम दिया गया। यह कानून उन सभी ऑनलाइन मनी गेम्स को प्रतिबंधित करता है जहां कोई यूजर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इस उम्मीद के साथ पैसे जमा करता है कि उसे उस डिपॉजिट पर जीत की रकम (विनिंग्स) मिलेगी। 3.5 बिलियन डॉलर की इंडस्ट्री को नुकसान इस नए कानून के लागू होने से देश की करीब 3.5 बिलियन डॉलर की रियल-मनी गेमिंग इंडस्ट्री अचानक संकट में आ गई। कमाई पूरी तरह रुक जाने के कारण कंपनियों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा और उन्होंने बड़े पैमाने पर खर्चों में कटौती शुरू कर दी। इस वजह से गेमिंग कंपनियों को 3,000 से अधिक कर्मचारियों को नौकरी से निकालना पड़ा। गेमिंग इंडस्ट्री से जुड़े ये नए नियम आधिकारिक तौर पर 1 मई 2026 से प्रभावी हो चुके हैं। क्या होता है रिट्रोस्पेक्टिव टैक्स और एक्शनएबल क्लेम? ये खबर भी पढ़ें… हुंडई की कारें ₹12,800 तक महंगी होंगी: नई कीमतें 1 जून 2026 से लागू की जाएंगी, कंपनी ने इनपुट कॉस्ट बढ़ने के चलते फैसला किया हुंडई मोटर इंडिया की कारें 1 जून 2026 से महंगी होने जा रही हैं। कंपनी ने अपनी कारों की कीमतों में 12,800 रुपए तक की बढ़ोतरी करने का फैसला किया है। नई कीमतें अलग-अलग मॉडल और वेरिएंट के आधार पर तय की जाएंगी। पूरी खबर पढ़ें…
SC ने कहा- ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों पर 28% GST सही:राज्यों को मनी गेम्स पर बैन लगाने का हक मिला, गेमिंग कंपनियों की याचिकाएं खारिज

सुप्रीम कोर्ट ने ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों को जारी किए गए गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) के कारण बताओ (शो-कॉज) नोटिसों को पूरी तरह से वैध ठहराया है। कोर्ट ने कहा कि गेमिंग प्लेटफॉर्म पर जमा की जाने वाली कुल राशि (फुल वैल्यू ऑफ डिपॉजिट) पर 28% टैक्स वसूलना संवैधानिक रूप से सही है। देश की सबसे बड़ी अदालत ने डेल्टा कॉर्प और अन्य गेमिंग कंपनियों की उन याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिनमें पिछली तारीख से (रिट्रोस्पेक्टिव) 28% GST लगाने के फैसले को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने साफ किया कि ऑनलाइन गेमिंग से जुड़ी एक्टिविटीज GST एक्ट के तहत एक्शन एबल क्लेम्स के दायरे में आती हैं, इसलिए इन पर टैक्स वसूलना बिल्कुल सही है। राज्यों को मनी गेम्स पर बैन लगाने का हक मिला सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी स्पष्ट किया कि राज्य सरकारों को ऑनलाइन मनी गेम्स पर प्रतिबंध लगाने का पूरा अधिकार है। भले ही उन खेलों में स्किल की जरूरत क्यों न होती हो, राज्य सरकारें उन्हें पूरी तरह बैन या रेगुलेट कर सकती हैं। इसके साथ ही कोर्ट ने तमिलनाडु और कर्नाटक सरकार की अपीलों को स्वीकार कर लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाई कोर्ट और कर्नाटक हाई कोर्ट के उन पुराने फैसलों को रद्द कर दिया है, जिन्होंने ऑनलाइन गेमिंग पर दांव लगाने (स्टेक्स) को बैन या रेगुलेट करने वाले राज्य के कानूनों को असंवैधानिक बताकर खारिज कर दिया था। कोर्ट ने कर्नाटक हाई कोर्ट द्वारा गेमिंग कंपनियों को दी गई अंतरिम राहत को भी पूरी तरह से हटा दिया है। कंपनियां टैक्स नोटिस पर दे सकती हैं जवाब सुप्रीम कोर्ट ने अब GST अथॉरिटीज को निर्देश दिया है कि वे कानून के मुताबिक इन कारण बताओ नोटिसों पर आगे की प्रोसेसिंग शुरू करें। हालांकि, इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा है कि प्रभावित ऑनलाइन गेमिंग कंपनियां GST अथॉरिटीज द्वारा जारी किए गए इन शो-कॉज नोटिसों पर अपना जवाब दाखिल करने के लिए पूरी तरह से स्वतंत्र हैं। 2.5 लाख करोड़ के टैक्स नोटिस पर था विवाद सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल अगस्त 2025 में रियल-मनी गेमिंग (RMG) प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ जारी किए गए करीब 2.5 लाख करोड़ रुपए के रिट्रोस्पेक्टिव टैक्स नोटिस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। इस पूरे विवाद की मुख्य वजह टैक्स कैलकुलेशन के तरीके को लेकर अलग-अलग व्याख्या होना था। फुल डिपॉजिट बनाम ग्रॉस गेमिंग रेवेन्यू का गणित टैक्स विभाग की मांग थी कि कंपनियों को यूजर्स द्वारा प्लेटफॉर्म पर जमा की जाने वाली पूरी रकम (फुल फेस वैल्यू ऑफ डिपॉजिट) पर 28% की दर से टैक्स चुकाना होगा। दूसरी तरफ, गेमिंग कंपनियों का तर्क था कि उन्हें केवल टूर्नामेंट होस्ट करने के बदले ली जाने वाली कमीशन राशि पर ही टैक्स देना चाहिए, जिसे ग्रॉस गेमिंग रेवेन्यू (GGR) कहा जाता है। कंपनियों के मुताबिक, यह कमीशन कुल जमा राशि का केवल 5% से 15% ही होता है। कंपनियों के बंद होने और नौकरियों पर संकट गेमिंग कंपनियों ने कोर्ट के सामने यह दलील भी दी थी कि टैक्स विभाग द्वारा मांगी गई GST की कुल रकम इन कंपनियों की कुल कमाई से भी कई गुना ज्यादा है। अगर यह टैक्स वसूला गया, तो कंपनियों को आखिरकार अपना पूरा कामकाज बंद करना पड़ेगा। नया ऑनलाइन गेमिंग कानून और संकट अगस्त 2025 में जब सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रखा था, उसके करीब दो हफ्ते बाद ही भारत सरकार ने एक नया ऑनलाइन गेमिंग कानून बनाया था, जिसे ‘प्रमोशन एंड रेगुलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग एक्ट’ (PROGA) नाम दिया गया। यह कानून उन सभी ऑनलाइन मनी गेम्स को प्रतिबंधित करता है जहां कोई यूजर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इस उम्मीद के साथ पैसे जमा करता है कि उसे उस डिपॉजिट पर जीत की रकम (विनिंग्स) मिलेगी। 3.5 बिलियन डॉलर की इंडस्ट्री को नुकसान इस नए कानून के लागू होने से देश की करीब 3.5 बिलियन डॉलर की रियल-मनी गेमिंग इंडस्ट्री अचानक संकट में आ गई। कमाई पूरी तरह रुक जाने के कारण कंपनियों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा और उन्होंने बड़े पैमाने पर खर्चों में कटौती शुरू कर दी। इस वजह से गेमिंग कंपनियों को 3,000 से अधिक कर्मचारियों को नौकरी से निकालना पड़ा। गेमिंग इंडस्ट्री से जुड़े ये नए नियम आधिकारिक तौर पर 1 मई 2026 से प्रभावी हो चुके हैं। क्या होता है रिट्रोस्पेक्टिव टैक्स और एक्शनएबल क्लेम? ये खबर भी पढ़ें… हुंडई की कारें ₹12,800 तक महंगी होंगी: नई कीमतें 1 जून 2026 से लागू की जाएंगी, कंपनी ने इनपुट कॉस्ट बढ़ने के चलते फैसला किया हुंडई मोटर इंडिया की कारें 1 जून 2026 से महंगी होने जा रही हैं। कंपनी ने अपनी कारों की कीमतों में 12,800 रुपए तक की बढ़ोतरी करने का फैसला किया है। नई कीमतें अलग-अलग मॉडल और वेरिएंट के आधार पर तय की जाएंगी। पूरी खबर पढ़ें…








